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Sunday, May 31, 2026



 


समाज में दान दहेज की प्रथा जारी-बजरंग एडवोकेट
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कनीना की आवाज।
 आज के समाज में जहां लड़कियों की कमी होती जा रही है फिर भी दान दहेज कम नहीं हो रहा है। विवाह शादियों में भारी दान दहेज दिया जाता है जो समाज के लिए कलंक है। ये विचार करीरा निवासी बजरंग एडवोकेट ने रिया और नरेश की शादी दौरान मुलाकात में व्यक्त किए।
 इस मौके पर बजरंग एडवोकेट ने कहा कि बहुत से ऐसे पिता होते हैं जो दान दहेज देते देते अपने घर और जमीन नीलाम कर देते हैं। एक लड़की की शादी के लिए इतना दान दहेज देना पड़ता है तो भविष्य कैसा होगा जबकि कहावत है- दुल्हन ही दहेज है और उसके अतिरिक्त दान दहेज लेना और देना समाज के लिए एक बुराई साबित होता है। आज के समय किसी के घर लड़की पैदा हो जाती है तो खुशियां बहुत कम मनाई जाती है जबकि लड़का पैदा होने पर खूब खुशियां मनाई जाती है क्योंकि लड़का होने पर दान दहेज से तो बच जाते हैं। यदि दान दहेज खत्म हो जाए तो समाज में लड़कियों की भी पैदा होने पर लोग बहुत खुश होंगे।
 उन्होंने कहा कि विवाह शादी प्रेम पर आधारित है। दो परिवारों के बीच संबंध को इंगित करता है किंतु जब दान दहेज बीच में आ जाता है तो दो परिवारों के बीच में दरार का काम करता है। इस दान दहेज की प्रथा से अगर बच जाए तो समझो समाज की अधिकांश बुराइयां समाप्त हो जाएंगी। वरना यह तन दहेज न जाने कितनी लड़कियों और कितने माता-पिताओं को लील लेगा। कुछ उदाहरण एक रुपए लेकर शादी करने के सामने आए हैं जो मन में खुशी भर देते हैं। इस मौके पर ओमप्रकाश भट्टी, मनोज कुमार, धर्मपाल एडवोकेट, केके भट्टी, बाल किशन और श्री कृष्ण वैद्य सहित कई जन मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 11:रिया और नरेश की शादी में दान दहेज की बुराई के बारे में जिक्र करते बजरंग एडवोकेट





व्यापारियों के पुराने टैक्स बकाया से मुक्ति का सुनहरा मौका
-हरियाणा सरकार ने शुरू की एकमुश्त निपटान स्कीम-2026
छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत, एक लाख तक का बकाया अब पूरी तरह माफ
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कनीना की आवाज।
हरियाणा सरकार ने प्रदेश के व्यापारी वर्ग को बड़ी राहत देते हुए एक बार फिर एकमुश्त निपटान स्कीम-2026 का आगाज कर दिया है। यह योजना आगामी 120 दिनों तक रहेगी।
यह जानकारी देते हुए डीईटीसी (सेल टैक्स) प्रियंका यादव ने बताया कि साल 2025 में इस योजना की अपार सफलता और 1.15 लाख से अधिक व्यापारियों द्वारा इसका लाभ उठाए जाने के बाद, सरकार ने इसे दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पुराने टैक्स विवादों को खत्म करना और व्यापारियों को अदालती मुकदमों से मुक्त कर एक स्वच्छ कारोबारी माहौल देना है, ताकि भविष्य में पूरा ध्यान जीएसटी संग्रह पर केंद्रित किया जा सके। यह योजना 1 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी है और आगामी 120 दिनों तक यानी 28 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी।
प्रियंका यादव ने स्पष्ट किया कि इस बार सरकार ने छोटे व्यापारियों का विशेष ख्याल रखा है। यदि किसी व्यापारी पर किसी एक वर्ष में 1 लाख रुपये तक का टैक्स बकाया है, तो उसे योजना के लिए आवेदन करने तक की आवश्यकता नहीं है; उनका कर, ब्याज और जुर्माना स्वत: ही माफ मान लिया जाएगा। यह स्कीम कुल सात अलग-अलग कराधान अधिनियमों के तहत पुराने बकायों पर लागू होगी। विशेष रूप से 1973 के पुराने बिक्री कर अधिनियम के मामलों में, जहाँ बकाया बहुत पुराना है, 1 लाख से अधिक की राशि पर 70 प्रतिशत तक की भारी छूट दी जा रही है। इसके अलावा जिन व्यापारियों के मामले सिर्फ इसलिए फंसे हुए थे क्योंकि वे समय पर जरूरी वैधानिक फॉर्म (जैसे फॉर्म सी, एफ या एच) जमा नहीं कर पाए थे, उन्हें भी अब ये फॉर्म जमा कर अपने टैक्स की मांग कम करवाने का मौका दिया गया है, बशर्ते वे फर्जी फर्मों की श्रेणी में न आते हों।
योजना की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया को भी बेहद लचीला बनाया है।
उन्होंने बताया कि जो व्यापारी अदालतों में लंबित अपने मुकदमों को वापस लेने को तैयार हैं, वे भी इस राहत का हिस्सा बन सकते हैं। बकाया राशि चुकाने के लिए किस्तों की सुविधा भी दी गई है, जहाँ 5 लाख से अधिक और 25 लाख तक की राशि को दो किस्तों में और 25 लाख से अधिक की राशि को तीन आसान किस्तों में चुकाया जा सकता है। एक बार आवेदन सही पाए जाने और स्वीकार होने के बाद, संबंधित व्यापारी के खिलाफ उस मामले में भविष्य में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक शांति मिल सकेगी।
जानिए कितना मिलेगा लाभ--
इस योजना के तहत हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम 1973 के मामलों में 1 लाख तक 100 प्रतिशत और उससे अधिक पर 70 प्रतिशत टैक्स छूट के साथ पूरा ब्याज व जुर्माना माफ है। अन्य छह अधिनियमों के अंतर्गत भी स्लैब के अनुसार राहत दी गई है, जिसमें 1 लाख तक 100 प्रतिशत, 10 लाख तक 60 प्रतिशत, और 1 करोड़ तक के बकाये पर 50 प्रतिशत टैक्स की छूट शामिल है। जैसे-जैसे बकाया राशि बढ़ती है, छूट का प्रतिशत 30 प्रतिशत तक आता है, लेकिन सभी श्रेणियों में ब्याज और जुर्माने की शत-प्रतिशत माफी व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी है।






सफर सृष्टि का लोकार्पण
-मुख्य अतिथि पद्म-भूषण हुकमदेव नारायण यादव थे
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कनीना की आवाज।
धारूहेडा में स्थित जंगल बैबलर ट्यूरिज्म कंपलैक्स में मित्र राधेश्याम गोमला द्वारा रचित सफर सृष्टि काÓ का लोकार्पण हुआ।  पुस्तक लोकार्पण के मुख्य अतिथि पद्म-भूषण हुकमदेव नारायण यादव थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोज कुमार यादव (आईएएस) ने की। पुस्तक की समीक्षा प्रकाशक डाक्टर अशोक कुमार मंगलेश, वरिष्ठ साहित्यकार व कोसली कालेज की प्राचार्या डाक्टर लाज कौशल, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र सिंह यादव, एडवोकेट रणजीत सिंह और लोकसभा चैनल के एंकर रामवीर श्रेष्ठ ने की।
वरिष्ठ साहित्यकार मनोज गौतम ने कार्यक्रम का सफल मंच संचालन किया।
टाइगर क्लब नारनौल की ओर से मुख्य अतिथि को गदा भेंट कर सम्मानित किया।
हुकमदेव नारायण यादव ने अपने संबोधन में अनेक उदाहरण देते हुए बताया कि साहित्य का समाज सुधारने और आगे बढ़ाने में विशेष योगदान रहता है। उन्होंने कहा कि लेखक के बाद साहित्य उसे अमर बना देता है।
यादव ने बताया कि सफर सृष्टि का पुस्तक भविष्य में अनेक साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगी।
पुस्तक समीक्षकों ने सार स्वरूप बारी बारी कहा कि पुस्तक सफर सृष्टि का एक ऐसी बहुआयामी कृति है, जो विज्ञान, इतिहास, दर्शन, अध्यात्म और मानव सभ्यता के विकास को एक ही वैचारिक धारा में प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। यह पुस्तक केवल घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण नहीं है, बल्कि मानव की सनातन जिज्ञासा—मैं कौन हूँ, कहां से आया हूँ और भविष्य में कहां जा सकता हूं?—का उत्तर खोजने का एक गंभीर साहित्यिक उपक्रम है। लेखक ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर संभावित भविष्य के प्रकाश-मानव तक की यात्रा को रोचक, संवादात्मक और विचारोत्तेजक शैली में प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि यह पुस्तक सामान्य ज्ञानग्रंथों से अलग एक विशिष्ट पहचान बनाती है।
पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका विषय-विस्तार है। लेखक ने सिंगुलैरिटी, बिग-बैंग, बिग-बॉउन्स, ग्रह-निर्माण, जैव-विकास, होमो-सेपियन्स, प्राचीन सभ्यताओं, वेदों, संवतों, इतिहास, मानव स्वभाव, आत्मा, चेतना और भविष्य की वैज्ञानिक संभावनाओं जैसे अनेक विषयों को एक ही संरचना में समाहित किया है। इतने व्यापक विषय को एक पुस्तक में समेटना स्वयं में चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेखक ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए पाठक के सामने एक ऐसी बौद्धिक यात्रा रखी है, जो उसे समय और ज्ञान के विशाल विस्तार में विचरण कराती है।
इस कृति की सबसे मौलिक उपलब्धि इसकी पाडकास्टीय-चंपू शैली है। लेखक ने आधुनिक पाडकास्ट की संवादात्मक पद्धति को साहित्यिक चंपू परंपरा के साथ जोड़कर एक नवीन शैली का निर्माण किया है। पुस्तक के दो प्रमुख पात्र - बीर श्रेष्ठ और मित्र पुनीतानंद, प्रश्न और उत्तर के माध्यम से विषयों को आगे बढ़ाते हैं। यह शैली पाठक को केवल पढऩे तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे संवाद का सहभागी बना देती है। अनेक स्थानों पर ऐसा अनुभव होता है जैसे पाठक किसी बौद्धिक चर्चा को सुन रहा हो। यह प्रयोग विशेष रूप से आधुनिक युवा पाठकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है।
पुस्तक का प्रथम खंड ब्रह्मांड और जीवन की उत्पत्ति पर केंद्रित है। लेखक ने बिग-बैंग सिद्धांत, सिंगुलैरिटी और ब्रह्मांडीय विकास की वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने वैदिक साहित्य, विशेषकर ऋग्वेद के नासदीय सूक्त और अन्य वैदिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए यह दिखाने का प्रयास किया है कि सृष्टि के रहस्यों पर चिंतन केवल आधुनिक विज्ञान की देन नहीं है, बल्कि प्राचीन भारतीय मनीषा भी इस विषय पर गंभीर विचार कर चुकी है। लेखक विज्ञान और अध्यात्म को विरोधी नहीं, बल्कि समान प्रश्नों के भिन्न उत्तर खोजने वाली परंपराओं के रूप में देखते हैं। यही दृष्टिकोण पुस्तक को विशिष्ट बनाता है।
दूसरे खंड में मानव सभ्यताओं और सांस्कृतिक विकास की चर्चा है। मेहरगढ़, राखीगढ़ी, धोलावीरा, सिंधु-सारस्वत सभ्यता, सुमेर, मिस्र और अन्य प्राचीन सभ्यताओं का उल्लेख पुस्तक को वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। लेखक भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और महत्ता पर बल देते हैं, परंतु साथ ही विश्व की अन्य सभ्यताओं के योगदान को भी स्वीकार करते हैं। इससे पुस्तक में संतुलन बना रहता है। विभिन्न संवतों, ग्रंथों और ऐतिहासिक घटनाओं का समावेश पाठक को मानव विकास की दीर्घकालिक यात्रा का बोध कराता है।
पुस्तक का तीसरा खंड भविष्य और चेतना से संबंधित है। यहाँ लेखक केवल अतीत का वर्णन नहीं करते, बल्कि मानव के संभावित भविष्य पर भी विचार करते हैं। आत्मा, मस्तिष्क, चेतना, स्वभाव, सामाजिक मर्यादाएँ और वैज्ञानिक संभावनाएँ इस खंड के प्रमुख विषय हैं। प्रकाश-मानव की अवधारणा लेखक की भविष्य-दृष्टि को अभिव्यक्त करती है। यह भाग पाठक को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि मानव विकास अभी पूर्ण नहीं हुआ है और विज्ञान तथा चेतना के नए आयाम भविष्य में मानव जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
भाषा की दृष्टि से पुस्तक सरल, सहज और प्रभावशाली है। लेखक ने कठिन वैज्ञानिक और दार्शनिक अवधारणाओं को भी सामान्य हिन्दी में प्रस्तुत किया है। बीच-बीच में प्रयुक्त पद्यांश, दोहे और छंद पुस्तक को साहित्यिक गरिमा प्रदान करते हैं। संवादों के बीच काव्यात्मक अभिव्यक्तियाँ पाठक की रुचि बनाए रखती हैं। यह गुण पुस्तक को केवल ज्ञानपरक नहीं, बल्कि साहित्यिक भी बनाता है।
लेखक की अध्ययनशीलता और परिश्रम पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में दिखाई देते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक शोधों, पुरातात्विक खोजों, ऐतिहासिक तथ्यों और प्राचीन ग्रंथों का व्यापक उपयोग किया है। साथ ही वे यह स्वीकार करते हैं कि उनका उद्देश्य अंतिम सत्य की घोषणा करना नहीं, बल्कि उपलब्ध ज्ञान को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करना है। यह विनम्रता पुस्तक की विश्वसनीयता को बढ़ाती है।
हालांकि आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो पुस्तक की कुछ सीमाएं भी हैं। कई स्थानों पर विज्ञान और अध्यात्म के बीच स्थापित समानताएँ दार्शनिक रूप से आकर्षक अवश्य हैं, किंतु उन्हें वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। कुछ संवाद अपेक्षाकृत लंबे हैं और विषय-विस्तार के कारण कभी-कभी सूचनाओं की अधिकता भी अनुभव होती है। फिर भी ये सीमाएँ पुस्तक की मूल शक्ति को कम नहीं करतीं। इसके विपरीत, वे इस तथ्य की ओर संकेत करती हैं कि लेखक ने अत्यंत व्यापक विषय को समेटने का साहस किया है।
समग्र रूप से 'सफर सृष्टि का एक महत्त्वपूर्ण, मौलिक और विचारोत्तेजक कृति है। यह पुस्तक पाठक को ब्रह्मांड की विराटता, मानव सभ्यता की जड़ों और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती है। विज्ञान, इतिहास, दर्शन और अध्यात्म के समन्वय का जो प्रयास इस पुस्तक में दिखाई देता है, वह हिन्दी साहित्य में अपेक्षाकृत दुर्लभ है। ज्ञान और जिज्ञासा की यह यात्रा पाठक को केवल बाहरी संसार से नहीं, बल्कि अपने भीतर के प्रश्नों से भी परिचित कराती है। यही इस कृति की सबसे बड़ी उपलब्धि और स्थायी महत्ता है।
इस अवसर पर एडवोकेट सुदेश यादव, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डॉक्टर एच डी यादव, पर्यटन विभाग के ए जी एम एच एस यादव, कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉक्टर अजय यादव, सुप्रसिद्ध हास्यकवि हलचल हरियाणवी, सुप्रसिद्ध दोहाकार रघुविंद्र यादव, सिंघानिया विश्वविद्यालय के कैंपस उप कुलपति प्यार सिंह जस्सल, एक सीएसआर कंपनी के हैड दीपक यादव, सिंघानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कैंपस उप-कुलपति पवन त्रिपाठी,  एडवोकेट अतरलाल,  प्राचार्य दिनेशकुमार यादव,  प्रोफेसर सविता मंगलेश, आशुकवि दलबीर सिंह फूल, बिजली विभाग के एकाउंट अधिकारी बलबीर सिंह, हरियाणा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष महावीर पहलवान, साहित्यकार  त्रिलोकचन्द फतेहपुरी, प्राचार्य सूरत सिंह धनोंदा, सामाजिक कार्यकर्ता अजीतवीर यादव, मुख्याध्यापक धर्मेंद्र यादव, वरिष्ठ साहित्यकार सुंदरलाल, लेखक नेमीचंद् शास्त्री, साहित्यकार शुभराम खालेटा, बिजली विभाग के उपमंडल अधिकारी बी डी यादव,दीपक यादव जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी, धर्मबीर बीडीपीओ, दिनेश कुमार समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी, समाजसेवी महावीर यादव,मास्टर रामकिशन यादव,दिल्ली पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर प्रदीप यादव, टाइगर क्लब के संरक्षक राकेश यादव टाइगर, बिट्टू लाम्बा,  वरिष्ठ साहित्यकार श्रीभगवान बव्वा, अजीत सांवरिया, सुनील यादव व सरपंच मिंटू गोमला सहित गणमान्य लोग उपस्थित है।
फोटो कैप्शन 12: संबंधित है

विश्व दूध दिवस
-दूध के बल पर पाई है नीतू गुढ़ा ने राष्ट्र स्तर पर
-दूध न केवल आहार है बल्कि जीवन का आधार है
-नीतू डेरी से प्रतिदिन जाता है 900 लीटर दूध 
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कनीना की आवाज।















 दूध नाम लेते ही सेहत के राज की याद आती है वही नीतू यादव गुढ़ा निवासी को दूध ने मालामाल कर दिया। वो दूध के बल वो दूध के बल पर फर्श से अर्श तक पहुंच गई है। कभी पांच गायों से अपना दूध से संबंधित सफर शुरू किया और आज 100 गाये उनके पास है। जिनसे सर्दियों में 1400 लीटर प्रति दिन तो गर्मियों में 900 लीटर प्रति दिन दूध डेरी तक पहुंच रहा है। उनका दूध पूरे ही राष्ट्र में जाता है। 1995 में गुढ़ा में पवनवीर नामक बेरोजगार व्यक्ति के नीतू यादव की शादी हुई तब तक नीतू ने 10 जमा दो और आईटीआई कटिंग टेलरिंग का कोर्स कर रखा था। गुढ़ा आने के बाद उनके सामने नौकरी की समस्या सामने मुंह बाए खड़ी थी चूंकि उनके पति पवनवीर बेरोजगार थे जो वर्तमान में बाबू पद पर कार्यरत हैं।
 नीतू ने देखा कि उनके जमीन जायदाद तो है किंतु बहुत अधिक चारा बेकार जाता है। तूड़ी, कड़बी, हरा चारा कितना ही बेकार चला जाता था। जिसके चलते उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए पांच गायों से दूध का सफर शुरू किया प्रारंभ में तो दोधिए को ही दूध दिया जाता था और लोकल में ही दूध पहुंच पा रहा था किंतु धीरे-धीरे 2013 तक गायों की संख्या बढ़ा ली और अमूल डेरी को दूध प्रदान करने लगी। धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ती चली गई। वर्तमान में गायों की संख्या एक सौ से अधिक पहुंच गई है। इनमें से दूध देने वाली 45 गाये हैं जो अधिकतम 70 लीटर प्रति दिन दूध देती हैं। घर परिवार के लिए दो भैंस भी पाल रखी हैं। दूध से जो आय हो रही है वह डेढ़ से 2 लाख प्रतिमाह पहुंच रही है। उनको देखकर जयपाल गुढ़ा ने भी एक सौ के करीब गाये पालकर डेरी शुरू कर दी। अनेक लोग हैं जो उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं और कुछ चलने का प्रयास कर रहे हैं।
 दूध के बल पर नीतू ने न केवल अपने स्तर को ऊंचा उठाया अपितु अपनी पुत्री मोनिका को एमबीबीएस करवाया। वर्तमान में वो पीजी की तैयारी कर रही है वही उनका पुत्र कुणाल दस जमा दो मेडिकल में पढ़ाई कर रहा है। वर्तमान में कहीं भी पूछा जाए नीतू डेरी का नाम प्रसिद्ध है। जिले में अमूल का आधार भी नीतू डेरी बनती जा रही है। दूध के बल पर उनका सफर बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने वर्तमान में बड़ी डेरी का निर्माण किया है जिसमें सभी कार्य स्वयं संचालित होंगे अर्थत आटोमेटिक होंगे। उनकी दूध के क्षेत्र में ख्याति के दृष्टिगत 2018 में चैनई  में, 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मान दिया। वही 2022 में भिवानी में उनकी गाय चैंपियन रही। 2022 में भिवानी में मनोहर लाल खट्टर ने उनकी गायों के कारण उन्हें सम्मानित किया। 2022 में  ही लाडवा में भी उन्हें पुरस्कृत किया गया। 2026 में झज्जर में उनका अनेक पुरस्कार मिले। 2026 में ही उनकी गाय पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रही।
 नीतू का कहना है कि दूध उनके लिए न केवल आहार है बल्कि जीवन का आधार है। जिन्होंने उनकी जिंदगी को संवार दिया है। आज घर की हालत बेहतरीन बन गई है। दूध के कारण ही उनका नाम दूरदराज तक विख्यात है। बुजुर्ग प्राय आशीर्वाद देते आए हैं- दंूधो नहाओ, फूलों फलों अर्थात दूध न केवल पीना अपितु दूध से भी नहाना भी है और आगे उन्नति के शिखर पर चलते जाना है। नीतू गुढ़ा यह कहावत चरितार्थ कर रही है।  
फोटो कैप्शन 9 व 10: नीतू यादव गुढ़ा डेरी संचालिका गायों के साथ


अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर दौंगड़ा अहीर में 36 बिरादरी की ऐतिहासिक महापंचायत, सर्वसमाज ने भरी हुंकार
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कनीना की आवाज।
अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर रविवार को ऐतिहासिक गांव दौंगड़ा अहीर स्थित रजवाड़ा फोर्ट में 36 बिरादरी की एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, जयपुर, बहरोड़ तथा आसपास के अनेक क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे समाज की एकजुटता और जागरूकता का परिचय मिला।
महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि अहीर समाज का देश की सेना और राष्ट्र सेवा में गौरवशाली योगदान रहा है। समाज लंबे समय से अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग करता आ रहा है। इस मांग को लेकर खेड़की दौला सहित विभिन्न स्थानों पर भूख हड़ताल, धरना-प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाए गए हैं तथा समाज आज भी पूरी मजबूती के साथ अपने अधिकार की आवाज बुलंद कर रहा है।
महापंचायत में पूर्व सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कैप्टन रतन सिंह, कैप्टन दलीप सिंह जावा, कैप्टन पुंशिका, कैप्टन लालाराम नागतिहाड़ी, सूबेदार मेजर धर्मदेव, आनरेरी कैप्टन हरिओम रेवाड़ी, हवलदार जय किशन तथा सूबेदार सूबे सिंह गुरुग्राम सहित अनेक पूर्व सैनिकों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा करते हुए अहीर रेजिमेंट गठन की मांग का समर्थन किया।
अहीर रेजिमेंट समिति दौंगड़ा अहीर की ओर से प्रधान दलीप सिंह, कैप्टन महादेव सिंह, हेड क्लर्क बनी सिंह, कैप्टन पवन कुमार, सूबेदार सत्यप्रकाश, सूबेदार सतबीर, हवलदार कृष्ण कुमार यादव, सुरेंद्र सिंह, ओमप्रकाश एवं लालचंद साहब सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
महापंचायत में साध्वी पुष्पा आर्या, जलयुद्ध नायक रघु यादव, विजय सोमानी, डॉ. अभयराम, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सत्यवीर झुकिया, अनिल भगड़ाना, मोहित यादव (दिल्ली), दीपिका यादव (रेवाड़ी) तथा इंदु यादव (बधवाना) सहित विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि अहीर समाज ने देश की सुरक्षा और सैन्य परंपरा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए अहीर रेजिमेंट का गठन केवल एक मांग नहीं बल्कि समाज के सम्मान, गौरव और वीर सैनिकों के योगदान को उचित पहचान दिलाने का विषय है।
इस अवसर पर अरुण यादव खेड़की दौला, राजेंद्र कमांडेंट, महेश शर्मा जयपुर, कप्तान शिवराज गिलोथ, ओमप्रकाश राजपूत, राव नरेंद्र यादव गुरुग्राम, एस.एस. यादव पालम विहार, कप्तान देशराज बेरावास, अमित यादव (उपाध्यक्ष एनएसयूआई बहरोड़), विनोद कुमार नांगल चौधरी, दिनेश यादव जयपुर, सूबेदार कृष्ण यादव जावा, कैलाश पालड़ी (पूर्व सरपंच) सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
महापंचायत में कलवाड़ी, मुंडिया खेड़ा, अटाली, बेवल, भालखी, सिलारपुर, सीहमा, सुंदरह, बवानिया सहित आसपास के अनेक गांवों से आए लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रजवाड़ा फोर्ट परिसर लोगों से खचाखच भरा रहा और पूरे आयोजन में सामाजिक एकता का माहौल देखने को मिला।
महापंचायत के अंत में सर्वसमाज के लोगों ने एकजुट होकर अहीर रेजिमेंट गठन के समर्थन में जोरदार हुंकार भरी तथा संकल्प लिया कि जब तक अहीर रेजिमेंट का गठन नहीं हो जाता, तब तक यह संघर्ष शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उपस्थित लोगों ने समाज की एकता, संगठन और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
फोटो कैप्शन:
दौंगड़ा अहीर स्थित रजवाड़ा फोर्ट में रविवार को अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर आयोजित 36 बिरादरी की विशाल महापंचायत में बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीण, महिलाएं, पूर्व सैनिक एवं सामाजिक प्रतिनिधि।
फोटो कैप्शन 08: अहीर रेजिमेंट के लिए महापंचायत




आर्य समाज गाहड़ा में मासिक यज्ञ संपन्न, भजनों से गुंजायमान हुआ वेद मंदिर परिसर।
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कनीना की आवाज।
वेद प्रचार मंडल एवं आर्य समाज गाहड़ा के तत्वावधान में रविवार को मासिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ किया गया।
     आर्य समाज के प्रधान शिक्षाविद रामेश्वर दयाल शास्त्री  की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।  अपने उद्बोधन में उन्होंने  कहा कि यज्ञ समाज में शांति, शुचिता और आपसी सद्भाव का संदेश देता है।
उन्होंने  शिक्षा और संस्कारों के मेल पर बल देते हुए कहा की वेदों का ज्ञान ही मानव जीवन के कल्याण का सच्चा मार्ग है। नई पीढ़ी को आर्य समाज के सिद्धांतों और वैदिक संस्कृति से जोडऩा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
   जिसमें पंडिता मनीषा आर्या ने ब्रह्मतत्व निभाया, यजमान के रूप में अनिल आर्य स्वदेशी नवनियुक्त वेद प्रचार मंडल के उप मंत्री व वैदिक पुरोहित पंडित रविन्द्र कुमार आर्य  द्वारा पूर्ण विधि-विधान और वैदिक रीति-नीति से यज्ञ संपन्न कराया गया। वैदिक  मंत्रोच्चारण और पावन आहुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय और सुगंधित हो उठा। श्रद्धा से यज्ञ करके यज्ञ कर्ताओं ने आत्मिक प्रसन्नता व संतुष्टि का अनुभव करते हुए आनंद की अनुभूति की।
         वेद प्रचार मंडल के जिला महेंद्रगढ़ के  प्रधान धर्मवीर सिंह आर्य खातौली के कुशल नेतृत्व में महेंद्रगढ़ की पावन धरा पर वेदवाणी की जो अलख जगाई जा रही है, वह अद्वितीय है। कार्यकारिणी में अनिल आर्य स्वदेसी को घर-घर यज्ञ के प्रचार प्रसार के प्रयासों, निस्वार्थ सेवा भाव, समर्पण हेतु ऋषि दयानंद के सपनों को साकार करने की तड़प को देखते हुए उप मंत्री का दायित्व मिला है। आर्य समाज गाहड़ा द्वारा अगाध श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक पगड़ी व गायत्री पट्टका पहनाकर उनका सम्मान करते हुए स्वयं को गौरवान्वित और कृतज्ञता  का अनुभव किया।
   अनिल आर्य स्वदेशी ने वेद प्रचार की मुहिम को तेज करने की बात कही। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य घर-घर तक वेदों का संदेश पहुंचाना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस तरह के साप्ताहिक यज्ञों के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों को दूर किया जा सकता है।
 मास्टर जगन्नाथ  ने युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा, आर्य समाज सामाजिक सुधार का एक सशक्त मंच है। युवाओं को आगे आकर इस पावन अभियान का हिस्सा बनना चाहिए ताकि एक राष्ट्रभक्त और संस्कारी समाज का निर्माण हो सके। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात आर्य समाज की बहनों द्वारा अत्यंत मधुर और प्रेरणादायक वैदिक भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा परिसर वैदिक लहरों से गुंजायमान हो गया।
फोटो कैप्शन 07: गाहड़ा में यज्ञ करते हुए

राहत:मोहनपुर में लगी मीठे पानी की छबील
-तृप्त हुए राहगीर ठंडा पानी पीकर
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कनीना की आवाज।
गर्मी से राहत देने के लिए मीठे ठंडे पानी की छबील लगाने का सिलसिला जारी है। इन दिनों क्षेत्र में भयंकर गर्मी पड़ रही है। सुबह होते ही जैसे जैसे सूर्य आसमान में चढ़ता है वैसे ही गर्मी भी अपना तेवर दिखाने लगती है। इस समय क्षेत्र का तापमान भी 46 डिग्री पार कर चुका है। इसी बीच मंडी में कनीना-नारनौल सड़क मार्ग पर मोहनपुर गांव के युवाओं ने मीठे पानी की छबील लगाई गई। नारनौल और अटेली की तरफ जाने वाले राहगीरों को मीठा पानी पिला कर पुण्य कमाया। युवाओं ने सुबह 09 बजे से शाम 05 बजे तक राहगीरों को पानी पिलाया। इस मौके पर अमरजीत कोच, मोहित, हितेश रोहिल्ला, मोहित जोशी, निकेतन शर्मा, राहुल शर्मा, वीरेंद्र चौहान समस्त ग्राम वासी मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 06: मीठे पानी की छबील लगाते हुए




विश्व दूध दिवस एक जून
-डेयरी पालन कर गरीब व्यक्ति कमा सकता है रोटी रोजी-डा कांगड़ा
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कनीना की आवाज।
 दूध ऐसा भोजन है जो वर्ष भर तथा जीवन भर प्रयोग किया जाता है। दूध की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व दूध दिवस मनाया जाता है।  विश्व दूध दिवस एफपीओ द्वारा 1 जून 2001 को मनाया गया था और हर वर्ष मनाया जाता है।
 जिला महेंद्रगढ़ में गेाय, भैंस एवं बकरी पाली जाती हैं जिनमें करीब 40 से 50 फीसदी दूध देती है और दूध के जरिए लोगों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। कनीना क्षेत्र में जहां गाय भैंस की डेयरी ओ की संख्या आधा दर्जन है।
 प्रसिद्ध महिला डेरी संचालिका नीतू यादव ने बताया उनके पास 200 गायें हैं प्रतिदिन 1200 लीटर दूध डेरी में जाता है किंतु दूध के भाव कम हैं जिसके पीछे चारा एवं फीड महंगा होना है। चारा 40 रुपये किलो तक पहुंच जाता है या फिर पशुओं का फीड महंगा है। नकली दूध की भरमार है इसलिए दूध महंगा नहीं हो पाता। डेयरी यूनियन ने बार-बार यह बात सरकार समक्ष उठाई है किंतु समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि गरीबों के लिए डेरी पालन बहुत बेहतर धंधा है।
जयपाल गुढ़ा निवासी का कहना है कि गाय पालकर बड़ा आनंद आता है और गायों की संख्या बढ़ाना उनका लक्ष्य है। दूध पर्याप्त मात्रा में देती है जिनसे घर का गुजर बसर ही नहीं बल्कि डेरी के लिए दूध उपलब्ध हो जाता है। जयपाल गुढ़ा डेयरी संचालक के पास गायें हैं तथा सैकड़ों लीटर दूध डेरियों में जा रहा।
क्या कहते हैं डा. पशुपालन विभाग -
 राजकीय पशु चिकित्सालय के डा पवन कांगड़ा वीएस ने बताया एक गाय और भैंस करीब 20 बार ब्याती है परंतु दो तीन बार ब्याने के बाद ही दूध बढ़ता है बाद में दूध घटता चला जाता है। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जाते हैं। डेरी पालन का धंधा करके गरीब व्यक्ति भी बेहतर आय ले सकता है।
चारे के करने पड़ते हैं भंडार--
दूध के लिए  महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी जिले पशु पालक खेतों में जाकर देखें तो तूड़ी से भरे हुए कूप तथा कड़वी की छुरियां तथा छव्वा रखते हैं। जिनमें लंबे समय तक पशु चारा खराब नहीं होता। दूध प्राप्त करने के लिए किसान वर्षभर के पशुचारे का प्रबंध इन्हीं विधियों से करते आ रहे हैं।  खरीफ फसल बतौर बाजरा उगाकर कड़बी प्राप्त करते हैं तो रबी फसल बतौर गेहूं और जौ की तूड़ी प्राप्त होती है। दोनों ही सूखे चारे में शामिल किए गए हैं।
गौशालाएं हैं दूध का केंद्र-
अकेले कनीना क्षेत्र में आधा दर्जन गौशालाएं हैं जिनमें कनीना, बुचावास, भोजावास, स्याणा, खरकड़ाबास आदि प्रमुख हैं। गौशालाओं में भी सूखे एवं हरे चारे का प्रबंध किया जाता है और विशेष प्रकार के शेड बनाए जाते हैं जहां वर्षभर का चारा सुरक्षित रखा जाता है। यहां दूध भी उपलब्ध हो पाता है।
 कनीना श्रीकृष्ण गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि उनके पास करीब 1500 गायों के लिए तूडी के भंडार हैं जहां से 100 मण के करीब तूड़ी प्रतिदिन गायों को परोसी जाती है और 50 गाय दूध दे रही हैं। समय समय पर वे गायों के लिए तूड़ी तथा कड़वी खरीदते हैं ताकि पशुओं का गुजारा चल सके।
किसान कृष्ण सिंह, महेंद्र सिंह, राम अवतार, सूबे सिंह, राजवीर सिंह, महिपाल आदि ने बताया कि वे पशु पालते हैं। पशुओं के लिए चारा खेतों से उपलब्ध हो जाता है। इस प्रकार पशुओं से दूध, घी एवं मक्खन आदि परिवार के लिए उपलब्ध हो जाता है ताकि कहीं से दूध खरीदना न पड़े।
कहावत है हरियाणा पर लागू-
ऐसे में देसां में देस हरियाणा जित दूध दही का खाना वाली कहावत इसी बात से चरितार्थ होती है कि सबसे अधिक दूध,घी एवं दही आदि इस क्षेत्र में पशुओं से प्राप्त होता है जो किसान हैं।  किसानी एवं पशुपालन दोनों का निर्वहण करते हुए एक पंथ दो काज की कहावत चरितार्थ करते हुए जिला महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी पशुपालक नाम कमा रहे हैं। यहां देसी नस्ल की गाय और मुर्रा नस्ल की भैंस से बहुत प्रसिद्ध है।
प्रसिद्ध है घी एवं दूध-
इन जिलों में पशुओं से विशेषकर देसी नस्ल की गायों एवं भैंसों का दूध, मक्खन, घी, मट्ठा, छाछ आदि दूर दराज से विख्यात है।
फोटो कैप्शन 05: नीतू डेरी पालन करने वाली महिला डेरी समक्ष।
             साथ में डा पवन कांगड़ा

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