सुमन यादव पत्रकार की याद में होंगे कई कार्यक्रम
--17 नवंबर को है उनकी 14वीं बरसी
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कनीना। श्रीमती सुमन यादव पत्रकार चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा कनीना की प्रथम महिला पत्रकार सुमन यादव की याद में विशाल लाइब्रेरी बनाने का कार्रवाई जारी है। वर्षों से हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर ट्रस्ट के नाम कनीना में जमीन उपलब्ध करवाने की मांग की गई थी और वह काफी हद तक सिरे बढ़ गई थी परंतु अभी तक जमीन अलाट नहीं हुई है और नहीं लगता कि अब जमीन अलाट हो पाएगी। चूंकि पूर्व प्रधान सतीश जेलदार ने इस संबंध में उत्साह भी दिखाया परंतु असफल रहे। अब विचार है कि वाटर सप्लाई के पास अपनी जमीन पर विशाल लाइब्रेरी बनाई जाए जहां पर उनकी याद दिलाने वाले उनके सभी फोटो, जीवन संबंधित जानकारी, उनके द्वारा लिखित पुस्तकें, उनके द्वारा रचा हुआ काव्या एवं अखबारों की कतरन जिसमें उन्होंने लंबे समय तक कार्य किया उपलब्ध कराया जाएगा। 17 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि पर इस संबंध में आने वाले लोगों से विचार विमर्श किया जाएगा। इसके लिए अभी तक इस ट्रस्ट ने बहुत अधिक सामाजिक कार्य किये है, जनहित के कार्य किये हैं और आंखें दान करने के लिए लंबे समय तक अभियान भी चलाया, सहयोग भी मिला किंतु आर्थिक सहयोग एक नए पैसे का भी नहीं मिला। इस समय ट्रस्ट के पास महज सभी सदस्यों का अंशदान 10000 रुपये ही उपलब्ध है साथ में पूर्व पार्षद विनय शर्मा द्वारा दान किए हुए 500 रुपये भी उपलब्ध हैं। ऐसे में 10500 रुपये उपलब्ध है किंतु ट्रस्ट के प्रधान शिक्षा के क्षेत्र में विश्व रिकार्ड धारक/वल्र्ड रिकार्ड अचीवर डा. होशियार सिंह यादव का कहना है कि वह पैसे अपनी जेब से लगाकर लाइब्रेरी स्थापित करेंगे। साथ में दिवंगत आत्मा के लिए जो कुछ बन पाएगा वो हर संभव पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सुमन यादव का एक पुत्र अमीश कुमार भी इस समय 10 जमा दो पास कर चुका है और आगे की उनकी पढ़ाई जारी है। विश्वास है कि आने वाली पीढिय़ां उनसे प्रेरणा लेती रहेगी।
उनके ट्रस्ट के विषय में जानकारी है--
श्रीमती सुमन यादव पत्रकार चेरिटेबल ट्रस्ट कनीना के नाम अगर कोई चंदा देने का इच्छुक है उसको निम्र जानकारी उपलब्ध कराई जा रही हैं। वो दान करके टद्यस्ट की रसीद जरूर प्राप्त कर ले। जानकारी निम्र है-- ---
खाता संख्या 0735000103293876
कनीना आईएफएससी कोड- पीयूएनबी0073500
मिक्र कोड--123024060
ट्रस्ट संख्या--1528/2011
फोन पे-- 9416348400 होशियार सिंह
प्रधान-डा. होशियार सिंह यादव
शिक्षण में वल्र्ड रिकार्ड होल्डर
फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह प्रधान
दो दानदाताओं की निम्र राशि प्राप्त हुई है-़11 व 12 नवंबर को प्राप्त हुई-
1. सुरेंद्र सिंह पुत्र श्री रामजीलाल यादव फलसावाला से 5100/-
2 दीपक कुमार 501/-
आप दोनों का तहदिल से आभार। आपकी रसीद आपको जल्द ही भेज दी जाएगी। आशीर्वाद और सहयोग बनाये रखने की जरूरत दान की भांति कार्य करती है वो बनाये रखना।
वाह! क्या जमाना आ गया
- खबर भी छापो और उनको सूचना भी दो, साथ में व्हाट्सएप पर भी भेजो
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कनीना की आवाज। समाचार छपवाने वाले लोग न जाने कब सुधरेंगे। एक तो समाचार छपवाते हैं, उस पर फोन कर करके पूछते कब छपेगी, कब छपेगी? अगर छप जाए तो पढ़ेंगे नहीं बल्कि यह पूछेंगे की समाचार छप गया क्या? फिर उन्हें बताना पड़ेगा की समाचार की अखबार में छप गया। तब तक वो यह नहीं पूछते कि किस समाचार पत्र में छापते हो। फिर छपवाने वालों का बहाना सुनिए कि हमने दिए अखबार ही नहीं पढ़ा हम तो कोई दूसरा अखबार पढ़ते हैं इसमें पत्रकार क्या करें? उस पर यह कहेंगे कि सर ,वह समाचार पत्र की खबर हमें व्हाट्सएप भी कर दो। यहां तक की समाचार छपने के कई दिनों बाद कुछ का फोन आएगा, देख लो समाचार ही नहीं छपा आपने? इसलिए अब ऐसे लोगों से तौबा। केवल उन्हीं लोगों के समाचार छापना चाहिए जो अखबार पढ़ते हैं,सजग हैं, हर समाचार पर नजर रखते हैं वरना ऐसे समाचार छापने से कोई लाभ नहीं है।
उधोदास का मनाया महापरिनिर्वाण दिवस
-भंडारा, प्रवचन, जागरण एवं हवन आयोजित
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कनीना की आवाज। संत शिरोमणि उधोदास बाबा का महापरिनिर्वाण दिवस उधो आश्रम में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर मंगलवार की रात्रि को जागरण आयोजित हुए वही सुबह हवन और भंडारा आयोजित किया गया। दूर दराज से आकर भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। संत उधो उदास महाराज का बड़ा आश्रम एवं मंदिर स्थित है जहां वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम चलाते रहते हैं। लेकिन देवउठनी एकादशी की रात्रि को जहां यहां प्रवचन हुए। प्रवचन हर वर्ष लाल दास महाराज करते आ रहे हैं। बुधवार को हवन तथा भंडारा चला। दूर दराज से भक्त भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे। दूर दराज तक उधो आश्रम की मान्यता है जहां होली, दीपावली, पूर्णिमा आदि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। उधोदास के नाम पर गौशाला है जहां गोपाष्टमी एवं जन्माष्टमी के दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं। जडूला उतरवाने का कार्यक्रम भी यहां चलता है। भक्त यहां आकर मन्नत मांगते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
फोटो कैप्शन 03: भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते भक्त
छात्राओं को दिया गया पाकशास्त्र का ज्ञान
-सेहत को कायम रख्ने के बताए गये नुसखे
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कनीना की आवाज। गृह विज्ञान विषय की प्रायोगिक परीक्षा के अंतर्गत राजकीय कन्या उच्च विद्यालय कनीना में दूसरे दिन आज गृह विज्ञान संकाय की सातवीं कक्षा की छात्राओं द्वारा ब्रेड ,बेसन व मैदा से बने पकवान बनाए गए जिसमे कचोरी ,आलू पराठे, बूंदी रायता, लौकी रायता, पास्ता, हरी सब्जी कटलेट, मैक्रोनी के अलावा धनिया, पुदीना ,मरवा, टमाटर ,मैथी व तुलसी की चटनी बनाई गई तथा बेहतरीन पकवानों के रूप में उन्हें परोसा गया। मुख्य अध्यापक नरेश कुमार कौशिक ने बताया कि यह पाक कला प्रशिक्षण छात्राओं के जीवन में नए आयाम स्थापित करेगा तथा उन्हें रसोई में बेहतर स्वास्थवर्धक में पौष्टिक व्यंजन बनाने की विधि में ज्ञानवर्धन करेगा। इसे छात्राएं भविष्य में शिक्षा के साथ-साथ अपने भविष्य की स्वरोजगार के रूप में भी अपना सकते हैं । गृह विज्ञान के अध्यापिका शालिनी प्रधान ने बताया कि छात्राओं द्वारा तैयार किए गए व्यंजन न केवल गुणवत्ता युक्त है बल्कि पौष्टिकता के साथ-साथ इसमें प्रोटीन विटामिन व कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में है ।
इस अवसर पर विद्यालय शिक्षा समिति की प्रधान सावित्री यादव वरिष्ठ शिक्षाविद डॉक्टर होशियार सिंह यादव ने पकवानों का परीक्षण किया तथा छात्राओं की पाक कला की प्रशंसा की। प्रयोग वर्ग में कल बिना अग्नि के तैयार किए गए व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा।
आज के कार्यक्रम में शिक्षक संदीप कुमार, दोपहर भोजन योजना प्रभारी राकेश कुमार, बाबूलाल, दीपिका यादव व कश्मीरी निंबल उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 06: बनाये गये भोजन का स्वाद चखता हुआ मुख्याध्यापक।
बाल दिवस- 14 नवंबर
बच्चे नेहरू को कम और अपने कार्यक्रमों को अधिक जानते हैं
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कनीना की आवाज। यूं तो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन 14 नवंबर को मनाया जाता है जो बच्चों को समर्पित है। विशेष रूप से बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि नेहरू जी बच्चों से बहुत प्यार करते थे और उन्हें बच्चे उन्हें चाचा नेहरू पुकारते थे। बाल दिवस को समर्पित भारत का यह राष्ट्रीय त्योहार है। देश की आजादी में भी नेहरू का योगदान रहा है। बाल दिवस की नीव 1925 में रखी गई थी जब बच्चों के कल्याण पर विश्व कांफ्रेंस में बाल दिवस मनाने की सबसे पहले घोषणा की गई। 1954 में दुनिया भर में से मान्यता मिली। बाल दिवस बच्चों के लिए महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन स्कूली बच्चे बहुत खुश दिखाई देते हुए सज धज कर विद्यालय जाते हैं और विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। बाल मेले जगह जगह लगाए जाते हैं जहां उनकी बनाई हुई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगती है जिसमें बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। नृत्य, गाना, नाटक, कविता, भाषण आदि भी प्रस्तुत करते हैं।
बच्चे देश का भविष्य है। उनकी उच्च की शिक्षा की तरफ ध्यान देना चाहिए। विशेष कर बाल श्रम रोधी कानून सही मायने में लागू किया जाना चाहिए। दिनों दिन बाल श्रमिकों की संख्या बढ़ रही है। बच्चों के भविष्य के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित होते हैं लेकिन बच्चे नेहरू पंडित नेहरू को कम जानते हैं अपितु अपने कार्यक्रमों को अधिक जानते हैं, जो उनके स्कूलों में आयोजित होते हैं।
इस संबंध में छोटे बच्चों से जानना चाहा। छोटे बच्चे पंडित जवाहरलाल नेहरू के विषय में जानते हैं लेकिन अधिक जानकारी नहीं रखते। महज उनके जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रमों को खूब जानते हैं। जिस देश के बच्चे कमजोर, गरीब, अविकसित हैं तो वह देश अच्छी तरह विकसित नहीं हो पाएगा। बच्चे देश का भविष्य है। ऐसे में देश के बच्चों की स्थितिको पूरा ध्यान केंद्रित कर,कमियों सुधार करने के लिए जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में 1964 से हर वर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जा रहा है। वर्ष 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद तय किया गया कि उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाए तब से भारत में 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है।
अमीशा बच्ची से इंस संबंध में जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि मुझे तो कविता अधिक पसंद है और कविता में पढ़कर स्कूल में सुनती हूं। नेहरू के विषय में मुझे पूछा गया तो उन्होंने बताया भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हुए हैं किंतु विस्तार से उनसे जानकारी चाहिए तो अधिक नहीं बोल सकी। ऐसे में बच्चे इस दिवस को लेकर प्रसन्नचित जरूर नजर आए।
योगेंद्र ने बताया कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री को याद करने के लिए बाल दिवस मनाते हैं किंतु जवाहरलाल नेहरू को कविता, भाषण एवं गीत आदि के जरिये स्कूलों में याद किया जाता है। उनकी जीवनी कम बताई जाती है।
प्राची ने बताया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री हुये हैं जिनको याद करते हैं। प्रार्थना सभा में उनकी जीवनी बताई जाती है। कविताएं अधिक सुनाई जाती हैं।
फोटो कैप्शन: अमीशा, प्राची, योगेंद्र
विश्व मधुमेह दिवस- 14 नवंबर
काबू न करने पर खतरनाक बीमारी होती है मधुमेह
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कनीना की आवाज। 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है क्योंकि इस दिन बैंटिंग नामक वैज्ञानिक ने 1921 में इंसुलीन की खोज 14 नवंबर की की थी। इसलिए 14 नवंबर विश्व डायबिटीज/मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह रोग एक बार हो जाने के बाद मातान्यत: ठीक नहीं होता। ऐसे में लोगों को मधुमेह के प्रति जागरूक करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। मधुमेह एक विकार है इसमें शरीर द्वारा खाए जाने वाले भोजन से उत्पन्न ग्लूकोज को संशोधित करके उसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
मधुमेह की तीन प्रकार है जिन्हें टाइप वन, एक टाइप दो तथा गर्भकालीन मधुमेह के नाम से जाना जाता है। अनियंत्रित मधुमेह गुर्दे को क्षति, अवसाद, दंत समस्याएं तथा कई जटिल समस्याएं पैदा कर सकता है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन अनुसार 2021 में 67 लाख लोगों की मौत हुई जो बढ़कर 2030 में 64 करोड़ होने की संभावना है। अधिकांश टाइप दो मधुमेह से पीडि़त होते हैं। जीवन शैली में बदलाव, संतुलित आहार लेने तथा धूम्रपान जैसी आदत को छोड़कर इसे रोका जा सकता है।
क्या कहते हैं डा सुंदरलाल-
इस संबंध में कनीना उप नागरिक अस्पताल के डा सुंदरलाल से बात की तो उन्होंने बताया की मधुमेह टाइप-दो उचित जीवन शैली में बदलाव, संतुलित आहार लेने से नियंत्रित किया जा सकता है इसके अतिरिक्त चीनी के सेवन से बचना, खाने में एक साथ न लेकर थोड़ा-थोड़ा खाना बार बार खाये, दिन में काम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, रक्त कोलेस्ट्राल 200 से नीचे होना चाहिए। मधुमेह अनुत्क्रमणीय विकार है जिसमें अग्राशय इंसुलिन हार्मोन बहुत कम छोड़ता है जिससे चीनी का पाचन नहीं हो पाता है। मधुमेह की नियमित जांच करवाते रहना चाहिए यदि शुगर स्तर बढ़ जाता है तो डॉक्टर से सलाह लेकर इंसुलिन प्रयोग की जा सकती है। मधुमेह दिनों दिन बढ़ता जा रहा है जिसके पीछे संतुलित भोजन न लेना, तनाव भरी जिंदगी जीना प्रमुख कारण है।
डाक्टर सुंदरलाल बताते हैं कि मधुमेह के कुछ लक्षणों में लगातार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, भूख लगना, वजन कम होना, थक जाना, चक्कर आना, त्वचा की समस्या, उल्टी की समस्या, धुंधली दृष्टि प्रमुख हो सकते हैं। उन्होंने बताया इसमें टाइप दो अधिक मिलता है जिसमें बढ़ती उम्र, मधुमेह का पारिवारिक चिकित्सा इतिहास, मोटापा ,उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, तनाव, जीवन शैली आदतों जिनमें धूम्रपान आदि प्रमुख है।
इसके उपचार से पहले शरीर में ब्लड शुगर जानने के लिए सबसे पहले ब्लड टेस्ट की आवश्यकता होती है। तत्पश्चात व्यायाम, स्वस्थ भोजन लेना, तले भुने सेवन से परहेज, रेशे वाली सब्जी अधिक प्रयोग करना ,योग करना, धूम्रपान छोडऩे आदि प्रमुख हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार के आदेशानुसार 30 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए मुफ्त शुगर,बीपी आदि की जांच के आदेश जारी कर रखे हैं। कोई भी व्यक्ति आकर अपनी जांच करवा सकता है। साथ में उन्होंने खान पान की आदतों में बदलाव करने की बात भी कही है।
फोटो कैप्शन: डाक्टर सुंदरलाल
नहर के साथ से सड़क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू
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कनीना की आवाज। कनीना की चर्चित मिनी बाईपास माने जाने वाली सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। परंतु यह केवल एक तरफ ही नहर के साथ-साथ बनाई जाएगी। विस्तृत जानकारी देते हुए ठेकेदार दुर्गा दत्त गोयल ने बताया कि नहर के एक तरफ सड़क का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। इसके रास्ते के झाड़ झंखाड़ हटा दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि कुछ जगह सीमेंट की तो बाकी जगह टाइल की बनाई जा रही है। पहले इसकी पैमाइश भी करवाई जाएगी, तत्पश्चात इसका निर्माण होगा। पैमाइश एक या दो रोज में हो जाएगी। तब तक सड़क निर्माण की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है।
क्षेत्र में पहली बार पड़ा कोहरा
-हुआ ठंड का एहसास
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में पहली बार कोहरा पड़ा और ठंड का एहसास हुआ। सुबह सवेरे से ही क्षेत्र में कोहरा पडऩे लगा जिसके चलते वाहन धीमी गति चलाए गए परन्तु कोहरा महज 2 घंटे तक की चला, बाद में छट गया। कोहरा पडऩे से ठंड का अनुभव हुआ, लोग ऊनी कपड़ों में लिपटे नजर आये वहीं फसलों के लिए ठंड बहुत जरूरी है। विशेषकर सरसों फसल तभी अच्छी पैदावार देती है जब इसको पर्याप्त ठंड मिलती है।
फोटो कैप्शन 01: क्षेत्र में पड़ता हुआ कोहरा
देव दीवाली पर्व- 15 नवंबर
दिवाली के 15 दिन बाद मनाया जाता है देवदीवाली का पर्व
-ग्रामीण क्षेत्रों में कार्तिक स्नान को किया जाता है पूर्ण
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कनीना की आवाज। देवदीवाली कार्तिक पूर्णिमा का प्रमुख पर्व है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रमुख रूप से मनाया जाता रहा है किंतु इसका शुभ संकेत धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब देवदीवाली के पर्व पर दीप जलाए जाते हैं। वाराणसी में गंगा नदी के किनारे रविदास घाट से लेकर राजघाट लाखो दीये जलाए जाते हैं। देव दिवाली के परंपरा पहले पंचगंगा घाट 1915 में हजारों दीये जलाकर शुरुआत की गई थी। प्राचीन परंपरा आज भी कायम है। यह विश्व विख्यात आयोजन है जो धीरे.धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश कर गया है। यह माना जाता है किसी दिन तीनों लोकों के देवता दिवाली मनाते हैं और इसी दिन देवताओं का काशी में प्रवेश हुआ था। कनीना क्षेत्र में देवदीवाली का पर्व विभिन्न गांवों में श्रद्धा एवं भक्ति से मनाया जाता है। इस मौके पर मंदिरों में पूजा अर्चना चलती है तथा एक माह से चला आ रहा कार्तिक स्नान पूर्ण किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।
देवदीवाली कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार है जो यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मनाया जाता है। यह काशी शहर में दीपावली के पंद्रह दिन बाद मनाया जाता है। देवदीवाली की परम्परा पंचगंगा घाट 1915 मे हजारों दीये जलाकर की गयी थी। माना जाता है कि देवता भी इस उत्सव में भाग लेते हैं। दीये जलाकर शहर जगमग हो उठता है जैसे काशी में पूरी आकाश गंगा ही उतर आयी हो।
एक कथा अनुसार तीनों लोकों में त्रिपुरासुर राक्षस का राज चलता था। देवतागणों ने भगवान शिव के समक्ष त्रिपुरासुर राक्षस से उद्धार की विनती की। भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन राक्षस का वध कर उसके अत्याचारों से सभी को मुक्त कराया और त्रिपुरारि कहलाये। इससे प्रसन्न देवताओं ने स्वर्ग लोक में दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया था तभी से कार्तिक पूर्णिमा को देवदीवाली मनायी जाने लगी। इस दिन सभी देवताओं ने काशी में प्रवेश कर दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। देवदीवाली एक दिव्य त्योहार है।
क्या कहते संत लालदास महाराज.
संतलाल दास बताते हैं कि दिये जलाना एक शुभ कार्य होता है जो अंधेरे को मिटाने में अहम योगदान देता है। देव दिवाली के दिन दीये जलाकर कम से कम मन को शुद्ध किया जाता है और जिस प्रकार दीये धरती पर अंधकार को दूर करते हैं वैसे ही पहले अपने मन के अंधकार को दूर करना चाहिए। तत्पश्चात आसपास के अंधेरे को बुराइयों को नष्ट करना चाहिए। देवदीवाली का पर्व बहुत बड़ा पर्व है। पर्व की लंबे समय से यह परंपरा चली आ रही है। जहां पहले एक निश्चित क्षेत्र में ही देवदीवाली का पर मनाया जाता था परंतु अब तो पूरे ही देश में देवदीवाली मनाई जाती है। लाल दास महाराज बताते के राजा कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की विजय दिवस के रूप में यह पर मनाया जाता है। इस पर्व को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव ने काशी के पंचगंगा घाट पर जाकर गंगा स्नान का ध्यान किया था। देवताओं की दिवाली को में भाग लेकर लोग अपने को खुशनसीब समझते हैं। देवदीवाली के पर्व पर ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न परंपराएं शुरू हो गई है हवन भंडारे आयोजित होते हैं। वहीं देवदीवाली के दिन कार्तिक स्नान प्रमुख रूप से किया जाता है। एक महीने से चला आ रहा कार्तिक स्नान पूर्ण हो जाता है।
क्या है कार्तिक स्नान .
महिलाएं दिवाली से 15 दिन पहले से किसी घाट पर स्नान करना शुरू करती है और दिवाली के 15 दिनों बाद तक सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा को जारी रखती है। देवदीवाली के दिन कार्तिक माह का अंतिम स्नान करती है। तत्पश्चात सज धज कर महिलाएं पूरे गांव एवं कस्बे में देवदीवाली के पर्व पर हंसी खुशी से जुलूस निकलती हैं। विभिन्न धार्मिक स्थानों, गंगा आदि नदियों पर घाटों पर भारी संख्या में लोग स्नान करने जाते हैं।
नये नियमानुसार नहीं बन पा रही ओबीसी और बीसी की सर्टिफिकेट
-विभिन्न अधिकारियों के किये हाथ खड़े
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कनीना की आवाज। एक और हरियाणा सरकार ने जहां सभी उन लोगों की बीसी और ओबीसी की सर्टिफिकेट बनाने की घोषणा की हुई है जिनकी आय 8 लाख से अधिक नहीं है किंतु इसमें पेंशन तथा वेतन आदि नहीं जोड़ा जाता। किंतु कनीना क्षेत्र के कम से कम एक दर्जन लोग बार-बार आवेदन कर रहे और उनके आवेदन रद्द हो रहा है। एक और परिवार पहचान पत्र में आय ठीक करने के लिए लोग मारे मारे फिर रहे हैं वही जिनकी पेंशन या वेतन 8 लाख या इससे अधिक है उनकी बीसी और ओबीसी की सर्टिफिकेट नहीं बनाई जा रही है। कनीना के सुनील कुमार, होशियार सिंह, मनोज कुमार ,दिनेश कुमार आदि ने बताया कि उन्होंने कई बार आवेदन किया किंतु इस आधार पर उनके बच्चों की बीसी और ओबीसी की सर्टिफिकेट का आवेदन रद्द कर दिया गया कि उनके पिता की पेंशन या वेतन 8 लाख से अधिक दर्शाया गया है। जबकि पेंशन और वेतन को भी सरकार दुरुस्त नहीं कर रही है। इन लोगों ने बताया कि परिवार पहचान पत्र में आय दुरुस्त करवाने के लिए वे छह छह माह से इधर-उधर मारे मारे फिर रहे हैं किंतु सरकार बेहद परेशान कर रही है। उन्होंने खेद जताया और सरकार से मांग की है कि कम से कम पोर्टल को दुरुस्त करें या इस प्रकार सर्टिफिकेट को रद्द नहीं करें इससे धन और समय बर्बाद हो रहा है। आय को वेरिफाई करके परिवार पहचान पत्र को ठीक करें।
उधर रमेश कुमार एडवोकेट ककराला ने बताया कि जुलाई 2024 से नया नियम लागू हो गया है जिसके तहत किसी भी व्यक्ति का वेतन/पेशन एवं कृषि से प्राप्त होने वाली इनकम को बीसी/ओबीसी की सर्टिफिकेट बनवाते वक्त नहीं जोड़ा जा सकता। अन्य स्रोतों से आय 8 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे में अगर सर्टिफिकेटस नहीं बनते तो सरकार को पोर्टल में खामियों को दूर करना चाहिए।
इस संबंध में जब इस संवाददाता ने सरल पोर्टल हेल्पलाइन से बात की तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिये और कहा कि यह मसला आपके क्षेत्र के अतिरिक्त जिला उपायुक्त या तहसीलदार का है। वे कुछ नहीं कर सकते।
जब इस संबंध में परिवार पहचानपत्र पोर्टल हेल्पलाइन से बात की तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह मसला उनके विभाग का नहीं है। इस संबंध में सरल पोर्टल पर बाते करे तथा अधिकारियों से बात करो।
इस समस्या को लेकर जब तहसीलदार से मिले तो उन्होंने कहा कि वे भी इसी समस्या से स्वयं पीडि़त हैं। वे महज आफलाइन ऐसी सर्टिफिकेट बनवाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी अपनी ऐसी सर्टिफिकेट आफलाइन बनवाने की कार्रवाई कर रहा हूं।
दो हजार देकर बनवा सकते हैं सर्टिफिकेट-
यह संवाददाता आखिरकार कनीना तहसील में पूछते हुए ऐसे दलाल से मिला जो गारंटी से दो हजार रुपये में ओबीसी/बीसी आदि की सर्टिफिकेट बनवा सकता है। उन्होंने बताया कि वो स्वयं ही नहीं उच्चाधिकारियों को भी कुछ राशि देनी पड़ती है। जब इस संवाददाता ने बार बार राशि कम करने की बात कही तो आखिरकार 800 रुपये देने की बात कही। यह भी तब जब उसे पता चला कि यह पत्रकार है। उन्होंने यह भी कहा कि आफलाइन सर्टिफिकेट महज एक सौ रुपये में बनवा सकते हैं परंतु आफलाइन चले या न चले उनकी कोई गारंटी नहीं है। जबकि ऐसी सर्टिफिकेट की सरकारी फीस करीब 30 रुपये बताई जाती है।
नये नियमानुसार नहीं बन पा रही ओबीसी और बीसी की सर्टिफिकेट
-विभिन्न अधिकारियों के किये हाथ खड़े
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कनीना की आवाज। एक और हरियाणा सरकार ने जहां सभी उन लोगों की बीसी और ओबीसी की सर्टिफिकेट बनाने की घोषणा की हुई है जिनकी आय 8 लाख से अधिक नहीं है किंतु इसमें पेंशन तथा वेतन आदि नहीं जोड़ा जाता। किंतु कनीना क्षेत्र के कम से कम एक दर्जन लोग बार-बार आवेदन कर रहे और उनके आवेदन रद्द हो रहा है। एक और परिवार पहचान पत्र में आय ठीक करने के लिए लोग मारे मारे फिर रहे हैं वही जिनकी पेंशन या वेतन 8 लाख या इससे अधिक है उनकी बीसी और ओबीसी की सर्टिफिकेट नहीं बनाई जा रही है। कनीना के सुनील कुमार, होशियार सिंह, मनोज कुमार ,दिनेश कुमार आदि ने बताया कि उन्होंने कई बार आवेदन किया किंतु इस आधार पर उनके बच्चों की बीसी और ओबीसी की सर्टिफिकेट का आवेदन रद्द कर दिया गया कि उनके पिता की पेंशन या वेतन 8 लाख से अधिक दर्शाया गया है। जबकि पेंशन और वेतन को भी सरकार दुरुस्त नहीं कर रही है। इन लोगों ने बताया कि परिवार पहचान पत्र में आय दुरुस्त करवाने के लिए वे छह छह माह से इधर-उधर मारे मारे फिर रहे हैं किंतु सरकार बेहद परेशान कर रही है। उन्होंने खेद जताया और सरकार से मांग की है कि कम से कम पोर्टल को दुरुस्त करें या इस प्रकार सर्टिफिकेट को रद्द नहीं करें इससे धन और समय बर्बाद हो रहा है। आय को वेरिफाई करके परिवार पहचान पत्र को ठीक करें।
उधर रमेश कुमार एडवोकेट ककराला ने बताया कि जुलाई 2024 से नया नियम लागू हो गया है जिसके तहत किसी भी व्यक्ति का वेतन/पेशन एवं कृषि से प्राप्त होने वाली इनकम को बीसी/ओबीसी की सर्टिफिकेट बनवाते वक्त नहीं जोड़ा जा सकता। अन्य स्रोतों से आय 8 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे में अगर सर्टिफिकेटस नहीं बनते तो सरकार को पोर्टल में खामियों को दूर करना चाहिए।
इस संबंध में जब इस संवाददाता ने सरल पोर्टल हेल्पलाइन से बात की तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिये और कहा कि यह मसला आपके क्षेत्र के अतिरिक्त जिला उपायुक्त या तहसीलदार का है। वे कुछ नहीं कर सकते।
जब इस संबंध में परिवार पहचानपत्र पोर्टल हेल्पलाइन से बात की तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह मसला उनके विभाग का नहीं है। इस संबंध में सरल पोर्टल पर बाते करे तथा अधिकारियों से बात करो।
इस समस्या को लेकर जब तहसीलदार से मिले तो उन्होंने कहा कि वे भी इसी समस्या से स्वयं पीडि़त हैं। वे महज आफलाइन ऐसी सर्टिफिकेट बनवाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी अपनी ऐसी सर्टिफिकेट आफलाइन बनवाने की कार्रवाई कर रहा हूं।
दो हजार देकर बनवा सकते हैं सर्टिफिकेट-
यह संवाददाता आखिरकार कनीना तहसील में पूछते हुए ऐसे दलाल से मिला जो गारंटी से दो हजार रुपये में ओबीसी/बीसी आदि की सर्टिफिकेट बनवा सकता है। उन्होंने बताया कि वो स्वयं ही नहीं उच्चाधिकारियों को भी कुछ राशि देनी पड़ती है। जब इस संवाददाता ने बार बार राशि कम करने की बात कही तो आखिरकार 800 रुपये देने की बात कही। यह भी तब जब उसे पता चला कि यह पत्रकार है। उन्होंने यह भी कहा कि आफलाइन सर्टिफिकेट महज एक सौ रुपये में बनवा सकते हैं परंतु आफलाइन चले या न चले उनकी कोई गारंटी नहीं है। जबकि ऐसी सर्टिफिकेट की सरकारी फीस करीब 30 रुपये बताई जाती है।
17 नवंबर से पहले पहले करें भगवतगीता के लिए रजिस्ट्रेशन
--सर्टिफिकेट्स एवं प्रतिदिन इनाम का प्रावधान
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कनीना की आवाज। भगवत गीता प्रश्नोत्तरी के लिए रजिस्ट्रेशन जारी है जिसकी रजिस्ट्रेशन के लिए विस्तार से निम्न जानकारी दी हुई है। प्रतिदिन एक एक हजार के दस दस पुरस्कार सही उत्तर देने वह चयन होने पर विद्यार्थी वर्ग, आम पब्लिक, दूसरे स्टेट के विद्यार्थी, दूसरे स्टेट का आम आदमी, ओडिशा के विद्यार्थी, ओडिशा के आम आदमी को दिये जाते हैं। 11 दिन प्रश्रोत्तरी चलेगी। अंत में फिर से ओवरआल इनाम मिलेगा। सभी को गीता की सर्टिफिकेट तो मिलेगी ही। 17 नवंबर से पहले रजिस्ट्रेशन करवा ले जो सरल है। रजिस्ट्रेशन का तरीका नीचे दिया गया है।
अपना रजिस्ट्रेशन निम्र तरीकें से करें--
कृपया आज और अभी इस कार्यक्रम में जुडऩे की पहल करें-Registration for gita Prashanmala 1. सबसे पहले निम्र को क्लिक करें--
https://igmquiz.in/
. 1 पब्लिक हरियाणा/स्टूडेंट हरियाणा/स्टूडेंट ओडिशा/स्टूडेंट बाकी स्टेट
2. गांव का नाम
3 अपना नाम
4 अपने फोन नंबर
5 मोटिवेटर 9416348400
मोटिवेटर का ध्यान रखे इसमें केवल 9416348400 ही भरे
FAQs about Quiz
Quiz : 17 Nov to 27 Nov. (Total 11 days)
Mode of Quiz : Online
Question Topics : Principles of the Gita and Their Application in Daily Life
No. of Questions: Daily 5 (Total 55)
Time: Whole Day (24 hours)
Attempt Time Limit: No Time Limit
Submission of Answer: Multiple time allowed
Loginid/ Userid: Mobile Number
Password: OTP Generated at the time of Registration
Please don't share your OTP to anyone.
We never ask any bank details over phone
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2024 के अवसर पर ऑनलाइन गीता प्रश्नमाला - नगद पुरस्कार जीतने और प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का सुनहरा अवसर*
17th नवंबर से 27th नवंबर
* रजिस्ट्रेशन के लिए लिंक👇🏻
http://igmquiz.in/
Participants Category
A) Student
B) Public
Cash Prizes / Certificate:
A) हर रोज 500-500 रुपए के 40 ईनाम
B) क्विज के समापन पर लाखों रूपए के ईनाम
C) मोटिवेटर्स को भी आकर्षक ईनाम राशि
D) किसी भी जिले, राज्य या देश के नागरिक, विद्यार्थी व उनके मातापिता कोई भी इसमें भाग ले सकते हैं।
विशेष
1. आपके Registration के समय जो OTP आएगा वो आपका पासवर्ड रहेगा तथा आपका फोन न. आपका लॉगिन आईडी रहेगा।
2. Registration करते समय Referral/Motivator Contact Number में Motivator 9416348400. मोबाइल नंबर भरें।
3. प्रतिदिन 5 वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएँगे जिनका उत्तर आपको देना होगा ।
4. यह प्रतियोगिता भगवदद्गीता के प्रति रुचि उत्पन्न करने व जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। स्वयं भी भाग लें और अन्य को भी प्रेरित करें।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2024 के अवसर पर ऑनलाइन गीता प्रश्नमाला - नगद पुरस्कार जीतने और प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का सुनहरा अवसर*
17th नवंबर से 27th नवंबर
Motivator 9416348400
* रजिस्ट्रेशन के लिए लिंक👇🏻
http://igmquiz.in/
Participants Category
A) Student
B) Public
Cash Prizes / Certificate:
A) हर रोज 500-500 रुपए के 40 ईनाम
B) क्विज के समापन पर लाखों रूपए के ईनाम
C) मोटिवेटर्स को भी आकर्षक ईनाम राशि
D) किसी भी जिले, राज्य या देश के नागरिक, विद्यार्थी व उनके मातापिता कोई भी इसमें भाग ले सकते हैं।
विशेष
1. आपके Registration के समय जो OTP आएगा वो आपका पासवर्ड रहेगा तथा आपका फोन न. आपका लॉगिन आईडी रहेगा।
2. Registration करते समय Referral/Motivator Contact Number में Motivator 9416348400 मोबाइल नंबर भरें।
3. प्रतिदिन 5 वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएँगे जिनका उत्तर आपको देना होगा ।
4. यह प्रतियोगिता भगवदद्गीता के प्रति रुचि उत्पन्न करने व जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। स्वयं भी भाग लें और अन्य को भी प्रेरित करें।
अधिक जानकारी के लिए निम्र फोन नंबर पर काल कर सकते हैं-
9416348400





















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