Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Wednesday, August 26, 2026



 




 छितरोली की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला को हरियाणा सरकार से मिला डेढ़ करोड़ रुपए का चेक
-साथ में सरकारी नौकरी का मिला पत्र
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज। 
कनीना उप-मंडल के गांव छितरोली निवासी दिव्यांग शर्मिला धनखंड ग्लासगो कोमन वैल्थ गेम्स-2026 की गोल्ड मेडल विजेता को हरियाणा के पंचकूला स्थित मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने डेढ़ करोड़ रुपए का चेक और नौकरी का पत्र प्रदान किया है। कामनवेल्थ गेम्स में विगत दिनों शर्मिला धनखड़ ने खेलों में गोल्ड मेडल जीत कर आई थी तत्पश्चात से उन्हें एक के बाद एक जगह सम्मानित किया जा रहा है।
 इसी कड़ी में हरियाणा सरकार की ओर से उन्हें बुधवार को पंचकूला में डेढ़ करोड़ रुपए का चेक प्रदान किया वहीं उन्हें नौकरी का पत्र भी प्रदान कर दिया गया है। यह नौकरी उननकी योग्यता के अनुसार दी जाएगी। नौकरी के पत्र में खिलाड़ी सेवा नियम 2021 का हवाला देते हुए क/ख/ग श्रेणी की नौकरी उनकी योग्यता के अनुसार देने की बात कही है। इसके लिए जो शर्तें पूरी करती है उसी अनुसार नौकरी  प्रदान कर दी जाएगी। क्षेत्र में खुशी की लहर है विशेषकर एसडीएम स्कूल छितरोली जहां से वह पढ़ी है, में खुशियां मनाई जा रही है।
 अपना असली गुरु मानती है अजमेर सिंह दांगी को -
शर्मिला धनखड़ अपना असली गुरु अजमेर सिंह दांगी को मानती है जिनके स्कूल में वह पढ़ी तथा उन्होंने ही खेलों के लिए बढ़ावा दिया। विगत दिनों जब छितरोली में उनका सम्मान समारोह आयोजित किया गया तो सबसे पहले अपने गुरु के चरणों में बैठकर उन्हें नमन करने पहुंची,तत्पश्चात गुरु माता को नमन करके तब कार्यक्रम स्थल में पहुंची। उनका कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा मंदिर अजमेर सिंह दांगी और उसकी पत्नी है। उनसे बड़ा अन्य कोई मंदिर नहीं। जिन्होंने उन्हें सही सलाह दी और आज इस मुकाम तक पहुंची।                               कौन बनेगा करोड़पति में जीते 12.50 लाख-
उधर स्वर्ण पदक जीतने के बाद कौन बनेगा करोड़पति की हाट सीट पर भी शर्मिला धनखड़ पहुंची और 12.50 लाख रुपए जीते। 25 लाख के प्रश्न का उत्तर देने में कुछ देरी हो गई और हूटर बज गया जिसके चलते उन्हें 12.50 लाख रुपए जीतकर बाहर आना पड़ा।
 मिले हैं अनेकों आफर-
शर्मिला को इस समय अनेक आफर मिल रहे हैं। एक के बाद एक कितने ही आफर मिलते जा रहे हैं जिनसे शर्मिला संतुष्ट नहीं है। उनकी अब दृष्टि ओलंपिक खेलों और आने वाले खेलों पर टिकी हुई है।
 दो गाडिय़ों की आफर मिली-

विभिन्न कंपनियों ने दो गाडिय़ां देने के लिए भी उन्हें आफर दी है।
 मकान बनाने के लिए सारा खर्चा देगी अंबुजा सीमेंट कंपनी-
 उधर अंबुजा सीमेंट ने शर्मिला को मकान बनाने के लिए सारा खर्चा देगी, चाहे वह कितने भी क्षेत्रफल में अपने लिए मकान बनाना चाहे, उनका कोई खर्चा नहीं लगेगा।
 एम-3-एम  कंपनी देगी जाने आने का खर्चा--

 उधर एम-3-एम कंपनी वर्ष 2028 तक शर्मिला के कहीं भी आने-जाने का सारा खर्च वहन करेगी। वैसे तो 2022 से यह कंपनी उन्हें 35 हजार रुपए प्रतिमाह देती आ रही है। क्योंकि 2028 में ओलंपिक खेल होंगे इसलिए तब तक उनका खर्चा कंपनी वहन करेगी।
 देसी घी का खर्च वहन करेगी गोवर्धन कंपनी-
गोवर्धन कंपनी ने उन्हें ओलंपिक खेल 2028 तक जितना भी देशी घी खाया जाए, सारा खर्चा/देशी घी देगी।
 कल्याण ज्वेलर्स ने दी ज्वेलरी -
उधर कल्याण ज्वेलर्स ने उन्हें पर्याप्त मात्रा में ज्वेलरी दी है जिसकी कोई कीमत नहीं आंकी गई है। इसके बाद अतिरिक्त अनेक और भी आफर उन्हें मिलते ही जा रहे हैं।
 क्या कहना है अजमेर सिंह दांगी का -
अजमेर सिंह दांगी एसडीम स्कूल छितरोली का कहना है कि उन्होंने शर्मिला को सही मार्ग दिखाया किंतु जी तोड़ लगन उनकी अपनी थी जिसके चलते आज वही इस मुकाम पर पहुंची है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ओलंपिक खेलों 2028 में वो स्वर्ण पदक जीतेगी।
फोटो कैप्शन 6: शर्मिला अपने गुरु और गुरु माता के साथ बचपन में
फोटो कैप्शन 07: डेढ़ करोड़ का चेक देते हैं मुख्यमंत्री
08 :मिला नौकरी का आफर




शिक्षा सुधार के दावों के बीच कनीना खंड में प्रशासनिक संकट
-- 24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों पर प्राचार्यों की भारी कमी
--कागजों पर सुधार, जमीन पर खाली कुर्सियां—क्या व्यवस्था संभाल पाएगी सरकार?
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
  एक ओर हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग स्कूलों की व्यवस्था सुधारने, सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लगातार दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विभाग आए दिन नए आदेश, पोर्टल संबंधी निर्देश और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्यस्त दिखाई देता है, लेकिन स्कूलों में नेतृत्वकारी अधिकारियों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था की कमजोर तस्वीर पेश कर रही है।
हाल के दिनों में स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं। स्कूल परिसरों में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब अनेक विद्यालयों में स्थायी प्राचार्य और मुख्याध्यापक तक उपलब्ध नहीं हैं, तो इन आदेशों और व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी आखिर किसके कंधों पर होगी?
वर्तमान में शिक्षा विभाग का बड़ा अमला विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों में व्यस्त है। एसआईआर संबंधी प्रक्रियाएं, जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां एवं प्रशिक्षण, एमआईएस पोर्टल पर शिक्षकों के अंक और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं लगातार चल रही हैं। इसके अतिरिक्त मॉडल संस्कृति विद्यालयों, पीएम श्री विद्यालयों और सीएम श्री विद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया के लिए हाल ही में मंडल स्तर पर परीक्षाएं भी आयोजित की जा चुकी हैं।
लेकिन इन तमाम गतिविधियों के बीच कनीना खंड के सरकारी विद्यालयों में प्राचार्यों और मुख्याध्यापकों की कमी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में नेतृत्व का संकट--
खंड कनीना में 24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं, लेकिन इनमें से अनेक विद्यालयों में प्राचार्य के पद रिक्त बताए जा रहे हैं। कई विद्यालयों में पीजीटी शिक्षकों को कार्यवाहक प्रभारी के रूप में विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
वित्त विभाग एवं सरकार की व्यवस्था के अनुसार विद्यालयों की ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग पावर  को लेकर स्पष्ट प्रशासनिक प्रावधान हैं और सामान्यत: वित्तीय जिम्मेदारी सक्षम अधिकारी के माध्यम से संचालित की जानी चाहिए। ऐसे में कार्यवाहक व्यवस्थाओं और एक अधिकारी पर कई विद्यालयों की जिम्मेदारी का बढ़ता बोझ व्यवस्था की व्यावहारिक चुनौतियों को उजागर करता है।
स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि कुछ प्राचार्यों को दो-दो और तीन-तीन विद्यालयों की अतिरिक्त डीडी पावर तक संभालनी पड़ रही है। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि एक ही अधिकारी कई विद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कितनी सीमा तक कर सकता है।
31 अगस्त के बाद और बढ़ सकता है संकट--
आगामी 31 अगस्त को एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं, वहीं खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे खंड की प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पडऩे की संभावना है।
इतना ही नहीं, आगामी दो महीनों में तीन अन्य प्राचार्यों के भी सेवानिवृत्त होने की संभावना बताई जा रही है। यदि रिक्त पदों को समय रहते नहीं भरा गया तो पहले से कमजोर प्रशासनिक ढांचा और अधिक दबाव में आ सकता है।
मौजूदा प्राचार्यों में से ही यदि किसी एक को खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यवाहक प्रभार दिया जाता है, तो पहले से प्राचार्यों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
खंड में पांच उच्च विद्यालय भी हैं और इनमें एक भी स्थायी मुख्याध्यापक नहीं होने की स्थिति शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
कागजों पर सुधार, जमीन पर रिक्त पद--
शिक्षा विभाग एक ओर शिक्षा सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर स्कूल प्रबंधन की बात करता है, लेकिन दूसरी ओर महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों के लंबे समय तक रिक्त रहने से व्यवस्थाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है।
विद्यालय में प्राचार्य केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं होता। वह शैक्षणिक नेतृत्व, अनुशासन, वित्तीय प्रबंधन, शिक्षकों के समन्वय, विद्यार्थियों की प्रगति और विद्यालय के समग्र संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है।
जब एक प्राचार्य को कई विद्यालयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़े और अनेक स्कूलों को कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे चलाना पड़े, तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पडऩे की आशंका बनी रहती है।
सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदारी किसकी?--
आज आवश्यकता केवल नए आदेश जारी करने, पोर्टल अपडेट कराने और बैठकों के आयोजन की नहीं है। आवश्यकता है कि विद्यालयों में स्थायी नेतृत्व उपलब्ध कराया जाए।
कनीना खंड की स्थिति सरकार और शिक्षा विभाग के सामने बड़ा सवाल खड़ा करती है—
क्या शिक्षा सुधार केवल पोर्टलों, आदेशों और बैठकों तक सीमित रहेगा, या फिर स्कूलों में रिक्त पड़े प्राचार्य, मुख्याध्यापक, मौलिक मुख्याध्यापक और हेड टीचर के पदों को भरकर वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाया जाएगा?
आखिर कब तक कार्यवाहक प्रभार और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के सहारे शिक्षा व्यवस्था चलाई जाएगी?
क्या सरकार उठाएगी ठोस कदम?---
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल सुधार के दावे करना नहीं, बल्कि उन दावों को धरातल पर उतारना है। शिक्षकों, मुख्याध्यापकों और प्राचार्यों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों को यदि समय रहते स्थायी नेतृत्व नहीं मिला, तो शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ता प्रशासनिक बोझ भविष्य में और गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
कागजों पर मजबूत दिखने वाली शिक्षा व्यवस्था की असली परीक्षा स्कूलों के मैदान में होती है। कनीना खंड में रिक्त पदों और अतिरिक्त प्रभारों की यह तस्वीर सरकारी दावों तथा जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच सरकार इन खाली कुर्सियों को भरने और चरमराती प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाती है।
क्योंकि सवाल केवल अधिकारियों की खाली कुर्सियों का नहीं है—सवाल उन हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का है, जिनके लिए हर सरकारी दावा आखिरकार स्कूल की चारदीवारी के भीतर सच साबित होना चाहिए।







किसानों को दी मूंग फसल में होने वाले कीटों के नियंत्रण की जानकारी
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
  दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता योजना के तहत बुधवार को कनीना में एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में डा. मनीष यादव बीटीएम कनीना ने किसानों को रोग कीट नियंत्रण और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की जानकारी दी। साथ में मूंग एवं अरहर की नई किस्मों व फसल में आने वाले विभिन्न रोगों की पहचान और उनकी रोकथाम के उपाय भी बताएं। डा. अरविंद ने विभागीय स्कीमों की जानकारी दी। इसके साथ ही किसानों को खाद वितरण की नई प्रणाली के बारे में भी बताया गया। प्रशिक्षण में करीब 35 किसानों ने भाग लिया।
 फोटो कैप्शन 10: मूंग की फसल के बारे में जानकारी देते कृषि अधिकारी




कनीना में एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह की राजनीतिक दलों के साथ बैठक
-स्वच्छ मतदाता सूची ही मजबूत प्रजातंत्र की नींव- डा. जितेंद्र सिंह
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
  अटेली विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीयन अधिकारी एवं एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को उनके कार्यालय में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए-1) की बैठक हुई।
इस मौके पर एसडीएम ने कहा कि एक पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची ही किसी भी स्वस्थ प्रजातंत्र की सबसे बड़ी मजबूती होती है।
बैठक के दौरान प्रशासन द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत तैयार किए गए प्रपत्र संख्या 9, 10, 11, 11ए और 11बी सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किए गए। इसके साथ ही इन प्रपत्रों पर अब तक की गई प्रशासनिक कार्यवाही तथा 68-अटेली विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत दावे, आपत्तियों व नोटिस चरण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
आम नागरिकों के लिए इस विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत अपने दावे तथा आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम समय-सीमा 30 अगस्त निर्धारित की गई है। कोई भी पात्र नागरिक जिसका नाम सूची से छूट गया है या जिसमें किसी प्रकार का संशोधन अपेक्षित है, वह 30 अगस्त तक अपने संबंधित बीएलओ या आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना दावा अथवा आपत्ति दर्ज करा सकता है।
एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने बीएलए के माध्यम से पात्र नागरिकों के नाम जुड़वाने और गलत या स्थानांतरित नामों को हटवाने में प्रशासनिक प्रक्रिया का सहयोग करें।
उन्होंने इस अभियान में लगातार अपनी सहभागिता बनाए रखने का अनुरोध किया।
फोटो कैप्शन 08: एसडीएम कनीना राजनीति दलों से बैठक करते हुए



राजकीय माडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल भोजावास में टीकाकरण शिविर का आयोजन
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
  राजकीय माडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल, भोजावास में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों के लिए विशेष टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में बच्चों को गलघोंटू (डिप्थीरिया), टिटनेस और काली खांसी (कुकुर खांसी) जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए गए।
टीकाकरण के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य की जांच भी की गई, जिसमें बच्चों का वजन और हीमोग्लोबिन की जांच शामिल थी। स्वास्थ्य कर्मी अनिल रसूल ने बताया कि जिन बच्चों में खून की कमी या वजन में कमी पाई गई, उन्हें आयरन की गोलियां व अन्य आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं और अभिभावकों को पोषण संबंधी जानकारी दी गई।
फोटो कैप्शन 05: डाक्टरों की टीम बच्चों की जांच करते हुए




 

गायों के लिए लगाई सवामणी
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
  नरेंद्र कुमार लखेरा वार्ड नंबर 4 कनीना ने अपने पिता स्व. जगमाल सिंह की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रीकृष्ण गोशाला कनीना में सवामणी का आयोजन किया। उन्होंने अपने हाथों से गायों को मीठा खाना खिलाया।
 इस अवसर पर नरेंद्र कुमार की माता चंद्रकला व परिवार के सभी सदस्य गण व गोशाला प्रशासक पूर्व प्रधानाचार्य कृष्ण सिंह, मास्टर रामप्रताप बलवान सिंह, कृष्ण प्रकाश, हिमांशु ,मुनीम सुपरवाइजर, अमीर सिंह, डा.महेश कुमार ठेकेदार ओमप्रकाश एवं समस्त गोशाला परिवार उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 04: गायों के लिए सवामणी लगाते हुए



खंड स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूर्ण
-एसडी स्कूल में एक दिवसीय कार्यक्रम
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
  कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी, कनीना द्वारा प्राथमिक स्तर के बच्चों की अंडर-11 की कलात्मक, सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रतिभा को तराशने के उद्देश्य से एक दिवसीय ब्लाक स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव का खाका तैयार किया गया है। 27 अगस्त 2026, बृहस्पतिवार को प्रात: 9 बजे से एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ककराला में आयोजित होने जा रहे इस सांस्कृतिक महाकुंभ में कनीना खंड के सभी राजकीय और निजी विद्यालयों के नन्हे सितारे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यह भव्य आयोजन  खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव, नोडल अधिकारी डा. मुन्ना राम प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ककराला ने आयोजन स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
नोडल अधिकारी डा. मुन्ना राम ने बताया कि खंड के राजकीय एवं निजी विद्यालयों के 11 वर्ष तक की आयु के विद्यार्थी विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। प्रतिभागियों के पंजीकरण के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जिसमें सन्नी कुमार, सुशील कुमार, मीना, सुमित्रा देवी, संगीता यादव, रिंकू तथा मोनिका को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस सांस्कृतिक महोत्सव में विद्यार्थी सात प्रमुख प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इनमें एकल अभिनय में प्रत्येक स्कूल से एक प्रतिभागी, समूह गायन में 7 से 9 प्रतिभागियों का समूह, चित्रकला एवं रंगोली में 1 से 2 प्रतिभागी, फैंसी ड्रेस में प्रत्येक स्कूल से 1 से 2 प्रतिभागी तथा एकल नृत्य में एक मुख्य नर्तक नर्तकी के साथ 2 सह-गायक भाग ले सकेंगे। समूह नृत्य में 7 से 10 बच्चों की टीम भाग लेगी।
सभी प्रतिभागी कार्यक्रम में स्वयं गाना प्रस्तुत करेंगे तथा रिकार्डेड आडियो/वीडियो या किसी बाहरी यंत्र का प्रयोग मान्य नहीं होगा। प्रतियोगिताओं के विषयों में राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, आतंकवाद, भ्रूण हत्या निवारण तथा नारी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक एवं समसामयिक विषय शामिल रहेंगे।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्णय के लिए अनुभवी शिक्षकों का निर्णायक मंडल भी नियुक्त किया गया है। निर्णायक मंडल में सतप्रकाश, सुभल लता, अनीता, चेतन, श्री दीपक शर्मा, सुशीला, प्रीति, मधु, श्री सुरेंद्र, रमेश कुमार, नरेश कुमार, पुखराज, किसमती देवी तथा सरजीत शामिल हैं।
फोटो कैप्शन : जगदेव यादव एसडी स्कूल ककराला



अब आलू की कांट्रैक्ट फार्मिंग से समृद्ध होंगे किसान
-पेप्सिको, बालाजी और हाइफन जैसी दिग्गज कंपनियों ने किसानों से मिलाया हाथ
-आईएचडीसी सुंदरह में किसान उद्योग संवाद आयोजित
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
 सूखे और कम पानी की चुनौती से जूझने वाले दक्षिण-पश्चिम हरियाणा का मिजाज अब बदलने लगा है। पारंपरिक फसलों से इतर, अब इस अंचल के किसान आलू की व्यावसायिक खेती के जरिए अपनी तकदीर लिखने की तैयारी में हैं। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की दूरदर्शी सोच और फसल विविधीकरण की पहल को धरातल पर उतारते हुए बागवानी विभाग और अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) ने मिलकर एक बड़ी शुरुआत की है।
सुंदरह (महेंद्रगढ़) स्थित आईएचडीसी में आयोजित एक दिवसीय किसान–उद्योग संवाद कार्यक्रम में इस बदलाव की पहली सीधी झलक देखने को मिली। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद क्षेत्र में आलू की कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देना और किसानों को सीधे देश की बड़ी प्रोसेसिंग कंपनियों से जोडऩा था।
इस संवाद में पेप्सिको, बालाजी और हाइफन/मंत्रा जैसी देश की जानी-मानी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के नुमाइंदों ने सीधा हिस्सा लिया। महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी और रेवाड़ी से पहुंचे लगभग 150 प्रगतिशील किसानों से सीधे रूबरू होते हुए कंपनियों ने कांट्रैक्ट फार्मिंग का मॉडल समझाया।
विशेषज्ञों ने किसानों को आश्वस्त किया कि अगर वे तय गुणवत्ता मानकों का पालन करेंगे, तो कंपनियां उनकी उपज की सीधे खेत से तय दरों पर खरीद करेंगी। इससे न सिर्फ बिचौलियों का खेल खत्म होगा, बल्कि किसानों को मंडी के उतार-चढ़ाव वाले जोखिम से भी राहत मिलेगी। पिछले साल महज 50 एकड़ में किए गए ट्रायल की अपार सफलता के बाद इस साल किसानों में गजब का उत्साह दिखा।
तकनीक और वैज्ञानिक मार्गदर्शन का मिला भरोसा--
कार्यक्रम में विशेषज्ञ डा. सरदार सिंह, डा. अजय और सीआईपी के कंट्री मैनेजर डॉ. नीरज शर्मा ने क्षेत्र में आलू उत्पादन की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम हरियाणा की आबोहवा और मिट्टी आलू की प्रोसेसिंग किस्मों के लिए बहुत मुफीद है।
सीआईपी की वैज्ञानिक टीम (डा. निर्मल और डा. दीपा) तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के डॉ. नरेश यादव, डा. बलबीर सिंह व डॉ. नरेंद्र यादव ने किसानों को आलू की आधुनिक किस्मों, रोग-कीट प्रबंधन और स्वस्थ बीजों के इस्तेमाल की बारीकियां सिखाईं। वहीं जिला उद्यान अधिकारी डा. प्रेम यादव, डा. नेहा यादव और डा. मुकेश ने विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम--
मुख्य अतिथि एवं उपनिदेशक उद्यान डा. मनदीप यादव ने हरियाणा सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी से लेकर तकनीकी सहायता तक हर मोर्चे पर किसानों के साथ खड़ी है। बागवानी विभाग, सीआईपी, केवीके और निजी उद्योग का यह साझा प्रयास निश्चित रूप से दक्षिण-पश्चिम हरियाणा के किसानों के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है। जहां पानी की बचत भी होगी और उपज का दाम भी सही मिलेगा।
फोटो कैप्शन 01:कार्यक्रम में मौजूद किसान।



 कई वर्षों से बंद पड़े डीएवी शिक्षण संस्थान  की भूमि का जनहित में शिक्षा व कौशल विकास के लिए उपयोग करने की मांग
-कनीना के लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम के माध्यम से सौंपा ज्ञापन,
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज।
  कनीना नगर पालिका की करीब 58 एकड़ भूमि पर पूर्व में संचालित डीएवी शिक्षण संस्थान को दोबारा शुरू करने अथवा डीएवी संस्था द्वारा इसे पुन: संचालित नहीं किए जाने की स्थिति में उक्त भूमि का जनहित में शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए उपयोग सुनिश्चित करने की मांग को लेकर कस्बावासियों एवं समाजसेवियों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन एसडीएम के अधीक्षक अनिल कुमार को सौंपा गया।
 ज्ञापन देने वालों में कस्बावासी एवं समाजसेवी हरेंद्र शर्मा ने बताया कि कनीना में नगर पालिका की करीब 58 एकड़ भूमि पूर्व में शिक्षण संस्थान के संचालन के उद्देश्य से डीएवी संस्था को दी गई थी। इस भूमि पर लंबे समय तक शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होती रहीं और क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा का लाभ  भी मिला। लेकिन वर्तमान में संस्थान लंबे समय से बंद एवं निष्क्रिय होने के कारण इतनी बड़ी भूमि तथा उससे संबंधित संसाधनों का अपेक्षित शैक्षणिक उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि कनीना एवं आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों के व्यापक हित को देखते हुए इस मामले में गंभीरता से कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि नगर पालिका के उपलब्ध मूल रिकॉर्ड के आधार पर भूमि की लीज अवधि, शर्तों एवं वर्तमान कानूनी स्थिति की जांच करवाई जाए।
डीएवी संस्था से मांगी जाए स्थिति स्पष्ट करने की जानकारी--
हरेंद्र शर्मा ने मांग रखी कि डीएवी संस्था को लिखित रूप से पत्र भेजकर पूछा जाए कि वह पूर्व संचालित शिक्षण संस्थान को दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है या नहीं। यदि संस्था पुन: शिक्षण कार्य शुरू करने को तैयार है तो उससे विस्तृत कार्ययोजना मांगी जाए, जिसमें भवन एवं स्टाफ की व्यवस्था, विद्यार्थियों के प्रवेश तथा संस्थान शुरू करने की प्रस्तावित तिथि सहित अन्य आवश्यक बिंदु शामिल हों।
उन्होंने कहा कि यदि डीएवी संस्था शिक्षण संस्थान संचालित करने में असमर्थ या इच्छुक नहीं है तो नगर पालिका द्वारा लीज पर दी गई भूमि को नियमानुसार वापस लेकर उसका जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
आधुनिक शिक्षा केंद्र विकसित करने की मांग--
ज्ञापन में मांग की गई कि भूमि का उपयोग क्षेत्र के विद्यार्थियों एवं युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया जाए। यहां वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, आधुनिक एवं डिजिटल लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन केंद्र, कंप्यूटर एवं डिजिटल शिक्षा केंद्र, कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, खेल एवं शारीरिक प्रशिक्षण सुविधाएं तथा विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं विकसित की जा सकती हैं।
हरेंद्र शर्मा ने कहा कि यदि इस भूमि और उपलब्ध संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो कनीना ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक एवं कौशल विकास सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।
समिति गठित करने की मांग--
ज्ञापन में इस पूरे मामले के अध्ययन एवं समाधान के लिए 5 से 7 सदस्यीय समिति गठित करने की भी मांग की गई है। समिति में नगर पालिका के प्रतिनिधियों के साथ शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ एवं स्थानीय नागरिक प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है, ताकि भूमि एवं संस्थान के भविष्य को लेकर पारदर्शी एवं जनहितकारी निर्णय लिया जा सके। इस मौके पर हरेंद्र शर्मा, पार्षद एडवोकेट दीपक चौधरी,पार्षद योगेश कुमार,पार्षद प्रतिनिधि मनीष कुमार, मुकेश कुमार,संजय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: ज्ञापन देते हुए कनीना के लोग




 कनीना के सतीश कुमार को बुरी तरह से काटा बंदरों ने
- अस्पताल भर्ती, छुट्टी
*******************************************************
**********************************************************
*******************************************************
कनीना की आवाज। 
 कनीना निवासी एवं दुकानदार सतीश कुमार को बंदरों ने बुरी तरह से काट खाया। वह मंगलवार की शाम छत पर किसी काम से गए थे, पीछे बंदरों ने आकर उसके घुटने के नीचे बुरी तरह से काट खाया और खूनमखून कर डाला। जब उसने शोर मचाया तब बंदर भाग खड़े हुए। उन्हेंअस्पताल भर्ती कराया गया जहां एंटी रेबीज के टीके लगाकर उन्हें छुट्टी दे दी गई।
 सतीश कुमार ने बताया कि उसने न तो बंदरों से कोई छेड़ की और न ही उन्होंने बंदरों की ओर देखा। पास में एक नीम के पेड़ पर बंदर बैठे थे, उन्होंने देखा नहीं और जब वे छत पर चढ़े पीछे से आकर बंदरों ने काट खाया। जब शोर मचाया तो वो भाग खड़े हुए। परिजन उसे अस्पताल ले गए जहां उन्हें एंटी रेबीज के टीके देकर छुट्टी दे दी।
 इस प्रकार की घटना एक नहीं आए दिन कनीना में घटित हो रही है। बंदरों को दो बार पड़कर दूर छोड़ा गया हैं किंतु बंदरों की संख्या घटती नहीं। अब तो राक्षसी बंदर भी आ गए हैं जो इंसानों को बिना किसी वजह से ही काटने दौड़ते हैं। जब बंदर दिखाई देते तो अधिकांश लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। ये बंदर बुरी तरह से पेड़ पौधों को तबाह कर रहे हैं, मल मूत्र त्याग कर घरों का हुलिया ही बिगाड़ रहे हैं। इन पर कोई काबू नहीं है। ऐसे में बंदर एक आफत बनते जा रहे हैं।                         












फोटो कैप्शन 03: सतीश कुमार बंदरों द्वारा काटे गए पैर को दिखाते हुए

No comments: