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Monday, March 31, 2025


 



पूरे हरियाणा से 2300 कर्मचारी सेवानिवृत्त
 -कनीना खंड से हुए तीन कर्मचारी सेवानिवृत्त
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कनीना की आवाज।
 पूरे हरियाणा में 31 मार्च को 2300 के करीब कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए हैं जिनमें से कनीना खंड के तीन कर्मचारी दिनेश प्राध्यापक कनीना, बृजेशचंद्र शर्मा प्राचार्य बूचावास तथा रामभूल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बूचावास सेवानिवृत्त हो गए हैं।



लड़की गुम,गुमसुदगी का मामला दर्ज
-एक युवक पर छुपाने का आरोप
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल से 30 मार्च को 18 वर्षीय एक लड़की गुम हो गई। उसकी मां ने गुमशुदगी  का मामला दर्ज करवाते हुए कहा है कि 30 मार्च को वह अपने काम से बाहर गई हुई थी। उसकी लड़की घर पर अकेली थी। शाम 3 बजे आकर देखा तो लड़की घर से गायब थी। अता-पता किया कहीं नहीं मिली। उन्हें मनजीत नाम की लड़के पर शक जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कहीं छुपा रखा है। कनीना पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है।



मेरा शिक्षा का सफर पुस्तक से साभार -115
आज तक सुरक्षित है मेरी आठवीं कक्षा तक की पुस्तकें
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह विज्ञान अध्यापक 31 अप्रैल 2024 का सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने विभिन्न शिक्षण संस्थानों में लंबे समय तक शिक्षण कार्य किया है। आज के दिन यदि विद्यार्थियों को देखा जाए तो अधिकांश विद्यार्थी अपनी पुरानी पुस्तकों को परीक्षा परिणाम आते ही बेच देते हैं जो सबसे बुरी बात है परंतु होशियार सिंह के पास उनकी आठवीं तक की पुस्तकें भी कुछ सुरक्षित है। आइये सुनते हैं डा. होशियार सिंह की कहानी उन्हीं की जुबानी---
 मैंने आठवीं की परीक्षा 1980 में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ,चंडीगढ़ से पास की थी। उस समय प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की थी किंतु आज के दिन 100 में से 100 अंक आ जाते हैं किंतु उस वक्त प्रथम श्रेणी में पास होना एक सौ में से एक सौ अंक आने के बराबर माना जाता था। किंतु उस जमाने से लेकर आज तक जितनी भी पढ़ाई की, विभिन्न किताबें आज भी लगभग सुरक्षित हैं। कुछ किताबें या तो उपलब्ध नहीं हैं या उपलब्ध नहीं है। आज की परिस्थितियों में देखे तो अधिकांश विद्यार्थी नई कक्षा में जाते ही अगली कक्षा में जाते ही पुरानी पुस्तकों को बेच देते हैं। यहां तक कि कुछ तो कबाड़ में भच देते जो बहुत बुरी बात है। यदि बेचना ही है तो चंद पैसों की बजाय किसी गरीब व्यक्ति को दे दी जाए तो ज्यादा बेहतर हो। आज मेरे घर पर जहां पांच अलमारियां किताबों से भरी हुई हैं। इन किताबों को नवनिर्मित होने जा रही श्रीमती सुमन यादव चैरिटेबल ट्रस्ट की लाइब्रेरी में रखा जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति उनको पढ़ सके क्योंकि पुस्कें ज्ञान का भंडार हैं। चाहे आज डिजिटल युग आ गया है परंतु डिजिटल युग में जितना गहराई से हम नहीं पढ़ पाते उतना हम पुस्तकों से पढ़ सकते हैं। ऐसे पुस्तकों को बेचने की बजाय संगृहीत कर लिया जाए तो हो सकता है भविष्य में किसी के काम आ जाए। मेरी इन पुस्तकों में एक ऐसी पुस्तक भी रखी हुई है जो आईएफएस आरपी बलवान द्वारा भेंट की गई थी। आरपी बलवान बहुत प्रसिद्ध विद्वान हैं। एक बार की बात हैं जब वे कनीना में पत्रकार वार्ता कर रहे थे तो पौधों के नाम गिनाये जा रहे थे और मैं उनके वैज्ञानिक नाम बताने लगा तो बहुत चकित हुये। उन्होंने पूछा क्या आपको इनका कैसे ज्ञान है? क्या मैंने बताया कि मैं वनस्पति शास्त्र से पढ़ाई की है। ऐसे में उन्होंने खुश होकर एक बहुत पुरानी 1938 में प्रकाशित पुस्तक भी मुझे भेंट की। यद्यपि उसे पुस्तक में पौधों की जानकारी जरूर है किंतु उनके चित्र नहीं है। यहां मेरे अलमारी में रखी हुई पुस्तकों में एमएससी तक की सभी पुस्तक रखी हुई है। किए गए शोध भी रखे हुए हैं। यहां तक कि जब मैं ट्यूशन शुरू किया तब भी कुछ पुस्तक खरीदता रहा और आज तक पुस्तक खरीदने का शौक रहा और वे पुस्तक भी आज मेरे पास उपलब्ध है। कुछ पुस्तकें खरीदने के लिए मुझे नई सड़क दिल्ली भी जाना पड़ा था और वह पुस्तक मुझे बहुत काम आई। आज वह भी सुरक्षित है। परिवार वाले बार-बार यही दबाव देते हैं कि कूड़ा कचरा क्यों भर कर रख रखा है? इनको बेच दो मैं उनसे एक ही बात हाथ जोड़कर कहता हूं कि मेरी मृत्यु तक तो इनको सुरक्षित रहने दो, जब मेरी मृत्यु हो जाए तो उसके बाद तुम्हारी मर्जी है क्या करना चाहोगे परंतु अब तो मेरी लाइब्रेरी जल्द ही बन जाएगी और आशा है कि सभी पुस्तकें उस लाइब्रेरी में स्थापित कर दी जाएगी ताकि आने वाली पीढ़ी इनको पढ़ सके। यहां तक की एक कमरा मेरी पुस्तकों से भरा हुआ है क्योंकि मैं पहले बता चुका हूं मेरी 43 पुस्तक के प्रकाशित हो चुकी और ये प्रकाशित पुस्तकें अधिकांश सैकड़ो की संख्या में उपलब्ध हैं। संत शिरोमणि बाबा मोलरडऩाथ मेरी प्रथम पुस्तक थी, उसकी एक या दो प्रति यदि बची हो तो उपलब्ध हैं वरना वो सभी पुस्तक मैं श्री कृष्ण गौशाला कनीना को भेंट कर दी थी। कुछ पाठक मेरे से ले गए थे। एक बात मैं अपने बच्चों को भी यही कहता हूं कि तुम अपनी पुरानी पुस्तक बेचना नहीं अपितु सुरक्षित रखें। कभी किसी समय किसी बात पर अपना ज्ञान बढ़ता हो तो उनको पढ़ा जा सकता है। यह सत्य है कि हम पीएचडी, डीलिट तक उपाधि हासिल कर लेते हैं लेकिन जो ज्ञान हम 12वीं कक्षा तक प्राप्त करते हैं वह एक नींव का काम करता है। जिस प्रकार एक मकान का निर्माण होता है तो नींव बेहतर बनानी चाहिए। यदि नींव कच्ची रह गई तो मकान गिर सकता। इसी प्रकार 12वीं कक्षा तक यदि अच्छी प्रकार से पढ़ाई कर ली तो समझो एमए और पीएचडी कुछ भी नहीं हैं। कहने को तो पीएचडी है लेकिन कहते हुए दर्द होता है कि पीएचडी के नाम पर खाना पूर्ति ज्यादा रह गई है। ऐसे में जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वह 12वीं तक का ही प्रमुख माना जाता है। यह ठीक है की बड़ी कक्षाओं में जब लिखते हैं तो कुछ बड़े उत्तर लिखने पड़ते हैं क्योंकि 10वीं 12वीं तक उत्तर एक निश्चित सीमा तक के होते हैं/ निश्चित शब्दों के होते हैं। परंतु बड़ी कक्षा में उनका विस्तृत रूप दिया जाता है। यह भी मैं पहले भी बताया है कि लिखने में कंजूसी नहीं बरतनी चाहिए। जब मैं सतीश पब्लिक कालेज रेवाड़ी से 1986-87 में बीएड कर रहा था उसे समय परीक्षा दौरान एक पेपर में मैंने 65 पेज भरे थे और आश्चर्य जनक बात है कि मूल्यांकन करने वाले ने भी 65 ही अंक पेपर में दिए। परंतु आज के दिन जब किसी विषय पर ध्यान देना हो तो पुरानी पुस्तक जरूर ढूंढता हूं। सबसे बड़ी मेरे पास दिक्कत है जगह का अभाव है क्योंकि ये पुस्तकें महज पांच अलमारियों में भरी हुई हैं। अगर इनको दूर-दर रख दिया जाए तो उनका अवलोकन करने में बड़ी सुविधा हो जाएगी और ऐसा मुझे विश्वास है कि भविष्य में ये मेरी पुस्तकें लाइब्रेरी में संगृहीत हो जाएंगी। ऐसे में मैं उन विद्यार्थियों से भी निवेदन करूंगा जो हर वर्ष पास होते ही अपनी पुस्तकों को या तो संजोकर रखें या फिर किसी ऐसे बच्चों को दे जो उनसे पढ़कर आगे की पढ़ाई कर सके।
मुझे यहां कहने में खुशी होती कि मेरा एक दोस्त निहालावास निवासी धर्मवीर कटारिया है। उनको अपनी बीएससी की पुस्तकें भेंट की थी। आज भी हमारी दोस्ती चली आ रही है। यद्यपि मुख्य अध्यापक से सेवानिवृत्त है। पुस्तकें ज्ञान के अथाह स्रोत हैं। चाहे कितने बड़े से बड़े मोबाइल आ जाए किंतु पुस्तकें ज्ञान सबसे बेहतर स्त्रोत हैं और अध्यापक से बड़ा कोई धरती पर शख्स नहीं। जो ज्ञान अध्यापक देगा वह मोबाइल नहीं दे सकते हैं।


घटता ही जा रहा है अप्रैल फूल बनाने का सिलसिला
-लोगों की जागरूकता के चलते ऐसा हुआ
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कनीना की आवाज।
 कहीं कहीं आज भी क्षेत्र में हंसी मजाक के रूप में फूल डे मनाया जाता है। अंग्रेजी काल के समय से ही चली आ रही परिपाटी को मनाने वाले कम लोग रहे हैं। जिस प्रकार हिंदु नव वर्ष कम लोग मनाते हैं वैसे ही मूर्ख दिवस कम लोग मनाते हैं। हिंदू नव वर्ष मनाने वाले मूर्ख दिवस मनाए जाने का विरोध भी करते हैं। लोग जागरूक भी हुए हैं।
 ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से प्रथम अप्रैल फूल डे मनाने की अनोखी परंपरा है। सुबह से ही मूर्ख बनाने की कार्रवाई शुरू होती है और शाम तक चलती रहती है। विशेषकर ग्रामीण लोगों को तो इस दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी तो फोन के मार्फत मूर्ख बनाया जाता है जो भारी तनाव का कारण बनता है।
  यूं तो मूर्ख बनाने के तरीके हजार होते हैं किंतु बच्चे से लेकर युवा वर्ग नोट से मूर्ख बनाने की कार्रवाई अक्सर करते देखे जा सकते हैं। एक सौ रुपये के नोट का एक सिरा धागे से बांध लेते हैं और भीड़ वाले रास्ते में डाल दिया जाता है। इस नोट को बड़े धागे से बांधकर दूर ले जाया जाता है। जब कोई सज्जन इस नोट को उठाने लगता है तो धागे की सहायता से इसे तेजी से खींच लिया जाता है। जब नोट उठाने वाले की नजर इन शरारतियों पर पड़ती है तो भारी मजाक होता है। ग्रामीण लोग अक्सर फूल डे के बारे में अंजान होते हैं और ऐसे में उनके साथ अच्छा खासा मजाक होता है। वैसे भी फसल कटाई का समय होता है और किसान अपनी फसल काटने में व्यस्त रहते हैं। फसल कटाई दौरान उनके साथ अच्छा मजाक होता है। एक किसान को कह दिया जाता है कि वह कृषि के यंत्र खेत में लेकर आओ। वह किसान बेचारा पुन: खेत से घर जाता है और बार-बार उसके साथ मजाक होता है। जब उन्हें अप्रैल फूल बनने का पता चलता है तो वे झुंझलाते हुए नजर आते हैं।
  जिन घरों में फोन लगे होते हैं उनको भी कई प्रकार की समस्याएं अप्रैल फूल से संबंधित झेलनी पड़ती हैं। कई बार तो ऐसे फोन आते हैं कि आपके परिचित की दुर्घटना होने के कारण उन्हें अमुक अस्पताल में भर्ती कराया गया है आप जल्दी से पहुंचो। जब फोन उठाने वाला भाग दौड़कर अस्पताल पहुंचता है तो उसे भारी झुंझलाहट होती है। मोबाइल पर भी अनेकों प्रकार की मजाक की जाती हैं किंतु ये मजाक अधिक समय तक नहीं चलती हैं। बाद में आम जन अप्रैल फूल के विषय में परिचित हो जाता है।  इस संबंध में डा. होशियार सिंह का कहना है कि पुराने समय में लोग अप्रैल फूल के प्रति आकर्षित होते थे किंतु अब इस मूर्ख दिवस को मनाने वाले बहुत कम बचे हैं।
   अप्रैल फूल बनने से सरकारी कर्मी भी पीछे नहीं होते हैं। जहां अस्थाई कर्मी काम करते हैं उनका एक अप्रैल फूल संबंधित आदेश निकालकर रख दिया जाता है जिसमें लिखा होता है कि आपकी सेवाएं समाप्त की जाती हैं। कर्मी परेशान होते हैं किंतु जब उन्हें हकीकत का पता चलता है तो वे अपना सा मुंह लेकर रह जाते हैं। पूरा दिन ही छोटे बड़े मजाकों में व्यतीत है। कई अन्य तरीकों से भी मूर्ख बनाया जाता है किंतु जिनके साथ मजाक किया जाता है वे बुरा नहीं मानते क्योंकि कहा है-बुरा ना मानो अप्रैल फूल डे है।



सरसों की खरीद के 7वें दिन 4200 क्विंटल खरीदी सरसों
-किसान अब बेच सकते हैं 40 क्विंटल प्रति गेट पास
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरसों खरीद जारी है। 24 मार्च से सरसों की खरीद शुरू हुई थी तब से अब लगातार खरीद का काम चल रहा है। रविवार को खरीद नहीं की जाती।  मंछी सुपरवाइजर सतीश कुमार ने बताया कि सोमवार को अकेले 4200 क्विंटल सरसों खरीदी गई जबकि बाकी दिनों कुल 9774 क्विंटल सरसों की खरीद हो चुकी है।   खरीद कार्य वेयरहाउस द्वारा किया जा रहा है। एमएसपी 5900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया हुआ है। उन्होंने बताया कि अब तक एक गेट पास पर किसान महज 25 क्विंटल सरसों बेच सकता था जो सीमा बढ़ाकर प्रति गेट पास 40 क्विंटल कर दी गई है। यही कारण है कि सोमवार को देर शाम तक खरीद जारी रही।
खरीद के अवसर पर सचिव विजय सिंह,मंडी सुपरवाइजर सतीश कुमार , विरेंद्र सिंह, सीमा पर्चेजर, मनोज सहायक सचिव सहित किसान मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 03:चेलावास मंडी में सरसों की खरीद करते हुए अधिकारी


पेंशनर्स को आठवीं पे कमीशन के लबों से वंचित करना निंदनीय है- धर्मपाल शर्मा
--छेड़ा जाएगा सघन  आंदोलन
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कनीना की आवाज।
पेंशनर्स को आठवें पे कमीशन के लाभों से वंचित करने की कड़े शब्दों में निंदा की है। केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग की सिफारिश के लाभों से 31 दिसंबर 2025 तक पेंशनर्स को पेंशन संशोधन के अधिकार से वंचित कर दिया गया है। जिससे करोड़ों पेंशनर केंद्र सरकार इस फैसले से नाराज हैं।  रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश सचिव धर्मपाल शर्मा ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि केंद्र  व राज्य सरकार के कर्मचारी व पेंशनर देश भर में विरोध कारवाइयां करके इसका माकूल जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि पेंशनर्स पर यह भारी हमला है। पुराने पेंशनर्स को नए पेंशनर से अलग करने का बिल 25 मार्च को लोकसभा में फाइनेंस बिल के साथ पास करवा लिया गया ।कोई नया बिल प्रस्तुत नहीं किया गया। बिल पेश किया जाता है उसे पर बहस होती है।  विरोध होता है। उससे बचने के लिए फाइनेंस बिल के साथ पास करवा लिया गया ।इससे पुराने पेंशनर की पेंशन व सुविधा जाम हो जायेगी। सरकार ने सांसदों का वेतन 24 प्रतिशत बढ़ा लिया। हरियाणा में विधायकों को कार खरीदने के लिए एक करोड़ का लोन 4 प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा। आम आदमी को लोन 9 प्रतिशत पर मिलता है भारत में विधायक और सांसद ही गरीब है ओर जनता व कर्मचारी व पेंशनर अमीर है। केंद्र सरकार कर्मचारी व पेंशनर का महंगाई भत्ता 2 प्रतिशत बढ़ाती है सांसद का वेतन 24 प्रतिशत बढाती है। विधायक, सांसद पांच छह  पेंशन ले रहे है  और सरकारी कर्मचारी की  पुरानी पेंशन स्कीम को  बन्द कर दिया गया है और विधायक, सांसद बनकर शपथ लेते ही  पेंशन का हकदार हो जाता है। यह आम जनता के साथ घोर अन्याय है।यह सब ज्यादा दिन तक बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। मजदूर, किसान, कर्मचारी, पेंशनर व आम जनता को इस के विरुद्ध आवाज उठानी होगी।
फोटो कैप्शन: धर्मपाल


एसडी विद्यालय ककराला के बच्चों ने सम्मान समारोह में दिखाई प्रतिभा
- नृत्य, गीत, नाट्य के माध्यम से दिया संदेश
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कनीना की आवाज।
एसडी विद्यालय ककराला में सम्मान समारोह मनाया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि रामावतार सह विभाग संघ चालक व कर्नल अश्वनी ठाकुर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। वहीं नन्हें-मुन्ने बच्चों की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुत किए गए। इसमें समूह गान, समूह नृत्य हरियाणवी और पंजीबी विशेष रहा। इसके बाद छात्रों ने हिन्दी और अंग्रेजी नाट्य मंचन के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
तत्पश्चात शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों एवं शिक्षकों को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
एनटीए की परीक्षा नीट में भारत में पांचवां स्थान प्राप्त करने वाली प्राची एवं रोनक को विद्यालय की तरफ से एक-एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसी कड़ी में पूनम को एक मुख्य उपहार प्रदान किया गया। इसी दौरान विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने छात्रों को उनकी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई दी और उन्हें आगे भी ऐसी ही उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय ने जीव विज्ञान अध्यापक जितू श्रीवास्तव को एक लाख रुपये उत्कृष्ट परिणाम के लिए प्रदान किये।  मैनेजमेंट कमेटी सदस्य व रसायन शास्त्र अध्यापक पूर्ण सिंह यादव को एक लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की गई।
एनडीए परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली इशिका व कशिश को विद्यालय तरफ से एक टेब वितरीत किया। क्रिडा भारती में अपनी अपना लोहा मनवाने वाले केशव पुत्र राजीव को टेब उपहार के रूप में प्रदान किया गया।
स्टार ओलम्पियाड में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल करने पर विद्यालय की तरफ से जिया को एक साइकिल प्रदान की गई।तथा कार्तिक , समर, सिद्ध, जिया, अंशिका, अदिति आर्य ,अभिनव ,रूपेश ,जतिन ,रोनक  को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर विद्यालय की तरफ से स्टडी टेबल प्रदान की गई।
द्वितीय स्थान पर जतिन , युग , ईशांत , चिराग , प्राकी , धीरज को समार्ट वाच प्रदान की गई। तृतीय स्थान नक्स , लक्ष्य , दीक्षान्त, अंकित को स्कूल बैग प्रदान किया।
गु्रप सोंग स्टेट लेवल में रहे विजेता विद्यार्थी सोनम , अन्नू , अंजली , तंशु , तम्मना , सविता ्र, येशिका , अंजना, गरीमा , मुस्कान को मुख्य उपहार प्रदान किया। गु्रप डांस स्टेट लेवल में रहे विजेता विद्यार्थी मुस्कान, कनिशका, कामना, निशा, नन्शी, साक्षी, भूमिका, अनुकरीती, निकिता व पायल को मुख्य उपहार प्रदान किया। खेल प्रतियोगिता में विद्यालय की विद्यार्थी खुशी ने नेशनल में सिल्वर मेडल, खुशी पुत्री वेदप्रकाश नैेशनल में ब्रोंज मेडल, भारत भूषण ने नेशनल में ब्रोंज मेडल, पीयूष शर्मा ने नेशनल में ब्रोंज मेडल, यश ने नेशनल में ब्रोंज मेडल, दिती नेशनल में ब्रोंज मेडल व विपिन नेशनल में ब्रोंज मेडल को मुख्य उपहार प्रदान किया गया। एथलैटिक्स में अदिति ने नोर्थ जोन अंडर 16 में 60 मीटर दौड़ में गोल्ड, एसजीएफआई 100 मीटर में ब्रोंज मेडल, एएफआई 60 मीटर में सिल्वर मेडल, सीबीएसई 100 मीटर में सिल्वर मेडल, सीबीएसई 200 मीटर में सिल्वर मेडल, एसजीएफआई 4 गुणा400 नेशनल लेवल में सिल्वर मेडल हासिल किया। अदिति को विद्यालय ने मुख्य उपहार प्रदान किया।
वहीं हिमांशु ने एसजीएफआई अंडर 14 फुटबाल में नेशनल भागीदारी, चेतन ने अंडर 14 एथलेटिक्स एयरफोर्स, हर्षिता पने मानक इंस्पायर में प्रथम स्थान, शिवचरण मानक इंस्पायर में प्रथम स्थान हासिल किया। स्टेट ओल्मिपियाड टोपर आस्था, प्रतिभा, अंश यादव, वंशिका विद्यार्थी। युथ एडिटेशन लेवल पारुल, अलका, महक, अनिषा, लक्षिता, अंशु, प्राची, सुहाना, सानू, सानिया, एनगल ने नेशनल लेवल प्राप्त किया। चंचल को संात्वना बाल भवन नारनौल।
इस अवसर पर डीएसपी दिनेश यादव ने युवांओं को नशा मुक्ति व सड़क सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर सरपंच नीलम देवी, कृष्ण एक्स सरपंच, महेन्द्र सिंह सरपंच, दलीप एक्स सरपंच, कंवर सिंह नम्बरदार,स्कूल चेयरमैन सुनील कुमार, कृष्णा स्कूल चेयरमैन गुलशन कुमार, बीएस स्कूल चेयरमैन पवन कुमार, स्कूल चेयरमैन रणसिंह, सुरेन्द्र लाल सरपंच, नरेश कुमार, अडवोकेट नरेश यादव, ओमप्रकाश, गुलशन, डा. सुनील कुमार, राकेश यादव, उदित, अश्वनी ठाकुर, अनिल, राजबीर, रत्न सिंह, अरवीन्द, सुरेन्द्र सिंह, राजबीर सिंह ककराला, कृष्ण कुमार, कृष्ण, सुमेर गोमला, गयानेन्द्र सिंह, मांगे राम, धर्मेन्द्र, सहित अभिभावक और छात्र उपस्थित रहे।
विद्यालय अध्यक्ष जगदेव यादव ने प्रधानाचार्य और अध्यापक अध्यापिकाओं की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में सभी बच्चों को समान रूप से अवसर मिलना चाहिए, इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है।
फोटो कैप्शन 02: अव्वल छात्रा को एक लाख रुपये का चेक वितरित करते हुए डीएसपी कनीना एवं अन्य










 संत आश्रम में संतों के लिए बनेगा विशाल हाल
-विधिवत रूप से किया भूमि पूजन
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कनीना की आवाज।
 कनीना के संत मोलड़ आश्रम पर विशाल हाल बनाने के लिए भूमि पूजन किया गया। यह हाल भक्तों के लिए उपलब्ध हो सकेगा। इसकी जानकारी देते हुए संत ट्रस्ट प्रधान दिनेश कुमार कनीना ने बताया कि यह हाल कनीनावासियों द्वारा निर्मित किया जाएगा। इस हाल को भव्य रूप दिया जाएगा ताकि भक्तजन यहां आराम कर सके तथा बाबा के दर्शन कर सके संत के दर्शन कर सके। इस मौके पर प्रवेश पंडित द्वारा भूमि पूजन करवाया गया तथा यजमान के रूप में दिनेश और मंजू उपस्थित रहे। इस मौके पर अभय साहब, पूर्व मुख्य अध्यापक  रतन सिंह शर्मा, पूर्व मुख्य अध्यापक विजेंद्र सिंह प्रकाश, सत्यवीर सिंह, रमेश कुमार, लाल सिंह शिवकुमार, अनिल कुमार, अशोक डीपी, मुकेश पंडित इंद्रजीत, अशोक ठेकेदार, संजय, रामनिवास आदि उपस्थित रहे।

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