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Thursday, January 22, 2026



 



 खारीवाड़ा मे स्वेटर वितरण के बाद बच्चों के खिले चेहरे
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कनीना की आवाज।
खारीवाड़ा निवासी राजकीय महाविद्यालय अटेली में प्रोफेसर के पद कार्यरत महेश कुमार ने अपनी नेक कमाई में से राजकीय प्राथमिक पाठशाला खारीवाड़ा में आयोजित एक सादे समारोह में बच्चों को सर्दी से बचाव के लिए स्वेटर वितरित की जिसके बाद बच्चों के चेहरे पर खुशी देखी गई।
इस अवसर पर पाठशाला के प्रभारी मास्टर राजेश उन्हाणी ने स्वेटर वितरण कार्य की सराहना करते हुए कहा की बच्चे देश व समाज के भविष्य है उन सब का ध्यान रखना हमारी बड़ी जिम्मेदारी है
इस अवसर पर पाठशाला के अध्यापक कैलाश चंद ने कहा की सर्दी के मौसम मे छोटे छोटे ननिहालो का ख्याल रखना चाहिए प्रोफेसर महेश द्वारा बच्चों को स्वेटर वितरण का कार्य इस दिशा मे एक सार्थक कदम है जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है।
प्रोफेसर महेश ने अपने संबोधन में राष्ट्र का धन बैंकों में नहीं अपितु विद्यालयों में पाया जाता है। वह भविष्य में भी अपनी नेक कमाई में से बच्चों के हितार्थ कोई न कोई कार्य करते रहेंगे।
इस अवसर पर गंगा देवी शकुंतला बीना देवी, इंद्रजीत, सुधीर आदि भी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 08: खरीवाड़ा में स्वेटर वितरित करते हुए।




 सुबह धूप तो शाम को छाये बादल, ठंड बढ़ी
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां सुबह धूप खिली रही वहीं दोपहर पश्चात बादल छाने लगे। इस वर्ष सर्दियों के मौसम में महज एक बार बूंदाबांदी हुई है, दूसरी बार बूंदाबांदी के आसार बन रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय बूंदाबांदी का खड़ी गेहूं की फसलों को बहुत लाभ होगा। सरसों की फसल में अब फलियां आने लग रही है किंतु उसको भी लाभ होने की संभावना है।
 इस समय कनीना के खेतों में करीब 18000 हेक्टेयर पर सरसों तो 8000 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल खड़ी हुई। यदि मौसम सही चला तो अच्छी पैदावार होने के आसार बने हुए हैं। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि धुंध और कोहरा भी फसलों के लिए लाभप्रद होते हैं लेकिन ज्यादा समय तक धुंध छाई रहे और मौसम न खुले तो नुकसान होने का अंदेशा बन जाता है। इस वर्ष क्षेत्र में लगातार मौसम बदल रहा है। पाला जमना, धूप खिलना, कोहरा, धुंध, सर्दी तो कभी तेज धूप जैसे मौसम बदलाव होते रहे हैं। किसान लगातार फसलों पर नजर जमाये हुये है।
 फोटो कैप्शन 09: क्षेत्र में छाये बादल




बाड़े से 9 बकरियां चोरी
-चोर आये स्विफ्ट गाड़ी में, मामला दर्ज
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र के गांव बेवल में अज्ञात चोरों ने रात के समय बकरियां चोरी कर ली। पीडि़त के अनुसार बकरी चोरी करने वाले काले रंग की स्विफ्ट कार में आए थे। पीडि़त पशुपालक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गांव बेवल निवासी सूरत सिंह ने दौंगडा अहीर पुलिस चौकी में दी शिकायत में बताया कि वह भेड़-बकरी पालन कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसने बीती रात अपनी बकरियों को घर के पास बने बाड़े में बांध रखा था। रात करीब तीन बजे एक काले रंग की स्विफ्ट कार बाड़े के पास आकर रुकी, जिसमें सवार अज्ञात व्यक्ति उसकी नौ मादा बकरियां चोरी कर ले गए।
सुरत सिंह ने बताया कि चोरी की गई बकरियों को वह सामने आने पर पहचान सकता है। घटना के बाद उसने परिजनों व ग्रामीणों के सहयोग से अपने स्तर पर बकरियों की तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लग सका। इसके बाद वह कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस चौकी पहुंचा और अज्ञात चोरों के खिलाफ शिकायत दी।
दौंगडा अहीर चौकी में धारा 303(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज करने के लिए थाना कनीना भेजा गया। पुलिस टीम शिकायतकर्ता के साथ मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।



नेताजी को कैमला में किया याद
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में नेताजी सुभाष चंद्र जयंती की पूर्व संध्या पर कंवर सिंह आर्य आनावास की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आचार्य श्यामरथ आर्य अनूपगढ़ आश्रम राजस्थान से विशेष रूप से उपस्थित रहें। सभी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति में पुष्प अर्पित करते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और संस्कृति के ओत-प्रोत  अपने-अपने विचार रखे गए। जो बच्चों के हित और भविष्य के लिए कारगर सिद्ध होंगे। आचार्य ने विद्यार्थियों को दैनिक दिनचर्या को ठीक रखने की बात कही वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भांति विचारों को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि योग से शरीर स्वस्थ रहता है ।स्वस्थ शरीर से मन में अच्छे विचार उत्पन्न होते हैं और मनुष्य की मानसिक स्थिति भी श्रेष्ठ बनती है। जैसा कि कहा गया है स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क वास करता है। कैप्टन संतोष ने बच्चों को दैनिक जीवन पद्धति को अपनाते हुए प्रात: काल ईश्वर का स्मरण करते कर योग्य अभ्यास निरंतर करना चाहिए। मौलिक मुख्याध्यापक  वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने नेताजी के समग्र जीवन पर प्रकाश डाला। तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ,जय हिंद, दिल्ली चलो आज भी उनके नारे युवाओं में जोश पैदा कर देते हैं।
 इस अवसर पर मनवीर सिंह विज्ञान अध्यापक ,सुनील कुमार शास्त्री, देवेंद्र अध्यापक ,सुनील कुमार, डीपीई राजेश कुमार, भगत सिंह, गरिमा रानी, सुबे सिंह ,तारामणि देवी, पिंकी देवी, बबली देवी आदि  उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 07: नेताजी को याद करते हुए




आनलाइन काम न करवाने संबंधी आशाओं ने दिया ज्ञापन
-प्राथमिक  चिकित्सा अधिकारी को दिया है ज्ञापन
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कनीना की आवाज।
 आशा वर्करों ने एनसीडी का आनलाइन कार्य न करवाने की अपील करते हुए एक ज्ञापन प्राथमिक चिकित्सा अधिकारी भोजावास को दिया है। उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि यह काम तकनीकी है और इसके लिए तकनीकी पद की जरूरत है। आशा वर्करों द्वारा दी जा रही सेवाओं में आनलाइन कार्य करवाने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा है कि पहले भी वर्ष 2018 में सरकार ने उन्हें फोन दिए थे किंतु वे अब काम नहीं कर रहे हैं। आशा वर्कर प्रधान कुसुम ता तथा सचिन अमृता ने बताया कि आशा वर्कर इस काम को कर नहीं सकती, उन पर अनावश्यक दबाव बनाकर न करवाया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि आये दिन नई-नई रिपोर्ट मांगी जा रही है जबकि आशा वर्करों का कार्य महिलाओं, बच्चों बुजुर्गों आदि को बीमारियों से बचाव करने संबंधी है जिसमेें उनका बहुत अधिक समय खर्च हो जाता है। उस पर आनलाइन काम दिया जाना अनुचित है। उन्होंने यह भी बताया कि आशाओं से आभा आईडी की रिपोर्ट मांगी जा रही है। रिपोर्ट बनाने में बहुत समय लगता है। उन्होंने इस कार्य पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने यह ज्ञापन चिकित्सा अधिकारी डा. दीपांशु शर्मा को दिया है। अधिकारी ने आगामी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
 फोटो कैप्शन 6: दीपांशु शर्मा को ज्ञापन देते हुए आशा वर्कर


 बसंत पंचमी-23 जनवरी
कई रूपों में मनाया जाता है बसंत पंचमी
-अक्षरज्ञान की शुरुआत होती है इसी दिन से
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कनीना की आवाज।
  कनीना क्षेत्र में बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी के दिन मनाया जाएगा। बसंत पंचमी का पर्व कई मायनों में सामाजिक एकता व भाईचारे का पर्व है। माघ कृष्ण पंचमी के दिन मनाए जाने वाले इस त्यौहार से जुड़ा है वासंती परिधान, पूजा अर्चना, होली गायन व नृत्य। मौसम मदमस्त करने के साथ-साथ मनमोहक होता है।
  किसानों के लिए सह वक्त प्रफुल्लित करने वाला होता है। किसानों की फसलें लहलहाने लगती हैं। सरसों के पीले रंग के फूल धरा को पीला परिधान ओढ़े होने का आभास कराते हैं। वृक्षों पर नई कोपलें,गेहूं की बालियां आ जाती हैं।  ग्रामीण अंचलों में तो इस पर्व का अधिक महत्व होता है। पतंगबाजी एवं मां सरस्वती की पूजा का पर्व है।
  शिक्षाविद डा. रामानंद यादव बताते हैं कि बसंत पंचमी से जुड़ी हैं अक्षरज्ञान की परंपरा। प्राचीन समय से बड़े बूढ़े अपने बच्चों को इसी दिन से ज्ञान देना शुरू करते थे। घर-घर में माँ सरस्वती की पूजा होती है। बताया जाता है कि शिव, ब्रह्मïा, विष्णु काम व रति की पूजा करने का प्रावधान भी होता है। बताया जाता है कि भगवान् भोलेनाथ को पार्वती ने बसंत बहार में ही आकर्षित किया था। राजस्थान में तो इस दिन मां की मूर्ति बनाकर पूजा करने के उपरांत नृत्य करने की परंपरा भी है।
    बसंत पंचमी को पीले वस्त्र पहनने की परंपरा भी चली आ रही है। पीले वस्त्र पहनकर नृत्य किया जाता है। महिलाएं मंदिरों में जाकर पीले पुष्प अर्पित करती हैं। घरों में पीले चावल बनाकर चाव से खाये जाते हैं। बसंत पंचमी को विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा करके सद्बुद्धि और विद्या का वरदान मांगते हैं। कवियों ने ऋतुराज बसंत का कविताओं में और साहित्य में मार्मिक वर्णन किया है। प्रेमियों के लिए भी यह दिन मदमस्त करने वाला होता है। जहां भी देखो खुशियों की बहार आ जाती है। किसान जहां खेतों में फसल पकती देख प्रसन्न होते हैं वहीं पक्षी भी ठंड से बचकर फसल खाने को लालायित दिखाई पड़ते हैं। भंवरे बागों और फसलों पर गूंजन करते हैं और मधुमक्खियां दिनभर फूलों से पराग इकट्ठा करने में लगी रहती हैं और इंसान को मेहनत करने की प्रेरणा देती हैं।
     इस पर्व के आगमन का द्योतक ही पेड़ पौधों पर फूलों का आना तथा मौसम का सुहावना होना माना जाता है। किसानों के लिए बसंत का कुछ विशेष महत्व होता है। किसान अपने खेतों की ओर देख-देखकर मन ही मन में विभोर हो जाता है और आने वाली खुशहाली को याद करता। अपने खेत में अच्छी फसल पैदा होने की संभावना को मन में धारण करके भगवान् एवं मां सरस्वती का आभार व्यक्त करता है। देश के विभिन्न भागों में इस त्योहार को अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है लेकिन सभी का अंतिम उद्देश्य मां की पूजा करना और सद्बुद्धि पाने की प्रार्थना करना होता है।
  कवियों की कल्पना का आधार एवं मन में एक विचार सृजन का वक्त बसंत अति सुहावना लगता है। इस मौसम का विभिन्न कवियों ने अपनी तूलिकाओं से विभिन्न रंगों में उकेरा है। इस मौसम को देखकर लगता है कि सचमुच कामदेव धरा पर अवतरित हो गए हैं। किसान हो या आम जन सभी को प्रकृति का बहुरंगी नजारा अति मनमोहक लगता है।
डा. रामानंद का कहना है कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष के माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन ही ब्रह्मांड के रचयिता बह्मा जी ने मां सरस्वती की रचना की थी। इस बात का उल्लेख पुराणों में मिलता है कि, सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने मनुष्य योनि की रचना की क्योंकि, अपनी प्रारंभिक अवस्था में मनुष्य मूक था और धरती बिल्कुल शांत थी तब, ब्रह्मा जी ने धरती को इस अवस्था में देखा तो अपने कमंडल से जल लेकर छिड़क दिया। जिससे एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिनके हाथ में वीणा थी और उनका दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। यही शक्ति मां सरस्वती कहलायी। उन्होंने वीणा का तार छेड़ा तो तीनो लोक में कंपन हो गया और सबको शब्द वाणी मिल गई।
 मेलों की तैयारी इस दिन से शुरू हो जाती है। अकेले कनीना एवं आस पास गांवों में मेले लगते हैं जिनकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। विभिन्न संस्थाओं में मां सरस्वती का पूजन होता है वहीं भंडारे एवं प्रसाद वितरण ,हवन आदि से मां को आह्वान किया जाता है। संत उधौदास आश्रम के लालदास महाराज के आश्रम में बसंत पंचमी के दिन हवन,भंडारा, मां की पूजा आदि अनेक कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं। मां की पूजा से संपूर्ण कार्य पूर्ण होते हैं।
फोटो कैप्शन 05: खेतों में लहलहाते पीले पीले सरसों के फूल एवं पकती फसल को देख प्रसन्न होते किसान।






लोगों की समस्याओं से अवगत कराया मंत्री को
-समस्याओं का समाधान करने का दिया आदेश
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कनीना की आवाज।
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से कनीना के समाजसेवी एवं पार्षद दीपक चौधरी ने मुलाकात की और क्षेत्र के लोगों की विभिन्न समस्याओं को विस्तारपूर्वक अवगत कराया।
उन्होंने जनता को हो रही व्यावहारिक परेशानियों, प्रशासनिक दिक्कतों एवं स्थानीय मुद्दों को सामने रखते हुए उनके शीघ्र समाधान की मांग रखी।
मंत्री ने विभिन्न मुद्दों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का आश्वासन दिया।
यह मुलाकात जनहित से जुड़े मुद्दों को शासन तक पहुंचाने की दिशा में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम रही।
  उन्होंने बताया कि 24 जनवरी को  स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव हरियाणा सरकार कनीना खंड के कई गांवों का धन्यवाद दौरा करेंगी
फोटो कैप्शन 03: मंत्री से समस्याओं के बाबत मुलाकात करते हुए दीपक चौधरी





 जन्मदिन पर श्री कृष्ण गौशाला में दी 1.55लाख रुपए की सहयोग राशि
-गौशाला परिवार ने किया उनका अभिनंदन
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कनीना की आवाज।
कनीना की श्री कृष्णगौशाला के प्रांगण में डा.ओम प्रकाश यादव आरपीएस ग्रुप आफ शिक्षण संस्थान का 83वां जन्म दिवस मनाया गया। इसमें उसके परिवार के ने गौशाला में चारे के वास्ते 1 लाख 55000 हजार रुपए की राशि दी।
 श्रीगौशाला परिवार ने उनका हार्दिक अभिनंदन किया। इस मौके पर प्रधान भगत सिंह, बलवान सिंह आर्य, मास्टर रामप्रताप, कृष्ण कुमार, राजकुमार, रविंद्र बंसल, अशोक कुमार पूर्व प्राचार्य, होशियार सिंह सत्संगी, यश कुमार, रामानंद सिंह, सूबेदार मेजर राजेश कुमार, नवीन कुमार, सतबीर सिंह गुगनवाला, नरेश फौजी, नरेंद्र फौजी एवं समस्त गौशाला परिवार उपस्थित रहा।
 फोटो कैप्शन 02: दानदाताओं का अभिनंदन करते हुए

धनौंदा बस स्टैंड पर लगाया भंडारा
-अयोध्या में श्रीराम मंदिर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में लगा भंडारा
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कनीना की आवाज।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में धनौन्दा बस अड्डे पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह भंडारा बस अड्डा के सभी दुकानदारों व ग्रामीणों के सहयोग से सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट ने जय सिया राम के जयकारों के बीच श्री राम मंदिर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर तथा रिबन काटकर भंडारा का शुभारंभ किया।
 इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को अतरलाल ने कहा कि भगवान राम भारत की शक्ति, भक्ति और संस्कृति के प्रतीक हैं। वे मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर की स्थापना सभी भारतवासियों के लिए गौरव की बात है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष विशाल भंडारा आयोजित करने के लिए बस स्टैंड धनौन्दा के दुकानदारों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि भंडारा, सत्संग, कीर्तन, जागरण हमारी भारतीय सनातन संस्कृति का द्योतक हैं। हर साल यह धार्मिक आयोजन करने के लिए धनौन्दा बस अड्डा के सभी दुकानदार धन्यवाद के पात्र हैं। भंडारा में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साह और आस्था के साथ प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर  सैकड़ों ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04:दीप प्रज्वलित कर भंडारे का उद्घाटन करते हुए





प्राचार्य कुतरूं के कारनामे-05
-कुतरूं ने शिक्षक को मारी डांट, शिक्षक ने उल्टे मारी 100 नंबर की डांट, हालात रुआँसे बंदर जैसी
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव जहां करीब 40 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में जमे रहे। उन्होंने अपने जीवन में कई हजार विद्यार्थियों को शिक्षा दी है। उन्होंने करीब 35 विभिन्न मुख्याध्यापकों एवं प्राचार्यों के साथ काम किया और करीब 35 ही स्कूलों/कालेजों में अपनी सेवा दी है। वैसे तो डा. होशियार सिंह की कृति -मेरी शिक्षा का सफर में विस्तार से बताया जा चुका है। सेवा दौरान अनेक कष्ट और समस्याएं झेलनी कुतरूं जैसे प्राचार्यों के कारण वहन करनी पड़ी है। साफ छवि और मेहनतकश शिक्षकों की तरफ बहुत कम लोग मिलते और बोलते हैं। डा. होशियार सिंह ने सदा ही कुर्सी पर बगैर बैठे पढ़ाया और नाम कमाया है। इस अवधि में कुछ ऐसे प्राचार्य मिले जिनका नाम लेते वक्त भी फक्र होता है जबकि कुछ ऐसे प्राचार्य भी मिले जिनके  नाम लेते हुए भी ऐसा महसूस होता है जैसे किसी गंदगी में हाथ लग गया हो। इसी दौरान उनके कारनामे भी सामने लाने पड़े हैं क्योंकि एक नहीं चार-पांच कुतरूं प्राचार्य मिले हैं जिनके कारनामे एपिसोड के रूप में पेश किए जाएंगे। किंतु पूर्ण रूप से नाम सहित गाथा पढऩे के लिए मेरी भविष्य प्रकाशित होने वाली पुस्तक कुतरूं प्राचार्य के कारनामे जरूर पढऩे का कष्ट करें।
कभी-कभी कुछ प्राचार्य अपने आपको प्रधानमंत्री से कम नहीं समझते और वो स्टाफ में कलंक साबित होते हैं। समाज ऐसे प्राचार्यों को कुतरूं कहकर पुकारते हैं। ऐसे प्राचार्य सदा दुखी रहते हैं जीवन में दुख ही दुख मिलते हैं। खासकर जिन प्राचार्यों के चमचामल निकृष्ट प्रवृत्ति के होते हैं वहां स्कूल का माहौल तनावपूर्ण बन जाता है।  
 दो घटनाएं मेरे सामने घटित हुई जिनका मैं हवाला दे रहा हूं। एक बार प्राचार्य के विरुद्ध दूर दराज तक बात फैल गई कि यह प्राचार्य अच्छा नहीं है, गलत कार्यों को पनाह देता है और खुद भी गलत कार्य करता है। समाचार पत्रों में भी समाचार छप गये। शेर सिंह नामक शिक्षक जो प्रार्थना सभा से पहले हस्ताक्षर करने पहुंचा तो शेर सिंह ने प्राचार्य को ज्यों ही नमस्ते कहा तो कुतरूं प्राचार्य कुर्सी से उछला जैैसे बम फट गया हो। कुतरूं प्राचार्य ने कहा कि हो चुका नमस्ते। तुम गांव में अफवाह फैलाते हो। इतना कह कर लाल पीला हो गया। फिर तो कुतरूं प्राचार्य के अनेक चमचे इधर-उधर इक_े हो गए किंतु शेर सिंह ने कहा तेरे में कुछ दम है तो आजा मैदान में। विद्यार्थी तमाशा देखते रहे और कुतरूं प्राचार्य बोलता रहा। शेर सिंह कुतरूं प्राचार्य की धुनाई करने पर उतर आया। फिर तो ऐसी हालत बन गई कि कुतरूं प्राचार्य रोनी सूरत बनाकर बैठ गया। उच्च अधिकारियों को शिकायत की, सब फेल। उल्टे किए गए कितने ही गलत कार्यों की जांच भी हुई। आखिरकार कुट पिटकर ठीक हुआ।
 उधर दूसरा वाक्य बहुत रोचक हुआ कि शेर सिंह शिक्षक ने किसी विद्यार्थी को धमका दिया। बच्चे के अभिभावक शिक्षक से मिले और कहने लगे आप लोग इसे मत धमकाइये। किंतु लड़का बाज नहीं आ रहा था। वह शिक्षक कुतरूं प्राचार्य के पास बच्चे को ले गया और बताया कि लड़का शरारत कर रहा है, आप इसे धमकाइये। क्योंकि कुतरूं प्राचार्य को अपने पर घमंड था। इसी दौरान बच्चे के अभिभावक भी आ गए और बात इतनी बढ़ गई की कुतरूं प्राचार्य ने शेर सिंह से कहा- यू सेटअप। शेर सिंह शिक्षक कम नहीं था। उसने पूरे एक सौ नंबर की डाट मारते हुए कुतरूं प्राचार्य से कहा-यू सेटअप ब्लडी बास्टर्ड। इतना होने के बाद फिर हंगामा तो होना ही था परंतु इतना सुनकर कुतरूं प्राचार्य की हालात और चेहरा देखने लायक था। भीगी बिल्ली जैसा नजर आया। कुतरूं प्राचार्य के चमचमल ने कुतरूं प्राचार्य को समझाया कि इस शेर सिंह के विरुद्ध अधिक न बोलिए, इसका कोई भरोसा नहीं है यह कब पटकनी लगा दे। फिर तो शेर सिंह के सामने कुतरूं प्राचार्य भीगी बिल्ली बनाकर रहा। शिक्षकों में भी चर्चा फैली और कहा कि बहुत अच्छा किया। जो बाज नहीं आते उनके लिए ऐसा ही ईनाम देना चाहिए।
 इन दो वाक्य से ऐसा लगता है कि प्राचार्य कोई बड़ी चीज तो नहीं है। अपने को वह बड़ा समझे तो उचित नहीं है। काम चलाने के लिए स्कूल का काम चलाने के लिए प्राचार्य की नियुक्ति की जाती परंतु वह सर्वे सर्वा नहीं है। एक चपरासी भी आज के दिन प्राचार्य को उल्टा सीधा बोल सकता है। चपरासी भी अधिक पढ़ा लिखा हो सकता है। इसलिए बहुत से वाक्या ऐसे हुए हैं जिसमें प्राचार्य अपनी औकात भूल कर आगे बढऩे का प्रयास करते जबकि प्राचार्य को अपने स्टाफ सदस्यों से ताल मेल बैठना चाहिए। उनसे सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाकर काम लेना चाहिए तभी वह प्राचार्य है वरना वह एक कुतरूं प्राचार्य कहलाएगा जैसे उपरोक्त दो केसों में प्राचार्य नहीं कुतरूं प्राचार्य कहलाएं।
                                   चमचे
 स्टाफ को साथ लेकर चला उसने नाम कमाया, चमचों के बल पर जो चला, कुतरूं ही कहलाया। 

कितने ही घर बिगाड़े हैं, इन चमचों ने जहान में,
चमचों की शरण में जा, जूतों का हार पहनवाया।
इन चमचों के कारण पृथ्वीराज चौहान भी हारा, चमचों के कारण शक्तिशाली रावण भी गया मारा। अगर जीना है जग में तो चमचों से सावधान रहो, चमचों का साथ रहना तो कहलाए दुर्भाग्य हमारा।। चमचों से तो प्रीत बुरी है, इनकी रीत भी बुरी है, इन चमचों के साथ रहना तो, नहीं कोई जरूरी है। इन चमचों की माया को, कोई समझ नहीं पाया, चमचों के कारण बलशाली ने भी सिर झुकाया।।
चमचों की नाक में पहले डाल दो पहले नकेल,  सवार होकर उन पर फिर खेलना जगत के खेल। वरना गिरकर तुम सीधे परलोक में चले जाओगे, याद रहे चमचों ने निकलवाया कइयों का ही तेल।।
राजा को मरवाते चमचे, फौज बर्बाद करें चमचे,
आपस में कितनों को ही भिड़वा देते हैं ये चमचे।
चमचे मिलेंगे हर गली, मोहल्ले में,  सुन लो यारों,
शातिर दिमाग रखते हैं इस जहान में भी चमचे।।

कनीना बस स्टैंड पर लगाया विशाल भंडारा
-दूर दराज से आये भक्तों ने ग्रहण किया प्रसाद
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कनीना की आवाज।
श्रीराम लाल की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य पर विशाल चौथ भंडारे का आयोजन बस स्टैंड के सामने किया गया जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे। सुबह 10 बजे बाबा मोलडऩाथ आश्रम का भोग लगाकर प्रसाद वितरण का कार्य शुरू किया गया।
 विस्तृत जानकारी देते हुए बाबा मोलडऩाथ मंदिर कमेटी के प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि रामलाल के प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में यह चौथा विशाल भंडारे का व्यापारियों द्वारा आयोजन किया गया। इस तरह से भंडारे करना हमारे सनातन धर्म की परंपरा रही है। जिससे हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करके अपने आपको प्रसन्नता महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि आए दिन बस स्टैंड पर व्यापारियों द्वारा किसी ने किसी मौके पर भंडारों का आयोजन किया जाता है। इस भंडारे में भी व्यापारियों ने अपना तन मन धन से सेवा की। सभी ने इस भंडारेे की प्रशंसा करते हुए सभी के मंगल जीवन की कामना की।
फोटो कैप्शन 01: प्रसाद ग्रहण करते भक्त










कल के अंक में पढऩा न भूले, रामप्रताप की हल्दी की खेती
कल ही पढ़े-बाजार में आ गई हैं एडवांस सब्जियां

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