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Tuesday, November 24, 2020

 

  15 बोतल शराब पकड़ी

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कनीना। मुखबिरी के आधार पर कोटिया के एक व्यक्ति से मोटरसाइकिल पर 13 बोतल शराब पकड़ी। मामला दर्ज कर लिया है।
एएसआई कुलदीप द्वारा सुनील अहीर कोटिया जो कोटिया से कोसली रोड कच्चे रास्ते पर अपनी मोटरसाइकिल पर पिट्टू बैग में दारु बेच रहा था को पकड़ा गया। तलाशी पर 13 बोतल शराब देसी असली संतरा व दो बोतल मैकडोल रम मिली।

  38 किसानों का 680 क्विंटल बाजरा खरीदा संवाद सहयोगी, कनीना। कनीना हैफेड द्वारा मंगलवार को 38 किसानों का 680 क्विंटल बाजरा खरीदा। अब तक कुल खरीद 301686 क्विंटल पहुंच चुकी है जबकि अब तक 10529 किसानों का बाजरा खरीदा जा चुका है। विस्तृत जानकारी देते सतेंद्र यादव हैफेड मैनेजर ने बताया कि अब तक 601485 बैग की लिफ्टिंग की जा चुकी है। 27 नवंबर तक बाजरे की खरीद होगी।
बार एसोसिएशन ने रखा एक दिन का कार्य बहिष्कार

एसडीएम विश्राम कुमार मीणा ने संभाला कनीना का अतिरिक्त कार्यभार, मैरिज पहले संचालकों की ली बैठक

__मैरिज पैलेस में अधिक भीड़ भाड़ ना करें:- एसडीएम विश्राम कुमार मीणा

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 कनीना। महेंद्रगढ़ एसडीएम विश्राम कुमार मीणा ने कनीना कनीना उपमंडल का मंगलवार को 11 बजे अतिरिक्त कार्यभार संभाला है। एसडीएम विश्राम कुमार मीणा ने कनीना उपमंडल कार्यालय का कार्यभार संभालकर कार्यालय कर्मचारियों की बैठक ली एवं निर्देश देते हुए कहा कि समय पर कार्यालयों में पहुंचकर आमजन के कार्य समय पर ही पूरे करें। लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनका लाभ दिलवाएं। वहीं दूसरी तरफ दोपहर में एसडीएम विश्राम कुमार मीणा ने मैरिज पहले संचालकों की एक बैठक ली इस बैठक में सभी मैरिज पैलेस संचालकों को दिशा निर्देश दिए गए कि कोविड-19 के निर्देशों का पालन करें। हलवाई कोरोना की जांच के बाद ही खाने बनाने का कार्य करें। हलवाई खाना बनाते समय मास्क का प्रयोग करते हुए ग्लव्स लगाएं। बैठक में एसडीएम ने मैरिज पैलेस संचालकों को कहा कि मैरिज पैलेस के अंदर जगह जगह पर पानी की बाल्टी और साबुन रखी जाए जिस वजह से कोई भी व्यक्ति बार-बार हाथ धो सके। मुख्य दरवाजे पर पानी की बाल्टी व साबुन जरूर रखें। अधिक भीड़भाड़ ना करें । डीजे बजाने के लिए एसडीएम कार्यालय से परमिशन लेनी होगी। डीजे बजाने का समय शाम को 7:00 से 10:00 बजे तक रहेगा।  बैठक में उपस्थित नगरपालिका के कनिष्ठ अभियंता हितेश कुमार यादव को दिशा निर्देश देते हुए कहां की कोई भी मैरिज पैलेस कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन नहीं करता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। शादी कार्यक्रम को आयोजन करने वाले आयोजकों से एसडीएम ने अपील की है कि एसडीएम कार्यालय से वह परमिशन लेकर ही मैरिज पैलेस में शादी करें।  


फ़ोटो कैप्शन:- एसडीएम विश्राम कुमार मीणा मैरिज पैलेस संचालकों को कोविड-19 की गाइडलाइन जानकारी देते हुए।



मुहिम तेज

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 कनीना। महेंद्रगढ़ को ही जिला मुख्यालय बनाने की मुहिम तेज होती नजर आ रही है।  कनीना बार एसोसिएशन ने मंगलवार को बार प्रांगण में एक बैठक का आयोजन किया। जिसमें बार एसोसिएशन  ने एक दिन का कार्य बहिष्कार रखा।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे बार प्रधान कुलदीप रामबास ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला मुख्यालय महेंद्रगढ़ में ही बनाए जाने की मांग रखी है इसमें सभी अधिवक्ताओं ने अपने अपने विचार रखे और सभी की सहमति से यह निर्णय लिया गया कि 1 दिन के कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। बैठक में सभी अधिवक्ताओं ने 25 नवंबर को महेंद्रगढ़ बार में पहुंचकर अपना प्रस्ताव महेंद्रगढ़ पार के समर्थन में देने का फैसला लिया है इस मौके पर बार के सभी अधिवक्ता गण मौजूद रहे।

कनीना क्षेत्र में मिले सात संक्रमित

कनीना क्षेत्र में सरकारी कर्मचारी सहित मिले 6 संक्रमित

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कनीना। कोरोना का कहर आए दिन बढ़ता ही जा रहा है। मंगलवार को कनीना क्षेत्र में साथ संक्रमित मिले हैं । उप नागरिक अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी सुनील ने जानकारी देते हुए बताया कि कनीना क्षेत्र में एक सरकारी कर्मचारी सहित छह संक्रमित मिले हैं। कनीना में 4 विद्यार्थी संक्रमित मिले हैं। जिसमें 15 वर्षीय एक बालक, 16 वर्षीय एक बालिका, 17 वर्षीय एक बालिका, 14 वर्षीय एक बालक है। इन सभी ने मोबाइल टीम को 20 नवंबर को अपना सैंपल जमा कराया था। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को पॉजिटिव आ गई। गाहड़ा गांव के 2  संक्रमित मिले हैं। उन्होंने 20 नवंबर को अपना सैंपल जमा करा था। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को पॉजिटिव आ गई। कपूरी गांव का एक सरकारी कर्मचारी संक्रमित मिला है। इस कर्मचारी ने मोबाइल टीम को 20 नवंबर को अपना सैंपल जमा कराया था जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को पॉजिटिव आ गई।

बेहतर प्रदर्शन रहा

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कनीना।  बाल भवन,नारनौल द्वारा आयोजित विभिन्न जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में आरआरसीएम पब्लिक स्कूल, कनीना के विद्यार्थियों का बेहतर प्रदर्शन रहा । रोशनलाल चेयरमैन ने बताया कि आरआरसीएम पब्लिक स्कूल ने 6 स्थान प्राप्त किए । आयुवर्ग 15-18 में कार्ड बनाओ प्रतियोगिता में छात्रा शिखा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं आयु वर्ग 10-14 में फेस मेकिंग प्रतियोगिता में छात्र लोकेश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा आयुवर्ग 3-5 में क्ले  माडलिंग प्रतियोगिता में छात्रा सनाया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया । आयुवर्ग 15-18 में स्केचिंग प्रतियोगिता में छात्र भव्य ने तथा आयुवर्ग 10-14 में छात्र सुमित ने स्केचिंग प्रतियोगिता में व आयुवर्ग 05-10 में छात्रा उमंग ने पोस्टर बनाओ में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
एक ही व्यक्ति बार-बार लोगों को लगा रहा है चूना
-हजारों रुपये का माल विभिन्न आधा दर्जन दुकानदारों का बहाना करके ले उड़ा

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 कनीना। महिंद्रा मिराजो  अप्लाइड फार में आने वाला एक हट्टा कट्टा व्यक्ति विभिन्न गांवों और दुकानदारों को लंबे समय से चूना लगा रहा है। उसके ठगने की कला भी अजब निराली है। किसी को पता भी नहीं लगने देता और चंद ही क्षणों में चपत लगा जाता है। करीब आधा दर्जन कनीना के दुकानदारों को चपत लग चुकी है। पुलिस तक भी जानकारी पहुंच गई है। पुलिस भी इस मामले में तह तक जाने में जुट गई है।
अच्छी खासी गाड़ी में और अच्छी खासी पर्सनालिटी होने से लोगों को पता भी नहीं चलता कि यह ठग हो सकता है। यहां तक की वेश बदलकर व आसपास के दुकानदारों के भाई बहनों या अन्य साथियों के बारे में जानकारी भी हासिल कर लेता है और अगले दिन ही चपत लगा देता है। ऐसा दुकानदारों ने बताया। कुछ घटनाएं इस प्रकार की घटी है जिसमें वह पहले सामान अपनी गाड़ी में रखवा लेता है और फिर तुरंत फोन पर झूठ में कहता है कि मेरे भाई कहां हो? मैं तुरंत आया, अभी आया और इतना कहकर दुकानदार को एक मिनट का समय मांग कर सामान लेकर फरार हो जाता है। गत दिवस कनीना के दुकानदारों ने भी उसका दोपहिया वाहनों द्वारा पीछा किया किंतु हाथ नहीं आया। यहां तक कि विगत वर्ष से लोग इसी गाड़ी को देख रहे हैं जो अप्लाइड फार है और नंबर नहीं लिये गये हैं।
नजारा एक-
बस स्टैंड कनीनना-महेंद्रगढ़ रोड पर करतार सिंह दुकानदार के पास यह हट्टा कट्टा युवक आया और कहा कि उसे अपने मंदिर के लिए बेहतरीन कालीन चाहिए। करीब 12 हजार रुपये की अच्छे दर्जे के कालीन व पैरों की चटाई गाड़ी में डलवा कर फोन पर कहा कि अच्छा मेरी बहन, मैं अभी आया, अभी आया, वहीं रुको।   ऐसा आभास करवाया कि उसकी बहन पास में खड़ी है। दुकानदार को कहा कि एक ही मिनट में मैं आया, मेरी बहन इंतजार कर रही है। अभी पैसे देता हूं इतना कहकर सामान सहित फरार हो गया।
दृश्य नंबर 2
भरपूर सिंह गाहड़ा रोड पर वही हट्टा कट्टा जवान गाड़ी सहित आता है और भरपूर के  पुत्र रोहित के बारे में पूछता है। ऐसा लगा कि यह व्यक्ति रोहित को जानता है। गाड़ी में करीब 13 हजार रुपये बिस्कुट आदि डलवा लिया और कहा कि आज स्कूल में समारोह है उसके लिए यह सामान चाहिए। तभी वहीं घटना, फोन पर झूठ मूठ कहता है कि पिताजी, मेरे पिताजी, कहां खड़े हो और दुकानदार से कहता कि मेरे पिता आ गए हैं,वे बुड्ढे और बीमार हैं, 1 मिनट का समय दो। इतना कह कर सामान सहित फरार हो जाता है।
 घटना नंबर 3 --
कनीना के सुमेर सिंह चेयरमैन अपनी सिले सिलाये वस्त्रों की दुकान पर बैठा है। उसका पुत्र कपड़े दिखा रहा है। तभी वह हट्टा कट्टा होती महिंद्रा मिराजों में आता है और आसपास के लोगों से नमस्ते करता है जिससे आभास करवाता है कि वह सभी को जानता है। कुछ पेंट शर्ट रखवाकर वहीं पुराना बहाना। फोन पर झूठा बात करने का बहाना करता है कि मेरा पुत्र आ गया,वहीं रुको मै आया।  दुकानदार से कहता है कि मेरा बेटा आ गया एक मिनट का समय दो, मैं अभी पैसे देता हूं इतना कहकर गाड़ी से फरार हो जाता है।
नजारा एकता बाजार का
 वही हट्टा कट्टा व्यक्ति अपने महिंद्रा मिराजो में एकता बाजार पर आता है। 30 हजार रुपये का विभिन्न सामान रखकर वही पुराना पैंतरा बनाता है लेकिन यहां के लोगों ने उसे समझ लिया जिसके चलते वह बहाना करके भागने लगा लोगों ने पीछा भी किया किंतु निराशा हाथ लगी बहुत तेज गति से गाड़ी को दौड़ा ले गया और फिर चपत लगाकर भाग गया।
नजारा रवि की दुकान का-
रवि इलेक्ट्रानिक्स की दुकान पर यही व्यक्ति अपनी गाड़ी सहित आता है और 3000 का सामान खरीद लेता है और रवि के भाई सुरेश के बारे में बातें भी करता है जिससे ऐसा लगा कि है उसको भी जानता है और वही फोन पर बहाना करके मिनटों में फरार हो गया। इससे पहले भी कनीना में एक इलेक्ट्रोनिक्स की दुकान पर लाखों रुपये की ठगी कर चुका है।  मिली जानकारी अनुसार इस व्यक्ति ने जिला महेंद्रगढ़ के विभिन्न शहरों एवं गांवों में भी ऐसा ही तहलका मचा रखा है। खूब ठगी सरेआम करता है। अब तो बात धीरे धीरे फैलने लगी है। सभी दुकानदारों को सूचित करना शुरू कर दिया है कि इस प्रकार गाड़ी में आने वाले व्यक्ति को से पहले पैसे वसूले फिर सामान दे तथा उसे पकड़वाने में मदद करे। वरना पछताना पड़ेगा।
  लुभाने लगे हैं किचन गार्डन, महिलाओं का रुझान बढ़ा

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कनीना। महंगाई के युग में जहरीली सब्जियों से बचने के लिए घरों में किचन गार्डन की ओर गृहणियों का ध्यान बढ़ा है। सरकार ने विभिन्न सरकारी स्कूलों में मिड डे मील के लिए भी किचन गार्डन जरूरी कर दिया है। ऐसे में स्कूलों में भी किचन गार्डन लगे हुए हैं। कोरोना काल के चलते भी धरों की सब्जी उगाना सेहत के लिए अच्छा माना जा रहा है।
 बागवानी विभाग द्वारा विगत वर्षों सब्जी के बीज किचन गार्डन के लिए दिए जाने से भी गृहणियों का मन हरी पत्तेदार सब्जियां उगाने तथा फल फूल उगाने की ओर अग्रसर हुई हैं। कनीना में करीब आधा दर्जन गृहणियां एवं लोग इस ओर ध्यान दे रहे हैं। कनीना के रविंद्र कुमार पूर्व अध्यापक, राजेंद्र सिंह, अजीत कुमार, कमला देवी कनीना मंडी, आशा कनीना ने बेहतर किचन गार्डन बनाकर दूसरों को प्रेरणा देने का काम किया है।
  कनीना के वार्ड एक की आशा नामक गृहणि ने तो अपना पूरा घर ही किचन गार्डन में बदल दिया है। उन्होंने अपने दो घरों में किचन गार्डन बना रखे हैं और पालक, गोभी, मटर, गाजर, धनिया, मूली के अलावा मेथी उगा रखी है वहीं फलों के रूप में अमरूद,  अनार आदि उगा रखे हैं। घर में विशिष्ट स्थानों पर तुलसी उगा रखी है। उन्होंने बताया कि बाजार की जहरीली सब्जियों की बजाय वे अपने गार्डन में उगाई गई सब्जी को प्रयोग करती आ रही है। बाजार से कुछ रुपयों के सब्जी के बीज मंगवाकर प्रयोग कर रही हैं।
  सबसे बड़ी विशेषता उन्होंने बताई कि जब कभी मेहमान घर में आ जाता है तो तुरंत गार्डन की सब्जी तोड़कर बनाई जाती है और मेहमान ताजी सब्जी को खाकर प्रसन्न हो जाता है। आस पास के घरों में जब किसी हरी पत्तेदार सब्जी की जरूरत होती है तो वे भी यहां से सब्जी ले सकते हैं। उनका गार्डन 24 घंंटे मुफ्त सब्जी की दुकान की भांति काम करती है।
  पूर्व खंड कृषि अधिकारी डा देवराज का कहना है कि घर में सब्जी उगाकर न केवल धन की बचत की जा सकती है वहीं ताजा सब्जी खाने को मिल सकती है। प्रत्येक गृहणि को इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए जिससे स्वस्थ किचन, साफ हवा तथा मनपसंद हाबी को अपनाकर रोगों से बचा जा सकता है। उनसे अन्य महिलाओं को भी शिक्षा लेनी चाहिए।
फोटो कैप्शन  1: आशा के किचन गार्डन का नजारा।











गाजर की खेती बन रही है वरदान

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कनीना। कोरोना की मार को देखते हुए इस वर्ष गाजर एवं मूली की पैदावार कम होने से भाव अच्छे मिल रहे हैं। कनीना उपमंडल के मोड़ी गांव के किसान सर्दी के मौसम में गाजर उगाकर लाखों रुपए का मुनाफा ले रहे हैं। वे एक नहीं अपितु दो-दो फसल ले रहे हैं।  गाजर उखाडऩे के बाद मेथी, मटर, टमाटर, मिर्च लगाकर अतिरिक्त लाभ कमाते हैं।
 मोड़ी के गजराज सिंह एवं अजय कुमार आदि ने बताया कि उन्होंने गाजर की खेती है और वर्ष 2008 से लगातार गाजर उगाते आ रहे हैं। इसे उखाडऩे के बाद मेथी,टमाटर, मिर्च की फसल पैदावार बतौर रबी फसल ले रहे है। जिसमें भी मुनाफा होता है। वर्तमान में आधा एकड़ में गाजर की बिजाई की गई है। बाजार में गाजर के भाव 20 रुपये किलो तक तथा मूली उगाने वाले गाहड़ा के सत्येंद्र शास्त्री ने बताया कि भाव 30 रुपये किलो तक मिले हैं और अब भाव घट रहे हैं।
   किसान अक्टूबर-नवंबर में उखाड़ कर उसके स्थान पर दूसरी पैदावार लेते हैं। इस फसल सब्जी में हजारों रुपए तक आया प्राप्त होती है लेकिन अब तो सरकार ने भावांतर भरपाई योजना शुरू कर रखी है। इस योजना के तहत नुकसान की भरपाई सरकार कर सकती है।

Monday, November 23, 2020


 27 नवंबर को महेंद्रगढ़ में सम्मान समारोह का होगा आयोजन

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 कनीना। स्थानीय विद्युत निगम कार्यालय के प्रांगण में बिजली कर्मचारियों की एक बैठक सोमवार को संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता एसएसए धर्मपाल यूनिट प्रधान एससी बीसी ने की।
 इस बैठक में कई प्रकार के मुद्दों को लेकर चर्चा की गई।  जिसमें आगामी 27 नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यकारिणी का सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसएसए धर्मपाल यूनिट प्रधान एससी बीसी ने बताया कि सम्मान समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों का भी सम्मान किया जाएगा। जिसमें कर्मचारियों की सभी मांगों को लेकर विचार विमर्श भी किया जाएगा।  इसके साथ ही उन समस्याओं का जल्दी उनका निदान कराने का प्रयास किया जाएगा। इस बैठक में राजेंद्र सिंह सर्किल ऑर्गेनाइजर, सज्जन सिंह यूनिट प्रधान, सत्यवीर एसएसए यूनिट सचिव, यूनिट सेक्रेटरी राजेश, लाइनमैन बाबूलाल उपप्रधान, मनोज प्रधान, सत्यवीर दहिया, संदीप सिंह, बृजलाल संगठनकर्ता, जोगेंद्र प्रेस सचिव, अनिल एल एम के अलावा अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे । फोटो कैप्शन:- बैठक में शामिल को संबोधित करते वक्ता । 

 

अज्ञात कारणों से लगी आग में डेढ़ सौ मन कड़बी जलकर हुई राख
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कनीना। गाहडा रोड़ पर टाइल फैक्ट्री के पास कनीना में सोमवार देर शाम अचानक आग लगने से किसान राजकुमार पुत्र बालकिशन  की डेढ़ सौ मन कड़बी जलकर राख हो गई। किसान ने तुरंत इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। लेकिन दमकल की गाडिय़ां पहुंचने पहले ही पूरी कड़बी जलकर राख हो चुकी थी। कनीना निवासी किसान राजकुमार ने अपने खेत में चार एकड़ की कड़बी एकत्रित कर रखी थी। सोमवार देर शाम को अज्ञात कारणों से कड़बी में आग लग गई। इसके बाद किसान ने आगजनी की सूचना फायर ब्रिगेड विभाग नारनौल को दी। परंतु फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचने से पूर्व ही कड़बी जलकर राख हो चुकी थी। फायर ऑफिसर राकेश कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड वहां से रवाना हो गई और मौके पर पहुंची मौके पर पहुंचे तब तक अधिकतर कड़बी जलकर राख हो चुकी थी। फायर ब्रिगेड टीम सुनील कुमार चालक, कुलदीप फायरमैन, राकेश फायरमैन में पहुंचकर आग बुझाने का भरपूर प्रयास किया। फ़ोटो कैप्शन:- आग बुझाते हुए फायर ब्रिगेड के कर्मचारी ।


धनौंदा मे शैड माता के भंडारे व जागरण के लिए की बैठक

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 कनीना। उप मण्डल के गावं धन्नौदा मे शैड माता के भंडारे व जागरण के लिए कमेटी ने बैठक का आयोजन किया। कमेटी के सदस्य अमित प्रजापत ने जानकारी देते हुए बताया कि शैड माता के भंडारे व जागरण के लिए कमेटी ने बैठक का आयोजन क्या गया था। यह कार्यक्रम
 तीन दिन चलेगा। जिसमें तीन वेद शास्त्रियों द्वारा मंत्र उच्चारण करके तीनों दिन जप किया जाएगा। जिसमें एक विवाहित जोड़ा मुख्य यजमान के रूप में तीनों दिन पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रहेगा। जिसके हाथों से पूजा करवाई जाएगी। पूजा में कोवीड़ 19 के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
 कार्यक्रम की व्यवस्था को बनाने में जेबीडी युवा क्लब धंनौंदा व शैड माता मंदिर कमेटी के सभी सदस्यों   द्वारा मुख्य भूमिका निभाई जाएगी । बैठक में माता कमेटी पनी लाल प्रधान प्रजापत समाज, कैसियर राजू पंच, पवन प्रधान, शेर सिंह ठेकेदार, उपप्रधान,  सुरेश कुमार धोलिया, अमित प्रजापत, मुकेश बोहरा, हरचंदा हलवाई, रामचंद्र प्रजापत, सतपाल वर्मा, प्रकाश मिस्त्री व अन्य लोगों को जिम्मेवारी सौंपी ।
फ़ोटो कैप्शन:- बैठक के बाद माता के मंदिर में बैठे हुए कमेटी के सदस्य ।

 आठ वर्ष बाद हुई दो बेटियों के जन्म पर किया कुआ पूजन

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 कनीना। बेटा और बेटी एक समान। बेटियों के बिना सृष्टि चल ही नहीं सकती। समाज को यही संदेश देने के लिए कनीना के वार्ड नंबर 4 में बेटियों की जन्म पर को कुआं पूजन करके खुशी मनाई गई।  सूबेदार जगदीश प्रसाद ने बताया कि उनके 8 वर्ष के बाद दो पोतीयां हुई हैं जो कि बहुत खुशी की बात है उन्होंने कहा कि लड़का और लड़की में कोई फर्क नहीं होता । आज हम इतनी खुशी है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। जगदीश प्रसाद सूबेदार से सेवानिवृत्त होकर समाज की सेवा में लगे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ सूबेदार जगदीश प्रसाद की पत्नी सोमवती देवी ने खुशी जताई उन्होंने कहा कि दादी बनने की खुशी और वह भी एक साथ दो पोतीयों के जन्म की खुशी है। कन्याओं के पिता योगेश व कन्या की मां राधा रानी ने सभी बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। योगेश ने जानकारी देते हुए बताया कि उसकी शादी 2012 में हुई थी। 8 वर्ष बाद उनके दो कन्याओं ने जन्म लिया है। इसकी खुशी है।  परिवार ने बेटीयों के जन्म पर वे सब रस्में पूरी की जो बेटे के जन्म पर की जाती हैं। कुआं पूजन की रस्म की गई। सूबेदार जगदीश प्रसाद ने कहा कि आज बेटियां किसी भी तरह बेटों से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी पोतीयों  को अच्छी शिक्षा दिलवा कर अफसर बनाएंगे। इस मौके पर कैप्टन भरपूर सिंह, सूबेदार जगदीश प्रसाद, योगेश कुमार, राधा रानी, सोमवती देवी, यादवेंद्र पूर्व प्रधान गौशाला प्रधान, महेश कुमार, कृष्ण कुमार, राकेश, राम कुमार, सुशील मित्तल, रेवती देवी आदि मौजूद रहे।
फ़ोटो कैप्शन:- कुआं पूजन के लिए जाती हुई महिलाएं ।


प्याज के भाव बढ़े, मांग घटी

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 कनीना। जहां प्याज के भाव दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं वह इसकी मांग घटती जा रही है। प्याज उत्पादन करने वाले किसानों का कहना है कि बाजार में बहुत कम प्याज बिकती है। विगत वर्ष प्याज के भाव कम थे, कोई पूछने वाला नहीं था। किसान हरी प्याज ही बेचने लगे हैं जिसकी मांग अधिक है। किसानों ने बताया कि बाजार में 30 से 35 रुपये किलो प्याज बिक जाती है।
     कनीना क्षेत्र के अजय कुमार, कांता देवी, गजराज सिंह महावीर सिंह ने बताया कि उन्होंने प्याज उगा रखी है। हरी प्याज की काफी मात्रा में बिक्री हुई हैं किंतु अब कीमत प्याज की मांग तो बढ़ गई है किंतु बाजार में खरीददार बहुत कम हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में 40 से 50 किलो प्याज ही दुकानदार खरीद पाते हैं जबकि उनके पास उत्पादन अधिक है।  उन्होंने बताया कि जहां गृहणी भी प्याज का कम से कम उपयोग कर रही है। वहीं वे प्याज का विकल्प ढूंढ रही हैं। सब्जी में प्याज डालनी कम कर दी हैं।
आज प्याज के भाव 60 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं किंतु किसी भी  सब्जी की दुकान पर 30 से 40 किलो से अधिक प्याज नहीं मिलती। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि प्याज के आए दिन भाव कम अधिक हो रहे हैं जिसके चलते वे अधिक प्याज नहीं खरीद रहे। वैसे भी नई प्याज आ जाने से वह जल्दी सड़ जाती है। ऐसे में अधिक मात्रा में लेकर दुकानदार भी प्याज को नहीं डाल रहे हैं।
विगत दिनों से प्याज एवं टमाटर के भाव बढ़ते ही जा रहे थे किंतु अब टमाटर तो कुछ सस्ता हो गया किंतु प्याज जस की तस महंगी है। उधर विगत वर्ष किसानों की प्याज के भाव कम होने से परेशानी बढ़ी थी और प्याज को कोई पूछने वाला नहीं था किंतु इस वर्ष प्याज के भाव अधिक तो मांग कम है।
फोटो कैप्शन 3: प्याज की खेती दिखाती महिला किसान

आवारा जंतुओं से किसान परेशान

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कनीना। सर्दी के मौसम में आवारा जंतु किसानों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। नील गाय उनमें से एक हैं। ये फसल का दस फीसदी भाग तक नष्ट कर देती हैं। गेहूं तथा सरसों की फसल खेतों में हरियाली के रूप में दिखाई पडऩे लगी है।
 किसान की फसल का बहुत कुछ हिस्सा आवारा जंतुओं का निवाला बन जाता है। चूहे,मोर, नील गाय, आवारा गाएं, पक्षी, कीट, बंदर और शशक आदि  किसान के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। किसान को तो इन जीवों से फसल को बचाए रखने के लिए भारी धन खर्च करना पड़ रहा है। आवारा जंतुओं से फसल को बचाने के लिए रखवालें भी रखने पड़ते हैं जो रखवाली के बदले अनाज लेते हैं। गौशाला होने के बावजूद भी कनीना में आवारा गाएं घूम रही हैं। किसान के लिए ये भी सिरदर्द बनी हैं। गौशाला के बाद माना जाता था कि अब तो खेत इनसे बच जाएंगे किंतु आवारा गाए अभी भी देखी जा सकती हैं।  
   किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत सिंह, कृष्ण कुमार आदि ने बताया कि नील गाय और आवारा गायें सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। नील गाय झुंड के रूप में चलती हैं और जिस किसी खेत में घुस जाती हैं उसे तबाह करके ही दम लेती हैं।  किसान को सबसे अधिक रखवाली इन्हीं जीवों से करनी होती है। इन्हीं जीवों से फसल को बचाने के लिए रखवालों का प्रबंध भी करना पड़ता है। आवारा गायों और नील गायों से बचने के लिए खेत में रखवाली के बावजूद भी ये गाएं फसल को नुकसान पहुंचाए बगैर नहीं रह सकती हैं। फसल को नुकसान पहुंचाने में आवारा गाएं, सुअर जैसे कितने ही जीव न केवल खेत में खड़ी अपितु काटकर डाली गई फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
क्या कहते हैं किसान-
 किसानों का कहना है कि नील गाय उनकी फसल को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। बाकी जानवर मिलकर जितना नुकसान नहीं पहुंचाते उतना नील गायें पहुंचा रही हैं। किसान अजीत कुमार, रमेश कुमार, सूबे सिंह ने बताया कि वे फलदार पौधे उगाते थे किंतु अब ये फलदार पौधे उगाने बंद कर दिए है क्योंकि फलदार एवं सब्जियों को नीलगाय खत्म कर जाते हैं।
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी-
कृषि विस्तार अधिकारी डा देवराज ने कहा कि यूं तो पूरे हरियाणा की ही यह समस्या है और समस्या अधिक विकराल दक्षिण हरियाणा की है जहां मेहनत अधिक करके ही किसान फसल उगाता है और उस पर पानी फेर नील गाय चंपत हो जाती है। सर्दी से बचने के लिए किसान जब घर में जाता है तभी ये नील गाय नुकसान पहुंचा जाती है। इनका नुकसान भारी है जो दस फीसदी को पार कर जाता है।









हरी सब्जी का विकल्प बथुआ हो रहा है प्रयोग

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 कनीना। सब्जी महंगी होने के कारण किसान वर्ग न केवल खेतों में खरपतवार के रूप में उगने वाले बाथू/बथुआ को सब्जी के रूप में प्रयोग कर रहे हैं वहीं खेतों से उखाड़कर दूसरों को भी खाने की प्रेरणा दे रहे हैं। बाथू गुणकारी औषधि के रूप में जानी जाती है।
उल्लेखनीय है कि बाथू मानव के काम तो आता है वहीं पशुओं के लिए भी उत्तम हरे चारे का काम करता है। सर्दियों में रबी फसल के साथ अपने आप उगने वाले इस हरे भरे शाक को ग्रामीण परिवेश के लोग बाथू,बथुआ या हरा नाम से पुकारते हैं जिसे आयुर्वेद में कई गुणों की खान व औषधियों में काम में लाया जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे चिनोपाडियम कहते हैं।
 किसान दिनेश कुमार, रवि कुमार, महेश कुमार ने बताया बाथू का किसी जमाने में गरीब तबके के लोग ही प्रयोग में लाते थे जो महंगी बाजार की सब्जी खरीदने में असमर्थ थे किंतु आजकल बदलाव आ गया है और अमीर एवं रोगी जनों के लिए रामबाण दवा का काम कर रहा है विशेषकर पेट की बीमारी एवं एनिमिया के शिकार इसे ढूंढते  फिरते हैं। उनका कहना है कि जब बाजार में अन्य सब्जियां महंगी हो रही है तो ऐसे में बाथू ही गुणकारी सब्जी का काम करेगा। ये किसान स्वयं भी इसे प्रयोग कर रहे हैं और दूसरों को भी इसे खाने की सलाह दे रहे हैं। वैद्य बालकिशन का कहना है कि पेट की बीमारियों एवं खून की कमी को दूर करने में सहायक है।
 किसानों कुलदीप बोहरा, देशराज, आशा, शकुंतला आदि ने बताया कि वे इसे रायता, देसी सब्जी बनाने में प्रयोग कर रहे हैं वहीं आटे में मिलाकर रोटियां बना रहे हैं वहीं इससे जायकेदार पराठे भी बना रहे हैं। ये व्यंजन उनको बहुत अधिक भा रहे हैं। यही नहीं अपितु वे सरसों का साग व अन्य खेतों में पाई जाने वाली हरी सब्जियां प्रयोग में ला रहे हैं। खरपतवार के रूप में अपने आप खेतों में उगने वाला बाथू ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शाक माना जाता है। कई रूपों में मानव के काम आता है वहीं पशुओं के लिए भी उत्तम हरे चारे का काम करता है। सर्दियों में फसल के साथ अपने आप उगने वाले इस हरे भरे शाक को ग्रामीण परिवेश के लोग बाथू,बथुआ या हरा नाम से पुकारते हैं।
    बाथू आजकल किसानों के लिए आय का साधन बनता जा रहा है। इसके गुणों को देखते हुए अमीर जन इसे बाजार से खरीद कर लाते हैं और बड़े ही चाव से खाते हैं जिससे सिद्ध होता है कि बीते जमाने की गरीबों की सब्जी अब अमीरों का भोजन बनती जा रही है। बाजार में किसान इसे उखाड़कर बेच रहे हैं और आमदनी कर रहे हैं। एक ओर जहां सब्जी महंगी हो रही हैं और हरी सब्जियां तो आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। ऐसे में बथुआ किसानों के लिए ही नहीं अपितु आम जन के लिए मुफ्त की हरी सब्जी बन गयी है।   
फोटो 1 व दो: बाथू खेतो ंमें उगा हुआ।

Sunday, November 22, 2020

 

खरीद बाजरे की खरीद नहीं हुई, उठान रहा जारी -11000 बैग का किया गया उठान 

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 कनीना। कनीना अनाज मंडी में जहां सोमवार को 50 किसान बाजरा बेचने के लिए आएंगे वहीं अब तक 7,63,3,98 बैग बाजरा कनीना मंडी में खरीदा जा चुका है जिसमें से 602318 बैग कनीना मंडी से 1,610,80 बैग गौशाला रोड से खरीदा गया है। जानकारी देते हुए हैफेड के भरपूर यादव ने बताया कि रविवार को खरीद नहीं हुई किंतु उठान जारी रहा। 11,000 बैग उठाना किया गया। अब महज अनाज मंडी में आठ हजार बैग पड़े हुए हैं। जिनका उठान जल्द ही कर दिया जाएगा। खरीद 27 नवंबर तक चलेगी।


बच्चों को ठंड लगने से बचाए
-गर्म पानी रोज पीये, बुजुर्गों को भी ठंड से बचाए

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कनीना। कनीना क्षेत्र में विगत दो दिनों से ठंड बढ़ी है। रविवार को दिनभर शीत लहर चली, आसमान में हल्के बादल भी नजर आये। ठंड पडऩे से जहां बुजुर्ग तथा छोटे बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। वही पशुपालक भी परेशान होने लगे हैं। एक ओर कोरोना वहीं ठंड एवं शीत लहर ने परेशानी बढ़ा दी है।
 कनीना के  डा वेदप्रकाश  ने बताया कि छोटे बच्चों में ठंड जल्दी लगती है जिनमें निमोनिया तक होने की संभावना जताई है उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को कपड़े पहना कर सुला देने से वे ठंड के शिकार हो रहे हैं क्योंकि वह ऊपरी कपड़े फेंक देते हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि अधिक कपड़े पहनाकर बच्चों को रजाई वगैराह नहीं ओढ़ाई जाए वही बच्चे की मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम है। बच्चों को सर्दी से बचाना चाहिए सर्दी लगने पर डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बच्चा दो-तीन घंटे में तक दूध नहीं पीता तुरंत डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को उसकी सांस से पता लगाया जा सकता है कि उन्हें कहीं निमोनिया आदि तो नहीं लग गया है यदि सांसों में एक विशेष प्रकार की आवाज आए तो समझों की ठंड लग गई है।
 उधर वैद्य बालकिशन शर्मा एवं हरिकिशन शर्मा ने बताया कि सर्दी से बुजुर्गों को भी बचाना जरूरी है। सर्दी से हृदयघात होने तथा सांस में तकलीफ बढऩे की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में बुजुर्गों को भी सर्दी से बचाना जरूरी है। उन्हें पीने के लिए गर्म पानी देने तथा बासी भोजन न देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि धूप निकलने पर बिस्तर से बाहर जाने देना चाहिए। सर्दी से बचाने से उनके रोगों से भी बचा जा सकता है।
  उधर पशुओं के लिए लंबे समय से औषधियां बनाने के शोध कार्य में लगे हुए विक्की एवं शिब्बू पंसारी का कहना है कि दूध देने वाले पशुओं को भी सर्दी से बचाना चाहिए वरना वे दूध कम देंगे वहीं बीमार हो सकते हैं। उनका कहना है कि पशु भी इंसान की भांति रोगों से पीडि़त हो सकते हैं। उन्हें बचाना जरूरी है। ऐसे में उन्हें गर्म बोरी आदि से ढककर आराम दिलाना जरूरी होता है।
 वैसे भी कोरोना से बचने के लिए बाहर न घूमना चाहिए, गर्म पानी पीना चाहिए, धूप में कुछ समय जरूर बैठना चाहिए। इससे सर्दी एवं कोरोना दोनों से बचा जा सकता है।

ककराला में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए निकाली जागरूकता रैली 

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कनीना। चुनाव चाहे किसी भी प्रकार का हो, हर प्रत्याशी वोटरों को लुभाने के लिए अनेक प्रकार से प्रलोभन देते हैं  जिनमें शराब बांटना, रुपये के बदले वोट या अन्य कई प्रकार के प्रलोभन प्रमुख हैं। इन्हीं प्रलोभनों में आकर अक्सर वोटर उम्मीदवार की योग्यता को नहीं परख पाते।
ग्राम पंचायत चुनाव नजदीक आ रहें हैं और इसी आगाज के चलते क्षेत्र में सामुदायिक प्रयास देखने को मिल रहें हैं। इसी कड़ी में गांव में एक मतदाता जागरूक रैली निकली गई। बाबा भैंया सेवा दल के  सदस्य रामेश्वर दयाल ने रैली को हरी झंडी दिखाई तथा ये विचार व्यक्त किये।
 रैली का संचालन सुमेर सिंह ने किया। इस जागरूकता रैली में सभी ग्रामीणों ने चर्चा में हिस्सा लिया। रैली के दौरान महिलाओं में विशेष उत्साह था जैसे उनकी दबी हुई आवाज को मंच मिल गया हो। ग्राम में नुक्कड़ चर्चा में रमेश, पवित्रा, उगन्ता, भगवानी, कृष्णा, गंगा, रानी सहित कई महिलाओं ने हिस्सा लिया, वहीं ग्रामीण पुरुषों में राजेन्द्र भारद्वाज, गुरदयाल सिंह, अनिल, कृष्ण, पप्पू सहित अन्य ने भाग लिया।
ज्यादातर महिलाओं का कहना था कि ये बहुत ही अच्छी मुहिम है। एक-दो महीने का चुनावी मौसम सबके घरों का माहौल बदल देता है। युवा व अन्य सदस्यों को शराब की लत लग जाती है। उन्होंने प्रण लिया कि इस बार के पंचायत चुनाव में शराब बांटने या अन्य प्रलोभन देने वाले किसी भी उम्मीदवार को अपना वोट नही देंगी।
जो उम्मीदवार चुनावों में अनाब सनाब पैसे की बर्बादी करता है वह आगे चलकर भृष्टाचार को ही बढ़ावा देता है। ऐसे असमाजिक व महत्वाकांक्षी उम्मीदवार को ककराला इस बार वोट नहीं देगा। सभी ग्रामवासी मिलकर इस जागरूकता अभियान को चलायेंगे और घर-घर जाकर मतदाता को बतायेंगे कि ऐसे उम्मीदवार को पहचाने जो वोट पाने के लिये उसे लालच देकर उसके वोट को खरीदना चाहता है। यह लालच प्रलोभन चुनाव आचार संहिता के खिलाफ है। जिन उम्मीदवारों को चुनाव लडऩा है तो अपनी योग्यता के बलबूते लड़ें।
इस रैली में वीर, धर्मन्द्र, प्रदीप, सुनील, यशवंत, कैलाश, प्रवीण, योगेश, धर्मबीर, कर्मबीर, यशपाल, धर्मपाल, सुनील, अजय, पंकज और आदित्य सहित अन्य ग्रामीणों व स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
फोटो कैप्शन 8: जागरूकता रैली निकालते ककराला के लोग।
           9: महिलाएं जागरूकता रैली को संबोधित करती हुई।

गोपाष्टमी पर गौशालाओं में हुए कई कार्यक्रम

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कनीना। गोपाष्टमी के पर्व पर कनीना एवं आस पास गौशालाओं में कई कार्यक्रम संपन्न हुए। कहीं हवन आयोजित हुआ वहीं गायों की पूजा करके उन्हें मीठा चारा चराया गया।
  श्रीकृष्ण गौशाला कनीना, भोजावास में दिनभर गो सेवकों का तांता लगा रहा और गायों की सेवा की। इस मौके पर लोगों ने गायों के लिए विशेष मीठा भोजन बनाकर खिलाया। गौभक्त एवं गौशाला में कार्य कर रहे होशियार सिंह ने कहा कि गायों की सेवा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। गायों की सेवा के चलते भगवान श्रीकृष्ण गोविंद नाम से जाना जाता है। गाय को माता का दर्जा दिया हुआ है और उसमें सभी देवता निवास करते हैं। गायों की सेवा करने से संताप नष्ट होते हैं वहीं जिस घर में गाय पाली जाती है उस घर में कोई आपदा एवं गरीबी नहीं आती है। इस मौके पर दूर दराज से भक्तजन पहुंचे।
  गोपाष्टमी का पर्व मनाए जाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। लालदास महाराज ने बताया  कि इंद्र का गर्व चूर करने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाए रखा था जिसके चलते इंद्र का गर्व आठवें दिन चूर चूर हो गया और वे भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आ गए थे। तभी से भगवान श्रीकृष्ण का नाम गोविंद पड़ा था। इस दिन भगवान की कामधेनु ने अपनी दुग्ध धारा से नहलाया था और भगवान श्रीकृष्ण ने गायों की सेवा करने का वचन दिया था। तभी से यह पर्व चला आ रहा है।
  एक दूसरी कहानी सुनाते हुए सुरेंद्र जोशी ने बताया कि बलराम एवं श्रीकृष्ण ने गोकुल में गायों की सेवा करने का प्रशिक्षण लिया था और गोपाष्टमी के दिन माता यशोदा एवं नंद बाबा से आज्ञा पाकर गायों को जंगल में चराने का निर्णय लिया था। उस वक्त भगवान श्रीकृष्ण की उम्र महज छह-सात वर्ष थी। उनके द्वारा गाए चराने पर ही उनका नाम गोपालक पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण जीवनभर गायों के रक्षक एवं सेवक बने रहे थे। यह भी माना जाता है कि राधा ने इसी दिन से जंगल में गाए चरानी शुरू की थी चूंकि लड़कियों को गाये चराने की अनुमति नहीं थी किंतु उन्होंने पुरुष ग्वाले के वस्त्र धारण किए और भगवान श्रीकृष्ण के साथ वन में गाए चराने निकल पड़ी थी।
 विभिन्न गौशालाओं में भी दिनभर भक्त गायों की सेवा करते, उनके लिए मीठा चारा देते, उनकी सेवा करते नजर आए। दान पुण्य दिनभर चलता रहा। भोजावास स्थित गौशाला में भी भक्तों ने गायों की सेवा की।

मास्क न लगाने वालों पर भारी पड़ी सीटी पुलिस

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कनीना। मास्क न लगाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ये विचार कनीना सीटी इंचार्ज गोबिन्द यादव ने आज दर्जनों मास्क रहित लोगों के चालान काट उनको ये बात भी समझाई कि वे जब भी घर से बहार निकले तो मास्क पहन कर ही निकले वरना उनको चालान के दंड से कोई नहीं बचाएगा।
इस अवसर पर गोबिन्द यादव ने बिना मास्क पहने वालों को पहले समझाया भी और इसके बाद भी जब उनको समझ नहीं आया तो पांच सौ रुपये का चालान भी काट कर उनके हाथ में थमा दिया। सीटी इंचार्ज ने बताया कि कुछ दिन पहले कोरोना में काफी कमी आई थी लेकिन दीवाली के उपरांत एक बार फिर से उक्त महामारी का संक्रमण ज्यादा होने के कारण मास्क न लगाने वालों पर शिकंजा कसना पड़ रहा है ताकि लोगों के जान माल कि रक्षा की जा सके।


अब तो खांसना भी गुनाह समझा जाता है 

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कनीना। एक बार फिर से क्षेत्र में कोरोना संक्रमण बढऩे से अब तो खासना भी गुनाह समझा जाता है। जब कोई खांसता है तो सीधा कोरोना होने का आक्षेप लगाया जाता है। यदि कोई खांसता उसके पास से गुजरना गंवारा नहीं समझते। वास्तव में सर्दी के कारण भी रोग बढ़ रहे हैं। रोगों से बचने की सावधानी भी बढ़ती जा रही है किंतु अब खांसना बुरी नजर से देखा जाता है। एक धारणा बन गई है कि खांसता है तो जरूर इसमें खांसी, जुकाम का रोग है और कोरोना होगा। उसको तुरंत अस्पताल में जाने की सलाह देने वाले भी मिल जाते हैं।
वैसे तो विवाह शादियां शुरू हो गई हैं और विवाह शादियों में लोग बिना मास्क के ही जा रहे हैं। जिससे रोग फैलने की संभावना बढ़ गई है। प्रशासन ने वैसे तो नियम पारित कर रखे हैं परंतु नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। किसी भी शादी समारोह स्थल में जाकर देखा जाए भारी भीड़ मिलती है किंतु मुंह पर मास्क तक नहीं मिलते।



जमकर बज रहे डीजे

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 कनीना। यूं तो 25 नवंबर से देव उठनी एकादशी शुरू हो रही है और इस दिन भारी संख्या में शादियां है किंतु अभी से ही लगन आने शुरू हो गए हैं और रात भर शहनाइयां तो भूल गए डीजे पर लोग थिरकते देखे जा सकते हैं। कोरोना से पहले कभी डीजे बजे थे। ऐसे में लोग दुखी नजर आ रहे थे, अब उन्हें थोड़ी राहत मिली है और जमकर डीजे पर थिरकने लगे हैं। यहां तक कि रात भर डीजे बज रहे हैं। कोई रोक-टोक अभी नहीं है। लोग ऐसा लगता है कि डीजे बजाने वाले अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।




हजारों मन कड़वी जलकर राख
-पूरा गांव आग बूझाने में जुटा
 -फायर ब्रिगेड ने करीब 3 घटों में काबू पाया

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कनीना। कनीना उप-मंडल के गांव स्याणा में बाबा ढाब आश्रम पर कड़वी के ढेरों में आग लग गई और देखते-देखते आग फैल गई तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया।
फायर अधिकारी राकेश कुमार अपने साथियों सहित महेंद्र, देवेंद्र, प्रदीप कुमार फायरमैन तथा संदीप कुमार ड्राइवर सहित मौके पर पहुंचे। 3 घंटों तक कड़ी मशक्कत करने के बाद आग पर काबू पाया।
ढाबा आश्रम के पास समस्त स्याणा के किसान अपनी अपनी कड़वी की छुरियां(ढेरियां) लगाते हैं। यही पास में गौशाला है जिसकी कड़वी भी डाली गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह करीब 10:30 बजे आग लग गई। ग्रामीणों ने अपने पानी के टैंकरों द्वारा पानी लाकर आग पर बूझानी शुरू कर दी। जब तक फायर ब्रिगेड पहुंची किसान त्वरित गति से आग पर काबू पाने में जुट गए।
 गांव के शमशेर सिंह कोसलिया, कैलाश लीलाराम, संदीप, प्रदीप कुमार, विनोद कुमार, नवीन यादव, राजवीर नंबरदार, सुंदर पूनिया, संदीप डागर आदि ने बताया कि जिस जगह आग लगी हुई थी उसके आगे भारी मात्रा में कड़वी लगी हुई थी जिनको भी आग लगने की संभावना थी। ऐसे में ग्रामीणों ने कड़बी को बिखेर डाला ताकि आगे आगे पहुंच सके तथा अपनी आग पर काबू पाने का प्रयास किया। आश्रम के श्रद्धानंद महाराज ने भी लोगों के साथ जमकर मदद की। आग पर काबू पाने वाले फायरमैन प्रदीप कुमार ने बताया कि 3 घंटे में आग पर काबू पाया गया है। कड़वी हजारों मन जलकर राख हो गई। हजारों मन कड़बी  बच भी गई। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
  इस आग से प्रसिद्ध इंदोख, कैर, जाल के पेड़ भी जल गये। पेड़ों पर लगी आग को भी फायर ब्रिगेड ने बूझाकर काबू पाया। ये इंदोख के पेड़ स्याणा,करीरा एवं गाहड़ा के जंगल में ही मिलते हैं किंतु गाहड़ा गांव के पेड़ सूख चले हैं।
यदि आग पर  काबू  नहीं पाया जाता तो पास में गौशाला को भी नुकसान हो सकता था। लोगों ने बताया कि इस पूरे गांव की कड़वी ही ढ़ाब आश्रम में डाली जाती है। सारी कड़वी में आग  फैलने की संभावना अधिक थी।
 प्रदीप कुमार फायरमैन ने बताया कि ग्रामीणों और श्रद्धानंद महाराज का विशेष योगदान रहा जिसके चलते आग पर 3 घंटों में काबू पा लिया। आग भीषण थी।
आग पर काबू पाकर ग्रामीणों ने खुशी जताई कि एकता आज भी गांव में बरकरार है और एकता के चलते ही आज इस मुकाम तक पहुंचे की आग पर काबू पा लिया है।
गत दिवस भी जला था कनीना में भैंस और कटड़ा-
 गत दिवस भी कनीना में वार्ड दस में छप्पर को आग लग जाने से कटड़ा, भैंस तथा एक व्यक्ति का हाथ झुलस गए थे। कटड़े की मौत भी हो चुकी है। फायर अधिकारी राकेश कुमार कनीना ने बताया कि कनीना के वार्ड नंबर 10 बावरियों में बलबीर सिंह के यहां छप्पर में रात्रि करीब 12 बजे आग लग। आग इतनी भयंकर थी की फायर ब्रिगेड पहुंचने से पहले एक कटड़ा, एक भैंस जोछप्पर में थे जल गए वहीं एक व्यक्ति का हाथ भी झुलस गया था। बाद में कटड़े ने दम तोड़ दिया जबकि भैंस उपचाराधीन है।
फोटो कैप्शन 2,3,4,5: आग पर काबू पढ़ पाते लोग एवं फायरमैन।
नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही युवा वर्ग में 

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 कनीना। दिनों दिन नशे की प्रवृत्ति की ओर युवा वर्ग बढ़ता जा रहा है। जहां बुजुर्ग नशे की बुराइयों से पीडि़त देखे गए वहीं अब उनको भी युवा वर्ग ने पीछे छोड़ दिया है।
बीड़ी, सिगरेट, चिलम, हुक्का, चाय, काफी आदि की ओर विशेष रूप से आकर्षित हो रहे हैं। जहां बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चिलम में निकोटीन पाया जाता है वही चाय काफी में कैफीन नामक नशीला पदार्थ पाया जाता है। कभी बुजुर्ग वर्ग या खेतों में काम करने वाले किसान, गरीब तबके के लोग इन चीजों का अधिक सेवन करते थे या कभी बीमारी होने पर चाय वगैराह बुजुर्ग तथा मरीज यदा-कदा पीते देखे गए थे किंतु अब चाय की लंबी लाइन लगती है।
कनीना में महाशय एवं पोंडा चायवाला  बताते हैं कि उनके पास प्रतिदिन 500 चाय तक बिक जाती है। यही नहीं जहां भी चाय की दुकान है वह भारी मात्रा में चाय बिकती है। इसी प्रकार बीड़ी, सिगरेट की बिक्री प्रतिमाह अकेले कनीना में ही लाखों में है। इसी प्रकार हुक्का चिलम की और फिर से लोगों का रुझान बढऩे लगा है। अब तो हुक्का शान की निशानी माना जाने लगा है। इस संबंध में विभिन्न प्रबुद्ध जनों से बात की गई जिनके विचार अलग-अलग थे।
सत्येंद्र आर्य का कहना है कि युवा वर्ग बीड़ी, सिगरेट, चिलम तथा हुक्के को अधिक पसंद करता है जबकि हुक्के में निकोटीन जहर पाया जाता है जो आदत डालने वाला पदार्थ है। उनका कहना है कि घरों में हुक्का अधिक प्रयोग किया जाता है इसलिए अपने बड़ों से सीख रहे हैं। उन्होंने इस प्रकार की आदत से बच्चों को बचाने की अभिभावकों से मांग की है।
 सत्यवीर सिंह प्राध्यापक का कहना है कि चाय के प्रति रुझान दिनों दिन बढ़ रहा है। कोई ऐसा कार्यालय या फिर व्यक्ति नहीं है जो चाय का सेवन न करता हो। चाय में कैफीन नशीला पदार्थ पाया जाता है जो शरीर में उत्तेजना पैदा करता है साथ में बुरा प्रभाव डालता है। विभिन्न प्रकार के रोगों में इसका अहं रोल होता है।
 गणेश अग्रवाल का कहना है कि बीड़ी सिगरेट की धुआं उड़ाने में युवा वर्ग बहुत आगे है। यद्यपि सरकार इन पर प्रतिबंध लगाती है किंतु इनका प्रचलन दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। उनका कहना है कि युवा वर्ग में तो यह गंभीर लात पैदा हो गई है। सरेआम बीड़ी सिगरेट पीते देखे जा सकता हैं। पहले तो शौकिया पीते हैं बाद में इसके आदी हो जाते हैं जिसके पीछे भी उन्होंने अभिभावकों द्वारा बीड़ी सिगरेट पीना बताया गया है। युवा एवं बच्चे बड़ों से सीख लेते हैं।
 सुनील कुमार यादव का कहना है नशीले पदार्थों के साथ साथ विभिन्न प्रकार के पान पराग आदि की लत युवा वर्ग ही नहीं बच्चों में बढ़ रही है। बच्चे भी अपने बड़ों को देखकर उन चीजों का सेवन करते हैं। बाद में भी इसके आदि हो जाते हैं। यही नहीं स्कूलों और कालेजों में जाने वाले विद्यार्थी भी स्कूल और कालेज से बाहर आकर इन चीजों का प्रयोग करते हैं। चाय तो दिनों दिन पीने की लत बढ़ रही है। ये सभी अति नुकसानदायक हैं।
   इस संबंध में कालू करीरा और बाल किशन करीरा वैद्य से बात की। उनका कहना है कि ये पदार्थ धीरे-धीरे इंसान को अंदर से खोखला कर देते हैं। रोग, असामयिक मौत, बेहोशी एवं हिंसा में शामिल होते हैं। उन्होंने इस प्रकार के नशीले पदार्थों से अपने बच्चों को बचाने की अपील की है। उनका कहना है कि अभिभावक शिक्षक चाहे तो इस प्रकार की आदतों से अपने बच्चों को बचा सकते हैं। वरना आने वाले समय में विभिन्न प्रकार के रोगों से पीडि़त बच्चे होंगे।
फोटो कैप्शन:गणेश अग्रवाल, सत्येंद्र आर्य, सत्यवीर सिंह, सुनील कुमार।


कनीना क्षेत्र में रही दुकानें खुली 

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कनीना।  देव उठनी एकादशी के चलते तथा विवाह शादियों की शुरुआत होने से कनीना क्षेत्र की दुकानें खुली रही। विगत दिनों दुकानें बंद रखने के आदेश दे दिए थे जिसके चलते दूसरे गांव से आने वाले दुकानदार दुकान खोलने के लिए नहीं आये जबकि क्षेत्रीय दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोली। सैकड़ों दुकानें खुली तो सैकड़ों बंद रही। दोपहर तक दुकानदारों को दुकानें खुलने की सूचना मिली तो तो उन्होंने भी दुकानें खोल ली।
उल्लेखनीय है कि विगत दिनों दिया दीपावली के चलते दुकाने रविवार को खुली रही थी तो अब त्योहारों के दृष्टिगत दुकानें खोलने की ढिलाई प्रशासन द्वारा दे दी गई। जिसके चलते सैकड़ों दुकानें खुली रही। कुछ दुकानें बंद रही। उल्लेखनीय है कि 25 है नवंबर से देव उठनी एकादशी पर मार्केट में चहल-पहल बढ़ जाएगी। त्योहारों के दृष्टिगत दुकानें खुली हुई है।
फोटो कैप्शन फोटो कैप्शन एक: कनीना बस स्टेंड पर खुली दुकानों का नजारा

Saturday, November 21, 2020

 

27 नवंबर तक चलेगी कनीना मंडी में खरीद,रविवार को खरीद रहेगी बंद 

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 कनीना। 20 नवंबर तक कनीना अनाज मंडी तथा श्री कृष्ण गौशाला दोनों स्थानों पर बाजरे की खरीद जारी थी किंतु शनिवार से बाजरे की खरीद केवल अनाज मंडी कनीना में ही चली
 विस्तृत जानकारी देते हुए जगदीश कुमार पर्चेजर ने बताया कि हैफेड द्वारा 1 अक्टूबर से बाजरे की खरीद जारी की थी। प्रारंभ में सौ सौ किसानों को बुलाया गया फिर 200 तत्पश्चात बढ़ाकर 500 किसानों को प्रतिदिन बुलाया जा रहा था। अब फिर से 50 किसानों को ही बुलाया गया था। श्रीकृष्ण गौशाला रोड कनीना पर खरीद कार्य बंद कर दिया गया है क्योंकि अब किसानों की संख्या कम है। भरपूर सिंह ने बताया गत दिवस के बचे हुये किसानों सहित 191 किसानों ने 4550 क्विंटल बाजरा बेचा। अब तक कनीना अनाज मंडी में कुल 3,82,500 क्विंटल बाजरे की खरीद की जा चुकी है जिसमें 70,000 क्विंटल गौशाला रोड पर तथा 2,91,387 क्विंटल कनीना मंडी से खरीद की जा चुकी है। 20 नवंबर को 4550 क्विंटल बाजरा खरीदा गया। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर तक खरीद जारी रहेगी। रविवार को खरीद नहीं होगी।


जल्द ही पकड़वा कर दूर भेजे जाएंगे बंदर 

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कनीना। कनीना नगर पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि कनीनावासी बंदरों से परेशान है। उन्होंने कहा कि बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर छोड़ा जाएगा और जल्द इन बंदरों को पकड़कर भिजवाया जाएगा। एक बार पहले भी नगरपालिका ने अभियान चलाया था।
उल्लेखनीय है कि कनीना क्षेत्र में बंदरों ने भारी नुकसान पहुंचाया है। लोगों को भी काटा है वही जीना मुहाल कर रखा है। फल सब्जी तो कतई नहीं होने देते। ऐसे में लोग बार-बार शिकायत कर रहे हैं। कनीना मंडी से शिवकुमार अग्रवाल बार-बार आरटीआई लगाकर बंदरों को पकड़वाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में नगर पालिका प्रधान ने कहा कि कनीना नगर से बंदरों को पकड़ा जाएगा ताकि लोगों को कुछ दिन के लिए तो आराम मिल सके। उन्होंने कहा कि एक टीम गठित की जाएगी जो बार-बार बिना बताए अतिक्रमण करने वालों पर शिकंजा कसेगी। बार बार कार्रवाई के बावजूद भी दुकानदार अतिक्रमण कर लेते हैं। अब सप्ताह में कम से कम एक बार कार्रवाई की जाएगी।

मोबाइल टीम ने कनीना कालेज में लिये 130 सैंपल
-6 कोरोना संक्रमित आये जिनमें दो स्कूली विद्यार्थी भी

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कनीना। कनीना क्षेत्र में जहां एक और गांवों में कोरोना संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में भी स्कूली विद्यार्थियों की कोरोना संक्रमतों की संख्या बढऩे लगी है। स्कूल में कोरोना का संक्रमण न फैले इसके लिए लगातार प्रशासन प्रयासरत है। स्कूलों में 30 नवंबर तक अवकाश घोषित किये जा चुके हैं। कालेजों से भी मोबाइल टीम ने सैंपल किये। इसी कड़ी में मोबाइल टीम सीएमओ डा अशोक कुमार, डाक्टर नवीन कुमार की देखरेख में कनीना में शनिवार को मोबाइल टीम नंबर दो जिसमें सुदेश कुमार इंचार्ज, दीपक एलटी,मनोज एलटी, सहित अन्य शामिल थे। मोबाइल टीम ने कनीना कालेज से 130 शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सैंपल लिये।
उन्होंने बताया कि स्कूलों के साथ-साथ दूसरे लोगों को विशेषकर संक्रमित लोग जिनके संपर्क में आए उनके भी सैंपल लिए जा रहे हैं। ये सैंपल मेवात मेडिकल कालेज भेजे जाते हैं जहां एक से तीन दिन के पश्चात रिपोर्ट आती है। उन्होंने बताया कि कनीना के विभिन्न स्कूलों में सैंपल लिए गये थे जिनमें से दो विद्यार्थी कोरोना संक्रमित सहित 6 संक्रमित मिले हैं।
कनीना के वार्ड नंबर 12 से 14 वर्षीय लड़की संक्रमित पाई गई है जबकि वार्ड 5 से14 वर्षीय स्कूली छात्र संक्रमित मिले हैं उन्होंने 19 नवंबर को सैंपल दिया था। उधर कनीना के वार्ड 8 से 38 वर्षीय महिला तथा वार्ड 3 से 23 वर्षीय युवक कोरोना संक्रमित मिले हैं।  सेहलंग से 29 वर्षीय महिला जिन्होंने 18 नवंबर को सैंपल दिया था संक्रमित मिली। 19 नवंबर को ही कनीना 27 वर्षीय युवक ने सैंपल लिया था जो कोरोना संक्रमित पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने आगामी कार्रवाई कर दी है। इन होम आइसोलेट कर दिया गया है। डा धर्मेंद्र ने बताया कि सावधानी से ही इस रोग से बचा जा सकता है।
 फोटो कैप्शन 04: कनीना कालेज से सैंपल लेते हैं मोबाइल टीम।
 

 

चाइल्ड लाइन दोस्ती सप्ताह आयोजित

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कनीना। चाइल्ड लाइन महेन्द्रगढ़ द्वारा आयोजित चाइल्ड लाइन से दोस्ती सप्ताह कार्यक्रम के तहत शपथ ग्रहण कार्यक्रम चाइल्डलाइन के समन्वयक व टीम सदस्यों द्वारा क्षेत्र के अधिकांश विद्यालयों में जाकर जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसमें मदर्स स्कूल अटेली, रामचन्द्र स्कूल कनीना, एम डी एस स्कूल बेवल, सरस्वती शिक्षा निकेतन स्कूल माजरा कलां आदि विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों तथा अध्यापकों को जागरूक करते हुए विद्यार्थियों को गुड टच - बैड टच, यौन शोषण तथा बच्चों से संबंधित अन्य समस्याओं से अवगत कराया। 1098 हेल्पलाइन के बारे में तथा चाइल्ड एक्ट के बारे में विस्तार से जाकारी देते हुए शपथ दिलवाई । विद्यार्थियों तथा अध्यापकों ने शपथ लेते हुए यह पर्ण लिया कि हम बच्चों से जुड़ी हुई हर समस्या के लिए तत्पर रहेंगे ।
इस अवसर पर महेन्द्रगढ़ चाइल्ड लाइन के समन्वयक साहिल यादव ने बच्चों से जुड़ी हुई समस्याओं के बारे में अधिकारियों को अवगत कराया तथा चाइल्ड लाइन के हेल्पलाइन नम्बर 1098 से संबंधित जानकारी देते हुए इस प्रोग्राम के तहत उन्हे बच्चों की हर संभव मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया।
फोटो कैप्शन 3: चाइल्डलाइन कार्यक्रम आयोजित करते समन्वयक साहिल यादव एवं अन्य।

बच्चों में ठंड लगने की बीमारी बढ़ी

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कनीना। कनीना क्षेत्र में विगत एक सप्ताह से लगातार ठंड पड़ रही है। शनिवार को दिनभर शीत लहर चली। ठंड पडऩे से जहां बुजुर्ग तथा छोटे बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। वही पशुपालक भी परेशान होने लगे हैं। एक ओर कोरोना वहीं ठंड एवं शीत लहर ने परेशानी बढ़ा दी है।
 कनीना के डा अजीत कुमार शर्मा, डा वेदप्रकाश  ने बताया कि छोटे बच्चों में ठंड जल्दी लगती है जिनमें निमोनिया तक होने की संभावना जताई है उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को कपड़े पहना कर सुला देने से वे ठंड के शिकार हो रहे हैं क्योंकि वह ऊपरी कपड़े फेंक देते हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि अधिक कपड़े पहनाकर बच्चों को रजाई वगैराह नहीं ओढ़ाई जाए वही बच्चे की मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम है। बच्चों को सर्दी से बचाना चाहिए सर्दी लगने पर डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बच्चा दो-तीन घंटे में तक दूध नहीं पीता तुरंत डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को उसकी सांस से पता लगाया जा सकता है कि उन्हें कहीं निमोनिया आदि तो नहीं लग गया है यदि सांसों में एक विशेष प्रकार की आवाज आए तो समझों की ठंड लग गई है।
 उधर वैद्य बालकिशन शर्मा एवं हरिकिशन शर्मा ने बताया कि सर्दी से बुजुर्गों को भी बचाना जरूरी है। सर्दी से हृदयघात होने तथा सांस में तकलीफ बढऩे की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में बुजुर्गों को भी सर्दी से बचाना जरूरी है। उन्हें पीने के लिए गर्म पानी देने तथा बासी भोजन न देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि धूप निकलने पर बिस्तर से बाहर जाने देना चाहिए। सर्दी से बचाने से उनके रोगों से भी बचा जा सकता है।
  उधर पशुओं के लिए लंबे समय से औषधियां बनाने के शोध कार्य में लगे हुए विक्की एवं शिब्बू पंसारी का कहना है कि दूध देने वाले पशुओं को भी सर्दी से बचाना चाहिए वरना वे दूध कम देंगे वहीं बीमार हो सकते हैं। उनका कहना है कि पशु भी इंसान की भांति रोगों से पीडि़त हो सकते हैं। उन्हें बचाना जरूरी है। ऐसे में उन्हें गर्म बोरी आदि से ढककर आराम दिलाना जरूरी होता है।

एसएसबी के जवान की हार्ट अटैक से हुई मौत
-शस्त्र झुकाकर जवान को दी अंतिम सलामी

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कनीना।  दौंगड़ा जाट निवासी सशस्त्र सीमा बल में उतराखंड के चमौली के गुवालद में कार्यरत 29 वर्षीय सिपाही ईश्वर सिंह का हृदयगति रुकने से देहांत हो गया। सरपंच सरपंच ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि सिपाही ईश्वर सिंह की मौत की खबर सुनकर शनिवार दौंगड़ा जाट के ग्रामीणों में शौक की लहर दौड़ गई। 6 मेाह पहले ही  सिपाही ईश्वर सिंह के पिता दयानंद का देहांत हुआ था। पति की मौत की खबर सुनकर जवान की पत्नी किस्मत का व 4 वर्षीय पुत्री हंसु का रो-रो कर बुरा हाल रहा है।  वहीं सिपाही की मां भी शोक से बेसुध थी।  गत 18 नवंबर की सायं को जवान ईश्वर सिंह ने अपनी माता से फोन पर आखिरी बातचीत की थी वहीं 19 की सुबह ड्यूटी पर कार्यरत ईश्वर को हार्ट अटैक आ गया। जवान के शव को गांव लेकर पहुंचे एसएसबी के सब इंस्पेक्टर तहसीलदार व 7 जवानों की टुकड़ी ने तिरंगे में लिपटा शव परिवारजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा।
 सिपाही ईश्वर सिंह की पत्नी किस्मत 7 माह के गर्भ से है। गत 18 नवंबर की सांय को जवान ईश्वर सिंह ने अपनी माता से फोन पर बातचीत की थी वहीं 19 की सुबह ड्यूटी पर कार्यरत ईश्वर को हार्ट अटैक आ गया। जवान के शव को गांव लेकर पहुंचे सब इंस्पेक्टर तहसीलदार व 7 जवानों की टुकड़ी ने तिरंगे में लिपटा शव परिवारजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा। सिपाही ईश्वर सिंह की अंतिम यात्रा में कृष्ण सिपाही ईश्वर सिंह की अंतिम यात्रा में कृष्ण नम्बरदार, होशियार, रणधीर नम्बरदार, पंच निरंजन, एडवोकेट हेमंत सिहमा, अनिल यादव दौंगडा अहीर, पूर्व सरपंच मनीराम, भूप पंच, पंच अमर सिंह, सतबीर, महावीर मास्टर, बलजीत, जुगलाल, सतबीर, अमीलाल, दोंगड़ा अहीर पुलिस चौकी प्रभारी पवन कुमार, सरपंच ओमप्रकाश शर्मा सहित आस-पास के गांवों के सैंकड़ो लोगों ने शामिल होकर शोक प्रकट किया। शमशानघाट पर एसएसबी 25 बटालियन सब इंस्पेक्टर अमीचंद ने 11 जवानों के साथ गार्ड ऑफ ऑनर में शस्त्र झुकाकर सलामी सिपाही ईश्वर सिंह को अंतिम सलामी दी।
फोटो कैप्शन 2: एसएसबी के सिपाही के अंतिम सलामी देते जवान।

गायों की पूजा का पर्व है गोपाष्टमी, पर्व 22 नवंबर को

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कनीना। गोपाष्टमी का पर्व गायों की विधि विधान से पूजा का पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा चलाए गए इस पर्व पर गायों को विभिन्न प्रकार का चारा खिलाया जाता है और सुबह सवेरे से ही पूजा शुरू कर दी जाती है। उनको छापे लगाए जाते हैं तथा रोली एवं मेहन्दी लगाकर पूजा की जाती है। विभिन्न गौशालाओं में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
  कार्तिक शुक्ल अष्टमी यानी 22 नवंबर को यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर ही भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम गोबिंद पड़ा था। कनीना के ज्योतिषाचार्य अरविंद जोशी बताते हैं कि गोपाष्टमी पर गायों की विधि विधान से पूजा की जानी चाहिए। घर में अगर गाय न हो तो गौशाला में जाकर भी पूजा की जा सकती है। उनके अनुसार गाय में सभी देवता निवास करते हैं और उनके गोबर में भी लक्ष्मी का निवास पाया जाता है। यही कारण है कि कच्चे घरों को गाय के गोबर से लीप पोतकर साफ सुथरा बनाया जाता है। सुबह से शाम तक उनकी इस दिन पूजा करनी चाहिए। गाय को मां का दर्जा दिया हुआ है। ऐसे में गायों की पूजा करने का विधान भी है।
  गोपाष्टमी का पर्व मनाए जाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। बताया जाता है कि इंद्र का गर्व चूर करने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाए रखा था जिसके चलते इंद्र का गर्व आठवें दिन चूर चूर हो गया और वे भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आ गए थे। तभी से भगवान श्रीकृष्ण का नाम गोविंद पड़ा था। इस दिन भगवान की कामधेनु ने अपनी दुग्ध धारा से नहलाया था और भगवान श्रीकृष्ण ने गायों की सेवा करने का वचन दिया था। तभी से यह पर्व चला आ रहा है।
  एक दूसरी कहानी के अनुसार बलराम एवं श्रीकृष्ण ने गोकुल में गायों की सेवा करने का प्रशिक्षण लिया था और गोपाष्टमी के दिन माता यशोदा एवं नंद बाबा से आज्ञा पाकर गायों को जंगल में चराने का निर्णय लिया था। उस वक्त भगवान श्रीकृष्ण की उम्र महज छह-सात वर्ष थी। उनके द्वारा गाए चराने पर ही उनका नाम गोपालक पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण जीवनभर गायों के रक्षक एवं सेवक बने रहे थे। यह भी माना जाता है कि राधा ने इसी दिन से जंगल में गाए चरानी शुरू की थी चूंकि लड़कियों को गाये चराने की अनुमति नहीं थी किंतु उन्होंने पुरुष ग्वाले के वस्त्र धारण किए और भगवान श्रीकृष्ण के साथ वन में गाए चराने निकल पड़ी थी। इस दिन मेहंदी के थापे लगाकर हल्दी एवं रोली से गायों की पूजा करने से सभी विकार पूर्ण हो जाते हैं।


17 सालों से अहम भूमिका निभा रही है कनीना गौशाला 

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 कनीना। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला वर्ष 2003 से क्षेत्र में है भूमिका निभा रही है। गायों की सेवा हो रही है वहीं गायों का दूध लोगों के रोगों को दूर करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना वासियों के सहयोग से स्थापित हुई थी जो 2003 की रजिस्टर्ड है( यहां करीब दो हजार गाय जिनमें से 27 गाय दुधारू है। गाए दिन-रात गौशाला में रहकर खुश हैं।
 विस्तृत जानकारी देते हुए हुकुम सिंह आर्य प्रधान गोशाला कनीना ने बताया कि कनीना गौशाला में 27 गाय दुधारू है। प्रतिदिन 70 लीटर दूध दे रही है जो 40 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक जाता है।  कनीना गोशाला बेहतरीन गोशालाओं में से एक है।
गाय के दूध की भारी मांग है। दूर दराज के लोग दूध ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 15 आदमी गायों की सेवा कर रहे हैं। 5 ट्रैक्टर ट्रॉली गायों की के लिए अन्न एवं चारा लाकर उनकी सेवा में लगी हुई हैं। कनीना गोशाला में प्रारंभ में 200 गायें थी और आज 1700 गायें हैं। गो ग्रास के लिए तीन गाडिय़ां तथा दो निजी गाडिय़ां काम कर रही हैं जो प्रतिदिन विभिन्न गांवों से गो ग्रास के रूप में 30 मण रोटी, दलिया, आटा  लेकर आती हैं। दूध वाली गायों को अलग से चारा खिलाया जाता है।
 कनीना गोशाला में देवराज महाशय,जगमाल सिंह, हुकुम सिंह, डा मेहरचंद, यादवेंद्र यादव, मनफूल सिंह, हुकुम सिंह आदि कनीना गौााला के प्रधान रह चुके हैं। गौशाला बड़ी बेणी नामक स्थान पर स्थापित है। जहां के लिए गौशाला द्वार बनाया गया है वहीं गायों को रखने के लिए धूप एवं छाया तथा हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। गौशाला प्रतिवर्ष अपना वार्षिक उत्सव मनाती है तथा लोगों में देसी गाय पालने की प्रवृत्ति को पैदा कर रही है। गौ सेवा में गौशाला में सेवारत होशियार सिंह ने बताया कि वह गायों की सेवा करके बहुत प्रसन्न हैं। जहां गाय के गोबर से खाद बनाया जा रहा है वहीं गोबर गैस प्लांट भी लगाया गया है। कनीना के समाजसेवी भगत सिंह ने समय समय पर दान दक्षिणा देकर इसमें सहयोग किया हुआ है।  देसी गाय का दूध, घी, मक्खन आदि की भारी मांग है। यही कारण है एक बार फिर से गायों की सेवा करने में लोग जुट गए हैं। पुराने समय में गाय को माता का दर्जा देते थे वैसे ही गायों के प्रति एक बार फिर से रोगों से बचने के लिए उनकी सेवा की प्रवृत्ति बढ़ी है।
गौशाला प्रधान का कहना है कि कोई भी व्यक्ति गाय या बछड़ा गौशाला में छोड़ सकता है बशर्ते कि बछउ़ा छोडऩे का 1100 रुपये तो गाय छोडऩे का 2100 रुपये एक बार देने पड़ते हैं। उन्होंने गाये ं पालने पर बल दिया।
फोटो कैप्शन 1: कनीना गौशाला का एक नजारा साथ में गौशाला के गेट की फोटो।
   2: कनीना गौशाला में गायें।

Friday, November 20, 2020

 कपूरी के खेतों में मिला व्यक्ति का शव, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

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 कनीना। कनीना उपमंडल के गांव कपूरी में कप्तान सिंह 50 वर्ष सरसों के खेत में मृत पाया गया। मृतक के पुत्र ने गांव के ही सरपंच पर साजिश के तहत हत्या का आरोप लगाया है तथा पुलिस में शिकायत की है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए महेंद्रगढ़ अस्पताल भेज दिया है। शनिवार को पोस्टमार्टम होगा। मृतक के एक लड़की तथा एक लड़का सहित पूरा परिवार है। इस संबंध में सरपंच से बात करनी चाही किंतु उनका फोन नहीं मिल पाया।
मृतक के पुत्र प्रवीण ने पुलिस में दी शिकायत में कहा है कि गांव कपूरी का अशोक नामक व्यक्ति प्रात: दस बजे उनके पिता को घर से बुलाकर ले गया था। प्रवीण कुमार का कहना है कि अशोक  सरपंच का नजदीकी व्यक्ति है जो अक्सर उन्हें बाइक पर बैठाकर ले जाता रहा है। करीब डेढ़ बजे गांव कपूरी के हिम्मत सिंह नामक व्यक्ति ने प्रवीण को सूचना दी कि उनके पिता खेत में पड़े हैं जिनके मुंह पर खून लगा हुआ है। प्रवीण ने खेत जाकर देखा तथा पुलिस को सूचित किया। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया है। अभी पुलिस जांच में जुटी हुई है।

अब केवल चलेगी कनीना मंडी में खरीद 

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 कनीना। 20 नवंबर तक कनीना अनाज मंडी तथा श्री कृष्ण गौशाला दोनों स्थानों पर बाजरे की खरीद जारी थी किंतु शनिवार से बाजरे की खरीद केवल अनाज मंडी कनीना में ही रहेगी।
 विस्तृत जानकारी देते हुए जगदीश कुमार पर्चेजर ने बताया कि हैफेड द्वारा 1 अक्टूबर से बाजरे की खरीद जारी की थी। प्रारंभ में सौ सौ किसानों को बुलाया गया फिर 200 तत्पश्चात बढ़ाकर 500 किसानों को प्रतिदिन बुलाया जा रहा था। अब फिर से 50 किसानों को ही बुलाया जाएगा। श्रीकृष्ण गौशाला रोड कनीना पर खरीद कार्य बंद कर दी  गई है क्योंकि अब किसानों की संख्या कम है इसलिए किसानों को केवल अनाज मंडी में बुलाया जाएगा। अब तक कनीना अनाज मंडी में कुल 3,78,000 क्विंटल बाजरे की खरीद की जा चुकी है जिसमें 70,000 क्विंटल गौशाला रोड पर तथा 2,86,837 क्विंटल कनीना मंडी से खरीद की जा चुकी है। 20 नवंबर को 15000 क्विंटल बाजरा खरीदा गया। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर तक खरीद जारी रहेगी।





अब केवल चलेगी कनीना मंडी में खरीद 

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 कनीना। 20 नवंबर तक कनीना अनाज मंडी तथा श्री कृष्ण गौशाला दोनों स्थानों पर बाजरे की खरीद जारी थी किंतु शनिवार से बाजरे की खरीद केवल अनाज मंडी कनीना में ही रहेगी।
 विस्तृत जानकारी देते हुए जगदीश कुमार पर्चेजर ने बताया कि हैफेड द्वारा 1 अक्टूबर से बाजरे की खरीद जारी की थी। प्रारंभ में सौ सौ किसानों को बुलाया गया फिर 200 तत्पश्चात बढ़ाकर 500 किसानों को प्रतिदिन बुलाया जा रहा था। अब फिर से 50 किसानों को ही बुलाया जाएगा। श्रीकृष्ण गौशाला रोड कनीना पर खरीद कार्य बंद कर दी  गई है क्योंकि अब किसानों की संख्या कम है इसलिए किसानों को केवल अनाज मंडी में बुलाया जाएगा। अब तक कनीना अनाज मंडी में कुल 3,78,000 क्विंटल बाजरे की खरीद की जा चुकी है जिसमें 70,000 क्विंटल गौशाला रोड पर तथा 2,86,837 क्विंटल कनीना मंडी से खरीद की जा चुकी है। 20 नवंबर को 15000 क्विंटल बाजरा खरीदा गया। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर तक खरीद जारी रहेगी।



सरकारी स्कूल 30 नवंबर तक रहेंगे बंद

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कनीना। सरकारी एवं प्राइवेट स्कूल सरकार के आदेशानुसार 30 नवंबर तक बंद रहेंगे। शिक्षक एवं विद्यार्थी स्कूल में नहीं आयेंगे। कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के दृष्टिगत यह निर्णय सरकार ने लिया है। यह जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी सत्यवान तथा हेमसा प्रधान बाबूलाल यादव ने दी। इस अवधि में स्कूल खोलने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

कनीना नगर पालिका ने  हटाया अतिक्रमण

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कनीना। कनीना नगर पालिका प्रशासन ने शुक्रवार को शहर में किए गए अतिक्रमण को हटवाया गया। पालिका द्वारा की गई इस कार्रवाई की अध्यक्षता पालिका कनिष्ठ अभियंता हितेश यादव ने की। उनके साथ पालिका के सफाई कर्मचारी मौजूद रहे। हर माह इस प्रकार की कार्रवाई की जाती है किंतु अतिक्रमण फिर से मुंह बाये मिलता है।
पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने बताया कि इस प्रकार की कार्रवाई करने से पहले ही पालिका प्रशासन ने दुकानों से बाहर लगाए गए सामान को उठाने की चेतावनी दे दी थी, लेकिन दुकानदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पालिका के अधिकारियों ने गुरुवार को अनाज मंडी मार्ग बस स्टैंड के दोनों ओर दुकानों के बाहर से सामान को कब्जे में लिया है। कनिष्क अभियंता हितेश यादव ने बताया कि दुकानदारों के अतिक्रमण व दुकानों के सामने खड़ी गाडिय़ों की वजह से ही जाम की स्थिती रहती है। जिसके कारण सडक़ की चौड़ाई सिकुड़ चुकी है। जिससे न सिर्फ वाहनों को बल्कि पैदल यात्रियों को भी आने-जाने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। अतिक्रमण के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं। शहर की उक्त समस्या को समाप्त करने के लिए नगरपालिका प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शहर में होने वाली जाम की स्थिति को काबू करने की कोशिश की।
 वहीं जेई हितेश कुमार ने बताया कि दुकानों के आगे बने नाले से भी आगे सामान रखा था उसे उठाया गया है। उन्होंने भी दुकानदारों को सामान अपनी दुकान के दायरे में रखने की अपील की है।
फोटो कैप्शन 13: अतिक्रमण हटाते पालिका के कर्मी।

कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं कर रहे लोग

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कनीना। कनीना बस स्टैंड पर जहां त्योहारों के बाद भीड़ बढऩे लगी है किंतु दुकानदार एवं ग्राहक कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और सभी मास्क तक नहीं पहनते।
 प्रशासन द्वारा विगत दिनों सभी ग्राहकों का नाम नोट करने, मास्क, सेनीटाइजर प्रयोग करने की दुकानदारों को हिदायत दी थी लेकिन दुकानदार नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।  दिवाली से लेकर आज तक अधिकांश लोग बगैर मास्क घूमते देखे गए हैं। यही कारण है कि कोरोना बढ़ता हुआ जर आ रहा है। यहां तक कि स्कूलों में 30 नवंबर तक अवकाश कर दिया गया है। समस्या दुकानदारों की बढ़ रही है। दुकानदार नियमों का पालन ही नहीं कर रहे हैं। किसी प्रकार की रेट लिस्ट भी नहीं लगा रहे हैं, न ही किसी प्रकार के आंकड़े नोट कर रहे हैं जिसके आधार पर कहा जा सके कि कितने ग्राहक उनके पास आए। प्रशासन के नियमों की धज्जियां उड़ रही है।
 यदि सख्ती से पेश आएं तो कोरोना पर काबू पाया जा सकता है। डा धर्मेंद्र का भी यही कहना है कि नियमों का पालन न करने से रोग बढ़ सकता है।
 

 

मोबाइल टीम ने जीआर स्कूल में लिये 152 सैंपल
-6 कोरोना संक्रमित आये जिनमें एक स्कूली छात्रा भी

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कनीना। कनीना क्षेत्र में जहां एक और गांवों में कोरोना संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में भी स्कूली विद्यार्थियों की कोरोना संक्रमतों की संख्या बढऩे लगी है। स्कूल में कोरोना का संक्रमण न फैले इसके लिए लगातार प्रशासन प्रयासरत है। इसी कड़ी में मोबाइल टीम सीएमओ डा अशोक कुमार, डाक्टर नवीन कुमार की देखरेख में कनीना में शुक्रवार को मोबाइल टीम नंबर दो जिसमें सुदेश कुमार इंचार्ज, सत्येंद्र चौहान, सहित अन्य शामिल थे। मोबाइल टीम ने लीआर स्कूल से 152 शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सैंपल लिये।
उन्होंने बताया कि स्कूलों के साथ-साथ दूसरे लोगों को विशेषकर संक्रमित लोग जिनके संपर्क में आए उनके भी सैंपल लिए जा रहे हैं। ये सैंपल मेवात मेडिकल कालेज भेजे जाते हैं जहां एक से तीन दिन के पश्चात रिपोर्ट आती है। उन्होंने बताया कि कनीना के विभिन्न स्कूलों में सैंपल लिए जाएंगे। क्षेत्र में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी की छात्रा सहित 6 कोरोना संक्रमित पाये गये।
कनीना के वार्ड नंबर 2 से 16 वर्षीय लड़की संक्रमित पाई गई है, उन्होंने 17 नवंबर को सैंपल दिया था। उधर कनीना के वार्ड 7 से 55 वर्षीय महिला भी कोरोना संक्रमित मिली है जिन्होंने 17 नवंबर को सैंपल दिया था। 17 नवंबर को ही कैमला का 9 महीने के एक बच्चा का सेंपल लिया था जो कोरोना संक्रमित पाया गया है। बाघोत में 45 वर्षीय पुरुष, मुंडियाखेड़ा में 33 वर्षीय युवक कोरोना संक्रमित मिले हैं जिन्होंने अपना सैंपल 17 नवंबर को दिया था। स्वास्थ्य विभाग ने आगामी कार्रवाई कर दी है। इन होम आइसोलेट कर दिया गया है। डा धर्मेंद्र ने बताया कि सावधानी से ही इस रोग से बचा जा सकता है।
 फोटो कैप्शन 13: जीआर स्कूल से सैंपल लेते हैं मोबाइल टीम।





बार एसोसिएशन की बैठक संपन्न

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कनीना। बार एसोसिएशन कनीना के विकास कार्यों के बारे में विचार विमर्श बाबत एक बैठक प्रधान कुलदीप रामबास के अध्यक्षता में बार रूम में संपन्न हुई। सचिव अखिल अग्रवाल ने मंच का संचालन किया।
 कुलदीप रामबास ने पूर्व प्रधान हरीश गाहड़ा से कार्यभार लेते हुए विकास कार्यों के बारे में चर्चा की। पूर्व प्रधान गिरवर लाल कौशिक, कैलाश चंद गुप्ता, सुभाष चंद्र शर्मा, रामनिवास शर्मा, विक्रम सिंह ककराला, नरेश यादव, विनोद यादव आदि अधिवक्ताओं ने पानी की व्यवस्था, शौचालय की व्यवस्था के बारे में अपने विचार रखे। कोविड-19 को देखते हुए सभी अधिवक्तागण मास्क का प्रयोग जरूर करें तथा अपने अपने सभी ग्राहकों को का प्रयोग करने के लिए बताएं, शारीरिक दूरी का भी पालन करें। सभी अधिवक्ता गण मौजूद थे।

पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल कर्मचारी यूनियन भाग लेगी 26 नवंबर के आंदोलन में

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 कनीना। हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल कर्मचारी यूनियन की एक बैठक पेयजल सप्लाई केंद्र कनीना में संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता प्रधान कृष्ण कुमार पूनिया ने की।
 श्री पूनिया ने कर्मचारी कर्मचारियों की मांगों व समस्याओं के बारे में विचार विमर्श किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार कर्मचारियों की अनदेखी रही है। अगर सरकार कर्मचारियों की मुख्य मांगे नहीं मानती तो कर्मचारी आने वाली 26 नवंबर को आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। उन्होंने निजी हाथों में विभिन्न विभाग सौंपे जाने की भी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ठेका प्रथा बंद करने, पुरानी पेंशन बहाल करने, डीए की किस्त जारी करने, एलटीसी देने, सभी कच्चे कर्मियों को पक्का करने जैसी अनेक मांगे हैं।
इस मौके पर महेंद्र सिंह यादव वरिष्ठ उप प्रधान अपने विचार व्यक्त किए और सचिव नरेंद्र सिंह गुर्जर, अशोक कुमार शर्मा, यशपाल शर्मा, सतीश कुमार, राकेश, वेदपाल, जयपाल, यश शर्मा, राज कपूर, कृष्ण कुमार, वेद प्रकाश आदि उपस्थित थे। फोटो कैप्शन 13: कर्मचारी रोष प्रकट करते हुए।

विज्ञान के युग में पेंटिंग का काम घटा

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 कनीना। करीरा गांव का एक पूरा परिवार न केवल पेंटिंग को समर्पित है अपितु दर्जनों युवाओं को भी पेंटिंग की ट्रेनिंग दे चुका है। आधुनिक मशीनों ने भी उनके काम को प्रभावित किया है। अब तो चुनाव आयोग के हंटर के चलते चुनावों में भी काम कम हो गया है। पेंटर परिवार मुश्किल से रोटी रोजी कमा पाता है तथा उनका पेशा भी घटता ही जा रहा है।
कनीना से महज दो किमी दूर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय वाला गांव करीरा का निहाल सिंह परिवार पूर्ण रूप से पेंटिंग को समर्पित है। मुखिया निहाल सिंह 50 वर्षों से तो उनका पुत्र सुरेश कुमार 25 वर्षों से पेंटिंग के काम से न केवल रोटी रोजी कमा रहा है अपितु एक दर्जन युवाओं को अल्प ट्रेनिंग दी है।
  पेंटर निहाल सिंह ने बताया कि एक जमाना था जब लोग उन्हें ढूंढते फिरते थे किंतु समय नहीं होता था। रात को सोने का समय भी नहीं मिलता था। अब जब चुनाव आते हैं तो उनकी मांग नहीं के बराबर होती है। अब जब कोई पोस्टर या बैनर छपवाना होता है तो मशीनों पर जाकर चंद मिनटों में ही छपवा लिए जाते हैं। उनका कहना है कि उनके बेटों को यह ट्रेनिंग दी गई थी । वर्तमान में तो किसी मंदिर, स्कूलों में कमरे में बच्चों के लिए कार्टून बनाने तथा द्वार आदि पर लिखाई के लिए ही अधिक याद किया जाता है।
 निहाल के पुत्र सुरेश कुमार का कहना है कि उनके पिता के एक बार सख्त बीमार होने के कारण उन्होंने घर की रोटी रोजी चलाने के लिए पेंटिंग का काम करने की सोची थी और वे सफल रहे। उस वक्त वे आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। उनका कहना है कि कभी नेम प्लेट, नंबर प्लेट तथा वाहनों के नंबर लिखने का काम जोरों पर होता था किंतु वो भी काम अब मशीनों से होने लगा है।
   उनका कहना है कि चुनाव आयोग की सख्ती के चलते अब दीवारों पर पेंटिंग आदि नहीं कराई जाती। यही कारण है कि कभी चुनावों के समय में बेहतर धंधा चलता था वो अब कम हो गया है।
फोटो कैप्शन 5: निहाल सिंह संत की प्रतिमा बनाते हुए, पेंटिंग करते हुए
फोटो कैप्शन 6/ 7/ 8: सुरेश कुमार पेंटर विभिन्न स्कूलों में पेंटिंग और शब्द लिखते हुए।


चाइल्ड लाइन दोस्ती सप्ताह मनाया गया

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कनीना। चाइल्ड लाइन महेन्द्रगढ़ द्वारा आयोजित चाइल्ड लाइन से दोस्ती सप्ताह कार्यक्रम के तहत शपथ ग्रहण कार्यक्रम चाइल्ड लाइन के समन्वयक व टीम सदस्यों द्वारा बीईओ कनीना, थाना कनीना, नारनौल महिला थाना, नारनौल पुराना थाना, सीडब्ल्यूसी नारनौल, डीसीपीओ नारनौल, अटेली थाना, शहर थाना महेन्द्रगढ़ आदि स्थानों पर आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के तहत सभी अधिकारियों ने यह शपथ ली कि चाइल्ड लेबर, चाइल्ड हरासमेंट आदि बच्चों से सम्बंधित किसी भी प्रकार की समस्याओं को लेकर हर संभव प्रयास के लिए तत्पर रहेंगे।
इस अवसर पर महेन्द्रगढ़ चाइल्ड लाइन के समन्वयक साहिल यादव ने बच्चों से जुड़ी हुई समस्याओं के बारे में अधिकारियों को अवगत कराया तथा चाइल्ड लाइल के हेल्प लाइन नम्बर 1098 से सम्बंधित जानकारी देते हुए इस कार्यक्रम के तहत उन्हें बच्चों की हर संभव मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर बीइओ कनीना से बाबूलाल, पंकज, प्रदीप, ओमरती व नारनौल महिला थाना से राजकला इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर शारदा देवी आदि सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 9:चाइल्ड लाइन महेन्द्रगढ़ द्वारा आयोजित चाइल्ड लाइन से दोस्ती सप्ताह कार्यक्रम के तहत पुलिस अधिकारी शपथ लेते हुए।

दादी पोती सम्मान समारोह में कनीना खंड की 60 दादी पोतियों को किया सम्मानित
जहां पर नारी की पूजा होती है वहां पर उन्नति होती है- एसडीएम 

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कनीना। कनीना में महिला एवं बाल विकास विभाग कनीना द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत दादी पोती सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएम रणबीर सिंह विशिष्ट अतिथि जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास लता शर्मा, अति विशिष्ट अतिथि डा नेहा व बीएमडी क्लब के चेयरमैन लक्की सिगड़ा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीडीपीओ सीमा ग्रोवर ने की। मंच का संचालन अमृत सिंह ने किया। इस कार्यक्रम में मेहंदी प्रतियोगिता रेसिपी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। मेहंदी प्रतियोगिता में हिमांशी, किरण, आशु, हरिना ने भाग लिया। जिसमें किरण को पहला पुरस्कार, हिमांशी को दूसरा पुरस्कार व आशु को तीसरा पुरस्कार मिला । रेसिपी प्रतियोगिता में अनीता ने गाजर का हलवा, अंकुरित मूंग चना बनाया। ओमवती ने मूंग का हलवा आंवले का मुरब्बा बनाया। राजवंती ने बेसन के लड्डू बनाए। रेनू नेम मूंग चावल की खिचड़ी बनाई संयोगिता ने साबूदाना की खीर साबूदाना की खिचड़ी बनाई। लवली ने सेरेलैक पौष्टिक भोजन तैयार किया। खुश ममता ने बाजरे का चूरमा बनाया। माया ने गोंद के लड्डू बनाए। रेसिपी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी वर्कर को भेंट देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सीडीपीओ सीमा ग्रोवर ने उपस्थित आमजन को संबोधित करते हुए कहा की जिसके घर तीसरी पोती हुई है उसका यहां सम्मान किया गया है उनके सम्मान में दादी को शॉल ओढ़ाकर व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है साथ ही पोती को कंबल व खिलौने दिए गए हैं। सीमा ग्रोवर ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का शुभारंभ किया गया था हर महीने इस तरह के कार्यक्रम होते रहते हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत गांव की सभा आंगनबाड़ी में उत्सव आयोजन किए जाते हैं स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान भी जागरूकता लाई जाती है। आसपास की सामाजिक संस्थाएं भी एक साथ जुड़कर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत गांव-गांव में आमजन को जागरूक कर रही हैं। जिस दादी के घर तीसरी पोती का जन्म हुआ है यह उत्सव से कम नहीं है माता पिता के साथ साथ दादा दादी भी बधाई के पात्र हैं। डा नेहा ने आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि पोषण व स्वच्छता के बारे में सभी को अच्छे तरीके से जानना चाहिए। डा नेहा ने पोषक तत्वों और स्वच्छता के बारे में जानकारी दी उन्होंने कहा कि खून की कमी से होने वाला एनीमिया रोग को हम अपने घर पर ही ठीक कर सकते हैं जिस में पोषक तत्वों की पूर्ति की जाती है सब्जी लोहे की कढ़ाई में बनाए जिससे लोहे की पूर्ति हो सके। बीएमडी क्लब के चेयरमैन लक्की सीगड़ा ने कहा कि भ्रूण हत्या समाज का बहुत बड़ा पाप है। कन्या को बचाने के लिए माता-पिता की सोच बदलना ही पहली जरुरत है। उन्हें अपनी बेटियों के पोषण, शिक्षा, जीवन शैली आदि की उपेक्षा रोकने की जरूरत है। उन्हें अपने बच्चों को एक समान मानना चाहिये चाहे वो बेटी हो या बेटा। यह माता-पिता की लड़की के लिए सकारात्मक सोच ही है जो भारत में पूरे समाज को बदल सकती है। बेटियों को अपने परिवार का गर्व मानना चाहिए। बेटा और बेटी दोनों वो पंख है जिसके बिना जीवन की ऊंचाईयों को नही छुआ जा सकता। समाज के नागरिकों को बेटियों को बचाना और सम्मान करना चाहिए क्योंकि वो पूरे संसार का निर्माण करने की शक्ति रखती है। हमारी संस्था बीएमडी क्लब लगातार 8 वर्षों से कन्या जन्म पूजन महोत्सव मना रही है जिसके तहत आमजन में जागरूकता आ रही है। किसी समय में 1000 लड़कों पर 800 लड़कियों का जन्म होता था। लेकिन अब आंगनवाड़ी वर्कर आशा वर्कर व सामाजिक संस्थाओं के विभिन्न जागरूकता शिविर व कार्यक्रमों की वजह से 2020 में 1000 लड़कों पर 1022 लड़कियों का जन्म हो रहा है यह हमारे लिए बड़ी खुशी की बात है।
मुख्य अतिथि एसडीएम रणवीर सिंह ने सम्मान समारोह की उपयोगिता व महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हरियाणा सरकार व भारत सरकार लड़कियों के लिए विभिन्न तरह की योजनाएं लेकर आ रही है जिससे समाज में जागरूकता फैल रही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2015 में लिंगानुपात पर ध्यान देकर पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की थी जिसको लेकर विभिन्न सामाजिक संस्थाएं आंगनवाड़ी वर्कर स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य विभाग भी लगातार जागरूकता फैला रहे हैं। शास्त्रों में भी लिखा है कि जहां पर नारी का सम्मान होता है वहां पर उन्नति होती है। दहेज प्रथा कन्या भ्रूणहत्या जैसी खतरनाक कुर्तियां तभी खत्म हो सकती हैं जब आज का युवा वर्ग के साथ बुजुर्ग वर्ग भी जागरूक होगा। सरकार ने बहुत अच्छा फैसला लिया है चुनावों में महिलाओं को आरक्षण बढ़ाया है। आने वाले चुनाव में सरकार ने 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी चुनाव में कर दी है जो कि बहुत अच्छा संकेत है। आज संस्कार लुप्त हो रहे हैं। उन्होंने सभी उपस्थित समूह से निवेदन किया कि वे बच्चों के लिए समय निकालें एवं उनसे अपनी बाते सांझा करें ताकि बच्चों में आत्म-विश्वास बढ़ सके। कोरोना के दौर में सभी लोग बचाव का ध्यान रखें कोविड-19 अभी खत्म नहीं हुआ है ना ही इसकी कोई दवाई आई है। जब तक दवाई नहीं तब तक कोई दिलाई ना करें। विवाह शादियों में जाए तब मास्क का प्रयोग करें। कम भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में जाएं। एसडीएम रणबीर सिंह ने दादी पोती सम्मान समारोह में उपस्थित आमजन व महिला बाल विकास के कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उसके बाद दादी पोती यों को प्रशस्ति पत्र शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। पोतियों के लिए कंबल व खिलौने भेंट किए । इस कार्यक्रम में एसडीएम रणवीर सिंह जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास लता शर्मा सीडीपीओ सीमा ग्रोवर बीएमडी क्लब के चेयरमैन लकी सीगड़ा डॉ नेहा अमृत सिंह सुपरवाइजर मनीषा यादव सुमन ज्योति कुसुमलता मंजू अनीता आदि उपस्थित रही।
फोटो कैप्शन 10 व 11: अव्वल रही तथा दादी को सम्मानित करते हुए एसडीएम।



  तेज मसालेदार वस्तुओं की ओर बढ़ा रुझान

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 कनीना। भावी पीढ़ी का रुझान फास्ट फूड व तेज मसालेदार वस्तुओं की ओर बढ़ रहा है। कभी मांस और अंडे घर में पकाना ग्रामीण क्षेत्रों में अशोभनीय माना जाता था तथा ऐसे मांसाहारियों को समाज घृणा की दृष्टिï से देखते थे उन्हें लोग अब आदर से देखते हैं। मांस बिक्री की दुकानों की संख्या भी बढ़ती ही जा रही है। कोरोना काल में एक बार बाहर की वस्तुएं खाने का प्रचलन कम हुआ था किंतु अब फिर से चरम पर है।
  युवा पीढ़ी का रुझान तेज मसालेदार वस्तुओं को खाने की ओर बढ़ता ही जा रहा है जिन्हें योग गुरू बहुत घटिया बता रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में मसाले पीसकर अपनी रोटी रोजी कमाने वाले कृष्ण कुमार ने बताया कि उनकी मशीन पर तेज मसाले पिसवाने वालों की कतार लगी रहती है। बाजार में अगर पकोड़ी, पानी के बतासे, पाव भाजी, टिक्की, छोल भटूरे की दुकानों पर झांककर देखे तो पता लगता है उनकी अच्छी बिक्री हो रही है। एक दही बल्ला बनाने वाले राजस्थानी युवक भारती का कहना है कि उनकी अच्छी बिक्री होती है। होटलों पर भी तेज मसालों के खाद्य पदार्थ अधिक बनाए जा रहे हैं।
  आश्चर्यजनक पहलु यह है कि कनीना के बस स्टैंड के आस-पास अंडों की रेहडिय़ां अधिक लगती हैं और दूध एवं फलों की दुकानें कम लगती हैं। इन रेहडिय़ों पर सुबह हो या शाम अंडे खाने वालों का तांता देखा जा सकता है। अंडों के कारोबार अच्छे चल रहे हैं। उधर कनीना बस स्टैंड से थोड़ा दूर मांस की दुकानें धड़ाधड़ चल रही हैं। खान पान में आए बदलाव से बुजुर्ग वर्ग परेशान है। बुजुर्ग आज भी सादा खाना खाते हैं और घरों में तो अब दो प्रकार के खानें बनते हैं। एक ओर बूढ़ों के लिए तो दूसरी ओर जवानों के लिए। कई बार तो बूढ़े एवं जवानों में खाने को लेकर नोकझोक होती देखी जा सकती है।
क्या कहते हैं डाक्टर-
वैद्य बालकिशन एवं हरिकिशन का कहना है कि फास्ट फूड सेहत के लिए हानिकारक होता है। इससे कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि इन फास्ट फूड में मिर्च, नमक ं दूसरी वस्तुएं अधिक मात्रा में मिलते हैं। इनका नियमित प्रयोग हृदय, गुर्दे एवं लिवर की बीमारी होने की संभावना बन जाती है।
 

 

पेंटर सिखा सकते हैं हिंदी और अंग्रेजी 

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कनीना। उप-मंडल के गांव करीरा के प्रसिद्ध पेंटर निहाल सिंह 50 वर्षों से पेंटिंग का काम कर रहे हैं। निहाल सिंह का कहना है कि पेंटर चाहे तो समाज में लोगों को हिंदी और अंग्रेजी सिखा सकते हैं वहीं बिगाडऩा चाहे तो बिगाड़ भी सकते हैं। उन्होंने कहा कि पेंटर अक्सर हिंदी और अंग्रेजी के शब्द गलत लिख डालते हैं जबकि सही शब्द प्रयोग करें तो पढऩे वाले के दिमाग में भी सही शब्द बैठ जाएंगे जिससे आने वाले समय में उनके काम आ सकते हैं। विशेषकर भावी पीढ़ी इन शब्दों को पड़ती है। उन्होंने कहा कि दुकानों पर अक्सर बेहद गलत शब्द प्रयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने पेंटिंग के कई रूप देखे हैं। अब उनके लड़के भी सालों से पेंटिंग का काम कर रहे हैं। पेंटिंग का काम धीरे-धीरे मशीनी युग के चलते समाप्त हो गया है। उन्हें बस यह मलाल है कि पेंटर पढ़े लिखे हो तो समाज में व्यापक सुधार कर सकते हैं। विद्यार्थी और लोग दुकानों पर लिखे हुए शब्दों को अपने मन में बिठा लेते हैं। यदि शब्द लिखे हुए हैं तो उनके दिमाग में सही रूप बैठ जाएगा। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है जानबूझकर हिंदी में अंग्रेजी अंग्रेजी में हिंदी शब्द लिखते हुए बिल्कुल हिंदी के साथ अन्याय कर रहे हैं।
निहाल सिंह का परिवार पेंटिंग के धंधे में जुटा हुआ है। निहाल सिंह का नाम दूर-दराज में प्रसिद्ध है जब कभी चुनाव आते थे तो उनकी मांग इतनी बढ़ जाती थी। दिन रात सोते नहीं थी भारी पैसे कमाते थे परंतु मशीनों के युग और चुनाव आयोग के हंटर के चलते पेंटिंग का काम लगभग कम हो गया है।  निहाल सिंह ने एक दर्जन लोगों को अल्प ट्रेनिंग भी दी है और आज भी उनके कदमों पर चलकर वे भी पेंटिंग से अपनी रोटी रोजी कमा रहे हैं। निहाल सिंह ने बताया कि एक जमाना था जब लोग उन्हें ढूंढते फिरते थे। यहां तक की फिल्मों के पोस्टर भी वह बनाते थे। आज मशीनों की के चलते धंधा लगभग चौपट हो चुका है। अब कोई न तो पोस्टर छपवाता और न हीं कोई बैनर।
अब तो मैं किसी के पास फुर्सत नहीं है। कुछ ही मिनटों में अपने बोर्ड/ बैनर, नेम प्लेट आदि छपवा लेते हैं किंतु उनका कहना है कि उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी के शब्दों पर पकड़ बना रखी है। वे लिखते हैं तो सदा शुद्ध लिखते हैं जिसके चलते आज भी विभिन्न स्कूलों, मंदिरों आदि पर मोटो लिखने या पेेंटिंग आदि का काम उनसे करवाया जा रहा है। उनके पुत्र ने सुरेश कुमार तो अपने पिता से भी आगे जा चुके हैं। वे बताते एक बार उनके पिता बीमार क्या हुए रोटी रोजी चलाने के लिए पेंटिंग का काम करने की सोची थी, वे सफल रहे। आज करीब 200 विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में मंदिरों में पेंटिंग एवं मोटो लिखने का लिखने का कार्य कर चुके हैं। कहीं भी जाते हैं तो हिंदी और अंग्रेजी के शब्दों पर ध्यान देते हैं। सुरेश कुमार ने बताया कि उनके जीवन में उनके शिक्षकों का योगदान रहा है इसलिए जब भी किसी शब्द में लिखने में दिक्कत आती है तो वे गलत नहीं लिखते अभी तो अपने गुरुजनों से पूछ कर लिखते हैं। यदि उन्हें थोड़ी सी भी शंका नजर आती है तो झटपट से फोन मिलाते हैं और शब्द सही लिखने की जानकारी लेते हैं। उनका कहना है कि आज भी महेंद्रगढ़, रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी तथा राजस्थान में जाते हैं और पेंटिंग का काम करते हैं। उनका हना है कि दुर्भाग्य है आज के दिन सही शिक्षा नहीं दे रहे हैं, दीवारों पर गलत शब्द लिखे होते हैं। दुकानों पर अक्सर गलत शब्द लिखे होते जिस कुप्रभाव प्रभाव विद्यार्थियों और लोगों के दिलों दिमाग पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि आशीर्वाद शब्द अधिकांश स्थानों पर ही गलत लिखा होता है। यदि हम सही शब्द का प्रयोग करेंगे तो निश्चित रूप से भावी पीढ़ी पर प्रभाव पड़ेगा। उनकी सरकार से भी मांग है कि गलत शब्द लिखने वालों पर कोई कार्रवाई अगर हो तो जरूर करने का आदेश जारी किया जाए ताकि सभी सही शब्दों का प्रयोग करेंगे और हमारी मातृभाषा सुधरेगी।
अपने पेशे से आज भी संतुष्ट हैं। यद्यपि उनके पिता 12वीं तक पढ़े हैं और वे स्वयं दसवीं कक्षा अच्छे अंकों से पास करके इस पेशे में उतरे हैं।
फोटो कैप्शन 5: निहाल सिंह संत की प्रतिमा बनाते हुए, पेंटिंग करते हुए
फोटो कैप्शन 6/ 7/ 8: सुरेश कुमार पेंटर विभिन्न स्कूलों में पेंटिंग और शब्द लिखते हुए।

25 नवंबर देव उठावनी एकादशी होने से खूब बजेंगी शहनाइयां
कनीना।
 25 नवंबर से देव उठनी एकादशी पर विवाह शादियों का सीजन शुरू हो जाने से इस बार कम अवधि में खूब शहनाइयां बजेंगी। ऐसे में नये कपड़ों की विशेषकर आधुनिक कपड़ों की मांग बढऩे लगी है। ऊनी कपड़ों की मांग भी बढ़ी है। कनीना एवं आस पास दो सौ के करीब शादियां हैं। सभी विवाह समारोह स्थल पहले से ही बुक हैं।  
देव उठनी एकादशी 25 नवंबर को-
 देव उठानी एकादशी 25 नवंबर से शुरू हो रही है। इस दिन विवाह शादी शुरू हो जाएंगी तथा विभिन्न विभिन्न स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कनीना के सुरेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि अकेले कनीना में 25 के करीब शादियां हो रही है तथा आस पास गांवों को मिलकार करीब 200 शादियां हैं। देव उठनी एकादशी का दिन विवाह शादियों के लिए सबसे शुभ दिन होता है। लंबे समय से विवाह शादी करने वाले इस दिन का इंतजार कर रहे थे। एकादशी पुनीत कार्य पुण्य के बराबर होते हैं। यही कारण है कि इस दिन विवाह शादियां की जाती है।
निर्वाण दिवस-
 उधो आश्रम के बाबा लाल दास ने बताया कि उदास निर्वाण दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन पवित्र ग्रंथ की पूजा अर्चना की जाती है तथा विभिन्न कार्यक्रम उदास आश्रम में आयोजित किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय उठानी एकादशी का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बहुत कम दिन चलेंगी शादियां-
सुरेंद्र वशिष्ठ ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार जहां कोरोना की मार पड़ी है वहीं शादियां 25 नवंबर से 31 दिसंबर तक ही चलेंगी। तत्पश्चात तारा डूब जाने के कारण 20 अप्रैल तक शादियां बंद रहेंगी। 20 अप्रैल के बाद फिर शादियां शुरू होंगी। इस बार मलमास के कारण शादियों का मुहूर्त कम दिनों का है। लोगों का कहना है कि इस बार कम अवधि में ही अधिक शादियां हैं। वैसे भी कोरोना काल से कुछ राहत मिलते ही ये शादियां शुरू हो रही हैं।
कोविड-19 के नियम डाल सकते हैं खलल- उधर जिला उपायुक्त नारनौल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में विवाह शादियों के दृष्टिगत कुछ नियम लागू कर दिये हैं जो कुछ डाल सकते हैं। जिला उपायुक्त की बैठक में निर्णय लिया है कि
अब हलवाई का भी कोरोना टेस्ट होगा वहीं कोविड-19 के नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। रात दस बजे बाद माइक पर प्रतिबंध लगा दिया है वहीं कुछ सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। विवाह समारोह स्थल में नियम लागू कर दिए हैं। जिनका पालन न करने पर कार्रवाई भी हो सकती है।

कोरोना संक्रमित बढऩे से अभिभावक  हुये चिंतित 

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 कनीना। यद्यपि सरकार द्वारा 9वी कक्षा से बारहवीं तक के स्कूल तथा कालेज विद्यार्थियों के लिए खोल दिये है किंतु एक बार फिर से सरकारी स्कूलों में कोरोना संक्रमण बढऩे से अभिभावक शिक्षक और विद्यार्थी सभी चिंतित हो गये हैं। अकेले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में 6 शिक्षक कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं जबकि 5 विद्यार्थी भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।  यद्यपि विद्यालय में नियमित रूप से स्कूल लग रहा है। एक और सरकार जहां ऐसे स्कूलों को कुछ दिनों तक बंद करने की घोषणा की है जहां कोरोना संक्रमित मिलते हैं किंतु यहां स्कूल फिर भी लगाए जा रहे हैं।
 अभिभावक रमेश कुमार, साधु राम, विजेंद्र, देवेंद्र, महेश कुमार आदि ने बताया कि उनके बच्चे विभिन्न स्कूलों में शिक्षा पाने जाते हैं और स्कूलों में कोरोना की मार बढऩे से उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि कहीं उनके बच्चे कोरोना की चपेट में न आ जाये और स्कूलों में विद्यार्थियों को भेजने से कतराने लगे हैं। वैसे तो सरकार द्वारा नियमों का पालन करते हुए शिक्षा देने का आदेश जारी किया हुआ है किंतु नियमों में ढिलाई बरती जा रही है। ऐसा आरोप अभिभावकों का है।
 विद्यार्थी मंजीता, देवेंद्र, सुनीता, मनीता आदि ने बताया कि उन्हें भी अब तो स्कूल में जाने से डर लगने लग गया है। स्कूलों में प्रवेश करते समय जहां मास्क प्रयोग की जाती है वहीं अन्य कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है। विद्यार्थी बसों में सफर करने लगे हैं जिसके चलते रोग बढ़ सकता है। ऐसे में विद्यार्थी परेशान हैं।
 शिक्षक राजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, राज कुमार, दिनेश कुमार आदि ने बताया कि उन्हें तो जो आदेश मिलेगा वैसा पालन करना पड़ेगा। सरकार का आदेश है कि स्कूल में जाकर शिक्षण किया जाए तो जरूर कर