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Sunday, March 29, 2026



 






 बैठक में परशुराम जन्मोत्सव की तैयारियों पर चर्चा
 -ब्राह्मण समाज के उत्कृष्ट विद्यार्थियों व समाजसेवियों को किया जाएगा सम्मानित
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कनीना की आवाज।
श्रीगौड़ सभा कनीना की आम सभा का आयोजन नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना में किया गया, जिसमें आगामी भगवान परशुराम जन्मोत्सव को भव्य रूप से मनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता डा. रवि कौशिक ने की, जबकि मंच संचालन उप-प्रधान बुद्धि प्रकाश शर्मा ने किया। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस वर्ष भगवान परशुराम जन्मोत्सव को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान ब्राह्मण समाज के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को भी सम्मान प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर समाज हित में निशुल्क लाइब्रेरी संचालित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इस पर प्रधान व कार्यकारिणी सदस्यों ने विस्तृत विचार-विमर्श के लिए समय मांगा, ताकि इसे व्यवस्थित रूप से लागू किया जा सके।
बैठक में उपप्रधान सुरेश वशिष्ठ, डा. अजीत शर्मा, इंद्रलाल आर्य, प्रदीप शर्मा, गोविंद शर्मा, मोहित इसराना, सचिन शर्मा सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 05: बैठक में मौजूद संगठन सदस्य।



ईमानदारी की मिसाल हरियाणा रोडवेज
-- यात्री का पर्स लौटाकर दिया ईमानदारी का परिचय।
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कनीना की आवाज।
 नारनौल से अटेली होते हुए कनीना जा रही हरियाणा रोडवेज बस में ईमानदारी की एक सराहनीय मिसाल देखने को मिली। प्राप्त जानकारी के अनुसार कल दोपहर को नारनौल से कनीना बस में यदुवंशी शिक्षा निकेतन, नारनौल के शिक्षक अनूप (निवासी गांव बहु झोलरी) अटेली से बस में सवार हुए थे। कनीना पहुंचने पर उतरते समय उनका पर्स बस में ही गिर गया।
पर्स में लगभग 2000 रुपये नकद, 2 एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस थे। कनीना बस स्टैंड पर जानकारी मिलने के बाद स्टैंड इंचार्ज प्रदीप कुमार (रेवाड़ी) ने तुरंत बस के चालक और परिचालक से संपर्क किया।
बस चालक सुदेश और परिचालक संतलाल को पर्स बस में सुरक्षित मिला। बाद में स्टैंड इंचार्ज पंकज (नारनौल) व प्रदीप कुमार (रेवाड़ी) की मौजूदगी में पर्स शिक्षक को लौटा दिया गया।
शिक्षक अनूप ने रोडवेज कर्मचारियों की ईमानदारी की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
फोटो कैप्शन 06: पर्स लौटाते हुए रोड़वेज कर्मी


गौसेवा के लिए आगे आए दानदाता
-श्रीकृष्ण गौशाला कनीना को नवीन कुमार ने दिए एक लाख रुपए
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कनीना की आवाज।
कनीना कस्बे के वार्ड 12 निवासी रामसिंह के पौत्र एवं जगदीश प्रसाद के पुत्र फल व्यापारी नवीन कुमार अपने परिवार सहित आज श्रीकृष्ण गौशाला कनीना पहुंचे, जहां उन्होंने गौमाताओं की सेवा करते हुए हरा चारा एवं खल खिलाया। इस अवसर पर नवीन कुमार ने गौशाला के लिए 1 लाख 1 हजार रुपए का  सहयोग प्रदान किया।
नवीन कुमार ने बताया कि उन्हें दान-पुण्य के संस्कार अपने परिवार से मिले हैं तथा ईश्वर की कृपा से उन्हें गौसेवा में विशेष रुचि है। उन्होंने कहा कि गौमाता की सेवा से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। इसी क्रम में वार्ड 2 निवासी जगदीश सिंह पुत्र श्रीराम ने भी गौशाला को 11 हजार रुपए की राशि भेंट कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। गौशाला कार्यकारिणी ने दोनों दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए उनके इस पुनीत कार्य की सराहना की और कहा कि ऐसे सहयोग से गौशाला के संचालन में निरंतर मजबूती मिलती है। इस अवसर पर नवीन कुमार के साथी अमित व मोहित सहित गौशाला प्रधान भगत सिंह, उपप्रधान रवींद्र बंसल, दिलावर सिंह, सूबे सिंह, होशियार सिंह सत्संगी, कप्तान दीनदयाल, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, कर्ण सिंह, राज डीलर, सत्यवीर गुगनवाला, अधिवक्ता कैलाश गुप्ता, पूर्व पार्षद राजेंद्र सिंह, मास्टर सुरेंद्र सोनी, डॉ. नीरज, महेश, नरेंद्र, अमीर सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04: गौशाला कनीना में दान देते हुए नवीन कुमार




14 पद यात्रियों का दल पहुंचा कनीना से भैरू का बास
- 4 घंटे में पहुंचा 20 किलोमीटर दूरी की तय
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कनीना की आवाज।
 कनीना के सक्रिय पदयात्रियों का दल विभिन्न धार्मिक स्थानों की यात्रा करता आ रहा है। अभी तक इन्होंने नांधा बालवाड़ी, माता महासर ,भैरू का बास आदि स्थानों की पदयात्रा की है। भैरू का बास की पदयात्रा उन्होंने 5 बजे कनीना से शुरू की थी और ककराला, कपूरी, नीमोठ, मंडोला ,शोभा की ढाणी कुलाना, राधा की ढाणी होते हुए भैरू का बास चार घंटे में तय की। करीब 20 किलोमीटर दूरी तय करने में उन्होंने एक जगह पड़ाव भी किया। सक्रिय पदयात्रियों का दल दो अप्रैल को लालदास महाराज जैनाबाद की पदयात्रा पर जाएगा। इस मौके पर डा. होशियार सिंह यादव पदयात्री ने बताया कि वह 2010 से लगातार हरिद्वार से बाघेश्वर धाम की करीब 350 किलोमीटर दूरी कर बाघेश्वर धाम पर हर वर्ष कावड़ अर्पित करते आ रहे हैं वहीं 2010 से ही 200 किलोमीटर दूरी खाटू श्याम मंदिर तक ध्वज अर्पित करके जा रहे हैं। यही नहीं जैतपुर के श्याम बाबा पर भी हर वर्ष पदयात्रा पर जाते हैं तथा विभिन्न धार्मिक स्थानों की भी यात्रा कर रहे हैं।  उनका कहना है कि इंसान को जिस कार्य में खुशी होती है वह कार्य जरूर करना चाहिए। इससे शरीर भी स्वस्थ रहता है और मौसम में भी बदलाव आ जाता है जिससे शरीर रोगरोधी बन जाता है।
  उन्होंने बताया कि केवल उद्देश्य शरीर को स्वस्थ रखने और थोड़ी बहुत आस्था विभिन्न धार्मिक स्थानों में रखना है। इससे वातावरण में बदलाव आता है तथा मन में खुशी होती है। इस मौके पर जहां जगदीश पूर्व पंच करीरा, निरंजन लाल, होशियार सिंह दहिया, सत्य प्रकाश, परमानंद शर्मा, श्रीकिशन वैद्य, राजपाल पूर्व सैनिक, संजीव भारद्वाज, सतवीर बोहरा, शिवचरण, सुरेंद्र मुख्य शिक्षक, सतीश कुमार मुख्य शिक्षक, नरेश कुमार तथा नरेंद्र आदि शामिल हुए।
 फोटो कैप्शन 01: पद यात्रियों का दल भैरूं का बास में





बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेहलंग में परिणाम घोषित
- पुरस्कार वितरण समारोह का हुआ आयोजन
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कनीना की आवाज।
बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेहलंग में आज कक्षा तृतीय से ग्यारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषणा एवं पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्साह, अनुशासन एवं अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति के साथ सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में चेयरमैन हरिश भारद्वाज, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपाध्यक्ष कृष्ण भारद्वाज तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज द्वारा की गई।
इसके उपरांत विद्यालय द्वारा वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया। कक्षा 3 से 11 तक के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर आमंत्रित कर मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न विषयों, अनुशासन एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने कहा कि सफलता का मूल मंत्र निरंतर मेहनत, अनुशासन एवं सही मार्गदर्शन है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की पढ़ाई में नियमित रूप से सहयोग करें तथा विद्यालय के साथ निरंतर संपर्क में रहें।
उपाध्यक्ष कृष्ण भारद्वाज ने विद्यार्थियों को निरंतर आगे बढऩे और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्या श्रीमती ज्योति भारद्वाज ने सभी विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी तथा विद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। बड़ी संख्या में उपस्थित अभिभावकों ने विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन एवं बच्चों के प्रदर्शन की सराहना की और संतोष व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन अभिभावक-शिक्षक बैठक के साथ हुआ, जिसमें अभिभावकों ने शिक्षकों से अपने बच्चों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की।
फोटो कैप्शन 03: चेयरमैन हरिश भारद्वाज एवं उपाध्यक्ष कृष्ण भारद्वाज तथा प्रिंसिपल विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए।



30 को लगेगा 3 घंटों का कट
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कनीना की आवाज।
डीएचबीवीएन कनीना के धनौंदा एवं खरकड़ाबास में 30 मार्च को दो घंटों का कट लगेगा।  विस्तृत जानकारी देते हुए एसडीओ ने बताया कि निवारक रखरखाव के लिए 30 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक 11 केवी धनौंदा आरडीएस फीडर पर परमिट टू वर्क लिया जाएगा। इसके चलते  सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक धनौंदा और खरकड़ाबास गांवों में बिजली की आपूर्ति बंद रहेगी।





 बाइक से 3454 किलोमीटर की शहीद स्मारक यात्रा संपन्न
-अगिहार स्कूल के प्राध्यापक ने चला रखा है यात्रा अभियान
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में अंग्रेजी के प्रवक्ता और ग्राम झगड़ोली निवासी मदन मोहन कौशिक ने अपनी  पांच दिवसीय  3454 किलोमीटर लंबी बाईक यात्रा संपन्न की।
 यह जानकारी देते हुए मदन मोहन कौशिक ने बताया कि उनकी यात्रा पांच राज्यों हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश सहित 57 जिलों से होकर गुजरी इस यात्रा के दौरान उन्होंने 10 से ज्यादा शहीद स्मारकों तथा वार मेमोरियल के अलावा भारत के सबसे बड़े थार के रेगिस्तान तथा ऐतिहासिक रण आफ कच्छ का भ्रमण किया।
 इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत के पांच सबसे बड़े जिलों कच्छ,,जैसलमेर,बीकानेर तथा बाड़मेर  तथा पूर्व में लेह का भ्रमण पूरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने सतलुज, घग्गर, गंग नहर, काकनी नदी, क्षिप्रा,चंबल, साबरमती, विश्वमित्री, दुधिमती, चंद्रभागा तथा काली नदी  सहित अरावली पर्वत शृंखला को पार किया। उन्होंने राष्ट्रीय शहीद स्मारक हुसैनी वाला, वार मेमोरियल जैसलमेर, भारत की एकता और अखंडता के नायक लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के घर तथा उनके संग्रहालय गांव करमसद जिला आनंद  गुजरात,भारत के महानतम क्रांतिकारियों में से एक चंद्रशेखर आजाद के पैतृक घर चंद्रशेखर आजाद नगर पूर्व में  भावरा, जिला-अलीराजपुर ,मध्य प्रदेश, मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में आदिवासी क्रांतिकारी तात्या भील की समाधि, उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर तथा चित्तौडग़ढ़ के किले का भी भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत की  ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक धरोहर का दिग्दर्शन करना,भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को सहेज कर रखना तथा क्रांतिकारियों के विचारों तथा उनकी देशभक्ति के प्रसंगो को जन-जन  तथा खासतौर पर युवा पीढ़ी तक पहुंचाना है। इसके साथ ही उनके द्वारा बाइक से भ्रमण किए गए जिलों की संख्या बढ़कर 527 से 542 हो गई है।
फोटो कैप्शन 02: बाइक से यात्रा करता हुआ प्राध्यापक




अंग्रेजी माध्यम प्राइमरी माडल स्कूलों में स्टेशन भरने में अध्यापकों ने नहीं दिखाई दिलचस्पी
-74 पोस्टों पर किसी भी प्राइमरी अध्यापक ने रुचि नहीं दिखाई
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कनीना की आवाज।
शिक्षा विभाग हरियाणा द्वारा हाल ही में पेपर लेकर अध्यापकों को अंग्रेजी माध्यम माडल स्कूलों में तैनाती की योजना बनाई थी लेकिन महेन्द्रगढ़ जिले के चौबीस स्कूलों में 74 पोस्टों पर किसी भी प्राइमरी अध्यापक ने रुचि नहीं दिखाई। इसमें राजकीय प्राइमरी माडल स्कूल ककराला में 4,कनीना में 2,कनीना कन्या स्कूल में 3,भोजावास में 4 पदों पर किसी भी प्राइमरी अध्यापक ने अपनी सहमति नहीं दी। हालांकि अब इन स्थानों पर अतिथि अध्यापकों को मौका दिया जाएगा लेकिन जिला महेंद्रगढ़ में प्राइमरी अतिथि अध्यापक नहीं है। अब अंत में इन स्कूलों में सामान्य तबादला नीति में उन अध्यापकों को दोबारा मौका दिया जाएगा जिन्होंने प्रथम राउंड में इन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में जाने में अपनी रुचि नहीं दिखाई। इसी तरह की कुछ  स्थिति पोस्ट ग्रेजुएट टीचर विषय कामर्स व अर्थशास्त्र में रही इन विषयों में भी अध्यापकों ने अपनी रुचि अंग्रेजी माध्यम माडल स्कूलों में काम करने में नहीं दिखाई।




28 मार्च से सरसों और 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू
-इस बार बायोमेट्रिक सिस्टम से होगी खरीद : उपायुक्त
-किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर 18001802060
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कनीना की आवाज।
रबी सीजन की फसलों की सुचारू खरीद सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा शनिवार रात्रि राज्य के सभी जिला उपायुक्तों के साथ की गई समीक्षा बैठक के बाद महेंद्रगढ़ जिले में भी खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि जिले में 28 मार्च से सरसों और 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू की जा रही है।
उन्होंने कहा कि केवल उन्हीं किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी, जिन्होंने मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवाया है।
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में डीसी ने जिले की सभी 6 मंडियों में बारदाने, लेबर और परिवहन की व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और किसानों की सुविधा का भरोसा दिलाया।
बैठक के बाद डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस बार सरकार द्वारा लागू किए गए बायोमेट्रिक सिस्टम का कड़ाई से पालन किया जाए।
उन्होंने बताया कि यह सिस्टम खरीद प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि किसानों की सहायता और समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने विशेष हेल्पलाइन नंबर 18001802060 भी जारी किया है। इस पर संपर्क कर किसान खरीद से संबंधित कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
डीसी ने मंडियों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, सफाई व्यवस्था और अटल कैंटीन की सुविधाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
इस बैठक में डीईएमओ जगजीत कादियान, सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी अरुण सैनी, डीएम हैफेड प्रवीण कुमार और कृषि विभाग के डॉ. हरपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।



करोड़ों की लागत से बना बीआरसी भवन बन चुका है शराबखाना
-तुगलकी नीति















यों के कारण सरकार को लगा दिया है करोड़ों रुपए का चूना
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव भडफ़ में करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित दो मंजिला भवन तुगलकी नीतियों के कारण आज शराबखाना बन चुका है। दरवाजे खिड़कियां, बिजली की फिटिंग अज्ञात चोर  उखाड़ ले गए। महेश 5 वर्षों तक ही यह भवन यहां चला। और ठीक मोहम्मद बिन तुगलक की याद आ गई जिसने कभी दिल्ली तो कभी दोआब राजधानी बदलते बदलते कितना भारी नुकसान करवा दिया था। ठीक वैसे ही इस बीआरसी आफिस के कारण सरकार को करोड़ों रुपए का घाटा उठाना पड़ा है इस प्रकार की नीतियां बनाने वाले और सरकार को घाटे में पहुंचने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। आज अधिकारी एवं कर्मचारी इस बाबत बोलने से भी हिचकिचा रहे हैं।
वर्ष 2001 में कनीना से महज 3 किलोमीटर दूर रेवाड़ी सड़क मार्ग पर कनीना उप-मंडल के अंतिम गांव भडफ़ बस स्टैंड से करीब एक किलोमीटर दूर भडफ़ की बणी में यह भवन निर्मित किया गया था। क्योंकि खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का कार्य यही चलाया गया था। बाकायदा 2 मंजिला भवन में शौचालय महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय, बेहतरीन कमरे ,कार्यालय सब कुछ तैयार किए गए। बेहतर दर्जे के का कार्यालय स्थापित करने के बाद ऐसी क्या आफत आ पड़ी की इसे फिर से कनीना शिफ्ट करना पड़ा और वो भी महज 5 वर्षों के अंतराल में। पास में ही भडफ़ का सरकारी स्कूल स्थित है। पहले ही से ही अगर भडफ़ स्कूल से के पास बना दिया जाता तो स्कूल परिसर विस्तृत हो जाता या फिर अन्य किसी सरकारी संस्थान या कार्यालय यहां स्थापित किया जा सकता था। जब यह भवन निर्मित करने के बाद कनीना स्थानांतरित कर दिया गया तो यहां किसी चौकीदार की तैनाती नहीं करना अपने आप में अनुत्तरित प्रश्र है? परिणाम धीरे-धीरे इसके दरवाजे, खिड़कियां उखाड़ उखाड़ कर लोग ले गए। आज खंडहरनुमा भवन आने जाने वाले लोगों को दुहाई दे रहा है कि मुझे बचाओ।  पुराने शिक्षकों , कर्मचारियों  आदि से इस संबंध में चर्चा की गई तो एक ही बात सामने आई की कनीना खंड के तहत उस समय समय 58 गांव होते थे और विभिन्न स्कूलों के शिक्षक एवं प्राचार्य, खंड शिक्षा अधिकारी के पास पहुंचने के लिए कई सममस्याओं को पार करके ही पहुंच पाते थे। कनीना से या तो निजी या सरकारी बसों से या  निजी वाहनों से चलकर आते थे। ककनीना से  3 किलोमीटर दूर भडफ़ बस स्टैंड पपुंचते। फिर एक किमी दूर भडफ़ की बणी में जाते तबकार्यालय पहुंच पाते। बगैर निजी साधनों के यहां पक पहुंचने के लिए गर्मी, सर्दी, बरसात मेें एक किमी दूर पैदल चलकर कार्यालय तक पहुंच पाते थे। इतना बड़ा सफर तय करने के बाद आखिरकार लोग बेहद परेशान हो चले। शिक्षक बेहद परेशान हो चले और बार-बार यही मांग की गई की बीआरसी कार्यालय वापस कनीना स्थानांतरित किया जाए। उल्लेखनीय है कि डीपीईपी योजना के तहत इसका नााम बीआरसी कार्यालय था जो वर्तमान में बीइओ नाम से जाना जाता है। यही नहीं उस समय के अधिकारी और कर्मचारी जो यहां कार्यरत थे वो भी यहां उबाऊ जगह पर बोर हो चले थे क्योंकि उसे समय यहां खाने-पीने,चाय पानी की सुविधा, दुकानों की सुविधा नहीं थी। केवल जंगल में यह बना दिया गया और खतरों से भी खाली नहीं रहा। परिणाम अपनी गलतियों को दबाने के लिए अधिकारियों ने इसे कनीना शिफ्ट कर दिया। वैसे तो इसका उद्घाटन तत्कालीन एसडीएम संदीप सिंह ने 2002 में किया। ऐसा लगा हुआ पत्थर प्रमाणित कर रहा है। आज इसमें गंदगी का साम्राज्य शराबियों का अड्डा बना हुआ है। जब पत्रकार इस कार्यालय तक पहुंचे तो शराबी शराब की बोतल छोड़ कर भाग खड़े हुए। आवारा जंतु, भेड़ बकरी चराने वाले लोग इस जगह खूब आनंद लेते हैं परंतु आज इसमें न तो कोई खिड़की बची है और न कोई दरवाजा। न कोई पंखा है ना कोई फिटिंग का सामान। कुछ ग्रिल जरूर लगी हुई है, अगर उनकी भी देखरेख नहीं की गई तो जल्दी उनको भी चोर उखाड़ कर ले जा सकते हैं।
इस संबंध में जब उच्च अधिकारियों से बात की तो कोई जवाब नहीं देकर एक दूसरे पर बात को टालते रहे। उसे समय के बाबू और कुछ लोगों से चर्चा की गई तो एक ही बात सामने आई कि यह गलत जगह पर निर्मित कर दिया गया था। यद्यपि यहां की जमीन ग्राम पंचायत द्वारा दी गई थी जिस पर यह कार्यालय निर्मित किया गया था। सभी कर्मचारी और अधिकारी इसे वापस कनीना देखना चाहते थे। इस बात को आज भी शिक्षक मानते हैं। परिणाम यह निकला कि जैसे तैसे इसे कनीना ही शिफ्ट करने की कवायद चली और वर्तमान में राजकीय माडल संस्कृति स्कूल के परिसर में ही खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गय।
चलाया जा सकता था कोई कार्यालय-
 कोई जरूरी नहीं है कि बीआरसी कार्यालय यहां चलाया जाए। जब भवन कनीना स्थानांतरित हो गया तो इसमें कोई अन्य सरकारी कार्यालय आसानी से इस भवन में चलाया जा सकता था किंतु न तो सरकार को बताया गया और न हीं यहां कोई चौकीदार छोड़ा गया जो इसकी देखरेख कर सके। सबसे बड़ी बात थी की इस भवन में काम से कम प्राथमिक स्कूल चलाया जा सकता था, आंगनबाड़ी केंद्र भी चलाया जा सकता था किंतु किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। सरकार का करोड़ों का नुकसान करते हुए भवन जर्जर बना दिया।
एक चौकीदार बचा सकता था करोड़ों रुपए-
यदि बीआरसी आफिस स्थानांतरित ही कर दिया गया तो कम से कम सरकार को एक चौकीदार यहां छोड़ दिया होता तो करोड़ों रुपए जो आज बर्बाद हो गए उसे खराब होने से बचाया जा सकता था किंतु किसी ने यह बात नहीं सोची कि कम से कम एक कर्मी की तैनाती लगा दी जाए। ताकि यहां के कीमती उपकरणों और फिटिंग आदि को उखाडऩे से बचा जा सकता था। अगर इसे स्थानांतरित किया जाना था तो पहले अधिकारियों की सोच कहां चली गई थी।
इस संबंध में बीआरसी नारनौल से बात की गई तो पहले तो उन्होंने साफ कह दिया कि इसका उन्हें  कोई ज्ञान नहीं है दूसरी बार फोन ही नहीं उठाया।  जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बात को बीआरसी पर टाल दिया। आखिर इसका जवाबदेही कौन है,अधिकारी बोलने से भी डर रहे हैं। वर्तमान में दीवारों में छेद कर दिये हैं, दीवारे ढहा दी गई हैं। कृड़ा कचरा कई क्विंटल भरा है। सैकड़ों शराब की बोतलें, कांच भंड़ बकरियों का मलमूत्र भरा हुआ है।
किसने दी थी बीआरसी की भूमि-
बीआरसी भवन निर्माण के तत्कालीन सरपंच भडफ़ ने यह जमीन शिक्षा विभाग को दान दी थी। सरपंच 2000 से 2005 योजना में रहा है।
क्या क्या निर्मित किया गया-
सरकार की हिदायतों के अनुसार उस समय लाखों रुपये में जो वर्तमान करोड़ों रुपये लागत से दो मंजिला भवन में एक ट्रेनिंग कक्ष, आइसीटी रूम, लोबी, टायलेट पुरुष एवं महिला, रिसेप्शन 30 से 50 लोगों का ट्रेनिंग हाल, दो कार्यालय जिनमें एक बीइओ तो दूसरा स्टाफ के लिए बनाने का प्रावधान था।
फोटो कैप्शन 01: उखाड़े हुए दरवाजों का भवन
              02: कमरों की जर्जर हालात
            03:चोरों द्वारा उखाड़े गये पंखे एवं फिटिंग
            04:शौचालयों की दुर्गति
            05:शराब की बोतलें
             06:कूड़ा कचरा भरा भवन
             07: जर्जर दो मंजिलों का भवन

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