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Friday, April 24, 2026



 

  57 वर्षों से सुरेश कुमार लगा रहे हैं पंचर
-1969 में अधिकतम कमा लेते थे 4 रुपये
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कनीना की आवाज।
 66 वर्षीय सुरेश कुमार भडफ़ निवासी ने अपनी 10 वर्ष की उम्र में साइकिल पंचर लगाने शुरू किए थे और आज 65 वर्ष की उम्र में भी पंचर लगा रहे हैं। उन्होंने साइकिलों का वह दौर देखा है जब एक साइकिल की कीमत 60 से 100 रुपये की होती थी। उस जमाने में साइकिल का क्रेज होता था। उन्होंने बहादुरगढ़, हरियाणा में अपनी पंचर की छोटे से पंप से दुकान शुरू की थी और आज कनीना में पंचर की दुकान लगाकर अपनी रोटी रोटी कमा रहे हैं।
सुरेश कुमार से संबंध में बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह अधिकतम 4 रुपये कमा लेते थे जिसमें से एक रुपये स्टेट बैंक में खाते में जमा कर देते थे और महीने के 30 से 40 रुपये बचाकर शानदार जीवन जी रहे थे। एक दिन इतने पैसों का उसके पिता को पता चला तो उन पैसों से उनके लिए पंखा एवं घरेलू सामान खरीद कर लाये। सुरेश कुमार ने तीन-चार जमात पास की थी किंतु परिवार की आर्थिक हालात अच्छी न होने के कारण इस काम में जुट गए। वो बताते हैं कि एक हवा भरने का पंप खरीदा और काम शुरू कर दिया। 10 पैसे में पंचर लगाया जाता था। लगातार मेहनत करते थे। उस जमाने में इतने साइकिल सवार होते थे कि पंचर लगवाने वाले कतारबद्ध खड़े होते थे। उस वक्त साइकिल में हवा भरने का काम भी पंचर लगाने वाला ही करता था। यही कारण है कि दिन में 40 से 50 तक पंचर लगा पाते थे इसके अतिरिक्त साइकिल ठीक करने का काम भी करते थे जिनका अलग से चार्ज लेते थे। उस जमाने में जो साइकिल होती थी वह स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर मानी जाती थी। इंसान सभी कार्य साइकिल से करता था। मामूली सा खर्चा और सेहत के लिए लाभप्रद होने के कारण गरीब जन भी प्रयोग करते थे। धीरे-धीरे समय बदला और सुरेश कुमार 1994 में कनीना आ पहुंचे और साइकिल के पंचर लगाने का काम शुरू किया। वो बताते हैं कि वर्तमान में साइकिल इतनी कम हो गई है कि अधिकतम 10 पंचर लगा पाते हैं। वर्तमान में छोटे बच्चों की साइकिल का क्रेज बढ़ गया है। धनवान लोग साइकिल कम चलाते हैं, आज के दिन कम से कम 4200 की साइकिल आती है और अधिकतम हीरो की इलेक्ट्रानिक साइकिल 35000 हजार रुपये की आती है।
सुरेश कुमार बताते हैं कि एक इंसान जब अपने काम के प्रति समर्पित होता है तो निश्चित ही सफलता मिलती है। सुरेश कुमार काम के प्रति इतने समर्पित रहे कि आज भी दूर आज तक नाम है। यह ठीक है कि आज के युग में युवा पीढ़ी साइकिलों की तरफ कम मोटरसाइकिल को अधिक पसंद करती है। सड़क पर साइकिल चलाने वाले गरीब माने जाते हैं जबकि गाडिय़ों में चलने वाले लोग अमीर माने जाते हैं। उनका कहना है कि विदेश में इससे उलटा है। अमीर व्यक्ति अपनी सेहत के लिए साइकिल चलाते हैं। वैसे भी सरकार साइकिल चलाने वालों के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं देती। इस बात का गम है। अगर साइकिल के प्रति सरकार विशेष प्रोत्साहन दे तो निसंदेह बहुत से लोग साइकिल चलाना शुरू कर देंगे। यह सत्य है कि शिक्षा विभाग ने छात्राओं के लिए जो दूर से आती है साइकिल मुफ्त देने का प्रावधान कर रखा है परंतु अच्छे दर्जे की साइकिल उन्हें भी नहीं मिल पाती।
साइकिल लगातार प्रयोग करें तो आदमी न तो बूढ़ा होता न ही पैरों की समस्या होगी। उनका कहना है कि आज के दिन हुए 2000 रुपये तक कमा लेते हैं फिर भी उसे जमाने के चार रुपए के मुकाबले कम हैं और वो खुशी नहीं मिल रही है।
कनीना क्षेत्र में अगर साइकिल चलाने वाले देखे जाए तो अधिकतम पांच व्यक्ति 20 सालों से अधिक वर्षों से साइकिल चला रहे हैं। आधुनिक युवा पीढ़ी अगर साइकिल चलाती है तो विशेष प्रकार की साइकिल प्रयोग करती है। साइकिल की कीमत अधिक है। ऐसे में सरकार को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और कम से कम सप्ताह में एक दिन सभी वाहन चालक घर पर और आसपास साइकिल प्रयोग करें तो ऊर्जा की भी बचत हो सकती है। साइकिल चलाने वालों को समय-समय पर सम्मानित किया जाना चाहिए। वैसे तो साइकिल यूपी में चुनाव चिन्ह भी नेताओं का है किंतु हरियाणा में साइकिल चलाने वाले का क्रेज घटना ही जा रहा है। आने वाले समय में शायद विश्वास नहीं करेंगे कि हजारों की संख्या में लोग साइकिल चलते थे।
 फोटो कैप्शन  सुरेश कुमार की फोटो साथ में
फोटो कैप्शन09:  साइकिल के पंचर लगता हुआ सुरेश कुमार




वार्ड 14 उपचुनाव
 40 साल की सत्ता के खिलाफ उभर रहा जनाक्रोश, बदलाव की ओर बढ़ते कदम-
पवन कुमार
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कनीना की आवाज।
कनीना कस्बे के वार्ड नंबर 14 में होने वाले 10 मई के उपचुनाव को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। चुनावी सरगर्मियों के बीच अब लगभग सभी प्रमुख चेहरों के नाम भी सामने आ चुके हैं। इस बार का चुनाव सामान्य नहीं बल्कि बदलाव की दिशा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
 चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी पवन कुमार का कहना है कि पिछले करीब 40 वर्षों से सत्ता का सुख भोग रहे कुछ परिवारों के खिलाफ जनता में गहरा रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का मानना है कि इन परिवारों ने हमेशा फूट डालो और राज करो की नीति अपनाकर अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखा। एक ही मोहल्ले और एक ही परिवार के लोगों के बीच विभाजन कर उन्हें आमने-सामने खड़ा करना इनकी पुरानी रणनीति रही है, जो इस चुनाव में भी साफ नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि इस बार भी एक ही मोहल्ले से जुड़े दो परिवारों को एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारकर वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय मतदाताओं का आरोप है कि इन परिवारों का मुख्य उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना रहा है, जबकि कस्बे के वास्तविक विकास से इनका कोई सरोकार नहीं रहा।
इसी बीच, वार्ड 14 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उभर रहे चेहरों को जनता का अच्छा खासा समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। कई मतदाता अब पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नए विकल्प की तलाश में हैं। उनका मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार ही बिना किसी दबाव के वार्ड और कस्बे के वास्तविक विकास के लिए काम कर सकता है।
वार्ड के मतदाताओं का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधि चुनने का नहीं, बल्कि एक नई सोच और नई दिशा तय करने का अवसर है। ऐसे में मतदाताओं से अपील की जा रही है कि वे जाति, परिवार और पुराने समीकरणों से ऊपर उठकर सोच-समझकर अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
कस्बे में बदलाव की इस लहर के बीच यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार का जनादेश पारंपरिक राजनीति को चुनौती देते हुए एक नई शुरुआत की ओर इशारा कर सकता है।
फोटो कैप्शन : नगरपालिका कनीना


पशु चिकित्सा दिवस-2026
पशुओं के प्रति समर्पण भाव से सेवा को दर्शाता है पशु चिकित्सक का उद्यम- डा. कांगड़ा

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कनीना की आवाज।
पशु चिकित्सा, पशुओं के रोग, रोगों के इलाज के लिए पूर्ण रूप से समर्पित होती है। पशु चिकित्सकों के व्यवहार के कारण ही कितने पशु ,पक्षी एवं जीव बच जाते हैं। ऐसे में पशु चिकित्सा दिवस पर पशु चिकित्सकों के समर्पण को सम्मानित करना, खाद्य सुरक्षा बीमारियों के नियंत्रण के बारे में जागरूक करना करना प्रमुख उद्देश्य है। इस मौके पर पशु कैंप,निशुल्क रेबीज टीकाकरण, बांझपन निवारण आदि के शिविर आयोजित किए जाते हैं। इस संबंध में पशु चिकित्सा दिवस पर कनीना पशु चिकित्सालय के डा.पवन कांगड़ा से विस्तृत जानकारी प्राप्त  की। उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। पशु चिकित्सक न केवल जानवरों का इलाज करते अपितु मानव समाज के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था में भी अहम योगदान देते हैं। इसलिए पशु चिकित्सक के समाज में योगदान को भूला पाना कठिन है। उन्होंने बताया कि जब पशु बीमार हो जाता है या घायल हो जाता है तो लोग  पशु चिकित्सालय में लाते हैं जहां पशु का इलाज किया जाता है और पशु स्वस्थ रहते हैं। उनकी मृत्यु दर भी कम हो जाती है। ऐसे में डाक्टर अहम भूमिका निभाते हैं। कई बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैलती है पशु चिकित्सा टीकाकरण और जागरूकता के माध्यम से रोगों पर नियंत्रण का कार्य करते हैं। ऐसे में इंसानों को पशुओं से होने वाले रोगों से बचाने में अहम योगदान देते हैं। दुग्ध और खाद्य सुरक्षा में भी अहम योगदान देते हैं। पशु चिकित्सा के सुनिश्चित करते हैं कि दूध एवं पशु उत्पाद सुरक्षित और स्वस्थ है या नहीं है? जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव न पड़ सके। ऐसे में पशु चिकित्सा खाद्य वस्तुओं में भी योगदान देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालक के लिए पशु आय का मुख्य स्रोत होता है। पशु चिकित्सा पशु की देखभाल प्रबंधन में सहायता करके किसानों की आय बढ़ाने में मदद करते हैं। यही नहीं वह किसानों के लिए बताते हैं कि कैसे पशु पाले कैसे सुरक्षा की जाए?
पशु चिकित्सा पशुओं के साथ होने वाले अत्याचारों को रोकने औरउनका जीवन बेहतर बनाने में योगदान देते हैं। जब कभी क्षेत्र या पूरे देश आदि में महामारी फैल जाती है जैसे कोविड-19 तब पशु चिकित्सा शोध और नियंत्रण में सहयोग करते हैं।
 डाक्टर कांगड़ा का कहना है कि पशु चिकित्सा समाज के लिए आवश्यक है। यह पशु और मनुष्य दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं और समाज के विकास कार्यों एवं भूमिका निभाते हैं। इसलिए पशु चिकित्सकों का योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता।
फोटो कैप्शन 06: खरगोश का इलाज करते हुए  07: पक्षी का इलाज करते हुए और
08: भैंस का आपरेशन करते हुए डा. कांगड़ा





 विद्यार्थियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर खड़ी की जा रही बाइकों पर होता है जुर्माना
-रेलवे पार्किंग की मांग
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कनीना की आवाज।
कनीना खास रेलवे स्टेशन की स्थापना सन् 1935 में हुई थी साथ में सरकार की तरफ से कनीना खास से झज्जर - कोसली - कनीना  व चरखी दादरी - कनीना - नीमराना - अलवर ये दोनों नई रेलवे लाईन परियोजना भी जल्दी ही धरातल पर उतारने की तैयारी है परन्तु कनीना खास रेलवे स्टेशन पर कोई भी वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं है । यात्रियों का आरोप है कि कोई पार्किंग न होने के कारण उनको या तो खुले में वाहन खड़े करने पड़ते है जहां से वाहन की हानि होने का खतरा सदा बना रहता है और जो यात्री वाहन स्टेशन के अंदर खड़े करते है जीआरपी वाले उनके वाहन को बेलो से बांध कर चले जाते है।
जिसके बाद यात्रियों को घंटों स्टेशन पर जीआरपी वाले का घंटों इंतजार करना पड़ता है और 500 रुपए का चालान भी भरना पड़ता है। भले ही वाहन किसी तरह बाधा न बन रहा हो। जो विशेष रूप से विद्यार्थी और दैनिक यात्रियों की जेब पर बहुत भारी पड़ता है। अगर कोई यात्री कुछ पूछे तो उससे महेंद्रगढ़ एसडीएम कार्यालय से वाहन प्राप्त करने को बोला जाता है जो यात्रियों के द्वारा सरासर पैसे वसूलने का तरीका व अपने साथ हुआ अन्याय बताया जा रहा है। यात्रियों में भरी आक्रोश इसलिए भी है क्योंकि दीवारों पर पार्किंग न करने का लिखा हुआ है वो ऐसी जगह लिखा है जो रात्रि में यात्रा करने वाले यात्रियों को दिखाई भी नहीं देता है। कुछ सवाल यात्रियों को विचलित करते है कि यदि पार्किंग रेलवे स्टेशन पर नहीं करेंगे तो कहा करेंगे ? जो वाहन किसी भी तरह से बाधा नहीं बन रहे उनका चालान क्यों किया जाता है। स्टेशन पर पार्किंग की सुविधा देने की मांग है।
यात्रियों की मांग है कि शीघ्र ही कनीना रेलवे स्टेशन पर पार्किंग की सुविधा दी जाए और जिनके पिछले कुछ दिनों में नो पार्किंग के गलत चालान काटे है उनके रुपए वापस किए जाए अन्यथा रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव को पत्र लिख कर यात्रियों द्वारा अपने साथ जो ठगा महसूस किया जा रहा है उससे अवगत कराया जाएगा। नीतिन कुमार, हर्ष कुमार, अमीश कुमार विद्यार्थियों ने मांग की है कि विद्यार्थियों के लिए पार्किंग की सुविधा दी जाए ताकि वे अपनी पढ़ाई निर्बाध गति से पूरा कर पाए और ट्रेनों से सफर कर सके।
फोटो कैप्शन 04: जीआरपी द्वारा बेल से बांधी मोटरसाइकिल
            05: अंधेरे में न दिखाई देने वाले चेतावनी शब्द




स्याणा में पंच के लिए आया एक नामांकन
-कनीना के पांच गांवों में होंगे पंचों के उप चुनाव
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के पांच गांवों के पंचों के उप चुनाव होंगे जिनमें नामांकन का काम जारी है। ये पांच गांव हैं भोजावास,कपूरी, स्याणा, धनौंदा और छीथरोली प्रमुख हैं। शुक्रवार को स्याणा से एक नामांकन आया जबकि गत दिवस धनौंदा में पंच के लिए एक नामांकन भरा गया है। इस संबंध में एआरओ सोमवीर धनखड़ ने बताया कि धनौंदा एवं स्याणा में एक-एक नामांकन भरा जा चुका है। नामांकन भरने की अंतिम तिथि 25 अप्रैल है।

 

विश्व मलेरिया दिवस-25 अप्रैल
घटते ही जा रहे हैं जिला में मलेरिया के केस
-2025 में कनीना में मलेरिया का एक केस आया  
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कनीना की आवाज।
 मच्छर से होने वाली बीमारी की प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है। मच्छर जानलेवा बीमारी डेंगू, चिकनगुनिया एवं मलेरिया आदि फैलाते हैं। 20 अगस्त 1897 को रोनाल्डो रोस मादा एनाफ्लीज मच्छर की खोज की और मलेरिया का कारण बताया था।  इसीलिए इस दिन को विश्व मच्छर दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कनीना के एमपीएचडब्ल्यू सुनील कुमार ने बताया कि मलेरिया फैलाकर लोगों की जान लेने में एनाफ्लीज मच्छर का योगदान होता है। एनाफिलीज मच्छर से मलेरिया नहीं होता बल्कि परजीवी इसका कारण होता है। यद्यपि मलेरिया के उपचार की दवा कुनीन पहले से ही खोज ली थी। सुनील कुमार एमपीएचडब्ल्यू का कहना है कि मच्छरों के काटने से अपने आपको बचाना चाहिए। अक्सर पानी में मच्छर अंडे देता हैं जिससे लारवा पैदा होता है इसलिए आस पास पानी नहीं खड़े होने देना चाहिए। एनाफ्लीज मच्छर की 40 प्रजातियां मिलती हैं और यह मच्छर अक्सर सुबह काटते हैं। चौकी मादा एनाफिलीज मच्छर को अंडे देने के लिए खून की जरूरत इसलिए खून पीती है जबकि नर मच्छर अक्षर फूल अन्य स्रोतों पर मिलते हैं।
 मलेरिया इंस्पेक्टर शीशराम ने बताया कि  
जिला महेंद्रगढ़ में 2021 में 5, वर्ष 2022 में 3 केस मलेरिया के थे। कनीना में वर्ष  2015 में 6 केस मलेरिया के थे जो 2016 में घटकर तीन रह गए, 2017 में फिर से 2 केस रह गए 2018 में 3 केस मलेरिया के आए। 2019 में कोई मलेरिया का केस नहीं किंतु वर्ष 2025 में कनीना में मलेरिया का एक केस आया है।
उन्होंने बताया कि मलेरिया प्लाजमोडियम परजीवी से फैलता है जिसे मादा एनाफिलीज खून पीते वक्त शरीर में छोड़  जाती है। मच्छर काटने के 10 से 15 दिनों में बार बार बुखार सिरदर्द आदि आता है। यदि जल्द उपचार नहीं किया जाए तो यह बहुत घातक भी साबित बन सकता है।
 ऐसे में मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी, क्रीम, तेल, लगाकर बचना चाहिए।  मलेरिया का इलाज करवाना बहुत जरूरी है वरना भविष्य में घातक परिणाम निकल सकते हैं।
 फोटो कैप्शन: शीशराम एचआई एवं सुनील कुमार।





मलेरिया जागरूकता अभियान चलाया -विद्यार्थियों को बताएं मलेरिया के लक्षण
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कनीना की आवाज।
राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में प्राचार्य की अध्यक्षता में मलेरिया के बारे में सभा का आयोजन किया गया। जिसमें संदीप यादव प्राध्यापक जीव विज्ञान में मलेरिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मलेरिया के बारे में रोनाल्ड रोश ने सबसे पहले जानकारी दी थी और नोबेल पुरस्कार विजेता बने थे। उन्होंने सबसे पहले बताया था कि मलेरिया मादा एनाफ्लीज मच्छर के काटने से फैलता है। बीइइ सतीश कुमार ने बताया कि इस रोग में तेज बुखार होता है,कपकपी, जी मचलाना, आरबीसी के टूटने के कारण खून में सीरम का लेवल बढ़ता है, पीलिया और मस्तिष्क की समस्या बनती है।
 उधर सुनील कुमार एमपीएचडब्ल्यू ने बताया कि इस रोग से बचने के लिए अपने आसपास पानी जमा न होने दे। सप्ताह में एक बार रविवार को ड्राई दिवस मनाया जाए, घरों की खुली टंकी होती सप्ताह में एक दिन जरूर सुखाया जाए, घर की दरवाजे खिड़कियों पर जाली लगवाए, जहां पानी जमा होता है मिट्टी भर दे, मिट्टी से नहीं भरा जाता तो काला तेल/ मिट्टी का तेल डालें। सोते समय मच्छरदानी प्रयोग करें। शाम के समय और प्रात: काल विशेष कर पूरी बाजू के कपड़े पहने। बुखार होने पर नजदीक की स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।
 फोटो कैप्शन 03: मलेरिया के बारे में जानकारी देते हुए



छात्राओं का सम्मान समारोह 25 अप्रैल को
-विश्वविद्यालय में पाया प्रथम एवं दूसरा स्थान
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कनीना की आवाज।
राजकीय कन्या महाविद्यालय उन्हाणी की छात्राओं ने इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में कला स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा में पहले और दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसको लेकर के महाविद्यालय में उनका सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
 विस्तृत जानकारी देते हुए प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने बताया कि मीरपुर इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की कला स्नातक प्रथम वर्ष में आरजू पोता ने विश्वविद्यालय में पहला और सोनिया खेड़ी तलवाना ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसी खुशी में अभिभावकों और समस्त स्टाफ द्वारा उनका अभिनंदन किया जाएगा।
















कनीना नगरपालिका उपचुनाव
-वार्ड-14 के लिए शुक्रवार को दो उम्मीदवारों ने भरा नामांकन
-पितामह कान्हसिंह धर्मशाला में होगा मतदान
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कनीना की आवाज। नगरपालिका कनीना के वार्ड संख्या 14 में होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया के चौथे दिन शुक्रवार को दो उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान बलजीत राज और सुरेन्द्र ने अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर चुनाव रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष नामांकन पत्र जमा किए। प्रशासन द्वारा चौथे दिन की कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट जिला उपायुक्त और राज्य निर्वाचन आयोग, पंचकूला को भेज दी गई है।
चुनाव रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से चल रही है। उन्होंने कहा कि
चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मतदाताओं की सहायता और किसी भी प्रकार की शिकायत के समाधान के लिए कंट्रोल रूम (संपर्क नंबर: 01285-294030) स्थापित किया गया है। वहीं बताया कि मतदान के लिए पितामह कान्ह सिंह धर्मशाला को मतदान केंद्र निर्धारित किया गया है तथा पुलिस प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
एसडीएम ने नागरिकों से अपील की है कि वे लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और शांतिपूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
फोटो कैप्शन 01 व 02: नामांकन करते हुए प्रत्याशी


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