तीन दिनों के बाद दिखाई दिया सूरज
- कड़ाके की ठंड का कहर जारी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में तीन दिनों के बाद रविवार को सूर्य देव के दर्शन हुए। अब तक सूरज नहीं दिखाई दे रहा था या कभी कभार लुका छिपी करता नजर आता था। बादल छाए हुए थे। जहां गत दिनों हल्की बूंदाबांदी के बाद हालात ये बन गये कि धुंध और कोहरा थोड़ा बहुत कभी कभार दिखाई दिया। कड़ाके की ठंड जारी है। लोग घरों में छिपे हुए देखे गए या आग सकते देखे गए क्योंकि तीन दिनों के बाद सूरज के दर्शन हुये इसलिए सूरज की धूप सेकते हुए लोग नजर आए।
फोटो कैप्शन 05: कनीना में खिली धूप का नजारा
गायों को न खिलाए अधिक गुड़
-गायों के मरने की बन जाती है संभावना-पशु चिकित्सक
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में जहां लोग अपने हाथों से गुड़ खिलाते हैं। यदि उनको गुड़ खिलाने से रोका जाए तो वो नाराज भी हो जाते हैं। भगत सिंह प्रधान गौशाला बताते हैं कि ताकतवर गाय सभी को पीछे धकेलते हुए अधिक गुड़ खा जाती है जिससे मरने की संभावना बन जाती है। ऐसे में उन्होंने लोगों से निवेदन किया है कि गुड़ दान करना चाहे तो दान जरूर करें किंतु अपने हाथों से बहुत कम खिलाए। एक गाय को खिला दे बाकी गुड़ दान कर दे ताकि गायों को बराबर मात्रा में गौशाला प्रबंधक कमेटी खिलाने का काम करेगी। इससे गायों का भी हित होगा और गुड़ दान करने वाले को भी पुण्य मिलेगा।
इस संबंध में कनीना के पशु चिकित्सक डा.पवन कांगड़ा से बात हुई। उन्होंने बताया कि प्राय: गौशाला में ताकतवर गाय अन्य गायों को पीछे धकेल देती और बार-बार वह गुड़ खाती रहती है क्योंकि पशु है उन्हें ज्ञान नहीं है। इसलिए उनके शरीर में गुड़ की मात्रा बढ़ जाती है और कार्बोहाइड्रेट बढऩे से एसिड बन जाता है और यह एसिड मेटाबालिक एसिडोसिस नामक बीमारी कर देता है। जिससे पशु के विभिन्न अंगों में एसिड पहुंच जाता है और उनके गुर्दे, फेफड़े आदि खराब होने की संभावना बनती है। या फिर अफारा आने से पशु की तुरंत मौत हो जाती है। ऐसे में अधिक गुड़ नहीं खिलाना चाहिए।
वही उनका कहना है कि सर्दियों में सुबह शाम 100 ग्राम गुड़ गाय को दिया जाए तो लाभप्रद है। इससे ज्यादा गुड़ देने से गाय को नुकसान होने की संभावना है। ऐसे में पशु चिकित्सा डा. पवन कांगड़ा का कहना है कि वो स्वयं भी पहले गायों को गुड़ खिलाते थे किंतु अब गायों के गुड़ की राशि दान कर देते हैं ताकि गौशाला प्रबंधक अपने आप गायों को बराबर बराबर मात्रा में गुड़ खिला सके। इससे गए स्वस्थ रहेंगी और गायों एवं गौशाला का उद्देश्य भी पूरा होगा। उनका मानना है की गौशाला में गायों को स्वस्थ रखना ही हम सभी का उद्देश्य होता है और ऐसे में गायों की सुरक्षा सभी को करनी चाहिए।
उधर भगत सिंह ने कहा कि वो गौशाला में ऐसा नियम बना रहे ताकि गुड़ खिलाने वाले थोड़ा बहुत अपने हाथों से खिलाए बाकी गुड़ वहां रख दे ताकि कि उसे गुण को सदुपयोग हो सके। ऐेसे में पुण्य दान करता को ही मिलेगा। उन्होंने बताया कि कभी-कभी तो सैकड़ों पेटी गुड़ आ जाता है और यह गुड़ गायों को खिलाने से बड़ी समस्या उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है। गायों को अधिक गुड़ खिलाने से बेचे।
फोटो कैप्शन 04: गायों को गुड़ खिलाते हुए लोग
डाक्टरी सलाह
सर्दी से करें बचाव -शर्मा
-बच्चे एवं बूढों को बचाये सर्दी से
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कनीना की आवाज। कड़ाके की सर्दी जारी हैं। सर्दी से बचाव करना बहुत जरूरी होता है। जहां सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है वही सर्दी से बचाव भी बहुत जरूरी है। इस संबंध में कनीना उपनागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेद संबंध रखने वाले डाक्टर विनय कुमार शर्मा से चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि सर्दियों में आयरन भरपूर मात्रा में हरी पत्तेदार सब्जियों में उपलब्ध होता है। हरी पात्तेदार सब्जियां जमकर खाई जाती है जो सेहत के लिए लाभप्रद है तथा हीमोग्लोबिन/खून को भी बढ़ती है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार च्यवनप्राश बहुत लाभप्रद होता है। सर्दियों में च्यवनप्राश जरूर खाए। दूध के साथ प्रयोग किया जा सकता है और चाय के साथ भी ले सकते हैं। छोटे बच्चों को सर्दी से बचाना बहुत जरूरी होता है। पुराने समय से बुजुर्ग जायफल को घिसकर छोटे बच्चों को देते आए हैं वह विधि भी कारगर है। उन्होंने बताया कि गिलोय शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है अपितु बहुत लाभप्रद है। कच्ची हल्दी को दूध में डालकर पीने से भी लाभ होता है। डाक्टर ने बताया कि सर्दियों से बचाव के लिए जब गर्म कपड़े पहनना चाहिए और सर्दी से बचना चाहिए। गर्म पानी बहुत लाभप्रद होता है। उन्होंने बताया कि यह प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और शरीर में रोगों से भी बचाया जा सकता है। इसलिए सर्दियों में गुनगुना/गर्म पानी जरूर पिये। यदि सर्दी लग भी जाए तो जहां गुडू़ची घनवटी तथा गिलोय घनवटी आदि विभिन्न आयुर्वेद की गोलियां उपलब्ध हैं। उनका उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सर्दियों में जहां बुजुर्ग और छोटे बच्चे ज्यादा परेशान रहते हैं। छोटे बच्चों को निमोनिया से बचाना चाहिए। समय-समय पर उन्हें गर्म पानी पिलाना चाहिए तथा गर्म कपड़े लपेट रखना चाहिए। उनके पैरों हाथों तथा सिर को जरूर ढककर रखे ताकि सर्दी से बचाया जा सके। सर्दी से बचने के लिए जहां बाजरे की रोटी बहुत प्रसिद्ध है खाई जा सकती है तथा सेहत के लिए भी यह लाभप्रद होती है।
उन्होंने बताया कि कच्ची हल्दी को दूध में डालकर सोते वक्त पीना लाभप्रद है। इससे गले का रोग, अस्थमा, वातरोग, हड्डियां रोग आदि में बेहतर साबित हो सकती है।
कनीना क्षेत्र में ठंड बढ़ी है। ठंड पडऩे से जहां बुजुर्ग तथा छोटे बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। वही पशुपालक भी परेशान होने लगे हैं।
कनीना के डा अजीत शर्मा ने बताया कि छोटे बच्चों में ठंड जल्दी लगती है जिनमें निमोनिया तक होने की संभावना जताई है उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को कपड़े पहना कर सुला देने से वे ठंड के शिकार हो रहे हैं क्योंकि वह ऊपरी कपड़े फेंक देते हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि अधिक कपड़े पहनाकर बच्चों को रजाई वगैराह नहीं ओढ़ाई जाए वही बच्चे की मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम है। बच्चों को सर्दी से बचाना चाहिए सर्दी लगने पर डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बच्चा दो-तीन घंटे में तक दूध नहीं पीता तुरंत डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को उसकी सांस से पता लगाया जा सकता है कि उन्हें कहीं निमोनिया आदि तो नहीं लग गया है यदि सांसों में एक विशेष प्रकार की आवाज आए तो समझों की ठंड लग गई है।
उधर वैद्य बालकिशन शर्मा एवं हरिकिशन शर्मा ने बताया कि सर्दी से बुजुर्गों को भी बचाना जरूरी है। सर्दी से हृदयघात होने तथा सांस में तकलीफ बढऩे की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में बुजुर्गों को भी सर्दी से बचाना जरूरी है। उन्हें पीने के लिए गर्म पानी देने तथा बासी भोजन न देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि धूप निकलने पर बिस्तर से बाहर जाने देना चाहिए। सर्दी से बचाने से उनके रोगों से भी बचा जा सकता है।
फोटो कैप्शन: डा. अजीत शर्मा
पशुओं को सर्दी से बचाये-पवन कांगड़ा
-अधिक सर्दी से पशुओं का घट जाता है दूध
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कनीना की आवाज। इंसानों की भांति पशुओं को भी सर्दी लगती है। दुधारू पशु कड़ाके की सर्दी लगने पर कम दूध देते हैं। ये विचार कनीना के वरिष्ठ पशु चिकित्सक पवन कांगड़ा ने व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसान पशु पालते हैं किंतु सर्दियों में उन पर ध्यान नहीं देते जिसके चलते सर्दी लग जाती है। उन्होंने कहा कि सर्दी के दिनों में पशुओं को खुले आसमान तले न बांधे, जब तक धूप न हो जाये तब तक घर से बाहर न निकाले, ठंडा पानी न पिलाये, धूप आने पर ही पानी पिलाये, ताजा पानी पिलाये और पशु को कपड़े से या बोरी आदि से रात को ढके। उन्होंने कहा कि सर्दियों में मवेशियों को प्रमुख रूप से सर्दी लग जाती है और जिसका सीधा प्रभाव दूध पर पड़ता है। अधिक ठंड के कारण पशु सर्दी से बचाव में लग जाता है तथा सामान्य मौसम में दूध की मात्रा भी अच्छी मिलती है। उन्होंने बताया कि जब कभी मौसम बदलता है तो पशु 50 फीसदी तक दूध कम देते हैं। जब गर्मी से सर्दी का मौसम आता है तो पशु हाइपोथर्मी अवस्था में चला जाता है जबकि सर्दी से गर्मी के मौसम में पशु हाइपरथर्मी अवस्था में चला जाता है जिससे दूध की मात्रा कम कर देता है।
उधर पशुओं के लिए लंबे समय से औषधियां बनाने वालों का कहना है कि दूध देने वाले पशुओं को भी सर्दी से बचाना चाहिए वरना वे दूध कम देंगे वहीं बीमार हो सकते हैं। उनका कहना है कि पशु भी इंसान की भांति रोगों से पीडि़त हो सकते हैं। उन्हें बचाना जरूरी है। ऐसे में उन्हें गर्म बोरी आदि से ढककर आराम दिलाना जरूरी होता है।
उनका कहना है कि इस मौसम में पशुओं को अश्वगंधा, हल्दी, अदरक, लहसुन, तुलसी, शतावर, मेथी, हालू, ग्वारपाठा, इलाइची और आक के फूल का उपयोग करना चाहिए, जिससे पशु सर्द मौसम में बीमारियों से बचा रहेगा।
उधर पशु पालक कनीना के अजीत कुमार, किसान सूबे सिंह से पशुओं के बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि सामान्य ठंड में पशु दूध ठीक मात्रा में देता है किंतु अधिक ठंड में दूध की मात्रा घट जाती है। वे कपड़ा/झूल ओढ़ाकर, पशुओं के पास आग जलाकर तथा रात के वक्त गुड़ खिलाकर सर्दी से बचाते हैं। पशु के आवास को सूखा रखना भी जरूरी है।
फोटो कैप्शन 06: पशुओं को कपड़े ओढ़ाकर सर्दी से बचाता पशु पालक
डा. होशियार सिंह यादव कनीना का नाम विश्व रिकार्ड बुक में
- 25 जनवरी जयपुर में मिलेगा अवार्ड
-कई विश्व रिकार्ड बुकों में हो चुका है नाम दर्ज
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव पूर्व शिक्षक, साहित्यकार ,लेखक एवं पत्रकार का नाम एक बार फिर से विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो चुका है। 25 जनवरी 2026 को जयपुर में उन्हें विभूषित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विदेशों तक विश्व बुक रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है। इसी कड़ी में इनफ्लुएंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज किया जा चुका है। अब तक 43,80000 किलोमीटर के करीब साइकिल चलाने तथा 8000 किलोमीटर के करीब पैदल चलने के कारण उनका यह नाम विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हुआ है।
अब तक हजारों की संख्या में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त, डा. होशियार सिंह यादव के 3 शोध प्रकाशित तथा तीन बार राज्यपाल से, राज्य शिक्षक पुरस्कार तथा अनेकों अवार्डोंं से सम्मानित डाक्टर यादव लंबे समय से साइकिल चला रहे हैं। करीब 40 सालों से साइकिल चला रहे और ताउम्र चलने का संकल्प ले रखा है। यही नहीं कावड़ यात्रा, खाटू श्याम पदयात्रा ,जैतपुर पदयात्रा तथा अन्य किसी धाम की यात्रा पर पैदल जाकर नाम कमा चुके हैं। यही कारण है कि उनका नाम एक बार फिर से विश्व रिकार्ड बुक में प्रकाशित हो चुका है। आने वाली 25 जनवरी को पिंक सिटी में सम्मानित किया जाएगा।
फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह
लुई ब्रेल को याद किया
-दीप जलाकर मिठाई बांटी
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कनीना की आवाज। राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में समावेशी शिक्षा के अंतर्गत हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधीन समावेशी शिक्षा कार्यक्रम कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें दो विशेष शिक्षक अमृत सिंह राघव व सरिता विशेष अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। आज संसाधन कक्षा में लुइस ब्रेल का विधि विधान से जन्मदिन मनाया गया। जिसमें अमृत सिंह राघव विशेष शिक्षक ने लुई ब्रेल के जीवन पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि लुइस ब्रेल जन्म से दृष्टि बाधित होते हुए दृष्टिबाधितों के लिए एक लिपि का आविष्कार किया। जिसे ब्रेल लिपि के नाम से जाना जाता है। जो दृष्टिबाधितों के लिए वरदान साबित है। दृष्टि बाधित ब्रेल लिपि में पढ़ लिखकर समाज में समायोजन कर रहे हैं । कनीना खंड के दृष्टि बाधित व अल्प दृष्टि बाधित बच्चों समावेशी शिक्षा के अंतर्गत पढ़कर समाज में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। लुई ब्रेल का जन्म फ्रांस में हुआ था। इसी अवसर पर एनएसएस प्रभारी डा. मुंशीराम,,सुरेंद्र गणित, बलदीप प्रवक्ता इतिहास, गुरदीप प्रवक्ता मैथ, रविता देवी विशेष रूप से उपस्थित रही।
फोटो कैप्शन 01: लुई ब्रेल को याद करते हुए।
कनीना के एनएसएस शिविर में सतीश आर्य ने समझाए जीवन के गुर
-डा. मुंशीराम ने भी रखे अपने विचार
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कनीना की आवाज। कनीना में एनएसएस के विशेष शिविर के अंतर्गत विभिन्न विभिन्न गतिविधियां की गई। जिसमें बच्चों ने विद्यालय की सफाई पर विशेष ध्यान दिया। और विद्यालय की सफाई भी करवाई गई। एनएसएस प्रभारी डा. मुंशी राम ने बच्चों को संबोधित किया। इस शिविर में आज आर्य समाज से सतीश आर्य ने बच्चों का मार्गदर्शन किया। और बच्चों को शिक्षा से संबंधित बातें बताई। उन्होंने बताया कि हमें अपना जीवन किस तरह से शुद्ध और शाकाहारी बनाना है। हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। और हमें नशे से बिल्कुल दूर रहना है। बच्चों को नशे से दूर रहने के लिए शपथ भी दिलवाई और अनुशासन में रहकर अपने माता-पिता की सेवा करनी है । अपने गुरुजनों का सम्मान करना है। आदि बातों पर प्रभाव डाला। आज शिविर में क्रेडिट ने विशेष रूप से विद्यालय की साफ सफाई का कार्य किया। आर्य समाज से आए सतीश आर्य जी की बातों को जीवन में उतारने का फैसला लिया। एनएसएस प्रभारी डा. मुंशी राम ने बच्चों का अनुशासन में रहकर अपने घर गांव अपने माता-पिता गुरुजनों का नाम रोशन करना है। आदि बातों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अमृत सिंह विशेष शिक्षक, बलदीप प्रवक्ता इतिहास, सुरेंद्र ,रविता देवी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: सतीश आर्य संबोधित करते हुए
सीख से सुरक्षा, तकनीक से परिवहन की थीम के तहत वाहनों पर लगाए गए रिफ्लेक्टर टेप
--लो विजन के समय होते हैं लाभप्रद
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कनीना की आवाज। जिले में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से महेंद्रगढ़ पुलिस द्वारा 1 जनवरी से 31 जनवरी तक सड़क सुरक्षा माह का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष के अभियान को सीख से सुरक्षा, तकनीक से परिवहन की थीम पर केंद्रित रखा गया है। पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के कुशल नेतृत्व और उप पुलिस अधीक्षक नारनौल सुरेश कुमार के दिशा-निर्देशों के तहत, जिले के यातायात प्रबंधक और सभी थाना प्रबंधकों को पूरे माह प्रतिदिन सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के आदेश जारी किए गए हैं, ताकि आमजन को सुरक्षित आवागमन के प्रति जागरूक किया जा सके।
इसी श्रृंखला में, आदेशों की अनुपालना करते हुए थाना शहर कनीना की पुलिस टीम ने एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के अंतर्गत सड़क से गुजरने वाले वाहनों, विशेषकर भारी वाहनों, लोडिंग व्हीकल्स, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और पिकअप गाडिय़ों पर नि:शुल्क रिफ्लेक्टर टेप लगाए गए। पुलिस अधिकारियों ने इस दौरान वहां मौजूद वाहन चालकों को जागरूक करते हुए समझाया कि मौजूदा समय में घने कोहरे और रात्रि के समय कम दृश्यता के कारण होने वाले हादसों को रोकने में ये रिफ्लेक्टर टेप जीवन रक्षक की भूमिका निभाते हैं। पुलिस का प्रयास न केवल यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है, बल्कि तकनीकी उपायों और जागरूकता के माध्यम से हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
फोटो कैप्शन 03: वाहनों के रिफ्लेक्टर लगाती हुई पुलिस
प्राचार्य कुतरूं के कारनामे, इसी ब्लाग पर 14 जनवरी से
-पढ़ते रहिये कनीना की आवाज
साल में एक विज्ञापन भी नहीं दिया
-वो मेरे पास प्रकाशन हेतु न भेजे समाचार











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