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Sunday, March 3, 2024


 
बाल यौन शोषण रोकथाम दिवस -4 मार्च
यौन शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना आज के दिन बहुत जरूरी
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कनीना की आवाज। दुनिया भर में महिला और बच्चों के साथ यौन शोषण के मामले सामने आते हैं। एक अनुमान के अनुसार हर दिन चार दर्जन से अधिक का यौन शोषण किया जाता है। दुनिया भर में यौन शोषण के विरुद्ध संघर्ष का दिवस मनाया जाता है। इस दिन का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं को यौन शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना है ताकि यौन शोषण पर लगाम लगाई जा सके।
इस संबंध में कनीना के एडवोकेट राजेश कुमार से चर्चा की गई। उनका कहना है कि बच्चों के साथ आन दुव्र्यवहार की घटनाएं देखने को मिलती है। व्यापक स्तर पर ऐसी प्रणाली गठित करनी चाहिए जिसमें माता-पिता, स्कूल और समुदाय, स्थानीय सरकार और पुलिस के अलावा वकीलों को शामिल किया जाए। बच्चों के साथ शारीरिक, मानसिक, योनिक शोषण किया जाता है जिसे बाल दुव्र्यवहार के रूप में जाना जाता है। इसका बच्चों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। बच्चों को गलत तरीके से छेडऩा जबरन, यौन कृत्य के लिए मजबूर करना, भोलेपन का फायदा उठाना, कोई प्रलोभन देकर पोर्नोग्राफी बनाना आदि यौन शोषण में शामिल किए गए हैं। उनका कहना है कि कई बार पारिवारिक कलह,पुत्र प्राप्त करी भावना, अवसाद आदि कई कारणों से यौन शोषण हो जाता है। लड़कियां ही नहींं अपितु लड़के भी यौन शोषण का शिकार होते हैं। देश भर में भारी संख्या में यौन शोषण होते हैं । 2007 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 13 राज्यों का अध्ययन किया जिसमें  21 प्रतिशत लोगों ने बचपन में गंभीर यौन शोषण की बात स्वीकार की। बाल यौन शोषण के कारण बच्चे अवसाद, बुरे सपने, आत्मविश्वास में कमी, अनिद्रा जैसे अनेक कुंठाओं का शिकार हो जाते हैं।
 उन्होंने बताया कि सरकार ने बाल शोषण के विरुद्ध कई कानून बना रखे हैं जिनमें वर्ष 2012 में पोक्सो एक्ट बनाया गया है। वैसे तो भारतीय दंड संहिता की धारा 375/ 372/ 373/377 के अंतर्गत यौन अपराधों पर अंकुश लगाने का प्रावधान है। उन्होंने  कहा कि आसपास कहीं भी ऐसी घटना घटित हो तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए वरना भविष्य के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
 फोटो कैप्शन: एडवोकेट राजेश कुमार





सांसद करेंगे कनीना में कई परियोजनाओं का उद्घाटन
-सोमवार को करेंगे विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन
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कनीना की आवाज। कनीना में सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह, विधायक सीताराम यादव, डीएमसी एसडीएम एस कनीना करोड़ों की लागत की परियोजनाओं का उद्घाटन सोमवार को करेंगे। विस्तृत जानकारी देते हुए एसडीएम कनीना सुरेंद्र सिंह ने बताया कि ये विधायक एवं सांसद अनीता यादव रोड़, गणेश पार्क, शहीद सुजान सिंह पार्क एवं अन्य सड़कों का उद्घाटन करेंगे।






 68 बूथो पर पिलाई 6780 बच्चों को पोलियो की खुराक
-15183 बच्चों को पोलियों की खुराक पिलाने का है लक्ष्य
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कनीना की आवाज। कनीना के विभिन्न बूथो पर जीरो से पांच आयु वर्ग के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई। 68 बूथ बनाए गए थे जहां पर 6780 बच्चों को पहले ही दिन खुराक पिलाई गई है। आगामी दो दिनों में घर-घर जाकर टारगेट पूरा किया जाएगा 150183 बच्चों को खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डाक्टर सुंदरलाल एसएमओ ने बताया कि कनीना के अलावा मुंडिया खेड़ा, दोंगड़ा अहीर के विभिन्न गांवों में 68 बूथ बनाए गए है। प्रत्येक बूथ पर चार-चार कर्मचारियों की तैनाती की गई है है। बूथ स्तर पर बच्चों को खुराक पिलाई गई, यहां तक की बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी स्पेशल बूथ बनाए गए थे जहां बसों एवं ट्रेनों से सफर कर रहे बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई। कंप्यूटर संचालक पवन कुमार ने बताया कि आगामी दो दिनों में बचे हुए बच्चों का लक्ष्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
 फोटो कैप्शन 05: बच्चों को पुलिया की खुराक पिलाते हुए




नुक्कड़ नाटक द्वारा दी गई एड्स बचाव की जानकारी
-पंचकुला से कनीना पहुंची नुक्कड़ नाटक मंडली
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कनीना की आवाज।  एड्स कंट्रोल सोसायटी पंचकूला की ओर से सिविल सर्जन नारनौल डा. रमेश चंद्र आर्य तथा एसएमओ कनीना डा सुंदरलाल के मार्गदर्शन में कनीना के बस स्टैंड पर पंचकूला से पहुंची नुक्कड़ नाटक मंडली द्वारा एड्स जागरूकता संबंधित एक नाटिका प्रस्तुत की गई। साथ में टीम के साथ ही डाक्टरों की टीम भी आई हुई थी जो एचआईवी के मौके पर ही सैंपल इक_ा कर रही थी, अगर कोई सैंपल देना चाहे तो मौके पर ही दे सकता था।
इस मौके पर डा जितेंद्र मोरवाल ने बताया कि यह मंडली लोगों को जागरूक करती है ताकि एड्स को फैलाने वाले एचआईवी की जानकारी मिल सके। जागरूकता मंडली द्वारा प्रस्तुत नाटिका को देखने के लिए भीड़ उमड़ी तथा इसने सहज और सरल तरीके से एड्स के फैलने, एड्स को रोकने और बचाव की विधियों की जानकारी दी गई।
 इस मौके पर डा. अंकित शर्मा, सत्येंद्र कुमार फार्मासिस्ट, सुनील कुमार एमपीएचडब्ल्यू, उप-नागरिक अस्पताल कनीना के कर्मचारी मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 3: पंचकूला की नाटक मंडली लोगों को एचआईवी के बारे में जागरूक करते हुए।







सड़क मार्ग उखाड़ डाली किंतु निर्मित नहीं किए जाने से बड़ी परेशानी
-दिनभर उड़ते हैं धूल के गुब्बार
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कनीना की आवाज। कनीना की चर्चित रेवाड़ी सड़क मार्ग जहां पहले मरम्मत की लंबे समय तक बाट जो रही थी। गड्ढों युक्त होने के कारण भारी परेशानी चल रही थी। आखिरकार सरकार ने इसको ठीक करने के लिए सड़क को उखाड़वा दिया है और कनीना से भडफ़ बस स्टैंड के थोड़ा आगे तक सड़क को उखाडऩे काम पूरा कर दिया है किंतु इसे फिर से निर्मित न किए जाने से दुर्घटनाओं का अंदेशा बना हुआ है वही उड़ती हुई धूल घरों और दुकानों में घुस रही है जिसके कारण लोग बेहद परेशान हैं। आए दिन भारी संख्या में वह वाहन गुजरते हैं जो धूल के गुब्बार उड़ा कर चले जाते हैं। सड़क मार्ग को पुन: निर्मित किये जाने की मांग उठ रही है। इस संबंध में लोगों तथा दुकानदारों के विचार निम्न हैं-
**सड़क मार्ग न बनाए जाने से उड़ती हुई धूल सांस के साथ शरीर में जा रही है जिसके कारण टीबी जैसी घातक बीमारी होने का की संभावना बढ़ रही है। विगत करीब एक माह से सड़क की यही दुर्दशा है। कभी कभार पानी भी छिड़का जाता है लेकिन कुछ ही देर बाद पानी सूख जाता है और धूल के गुब्बार फिर से उडऩे लग जाते हैं। इस सड़क मार्ग की अभिलंब सुध ली जाए।
--- रूपचंद कनीनावासी
 सड़क मार्ग के फिर से निर्माण ने किए जाने से दुकानों में भारी मात्रा में धूलकण उड़ कर आ रही है, जिससे खाद्य सामग्री खराब हो रही है। सभी दुकानों के शीशे उपलब्ध नहीं है जिसके कारण सीधे ही धूल कण अंदर आ रहे हैं। सबसे व्यस्त मार्ग होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो गई है। इस सड़क मार्ग की शुद्ध ली जाए। ----महावीर सिंह,कनीना
लंबे समय से सड़क मार्ग जर्जर हालत में था, इसे ठीक करने की योजना बनाई तो सड़क को उखाड़ डाला है जिससे दुपहिया वाहन रोडिय़ों पर फिसल कर गिर रहे हैं। धूलकण उड़ रहे हैं, आवागमन में परेशानी हो रही है जिससे आम आदमी बेहद परेशान है। ग्रामीणों के घरों में धूल कण उड़ कर जा रहे हैं तथा दुकानदार तो बेहद परेशान है।
---- राजवीर सिंह, कनीना
सड़क मार्ग उखाड़ देने के बाद इसे तुरंत निर्मित किया जाना चाहिए वरना कई लोग दमे और टीबी के रोगी बन जाएंगे। धूल के कण फेफड़ों में जा रहे हैं, सांस लेने में तकलीफ हो रही है। यहां आस-पास दुकानदार अपनी दुकानों पर मास्क लगा कर बैठने को मजबूर है। बार-बार सरकार से मांग की जा रही है कि इसे दुरुस्त किया जाए किंतु सड़क मार्ग को ठीक नहीं किया जा रहा, जिससे परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
-- रमेश कुमार, कनीना
 फोटो कैप्शन 4: जर्जर सड़क मार्ग साथ में
महाबीर सिंह, राजबीर सिंह, रमेश कुमार, रूपचंद की पासपोर्ट फोटो






 संत मोलडऩाथ मेला 20 मार्च को
-19 मार्च को आयोजित होगा जागरण
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कनीना की आवाज। कनीना के परम संत एवं कनीना के अतिरिक्त आधा दर्जन विभिन्न गांवों में पूजे जाने वाले संत मोलडऩाथ का मेला 20 मार्च बुधवार को कनीना में आयोजित होगा। इससे पूर्व 19 मार्च की रात को कनीना के फुटबाल खेल के मैदान में जागरण आयोजित होगा।
 संत मोलडऩाथ ट्रस्ट के प्रधान दिनेश कुमार ने बताया कि जागरण में विकास पासोर, सिंगर रजनी शर्मा, मुकेश करनावासिया, अंजू शर्मा, सरिता, सोनू रुद्रा, मनोज शर्मा आदि पहुंच रहे हैं जो संत मोलडऩाथ का गुणगान करेंगे।
इसी क्रम में ऊंटों की दौड़ जिसमें प्रथम पुरस्कार 51000 रुपये जिसमें दूसरा पुरस्कार 41000 रुपये, तीसरा 31000 रुपये तथा चौथा 21000 रुपये तथा पांचवां इनाम 11000 रुपये का दिया जाएगा। देसी घोडिय़ों की दौड़ भी 11000 रुपये से लेकर 51000 रुपये तक की तक की आयोजित होगी। देशी घोडिय़ों की दौड़ में प्रथम पुरस्कार 51 हजार रुपये, दूसरा इनाम 41 हजार रुपये, तीसरा 31000 रुपये तथा चौथा 21000 रुपये तथा पांचवां इनाम 11000 रुपये का दिया जाएगा 31000 रुपये तक की कुश्ती, 21000 रुपये तक घोड़ी चाल आयोजित होंगी। घोड़ी चाल में पहला इनाम 21 हजार, दूसरा इनाम 15000  रुपये तीसरा इनाम 7100 रुपये का दिया जाएगा। ऊंट एवं घोडिय़ों की दौड़ सीहोर-छीथरोली सड़क मार्ग पर आयोजित होगी। कश्तियां 51 रुपये से लेकर 31000 रुपये तक की होंगी। पर्व तीन दिन चलता है जहां केवल शक्कर का प्रसाद ही चढ़ाया जाता है।
फोटो कैप्शन 01: संत मोलडऩाथ आश्रम


 



कट के लिए किसानों का केंद्र सरकार के प्रति आक्रोश,  357वें दिन जारी रहा धरना
-अनिश्चितकालीन धरने पर हैं ग्रामीण
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कनीना की आवाज। राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर सेहलंग -बाघोत के बीच कट के लिए अनिश्चितकालीन धरना जारी है। रविवार को धरने की अध्यक्षता सूबेदार हेमराज अत्रि बाघोत ने की और उन्होंने बताया कि हम बार-बार राज्य सरकार और केंद्र सरकार को याद दिला रहे हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर बाघोत-सेहलंग के बीच कट के काम को शुरू करने में सरकार की तरफ से देरी नहीं होनी चाहिए। केंद्र सरकार के द्वारा कट का काम शुरू न करने के कारण किसानों में आक्रोश है, उन्हें लग रहा है कि सरकार कट को लेकर किसानों की अनदेखी कर रही है। क्षेत्र के लोगों की मांग जायज है, इन 40-50 गांवों के विकास के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर चढऩे और उतरने का मार्ग बनना जरूरी है।
 धरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय सिंह चेयरमैन ने बताया कि धरने को चलते 357 दिन हो गए हैं लेकिन धरातल पर कार्य शुरू न होने के कारण किसानों में निराशा है। केंद्र सरकार किसानों की पीड़ा को समझे और जितना जल्दी हो सके  राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच कट का काम शुरू करवाया जाए। जब तक कट का काम शुरू नहीं होगा, हमारा धरना जारी रहेगा।
इस मौके पर डॉ लक्ष्मण सिंह, नरेंद्र कुमार शास्त्री, पहलवान रणधीर सिंह, चेयरमैन सतपाल, मुंशी राम, मास्टर विजयपाल, पूर्व सरपंच सतबीर सिंह , सुरेंद्र सिंह, डॉ राम भक्त, ठेकेदार शेर सिंह, मनफूल, सत्य प्रकाश, पूर्व सरपंच हंस कुमार,सीता राम, वेद प्रकाश, रोशन लाल आर्य, प्रधान कृष्ण कुमार, राम भक्त,मुख्तार सिंह, पंडित मनीराम अत्रि, दाताराम, प्यारेलाल, मास्टर विजय सिंह व गणमान्य लोग मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 02: कट की मांग को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीण।

Saturday, March 2, 2024


 

गौ सेवा भगवान श्री कृष्ण की सच्ची भक्ति है -स्वामी शिवानंद  
--धनौंदा में आयोजित हुआ यज्ञ
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कनीना की आवाज। गौ माता की सेवा भगवान श्रीकृष्ण की सच्ची भक्ति है। इसलिए हमें गौ सेवा अवश्य ही करनी चाहिए और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गौ सेवा में भी लगाना चाहिए। ये विचार शिवानंद महाराज ने बाबा दयाल गौशाला में यज्ञ के उपरांत संबोधित करते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि गो सेवा करके मानव भवसागर से पार उतर जाता है । इसलिए हमें गौ सेवा में बढ़-चढ़कर कोई सेवा नहीं है। वही गौशाला के प्रधान ठाकुर पूर्ण सिंह तंवर ने बताया की गांव धनौंदा में श्री बाबा दयाल गौशाला पिछले लंबे समय से यहां चल रही है जिसमें झाड़ली, छितरौली, उच्चत, बाघोत, सीहोर, गाहड़ा खरकड़ाबास, खेड़ी तलवाना, अगियार एवं  पाथेडा के अलावा क्षेत्र के लोगों का इस गौशाला में बड़ा ही सहयोग है। समय-समय पर गौशाला में ये लोग आकर सहायता व सहयोग करते हैं जिसके बलबूते पर आज यहां लगभग 400 के करीब गोधन सुख शांति से रह रही है।  शनिवार को गौशाला में विशाल जागरण का कार्यक्रम भी कराया गया जिसमें क्षेत्र के गायकों ने भाग लिया।  इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बजरंग सिंह, डा विनयपाल सिंह गौशाला प्रधान, ठाकुर पूर्ण सिंह तंवर, ठाकुर बीर सिंह, सोनू तवर, नरेंद्र शर्मा, जगदीश सिंह, जीतपाल सिंह, कर्मवीर सिंह, गो भगत दिनेश कुमार शर्मा ग्रामीणों ने भाग लिया।
 फोटो कैप्शन 06: स्वामी शिवानंद जी के साथ गो भक्त







 संत मोलडऩाथ मेला 20 मार्च को
-19 मार्च को आयोजित होगा जागरण
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कनीना की आवाज। कनीना के परम संत एवं कनीना के अतिरिक्त आधा दर्जन विभिन्न गांवों में पूजे जाने वाले संत मोलडऩाथ का मेला 20 मार्च बुधवार को कनीना में आयोजित होगा। इससे पूर्व 19 मार्च की रात को कनीना के फुटबाल खेल के मैदान में जागरण आयोजित होगा।
 संत मोलडऩाथ ट्रस्ट के प्रधान दिनेश कुमार ने बताया कि जागरण में विकास पासोर, सिंगर रजनी शर्मा, मुकेश करनावासिया, अंजू शर्मा, सरिता, सोनू रुद्रा, मनोज शर्मा आदि पहुंच रहे हैं जो संत मोलडऩाथ का गुणगान करेंगे।
इसी क्रम में 51000 रुपये तक की ऊंटों की दौड़ जिसमें दूसरा पुरस्कार 41000 रुपये, तीसरा 31000 रुपये तथा चौथा 21000 रुपये तथा पांचवां इनाम 11000 रुपये का दिया जाएगा। देसी घोडिय़ों की दौड़ भी 11000 रुपये से लेकर 51000 रुपये तक की तक की आयोजित होगी। 31000 रुपये तक की कुश्ती, 21000 रुपये तक घोड़ी चाल आयोजित होंगी। घोड़ी चाल में दूसरा इनाम 15000  रुपये तीसरा इनामी 7100 रुपये का दिया जाएगा। ऊंट एवं घोडिय़ों की दौड़ सीहोर-छीथरोली सड़क मार्ग पर आयोजित होगी। कश्तियां 51 रुपये से लेकर 31000 रुपये तक की होंगी। पर्व तीन दिन चलता है जहां केवल शक्कर का प्रसाद ही चढ़ाया जाता है।
फोटो कैप्शन 05: संत मोलडऩाथ आश्रम








विश्व वन्यजीव दिवस-03 मार्च
वन्य जीवों का है इंसान से गहरा संबंध
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कनीना की आवाज। वन्य जीवों का इंसान से गहरा संबंध है। सदा जीव इंसान के साथ साथ विचरण करते आये हैं। परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाले जीव जंतु लुप्तप्राय हो गये हैं। इनकी सुरक्षा इंसान की सुरक्षा होती है। इंसान की पर्यावरण से छेड़छाड़ जीवों के लिए मुसीबत बन रही है। चिडिय़ा, फाख्ता, कौवा, बुलबुल ग्रामीण क्षेत्रों में खूब मिलती थी किंतु अब वो भी विलुप्त होती जा रही हैं। पर्यावरण प्रदूषण,भीषण गर्मी एवं जल अभाव, अभ्यारण्यों का अभाव, जंगलों की सफाई, आखेट आदि जंगली जीवों की संख्या को कम करती जा रही है। जंगल से तीतर बटेर, शशक, हरिण लुप्त होने के कगार पर हैं। काला तीतर राज्य पक्षी घोषित है किंतु यह लुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
कौन कौन से जीव मिलते हैं जिला महेंद्रगढ़ के वनों में-
पूर्व फोरेस्टर जसवंत सिंह बताते हैं कि 1948 में जब महेंद्रगढ़ बना था उस वक्त भारी संख्या में वन्य जीव होते थे किंतु अब संख्या घटती ही जा रही है। कभी सेही, तीतर, बटेर, काला तीतर, हिरण, नील गाय, पक्षियों की विभिन्न प्रकार, जरख, गीदड़, जावामूसा, काला नाग, गिद्ध, चील, मोर , शशक , लोमड़ी और कई अन्य जीव मिलते थे जो धीरे धीरे या तो लुप्त हो गये या बहुत कम बचे हैं। उनको उचित वातावरण नहीं मिल रहा है।
  --जसवंत सिंह पूर्व फोरेंस्टर
जब महलों की बजाय झोपड़ी होती थी और चिडिय़ां भारी संख्या में मिलती थी। वन अधिक होने से तीतर, बटेर, हरियल, फाख्ता, टीटीहरी, काला तीतर, हरिण, शशक एवं नाना प्रकार के जंगली जीव मिलते थे। आज उनके दर्शन दुर्लभ हो गए हैं जिनके पीछे इंसान की पर्यावरण से छेड़छाड़ मानी जाती है। पेड़ पौधों की कटाई, अंधाधुंध उर्वरक एवं पीड़कनाशी खेतों में डालना, पक्के मकान बनाए जाना, वनों का विनाश, औद्योगीकरण, बढ़ता प्रदूषण, आखेट पर कड़ा प्रतिबंध न लग पाना, शौकीनी के लिए जीवों को पालना, जीवों को पालतू बनाने की होड़, सांपों को पकड़कर सपेरे की भूमिका निभाना, गर्मी एवं सर्दी से जीवों को बचने के शरणस्थल न होना, खुले कुओं की जगह बोर बनाया जाना, सूखता जल, नदियों एवं नहरों में पानी का अभाव, भोजन न मिल पाना, आहार शृंंखला का छोटा होना एवं जीवों के लिए संरक्षण कानून सख्त न होना आदि प्रमुख कारण है जिनके चलते जीव जंतु दिनोंदिन लुप्त होते जा रहे हैं।
   ----सूबे सिंह, किसान
  अभ्यारण्य जैसे स्थल स्थापित करने की अनुमति दी जाए ताकि जीवों को मरने से बचाया जा सके। उनका कहना है कि जंगली जीवों को बचाने के अब सघन प्रयास करने पड़ेंगे वरना जंगली जीव अब लुप्त हो जाएंगे।  जंगली जीवों को बचाने के लिए पेड़ पौधों को बचाना जरूरी है। पेड़ पौधे अकसर गर्मी में जल की कमी के चलते नष्ट हो जाते हैं वहीं सर्दी में झुलस जाते हैं।
----सुरेश कुमार, पर्यावरणविद
   पर्यावरणविद रविंद्र कुमार बताते हैं किसान अपने खेतों से जाटी पेड़ का विनाश करने पर तुले हुए हैं जिसके चलते तीतर, काला तीतर, फाख्ता आदि विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके हैं। शशक एवं गीदड़ क्षेत्र में भारी मात्रा में देखने को मिलते थे किंतु जंगलों की सफाई कर देने से सुरक्षित स्थल बचे नहीं हैं जिसके चलते वे विलुप्त होने के कगार पर हैं।  जंगली जीवों को बचाने के लिए जंगलों की आग पर काबू पाना होगा वहीं पर्यावरण को दूषित होने से बचाना जरूरी हो गया है। जीवों को पिंजरे में बंद करने वाले या सांप आदि दिखाने वाले सपेरों, जीवों के साथ मजाक करने वाले मदारी आदि पर सख्त नजर रखनी होगी ताकि पक्षियों, सरीसृपों एवं जंगली जीवों को बचाया जा सके। जब जीवों का प्रजनन चलता है तो उस वक्त आखेट करने वाले कुत्ते एवं कुछ आखेट करने वाले जन उनके अंडे चोरी कर लेते हैं या फिर पक्षियों को मारकर खा जाते हैं। कानून सख्त नहीं होने से आखेट चोरी छिपे जारी है।  जंगली जीवों को बचाने के लिए जंगलों की आग पर काबू पाना होगा वहीं पर्यावरण को दूषित होने से बचाना जरूरी हो गया है।
----रविंद्र कुमार, पर्यावरणविद
     जंगली जीवों को समाप्त करने में घरों में पाले जाने वाले कुत्ते भी अहं भूमिका निभा रहे हैं। कहीं इंसान अपने मनोरंजन के लिए जीवों को पकड़ रहा है जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। जंगल जहां जीव जंतु छुपकर प्रसव करते थे वो स्थल अब बचे नहीं हैं। जिस जगह इंसान दिन के समय भी जाने से डरता था वहां रात के वक्त भी जगमगाहट दिखाई पड़ती है। इंसान जीवों को रक्षा की नजर से नहीं देखेगा तब तक जीवों का यूं ही अंत होता चला जाएगा।
----सुनील कुमार, बिसोहा
फोटो कैप्शन: रविंद्र कुमार, सूबे सिंह,  सुनील कुमार, जसवंत सिंह, सुरेश कुमार।






रेलवे विभाग द्वारा फिर से साधारण किराया लागू करने पर रेल यात्रियों ने खुशी जताई
--कोरोना से पूर्व किराया फिर से बहाल
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कनीना की आवाज। रेलवे विभाग ने जहां शनिवार से कोरोना काल में साधारण गाडिय़ों का किराया बढ़ा दिया था वह फिर से वापस लेते हुए पुराना किराया लागू कर दिया है। जिससे यात्रियों को लाभ मिलेगा तथा अब उन्होंने खुशी जताई है। अब तक साधारण गाडिय़ों को भी एक्सप्रेस नाम से चलाया जा रहा था तथा किराया बढ़ा दिया था जिसके कारण कम से कम दोगुना अधिक किराया लिया जा रहा था। वह वापस ले लिया है।  फिर से साधारण गाडिय़ों का किराया घटा दिया है।
 विस्तृत जानकारी देते हुए स्टेशन मास्टर कंवरपाल शर्मा ने बताया कि दो मार्च से पुराना किराया लागू हो गया है। जो गाडिय़ां साधारण गाडिय़ां थी उन्हें कोरोना कल में धीरे-धीरे फास्ट एक्सप्रेस गाड़ी का नाम दे दिया गया था। अब उनका किराया वापस पहले वाला लागू कर दिया है।
 इस संबंध में कुछ ट्रेन से सफर वाले यात्रियों से बात की गई तो उन्होंने खुशी जताई।
**कोरोना कल में साधारण गाडिय़ों को धीरे-धीरे बंद कर दिया गया था तथा फिर से उन्हें चलाया गया तो एक्सप्रेस नाम दिया गया था। किराया भी अधिक लिया जाता रहा है जिसके कारण साधारण गाडिय़ों में आम आदमी का चलना भी कठिन हो गया था किंतु अब फिर से पुराना किराया लागू कर देने से उन्हें खुशी है। वे अक्सर महेंद्रगढ़ जाने के लिए साधारण गाडिय़ां पकड़ती है परंतु कोरोना कल के बाद से बसों का किराया भी ट्रेन जितना कर दिया गया था जिसके कारण ट्रेनों की मांग घटी थी।
--- विमला देवी ट्रेन यात्री
ट्रेनों का किराया फिर से कोरोना काल से पूर्व वाला कर देने से उन्हें खुशी है क्योंकि ट्रेन सफर के लिए अच्छा साधन है किंतु बसों के बराबर ही उनका किराया रख देना उन्हें दिक्कत दे रहा था। बार-बार किराया वापस घटाने की मांग चल रही थी आखिरकार  रेलवे विभाग ने किराया घटा दिया है, पहले जैसा ही कर दिया है जिसकी उन्हें खुशी है।
--- सुनहरी देवी रेल यात्री
फोटो कैप्शन: सुनहरी देवी एवं विमला देवी






तेज हवाओं ने बढ़ाई किसानों की चिंता
-अभी भी 20 हजार हेक्टयर पर खड़ी है सरसों
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां शुक्रवार की रात को हल्की बारिश हुई वहीं शनिवार को दिनभर तेज हवाएं चली जिसको लेकर किसान चिंतित है। एक और जहां सरसों फसल की लावणी शुरू हो गई है वहीं गेहूं की फसल पकान पर है। गेहूं की फसल में अभी भी पानी दिया जा रहा है जिसके कारण तेज हवा से फसलें गिरने का डर सता रहा है।
किसान सूबे सिंह,महेश कुमार, दिनेश कुमार आदि ने बताया कि इस वक्त बारिश सरसों की फसल के लिए नुकसानदायक साबित होगी वहीं तेज हवाएं भी नुकसानदायक साबित होंगी। क्योंकि किसान अभी खेतों में पानी दे रहे हैं, गेहूं की फसल तेज हवा के कारण गिर जाने का खतरा है। वहीं तेज हवाओं के कारण लावणी की हुई सरसों की फसल उड़कर भी देर जाने की संभावना बन गई है। ऐसे में किसान की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग ने पहले ही 3 मार्च तक मौसम के बदलने की संभावना जता रखी है और मौसम पल-पल बदल रहा है। विगत दिनों से जहां तेज गर्मी पड़ रही थी वहीं मौसम में बदल आ रहा था। किसानों का कहना है कि पहले भी जहां एक महीने तक सूर्य का प्रकाश न मिलने से फसल को नुकसान हुआ है और अब लावणी के वक्त भी फसलों को नुकसान होने की संभावना बना दी है।
कृषि अधिकारी गेहूं की फसल में पानी न देने की बात कर रहे हैं ताकि तेज हवाओं का कुप्रभाव न  पड़े।
फोटो कैप्शन 03: तेज हवाओं में अपनी पछैती सरसों फसल को निहारता किसान







महिलाओं का नारा कट बने हमारा के साथ, 356वें दिन जारी रहा धरना
-अनिश्चितकालीन धरने पर हैं ग्रामीण
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कनीना की आवाज। राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर सेहलंग -बाघोत के बीच कट के लिए अनिश्चितकालीन धरना जारी है। शनिवार को धरने कि  अध्यक्षता बाबूलाल सेहलंग ने की और उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच चढऩे और उतरने का मार्ग शुरू न होने के कारण महिलाओं ने अपना मोर्चा संभाल लिया है।  गोदावरी पोता और रामकला सेहलंग महिलाओं  के साथ धरना स्थल पर पहुंची और सरकार के विरोध में नारे लगाए। राज्य सरकार और केंद्र सरकार हमारी मांग पूरी करें, महिलाओं का नारा कट बने हमारा। जब तक केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच कट का काम शुरू नहीं करती है, तब तक हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। महिलाओं ने सरकार को चुनौती दी कि हमें और हमारे परिवारों को कट न होने के कारण  कितनी परेशानियां हो रही हैं, हम ही जानती हैं, केंद्र सरकार हमारी पीड़ा को समझे और जितना जल्दी हो सके कट का काम शुरू करवाया जाए। महिलाओं ने बताया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने कट के लिए समय से चेत नहीं किया तब हमें अपने वास्तविक रूप में सरकार के विरोध में आना है और कट बनवाना है।
धरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय सिंह चेयरमैन ने बताया कि धरने को चलते 356 दिन हो गए हैं किंतु कट का काम शुरू नहीं करती है तब तक हम यहीं पर डटे रहेंगे और सरकार का विरोध करते रहेंगे। जब तक कट नहीं बनेगा हमारा क्षेत्र का विकास नहीं हो सकता।
इस मौके पर मुकेश,सुशीला, रामेश्वरी, कांता,मंजू संतोष,लक्ष्मी, प्रमिला, लाडो देवी, मनीता, बबली,उर्मिला, अनीता, बाला,सविता,सुमन,नरेंद्र  शास्त्री, डा लक्ष्मण सिंह,चेयरमैन सतपाल,मास्टर विजयपाल, प्रधान कृष्ण कुमार ,  पहलवान रणधीर सिंह,  मुंशी राम, सूबेदार हेमराज अत्री, सीताराम,   मास्टर विजय सिंह, पूर्व सरपंच सतवीर सिंह,  वेद प्रकाश,  डा राम भक्त, दाताराम, पंडित संजय सिंह, रोशन लाल आर्य, मनफूल ,  पूर्व सरपंच हंस कुमार, अशोक चौहान, रामकिशन,  करतार सिंह  व गणमान्य लोग मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 04: कट की मांग को लेकर धरना स्थल पर नारे लगाती महिलाएं।






 अपने जन्म दिवस पर प्राचार्य ने किया विद्यालय प्रांगण में पौधारोपण
-पाथेड़ा प्राचार्य की नई पहल
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कनीना की आवाज। पाथेडा स्कूल के प्राचार्य विष्णु प्रकाश जोशी ने अपना जन्मदिन स्कूल प्रांगण राजकीय वरिष्ठ ममाध्यमिक विद्यालय में पेड़ लगाकर मनाया। उन्होंने पेड़ों के महत्व को समझाते हुए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में अधिक से अधिक पेड़ लगाने की शिक्षा दी।  अपने स्कूल में हरियाली बनी रहे इसी को अपना मुकाम बनाया है।
 उन्होंने कहा कि हम सब सकल्प ले कि हर व्यक्ति जन्मदिन पर एक पौधा अवश्य लगाएं तभी हम सभी पेड़ों के महत्व को समझ पाएंगे तथा पर्यावरण संरक्षण संभव होगा। प्राचार्य को बचपन से ही पेड़ पौधों से प्रेम रहा है। जहां भी रहे हैं वहीं पौधारोपण किया है। उन्होंने सभी कर्मियों को अपने जन्म दिन पर एक एक पौधा लगाने की अपील की। और साथ में बड़ा होने तक सेवा करने की अपील भी की।
 इस अवसर पर राजनीति प्रवक्ता सुरेश शर्मा, अंग्रेजी प्रवक्ता राजेश कुमार,गणित प्रवक्ता ओम कुमार, सस्कृत प्रवक्ता मुनेश कुमार, भूगोल प्रवक्ता राज बाला, हिन्दी प्रवक्ता डि पल, सुरेन्द्र कुमार,  शारीरिक शिक्षक सुलक्षणा, मुकेश ,वन्दना ,रीना राजेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: पाथेड़ा स्कूल प्रांगण में प्राचार्य पौधारोपण करते हुए।







परीक्षा केंद्र का खंड शिक्षा अधिकारी ने किया शुभारंभ
- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में बना है 10वीं और 12वीं का परीक्षा केंद्र





















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कनीना की आवाज। शहीद शिव कुमार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला के नवनिर्मित 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा के केंद्र का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी कनीना डा.विश्वेश्वर कौशिक द्वारा किया गया। इस मौके पर पंचायत समिति अध्यक्ष जयप्रकाश भी उपस्थित रहे।
 खंड शिक्षा अधिकारी ने सुंदर प्रांगण तथा अच्छी व्यवस्था के लिए ग्रामवासियों एवं विद्यालय स्टाफ को बधाई दी तथा परीक्षा केंद्र को सुचारू रूप से चलने के लिए ग्राम पंचायत ग्राम विकास कमेटी के सदस्यों से विशेष आग्रह भी किया।
 इस मौके पर प्राचार्य रामेश्वर दयाल ने परीक्षा केंद्र बनवाने के लिए ग्राम विकास कमेटी तथा ग्राम पंचायत के विशेष सहयोग के लिए उनका धन्यवाद किया तथा बोर्ड चेयरमैन वीपी यादव के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। प्राचार्य ने बताया कि परीक्षा केंद्र में 209 विद्यार्थी दसवीं कक्षा के तथा 177 विद्यार्थी 12वीं कक्षा की परीक्षा देंगे। उन्होंने सभी अतिथियों का आभार जताते हुए ग्राम विकास कमेटी एवं ग्राम पंचायत के सदस्यों से परीक्षा केंद्र को सुचारु रूप से चलने के लिए विशेष सहयोग की अपील की। इस मौके पर पर ग्राम सरपंच नीलम देवी, नंबरदार कंवर सिंह, शांतिलाल, ग्राम पंचायत एवं ग्राम विकास कमेटी के सदस्य सूबेदार रंगराव, प्राचार्य ओमपाल, प्राचार्य रामस्वरूप, केंद्र अधीक्षक सुरेंद्र सिंह, विद्यालय स्टाफ एवं गांव के अनेक व्यक्ति मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 02: परीक्षा केंद्र का शुभारंभ करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी कनीना





Friday, March 1, 2024


 
 दिनदहाड़े घर में एक घर से चोरी
- सवा लाख की नकदी सहित लाखों के गहने ले उड़े चोर
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कनीना की आवाज। कनीना में चोरों के हौसले दिन-व-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। शुक्रवार को कनीना में  चोरों ने एक घर में चोरी की बड़ी घटना को अंजाम दे दिया। पीडि़त राहुल यादव ने जानकारी देते हो बताया कि सुबह किसी गृहकार्य से परिवार सहित बाहर गए हुए थे दोपहर 2 बजे आए तब घर का सारा सामान बिखरा हुआ पड़ा मिला। उसी वक्त उन्होंने डायल 112 को काल किया जिसके बाद शहर थाना की टीम मौके पर पहुंची और उन्होंने इसके जानकारी ली। राहुल ने बताया कि घर के पीछे के दरवाजे का ताला टूटा हुआ मिला। घर में रखी हुईं पेटियों और अलमारियों के ताले भी टूटे थे और पूरा सामान बिखरा पड़ा था। घर से सोने की चूड़ी 43 ग्राम, सोने की चैन, सोने की अंगूठी, सवा लाख रुपये आदि सामान अज्ञात चोर चुरा ले गए।
सवा लाख नकद सहित गहने चोरी-
राहुल ने बताया कि घर से परिवार के लोग भी 11 बजे किसी कार्य से गए हुए थे। दो बजे जब घर लौटे तो घर के पीछे का दरवाजा की जाली व ताला टूटा हुआ मिला। घर के अंदर रखी पेटी और शूटकेस के, अलमीरा ताले भी टूटे पड़े थे। राहुल ने बताया कि उनके घर से जेवर सोने की चूड़ी, सोने की चेन, सोने की अंगूठी  सहित सवा लाख रुपये  की नकदी चोरी हुआ। अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोरों ने टीम बनाकर एक साथ वारदात को अंजाम दिया होगा और पहले से रेकी भी कर रखी थी। राहुल ने बताया कि चोरों के पैरों के निशान से लगता है कि चोर एक नहीं अपितु संख्या में कई हैं। सूचना मिलते ही थाना शहर थाना पुलिस घटना स्थल पहुंची। शहर थाना प्रभारी कमलदीप राणा के अनुसार हर एंगल से जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आसपास के सीसीटीवी कैमरा को भी खंगाला जा रहा है।
फोटो कैप्शन 7 व 8: घटनास्थल पर बिखरा पड़ा हुआ सामान एवं जानकारी लेते अधिकारी।









लावणी के लिए मजदूरों की बढ़ गई है मांग
-सरसों की लावणी रेट है 2500 रुपये प्रति किला
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में सरसों की फसल कटाई शुरू हो गई हैं। किसान अपनी फसल कटाई स्वयं कम करते हैं और मजदूरों से अधिक करवा रहे हैं। दूसरे राज्यों से भारी संख्या में मजदूर आए हुए हैं जो सरसों 2500 रुपये प्रति किला तथा गेहूं कम से कम 6000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से फसल कटाई करते हैं। किसान अपने खेतों में फसल कटाई सरसों निकालना, यहां तक कि आने वाले समय में गेहूं की कटाई और भंडारण भूसे का भंडार आदि सभी कार्य इन मजदूरों से करवाते हैं। आलम यह है कि किसान अपने खेतों में जबसे फसल उगाता है तभी से उसकी रखवाली  का कार्य भी मजदूरों पर छोड़ता रहा है। मजदूर निश्चित राशि में फसलों की देखभाल करते हैं। फसलों की आवारा जंतुओं से देखरेख के लिए अलग से रखवाले भी रखे जाते हैं। ये रखवाले रात को आवारा जंतु जैसे नीलगाय से फसल की सुरक्षा करते हैं। भारी संख्या में मजदूर होली मनाकर यहां पहुंच रहे हैं।
 किसानों ने बताया कि एक जमाना था जब परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक होती थी उस समय मजदूरों की जरूरत कम पड़ती थी किंतु अब प्रत्येक घर में सदस्य की संख्या कम होती है। एक और जहां  चल रही हैं विद्यार्थी अपने स्कूल में परीक्षा देने जाते हैं वही किसान अपने खेतों में लावणी का कार्य करते हैं। लेकिन ऐसे बहुत कम किसान है जो अपने खेत की लावणी स्वयं करते हैं। मजदूरों पर ही लावणी का कार्य निर्भर करता है।
 मिली जानकारी अनुसार राजस्थान, बिहार ,उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्य से मजदूरों के ग्रुप आए हुए हैं। ये ग्रुप दस से लेकर के 30 की संख्या में मिलते हैं। एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। फसल कटाई का काम जो दिनों में पूरा होना चाहिए कुछ ही घंटों में पूरा कर जाते हैं। यही कारण है किसान मौसम को देखते हुए तथा मौसम बदलाव के चलते हुए इन मजदूरों से कटाई करवाता है। यहां तक सरसों निकालना आदि का कार्य भी मजदूरों से करवा भंडारण तक का कार्य भी मजदूरों से करवाता है। एक और मजदूरों को अपनी रोटी रोजी मिल रही है वही किसान भी इन मजदूरों से काम करवा कर प्रसन्न नजर आ रहे हैं।
फोटो कैप्शन 06: लावणी करता मजदूरों का एक ठोल।







सरसों की कटाई हुई शुरू
-बुलाये जा रहे हैं दूसरे प्रांतों से मजदूर
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कनीना की आवाज। करीब एक हफ्ते बाद सरसों की कटाई के लिए दूसरे प्रांतों से मजदूर पहुंच जाएंगे। फसल पक जाने से किसान लावणी के काम में लग गये हैं।  गेहूं की फसल अप्रैल माह में लावणी आएगी।  
  यूं तो सरसों की कटाई का पर्व 15 मार्च से शुरू उम्मीद थी किंतु मौसम के बदलने व गर्मी अधिक पडऩे के चलते फसल जल्द पककर तैयार हो गई है और कटाई भी शुरू हो गई है। किसानों गजराज, अजय, महेंद्र, कांता का का कहना है कि गेहूं में अभी एक और सिंचाई की जरूरत है वहीं सरसों की लावणी शुरू कर दी है।
 दुकानों से दरांती एवं बाकड़ी की बिक्री बढ़ गई है। वहीं किसान अपने कृषि के इन औजारों को साफ करके तैयारी में जुट गए हैं। सरसों फसल की कटाई के साथ साथ किसान सरसों के धांसे भी काटकर ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं। इस मौसम में लंबे समय तक ईंधन के विकल्प के रूप में काम आने वाले धांसों की मांग बढ़ जाती है।
   दूसरे राज्यों से फसल कटाई के लिए मजदूर भारी संख्या में आएंगे। ये मजदूर किसान से निश्चित राशि लेकर कटाई करते हैं तथा वापस अपने प्रांत को चले जाते हैं। किसान आलसी होते जा रहे हैं और इन मजदूरों से ही कटाई करवाने लगे हैं। विभिन्न किसानों के पास मजदूरों के फोन नंबर होते हैं जिस पर वे फोन करके उन्हें फसल कटाई के समय बुला लेते हैं। धड़ाधड़ फोन करके उन्हें बुलाया जा रहा है।  कृषि अधिकारी मानते हैं कि सरसों की कटाई का सही समय मार्च माह का पहला सप्ताह होता है वहीं गेहूं की कटाई का सही समय अप्रैल दूसरा सप्ताह होता है।
  मिली जानकारी अनुसार राजस्थान, बिहार एवं उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश राज्यों के भारी संख्या में मजदूर लावणी के लिए पहुंचेंगे।  किसान अपने खेतों से फसल की कटाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मजदूर होली पर्व पर अपने गांव चले गये तथा होली के बाद लौटेंगे।
किरायेदार बढ़ेंगे---
  इस क्षेत्र में यूं तो विगत कुछ समय से दूसरे राज्यों के किराएदारों की संख्या बढ़ जाएंगे वहीं अब फसल काटने के लिए राजस्थान, बिहार एवं एमपी के मजदूर भी आएंगे। ये मजदूर पूरे खेत की लावणी का ही काम ठेके पर लेते हैं। ऐसे में किसान धूप में तपने से बचने के लिए इन मजदूरों का सहारा ले रहे हैं। कुल मिलाकर किसान की फसल की कटाई, निकालने का काम और घर तक पहुंचाने का काम अब मजदूर ही करने लगे हैं। आज से चार-पांच वर्ष पहले क्षेत्र के किसान इन मजदूरों से काम नहीं लेते थे किंतु अब स्थिति यह बन गई है कि इन्हीं से अधिक काम लेने लगे हैं।
थ्रेसर और ट्रैक्टर भी साथ--
   बाहर से आने वाले मजदूर अपने साथ थ्रेसर एवं ट्रैक्टर आदि भी रखते हैं ताकि फसल काटने के अलावा फसल निकालने का काम भी पूरा कर सके। राजस्थान में सरसों करीब एक माह पहले ही निकाली जा चुकी हैं।
अब ठेका लेते हैं बड़े किसान-
बड़े किसान अपने खेतों के ट्यूबवेलों पर दूसरे प्रांतों से मजदूरों को बुला लेते हैं जिनसे अपने खेत की लावणी के अतिरिक्त दूसरे किसानों की लावणी के लिए ठेका लेते हैं। मजदूरों को भी ये ही किसान भेजते हैं। कनीना में एक दर्जन के करीब ऐसे ठेकदार हैं जो हर गांव में मिलते हैं।
हर हर वर्ष बढ़ जाते हैं इनके रेट-
 हर वर्ष इन मजदूरों के भी रेट बढ़ जाते हैं। विगत वर्ष जहां 5000 रुपये तक एक एकड़ गेहूं खेत की लावणी की गई। इस बार अनुमान है कि कम से कम 6000 रुपये प्रति एकड़ में लावणी करेंगे। लावणी के अतिरिक्त भी इन मजदूरों से खेती करने तथा मुर्गी फार्म में रखरखाव का काम करते हैं। सरसों की लावणी का रेट विगत वर्ष 2500 रुपये प्रति किला था किंतु इस बार यह कम से कम 3 हजार रुपये किला है। लावणी जल्दी आ गई है वरना होली के बाद मजदूर आते रहे हैं।
फोटो कैप्शन 4 एवं 5: सरसों की लावणी का नजारा







कर्मचारी प्रशंसा दिवस -2 मार्च
अपने काम के अतिरिक्त मेहनत करने वाले कर्मचारी होते हैं प्रशंसा योग्य
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कनीना की आवाज। यूं तो सभी कर्मचारी अपने काम को की जान से करने का प्रयास करते हैं। सरकार द्वारा या गैर सरकार द्वारा रखे गये कर्मचारी काम को अंजाम तक ले जाते हैं जिससे समाज को एक नई प्रेरणा मिलती है। यह सत्य है कि कोई हजारों में एक कर्मचारी अपने काम के प्रति उतना ईमानदार नहीं भी हो सकता जितना उसे होना चाहिए किंतु अधिकांश कर्मचारी काम के प्रति ईमानदार होते हैं। यदि किसी कर्मचारी में अपने काम के अतिरिक्त कुछ समय देकर काम को और अधिक सुंदर बनाने का प्रयास करता है तो वह प्रशंसा के योग्य बन जाता है। ऐसे कर्मचारी बहुत कम मिलते हैं जो समाज में ऊंचा नाम कमाते हैं। इसी कर्मचारियों के विषय में कुछ लोगों से चर्चा की गई--
**कर्मचारियों द्वारा अपना काम पूर्ण करना उसकी जिम्मेदारी है किंतु सरकार द्वारा निर्धारित समय के अतिरिक्त भी कोई कर्मचारी मेहनत करता है और समाज सेवा में योगदान देता है तो निसंदेह वह कर्मचारी प्रशंसा का पत्र होता है। ऐसे कर्मचारियों को की प्रशंसा की जाए तो उन्हें बहुत शकुन मिलता है। तत्पश्चात वे समाज में और कुछ कर गुजरने की क्षमता रखेंगे।
--- राजेश चौहान समाजसेवी
यूं तो सभी कर्मचारी प्रशंसा के पात्र है परंतु कभी-कभी कुछ कर्मचारी समाज से हटकर अपनी जिम्मेदारियां को समझते हुए अधिक समय देकर किसी काम में निखार ला देते हैं तो उसे समय उनकी प्रशंसा जरूरी बन जाती है। जिससे उन्हें एक प्रोत्साहन मिलता है और वे भविष्य में और बेहतर कार्य करने में जुट जाते हैं। ---मेवा देवी नांगल हरनाथ
कर्मचारी अपने काम से बंधे होना स्वाभाविक परंतु काम में कुछ नयापन लाने के लिए तथा समाज में एक नई धारणा अपने काम को करते हुए पैदा करने में जब कोई मेहनत करता है तो प्रशंसा का हकदार बन जाता है। ऐसे कर्मचारी जो अपने काम की जिम्मेदारी को भी पूरा करते हैं और समाज में इस काम को ज्यादा बेहतर तरीके से करके नाम कमाते हैं उन्हें समाज की कम से कम प्रशंसा रूपी दो शब्द प्रोत्साहन के रूप में मिलने जरूरी है ताकि वह भविष्य में और बेहतर काम कर सके।
-- बिमला देवी, कपूरी
किसी कर्मचारी के प्रशंसा में कहे गए दो शब्द उसके लिए एक ईनाम का कार्य करते हैं। इस ईनाम को पाकर कर्मचारी मनोबल बढ़ता है और उसके कारण वह काम को बेहतर ढंग से अपने कार्य को करते हैं। यह उनके लिए एक प्रेरणा कारण बनता है। ऐसे में कर्मचारियों को जो जी जान से दिन रात मेहनत करते हैं, दो शब्द प्रशंसा की जरूर कहने चाहिए।
--संतोष देवी
फोटो कैप्शन:  संतोष देवी, राजेश चौहान, मेवा देवी, बिमला देवी






पंडित नत्थूराम शर्मा जैसे महान समाज सुधारक का इस संसार से चला जाना बड़ी क्षति -रामबीर
---छठी पुण्यतिथि मनाई
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कनीना की आवाज। नत्थूराम शर्मा जैसे महान ज्योतिषशास्त्री एवं समाजसेवी का इस दुनिया से चला जाना एक बहुत बड़ी क्षति है। ये विचार पटौदी के पूर्व विधायक रामबीर सिंह ने उनकी छठी पुण्यतिथि पर भारती आश्रम, रेलवे फाटक कनीना में चल रहे आयोजन को व्यक्त किये।
 इस अवसर पर उन्होंने कहा पंडित नाथूराम शर्मा गृहस्थी होते हुए भी संत जैसा व्यवहार रखते थे जिन्होंने अपने जीवन में एक उच्च कोटि की साधना कर जो प्राप्त किया वह किसी से छुपा नहीं है। पूर्व विधायक ने कहा कि मुझे नत्थूराम शर्मा जैसे महान समाज सुधारक से मिलने का कई बार मौका मिला और मैं अपने व अपने साथियों के बारे में उनसे हर समस्या पर समय समय पर बात की। उनकी हर वाणी सत्य सिद्ध हुई तथा हर समस्या का समाधान भी हुआ। उन्होंने यह भी कहा आज उनके चले जाने के बाद पता चलता है कि इस प्रकार के लोगों का इस दुनिया से चला जाना इस क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि पंडित नत्थूराम शर्मा अपने थूल शरीर को छोड़कर ब्रह्मलीन सूक्ष्म शरीर में आज भी इस दुनिया में हाजिर है जो उनको सच्ची श्रद्धा व प्यार से याद करता है वह उनके कार्य पहले की भांति आज भी पूरा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र का बहुत बड़ा सौभाग्य है कि उनके आशीर्वाद से हजारों लोगों का भला भी हुआ।
 इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राचार्य कमलेश शर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम में अखंड रामायण पाठ के आयोजन के उपरांत एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया। तत्पश्चात सहजभोज का आयोजन किया गया जिसमें हजारों लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया और नत्थूराम को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर क्षेत्र के समाजसेवी पर न्यायपालिका से जुड़े उच्च अधिकारियों ने भी पहुंचकर पंडित नाथूराम शर्मा को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
 इस अवसर पर राजेश शर्मा, कमलेश शर्मा, रमेश शर्मा, नरेंद्र शर्मा, रूपेश शर्मा, मोनू शेखावत, गोपाल शेखावत, कनीना बार के पूर्व प्रधान कुलदीप यादव, रामनिवास शर्मा, नरेंद्र शर्मा एडवोकेट, भगत सिंह यादव के अलावा अन्य गण मन लोग उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 03: पंडित नत्थूराम शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पटौदी के पूर्व विधायक रामबीर सिंह व  कमलेश शर्मा







किसानों का 355वें दिन जारी रहा धरना
-किसान अनिश्चितकालीन धरने पर हैं
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कनीना की आवाज। राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर सेहलंग -बाघोत के बीच कट के लिए अनिश्चितकालीन धरना जारी है। धरने की अध्यक्षता सूबेदार सुखबीर सिंह छिथरोली  ने की और उन्होंने बताया कि 8 मार्च को बाघेश्वर धाम में मेला है, इस अवसर पर श्रद्धालु  बाबा शिव भोले पर कावड़  चढ़ाते हैं। शिव भक्तों का बाघेश्वर धाम में पहुंचना शुरू हो गया है । ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच चढऩे -उतरने के मार्ग की अति जरूरत है। जब तक केंद्र सरकार कट का काम शुरू नहीं करती है, हमारा धरना जारी रहेगा।
धरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय सिंह चेयरमैन ने बताया कि धरने को चलते 355 दिन हो गए हैं। केंद्र सरकार के द्वारा  अब तक राष्ट्रीय राजमार्ग 152डी पर बाघोत -सेहलंग के बीच कट का काम शुरू नहीं किया गया है। अब हम जल्दी ही 50 गांव मिलकर यह फैसला लेंगे कि यदि केंद्र सरकार कट के लिए जल्दी कार्रवाई शुरू नहीं करेगी तो उसके बाद हम सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इस मौके पर ओम प्रकाश, ठेकेदार शेर सिंह,  बाबूलाल, नरेंद्र  शास्त्री, आचार्य मक्खन लाल, डॉ लक्ष्मण सिंह,चेयरमैन सतपाल,मास्टर विजयपाल, प्रधान कृष्ण कुमार , पहलवान धर्मपाल, पहलवान रणधीर सिंह,  मुंशी राम, सूबेदार हेमराज अत्री, सीताराम,   सत्यप्रकाश,  मास्टर विजय सिंह, पूर्व सरपंच सतवीर सिंह,  वेद प्रकाश,  डा राम भक्त, दाताराम, पंडित संजय सिंह,  रोशन लाल आर्य, मनफूल ,  रामकिशन,  करतार सिंह  व गणमान्य लोग मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 02: कट की मांग के लिए धरने पर बैठे ग्रामीण।



 
सिमट कर रह गए होली के खेल
-कभी एक माह चलते थे खेल
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कनीना की आवाज। कनीना में एक माह तक चलने वाले होली के खेल अब सिमटकर रह गए हैं। होली मनाने के विशेष ढंग, होलीवाला जोहड़ तथा होली पर ईंधन डालने की अनोखी परंपरा अब औपचारिकता बनकर रह गई हैं। कनीना में दो दिन पहले होली का डांडा गाड़ दिया गया है।
  एक वक्त था जब एक माह तक कनीना क्षेत्र में होली के खेल चलते थे। जब से होली का डांडा गाड़ दिया जाता था तभी से होली के खेल शुरू हो जाते थे। इन खेलों में चांदनी रात में लुक्का छुपी, कोरड़ा मारना तथा स्वांग रचना आदि प्रमुख होते थे। इन खेलों से जहां एक माह उत्सव चलता था वहीं पकती फसल को देखकर भी खुशी मनाई जाती थी। अब न तो वो खेल रहे हैं और न उनके खिलाड़ी।
  अब तो लुक्का छुपी का खेल रात को चले तो लोग चोर समझकर पीट डाले। होली के डांडे पर ईंधन डालने का रिवाज भी सिमटकर रह गया है। होलिका दहन से महज पांच सात पूर्व ही ईंधन डालकर खानापूर्ति की जाती है। बुजुर्गों के सहयोग से चलने वाले होली के खेल अब देखने को कम ही मिलते हैं। जहां होली के मधुर मधुर गीत, स्वांग रचना, ढोल एवं ताशें अब किसी मेले में ही देखने को मिल सकते हैं।
  बुजुर्ग आज के दिन जब होली का पर्व देखते हैं और सुनते हैं तो एक ही बात कहते हैं कि अब न तो एकता रही और न पहले वाला भाईचारा। अब तो बस आपसी रंजिश एवं एक दूसरे को नीचा दिखाने की परंपरा बढ़ रही है। होलीवाला जोहड़ जहां होलिका दहन किया जाता है उसमें गंदा पानी भरा खड़ा रहता है। मजबूरीवश होलिका दहन के समय महिला एवं पुरुष वहां जाकर प्रह्लाद भक्त की पूजा अर्चना करते हैं। होलिका दहन का पर्व 24 मार्च को मनाया जा रहा है।
होली के खेलों के विषय में बात की गई। बुजुर्गों के विचार छनकर सामने आये---
**आपसी रंजिश एवं प्रेम की भावना कम होने के कारण अब इन खेलों का अस्तित्व ही सिमट गया है। आज से 30 वर्षों पर्व आपस में भाईचारा पूरे यौवन पर होता था किंतु आज भाई-भाई का दुश्मन बनता जा रहा है। आपसी बैर भाव होली के खेलों को ले डूबी है।
---रामपाल पूर्व सैनिक
होली दहन स्थल पर अब ईंधन डालने का रिवाज भी कम हो गया है। कभी होली के खेल खेलने वाले लोग ही ईंधन उठाकर लाते थे और होली दहन स्थल पर डालते थे। अब तो किसी के खेत क्यार में इतना ईंधन नहीं मिलता है। यही कारण है कि होली दहन पर ईंधन न के बराबर डाला जाता है।
----रामगिरी नांगल हरनाथ
फोटो कैप्शन 01: कनीना में होलिका दहन पर डाला गया ईंधन
साथ में रामपाल एवं रामगिरी

 























 

कनीना क्षेत्र में हुई बूंदाबांदी

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कनीना की आवाज।  कनीना क्षेत्र में शुक्रवार की देर शाम हल्की बूंदाबांदी हुई। किसान इस वक्त सरसों की लावणी में जुट गये हैं और मौसम में बदलाव हो रहा है। किसान मौसम के बदलने से चिंतित हैं।