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Monday, June 10, 2024


 

पूर्व एसपी मातादीन का 87 वर्ष की उम्र में निधन
--जसवंत सिंह बबलू भाजपा नेता के पिता थे
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कनीना की आवाज। जसवंत यादव  बबलू पूर्व प्रदेश मंत्री भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के पिता मातादीन यादव (सेवानिवृत्त एसपी ) का इलाज के दौरान सोमवार को गुरुग्राम के आर्टिमिस अस्पताल में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार कनीना में मंगलवार सुबह 9 बजे बस स्टैंड के पास स्थित बाबा मोलडऩाथ आश्रम के सामने शमशान घाट में किया जाएगा। बबलू की माता जी सजनी देवी का 17 वर्ष पहले ही निधन हो चुका है। मातादीन साहब अपने पीछे दो पुत्र जसवंत एवं हरीश, एक पुत्री, चार पोते सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। वे कनीना शिक्षा समिति के सचिव भी रहे हैं।  उनके पौत्र एवं दोहते, दोहती आस्ट्रेलिया, कनाडा में रहते हैं। कनीना में शोक की लहर है। जसवंत सिंह बबलू अपने जमाने के प्रसिद्ध भाजपा नेता हैं।
फोटो कैप्शन: पूर्व डीएसपी मातादीन।



शिक्षा विभाग में नहीं लगता इस वर्ष होंगे तबादले
-कई जंजाल मुंह बाये हैं खड़े
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कनीना की आवाज। यद्यपि हरियाणा सरकार और विभिन्न संघ जुलाई -अगस्त महीने में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की तबादलों के पक्ष में हैं किंतु परिस्थितियों इस प्रकार की बनती जा रही है कि शायद ये बदलियां नहीं हो पाएंगी। एक और जहां सरकार अपनी खराब साख को मिटाने के लिए भरसक प्रयास करेगी कि ये तबादले हो ताकि कर्मचारी खुश हो जाए जो कि कर्मचारी अभी तक नाखुश हैं। अगर तबादले हो जाते हैं तो हो सकता है कुछ कर्मचारी खुश हो जाए परंतु इतने ही कर्मचारी जिनकी दूर दराज बदली होगी नाखुश हो जाएंगे। यही नहीं इस बार 8 नगर निगमों एवं 22 नगर पालिकाओं के चुनाव भी मुंह बाये खड़े हैं। अगर नगर पालिकाओं के चुनाव होते हैं तो यह तबादले एक बार फिर से रुक जाएंगे और विधानसभा चुनाव फिर आगे मुंह बाये खड़े मिलेंगे। इसके बाद नए सत्र 2025 में ही ये बदलियां हो पाएंगे, अभी तक सभी शिक्षक आश्वस्त है कि शायद इस बार बदलियां हो जाए? विगत वर्ष जहां बदलिया ऐन मौके पर रोक दी गई थी बिना किसी कारण से रोक दी गई थी। इस प्रकार नहीं लगता कि बदलियों की राह आसान हो फिर भी जब तक सांस तब तक आश। आज कर्मचारी लगातार प्रयासरत है कि किसी प्रकार उनके तबादले हो जाए और वह अपने घर के पास पहुंच जाए। अब देखना है कि सरकार क्या ये तबादले इस वर्ष कर पाती हैं? अगर यह तबादले अगस्त महीने तक नहीं हो पाए तो आचार संहिता लग जाएगी और चुनाव विधानसभा चुनाव में फंस जाएंगे, इससे पहले भी नगर पालिका के चुनाव अगर होते हैं तो तबादले रुक जाएंगे। इन परिस्थितियों के चलते नहीं लगता कि शिक्षकों के तबादले होंगे। अब देखना है कि सरकार और शिक्षा विभाग किस प्रकार ये तबादले करता है या अपनी योजना में असफल होते हैं।




कनीना में 6 जोहड़ों की हो खोदाई, अमृत सरोवर योजना सिरे नहीं चढ़ पाई कनीना में
-कनीना की गलियों को जलमग्र करने में इनका अहम रोल
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कनीना की आवाज। दिनोंदिन भूमिगत जल कम होता जा रहा है। कनीना को पहले ही डार्क जोन घोषित किया हुआ है किंतु पेयजल और भूमिगत जल को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। कनीना के जोहड़ गंदे पानी से लबालब भरे खड़े हैं। हर वर्ष कनीना की गलियों को जलमग्र करने में जोहडों का अहं योगदान रहा है। सरकार को भारी क्षति उठानी पड़ी है।
जोहड़ों की हो खोदाई-
कनीना क्षेत्र में करीब छह जोहड़ पानी से भरे रहते हैं। इन जोहड़ों की खोदाई की जरूरत है। कनीना के दो प्रमुख जोहड़ होलीवाला और कालरवाली जोहड़ लबालब पानी से भरे हैं।  खोदाई न होने और जल की को सही ढंग से न सहेजे जाने के कारण गंदा जल दूर-दराज तक फैल रहा है और सैकड़ों हरे पेड़ों को लील लिया है। अमृत सरोवर योजना के तहत राशि तो मंजूर है किंतु अमृत सरोवर नहीं बन पाये हैं। पालिका के पूर्व प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि उनके समय में जोहड़ों की खोदाई एवं अमृत जल योजना के तहत राशि मंजूर हो चुकी थी किंतु आ नहीं पाई जिसके चलते किसी भी तालाब को अमृत सरोवर नहीं बनाया जा सका।
विगत 20 वर्षों में कनीना क्षेत्र में जलस्तर गिरता ही जा रहा है। कभी 20 मीटर गहराई पर होता था जो अब 70 मीटर गहरा जा चुका है। पूरा जिला महेंद्रगढ़ ही डार्क जोन घोषित हो चुका है। दिनोंदिन जल का दोहन हो रहा है किंतु जल की आपूर्ति जो वर्षा से होती है वो घटती ही जा रही है। करीब 20 वर्षों में कनीना क्षेत्र में हुई वर्षा पर नजर डाले तो पता चलता है कि वर्ष 1995 व 1996 में कुछ वर्षा हुई जबकि अन्य वर्ष अल्प वर्षा हुई है।
नालियों में बहा रहे हैं जल-
कनीना क्षेत्र ही नहीं अपितु आस पास के लोग पेयजल से गाडिय़ां धोते, नालियां साफ करते, भैंस को नहलाते देखे जा सकते हैं और पेयजल से गलियों को साफ करते है। भूमिगत जल का दोहन हो रहा है। यू ही जल का दोहन हुआ तो जल पाताल में पहुंच जाएगा। नुकसान की ओर नजर डाले तो कस्बे के दोनों जोहड़ों ने यहां तीन दर्जन बड़े-बड़े विशालकाय पेड़ों को लील लिया है। जोहड़ों में तीन दर्जन विशालकाय पेेड़ समा गए हैं, वही अभी भी आधा दर्जन पेड़ सूखे खड़े हुए हैं। इन जोहड़ों के कारण विगत समय में जहां होलीवाला सड़क मार्ग, कालर वाली जोहड़ से जहां रेवाड़ी सड़क मार्ग को क्षतिग्रस्त कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है परंतु सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के आधुनिकीकरण किए जाने के बाद ही यह समस्या संभव हो सकती है।
 जब कभी वर्षा होती है तब ये जोहड़ गंदे पानी से भरे जानलेवा साबित हो सकते हैं। ऐसे में इन जोहड़ों की समस्या का समाधान करना जरूरी बन गया है। एडवोकेट पंकज यादव बताते हैं कि होलीवाला जोहड़ ने तो मुख्य सड़क मार्ग से आवागमन बंद करने में कसर नहीं छोड़ी है। यह जोहड़ आफत बन जाता है। इस संबंध में विभिन्न अधिकारियों से बात की गई जिनके विचार निम्र हैं-
*** होलीवाला जोहड़ के गंदे पानी और गाद को निकालने के लिए प्रस्ताव पास किया जा चुका है। 20 दिनों में टेंडर छोड़कर इसके जल को निकाल दिया जाएगा ताकि वर्षा के समय जोहड़ का पानी आस पास न फैल पाए।
 --जयबीर सिंह जेई,कनीना पालिका
अमृत सरोवर के लिए अभी तक कोई राशि नहीं आई है वरना इस जोहड़ की कायाकल्प की जा सकती है। सरकार से इस संबंध में बात की जाएगी।
  ---सीताराम विधायक अटेली
सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की हालात सुधार दी गई है। पांच मोटरें लगा दी गई हैं जो कनीना कस्बा के गंदे जल को खींचकर पीपलवाली बणी में गंदे जल को पहुंचाएंगी जहां पानी साफ कर किसानों को उपलब्ध हो पाएगा। ये मोटर दो हजार से 6 हजार लीटर पानी एक मिनट में खींच सकती हैं। इस बार जोहड़ों की समस्या नहीं आएगी। उनका पानी खींचकर एसटीपी तक ले जाया जाएगा और वर्षा का जल इन जोहड़ों में संचित हो जाएगा।
--नरेंद्र सिंह एसडीओ जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो कैप्शन 7 व 8: होलीवाला जोहड़ कनीना
साथ में नरेंद्र सिंह एसडीओ जनस्वास्थ्य विभाग




 भाजपा को मजबूती देने वाले दक्षिणी हरियाणा के साथ इस बार भी सौतेला व्यवहार क्यों
-6 बार के सांसद को केवल राज्यमंत्री, 3 बार के सांसद को कुछ नहीं और 1 बार के सांसद को सीधा कैबिनेट मंत्री
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कनीना की आवाज। देश में सरकार और उनके मंत्रीमंडल गठन में हर बार की तरह इस बार भी दक्षिण हरियाणा के साथ भेदभाव किया गया है। अगर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर , पक्ष-विपक्ष, राजनीतिक पार्टियां सब भूलकर सिर्फ दक्षिणी हरियाणा के हक की बात की जाए तो आज दक्षिणी हरियाणा की जनता अपने आप को भाजपा राज में ठगा हुआ सा महसूस कर रही है। पिछले 10 सालों की तरह इस बार भी दक्षिण हरियाणा की जनता ने भाजपा के उम्मीदवारों को जीताकर विधायक व सांसद बनाकर भेजा है, लेकिन जब दक्षिण हरियाणा के प्रतिनिधित्व की बात की जाए तो दक्षिण हरियाणा के साथ हमेशा भेदभाव किया जाता रहा है।
 मोदी कैबिनेट में हरियाणा प्रदेश से सबसे अधिक 6 बार सांसद चुने जा चुके सांसद राव इंद्रजीत को केवल राज्यमंत्री बनाया गया है। वहीं दक्षिण हरियाणा की महेंद्रगढ़-भिवानी लोकसभा सीट से पिछली तीन बार से लगातार सांसद चुने गए चौधरी धर्मबीर सिंह को पिछले दो कार्यकाल की तरह इस बार भी खाली रखा गया है, यानि कुछ नहीं दिया गया, जबकि दक्षिण हरियाणा की जनता ने भाजपा के कठिन समय में भी चौधरी धर्मबीर सिंह को सांसद बनाकर संसद भेजा है। वहीं बात की जाए मनोहर लाल की तो वे पहली बार सांसद चुने गए हैं और पहली बार में ही उनको सीधा कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है। इससे पहले भी मनोहर लाल को पहली बार विधायक चुने जाने पर ही मुख्यमंत्री बना दिया गया था। इस प्रकार भाजपा सरकार ने दक्षिण हरियाणा के साथ भेदभाव करने का काम किया है। सरकार भले की दक्षिणी हरियाणा का हितैषी होने का दिखावा करती रही हो, लेकिन जब बात प्रतिनिधित्व की आती है तो हर बार दक्षिणी हरियाणा की अनदेखी कर दी जाती है।




 खेल महाकुंभ के लिए बच्चों की चली ट्रायल
--भीषण धूप में कुछ कपड़ों में ही दिया ट्रायल
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कनीना की आवाज। हरियाणा राज्य क्षेत्रिय खेल महाकुंभ आगामी 18 जुलाई से शुरू होने जा रहा है जिसके चयन को लेकर हर जिले में विभिन्न गेम कराए जा रहे हैं जिसमें जिला महेंद्रगढ़ में 24 गेम चल रहे हैं जिसमें  फुटबाल प्रतियोगिता की चयन  ट्रायल कनीना के निकटवर्ती ग्राम धनौंदा में संजू कोच तथा कपिल व प्रदीप की देखरेख में चल रही है। ट्रायल देने आए खिलाडिय़ों का कहना है कि यह चयन प्रतियोगिता सुबह 7 बजे से  शुरू कराई जानी चाहिए थी लेकिन यह प्रतियोगिता की ट्रायल लगभग 10 के बाद शुरू की गई जिसमें ट्राई देने आए लगभग 34 खिलाडिय़ों  ने मात्र 15 मिनट ग्राउंड में अपना प्रदर्शन दिखाया उसके बाद ट्रायल गेम समाप्त कर दिया गया यहां गौरतलब है कि इतनी भारी गर्मी के बावजूद इस तरह की ट्रायल लेना 10 न्यायोचित  नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों का यह भी कहना था की ट्रायल देने आए कुछ फुटबाल खिलाडिय़ों के शरीर पर कपड़े भी नहीं थे। यहां गौरतलब यह भी है कि जिन फुटबाल खिलाडिय़ों की चयन प्रतियोगिता ट्रायल यहां कराई गई उनको मात्र 15 मिनट का टाइम ही दिया गया जिस के कारण खिलाड़ी मायूस होकर के  लौट गए जब इसके बारे में ट्राई देने आए कुछ खिलाडिय़ों से बात की गई तो उनका कहना था क्या करें सर इतनी धूप में आदमी चल नहीं सकता तो हम ट्रायल कैसे दे सकते हैं? लेकिन हमारी मजबूरी है की ट्राई लेने वाले कोच साहब के आदेश हैं के ट्रायल देनी ही पड़ेगी। यहां मजेदार बात यह भी है इतनी भारी गर्मी में हर व्यक्ति का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है वही इस तपती दुपहरी में खेल महाकुंभ के लिए धनौंदा में फुटबाल की ट्रायल ली जा रही है । जब इस बारे में ट्राई लेने आए कोच साइन बानो से बात की गई तो उनका कहना था खिलाड़ी लेट आए, इस वजह से ट्राई लेट हो वही इस बारे में जब डीएसओ  नारनौल से बात की गई तो उनका कहना था कि आज लास्ट डे था और 24 खेलों की ट्रायल पूरे जिले में चल रही है। मैं भी फिलहाल नारनौल ग्राउंड में खड़ा बच्चों की टाइल ले रहा हूं, हमने कोच वगैरह को सुबह ट्राई लेने का आदेश दे दिया था अब उन्होंने किस प्रकार से ट्रायल लिया है इसके बारे में बात की  जाएगी।
फोटो कैप्शन 06: खेल महाकुंभ की ट्रायल देते खिलाड़ी।



 गर्भवती महिलाओं को निशुल्क इलाज के साथ मुफ्त में दिया जाता है राशन
--अस्पताल में लगा कैंप
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कनीना की आवाज। प्रधानमंत्री सुरक्षा मातृत्व  योजना के तहत स्थानीय उप नागरिक अस्पताल कनीना में गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए कैंप का आयोजन किया गया जिसमें आस-पड़ोस के 50 गांवों की 150 महिलाओं ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई और उपचार लिया।
 मिली जानकारी के अनुसार उप नागरिक अस्पताल के एमओ डा. जितेंद्र मोरवाल ने  जानकारी देते हुए बताया कि  उप नागरिक अस्पताल कनीना में प्रधानमंत्री सुरक्षा मातृत्व योजना के तहत कैंप का आयोजन किया गया जिसमें अस्पताल की  महिला चिकित्सक तमन्ना  द्वारा गर्भवती महिलाओं की जांच कर उनको निशुल्क दवाइयां वितरित की जाती है। डा. मोरवाल ने बताया इस कैंप का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं के पेट में पल रहे बच्चे को स्वस्थ रखना व उनकी माताओं को स्वस्थ रखना है ताकि स्वस्थ माता ही स्वस्थ शिशु को जन्म देती हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ रखने के लिए उनकी सभी प्रकार की जांच वह दवाइयां दी जाती हैं तथा उनका निशुल्क पोषक आहार भी दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी शुगर, थायराइड, हिमोग्लोबिन ,आरबीसी एचआईवी, यूरिन, ,एचआईवी  के अलावा अन्य कई प्रकार की जांच स्थानीय अस्पताल में ही कराई जाती हैं ताकि इस बात का पता लगाया जा सके की  महिलाओं व उनके गर्भ में पल रहा बच्चा कितना स्वस्थ है? कैंप में आई महिलाओं को संबोधित करते हुए डाक्टर तमन्ना ने बताया इस समय में महिलाओं को मानसिक रूप से व शारीरिक रूप से स्वस्थ होना अति आवश्यक है क्योंकि मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने वाली महिलाओं के पेट में पल रहे शिशुओं पर उनका गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कैंप में महिलाओं को स्वस्थ रहने के भी कई नुसखे बताएं और कहा हरी सब्जियां फल, दूध, घी आदि जल्दी हजम होने वाले मोटे अनाज के साथ अंडे तथा ताजा फल का प्रयोग गर्भवती महिलाओं के लिए अति उत्तम होता है। इसलिए उनको समय-समय पर यह सभी चीज लेते हुए नजदीक के सरकारी अस्पतालों में अपनी वह अपने पेट में पल रहे शिशु की जांच करती रहना चाहिए ताकि भविष्य में उनको इसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। इस कैंप में विकास लैब टेक्नीशियन मोहित, लैब टेक्नीशियन  सुरेंद्र, टेक्नीशियन सुनील कुमार, एड्स काउंसलर रणधीर सिंह, शर्मिला स्टाफ नर्स अंजू बाला स्टाफ नर्स ने बताया इस कैंप में 150 महिलाओं ने  भाग लिया और विभिन्न प्रकार के टेस्ट भी कराये गये।
फोटो कैप्शन 05: महिलाएं अस्पताल में जांच करवाते हुए।





बीपीएल प्लाटों के इंतकाल को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
--कोका गांव के लोग पहुंचे एसडीएम कार्यालय
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कनीना की आवाज। सरकार द्वारा दिए गए बीपीएल प्लाट की इंतकाल दर्ज करने को लेकर आज गांव कोका निवासी दर्जनों पीडि़त महिला एवं पुरुषों ने एसडीएम कनीना के माध्यम से जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन भेज कर जल्द से जल्द इंतकाल दर्ज करने की गुहार लगाई है उन्होंने अपने ज्ञापन में कहा है कि सरकार ने ग्राम पंचायत की जमीन पर हमें जो बीपीएल के प्लाट दिए हैं। उनका न तो आज तक हमें कब्जा मिला है और ना ही इंतकाल दर्ज हुए हैं। इसके कारण अभी हमारा इंतकाल का काम अधूरा पड़ा है जिसे पूरा कराया जाए
फोटो कैप्शन 02: एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपते ग्रामीण।






खिलाडिय़ों का चयन एसडी स्कूल में संपन्न
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कनीना की आवाज। हरियाणा खेल विभाग की ओर से आयोजित किए जाने वाले राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ के लिए जिला की महिला खिलाडिय़ों का चयन रविवार को व पुरुष खिलाड्यिों का चयन सोमवार को एसडी विद्यालय ककराला में बाक्सिंग खेल के लिए चयन किया गया। जिसमें महिला वर्ग में 20 खिलाडिय़ों ने भाग लिया जिसमें से 10 महिला खिलाडिय़ों का भार के अनुसार चयन किया गया। 48 किलो ग्राम भार वर्ग में पूजा, 50 किलो ग्राम भार वर्ग में खुशी, 52 किलो ग्राम भार वर्ग में दीति, 54 किलो ग्राम भार वर्ग में पूनम, 57 किलो ग्राम भार वर्ग में गरवी, 60 किलो ग्राम भार वर्ग में मधुर, 63 किलो ग्राम भार वर्ग में अनिषा, 66 किलो ग्राम भार वर्ग में गरिमा, 70 किलो ग्राम भार वर्ग में चंचल, 75 किलो ग्राम भार वर्ग में दीपिका ने प्रथम स्थान हासिल किया पुरुष 48 किलो ग्राम भार वर्ग में सुदीप, 51 किलो ग्राम भार वर्ग में दीक्षांत, 54 किलो ग्राम भार वर्ग में प्रदीप, 50 किलो ग्राम भार वर्ग में अमन, 60 किलो ग्राम भार वर्ग में दीपांशु, 67 किलो ग्राम भार वर्ग में नीतिश, 71 किलो ग्राम भार वर्ग में विवेक, 75 किलो ग्राम भार वर्ग में भारत, 80 किलो ग्राम भार वर्ग में विजय, 92 किलो ग्राम भार वर्ग में पियूष प्रथम स्थान हासिल किया।
चेयरमैन जगदेव यादव ने बताया कि इस प्रकार की खेल गतिविधियों से प्रतिभागियों का शारीरिक दक्षता और क्षमता बढ़ती है। खेलों से हृदय मजबूत बनता है एवं मांसपेशियां विकसित होती हैं। खेलों से खिलाडिय़ों में संयम बढ़ता है तथा एक दूसरे के लिए सहयोग के भाव भी पैदा होते हैं। इस अवसर पर सभी गणमान्य सदस्य मोनिका जूनियर बाक्सिंग कोच खेल विभाग नारनौल सतीश सोलंकी बाक्सिंग कोच, प्राचार्य ओमप्रकाश यादव, राजेन्द्र सिंह, अधिकारी वर्ग पूर्ण सिंह, नरेन्द्र यादव, आर एस यादव, उत्तम सिंह, सोनपाल, रतन सिंह व समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: बाक्सिंग के लिए चुने गये खिलाड़ी।


नहर के साथ साथ मार्ग को अविलंब किया जाये निर्मित
-जल्द ही छोड़े जा रहे हैं टेंडर-विधायक
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कनीना की आवाज। अटेली व रेवाड़ी सड़क मार्गों से मिलाने वाला नहर के साथ.साथ मार्ग को अविलंब निर्मित किये जाने की मांग कनीनावासियों ने की है। कनीना के विभिन्न मार्गों को पक्का करने या पुन: निर्मित किये जाने की कार्रवाई जारी है किंतु वर्षों से कनीनावासियों की प्रमुख मांग अधर में अटकी है। रेवाड़ी.अटेली मार्गों को नहर के साथ साथ जोडऩे वाला मार्ग आधा अधूरा करीब आठ साल पहले निर्मित हुआ था। पूर्व प्रधान सतीश जेलदार ने इसे सिरे चढ़ाने का प्रयास किया था जिसके चलते नहर को भूमिगत कर दिया गया था किंतु पेड़ों को हटाने तथा बिजली की लाइनों को हटाने की कार्रवाई नहीं हो पाई थी। वर्तमान में कनीना प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम कनीना हैं जिनसे कनीनावासी यह मार्ग पूरी किये जाने की आश टिकाये हैं।
  उल्लेखनीय है कि मार्ग के साथ साथ गुजरने वाली नहर को भूमिगत कर दिया है। अब सड़क निर्माण कर दोनों तरफ से आवागमन बाइपास के रूप में किया जा सकता है। इसके लिए लंबे समय से कार्रवाई चल रही है किंतु अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। यह करीब 3 किलोमीटर का रास्ता है जिसमें से आधा मार्ग करीब 8 वर्षों पहले नगर पालिका द्वारा पक्का किया हुआ है। जो अति जर्जर हो गया है। अगर यह मार्ग पुन: निर्मित हो जाये तो रेवाड़ी से अटेली अटेली से रेवाड़ी जाने वाली लोगों को भारी लाभ होगा। नगर पालिका के पूर्व प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि उनकी दिली इच्छा थी कि मिनी बाईपास उनके कार्यकाल में बन जाए किंतु उनके कार्यकाल में नहीं बन पाया। अब एसडीएम कनीना प्रशासनिक अधिकारी हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एसडीएम की देखरेख में यह मिनी बाईपास बन जाएगा। मिनी बाईपास बनता है तो हर इंसान को ही लाभ होगा।
नहर के साथ साथ एक तरफ की सड़क बनाने के लिए टेंडर या तो छोड़ दिये गये हैं या फिर अविलंब छोड़ दिये जाएंगे। इस प्रकार सड़क की समस्या का समाधान हो जाएगा। नहर के दूसरी तरफ सड़क मार्ग का भविष्य में समाधान हो जाएगा।
..सीताराम विधायक अटेली
फोटो कैप्शन 02: नहर के साथ का कच्चा मार्ग
साथ में विधायक सीताराम अटेली।





गंदे नाले गाद से खड़े हैं भरे
-प्री-मानसून के इसी माह दस्तक की संभावना
-नालों की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है-समयपाल सिंह सचिव
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कनीना की आवाज।  कनीना के सभी गंदे नाले एवं कुछ नालियां गाद से भरी खड़ी हैं। एक और जहां प्री-मानसून इसी माह दस्तक दे सकता है वही अभी तक इन गंदे नालों की सफाई नहीं की गई है। कनीना के प्रशासक एसडीएम है जो विकास कार्यों की ओर तो ध्यान दे रहे हैं लेकिन अभी तक गंदे नालों की और कोई ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कनीना कस्बे में कभी 6 गंदे पानी के जोहड़ होते थे इस समय महज दो जोहड़ बचे हैं। जिनमें एक होलीवाला और दूसरा कालरवाली है। दोनों ही जोहड़ इस समय गंदे पानी से भरे खड़े हैं। पूरे कस्बा जिसमें कनीना अनाज मंडी, मुख्य कस्बा का गंदा पानी इन नालों द्वारा जोहड़ों तक पहुंचता है परंतु अभी तक तो ये गंदे नाले इस प्रकार भरे खड़े हैं कि यही नहीं पता चल पाता कि यहां गंदा नाला भी होगा? जहां होलीवाला जोहड़ में कनीना के आधे कस्बा का गंदा पानी पहुंचता है। इसको गंदे पानी को ले जाने वाले नाले जोहड़ के पास अटे पड़े हैं जिसके चलते गंदा पानी दूर-दूर तक बिखर रहा है। एक तरफ जहां ये जोहड़ अतिक्रमण के शिकार हैं वही कितने पेड़ पौधों को  गंदा जल लील रहा है। लोग बेहद परेशान है। आसपास दूर दराज तक बदबू फैल रही है। गंदे नालों की अगर सफाई नहीं करवाई गई और गाद नहीं निकलवाई गई तो आने वाले समय में भारी परेशानी का कारण बन सकते हैं। उधर यही हालात कालरवाली जोहड़ की है। आधे कस्बे का गंदा पानी कालरवाली जोहड़ में पहुंचता है लेकिन जोहड़ तक पानी ले जाने वाले नाले पूर्ण रूप से गाद से भरे पड़े हैं।  अगर देखा जाए तो ये गंदे नाले संत मोलडऩाथ आश्रम के करीब से गुजरते हैं और सबसे ज्यादा लंबी दूरी तय करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में जहां बारिश के समय गलियां जलमग्न हो गई थी, गंदा पानी कई कई दिनों तक सड़कों पर खड़ा देखा गया था। यदि इन गंदे नालों की सफाई नहीं करवाई गई और जोहड़ों को साफ नहीं करवाया गया तो आने वाले समय में एक बार फिर से मुसीबत बन सकते हैं। ऐसे में जहां कनीना के लोग विशेष कर जिनके घर गंदे नालों के पास पड़ते हैं बेहद परेशान है क्योंकि इन नालों का गंदा पानी दीवारों के साथ खड़ा रहता है।
उधर कनीना अनाज मंडी में सड़क मार्ग के दोनों तरफ नाले बने हुए हैं और ये नाले भी दोनों जोहड़ों में ही समाहित हो जाते हैं। यहां तक कि बस स्टैंड का गंदा पानी भी इकट्ठा होकर के इन जोहड़ों में जा रहा है परंतु बस स्टैंड के पास से गुजरने वाले नालियां और नाले साफ नहीं किए गए हैं और न ही अनाज मंडी मार्ग वाले नाले और नालियां साफ हुए हैं। बड़े नालों की और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इन गंदे नालों की सफाई मशीनों द्वारा करवाई जाए तो जल्द ही हो जाएगी वरना इन गंदे नालों की सफाई करना भी जोखिम भरा कार्य है। हर वर्ष कनीना में गंदे नालों की सफाई का अभियान चलाया जाता है किंतु अभी तक कनीना में यह  अभियान नहीं चलाया गया है। अगर कहीं मानसून में कनीना की गलियां जलमग्न होती तो उनमें गंदे नालों का अहम योगदान होगा।
  इस संबंध में सचिव नगरपालिका कनीना समयपाल सिंह ने बताया कि नालों की सफाई करने का काम शुरू किया हुआ है जल्द ही सभी नाले साफ कर दिये जाएंगे ताकि बरसात में कोई समस्या किसी को न आने पाये।
फोटो कैप्शन 5, 6, 7 व 8: गंदे नाले जो जो गाद से भरे पड़े हैं।


 सब कुछ देखा बदला बदला....
सेवानिवृत्ति का बीता एक महीना
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कनीना की आवाज। सत्य कहा है कि जब तक इंसान सत्ता में होता है या किसी पद पर होता है तब तक उसको सलाम किया जाता है और सत्ता और पद नहीं हो तो उसे भुलाने का प्रयास किया जाता है। कनीना के लेखक, शिक्षक साहित्यकार डा होशियार सिंह यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। सेवानिवृत्ति का करीब एक महीना बीत गया है परंतु बहुत से लोग जो दिन रात उनसे फोन पर बातें करते थे, समाचार प्रकाशित करवाते रहते थे, उन्होंने एक दिन भी यह नहीं पूछा कि आप सेवानिवृत्त हो गए कैसा महसूस कर रहे हैं? आश्चर्यजनक बात तो यह है की बहुत कुछ बदलाव आ गया है, जब तक शिक्षक रहा तब तक लोग शिक्षक नहीं अपितु पत्रकार के नाम से पुकारते थे और अब जब शिक्षक नहीं रहा केवल पत्रकार है तब उन्हें मास्टर, गुरुजी आदि शब्दों से अलंकृत किया जाता है जो मन को आहत देते हैं। इंसान को सच्चाई का सामना करना चाहिए और सच का साथ देना चाहिए। कुछ लोग तो अभी भी हेडमास्टर या प्रोफेसर आदि नाम से पुकारते हैं। बड़ा दुर्भाग्य है कि ऐसे शब्द प्रयोग कर रहे हैं। चाहे कालेज में प्राध्यापक रहा, स्कूलों में प्राध्यापक रहा, अध्यापक रहा, जेबीटी पर चयन हुआ किंतु कार्यभार ग्रहण नहीं किया परंतु आखिर में जब सेवानिवृत्त हुआ तब मास्टर पद से हुआ। ऐसे में गलत शब्द प्रयोग करना उचित नहीं है। अब तो बहुत से लोग भूल चुके हैं परंतु डा. होशियार सिंह सुबह से शाम अपने काम में तल्लीन रहते हैं। उन्हें इन चीजों का थोड़ा सा आहत होता है जो स्वाभाविक हैं। इस समय डाक्टर होशियार सिंह आत्मकथा लिख रहे हैं, विशेष कर स्कूलों में किसने क्या उनके साथ किया? कौन उनके दुश्मन रहे, कौन उनके दोस्त रहे, किसने क्या टांग खींचाई, की किसने साथ दिया इन सभी बातों का हवाला जिसने विरोध किया क्या-क्या विरोध हुआ, क्या-क्या ख्यातियां मिली, सभी कुछ इस पुस्तक में हवाला दिया जाएगा। इसके लिए आंकड़े इकट्ठे करने का कार्य प्रगति पर है और कृति लेखन कार्य भी आगे बढ़ रहा है। सबसे बड़ा दुर्भाग्य रहा कि बहुत से कहने को साथी रहे परंतु उन्होंने भारी नुकसान पहुंचाया, यहां तक आर्थिक नुकसान हो या सामाजिक प्रतिष्ठा पर कलंक लगाने का प्रयास किया हो, बहुत से ऐसे साथी मिले जिनको कभी नहीं भूलाया सकता। धनौंदा स्कूल में सेवानिवृत्ति दिन केवल विद्यार्थियों को बताया फिर भी विद्यार्थियों ने जो सम्मान दिया उसके गवाह कनीना के लगभग आधा दर्जन से अधिक पत्रकार रहे जो मौके पर मौजूद रहे। शायद ही इतने पत्रकार किसी की सेवानिवृत्ति के समय प्रदेशभर में मिलेंगे। उन पत्रकारों द्वारा दिया गया सम्मान  मृत्यु दम तक याद रखेंगे। जहां कुछ ऐसे राक्षसी प्रवृत्ति के लोग भी मिले जिन्होंने दोनों हाथों से पैसे भी झटकने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन डा होशियार सिंह ने आज के दिन सभी को माफ कर दिया परंतु भगवान की नजरों से कभी वो नहीं बच पाएंगे। डाक्टर होशियार सिंह का कहना है कि जब तक ऐसे लोगों का बुरा अंत न हो जाए तब तक वह इस दुनिया से रुखसत नहीं होंगे। वह अपनी आंखों से इनका सब कुछ नष्ट होते देखना चाहते हैं। ऐसे ऐसे गद्दार रहे जिन्होंने लाखों रुपये ऐंठ लिए,दूसरों के कंधों पर बंदूक रखकर चलाई ताकि पैसे में से कुछ  हिस्सा उन्हें मिल सके। लेकिन डा होशियार सिंह ने चुपचाप गम सहन किया परंतु दुर्भाग्य ऐसे लोग अब उनके साथ मुंह से बातें भी नहीं करना चाहते करें भी कैसे, किस मुख से? डाक्टर होशियार सिंह ने सभी को माफ कर दिया है परंतु उनकी सेवा निवृत्ति में टांग अड़ाने वाले राक्षसी लोगों को कभी नहीं बख्शा जाएगा। मंदोला से नरेश कुमारी एक ऐसी शख्सियत मिली जिन्होंने बहुत सेवा की, कुछ और भी दोस्त मिले जिन्होंने बुरे वक्त में साथ दिया। नौकरी दौरान 29 बार तबादले हुए। इस अवधि मेंकितने ही प्राचार्य मिले जिन्होंने आर्थिक नुकसान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उनके नुकसान की भरपाई जरूर प्रभु और और प्रभु की लाठी पूरा कर पाएगी। ऐसे कुछ लोगों को सजा मिलनी शुरू हो गई है। डाक्टर होशियार सिंह ने कई सालों तक ट्यूशन करने में बेहद नाम एवं पैसा कमाया, निजी स्कूलों, नवोदय स्कूलों, सरकासारी एवं राजकीय माडल स्कूलों, कालेज आदि में शिक्षण कार्य किया और 1988 से छोटे समाचारपत्रों में पत्रकारिता शुरू की जो आज तक कायम है। पत्रकारिता ने भारी संख्या में दुश्मन बनाये। डा होशियार सिंह ने अब तक 36 कृतियां प्रकाशित करवाई है, परिवार पूरा ही लेखन कार्य में जुटा रहा है और रहेगा। करीब 50 पुस्तके कंप्यूटर में फीड है, आर्थिक अभाव के कारण अभी तक प्रकाशन संभव नहीं हो पाया है। शेष जीवन उनकी दिवंगत पत्नी सुमन यादव के नाम से बनाई हुई ट्रस्ट द्वारा जन सेवा की जाएगी। ऐसे में किसी प्रकार का कोई आर्थिक सहयोग मिला तो नि:संकोच ट्रस्ट के मार्फत स्कूली विद्यार्थियों और उन लोगों की सेवा में दिया जाएगा जिनको वास्तव में जरूरत है। पीएचडी करवाने के नाम पर तीन बार लोगों ने लूटा। एक बार दो लाख एक बार 7 लाख तो अंतिम बार 80 हजार खो दिये परंतु ऐसे ढीठ व्यक्ति निकले जो अब उन पैसों को देने की बजाय फोन तक नहीं उठाते हैं। भगवान ने खूब पैसे दिये, उनमें गहन आस्था है तथा खूब पैसे खर्च भी हुए। 13 बार कांवड़ अर्पित की तथा 13 बार खाटू श्याम पदयात्रा की, 20 सालों से सप्ताह में एक दिन का व्रत चल रहा है फिर भी पूर्व पत्नी का कैंसर से निधन हुआ 25 लाख रुपये वर्ष 2010 तक खर्च हुए शिक्षा विभाग ने एक पैसा भी भरपाई नहीं की क्योंकि साथी ऐसे निकृष्ट मिले कि यह तक नहीं बताया कि पत्नी पर किया गया खर्च छह माह के भीतर क्लेम करना होता है। तीन बार राज्यपाल एवं न्यायाधीश से सम्मान, लेखन कार्य में 500 से अधिक सर्टिफिकेट्स मिले है।  ऐसे ही दास्तानों से भी है आत्मकथा.....।


एक लड्डू 4000 रुपये का
-अखबार को नहीं मिलता कोई लाभ
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कनीना की आवाज।




















एक बुजुर्ग कह रहे थे की 2 रुपये में भरपेट खाना मिलता था, वह भी मिठाइयों एवं पकवान आदि सहित। जब उससे पूछा कि वह कैसे, तो उन्होंने बताया कि पुराने समय में ग्रामीण क्षेत्रों में 2 रुपये कन्यादान करवाते थे और बदले में भरपेट खाना मिलता था। उनकी बात अटपटी लगी हो किंतु आज के दिन कुछ मायनों में सटीक बैठती है। कई बार सिर्फ दिखावे के लिए पांच लड्डू किसी खुशी में बांटे जाते हैं, बड़ी सी फोटो बनवाई जाती है, विभिन्न समाचार पत्रों में छपवाई जाती है, कि हमने लड्डू बांटे।  समाचार पत्र ऐसी खबरों को कम अहमियत देते हैं यहां तक की कुछ पत्रकारों पर डांट भी पड़ती है परंतु जब छपती है तो कम से कम 20000 रुपये के विज्ञापन के बराबर लाभ मिलता है। इस समाचार के बराबर विज्ञापन दे तो करीब 20 हजार रुपये खर्चा आता हे और अखबार को लाभ मिलता है। यदि खबर छप गई वहां तक तो ठीक है परंतु लड्डू बांटने वाले अगले दिन पत्रकारों से यह और पूछते हैं कि हमारी खबर छपी? यहां तक की अखबार खरीदने की बजाय इधर-उधर से समाचार तलाशते हैं और कहीं समाचार मिल जाए तो समाचार पत्र में से अपनी खबर को काट ले जाते हैं या अखबार को ही उठा ले जाते। इसे कहते हैं कि हल्दी लगे ना फिटकरी रंग आया चौखा। इस बात से नाराज न हो अपितु सबक ले।

Sunday, June 9, 2024


 

गंदे नाले गाद से खड़े हैं भरे
-प्री-मानसून के इसी माह दस्तक की संभावना
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कनीना की आवाज।  कनीना के सभी गंदे नाले एवं कुछ नालियां गाद से भरी खड़ी हैं। एक और जहां प्री-मानसून इसी माह दस्तक दे सकता है वही अभी तक इन गंदे नालों की सफाई नहीं की गई है। कनीना के प्रशासक एसडीएम है जो विकास कार्यों की ओर तो ध्यान दे रहे हैं लेकिन अभी तक गंदे नालों की और कोई ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कनीना कस्बे में कभी 6 गंदे पानी के जोहड़ होते थे इस समय महज दो जोहड़ बचे हैं। जिनमें एक होलीवाला और दूसरा कालरवाली है। दोनों ही जोहड़ इस समय गंदे पानी से भरे खड़े हैं। पूरे कस्बा जिसमें कनीना अनाज मंडी, मुख्य कस्बा का गंदा पानी इन नालों द्वारा जोहड़ों तक पहुंचता है परंतु अभी तक तो ये गंदे नाले इस प्रकार भरे खड़े हैं कि यही नहीं पता चल पाता कि यहां गंदा नाला भी होगा? जहां होलीवाला जोहड़ में कनीना के आधे कस्बा का गंदा पानी पहुंचता है। इसको गंदे पानी को ले जाने वाले नाले जोहड़ के पास अटे पड़े हैं जिसके चलते गंदा पानी दूर-दूर तक बिखर रहा है। एक तरफ जहां ये जोहड़ अतिक्रमण के शिकार हैं वही कितने पेड़ पौधों को  गंदा जल लील रहा है। लोग बेहद परेशान है। आसपास दूर दराज तक बदबू फैल रही है। गंदे नालों की अगर सफाई नहीं करवाई गई और गाद नहीं निकलवाई गई तो आने वाले समय में भारी परेशानी का कारण बन सकते हैं। उधर यही हालात कालरवाली जोहड़ की है। आधे कस्बे का गंदा पानी कालरवाली जोहड़ में पहुंचता है लेकिन जोहड़ तक पानी ले जाने वाले नाले पूर्ण रूप से गाद से भरे पड़े हैं।  अगर देखा जाए तो ये गंदे नाले संत मोलडऩाथ आश्रम के करीब से गुजरते हैं और सबसे ज्यादा लंबी दूरी तय करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में जहां बारिश के समय गलियां जलमग्न हो गई थी, गंदा पानी कई कई दिनों तक सड़कों पर खड़ा देखा गया था। यदि इन गंदे नालों की सफाई नहीं करवाई गई और जोहड़ों को साफ नहीं करवाया गया तो आने वाले समय में एक बार फिर से मुसीबत बन सकते हैं। ऐसे में जहां कनीना के लोग विशेष कर जिनके घर गंदे नालों के पास पड़ते हैं बेहद परेशान है क्योंकि इन नालों का गंदा पानी दीवारों के साथ खड़ा रहता है।
उधर कनीना अनाज मंडी में सड़क मार्ग के दोनों तरफ नाले बने हुए हैं और ये नाले भी दोनों जोहड़ों में ही समाहित हो जाते हैं। यहां तक कि बस स्टैंड का गंदा पानी भी इकट्ठा होकर के इन जोहड़ों में जा रहा है परंतु बस स्टैंड के पास से गुजरने वाले नालियां और नाले साफ नहीं किए गए हैं और न ही अनाज मंडी मार्ग वाले नाले और नालियां साफ हुए हैं। बड़े नालों की और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इन गंदे नालों की सफाई मशीनों द्वारा करवाई जाए तो जल्द ही हो जाएगी वरना इन गंदे नालों की सफाई करना भी जोखिम भरा कार्य है। हर वर्ष कनीना में गंदे नालों की सफाई का अभियान चलाया जाता है किंतु अभी तक कनीना में यह  अभियान नहीं चलाया गया है। अगर कहीं मानसून में कनीना की गलियां जलमग्न होती तो उनमें गंदे नालों का अहम योगदान होगा।
फोटो कैप्शन 5, 6, 7 व 8: गंदे नाले जो जो गाद से भरे पड़े हैं।




लड़के को बंधक बनाने का शक किया जाहिर
-पुलिस ने किया मामला दर्ज, लड़का लौटा घर
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कनीना की आवाज। रसूलपुर निवासी जोगिंद्र सिंह ने कनीना पुलिस में उसके छोटे भाई को बंधक बनाए जाने की शंका जताई है और कनीना पुलिस में मामला दर्ज करवाया है।
उन्होंने कहा कि मेरा छोटा भाई 25 वर्षीय योगेश  शाम को करीब 7 बजे ट्यूबवेल पर अपने साथी रवि एवं राजकुमार के साथ बैठा था। तभी सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर गाड़ी में अंकित तथा झज्जर निवासी सरवर पहुंचे।  तत्पश्चात से योगेश का फोन स्विच आफ आ रहा है। उन्होंने शंका जताई है कि योगेश को इन लड़कों ने कहीं गुप्त स्थान पर बंधक बना रखा है। उसे खोजने की मांग प्रशासन से की है जिसके चलती कनीना पुलिस ने दो लोगों पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गुम हुये लड़के के ताऊ राज बीरेंद्र ने बताया कि लड़का घर वापस आ गया है।






डा. राजेश सोनी को मातृशोक
--गुढ़ा की सीता देवी का निधन
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कनीना की आवाज। गुढ़ा निवासी डा. राजेश सोनी की माता सीता देवी 58 वर्ष का देहांत हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थी। डॉ राजेश सोनी के पिता सुभाष सोनी ने दुकान कर रखी है।सीता देवी भरा पूरा परिवार छोड़ गई है। उनके राजेश ए संदीप, उषा तीन पुत्र व पुत्री हैं। सीता देवी धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़.चढ़कर भाग लेती थी। बरसात के मौसम में पौधारोपण करना उनकी सुरक्षा करने में लगी रहती थीं। गुढ़ा गांव में शोकसभा आयोजित कर दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उनके निधन पर व्यापार मंडल प्रधान राहुल यादव, सुशील शर्मा, अनिल भारद्वाज, राजकुमार सोनी, डा. अजय शर्मा, डा. जितेंद्र शर्मा, डा.नेहा, डा.अंजली, डा.निकिता, डा. नरेंद्र भारद्वाज, मनोज कुमार, डा जसवंत सिंह, समाज सेविका रोशनी देवी, मास्टर ओम प्रकाश, जितेंद्र शास्त्री, प्रवेश शास्त्री, पिंटू गुप्ता, संदीप रोहिल्ला आदि ने शोक जताया।
फोटो कैप्शन: सीता देवी



महाराणा प्रताप को याद किया
-पुष्प अर्पित किये गये
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कनीना की आवाज। वीर भूमि खेड़ी गांव में महाराणा प्रताप जयंती मनाई, शौर्य और पराक्रम को याद किया।
वीर भूमि खेड़ी गांव में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महाराणा प्रताप की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर महेंद्रगढ़ जिला संयोजक प्रधानमंत्री मन की बात कार्यक्रम एवं भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा जिला महेंद्रगढ़ के जिला महासचिव चौधरी रामनिवास खेड़ी ने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प अर्पित उन्हें  नमन किया और चौधरी ने कहा कि महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में शौर्य पराक्रम व त्याग के लिए अमर रहेगा। महाराणा प्रताप की शौर्य और बलिदान को याद करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को राष्ट्र के स्वाभिमान व उसकी अस्मिता के लिए अपना जीवन बलिदान करने वाले महाराणा प्रताप से प्रेरणा लेनी चाहिए
इस अवसर पर पूर्व स्टेशन अधीक्षक ओम प्रकाश दुबट पृथ्वी सिंह, संदीप कुमार भगत, अशोक कुमार, मनोज कुमार, कृष्ण कुमार, मनीष कुमार ,हरीश कुमार, ललित कुमार, रविपाल , अविनाश आदि उपस्थित रहे।
फोटो साथ है





खेड़ी के बाबा भोलागिरी आश्रम पर अमृत सिंह प्रस्तुत करेंगे हरियाणा सांस्कृतिक कार्यक्रम
--भंडारा भी लगेगा मंगलवार को
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कनीना की आवाज। 10 जून  को रात्रि के समय बाबा भोला गिरी आश्रम खेड़ी तलवाना में बालाजी का जागरण, हरियाणवी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। जिसमें हरियाणा के विशेष भजन गायक व रागनी गायक अमृत सिंह राघव एंड पार्टी द्वारा भजनों की प्रस्तुति की जाएगी। तथा उनके  साथ पम्मी नौताना तथा मास्टर प्रदीप म्यूजिकल ग्रुप नांगल मोहनपुर के द्वारा बाबा के भजनों का गुणगान किया जाएगा। मंगलवार को भंडारे का आयोजन बाबा भोला गिरी आश्रम पर किया जा रहा है। म्यूजिक टीम में मोनू भोजावास, नरवीर निमोठ ,रघुवीर झाड़ोदा, तथा सुशील शर्मा पायल साउंड सर्विस द्वारा तथा राहुल राघव द्वारा भजनों की प्रस्तुति बाबा के आश्रम पर की जाएगी।



भारत विकास परिषद शाखा कनीना द्वारा योग कैंप कनीना आयोजित
--50 बच्चे ले रहे हैं भाग
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कनीना की आवाज। कनीना के डीएवी स्कूल के प्रांगण में राजेश साहब कनीना व जोगिंद्र फौजी जैनाबाद द्वारा संचालित छात्रों को  योग का प्रतिदिन प्रशिक्षण दिया जाता रहा है। इसी क्रम में रविवार को सुबह 6 बजे भारत विकास परिषद शाखा कनीना की तरफ से पूर्व शाखा अध्यक्ष मोहन सिंह यादव की अध्यक्षता में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि अनिल जिला मंत्री भाजपा कनीना थे। इस मौके पर भारत विकास परिषद शाखा कनीना के संरक्षक कंवरसेन वशिष्ठ ने बच्चों को व्यायाम के फायदे बताएं और कहा कि 21 जून को भारत के विशेष प्रयासों से विश्व में योग दिवस मनाया जाता है, जो भारतीय संस्कृति का एक आवश्यक अंग है।
   कार्यक्रम के संयोजक राजेश साहब सचिव भारत विकास परिषद शाखा कनीना ने बताया कि यहां योगा करने प्रतिदिन 50 छात्र आते हैं जिन्हें विभिन्न परीक्षाओं में फौज व सिविल में छात्राओं को आने वाली कठिनाइयों के बारे में अवगत कराया जाता है और हमारे ट्रेनर जोगिंद्र फौजी द्वारा परीक्षाओं में आने वाले प्रश्नों को विस्तार से समझाया जाता है और 10 बच्चे विभिन्न परीक्षाओं में उत्तीर्ण हुए हैं।
   इस मौके पर पूर्व पार्षद मोहन सिंह यादव ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि इस तरह के कैम्पों का आयोजन ज्यादा से ज्यादा होते रहने चाहिए और सामाजिक संस्थाओं को इनका हौसला अफजाई करना चाहिए। इसी कड़ी में आज भारत विकास परिषद शाखा कनीना बच्चों की मेहनत और आयोजकों को बधाई दी और अपनी तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मोहन सिंह यादव पूर्व शाखा अध्यक्ष ने बताया कि जल्दी ही शाखा पौधा रोपण का कार्य भी करेगी। इस मौके पर मुख्य अतिथि अनिल जिला मंत्री भाजपा ने बच्चों को बताया कि नशे से शरीर व परिवार नष्ट हो जाता हैं, इससे अपने आप को बचाए व भारत सरकार द्वारा चलाई गई अग्नि वीर सेवा भारत के जवानों को मार्गदर्शन के लिए एक अच्छा मौका है जिससे वह अपना भविष्य सुधार सकते हैं।  इस कैंप से अनुशासन सीख सकते हैं। बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए फल बांट कर वित्तीय सहायता की।
फोटो कैप्शन 03: योग करते हुए विद्यार्थी।





120 मरीज पहुंचे मुफ्त चिकित्सा शिविर में
--आंखों एवं हृदय रोग से संबंधित शिविर आयोजि
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कनीना की आवाज। कनीना मंडी की लाला शिवलाल धर्मशाला में सेवा भारती हरियाणा प्रदेश शाखा कनीना द्वारा 75वां हृदय रोग एवं नेत्र रोग जांच, परामर्श शिविर आयोजित हुआ। शिविर में मेट्रो अस्पताल से हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अश्विनी यादव ने अपनी सेवाएं प्रदान की। उनके साथ धनराज, विनय, रिंकू, पूजा ,अलका, विकास एवं राजेश टीम उपस्थित रही।
शिविर में बीपी, ब्लड शुगर जांच सुविधा प्रदान की गई। गंगा देवी पांडे नेत्र चिकित्सालय महेंद्रगढ़ से नेत्र रोग विशेषज्ञ डाक्टर संतोष, डाक्टर मनमत यादव अपने सहयोगी गोपाल अग्रवाल, नवीन, लोकेश के साथ सेवा देने पहुंचे। शिविर में 120 विभिन्न मरीजों ने अपनी अपनी जांच करवाई। चिकित्सालय के प्रबंधक श्रीनिवास स्वयं हाजिर रहे। योगेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि शिविर में दवाइयां निशुल्क वितरित की गई। 1
 उन्होंने बताया कि सेवा भारती कनीना की ओर से हर महीने के दूसरे रविवार को यह शिविर आयोजित होता है। इसके अतिरिक्त सेवा भारती आर्य समाज मंदिर में प्रतिदिन शाम को 5 से 6:30 के बीच प्राथमिक चिकित्सा केंद्र एवं महिला सिलाई प्रशिक्षण केंद्र चलाता है।
 शिविर में सेवा भारती के संरक्षक शिवकुमार अग्रवाल, डाक्टर वेद शर्मा, प्रधान सुखदेव, सुरेश शर्मा श्रीश्याम सुंदर कोषाध्यक्ष, अमित कुमार, योगेश अग्रवाल, मास्टर सोमनाथ शर्मा, दिनेश कुमार, राजेश साहब, मोर सिंह, राकेश सिंघानिया,  प्रेम सिंघल,जगदीश आचार्य सहित विभिन्न जन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 4: मरीजों की जांच करते हुए डाक्टर




पालिका चुनावों की सुनाई पड़ रही है आहट
-दो माह में नहीं हुये तो चुनाव होंगे अगले वर्ष
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कनीना की आवाज। कनीना पालिका के चुनाव वर्ष 2024 में आगामी दो माह में होने की संभावना बढ़ी है। अगर ये चुनाव इस वक्त नहीं हुये तो विधानसभा चुनाव आ जाएंगे और ये चुनाव वर्ष 2025 में ही संभव हो पाएंगे।  चुनाव तिथि भविष्य के गर्भ में हैं पर चुनाव लडऩे वाले जल्दी चुनाव चाहते हैं।
चुनाव लडऩा चाहने वाले लोग किसी प्रकार पीछे हटने वाले नहीं। यदि प्रधान पद के लिए उनके परिवार से वो स्वयं या परिवार से महिला आदि चुनाव लड़ सकते हैं। क्योंकि प्रधान की शक्ति इस बार अधिक हो गई है, उसका चुनाव सीधा होने की वजह से उसे पार्षदों का काम कम हो गया है। भविष्य में प्रधान बनने के बाद किसी प्रस्ताव को पारित करते समय इन पार्षदों की जरूरत हो सकती है। ऐसे में बड़ा और सशक्त पद प्रधान का बना दिया गया है जिसको लेकर के दर्जनों लोग तैयार हैं। यह सत्य है कि चुनाव लडऩे वाले अब अपनी मां, बहन, बेटी या पत्नी को चुनाव लड़ा सकते हैं, स्वयं भी पार्षद पद के लिए चुनाव लडऩे के लिए तैयार हो रहे हैं।  नजरें---
कनीना पालिका 1952 से चली आ रही है। कनीना नगर पालिका के समय-समय पर अनेक प्रधान रह चुके हैं। सबसे अधिक समय तक पूर्व प्रधान मा. दलीप सिंह एवं उनके पिता स्व. चौ. बलबीर सिंह पालिका में प्रधान रह चुके हैं।
 इस बार पालिका प्रधान के चुनाव सीधे होने हैं। अब तक पालिका प्रधान बनते आए वह किसी के रहमों करम पर होते थे या पार्षदों पर निर्भर रहे हैं। सभी की नजरें चुनाव पर टिकी हुई है।
 घट गई हैं चुनावी चर्चाएं ---
 दुकान हो या कोई चाय की दुकान, चुनावी चर्चा मिलने लगी थी वो अब गायब हो गई हैं। रातोंरात पार्षद और प्रधान पद के दावेदार ढूंढे जा रहे हैं। क्योंकि बहुत से लोग तो चुनाव तो लडऩा चाहते हैं  ऐसे में चुनाव लडऩे वाले अंदर खाते मतदाताओं के मन को टटोल रहे हैं।
समय लग सकता है चुनाव होने में-
प्रदेश के 8 निगमों एवं 22 नगरपालिकाओं के चुनाव कराए जाने हैं। चुनाव आयोग द्वारा सरकार को चुनाव कराने के लिए पत्र भेजा है किंतु वार्डबंदी का काम ही अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। कनीना में 14 वार्ड होंगे तथा 14 ही मेंम्बर चुने जाने हैं। करीब 90 के बाद विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं। यदि समय रहते पालिका के चुनाव हो गये तो ठीक है वरना अगले वर्ष ही चुनाव संभव हो पाएंगे। ऐसे में लोगों की नजरें इन चुनावों पर टिकी हुई हैं। अभी तक प्रशासक ही काम कर रहे हैं, प्रधान का पद रिक्त है।
फोटो कैप्शन: नगरपालिका कनीना






डा प्रशांत ने की पीएचडी























-आयोजित हुआ सम्मान समारोह
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कनीना की आवाज। डा. प्रशांत कुमार, गांव कनीना, वार्ड नंबर-8, ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, नई दिल्ली भारत और रायल मेलबर्न इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, मेलबर्न, आस्ट्रेलिया के बीच एक संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम के तहत पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने स्पिन डायनेमिक्स और बायोमेडिकल एप्लिकेशन के लिए मिश्रित फेरिएट्स फेरोफ्लुइड्स और नैनोकंपोजिट्स पर मैग्नेटो-आप्टिकल अध्ययन पर अपना पीएचडी कार्य किया है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 23 एससीआई प्रकाशन और 3 पुस्तक अध्याय प्रकाशित किए हैं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और कार्यशालाओं में भी अपना काम प्रस्तुत किया है। उन्होंने 6 सर्वश्रेष्ठ पेपर पुरस्कार प्राप्त किए हैं और उन्हें भारत सरकार द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ट्रेवल फंड पुरस्कार भी मिला है। अब वे लगातार रायल मेलबर्न इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलाजी, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में रिसर्च फेलो के रूप में काम कर रहे हैं।  उन्होंने अपने गांव और देश का नाम रोशन किया है और अपने गांव और देश का नाम रोशन करते रहेंगे। उन्होंने यह उपलब्धि अपने दादा, दादी, स्वर्गीय अमर सिंह और स्वर्गीय अनारो देवी, पिता मास्टर सतीश कुमार, माता कैलाश और भाई इंजीनियर सिद्धार्थ, अनुज कुमार को समर्पित की है। इस अवसर पर गणमान्य लोगों ने उन्हें बधाई दी रामेश्वर पूर्व पार्षद, उमराव सरपंच उंचत, सतेंद्र शास्त्री, डा. पवन कांगड़ा, , कमल प्रधान, बलवान आर्य, पवन प्रधान, नवीन शर्मा, मास्टर विजयपाल, प्रवक्ता सूबे, मास्टर संजय, प्रताप सिंह, गोपीचंद, देशराज, भारतपाल, प्रदीप ने बधाई दी है।
फोटो कैप्शन 01: डा. प्रशांत का सम्मान करते हुए।
 साथ में प्रशांत की फोटो

Saturday, June 8, 2024


 
पालिका चुनावों की फिर बढ़ी संभावना
-दो माह में नहीं हुये तो चुनाव होंगे अगले वर्ष
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कनीना की आवाज। कनीना पालिका के चुनाव वर्ष 2024 में आगामी दो माह में होने की संभावना बढ़ी है। अगर ये चुनाव इस वक्त नहीं हुये तो विधानसभा चुनाव आ जाएंगे और ये चुनाव वर्ष 2025 में ही संभव हो पाएंगे।  चुनाव तिथि भविष्य के गर्भ में हैं पर चुनाव लडऩे वाले जल्दी चुनाव चाहते हैं।
चुनाव लडऩा चाहने वाले लोग किसी प्रकार पीछे हटने वाले नहीं। यदि प्रधान पद के लिए उनके परिवार से वो स्वयं या परिवार से महिला आदि चुनाव लड़ सकते हैं। क्योंकि प्रधान की शक्ति इस बार अधिक हो गई है, उसका चुनाव सीधा होने की वजह से उसे पार्षदों का काम कम हो गया है। भविष्य में प्रधान बनने के बाद किसी प्रस्ताव को पारित करते समय इन पार्षदों की जरूरत हो सकती है। ऐसे में बड़ा और सशक्त पद प्रधान का बना दिया गया है जिसको लेकर के दर्जनों लोग तैयार हैं। यह सत्य है कि चुनाव लडऩे वाले अब अपनी मां, बहन, बेटी या पत्नी को चुनाव लड़ा सकते हैं, स्वयं भी पार्षद पद के लिए चुनाव लडऩे के लिए तैयार हो रहे हैं।  नजरें---
कनीना पालिका 1952 से चली आ रही है। कनीना नगर पालिका के समय-समय पर अनेक प्रधान रह चुके हैं। सबसे अधिक समय तक पूर्व प्रधान मा. दलीप सिंह एवं उनके पिता स्व. चौ. बलबीर सिंह पालिका में प्रधान रह चुके हैं।
 इस बार पालिका प्रधान के चुनाव सीधे होने हैं। अब तक पालिका प्रधान बनते आए वह किसी के रहमों करम पर होते थे या पार्षदों पर निर्भर रहे हैं। सभी की नजरें चुनाव पर टिकी हुई है।
 घट गई हैं चुनावी चर्चाएं ---
 दुकान हो या कोई चाय की दुकान, चुनावी चर्चा मिलने लगी थी वो अब गायब हो गई हैं। रातोंरात पार्षद और प्रधान पद के दावेदार ढूंढे जा रहे हैं। क्योंकि बहुत से लोग तो चुनाव तो लडऩा चाहते हैं  ऐसे में चुनाव लडऩे वाले अंदर खाते मतदाताओं के मन को टटोल रहे हैं।
समय लग सकता है चुनाव होने में-
प्रदेश के 8 निगमों एवं 22 नगरपालिकाओं के चुनाव कराए जाने हैं। चुनाव आयोग द्वारा सरकार को चुनाव कराने के लिए पत्र भेजा है किंतु वार्डबंदी का काम ही अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। कनीना में 14 वार्ड होंगे तथा 14 ही मेंम्बर चुने जाने हैं। करीब 90 के बाद विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं। यदि समय रहते पालिका के चुनाव हो गये तो ठीक है वरना अगले वर्ष ही चुनाव संभव हो पाएंगे। ऐसे में लोगों की नजरें इन चुनावों पर टिकी हुई हैं। अभी तक प्रशासक ही काम कर रहे हैं, प्रधान का पद रिक्त है।
फोटो कैप्शन: नगरपालिका कनीना








28 लाख की लागत से संत मोलडऩाथ तालाब में भर दिया गया पानी
-ऐतिहासिक महत्व भी है तालाब का
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कनीना की आवाज। कनीना के परम संत मोलडऩाथ विक्रमी संवत 2006 में पंचतत्व में विलीन हो गये थे किंतु वे जिस तालाब के पास आराम करते थे, स्नान करते थे उस तालाब का नवीकरण कर दिया गया है।  आज संत को पंचतत्व में विलीन हुई करीब 75 साल बीत गये हैं। इस तालाब को करीब 28 लाख रुपये की लागत से पक्का करके आखिरकार पानी से भर कर दिया गया है। पहले तो इसे नहरी पानी से भरने की योजना थी किंतु अभी तक सफलता नहीं मिलने पर विगत वर्ष संत के मेले के दृष्टिगत इसे आखिरकार पानी से भर दिया गया था। तब से अब तक लगातार पानी से भरा जा रहा है।
जहां एक और मोलडऩाथ  का आश्रम वहीं दूसरी ओर खाटू श्याम मंदिर भी है। इस तालाब को खाटू श्याम तालाब के रूप में भी जाना जाता है।
उस वक्त के जीवित बहुत कम लोग बचे हैं। वे बताते हैं कि कभी इसी जोहड़ के किनारे जाल के पेड़ के नीचे संत विश्राम करते थे। यहां एक बणी होती थी जिसमें जाल के पेड़ के नीचे संत आराम करते थे और तालाब का ही पानी प्रयोग करते थे। गीदड़, चिडिय़ा तथा अनेकों प्रकार के जीव जंतु यहां विचरण करते थे। जहां जोहड़ में पानी भरने के बाद रौनक और बढ़ गई है। पानी की मात्रा कम हैं जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों युवा एवं बच्चे गर्मी के दिनों में नहाते हैं।
प्रधान बाबा मोलडऩाथ आश्रम बताते हैं कि लाखों रुपए की लागत से सुंदर तालाब बना दिया गया है जिस तो चारों ओर सैर करने वाले और दर्शन करने वाले लोगों के लिए भी प्रकाशमान पक्की सड़क निर्मित की गई है।  यह जोहड़ अब तालाब का रूप ले चुका है जो पास में स्थित खाटू श्याम मंदिर के कुंड का भी के काम करेगा। यही कारण है कि श्याम कुंड नाम से भी यह तालाब भविष्य में जाना जाएगा। 2021 में बनना शुरू हुआ था और साल के अंत तक तैयार हो गया था।
 कनीना के नगर पालिका पूर्व प्रधान सतीश जेलदार का कहना है कि दो तरीकों से पानी भरा जा सकता है। सबसे बेहतर तो हो कि कनीना अनाज मंडी से गुजर रही नहर से पाइप दबाकर यहां तक पानी लाया जाए ताकि इसमें पानी भरता रहे जिसके लिए उन्होंने विधायक और सरकार से बार-बार प्रयास किया है तथा प्रयास जारी हैं। जब तक यह व्यवस्था नहीं बनती तब तक नलकूप से भी इस जोहड़ को भरा जा सकता है। यहां बाबा मोलडऩाथ और श्याम खाटू श्याम के मेले लगते हैं उस समय तालाब को पानी से भर दिया जाता है। संत स्थल को और भी दर्शनीय बनाया गया है।
उधर श्री श्याम सेवक मंडल के दुलीचंद साहब से संबंध में बात हुई। उनका कहना है कि वे भी इसको नहरी पानी से भरने के लिए प्रयासरत हैं तथा दोनों ही तरीकों से पानी को भरने के प्रयास किये जाएंगे। उन्होंने कहा वे भी उच्च अधिकारियों से मिलकर नहर से तालाब को जुड़वाने का प्रयास करेंगे।
जागरण प्रभाव-
दैनिक जागरण ने इस तालाब का ऐतिहासिक महत्व वर्षांे पहले बताना शुरू कर दिया था जिसके चलते पूर्व प्रधान सतीश जेलदार ने इस बीड़ा को उठाया है। तालाब में वर्तमान में नलकूपों से पानी भरा जा रहा है नहर से जोडऩे के लिए अभी प्रयास करने बाकी हैं। यह सबसे सुंदर तालाब बना हुआ है।
फोटो कैप्शन: सतीश जेलदार एवं दुलीचंद साहब, दिनेश प्रधान
साथ में फोटो कैप्शन 02: कनीना का बाबा मोलडऩाथ तालाब।



 अभी तपन जारी है
--अभी प्री मानसून के आसार नहीं
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कनीना की आवाज। अभी तपन जारी है। अभी प्री मानसून के आसार नहीं हैं।
कनीना क्षेत्र में एक बार फिर से तपन बढ़ती जा रही है। जहां गत दिनों कुछ तापमान में गिरावट आई थी वह एक बार फिर से बढऩे लगी है। अधिकतम तापमान 43 डिग्री पहुंच गया है जबकि कम से कम तापमान 30 डिग्री पहुंचा है। गर्मी के कारण जहां जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, कफ्र्यू जैसी हालत बन जाती है। दोपहर को सड़के सुनसान हो जाती है, हर जीव जंतु और इंसान दुबक जाते हैं। परंतु कनीना क्षेत्र में करीब 500 बंदर है जिनसे अब गर्मी के दिनों में निजात मिला है क्योंकि गर्मी के कारण ये बंदर बाहर नहीं निकल रहे और यहां तक वे जोहड़ों में डुबकी लगा रहे हैं या फव्वारों के नीचे नहा रहे हैं। यही नहीं कनीना के शहीद सुजान सिंह पार्क में फव्वारों के नीचे बंदर नहाते देखे गए वहीं मोलडऩाथ जोहड़ में भी डुबकी लगा रहे हैं। परंतु जब फोटो खींचते हैं तो भाग खड़े होते हैं। सबसे बड़ी बात है कि पक्षी भी छाया को ढूंढते रहते हैं। हर वर्ष पर्यावरण दिवस पर कितने पेड़ पौधे लगाने का की शपथ ली जाती है किंतु अगले साल वे पेड़ पौधे गायब हो जाते हैं। यही करने की धरती का तापमान बढ़ता ही जा रहा है। मोलडऩाथ आश्रम समक्ष शहीद सुजान सिंह पार्क के जहां हालात बदल दिए हैं, फव्वारे लगा रखें हैं। जिनके नीचे बंदर और कौवे दिनभर मौज मस्ती करते हैं। जहां आश्रम के पीछे पक्का जोहड़ है जिसे पानी से भरा हुआ है जिसमें बंदर डुबकी लगाते हैं। भक्त दिनेश कुमार, महेश कुमार, सुरेंद्र, इंद्र देव आदि बताया कि दिन भर बंदर और लोग  गर्मी से राहत पाने के लिए जोहड़ों में स्नान करते हैं, वही पार्क में बैठे दिखाई देते हैं। पक्षी भी पाके स्थित जाल के पेड़ के नीचे आराम से धूप से बचते नजर आते हैं। गर्मी के कारण किसान बेहद परेशान है क्योंकि वो सुबह सवेरे मुश्किल से खेतों में जा पाते हैं जहां भी देखे बस पानी की किल्लत छाई हुई है जोहड़ों का पानी भी घटता ही जा रहा है, ऐसे पशुओं के लिए और पक्षियों के लिए जल की समस्या बनी हुई है। चाहे कितनी गर्मी पड़े तापमान कितना भी अधिक हो जोहड़ों में पानी कभी खत्म नहीं होता। कनीना क्षेत्र के लोग पेयजल किल्लत से भी परेशान है और दोनों वक्त पेयजल सप्लाई करने की मांग कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन : जोहड़ के  जल में स्नान करते हुए बच्चे






हृदय, नेत्र रोग एवं सामान्य रोग चिकित्सा का 75वां शिविर रविवार को
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कनीना की आवाज। कनीना अनाज मंडी स्थित लाला शिवलाल धर्मशाला में सेवा भारती हरियाणा प्रदेश शाखा कनीना की ओर से 75वां हृदय, नेत्र रोग, जांच एवं परामर्श शिविर 9 जून को आयोजित किया जाएगा। इस मौके डा अश्विनी यादव हृदय रोग तथा गंगादेवी पांडेय नेत्र चिकित्सालय महेंद्रगढ़ के नेत्र रोग विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे। गंगादेवी पांडेय की टीम पहली बार शिविर में पहुंच रही है।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सेवा भारती के योगेश अग्रवाल ने बताया कि इस मौके पर ईसीजी, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर आदि की जांच की जाएगी वही हृदय रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं सामान्य रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे। उल्लेखनीय की लंबे समय से सेवा भारती की ओर से इस प्रकार के कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक 74 निशुल्क शिविर आयोजित किए जा चुके हैं जिसमें हजारों लोगों ने लाभ उठा लिया है। उन्होंने बताया कि सेवा भारती लगातार जन सेवा में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि प्राय हृदय रोगों की जांच उन लोगों को करवानी चाहिए जिनकी सांस फूलती हो, अत्यधिक मोटापा, अत्यधिक पसीना आता हो, उम्र 40 वर्ष से अधिक हो, तंबाकू-धूम्रपान सेवन करने वाले, रक्तचाप से पीडि़त, अत्यधिक घबराहट बेचैनी, हृदय संबंधित पारिवारिक रोग प्रवृत्ति, आलसी जीवन शैली वाले जरूर इस शिविर का में जांच करवाएं।








शुभम सिंह का भारतीय सेना में सीधे लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त
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कनीना की आवाज। जिला के गांव धनौन्दा निवासी शुभम सिंह पुत्र मोहन सिंह का भारतीय सेना में सीधे लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त होने पर आगामी 10 जून को गांव में सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
  उक्त जानकारी देते हुए आयोजन समिति के संयोजक सूबेदार मेजर मदन सिंह ने कहा कि सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि प्रमुख समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट होंगे। उन्होंने कहा कि शुभम सिंह के लेफ्टिनेंट बनने पर आस-पास के गांवों में खुशी की लहर है। सम्मान समारोह को लेकर युवाओं तथा ग्रामीणों में भारी जोश व उत्साह है। उन्होंने कहा कि सम्मान समारोह से युवाओं को आगे बढऩे की प्रेरणा मिलेगी।



डा 
प्रशांत कुमार ने की पीएचडी

--कई अवार्ड प्राप्त है डा. प्रशांत कुमार
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कनीना की आवाज। डा. प्रशांत कुमार, गांव कनीना, वार्ड नंबर-8, ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, नई दिल्ली भारत और रायल मेलबर्न इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, मेलबर्न, आस्ट्रेलिया के बीच एक संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम के तहत पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने स्पिन डायनेमिक्स और बायोमेडिकल एप्लिकेशन के लिए मिश्रित फेरिएट्स फेरोफ्लुइड्स और नैनोकंपोजिट्स पर मैग्नेटो-आप्टिकल अध्ययन पर अपना पीएचडी कार्य किया है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में २३ एससीआई प्रकाशन और ३ पुस्तक अध्याय प्रकाशित किए हैं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और कार्यशालाओं में भी अपना काम प्रस्तुत किया है। उन्होंने 6 सर्वश्रेष्ठ पेपर पुरस्कार प्राप्त किए हैं और उन्हें भारत सरकार द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ट्रेवल फंड पुरस्कार भी मिला है। अब वे लगातार रायल मेलबर्न इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलाजी, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में रिसर्च फेलो के रूप में काम कर रहे हैं।  उन्होंने अपने गांव और देश का नाम रोशन किया है और अपने गांव और देश का नाम रोशन करते रहेंगे। उन्होंने यह उपलब्धि अपने दादा, दादी, स्वर्गीय अमर सिंह और स्वर्गीय अनारो देवी, पिता मास्टर सतीश कुमार, माता कैलाश और भाई इंजीनियर सिद्धार्थ, अनुज कुमार को समर्पित की है। इस अवसर पर गणमान्य लोगों ने उन्हें बधाई दी रामेश्वर पूर्व पार्षद, उमराव सरपंच उंचत, सतेंद्र शास्त्री, डा. पवन कांगड़ा, , कमल प्रधान, बलवान आर्य, पवन प्रधान, नवीन शर्मा, मास्टर विजयपाल, प्रवक्ता सूबे, मास्टर संजय, प्रताप सिंह, गोपीचंद, देशराज, भारतपाल, प्रदीप ने बधाई दी है।
फोटो कैप्शन ०१: डा. प्रसाद का सम्मान करते हुए।


Friday, June 7, 2024


 
अमृत सरोवर...
28 लाख की लागत से संत मोलडऩाथ तालाब में भर दिया गया पानी
-ऐतिहासिक महत्व भी है तालाब का
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कनीना की आवाज। कनीना के परम संत मोलडऩाथ विक्रमी संवत 2006 में पंचतत्व में विलीन हो गये थे किंतु वे जिस तालाब के पास आराम करते थे, स्नान करते थे उस तालाब का नवीकरण कर दिया गया है।  आज संत को पंचतत्व में विलीन हुई करीब 75 साल बीत गये हैं। इस तालाब को करीब 28 लाख रुपये की लागत से पक्का करके आखिरकार पानी से भर कर दिया गया है। पहले तो इसे नहरी पानी से भरने की योजना थी किंतु अभी तक सफलता नहीं मिलने पर विगत वर्ष संत के मेले के दृष्टिगत इसे आखिरकार पानी से भर दिया गया था। तब से अब तक लगातार पानी से भरा जा रहा है।
जहां एक और मोलडऩाथ  का आश्रम वहीं दूसरी ओर खाटू श्याम मंदिर भी है। इस तालाब को खाटू श्याम तालाब के रूप में भी जाना जाता है।
उस वक्त के जीवित बहुत कम लोग बचे हैं। वे बताते हैं कि कभी इसी जोहड़ के किनारे जाल के पेड़ के नीचे संत विश्राम करते थे। यहां एक बणी होती थी जिसमें जाल के पेड़ के नीचे संत आराम करते थे और तालाब का ही पानी प्रयोग करते थे। गीदड़, चिडिय़ा तथा अनेकों प्रकार के जीव जंतु यहां विचरण करते थे। जहां जोहड़ में पानी भरने के बाद रौनक और बढ़ गई है। पानी की मात्रा कम हैं जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों युवा एवं बच्चे गर्मी के दिनों में नहाते हैं।
प्रधान बाबा मोलडऩाथ आश्रम बताते हैं कि लाखों रुपए की लागत से सुंदर तालाब बना दिया गया है जिस तो चारों ओर सैर करने वाले और दर्शन करने वाले लोगों के लिए भी प्रकाशमान पक्की सड़क निर्मित की गई है।  यह जोहड़ अब तालाब का रूप ले चुका है जो पास में स्थित खाटू श्याम मंदिर के कुंड का भी के काम करेगा। यही कारण है कि श्याम कुंड नाम से भी यह तालाब भविष्य में जाना जाएगा। 2021 में बनना शुरू हुआ था और साल के अंत तक तैयार हो गया था।
 कनीना के नगर पालिका पूर्व प्रधान सतीश जेलदार का कहना है कि दो तरीकों से पानी भरा जा सकता है। सबसे बेहतर तो हो कि कनीना अनाज मंडी से गुजर रही नहर से पाइप दबाकर यहां तक पानी लाया जाए ताकि इसमें पानी भरता रहे जिसके लिए उन्होंने विधायक और सरकार से बार-बार प्रयास किया है तथा प्रयास जारी हैं। जब तक यह व्यवस्था नहीं बनती तब तक नलकूप से भी इस जोहड़ को भरा जा सकता है। यहां बाबा मोलडऩाथ और श्याम खाटू श्याम के मेले लगते हैं उस समय तालाब को पानी से भर दिया जाता है। संत स्थल को और भी दर्शनीय बनाया गया है।
उधर श्री श्याम सेवक मंडल के दुलीचंद साहब से संबंध में बात हुई। उनका कहना है कि वे भी इसको नहरी पानी से भरने के लिए प्रयासरत हैं तथा दोनों ही तरीकों से पानी को भरने के प्रयास किये जाएंगे। उन्होंने कहा वे भी उच्च अधिकारियों से मिलकर नहर से तालाब को जुड़वाने का प्रयास करेंगे।
जागरण प्रभाव-
दैनिक जागरण ने इस तालाब का ऐतिहासिक महत्व वर्षांे पहले बताना शुरू कर दिया था जिसके चलते पूर्व प्रधान सतीश जेलदार ने इस बीड़ा को उठाया है। तालाब में वर्तमान में नलकूपों से पानी भरा जा रहा है नहर से जोडऩे के लिए अभी प्रयास करने बाकी हैं। यह सबसे सुंदर तालाब बना हुआ है।
फोटो कैप्शन: सतीश जेलदार एवं दुलीचंद साहब, दिनेश प्रधान
साथ में फोटो कैप्शन 02: कनीना का बाबा मोलडऩाथ तालाब।





बवानिया की सुनीता यादव को मिला इन्नोवेटिव फार्मर अवार्ड
-पूरे हरियाणा से एकमात्र अवार्ड है
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कनीना की आवाज। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा हाल ही में इन्नोवेटिव फार्मर पुरस्कार तथा फेलो फार्मर पुरस्कार दिए गए हैं जिसमें बवानिया की सुनीता यादव ने पूरे हरियाणा में नाम कमाया है। इससे पहले भी सुनीता को 2022 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार द्वारा प्रगतिशील किसान अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
 इन्नोवेटिव फार्मर अवार्ड का चयन राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है जिसमें एक राज्य से एक प्रतिभागी या एक से अधिक प्रतिभागी भी चयनित हो सकते हैं। इस बार यह राष्ट्रीय स्तरीय सम्मान सुनीता यादव को दिया गया है। यह अवार्ड उन्हें गुरुवार को दिल्ली में प्रदान किया गया। इस प्रकार के अवार्ड हर वर्ष कृषि अनुसंधान संस्थान घोषित करती है। हाल ही में कृषि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने 7 फेलो अवार्ड तथा 33 इन्नोवेटिव फार्मर अवार्ड घोषित किए हैं जिनमें हरियाणा से एकमात्र सुनीता यादव का नाम घोषित हुआ है। इस सूची में जहां सबसे अधिक नाम उत्तर प्रदेश से पांच अवार्ड घोषित किए गए हैं। सुनीता यादव ने खुशी जताते हुए बताया कि उन्हें यह अवार्ड दिल्ली में दिया गया है तथा जो भी राशि दी जाएगी वह उनके खाते में आएगी।
 इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ के एसडीओ डाक्टर अजय यादव से चर्चा की गई उन्होंने बताया कि सुनीता यादव 4.5 एकड़ में किसानी का कार्य करती है । वह एफपीओ की सदस्य है तथा बवानिया में गैर सरकारी सेल्फ हेल्प ग्रुप भी बनाया गया है। जिसमें महिलाओं को जोड़ा गया है ,महिलाओं को लेकर रोजगार मिल रहा है। जिसके चलते महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हुई है। प्राकृतिक खेती में गहन रुचि रखने वाली सुनीता यादव खेती के लिए जीवामृत, बायो गैस प्लांट, ड्रिप सिंचाई, सोलर लाइट आदि यंत्र प्रयोग कर रही है वहीं बाजरे के उत्पादअचार बनाना आदि का कार्य भी कर रही है।
 उनका आवेदन कृषि विज्ञान केंद्र के मार्फत पंचकूला भेजा गया था। इसमें डाक्टर रमेश यादव का अहम योगदान है। यह अवार्ड चार महीने पहले मिलने थे किंतु किसान आंदोलन बाद में आचार संहिता के कारण नहीं दिये जा सके और इनको अब दिल्ली में दिया गया है। यह क्षेत्र के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण अवार्ड है।
 फोटो कैप्शन 01: सुनीता यादव को दिल्ली में दिया गया अवार्ड तथा
एसडीओ कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ डाक्टर अजय यादव फोटो






विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस 8 जून
प्राथमिक अवस्था में ब्रेन ट्यूमर का पता लगने पर इलाज है संभव  डा धर्मेंद्र
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कनीना की आवाज। ब्रेन ट्यूमर सामान्य रूप से मस्तिष्क में तेजी से वृद्धि करने वाली कोशिकाएं होती है जो कैंसर युक्त भी हो सकती हैं। मस्तिष्क ट्यूमर मस्तिष्क के उत्तकों के क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि समय रहते इसका पता लग जाए तो इलाज संभव है वरना घातक परिणाम साबित होते हैं। यह जानकारी डा धर्मेंद्र रेजिडेंट डाक्टर पीजीआईएमएस रोहतक ।
उन्होंने बताया ब्रेन ट्यूमर होने के कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जो भिन्न भिन्न हो सकते हैं। इन लक्षणों में सिर दर्द होना, दौरा पडऩा,  सोचना मुश्किल, व्यवहार में परिवर्तन, पक्षाघात, संतुलन खोना, चक्कर आना, धुंधली दृष्टि, सुनने की क्षमता बाधित, उल्टी आना, निगलने में कठिनाई, भ्रमित मानसिकता, गंध न आना आदि हो सकते हैं। डा. सुंदरलाल ने बताया ब्रेन ट्यूमर को रोकने का कोई तरीका नहीं है लेकिन बचने के जोखिम को कम कर सकते हैं जिनमें कीटनाशकों के संपर्क में कम आना, कैंसर जनित रसायन पदार्थों के संपर्क में न आना, धूम्रपान करना, विकिरण आदि प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त कुछ और लक्षण भी मरीज में दिखाई पड़ सकते हैं।  ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाने के पीछे लोगों को इस रोग से जागरूक करना तथा रोग के प्रति शिक्षित करना है।
 क्या होता है ब्रेन ट्यूमर-
डॉक्टर धर्मेंद्र यादवबताते हैं कई बार किसी कारण से नई कोशिकाएं तो पैदा होती है लेकिन पुरानी कोशिकाएं नष्ट नहीं होती। धीरे-धीरे कोशिका और उत्तकों की एक गांठ बन जाती है,जो मस्तिष्क में बनने पर ब्रेन ट्यूमर कहलाती है। उन्होंने बताया ब्रेन ट्यूमर से ग्रसित व्यक्ति की सर्जरी की जाती है। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम और योग करना चाहिए, भरपूर नींद के साथ वजन का ध्यान रखना चाहिए। तंबाकू एवं शराब के सेवन से बचे।
डा.धर्मेंद्र यादव ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर का प्राथमिक अवस्था में पता लग जाए तो इलाज संभव है। उन्होंने कहा कि ब्रेन ट्यूमर का पता लगाने के लिए कुछ जांच करवानी पड़ती हैं।
कैसे पता लगाई ब्रेन ट्यूमर का-
 ब्रेन ट्यूमर की जांच सीटी स्कैन, एमआरआई तथा कई अन्य जांच से की जाती है जिसकी माइक्रो सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी आदि से इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि ट्यूमर दो प्रकार का होता है, एक कैंसर युक्त तथा एक बगैर कैंसर का। प्राय: 20 से 40 वर्ष की आयु में बिना कैंसर का ट्यूमर होता है। ब्रेन ट्यूमर का इलाज आपरेशन के जरिए संभव है परंतु 50 फीसदी मरीजों को रोग का एक साल के बाद ही पता चलता है जिसके कारण यह खतरनाक स्टेज तक पहुंच चुका होता है। उसके बाद इलाज असंभव होता है। सर्जरी के बाद थेरेपी दी जाती हैं जिनमें कीमो थेरेपी, रेडियो थेरेपी आदि विकल्प बचते हैं।
 फोटो कैप्शन: डा धर्मेंद्र रेजिडेंट डाक्टर









सीताराम मन्दिर में लगाईं मीठे पानी की छबील
-जगह जगह लगती हैं छबील
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कनीना की आवाज। कभी निर्जला एकादशी को ही मीठे पानी की छबील लगाई जाती थी किंतु अब तो हर दिन निर्जला एकादशी बना दिया है। प्रतिदिन विभिन्न मार्गों पर मरठे पानी की छबील लगाई जा रही हैं।
  इसी कड़ी में कनीना के सीताराम मन्दिर में धर्मार्थ मीठे पानी की छबील लगाई गई। जितेंद्र यादव ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सीताराम मंदिर में मीठे पानी की छवि लगाई गई है। उन्होंने बताया कि इस तरह के धार्मिक कार्यों में आसपास दुकानों के संचालक है, कस्बावासी मिलकर कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में समय-समय पर रामायण का पाठ सुंदरकांड का पाठ वह अन्य प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते रहे हैं। मीठे पानी की छबीली के साथ-साथ पशु पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था की जाती है। गर्मी के मौसम में लगातार 3 महीने के लिए पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की जाती है। इसके साथ ही पक्षियों के लिए अलग से दाने की व्यवस्था की गई है। जहां पर कस्बा के लोग मंदिर में आने वाले लोग यहां पर पक्षियों के लिए दाना डालते हैं। इस दौरान  पंडित प्रवेश शर्मा, प्रदीप, विशु , विकास,  प्रेम,  भल्ले, देवेंद्र, राजेंद्र, ललित, विजय सिंह, जितेंद्र शास्त्री सहित अन्य मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 06:राहगीरों को मीठा पानी पिलाते भक्त।






हरियाणा के राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अपना खोया हुआ सम्मान पाने को ला













लायित
-दो साल का सेवा विस्तार एवं दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियोंं की मांग
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कनीना की आवाज। हरियाणा शिक्षा विभाग में वर्ष 2020 व इससे पहले सभी राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को 2 साल का सेवा विस्तार, दो अतिरिक्त वेतन वृद्धियां, 21 हजार रुपये नकद ,शाल, प्रशस्ति पत्र सहित मेडल दिया जाता रहा है। परंतु वर्ष 2021 और इसके बाद राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को इन सेवाओं से वंचित कर दिया गया है। जिसका शिक्षकों में रोष है।
जहां वर्तमान में दो साल का सेवा विस्तार बंद है वहीं दो अतिरिक्त की बजाय अग्रिम वेतनवृद्धियां दी जा रही है वहीं पुरस्कार की राशि 21 हजार की बजाय एक लाख रुपये कर दी गई है। तबादलों में मिलने वाले पांच अंक भी काट दिये गये हैं। अग्रिम वेतन वृद्धि को लेकर अधिकारी संशय में हैं और ये कब और किसे दिया जाए स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे अनेक शिक्षक हैं जिनको अग्रिम वेतन वृद्धि का कोई लाभ नहीं हुआ है।  
  खोया हुआ सम्मान पाने के लिए स्टेट अवार्डी शिक्षकों ने एक अभियान भी चलाया। हर जिले से स्टेट अवार्डी शिक्षकों की  कार्यकारिणी गठित की गई तथा सरकार को रोकी गई सेवाओं पर पुनर्विचार करने पर के लिए ज्ञापन प्रेषित किए। हर जिले में यह कार्रवाई चल रही है।
वर्तमान में पालिसी में संशोधन करने के लिए प्रदेश कमेटी का गठन किया गया था किंतु कोई परिणाम नहीं मिला। पूर्व स्टेट अवार्डी शिक्षक बनवारी लाल, एचएस यादव आदि ने ने 2020 से पहले वाली दी जाने वाली सभी सुविधाएं प्रदान करने की मांग की है।  ऐसे में अगर सरकार इन शिक्षकों की मांग मान लेती है तो गिनी चुनी संख्या के इन शिक्षकों को अपना खोया हुआ सम्मान वापस मिल जाएगा। स्टेट अवार्डी शिक्षक अब टकटकी लगाकर सरकार पर नजरें टिकाये हुये है ताकि जब भी भविष्य में इन विषयों पर चर्चा हो तो सरकार तुरंत उनकी मांगे मान ले। अभी तक दो अग्रिम वेतनवृद्धियों को लेकर भी स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं है कि किसे दिए जाने हैं। जिसके चलते अधिकांश शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धियां अभी नहीं दी जा रही है। पे रूल 2016 का हवाला देकर दो अग्रिम वेतन वृद्धि उन शिक्षकों को नहीं दे रहे जिनकी उम्र 55 साल या इससे अधिक है। ऐसे में बहुत से शिक्षक बेहद परेशान है और उनका कहना है कि अब तो सम्मान का अर्थ ही बदल गया है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि उनका खोया हुआ सम्मान एक बार फिर से लौटाते हुए उनकी 2 साल सेवा विस्तार दो अग्रिम वेतन वृद्धियां एवं अतिरिक्त लाभ दिए जाएं।