डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान: गागड़वास में युवाओं को नशे के खिलाफ किया गया जागरूक, नए आपराधिक कानूनों की भी दी गई जानकारी।
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कनीना की आवाज। जिले में चलाए जा रहे डोर-टू-डोर नशा मुक्त अभियान के तहत गठित टीम द्वारा गांव गागड़वास का दौरा कर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गांव के शिव मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया, जहां मुख्य रूप से समाज को नशामुक्त बनाने पर गहन चर्चा की गई। अभियान के दौरान टीम ने विशेष रूप से युवा वर्ग से सीधा संवाद किया और उन्हें नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से अवगत कराते हुए इस बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए निरीक्षक शारदा और उनकी टीम ने बताया कि जो भी नशा पीडि़त व्यक्ति स्वेच्छा से नशा छोडऩा चाहता है, पुलिस द्वारा उसकी हर संभव मदद की जाएगी। इस दौरान ग्रामीणों को मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में भी जागरूक किया गया।
नशा मुक्ति के साथ-साथ इस अवसर पर ग्रामीणों को नए आपराधिक कानूनों— भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों और बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में गांव के सरपंच अजय सहित कई गणमान्य व्यक्ति और ग्रामीण उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 09: संबंधित है
कुतरूं प्राचार्य के कारनामों की 18वीं कड़ी पढ़े 28 को
-कुतरूं को चमचों पर रहा भरोसा, कानों का रहा कच्चा
राताकलां से मानपुरा तक कृष्णावती नदी को रिचार्ज के लिए किया जाएगा विकसित
-सरकार ने 2.71 लाख रुपये की राशि की मंज़ूर-सीताराम यादव
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कनीना की आवाज। अटेली-कनीना क्षेत्र में गिरते भूजल स्तर को सुधारने के उद्देश्य से कृष्णावती नदी के माध्यम से रिचार्ज की एक महत्वपूर्ण योजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। राताकलां से मानपुरा तक नदी के विकास और जल संचयन के लिए हरियाणा सरकार ने 2.71 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है।
पूर्व विधायक सीताराम यादव ने बताया कि इस योजना पर पिछले दो वर्षों से निरंतर कार्य चल रहा था और अब इसे तेजी से पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए पूर्व कार्यकाल में तत्कालीन सिंचाई राज्यमंत्री डा. अभय सिंह यादव के माध्यम से दो बड़ी पाइपलाइन स्वीकृत करवाई गई थी।
इनमें से एक पाइपलाइन भालखी से राताकलां के पास कृष्णावती नदी में मिलती है, जबकि दूसरी सुर्जनवास खेड़ा से मानपुरा के पास आकर जुड़ती है। इसके अलावा महासर गांव से एक अतिरिक्त वाटर चैनल भी तैयार किया गया है, जो ओवरफ्लो पानी को राताकलां के पास नदी में पहुंचाएगा। इन तीनों स्रोतों से पर्याप्त मात्रा में पानी नदी में आएगा, लेकिन वर्तमान में नदी की क्षमता इस पानी को समाहित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इसी को ध्यान में रखते हुए नदी की खुदाई कर उसकी जल धारण क्षमता बढ़ाई जाएगी। साथ ही विभिन्न स्थानों पर जल भंडारण संरचनाएं विकसित की जाएंगी और पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए अवरोधकों (चेक डैम) का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त नदी के मार्ग में आने वाले रास्तों को सुगम बनाने के लिए आवश्यक पुलिया एवं पार मार्ग भी बनाए जाएंगे।
पूर्व विधायक ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से आसपास के कई दर्जन गांवों के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही जिन पंचायतों द्वारा भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी, वहां बड़े जोहड़ों का निर्माण कर रिचार्ज प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने हरियाणा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण और प्रबंधन को लेकर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी सहित सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह योजना क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
फोटो कैप्शन: सीताराम पूर्व विधायक
श्रीराम शिव सनातन धर्म सभा में हुआ भव्य कार्यक्रम
-- निकाली कलश यात्रा।
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव गुढ़ा गांव में राम नवमी के दिन कलश यात्रा निकाली गई।यह कलश यात्रा पूरे गांव से होती हुई राम मंदिर पहुंची। उसके बाद मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज उपस्थित थे। इसके अलावा विशिष्ठ अतिथि वि_ल गिरी महाराज और स्वामी कैलाश दास महाराज भी मंदिर में पहुंचे। कलश यात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया । और श्री राम के जय घोष करते हुए गांव के चक्कर लगाएं इसके साथ महिलाएं भी कलश लिए हुए श्रीराम की भक्ति में लीन होती दिखी। कलश यात्रा के दौरान मंदिर समिति की तरफ से भक्तों पर पुष्प वर्षा की गई। जानकारी देते हुए कैलाश बिरला ने बताया कि कलश यात्रा के बाद 27 मार्च को प्रात: काल में मूर्ति स्थापना की जाएगी उसके बाद हवन का आयोजन किया जाएगा और अंत में भंडारे का आयोजन के साथ समापन किया जाएगा।
उधर गुढ़ा गांव में आयोजित सम्मान समारोह में आश्रम हरि मंदिर पटौदी जिला गुरूग्राम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव और महंत लक्ष्मण गिरी गौशाला बूचावास जिला महेन्द्रगढ़ के महंत स्वामी वि_ल गिरी को राष्ट्र गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह अवार्ड उनके समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण, युवा विकास, महिला सशक्तिकरण, साहित्य, कृषि, खेल, गौसेवा और सनातन धर्म मूल्यों के संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट व सराहनीय योगदान के लिए दिया गया है।
गांव गुढ़ा में आयोजित भव्य समारोह में अतरलाल एडवोकेट ने स्वामी धर्मदेव व स्वामी वि_ल गिरी को शाल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र भेंट कर राष्ट्र गौरव अवार्ड से सम्मानित किया। अतरलाल ने कहा कि स्वामी धर्मदेव व स्वामी वि_ल गिरी का जीवन समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। दोनों संतों ने अपनी विचारों और कार्यों से पूरे समाज को एक नई दिशा प्रदान करने का कार्य किया है। उन्हें सनातन धर्म और संस्कृति का आधुनिक संरक्षक बताते हुए अतरलाल ने कहा कि एक महान ज्ञानयोगी और कर्मयोगी के रूप में गौ सेवा, शिक्षा और प्राचीन संस्कृति के संरक्षण के लिए उनका योगदान चिर स्मरणीय रहेगा। इस अवसर पर श्रीराम शिव सनातन धर्म सभा गुढ़ा के तत्वावधान में मंदिर में श्रीगणेश, रामदरबार, शिव परिवार, राधा कृश्ण, मां दुर्गा तथा हनुमान जी की मूर्तियों की स्थापना भी की गई एवं भव्य कलश यात्रा तथा भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर पूर्णचंद बिड़ला, रतन सिंह चेयरमैन, राजेन्द्र सिंह नम्बरदार, पूर्णचंद मक्कड़, धर्मपाल दीक्षित, सरपंच विरेन्द्र दीक्षित प्रधान रवि छाबड़ा, नेब राज बिरला,नवनीत बिरला ,पूरण बिरला, साहिल छाबड़ा ,नरेंद्र गेरा आदि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 07: कलश यात्रा निकालते हुए
08: उपस्थित महामंडलेश्वर एवं अन्य
कपूरी में शराब ठेके की आड़ में चल रहे अवैध धंधे का भंडाफोड़,
--भारी मात्रा में शराब बरामद
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री पर कड़ा प्रहार करते हुए महेंद्रगढ़ पुलिस की सीआईए महेंद्रगढ़ की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। दिनांक 25 मार्च की रात थाना सदर कनीना के अंतर्गत आने वाले गांव कपूरी में की गई इस छापेमारी में, एक वैध शराब ठेके के बिल्कुल बगल में अवैध रूप से संचालित हो रहे शराब के जखीरे का पर्दाफाश किया गया है। गुप्त सूचना के आधार पर सीआईए महेंद्रगढ़ और एक्साइज विभाग द्वारा यह कार्रवाई की गई, जिसमें ठेके के सेल्समैन को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में देशी, अंग्रेजी शराब और बीयर बरामद की गई है।
सीआईए महेंद्रगढ़ की टीम को यह गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि कपूरी गांव स्थित शराब ठेके का सेल्समैन मोहित निवासी कपूरी, ठेके के ठीक बराबर में बने एक लोहे के टीन शेड (खोखे) में अवैध रूप से शराब का भंडारण कर रहा है और ठेके की आड़ में उसे बेच रहा है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईए की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने सेल्समैन मोहित को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की, तो उसने टीन शेड का ताला खोल दिया। शेड के अंदर शराब की पेटियों का बड़ा भंडार देखकर पुलिस ने तुरंत एक्साइज विभाग को टीम को मौके पर बुलाया।
संयुक्त टीम द्वारा शेड में रखी गई शराब की जांच करने पर यह स्पष्ट हो गया कि यह पूरा स्टॉक अवैध है और इसका ठेके के आधिकारिक रिकॉर्ड से कोई संबंध नहीं है। इस दौरान टीम ने कुल 115 पेटियों से अधिक अवैध शराब बरामद की। इस विशाल खेप में देशी शराब, अंग्रेजी शराब और बीयर की भी कई पेटियां जब्त की गई हैं। जो यह शराब विभिन्न जिलों से लाकर यहां टीन शेड में स्टॉक की हुई थी।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी सेल्समैन मोहित अपने कुछ पुराने साथियों के साथ मिलकर लाइसेंस वाले ठेके की आड़ में इस अवैध शराब के कारोबार को चला रहा था। थाना सदर कनीना में आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
एक ही आदेश परंतु अलग-अलग नियम
- हरियाणा में आहरण एवं वितरण अधिकारी की नियुक्ति पर उठे गंभीर सवाल
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कनीना की आवाज। हरियाणा सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रदेश के विभिन्न जिलों में उनके पालन में व्यापक असमानता देखने को मिल रही है। 07 अप्रैल 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि उच्च वेतनमान वाले पदों का अतिरिक्त कार्यभार किसी भी स्थिति में निम्न वेतनमान वाले अधिकारी या कर्मचारी को नहीं सौंपा जा सकता। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति आदेश के विपरीत नजर आ रही है।
प्रदेश के अनेक सरकारी विद्यालयों में प्राध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक व कार्यरत कर्मचारियों को आहरण एवं वितरण अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। यह न केवल वित्त विभाग के निर्देशों की अवहेलना है, बल्कि प्रशासनिक संतुलन और जवाबदेही को भी प्रभावित करता है।
सूत्रों के अनुसार एक ही आदेश को प्रदेश के विभिन्न जिलों में अलग-अलग तरीके से लागू किया जा रहा है—
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 1 अप्रैल तक सभी विद्यालयों में आहरण एवं वितरण पावर समीपवर्ती प्राचार्य या मुख्याध्यापक को सौंपने के निर्देश जारी किए गए हैं।
सोनीपत मे पहले से ही डीडी पावर वरिष्ठ प्राध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक से लेकर नजदीकी प्राचार्यों या मुख्याध्यापकों को दी जा चुकी है।
महेंद्रगढ़ में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा हाल ही में खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक/प्राध्यापक को ही डीडी पावर देने को सुनिश्चित करने को कहा गया है। जबकि पलवल पानीपत जिले में यह शक्तियां समीपवर्ती विद्यालयों के प्राचार्य को हस्तांतरित की जा चुकी है
एक ही आदेश की भिन्न-भिन्न व्याख्या और क्रियान्वयन से प्रशासनिक एकरूपता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। शिक्षा एवं प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की असंगत व्यवस्था से कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं—
वित्तीय जवाबदेही प्रभावित हो सकती है
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका कमजोर पड़ सकती है। भविष्य में ऑडिट आपत्तियां एवं प्रशासनिक विवाद बढ़ सकते हैं
वित्त विभाग के 07 अप्रैल 2025 के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि—
उच्च वेतनमान वाले पदों का कार्यभार निम्न वेतनमान वाले कर्मचारी को नहीं दिया जाए
सभी विभागाध्यक्ष एवं जिला अधिकारी इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
इस मुद्दे को लेकर कर्मचारियों एवं विभिन्न संगठनों ने सरकार से मांग की है कि—
पूरे प्रदेश में एक समान नीति लागू की जाए
नियमों के उल्लंघन की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर भ्रम की स्थिति समाप्त की जाए।
नहीं फेंकना चाहिए उगाए हुए जौ/जवारा
-व्रत समापन दौरान प्रयोग करें-वैद्य
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कनीना की आवाज। नवरात्रि शुक्रवार को संपन्न हो जाएंगे। नवरात्रों पर जहां जौ और गेहूं आदि उगाने की एक प्रथा है। करीब 9 दिनों में ये गेहूं और जौ बड़े हो जाते हैं जिन्हें पानी में बहा दिया जाता है। यद्यपि पानी में बहाने से जहां जल दूषित होता है वहीं अनेक विद्वान मानते हैं कि बहाने नहीं चाहिए। इनका उपयोग करना चाहिए। ये अनेक रोगों में काम आते हैं। लोग जवारे को कूड़े में डाल देते हैं या फिर गंदे पानी में बहा देते हैं जो नहीं बहाना चाहिए।
क्या कहते हैं वैद्य-
मांगेलाल शर्मा योगाचार्य जिन्होंने क्षेत्र में हजारों लोगों को अपनी योग एवं जड़ी बूटियों से ठीक किया है, का कहना है कि ये जौ तथा गेहूं जब आठ दिन बाद काटे जाए तो इनसे जवारे रस प्राप्त किया जा सकता है। इसमें क्लोरोफिल आयोडीन, सेलेनियम, आयरन, विटामिन आदि अनेक पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए लाभप्रद है। इसलिए नवरात्रि संपन्न किए जाए इन का ऊपरी भाग काट कर पानी में मिलाकर जरूर व्रत खोलना चाहिए जिससे शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहेगा। उनका कहना है कि जहां करीब 350 के करीब बीमारियां ठीक हो जाती है वही कैंसर में भी लाभप्रद है। दांतों से खून आना, दांतो की समस्या को दूर करने के लिए जवारे रस पी लेना चाहिए।
उधर श्रीकिशन वैद्य का कहना है कि जवारे रस पीने से लाभ होते हैं इसलिए इनमें बुढ़ापा रोकने, वजन घटाने में काम में लेते हैं वहीं रक्तचाप घटाने, हृदयघात की समस्या में जवारे रस लाभप्रद है। उनका कहना है कि नवरात्रों में जो- गेहूं और जौ बड़े हो जाते हैं उनका सेवन किया जा सकता है। इससे दोहरा लाभ होगा। एक तो घर में उगाए हुए जौ एवं गेहूं से जवारे रस तैयार हो सकता है वहीं इनको अनावश्यक रूप से पानी में फेंकने से प्रदूषण बढ़ता है। उन्होंने कहा कि कुछ भी नहीं तो यह जवारा गायों को खिला देना चाहिए किंतु गंदे नालों में नहीं डालना चाहिए।
फोटो कैप्शन 05: नवरात्रों में घरों में पैदा जवारा
साथ में मांगेलाल शर्मा एवं श्रीकिशन वैद्य
कंजकों को कराया गया भोजन
-- शुक्रवार को भी कराया जाएगा भोजन
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कनीना की आवाज। दुर्गा अष्टमी पर कंजकों को भोजन कराया और उन्हें दान पुण्य किया। शुक्रवार को भी भोजन कराया जाएगा । दोपहर तक कंजकों को भोजन कराने का सिलसिला जारी रहा। यही नहीं अपितु कुत्तों एवं कौवों ने भी जी भर के भोजन किया। हरियाणा सरकार ने गुरुवार को ही राम नवमी करा अवकाश घोषित किया हुआ था। दो दिनों तक राम नवमी चलेगी।
बुधवार से कंजकों को भोजन कराने का सिलसिला जारी है। दुर्गा सप्तमी से सिलसिला शुरू हुआ था और नवमी शुक्रवार को भी जारी रहेगा। वैसे तो कंजकों की कमी रही वहीं उन्हें जबरन खाना खाना पड़ा।
नवरात्रों के आठवें दिन मंदिरों में पूजा अर्चना का जोर रहा वहीं मां की कढ़ाई की गई। विभिन्न मंदिरों में रौनक देखने को मिली। शुक्रवार को क्षेत्र में नवरात्रे पूर्ण होने जा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर हवन, कढ़ाई, भजन एवं सत्संग होते रहे।
इस हाइटेक युग में जहां खानपान में तीव्र गति से बदलाव आ रहा है वहीं नवरात्रों में कंजकों को खाना खिलाने में भी बदलाव आ गया है। हाइटेक युग में जहां हलवा पुड़ी एवं शुद्ध देशी घी से बनी वस्तुओं से इंसान का मोह भंग हो रहा है। नवरात्रों पर कंजकों को भी अब फास्ट फूड भी खिलाये जाने लगे हैं। नवरात्रों के दिनों में फल एवं सब्जियां महंगी रही हैं। केले से लेकर सेब तक महंगे हैं। इन चीजों की जरूरत हर घर में रहती है।
फल महंगे-
बाजार में सभी फल एवं सब्जियां महंगी चल रही हैं। रेहडिय़ों पर फल एवं सब्जियां सजी हुई हैं। नवरात्रों के बाद फिर से फल एवं सब्जियां सस्ती हो जाएंगी।
51 कन्याओं को कराया भोजन, हवन आयोजित-
संत मालडऩाथ आश्रम में 9 दिनों से चल रही मां दुर्गा के अखंड ज्योति का आज हवन करके विधि विधान से समापन किया गया। 51 कन्याओं को भोजन करवा कर दान दक्षिणा देकर कन्याओं का पूजन किया गया। मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मां दुर्गा का नवरात्रों का समापन पर हवन किया गया वहीं कन्याओं को भोजन करवा कर दान दक्षिणा दी गई।
महिलाओं ने जहां मां दुर्गा के भजन किये वहीं पर हवन में पांच जोड़ों से आहुति दिलाई गई। जिनमें प्रधान दिनेश यादव अपनी धर्मपत्नी मंजू देवी, नरेश यादव अपनी धर्मपत्नी सनेह लता देवी, शिवकुमार अपनी धर्मपत्नी, पवन कुमार अपनी धर्मपत्नी व अशोक डीपी अपनी धर्मपत्नी सहित ने पूर्ण आहुति दी।
इस मौके पर राजेंद्र सिंह, बलबीर साहब, नरेश कुमार, शिव कुमार, प्रकाश साहब, लाल सिंह, अरविंद कुमार, महेंद्र सिंह, सतबीर यादव, रमेश कुमार, मास्टर अनिल कुमार, सुरेंद्र सिंह अनेक महिलाएं विद्या देवी, सुमन देवी, कौशल्या देवी, लाली देवी, रामकला देवी, सावित्री देवी प्रमुख रही। पंडित प्रवेश शर्मा द्वारा हवन पूर्ण करवाया गया। सैकड़ों महिलाओं एवं पुरुषों ने हवन में आहुति देकर धर्म लाभ कमाया।
फोटो कैप्शन 02:कंजकों को भोजन कराते हुए।
03: मोलडऩाथ आश्रम पर 51 कन्याओं को भोजन कराते हुए
04: मोलडऩाथ आश्रम पर हवन करते हुए।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है-यादव
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कनीना की आवाज। राम नवमी एक हिंदू त्योहार है जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म का उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
इस संबंध में लेखक एवं साहित्यकार डा. एचएस यादव का कहना है कि रामायण के अनुसार, भगवान राम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ था। यह दिन हिंदू महीने चैत्र के नौवें दिन मनाया जाता है, जो इस बार 27 मार्च को पड़ रहा है। यह त्यौहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को बुराई पर अच्छाई, धर्म की स्थापना और सत्य व मर्यादा के प्रतीक के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। क्योंकि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा से ही चैत्र नवरात्रि का त्यौहार शुरू होता है जो की लगातार 9 दिनों तक पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में माता पार्वती के 9 रूपों की पूजा की जाती है। और रामनवमी पर्व के दिन नवरात्रि का पर्व समाप्त होता है। रामायण के मुख्य संस्करणों के अनुसार, भगवान राम की कोई पुत्री नहीं थी। उनके केवल दो पुत्र थे - लव और कुश।
डा. यादव के अनुसार कई भक्त राम नवमी पर कठोर उपवास रखते हैं और सूर्यास्त तक भोजन और पानी का त्याग करते हैं। ऐसा माना जाता है कि उपवास शरीर और मन को शुद्ध करता है, जिससे आध्यात्मिक उत्थान और आत्म-अनुशासन में सहायता मिलती है। हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा धर्म की पुन: स्थापना के लिये भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। श्रीराम चन्द्र जी का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन रानी कौशल्या की कोख से, राजा दशरथ के घर में हुआ था।
डा. यादव बताते हैं कि रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियां थीं लेकिन बहुत समय तक कोई भी राजा दशरथ को सन्तान का सुख नहीं दे पायी थीं जिससे राजा दशरथ बहुत परेशान रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ को ऋषि वशिष्ठ ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराने को विचार दिया।
यज्ञ के कुछ महीनों बाद ही तीनों रानियां गर्भवती हो गयीं। ठीक 9 महीनों बाद राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने श्रीराम को जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे, कैकयी ने श्रीभरत को और सुमित्रा ने जुड़वा बच्चों श्रीलक्ष्मण और श्रीशत्रुघ्न को जन्म दिया। भगवान श्रीराम का जन्म धरती पर दुष्ट प्राणियों को सहार करने के लिए हुआ था।
डा. यादव का कहना है कि रामनवमी के त्यौहार के साथ ही मां दुर्गा के नवरात्रों का समापन भी होता है। हिन्दू धर्म में रामनवमी के दिन पूजा अर्चना की जाती है।
डा. यादव भातृ प्रेम का सुंदर उदाहरण देते हुए कहते हैं कि यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम एवं भातृ रक्षक बताया गया है। चारों ही भाइयों में अनमिट प्रेम था। जहां राम ने सहर्ष राज त्यागकर भरत को दे दिया किंतु भरत ने भाई के प्रेम के चलते श्रीराम की खड़ाऊं से राज किया जब तक भगवान श्रीराम वनवास से नहीं लौटे। उधर लक्ष्मण ने वन में भटकते हुए सभी सुख का त्याग कर दिया और भाई एवं माता सीता के लिए दिनरात तत्पर रहा। उर्मिला का त्याग सदा याद रहेगा।
फोटो कैप्शन: डा. एचएस यादव















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