फर्जी बीमा अधिकारी बन व्यक्ति से ऐंठी मोटी रकम
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कनीना की आवाज। कनीना में फर्जी बीमा एजेंट बनकर एक व्यक्ति से 10,000 रुपए लेने का मामला सामने आया है। देवेंद्र वासी लिसान ने बताया कि मेरे पास एक ट्रैक्टर है जिसका बीमा करवाने के लिए जो मनोज कुमार वासी मोहनपुर से संपर्क किया तो उसने बताया कि वह बीमा एजेंट है उसने स्वयं की दुकान पूजा फिलिंग स्टेशन कनीना के पास पालिसी जंक्शन के नाम से बताई। पीडि़त ने 09 मई 2019 को मनोज को 10,000 रुपए बीमा के नाम के दिए और रिलायंस इंश्योरेंस का बीमा बता दिया गया। ट्रैक्टर का 28 अगस्त 2019 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया और घायल व्यक्ति ने दावा याचिका दायर की। बीमा अधिकारियों ने उपस्थित होकर बीमा को फर्जी करार दिया। उसके बाद ट्रैक्टर मालिक ने 80,0000 रुपए का भुगतान घायल व्यक्ति धर्मेंद्र बनाम देवेंद्र कालिया को दिया। उसके बाद पीडि़त ने 23 फरवरी 2026 को जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष मामला पेश किया। उसके उपरांत मामला कनीना थाना भेज दिया गया। यहां पर आपसी सहमति के पश्चात मामले को समाप्त करने और भरपाई होने की बात हुई थी लेकिन काफी दिन बीत जाने के बाद भी आज तक कोई सकारात्मक कारवाही ना होने के बाद दोबारा आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज करने की शिकायत दर्ज की गई है। पीडि़त ने पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। सदर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन गोवर्धन पूजा और रासलीला प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव विभोर
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कनीना की आवाज। गांव बाघोत में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन कथा पंडाल में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए गोवर्धन पूजा, इंद्र के अभिमान का हरण तथा महारास के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया कथाव्यास ने बताया कि जब ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की, तो देवराज इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलधार वर्षा शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। इस प्रसंग से भगवान ने यह संदेश दिया कि अहंकार का अंत निश्चित है तथा सच्चे भक्तों की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं।कथा में महारास का भावपूर्ण वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि रासलीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को प्रेम, समर्पण और भक्ति का मार्ग दिखाती हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर झूम उठे और पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंच रहे हैं। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर पंडित प्रेमदास की कुटिया बाघोत के श्रद्धालुओं सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 09:गोवर्धन पूजा एवं महारास प्रसंग का वर्णन करते कथा व्यास आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री
श्री सीताराम शिव मंदिर कमेटी ने लगाई मीठे पानी की छबील, राहगीरों की बुझाई प्यास
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कनीना की आवाज। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कनीना सदर थाना के समीप स्थित श्रीसीताराम शिव मंदिर कमेटी द्वारा मीठे पानी की छबील लगाई गई। छबील में बड़ी संख्या में लोगों ने शीतल जल ग्रहण कर गर्मी से राहत महसूस की। मंदिर कमेटी के प्रधान प्रदीप कुमार विशु ने बताया कि समिति द्वारा हर वर्ष गर्मी के मौसम में जनसेवा के तहत मीठे पानी की छबील लगाई जाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी राहगीरों, वाहन चालकों एवं आमजन के लिए शीतल जल की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में प्यासे लोगों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। उन्होंने बताया कि समिति केवल मानव सेवा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पक्षियों के संरक्षण के लिए भी विशेष प्रयास करती है। गर्मी शुरू होते ही शहर के विभिन्न स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी के पात्र रखे जाते हैं, जिनमें प्रतिदिन स्वच्छ एवं ताजा पानी भरा जाता है ताकि पक्षियों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे जितेंद्र बबलू ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल सेवा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में भी प्यासे को पानी पिलाने को श्रेष्ठ सेवा बताया गया है। उन्होंने लोगों से भी गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने छबील सेवा में सहयोग करते हुए समाज सेवा का संदेश दिया।
फोटो कैप्शन 10: कनीना में श्री सीताराम शिव मंदिर कमेटी द्वारा लगाई गई मीठे पानी की छबील
विश्व साइकिल दिवस-3 जून
साइकिल चलाने के क्षेत्र में विश्व रिकार्डधारी हैं डा. होशियार सिंह
-प्रतिदिन 20-30 किलोमीटर दूरी करते हैं तय
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कनीना की आवाज। वैसे तो प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार प्रदूषण रोकने पर बल दे रही है किंतु कनीना निवासी एवं पूर्व विज्ञान अध्यापक डा. होशियार सिंह 41 सालों से लगातार साइकिल चला रहे हैं और स्कूल भी साइकिल से जाते रहे हैं। वे साइकिल से ही दैनिक जीवन के कार्य करते हैं। उनके पास किसी प्रकार की कोई बाइक आदि नहीं है। कहीं भी 10 से 15 किमी दूर किसी कार्य में के लिए जाना हो तो साइकिल ही प्रयोग करते हैं और साइकिल मैन के रूप में एक उदाहरण बन गये हैं। समय-समय पर विभिन्न संस्थाएं उन्हें सबसे लंबे समय तक साइकिल चलाने के कारण सम्मानित करने की बात तो कर रहे हैं किंतु कभी उन्होंने तो सरकार द्वारा और ना ही किसी संस्था द्वारा सम्मानित किया गया है। विश्व रिकार्ड में नाम गत वर्ष जरूर दर्ज करवाया था।
होशियार सिंह कनीना निवासी ने 1985 में साइकिल चलानी शुरू की थी किंतु नियमित रूप से 1987 से साइकिल चला रहे हैं। शिक्षक दौरान कम से कम 25 विभिन्न स्कूलों में उनकी बदली हुई किंतु कभी भी उन्होंने नजदीक स्टेशनों पर वाहन प्रयोग नहीं किया व साइकिल से ही सफर तय करते रहे। चाहे स्कूल जाना हो, चाय सब्जी खरीदनी घरेलू कार्य करना हो सभी कार्य साइकिल से करते हैं। बार-बार लोगों ने बाइक खरीदने की सलाह देते हैं किंतु उनका कहना है कि उनके शरीर का स्वास्थ्य और पैरों की कसरत होने के कारण ही साइकिल चला रहा है।
40 बार कर चुके हैं पैदल यात्रा-
यही नहीं अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अब तक 17 बार पैदल हरिद्वार से कावड़ तथा इतनी ही बार कनीना से खाटू श्याम पदयात्रा पर ध्वज लेकर जा चुके हैं। छह बार कनीना से जैतपुर, एक बार कनीना से नांधा बलवाड़ी, कनीना से माता मंदिर महासर, कनीना से भैरूं का बास पैदल यात्रा की है। एक अगस्त 2026 को हरिद्वार से कांवड़ लाने जाएंगे। जो भी कहीं उन्हें कोई काम हो तो साइकिल ही या पैदल चलना ही उन्हें पसंद है। विज्ञान के शिक्षकों होने के कारण वे प्रदूषण के विषय में जहां स्कूल दौरान विद्यार्थियों को हर समय जानकारी देते रहते हैं वहीं विद्यार्थियों को भी साइकिल पर चलने की सलाह देते थे। यद्यपि कुछ देशों में साइकिल चलाने वालों को सरकार प्रोत्साहित कर रही है किंतु उन्हें साइकिल चलाने के लंबे अरसे के बाद भी किसी प्रकार का कोई प्रोत्साहन तथा प्रशंसा पत्र भी नहीं मिला है जिसके कारण वे मायूस हैं। उन्होंने बताया कि कड़ी सर्दी तथा भीषण गर्मी में भी वे साइकिल चलाते रहे हैं। साइकिल चलाने से जहां उन्हें नींद अच्छी आती है।
43 पुस्तकों की रचना की-
डा. होशियार सिंह लंबे समय से लेखन कार्य से जुड़े होने के कारण अब तक उनकी 43 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और किसी भी फोटो वगैराह लेने के लिए भी साइकिल पर ही जाते हैं। लोग उन्हें साहित्यकार के नाम से जानते हैं। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो उनकी साइकिल चलाने की अदा को नहीं जानता हो। डा.होशियार सिंह के लंबे समय से साइकिल चलाने के कारण उन्हें सम्मानित करने की मांग सरकार से की है।
क्या कहते हैं होशियार सिंह -
होशियार सिंह पूर्व विज्ञान अध्यापक का कहना है कि साइकिल उनके स्वास्थ्य को ठीक रखने में अहम भूमिका निभाती है। यही कारण है की गर्मी सर्दी में जब भी कहीं जाना हो साइकिल पर ही चलते हैं। उन्हें साइकिल बेहद पसंद है। कभी 500 रुपये में साइकिल खरीदी थी किंतु आज साइकिल कीमत 4500 रुपये से अधिक पहुंच गई है। वे साधारण साइकिल रखते हैं किंतु साइकिल 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाकर स्कूल जाते थे। उन्हें चाहे विद्यार्थी शिक्षक तथा कुछ लोग साइकिल पर देखना पसंद नहीं करते किंतु उनको साइकिल चलाने में जो आनंद आता है उसे वो स्वयं बयां कर रहे हैं।
लेखन के क्षेत्र में हो चुके हैं सम्मानित-
बतौर लेखक हरियाणा साहित्य अकादमी, हरियाणा के राज्यपाल सहित सैकड़ों संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। हजारों की संख्या में लेखन कार्य में उपलब्धियां के प्रशस्ति पत्र मिले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि उनकी पत्नी आशा यादव तथा पुत्र अमीश कुमार भी लेखन के क्षेत्र में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित हो चुके हैं और उनकी भी पांच-पांच कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं।
राज्य शिक्षक पुरस्कार से हैं सम्मानित-
डा होशियार सिंह हरियाणा सरकार द्वारा राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित हैं। राज्यपाल द्वारा उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 2022 में मिला था। शिक्षा के क्षेत्र में भी अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं।
पर्यावरण प्रेमी हैं डा.साहब-
डा होशियार सिंह पर्यावरण से अति लगाव रखते हेें। अपने घर एवं पलट पर सैकड़ों पौधे लगा रखे हैं जिनकी प्रतिदिन समय निकाल कर सेवा करते हैं। पर्यावरण मित्र बतौर भी उन्हें सम्मान मिल चुके हैं। उनका कहना है कि समय रहते सभी को साइकिल प्रयोग करनी चाहिए। इससे देश का ईंधन भी बचेगा तथा सेहत भी बनी रहेगी।
फोटो कैप्शन 01: साइकिल चलाता हुआ पूर्व विज्ञान अध्यापक डा होशियार सिंह।
विश्व साइकिल दिवस
57 वर्षों से सुरेश कुमार लगा रहे हैं पंचर
-1969 में अधिकतम कमा लेते थे 4 रुपये
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कनीना की आवाज। 67 वर्षीय सुरेश कुमार भडफ़ निवासी ने अपनी 10 वर्ष की उम्र में साइकिल पंचर लगाने शुरू किए थे और आज 65 वर्ष की उम्र में भी पंचर लगा रहे हैं। उन्होंने साइकिलों का वह दौर देखा है जब एक साइकिल की कीमत 60 से 100 रुपये की होती थी। उस जमाने में साइकिल का क्रेज होता था। उन्होंने बहादुरगढ़, हरियाणा में अपनी पंचर की छोटे से पंप से दुकान शुरू की थी और आज कनीना में पंचर की दुकान लगाकर अपनी रोटी रोटी कमा रहे हैं।
सुरेश कुमार से संबंध में बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह अधिकतम 4 रुपये कमा लेते थे जिसमें से एक रुपये स्टेट बैंक में खाते में जमा कर देते थे और महीने के 30 से 40 रुपये बचाकर शानदार जीवन जी रहे थे। एक दिन इतने पैसों का उसके पिता को पता चला तो उन पैसों से उनके लिए पंखा एवं घरेलू सामान खरीद कर लाये। सुरेश कुमार ने तीन-चार जमात पास की थी किंतु परिवार की आर्थिक हालात अच्छी न होने के कारण इस काम में जुट गए। वो बताते हैं कि एक हवा भरने का पंप खरीदा और काम शुरू कर दिया। 10 पैसे में पंचर लगाया जाता था। लगातार मेहनत करते थे। उस जमाने में इतने साइकिल सवार होते थे कि पंचर लगवाने वाले कतारबद्ध खड़े होते थे। उस वक्त साइकिल में हवा भरने का काम भी पंचर लगाने वाला ही करता था। यही कारण है कि दिन में 40 से 50 तक पंचर लगा पाते थे इसके अतिरिक्त साइकिल ठीक करने का काम भी करते थे जिनका अलग से चार्ज लेते थे। उस जमाने में जो साइकिल होती थी वह स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर मानी जाती थी। इंसान सभी कार्य साइकिल से करता था। मामूली सा खर्चा और सेहत के लिए लाभप्रद होने के कारण गरीब जन भी प्रयोग करते थे। धीरे-धीरे समय बदला और सुरेश कुमार 1994 में कनीना आ पहुंचे और साइकिल के पंचर लगाने का काम शुरू किया। वो बताते हैं कि वर्तमान में साइकिल इतनी कम हो गई है कि अधिकतम 10 पंचर लगा पाते हैं। वर्तमान में छोटे बच्चों की साइकिल का क्रेज बढ़ गया है। धनवान लोग साइकिल कम चलाते हैं, आज के दिन कम से कम 4200 की साइकिल आती है और अधिकतम हीरो की इलेक्ट्रानिक साइकिल 35000 हजार रुपये की आती है।
सुरेश कुमार बताते हैं कि एक इंसान जब अपने काम के प्रति समर्पित होता है तो निश्चित ही सफलता मिलती है। सुरेश कुमार काम के प्रति इतने समर्पित रहे कि आज भी दूर आज तक नाम है। यह ठीक है कि आज के युग में युवा पीढ़ी साइकिलों की तरफ कम मोटरसाइकिल को अधिक पसंद करती है। सड़क पर साइकिल चलाने वाले गरीब माने जाते हैं जबकि गाडिय़ों में चलने वाले लोग अमीर माने जाते हैं। उनका कहना है कि विदेश में इससे उलटा है। अमीर व्यक्ति अपनी सेहत के लिए साइकिल चलाते हैं। वैसे भी सरकार साइकिल चलाने वालों के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं देती। इस बात का गम है। अगर साइकिल के प्रति सरकार विशेष प्रोत्साहन दे तो निसंदेह बहुत से लोग साइकिल चलाना शुरू कर देंगे। यह सत्य है कि शिक्षा विभाग ने छात्राओं के लिए जो दूर से आती है साइकिल मुफ्त देने का प्रावधान कर रखा है परंतु अच्छे दर्जे की साइकिल उन्हें भी नहीं मिल पाती।
साइकिल लगातार प्रयोग करें तो आदमी न तो बूढ़ा होता न ही पैरों की समस्या होगी। उनका कहना है कि आज के दिन हुए 2000 रुपये तक कमा लेते हैं फिर भी उसे जमाने के चार रुपए के मुकाबले कम हैं और वो खुशी नहीं मिल रही है।
कनीना क्षेत्र में अगर साइकिल चलाने वाले देखे जाए तो अधिकतम पांच व्यक्ति 20 सालों से अधिक वर्षों से साइकिल चला रहे हैं। आधुनिक युवा पीढ़ी अगर साइकिल चलाती है तो विशेष प्रकार की साइकिल प्रयोग करती है। साइकिल की कीमत अधिक है। ऐसे में सरकार को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और कम से कम सप्ताह में एक दिन सभी वाहन चालक घर पर और आसपास साइकिल प्रयोग करें तो ऊर्जा की भी बचत हो सकती है। साइकिल चलाने वालों को समय-समय पर सम्मानित किया जाना चाहिए। वैसे तो साइकिल यूपी में चुनाव चिन्ह भी नेताओं का है किंतु हरियाणा में साइकिल चलाने वाले का क्रेज घटना ही जा रहा है। आने वाले समय में शायद विश्वास नहीं करेंगे कि हजारों की संख्या में लोग साइकिल चलते थे।
फोटो कैप्शन: सुरेश कुमार की फोटो साथ में
फोटो कैप्शन 08: साइकिल के पंचर लगता हुआ सुरेश कुमार
सड़क दुर्घटना में आमने सामने की टक्कर में युवक की दर्दनाक मौत।
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कनीना की आवाज। कनीना में गाहड़ा-बव्वा रोड पर सोमवार शाम को बुलेट सवार युवक की मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार नीरज वासी बब्बा अपनी मोटर साइकिल पर सवार होकर किसी काम से बाहर जा रहा था। तभी सामने से एक बाइक ने टक्कर मार दी और फरार हो गया । टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार बुरी तरह घायल हो गया। घायल को तुरंत उप नागरिक अस्पताल कनीना लेकर आए। लेकिन डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मंगलवार को मृतक का कनीना में पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संघर्ष, सेवा और मानवता की मिसाल बने पवन राठौड़ मोड़ी
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कनीना की आवाज। महेंद्रगढ़ जिले के गांव मोड़ी निवासी समाजसेवी पवन कुमार राठौड़ आज सेवा, संघर्ष और मानवता के प्रतीक बन चुके हैं। 2 जनवरी 1985 को जन्मे पवन राठौड़ ने साधारण परिवार में जन्म लेकर कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी पहचान बनाई। सरकारी विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने गुरुग्राम, दिल्ली और एनसीआर में कंप्यूटर, मार्केटिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंस्टालेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 20 वर्षों तक कार्य किया।
समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए उन्होंने आईसीटीएम सोशल फाउंडेशन की स्थापना की। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण और मानव सेवा के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर शिक्षा, जरूरतमंद बच्चों की सहायता, पौधारोपण और पशु-पक्षी संरक्षण जैसे अनेक जनहितकारी अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
कोरोना महामारी के दौरान पवन राठौड़ और उनकी टीम ने जरूरतमंद परिवारों तक राशन एवं आवश्यक सामग्री पहुंचाकर मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी सेवा भावना के तहत वर्ष 2020 में बेसहारा और असहाय लोगों के लिए आश्रय स्थल की शुरुआत की गई, जो आज शांति कुंज प्रभुजन निवास के रूप में संचालित हो रहा है।
संस्था अब तक 60 से अधिक बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ और लावारिस व्यक्तियों का उपचार करवाकर उन्हें उनके परिवारों से मिलवा चुकी है। इसके अलावा सामाजिक एवं पारिवारिक विवादों के समाधान में भी संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पवन राठौड़ का मानना है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है।उनका लक्ष्य भविष्य में आधुनिक अस्पताल, वृद्धाश्रम, महिला आश्रम, अनाथालय, पुनर्वास एवं कौशल विकास केंद्र स्थापित कर जरूरतमंद लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, सेवा भावना और सकारात्मक सोच से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
फोटो कैप्शन: पवन राठौड़
यूपीईएस देहरादून के छात्र पहुंचे बीएमडी फाउंडेशन कार्यालय
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कनीना की आवाज। सामाजिक संस्था बीएमडी फाउंडेशन के कनीना स्थित कार्यालय पर यूनिवर्सिटी आफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) देहरादून के छात्रों सामाजिक समर इंटर्नशिप के लिए आगमन हुआ। संस्थान ने उनकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूर्ण करवाते हुए इंटर्नशिप के बारे में जानकारी अवगत कराई। चेयरमैन लक्की राव सीगड़ा ने बताया कि फाउंडेशन का सामाजिक इंटर्नशिप कार्यक्रम न सिर्फ खुद के बारे में ज़्यादा जागरूक बनाएगा, बल्कि उन्हें समाज की भलाई के लिए असरदार काम करने के लिए प्रेरित भी करेगा। उन्होंने कहा कि अच्छी इंटर्नशिप उन जरुरी स्किल्स को डेवलप करने के लिए जरूरी हैं जो आपको क्लासरूम में नहीं मिल सकती। इंटर्नशिप सामाजिक मुद्दों को सुलझाने, बदलाव को बढ़ावा देने और लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने पर भी फोकस करती हैं।
चेयरमैन लक्की राव सीगड़ा ने बताया कि एनजीओ इंटर्नशिप छात्रों और युवाओं को सामाजिक कार्यों में योगदान देने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का एक बेहतरीन माध्यम है। यह युवाओं के विचारों को मजबूत करती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करती है।
गौरतलब हैं कि इस संस्था में विगत वर्ष विभिन्न संस्थाओं के छात्रों एवं युवाओं को सफलतापूर्वक सामाजिक इंटर्नशिप प्रदान कर चुके हैं।
फोटो कैप्शन 07: युवाओं का पंजीकरण करते हुए लक्कीराव
बाबा भैया सेवा दल 10वीं वर्षगांठ पर करेगा होनहार युवाओं एवं सेवानिवृत्त सम्मानित ग्रामवासियों का सम्मान
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कनीना की आवाज। उपमंडल के ग्राम ककराला की सामाजिक संस्था बाबा भैया सेवा दल अपनी स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आगामी 20 जून 2026 को बाबा भैया लाइब्रेरी परिसर में भव्य समारोह आयोजित करेगा। इस विशेष अवसर पर गाव के होनहार युवाओं तथा विभिन्न सेवा क्षेत्रों से सेवानिवृत्त सम्मानित ग्रामवासियों को सम्मानित किया जाएगा।
पिछले 10 वर्षों से बाबा भैया सेवा दल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता एवं जनसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था द्वारा संचालित बाबा भैया लाइब्रेरी क्षेत्र की एक प्रमुख अध्ययन केंद्र बन चुकी है।
संस्था द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से अब तक शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। इसमें अनेक परीक्षाएं उत्तीर्ण करने वाले युवा, विभिन्न प्रतियोगिताओं में चयनित प्रतिभागी, जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ी तथा अन्य उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले युवा शामिल किए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, संस्था द्वारा 19 जून 2016 से अब तक विभिन्न सेवा क्षेत्रों से सेवानिवृत्त हुए ग्रामीणों को भी समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इन दोनों सम्मान समारोहों के लिए संस्था ने आनलाइन नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक व्यक्ति अथवा उनके परिजन गूगल फार्म के माध्यम से नामांकन दर्ज कर सकते हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 10 जून 2026 निर्धारित की गई है।
फोटो कैप्शन 04: बाबा भैया सेवा दल के सदस्य ग्रामीणों को जागरूक करते हुए
विवाह की 25वीं वर्षगांठ पर गोशाला को 1 लाख का दिया सहयोग
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कनीना की आवाज। श्री कृष्ण गौशाला कनीना में अपनी वैवाहिक जीवन की रजत जयंती (25वीं वर्षगांठ) के शुभ अवसर पर सुरेंद्र कुमार ने गायों के लिए एक लाख रुपए का सहयोग दिया है।
इस अवसर पर सुरेंद्र कुमार ने गोशाला में सवामणी का आयोजन कर गोवंश की सेवा की। उनके साथ ही उनकी बुआ ने गोमाता के प्रति अपनी अथाह श्रद्धा व्यक्त करते हुए 75 किलोग्राम गेहूं का दान किया। गौवंश को ताजा तरबूज खिलाकर सभी ने गोसेवा का आनंद लिया।
श्री श्याम मंडल ने लगाई सवामणी-
गोसेवक श्री श्याम मंडल कनीना ने भी सवामणी का आयोजन कर गौशाला के लिए 11,000 रुपए का सहयोग दिया।
भगत सिंह प्रधान ने कहा कि जीवन के खुशी के विशेष अवसरों को गौसेवा से जोडऩा समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
इस अवसर पर गौशाला प्रधान भगत सिंह, मेजर दुलीचंद, प्रधान संदीप राठी, उपसचिव रामपाल, सुरेंद्र कुमार,महेंद्र साहब, सतनारायण गुप्ता, गुड्डू चौधरी, मुकेश बंसल, नवीन सिंगला, कपिल गर्ग, हंसराज गर्ग, पूनम गुप्ता आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 05: गोशाला में एक लाख का दान देते हुए
06: गोशाला में सवामणी लगाते श्री श्याम सेवक मंडल पदाधिकारी
भारत निर्माण युवा दल ने नशे के खिलाफ छेड़ी जंग
-भडफ़ में सात दिवसीय चरित्र निर्माण शिविर का आगाज
-प्रदेश के कई जिलों के युवा ले रहे भाग
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कनीना की आवाज। भारत निर्माण युवा दल हरियाणा की ओर से जिला के गांव भडफ़ में चलने वाले सात दिवसीय चरित्र निर्माण एवं प्रशिक्षण शिविर का सोमवार को वैदिक परंपराओं के अनुसार शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन मंगलवार का दिन भी बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक उत्थान को समर्पित रहा।
श्रीमदभागवत सेवा आश्रम के स्वामी समर्पणानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित हवन-यज्ञ के साथ शुरू हुए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का संचार करना है। इस कैंप में प्रदेश के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, नूंह और झज्जर जिलों से आए युवाओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस शिविर में वर्तमान में 50 विद्यार्थी, 20 वयस्क सहभागी और 10 प्रबंधन कार्यकर्ता सर्वांगीण विकास के इस कड़े अनुष्ठान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जहां उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक उत्थान पर विशेष बल दिया जा रहा है।
प्रतिदिन सुबह की शुरुआत योग, प्राणायाम और शारीरिक गतिविधियों से हो रही है, जिसके साथ ही युवाओं को आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जा रहे हैं ताकि वे आत्मनिर्भर और साहसी बन सकें।
भारत निर्माण युवा दल के संस्थापक अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह यादव ने इस अवसर पर युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी को सही दिशा और संस्कार मिल जाएं, तो वे राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े संवाहक बन सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, नशे की बढ़ती लत और सांस्कृतिक मूल्यों से विमुख होने को आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती बताया।
वहीं शिविर के वर्ग प्रमुख भगत सिंह कोठारी ने कहा कि भारत की महान ऋषि परंपरा और महापुरुषों का जीवन ही आज के भटके हुए युवाओं को सही मार्ग दिखा सकता है। इसी सोच के साथ शिविर में पारंपरिक जीवन पद्धति, ऋतु अनुकूल खान-पान और पारिवारिक मूल्यों पर गहन चर्चा की जा रही है।
डिजिटल युग की चुनौतियां और नशा मुक्त भारत का महासंकल्प--
आधुनिकता के इस दौर में यह शिविर केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समसामयिक विषयों को भी बेहद बारीकी से शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि शिविरार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और सोशल मीडिया के सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं से रूबरू कराया जा रहा है, ताकि वे तकनीक का उपयोग रचनात्मक कार्यों और शोध के लिए कर सकें। इसके साथ ही साइबर अपराध, आनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर भी युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। बौद्धिक सत्रों के तहत व्याख्यान, समूह चर्चा, प्रश्नोत्तरी और व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न जिलों से आए युवाओं में आपसी संवाद और सामूहिक नेतृत्व की भावना को सुदृढ़ किया जा रहा है।
शिविर में मौजूद सभी विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों और प्रबंधकों ने नशीले पदार्थों, जंक फूड और अन्य हानिकारक वस्तुओं के सेवन से दूर रहने का सामूहिक संकल्प लिया।
फोटो कैप्शन 02:हवन यज्ञ के साथ शिविर का शुभारंभ।
फोटो कैप्शन 01:शिविर में मौजूद युवाओं को संबोधित करते अभिमन्यु राव।
कैमला में भारतीय भाषा समर कैंप आयोजित
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में भारतीय भाषा समर कैंप में विभाग के निर्देश अनुसार कार्यशाला का आयोजन मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ की अध्यक्षता में किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए बताया कि भाषायी कौशलों के साथ-साथ भाषा को सीखना, व्यवहार और शिष्टाचार को अपनाना, गांव व शहरी समुदाय के साथ परस्पर वार्तालाप के तौर-तरीकों को अपनाना ,दिशाएं और स्थान का जानकारी के साथ -साथ बाजार में वस्तुओं की खरीददारी में व्यवहारिकता और कुशलता का परिचय देना, अन - जान जगह की जानकारी को प्राप्त करना तथा जीवन के प्रत्येक स्तर पर सभी का परिचय जानना, अभिवादन, शिष्टाचार के बुनियादी तौर -तरीके पर आधारित एक्टिविटी विद्यालय प्रांगण में कराई गई। जिससे विद्यार्थियों को खेल-खेल में नवीनतम ,सृजनात्मक, उपचारात्मक ज्ञान की प्राप्ति के साथ नई आदतों का सृजन और शिष्टाचार की भावना विकसित होती और आत्मविश्वास के साथ स्वाभिमान की भावना जागृत होती है तथा भय मुक्त शिक्षण एवं पाठ्यक्रम आधारित क्रियाकलापों से विकास होता है।
इस अवसर पर संजीत एबीआरसी क्लस्टर बूचावास विशेष रूप से उपस्थित हुए और उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में उपयोगी और बहुमूल्य विचारों से अवगत कराया। इस मौके पर सुनील कुमार शास्त्री,वरिष्ठ अध्यापक सुनील कुमार, मनवीर सिंह तंवर विज्ञान अध्यापक,संजीत एबीआरसी ,सुनील कुमार डीटीएच चौकीदार ,सूबे सिंह पार्ट टाइम ,तारामणि देवी, राजकुमार पंच, यशपाल साहब आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: समर कैंप में जानकारी देते हुए मुख्याध्यापक

















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