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Friday, January 30, 2026



 




करीरा रोड़ निर्माण कार्य होगा शुरू, पुरानी अनाज मंडी रास्ते पर नहर चौड़ीकरण भी जल्द
-क्षेत्रवासियों को मिलेंगी सुविधाएं
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र के विकास से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। करीरा रोड़ पर लंबे समय से रुका हुआ सड़क निर्माण कार्य अब जल्द शुरू होने जा रहा है, वहीं पुरानी अनाज मंडी के रास्ते में अवरोध बन रही नहर के चौड़ीकरण का कार्य भी शुरू करवाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, करीरा रोड का निर्माण कार्य पेड़ों की कटाई के लिए आवश्यक राशि जमा न होने के कारण रुका हुआ था। अब संबंधित विभाग द्वारा पेड़ काटने की राशि जमा करवा दिया गया है। दीपक चौधरी पार्षद कनीना ने बताया कि यह प्रक्रिया आरती सिंह राव के प्रयासों से पूरी करवाई गई है, जिससे अब सड़क निर्माण में कोई प्रशासनिक रुकावट नहीं रहेगी। सड़क बनने से करीरा व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
इसके साथ ही, पुरानी अनाज मंडी की ओर जाने वाले रास्ते पर बीच तक आकर बाधा उत्पन्न कर रही नहर के चौड़ीकरण का कार्य भी जल्द शुरू करवाया जाएगा। नहर संकरी होने के कारण रास्ता प्रभावित हो रहा था। चौड़ीकरण होने के बाद मार्ग खुला और सुगम हो जाएगा, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।
दीपक चौधरी ने कहा कि ये सभी विकास कार्य बहन आरती राव की जानकारी में लाकर आगे बढ़ाए जा रहे हैं और इनके शीघ्र पूर्ण होने की पूरी संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर आरती राव लगातार सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं।
फोटो: दीपक चौधरी पार्षद




स्कूल सरकारी, महिमा सबसे सुंदर, सबसे न्यारी
-दूर दराज से मोह रहा है कनीना मंडी स्कूल लोगों का मन
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कनीना की आवाज।
कनीना खंड मुख्यालय स्थित रेलवे स्टेशन के समीप स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी आज सरकारी विद्यालयों की पारंपरिक छवि को पीछे छोड़ते हुए शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श और अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है।
जो स्कूल सरकारी है, वही सबसे ज़्यादा असरकारी है जैसे सशक्त संदेश के साथ यह विद्यालय उस आम धारणा को सफलतापूर्वक तोड़ रहा है कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा संभव नहीं है।
विद्यालय में आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिलता है। प्रत्येक कक्षा कक्ष में डिजिटल बोर्ड व सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं तथा पूरा विद्यालय परिसर वाई-फाई सुविधा से सुसज्जित है। छात्राओं की भाषा दक्षता के विकास हेतु 20 अत्याधुनिक कंप्यूटरों से युक्त लैंग्वेज लैब, पृथक कंप्यूटर लैब तथा विज्ञान विषयों के लिए गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र एवं जीव विज्ञान की पूर्ण रूप से सुसज्जित प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
विद्यालय की समृद्ध पुस्तकालय विशेष आकर्षण का केंद्र है, जहां पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ सामाजिक विषयों एवं छात्राओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित पुस्तकें, चार्ट व प्रेरणादायक पोस्टर भी उपलब्ध हैं।
विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक के कुशल नेतृत्व में तकनीकी नवाचारों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय में वाई-फाई युक्त मोशन सेंसर कैमरे, सभी सीसीटीवी कैमरों का मोबाइल के माध्यम से नियंत्रण, तथा तीन टेराबाइट हार्ड डिस्क की व्यवस्था की गई है, जिससे कई महीनों तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा सकती है।
विद्यालय में आसपास के लगभग आठ गांवों की छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि पूरे कनीना कस्बे में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित छात्रों के लिए कोई अन्य सरकारी विद्यालय उपलब्ध नहीं है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से विद्यालय को को-एड (सहशिक्षा) संस्थान में परिवर्तित करने का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा गया है, ताकि अधिक से अधिक गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
उपलब्धियां---
विद्यालय का शैक्षणिक प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा है। गत दो वर्षों में कक्षा 10वीं एवं 12वीं का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। इसी अवधि में 24 छात्राओं ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में स्थान बनाया।
गत वर्ष विद्यालय की छात्रा कनिका (कला संकाय) एवं मनीषा (वाणिज्य संकाय) ने खंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया। साथ ही विद्यालय को अशोक चक्र विजेता सूबेदार सज्जन सिंह स्मृति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
विद्यालय भवन के प्राथमिक व मौलिक विंग के कुछ हिस्सों की मरम्मत नितांत आवश्यक है, जिसके लिए विभाग को एस्टीमेट व प्रस्ताव भेजा जा चुका है। स्वीकृति प्राप्त होते ही विद्यालय की ढांचागत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
निस्संदेह, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना मंडी आज बदलते शैक्षिक परिवेश में सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता, नवाचार और सफलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है ।
फोटो कैप्शन 05 व 06: सरकारी स्कूल का नजारा





पाली में आयोजित हिंदु सम्मेलन में पहुंचेंगे हजारों हिंदु
-8 फरवरी को आयोजित होगा सम्मेलन, तैयारियां जारी
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कनीना की आवाज।
संघ के शताब्दी वर्ष में होने वाले मंडल स्तरीय हिंदू सम्मेलनों की तैयारी जिला-महेंद्रगढ़ में जोरों पर चल रही है। इस कड़ी में पाली मंडल में होने वाले हिंदू सम्मेलन हेतु आज युवाओं की बैठक गांव जाट के विश्वकर्मा मंदिर और मंडोला में आयोजित की गई। कार्यक्रम के संयोजक दशरथ सिंह की अध्यक्षता में हुई। इन बैठकों में युवाओं ने संकल्प लिया कि अधिक से अधिक संख्या में वे इन कार्यक्रमों में में भाग लेंगे। सनातनी ध्वज लेकर जाट गांव के 251 युवा मंदिर से पाली बाबा जयराम दास धाम तक पैदल यात्रा करेंगे। इस टोली में 14 वर्ष से 30 वर्ष तक की युवा भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त गांव से सैकड़ों महिलाएं और पुरुष भी इस कार्यक्रम में जाएंगे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया की गांव के प्रत्येक घर में अलख जगायेंगे। सभी को सम्मेलन हेतु लेकर जाएंगे। गांव की आधी आबादी उस दिन सम्मेलन में पहुंचे।
   इन बैठकों को संबोधित करते हुए कैलाश पाली ने कहा कि सनातन  के संरक्षण में युवाओं का हमेशा योगदान रहा है। स्वामी विवेकानंद ने युवा अवस्था में भारत का डंका अमेरिका में बजा करके आए थे। स्वामी विश्व धर्म सम्मेलन में गए थे और आज मंडल हिंदू सम्मेलनों में युवाओं की भागीदारी दुनिया को दिखाएंगे कि भारत का युवा अब सनातन के प्रति जागरूक हो चुका है। उन्होंने बताया की कार्यक्रम में सन्तों का सानिध्य मिलेगा वही अयोध्या राम मन्दिर के गर्भ गृह के योजनाकार व मूर्ति कार चन्द्रेश राम लला की मूर्ति के साथ रहेंगे। इस मौके पर ग्राम टोली का गठन किया गया जिसमें प्रदीप, रवि, विशाल, उदय, विकास, गगन हिमांशु, मोहित, सागर, रवि, जतिन हेमंत, नवदीप, देवेंद्र, जतिन, विशाल, धीरज आशीष, संजीव को रखा गया। इन सभी ने संकल्प लिया कि उस दिन बड़ी संख्या में युवा महापुरुषों का रूप धारण करके पाली बाबा जयरामदास धाम पर पहुंचेंगे। महिलाओं का नेतृत्व ललिता भारद्वाज, पूजा, सुमन, कृष्णा करेंगी।
फोटो कैप्शन 03 व 04: हिंदु सम्मेलन की तैयारी करते हुए





बच्चे का जन्मदिन मनाया गौशाला में
-दिया 5100 रुपए का दान एवं ली एक गाय गोद
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कनीना की आवाज।
 वीरचक्र से सम्मानित नायक रामकुमार शहीद के प्रपौत्र एवं सूबेदार मेजर अर्जुन सिंह के पौत्र गर्वित राव का 1 वर्ष पूरा होने पर जन्मदिन श्रीकृष्ण गौशाला में पूरे परिवार एम गौशाला कार्यकारिणी की उपस्थिति मनाया गया। गर्वित राव के पिता नरेंद्र कुमार ,माता दीपक कुमारी एवं अन्य सदस्यों ने गायों को गुड़ खिलाया। इस मौके पर अर्जुन सिंह एवं उसकी धर्मपत्नी विमला देवी ने एक गाय गोद ली और 5100 का सहयोग दिया। गौशाला प्रधान भगत सिंह ने सभी का अभिनंदन किया और गर्वित राय के दीर्घायु की कामना भी की।
  इस मौके पर भगत सिंह प्रधान गौशाला ने बताया कि पिछले करीब 6 महीने से गौशाला के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। एक और जहां गायों को गोद लेने की नई परंपरा शुरू की गई थी जिसके तहत आशातीत परिणाम प्राप्त हुए हैं। 500 से भी अधिक गायें गोद ली जा चुकी हैं। वहीं गए गौशाला में घूमने फिरने के लिए भी प्रबंध किया जा रहा है। जल्द ही यह प्रबंध पूरा कर लिया जाएगा। जहां गायों के लिए सेवा भी बढ़ गई है। उनके लिए सर्दी, गर्मी, बरसात से बचाने के व्यापक प्रबंध किए हैं। वही अब गौशाला अग्रणी गौशालाओं में शामिल हो चुकी है। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में प्रतिदिन सैकड़ों लोग न  केवल गायों को देखने के लिए आते हैं अपितु गौशाला में किये जा रहे विकास कार्यों को भी देखने के लिए आते हैं। जो भी कोई गौशाला में आता है वह प्रसन्नचित लौटता है। यह कनीना गौशाला के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। अभी तक श्रीकृष्ण गौशाला में दर्जनों प्रधान रह चुके हैं किंतु यहां उल्लेखनीय है कि जब से भगत सिंह ने कार्यभार संभाला है गौशाला को चार चांद लगा दिये हैं। गौशाला का नाम आज हर व्यक्ति की जुबान पर है। जिस भी किसी से पूछा जाए वह गौशाला की बड़ाई करता मिलता है। यह न केवल कनीनावासियों के लिए अपितु भगत सिंह और गौशाला के लिए सम्मान का विषय बन गया है।
इस अवसर पर गौशाला उप प्रधान रविंद्र बंसल, अशोक पैकन, ठेकेदार ओमप्रकाश जांगिड़, प्रिंस भाविका यादव, सुनीता यादव, डा. नीरज, अमीर सिंह सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 01: जन्मदिन गौशाला में मनाते हुए



कनीना में मौसम रहा साफ,तापमान बढ़ा, सुबह से ही खिली धूप
-विगत दिनों से लगातार बदल रहा है मौसम
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कनीना की आवाज।
 कनीना में विगत दो दिनों तक बादल छाए रहने के बाद शुक्रवार को सुबह से ही धूप खिली, मौसम साफ रहा तथा सुबह सवेरे कुछ समय के लिए हल्की धुंध पड़ी। दिनभर तापमान अधिक रहने से गर्मी का एहसास हुआ।
 उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में लगातार मौसम बदल रहा है, कभी ठंड कभी पाला जमना, कभी बादल छाना, कभी वर्षा, कभी मौसम साफ रहना आदि घटनाएं लगातार घट रही हैं। जिसके चलती किसानों के माथे पर चिंता की रेखाएं बनी हुई हैं। किसान लगातार मौसम को तथा अपनी फसलों को निहार रहे हैं। किसानों का मानना है कि शायद अब मौसम साफ रहेगा और उनकी फसल वृद्धि करेगी। अभी तक गेहूं की वृद्धि नहीं हो पाई है। गेहूं की फसल बहुत छोटी है। सरसों की फसल पकान  पर जा चुकी है।
 किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह , रवि कुमार योगेश कुमार आदि का कहना है कि अब गेहूं में बढ़ोतरी होगी और जल्दी पक जाएगी। होली पर्व तक सभी फसलें पक जाती है। इस बार होली का पर्व 4 मार्च को लगेगा। ऐसे में किसान अभी तक खुश हैं और अपनी फसलों पर नजर जमाए हय हैं।
फोटो कैप्शन 02: धूप में सरसों सोने सी चमकती हुई


कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन आमंत्रित
-किसान 16 तक कर सकते हैं आनलाइन आवेदन: जिला उपायुक्त
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कनीना की आवाज।
उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से वर्ष 2025-26 में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए आरकेवीवाई स्कीम के स्मैम मद के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान देने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। किसान इसके लिए 16 फरवरी तक कृषि विभाग की वेबसाइट पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
सहायक कृषि अभियन्ता इंजीनियर दिनेश शर्मा ने बताया कि वे किसान जो मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर सीजन रबी 2024 एवं खरीफ 2025 में पंजीकृत है, वो ही उपरोक्त स्कीम में आवेदन के लिए पात्र होंगे। एक परिवार पहचान पत्र में से केवल एक किसान एक कृषि यंत्र पर ही अनुदान का लाभ ले सकता है। उन्होंने बताया कि अनुसुचित जाति, लघु एवं सीमांत, महिला किसानों को 50 प्रतिशत व अन्य किसानों को 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा। लघु एवं सीमातं श्रेणी का लाभ किसानों को उनके मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकृत जमीन के आधार पर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत विभिन्न कृषि यंत्रों बैट्री, इलेक्ट्रिक, सोलर आपरेटिड पावर वीडर, राइड आन सेल्फ प्रोपेल्ड मल्टी टूलबार, सेल्फ प्रोपेल्ड हाइक्लीयरंश बूमस्प्रेयर, हाई कैपस्टी चाफकटर लोडर के साथ 5 टन से 10 टन प्रति घंटा, 10 टन प्रति घंटा से अधिक एवं चाफ कटर मोटर आप्रेटिड), ट्रैक्टर आपरेटिड साइलेज पैकिंग मशीन / बेलर (1400-1500 केजी/आवर), बैट्री आपरेटर फर्टीलाइजर ब्राडकास्टर, ट्रैक्टर आपरेटिड फर्टीलाइजर ब्राडकास्टर, ट्रैक्टर आपरेटिड हाइड्रोलिक प्रेस स्ट्रा बैलर, सब सायलर, मल्टीकोप बैड प्लान्टर / रेज्ड बैड प्लान्टर, सेल्फ प्रोपेल्ड राईस ट्रांसप्लान्टर (4 लाईन), विनोविंग फैन, मिलेट मशीन / मिलेट मील, मेज थ्रैशर (ट्रैक्टर ऑपरेटिड)/ मैज सलैसर, न्युमैटिक प्लान्टर, ऑयल एक्सपेलर, सुगरकेन थैस कटर 75 इंच साइज, मोबाईल / काटन शेडर ( ट्रैक्टर आपरेटिड), कॉउ डंग ब्रिकेट मशीन, कॉउ डंग डीवाटरिंग मशीन, पैडी मोबाईल ड्रायर, लेजर लैंड लेवलर, रोटावेटर, ट्रैक्टर माउन्टिड पावर वीडर, आलु बोने की मशीन इत्यादि पर अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसान विभाग की वेबसाइटपर 16 फरवरी तक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि आनलाइन आवेदन के लिए किसान के नाम हरियाणा राज्य में पंजीकृत ट्रैक्टर की वैध आरसी (परिवार के किसी सदस्य के नाम जो परिवार पहचान पत्र में हो) बैंक खाता, पैनकार्ड, परिवार पहचान पत्र एवं आधार कार्ड की आवश्यकता होगी। यदि कोई किसान अनुसूचित जाति से सम्बन्ध रखता है तो उसे अनुसूचित जाती प्रमाण पत्र देना होगा, आवेदन करने वाले किसान को खेत में फसल अवशेष नहीं जलाने बारे, पिछले 3 वर्षों में उसी कृषि यंत्र पर अनुदान न लेने बारे शपथ पत्र भी देना होगा। यदि आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्यों से अधिक होती है तो उपायुक्त की अध्यक्षता में गठीत कमेटी द्वारा ड्रा/ऑफलॉट्स के माध्यम से लाभार्थियों का चयन किया जाएगा।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे समय रहते आवेदन करें व योजना का लाभ उठाएं। किसान अधिक जानकारी के लिए उक्त वैबसाइट, सहायक कृषि अभियन्ता, नारनौल या अपने सम्बन्धित खण्ड कृषि अधिकारी / कृषि विकास अधिकारी से सम्पर्क कर सकते हैं।
जिन कृषि यन्त्र निर्माताओं की मशीन / कृषि यंत्र, भारत सरकार द्वारा अधिकृत टैस्टींग सेंटरों से टैस्ट की हुई है और वो कृषि विभाग, हरियाणा की सब्सिडी स्कीमों के तहत अपनी मशीन / कृषि यंत्र देना चाहते हैं। वो कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा पंचकुला की उपरोक्त वैबसाइट पर अपना पंजीकरण करवाएं।



कुतरूं प्राचार्य के कारनामे-08
 कुतरूं सेवानिवृत्त होने जा रहे शिक्षकों से निभाता था दुश्मनी, मिला बुरा परिणाम
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी पूर्व विज्ञान शिक्षक रहे डा. होशियार सिंह यादव ने अपने पूरे जीवन काल में विभिन्न स्कूल/कालेजों में सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में करीब 40 वर्षों तक शिक्षण कार्य किया। इस दौरान अनेक प्राचार्यों के साथ  डा. होशियार सिंह से भेंट हुई। करीब 29 विभिन्न स्कूली संस्थाओं में हजारों विद्यार्थियों को पढ़ाने का मौका मिला। इस दौरान बहुत से ऐसे प्राचार्य मिले जिनको का नाम लेकर भी पवित्र गंगा जैसा आभास हुआ। ऐसा लगता है कि उनके साथ मिलना गंगा में डुबकी सम पावन है। परंतु कुछ ऐसे कुतरूं प्राचार्य मिले जिनका नाम लेते ही ऐसा लगता है किसी गंदगी को छू लिया। वे गंदे नाले के समान कीचड़ युक्त जिंदगी जी रहे हैं, जी गए हैं। उनके पास जाने से ऐसा लगता है कहीं किसी दलदल में न धंस जाए। ऐसे प्राचार्य जो किसी के पास अच्छे काम को करने में भी आनाकानी करते रहे, ऐसा लगता था जैसे उनके बाप दादा की कोई जमीन/खैरात उनके पास और वे बांट रहे हो।
   डा. होशियार सिंह यादव को भी करीब पांच ऐसे प्राचार्य मिले जिनको ग्रामीण लोग कुतरूं नाम से संबोधित करते थे। आज भी वे कुतरूं नाम से ही मशहूर हैं। ऐसे कुतरूं प्राचार्यों के कारनामे सुन सुनकर मन व्यथित होता है। सोचा कि अब इन कुतरूं प्राचार्यों के कारनामे सभी को उजागर करूं जो ब्लैकमेलिंग से लेकर के शोषण तक का भी कार्य करते रह हैें। परंतु ये भूल गए हैं कि बुरे कार्य करने वालों का परिणाम भी बुरा होता है। होशियार सिंह ने सेवाकाल दौरान देखा है कि कुछ ऐसे लोग भी मिले जो महिलाओं का शोषण करते थे और परिणाम यह निकला उनकी खुद की महिला वर्षों तक डेथ बेड पर पड़ी देखी गई। कुछ ऐसे लोग भी देखें जो किसी का शुभ कार्य करने में भी कलम तक नहीं टिकाते थे और उनको कारावास तक जाना पड़ा। इस दुनिया में ऐसे भी कुतरूं प्राचार्य देखे जो दिन रात ब्लैकमेलिंग का कार्य कर रहे हैं फिर भी लोग उनको पूजते क्योंकि अच्छे व्यक्तियों के साथ बहुत कम लोग खड़े मिलते हैं। अब कई कुतरूं प्राचार्य डा. होशियार सिंह यादव के विरुद्ध षडय़ंत्र तक रच सकते हैं किंतु डाक्टर होशियार सिंह तैयार है क्योंकि न केवल शिक्षा प्राप्त करने में और कलम चलाने में ही अग्रणी रहे हैं अपितु लठेत भी है। डा. होशियार सिंह के पिता जयनाराण एवं ताऊ अुर्जन सिंह जाने माने/मशहूर लठेत रहे हैं। इसलिए लाठी तक भी चलाना डा. यादव जानता है। डा. होशियार सिंह  चाहते हैं कि एक बार जंगल में किसी ऐसे कुतरूं प्राचार्य के साथ मुकाबला हो जाए तो कुतयं एक मिनट से अधिक सामना नहीं कर पाएंगा। उनको ऐसे धराशाई किया जाएगा जैसे राक्षसों एवं दुष्टों का अंत  अंत अर्जुन और श्री कृष्ण ने पलभर में किया था। उनको ककड़ी सम तोड़ दिया जाएगा। ऐसे कुतरूं प्राचार्य के कारनामों को उजागर करने वाली किस्त 8 को पढ़ें---
  कुतरूं प्राचार्य सेवानिवृत्त होने जा रहे शिक्षकों से दुश्मनी पूरे जोश के साथ निभाता आया है या निभा चुका है। दो-तीन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति के समय कुतरूं प्राचार्य ने ऐसे हालात बनाएं कि सुनकर दर्द होता है। इस देश में नौकरी मिलना कई बार बहुत कठिन होता और नौकरी मिल भी जाए तो उसकी सेवानिवृत्ति निश्चित होती है। जो मेहनत के जज्बे से पूरी कर गये उनके साथ सभी को खड़ा रहना चाहिए लेकिन सेवानिवृत्ति के समय एक कुतरूं प्राचार्य तो छुट्टी ले भगे चूंकि उन्हें डर था कि कहीं सेवानिवृत्ति के दिन सेवानिवृत्ति पाने वाले शिक्षक को कहीं अपने हाथों से पगड़ी या फूलमाला न पहनानी पड़ जाए क्योंकि वह इस शिक्षक से बहुत ही डरता था, खौफ खाता था और वह नहीं चाहता था कि शिक्षक की सेवानिवृत्ति के दौरान स्वयं रहे। इसलिए पिछले और अगले कुछ दिनों में न तो कभी उन्होंने छुट्टी ली थी किंतु सेवानिवृत्ति के दिन ही छुट्टी ली। इससे साफ जाहिर हुआ कि उसकी मंशा अच्छी नहीं थी।
  सारे स्टाफ में बात फैल गई की कुतरूं प्राचार्य जानबूझकर छुट्टी ले गया परंतु स्टाफ और शिक्षक के साथी/दोस्त सदा साथ रहे, इसलिए शेर सिंह के साथ खड़े मिले। उनके साथी शेर सिंह शिक्षक जो सेवानिवृत्त हो रहा था उसके साथ खड़े मिले। शेर सिंह ने प्रशंसा भी की है कि स्टाफ बेहतर मिला किंतु कुतरूं प्राचार्य के न आने पर लोगों ने यही कहा कि इससे घटिया बात और कोई जीवन में नहीं हो सकती। शिक्षक कैसा भी रहा हो सेवानिवृत्ति और मृत्यु दो वक्त ऐसे होते हैं जब उनकी प्रशंसा अनिवार्य रूप से करनी पड़ती है। प्रशंसा भी नहीं की जाए तो कम से कम हाजिर रहने में कोई बुराई नहीं। शेर सिंह शिक्षक तो जाने माने शिक्षक रहे हैं जिन पर कोई उंगली उठाता है तो उसका दुश्मन हो सकता है बाकी कोई नहीं। आज भी हजारों हजार विद्यार्थी उन्हें याद करते हैं। शेर सिंह को मान सम्मान के साथ विदा किया जिससे कुतरूं की सारी योजनाएं फेल हो गई। जब कुतरूं प्राचार्य ने देखा कि उसकी खुद की सेवानिवृत्ति का समय आ गया है तो स्कूल के एक ऐसे गुट से जा मिला जो हमेशा कुतरूं प्राचार्य का विरोध कर रहा है/रहा था। ताकि प्राचार्य की सेवानिवृत्ति हो तो खूब मान सम्मान मिले। कभी शेर सिंह जैसा उसके साथ भी हाल ना हो जाए और हुआ भी वैसा ही। क्योंकि पूरे स्टाफ ने पहले से ही सोच रखा था कि जो दूसरों के साथ बुरी बीताता है उसके साथ भी बुरा बिताना चाहिए। हुआ यूं कि जिस दिन कुतरूं प्राचार्य सेवानिवृत्त होने थे, स्टाफ एक-एक करके दूर चला गया और कहा कि इन्होंने तो बहुत हमें दर्द दिया है। इसने तो शेर सिंह और दूसरे शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में आने तक का भी साहस  नहीं किया ऐसे में एक मायूस, भीगी बिल्ली जैसा मुंह करके वह निकृष्ट और कुतरूं प्राचार्य बैठ गया और कोई सम्मान नहीं दिया गया। आज तक स्टाफ उस दिन को याद करता है और कहता है कि इन्होंने शेर सिंह का साथ नहीं दिया इसलिए हम इसका साथ क्यों दे। सबसे बड़ी खुशी की बात थी कि जो स्टाफ को कुतरूं प्राचार्य के साथ था वह भी उस दिन विरोध में खड़ा देखा गया। कुतरूं ऐसे गया जैसे शेर सिंह एवं धनीराम गये थे।
   एक और उदाहरण सामने आया कि कुतरूं प्राचार्य की धनीराम शिक्षक से कभी नहीं बनी क्योंकि धनीराम ने एक दिन सरेआम कुतरूं प्राचार्य को गाली गलौज करनी पड़ी। चूंकि कुतरूं  प्राचार्य ने उसे एक दिन गाली गलौज किया था। बदले में तंग आकर धनीराम ने भी गाली गलौच करने के लिए बाध्य होना पड़ा था। परिणाम यह निकला कि धनीराम के सेवानिवृत्ति के दिन सारे स्टाफ को कुतरूं  प्राचार्य ने बहका दिया कि इसका सेवानिवृत्ति समारोह नहीं करेंगे। इसे बुरे तरीके से स्कूल से निकलेंगे। यह ऐसे जाएगा जैसे आम दिनों की तरह स्कूल की छुट्टी होने पर जाता है। परंतु धनीराम भी बहुत दिल के धनी थे। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उसने कहा कि जो बुरा करेगा उसका भी बुरा होगा। आखिर सेवानिवृत्ति का धनीराम का दिन आ पहुंचा। उस दिन छुट्टी होने तक न तो स्टाफ को धनीराम की विदाई का कार्यक्रम करने दिया और न ही खुद किया। हां थोड़े बहुत शिक्षकों ने दबे मन से उनका विदाई समारोह एक कमरे में बैठकर जरूर कार्य किया। और दुख व्यक्त किया कि ऐसी कुतरूं प्राचार्य का अंत भी बुरा होगा। आखिर कुछ लोग धनीराम के अपने गांव के थे वो पहुंचे और धनीराम को सेवानिवृत्ति के दिन अपने स्तर पर मान सम्मान से के साथ ले जाने का निर्णय किया। गाड़ी एवं डीजे लेकर आए कुतरूं प्राचार्य की एक चाल भी नहीं चली क्योंकि कुतरूं के चमचाराम ने कुतरूं को एक सलाह दी कि धनीराम को स्कूल के बाहर से विदा किया जाए। स्कूल के अंदर से नहीं? यही नहीं धनीराम को पगड़ी भी नहीं पहनाने दी। केवल उसके साथ धनीराम के धनवान व्यक्ति आए थे उन्होंने उसे मुख्य दरवाजे पर पगड़ी पहनाकर, गाड़ी में बिठाया और बड़े ही अदब से घर ले गए। कुतरूं प्राचार्य का मुंह एक रुआंसे बंदर जैसा नजर आया।
 अब बारी आ गई कुतरूं प्राचार्य के सेवानिवृत्ति की। जब कुतरूं ने देखा कि अब तो बहुत बुरा कर लिया, लोग गाली दे रहे हैं तो उसने धनीराम और शेर सिंह के साथी रहे शिक्षक पर डोरे डालना शुरू किया। उसे अपनी तरफ करने के प्रयास में कई बार उसे मंच से सम्मानित किया। बहाना बनाया कि अच्छा शिक्षक है, बेहतरीन ढंग से पढ़ाता है। रामू शिक्षक ने खुद आश्चर्य व्यक्त किया कि उन्होंने न तो ऐसा कोई महान कार्य किया जिससे लोग आकर्षित हो फिर अचानक कुतरूं प्राचार्य क्यों चाहने लग गया लेकिन हमारे काबिल शास्त्री दोस्त बताते हैं कि अचानक किसी के प्रति अति लगाव कोई करता है तो उसके पीछे बुरी मंशा होती है, अच्छी मंशा नहीं। ऐसा एक कुतरूं प्राचार्य जब मरा तो उसके पूरे जीवन काल के स्टाफ सदस्यों में से दो सदस्य भी खड़े नहीं नजर आए। बल्कि लोग यह कहते रहे कि बहुत अच्छा हुआ ऐसा राक्षस धरा से चला गया। लोगों ने कहा कि इसके कारनामे गंदे रहे हैं। इसलिए कहा है-
बुरा करने वाले का खुद बुरा हो जाएगा,
दूसरों का हित करें वो जन आशीष पाएगा।
परहित का काम करें, जग में नाम कमाएगा,  
अहित करें जन का, कुत्ते सम










मारा जाएगा।।

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