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Saturday, May 30, 2026



 



अगिहार से इतिहास के प्रवक्ता राजेंद्र कटारिया सेवानिवृत्ति
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में इतिहास के प्रवक्ता और ग्राम सिगड़ी हरिजन निवासी  राजेंद्र सिंह कटारिया आज अपनी 30 साल और 6 महीने की सेवा पूरी करके  सेवानिवृत्त हो गए विद्यालय के प्रांगण में आज उनके सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया विदाई समारोह में जिला प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर , तथा स्टेट अवार्ड विजेता  दिलबाग सिंह  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे ,खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश यादव विशिष्ट अतिथि तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य पूनम यादव ने की,कार्यक्रम का मंच संचालन विद्यालय में अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने किया सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण विद्यालय की संस्कृत प्रवक्ता कैलाश देवी ने किया  इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्रवक्ता को पगड़ी पहनकर तथा  भेंट देकर विद्यालय परिवार, ग्राम वासियों, विभिन्न विद्यालयों से पधारे अध्यापक, प्रवक्ता,प्राचार्य  तथा विद्यार्थियों ने सम्मानित किया  इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं कोमल, नेहा,नव्या, नरगिस,शारदा कल्पना,पूजा, अर्चना,मुस्कान तथा साक्षी सहित अनेक विद्यार्थियों द्वारा  सांस्कृतिक कार्यक्रम  भी प्रस्तुत किए गए अपने कार्यकाल में उन्होंने खातीवास,बुचावास ,ऊष्मापुर उन्हाणी,तलवाना बाछोद तथा अगिहार स्कूलों में अपनी सेवाएं दी  इस कार्यक्रम में पाथेड़ा के प्राचार्य कृष्ण कुमार,प्रवक्ता सुरेश कुमार, राजेश दहिया,  करीरा के प्राचार्य रामस्वरूप, प्रवक्ता फकीरचंद , समाजसेवी एवं रिटायर्ड संस्कृत अध्यापक निर्मल सिंह राजकीय उच्च विद्यालय उन्हाणी के हेड मास्टर  शुभकरण  यादव,  रणधीर सिंह, विद्यालय के प्रवक्ता अजय बंसल निशा जांगड़ा वंदना जांगड़ा धर्मेंद्र डीपी राकेश कुमार शशि कुमारी पूनम कुमारी,मुख्य शिक्षक रतनलाल, राजेंद्र सिंह की धर्मपत्नी सुमन देवी,उनके चाचा ओमप्रकाश कटारिया, भाई दलीप सिंह कटारिया,सुनील कुमार कटारिया सहित उनके परिवार के अनेक सदस्य तथा ग्राम सिगड़ी तथा अगिहार के गणमान्य लोग उपस्थित रहे
फोटो कैप्शन 03: संबंधित है



उप स्वास्थ्य केंद्र स्याना में लिंगानुपात जागरूकता बैठक आयोजित
-लिंगानुपात सुधार को चुनौती मान स्वास्थ्य कर्मियों ने किया संकल्प, गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर दिया जोर
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कनीना की आवाज।
उप स्वास्थ्य केंद्र सयाना में गुरुवार को लिंगानुपात जागरूकता अभियान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएचसी सेहलंग की एसएमओ डा. प्रभा यादव ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज में घटते लिंगानुपात के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इसे सामाजिक चुनौती के रूप में स्वीकार करना तथा गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण को सुनिश्चित करना रहा।
बैठक में एमपीएचडब्ल्यू भूपेंद्र, एएनएम प्रियंका, ब्लॉक आशा कोऑर्डिनेटर इंद्रजीत, सभी आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा ग्राम सयाना के अनेक गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे। इनमें राजेंद्र, दिनेश, विनोद, आशा, मुकेश एवं सुनीता प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इस अवसर पर डा. प्रभा यादव ने आशा कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र की प्रत्येक गर्भवती महिला का गर्भावस्था के 10 सप्ताह के भीतर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाओं एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग जांच एवं कन्या भ्रूण हत्या कानूनन दंडनीय अपराध हैं और समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
डा. प्रभा यादव ने कहा कि घटता लिंगानुपात केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी गंभीर सामाजिक चुनौती है, जिसे सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संगठनों और आमजन की संयुक्त भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया।
बैठक में स्वास्थ्य कर्मियों ने घटते लिंगानुपात को एक गंभीर चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए इसे संतुलित और सम्मानजनक स्थिति में लाने के लिए कमर कसने का संकल्प लिया। सीएचसी सेहलंग की एसएमओ डा. प्रभा यादव के नेतृत्व में आशा एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलाने, गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण करवाने तथा बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का संदेश घर-घर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। स्वास्थ्य कर्मियों ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि घटते लिंगानुपात को चुनौती मानते हुए वे लिंगानुपात को सम्मानजनक स्थिति में ले जाकर ही दम लेंगे।
बैठक के दौरान ग्राम सयाना के बाबू राजेंद्र यादव ने भी ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बेटियों के सम्मान, समान अवसर और लिंगानुपात सुधार के लिए जागरूकता फैलाने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समाज में लिंग समानता को बढ़ावा देने तथा लिंगानुपात सुधार अभियान को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया। बैठक का वातावरण जागरूकता, सामाजिक जिम्मेदारी और जन सहभागिता की भावना से ओत-प्रोत रहा।
फोटो कैप्शन 04: संबंधित है




 38 सालों की सेवा पूरी करके ओम प्रकाश करीरा सेवानिवृत्त
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कनीना की आवाज।
हरियाणा ग्रामीण बैंक कनीना से 38 सालों की सेवा करके ओमप्रकाश भाटी करीरा निवासी सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी सेवानिवृत्ति में मैनेजर कीर्ति अग्रवाल ने गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया और उनकी विदाई की। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश भाटी सदा ईमानदारी पर चले हैं और इन्होंने कभी कोई किसी से सदा ही सद्व्यवहारी रहे हैं। इनका कार्य सदा सराहनीय रहा है। इस मौके पर क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश कुमार, अजय करीरा, धर्मवीर ब्लॉक प्रधान, बजरंग एडवोकेट, केक भाटी ठेकेदार, श्रीकिशन बालकिशन वैद्य, सतेंद्र यादव ,आरके यादव पूर्व ब्रांच मैनेजर सहित भारी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: ओमप्रकाश भाटी सेवानिवृत्ति पाते हुए


नशा तस्करों पर पुलिस का कड़ा प्रहार: स्मैक व गांजे के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, गाड़ी भी जब्त, 4.44 ग्राम स्मैक और 2 किलो गांजा बरामद।
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कनीना की आवाज।
पुलिस अधीक्षक दीपक के कुशल नेतृत्व और सख्त दिशा-निर्देशों के तहत जिले भर में नशा तस्करों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज से नशे रूपी जहर को खत्म करना और अवैध धंधे में संलिप्त अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजना है। इसी कड़ी में नशा तस्करों पर कड़ा प्रहार करते हुए थाना शहर कनीना की पुलिस टीम को एक शानदार सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नशा तस्करों को नशीले पदार्थों (स्मैक और गांजा पत्ती) के साथ गिरफ्तार किया है तथा तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को भी जब्त कर लिया है।
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि दिनांक 30 मई को थाना शहर कनीना की पुलिस टीम गश्त पर थी, तभी उन्हें एक गुप्त सूचना मिली कि विकास निवासी मालड़ा सराय और मनीष निवासी तलवाना अवैध रूप से नशीला पदार्थ बेचने का काम करते हैं। वे दोनों एक गाड़ी में नशीले पदार्थ के साथ रेवाड़ी की तरफ से मालड़ा सराय की ओर जा रहे हैं। इस पुख्ता सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तुरंत शहर कनीना क्षेत्र में मेन रोड पर नाकाबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी। कुछ समय पश्चात बताए गए नंबर की सफेद गाड़ी आती दिखाई दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गाड़ी को रुकवाया और उसमें सवार दोनों व्यक्तियों को काबू कर लिया। पूछताछ में उन्होंने अपनी पहचान मनीष कुमार (चालक) और विकास के रूप में बताई।
पुलिस ने मौके पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट को बुलाया, जिनकी मौजूदगी में दोनों व्यक्तियों और उनकी गाड़ी की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान विकास के पास से 30 पाउच अवैध स्मैक बरामद हुई, जिसका कुल वजन 4.44 ग्राम पाया गया। वहीं, गाड़ी की डिक्की की तलाशी लेने पर एक प्लास्टिक के कट्टे से भारी मात्रा में गांजा पत्ती बरामद हुई, जिसका कुल वजन 2 किलो 60 ग्राम था। पुलिस ने तुरंत प्रभाव से बरामद स्मैक, गांजा पत्ती और तस्करी में प्रयुक्त गाड़ी को कब्जे में लेकर सील कर दिया।
इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना शहर कनीना में एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस द्वारा आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की गहनता से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे यह नशा कहां से लाते थे और किन-किन लोगों को सप्लाई करते थे। जिला पुलिस का आमजन को यह स्पष्ट संदेश है कि नशे के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा और किसी भी नशा तस्कर को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
आरोपी मनोज के खिलाफ राजस्थान के थाना चिड़ावा में मुकदमा संख्या सन् 2013 में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में आरोपी काफी समय से पीओ चल रहा था। उसकी इसी फरारी को देखते हुए उस पर 5000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। सीआईए महेंद्रगढ़ की टीम ने अपने सूचना तंत्र को मजबूत करते हुए इस इनामी अपराधी को सफलतापूर्वक काबू कर लिया। आज दिनांक 20 मई को सीआईए महेंद्रगढ़ द्वारा आरोपी को पकडऩे के उपरांत, आगामी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु चिड़ावा (राजस्थान) पुलिस को सौंप दिया गया।
फोटो 02: संबंधित है


विश्व धूम्रपान दिवस-31 मई
धूम्रपान है मौत की निशानी-डा. जितेंद्र
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कनीना की आवाज।
गुटका, पान, तंबाकू या फिर बीड़ी और सिगरेट इन सभी चीजों का नशा आपको मौत के मुंह में धकेल सकता है। विज्ञापनों और फिर तंबाकू और सिगरेट की डिब्बियों पर दी जाने वाली कितनी ही चेतावनियों बाद भी हजारों-लाखों लोगों की मौत तंबाकू के कारण होती है। भारत सहित दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जहां इस तंबाकू या फिर अफीम जैसे नशे के आदि लोगों की संख्या बढ़ रही है।
 तंबाकू या सिगरेट की लत शराब की लत से कई गुना हानिकारक और खतरनाक है। पूरी दुनिया में तंबाकू के कारण लगभग हर 6 सेकंड के अंदर एक व्यक्ति की मौत होती है। तंबाकू और धूम्रपान के कारण कई गंभीर बीमारियां जैसे- दिल का दौरा, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, अस्थमा, मुंह और फेफड़ों का कैसर आदि शामिल है। इसलिए बेहतरी इसी में है कि जितना जल्दी हो सके इस बुरी लत को छोड़ दें।
इस संबंध में ने इस लत की जानकारी देते हुए कहा डा. जितेंद्र मोरवाल कनीना उप नागरिक अस्पताल बताते हैं कि-  
तंबाकू का सेवन हृदय को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करता है, हालांकि, पर्याप्त पानी का पीने से न केवल दिल को कई समस्याओं से बचाने में, बल्कि संपूर्ण सेहत को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। पानी की पर्याप्त मात्रा ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने और खून के थक्के बनने के खतरे को कम करती है। खून के थक्के बनना दिल का दौरा पडऩे का सबसे प्रमुख कारणों में से एक है।  
 डा. ओमप्रकाश योगाचार्य का कहना है कि व्यायाम और योग की मदद से तंबाकू की लत को छोडऩे में मदद मिल सकती है। अक्सर आपने देखा होगा कि आप जब ज्यादा परेशान या तनाव में होते हैं, तो आप ज्यादा सिगरेट या तंबाकू का सेवन करते हैं। लेकिन व्यायाम और योग आपके तनाव को कम करने में मदद करता है और जीवन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। व्यायाम आपकी तंबाकू की लत को छोडने में मदद कर सकता है।
तंबाकू या धूम्रपान के नियमित सेवन से शरीर में निकोटीन जैसे विषैले यौगिकों का जमाव होता है। इस व्यसन का त्याग करने से इंसान की जिंदगी बढ़ सकती है वरना अनेक रोगों से पीडि़त हो जाएगा।
फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल


31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष-
तंबाकू अनेकों रोगों का कारण, तंबाकू सेवन छोड़कर अब हैं कई जन खुश
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कनीना की आवाज।
तंबाकू एक जानलेवा पदार्थ है जिसे लत डालने वाला पदार्थ कहते हैं। जो एक इसका प्रयोग शुरू कर दे तो लंबे समय तक इंसान उससे छुटकारा नहीं पा सकता। यहां तक कि अनेक बीमारियां शरीर में घर कर जाती है। कैंसर जिनमें से एक हैं। यदि आत्मविश्वास और जिजीविषा हो तो तंबाकू की लत से मुक्ति पाई जा सकती है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कुछ कनीना क्षेत्र के ऐसे व्यक्तियों से बात हुई जिन्होंने यह बुराई अब छोड़ दी है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं। बहुत से व्यक्तियों से तंबाकू के विषय में चर्चा की तो उन्होंने तंबाकू को छोडऩेे के लाभ गिनाये। आज वो व्यक्ति दूसरों को शिक्षा दे रहे हैं जो कभी स्वयं बीड़ी सिगरेट पीते थे।
 सुरेश कुमार कनीना का कहना है कि 25 वर्ष की उम्र तक खूब सिगरेट एवं बीड़ी पीते थे किंतु जब से उन्हें इसके शरीर पर पडऩे वाले घातक प्रभावों की जानकारी मिली तब से उन्होंने पूर्ण रूप से त्याग दिया। उनकी उम्र 49 वर्ष और बीड़ी सिगरेट नहीं पीते बल्कि दूसरे पीने वालों को भी शिक्षा दे रहे हैं।
 कंवर सैन वशिष्ठ अध्यापक नेता है जो कभी बीड़ी सिगरेट के आदि होते थे। लंबे समय तक इन्होंने बीड़ी सिगरेट की धुआं हवा में उड़ाई। तत्पश्चात उन्होंने इनकी हानियों के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। उनकी उम्र करीब 70 वर्ष है। वर्ष 2008 से बीड़ी सिगरेट का त्याग किए हुए हैं। सिगरेट की हानियों के विषय में विशेष रूप से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उन्हें कोई सिगरेट पीने वाला मिलता है तो स्पष्ट कहते हैं कि इसका त्याग ज्यादा बेहतर होगा। दूसरों को बेहतर अच्छे पद चिन्हों पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं और किसी प्रकार की लत से दूर रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। मामराज अग्रवाल की उम्र 67 साल है और 10 वर्ष पहले उन्होंने बीड़ी सिगरेट का त्याग कर दिया था।  वे परचून की दुकान चलाते हैं किंतु बीड़ी सिगरेट के कट्टर विरोधी हो गए हैं। उनका कहना है कि बीड़ी सिगरेट के कारण उन्हें एक बार सभा में एहसास हुआ जब उन्हें खांसी आ रही थी। सभी लोग उनकी तरफ देख रहे थे। तब से उन्हें महसूस हुआ कि इस बीड़ी सिगरेट के कारण से आज इतना जलील होना पड़ रहा है और उन्हें सदा सदा के लिए बीड़ी सिगरेट का त्याग कर दिया। वे अब दूसरों को शिक्षा दे रहे हैं कि बीड़ी सिगरेट आदि प्रयोग न करे।
 उधर वेद प्रकाश का कहना है कि बीड़ी सिगरेट आदि लत डालने वाले पदार्थ होते जिनमें निकोटीन जहर पाया जाता है जो हमारे फेफड़ों को बर्बाद कर ही देता हैं वही अनेकों बीमारियां शरीर में घर कर जाती है जिनमें उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, कैंसर आदि प्रमुख है। उन्होंने कहा कि यदि इंसान समय रहते नहीं चेते तो भयंकर परिणाम बीड़ी सिगरेट पीने वालों को वहन करने पड़ते हैं। उन्होंने इस प्रकार के पदार्थों का अविलंब त्याग करने की लोगों से अपील की है ताकि वे सुखी और संपन्न जीवन जी सके।
फोटो कैप्शन: डा वेद प्रकाश, कंवर सेन वशिष्ठ, मामराज अग्रवाल, सुरेश कुमार



31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष-
सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है हुक्का-डा. यादव
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कनीना की आवाज।
सिगरेट से ज्यादा खतरनाक हुक्का है क्योंकि हुक्का बार में जब कोई हुक्का पीता है तो कम से कम 30 मिनट तक हुक्का पीता है। 30 मिनट तक लगातार कार्बन मोनोआक्साइड शरीर के अन्दर जाता है जो कि सिगरेट से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। हुक्का पीने से हार्ट की ब्लड सेल और वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है। ये विचार डा. होशियार सिंह यादव के हैं।
उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं का मानना है कि कार्बन मोनोआक्साइड शरीर के लिए जहर जैसा काम करता है। हुक्का पीने वालों में एक्सरसाइज करने की क्षमता लगातार घटती है। हुक्का पीने वालों का फेफड़ा जल्द कमजोर होता है जो कि कार्बन मोनोआक्साइड के साथ अन्य विषैले कणों के कारण होता है। हुक्का में उपयोग किये जाने वाले निकोटीन पदार्थ के साथ वाष्पशील कार्बननिक रसायन, पालीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन, एक्रोलिन, लेड, कैडमियम और आर्सेनिक जैसे हानिकारक रसायन शरीर के अंदर जाते हैं जो हार्ट को बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित करते हैं।
उन्होंने एक पत्रिका में प्रकाशित शोध का हवाला देते हुए बताया कि हुक्का पीना सिगरेट से भी ज्यादा खतरनाक होता है। हुक्के में बहुत ज्यादा मात्रा में विषैले पदार्थ लंबे समय तक शरीर में जाते हैं जो हार्ट और फेफड़ों के लिए खतरनाक है। ई-सिगरेट अधिक पीने से बढ़ता है मुंह के कैंसर का खतरा। सिगरेट के तंबाकू से हुक्का का तंबाकू ज्यादा खतरनाक होता है। क्योंकि हुक्का के तंबाकू को बनाने के लिए कई तरह के फ्लेवर और रंग का उपयोग किया जाता है जो कई तरह के कैमिकल को बनाते हैं। फ्लेवर वाले तंबाकू से लेड और खतरनाक विषैले रसायन बनते हैं जो हार्ट के लिए खतरनाक साबित होते हैं। हुक्का पाइप में तम्बाकू सिगरेट से कम जहरीला नहीं होता। हुक्के में पानी धुएं को ठंडा करता है, लेकिन यह धुएं में मौजूद विषाक्त पदार्थों को फिल्टर नहीं करता। हुक्का पीने वाले सिगरेट पीने वालों की तुलना में ज़्यादा तम्बाकू का धुआं सांस के साथ अंदर ले सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक हुक्का पीने का सत्र एक घंटे या उससे ज़्यादा समय तक चल सकता है।
 हुक्का के धुएँ में हानिकारक रसायनों की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है। इनमें टार, कार्बन मोनोआक्साइड, भारी धातुएँ और कैंसर पैदा करने वाले रसायन शामिल हैं जिन्हें कार्सिनोजेन्स कहा जाता है। दरअसल, हुक्का पीने वाले सिगरेट पीने वालों की तुलना में ज़्यादा कार्बन मोनोआक्साइड और धुएँ के संपर्क में आते हैं।
हुक्का पीने से फेफड़े, मूत्राशय, पेट, ग्रासनली और मौखिक कैंसर,दिल की बीमारीएवं
अन्य गंभीर स्थितियां, जैसे फेफड़ों के रोग और कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता पैदा होते हैं।
हुक्का पीने से निकोटीन की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है, जैसे सिगरेट पीने से होती है। निकोटीन तम्बाकू में मौजूद एक आदत बनाने वाला रसायन है जो व्यक्ति को धूम्रपान करने के लिए मजबूर करता है। हुक्के का धुआं दूसरों के धुएं से जुड़े खतरे पैदा करता है।
गर्भवती महिलाओं द्वारा हुक्का पीने से जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं का जन्म होता है।
गंदे पाइप का इस्तेमाल करना या दूसरे धूम्रपान करने वालों के साथ पाइप साझा करना जोखिम भरा है। इससे फ़्लू, क्षय रोग, हरपीज, हेपेटाइटिस हो सकते हैं।
   नए इलेक्ट्रानिक हुक्के, जिन्हें ई-हुक्का कहा जाता है, वेपिंग डिवाइस हैं। वे एक तरल पदार्थ को वाष्प में गर्म करने के लिए बैटरी का उपयोग करते हैं, जिसे उपयोगकर्ता सांस लेते हैं। तरल पदार्थ निकोटीन और स्वाद के साथ या बिना आ सकता है। ई-हुक्का के स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध अभी भी शुरुआती चरण में है। लेकिन ई-हुक्का सहित वेपिंग डिवाइस का उपयोग अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। और किसी भी रूप में तंबाकू का उपयोग किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं है।
फोटो कैप्शन: डाक्टर होशियार सिंह यादव



गाड़ी ने मोटरसाइकिल सवारों को मारी टक्कर, घायल, अस्पताल में एक ने तोड़ा दम
- मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
कनीना में करीरा रोड़ के पास एक सड़क हादसे में दो युवक घायल हो गए। अस्पताल में मनीष नामक युवक  की मौत हो गई जबकि दूसरे को चोटें आई। गोविंदा कोटिया निवासी ने मामला दर्ज करवाया है। गोविंदा ने पुलिस में बताया कि 28 मई को उनका भतीजा मनीष किसी कार्य से कनीना गया था लेकिन देरी से घर नहीं लौटा तो फोन करके पूछा। मनीष ने बताया कि वह हर्ष कोटिया के साथ किसी काम से कनीना आया हुआ हूं। बाद में करीरा गांव से एक व्यक्ति का फोन आया कि आपका भतीजा मनीष का करीरा- कनीना सड़क मार्ग के पास दुर्घटना हो गई है। उसे सरकारी अस्पताल में उसे पहुंचाया गया है। जब गोविंदा अस्पताल पहुंचा तो डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। गोविंद ने बताया कि मनीष और हर्ष मोटरसाइकिल पर सवार होकर करीरा से कनीना की तरफ आ रहे थे। हर्ष मोटरसाइकिल चला रहा था। तभी करीरा से कनीना की तरफ एक चालक तेज रफ्तार से गाड़ी चलाता आया और उसने मोटरसाइकिल सवारों को टक्कर मार दी, दोनों गिर गए और वो घायल हो गए। मौके पर मौजूद बृजेश करीरा ने पुलिस को सूचित किया। एम्बुलेंस मौके पर आई और दोनों को अस्पताल भर्ती करवाया जहां डाक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। गोविंदा की शिकायत पर गाड़ी चालक के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है।















ध्यान से होती है सुख व शान्ति की अनुभूति-डा. ओमप्रकाश
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव नांगल मोहनपुर निवासी एवं विदेशों तक योग की शिक्षा देने वाले ओम योग संस्थान के डा. ओमप्रकाश योगिराज ध्यान का अर्थ है मन को किसी एक विचार, वस्तु या लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित करना। यह जागरूकता और मानसिक शांति की एक अवस्था है, जिसमें चित्त वर्तमान में स्थित होता है और विचारों का प्रवाह शांत होने लगता है। इसे गहराई से समझने के लिए मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं।
सामान्य अर्थ (एकाग्रता)साधारण शब्दों में ध्यान का मतलब किसी काम या बात पर अपना पूरा मन लगाना या विचार करना है। जबकि भारतीय अध्यात्म और योग में ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं है। यह बाहरी दुनिया से हटकर अपने भीतर लौटने की अवस्था है। इसमें व्यक्ति साक्षी भाव से स्वयं के विचारों और श्वास को देखता है, जिससे उसे परम शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
  उन्होंने कहा कि ध्यान तनाव हार्मोन को कम करके मानसिक शांति देता है। नियमित अभ्यास से कार्य करने की क्षमता और याददाश्त बढ़ती है। क्रोध और अवसाद से मुक्त होकर सकारात्मक रूप से प्रतिक्रिया करने में मदद करता है। महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में ध्यान भी एक सोपान है।
 चित्त को एकाग्र करके किसी एक वस्तु पर केन्द्रित कर देना ध्यान कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान का ध्यान करते थे। ध्यान की अवस्था में ध्यान करने वाला अपने आसपास के वातावरण को तथा स्वयं को भी भूल जाता है। ध्यान करने से आत्मिक तथा मानसिक शक्तियों का विकास होता है। जिस वस्तु को चित में बांधा जाता है उस में इस प्रकार से लगा दें कि बाह्य प्रभाव होने पर भी वह वहां से अन्यत्र न हट सके, उसे ध्यान कहते है। ध्यान  से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं जिनमें बेहतर स्वास्थ्य,
शरीर की रोग-प्रतिरोधी शक्ति में वृद्धि, रक्तचाप में कमी,तनाव में कमी,स्मृति-क्षय में कमी,
वृद्ध होने की गति में कमी,उत्पादकता में वृद्धि।
मन शान्त होने पर उत्पादक शक्ति बढ़ती है, लेखन आदि रचनात्मक कार्यों में यह विशेष रूप से लागू होता है। ध्यान से हमें अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है।छोटी-छोटी बातें परेशान नहीं करती, मन की यही प्रकृति (आदत) है कि वह छोटी-छोटी अर्थहीन बातों को बड़ा करके गंभीर समस्याओं के रूप में बदल देता है। ध्यान से हम अर्थहीन बातों की समझ बढ़ जाती है; उनकी चिन्ता करना छोड़ देते हैं; सदा बड़ी तस्वीर देखने के अभ्यस्त हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में ऋषि मुनि और संत लोग ध्यान लगाकर अपने आराध्य देव के दर्शन प्राप्त करते थे और उनसे अपने समस्या का हल भी पुछा करते थे , यह आज के समय में भी संभव है।
फोटो कैप्शन: डा. ओमप्रकाश योगीराज





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