Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Friday, January 16, 2026



 


 किसान अपना रहे हैं प्योद तैयार करने का धंधा
-कमा रहे हैं अपनी रोटी रोजी
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र  और आसपास गांवों में करीब एक दर्जन किसान छोटे स्तर पर तैयार करके अपनी रोटी रोजी कमा  रहे ह। वह बड़े स्तर पर नर्सरी तैयार नहीं करते अपितु मौसम अनुसार प्योद तैयार करके स्वयं भी अपने खेतों में लगा देते हैं वहीं अधिक मात्रा में तैयार प्योद को बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त करते हैं।  इस समय प्याज, टमाटर, मिर्च एवं बैंगन आदि की प्योद तैयार कर रहे हैं। इस समय प्याज की अधिक मांग है। लोग त्वरित गति से प्याज अपने खेतों में लगा रहे हैं। हमीर कनीना निवासी ने बताया कि वह 10 वर्षों से प्योद तैयार करके बेच रहे हैं ताकि रोटी रोटी चलती रहे। उन्होंने बताया कि प्योद तैयार करना बहुत कठिन कार्य है। उनकी सुरक्षा विशेष कर गर्मी और सर्दी में करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि प्योद तैयार करने से पहले बीज लाने पड़ते हैं और कई बार बीज बहुत महंगे मिलते हैं और क्योंकि सर्दी और गर्मी में कई बार प्योद नष्ट हो जाती है। ऐसे में उन्होंने बताया कि प्योद तैयार करना सरल कार्य नहीं है। पर अपनी रोटी रोटी इस प्योद तैयार करके बेचकर प्राप्त करते हैं।
   उधर डीएचओ नारनौल प्रेम कुमार ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए प्योद तैयार करके एकीकृत बागवानी केंद्र सुंदरह से उपलब्ध करवाई जाती है। जिन पर भी सब्सिडी होती है। वैसे किसान अगर अपने खेतों में सब्जी उगाना चाहे तो मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई यदि प्रयोग करता है तो उसे 15000 रुपये प्रति एकड़ सब्सिडी दी जाती है। बाकी प्योद तैयार करवाना चाहे तो एकीकृत बागवानी केंद्र सुंदराह से तैयार करवा सकता है क्योंकि यहां पर प्योद तैयार करने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।  उधर डा. नेहा विषय विशेषज्ञ एकीकृत बागवानी केंद्र सुंदराह ने बताया कि जब तीन पत्ती की प्योद तैयार हो जाती है तब किसानों को उपलब्ध करवाई जाती है। प्योद तैयार होने में अलग अलग समय लगता है। बेल वाली फसलों की प्योद 1.20 रुपए में तो अन्य सब्जी की प्योद 1.40 रुपए प्रति प्योद तैयार करके दी जाती है। अलग-अलग प्योद तैयार करने पर अलग-अलग सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने कहा कि प्योद मिट्टी रहित तैयार की जाती हैं।
फोटो कैप्शन 05: कनीना क्षेत्र में किसान प्याज की प्योद तैयार करता हुआ।




कड़ाके की ठंड जारी, दिन में खिलती है धूप
-किसान निहार रहे हैं फसलों को
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज।
कनीना एवं आस पास पल पल मौसम बदल रहा है। कभी कड़ाके की ठंड पड़ती है तो कभी कोहरा पड़ता है। कई दिनों तक पाले की समस्या भी देखने को मिली है।
 क्षेत्र के रवि कुमार, दिनेश कुमार, सुरेश कुमार, महेश कुमार आदि लोगों का कहना है की क्षेत्र में बढ़ रही सर्दी के कारण लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं तथा लोग खांसी, जुकाम ,बुखार की चपेट में आ रहे हैं जिसके कारण सरकारी अस्पतालों में लाइन लगी हुई है। सरकार ने 15 दिनों के अवकाश घोषित कर 16 जनवरी को सभी स्कूल खुलने की बात कही थी किंतु सर्दी को देखते हुए अवकाश 18 जनवरी तक कर दिये गए हैं। अब स्कूल 19 जनवरी को खुलेंगे। अभी कड़ाके की ठंड एवं कोहरा पड़ रहा है।  
 आम आदमी का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है तो फिर बच्चे किस प्रकार स्कूल में जा सकते हैं। सरकारी अस्पताल के चिकित्सक जितेंद्र कुमार से जब इस बारे में बात की गई तो उनका कहना था की सर्दी के मौसम इंफेक्शन ज्यादा होता है तथा बच्चों में इम्यूनिटी की कमी होने के कारण वह जल्दी बीमार हो जाते हैं। इसलिए बच्चों को सर्दी से बचा के रखना चाहिए।
उधर किसान अभी खुश हैं क्योंकि इस समय सरसों एवं गेहूं की फसल लहलहा रही है। कनीना क्षेत्र में 20000 हेक्टेयर पर सरसों तथा 8000 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल खड़ी है। अब तक महज एक बार हल्की वर्षा हो चुकी है जिससे किसानों को लाभ मिला है। विगत वर्ष सर्दियों में तीन बार वर्षा हुई थी।
 सरसों में इस समय फूल और फलियां आ रही है। पाले से जिसे नुकसान होने का अंदेशा बना बन जाता है। जहां गेहूं की फसल अभी छोटी है  किसान अपनी फसलों को निहार रहे तथा उन्हें विश्वास है कि अभी तक इतना पाला नहीं जमा है जिससे नुकसान हो जाए। उन्हें विश्वास है कि भविष्य में अच्छी पैदावार सरसों और गेहूं की होगी।
  फोटो कैप्शन 06: गेहूं फसल को निहारता किसान



छीथरोली में अंतर्राष्ट्रीय स्तर खेल स्टेडियम में उत्कृष्ट केन्द्र स्थापित करने की मांग
--खिलाडिय़ों से बात की अतरलाल ने
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज।
बसपा के नेता अतरलाल एडवोकेट ने हरियाणा सरकार से जिला के छिथरोली गांव के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में कुश्ती, कबड्डी तथा मुक्केबाजी का अंतर्राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट केन्द्र स्थापित करने की मांग की है।
 उन्होंने खिलाडिय़ों से बातचीत करते हुए उक्त मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जिला महेन्द्रगढ़ कुश्ती, कबड्डी तथा मुक्केबाजी के पहलवान खिलाडिय़ों का गढ़ है। छीथरोली गांव के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में हर साल पंचायत तथा ग्रामवासियों की तरफ से कुश्ती, कबड्डी खेलों का महाकुंभ आयोजित किया जाता है। जिसमें प्रदेशभर से नामी पहलवान खिलाड़ी भाग लेते हैं। इसलिए इस स्टेडियम में कुश्ती कबड्डी तथा मुक्केबाजी का एक्सीलेंस सेंटर स्थापित कर यहां आधुनिक ढ़ांचागत सुविधाएं बढ़ाने, विश्व स्तरीय खेल उपकरण, उच्च गुणवतापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था, अनुभवी तथा योग्य अनुशिक्षण स्टाफ उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है। इस खेल स्टेडियम में उक्त खेलों का उत्कृष्ट केन्द्र स्थापित करने से इलाके के खिलाड़ी पहलवान तथा मुक्केबाजों को अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी। जिससे भविष्य में इलाके के खिलाड़ी ओलंपिक, एशियाई और अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हरियाणा का नाम रोशन करने में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल इलाके के कुश्ती, कबड्डी तथा मुक्केबाजी के खिलाडिय़ों को विश्व स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि वे इस मांग को लेकर जल्दी ही हरियाणा के मुख्यमंत्री तथा खेलमंत्री से मुलाकात कर खिलाडिय़ों की इस अहम मांग को शीघ्र पूरा करने का अनुरोध करेंगे।


सीडीपीओं की ओर से आयोजित हुई महिलाओं की खेलकूद
-ज्योति ने पाया साइकिल दौड़ में प्रथम स्थान
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज।
  महिला एवं बाल विकास परियोजना कनीना की ओर से सरकार द्वारा महिलाओं को हर एक क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए चलाई गई मुहिम महिला खेलकूद प्रतियोगिता खंड स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में खंड कनीना के 61 गांवों की कामकाजी महिलाओं में अन्य महिलाओं ने बढ़ सरकार भाग लिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जितेंद्र अहलावत उपमंडल अधिकारी कनीना रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला में बाल विकास परियोजना अधिकारी सुनीता सांगवान द्वारा की गई। कार्यक्रम में मंच संचालन अमृतसिंह राघव द्वारा किया गया।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष की प्रतियोगिता में 6 प्रतियोगिताएं करवाई गई। जिसमें डिस्कस थ्रो, साइकिलरेस ,100 मीटर दौड़, 300 मीटर दौड़ ,400 मीटर दौड़ ,म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता आयोजित की गई। साइकिल दौड़ में प्रथम स्थान पर ज्योति , दूसरे स्थान पर तनु , निशा , तीसरी स्थान पर रही। 100 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान पर पूनम , द्वितीय स्थान पर गीता रानी, तृतीय स्थान पर मुनिता  रही। 400 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान पर मुस्कान नांगल हरनाथ , दूसरे स्थान सरला , तृतीय स्थान पर राजबाला कोका रही। म्यूजिकल चेयर में प्रथम स्थान पर सपना , द्वितीय सरिता , तृतीय प्रवीण  रही। डिसकस थ्रो में प्रथम स्थान पर ज्योति , दूसरे स्थान पर अन्नू और तृतीय स्थान पर सीमा चेलावास रही। सभी प्रतियोगिताओं में डीपी किस्मती व डीपी शर्मिला द्वारा प्रतियोगिताओं का अवलोकन किया गया व भरपूर सहयोग किया गया।
उपमंडल अधिकारी जितेंद्र अहलावत मुख्य अतिथि द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि आज के दिन हिलाए हर क्षेत्र में अपना परचम फहरा रही हैं। चाहे धरती हो या फिर आकाश हर जगह अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। घर से लेकर सेना तक नाम कमा चुकी हैं। महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी सुनीता सांगवान द्वारा मुख्य अतिथि का सम्मान किया गया।   कार्यक्रम में सर्कल सुपरवाइजर सुमन, पूजा, खींची अनीता रानी, मनीषा, कुसुम लता ,ज्योति यादव, जग्गू देवी, एकता सहायक मोहित लिपिक, विनय देव, अजीत सेवादार आदि उपस्थित रहे खंड के सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
फोटो कैप्शन 01: दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए एसडीएम कनीना


फर्जी हेल्थ सर्टिफिकेट जारी करने का मामला दर्ज,जांच जारी
--पशु चिकित्सक ने करवाया मामला दर्ज
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में फर्जी पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट जारी करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में राजकीय पशु चिकित्सालय मोतला कलां, रेवाड़ी में कार्यरत पशु चिकित्सक डा. अरविंद कुमार ने उप पुलिस अधीक्षक कनीना को शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर थाना शहर कनीना में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
डा. अरविंद कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके संज्ञान में यह मामला आया है कि जीवीएच मोतला कलां के नाम से एक फर्जी पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया है। यह सर्टिफिकेट पुनीत कुमार निवासी गांव मुसेपुर, जिला रेवाड़ी के नाम से तैयार किया गया। जिसका उपयोग एसबीआई कनीना से संबंधित कार्यों में किया गया। आरोप है कि यह फर्जी सर्टिफिकेट बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर तैयार किया गया है। डा. अरविंद कुमार ने स्पष्ट किया कि उक्त हेल्थ सर्टिफिकेट न तो उनके द्वारा और न ही जीवीएच मोतला कलां द्वारा कभी जारी किया गया है। उन्होंने मामले में कार्रवाई के लिए फर्जी हेल्थ सर्टिफिकेट की प्रति अपनी शिकायत के साथ संलग्न कर पुलिस को सौंपी है। शिकायत मिलने के बाद उप पुलिस अधीक्षक कनीना के कार्यालय से यह परिवाद थाना शहर कनीना को भेजा गया।
पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट पशु पालकों की अर्जी पर या बैंक के कहने पर पशु पालकों को जारी किया जाता है। इससे पशु पालक अपना फार्म हाउस खोलने या पशु खरीदने के लिए बैंक से एक करोड़ रुपए तक का लोन ले सकता है।


श्रीश्याम का लगा भंडारा, बस स्टैंड समझ कराया भोजन
--कढ़ी चावल का प्रसाद चला शाम तक
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज।
 कनीना बस स्टैंड के समक्ष श्रीश्याम का भंडारा आयोजित किया गया। यह भंडारा कुछ दुकानदारों के सहयोग से लगाया गया जिनमें अजय कुमार ,लालाराम कृष्ण कुमार, तुषार एवं प्रदीप आदि प्रमुख है।
कृष्ण कुमार कथूरिया ने बताया की श्रीश्याम का भंडारा आयोजित किया गया जिसमें गरमा गरम काली और चावल लोगों को दिनभर खिलाया गया क्योंकि बस स्टैंड के पास से हजारों की संख्या में लोग गुजरते हैं। यदि किसी को भोजन करना हो तो उसने  यहां आसानी से भोजन किया। वैसे भी यह सभी के लिए खुला हुआ भंडारा था। कोई भी भोजन कर सकता था। इस मौके पर उन्होंने बताएं दूर दराज से आए भक्तों ने आकर भोजन ग्रहण किया और वो खुश नजर आए।
 फोटो कैप्शन02: श्री श्याम का भंडारा एक नजारा



 समाजसेविका मिश्री देवी को किया याद
- 9 साल पहले हो गया था देहांत
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज।
कनीना में कनीना की समाजसेविका मिश्री देवी को उनकी 9वीं बरसी पर याद किया गया। वो अपने समय की धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में जीवन जीकर अपने परिवार को पालन पोषण किया। उनके यहां कनीना में सबसे बड़ी डेरी 1986 तक चलती थी और परिवार में अनेकों गाय पाली जाती थी। चाहे आज गौशाला में गाय देखने को मिलती है किंतु उस समय उनके पास कई गाए होती थी। दूध पर्याप्त मात्रा में था जिनके बल पर उन्होंने परिवार को पाल पोषकर लिखा पढ़ाकर अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया। कृष्ण कुमार ने बताया कि उनका जब देहांत हुआ तब वे करीब 95 वर्ष की थी और कुछ समय से बीमार चल रही थी।
 9 साल पहले मकर संक्रांति के दिन अधिक बीमार हो गई थी और बीमारी के कारण उनका देहांत हो गया था। आज भी जयनारायण गोपालक का नाम दूरदराज तक मशहूर है। एक सीधी सादी महिला अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करें और वो भी भक्ति भाव में रहकर यह मिश्री देवी ने लोगों को समझाया। इस मौके पर नीलम, टिंकू, योगेंद्र, अमीश कुमार, अमीशा सहित कई जन मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 3: मिश्री देवी को याद करते हुए












कुतरूं प्राचार्य के कारनामे -एपीसोड 02
स्कूल से लकड़ी कटवाकर ट्राली भरकर बेचने निकला था कुतरूं प्राचार्य
- पकड़े जाने पर पैर पकड़कर छुड़वाया पीछा
****************************************************************
**********************************************************************
***************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव जहां करीब 40 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में जमे रहे। उन्होंने अपने जीवन में कई हजार विद्यार्थियों को शिक्षा दी है। उन्होंने करीब 35 विभिन्न मुख्याध्यापकों एवं प्राचार्यों के साथ काम किया और करीब 35 ही स्कूलों/कालेजों में अपनी सेवा दी है। वैसे तो डा. होशियार सिंह की कृति -मेरी शिक्षा का सफर में विस्तार से बताया जा चुका है। सेवा दौरान अनेक कष्ट और समस्याएं झेलनी कुतरूं जैसे प्राचार्यों के कारण वहन करनी पड़ी है। डा. होशियार सिंह के अनेक लाभ जो प्रदेश के बहुत से स्टेट अवार्डी शिक्षक ले रहे हैं वो भी आज तक नहीं दिए क्योंकि साफ छवि और मेहनतकश शिक्षकों की तरफ बहुत कम लोग मिलते और बोलते हैं। डा. होशियार सिंह ने सदा ही कुर्सी पर बगैर बैठे पढ़ाया और नाम कमाया है। इस अवधि में कुछ ऐसे प्राचार्य मिले जिनका नाम लेते वक्त भी फक्र होता है जबकि कुछ ऐसी प्राचार्य भी मिले जिनके  नाम लेते हुए भी ऐसा महसूस होता है जैसे किसी गंदगी में हाथ लग गया हो। इसी दौरान उनके कारनामे भी सामने लाने पड़े हैं क्योंकि एक नहीं दो-तीन कुतरूं प्राचार्य मिले हैं जिनके कारनामे एपिसोड के रूप में पेश किए जाएंगे। किंतु पूर्ण रूप से नाम सहित गाथा पढऩे के लिए मेरी भविष्य प्रकाशित होने वाली पुस्तक कुतरूं प्राचार्य के कारनामे जरूर पढऩे का कष्ट करें।
एक कुतरूं प्राचार्य जिसको न तो हिंदी आती ना अंग्रेजी में,न संस्कृत और उर्दू ,फारसी आदि का ज्ञान है किंतु प्राचार्य है। होशियार सिंह के शिक्षण  दौरान प्राचार्य रहा किंतु ताज्जुब होता है कि जिनको किसी भाषा का ज्ञान नहीं और न किसी विषय का वो कैसे प्राचार्य बना इसके बारे में अगले किसी एपीसोड में हवाला दिया जाएगा। हां चापलूसी में एक नंबर रहा है। जब भी कोई काम बिगड़ जाता तो तुरंत पैर पकड़ लेता है, वह गुण उसमें कूट कूटकर भरा है। लेखक का दावा है कि यदि उनके साथ किसी भी विषय पर वह चर्चा करें यहां तक कि उनके विषय में भी चर्चा करें अगर कुतरूं अच्छा उत्तर दे पाए तो होशियार सिंह उसका ताउम्र गुलाम रहेगा नहीं तो ऐसे कुतरूं आचार्य को शिक्षा विभाग में रहने का कोई हक नहीं। कुतरूं प्राचार्य बेईमानी से भरा हुआ है, ब्लैकमेलिंग में भी एक नंबर है। बात उन दिनों की है जब स्कूल में शिविर लगा हुआ था और वह भी एनएसएस का शिविर। बच्चे साफ सफाई कर रहे थे। साफ सफाई के नाम पर बच्चों ने पेड़ों की छंगाई, कटाई कर डाली। कुतरूं प्राचार्य की उन पर नजर थी। झटपट उसने एक ट्राली मंगवा और उसमें कटाई किए हुए पेड़ पौधे सभी डाल दिए और आरा मशीन पर बेचने के लिए निकल पड़ा क्योंकि ऐसे घटिया इंसान के विरुद्ध अनेकों लोग खड़े हुए थे। द्वार पर खड़े कुछ लोगों ने देखा कि इस समय यह लकडिय़ां कहां जा रही हैं? उन्होंने ट्रैक्टर चालक को रुकवा लिया, पूछताछ की तो उसने कुतरूं प्राचार्य का नाम बताया। फिर तो कुतरूं भी आ पहुंचा।फिर क्या था, इन लोगों ने कहा चलो पुलिस में शिकायत देते हैं। इतना सुन कुतरूं  प्राचार्य पसीनों से तर बतर हो गया। सरेआम सड़क पर ही माफी मांगने लगा, स्कूल कैंपस में उन लोगों को बुलाया और उनके पैरों में ही गिर पड़ा और कहने लगा मुझे बख्श दो नहीं तो मेरी नौकरी चली जाएगी, मेरे बच्चे बर्बाद हो जाएंगे।
 इतना सुनकर उनको रहम आ गया क्योंकि पैरों में गिरकर बुरी तरह से रोने लगा। आंखों में आंसू आ गए। कुतरूं प्राचार्य ऐसे रो रहा था जैसे कोई बच्चा रो रहा हो। ट्रैक्टर ट्राली पकडऩे वालों ने बहुत भला बुरा कहा। कुतरूं प्राचार्य ने उनके पैर पकड़ लिये और कहा कि तब तक नहीं छोडूंग़ा जब तक मुझे माफ नहीं कर दोगे। उन लोगों ने आखिर सोच समझकर उसे माफ करने का मन बनाया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर कोई तुम्हारी शिकायत आई तो किसी हाल में नहीं बख्शा जायेगा इतना कह कर कुतरूं को उन्होंने बख्श दिया। लकडिय़ों को कुतरूं बेचकर खा गया। जब भी वे लोग मिलते हैं मारे कुतरूं शर्म के मुंह लटका लेता है। दुर्भाग्य है शिक्षा विभाग में ऐसे प्राचार्य भी है। जिन्हें कुछ आता नहीं और उस पर ब्लैकमेलिंग और स्कूल की सामान को बेच डालते हैं।

No comments: