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Wednesday, September 23, 2026



 


डा. होशियार सिंह यादव का दो पुरस्कारों के लिए चयन
--दो कृतियां चयनित
- एक जबलपुर तो दूसरा बिदर, कर्नाटक में दिया जाएगा





नशा मुक्ति की दी गई जानकारी
-इंस्पेक्टर शारदा देवी ने किया लोगों को जागरूक
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कनीना की आवाज। 
नशा मुक्त अभियान के अंतर्गत इंस्पेक्टर शारदा देवी के द्वारा वार्ड नंबर 04 में आर्य समाज मन्दिर में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें शारदा जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से नशे के प्रति सभी को जागरूक किया और हेल्प लाइन नंबर के बारे में बताया।  आर्य समाज मन्दिर के प्रधान मोहर सिंह साहब और सरला  के द्वारा मैडम शारदा को विवेकानंद की पुस्तक भेंट की।
फोटो कैप्शन 08: संबंधित है




हरियाणा एनसीआर दिल्ली ताज़ा मौसम अपडेट और मौसम पूर्वानुमान
हरियाणा से मानसून की विदाई हो गई है- डॉ चंद्र मोहन
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कनीना की आवाज।
बुधवार को हरियाणा एनसीआर समेत अन्य कई राज्यों से मानसून की विदाई हो चुकी है।  दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान के ज़्यादातर हिस्सों से वापस चला गया है। अब, कोटा और उदयपुर डीवीजऩ के कुछ हिस्सों से ही वापसी बाकी है। जबकि हरियाणा के 21 जिलों से मानसून  की विधिवत विदाई हो चुकी है। आज राज्य में केवल यमुनानगर को छोड़कर, मानसून लगभग पूरे राज्य से वापस चला गया है। साथ ही साथ पंजाब के लगभग 92 प्रतिशत हिस्से से मानसून की विदाई हो चुकी है। इसके अलावा गुजरात और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से भी मानसून वापस चला गया है। इस साल मानसून पर अल-नीनो का साया साफ तौर पर देखने को मिला। हरियाणा  में इस मानसून सीजन में कुल 317.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है जबकि इस दौरान राज्य में 413.0 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है जो सामान्य से -23 फीसदी कम हुई है। जिला पलवल को छोड़कर शेष हरियाणा के सभी जिलों में सामान्य से नीचे बारिश हुई है। कुल मिलाकर इस साल मानसून की परफोर्मेंस  कमजोर बनीं रहीं। हरियाणा एनसीआर दिल्ली से आज  बुधवार को मानसून अपने अन्तिम पड़ाव पर पहुंच गया है।इस साल अल-नीनो परिस्थितियों की वजह से हरियाणा एनसीआर दिल्ली कमजोर मानसून परिस्थितियां देखने को मिलीं।हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर अल-नीनो ने मानसून की सुर-ताल  और मौसम वैज्ञानिकों का गणित को बिगाड़ दिया। इस साल मानसून की शुरुआत से लेकर मानसून की विदाई तक लगातार  मानसून गतिविधियां में अनियमितता देखने को मिलीं पूरे सीजन में मानसून लडख़ड़ाता रहा।
 हरियाणा में पिछले 12 सालों की मानसून की परफोर्मेंस
 साल       मानसून बारिश

2014     200.1 मिलीमीटर
2015     287.7 मिलीमीटर
2016    335.5 मिलीमीटर
2017    343.9 मिलीमीटर
2018     415.2 मिलीमीटर
2019    255.0 मिलीमीटर
2020    376.1 मिलीमीटर
2021     571.5 मिलीमीटर
2022     465.8 मिलीमीटर
2023     419.7 मिलीमीटर
2024    405.5 मिलीमीटर
2025    568.0 मिलीमीटर
2026     317.5 मिलीमीटर
 स्त्रोत भारतीय मौसम विभाग
 हरियाणा एनसीआर दिल्ली से मानसून की विदाई
  हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर क्योंकि  पिछले कुछ दिनों से मानसून लोटने की कंडिशन बनने लगी थी।  राजस्थान पर मौजूद एक प्रति चक्रवातीय सर्कुलेशन की वजह हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर लगातार  पश्चिमी गर्म  शुष्क हवाओं का आगाज शुरू हो गया था  इन शुष्क हवाओं ने वातावरण से धीरे-धीरे नमी को सोख लिया जिससे सम्पूर्ण इलाके में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।  
 कैसे लौटता मानसून है
मानसून का लौटना रातों-रात होने वाली घटना नहीं है। मौसम विभाग मानसून की वापसी की घोषणा 1 सितंबर के बाद तभी करता है जब तीन स्पष्ट संकेत मिलते हैं। उस इलाके में लगातार पांच दिनों तक बारिश न हो, सूखी हवा चलने लगे और निचले वायुमंडल में उच्च दबाव वाला सिस्टम बने। जैसे-जैसे सूखी हवा का असर बढऩे लगता है वैसे-वैसे आसमान साफ होने लगता है। इसके बाद बारिश की गतिविधियां बंद हो जाती हैं।भारतीय मौसम विज्ञान विभाग  के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की घोषणा के लिए मुख्य तौर पर तीन प्रमुख मौसमी पैरामीटर या स्थितियां देखी जाती हैं:
मुख्य पैरामीटर
1. लगातार 5 दिनों तक बारिश न होना :संबंधित क्षेत्र या उत्तर-पश्चिम भारत के हिस्से में लगातार 5 दिनों तक वर्षा गतिविधियों का पूरी तरह बंद होना या बारिश न होना।
   2. एंटी साइक्लोन का बनना :निचले  क्षोभ मंडल में एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (प्रतिचक्रवात) की स्थापना होना, जो हवाओं की दिशा और दबाव में बदलाव का संकेत देता है।
3. नमी में भारी कमी :उपग्रह से प्राप्त जल वाष्प  की तस्वीरों और तेफिग्राम (ञ्जद्गश्चद्धद्बद्दह्म्ड्डद्वह्य) - वायुमंडलीय डेटा चार्ट) के जरिए हवा में नमी की मात्रा में काफी कमी दर्ज किया जाता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून आज, 23 सितंबर 2026 को पंजाब, हरियाणा,
वर्तमान परिदृश्य में मौसम परिस्थितियां
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा अब 32.5एहृ/72.5एश्व, गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा, नालिया और 23.0एहृ/67.8एश्व से होकर गुजर रही है। इसके अलावा पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना 'डीप डिप्रेशन'  05 किमी/घंटा की गति से पश्चिम की ओर बढ़ा और यह कलिंगपट्टनम (आंध्र प्रदेश) के आसपास एरिया में पहुंच गया है
इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढऩे  'डीप डिप्रेशन' के रूप में उत्तरी आंध्र प्रदेश - दक्षिणी ओडिशा के तटों को पार करने की बहुत संभावना है। साथ ही साथ एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ, मध्य क्षोभमंडल स्तर पर पछुआ हवाओं में एक ट्रफ के रूप में सक्रिय है। एक ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण, उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्र पर बना हुआ है। कुल मिलाकर राजस्थान पर मौजूद प्रति चक्रवातीय सर्कुलेशन से आधे भारत के हिस्सों से मानसून की विदाई चल रही है साथ ही बंगाल की खाड़ी पर मौजूद मौसम प्रणाली से भारत के आधे हिस्से पर लगातार मानसून गतिविधियां देखने को मिलेगी।
मौसम पूर्वानुमान
हरियाणा एनसीआर दिल्ली में भारतीय मौसम विभाग द्वारा विधिवत रूप से मानसून की विदाई कर दी है। 25 सितंबर को एक नया कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हरियाणा के उत्तरी जिलों पर हल्की बारिश छिट-पुट बूंदाबांदी की गतिविधियों को दर्ज किया जाएगा। साथ ही साथ बंगाल की खाड़ी पर मौजूद डिप डिप्रेशन का ट्रैक उत्तर पश्चिम में बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश तक 27/28 सितंबर तक पहुंचने और साथ ही साथ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से 28-30 सितम्बर के दौरान हरियाणा एनसीआर दिल्ली में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा बादलों की आवाजाही के साथ उत्तरी और पूर्वी जिलों में तेज़ गति की हवाओं के साथ हल्की बारिश बूंदाबांदी की गतिविधियों की सम्भावना बन रही है जबकि शेष हरियाणा एनसीआर दिल्ली में कहीं कहीं बिखराव वाली खंड बारिश बूंदाबांदी की गतिविधियों की सम्भावना बन रही है। हरियाणा एनसीआर दिल्ली में लगातार दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है जबकि रात के तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है। दिन के तापमान सामान्य से अधिक जबकि रात के तापमान सामान्य से नीचे बने हुए हैं ?
हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर कमजोर मानसून परिस्थितियां का  असर
हरियाणा एनसीआर दिल्ली क्षेत्र कमजोर मानसून का बहुआयामी प्रभाव पड़ता है। क्योंकि  हरियाणा एनसीआर दिल्ली में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 75 त्न जनसंख्या कृषि कार्यों में लगीं हुईं हैं। मानसून हरियाणा एनसीआर दिल्ली का भाग्य विधाता है। हरियाणा एनसीआर दिल्ली क्षेत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और कृषि केंद्रों में से एक है, इसलिए मानसून की कमी यहाँ के जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित करती है।विभिन्न क्षेत्रों पर इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:
1. मौसम और ऋतुओं पर प्रभाव लंबे समय तक अत्यधिक गमीर्: मानसून के कमजोर होने से उमस और शुष्क गर्मी (रुशश) का दौर लंबा खींच जाता है। जून-जुलाई के बाद भी तापमान सामान्य से ऊपर बना रहता है।ऋतु चक्र में बदलाव: मानसून की वापसी जल्दी या अनियमित होने से शरद ऋतु का आगमन प्रभावित होता है। सर्दियों की शुरुआत में देरी हो सकती है और विंटर सीजन की अवधि छोटी हो जाती है।
2. आर्थिक प्रभाव खेती की लागत में बढ़ोतरी: बारिश की कमी के कारण किसानों को फसलों को बचाने के लिए डीजल इंजन और ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ता है, जिससे सिंचाई की लागत  बहुत बढ़ जाती है।ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्ती: खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट से किसानों की आय कम होती है, जिससे बाजारों में ग्रामीण मांग घट जाती है।महंगाई : सब्जियां, दालें और अन्य खाद्य पदार्थों का उत्पादन घटने से दिल्ली-एनसीआर के खुदरा बाजारों में कीमतें तेजी से बढ़ती हैं ।बिजली संकट: गर्मी बढऩे और सिंचाई के लिए ट्यूबवेल चलने के कारण इस क्षेत्र में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती है, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ता है।
3. सामाजिक प्रभाव जल संकट: दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के शहरों में पीने के पानी की भारी किल्लत हो जाती है क्योंकि भूजल और जलाशयों  का स्तर नीचे चला जाता है।वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएँ: मानसून के दौरान होने वाली बारिश हवा के प्रदूषकों  को साफ करती है। बारिश न होने से हवा जहरीली बनी रहती है, जिससे सांस और फेफड़ों की बीमारियां बढ़ती हैं।मानसिक तनाव: फसलों के खराब होने की आशंका से किसानों में कर्ज और मानसिक तनाव बढ़ता है।
4. मृदा (मिट्टी) पर प्रभाव नमी की कमी: मानसून की बेरुखी से मिट्टी की प्राकृतिक नमी  खत्म हो जाती है, जिससे मिट्टी शुष्क और कठोर हो जाती है।लवणीयता : नहर के पानी की कमी के कारण किसान अत्यधिक खारे भूजल  से सिंचाई करते हैं, जिससे मिट्टी में नमक की मात्रा बढ़ जाती है और भूमि बंजर होने लगती है।सूक्ष्मजीवों को नुकसान: मिट्टी के अत्यधिक गर्म और शुष्क रहने से उसमें मौजूद उपजाऊ बैक्टीरिया और केंचुए जैसे मित्र-जीव नष्ट हो जाते हैं।
     5.  रबी की फसलों पर प्रभाव हालांकि मानसून सीधे तौर पर खरीफ (धान, कपास) को प्रभावित करता है, लेकिन इसका सीधा असर आने वाली रबी सीजन (अक्टूबर-मार्च) पर भी पड़ता है:बुआई में देरी: रबी फसलों जैसे गेहूं, सरसों और चने की बुआई के लिए मिट्टी में शुरुआती नमी  बहुत जरूरी होती है। मानसून कमजोर रहने से बुआई में देरी होती है।भूजल स्तर का गिरना: मानसून में रिचार्ज न होने के कारण रबी सीजन में ट्यूबवेल चलाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे फसलों की सिंचाई प्रभावित होती है।तापमान का असर: सर्दियों में शुरुआती गर्मी बढऩे की आशंका रहती है ( अल-नीनो के कारण), जिससे गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है और दानों का आकार छोटा रह जाता है, जिससे पैदावार घटती है।
फोटो कैप्शन: डा. चंद्रमोहन


 जन्म दिन पर गोशाला में पौधारोपण कर शहीदों को नमन किया
-रहे अनेक जन मौजूद

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कनीना की आवाज।
  पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव का जन्मदिन राजकुमार पूर्व चेयरमैन के निवास स्थान पर मनाया गया। केक काटने के बाद पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव श्रीकृष्ण गोशाला कनीना पहुंची। अपने कार्यकाल के दौरान भी गोशाला में काफी सहयोग किया था वो समय समय पर गोशाला आती रहती है। जन्मदिन के शुभ अवसर पर वहां गो सेवा के बाद पौधारोपण किया गया।
 तत्पश्चात संतोष ने शहीद स्थलों पर जाकर शदीदी दिवस के अवसर पर शहीदों को पुष्प अर्पित किए और शहीदों को नमन किया।
 इस मौके पर भाजपा नेता ओमप्रकाश लिसानियां पूर्व चेयरमैन, होशियार पार्षद, सुरेंद्र पार्षद, राजकुमार पार्षद,सवाई पार्षद,निलम पार्षद, मोहन सिंह पूर्व पार्षद,राज सिंह ठेकेदार, तुलसी राम सोनी, नरेंद्र प्रधान गौशाला, मास्टर रामप्रताप, कुलदीप नंबरदार, रामपाल,हंस राज,रतन सिंह,पोप सिंह और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 04: शहीद तुलाराम को याद करते हुए
             05: कनीना की गोशाला में पौधारोपण करते हुए


डीएवी संस्थान कनीना को पुन: शुरू करवाने के लिए एकजुट हुए लोग
-शहीदी दिवस पर आयोजित जनसभा में पूर्व कर्मचारियों व महिलाओं ने भी दिया समर्थन
- पुराने कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग
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कनीना की आवाज।
शहीदी दिवस के अवसर पर डीएवी अकादमी कनीना को पुन: संचालित करवाने की मांग को लेकर संस्थान परिसर में जनसभा आयोजित की गई। जनसभा की अध्यक्षता हरेंद्र शर्मा ने की। इसमें क्षेत्र के लोगों के साथ पूर्व कर्मचारी और महिलाओं ने भी पहुंचकर संस्थान को दोबारा शुरू करवाने के अभियान को अपना समर्थन दिया।
हरेंद्र शर्मा ने कहा कि बूंद-बूंद से नदी बनती है और इसी तरह छोटे-छोटे प्रयासों से आंदोलन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने ने कहा कि डीएवी शिक्षण संस्थान को पुन: संचालित करवाना अब सभी का मुख्य उद्देश्य है। वहीं पूर्व कर्मचारियों ने कहा कि संस्थान के दोबारा संचालन के समय पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिन्होंने अपना पूरा जीवन डीएवी संस्थान को समर्पित किया है।
डीएवी के लिसान गांव से आए पूर्व विद्यार्थी बिजेंद्र भारद्वाज ने कहा कि डीएवी संस्थान क्षेत्र में लंबे समय तक बेहतर शिक्षा का केंद्र रहा है। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने डीएवी प्रबंधन से संस्थान को पुन: शुरू करने का आग्रह किया।
जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि संस्थान के पुन: संचालन से क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के अवसर मिलेंगे और अभिभावकों को भी लाभ होगा। लोगों ने संस्थान को दोबारा शुरू करवाने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने शहीदी दिवस पर देश के वीर शहीदों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
फोटो कैप्शन 06: डीएवी संस्थान के पुन: शुरू करवाने के लिए इकट्ठे हुए लोग

तीन लोगों के विरुद्ध मार पिटाई व जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज
--गांव सुंदरह का मामला
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कनीना की आवाज।
 गांव सुंदरह के राकेश कुमार ने तीन लोगों पर मार पिटाई और जान से मारने की धमकी देने का मामला दौंगड़ा अहीर पुलिस चौकी में दर्ज करवाया है।
 उन्होंने पुलिस में कहा है कि 12 सितंबर को सुबह 9 बजे वह तथा उसका भतीजा कर्मपाल गांव में जा रहे थे। गांव की फिरनी पर उनका प्लाट है। प्लाट के बटवारे का केस अभी न्यायालय में चल रहा है। प्लाट में पहुंचे तो रामनिवास उसका लड़का सुरेंद्र जेसीबी की सहायता से नीव खोदाई करवा रहे थे। राकेश ने  जेसीबी ड्राइवर को मना किया कहा कि प्लाट का बंटवारा नहीं हुआ है, कनीना कोर्ट में केेस चल रहा है, फैसला होने के बाद ही नीव खोद सकते हैं। इतना कहकर वापस चले कि रामनिवास उसका लड़के सुरेंद्र ने रास्ता रोक लिया और रामनिवास की पत्नी घर से फरसा, जेली आदि ले आई। इसी बीच कर्मपाल ने घर पर फोन किया तो राकेश कुमार की पत्नी राजबाला व उसका भाई सतपाल भी मौके पर आ पहुंचे। तभी अनीता, सुरेंद्र एवं रामनिवास ने फरसा, जेली आदि से वार किए। जिसमें राकेश कुमार, उसकी पत्नी राजबाला और कर्मपाल घायल हो गए ।तभी शोर मचाया तो मौके पर वीरेंद्र, मनोज एवं अशोक आदि बी बचाव में आए। तभी राकेश के स्वजन भी मौके पर पहुंचे। तीन घायलों को कनीना अस्पताल ले जाया गया। तभी डाक्टरों ने राकेश को रोहतक पीजीआइएमएस ,कर्मपाल को नारनौल अस्पताल, राजबाला को महेंद्रगढ़ अस्पताल रेफर कर दिया। इलाज करवा कर अब राकेश कुमार ने तीन लोगों पर मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।


शहीद राव तुलाराम को शहीदी दिवस पर आर्य समाज ने किया याद
--नसीबपुर का युद्ध सदा याद रहेगा-राव मोहर सिंह
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कनीना की आवाज।
आर्य समाज कनीना ने शहीद राव तुलाराम को उनके शहीदी दिवस पर याद किया। कनीना के शहीदी दिवस पर उनकी फोटो समक्ष पुष्प अर्पित किए और कहा कि उनसे महान शहीद अहीरवाल क्षेत्र का और कोई हो ही नहीं सकता।
 इस मौके पर मुख्य अतिथि राव मोहर सिंह प्रधान रहे। जिन्होंने कहा कि अहीरवाल की शान शहीद राव तुलाराम रहे हैं। जिनकी ऊंची कद काठी को देखकर दुश्मन थर थर कांपते थे। नसीपुर की उनकी लड़ाई सदा याद रहेगी।
राव मोहर सिंह ने कहा कि राव तुलाराम का जन्म रेवाड़ी राज परिवार में हुआ था, लेकिन उनका जीवन फूलों की सेज नहीं, बल्कि काँटों का ताज था। नियति ने बहुत छोटी उम्र में ही उनके कंधों पर राज सिंहासन का भार डाल दिया। पिता की मृत्यु के बाद, एक किशोर बालक ने जिस परिपक्वता और साहस के साथ सत्ता संभाली, उसने यह सिद्ध कर दिया था कि यह बालक आगे चलकर इतिहास रचेगा। उनमें बचपन से ही नेतृत्व के गुण और देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी।
अंग्रेजों के खिलाफ सुनियोजित विद्रोह का शंखनाद-
1857 की क्रांति केवल एक तात्कालिक आक्रोश का परिणाम नहीं थी, बल्कि कई जगहों पर यह एक सुनियोजित रणनीति थी, और राव तुलाराम इसके प्रमुख सूत्रधारों में से एक थे। वे अंग्रेजों की विस्तारवादी और शोषणकारी नीतियों को भली-भांति समझते थे। उन्होंने चुपचाप अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाई, हथियार जुटाए और जनता को एकजुट किया। जैसे ही क्रांति का बिगुल बजा, राव तुलाराम ने रेवाड़ी क्षेत्र से अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंका और खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया। उनकी संगठनात्मक क्षमता अद्भुत थी।
 नसीबपुर का ऐतिहासिक युद्ध-
1857 की सबसे भीषण लड़ाई।इतिहास गवाह है कि 16 नवंबर 1857 को नारनौल के पास नसीबपुर के मैदान में जो युद्ध हुआ, वह प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की और अविभाजित भारत की सबसे बड़ी और सबसे खूनी लड़ाइयों में से एक था। यह कोई छोटी-मोटी झड़प नहीं थी, बल्कि एक महायुद्ध था।
राव तुलाराम और उनके भाई गोपाल देव के नेतृत्व में लगभग 5000 वीरों ने अंग्रेजों और उनके सहयोगियों की विशाल और आधुनिक सेना का सामना किया। नसीबपुर की धरती उस दिन वीरों के रक्त से लाल हो गई थी। राव तुलाराम की सेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया। अंग्रेजी कमांडर भी उनकी वीरता देखकर दंग रह गए थे। भले ही संसाधनों की कमी के कारण इस युद्ध का परिणाम अपेक्षित नहीं रहा, लेकिन इस युद्ध ने अंग्रेजों की कमर तोड़ दी थी और यह साबित कर दिया था कि भारतीय वीर अपनी मिट्टी के लिए किस हद तक जा सकते हैं।
राव मोहर सिंह ने कहा कि नसीबपुर के युद्ध के बाद भी राव तुलाराम का मनोबल नहीं टूटा। वे जानते थे कि यह संघर्ष लंबा चलेगा। वे भूमिगत हो गए और देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर राजस्थान में जाकर, तात्या टोपे और अन्य क्रांतिकारी नेताओं के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
जब उन्हें लगा कि देश के भीतर से अंग्रेजों को हराना मुश्किल हो रहा है, तो उन्होंने एक दूरदर्शी कदम उठाया। वे विदेशी सैन्य सहायता प्राप्त करने के लिए एक कठिन और जोखिम भरी यात्रा पर निकल पड़े। रूस के जार से मिलने की कोशिश में वे ईरान गए और फिर अफगानिस्तान के शासकों से मदद की गुहार लगाई। उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग से भारत को आजाद कराना था।
देश को गुलामी की बेडिय़ों से मुक्त कराने के लिए विदेश से सैन्य सहायता का प्रयास करने वाले वो अविभाजित भारत के प्रथम राजदूत थे, उनके बाद ऐसा दूसरा व्यक्ति नेता जी सुभाष चंद्र बोस थे।
दुर्भाग्यवश, काबुल (अफगानिस्तान) में लगभग 38 वर्ष की छोटी उम्र में आज ही के दिन यानी कि 23 सितंबर 1863 को, मातृभूमि की आजादी का सपना अपनी आँखों में लिए, यह महान योद्धा हमेशा के लिए सो गया। इस मौके पर मनफूल सिंह आर्य, बलवान सिंह आर्य, मास्टर भूप सिंह ,मास्टर राजेश, एडवोकेट विनय, प्रेम आर्य, भूतपूर्व सैनिक संस्था अर्जुन सिंह, वीरेंद्र सिंह, अजय कुमार आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 03:राव तुलाराम को याद करते हुए



राव तुलाराम के शहीदी दिवस पर पौधारोपण, वीर योद्धा को अनोखी श्रद्धांजलि
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कनीना की आवाज।
महान क्रांतिकारी एवं वीर योद्धा राव तुलाराम के शहीदी दिवस 23 सितम्बर के अवसर पर पर्यावरण प्रेमी मनोज कुमार रामबास व अन्य युवाओं ने पौधारोपण कर वीर योद्धा को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पौधे लगाकर न केवल राव तुलाराम के बलिदान को याद किया गया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश भी दिया गया।
मनोज कुमार ने कहा कि राव तुलाराम का जीवन साहस, त्याग, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की मिसाल है। उनके शहीदी दिवस पर पौधा लगाना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को प्रकृति संरक्षण के माध्यम से आगे बढ़ाने का संकल्प है। जिस प्रकार वीरों ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उसी प्रकार आज हमें प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनकर समाज को छाया, आक्सीजन, फल और हरियाली प्रदान करेंगे। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को पौधारोपण से जोडऩा चाहिए और केवल पौधा लगाने तक सीमित न रहकर उसकी नियमित देखभाल एवं सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राव तुलाराम  के साहस और देशभक्ति से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण को जन-अभियान बनाएं। एक पौधा लगाना आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ हवा और हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर वीर राव तुलाराम को नमन करते हुए शहीदों की स्मृति में पौधा लगाएं, पौधे को वृक्ष बनाएं और हरियाणा को हरा-भरा बनाएं का संदेश दिया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि वीरों की सच्ची स्मृति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के लिए किए गए सकारात्मक कार्यों में जीवित रहती है।
फोटो कैप्शन 02: पौधारोपण कर शहीद राव तुलाराम को याद करते हुए



भोजावास में आयोजित हुआ जिला स्तरीय आयुर्वेदिक शिविर
-185 रोगियों की हुई निश्शुल्क जांच
-आयुर्वेद ही जीवन का आधार है- डा. सतीश
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कनीना की आवाज।
आयुष विभाग के महानिदेशक संजीव वर्मा के निर्देशानुसार व उपायुक्त अनुपमा अंजली के मार्गदर्शन में आज सेवा संकल्प अभियान के तहत 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य पर कनीना उपमंडल के गांव भोजावास स्थित ग्राम सचिवालय परिसर में जिला स्तरीय आयुर्वेदिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। शिविर का शुभारंभ जिला योग समन्वयक डा. सतीश कुमार एवं सरपंच प्रतिनिधि पवन कुमार ने आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। शिविर में 185 रोगियों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें निश्शुल्क आयुर्वेदिक औषधियां वितरित की तथा औषधीय पौधों के महत्व की जानकारी देकर पौधे भी बांटे।
जिला योग समन्वयक डा. सतीश कुमार ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का विज्ञान है। उन्होंने कहा सेवा संकल्प अभियान का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुंचाना है। आज की अनियमित दिनचर्या और खानपान के कारण रोग बढ़ रहे हैं। आयुर्वेद बिना किसी दुष्प्रभाव के रोग को जड़ से खत्म करता है। हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में योग, प्राणायाम और आयुर्वेद को अपनाना चाहिए। तभी स्वस्थ भारत और विकसित भारत का सपना साकार होगा।
शिविर के सह-नोडल अधिकारी डॉ. विकास यादव ने कहा कि सरकार ग्रामीणों को उनके घर-द्वार पर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा इस शिविर में 185 मरीजों को आयुर्वेदिक दवाइयां वितरित कर उन्हें परामर्श दिया गया। उन्होंने बताया कि अधिकांश लोगों में मौसमी बीमारियों, जोड़ों के दर्द, मधुमेह, रक्तचाप और उदर रोग की समस्या पाई गई तथा सभी को निशुल्क दवाएं दी गई। साथ ही तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा और आंवला जैसे औषधीय पौधों की जानकारी और पौधे भी वितरित किए, ताकि लोग अपने घर में ही छोटी बीमारियों का उपचार कर सकें और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकें।
शिविर के दौरान चिकित्सकों द्वारा उपस्थित ग्रामीणों के रक्तचाप, मधुमेह और नाड़ी परीक्षण की गहन जांच की गई। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर आयुष योग सहायकों द्वारा रोगियों को व आए हुए ग्रामीणों को योग के बारे में बताया गया तथा उन्हें योग की विभिन्न मुद्राओं व प्राणायाम के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर जिले के समस्त आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, आयुष फार्मेसिस्ट व समस्त आयुष योग सहायकों सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 07: रोगियों की जांच करते चिकित्सक।













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