अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है किसानों को
-बार-बार मौसम की मार झेल रहे हैं किसान
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां किसानों ने 20,000 हेक्टेयर पर सरसों तो 9000 हेक्टेयर के करीब गेहूं की फसल उगाई थी बाकी पर सब्जी तथा चारे वाली फसलें उगाई थी। इस बार किसान बेहद परेशान है। बार-बार मौसम की मार झेल रहा है। रही सही कसर अब पूरी कर दी जब ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। ओलावृष्टि भी लंबे समय तक चली।
मिली जानकारी अनुसार इस बार रबी फसल उगाने बाद जहां कभी सर्दी, कभी गर्मी, कभी ठंड, कभी पाला जमा,तो कभी वर्षा, बार-बार वर्षा और बार-बार ओलावृष्टि ने किसानों की कमर ही तोड़कर रख दी है। अब जब किसान सरसों की फसल की लावणी करके पैदावार ले रहे थे और गेहूं की लावणी शुरू कर दी है तब ओलावृष्टि ने तबाही मचा दी है। किसान बेहद परेशान है। बार-बार वर्षा के कारण जब फसल भीग जाती है और ज्योंही उसे सुखाता है तो दोबारा से वर्षा हो जाती है। ऐसे में बहुत से किसानों ने मजबूरी में अपनी फसल पैदावार आनन फानन में ले ली है।
किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, मनोज कुमार, कृष्ण कुमार, अजीत कुमार आदि ने बताया कि इस बार रबी फसल लेना तलवार की धार के समान रहा है। बार-बार मौसम की मार झेली है। यही नहीं लगता कि सही सलामत रूप से पैदावार घर तक या मंडियों तक पहुंच जाएगी। किसान जितना जल्दी करना चाह रहे हैं उतनी ही देरी हो रही है। जहां सरकार हरियाणा सरकार ने गेहूं और सरसों की खरीद भी शुरू कर दी है लेकिन किसान अभी तक फसल पैदावार नहीं ले पाए हैं क्योंकि मौसम से लगातार जूझ रहे हैं। किसानों ने बताया कि इतनी बुरी हालत पहले कभी नहीं हुई थी। यह भी सत्य है हर वर्ष जब फसल पक जाती है तब ओलावृष्टि आती है और ओलावृष्टि से हर वर्ष फसलों में थोड़ा बहुत नुकसान हो जाता है। एक और जहां फसल उगाई जाती है तभी से ठंड, गर्मी, कभी आवारा जंतुओं से फसल को बचाते बचाते किसान मौसम की मार के आगे जरूर असहाय हो जाता है और इस मार को झेल भी नहीं पाता।
किसानों ने बताया कि बहुत से ऐसे किसान है जिन्होंने अपनी फसल का बीमा ही नहीं करवाया था। परिणाम यह निकलेगा कि अब सरकार कुछ मुआवजा दे तो उन्हें लाभ होगा वरना उनकी फसल भी बर्बाद हो गई मुआवजा भी मिलने की संभावना कम होती है। अब कृषि विभाग का कार्य शुरू होगा कि वह देखेगा कितनी फसल में नुकसान हुआ है और अपनी रिपोर्ट आगे भेजेगा। मंगलवार को ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान हुआ। कनीना के काम से कम दो दर्जन गांवों में ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि भी इतनी तेज हुई है की सरसों की फसल को नुकसान हुआ है, गेहूं की फसल में नुकसान नाम मात्र हो सकता है परंतु गेहूं की लावणी का काम दूभर हो गया है।
उल्लेखनीय इस क्षेत्र के लोग गेहूं और जो चारे के लिए उगते हैं। तूड़ी प्राप्त होती और तूड़ी में रेत मिल जाएगा क्योंकि लावणी करते समय गेहूं कि जड़ साथ आने की संभावना बन गइ्र है चूंकि जमीन नरम हो गई है। एक और जहां किसान चिंतित यूं भी है समय पर मजदूर नहीं मिले। वैसे भी किसान मजदूर से लावणी करवाता है। परिणाम यह निकला कि इस बार मजदूर नहीं मिले जिसके कारण फसल पैदावार लेने में देरी हो गई है। अब भविष्य पर निर्भर करता है का मौसम खुलता है या नहीं और किसान कैसे अपनी फसल को सुखाकर पैदावार ले पाते हैं। तब तक किसानों की सरकार से मांग उठने लगी है कि उन्हें मुआवजा दिया जाए।
फोटो कैप्शन 9/ 11/ 12: गेहूं और सरसों की फसल काटकर एवं खड़ी फसल
स्वास्थ्य सुपरवाइजर मुन्नी बाई सेवानिवृत्त, सम्मान समारोह आयोजित
-32 वर्ष 7 माह की सेवा के बाद विदाई, स्टाफ ने किया सम्मान
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कनीना की आवाज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी सेहलंग में कार्यरत स्वास्थ्य सुपरवाइजर मुन्नी बाई के सेवानिवृत्त होने पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. प्रभा यादव ने की, जबकि मंच संचालन एसएमआई राजेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम में डा. सचिन, डा. आशीष और डा. नंदिनी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्वास्थ्यकर्मी नवनीत एवं पूर्व राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश चौहान ने बताया कि मुन्नी बाई ने स्वास्थ्य विभाग में करीब 32 वर्ष 7 माह की सेवाएं दी हैं। वे 3 अप्रैल 2025 को सीएचसी सेहलंग में स्वास्थ्य सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हुई थीं और इससे पहले भी विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कर्तव्यनिष्ठा और मिलनसार व्यवहार से सभी का दिल जीता।
समारोह के दौरान स्वास्थ्य निरीक्षक इंद्रजीत तथा पीएचसी धनोंदा के स्वास्थ्य सुपरवाइजर पवन शर्मा के नेतृत्व में स्टाफ ने मुन्नी बाई को पगड़ी पहनाकर व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। साथ ही उन्हें पौधा भेंट कर हरियाली व खुशहाली का संदेश दिया गया। इस अवसर पर डा. नंदिनी, डा. आशीष, डा. अरोड़ा, राजेंद्र सिंह, विक्रम, आलोक, भूपेंद्र, इंद्रजीत, राजेश, कुलदीप, मैना, संतोष, मंजू, प्रिया सहित नर्सिंग ऑफिसर, फार्मेसी अधिकारी, लैब टेक्नीशियन, अकाउंटेंट एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने मुन्नी बाई को उपहार भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
फोटो कैप्शन 08: मुन्नी को विदाई में पौधा भेंट करते हुए
कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-19वीं कड़ी पढ़े 2 अप्रैल को
-कुतरूं महिला शिक्षकों में मिलता था प्रसन्न, उसकी पत्नी रही सदमे में
ओलावृष्टि से खराब हुई पकी फसल --फसलों का किसानों को उचित मुआवजा दे सरकार- सुनील
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कनीना की आवाज। बार एसोसिएशन कनीना के पूर्व उप प्रधान सुनील राव ककरालिया ने असमय हुई ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की तैयार हुई फसल खराब का सरकार से जल्दी से जल्दी उचित मुआवजा किसानों को देने की मांग की है।
किसानों की मेहनत से तैयार फसल को हुए नुकसान से किसानों को आर्थिक व मानसिक नुकसान हुआ है। किसानों का जीवनयापन खेतीबड़ी से ही चलता है । किसानों की उम्मीदों पर इससे नुकसान हो गया है। दिनों दिन बढ़ रही महंगाई और अब फसल नुकसान से किसान चिंतित है।
फैक्ट्री में नकदी चोरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार और नकदी बरामद
-सुनील कुमार अगिहार की शिकायत पर हुआ था मामला दर्ज
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कनीना की आवाज। थाना शहर महेंद्रगढ़ पुलिस ने माजरा चुंगी स्थित एक फैक्ट्री में हुई चोरी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान अजय निवासी गांव परसरामपुरा, जिला झुंझुनूं (राजस्थान) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ के दौरान चोरी की गई 83,500 रुपये की कुल राशि में से 58 हजार रुपये की नकदी बरामद कर ली है।
इस संबंध में पीडि़त सुनील कुमार निवासी गांव अगिहार (हाल माजरा चुंगी, महेंद्रगढ़) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उसकी माजरा चुंगी पर दरवाजों और खिड़कियों की फैक्ट्री है, जहां आरोपी अजय पिछले कुछ समय से नौकर के रूप में काम कर रहा था। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि दिनांक 27 मार्च की रात को उसने इंश्योरेंस के पैसे देने के लिए अपने ऑफिस के गल्ले में 83,500 रुपये रखे थे, जिसकी जानकारी आरोपी अजय को थी। रात को ऑफिस बंद कर वह अपने घर चला गया और अजय सहित दो मजदूर फैक्ट्री में ही मौजूद थे।
जब शिकायतकर्ता ने दिनांक 28 मार्च को सुबह आकर देखा तो ऑफिस के पीछे का दरवाजा खुला था, सामान बिखरा हुआ था और गल्ले का ताला खुला हुआ था, जिसमें से 83,500 रुपये गायब थे। इसके बाद जब फैक्ट्री में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक की गई, तो उसमें आरोपी अजय फैक्ट्री के शटर के नीचे से छुपकर निकलता हुआ दिखाई दिया। घटना के बाद से ही आरोपी का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ था और दूसरे कर्मचारी को उसके जाने की कोई भनक नहीं लगी।
शिकायत और सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर थाना शहर महेंद्रगढ़ पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अजय को गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ करने पर उसके कब्जे से 58 हजार रुपये बरामद किए गए।
कई गांवों में हुई ओलावृष्टि
- कनीना क्षेत्र में ही 9 एमएम वर्षा तथा हल्के ओले भी पड़े
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल के कई गांव में ओलावृष्टि हुई तथा वर्षा हुई। सुबह से ही मौसम बदला हुआ था। दोपहर पश्चात तेजी से वर्षा होने लगी और कनीना क्षेत्र में 9 एमएम वर्षा हुई वहीं कई गांवों में ओलावृष्टि से भी फसलों में नुकसान पहुंचाने की संभावना बन गई है।
मिली जानकारी अनुसार कनीना कके गांव मोहनपुर, छितरौली ,कनीना, उच्चत, सीहोर, रसूलपुर, ककराला, गुढ़ा और विभिन्न गांवों से ओलावृष्टि के होने का समाचार मिला है। ककराला के रमेश कुमार ने बताया कि ओलावृष्टि से एक बार धरती सफेद हो गई थी। मोहनपुर के मुंशीराम ने बताया कि जमकर ओलावृष्टि हुई है। गुढ़ा से राजकुमार ने बताया कि ओलावृष्टि हुई है। छीथरोली एवं कनीना के किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है।
इस समय जहां गेहूं और सरसों दोनों फैसले खड़ी हुई है। कुछ किसानों ने काट कर फसल डाल रखी है। फसलों में ओलावृष्टि से खड़ी व पड़ी दोनों फसलों में नुकसान की संभावना बन गई है। विशेष कर सरसों की फसल पककर तैयार है जिसकी फलियों पर ओले की मार से फलियां फट जाती हें और सरसों मिट्टी में मिल जाती है।अभी तक विभिन्न गांव से ओलावृष्टि के समाचार मिल रहे हैं। इस संबंध में एसडीओ कृषि डा. अजय यादव से बात हुई उन्होंने कहा कि अभी तक उनके पास पुष्ट सूचना नहीं मिली है कि कहां कहां ओलावृष्टि हुई है। उधर अभी से ही किसानों ने ओलावृष्टि से नुकसान का मुआवजा मांगना शुरू कर दिया है।
उधर बार एसोसिएशन कनीना के पूर्व उप प्रधान सुनील राव ककरालिया ने असमय हुई ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की तैयार हुई फसल खराब का सरकार से जल्दी से जल्दी उचित मुआवजा किसानों को देने की मांग की है।
किसानों की मेहनत से तैयार फसल को हुए नुकसान से किसानों को आर्थिक व मानसिक नुकसान हुआ है। किसानों का जीवनयापन खेतीबड़ी से ही चलता है । किसानों की उम्मीदों पर इससे नुकसान हो गया है। दिनों दिन बढ़ रही महंगाई और अब फसल नुकसान से किसान चिंतित है।
फोटो कैप्शन 6: इकट्ठे किए ओले दिखाता किसान
7: खेत में ओलावृष्टि का एक नजरा
03: किसान ओलावृष्टि के नुकसान को देखता हुआ
गोमला की लड़की परी ने डांस में दिखाया दम बढ़ाया क्षेत्र का मान
-किसमें कितना है दम में, दिखाया अपना दम
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कनीना की आवाज। गोमला की प्रतिभाशाली लड़की परी गोमला ने डांस में अपनी लगन ,मेहनत और निरंतर अभ्यास से एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। चंडीगढ़ में केके एचडी (किस में कितना है दम)टीवी रियलिटी शो द्वारा आयोजित डांस प्रतियोगिता के ग्रांड फाइनल राष्ट्रीय शो में परी गोमला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोमला का नाम रोशन किया है। इससे पहले परी गोमला ने कनीना और अलग-अलग जगह में आयोजित प्रारंभिक इंटरमीडिएट राउंड को सफलतापूर्वक क्वालीफाई कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। केकेएचडी शो के निदेशक वरुण बंसल द्वारा आयोजित एक ऐसा प्लेटफार्म है जो न केवल एक डांस के शो को बल्कि पेंटिंग ड्राइंग गीद्धा, भांगड़ा डांस, कैलीग्राफी और अलग-अलग प्रतिभाओं को निखारने के अवसर प्रदान करता है।
परी की यह उपलब्धि ने केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है बल्कि गोमला के अन्य युवा योग साधकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनके पिता महेश गोमला ने बताया की बेटी की कड़ी मेहनत और गुरुजनों के मार्गदर्शन से ही यह सफलता संभव हो पाई है। 26 मार्च को मोहाली में रायक बहरा यूनिवर्सिटी पंजाब में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ है।
फोटो कैप्शन 04 व 05: परी को पुरस्कृत करते हुए
घटता ही जा रहा है अप्रैल फूल बनाने का सिलसिला
-लोगों की जागरूकता के चलते ऐसा हुआ संभव
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कनीना की आवाज। कहीं कहीं आज भी क्षेत्र में हंसी मजाक के रूप में फूल डे मनाया जाता है। अंग्रेजी काल के समय से ही चली आ रही परिपाटी को मनाने वाले कम लोग रहे हैं। जिस प्रकार हिंदु नव वर्ष कम लोग मनाते हैं वैसे ही मूर्ख दिवस कम लोग मनाते हैं। हिंदू नव वर्ष मनाने वाले मूर्ख दिवस मनाए जाने का विरोध भी करते हैं। लोग जागरूक भी हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से प्रथम अप्रैल फूल डे मनाने की अनोखी परंपरा है। सुबह से ही मूर्ख बनाने की कार्रवाई शुरू होती है और शाम तक चलती रहती है। विशेषकर ग्रामीण लोगों को तो इस दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी तो फोन के मार्फत मूर्ख बनाया जाता है जो भारी तनाव का कारण बनता है।
यूं तो मूर्ख बनाने के तरीके हजार होते हैं किंतु बच्चे से लेकर युवा वर्ग नोट से मूर्ख बनाने की कार्रवाई अक्सर करते देखे जा सकते हैं। एक सौ रुपये के नोट का एक सिरा धागे से बांध लेते हैं और भीड़ वाले रास्ते में डाल दिया जाता है। इस नोट को बड़े धागे से बांधकर दूर ले जाया जाता है। जब कोई सज्जन इस नोट को उठाने लगता है तो धागे की सहायता से इसे तेजी से खींच लिया जाता है। जब नोट उठाने वाले की नजर इन शरारतियों पर पड़ती है तो भारी मजाक होता है। ग्रामीण लोग अक्सर फूल डे के बारे में अंजान होते हैं और ऐसे में उनके साथ अच्छा खासा मजाक होता है। वैसे भी फसल कटाई का समय होता है और किसान अपनी फसल काटने में व्यस्त रहते हैं। फसल कटाई दौरान उनके साथ अच्छा मजाक होता है। एक किसान को कह दिया जाता है कि वह कृषि के यंत्र खेत में लेकर आओ। वह किसान बेचारा पुन: खेत से घर जाता है और बार-बार उसके साथ मजाक होता है। जब उन्हें अप्रैल फूल बनने का पता चलता है तो वे झुंझलाते हुए नजर आते हैं।
जिन घरों में फोन लगे होते हैं उनको भी कई प्रकार की समस्याएं अप्रैल फूल से संबंधित झेलनी पड़ती हैं। कई बार तो ऐसे फोन आते हैं कि आपके परिचित की दुर्घटना होने के कारण उन्हें अमुक अस्पताल में भर्ती कराया गया है आप जल्दी से पहुंचो। जब फोन उठाने वाला भाग दौड़कर अस्पताल पहुंचता है तो उसे भारी झुंझलाहट होती है। मोबाइल पर भी अनेकों प्रकार की मजाक की जाती हैं किंतु ये मजाक अधिक समय तक नहीं चलती हैं। बाद में आम जन अप्रैल फूल के विषय में परिचित हो जाता है। इस संबंध में डा. होशियार सिंह का कहना है कि पुराने समय में लोग अप्रैल फूल के प्रति आकर्षित होते थे किंतु अब इस मूर्ख दिवस को मनाने वाले बहुत कम बचे हैं।
अप्रैल फूल बनने से सरकारी कर्मी भी पीछे नहीं होते हैं। जहां अस्थाई कर्मी काम करते हैं उनका एक अप्रैल फूल संबंधित आदेश निकालकर रख दिया जाता है जिसमें लिखा होता है कि आपकी सेवाएं समाप्त की जाती हैं। कर्मी परेशान होते हैं किंतु जब उन्हें हकीकत का पता चलता है तो वे अपना सा मुंह लेकर रह जाते हैं। पूरा दिन ही छोटे बड़े मजाकों में व्यतीत है। कई अन्य तरीकों से भी मूर्ख बनाया जाता है किंतु जिनके साथ मजाक किया जाता है वे बुरा नहीं मानते क्योंकि कहा है-बुरा ना मानो अप्रैल फूल डे है।
दीपक कुमार वशिष्ठ को मिला ग्रासरूट्स सस्टेनेबिलिटी लीडरशिप अवार्ड
--देश से लगभग 125 प्रतिभागियों ने भाग लिया था भाग
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कनीना की आवाज। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पर्यावरण प्रेमी दीपक कुमार वशिष्ठ को ग्रासरूट्स सस्टेनेबिलिटी लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान नई दिल्ली स्थित यूनेस्को हाउस में आयोजित एक समारोह के दौरान प्रदान किया गया।
यह आयोजन नेट ग्रीन फाउंडेशन द्वारा आयोजित हाई-इम्पैक्ट सस्टेनेबिलिटी डायलाग और अर्थ अवार्ड्स-2026 के अंतर्गत किया गया, जिसमें पूरे देश से लगभग 125 प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह पहल पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सहयोग से आयोजित की गई, जो वैश्विक स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा उद्योग, पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री, जीएनसीटीडी तथा विशेष अतिथि डा. बेन्नो बोअर (यूनेस्को) उपस्थित रहे। इस अवसर पर नेट ग्रीन फाउंडेशन के निदेशक एवं प्रधान संपादक उमेश कुमार शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नेहा एडविन, डा. लिपिका शर्मा संयुक्त राष्ट्र महिला - वरिष्ठ सलाहकार, लिंग एवं जलवायु विशेषज्ञ, एयर मार्शल विनोद के. भाटिया सेवानिवृत्त, भारतीय वायु सेना, सुरभि गुप्ता और वाणी हीरेमथ सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
दीपक कुमार वशिष्ठ को यह सम्मान जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के लिए किए जा रहे उनके निरंतर प्रयासों के लिए प्रदान किया गया। उनके कार्यों को समारोह में विशेष रूप से सराहा गया और उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया। उनके प्रमुख कार्यों में वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता जागरूकता और जल संरक्षण शामिल हैं।
फोटो कैप्शन 01: दीपक वशिष्ठ को अवार्ड देते हुए
कनीना में हुई 9 एमएम वर्षा, किसानों के चेहरे उतरे, मायूस
-लावणी का काम
हो गया प्रभावित
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर पश्चात मौसम में बदलाव आया और वर्षा होने लगी। यूं तो सुबह से ही बादल छाए हुए थे और बूंदाबांदी हुई लेकिन दोपहर पश्चात बूंदाबांदी के बाद वर्षा होने लग गई। देखते-देखते 9 एमएम वर्षा हुई। वर्षा होने का सिलसिला जारी था।
वर्षा कारण किसानों की सरसों पैदावार ,सरसों लावणी, गेहूं की लावणी का कार्य ठप हो गया है। बार-बार किसान वर्षा के बाद फसल को सुखाता है, फिर से वर्षा हो जाती है। वर्षा के कारण एक बार फिर से सरसों की काटकर डाली गई फसल भीग गई है। वहीं गेहूं की लावणी भी प्रभावित हो गई है।
क्या कहते हैं किसान-
किस सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, अजीत कुमार, महेंद्र सिंह, योगेश कुमार, रोहित कुमार आदि ने बताया कि वर्षा के कारण जहां सरसों की काटकर डाली गई फसल भीग गई है। उसे सुखाना पड़ेगा तथा फिर से सुखाकर इसकी पैदावार ली जायेगी। आनन फानन में बहुत से किसानों ने तो अपनी सरसों की पैदावार ले ली है। कुछ एक ने तो मंडियों तक भी पहुंचा दी है। किसने कहना है कि यदि यूं ही मौसम खराब रहा तो इस बार उनकी फसल पैदावार बर्बाद हो जाएगी।
क्या पड़ेगा प्रभाव -
किसानों ने बताया कि इस समय लावणी करना भी कठिन हो जाएगा क्योंकि गेहूं की लावणी करना बहुत जरूरी है वहीं सरसों की लावणी भी जरूरी है। यदि लावणी नहीं होगी तो सरसों की फलिया फट जाएगी और मिट्टी में मिल जाएगी। वहीं गेहूं की लावणी का कार्य धीमा होगा क्योंकि दरांती से गेहूं की कटाई की जाती है तो गेहूं की जड़े भी साथ आ जाती है। जड़ों का रेत तूड़ी में चला जाएगा और पशु कम खाएंगे। किसानों कहना है कि तूड़ी भी खराब हो जाएगी क्योंकि इस क्षेत्र में तूड़ी प्रमुख पशु चारा है। अगर वह खराब हो जाता है तो किसानों के पशु भी अच्छी प्रकार दूध नहीं दे पाएंगे।
नहीं मिल रहे हैं मजदूर-
क्योंकि सरसों और गेहूं की लावणी एक साथ आने से मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूर मिलते हैं वो भी मुंह मांगा दाम मांग रहे हैं। ऐसे में किस कंबाइंड हार्वेस्ट मशीनों से ही लावणी करवा रहे हैं। किसान सूबे सिंह और राजेंद्र सिंह ने बताया कि यदि मजदूर नहीं मिलेंगे तो वो भी मशीनों द्वारा लावणी एवं फसल पैदावार लेंगे।
सरसों खरीद प्रभावित-
उधर कनीना की अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरसों की खरीद जारी है किंतु वर्षा के कारण काम प्रभावित हो गया है। सरकारी तौर पर किसान सरसों नहीं बेच रहे हैं केवल निजी स्तर पर ही सरसों बेचने का कार्य कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन 02: कनीना क्षेत्र में होती हुई वर्षा















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