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Tuesday, June 30, 2026
23 वर्षों की सेवा करके सेवानिवृत्ति हुए महेंद्र कुमार
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कनीना की आवाज। कनीना प्राथमिक कृषि सहकारी लिमिटेड कनीना से महेंद्र कुमार सेवादार 23 वर्षों की सेवा कर सेवानिवृत्त हो गए हैं। महेंद्र कुमार की सेवानिवृत्ति पर समिति प्रबंधक कृष्ण कुमार, निरीक्षक अजेश,राजेश कुमार डा. विनोद कुमार, सुमेर सिंह, भरपूर सिंह तथा गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने 23 वर्षों तक की कनीना के किसानों की सेवा पूरी लगन और मेहनत से की। इस मौके पर उनके सुखद एवं स्वस्थ जीवन की कामना की गई।
फोटो कैप्शन 6: सेवानिवृत्त होते हुए महेंद्र कुमार
तीन दशक बाद नई अनाज मंडी को मिली खारे पानी से मुक्ति
-स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की पहल पर एक करोड़ पांच लाख की लागत से पेयजल परियोजना का काम शुरू
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कनीना की आवाज। अटेली की नई अनाज मंडी और उसके आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों के लिए आज का दिन एक बड़ी राहत लेकर आया है। पिछले तीस वर्षों से इस क्षेत्र के लोग खारे पानी की समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन अब उनका मीठे पानी का इंतजार खत्म होने जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के प्रयासों से आज इस बहुप्रतीक्षित पेयजल परियोजना का विधिवत काम शुरू कर दिया गया है। मंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर न केवल प्रशासनिक मंजूरी दिलाई, बल्कि इसके लिए जमीन का आवंटन भी सुनिश्चित कराया।
इस नई परियोजना के तहत अनाज मंडी के गेट नंबर दो के पास आवंटित की गई तीन सौ दो गज जमीन पर तीन लाख पच्चीस हजार आठ सौ पचास लीटर क्षमता का एक आधुनिक बूस्टर और क्लोरीन बूस्टर प्लांट तैयार किया जा रहा है। सरकार इस पूरे काम पर एक करोड़ पांच लाख रुपये खर्च कर रही है। इस परियोजना के पूरा होने से नई अनाज मंडी के व्यापारियों के साथ-साथ नारनौल रोड अंडरपास, कनीना रोड और आसपास के क्षेत्रों की करीब 2800 की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य को पूरी तेजी से चलाया जाएगा और आगामी डेढ़ महीने के भीतर इस पूरे इलाके में मीठे पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएगी।
इस शुरुआत से स्थानीय निवासियों और मंडी के व्यापारियों में भारी उत्साह है और उन्होंने इस जनहित कार्य के लिए सरकार और मंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।
हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा को लेकर डीसी अनुपमा अंजली ने ली बैठक
-जिले में कुल 22 परीक्षा केंद्र बनाए गए, फ्लाइंग स्क्वाड का गठन
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कनीना की आवाज। मुख्यमंत्री के निर्देश अनुसार हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट)-2025 के सफल और पारदर्शी संचालन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इस परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। यह निर्देश उपायुक्त अनुपमा अंजली ने मंगलवार को लघु सचिवालय में ड्यूटी मजिस्ट्रेट, सेंटर सुपरवाइजर तथा अधिकारियों की एक बैठक में दिए।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने निर्देश दिए कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और नकल रहित माहौल में संपन्न करवाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उपायुक्त ने बताया कि आगामी 4 और 5 जुलाई को आयोजित होने वाली इस परीक्षा के लिए महेंद्रगढ़ जिले में कुल 22 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें उपमंडल नारनौल में 7 और उपमंडल महेंद्रगढ़ में 15 केंद्र शामिल हैं। परीक्षा केंद्रों के औचक निरीक्षण के लिए फ्लाइंग स्क्वाड (उडऩदस्ते) का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि लेवल 3 की परीक्षा 4 जुलाई को दोपहर बाद 3 से शाम 5 बजकर 30 मिनट तक होगी। लेवल 2 की परीक्षा 5 जुलाई को सुबह 10 से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक होगी। लेवल 1 की परीक्षा 5 जुलाई को ही दोपहर 3 से शाम 5 बजकर 30 मिनट तक संचालित की जाएगी। नारनौल उपमंडल में केवल लेवल 2 की परीक्षा आयोजित की जाएगी बाकी परीक्षाएं महेंद्रगढ़ उप मंडल में होंगी। नेत्रहीन और दिव्यांग अभ्यर्थी जो लिखने में असमर्थ हैं, उन्हें परीक्षा में 20 मिनट प्रति घंटा के हिसाब से कुल 50 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों की एंट्री सुबह की शिफ्ट में 7.50 तथा शाम की शिफ्ट में 12.50 पर शुरू हो जाएगी।
इस बैठक में पुलिस अधीक्षक दीपक, एसडीएम नारनौल अनिरुद्ध यादव, एसडीएम महेंद्रगढ़ योगेश सैनी, सीईओ जिला परिषद निर्मल नगर, सीटीएम डॉ मंगल सेन तथा जिला शिक्षा अधिकारी विश्वेश्वर कुमार शर्मा के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे।
महिला परीक्षार्थियों को मंगलसूत्र बिंदी व सिंदूर की अनुमति, अन्य आभूषणों पर रहेगा प्रतिबंध-
सिख अभ्यर्थियों को धार्मिक आस्था के प्रतीक ले जाने की अनुमति।
महिला परीक्षार्थियों को मंगलसूत्र पहनने, बिन्दी व सिंदूर लगाने की छूट होगी। अन्य किसी प्रकार की कोई भी चीज जैसे अंगूठी, चैन, बालियां आदि पहनने की अनुमति नहीं होगी। सिख परीक्षार्थियों को धार्मिक आस्था के चिन्ह ले जाने की अनुमति होगी।
फोटो कैप्शन 05: एचटेट को लेकर अधिकारियों की बैठक लेती डीसी अनुपमा अंजली।
इसराना के आशीष ने राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक, क्षेत्र में खुशी की लहर
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कनीना की आवाज। उप मंडल के गांव इसराना के खिलाड़ी आशीष ने पुणे स्थित सीएमई नोड में आयोजित अंडर-23 राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप में सर्विसेज टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
आशीष के पिता ओम पाल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में आशीष 4 राजपूताना राइफल्स में सेवाएं दे रहा हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी सफलता को क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है। ग्रामीणों एवं खेल प्रेमियों ने आशीष को इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। सभी ने विश्वास जताया कि आशीष आगामी एशियन रोइंग चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन कर भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगे।
इसराना की ढाणी सरपंच यशवंती देवी ने कहा कि खेलों में लगातार मिल रही, ऐसी सफलताएं युवा खिलाडिय़ों को आगे बढऩे की प्रेरणा देती हैं। आशीष की उपलब्धि से महेंद्रगढ़ जिले में खेल प्रतिभाओं का मनोबल और अधिक बढ़ेगा। खिलाड़ी आशीष के पिता ओमपाल सिंह खेती-बाड़ी का काम करते हैं वहीं उनकी मां ग्रहणी है। दो बहन प्रियंका और मोनिका है। वो कालेज की पढ़ाई कर रही है। आशीष को दादी कृष्णा देवी, ताऊ पृथ्वी सिंह, मौसी बबली देवी, चचेरे भाई विकाश, ज्ञानेंद्र, सतीश , संजय, संदीप, राजबीर सिंह दादा का भाई, पूर्व सरपंच विजेंद्र सिंह, समाजसेवी मोहित शर्मा, अतर सिंह, श्रीगौड़ सभा के उप प्रधान बुद्धि प्रकाश शर्मा, पूर्व सरपंच राजेश शर्मा सहित अन्य लोगों ने बधाई दी है ।
फोटो कैप्शन 04: पदक दिखाते हुए आशीष कुमार
गैर सरकारी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण- अतरलाल
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कनीना की आवाज। ग्रामीण विकास में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह समाज के लोगों को एकजुट कर बच्चों, युवा, महिला, अनुसूचित, पिछड़ा तथा गरीब लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का सामाजिक अभियान है। ऐसे गैर सरकारी संगठनों में लोगों को बढ़-चढ़ कर भाग लेना चाहिए।
ये विचार बसपा नेता अतरलाल ने कनीना खंड के गांव पड़तल में बनारसी देवी सेवा फाउंडेशन के शुभारम्भ अवसर पर लोगों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने रिबन काटकर फाउंडेशन का शुभारम्भ किया। फाउंडेशन के संयोजक राजेश चैधरी ने कहा कि इसके माध्यम से गरीब, बच्चों, युवा, महिलाओं को खेल, शिक्षा रोजगार, चिकित्सा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्वच्छता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। फाउंडेशन की स्थापना लोगों की कठिनाई व समस्याओं को दूर करने के लिए ही की गई है। इस अवसर पर मुकेश देवी, भागसिंह चेयरमैन, कैलाश सेठ, अंजू, रामेश्वर दयाल, अजय कुमार, रणजीत, हरकेश, दलीपसिंह, रोहताश यादव, सुनिल पंच, सतेन्द्र, धर्मपाल, राकेश यादव ने फाउंडेशन स्थापित करने के लिए संयोजक राजेश चौधरी को शुभकामनाएं देते हुए फाउंडेशन की सफलता की कामना की।
फोटो कैप्शन 02: पड़तल में रिबन काटकर फाउंडेशन का शुभारम्भ करते बसपा नेता
तीन लोगों पर मारपीट का मामला दर्ज
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कनीना की आवाज। कनीना उप मंडल के गांव सीहोर के एक युवक ने तीन लोगों पर उनके साथ मारपीट के जाने का मामला दर्ज करवाया है।
कनीना पुलिस में दी शिकायत में जतिन सीहोर ने कहा है कि 25 जून को शाम 6 बजे वह तथा योगेंद्र सिहोर अपने-अपने घर से दौडऩे का अभ्यास के लिए सिहोर के गांव के मैदान की तरफ जा रहे थे। पीछे से दो बोलोरो गाड़ी आई जिनमें 18 से 20 लड़के निकले। उनके हाथों में लोहे के पाइप, लाठी और डंडे थे। रास्ता रोककर उन्होंने मार पिटाई की। उनमें से एक लड़का संदीप, दूसरा सोमवीर, तीसरा दिनेश स्वामी को वह जानता है। गाडिय़ों के नंबर भी उन्होंने नोट किए। मारपीट करके सभी फरार हो गए। योगेश को काफी चोटें आई। जतिन को उनके स्वजन सरकारी अस्पताल महेंद्रगढ़ ले गए। अभी भी उनका इलाज महेंद्रगढ़ से चल रहा है जबकि योगेश का परिवार इलाज के लिए कनीना सरकारी अस्पताल ले जाया गया। उनके बयान पर तीन नामजद और अन्य लोगों पर मारपीट का मामला दर्ज कर लिया। कनीना पुलिस ने बीएनएस की धारा 115/126/190/191(3)/351(3) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
सीईओ जिला परिषद निर्मल नागर ने ली किसान उत्पादक संगठनों की बैठक
-एफपीओ से सशक्त होंगे किसान : निर्मल नागर
-2 करोड रुपए तक की क्रेडिट गारंटी दे रही सरकार
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कनीना की आवाज। प्रदेश सरकार किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के विजन को आगे बढ़ाते हुए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन कर रही है । जिला महेंद्रगढ़ में अब तक 8 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन कर हजारों किसानों को इससे जोड़ा जा चुका है। अधिकारी जिला के और किसानों को इससे जोड़ें। ये निर्देश सीईओ जिला परिषद निर्मल नागर ने आज लघु सचिवालय में आयोजित जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में दिए।
सीईओ ने बताया कि ये एफपीओ क्षेत्र के अन्नदाताओं के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इन संगठनों से जुड़कर किसान न केवल बिचौलियों के चंगुल से मुक्त हो रहे हैं बल्कि उन्हें अपनी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत सर्वश्रेष्ठ दाम मिल रहा है। उपायुक्त ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि एफपीओ प्रबंधन के लिए मिलने वाली 18 लाख रुपए की वित्तीय सहायता राशि का उपयोग अब पांच साल की लंबी अवधि के भीतर सुविधानुसार किया जा सकता है।किसानों के इन समूहों को बिना किसी परेशानी के बैंकों से संस्थागत ऋण मिल सके, इसके लिए सरकार द्वारा पात्र बैंकों के माध्यम से 2 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट गारंटी सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अलावा अब प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसी) को भी इस योजना के तहत क्रेडिट गारंटी सुविधा का सीधा लाभ उठाने के लिए एफपीओ के बिल्कुल समकक्ष दर्जा दे दिया गया है।
सीईओ ने सभी क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठनों (सीबीबीओ) और एफपीओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ पूरी ईमानदारी से काम करें तथा सीबीबीओ जल्द से जल्द जिला या ब्लॉक मुख्यालय पर अपने स्थायी कार्यालय स्थापित करें।
इस मौके पर डीडीए डा. देवेंद्र सिंह तथा डीएचओ प्रेम कुमार के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद है।
फोटो कैप्शन 03: किसान उत्पादक संगठनों की बैठक लेते सीईओ जिला परिषद निर्मल नागर।
हंसना,हंसाना एक कला है- अमृत सिंह
विश्व मजाक दिवस -1 जुलाई
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कनीना की आवाज। हंसना और हंसाना दोनों कला हैं। यदि इंसान हंसना जानता है तो समझो उसके सभी रोग दूर हो जाते हैं। सभी अंग प्रफुल्लित हो जाते हैं और हंसाना भी एक कला है। हंसने एवं हंसाने के लिए अनेकों तरीके अपनाए जाते हैं किंतु सबसे आसान तरीका है जोक्स सुनाना। कुछ लोग बातें इस प्रकार से करते हैं कि उनकी हर बात में अंदाज हंसाने वाला होता है।
अक्सर खुशी के अवसर पर विभिन्न प्रकार के चुटकुले जोक्स सुनाएं जाते हैं। जोक्स एक अच्छी दवा है इसलिए आसपास के लोगों के चुटकुले सुनाकर जोर से हंसाना चाहिए। एक चुटकुला प्रतियोगिता भी आयोजित होना चाहिए ताकि हंसते रहे। जितनी देर हंसा जाए उतना ही लाभ होगा। बाबा रामदेव तो हंसने पर जोर देते हैं और कहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा हंसने से लाभ होता है। इसी प्रकार डाक्टर भी मानते हैं की हंसी खुशी से इंसान स्वस्थ रहता है। इस संबंध में कुछ गुदगुदाने वाले और हंसाने वाले लोगों से चर्चा की गई।
**हंसना बड़ी कला है। कई बार इस प्रकार से चुटकुले और जोक्स पेश किए जाते हैं कि अगला व्यक्ति हंसने को मजबूर हो जाता है। चुटकुला प्रतियोगिता भी आयोजित होनी चाहिए ताकि इस बहाने लोग हंस भी सके और अव्वल रहे चुटकुले को पुरस्कृत भी किया जाना चाहिए। चुटकुले वाली किताबें पढ़े और पसंदीदा चुटकुलों को परिवार दोस्तों के साथ साझा करना चाहिए। हंसना बहुत बड़ी कला है।
-- सूबे सिंह शिक्षक एवं जोक्स में माहिर
शिक्षण कार्य और रागिनी के लिए जाने जाने वाले अमृत सिंह का कहना है कि वे दिन रात हंसाने की कला एवं तरीके सोचते रहते हैं कि सि प्रकार दर्शकों को हंसाया जाए। अक्सर रागिनी से पहले उनको हंसाया जाता है ताकि रागिनी पर अच्छी प्रकार ध्यान दें। विद्यार्थियों को भी पढ़ते समय बीच-बीच में हंसाना चाहिए ताकि पढ़ाई की निरसता दूर की जा सके। जोक्स अच्छी कला है और उसे कहने का अंदाज अच्छा हो तो सभी लोग हंसने को मजबूर हो जाते हैं। हंसाने में बहुत सोच विचार कर और अच्छी बातें एवं सामाजिक बातें ही बोलनी चाहिए ताकि माहौल बेहतरीन बन सके। परिवार के लोग भी बैठे होते हैं तथा छोटे-बड़े सभी बैठे होते हैं। इसलिए जोक्स ऐसे हो ताकि हर इंसान को गुदगुदाने के लिए मजबूर कर दे। हंसाना लंबे समय तक अभ्यास करने के बाद कला हासिल हो सकती है। यह कला शुद्ध भारतीय कला है और इससे हर इंसान को हंसाया जा सकता है।
-- अमृत सिंह शिक्षक एवं रागिनी गायक, हंसाने में मशहूर
फोटो कैप्शन: सूबे सिंह, अमृत सिंह
चिकित्सा दिवस-1 जुलाई
प्राइवेट अस्पतालों के कारण मरीजों के दिल में डाक्टरों के प्रति आदर भाव घटा
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कनीना की आवाज। एक वक्त था जब डाक्टर को मरीज भगवान समझते थे। कई बार तो उसकी पूजा अर्चना भी करते थे। डाक्टर आने पर यह समझते थे अब मरीज की जान बच जाएगी किंतु दिनों दिन आबादी बढ़ गई, डाक्टरों की संख्या भी बढ़ गई और निजी अस्पताल भी बढ़ गए जिसके कारण मरीज और आम आदमी के दिल में पहले वाला आदर भाव नहीं रहा। इस संबंध में कनीना उप-नागरिक अस्पताल से विभिन्न डाक्टरों से उनके विचार जाने गये। जिनके विचार निम्न हैं-
नैतिक मूल्य गिर रहे हैं वहीं पढ़ाई महंगी हो गई इसलिए डाक्टरों का एक ही उद्देश्य होता है अधिक से अधिक पैसे कमाए जाए। वहीं उपभोक्ता भी जागरूक हो गए हैं। वे सरकारी डाक्टरों को तो अपना नौकर समझते हैं। इस वजह से उनके दिल में आदर भाव घटा है। वही निजी अस्पतालों में अधिक पैसे मिलते हैं इसलिए डाक्टर अधिक पैसे कमाने के चक्कर में निजी अस्पताल में चले जाते हैं और नैतिकता में गिरावट आना स्वाभाविक है। इसलिए आदर भाव कम होता जा रहा है जिसे दूसरा भगवान मानते थे अब ऐसा भाव दिल से घट गया है।
- डा. जितेंद्र मोरवाल चिकित्सक,कनीना
यह तो अपने-अपने देखने का नजरिया है। जहां पुराने समय में इलाज सस्ता था वहीं मरीज कम थे। 10 से 15 मरीज पूरे गांव में होते थे वहीं मरीजों को अधिक समय दे पाते थे। परंतु अब बीमारी व मरीज बढ़ गए हैं। डाक्टर इतने बढ़े नहीं इसलिए इस समय में जो समय 20 मरीजों को देखने में लगता था अब उसी समय में डेढ़ सौ मरीजों को देखा जाता है। रही इलाज महंगा हो गया, खर्च बढ़ गए हैं। डाक्टर प्राइवेट बनते जा रहे हैं। छोटे-छोटे क्लीनिक में सस्ते में इलाज करते हैं और जब मरीज बड़े अस्पताल में चले जाते हैं तो उनका इलाज बहुत महंगा होता है जिसके कारण डाक्टर को उस भाव से नहीं देख पाते जो पहले था।
-डा. विनय कुमार शर्मा उप-नागरिक अस्पताल, कनीना
फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल, डा. विनय कुमार शमा
राष्ट्रीय डाक सेवक दिवस-एक जुलाई
-साइकिल पर प्रतिदिन 20 किलोमीटर सफर तय करना होता है पोस्टमैन को
- घर घर जाकर बांटनी होती है डाक-राजेंद्र सिंह
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कनीना की आवाज। कनीना उप-डाकघर के राजेंद्र सिंह पूर्व पोस्टमैन का कहना है कि साइकिल पर 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके डाक वितरण का काम करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में लोग घरों में छिपे हुए थे तब भी पोस्टमैन घर घर जा रहे थे और डाक बांटने का कार्य कर रहे थे। उन्होंने कड़ी धूप में डाक बांटने का काम किया है। आज भी यही जिम्मेदारी पोस्टमैन की है। कभी डाक अधिक आती थी किंतु अब डाक कम आने लगी है।
एक और जहां कोरोना काल में भी उन्होंने कोरोना से कभी नहीं डरे कोरोना योद्धा के रूप में कार्य किया है वही हमेशा साइकिल पर ही डाक वितरण करते रहे हैं।
पोस्टमैन की तैनाती कठिन है। राजेंद्र पोस्टमैन बताते हैं कि सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक तैनाती देते थे। यहां तक कि कम से कम प्रतिदिन 100 लोगों से मिलते थे और 20 किलोमीटर दूरी प्रतिदिन साइकिल से तय करते रहे हैं।
उन्हें कम से कम सैकड़ों लोगों से उस वक्त मिलना पड़ता था जब उनकी डाक देकर हस्ताक्षर आदि करवाकर लाने पड़ते थे। ऐसे में पोस्टमैन को कड़ी मेहनत और बुरे वक्त के दौर में भी सेवा निभानी पड़ी है। सरकार ने राजेंद्र सिंह को बेहतर सेवाओं के चलते सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा का मौका दिया है।
फोटो कैप्शन: पोस्टमैन राजेंद्र सिंह डाक बांटते हुए।
पर्यावरण प्रेमी ऋषिराज आर्य ने मृत गौरैया को दफनाकर दी श्रद्धांजलि, पक्षी संरक्षण का दिया संदेश
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कनीना की आवाज। प्रकृति और पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब पर्यावरण प्रेमी ऋषिराज आर्य ने अपने निजी फार्म शंकर गिरी दास महाराज फार्म पर मृत मिली एक गौरैया को सम्मानपूर्वक दफनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने सभी से प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील भी की।
ऋषिराज आर्य ने बताया कि उनके निजी फार्म पर 100 से अधिक गौरैया नियमित रूप से रहती हैं। इसके अलावा अन्य कई प्रजातियों के पक्षी भी प्रतिदिन यहां आते हैं। पक्षियों के लिए फार्म पर स्वच्छ पानी, दाना और सुरक्षित वातावरण की विशेष व्यवस्था की गई है। वे स्वयं प्रतिदिन उनके भोजन और पानी की व्यवस्था का निरीक्षण करते हैं, जिससे किसी भी पक्षी को भोजन या पानी की कमी न हो।
उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरण, शहरीकरण और पेड़ों की लगातार कटाई के कारण गौरैया सहित कई पक्षियों की संख्या में कमी देखी जा रही है। ऐसे समय में यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, खेत, बगीचे या छत पर पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करे तथा पेड़-पौधों का संरक्षण करे, तो इन नन्हे जीवों को सुरक्षित आश्रय मिल सकता है।
ऋषिराज आर्य ने कहा कि प्रत्येक जीव का अपना महत्व होता है। किसी भी पक्षी या जीव की मृत्यु केवल एक जीवन का अंत नहीं, बल्कि हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी एहसास कराती है। मृत गौरैया को दफनाकर श्रद्धांजलि देना उनके लिए केवल एक भावनात्मक क्षण नहीं था, बल्कि सभी जीवों के प्रति सम्मान और करुणा व्यक्त करने का एक छोटा-सा प्रयास भी था।
उन्होंने लोगों से अपील की कि गर्मी के मौसम में अपने घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी के पात्र रखें, नियमित रूप से दाना डालें और ऐसे वातावरण का निर्माण करें जहां पक्षी सुरक्षित होकर अपना जीवन व्यतीत कर सकें। प्रकृति के प्रति यही संवेदनशीलता भविष्य की पीढिय़ों के लिए स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित कर सकती है।
फोटो कैप्शन 01: गौरैया को मिट्टी देकर श्रद्धांजलि देते हुए
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