Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Tuesday, January 13, 2026



 

ठंड बढऩे से बढ़ी चाय की चुस्कियां
-हर जन को आसानी से उपलब्ध
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में विगत दिनों से ठंड पड़ रही है। ठंड से बने के लिए चाय की चुस्कियां बढ़ गई हैं वहीं शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए विभिन्न पदार्थ खाए जा रहे हैं।
दुकानदार महेश, कुलदीप दिनेश, सुरेश आदि ने बताया कि ठंड के चलते वे गर्मी की बजाय देर से दुकान पर आते हैं। सर्दी बढ़ जाने से चाय की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। चाय विक्रेताओं की बिक्री बढ़ी है। सर्दी में छुहारा, ड्राई फ्रूट, गाजरपाक, गर्म गुलाब जामुन, गर्म हलुआ, गाजर का हलवा पसंद किये जा रहे हैं।
चाय की मांग अधिक-
ठंड के कारण लोग चाय अधिक पीते हैं। चाय विक्रेता पोंडा चायवाला, महाशय चायवाले ने बताया कि यूं तो सर्दी एवं गर्मी चाय की मांग होती है किंतु सर्दियों में चाय की मांग अधिक होती है। एक सौ चाय तक अधिक बिकती हैं। चूंकि सर्दी से बचने के लिए गर्म कपड़े तो पहनते ही हैं वहीं गर्मागर्म चाय पीकर प्रसन्न नजर आते हैं। चाय की दुकानें जगह जगह खुल गई हैं। अकेले कनीना में विभिन्न स्थानों पर चाय बनाने वाले 250 के करीब दुकानदार हैं। दो तीन दुकानों के साथ जरूर चायवाला मिल जाता है।
बाजार में आये सर्दी के खाद्य पदार्थ-
बाजार में मूंगफली, गजक, रेवड़ी, शकरकंदी की बहार आ गई है। जहां भी देखे वहीं सब्जी की दुकानों पर शकरकंदियों के ढेर लगे हैं वहीं जगह जगह जमकर मूंगफली भूनकर बेची जा रही हैं। मूंगफली के साथ लोग गजक रेवड़ी भी बेच रहे हैं। दो से तीन माह तक इन पदार्थों की बिक्री कर सैकड़ों लोग रोटी रोजी कमा लेेते हैं। 14 जनवरी की रातभर शकरकंदी भूनी जाती हैं और जमकर खाई जाती हैं। इसके बाद शकरकंदियों की मांग घट जाती है।
फोटो कैप्शन 07: चाय की दुकान पर चाय पीने वालों की भीड़।




50 खंड शिक्षा अधिकारी बने उप जिला शिक्षा अधिकारी
-कनीना के खंड शिक्षा अधिकारी दिलबाग सिंह बने नारनौल के उप जिला शिक्षा अधिकारी
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कनीना की आवाज।
 हाल ही में प्रदेश के 50 खंड शिक्षा अधिकारियों को उप जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया है। इसी कड़ी में जहां कनीना खंड शिक्षा अधिकारी दिलबाग सिंह को नारनौल के उप जिला शिक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति मिली है। उनकी पदोन्नति पर अनेक लोगों ने खुशी जताई है जिनमें प्राचार्य विजयपाल, पूर्व मुख्याध्यापक राज कुमार गुढ़ा, हंसराज सिंह, ओमप्रकाश ओएस आदि प्रमुख हैं।
फोटो: दिलबाग सिंह







श्रीकृष्ण हैं 16 कला निधान अवतार-आचार्य
-श्रीमद्भागवत भक्ति कथा का पांचवां दिन
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कनीना की आवाज।
कनीना मंडी में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत भक्ति कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ पर विराजमान पंडित रामबिहारी आचार्य ने श्रीकृष्ण की बाल लीला तथा रासलीलाओं का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। उन्होंने कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्हें 16 कला निधान अवतार बताया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के सुनने से संशय तथा भ्रम दूर होता है। कष्ट, दुख दूर होते हैं। उन्होंने रासलीला में पधारे भगवान शिव प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि रासलीला में भाग लेने के कारण ही भगवान शिव को गोपेश्वर कहते हैं। कथा श्रवण करने पहुंचे अतरलाल एडवोकेट ने श्रद्धालुओं की तरफ से आचार्य रामबिहारी को साफा पहनाकर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कनीनावासियों का भागवत कथा आयोजित करने के लिए धन्यवाद किया।
उन्होंने सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग से अवगुण छूटते हैं और सत्संगी खुशहाली के मार्ग पर अग्रसर होता जाता है। इस दौरान अनेक दिव्य तथा भव्य झांकिया प्रदर्शित की गई। इस अवसर पर व्यापार मंडल के प्रधान रविन्द्र बंसल, अशोक कुमार, शुभम, मोहनी, भूरा प्रधान, महेन्द्र सेठ उपप्रधान, सुरेश, बिल्लू, अशोक ठेकेदार, औमप्रकाश जांगिड़, ब्रहमदत प्रधान, लक्ष्मी, सुशीला, सुधा, संतरा, मंजू, गुंजन, नीतू, अंजली, पुष्पा, मीना दादी आदि अनेक श्रद्धालुगण उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 05: रासलीला की झांकियां प्रदर्शित करते कलाकार।



नये शादीशुदा जोड़ों एवं उत्पन्न बच्चे एवं बच्चियों के लिए मनाया गया पर्व लोहड़ी
-कनीना मंडी में आग के समक्ष शपथ ली तथा मूंगफली एवं रेवाड़ी बांटी
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कनीना की आवाज।
  नये शादीशुदा जोड़ों एवं उत्पन्न बच्चे एवं बच्चियों के लिए लोहड़ी पर्व मनाया गया। एक समुदाय विशेष एवं परिवारों में लोहड़ी का विशेष पर्व मनाया गया। आग के समक्ष खड़े होकर प्रतिज्ञा ली तथा रेवड़ी आदि जमकर बांटी। यूं तो लोहड़ी को विभिन्न समुदाय के लोग भी मनाने लगे हैं किंतु पंजाबी समुदाय के लोग इस दिन नव विवाहित जोड़ों एवं उत्पन्न बच्चा या बच्ची के के लिए प्रथम लोहड़ी पर विशेष आयोजन करते आ रहे हैं। इसी कड़ी में कनीना मंडी में धूम रही।
 कनीना के कृष्ण कुमार और दिनेश कुमार ने बताया कि 13 जनवरी की रात को उनका परिवार विशेष रूप से नव विवाहित जोड़ों की खुशी को और बढ़ाता है अग्नि जलाकर मूंगफली एवं रेवड़ी को प्रसाद के रूप में बांटने से पूर्व अग्रि को भेंट किया जाता है। पूरा ही परिवार आग के चारों ओर चक्कर लगाता है। परिवार में जब कोई नया बच्चा जन्म लेता है या कोई बच्ची जन्म लेती है तो उसकी खुशी भी लोहड़ी पर्व पर मनाई जाती है। उन्हें भी इस पर्व में शामिल किया जाता है और उनकी खुशी को और बढ़ाने के लिए जहां विशेषकर मूंगफली, गजक, रेवड़ी आदि बांट कर खुशी मनाई जाती है। यही नहीं जहां 13 जनवरी को नव दंपत्ति, पैदा हुये बच्चे या बच्चियों को समर्पित है।
 कनीना के सन्नी एवं रियांसी की विगत विगत वर्ष शादी हुई थी। इसी प्रकार कर्ण एवं प्रीति की शादी भी विगत वर्ष हुई थी। उन्होंने विगत वर्ष लोहड़ी मनाई और आग के पास बैठकर उनकी खुशी को बढ़ाया। इस वर्ष सीमा उनकी लड़की मायरा, दीपिका उनका लड़का दीवांश, प्रीति उनकी नवजात लड़की कायरा तीनों की पहली लोहड़ी मनाई गई। अग्निदेव को प्रसाद भेंट कर सारा परिवार प्रसाद ग्रहण करेगा।  दिनेश कथूरिया, वीना कथूरिया, चंचल एवं प्रिया आदि ने  बताया कि न केवल उनका समाज अपितु आसपास के सभी समुदाय के लोग इस परंपरा में शामिल होने लगे हैं और सभी मिलकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
उल्लेखनीय है कि कनीना एम आसपास पंजाबी समुदाय विशेष के करीब 50 परिवार है और इस परिवारों में लोहड़ी का विशेष पर्व मनाया जाता है। यूं तो लोहड़ी को विभिन्न समुदाय के लोग भी मनाने लगे हैं किंतु पंजाबी समुदाय के लोग इस दिन नव विवाहित जोड़ों एवं उत्पन्न बच्चा या बच्ची के के लिए प्रथम लोहड़ी पर विशेष आयोजन करते हैं।
फोटो कैप्शन  आग को भेंट देता नव दंपत्ति






सेना भर्ती के लिए आनलाइन परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों के लिए शारीरिक दक्षता एवं मापदंड परीक्षा भिवानी में 28 जनवरी से 12 फरवरी तक
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कनीना की आवाज।
सेना भर्ती कार्यालय चरखी दादरी की ओर से अग्निवीर श्रेणी, अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर क्लर्क, स्टोर कीपर टेक्निकल, अग्निवीर टेक्निकल और अग्निवीर ट्रेड्समैन के लिए सेना भर्ती 2025-2026 अग्निवीर स्कीम और स्थायी श्रेणी के तहत आनलाइन परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों के लिए 28 जनवरी 2026 से 12 फरवरी 2026 के बीच शारीरिक दक्षता एवं मापदंड परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।
सेना भर्ती कार्यालय चरखी दादरी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति अनुसार शारीरिक दक्षता एवं मापदंड परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को 28 जनवरी से 12 फरवरी के बीच एडमिट कार्ड पर दिए गए समय के अनुसार भीम स्टेडियम भिवानी में उपस्थित होना होगा। उन्होंने बताया कि यह भर्ती रैली उन अभ्यार्थियों के लिए है जिन्होंने सीईई परीक्षा जून 2025 में उत्तीर्ण की है। शारीरिक दक्षता और मापदंड परीक्षा संबंधी सभी जानकारी वेबसाइट से जानकारी ले सकते हैं। जिन उम्मीदवारों ने एक या एक से अधिक श्रेणियों में पंजीकरण किया है और सामान्य प्रवेश परीक्षा पास की है उनके लिए एक ही बार दौड़ में भाग लेने की अनुमति होगी। ऐसे उम्मीदवारों के लिए एक ही एडमिट कार्ड मिलेगा जिसमे सभी श्रेणियों को दर्शाया होगा। एडमिट कार्ड को शारीरिक दक्षता और मापदंड परीक्षा में साथ लाना अनिवार्य है।
सभी उम्मीदवार अपने साथ दस्तावेज का सत्यापन करने के लिए 10वीं एवं 12वीं पास की मार्कशीट, निवास प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, पुलिस वेरिफिकेशन, खेल प्रमाण पत्र, सेना से सम्बंधित प्रमाण पत्र (रिलेशन सर्टिफिकेट) और एडमिट कार्ड अन्य दस्तावेज लाने होंगे। इसके अलावा उम्मीदवार अधिक जानकारी के लिए आफिसियल नोटीफिकेशन को भी जरूर चेक कर लें। इसकी सूचना लिखित परीक्षा में सफल हुए उम्मीदवारों के पंजीकृत ई-मेल आईडी पर भी भेजी जायेगी।
उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे किसी भी प्रकार कि धोखाधड़ी या दलाल से सावधान रहें। भर्ती प्रक्रिया पूर्णत: पारदर्शी एवं योग्यता पर आधारित होगी।





एसडीओ का भरा जाये स्थायी पद
- 2024 से दिया हुआ है अतिरिक्त कार्यभार
- बेरी के एसडीओ आते हैं कनीना में महज दो दिन
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कनीना की आवाज।
 कनीना जन स्वास्थ्य विभाग में एसडीओ का वर्ष 2024 से स्थायी पद स्थायी पद नहीं भरा गया है जिसके चलते अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही है। कनीना पेयजल सप्लाई केंद्र पर जो कार्य होने थे वो नहीं हो पा रहे हैं। मिली जानकारी अनुसार बेरी जो कनीना से करीब 80 किलोमीटर दूर झज्जर जिले का एक कस्बा है वहां के एसडीओ को कनीना का अतिरिक्त कार्य भर दिया हुआ है। जो केवल दो दिनों बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार को ही आ पाते हैं। वो भी हमेशा इन दो दिनों में नहीं आ पाते क्योंकि अनेकों केस आदि की सुनवाई के लिए उन्हें जाना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि अतिरिक्त कार्य भर दिया ही जाना है तो दूसरे जिले और विशेष कर इतनी दूरी वाले एसडीओ को क्यों? नारनौल और आसपास शहरों के अधिकारियों को अतिरिक्त कार्य भर दिया जाए तो कम से कम आसानी से वे कनीना पहुंच सकेंगे  और क्षेत्र की समस्याओं से रूबरू हो सकेंगे।
 ऐसे में कनीना क्षेत्र के रमेश कुमार, सुनील कुमार ,दिनेश कुमार, सुरेंद्र कुमार, रवि कुमार आदि ने मांग की है कि कनीना के एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग की स्थायी नियुक्ति की जाए और जब तक नहीं भरा जाता है तब तक किसी आसपास के एसडीओ को अतिरिक्त कार्य भर दिया जाए ताकि कनीना क्षेत्र की समस्याओं से वो रूबरू हो सके। अगर ऐसा नहीं किया तो कनीना क्षेत्र के लोग जन आंदोलन पर उतरूं हो जाएंगे।


 विज्ञान के युग में भी स्पीड पोस्ट पहुंचती है 5 दिनों में
-कभी साधारण डाक भी पहुंचती थी महज 3 दिनों में
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कनीना की आवाज।
 कहने को तो विज्ञान ने बहुत अधिक तरक्की की है परंतु आश्चर्य तब होता है जब डाक विभाग के कार्य प्रणाली इसके विपरीत चलती नजर आ रही है। जहां  रजिस्टर्ड डाक बंद कर दी गई है और डाकघर से स्पीड पोस्ट आदि की जाने लगी हैं। स्पीड पोस्ट कहने को तो स्पीड है किंतु इसकी स्पीड कछुए की चाल से भी बेहतर नहीं है। स्पीड पोस्ट कम से कम 5 दिनों में गंतव्य स्थान पर पहुंचती है।
 मिली जानकारी अनुसार एक स्पीड़ पोस्ट कुरुक्षेत्र से 9 जनवरी को करवाई गई जो 14 जनवरी को मिलने की संभावना है। कनीना तक पहुंचने में इतना समय ले रही है। यही नहीं कनीना के अमीश कुमार ने एक एक स्पीड पोस्ट  दिल्ली के लिए भेजी। यह 5 जनवरी को कनीना से बुक करवाई गई और दिल्ली 9 जनवरी को ही पहुंच पाई। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है?
 बुजुर्ग राजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, गजराज सिंह आदि बताते हैं कि उनके जमाने में भी साधारण से साधारण डाक तीन दिनों में पहुंच जाती थी और रजिस्टर्ड डाक भी अधिकतम 3 दिनों में पहुंचती थी किंतु अब विज्ञान ने उन्नति की तो डाक विभाग ने उन्नति के बजाय अवनति की है। यही नहीं डाक विभाग से भेजी जाने वाली साधारण पत्र पत्रिकाएं विगत 3 सालों से इक्की दुक्की ही पहुंच पा रही। विशेषकर कनीना क्षेत्र में साधारण डाक से आने वाले पत्र पत्रिकाएं कभी कभार ही मिल रहे है। जिसके चलते लेखकों और बुद्धिजीवियों में भारी रोष है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि पहले कनीना क्षेत्र से डाक ट्रेन से जाती थी और जो जनता बिस्तर पर करीब तीन दिनों में पहुंच जाती थी अब तो उल्टा प्रभाव पड़ रहा है इंडियन पोस्ट की एक गाड़ी गुरुग्राम से कनीना,महेंद्रगढ़, सतनाली आदि स्थानों पर जाती है जिससे डाक लाने और ले जाने का कार्य चलता है। यही कारण है की स्पीड पोस्ट हो या कोई अन्य डाक देरी से अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच रही है। क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। उन्होंने मांग की है कि डाक विभाग को अपनी कार्य शैली में सुधार किया जाना चाहिए वरना वह दिन दूर नहीं जब लोगों का विश्वास डाक विभाग से उठ जाएगा।
 उधर कनीना के सब पोस्ट मास्टर गौतम यादव से बात हुई उन्होंने बताया कि यहां से किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरती जाती क्योंकि डाक गुरुग्राम जाती है और वहीं से छटनी होती है। वहां किसी प्रकार की समस्या हो सकती है जिसके चलते देरी से स्पीड पोस्ट पहुंच रही हो।


मकर संक्रांति पर बाबा बुर्जेश्वर धाम पर होगा भव्य गुणगान व भंडारा
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कनीना की आवाज।
 मकर संक्रांति के पावन पर्व के अवसर पर कनीना उप-मंडल के गांव कोटिया स्थित बाबा बुर्जेश्वर धाम में 14 जनवरी को बाबा का गुणगान एवं विशाल भंडारे का भव्य आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना हुआ है। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 8:15 बजे हवन के साथ किया जाएगा। इसके पश्चात प्रात: 11 बजे से श्रद्धालुओं के आगमन तक प्रसाद वितरण व भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भगत सिंह, प्रधान श्री कृष्णा गौशाला कनीना उपस्थित रहेंगे। वहीं जागरण में सुप्रसिद्ध भजन कलाकार सुरेश गोला, दिशा गुरुग्राम, संध्या चौधरी, मनु यादव महेंद्रगढ़, बंटी बालाजी हिसार एवं डिंपी रावत फरीदाबाद अपनी भक्ति प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करेंगे।
आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर बाबा बुर्जेश्वर का गुणगान सुनने और प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।
  उधर उधोदास गौशाला में मकर संक्रांति पर हवन, भजन एवं भंडारा लगेगा। विस्तृत जानकारी देते हुए भक्त रणधीर सिंह ने बताया कि लालदास महाराज स्वयं हवन करेंगे।




मकर संक्रांति को  याद कर प्रसन्न हो जाते हैं लोग
-खो जाते हैं पुरानी यादों में
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कनीना की आवाज।
 ग्रामीण क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व कुछ प्रथाएं खो चुका हैं तो कुछ आज भी जारी हैं। इस पर्व को याद करके लोग प्रसन्नचित होकर पुरानी यादों में खो जाते हैं। कुछ लोगों से इस पर्व के बारे में चर्चा की गई तो कुछ लोगों ने ऐसे रीति रिवाज बताये जो लुप्त हो गये या इस पर्व से आज भी जुड़े हुए हैं।
 **जब छोटे थे तब गांव में 200 से 300 गायों को चारा एवं गुड़ देते थे। मकर सक्रांति पर गायों की सेवा करते थे। सेठ साहूकार गुड़ देते थे तथा दान करने का कार्यक्रम दिनभर चलता था। बुजुर्गों को आज भी जगाने का रिवाज चला आ रहा है जो बहुत पुराना है। जगाने का अर्थ है कि उनका सम्मान करना। उन्हें गर्म एवं नये कपड़े भेंट किये जाते हैं।
---सूबे सिंह उम्र 63 साल
यह पर्व हंसी खुशी का पर्व है। इस दिन दान दक्षिणा पूरे यौवन पर होती है। इस पर्व के प्रति लोगों में उत्साह मिलता है। पितामह भीष्म को याद करने के लिए इस पर्व को मनाया जाता है। बुजुर्गों से भी सुनते आए हैं इस दिन दाल चूरमा प्रमुख रूप से बनाकर खाए जाते हैं और भारी मात्रा में शकरकंदी, आलू भूल कर खाते हैं। आग के सामने बैठते हैं। यहां तक कि आग के सामने पूरी पूरी रात बैठे मिलते हैं। उन्होंने बताया कि पर्व सचमुच मन में खुशी का उल्लास पैदा करता है।
---  राजेंद्र सिंह 67 वर्ष, कनीना
वे इस पर्व पर हर वर्ष आग के सामने बैठकर भगवान से प्रार्थना करते आए हैं कि उनकी फसल अच्छी हो। वर्तमान में सरसों और गेहूं खड़ा हुआ है। जल्द ही यह फसल पकान की ओर जाएगी। इस पर्व पर रात भर जाकर अपनी फसल को निहारते है। हर जन की खुशी की प्रार्थना करते हैं।  पूजा अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। सूर्य की पूजा, बुजुर्गों का सम्मान, खेलकूद तथा कुछ जगह पतंगबाजी करके भी इस पर्व को मनाया जाता है।
 --हनुमान सिंह(52) कनीना
 इस पर्व पर वह दान दक्षिणा करते हैं। विशेषकर गायों को गुड़ खिलाया जाता है। विभिन्न गौशालाओं में जाकर के दान दिया जाता है, पूरे दिन हवन एवं गायों की सेवा का सिलसिला चलता है। पुराने समय से गाय बहुत पाली जाती थी, तब गायों को गुड़ खिलाया जाता रहा है और चारा दिया जाता रहा है। परंतु पूर जलाना, प्रभात फेरी लगाना, कुओं पर जल्दी स्नान करना, गांव की परिक्रमा करना आदि घटने का दुख जरूर है। जब छोटे थे तो मकर सक्रांति की रात को जागते थे। आग के सामने बैठकर समय बिताते थे। वास्तव में बुजुर्गों को जगाने का अर्थ था उनको दान में रजाई और गद्दे आदि दिया जाते थे। उनका सम्मान करने का यह दिन होता है। मकर सक्रांति के दिन दान पुण्य करते हुए देखते आ रहे हैं। इस पर्व के प्रति सदा ही बुजुर्गों, बच्चों और युवाओं में लगाव रहा है। सूर्य की पूजा की जाती और जल्दी उठकर स्नान किया जाता है।
  ---कंवरसेन वशिष्ठ, 76 वर्ष
फोटो कैप्शन 04: सूबे सिंह, कंवरसेन वशिष्ठ, राजेंद्र सिंह, हनुमान सिंह।






स्वयं सेवकों को दी संस्कारों की जानकारी
-संस्कार के बजलपर बनता है इंसान महान-डा. राकेश
-मकर संक्रांति को होगा शिविर का समापन
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर के छठे दिन मुख्य अतिथि के रूप में डाइट प्रवक्ता डा राकेश कुमार ने अपने वक्तव्य में संस्कारों के महत्व के बारे में समझाया।
उन्होंने कहा कि ये संस्कार ही है जो समाज में व्यक्ति के वजूद निर्धारित करते हैं। विशिष्ट अतिथि के तौर पर स्वास्थ्य विभाग में डा. रविना ने स्वस्थ जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हमारा खानपान कैसा होना चाहिए? इस अवसर पर डा. पुखराज ,विरेंद्र शास्त्री ,बुधराम,  दयानंद यादव प्रवक्ता ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया। सुबह के सेशन में स्वयंसेवकों ने स्वच्छता अभियान चलाया। मंच संचालन सुरेंद्र सिंह प्रवक्ता अर्थशास्त्र ने किया। कार्यक्रम अधिकारी राजेश बालवान प्रवक्ता अंग्रेजी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
फोटो कैप्शन 01: डा. राकेश जानकारी देते हुए


मकर संक्रांति -14 जनवरी
--सूर्योपासना का पर्व है मकर संक्रांति
-वर्तमान में भी बुजुर्गों को जगाने की प्रथा है जारी             
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कनीना की आवाज।
आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में सूर्यपर्व मकर संक्रांति प्रासंगिक है। कनीना क्षेत्र में 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस मौके पर दिनभर दान पुण्य, धर्म-कर्म एवं उत्सव चलता रहता है। दाल चूरमा प्रमुख रूप से खाया जाता है।
मकर संक्रांति अनेक सद्भावों से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक पर्व है। बहनों को याद करना, दान पुण्य करना, गायों की सेवा करना, रातभर आग जलाना, मूंगफली, गुड़ व खांडसारी की बनी रेवडिय़ां एवं गजक खाना, सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, शकरकंदी का भाग लगाना जैसी अनेक परम्पराओं को अपने में समेटे हुए होता है। इस त्योहार से एक दिन पूर्व पंजाब प्रांत का प्रसिद्ध पर्व लोहड़ी भी आता है।
   पुराने समय में सर्वोत्तम माना जाने वाला भाई बहन के प्यार को प्रगाढ़ पूर्ण बनाने के लिए इस त्योहार का विशेष योगदान रहा है। इस मौके पर भाई बहन को याद करता है और उपहार स्वरूप उन्हें रुपये-पैसे और गुड़ भेंट करता है। इस मौके पर भाई बहन से मिलने जाता है और बहन भी भाई को याद करती है। आधुनिक भागदौड़ के युग में भी यह पर्व सार्थक बना हुआ है। इस पर्व का वर्णन अनेकों स्थानों पर मिलता है।
   दान पुण्य की शृंखला में बड़े बूढ़ों को जगाने की प्रथा इस त्योहार से जुड़ी हैं। बहुएं अपने सास व ससुर को जगाकर दान पुण्य करती हैं और उन्हें नए वस्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। दानी सज्जन दान पुण्य करते हैं। शहरों में एक निर्धारित स्थान पर गुड़ व चारा आदि डाल दिए जाते हैं और पशुओं को सामूहिक रूप से वहां चारा चराया जाता है। रातभर जागने की प्रथा में गली व मोहल्लों में बूढ़े बड़े एकत्रित होकर खुशियां मनाते हैं। आग जलाकर रातभर बैठे रहते हैं। जनसमूहों की टुकडियां इस रात मूंगफली और गजक तथा शकरकंदी का उपभोग करती हैं। यहां तक की एक जाति विशेष के लोग तो इस दिन एक ही थाली में इकट्ठे


















बैठकर खाना खाते हैं। गांवों में इस दिन देशी घी का चूरमा तथा खीर का भोजन प्रमुख रूप से पकाया जाता है। चूरमे को दाल के साथ परोसने की प्रथा भी चली आ रही है। मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व भी है। माना जाता है कि इसी दिन पितामह भीष्म ने अपने प्राण शरशैया पर लेटे हुए त्यागे थे। उतरायणकाल इसी दिन से शुरू होता है। यही कारण है कि आज भी सूर्य की पूजा के रूप में पर्व मनाया जाता है।
  ग्रामीण क्षेत्रों में तो इस दिन अपना प्रमुख भोजन दाल-चूरमा बनाकर पूरा परिवार ही भोग लगाता है। दाल-चूरमा एक दूसरे को खिलाया जाता है। दाल चूरमा खाने के बाद खेल खेले जाते हैं या फिर जगाने की प्रथा में व्यस्त देखे जा सकते हैं। ग्रामीण लोग इस दिन पुण्य करने में सुबह से ही देखे जा सकते हैं। रातभर जहां ईंधन को जलाकर उसके चारों ओर लोग बैठे देखे जा सकते हैं वहीं गायों के लिए विशेष स्थान पर गुड़ एवं चारा डाल दिया जाता है जहां गाय मीठा भोजन व चारा आसानी से प्राप्त करती हैं।
    प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा भी चली आ रही है। स्त्री व पुरुषों में इस दिन जल्दी उठकर स्नान करने की होड़ लगी रहती है। माना जाता है कि इस दिन जल्दी उठकर स्नान करने वाला सीधा स्वर्ग में जाता है जब उसकी मौत होती है तो। ऐसे में सभी स्वर्ग के भागी बनना चाहते हैं। लोग जल्दी उठकर स्नान करने के उपरांत टहलने को जाते हैं। सर्दी का प्रकोप भी इस दिन से कम होना शुरू हो जाता है। स्त्री व पुरुष ऊनी परिधान धारण करके रंग बिरंगे नजर आते हैं। चारों तरफ सरसों के पीले फूलों को देखकर किसान फूले नहीं समाते हैं। कुछ शहरों में इस दिन मेले लगते हैं और ढोल व ताशें बजते हैं।






मकर संक्रांति को होंगे अनेक कार्यक्रम
-हवन तथा मेले लगेंगे
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कनीना की आवाज।
 मकर संक्रांति 14 जनवरी को कनीना क्षेत्र में अनेक कार्यक्रम होंगे। जहां मेले लगेंगे वहीं हवन आयोजित किए जाएंगे, गायों की सेवा की जाएगी। उधर श्रीकृष्ण गौशाला में मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर गौशाला में हवन एवं भजन आयोजित होंगे।
 विस्तृत जानकारी देते हुए गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव ने बताया कि हवन के समय मुख्य अतिथि रोशन लाल यादव होंगे वही अध्यक्षता हरीश कनीनवाल करेंगे। इस मौके पर दीपक गुप्ता वाइस चेयरमैन मार्किट कमेटी विशिष्ट अतिथि होंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के सभी गौ प्रेमी व समाजसेविओं को गौशाला कमेटी की तरफ से सम्मानित किया जाएगा।
 फोटो कैप्शन 02: श्रीकृष्ण गौशाला का द्वार






 

 

***प्राचार्य कुतरूं के कारनामे, इसी ब्लाग पर 14 जनवरी से
   -पढ़ते रहिये कनीना की आवाज
 ***साल में एक विज्ञापन भी नहीं दिया
 -वो मेरे पास प्रकाशन हेतु न भेजे समाचार

Monday, January 12, 2026



 


कनीना के विकास कार्यों का लिया गया जायजा
-पार्षद दीपक चौधरी रहे अधिकारी के साथ
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कनीना की आवाज।
नगर पालिका कनीना द्वारा शहर के सार्वजनिक स्थलों को बेहतर एवं सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नगर पालिका के अधिकारी दीपक चौधरी की उपस्थिति में दिनेश कुमार पालिका अभियंता ने नगर क्षेत्र के विभिन्न पार्कों एवं सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कान्हा सिंह पार्क, ढोकलमल पार्क, सुजान सिंह पार्क एवं गणेश पार्क की साफ-सफाई, मरम्मत, रख-रखाव एवं सौंदर्यीकरण कार्यों की स्थिति का विस्तृत जायजा लिया गया।
पालिका अभियंता दिनेश कुमार ने युवा इंकलाब एजेंसी के ठेकेदार को निर्देश दिए कि सभी पार्कों में स्वच्छता, आवश्यक मरम्मत, सुधार कार्य एवं सौंदर्यीकरण का कार्य शीघ्रता और गुणवत्ता के साथ प्रारंभ किया जाए, ताकि आमजन को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
निरीक्षण के दौरान होली दहन के लिए निर्धारित स्थल की स्थिति पर भी विशेष चर्चा की गई। दिनेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि होली दहन स्थलों पर साफ-सफाई का कार्य तुरंत पूरा किया जाए तथा वहां टाइल लगाने का कार्य भी शीघ्रता से पूर्ण किया जाए, जिससे त्योहारों के दौरान व्यवस्था सुचारु एवं सुरक्षित बनी रहे।
बताया गया कि इन सभी कार्यों के लिए वर्क आर्डर पहले ही युवा इंकलाब एजेंसी को जारी किया जा चुका है, और नगर पालिका की निगरानी में सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे कराए जाएंगे। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने शहर के सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक बनाने पर सहमति जताई। इस निरीक्षण में कनिष्ठ अभियंता राकेश कुमार, लिपिक सुरेंद्र जोशी आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 09:कनीना के विकास कार्यों का जायजा लेते हुए





एसडियंस ने तीनों सेनाओं में एक साथ लहराया परचम
--51 हजार रुपए का चेक भेंट
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कनीना की आवाज।
एसडियंस ने तीनों सेनाओं में एक साथ परचम लहराया है। एसडी विद्यालय ककराला की छात्रा कशिश गांव रामबास  एनडीए की परीक्षा में आल इंडिया 29वां रैंक हासिल कर भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट पद के लिए चयनित हुई हैं व 12 जनवरी 2026 को इंडियन नेवल अकादमी, केरला में ट्रेनिंग के लिए ज्वाइन करेगी।
कशिश ने नियमित कक्षाओं के साथ-साथ एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण की है, जो उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। इसी सत्र में उसकी कक्षा के विद्यार्थी जतिन शर्मा भडफ़ एनडीए पुणे महाराष्ट्र से ट्रेनिंग पूरी कर वायुसेना में पायलेट बनेगा वहीं छविकांत करीरा मिल्ट्री कालेज मऊ मध्य प्रदेश से ट्रेनिंग कर लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त होगा।
विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने बताया कि विद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करता है और कक्षा कक्ष से ही विभिन्न प्रतियोगिताओं में परिणाम दे रहा है। इस उपलब्धि पर एस डी विद्यालय ककराला में सम्मान समारोह आयोजित किया गया जिसमें विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने विद्यार्थियों को 51 हजार रुपए का चैक देकर सम्मानित किया। कमांडर विकास यादव ने भी एसएसबी में सफलता प्राप्त करने के गुर बताएं।
विद्यालय की तरफ से आज एक रोड शो का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे युवा व विद्यार्थियों को संदेश मिले। आज के रोड शो में ग्रामीणों के द्वारा भव्य स्वागत किया गया।  रोड शो ककराला एसडी विद्यालय से शुरु होकर गांव रामबास, ढाणा, पड़तल, चेलावास, उन्हानी, धनौंदा, खेड़ी तलवाना, सेहलंग, बाघोत, छितरोली, सीहोर, गाहडा व कनीना होते हुए विद्यालय में समाप्त हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय प्रधानाचार्य ओमप्रकाश यादव, एसडी ब्रांच खेड़ी तलवाना के डायरेक्टर नरेन्द्र यादव, उप प्रधानाचार्य पूर्ण सिंह, एसएसबी कार्डिनेटर रजनीश सिंह, जीतू श्रीवास्तव, दवेव्रत, सुनील, अविनाश कुमार, धनराज व सभी प्राध्यापकगण मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 04: चयनित विद्यार्थियों को 51 हजार का चेक देते हुए


एनएसएस का सात दिवसीय विशेष शिविर का हुआ शुभारंभ
--राजकीय कालेज उन्हाणी में हैं एनएसएस की दो इकाइयां
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कनीना की आवाज।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हानी की राष्ट्रीय सेवा योजना  दोनों इकाइयों द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य एवं मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर विक्रम सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
उद्घाटन सत्र में एनएसएस स्वयंसेवकों ने एनएसएस गीत प्रस्तुत किया और शिविर की प्रस्तावित गतिविधियों की रूपरेखा से अवगत कराया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर विक्रम सिंह ने विद्यार्थियों को समाज सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एनएसएस विद्यार्थियों में नेतृत्व कौशल, अनुशासन तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है।
इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारियों प्रो. सीमा एवं प्रो. नीतू कुमारी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। उद्घाटन दिवस के दौरान स्वच्छता अभियान, जागरूकता गतिविधियां तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे आयोजन सम्पन्न हुए। शिविर में दोनों इकाइयों के स्वयंसेवक उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम अधिकारियों के अनुसार यह सात दिवसीय शिविर सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता, व्यक्तिगत विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वास्थ्य संबंधित गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा। शाम के सत्र में महाविद्यालय के प्रो. सुधीर कुमार द्वारा छात्राओं को जागरूकता संबंधी व्याख्यान दिया गया । इस अवसर पर महाविद्यालय का संपूर्ण परिवार उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 05: कालेज उन्हाणी में एनएसएस का शुभारंभ करते हुए




प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किया जागरूक
-चल रहा है धरती माता बचाओ अभियान
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कनीना की आवाज।
धरती माता बचाओ अभियान के अंतर्गत सहायक कृषि अधिकारी डा. वीर कुमार ने क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर किसानों को मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने तथा प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया। गांव फतेहपुर, तोबडा तथा गुजरवास में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कृषि अधिकारी ने मिट्टी की सेहत सुधारने और उर्वरक के दुरुपयोग को रोकने पर जोर दिया। कृषि अधिकारी डॉ. वीर कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल हमारी मिट्टी को बचाएगी, बल्कि हमारी फसलें भी स्वस्थ और पौष्टिक होंगी। हमें रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को कम करना होगा और प्राकृतिक खेती की ओर बढऩा होगा। सरपंच वर्षा रानी ने कहा कि  प्राकृतिक खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक है । इसके लिए सरकार प्रोत्साहन स्वरूप किसानों को सब्सिडी व अन्य लाभ प्रदान कर रही है, इसलिए हमें सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए ।
सहायक तकनीकी प्रबंधक राजकुमार एवं भूपेंद्र पटवारी ने ऑनलाइन पंजीकरण योजना के बारे में जानकारी दी और बताया कि कैसे किसान अपनी फसल का पंजीकरण करवा सकते हैं और सरकार की योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।
इस अवसर पर ग्राम सचिव अनिता यादव, बीर सिंह नंबरदार, पूर्ण सिंह, भूपेंद्र कुमार, जवाहर सिलारपुर, प्रदीप कुमार, राकेश मोहनपुर, शिव कुमार, हरपाल मुंडिया खेड़ा, निहाल कटकई, मुकेश चौहान, भूपेंद्र पटवारी और विभिन्न गांवों के किसान मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 08: संबंधित है


माता खिमज मेला सेहलंग 25 
जनवरी  को
-आयोजित होगी विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताएं
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव सेहलंग स्थित खिमज माता का धार्मिक मेला 25 जनवरी 2026 को लगेगा। इस उपलक्ष्य पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। विस्तृत जानकारी देते हुए विजयपाल सेहलंगिया ने बताया कि क्रिकेट प्रतियोगिता 15 जनवरी 2026 से प्रारंभ होगी और एंट्री फीस 800 रुपए होगी वहीं नेशनल कबड्डी और वालीबाल स्मेशिंग के खेल 24 जनवरी 2026 को प्रारंभ होंगे, एंट्री फीस 300 रुपए  जो 24 जनवरी प्रात: 10 बजे तक जमा की जाएगी। कुश्ती प्रतियोगिता 51रुपए से 31000 रुपए की 25 जनवरी 2025 को आयोजित होंगी। मेले में 25 जनवरी को भंडारा सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगा। 24 जनवरी को रहीश यादव सांग सुबह 11 बजे  प्रारंभ होगा तथा 25 जनवरी 2026 को अरुण बास गायक प्रमुख होंगे। सेहलंगिया जन सेवा ग्रुप की तरफ से चाय-पानी और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है। मेले का सुचारु रूप से संचालन के लिए गांव के सभी लोगों से सहयोग की अपील की गई है।
फोटो कैप्शन 07: माता खिमज मंदिर सेहलंग




लोहड़ी पर्व-13 जनवरी
दुल्ला भट्टी का नाम लिया जाता है लोहड़ी पर्व पर
-पंजाबी समुदाय के पर्व को मनाते हैं सभी लोग मिलकर
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कनीना की आवाज।
यह पर्व पंजाबी समुदाय के विशेष होता है।
इस पर्व से जुड़ी यादों के बारे में सुभाषचंद धींगड़ा ने बताया कि पर्व लोहड़ी से पंजाब में दुल्ला भट्टी का नाम जुड़ा है। इनका जिक्र लोहड़ी से जुड़े हर गीत में भी किया जाता है। कहा जाता है कि मुगल काल में बादशाह अकबर के समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक युवक पंजाब में रहता था। कहा जाता है कि एक बार कुछ अमीर व्यापारी कुछ समान के बदले इलाके की लड़कियों का सौदा कर रहे थे। तभी दुल्ला भट्टी ने वहां पहुंचकर लड़कियों को व्यापारियों के चंगुल से मुक्त कराया। और फिर इन लड़कियों की शादी हिन्दू लड़कों से करवाई। इस घटना के बाद से दुल्ला को भट्टी के नायक की उपाधि दी गई और हर बार लोहड़ी पर उसी की याद में कहानी सुनाई जाती है।
 लोहड़ी के दिन आग जलाने को लेकर माना जाता है कि यह अग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है। एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। इस बात से निराश होकर सती अपने पिता के पास आकर पूछा कि उन्हें और उनके पति को इस यज्ञ में निमंत्रण क्यों नहीं दिया गया। इस बात पर अहंकारी राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की। इससे सती बहुत आहत हुईं और क्रोधित होकर खूब रोईं। उनसे अपने पति का अपमान देखा नहीं गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर लिया। सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया। तब से माता सती की याद में लोहड़ी को आग जलाने की परंपरा है।




पंजाबी समुदाय का पर्व-
नये शादीशुदा जोड़ों एवं उत्पन्न बच्चे एवं बच्चियों के लिए विशेष महत्व रखता है लोहड़ी
- बुजुर्गों के सम्मान का प्रतीक है मकर सक्रांति
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कनीना की आवाज।
 लोहड़ी एवं मकर  संक्रांति पर्व हर इंसान के लिए खुशहाली लेकर आता है। कनीना एम आसपास पंजाबी समुदाय विशेष के करीब 50 परिवार है और इस परिवारों में लोहड़ी का विशेष पर्व मनाया जाता है। यूं तो लोहड़ी को विभिन्न समुदाय के लोग भी मनाने लगे हैं किंतु पंजाबी समुदाय के लोग इस दिन नव विवाहित जोड़ों एवं उत्पन्न बच्चा या बच्ची के के लिए प्रथम लोहड़ी पर विशेष आयोजन करते हैं।
 कनीना के कृष्ण कुमार और दिनेश कुमार ने बताया कि 13 जनवरी की रात को उनका परिवार विशेष रूप से नव विवाहित जोड़ों की खुशी को और बढ़ाता है अग्नि जलाकर मूंगफली एवं रेवड़ी को प्रसाद के रूप में बांटने से पूर्व अग्रि को भेंट किया जाता है। पूरा ही परिवार आग के चारों ओर चक्कर लगाता है। परिवार में जब कोई नया बच्चा जन्म लेता है या कोई बच्ची जन्म लेती है तो उसकी खुशी भी लोहड़ी पर्व पर मनाई जाती है। उन्हें भी इस पर्व में शामिल किया जाता है और उनकी खुशी को और बढ़ाने के लिए जहां विशेषकर मूंगफली, गजक, रेवड़ी आदि बांट कर खुशी मनाई जाती है। यही नहीं जहां 13 जनवरी को नव दंपत्ति, पैदा हुये बच्चे या बच्चियों को समर्पित है वहीं जहां 14 जनवरी मकर सक्रांति का दिन बुजुर्गों को समर्पित किया जाता है। बुजुर्गों को जगाने का रिवाज है। वही 13 जनवरी लोहड़ी को विशेषकर समुदाय में गहन आस्था का पर्व मनाया जाता है।
 कनीना के सन्नी एवं रियांसी की विगत अर्से में शादी हुई है। इसी प्रकार कर्ण एवं प्रीति की शादी भी विगत अर्से में हुई है। उनका कहना है कि उनके समुदाय में यह पहली लोहड़ी मनाई जाएगी और आग के पास बैठकर उनकी खुशी को बढ़ाया जाएगा। अग्निदेव को प्रसाद भेंट कर सारा परिवार प्रसाद ग्रहण करेगा। राहुल और राखी की शादी भी विगत अर्से हुई थी जिसके चलते उनकी पहली लोहड़ी मनाई जा चुकी है। इस वर्ष सीमा उनकी लड़की मायरा, दीपिका उनका लड़का दीवांश, प्रीति उनकी नवजात लड़की कायरा तीनों की पहली लोहड़ी होगी और पर्व उन्हें समर्पित होगा। परिवार में खुशी का माहौल है तथा उनका कहना है कि वे इस त्यौहार पर नव उत्पन्न बच्ची को भी शामिल करेंगे और उस बच्ची के परिवार में वृद्धि के लिए अग्नि देव की पूजा करेंगे तथा इस दिन प्रसाद वितरित करेंगे। दिनेश कथूरिया, वीना कथूरिया, चंचल एवं प्रिया आदि ने बताया कि न केवल उनका समाज अपितु आसपास के सभी समुदाय के लोग इस परंपरा में शामिल होने लगे हैं और सभी मिलकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। क्षेत्र में लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी को मनाया जा रहा है यही कारण है कि बाजार में रेवड़ी, गजक मूंगफली, शकरकंदी आदि भारी मात्रा में आए हुए हैं। इस पर्व को लेकर रमेश कुमार जो 10 वर्षों से मूंगफली, गजक ,रेवड़ी आदि बेच रहा है। उनका कहना है कि इस पर्व का विशेष लगाव होता है। हर परिवार में कुछ न कुछ मूंगफली, गजक एवं रेवड़ी आदि खरीदे जाते हैं यही कारण है कि इस पर्व के प्रति उनमें विशेष खुशी है। कनीना बस स्टैंड पर करीब तीन दर्जन लोग गजक,रेवड़ी आदि के ढेर लगाकर बेच रहे हैं और इस पर्व का इंतजार कर रहे हैं। उधर शकरकंदी बेचने वाले विशाल कुमार ने बताया कि इस पर्व पर शकरकंदी विशेष रूप से बिकती है। 40 से 50 रुपये किलो शकरकंदी बेची जा रही है तथा इस दिन शकरकंदी को आग में भूनकर खाने का विशेष आनंद आता है। यही कारण है कि भारी मात्रा में शकरकंदी मंगवाई जा चुकी है। सब्जी की दुकानों पर ढेर लगे हुए तथा लोहड़ी तथा सक्रांति पर अधिकार शकरकंदी बिक जाती है। ऐसे में दोनों ही पर्व लोगों के लिए खुशहाल लेकर आते हैं।
 फोटो कैप्शन: सीमा-मायरा,दीपिका-दीवांश, प्रीति-कायरा को समर्पित होगा लोहड़ी पर्व






रविवार की रात रही सीजन की सबसे ठंडी रात
-पूरा रास्ता पाले से भरा, खेत नजर आये सफेद
-सरसों में नुकसान का बना अंदेशा
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कनीना की आवाज।
रविवार की रात तापमान फ्रीजिंग प्वाइंट तक पहुंच गया और फसलों पर पाले की परत जम गई । जैसे सभी को विदित है कि जब पानी जमता है तो फैलता है और यही स्थिति फसलों में होती है।जो पानी पौधे की कोशिका में होता है वो जम कर फैलता है और पौधे की कोशिका भित्ति को फाड़ देता है । ज्यादा नुकसान चौड़ी पत्ती वाली और फूल वाली फसलों में होता है ।यह जानकारी देते हुए कृषि विशेषज्ञ डा. योगेश ने बताया ,इस समय सरसों फसल जो जिले में लगभग 2 लाख 78 हजार एकड़ में बोई गई है में नुकसान की आशंका है। दिन में जब तेज धूप हो और शाम को हल्की हल्की हवा चले और तापमान नीचे चल रहा हो तो 100 प्रतिशत पाला गिरेगा ।  फूल वाली फसल में परागकण मर जाएंगे ,और फसल बुरी तरह से प्रभावित होगी। उस दशा में किसान ,फसलों की हल्की सिंचाई करे ,रात को हवा की दिशा में टायर या घास फूस जलाकर धूम्र करे । ताकि धूम्र की चद्दर फसल में पाला जमने से रोके। फसल में पोटेशियम नाइट्रेट 13/0/45 का एक किलो प्रति 100 लीटर पानी की दर से छिड़काव करवाए।
  क्या कहते हैं किसान-
 इस संबंध में क्षेत्र के किसानों से बात हुई। उन्होंने बताया कि पाले से नुकसान की पूरी संभावना बन गई है। सुबह जब उठकर उन्होंने देखा तो खेतों में दूर दराज तक सफेद चादर पाले की नजर आ रही थी। किसान गजराज सिंह, अजय कुमार, अजीत कुमार, सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, सवाई सिंह आदि ने बताया कि जब उठकर उन्होंने देखा तो खेतों में दूर दराज तक पाइपों पर पर तथा घास फूस पर सफेद चादर पाले की जमी नजर आ रही थी। सरसों के पत्ते मुरझाये नजर आ रहे थे तथा सभी फसलें अलसाई हुई नजर आ रही थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस समय सरसों और गेहूं की फसल उगा रखी है। गेहूं की पत्तियों पर पाला जमा देखा गया। किसानों ने बताया कि वे पहली बार इतना अधिक पाला जमा देख रहे हैं जो समस्या बन सकता है। कनीना क्षेत्र में 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों तो 8 हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल खड़ी हुई है।
  क्या कहते हैं किसान- इस संबंध में क्षेत्र के किसानों से बात हुई उन्होंने बताया कि पहले से नुकसान की पूरी संभावना बन गई है सुबह जब उठकर उन्होंने देखा तो खेत खेत दूर दराज तक सफेद नजर आ रहे थे किस गजराज सिंह अजय कुमार अजीत कुमार सुबह सिंह राजेंद्र सिंह कृष्ण कुमार सवाई सिंह आदि ने बताया कि जब उठकर उन्होंने देखा तो खेतों में दूध दराज तक पाइपों पर चो पर तथा घास फूस पर सफेद चादर वाले की जाम नजर आ रही थी सरसों के पत्ते मर्ज है नजर आ रहे थे तथा फासले अलसी हुई नजर आ रही थी उन्होंने बताया कि उन्होंने इस समय सरसों और दिन की फसल उगा रखी है गेहूं की पत्तियों पर पाल जमा देखा गया किसानों ने बताया कि वे पहली बार इतना अधिक पाल जमा देख रहे हैं जो समस्या बन सकता है।  
  उधर किसान अजय कुमार, कांता, गजराज सिंह मोदी आदि ने बताया कि उनके फव्वारा पाइपों पर भी पाला जमा हो गया वहीं महेश कुमार ,कुलदीप बोहरा आदि ने बताया कि उनकी गाड़ी की छत पर भी पाले की परत जमा हो गई। भरपूर सिंह किसान ने बताया कि उन्हें नींबू की तुड़ाई करनी थी और नींबू पर भी पाला जमा देखा जिससे तोड़ाई संभव नहीं हो पाई। किसानों के घास फूस तथा घर सभी जगह पाला जमा हुआ था। गृहिणी आशा, शकुंतला एवं नीलम आदि ने बताया कि उनके घरों में आंगन में भी पाला जमा देखा गया। घरों में पानी के घड़ों में भी ऊपर पाले की परत जमी हुई थी। सब्जी की फसलों को नुकसान होने का अंदेशा बन गया है। वही सरसों की फसल को अधिक नुकसान होने की संभावना बन गई है। वैसे तो हर वर्ष फरवरी माह में अधिक पाला पड़ता था किंतु इस बार जनवरी माह में अधिक पाला जमा है। कनीना क्षेत्र में जहां विगत कई बार पाला जम चुका है।  एक बार फिर से पाला जमा है जिससे किसान मायूस हैं।
 क्या कहते एसडीओ कृषि -
एसडीओ कृषि डा. अजय यादव ने बताया कि पाले से नुकसान की सरसों में संभावना है। उन्होंने बताया गेहूं की फसल में पाले का कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि गेहूं की एक विशेषता होती है कि वह रिकवरी कर लेता है किंतु सरसों इस समय फूल आ रहे हैं और पराग बन रहे हैं जिनमें नुकसान होने का अंदेशा बन गया है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वह खेतों में हल्की सिंचाई कर दे कर दे और खेत के चारों धुआं कर दे ताकि धुआं से फसल को नुकसान होने से बचाया जा सके।
फोटो कैप्शन 01 से 22: पाले की हैं साथ में एसडीओ कृषि डा. अजय यादव





भोजावास में धूमधाम से मनाया गया युवा दिवस
--स्वामी विवेकानंद को किया गया याद
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कनीना की आवाज।
देश की युवाओं के आदर्श एवं प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानन्द का जन्म दिन जिसे भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ मध्यमिक विद्यालय भोजावास में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय कैंप के पांचवें दिन स्वामी विवेकानन्द का जन्म दिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया। उन्होंने स्वयंसेवकों से स्वामी विवेकानन्द के पद चिन्हों पर चलने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने बागवनी क्षेत्र से संबंधित जानकारी दी इसे कैरियर के रूप में कैसे अपना सकते हैं  और किस तरह से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सौजन्य से विशिष्ट अतिथि के रूप में एडवोकेट मिनाक्षी व सरोज पीएलवी ने शिरकत की। उन्होंने स्वयं सेवकों से नशे से दूर रहने का भी आह्वान किया व कानून की जानकारी दी। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी  राजेश बालवान ने स्वयं सेवकों से बताया की स्वामी विवेकानन्द का कहना था उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत। संघर्ष जितना बड़ा होगा जीत उतनी ही शानदार होगी। मंच संचालन सुरेंद्र सिंह प्रवक्ता अर्थशास्त्र ने किया। इस अवसर पर विरेंद्र शास्त्री, सुमित पाठक, अभय सिंह, बुधराम ,राजकुमार प्रवक्तागण  ने भी स्वयंसेवकों में ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम अधिकारी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
फोटो कैप्शन 01: स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए






पीएमश्री भोजावास में  कौशल विकास सेमिनार
--डा. नेहा यादव ने रखे अपने विचार
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कनीना की आवाज।
पीएम श्री गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल भोजावास में कौशल विकास, रोल माडल व फन सेमिनार का आयोजन के दूसरे दिन डाक्टर नेहा यादव कृषि अधिकारी ने कृषि एवं वाणीकी क्षेत्र में जानकारी देते हुए बताया कि कृषि के क्षेत्र में बच्चे शिक्षा ग्रहण करके अपना भविष्य सुनहरा बना सकते हैं। इसी के साथ उन्होंने बताया कि आज कृषि की जोत छोटी होने से, विकसित टेक्नोलाजी का अगर  प्रयोग करें तो उन्नत कृषि करके अपनी आवश्यकताएं पूरी की  जा सकती है। आज नए-नए क्षेत्रों में फलों , फूलों सब्जियों की खेती उन्नत तरीके से की जा रही है। जिससे किसान छोटी जोत के बाद भी अच्छी कमाई कर रहे हैं । इसी के साथ आने वाले समय की जरूरत बताते हुए डाक्टर ने कहा कि जब जो छोटी होगी और देश की जनसंख्या बढ़ती जा रही है तो हमें तकनीकी कृषि का उपयोग करके ही हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं। और अच्छी कमाई कर सकते हैं । उन्होंने बताया कि आज किसान अगेती सब्जियां , फल , फूल उगाकर बाजार में अच्छी किमत हासिल कर रहा है।
इस अवसर पर भूगोल प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह ने डाक्टर नेहा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश को विकसित होने के लिए किस को औद्योगिक कृषि करते हुए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना अनिवार्य है देश का किसान आत्मनिर्भर होगा तभी देश विकसित होगा ऐसे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए स्वामी विवेकानंद ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा था कि आगे बढ़े और लक्ष्य प्राप्ति तक रुके नहीं 12 जनवरी युवा दिवस यानी कि स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस पर भी उन्हें याद किया गया। अंत में प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह व  सत्य प्रकाश ने डाक्टर नेहा यादव का सम्मान किया। इस अवसर पर प्रवक्ता बुधराम राजकुमार , राजेश कुमार व सुमित पाठक उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: डा. नेहा यादव को सम्ृति चिह्न भेंट करते हुए






































राष्ट्रीय युवा दिवस पर रामबास के युवाओं ने की पौधों की निराई-गुड़ाई
--रामबास मेें चला कार्यक्रम
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कनीना की आवाज। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर गांव रामबास के युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधों की निराई-गुड़ाई कर श्रमदान किया। युवाओं ने गांव के सार्वजनिक स्थलों और पौधारोपण क्षेत्रों में साफ-सफाई कर पौधों की देखभाल की।
इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों से प्रेरित होकर वे समाज सेवा और प्रकृति संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
 मनोज कुमार रामबास ने बताया कि इस तरह की गतिविधियां न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहायक होती हैं, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा भी प्रदान करती हैं। ग्रामीणों ने युवाओं की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया।
फोटो कैप्शन 03: पौधों की निराई गुड़ाई करते हुए युवा








 

 

 

***प्राचार्य कुतरूं के कारनामे, इसी ब्लाग पर 14 जनवरी से
   -पढ़ते रहिये कनीना की आवाज
 ***साल में एक विज्ञापन भी नहीं दिया
 -वो मेरे पास प्रकाशन हेतु न भेजे समाचार