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Sunday, July 5, 2020
हल्की बारिश हुई *********************** *********************** ************************** कनीना। क्षेत्र में गत दिनों से पड़ रही गर्मी के पश्चात रविवार को हल्की बारिश हुई। यद्यपि किसान अच्छी बारिश का इंतजार करते रहे किंतु महज मामूली बारिश के बाद फिर से उमस बढ़ गई, सूर्यताप बढ़ गया। किसान रवि कुमार, सुरेश कुमार,कृष्ण कुमार आदि ने बताया कि इस समय पानी की अधिक आवश्यकता है और इसी समय बारिश नहीं हो रही है। खेतों में फसल भी सूखने के कगार पर पहुंच गई है।
कनीना क्षेत्र में आए चार कोरोना पाजिटिव केस **************************************** ************************************* कनीना। कनीना क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव के 4 मामले सामने आए हैं । अब तक कनीना क्षेत्र में 41 कोरोना के केस थे जिसमें चार और नये केस आने से इनकी संख्या बढ़कर 45 हो गई है। उल्लेखनीय कनीना मंडी से एक ही परिवार के तीन सदस्य कोरोना पाजिटिव मिले हैं। परिवार में पहले भी कोरोना का एक मामला सामने आया था। उसी परिवार में एक महिला एवं दो बच्चे भी अब कोरोना पाजिटिव पाये गये हैं। कनीना के स्वास्थ्य विभाग ने आगामी समस्त कार्रवाई कर दी है ताकि कोरोना आगे न बढ़ सके। कंटेनमेंट जोन और बफर जोन बना दिये गये हैं। स्क्रीनिंग का कार्य पूर्ण हो गया है। उधर उपमंडल के गांव पड़तल में पहले ही कोरोना पॉजिटिव महिला थी और अब उसका 11 माह का बच्चा भी कोरोना पाजिटिव पाया गया है। एसएमओ डा धर्मेंद्र ने बताया कि नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए वरना रोग बढ़ता ही जायेगा। उन्होंने कहा कि मास्क पहनना चाहिए तथा सेनिटाइजर का प्रयोग करना चाहिए। हो सके बाहर न जाये और अगर बाहर कहीं जाना पड़े तो ऐतिहात के सभी नियमों का पालन करना चाहिए।
मनोज कुमार की पर्यावरण संरक्षण की मुहिम लगातार जारी ************************************* ************************************* कनीना। पर्यावरण को बचाने एवं पौधारोपण में मनोज कुमार रामबास का नाम अग्रणी है। कई वर्षों से इस मुहिम में जुटे हुये हैं। मनोज कुमार ने जहां पिछले एक साल की अथक मेहनत से गाव रामबास मे राधा-कृष्ण मंदिर व धर्मशाला भवन के पास एक सुन्दर पार्क का निर्माण किया गया। जहा पर पार्क का निर्माण किया गया। वहा उबड खाबड व गहरे गड्ढों खतपतवार से जमीन भरी पड़ी थी लेकिन गाव के युवाओं ने गाव के सहयोग से बिना किसी सरकारी मदद से शहर की तर्ज पर एक बहुत सुंदर पार्क का निर्माण कर दिया। पार्क निर्माण के साथ साथ पौधारोपण अभियान लगातार जारी रखा, धर्मशाला भवन से लेकर जोहड़ की पाल व पार्क की मेड पर कनेर कदम जामुन अशोक आदि के सुंदर फूलदार व छायादार पौधे लगाये। इसके साथ ही बणी - जंगलात की खाली पडी जमीन पर 1000 पौधे लगाने की मुहिम लेकर चले है। अब तक 250 पौधे नीम, पीपल, बरगद, पीलखन, जामुन, कदम शहतूत आदि के पौधे लगाये है। मनोज कुमार का कहना है पर्यावरण संरक्षण व प्रकृति को ध्यान में रखते हुए पीपल, बरगद, नीम के ज्यादातर पौधे लगाये है। ये बड़े पेड़ बनकर पर्यावरण को संरक्षित करते है, आक्सीजन का उत्पादन सबसे अधिक करते है, जहरीली गैसों का विसर्जन करते है व आक्सीजन का उत्सर्जन करते है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद सिर्फ पौधे लगाने और फोटो खिचवाने तक नही है हमारा प्रयास है कि हम पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को धरातल पर अमलीजामा पहनाकर इन पौधो को बड़े पेड़ बनने तक इनकी सुरक्षा व पालन पोषण तक कि जिम्मेदारी ले रहे है। प्रत्येक गाव प्रत्येक युवा पीढ़ी को अब जागरूक हौने का समय है। पर्यावरण संरक्षण एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। हम सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम मे अपना सहयोग करना चाहिए, अब मानसून का मौसम आरंभ हो चुका है। पौधे जरुर लगाये लेकिन प्रयास यह किया जाये कि जो पौधे आप लगा रहे है। उनकी परवरिश जरुर करे, एक दिन पौधे लगाने से हमारा पर्यावरण साफ सुथरा नही होंगा। हमे उन पौधो को पेड़ बनने तक सुरक्षा पानी की व्यवस्था करनी होंगी, पौधे लगाना बहुत आसान है लेकिन पेड बनाने मे कोई साल लग जाते है, एक दूसरे से प्रेरित होकर पौधें लगाये व उनकी सुरक्षा का ध्यान रखे। मनोज कुमार गांव मे लगातार युवाओं को जागरूक कर रहे है। पर्यावरण संरक्षण के पौधारोपण ही एकमात्र विकल्प है जिसके लगातार सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे है। प्रत्येक व्यक्ति जागरूक हो रहा। अपने घरों में घर के आस पास पौधे लगा रहे है। हमारी मुहिम धरातल स्तर पर नजर आती जा रही है, एक साल के बाद हमारी बणी जंगलाती जमीन पर हजारों की संख्या में पेड़ नजर आयेंगे जो भविष्य में हमारे पर्यावरण संरक्षण की नीव है। उनकी इस मुहिम में पूरा गांव रामबास अपनी भागीदारी बढ़ चढ़कर निंभा रहा है। फोटो कैप्शन: मनोज कुमार रामबास।
गुरु पूर्णिमा को लेकर दिनभर गुरुओं का लिया आशीर्वाद, आयोजित हुये कई कार्यक्रम ********************************** ************************************ कनीना। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर क्षेत्र में कई कार्यक्रम आयोजित हुये। गुरु पूर्णिमा के पर्व पर जहां पुराने समय से विधान है कि गुरु करीब 4 महीने एक ही जगह बैठकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं और सभी अंधकार दूर कर देते हैं इसलिए गुरु की पूजा की जाती है। विस्तृत जानकारी देते हुए संतलाल दास ने बताया की महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास जिन्हें वेदव्यास भी कहा जाता है, का जन्मदिन इसी दिन हुआ था उन्होंने चारों वेदों की रचना की थी। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है और इस दिन को व्यास वेद व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्ति काल के समय संत घीसा राम जो कबीर दास के शिष्य थे का भी जन्म इसी दिन हुआ था। गुरु पूर्णिमा के दिन जहां हरिद्वार के गंगा में डुबकी लगाकर भक्तजन कावड़ लेकर विभिन्न मार्गों पर प्रस्थान शुरू होता रहा है किंतु कोरोना के चलते इस बार कांवड़ नहींं लाई जा रही हैं तथा मेले भी आयोजित नहीं हो रहे हैं। आषाढ़ माह की पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा नाम से जानी जाती है। तत्पश्चात श्रावण मास शुरू हो जाता है और श्रावण माह में भक्तजन शिव आराधना में लग जाते हैं। इस दिन शिष्य अपने गुरु को विभिन्न प्रकार की भेंट करते हैं। इस पर्व को लेकर उत्साह देखने को मिला। शिष्यों ने गुरु को याद किया। श्रावण माह में तीज,सिंघारा, रक्षाबंधन आदि पर्वों की भरमार रहती है। श्रावण माह पर्वों से भरा हुआ है। परंतु इस बार इन पर भी कोरोना का प्रभाव नजर आया। विभिन्न स्थानों पर भंडारा लगा, भजन सत्संग हुये तथा गुरुओं को नमन किया। फाोटो कैप्शन 2:लालदास महाराज भक्तों के संग 3: भक्तों को भोजन कराते हुए 4 सत्संग करते हुए भक्त। सावन के सोमवार व्रत के लिए बेहतर होते हैं-शर्मा ***************************** ********************************** कनीना। सावन के सोमवार व्रत के लिए बेहतर माने जाते हैं। किसी भी भक्त को 15 सोमवार के व्रत करने चाहिए। ये विचार सुरेंद्र शर्मा ज्योतिषाचार्य ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि 6 जुलाई से सावन शुरू हो रहा है। सावन में माता माह मदमाने वाला होता है। इस बार सावन की शुरुआत सोमवार से हो रही है यह सबसे बड़ा शुभ दिन है और इस महीने में सावन में पांच सोमवार आएंगे। सोमवार को शिवभोले ककी विधि विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए। शिवभोले कम से प्रसन्न हो जाते हैं और जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना केे चलते बड़े मंदिरों में जाने पर जहां इस बार प्रतिबंध लगाया हुआ है वही अपने घरों में भी इष्टदेव को याद किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जहां सावन माह में अधिक बारिश होती है, भगवान भोले को विशेष रूप से याद किया जाता है। इसलिए भगवान भोले की प्रार्थना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सोमवार का व्रत शुरू करने वालों के लिए सावन मास ही सबसे बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा अर्चना की जाती तत्पश्चात सावन शुरू हो जाता है। इस बार सावन माह में पांच सोमवार आएंगे तो सबसे बड़ी खुशी की बात है। यूं तो पूरे सावन माह में शिव भोले को याद करना चाहिए लेकिन समय रहते हुए सावन में व्रत जरूर करना चाहिए और सावन माह में आने वाली माह शिवरात्रि के दिन व्रत रखा जा सकता है। फोटो कैप्शन: सुरेंद्र शर्माे
निर्माण कार्यों में लाई जाये तेजी *******************************
********************************* कनीना। बहुजन समाज पार्टी के नेता एवं प्रमुख समाजसेवी ठाकुर अतरलाल एडवोकेट ने कनीना के निकट चेलावास गांव की जमीन में बनाए जा रहे दमकल केंद्र, अनाज मंडी, सब्जी मंडी तथा स्टेडियम आदि के रुके पड़े निर्माण कार्य पर रोष प्रकट करते हुए राज्य सरकार से इन्हें शीघ्र पूरा करवाने की मांग की है। अतरलाल ने निर्माणाधीन दमकल केंद्र, अनाज मंडी, सब्जी मंडी तथा स्टेडियम का दौरा कर निर्माण कार्य का जायजा लिया। उन्होंने चारों संस्थानों के निर्माण कार्य के पूरा होने में हो रही देरी को इलाके के लिए नुकसानदेह बताते हुए कहा कि जो संस्थान अभी शुरू हो जाने चाहिए थे, उनका पचास प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। इससे इलाके की जनता, किसान, मजदूर तथा युवाओं को भी भारी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। दमकल केंद्र चालू न होने के कारण आग लगने पर महेंद्रगढ़ अथवा नारनौल से दमकल गाडिय़ां बुलानी पड़ती हैं। जब तक दमकल की गाडिय़ां आग स्थल पर पहुंचती है तब तक सब कुछ स्वाहा हो चुका होता है। इसलिए कनीना क्षेत्र की मांग पर यहां दमकल केंद्र स्थापित किया गया था। यही हाल सब्जी मंडी का है। कनीना में सब्जी मंडी नहीं होने के कारण इलाके के सब्जी उत्पादक किसानों को अपनी सब्जी बिक्री हेतु महेंद्रगढ़ अथवा रेवाड़ी की सब्जी मंडी में जाना पड़ता है, जो काफी दूर हैं। वर्तमान कनीना अनाज मंडी की तंग हालत को देखकर चेलावास में नई अनाज मंडी तथा युवाओं के अभ्यास के लिए स्टेडियम की स्थापना की गई थी, परंतु चारों ही संस्थानों के रुके पड़े कार्य ने इलाके की जनता के अरमानों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर लोगों में भारी रोष व्याप्त है। इसलिए बहुजन समाज पार्टी राज्य सरकार से मांग करती है कि दमकल केंद्र, अनाज मंडी, सब्जी मंडी तथा स्टेडियम का निर्माण कार्य त्वरित गति से पूरा करवा कर चारों संस्थानों का शीघ्र लोकार्पण किया जाए जिससे लोगों को इन संस्थानों का लाभ मिल सके। उन्होंने राज्य सरकार से इन संस्थानों के शीघ्र निर्माण के लिए एक नागरिक निगरानी समिति का गठन करने की मांग भी की। फोटो कैप्शन-01 अनाज मंडी के निर्माण कार्य का जायजा लेते हुए बसपा नेता ठाकुर अतरलाल।
Saturday, July 4, 2020
करंट आने से एक व्यक्ति की मौत, बिजली विभाग पर करवाया मामला दर्ज ********************************** ******************************************************* कनीना। कनीना में बिजली के तारों पर काम कर रहे प्रदीप उन्हाणी की अचानक करंट आने से मौत हो गई। मिली जानकारी अनुसार कर्मचारी प्रदीप कनीना के एसआर पेट्रोल पंप समक्ष रास्ते पर बिजली विभाग से परमिट लेकर तारों पर काम कर रहा था। अचानक बिजली के तारों में करंट आ गया और मौके पर मौत हो गई। उन्हें कनीना के उप नागरिक अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिजन संदीप ने बिजली विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों पर मामला दर्ज करवा दिया है। उधर शव का पोस्टमार्टम करवा उसके परिजनों को दे दिया गया है जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। वह डीसी रेट पर करीब छह वर्षों से काम कर रहा था।
30 सालों से गुरु की सेवा कर रहे हैं - निस्वार्थ भाव से पूरा परिवार करते आए हैं उनकी सेवा ******************************* ******************************** कनीना। गुरु शिष्य परंपरा बहुत पुरानी है। जहां भगवान श्रीकृष्ण ने संदीपन गुरु से शिक्षा शिक्षा पाई थी वही श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से शिक्षा पाई किंतु गुरु शिष्य परंपरा वर्तमान में भी जारी है। कनीना से 9 किलोमीटर दूर जैनाबाद में जहां रणधीर सिंह (50) विगत 30 सालों से अपने गुरु आश्रम में नियमित रूप से जा रहे हैं। यही नहीं उनका पूरा परिवार ही उनकी गुरु की सेवा में जुटा रहता है। गुरु लाल दास महाराज (70) उनसे अपनी सेवा कम करवाते बाकी मंदिर आश्रम की सेवा ज्याद करवाते हैं। रणधीर सिंह ने बताया कि उनकी गहन आस्था है। सुबह शाम बस जब भी समय मिलता है गुरु लाल दास महाराज को याद करते हैं। गुरु आश्रम में जाकर वे प्रतिदिन धोक लगाते हैं। गुरु लाल दास महाराज को से आशीर्वाद पाते हैं। करीब 13 साल पूर्व गौशाला का निर्माण करवाया था तब से रणधीर सिंह गौशाला में भी मददगार साबित होते हैं। आश्रम में भक्तों की सेवा निभाने में उनका अहम योगदान होता है। गुरु के प्रति उनकी भक्ति,भक्तों के लिए भोजन प्रबंध करना, किसी खास पर्व पर बनाए जाने वाला विशेष भोजन बनाने व भक्तों को खिलाने में आनंद महसूस करते हैं। गुरु लाल दास महाराज को अपने दिल में समाए हुए हैं। उनका पूरा आशीर्वाद लेकर ही किसी कार्य को करते हैं। यद्यपि वे एक दुकान चलाते हैं और जब कभी जरूरत होती तो अपनी दुकान का कार्य भी रोक देते हैं। उनका पूरा परिवार गुरु सेवा में जुटा रहता है। उनका कहना है कि गुरु से बढ़कर कोई दुनिया में श्रेष्ठ नहीं है। रणधीर सिंह का कहना है कि गुरु उनको सच्चा मार्ग दिखाते हैं। लाल दास महाराज को एक सच्चा गुरु मानते हैं जिसके कारण भी उनके कदमों में बैठे मिलते हैं। जब भी कोई सेवा होती है तो वे उनके पास जाकर सेवा प्रदान करते हैं। एक वक्त था जब खाना तक भी विशेष पर्व पर अपने हाथों से गुरु को खाना खिलाते थे लेकिन बीच में एक दुर्घटना होने के बाद रणधीर सिंह से अस्वस्थ रहें और घर पर रहने के कारण कुछ दिनों से गुरु से दूर रहकर बहुत दर्द हुआ। इसलिए जब भी वे ठीक हुये तुरंत गुरु के चरणों में जाकर बैठ गए। रणधीर सिंह उद्यो दास आश्रम में सुबह शाम जब भी वक्त में होता है जरूर जाते हैं। कुछ देर आश्रम में गुरु के चरणों में बैठे रहते हैं इससे उन्हें बहुत मानसिक शांति मिलती है। फोटो कैप्शन दो: गुरु लाल दास महाराज के साथ रणधीर सिंह
30 सालों से कर रहे हैं गुरु की सेवा *********************************** *************************** कनीना। गुरु शिष्य परंपरा में कनीना खंड के गांव धनौंदा में कृष्णानंद महाराज की सेवा करने में अहम भूमिका जसवंत सिंह ने निभाई है। जसवंत सिंह की पत्नी की शिक्षिका है। जबकि जसवंत सिंह समाजसेवी है। दोनों दिन रात सुबह शाम बाबा आश्रम में जाकर धोक लगाते हैं तथा उनकी निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। यहां तक कि अपने हाथों से खाना खिलाना उनके चरणों में बैठकर उनके विचार सुनने में बिताते हैं। दंपति स्वयं खाना खाने से पहले संत को खिलाते हैं। इतनी निश्चल भक्ति दंपति में देखने को मिल रही है। कृष्णानंद महाराज 85 वर्षीय है उनके ।गुरु हरद्वारी लाल के दिल्ली टैर गांव के आश्रम में समाधि ली थी। तत्पश्चात कृष्णानंद महाराज धनौंदा में आकर बनी में अपना स्थान बनाया था और वहीं पर यह जीवन जी रहे हैं। करीब 50 साल पहले उन्होंने यहां आकर रहना शुरू किया था और जन सेवा में जुटे रहते हैं। चाहे कोई समाज सेवा का कार्य हो,औषधीय पौधों से किसी का कोई कष्ट दूर करना हो या फिर जन सेवा में भोजन कराने का कार्य हो, लगातार चलता है। जसवंत सिंह तथा उनकी पत्नी बारिश हो या आंधी हो जरूर उनके यहां जाते हैं और जाकर उनकी निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। जब उनकी पत्नी स्कूल में जाती है तो उससे पहले वे संत के दर्शन कर लेते हैं। शायद ही कोई ऐसा वक्त हो जब वे संत से मिलकर नहीं आये हो। पूरा परिवार किसी विशेष मौके पर आश्रम में सेवा करता है। कृष्णानंद आश्रम में विभिन्न पर्वों पर कार्यक्रम चलते हैं। संत अपने विचार रखते हैं। दंपति की निश्छल भक्ति से आस पास के लोगों में भी एक सकारात्मक संदेश पहुंचा है। फोटो कैप्शन : जसवंत सिंह एवं कृष्णानंद महाराज।
कपूरी गांव के युवा ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्म हत्या ************************************ ************************************** कनीना। अज्ञात कारणों से एक युवा ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या करने का मामला प्रकाश में आया है। मिली जानकारी के अनुसार खण्ड के गांव कपूरी निवासी पारस ने अपने खेतों में जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मिली जानकारी अनुसार मृतक सुबह लगभग आठ बजे अपने खेतों में गया और वहा जाकर उसने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया वही मृतक ने जहरीला पदार्थ खाने के बाद अपनी माँ के पास फोन कर यह भी बताया कि उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया है। वही इसकी सूचना के बाद सारे घर वाले खेतों में दौड़ चले और तुरंत पारस को गाड़ी में डालकर रेवाडी एक निजी अस्पताल ले गए जहां चिकित्सों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वही इसकी सूचना परिजनों द्वारा कनीना पुलिस को देकर अवगत कराया जिसके बाद पुलिस ने मृतक के परिजनों के बयान पर इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई आरंभ कर दी है तथा शव का विच्छेदन कर परिजनों को सोप दिया है। गांव में शोक की लहर है।
बाघोत में नहीं लगेगा मेला *********************************** ****************************** कनीना। बाघेश्वरी धाम पर इस बार 18 जुलाई को लगने वाला सबसे बड़ा मेला नहीं लगेगा। कोरोना के दृष्टिगत यह निर्णय पंचायत ने लिया है। सरपंच विनोद कुमार भागवत ने बताया कि उन्होंने पूरे गांव में मुनादी करवा दी है किसी प्रकार की कोई दुकान की जगह किसी के अलाट नहीं की गई है और मेला इस बार कोरोना के चलते नहीं लगेगा। उल्लेखनीय कनीना उपमंडल का ही नहीं अपितु पूरे भारत का प्रसिद्ध मेला बाघेश्वर धाम पर लगता है जहां लाखों कावड़ चढ़ाई जाती है किंतु इस बार ने तो कोई कावड़ आएगी और न कोई मेला लगेगा। हर वर्ष यह मेला लगता रहा है किंतु यह पहला अवसर होगा जब यहां मेला नहीं लगेगा बाकी विभिन्न गांव में शिवालयों में जल जरूर अर्पित किया जाएगा या लोग घर पर ही जल अर्पित करेंगे।
गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई को गुरुओं से लिया जाएगा आशीर्वाद *********************************** *************************************** कनीना। पांच जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। तत्पश्चात सावन माह लग जायेगा। इस बार कांवड़ लाने व अर्पित किये जाने पर प्रतिबंध लग गया है। गुरु पूर्णिमा के पर्व पर जहां पुराने समय से विधान है कि गुरु करीब 4 महीने एक ही जगह बैठकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं और सभी अंधकार दूर कर देते हैं इसलिए गुरु की पूजा की जाती है। विस्तृत जानकारी देते हुए अरविंद जोशी ने बताया की महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास जिन्हें वेदव्यास भी कहा जाता है, का जन्मदिन इसी दिन हुआ था उन्होंने चारों वेदों की रचना की थी। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है और इस दिन को व्यास वेद व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्ति काल के समय संत घीसा राम जो कबीर दास के शिष्य थे का भी जन्म इसी दिन हुआ था। गुरु पूर्णिमा के दिन जहां हरिद्वार के गंगा में डुबकी लगाकर भक्तजन कावड़ लेकर विभिन्न मार्गों पर प्रस्थान शुरू कर देते थे वो इस बार कोरोना के चलते बंद कर दिया गया है। इस बार घर पर ही रहकर शिव की पूजा की जाएगी। सबसे अधिक कांवड़ वाले सुमेर सिंह चेयरमैन का कहना है कि भक्तजन हरिद्वार जाकर जहां मंशा देवी, चंडी देवी, ऋषिकेश, लक्ष्मण, राम झूला आदि के दर्शन करने के उपरांत नीलकंठ की चढ़ाई करते रहे हैं किंतु इस बार सरकार के आदेशों के चलते घर पर रहकर ही शिव आराधना करेंगे। इस दिन शिष्य अपने गुरु को विभिन्न प्रकार की भेंट करते हैं। इस पर्व को लेकर उत्साह देखने को मिलता है। श्रावण कृष्णा त्रयोदशी को बाघेश्वरी धाम पर मेला लगता है वह मेला इस बार नहीं लगेगा। तत्पश्चात विभिन्न प्रकार के पर्व शुरू हो जाते हैं जिनमें तीज,सिंघारा, रक्षाबंधन आदि पर्वों की भरमार रहती है। श्रावण माह पर्वों से भरा हुआ है किंतु सभी पर कोरोना का साया रहेगा। कनीना के ज्योतिषाचार्य अर्रविंद जोशी का कहना है कि शिवभोले के व्रत करने वालों को श्रावण सोमवार से व्रत शुरू करना चाहिए। ये व्रत सर्वोत्तम होते हैं। शिवभक्त श्रावण शुक्ल सोमवार से ही व्रत धारण करते हैं। फोटो कैप्शन: सुमेर सिंह।
श्रावण माह पांच जुलाई से शुरू *************************** ********************************** कनीना। श्रावण माह यूं तो कवियों की कई कल्पनाओं को मूर्तरुप देता रहा है और आमजन के लिए भी खुशी का पैगाम लाता है। कनीना और आस-पास गांवों में श्रावण माह में कई स्थानों पर मेले लगते हैं, पींग पर झूलने की प्रथा , तीज का पर्व, पतंगबाजी तथा रक्षा बंधन का त्यौहार भी इसी माह से जुड़े हुए हैं। ऐसे में श्रावण माह को त्योहारों का माह कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। इस बार कोरोना का प्रभाव पर्वों पर रहेगा। श्रावण माह के आगमन से जुड़ी है वर्षा। किसान अपनी खरीफ की फसल में व्यस्त हो जाते हैं क्योंकि खरीफ की फसल पूर्णरूप से वर्षा पर आश्रित है। भीषण गर्मी से जहां राहत मिलती है वहीं दिन को झूला झूलने तथा रात के समय श्रावणी गीतों की गूंज सुनाई पड़ती है जो मन को मोह लेती है। श्रावण माह के आते ही ऊंचे वृक्षों पर झूले डाल दिए जाते हैं जिन पर बच्चियां व महिलाएं दिनभर झूलती रहती हैं। नव विवाहित तो पींग पर अपने प्रियतम के विछोह एवं पुनर्मिलन के गीत गाती देखी जा सकती हैं। नव विवाहिता के जीवन में प्रथम श्रावण के समय में अपने प्रियतम के दर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। विवाहिता पूरे श्रावण माह में अपने मायके रहती है। ससुराल पक्ष अपनी बहु के लिए रस्सी व पींग भी भेजता है। श्रावण माह की तीज का यूं तो पूरे देश में ही महत्व है किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में पतंगबाजी करके यह पर्व मनाया जाता है। ज्यों-ज्यों यह पर्व पास आता है त्यों-त्यों पतंगबाजी तेज हो जाती है। तीज के दिन अंतिम बार पतंगबाजी की जाती है। अच्छी वर्षा व सुहावना मौसम के साथ--साथ लहलहाती फसल को देखकर युवा वर्ग पूर्णतया पतंगबाजी में खो जाता है। तीज पूर्व सिंधारा आता है जब घेवर मिठाई की बहार देखने को मिलती है। अपनी विाहित लड़की के लिए माँ-बाप घेवर की मिठाई भेजते हैं। पूरे माह पकवान बनते हैं तथा गीत गूंजते रहते हैं। पदमावत के गीतों से कम इनमें भी विरह नहीं होता। शिवालयों में तांता लगता है वहीं पूरे माह व्रत चलता है। श्रावण माह के अंत में भाई-बहन के प्यार को इंगित करने वाला रक्षा बंधन का पर्व आता है। भाई अपनी बहन के पास अपनी कलाई पर रक्षासूत्र बंधवाने बहन के पास जाता है। बहन कहीं भी हो वह अपने भाई के आने का इंतजार करती है। इस पर्व का एतिहासिक एवं पौराणिक महत्व भी है।
नीम वाटिकालगा कैलाश पाली ने कमाया नाम ************************************* ************************************** कनीना। जिला महेंद्रगढ़ के गांव पाली निवासी कैलाश पाली अपनी प्रतिभा के लिए ही नहीं अपितु नीम के पेड़ लगातार आठ वर्षों से लगाते आ रहे और उनकी सेवा करते आ रहे जन के रूप में भी जाने जाते हैं। इस प्रकार पाली न केवल पर्यावरण के क्षेत्र में अपितु सामाजिक एवं शिक्षा के क्षेत्र में अहं योगदान दिया है। पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में कैलाश पाली को पर्यावरणविद नाम से जाना जाता है। बाबा जयरामदास पाली स्थित धार्मिक स्थल पर 25 जुलाई 2010 को 250 नीम के पेड़ लगाकर नीम वाटिका का निर्माण किया है। आज उस वाटिका में लगभग सभी नीम के पेड़ जीवित हैं और उनकी देखरेख की जा रही है। इस वाटिका में लगे नीम के पेड़ों की हर रविवार को लगातार दो वर्षों तक श्रमदान करके सेवा की है। दस सेवा में गांव के कुछ व्यक्ति भी साथ होते थे। इस वाटिका में नीम के पेड़ों ने बहुत अधिक वृद्धि दिखाई और आज छायादार वाटिका दूर से मन को हर्षित कर रही है। प्रारंभ में पाली में 101 पेड़ लगाए थे जो बढ़कर 250 हो गए हैं। नीम के पेड़ लगाने की श्रंखला में कैलाश पाली ने नावां स्कूल में एक गैलरी में 50 नीम के पेड़ लगाए थे। यह गैलरी कोई काम नहीं आ रही थी। तत्पश्चात पालड़ी पनिहार में उन्होंने स्कूल कैंपस में एक सौ पेड़ लगाकर न केवल स्कूल प्रांगण की शोभा बढ़ाई अपितु विद्यार्थियों के गर्मियों में बैठने के काम आ रहे हैं। इससे पूर्वपाली स्कूल कैंपस में भी नीम के 11 पेड़ लगाए थे। विभिन्न स्कूलों में वे 300 नीम के पेड़ लगा चुके हैं और इस बाप 25 जुलाई को पाली के स्टेडियम में भ्ज्ञी नीम के पेड़ लगाने का इरादा है। चूंकि 25 जुलाई से ही नीम लगाने की शुरूआत की गई थी जिसके चलते वे 25 जुलाई को ही नीम के पेड़ लगाते आ रहे हैं। वर्ष 2008 से नीम के पेड़ लगाने की श्रंखला अब आगे भी चलती रहेगी। कैलाश पाली ने अपनी एक जमीन पर भी नीम के पेड़ लगाए थे। क्यों लगाते हैं नीम के पेड़- कैलाश पाली नीम के पेड़ से इतने क्यों जुड़े हुए हैं? इसके पीछे स्वयं कैलाश पाली का कहना है कि महेंद्रगढ़ जिला की मिट्टी में ये पेड़ बेहतर उन्नति करते हैं और जलते नहीं। ये कम बारिश में भी पनपते हैं और इनकी लंबी उम्र होती है। प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र में कंटीली झाडिय़ां, पीपल एवं नीम के पेड़ पाए जाते थे। उनके अनुसार रेगिस्तान क्षेत्र में जब कभी महामारी फैलती थी तो इस नीम के पेड़ से ही दूर किया जाता था। आज भी नीम का पेड़ स्वास्थ्य का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर विदेशी पेड़ लगाते हें जो कम आयु, कम ठंड व कम फल के अलावा कम छाया देते हैं जबकि नीम दन सभी से उलट है। जिन व्यक्तियों में मधुमेह का रोग हो उसे नीम की निबोरी से बचाया जा सकता है वहीं दांतों के पायरिया रोग को भी नीम की दातुन से बचाया जा सकता है। कितने ही रोगों में नीम की छाल, पत्ते, फल, नीम का जल आदि काम में लाए जाते हैं। यही कारण है कि वे नीम के प्रति इतने जुड़े हुए हैं। कैलाश पाली द्वारा लगाए गए सभी पेड़ लगभग सुरक्षित हैं और वे समय समय पर उनकी देखभाल के लिए जाते हैं। उनका मानना है कि 80 प्रतिशत पौधे सफल होते हैं और 20 प्रतिशत किन्हीं कारणों से समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों में नीम के अनेकों पेड़ लगाकर नीम को बचाने का आंदोलन छेड़ा हुआ है। उनका कहना है कि वे जीवनपर्यंत नीम के पेड़ लगाते रहेंगे। वर्ष 2010 से वे लगातार नीम के पेड़ लगाने का जिम्मा उठाए हुए हैं और हर वर्ष इन पेड़ों का जन्मोत्सव भी मनाते आ रहे हैं जो अपने आप में अनूठी पहल है। इस प्रकार वे ग्रामीण क्षेत्र में पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दे रहे हैं। संक्षिप्त जीवन परिचय- पालड़ी पनिहारा के स्कूल में मौलिक हैडमास्टर पद पर कार्यरत कैलाश पाली ने वर्ष 2008 में 1857 की क्रांति के 150 वर्ष पूरे होने पर 150 निजी एवं सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को इतिहास के प्रति जागरूक किया। दस मई 2008 को सांय 18 बजकर 57 मिनट पर महेंद्रगढ़ के आजाद चौक 1857 दीपक जलाकर उन्होंने एवं उनके सहयोगियों ने क्रांतिकारियों को याद किया एवं नमन किया। कैलाश पाली ने 2009 में विश्व मंगल गऊ ग्राम यात्रा के तहत गाय बचाने का अभियान छेड़ा व गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करवाने के लिए लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया। इसी कड़ी में 51 गांवों के उन 170 गऊ भक्तों को सम्मानित किया जिनके घर में दो या दो से अधिक देशी गाय पाल रखी थी। स्वामी विवेकानंद के जन्म को 150 वर्ष पूरे होने पर 2013 में स्वामी विवेकानंद श्राद्ध शती आयोजन समिति के बैनर तले इन्हीं तीन जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। इसी वर्ष विवेकानंद के जीवन को लेकर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया और अव्वल रहने वालों को सम्मानित किया। कैलाश पाली ने 11 सितंबर 2013 को भारत जागो दौड़ का आयोजन किया गया। 1981 से अब तक लगातार बाबा जयरामदास क्रिकेट प्रतियोगिता का हर वर्ष पाली में फाल्गुन मास में आयोजन किया जाता है जिसमें देश विदेश के प्रसिद्ध खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस कार्यक्रम में कैलाश पाली की अहं भूमिका रही है। 1989 में डा. हेडगेवार जन्म शताब्दी वर्ष में 25 गांवों में सम्पर्क, शिला पूजन कार्यक्रम के निमित 40 गांवों में शिला पूजन कराया, राम जन्मभूमि आन्दोलन, सन् 2000 में राष्ट्र जागरण अभियान के पीछे कैलाश पाली का अहं योगदान रहा है। कुछ फोटो साथ हैं और कुछ फोटो और भेज रहा हूं। *
पानी एवं सुरक्षा के अभाव में पेड़ पौधे तोड़ देते हैं दम ********************************** ************************************ कनीना। दक्षिण हरियाणा में जहां पहले ही पानी की कमी है तथा रेतीला क्षेत्र होने के कारण भरसक प्रयास करने के बावजूद भी पेड़ पौधों की संख्या इतनी अधिक नहीं बढ़ रही जितनी होनी चाहिए। बार-बार पानी देने की जरूरत पड़ती है। बारिश कम होती है इस वजह से पेड़ पौधे या तो बीच में ही दम तोड़ जाते हैं या फिर उन्हें पशु खत्म कर देते हैं। इस क्षेत्र में कांटेवाले पौधे, काला नीम, पपड़ी, बेलपत्र, आंवला आदि को पशु कम खाते हैं जबकि पीपल, बरगद एवं नीम आदि को पशु अधिक खाते हैं। क्षेत्र के समाजसेवी पौधारोपण करने वाले तथा फॉरेस्ट से संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों से संबंध में चर्चा की गई। सुरेश कुमार करीरा ने करीरा में अकेले अपने दम पर एक वाटिका का निर्माण किया है जिसमें करीब 300 पौधों की सेवा कर रहे हैं। उनका कहना है कि पानी का अभाव बड़ी समस्या है, अक्सर कड़ाके की ठंड और भीषण गर्मी पड़ जाते हैंमें पैधे दम तोड़ देते हैं। यदि पौधों की देखरेख की जाए और सप्ताह में कम से कम एक बार पानी दिया जाए तो निश्चित रूप से बढ़ पाएंगे। पौधे लगाने के पीछे दिखावा न हो। उनका कहना है कि कुछ लोग मान लेते हैं कि पौधे अपने आप पैदा हो जाएंगे अपने आप नहीं तो बढ़ेंगे पाएंगे इसलिए उनकी सेवा बच्चे की तरह की जानी चाहिए। राजेश कुमार एक प्रवक्ता है जिन्होंने बहुत पेड़ पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि पेड़ पौधे अधिक बढ़ाए जा सकते हैं, बस भेड़ बकरियों से बचाना चाहिये। क्षेत्र में भारी संख्या में भेड़ बकरियां होती है और भेड़ बकरियां छोटे पौधों को चट कर जाती है इसलिए पौधों की सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं वहीं पर उन्होंने बताया कि यदि पेड़ों की देखरेख नियमित की जाए तो बहुत बेहतर होगा। पानी पर्याप्त होना जरूरी है। यदि पानी कम होगा तो पेड़ पौधे नष्ट हो जाएंगे। सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर पौधों को पानी दे, उनकी सफाई रखें तब जाकर यह पेड़ पौधे बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि खाली जगह हो वहां पेड़ पौधे लगाए जाने चाहिए। छोटी-छोटी वाटिका भी निर्मित की जानी चाहिए जिससे पेड़ पौधे बढ़ सकते हैं। पूर्व फोरेस्टर जसवंत सिंह का कहना है कि पेड़ पौधे लगाने के साथ-साथ सेवा करने से कामयाबी मिलती है। हर वर्ष हजारों पेड़ पौधे लगाये जाते हैं लेकिन देखरेख अभाव, जल आदि की आपूर्ति अभाव में दम तोड़ देते हैं। फॉरेस्ट अधिकारी देवेंद्र सिंह का कहना है कि पेड़ पौधे बच्चे की भांति पाले जाते हैं जिसके लिए आवश्यकता है पानी की। पर्याप्त पानी नहीं मिलना दक्षिण हरियाणा में एक बड़ी समस्या है इसलिए अधिक पेड़ पौधे नहीं लगाए जा सकते हैं। यदि नहरों का पर्याप्त प्रबंध हो पानी आता रहे तो संभावनाएं कुछ पौधे और बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि रोड निर्माण तथा विकास कार्यों के दृष्टिगत पेड़ों की कटाई अधिक होती है और लगाए कम जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम सभी मिलकर प्रयास करें तब यह संभव हो पाएगा। भेड़ बकरियों से बचाए, पानी नियमित रूप से तब ही पौधे बन पायेंगे। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक बार पानी दें तभी बच पाएंगे। घरों में जो पौधे लगाये जाते हैं उनकी सेवा प्रतिदिन की जानी चाहिए। पूर्व फॉरेस्ट अधिकारी रूपचंद का कहना है कि पेड़ पौधे संख्या बढ़ा सकते हैं लेकिन किसी एक व्यक्ति का दायित्व नहीं होना चाहिए। सभी सरकार के साथ मिलकर कार्य करें तो पेड़ पौधे निश्चित रूप से बढ़ेंगे। खाली जगह पर पेड़ पौधे लगाए, सुरक्षा की जाए, सप्ताह में एक बार जरूर पानी दे,हर रविवार को पानी का दिन कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे विकास कार्यों के दृष्टिगत घट जाते हैं, बारिश पर आधारित है।। बारिश अभाव में पौधे सूख जाते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधों की सुरक्षा की जिम्मेवारी भी हमारी जिम्मेवारी होनी चाहिए। फोटो कैप्शन: राजेश कुमार, सुरेश कुमार,देवेंद्र, रूपचंद, जसवंत सिंह।
सूखने लगी है बाजरे की फसल ******************************* ************************************ कनीना। विगत दिनों क्षेत्र में बाजरे की फसल की बीजाई कर दी लेकिन बारिश समय पर न होने से अब सूखने के कगार पर पहुंच गई है। किसान मजबूरी वश फसल में पानी दे रहे हैं लेकिन जब तक बारिश नहीं होगी तब फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा। किसान सूबे सिंह, कृष्ण सिंह ने बताया कि इस समय फसल बड़ी हो गई है किंतु बारिश न होने से समस्या बन गई है। यही कारण है कि अब मजबूरी वश फव्वारों द्वारा सिंचाई की जा रही है। बारिश सागर समय पर हो जाती है तो फसल बज जाएगी वरना यह अगेती फसल नष्ट हो जाएगी। किसान परेशान हैं। बहुत से किसानों ने तो अभी तक बिजाई भी नहीं की और बारिश का इंतजार कर रहे हैं। जिन किसानों ने बिजाई कर दी वह अब पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। बारिश पर निर्भर है। सावन माह शुरू हो गया है किंतु बारिश अभी तक नहीं हुई है। फोटो कैप्शन एक :फसल को पानी देता किसान।
कनीना में शिवालय पर लगता है तांता शिव मंदिर- **************************************
जिला महेंद्रगढ़ के कनीना के शिवभक्त भरपूर सिंह निर्बाण की शिव के प्रति आस्था जागृत क्या हुई कि कावड़ लाने का सिलसिला शुरू करने के तत्पश्चात उन्होंने कनीना में ही विशाल शिवालय का निर्माण कर डाला। कनीना के मोदीका मोहल्ले का रहने वाला भरपूर सिंह पेशे से एक छोटा सा दुकानदार है किंतु उनकी आस्था विशाल है। अच्छी आमदनी न होते हुए भी उन्होंने शिव के प्रति विश्वास नहीं छोड़ा। शिव के प्रति आस्था क्या जागी कि नीलकंठ एवं हरिद्वार से कावड़ लाने का सिलसिला शुरू कर दिया। वे लगातार 16 वर्षों तक कावड़ लाते रहे। वे बाघेश्वरी धाम पर चढ़ा देते। वे शिव के प्रति इतने आशक्त हो गए कि उन्होंने अपने खून पसीने की पूंजी से कनीना में विशालकाय शिवालय बनवाने का निर्णय लिया। इतिहास- कनीना निवासी भरपूर सिंह निर्बाण ने कनीना के बाबा मोलडऩाथ मंदिर के पास ही 21 फुट ऊंची प्रतिमा वाले शिवालय का निर्माण 2000 शुरू करवा दिया। पूरे एक वर्ष तक काम चलने और लाखों रुपये खर्च करके उनका शिवालय पूर्ण हो गया। आखिरकार शिवरात्रि के दिन वर्ष 2001 में यह शिवालय आमजन के लिए खोल दिया गया। आस पास के लोग इस विशालकाय शिवभोले को देखते ही रह जाते हैं। इस शिवालय पर जो भी खर्चा आता है वह स्वयं वहन करते हंै। चढ़ावे के रूप में जो अन्न आता है उसे वह बोरों में भरकर या तो गौशाला को दान कर देता है या फिर गायों को चरा देता है। वर्ष 2001 से लगातार यहां शिवरात्रि हो या महाशिवरात्रि भक्तों की अपार भीड़ जुटती है और विभिन्न प्रकार के प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं। यू तो हर सोमवार को यहां भीड़ जुटती है किंतु महाशिवरात्रि या शिवरात्रि को यहां का नजारा देखने लायक होती है। भरपूर सिंह- (शिवालय के निर्माण करवाने वाले) इस शिवालय पर प्रतिदिन सुबह सवेरे सबसे पहले भरपूर सिंह की पत्नी शकुंतला देवी ही पूजा अर्चना करने आती है। उनका पुत्र रोहित कुमार व बच्ची शर्मिला भी अक्सर शिवालय पर आकर पूजा करते हैं। भरपूर सिंह भी सबसे पहले अपनी दुकान पर जाने की बजाय शिवालय पर आकर पूजा करता है। भरपूर सिंह का कहना है कि वे वर्ष 2001 से लगातार यहां सुबह सवेरे आकर पूजा करते हैं तथा झाड़ू लगाकर शिवालय को साफ सुथरा बनाते हैं। कोरोना के दृष्टिगत फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भक्तों को शिवालय पर आने दिया जाएगा। मास्क पहनकर ही आने दिया जाएगा। शिवालय के बाहर भी सेनिटाइजर रखा जाएगा। शकुंतला देवी (शिव की अन्यय भक्त एवं देखरेख करने वाली) मैं वर्ष 2001 से लगातार प्रत्येक सोमवार को तथा शिवरात्रि आदि पर्वों पर शिवालय पर रहकर भक्तों की सेवा करने तथा साफ सफाई करने का काम करती हूं। मुझे शिव के प्रति गहन आस्था है और लोगों में अपार भक्तिभाव देखने को मिलता है। भारी भीड़ यहां आती है। फोटो कैप्शन 5: कनीना के शिवालय का दृश्य। साथ में भरपूर सिंह एवं शकुंतला देवी की फोटो
Friday, July 3, 2020
एक मरा, आया भूकंप ************************* ******************** ************************** कनीना। कनीना में एक बिजली कर्मचारी की बिजली का करंट लगने से शुक्रवार शाम मौत हो गई। उन्हें कनीना के अस्पताल पर लाया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। उधर कनीना में शुक्रवार शाम भूकंप के झटके लगे जिसके चलते मोर बोलने लगे, लोग घरों को छोड़ कर बाहर आ गए। ऐसा लगा कि जैसे दीवारें हिल रही हो, लोगों में डर का माहौल था किंतु भूकंप समाप्त होते ही लोग घरों के अंदर चले गए। भूकंप कुछ सेकंड चला। दीवारों के पर्दे हिलने लगे तस्वीरें गिर गई, अलमारी में रखी किताबें गिर गई।
गैस पर आधारित शवदाह गृह शुरू न होने से रोष, - लाखों रुपए की मशीन दो सालों से खा रही है जंग ************************************** कनीना। कनीना के राजकीय कालेज के पास शमशान घाट पर पूर्व एसडीएम संदीप सिंह द्वारा करीब 25 लाख रुपए की गैस पर आधारित शवदाह गृह बनवाकर मशीन तो स्थापित करवा दी गई थी किंतु दो वर्ष से भी अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी शवदाह गृह शुरू नहीं हो पाया है जबकि इसके लिए बिजली कनेक्षन तथा गैस सिलेंडर की आपूर्ति हो चुकी है। मिली जानकारी अनुसार गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से लाखों रुपए की गैस पर आधारित शवदाह गृह मशीन को एक साल पूर्व मंगवाई गई थी। शमशान घाट पर इसे स्थापित भी कर दिया गया था। इसके लिए बिजली कनेक्शन और सिलेंडरों की व्यवस्था की जानी थी, 6 सिलेंडर तथा बिजली कनेक्शन भी मिल चुका है किंतु लंबे अरसे तक इंतजार करने के बावजूद भी यह गैस पर आधारित शवदाह गृह शुरू नहीं हो पाया है। इसी को लेकर विगत दिनों भारत विकास परिषद ने एक वर्ष पूर्व एसडीएम का अभिषेक मीणा को भी एक मांग पत्र सौंपा था जिसमें शवदाह गृह को शुरू किए जाने की मांग की गई थी। कनीना मंडी के शिव कुमार अग्रवाल ने बताया कि शवदाह गृह गैस पर आधारित है जिसके लिए छह गैस सिलेंडरों की जरूरत थी जो आपूर्ति हो चुकी है वहीं बिजली कनेक्शन भी मिल चुका है। गोरखपुर से यह मशीन मंगवा कर स्थापित की गई थी ताकि सबको एक गैस सिलेंडर में ही अंतिम संस्कार किया जा सके। इससे पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगेगी वहीं पेड़ों की कटाई भी रुकेगी लेकिन अभी तक गैस पर आधारित शवदाह गृह को शुरू नहीं किया गया है। उधर का कनीना के महेश बोहरा, रवि कुमार, सुरेश कुमार डॉ सुरेश कुमार तथा कई लोगों ने बताया कि कस्बा कनीना में गैस पर आधारित शवदाह गृह एक बेहतर प्रयास है किंतु इसको नगरपालिका और प्रशासन अभी तक शुरू नहीं कर रहे हैं जिसके चलते शवों के दहन से प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि अविलंब शवदाह गृह को शुरू करवाया जाए। जब इस संबंध में नगर पालिका प्रधान सतीश जेलदार से बात की तो उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने मशीन को कंपनी ने अभी तक हैंड ओवर नहीं किया है वहीं कंपनी के करीब छह लाख रुपये बाकी हैं। बार बार नोटिस दिया जा चुका है किंतु इसे हैंड ओवर करने का काम पूरा नहीं किया जा रहा है। उधर जानकारों ने बताया गैस पर आधारित शवदाह गृह शुरू होने से सबसे बेहतर कार्य वायु प्रदूषण से बचना होगा। यह महज एक गैस सिलेंडर में एक शव को जला देगा। इसके चलते प्रदूषण भी कम होगा वहीं अंधाधुंध पेड़ों की कटाई भी रुक जाएगी। वैसे भी क्षेत्र में इस प्रकार के शवदाह गृह है केंद्र की मांग लंबे समय से चल रही थी किंतु एसडीएम संदीप सिंह के तबादले के बाद यह शवदाह गृह अधर में लटक गया था बाद में और भी एसडीएम आये किंतु इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। यहां रखी हुई मशीन जंग खा रही है। जिसे अविलंब शुरू किए जाने की मांग उठने लगी है। इसी मांग को लेकर भारत विकास परिषद के प्रधान कंवरसेन वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने भी इस संबंध में एक ज्ञापन एक वर्ष पूर्व एसडीएम कनीना अभिषेक मीणा को सौंपा था जिसमें उन्होंने इसे शुरू किए जाने की मांग की थी। सामने फोटो कैप्शन 2: गैस आधारित शवदाह गृह का नजारा।
विश्व हिन्दू परिषद् ने उन्हाणी के राजेश को किया सम्मानित ************************************** कनीना। कोरोना काल की विकट परिस्थितियों के दौरान इस महामारी को रोकने के लिए करोना योद्धा दिन रात लगे हुए हैं। इन कर्मठ कर्मवीर योद्धाओं का हौसला अफजाई के लिए विभिन्न संस्थाएं इनको सम्मानित कर रही है। इसी सम्मान की कड़ी में विश्व हिन्दू परिषद् की चंडीगढ़ शाखा ने कनीना उपमंडल के उन्हाणी निवासी राजेश कुमार को करोना योद्धा सम्मान पत्र प्रदान किया है। राजेश कुमार ने बताया कि विश्व हिन्दू परिषद चंडीगढ़ के मीडिया प्रभारी मनोज शर्मा व परिषद् के मंत्री सुरेश राणा ने उन्हें दूरभाष पर सूचना दी कि करोना महामारी के समय आपके द्वारा दी गई सेवाओं ने मानवता की नई मिसाल कायम की है आपने एक योद्धा की भांति सेवा कार्य किए जिसके लिए विश्व हिन्दू परिषद चंडीगढ़ आपको करोना योद्धा सम्मान पत्र प्रदान करती है और आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है। गौरतलब है कि शिक्षक राजेश कुमार ने करोना काल के दौरान बच्चों को आनलाइन शिक्षण कार्य के बाद, पशु पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था,लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इस सम्मान के मिलने पर उन्हें बड़ी खुशी हो रही हैं। फोटो कैप्शन: राजेश उन्हाणी
आरती राव के जन्मदिन को विधायक सीताराम यादव ने त्रिवेणी रोप कर मनाया ************************************ कनीना। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की पुत्री आरती राव के जन्म को डीएवी के पास त्रिवेणी लगाकर जन्म दिन मनाया। इस मौके पर मुख्य अतिथि सीताराम यादव विधायक ने त्रिवेणी लगाकर मनाया। सीताराम ने कहा कि पेड़ पौधे लगाने से धरती का का शृंगार होता है, प्रकृति साफ-सुथरी रहती है। और प्रकृति बचेगी तो इंसान भी बच जाएगा। पेड़ पौधे नहीं होंगे तो इंसान मृत्यु के कगार की ओर चला जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सभी का दायित्व बनता है कि पर्यावरण को साफ सुथरा रखें। दिनोंदिन पर्यावरण में हो रही छेड़छाड़ के चलते विभिन्न प्रकार की आपदाएं आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इंसान की जिंदगी का संबंध सीधे पर्यावरण और पेड़-पौधों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उन्होंने अपने आसपास जहां भी संभव अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाकर पर्यावरण एवं प्रकृति की देखभाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी भी वक्त है इंसान अपने भविष्य को बचा सकता है। उन्होंने हर इंसान को एक कम से कम हर वर्ष एक पेड़ लगाने और उसकी सुरक्षा करने की अपील की। इस कार्यक्रम में नगर पालिका प्रधान सतीश जैलदार चेयरमैन अटेली जतिन अग्रवाल, वॉइस चेयरमैन अशोक ठेकेदार उमेश यादव, राजेंद्र सिंह लोढा, सतवीर यादव जिला उपाध्यक्ष, पूर्व नगर पालिका प्रधान अटेली सुगन चंद, पार्षद अशोक जांगड़ा, अटेली मंडल अध्यक्ष थान सिंह, सरपंच भडफ़ महेंद्र सिंह, युवा नेता मनोज यादव, हनुमान सेहलंगिया सहित विभिन्न जन मौजूद थे। फोटो कैप्शन 1:पौधारोपण करते अटेली विधायक सीताराम यादव।
उगाये जा रहे हैं औषधीय पौधे -औषधीये पौधों से किसान होने लगे हैं परिचित
************************************** कनीना। भारतवर्ष में 45 हजार से भी अधिक पादप प्रजातियां पाई जाती हैं। चरक संहिता एवं सुश्रुत संहिता सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रन्थों में स्वस्थ जीवन जीने के अनेक सुझाव दिए गए हैं वहीं दूसरी ओर विभिन्न पेड़-पौधों का उल्लेख भी किया गया है। एक समय था जब किसान इन पौधों से परिचित नहीं था किंतु अब इनको उगाना शुरू कर दिया है। बुजुर्ग शिक्षक राम अवतार बताते हैं कि रोगों के उपचार में नीम, नीम्बू, बेल, तुलसी, हल्दी, हींग, अदरक, लहसुन, जीरा, सौंफ एवं काली मिर्च सहित अनेक पेड़-पौधों एवं उनके विभिन्न उत्पादों का प्रयोग किये जाते हैं। लेकिन इनके अतिरिक्त भी अनेक पेड़-पौधों ऐसे हैं जिनके औषधीय गुणों की अधिक जानकारी कम है। उनका कहना है कि सर्पगंधा का प्रयोग उच्च रक्तचाप को कम करने, अनियमित हृदय गति को ठीक करने, विभिन्न चर्म रोगों, जैसे- छाले, खुजली, अधिक पसीना आना तथा अनिद्रा व मानसिक विकार को दूर करने के लिए किया जाता है। वहीं अश्वगन्धा शारीरिक दुर्बलता को दूर कर शरीर को हृष्ट-पुष्ट एवं बलवान बनाता है। यह गठिया के दर्द, जोड़ों की सूजनके उपचार में भी किया जाता है। इस पेड़ की पत्तियां शीघ्र घाव भरती हैं। उधर मोड़ी के अजय कुमार, कांता, गजराज सिंह का कहना है कि अर्जुन हृदय रोग की एक अचूक औषधि है। अर्जुन की छाल हृदय रोगों के साथ-साथ बुखार एवं घाव भरने में भी लाभदायक है। इसके काढ़े से घाव को साफ किया जाता है।इसको उगा रखा है वहींग्वारपाठा भी उगाते हैं जो बुखार, जिगर एवं प्लीहा के बढऩे, त्वचा सम्बन्धी रोगों, कब्ज, बवासीर, पीलिया, सूजाक, मासिक धर्म सम्बन्धी रोगों, गठिया तथा जलोदर में अत्यन्त लाभकारी है। राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह किसान बताते हैं कि पत्थरचटा की पत्तियों का रस आँव, पेचिश, खूनी पेचिश, पथरी तथा हैजे में दिया जाता है। इसकी पत्तियाँ जलने, कटने, जहरीले कीट-पतंगों के काटने तथा विभिन्न प्रकार के घावों के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। इसी प्रकार सदाबहार पौधा फूलों के लिए उगाकर लाभ उठा रहे हैं। यह जहरीले कीट-पतंगों के काटने पर सदाबहार की पत्तियों का रस लगाने से आराम मिलता है। वैद्य बालकिशन, एवं श्रीकृष्ण करीरा बताते हैं कि मकोय, चिरचिटा, अरंड,आक, सफेदा आदि पौधे घरों उगाकर उनके औषधीय लाभ लेने चाहिए। विभिन्न प्रकार के रोगों से न केवल छुटकारा मिलता है अपितु लाभकारी हैंं। उनका कहना है कि क्षेत्र में भूमि आंवला, सांटी, चौलाई, कोहेंद्रा, बाथू आदि खूब उगते हैं जिनका लाभ लेना चाहिए।
Thursday, July 2, 2020
कंटेंटमेंट जोन में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त- एसडीएम **************************** ************************************* ************************** कनीना।एसडीएम कनीना रणबीर सिंह ने बृहस्पतिवार को कार्यालय में बैठक का आयोजन किया। बैठक में कंटेंटमेंट जोन से संबंधित सभी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए एसडीएम रणबीर सिंह ने कहा कि कंटेंटमेंट जोन में संक्रमितों से लगातार शिकायतें मिल रही है। अधिकारी डृयूटी लगाने के बाद भी जोन की चेकिंग नहीं कर रहे है। वे स्वयं भी तीन-चार बार कंटेंटमेंट जोन का औचक निरीक्षण कर चुके है। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि यह महामारी का समय है, हमें अपना बचाव करते हुए आमजन व संक्रमित लोगों की भी समस्याओं की तरफ पूरा ध्यान रखना होगा। अगर कोई कर्मचारी व अधिकारी लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। बिना मास्क के घूमने वालों के करें चालान: एसडीएम रणबीर सिंह ने कहा कि बिना मास्क घूमने वाले व थूकने वाले लोगों के चालान काटने में तेजी लाए। एसडीएम ने कहा िकवे स्वयं भी बिना मास्क के घूमने वाले लोगों के चालान कर रहे है। उन्होंने कहा कि अकसर देखा जा रहा है कि कर्मचारी अपने दफृतरों में ही बैठे रहते है। जबकि चालान काटने में रूचि कम दिखा रहे है। मेरिज पैलेस के संचालकों की ली बैठक एसडीएम रणबीर सिंह ने शाम को मेरिज पैलेस संचालकों की भी बैठक ली। संचालकों को एसडीएम ने कहा कि शादी-विवाह में सोशल डिस्टेंथ का पूरा ध्यान रखा जाए। इसके साथ अगर कोई पैलेस में बिना मास्क के आता है तो उसकी जानकारी प्रशासन को दे। उन्होंने कहा कि पैलेस में अधिक लोगों की भीड को एकत्रित न होने दें। अगर वे ऐसा करते है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फोटो कैप्शन 2: एसडीएम बैठक लेते हुए।
कनीना में एक और कोरोना केस आने से अब कोरोना मरीजों की संख्या हुई 42 ************************************** कनीना। कनीना क्षेत्र में अब तक कोरोना के 42 केस पहुंच गए हैं कनीना का एक और कोरोनावायरस जिसमें एक परिजन जिसमें उनके परिजन पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने जाकर स्क्रीनिंग की कथा कंटेनमेंट जोन बनाया। मिली जानकारी अनुसार डाक्टरों की अध्यक्षता में राजेश कुमार, सुनील कुमार, सुशीला, सुमन और आशा वर्कर ने मिलकर कनीना मंडी में मिले केस बतौर स्क्रीनिंग की। इस मौके पर कंटेनमेंट जोन में चार घर तथा 18 व्यक्ति तथा बफर जोन में 29 घर तथा 144 व्यक्तियों का स्क्रीन किया गया। उधर मोबाइल टीम नारनौल ने भी कनीना में दौरा करके विभिन्न स्थानों पर विशेष कर कोंटेंनमेंट जोन में रहे लोगों का सैंपल लिया कोरोना पर नियंत्रण करने के लिए त्वरित कार्रवाई चल रही है। कोरोना के केस बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐतिहात के नियमों का पालन न करने से भी समस्या बढ़ रही है। उधर डॉ धर्मेंद्र एसएमओ कहा कि जब तक नियमों का सख्ती से पालन नहीं करेंगे तब तक यह समस्या बरकरार रहेगी। उन्होंने कहा कि हाथ अच्छी प्रकार सैनिटाइजर से धोएं, मास्क प्रयोग करें, ब्लाउज प्रयोग करें। इस प्रकार रोग से बचने बचा जा सकता है। फोटो कैप्शन 1: स्क्रीनिंग करते हुए कनीना मंडी में स्वास्थ्य विभाग के लोग।
गर्मी से बचे है नुकसानदायक ********************************* कनीना। गर्मी बढ़ रही है जिसको लेकर डॉक्टर धर्मेंद्र एसएमओ ने कहा कि कोरोना के बढऩे के साथ साथ गर्मी बढ़ रही है। गर्मी में बाहर नहीं निकलना चाहिए। गर्मी से बचना चाहिए। धूप तेज होती है, बहुत जरूरी काम हो तो मास्क लगाकर सिर को ढक कर ही बाहर जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इनसे जहां फूड प्वाइजनिंग की समस्या होती है उल्टी और दस्त लगते हैं। ऐसे में उन्होंने कहा कि गर्मी के साथ-साथ कोरोना से बचने के लिए नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गर्मी में उल्टी तथा दस्त की बीमारी बढऩे की संभावना रहती है। ऐसे में उन्होंने कहा कि गर्मी के समय में घर के अंदर ही समय बिताए तो ज्यादा बेहतर होगा।
इस बार कावड़ आने की संभावनाएं क्षीण ************************************ ********************* कनीना। इस बार 5 जुलाई से लग रहे सावन में कावड़ आने की संभावनाएं क्षीण हो गई हैं। हर वर्ष लाखों कांवड़ लाकर बाघेश्वरी धाम पर चढ़ाई जाती है लेकिन इस बार कोरोना के चलते विभिन्न राज्यों के अधिकारियों की बैठक आयोजित हो चुकी है जिसमें किसी भी भक्त को गंगाजल लेकर चलने की अनुमति नहीं है। यदि ऐसा करता है तो उसे 14 दिन को क्वारेंटाइन में रखा जाएगा और उस अवधि का जो खर्चा होगा उसी से लिया जाएगा। ऐसे में लाखों भक्त इस बार मायूस होकर बैठेंगे। सावन माह में कनीना उपमंडल के गांव बाघोत में सबसे बड़ा मेला लगता है। जिसे बाघोश्वरी धाम मेला नाम से जाना जाता है। इस बार कांवड़ नहीं चढऩे की पूरी संभावना बन गई है। उधर आगे देखना है क्या बाघेश्वरी धाम पर लगने वाले मेले पर भी प्रतिबंध लगेगा या नहीं। हर वर्ष सावन माह में कृष्ण त्रयोदशी को यह मेला आयोजित होता है।
इको फें्रडली रूप से हर अवसर को पर्यावरण संरक्षण से जोडऩे की अपील के साथ गतिशील हैं पिंकी यादव ************************************ कनीना। काउंसलर पिंकी यादव कनीना क्षेत्र के आस-पास इको-फ्रेंडली रूप से हर अवसर को पर्यावरण संरक्षण से जोडऩे की अपील के साथ गतिशील हैं। विभिन्न महिलाओं को साथ लेकर पिंकी यादव ने न केवल पौधरोपण को गति प्रदान बल्कि महिलाओं को उनके आरक्षण के बारे में भी जागरूक किया। इन्होने हर अवसर पर पौधरोपण करने का कार्य किया हैं। चाहे बेटियों के जन्मदिवस पर एक बेटी -एक पौधा मुहिम हो,जन्मदिन एक सन्देश अभियान मिशन हो या रक्षाबंधन को वृक्षाबंधन से जोडऩे का मिशन हो हर मिशन में समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं। इन्होंने अब तक घर से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर 1000 पौधे लगाकर पर्यावरण को संरक्षित करने में आहुति प्रदान की हैं एवं 2000 से ज्यादा पौधे वितरित भी किए हैं। पिंकी यादव का कहना हैं की पर्यावरण के संरक्षण के लिए हम सभी को साँझा कदम बढ़ाने की आवश्यकता हैं। प्रकृति का संतुलन भी पर्यावरण पर ही निर्भर करता हैं। हमारे त्यौहार एवं ऋतुएं भी पौधों के साथ जुड़ी हुई हैं। हमें हमारे त्योहारों को इको-फ्रेंडली रूप से पर्यावरण संरक्षण को समर्पित सरोकारों के साथ जोड़कर मनाना चाहिए। हमें जीवनशैली से ज्यादा सोच में बदलाव लाना पड़ेगा। कुदरत से छेड़छाड़ हमारे जीवन के लिए नुकसानदायक हैं। प्रकृति के पहरेदार हरे पेड़ों को कटाई से बचाना चाहिए। आज मानवीय मूल्य के साथ समझदारी के हिसाब से पर्यावरण संरक्षित जैसे अभियानों को दिशा प्रदान करनी चाहिए। जागरूकता एवं संवेदनशीलता ही हमें पर्यावरण प्रेमी बना सकती हैं। पर्यावरण को समर्पित मुहिम तभी सार्थक होगी जब ज्यादा से ज्यादा युवा इस मिशन में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। प्रत्येक व्यक्ति को जन्मदिन के साथ -साथ अन्य अवसरों पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए ताकि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न हो सके। फोटो कैप्शन: पिंकी
भीषण गर्मी से पशु पालक परेशान ********************************** कनीना। भीषण गर्मी पडऩे के साथ साथ अब लू चल रही हैं। दिन के समय घर से बाहर निकल पाना कठिन हो गया है। गर्मी में पेयजल एवं पशुओं के लिए जल की समस्या बढ़ रही है। पशु पालक बेहद परेशान हैं। दूध देने वाले पशु गर्मी के चलते कम दूध दे रहे हैं। पशुओं को भी गर्मी से बचाना जरूरी है ताकि पशुओं के दूध में गिरावट न आए। पशुओं में गर्मी भी बढ़ रही है जिसे दूर करने के लिए देशी औषधियां अधिक कारगर होती हैं। हरियाणा में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है तापमान अधिक हो चुका है। जिसके चलते इंसान और पशु काफी तकलीफ में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार गर्मी की वजह से पशुओं का दूध उत्पादन काफी कम हो गया है साथ ही पशुओं में गर्मी से होने वाले रोगों का काफी इजाफा हुआ है जिसके चलते किसान अपने पशुओं को दिन में कई कई बार नहला रहे हैं। जिससे पानी का दुरुपयोग हो रहा है।अच्छा दाना चारा कैल्शियम विटामिन मिनरल मिक्चर खिला रहे हैं। सूखा चारा और फीड के भाव में काफी इजाफा हुआ है साथ ही इन भारी-भरकम दवाइयों के खर्चे से किसान की पशुओं से आमदनी कम होती जा रही है। ऐसे बचाएं रोगों से एवं गर्मी से- इस बारे में कनीना के पशु वैद्य विक्की पंसारी का कहना है कि गर्मी से बचाने वाले पेड़ पौधे और फल बेल फल लेसवा आंवला, कैरी गुलाब सौंफ जो लोध गोखरू वाली घास,पोदीना, छुईमुई, दूधी धनिया,पालक मेहंदी गोंदिया, निंबू, तरबूज इसबगोल मुल्तानी मिट्टी शीशम पेड़ पौधों का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना है कि सोहजना पेड़ की पत्तियों से पशुओं को चारे के रूप में खिलाने से दूध की मात्रा में काफी इजाफा होता है। अगर किसान इस तरह के प्रयोग अपने पशुओं पर करेंगे तो लाभ मिलेगा।
पर्यावरण बिगाडऩा इंसान के हाथ में ********************************* ************************************* संवाद सहयोगी,कनीना। दिनोंदिन पर्यावरण बिगड़ता जा रहा है जिसके चलते तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, पेयजल संकट,छा रहा है। कनीना के सुरेंद्र कुमार, महेंद्र शर्मा का कहना है कि दक्षिण हरियाणा में भारी मात्रा में जाटी के पेड़ होते थे किंतु दिनों दिन किसानों ने उनको काट डाला है जिसके चलते बारिश कम हो रही है। वातावरण दूषित हो रहा है। सुमेर सिंह चेयरमैन, रवि कुमार, सुरेश कुमार आदि का कहना है कि लोग पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं। सड़कों पर एवं नहर के किनारे पेड़ों को नहीं बख्शा जा रहा है। यही कारण है कि वातावरण दूषित होता जा रहा है। तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। सुमेर सिंह चेयरमैन का कहना है कि दिनोंदिन पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है जल को दूषित किया जा रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने की लोगों से अपील की है। कनीना के अजीत कुमार, सूबे सिंह,राजेंद्र सिंह का कहना है ज्यों ज्यों पेड़ पौधे काटे जाएंगे त्यों त्यों तापमान बढ़ता जाएगा और वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान यूं ही बढ़ता गया तो एक दिन ऐसा आएगा इंसान का जीना दूभर हो जाएगा। कनीना के रविंद्र कुमार पूर्व शिक्षक इस मामले में अहम भूमिका निभा रहे हैं और भारी संख्या में पेड़ पौधे लगा रहे हैं। महावीर सिंह करीरा, गजराज सिंह मोड़ी, आशा यादव कनीना विभिन्न स्थानों पर एवं विभिन्न तरीकों से पेड़ पौधों की रक्षा कर रहे हैं। वहीं दूसरे लोगों को भी पेड़ पौधे लगाने की प्रेरणा दे रहे हैं। शिक्षाविद निर्मल शास्त्री, कंवर सेन वशिष्ठ, कृष्ण सिंह पूर्व प्राचार्य, बनवारी लाल का कहना है कि जीवन तभी संभव हो पाएगा जब हम पेड़ पौधे लगाएंगे, पानी को बचाएंगे तथा प्रदूषित होने से वातावरण को बचाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण के कोहिनूर बने, सीगड़ा के बेटे लक्की राव सिगडिय़ा *********************************** ********************************
राष्ट्रीय स्तर पर देश भर में एक लाख पौधे लगाने के संकल्प के साथ सेवारत हैं लक्कीराव सीगड़ा
कनीना। युवाओं के बिना न तो हम अपने समाज को समृद्ध बना सकते हैं और न ही अपने पर्यावरण को । पर्यावरण में युवाओं की भागीदारी बहुत आवश्यक हैं,अपनी इसी सोच के कारण लक्कीराव सीगड़ा अनेकों युवाओं के प्रेरणास्त्रोत है,जिसके फलस्वरूप आधुनिक दुनिया में ऐसी भव्य सोच रखने वाले लक्की सीगड़ा आज अपने जीवन को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में समर्पित कर सैकड़ों युवाओं एवं साथियों को पर्यावरण संरक्षण की राह पर ला चुके हैं। हाल ही में लक्की सीगड़ा बीएमडी क्लब के चेयरमैन के रूप में सेवा करते हुए एक परिवार-एक पौधा,एक बेटी-एक पौधा एवं पौधा रोपो - मृदा अपरदन रोको,रक्षाबंधन पर वृक्षाबन्धन जैसे मिशन के तहत पूरे देश में 1 लाख पौधे लगाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं आम इंसान सोचता है कि वो तो समाजसेवा कर ही नहीं सकता। समाजसेवा करने के लिए समय और पैसा चाहिए और दोनों चीज उनके पास नहीं होती। क्योंकि आम जनता का पूरा समय पैसा कमाने में ही खर्च हो जाता है। लेकिन आज हम मिलेंगे एक ऐसे व्यक्ति से, जो न तो कोई नेता है, न हीं कोई बड़ा अधिकारी।फिर भी उसने देश के सामने समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। इस युवा का नाम है 'लक्की राव सीगड़ा Ó, जो गांव सीगड़ा जिला महेन्द्रगढ़ हरियाणा के रहने वाले हैं। ऐसे लोग बिरले होते हैं जो ऐसे सपने सोचते हैं और उनको पूरा भी करते हैं । इसी प्रकार की सोच साधारण परिवार में जन्मे एक बेटे की है,जो एक पर्यावरण प्रेमी बन कर देश में पर्यावरण का संरक्षण के प्रति प्रेम की लहर लाना चाहता है। पिछले 7 वर्षों से समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में गतिशील होकर देश के कोने-कोने में बढ़-चढ़कर अतुलनीय योगदान दे रहे है। साथ ही जल संरक्षण ,पर्यावरण संरक्षण ,युवा सशक्तिकरण,शहरी और ग्रामीण जनता के हितो के प्रयास के लिए एवं सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए भी कार्य कर रहे हैं। लक्की राव सीगड़ा को सामाजिक लोगों से जुडऩे एवं कार्य करने की प्रेरणा अपने स्वर्गीय दादा जी अमीलाल यादव जी से भी मिली जो एक किसान थे। पढ़ाई के दौरान भी सीगड़ा का प्रकृति से मेरा बहुत लगाव था। गांव के कुछ युवा साथी भी एकत्रित होकर अक्सर बरसात के मौसम में भी पौधे लगाते थे।पढ़ाई के दौरान ही एक दूसरे की सहायता करते थे उसी सिलसिले में आगे बढ़ते-बढ़ते एक ग्रुप बनता गया। वर्तमान में सामाजिक संस्था बीएमडी क्लब के चेयरमैन पद का प्रतिनिधित्व करते हुए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नि:स्वार्थ भाव से कार्य किया जा रहा हैं। लक्की राव सीगड़ा ने पर्यावरण संरक्षण और पेड़-पौधों के बारे में कहा की वृक्षों से ही प्रकृति की पहचान होती हैं। केवल पेड़ लगाना ही काफी नहीं हैं बल्कि उसकी मजबूती तक देख - रेख करना भी जरूरी हैं । अगर हम पर्यावरण को सुरक्षित नहीं करेंगे तो भविष्य में आने वाली पीढिय़ों की सुरक्षा कैसे करेंगे। हमें हर अवसर पर कम से कम एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए और लगाकर उसका लालन -पालन करना चाहिए। हमें हमारे द्वारा लगाए गए पौधों की देखभाल स्वयं करनी चाहिए। अगर पर्यावरण स्वच्छ होगा तो हमारे आस -पास का पड़ोस स्वच्छ होगा। पेड़-पौधे कुदरत का एक बहुत ही अनमोल तोहफा है। पेड़-पौधे. ये हमें फल, फूल, लकड़ी, बांस, ईंधन, इत्यादि बहुत सी चीजें प्राप्त होती हैं। पेड़-पौधों के बिना जीवन असंभव है। पेड़-पौधों की वजह से हीं आज इस संसार में हरियाली है और इन्हीं की वजह से आज हम जीवित हैं। पेड़-पौधे बिना हमसे कुछ लिए ही हमारी वर्षों तक सेवा करते हैं। भूमि को उपजाऊ बनाने में के लिए भी वृक्ष बहुत ज़रूरी हैं। पेड़ पौधे हमारे पृथ्वी को रंगीन बनाते हैं इनकी हरियाली और फूलों के रंग धरती की सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं। पेड़ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होते हैं। पेड़ हर समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पेड़-पौधे शांतिपूर्ण एवं सुंदरतापूर्ण माहौल बनाते हैं। पेड़ ऑक्सीजन प्रदान करके, वायु की गुणवत्ता में सुधार, जलवायु में सुधार, जल संरक्षण, मिट्टी के संरक्षण और वन्यजीव को समर्थन देने के द्वारा पर्यावरण में विशेष योगदान देते हैं। लक्की सीगड़ा ने युवाओं को सन्देश देते हुए भी कहा की बिना युवाओं की कोई भी काम सफल नहीं होता है। जागरूकता एवं सवेदनशीलता ही हमें पर्यावरण प्रेमी बना सकती हैं। पर्यावरण को समर्पित मुहिम एक परिवार -एक पौधा तभी सार्थक होगी जब ज्यादा से जायद युवा इस मिशन में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। प्रत्येक व्यक्ति को जन्मदिन के साथ -साथ अन्य अवसरों पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए ताकि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न हो सके। हमें हरसंभव पेड़ो की कटाई को रोकना चाहिए एवं अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए। चेयरमैन लक्की सीगड़ा के एक परिवार-एक पौधा मिशन से देश के हर घर- परिवार में जाग्रति आएगी और यह मिशन देशभर के युवाओं एवं समाज के साथ-साथ परिवारों को कम से कम एक पौधा लगाकर उसे लालन-पालन करने की प्रेरणा भी देगा। जिससे देश भर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई क्रांति का आगाज होगा। लक्की सीगड़ा का स्वप्न है कि वह इंसानियत के लिये एक मिशाल बनें और उसकी पहचान एक इंसान के रूप मे हो और इसी पहचान को लेकर एक कारवाँ तैयार हो, जो इंसानियत कि पुनस्र्थापना करे एवं गर्व से कहे हम है इंसान। पर्यावरण के प्रति इसी समर्पण को देखते हुए अनेकों बार लक्की राव सिगडिय़ा को स्टैंड फॉर सोशल अवार्ड,राष्ट्रीय अवार्ड विलक्षणा समाज सारथी सम्मान,भारत लीडरशिप अवार्ड,सोशल कंट्रीब्यूशन अवार्ड,इंडियाज साइनिंग स्टार अवार्ड,अपराजित सम्मान सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों, प्रशासनिक अधिकारियों, सरकारी एवं गैर सरकारी विभागों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय,राज्य स्तरीय और दर्जनों क्षेत्रीय सम्मान से भी नवाजा जा चुका हैं। इनके द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर पर कई युवा सम्मेलनों,पर्यावरण जागरूकता सम्मेलनों सहित अन्य सेमिनारों में भी भाग लेकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया हैं। फोटो संलग्र हैं।
Wednesday, July 1, 2020
सेवानिवृत्ति कर्मी का अहं भाग-कंवरसेन वशिष्ठ **************************** ******************************** कनीना। राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला पड़तल प्राथमिक स्कूल हेड टीचर सुरेंद्र कुमार की सेवानिवृत्ति समारोह लॉकडाउन नियमों का पालन करते हुए राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला पड़तल में आयोजित की गई जिसमें मुख्य अतिथि राजकीय वरिष्ठ विद्यालय रामबास डा मुंशी राम रहे जबकि अध्यक्षता ईएसएचएम राज कुमार ने की। इस मौके पर मुख्य वक्ता कंवर सैन वशिष्ठ प्रधान भारत विकास परिषद शाखा कनीना ने सुरेंद्र कुमार के बारे में बताया कि शिक्षा विभाग का एक अनमोल रत्न अपने 24 साल 7 महीने सर्विस पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हो गये हैं जिन्होंने अपने जीवन में शिक्षा के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां दर्ज की है। बच्चों का सर्वांगीण विकास करने विशेषता हासिल है उनका जीवन व अध्यापन कार्य प्रभावी था वहीं ईमानदारी की एक मिसाल रहे हैं। वे सभी अध्यापक व बच्चे उनके प्रेरित थे। इस मौके पर सुरेंद्र कुमार ने विदाई भाषण भावुक होकर कहा सरकार नियमों के अनुसार 58 साल,में रिटायर होना आवश्यक है। इस स्कूल की 14 साल की सर्विस में सभी अध्यापक व छात्र से इतने गहरे संबंध हो गए थे जैसा अपने परिवार हो और उनकी आवश्यकता होगी वे हाजिर रहेंगे। इस मौके पर डा मुंशीराम यादव ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी इमानदारी से अध्यापन कार्य करने वाला, किसी भी कार्य करने के लिए आगे आकर कार्य में सहयोग देना ,कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखना, सभी से मिलजुल कर रहना, इनके अमिट कार्य की छाप हमारे दिलों पर डाली है वो भुलाई नहीं जा सकती। उनके बड़े भाई के कैप्टन जसवंत सिंह मुख्याध्यापक रतन सिंह ने सामाजिक कार्य करने वह सुखी जीवन बिताने का आशीर्वाद दिया। इस मौके पर सत्येंद्र शास्त्री,रामनिवास ,बालकुमार ,ब्रह्मानंद ,अनिल ,अंजू ,सतीश, राजेश, अध्यापक अरविंद,हंसराज ,अध्यापक कैलाश चंद्र। फूल माला व पगड़ी से स्वागत व सम्मान किया और सभी सुरेंद्र को उनके घर कनीना तक उनके सम्मान के साथ लाए। फोटो कैप्शन 2: सुरेंद्र कुमार एचटी के विदाई समारोह का नजारा।
26 जुलाई तक अवकाश घोषित *************************** ************************ कनीना। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबंधित कर्मचारी संघ हरियाणा एवं स्कूल टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया की मांग पर आखिरकार शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 जुलाई से 26 जुलाई तक घोषित कर दिये हैं। जानकारी देते हुए अध्यापक संघ नेता धर्मपाल शर्मा ने बताया कि एक ओर जहां कोरोना वहीं गर्मी का माहौल था ऊपर से अब बारिश का वक्त भी आ गया है। इन परिस्थितियों में वह बार-बार ज्ञापन देकर मांग कर रहे थे कि आकाश घोषित किया जाए। आखिरकार शिक्षा विभाग हरियाणा ने कदम उठाते हुए अवकाश घोषित कर दिये हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक दिन रात शिक्षण ऑनलाइन शिक्षण कार्य करवा रहे थे। अब उन्हें थोड़ी राहत महसूस होगी।
सेनिटाइजर एवं मास्क प्रदान करने की मांग **************************** ********************************** कनीना। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन हरियाणा ने सामाजिक न्याय अधिकारिता एवं न्याय मंत्री हरियाणा सरकार को ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन हरियाणा अपनी मांगों का ज्ञापन ओमप्रकाश यादव राज्य मंत्री हरियाणा सरकार को सौंपेगी। इस संबंध में एक नोटिस नारनौल कार्यालय इंचार्ज रमेश कुमार को दे दिया है। महासचिव महेन्द्र सिंह ने ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के महासचिव ने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 28 हजार रुपये देने,सफाई के उपकरण देने, मास्क सेनेटराइजर, ग्लव्ज, साबुन व मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि जोखिम भत्ता 10000 रुपये, वर्दी भत्ता 8000 रुपये प्रति वर्ष दिया जाए। सामाजिक सुरक्षा व पेंशन योजना लागू किया जाए, पहचान पत्र व नियुक्ति पत्र जारी किया जाए, 250 जनों की आबादी पर एक ग्रामीण सफाई कर्मचारी लगाया जाए आदि प्रमुख मांगे हैं। इस मौके पर महेन्द्र सिंह कामरेड, सुभाष चन्द्र एडवोकेट, यूनियन के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण कुमार शामिल थे।
कोरोना महामारी व गलवान घाटी में हुई वारदात के बाद से लोगों ने तेजी से चीनी सामान का बहिष्कार करना किया शुरू ********************** ***********************************
-क्षेत्र की दुकानों पर चीनी सामान की बिक्री 45 प्रतिशत से घटकर हुई करीब 15 प्रतिशत -उपभोक्तओं द्वारा स्वदेशी वस्तुओं को दिया जा रहा है बढ़ावा कनीना। बीते कुछ समय से चीन की हरकतें देश के लोगों को गुस्सा दिलाती जा रही हैं। पहले तो चीन ने वुहान शहर से दुनियाभर में कोरोना वायरस को फैलाया और अब भारत की सीमा पर किए गए हमले से लोगों में जमकर आक्रोश भर गया है। अपने गुस्से को बताने के लिए लोग चीन के वस्तुओं के बजाय विकल्प के रूप में स्वदेशी वस्तुओं को खरीदने की तवज्जो दे रहे हैं। इसमें भी कई लोगों की प्राथमिकता है कि लोकल को वोकल किया जाए। कनीना खंड में भी लोगों ने चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार कर अपना रोष जताना शुरू कर दिया है। जिसके चलते चाइनिज सामान की खरीददारी पर काफी प्रभाव देखा जा सकता है। कस्बे में इलेक्टॉनिक सामान बेचने वाले व मोबाइल विक्रेताओं ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों के द्वारा चाइनीज सामान को काफी कम महत्व दिया जा रहा था। लेकिन अब गलवान में हुई घटना के बाद से इस पर काफी असर देखा जा सकता है। दुकानदारों ने बताया कि इससे पहले प्रतिदिन करीब 40 से 45 प्रतिशत सामान चाइनीज ही बिकता था। लेकिन अब यह केवल 15 से 20 प्रतिशत पर ही रह गया है। ऐसा लगता है कि कुछ समय के बाद यह भी बिलकुल बंद हो जाएगा। दुकानदारों ने सभी गलवान घाटी में हुई घटना को लेकर रोष प्रकट करते हुए लोगों को स्वदेशी सामान को महत्व देने की अपील की है ताकि देश आगे बढ़ सके। क्या कहते क्षेत्र के लोग व व्यापारी दीपक सिहोर ने बताया कि गलवान घाटी में चीन के सैनिकों द्वारा धोखे से मारे गए 20 जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को इस समय अपनी ताकत देखाकर चीन के बने उत्पादों का बहिष्कार करे व स्वदेश में बनी वस्तुओं के उपयोग पर बल दिया जाए। कपिल कोटिया ने बताया कि कोरोना महामारी की वजह से लोगों के द्वारा पहले से की चीन से आने वाले सामान का काफी कम उपयोग किया जा रहा था। लेकिन गलवान घाटी में हुई घटना के बाद से लोगों के द्वारा लगभग पूर्ण रूप से ही चीन के सामान का बहिष्कार किया जा रहा है। जो एक सही कदम है इससे जहां स्वदेशी कम्पनियों के सामान की खपत बढ़ेगी वहीं चीन को भी आर्थिक रूप से छति पहुंचेगी। दुकानदार ओमबीर यादव ने बताया कि उसकी दुकान पर प्रतिदिन चीन की कम्पनी के द्वारा बनाए गए दो से तीन मोबाइल बिकते थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों से दुकान पर आने वाले लोगों के द्वारा चीन की कम्पनी के द्वारा बनाए गए मोबाइलों को अनदेखा किया जा रहा है। लोग चीन की कम्पनियों के बजाए अन्य कम्पनियों के मोबाइल को महत्व दे रहे है। दुकानदार प्रदीप महेश्वरी ने बताया कि कोरोना महामारी व गलवान घाटी में हुई घटना के बाद से क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे देश में ही चीन की कम्पनियों के द्वारा बनाए जाने वाले सामानों की मांग काफी घटी है। इससे पहले चीन की कम्पनियों के सामान ही लोगों के द्वारा सबसे ज्यादा खरीदा जाता था। लेकिन अब इनकी खरीददारी पर काफी प्रभाव पड़ा है। इससे स्वदेशी उद्योगों व देश को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है। फोटो कैप्शन: ओमबीर,कपिल, दीपक, प्रदीप।