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Tuesday, May 26, 2026




शोक जताने मंत्री आएंगे कनीना
-पूर्व डीआईजी का गत दिनों हो गया देहांत
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कनीना की आवाज।
पूर्व डीआईजी राज सिंह का बीते दिन देहांत हो गया। उनकी शोक सभा मे पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव 28 मई को कनीना मे शाम लगभग 4 बजे शामिल होंगे। इस दौरान वो पूर्व डीआईजी राज सिंह की याद में त्रिवेणी लगाएंगे।



विशाल भंडारे के लिए कनीना से रवाना हुआ भक्तों का दल
- खाटू श्याम धाम में लगाएंगे दो दिन तक भंडारा
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कनीना की आवाज।
 कनीना कस्बे के विभिन्न समाजसेवी एवं श्याम भक्त खाटू श्याम धाम पर जाकर हर वर्ष भंडारा लगते हैं।  भंडारा लगाने के लिए कनीना मंडी से बस रवाना हुई। बस को बसपा नेता अतरलाल ने रवाना किया।
 इस मौके पर रविंद्र कुमार भक्त ने बताया कि यह हर वर्ष भंडारा लगता है जिसमें राहगीरों के लिए खाटू श्याम धाम में नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम का नाश्ता, रात्रि भोजन सब कुछ उपलब्ध होगा। पेयजल का विशेष प्रबंध तथा विभिन्न प्रकार के पेयजल भी पिलाये जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए खर्च सभी समाजसेवी वहन करते आ रहे हैं। ये सभी समाजसेवी जाकर दो दिनों तक राहगीरों की सेवा करेंगे तत्पश्चात 2 दिन के बाद वापस घर लौटेंगे। भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला। भक्तों की उत्साह को देखते हुए अतरलाल ने अपनी तरफ से 3100 रुपए का दान दिया तथा विभिन्न भक्तों को फूल मालाओं से स्वागत किया।
 इस मौके पर नीटू ठेकेदार, रवि कुमार, सुरेश चीफ, संजय मित्तल, मुकुट मित्तल, राकेश रोहिल्ला, रोहित गर्ग, गोपाल मोबाइल, सुरेश कुमार, रमन कुमार, महावीर ,महिपाल, अश्वनी, डा. एसबी यादव, अजीत कुमार, अशोक शर्मा, धनराज गोयल, विजेंद्र गर्ग, नरेश यादव, सन्नी गुप्ता, भूदेव शर्मा ,बंटी सहित श्रीश्याम सेवक कनीना के पदाधिकारी मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 6, 7, 8: भक्त खाटू श्याम धाम के लिए रवाना होते हुए


भावी पीढिय़ों के लिए सहेजी जाएगी देश की बौद्धिक संपदा -एडीसी
-जिले के प्रत्येक वार्ड और पंचायत में तैनात किए गए दो-दो सर्वेक्षक
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कनीना की आवाज।
भारत की अमूल्य बौद्धिक संपदा और सदियों पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय और हरियाणा सरकार के समन्वय से ज्ञान भारतम मिशन की शुरुआत हो चुकी है। इसी कड़ी में आज अतिरिक्त उपायुक्त एवं इस मिशन के जिला नोडल अधिकारी तरुण कुमार पावरिया ने सभागार में अधिकारियों और संबंधित कमेटियों की एक बैठक ली।
इस बैठक में उन्होंने राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत रोडमैप साझा किया और तैनात अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। इस दौरान उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले महेंद्रगढ़ जिले में इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
एडीसी ने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन देश के इतिहास को पुनर्जीवित करने और हमारी सभ्यता के ज्ञान, परंपराओं, विज्ञान व दर्शन को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जिले में इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण को पूरी पारदर्शिता और गति के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए एक विस्तृत प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया गया है। एडीसी ने कहा कि जिले के प्रत्येक वार्ड और ग्राम पंचायत में अनिवार्य रूप से कम से कम दो-दो अधिकारियों व कर्मचारियों को विशेष सर्वेक्षक के रूप में तैनात कर दिया गया है। इन सभी तैनात सर्वेक्षकों को एक विशेष रूप से गठित कमेटी के माध्यम से अनिवार्य क्षमता निर्माण, तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावहारिक ओरिएंटेशन प्रदान की जा चुकी है, ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और वैज्ञानिक पद्धति से कर सकें।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने इस व्यापक सर्वेक्षण कार्य को आगामी 10 जून 2026 तक हर हाल में पूरा करने की समय-सीमा तय की है।
उन्होंने बताया कि यह संपूर्ण सर्वेक्षण आधुनिक ज्ञान भारतम मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डिजिटल रूप से संचालित किया जा रहा है। इस उच्च तकनीक आधारित प्रणाली में डेटा की प्रमाणिकता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए कई विशेष मानक तय किए गए हैं। सर्वेक्षण के दौरान सर्वेक्षकों के लिए मोबाइल में जीपीएस को सक्रिय रखना और उसी सटीक स्थान पर उपस्थित रहना अनिवार्य होगा, जहां पांडुलिपियां या दुर्लभ अभिलेख मौजूद हैं। यह प्रणाली पांडुलिपि के वास्तविक भौगोलिक स्थान को स्वचालित रूप से रिकॉर्ड करेगी। डेटा संकलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्थित रखने के लिए एप्लिकेशन का इंटरफेस भले ही हिंदी और अंग्रेजी सहित देश की कुल 23 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय भाषाओं और प्राकृत का समर्थन करता हो, लेकिन सर्वे फॉर्म की सभी प्रविष्टियां केवल अंग्रेजी भाषा में ही दर्ज की जाएंगी।
सर्वेक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए इसे कुल सात महत्वपूर्ण चरणों में विभाजित किया गया है।
उन्होंने बताया कि एप्लिकेशन में लॉगिन के बाद भाषा चयन, प्रोफाइल श्रेणी का चुनाव, फिर संरक्षक या संबंधित धार्मिक व सार्वजनिक संस्था के नाम, मोबाइल नंबर और पते का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। इसके बाद पांडुलिपि के स्वरूप (जैसे ताड़पत्र, प्राचीन कागज, धातु आदि), उसकी लिपि, भाषा और वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य शर्त यह रखी गई है कि प्रत्येक पांडुलिपि के मुखपृष्ठ या पहले पृष्ठ की कम से कम एक अत्यंत स्पष्ट, पर्याप्त रोशनी वाली और बिना छाया या चमक वाली वास्तविक फोटो अपलोड करनी होगी। अंतिम सबमिशन के बाद पोर्टल द्वारा एक विशिष्ट रिक्वेस्ट आईडी जेनरेट की जाएगी, जिसके माध्यम से भविष्य में उस धरोहर के संरक्षण, कैटलागिंग और डिजिटाइजेशन की प्रगति को ट्रैक किया जा सकेगा।
अतिरिक्त उपायुक्त ने जिलावासियों से अपील की है कि प्राचीन पांडुलिपियां, ऐतिहासिक पत्र, दुर्लभ ताम्रपत्र, पुराने मानचित्र या प्राचीन तस्वीरें केवल किसी व्यक्ति या परिवार की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि ये हमारे समाज की साझा बौद्धिक धरोहर हैं। उन्होंने आह्वान किया कि अभिलेख दान अभियान के तहत आमजन और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं स्वेच्छा से आगे आएं और अपने घरों, मठों, पारंपरिक पाठशालाओं या मंदिरों में सहेज कर रखी गई ऐसी दुर्लभ सामग्री को राज्य अभिलेखागार विभाग को सौंपने में सहयोग करें।
बैठक में शिक्षा विभाग, स्थानीय निकाय और पंचायत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व कमेटी सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04:ज्ञान भारतम मिशन को लेकर बैठक लेते एडीसी तरुण कुमार पावरिया।


एसआईआर-2026 के लिए जल्द बीएलए नियुक्त करें सभी राजनीतिक दल
-मतदाताओं की सहायता और जानकारी के लिए जिला स्तर पर टोल फ्री नंबर 01282-1950 शुरू
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कनीना की आवाज।
निष्पक्ष व त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि जल्द से जल्द अपने-अपने बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-2) नियुक्त करें। चुनाव प्रक्रियाओं को पारदर्शी व सुगम बनाने में सभी की अहम् भूमिका होती है। यह बात उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अनुपमा अंजली ने मंगलवार को लघु सचिवालय के मीटिंग हाल में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर-2026) के संबंध में आयोजित बैठक में कही।
डीसी ने स्पष्ट किया कि नियुक्त किया जाने वाला बूथ लेवल एजेंट अनिवार्य रूप से उसी संबंधित बूथ का मतदाता होना चाहिए, ताकि वह स्थानीय स्तर पर सही सत्यापन में सहयोग कर सके।
उपायुक्त ने बताया कि विशेष गहन संशोधन के लिए पात्रता तिथि एक जुलाई निर्धारित की गई है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए 5 जून से 14 जून तक संबंधित अधिकारियों और चुनाव अमले को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। 15 जून से 14 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करेंगे। साथ ही 14 जुलाई तक जिले के मतदान केन्द्रों का रेशनलाइज़ेशन (युक्तिकरण) कार्य पूरा किया जाएगा। 21 जुलाई को मतदाता सूचियों का प्रारंभिक प्रकाशन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 21 जुलाई से 20 अगस्त तक इस अवधि के दौरान मतदाता सूची को लेकर दावे तथा आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। साथ ही 21 जुलाई से 18 सितंबर तक प्राप्त हुई सभी
आपत्तियों और दावों का निपटारा किया जाएगा। 22 सितंबर को मतदाता सूचियां का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। जिला में एसआईआर से संबंधित जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 01282-1950 शुरू कर दिया गया।
इस अवसर पर जिला निर्वाचन तहसीलदार सुरेंद्र, बीजेपी जनप्रतिनिधि सुशील चौटाला, नरेंद्र सिंह, योगदत व राजेंद्र कुमार, कांग्रेस जन प्रतिनिधि मनजीत कुमार, जेजेपी जनप्रतिनिधि वीरेंद्र, इनेलो जनप्रतिनिधि विजय सैनी मौजूद थे।
1200 से ज़्यादा वोटर वाले पोलिंग स्टेशनों का 14 जुलाई तक होगा रेशनलाइजेशन-
उपायुक्त अनुपमा अंजली ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग व हरियाणा राज्य चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, 1200 से ज़्यादा वोटर वाले पोलिंग स्टेशनों का 14 जुलाई तक रेशनलाइज़ेशन किया जाना है। उन्होंने बताया कि जिले में ऐसे 175 मतदान केंद्र चिह्नित किए गए थे जहां मतदाताओं की संख्या 1200 से अधिक है। इनमें से 62 केंद्रों को समायोजन किया जाएगा, जबकि 113 नए मतदान केंद्र बनाने प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
इन नए प्रस्तावों में अटेली से 24, महेंद्रगढ़ से 30, नारनौल से 31 और नांगल चौधरी से 28 नए पोलिंग स्टेशन शामिल हैं।
फोटो कैप्शन 05:राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करती डीसी






अटेली सीएचसी में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं होंगी मजबूत
-मेदांता फाउंडेशन के सहयोग से आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को मिलेगा विस्तार
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कनीना की आवाज।
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की पहल पर महेंद्रगढ़ जिले के अटेली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग हरियाणा और मेदांता फाउंडेशन के बीच सहयोग से तैयार प्रस्ताव को सिद्धांतत: मंजूरी के लिए विचाराधीन रखा गया है।
प्रस्ताव के अनुसार सीएचसी अटेली में आगामी तीन वर्षों के लिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस पहल के तहत सीजेरियन ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, ओपीडी सेवाएं, एनीमिया स्क्रीनिंग क्लीनिक तथा अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाओं को आधुनिक बनाया जाएगा।
इसके अलावा महिलाओं में स्तन एवं गर्भाशय कैंसर की जांच, एनीमिया प्रबंधन, बीपी, आरबीएस और हीमोग्लोबिन जैसी जांचों की सुविधा तथा नवजात शिशुओं के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) को भी मजबूत किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अटेली सीएचसी में इस पहल से महिलाओं और नवजात शिशुओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी।
प्रस्ताव में योग्य डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती, एसीएलएस एंबुलेंस सुविधा, चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव तथा स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण का भी प्रावधान रखा गया है। साथ ही अटेली में परियोजना के सफल संचालन के
बाद फर्रुखनगर और मीरपुर तक इस माडल के विस्तार की संभावना भी जताई गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में चल रही हरियाणा सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और जनसुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
फोटो कैप्शन 03: आरती सिंह राव

खंभे पर चढ़ा व्यक्ति गिरा, घायल
-अस्पताल में मृत घोषित, मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
 ठेकेदार द्वारा रखा गया एक व्यक्ति बिना उपकरणों और अनुभव के खंभे पर चढ़ा दिया जो गिरकर घायल हो गया, अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के भाई ने रवि ने ठेकेदार के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया है।
 रवि कुमार ने कहा है कि वह पामनावली मुजफ्फरनगर का निवासी है। उसका सगा भाई बाबी कुछ दिनों पूर्व जय हनुमान इलेक्ट्रिकल के ठेकेदार सुनील कुमार के पास कार्य कर रहा था। जो बिजली विभाग में ठेके पर कार्य करता है। वह प्राइवेट व्यक्तियों को कार्य पर रखता है। बाबी को बिना किसी लिखित नियुक्ति, बिना तकनीकी प्रशिक्षण, बिना सुरक्षा उपकरण, बिना किसी अनुभवी भक्ति की निगरानी के बिजली के खंभों पर अत्यंत जोखिम पूर्ण कार्य करने हेतु लगा दिया गया। ऐसा कार्य अत्यधिक जानलेवा एवं तकनीकी सावधानी वाला होता है। 24 मई को बाबी बिजली के खंभे पर चढ़ा हुआ था। बिना सुरक्षा उपकरण, बिना पर्याप्त प्रशिक्षण संतुलन बिगड़ गया और वह ऊंचाई से नीचे गिर गया। उसे गंभीर चोटें आई। बाद में अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रवि कुमार का कहना है कि ठेकेदार सुनील कुमार ठेकेदार ने जानबूझकर सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते कर्मचारी की जान जोखिम में डालने का कार्य किया। यदि अनुभवी सुपरविजन में कार्य करवाया गया होता तो दर्दनाक हादसा टल सकता था। ऐसे में सुनील अन्य जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाए। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत सुनील कुमार ठेकेदार पर मामला दर्ज कर लिया है।


मार्केट कमेटी के तहत नहीं हो रही नालियों की सफाई
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कनीना की आवाज।
कनीना मार्केट कमेटी के तहत आने वाली नालियां कूड़े कचरे एवं पोलीथिन से भरी खड़ी हैं।  प्रमुख समाज सेवी हरेंद्र शर्मा ने कहा कि जगह जगह पालीथिन और कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं जबकि नालियों के बीच पौधे खड़े हैं यह संकेत दे रहे हैं कि सफाई कार्य को और नियमित करने की आवश्यकता है। कई स्थानों पर नालियां कूड़े से इस कदर भर चुकी हैं कि गंदा पानी सड़कों तक फैल रहा है, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं श्री शर्मा ने भी कहा कि सड़क किनारे जमा कूड़ा भी स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है लेकिन मंडीवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मार्केट कमेटी जल्द इस समस्या का समाधान करेगी। लोगों का विश्वास है कि नालियों की सफाई घास फूस और पेड़ों की कटाई तथा कूड़ा हटाने का कार्य शीघ्र शुरू किया जाए ताकि मार्केट कमेटी की सुंदरता और स्वच्छता फिर से लौट सके।
स्वच्छ और साफ वातावरण केवल प्रशासन की नहीं बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो कनीना का बाजार एक बार फिर स्वच्छ सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देगा। उन्होंने मांग की है कि नालियों की सफाई की जाए।
 कनीना मार्केट कमेटी के अंतर्गत आने वाली नालियां इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति से सफाई व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित कर रही हैं। प्रमुख समाजसेवी हरेंद्र शर्मा ने कहा कि जगह-जगह पॉलीथिन और कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं जबकि नालियों के बीच उगे पौधे यह संकेत दे रहे हैं कि सफाई कार्य को और नियमित करने की आवश्यकता है।
कई स्थानों पर नालियां कूड़े से इस कदर भर चुकी हैं कि गंदा पानी सड़कों तक पहुंच रहा है, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत ऐसी बन गई है मानो नालियां पानी निकासी का नहीं बल्कि कूड़ा संग्रह अभियान का हिस्सा बन चुकी हों।
वहीं सड़क किनारे जमा कूड़ा भी स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। मंडी वासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मार्केट कमेटी जल्द इस समस्या का समाधान करेगी। लोगों का कहना है कि नालियों की सफाई, घास फूस और झाडिय़ों की कटाई तथा कूड़ा हटाने का कार्य शीघ्र शुरू किया जाना चाहिए, ताकि मार्केट कमेटी क्षेत्र की सुंदरता और स्वच्छता फिर से लौट सके।
स्थानीय लोगों का मानना है कि स्वच्छ और साफ वातावरण केवल प्रशासन की ही नहीं बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो कनीना बाजार एक बार फिर स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित दिखाई दे सकता है।
फिलहाल तो लोग यही कह रहे हैं कि नालियों में उगी हरियाली देखकर ऐसा लग रहा है जैसे सफाई कर्मचारियों का इंतजार करते-करते वहां मिनी गार्डन ही तैयार हो गया हो। लेकिन लोगों को उम्मीद ही नहीं, पूरा भरोसा है कि मार्केट कमेटी जल्द सकारात्मक कदम उठाकर व्यवस्था को पटरी पर लाएगी। मौके पर मौजूद भागमल कुमार, दीपक कुमार, देशराज यादव, राजेंद्र कुमार व अन्य ने मार्केट कमेटी से जल्द से जल्द सफाई करवाने की प्रार्थना और कार्रवाई न होने पर धरना देने चेतावनी भी दी। वहीं दूसरी ओर  ककराला रोड पर खंभों पर लगी लाइटों को रात 09 बजे के बाद स्थानीय लोगों के द्वारा बंद कर दिया जाता है ।उसके बाद फिर अंधेरा हो जाता है जिस से किसी अप्रिय घटना घटित होने का अंदेशा बना रहता है ।
फोटो कैप्शन 02: मार्केट कमेटी कनीना की गंदगी से भरी खड़ी नालियां



खरखड़ा बास में लगा टीबी जांच शिविर एवं जागरूकता कैंप
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कनीना की आवाज।
हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार और डा. प्रतीक इंचार्ज पीएचसी धनौंदा के आदेशानुसार गांव खरकड़ाबास में टीबी जांच शिविर ओर जागरूकता कैम्प लगाया गया। जिसमें कुलदीप यादव एमपीएचडब्ल्यू मेल और वर्षा एमपीएचडब्ल्यू फीमेल सभी आशा वर्कर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित थे। कैम्प में डा. प्रतीक ने 120 लोगों की स्क्रीनिंग की जिसमें 22 संदिग्ध लोगों के सेपूटम के सैंपल जांच के लिए कनीना लैब में भिजवाए डा. प्रतीक ने जानकारी देते हुए बताया कि दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बलगम में खून आना, हल्का बुखार ओर वजन कम होना आदि टीबी के लक्षण हो सकते हैं इसलिए इनमें से कोई भी लक्षण हो तो जांच करवानी चाहिए। जो सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
इस अवसर पर कुलदीप यादव एमपीएचडब्ल्यू  मेल और वर्षा एमपीएचडब्ल्यू  फीमेल पवन कुमार  युद्धवीर टीबी हेल्थ विजिटर आदि उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 01: टीबी की जानकारी देते हुए डाक्टर


सफर सृष्टि का, का विमोचन 31 मई को
-राधेश्याम गोमला है प्रतिष्ठित लेखक
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कनीना की आवाज।
लब्धप्रतिष्ठ लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता मित्र राधेश्याम गोमला द्वारा लिखित और निर्मला प्रकाशन चरखी दादरी द्वारा प्रकाशित ग्रंथ 'सफर सृष्टि काÓ का आगामी 31 मई रविवार को लोकार्पण किया जाएगा। इस अवसर पर पद्म-भूषण अवार्डी पूर्व सांसद हुकुमदेव नारायण यादव बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित होंगे। रेवाडी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।
इसकी जानकारी देते हुए पुस्तक के लेखक मित्र राधेश्याम गोमला के पुत्र विराट गोमला ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए बताया कि जिला रेवाडी के धारूहेडा में स्थित जंगल बाबलर ट्युरिजम काप्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में बडी संख्या में क्षेत्र के साहित्य और शिक्षाप्रेमी उपस्थित रहेंगे।
विराट ने बताया कि लोकार्पित पुस्तक समकालीन हिन्दी साहित्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण, व्यापक और वैचारिक कृति है। यह केवल एक सामान्य पुस्तक नहीं, बल्कि विज्ञान, इतिहास, दर्शन, अध्यात्म, मानव-विकास और भविष्य-दृष्टि का समन्वित बौद्धिक दस्तावेज है। इसमें ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान तक की यात्रा को बड़ी रोचकता, शोधपरकता और साहित्यिक सौंदर्य के साथ प्रस्तुत किया है।
विराट ने जानकारी दी कि 'सफर सृष्टि काÓ पुस्तक में बिग-बैंग सिद्धांत, ब्रह्मांड-विज्ञान, मानव-उत्पत्ति, सभ्यताओं का विकास, वेद-उपनिषद, संवत-प्रणालियां, भविष्य-विज्ञान और चेतना जैसे अनेक विषय एक ही धारा में प्रवाहित होते हैं। इसमें ज्ञान की विभिन्न धाराओं को एक सूत्र में बांधने का साहस किया है।
लेखक के पुत्र ने जानकारी दी इस कृति की सबसे अनूठी उपलब्धि इसकी पाडकास्टीय-चंपू शैली है। हिन्दी साहित्य में यह प्रयोग अत्यंत नवीन और मौलिक है। लेखक ने आधुनिक पाडकास्ट संस्कृति को प्राचीन चंपू परंपरा से जोड़कर एक ऐसी शैली निर्मित की है, जिसमें संवाद, नाटकीयता, गद्य, पद्य, दृश्यात्मकता और श्रव्य अनुभूति का अद्भुत मिश्रण दिखाई देता है। पुस्तक के संवाद केवल प्रश्नोत्तर नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक मनुष्य की जिज्ञासा और प्राचीन ज्ञान-परंपरा के बीच सेतु का कार्य करते हैं। पाठक को ऐसा अनुभव होगा जैसे वह किसी बौद्धिक पॉडकास्ट को सुन और देख रहा हो। यह शैली विशेष रूप से नई पीढ़ी के पाठकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती है।
विराट ने बताया कि पुस्तक में सिंगुलैरिटी, बिग-बाउन्स, बिग-बैंग, ब्रह्मांड निर्माण, पृथ्वी निर्माण और जैव-विकास की यात्रा को वैज्ञानिक तथ्यों सहित क्रमवार प्रस्तुत किया है।  आधुनिक विज्ञान जहां डार्क-मैटर, डार्क-एनर्जी और क्वांटम सिद्धांतों के माध्यम से ब्रह्मांड को समझने का प्रयास करता है, वहीं लेखक ऋग्वेद, नासदीय सूक्त और ईशोपनिषद के संदर्भों द्वारा यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि प्राचीन भारतीय चिंतन में भी ब्रह्मांडीय रहस्यों को लेकर गहन मंथन हुआ था।  
विराट के अनुसार पुस्तक की भाषा अत्यंत प्रवाहपूर्ण और जन सुलभ है। लेखक ने वैज्ञानिक और दार्शनिक विषयों को भी सरल हिन्दी में व्यक्त किया है। पुस्तक में सिंधु-सारस्वत सभ्यता, मेहरगढ़, राखीगढ़ी, धोलावीरा, सुमेरियन सभ्यता, मिस्र, माया सभ्यता और अन्य प्राचीन संस्कृतियों का उल्लेख करते हुए मानव विकास की वैश्विक यात्रा को सामने रखा है। पुस्तक में विभिन्न संवतों—सप्तऋषि संवत युधिष्ठिर संवत, विक्रमी संवत कलि संवत आदि—का उल्लेख करके भारतीय कालगणना की समृद्ध परंपरा को भी सामने रखा है।
विराट ने बताया कि पुस्तक में मानव चेतना, मस्तिष्क, आत्मा, स्वभाव,भ्रूण-विकास और भावी वैज्ञानिक संभावनाओं पर भी विचार किया गया है ।
विराट गोमला का कहना है कि 'सफर सृष्टि काÓ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि ज्ञान की बहुआयामी यात्रा है। यह पाठक को ब्रह्मांड की विराटता का अनुभव कराएगी और मानव सभ्यता की जड़ों से परिचित करवाएगी। इसमें विज्ञान है, दर्शन है, अध्यात्म है, इतिहास है, साहित्य है और सबसे बढ़कर जिज्ञासा है।  यह कृति हिन्दी साहित्य में एक साहसिक और मौलिक प्रयोग है। इसकी व्यापक विषय-वस्तु, शोधपरक दृष्टि, सरल भाषा, साहित्यिक शैली और बौद्धिक गहराई इसे समकालीन हिन्दी जगत में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो ब्रह्मांड, मानव-उत्पत्ति, सभ्यताओं, विज्ञान और अध्यात्म के अंतर्संबंधों को समझना चाहते हैं। 'सफर सृष्टि काÓ वास्तव में एक ऐसी ज्ञान-यात्रा है, जो पाठक को बाहरी ब्रह्मांड के साथ-साथ उसके भीतर के ब्रह्मांड से भी परिचित कराती है। यही इस पुस्तक की सबसे बड़ी सफलता है।
फोटो कैप्शन: राधेश्याम गोमला




विश्व रक्त कैंसर दिवस -28 मई
--समय पर पता लगने पर रक्त कैंसर से पपाई जा सकती है मुक्ति
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कनीना की आवाज।
रक्त कैंसर के लक्षण, उपचार एवं जागरूकता बढ़ाने के लिए 28 मई को विश्व रक्त कैंसर दिवस मनाया जाता है। प्रारंभ में यदि इसके होने का पता चल जाए तो इसका निदान संभावित है।
इस संबंध में डा. जितेंद्र मोरवाल बताते हैं कि ब्लड कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो शरीर में रक्त कोशिकाओं के उत्पादन और कार्य को प्रभावित करता है। अस्थि मज्जा लाल रक्त कोशिकाएं, सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स का उत्पादन करती है। रक्त कैंसर के रोगियों में इनके अतिरिक्त असामान्य कोशिकाएं विकसित हो जाती है। ऐसा में ये असामान्य रक्त कोशिकाएं संक्रमण से लडऩे जैसे कई कार्यों करने से रोकती है। डाक्टर बताते हैं कि विश्व का प्रत्येक पांचवां जन रक्त कैंसर से प्रभावित मिल सकता है। 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे में भी रक्त कैंसर मिलता है। रक्त कैंसर के लक्षण अलग-अलग होते हैं। इन लक्षणों में थकान, सांस लेने में तकलीफ, बार-बार संक्रमण होना आदि प्रमुख हैं। ये लक्षण मामूली से भी हो सकते हैं और इनको पहचाना चुनौती पूर्ण कार्य होता है। शोध से पता चलता है की रक्त कैंसर के शिकार के निदान से एक मरीज को 5 साल से अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना तीन गुना बढ़ सकती है।
 डाक्टर बताते है कि रक्त कैंसर ल्यूकेमिया, लिंफोमा कैंसर जैसे प्रमुख प्रकार है। सबसे पहले कैंसर का पता लगाया जाता है कि क्या यह रक्त कैंसर है?  रक्त कैंसर के इलाज के विषय में बताते हैं कि इसका उपचार अलग-अलग चिकित्सा रणनीतियां उपलब्ध है कीमोथेरेपी, शल्य चिकित्सा, स्टेम सेल प्रत्यारोपण, लक्षित चिकित्सा आदि प्रमुख हैं। कुछ मामलों में प्रभावी इलाज के लिए उपचारों के संयोजन का उपयोग भी किया जाता है।
फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र





विश्व भूख दिवस-28 मई















 भारी संख्या में लोग भूख और कुपोषण से पीडि़त है
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कनीना की आवाज। भूख दिवस एक ऐसा उत्सव है जिसका उद्देश्य दुनिया भर के भूख एवं कुपोषण से पीडि़त लाखों लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। कोई भूखा नहीं रहे और सभी को पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो यही विश्व भूख दिवस का एक उद्देश्य है। यह तभी संभव है जब टिकाऊ कृषि के महत्व ,भोजन की बर्बादी को कम करने, भूख के मूल कारणों का पता लगाने से भूख को मिटाया जा सकता है। पहली बार वर्ष 2011 में विश्व भूख दिवस मनाया गया था। भूख दिवस सिर्फ भोजन की कमी की समस्या नहीं है बल्कि संसाधन और अवसरों तक पहुंच की कमी की भी समस्या है। भूख संकट के बारे में जागरूकता बढ़ाने व इसे समाप्त करने के लिए 28 मई को विश्व भूख दिवस मनाया जाता है।
भूख के विषय में डा. होशियार सिंह यादव बताते हैं कि भूख राहत संगठनों के लिए धन-जुटाने, खाद्य अभियान का आयोजन करने, भूख से संबंधित सम्मेलन सेमिनार करने की जरूरत है। भूख के विषय में बताते हैं कि गरीबी, जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और युद्ध ,संसाधनों का असमान वितरण, शिक्षा तक पहुंच का अभाव आदि प्रमुख भूख के कारण हो सकते हैं। भूख मिटाने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। भूख से निपटने के कुछ तरीके बताते हुए उन्होंने बताया कि सतत कृषि में निवेश करें, टिकाऊ कृषि में निवेश करने से खाद्य उत्पादन में सुधार हो सकता है। जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने से खाद्य उत्पादन पर प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। खाद्य बैंक का समर्थन करने से भूख को कम करने में मदद मिल सकती है। शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए ,नीति परिवर्तन करना चाहिए, खाद्य प्रणाली को मजबूत बनाना चाहिए, महिलाओं को सशक्त बनाना चाहिए, दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए तभी भूख से मिटाने से कुछ मदद मिल सकती है। यहां तक की भूख राहत संगठन में दान करना चाहिए, घर में भोजन बर्बादी को रोक, स्थानीय स्तर पर खरीददारी करें, नीति परिवर्तन आदि के बारे में स्वयं और दूसरों को शिक्षित करें, टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना चाहिए, उन संगठनों को दान दे जो भूख के लिए समाधान करते हैं।
 फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह यादव

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