सुनील निनाणिया बने नारनौल यूनिट प्रधान और राजेश जेई बने यूनिट सचिव
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कनीना की आवाज। सर्किल आफिस दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम नारनौल के प्रांगण में हरियाणा पावर कारपोरेशन अनुसूचित जाति /जनजाति और पिछड़ा वर्ग कर्मचारी यूनियन के बैनर तले यूनिट बॉडी नारनौल का द्विवार्षिक चुनाव सौहार्दपूर्ण माहौल में सर्व सम्मति से संपन्न हुए। जिसमें अध्यक्षता लखनलाल सर्कल सचिव और वेद प्रकाश प्रधान ने की तथा चुनाव अधिकारी के रूप में सुरेंद्र सिंह सर्किल आर्गेनाइजर रहे। सर्व समिति से चुनाव संपन्न करवाए गए ।
सभी सदस्यों की सहमति से सुनील निनानिया को यूनिट प्रधान चुने गए। यूनिट सचिव राजेश कुमार जेई, वरिष्ठ उप प्रधान राकेश कुमार फोरमैन, उपप्रधान बाबूलाल , सह सचिव जय सिंह यूडीसी, प्रेस सचिव सत्यवान फोरमैन, खजांची वीर सिंह जेई, रामभरत एएलएम को संगठनकर्ता चुना गया। राज्य वित्त सचिव राजेंद्र सिंह कपूरी ने यूनियन के संविधान की शपथ दिलाई और यूनियन के कर्मचारियों के कार्यों को प्राथमिकता पर करवाने का प्रण लिया। बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारी को फूलमालाएं पहना कर सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारी को सम्मानित किया और हार्दिक बधाई दी एवं शुभकामनाएं दी।
बैठक में मुख्य रूप से संदीप कुमार राज्य उपप्रधान ,महेश गोमला राज्य अतिरिक्त महासचिव, संदीप जेई फील्ड, गौरी शंकर फोरमैन सतपाल जेई फील्ड, अनिल कुमार लाइनमैन व अनेकों कर्मचारी मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 05: सर्वसम्मति से नारनौल में मनोनीत पदाधिकारी
वार्ड 14 उपचुनाव
कनीना की चौधर को चुनौती, बदलाव की आहट तेज
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कनीना की आवाज। कनीना कस्बे के वार्ड नंबर 14 में उपचुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। लगभग सभी प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर मैदान में डट चुके हैं और अब असली लड़ाई जनता के बीच शुरू हो चुकी है।
इस बार का चुनाव सामान्य नहीं माना जा रहा। कस्बे में खुलकर चर्चा है कि यह मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही पारंपरिक राजनीतिक पकड़ और बदलाव की चाहत के बीच सीधा टकराव है। लंबे समय से प्रभाव बनाए रखने वाले परिवारों के खिलाफ जनता के भीतर असंतोष की लहर साफ महसूस की जा रही है।
इसी बीच दो युवा चेहरे—नरेंद्र फौजी और नवीन यादव—तेजी से चर्चा के केंद्र में आए हैं। कस्बे में इन दोनों की सक्रियता और जनसंपर्क को लेकर सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है, जिससे सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
वार्ड एक के चुनावों में प्रत्याशी के जीत के लिए इन दोनों की रणनीति काम आई थी। एक बार फिर ये दोनों अपने एक चहेते प्रत्याशी की जीत के लिए दिनरात एक किए हुए हैं।
निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। खास बात यह है कि एक तरफ जहां कुछ उम्मीदवार खुद को निर्दलीय बताकर मैदान में हैं, वहीं मतदाताओं के बीच उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि बार-बार पाला बदलने वाले चेहरों को इस बार जनता गंभीरता से परख रही है।
वहीं, सत्ता से जुड़े पक्ष पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि लंबे समय तक विकास कार्यों से दूरी बनाए रखने वाले अब चुनाव आचार संहिता के बीच ही वार्ड में सड़क, नालों और पानी निकासी के कार्यों में अचानक सक्रिय हो गए हैं। इस पर स्थानीय लोग इसे चुनावी सक्रियता बताकर सवाल खड़े कर रहे हैं।
वार्ड 14 का यह उपचुनाव अब पूरी तरह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। एक ओर पुरानी राजनीतिक पकड़ है तो दूसरी ओर बदलाव का दावा करने वाले नए चेहरे। ऐसे में अब सबकी नजरें मतदाताओं पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि कस्बे की राजनीति पुरानी राह पर चलेगी या नया अध्याय लिखा जाएगा।
गर्मी के तेवर बढ़े, ताप 43 डिग्री पार
--ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कट बढ़े, पेयजल की बढऩे लगी किल्लत
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कनीना की आवाज। कनीना के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली कटों के साथ-साथ गर्मी के तेवर भी बढ़ते जा रहे हैं। कम से कम तापमान 29 डिग्री अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेंटीग्रेड नोट किया गया। सुबह सवेरे गर्मी से बचने के लिए पार्कों में लोग घूमते देखे जा सकते हैं। वही सुबह करीब 10 बजते ही लोग अपने घरों के दरवाजों को बंद कर लेते हैं तथा घरों में छुपे मिलते हैं। बाहर निकलना बहुत कठिन हो गया है। एक और जहां गर्मी तेवर तलख हो गए हैं वहीं बिजली कट भी बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में लोग परेशान हैं।
कनीना क्षेत्र में पशुपालक भी बेहद परेशान है क्योंकि जोहड़ों का पानी या तो सूख गया है या साफ नहीं है जिसके चलते पशुओं को गंदा पानी ही पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। पशु चिकित्सक बताते हैं कि पशुओं को सुबह शाम गर्मी से बचाने के लिए जोहड़ों में छोड़ देना चाहिए किंतु अब धीरे-धीरे जोहड़ लुप्त होते जा रहे हैं। ऐसे में गर्मी बेहद परेशान कर रही है।
क्षेत्र में तापमान बढऩे से पंखे, कूलर आदि कम काम कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि गर्मी यूं ही चलती रही तो परेशानी बढ़ेगी।
ज्यों ज्यों दोपहर होता है तो लोग घरों में पूर्णतया छुपे होते हैं। इक्का दुक्का वाहन ही सड़कों पर घूमता नजर आता है तथा लोग गर्मी से बचाव के रास्ते ढूंढते रहते हैं। किंतु विद्यार्थी एवं शिक्षक स्कूलों में पढऩे एवं पढ़ाने जाते हैं। जिस दिन अवकाश होता है उस दिन खुशी मनाते हैं।
गर्मी के कारण जहां जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, कफ्र्यू जैसी हालत बन जाती है। दोपहर को सड़के सुनसान हो जाती है, हर जीव जंतु और इंसान दुबक जाते हैं। भक्त दिनेश कुमार, महेश कुमार, सुरेंद्र, इंद्र देव आदि बताया कि दिन भर बच्चे और लोग गर्मी से राहत पाने के लिए पार्क में बैठे दिखाई देते हैं। पक्षी भी पार्क स्थित जाल के पेड़ के नीचे आराम से धूप से बचते नजर आते हैं। जहां भी देखे बस पानी की किल्लत छाने लगी है जोहड़ों का पानी भी घटता ही जा रहा है, ऐसे पशुओं के लिए और पक्षियों के लिए जल की समस्या बनी हुई है। कनीना क्षेत्र के लोग पेयजल किल्लत से भी परेशान है और दोनों वक्त पेयजल सप्लाई करने की मांग कर रहे हैं।
विभिन्न गांवों में लू एवं गर्मी से बीमारों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अधिकांश समय लोग अपने घरों में बिताते हैं। तुझे भी बाहर जाते हैं तो उस समय भीषण गर्मी होती है। एक और जहां रेहड़ी पर सामान बेचने वाले मजबूरीवश गर्मी में खड़े दिखाई देते हैं ,जिनके पास छत तक नहीं होती वहीं मजदूर भी काम पर जा रहे हैं जिन्हें अपना पेट पालना होता है। गर्मी एवं लू के चलते एसी, कूलर, पंखे सब खिलौने नजर आते हैं। लोग जब भी बाहर निकलते हैं तो पूरे प्रबंध करके निकलते हैं।
हल्का भोजन ले-
जहां गर्मी के तेवर दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। कहीं भी चैन नहीं मिल रहा है। सुनील कुमार एमपीएचडब्ल्यू ने एक अभियान चला रखा है। जो भी लोगों के संपर्क में आते हैं उनको गर्मी से बचने के उपाय बता रहे हैं। उनका कहना है कि तेज गर्मी के कारण बीमार हो सकते हैं, ऐसे में सावधानियां बरतनी जरूरी है।
इन सावधानियों में घर से बाहर जाते समय शरीर को ढककर, हल्के रंग के आरामदायक कपड़े पहनकर जाना चाहिए। धूप में बाहर जाते समय छाता, तौलिया, टोपी, आंखों पर धूप का चश्मा भी प्रयोग करें, थोड़े-थोड़े समय अंतराल पर तरल पदार्थ पीते रहे, हल्का ताजा भोजन करें ,नंगे पैर, नंगे बदन धूप में न जाए। अधिक गर्मी एवं धूप में कोई भी कार्य करने से बचे, शराब, चाय, काफी कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन करने से बचे, गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बीमार, बुजुर्गों का विशेष रूप से गर्मी का ध्यान रखे।
उनका कहना है कि गर्मी लगने के गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यदि ज्यादा देर धूप में काम करें तो गर्मी लग सकती है। इसके लक्षणों में लाल,गर्म,सूखी त्वचा होना, शरीर का तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेड होना, जी मचलाना, उल्टी होना ,सिर दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, चक्कर आना, बेहोशी, सिर दर्द आदि प्रमुख है। गर्मी और लू से बचने के लिए रोगी को छांयादार एवं ठंडी जगह पर ले जाए, ओआरएस का घोल, पानी एवं अन्य तरल पदार्थ ,पैरों को ऊपर करके लिटाए, शरीर को ठंडे पानी से पोंछे, गिला कपड़ा लपेटकर हवादार स्थान पर विश्राम कराए।
कनीना के बड़ी बणी के टैंक में भी कई मौत हो चुकी है जिसके पीछे चाहे कारण कुछ भी हो परंतु माना जाता है नहाने के लिए और पानी पीने के लिए लोग घुसते हैं और डूब जाते हैं। विभिन्न जोहड़ों में डूबने से ऐसी घटनाएं सामने आती है।
डाक्टरों के अनुसार गर्मी से बचने का एकमात्र साधन कुछ पदार्थ का प्रयोग करना है।
डाक्टरों के अनुसार नींबू, राबड़ी, तरबूज ,ककड़ी आदि अधिक से अधिक प्रयोग करने चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाये। दो से तीन लीटर कम से कम पानी पीना चाहिए तथा ठोस पदार्थ की बजाय पेय पदार्थ अधिक से अधिक प्रयोग करें। गर्मी में जहां फास्ट फूड न खाए, बासी भोजन भी प्रयोग न करें। गर्मी एवं लू अगर लग भी जाए तो भूने हुए कच्चे आम का जूस में नमक और कुछ चीनी डालकर प्रयोग करें। इससे लू आदि से बचा जा सकता है।
गर्मी से बचने के लिए तरबूज बहुत उत्तम माना जाता है।
किसान अभी भी खेतों की तैयारी कर रहे हैं, दिन-रात खेतों की तैयारी करके आने वाले समय में वर्षा के जल का सदुपयोग करने की सोच रहे हैं। इस वक्त खेतों में कपास एवं चारा देने वाली फसलें उगा दी है तथा मोटा अनाज, बाजरा उगाने की तैयारी चल रही हैं। गर्मी के दिनों में भी किसान अपने खेतों में दिखाई दे रहे हैं जो उनकी मजबूरी बन गई है।
क्या कहते हैं किसान -
किसान दिनेश कुमार, महेश कुमार, सुरेश कुमार, सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि गर्मी के कारण खेतों में ठहर पाना कठिन है। सुबह शाम कभी कभार खेत तक जाते हैं और वापस आ जाते हैं। जिनके घर खेतों में बने हुए उन्हें लू और गर्मी अधिक परेशानी दे रही है। वर्षा का इंतजार है।
क्या कहती हैं गृहिणी-
गृहिणी शकुंतला ,आशा ,नीलम, दाना आदि ने बताया कि खाना बनाते समय और भी ज्यादा गर्मी लगती है। ऐसे में खाना बनाना भी बहुत दुष्कर हो गया है। गर्मी दिन रात सता रही है। गर्मी के कारण पानी की मांग बढ़ गई है। जोहड़ों में नहाने पर प्रतिबंध है किंतु रविवार या अवकाश के दिन बच्चे जोहड़ों में स्नान करने जाते हैं।
फोटो कैप्शन 03: जोहड़ में स्नान करते बच्चे
04: बच्चों को घर ले जाते हुए किसान
पशुओं को गर्मी से बचाना जरूरी
-गर्मी और लू में दूध देने की मात्रा जाती है घट
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कनीना की आवाज। जिस प्रकार इंसान को गर्मी से बचना होता है उसी प्रकार पशुओं को भी गर्मी और लू से बचाना चाहिए। पशुओं को भी गर्मी एवं सर्दी प्रभाव डालती है। यदि पशुओं को गर्मी से नहीं बचाते है तो दूध की मात्रा घटती चली जाती है और यहां तक की 50 प्रतिशत दूध कम हो जाता है। जिस प्रकार सर्दी से और गर्मी से इंसान बचता है, इसी प्रकार पशु की भी तासीर होती है। पशुओं को विशेष कर भैंस को अधिक गर्मी लगती है और जब गर्मी बढ़ती चली जाती है, तापमान 47 डिग्री पार कर जाता है तो उस समय पशु गर्मी में हांपने लग जाते हैं। हालात यह होती है कि शाम के समय तापमान अधिक होता है जिससे पशु चारा चरना कम कर देता है और दूध भी कम हो जाता है। ऐसे में पशुओं को भी गर्मी और सर्दी दोनों तापों से बचना जरूरी होता है।
क्या कहते हैं पशु चिकित्सक कनीना-
कनीना के राजकीय पशु चिकित्सालय के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डा. पवन कांगड़ा बताते हैं कि ज्यों ज्यों तापमान बढ़ता है त्यों त्यों शाम के समय तापमान अधिक रहता है जिसके कारण पशु चारा चरना काम कर देता है। दूध की मात्रा 50 प्रतिशत तक काम हो जाती है। ऐसे में पशु पालक प्रतिदिन पशुओं को एक निश्चित समय पर चारा डालने की आदत को भुला देना चाहिए और सोते समय पशुओं के लिए चारा डाल देना चाहिए क्योंकि जब ताप कम होता है तो पशु अपने आप चारा चरने लग जाता है। कम ताप होने पर ही पशु चारा चरते हैं। यही कारण है कि जंगली जीव भी गर्मियों में रात को चारा चरने जाते हैं क्योंकि रात को तापमान कम होता है वहीं सर्दियों में दिन के समय चारा चरने जाते हैं क्योंकि सर्दियों में थोड़ा ताप दिन में बढ़ जाता है। उनका कहना है कि पशुओं को ठंडे एवं छायादार पेड़ के नीचे बांधना चाहिए। गर्मी से बचाना चाहिए, हो सके तो किसी कमरे में पशु को रखना चाहिए जिसकी खिड़की और दरवाजे हवादार होने चाहिए किंतु खिड़की और दरवाजों पर सूती कपड़े या बोरी बांध देनी चाहिए और बोरी और सूती कपड़े पर समय-समय पर पानी डालना चाहिए। हो सके तो कूलर और पंखों का भी प्रबंध पशुओं के लिए करना चाहिए। सुबह और शाम दो बार पशु को नहलाना चाहिए। अगर पास में जोहड़ एवं तालाब हैं तो पशु को जोहड़ या तालाब में छोड़ देना चाहिए जिससे पशु प्रसन्न हो जाता है, गर्मी से बच जाता है। उनका कहना है कि कि पशुओं को गर्मी से बचाकर ही उनसे दूध प्राप्त किया जा सकता है। यदि पशु चारा चरना कम कर देता है तो कमजोर होता चला जाता है, ऐसे समय जब दूध को यथावत बनाए रखने के लिए पशु को मीठा खिलाना चाहिए और मिनरल मिक्सर आदि चारे के साथ प्रदान करने चाहिए ताकि शरीर में ऊर्जा की पूर्ति होती रहे और पशु अधिक दूध दे। उन्होंने बताया कि जुलाई से दिसंबर महीने में पशुओं का अधिक ब्याते हैं जिसके कारण दूध की मात्रा
फिर से बढऩे लग जाती है। वरना दूध की मात्रा घटती ही चली जाती है। डा. का कहना है कि गर्मियों में पशु को ठीक उसी प्रकार रखना चाहिए जैसी इंसान गर्मी से बचता है।
क्या कहते हैं पशुपालक -
पशुपालक सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, नरेश कुमार आदि ने बताया कि वह पशु पालते हैं और हर वर्ष गर्मी और सर्दी में उनके पशु दूध कम देने लग जाते हैं। दूध की मात्रा घटने से पूरे परिवार का भरण पोषण भी करना कठिन हो जाता है और यह समस्या बारिश आने तक बनी रहती है। जब वर्षा आती है तो फिर से पशु खुश हो जाते हैं। ऐसे में उनका मानना है कि वह पशुओं को सर्दी गर्मी से बचाना चाहिए।
फोटो कैप्शन: डा. पवन कांगड़ा और
फोटो कैप्शन 02: पशुओं के साथ खड़ा पशुपालक
तीन लोगों के विरुद्ध चोरी का मामला दर्ज
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कनीना की आवाज। कनीना थाने के तहत आने वाले गांव बवाना निवासी किताबों ने तीन लोगों के विरुद्ध चोरी के मामला दर्ज करवाया है।
उन्होंने कहा है कि 6 अप्रैल को रात्रि के 10-11 बजे जब घर वह सो रही थी तो टिंकू, गुल्लू एवं टोनी घर से बाहर की ओर कूदे। तब आवाज सुनकर देखा तो ये व्यक्ति मोटर व उसके तार चेारी करके ले जा रहे थे। शोर मचाने पर वहां से भाग खड़े हुए। उनके बयान पर चोरी का मामला दर्ज कर लिया है।
56 वर्षीय व्यक्ति गुम, दिमागी हालत से है परेशान
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कनीना की आवाज। कनीना उप मंडल के गांव सुंदरह के मनीष ने अपने पिता रूपचंद के गुम होने का मामला दर्ज करवाया है। उन्होंने कहा है कि वह कंपनी में काम करता है और उसके पिता 56 वर्षीय रूपचंद दिमागी हालात से ठीक नहीं है। पहले भी दो-तीन बार घर से बिना बताए कहीं जा चुके किंतु खुद आ जाते हैं। 8 अप्रैल को सुबह 11 बजे उनके पिता बस स्टैंड की तरफ जाते हुए दिखाई दिए किंतु घर नहीं लौटे। हर जगह पता किया किंतु पता नहीं चला। दौंगड़ा अहीर पुलिस चौकी में गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है।
लड़का गुम, गुमशुदगी का मामला दर्ज
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव धनौंदा की उषा ने कनीना थाने में अपने लड़के गुम होने का मामला दर्ज करवाया है। उन्होंने कहा कि 24 अप्रैल को वह अपने लडके सचिन को घर छोड़कर नारनौल गई थी। जब वापस आई तो लड़का नहीं मिला। आसपास पता किया नहीं मिल पाया। उन्हें शक है कि उसे किसी ने अज्ञात स्थान पर छुपा रखा है। वह मंदबुद्धि का है, दिमागी दवाइयां चल रही है। उसकी उम्र 24 वर्ष है। कनीना पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है।
महाराण प्रताप को किया जाएगा याद
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कनीना की आवाज। भोजावास में 10 मई को वीर महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाएगी। समारोह के मुख्य अतिथि ठाकुर अतरलाल, प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट हरियाणा अशोक कुमार चौहान, एडवोकेट जिला अध्यक्ष राजपूत सभा गुरुग्राम अरुण सिंह चौहान, डा. बृजपाल सिंह पप्पू जिला अध्यक्ष राजपूत प्रतिनिधि सभा भिवानी तथा पवन ठाकुर भिवानी होंगे। आयोजन समिति के चेयरमैन भाग सिंह तंवर ने उक्त जानकारी देते हुए कहा कि समारोह को लेकर 51 सदस्यीय आयोजन समिति तथा दिनेश डालू सिंह एडवोकेट बसई की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय स्वागत समिति बनाई गई है। समिति के पदाधिकारी व सदस्य गांव-गांव जाकर जयंती समारोह का निमंत्रण दे रहे हैं।
गांव रामबास में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल, फलदार पौधों की देखभाल की गई
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कनीना की आवाज। गर्मी के मौसम में पौधों को विशेष देखभाल और पानी की आवश्यकता होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए गांव रामबास की पर्यावरण संरक्षक टीम ने पशु अस्पताल परिसर में लगाए गए फलदार पौधों की सेवा करते हुए उन्हें पानी दिया तथा पौधों के आसपास निराई-गुड़ाई का कार्य किया।
टीम सदस्य मनोज कुमार रामबास ने बताया कि तेज गर्मी में पौधों को समय-समय पर पानी देना बेहद जरूरी है, ताकि वे सूखने से बच सकें और सही तरीके से विकसित हों। साथ ही पौधों के आसपास उगी घास-फूस हटाकर उनकी जड़ों को मजबूती देने का कार्य भी किया गया।
गांववासियों ने टीम के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे कार्य समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। टीम ने सभी ग्रामीणों से अपील की कि वे भी पौधे लगाएं और उनकी नियमित देखभाल करें, ताकि गांव हरा-भरा और स्वच्छ बना रहे।
फोटो कैप्शन 01: मनोज कुमार गर्मी में पौधों को बचाते हुए










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