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Friday, January 23, 2026



 



मंत्री ने बार एसोसिएशन कनीना को 10 लाख रुपए दियाअर्थिक सहयोग
  -बार एसोसिएशन ने जताया मंत्री का आभार
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कनीना की आवाज।
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बार एसोसिएशन कनीना को अर्थिक सहयोग राशि के रूप में 10 लाख रुपए अपने कोटे से उपलब्ध करवाये।
  पूर्व प्रधान दीपक चौधरी ने बताया कि हरियाणा की कैबिनेट मंत्री आरती सिंह राव ने महेन्द्रगढ बार एसोसिएशन में अधिवक्ता संघ के कार्यक्रम में शिरकत की ओर अधिवक्ता साथियों से रूबरू हुई। इस अवसर पर उन्होंने अधिवक्ता साथियों के द्वारा अर्थिक सहयोग राशि की मांग की और स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने उनकी मांगों को मानते हुए 10 लाख महेन्द्रगढ़ बार एसोसिएशन को और 10 लाख रुपए कनीना बार एसोसिएशन को सहयोग राशि दी। कनीना बार एसोसिएशन के प्रधान मंजीत यादव ने बताया मंत्री जब कनीना बार एसोसिएशन में कार्यक्रम के दौरान घोषणा करके गई थी कि कनीना बार एसोसिएशन को सहयोग राशि जल्द ही दी जाएगी आज उन्होंने ये वादा पूरा किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान सुनील रामबास भी मौजूद रहे।
 फोटो कैप्शन 07: मंत्री आरती सिंह राव का आभार जताते बार एसोसिएशन




यादें नई पुरानी-
ऐसे हुई थी कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला की स्थापना
-मानका की बणी में गाय इकट्ठी करने की थी योजना
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कनीना की आवाज।
 हर किसी नए काम के लिए पहले विचारधारा पैदा होती है विशेषकर लोगों के दिलों दिमाग में उत्पन्न होती है जो बाद में अमली रूप दिया जाता है।
 कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला जनवरी 2003 में स्थापित हुई थी किंतु विचारधार दिसंबर 2002 में उत्पन्न हुई थी। वर्ष 2002 सर्दियों के दिनों में गौशाला स्थापना करने के विचारधारा कनीना के बहुत से लोगों के विशेषकर किसानों के दिमाग की उपज रही है। हुआ यू कि 2002 में सर्दियों के महीने में सुभाष, अजीत- पप्पू, रामावतार दीनदयाल, लाजपत, सूबे सिंह ,राजेंद्र सिंह आदि सभी किसान कनीना-गाहड़ा रोड़ नहर के पुल पर रातभर आग जला कर बैठे रहते ताकि गायों से खेतों की सुरक्षा की जा सके। एक ही जगह नहीं कभी कभी नहर पर तो कभी किसी रास्ते पर आग जलाकर फसल सुरक्षा करते थे। वो बताते हैं कि 100 से 200 गाए एक साथ चलती थी और जिस भी खेत में घुस जाती उसे तबाह कर देती थी। रात भर ठंड में किसानों द्वारा आग जला कर बैठे रहने से परेशानी होना स्वाभाविक होता है।
इस संबंध में राजेंद्र किसान बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले सभी के समक्ष सुझाव रखा कि क्यों न हम इन गायों को एक जगह इकट्ठा कर दें और उनके लिए चारे का प्रबंध भी कर दे। इस संबंध में करीब सभी किसानों ने किसी ने 100 रुपए किसी 200 रुपए इस काम के वास्ते जमा किए और करीब 4000 रुपए राशि इकट्ठी कर ली जो बाद में वापस भी कर दी गई। साथ में मानका वाली बणी में गायों को इकट्ठा करने की प्लान बन गई थी। क्योंकि कुछ किसान गायों को बेदर्दी से पीटते थे ,यह भी कुछ किसानों को सहन नहीं हो रहा था। यही कारण है की मानका वाली बणी में गायों को इकट्ठा करने की योजना बनी। जिसमें सूबे सिंह किसान बताते हैं कि उनके पास उस समय तूड़ी का का एक कूप था। उन्होंने कहा कि चाहे मेरे पशु बगैर तूड़ी के रहे लेकिन मैं यह सारी तूड़ी गायों के लिए दान दूंगा। बहुत से किसान आगे आए उन्होंने कहा हम भी गायों के लिए तूड़ी एवं चारा प्रबंध करेंगे और यही कारण है कि सारी योजना आगे बढऩे लगी। किंतु उसे समय सतवीर सिंह बोहरा जो बाद में श्रीकृष्ण गौशाला के प्रथम प्रधान रहे हैं, उनके पास ये किसान जाकर मिले। उन्होंने भी कहा कि क्यों नहीं इस योजना को सिरे चढ़ाया जाए। यह योजना अच्छी लगी।  तत्पश्चात मास्टर दिलीप सिंह पूर्व प्रधान से मिले। उन्होंने भी बात को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि चलो इस संबंध में बीडीपीओ कनीना से मिलते हैं। ऐसा करते करते यह फैसला लिया गया कि कनीना में एक गौशाला की स्थापना की जाए। इसके प्रथम प्रधान सतवीर सिंह बोहरा को बनाया गया था लेकिन यह गौशाला डीएवी के पास बड़ी बणी में स्थापित करने की प्लान बन गई। और धीरे-धीरे सभी की राय एवं सहमति से जनवरी 2003 में कनीना की गौशाला स्थापित कर दी गई। अनेक प्रधान बने जिन्होंने गौशाला को आगे बढ़ाया किंतु वर्तमान में भगत सिंह ने गौशाला के विकास में चार चांद लगा दिए हैं। यही कारण है कि आज की जो गौशाला है उसके असली दिमागी तौर पर जन्मदाता सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह और अन्य किसान रहे हैं। आज भी उन दिनों को तथा योजना को याद कर ये लोग प्रसन्नचित हो जाते हैं।
 फोटो कैप्शन: राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह और सत्यवीर सिंह बोहरा





स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने किए लगभग 16 करोड़ के शिलान्यास व उद्घाटन
-सरकार सबका साथ, सबका विकास को प्रतिबद्ध - आरती सिंह राव
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कनीना की आवाज।
 हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार ढांचागत विकास करवा रही है। ये सरकार सबका साथ सबका विकास की सोच को लेकर चलने वाली सरकार है। स्वास्थ्य मंत्री आज अटेली हलके के गांवों में धन्यवाद कार्यक्रम के तहत विभिन्न विकास कार्यों के उद्घाटन व शिलान्यास के मौके पर विभिन्न गांवों में जनसभाओं में संबोधित कर रही थीं। इस मौके पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के उपलक्ष में नागरिकों को बधाई दी।
इस दौरान उन्होंने लगभग सभी 16 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने नगरपालिका अटेली मंडी के नये भवन के
स्वागत द्वार एवं रास्ते के निर्माण कार्य, अटेली मंडी के अंबेडकर भवन के निर्माण कार्य, अटेली मंडी के पार्क निर्माण
कार्य, उप स्वास्थ्य केंद्र गांव अटेली का शिलान्यास किया।
इसके अलावा उन्होंने गांव गणियार से अटेली तक इंटरलाकिंग पेवर ब्लॉक्स से निर्मित रास्ते व अमृत सरोवर, नई अनाज मंडी में अटल किसान मजदूर कैंटीन , गणियार से बोचडिया संपर्क सड़क,
हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड दौंगड़ा अहीर से बवानियां सम्पर्क सड़क,
दौंगड़ा अहीर से नानगवास सम्पर्क सड़क, मनरेगा स्कीम के तहत नवनिर्मित अटल सेवा केंद्र दौंगड़ा अहीर का उद्घाटन किया। वही दौंगड़ा जाट से मुण्डिया खेड़ा सम्पर्क सड़क, मोहम्मदपुर से गढ़ी रूथल तक इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक्स से निर्मित रास्ते तथा
मोहनपुर से अटाली सम्पर्क सड़क का उद्घाटन गया।
इस अवसर पर जिला नगर आयुक्त रणवीर सिंह, बीजेपी के जिला अध्यक्ष डा. यतेंद्र राव, मुख्य चिकित्सक अधिकारी डा. अशोक कुमार, जिला आयुर्वेद अधिकारी डा. शशिबाला, एसएमओ डॉ. विजय, ब्लॉक समिति चेयरमैन जयप्रकाश, पूर्व जिला अध्यक्ष दयाराम यादव, पूर्व जिला अध्यक्ष अजीत कलवाड़ी, ब्लाक समिति कनीना जयप्रकाश, चेयरमैन मार्केट कमेटी दिनेश, मंडल अध्यक्ष मुकेश कुमार, मण्डल अध्यक्ष हरपाल, दौंगड़ा अहीर की सरपंच सुनिता देवी, दौंगड़ा जाट का सरपंच मुकेश कुमार , सरपंच मोहम्मदपुर हरि सिंह, सरपंच अटेली देवेंद्र सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
फोटो-विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन व शिलान्यास करती स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव।



अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस-24 जनवरी
इंसान की शिक्षा के कारण होती है पूजा-कंवरसेन
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कनीना की आवाज।
2018 से अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस  मनाया जा रहा है। शिक्षा दिवस मनाने का उद्देश्य शिक्षकों को अपनी  जिम्मेदारी और अहमियत के प्रति जागरूक करना है। उनकी मेहनत के लिए उन्हें सम्मानित करने के लिए विश्व शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है। जिस प्रकार शिक्षा हमारे जीवन को स्वर देती है उसी प्रकार शिक्षक, शिष्य के जीवन को स्वर देता है। सदा ही शिक्षकों का आदर रहा है और रहेगा। विश्व शिक्षा दिवस की पूर्व संध्या पर कुछ सम्मानित शिक्षकों से बात हुई
** शिक्षा वहीं जो इंसान को संस्कारवान बनाये। हमारे प्रथम गुरु माता-पिता ही होते हैं जो इस दुनिया में लाते हैं। माता-पिता की छांव में बच्चे सीखते हैं, संस्कार ग्रहण करते हैं। बच्चा जब बड़ा होता है तो उसका सामना समाज जीवन की वास्तविकता से होता है। तब शिक्षक अपने ज्ञान और मार्गदर्शन के रूप में आगे बढ़ाने में सही राह दिखाता है। इसकी मेहनत पर एवं शिक्षा के बल पर शिष्य अपनी ऊंचाइयों की और अग्रसर होता है।  शिक्षक को शिष्य कभी नहीं भुला सकता। शिक्षक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहा है और देखा जाता रहेगा। शिक्षक ही है जो हर विद्यार्थी में गुण भर देता है जिसके बल पर विद्यार्थी ऊंचाइयों को छू जाता है। शिक्षा के बल पर ही इंसान नाम कमाता है। समस्त विश्व में जिस भी युग में बदलाव आये वो शिक्षकों की भागीदारी का गवाह है। सह सब शिक्षा के कारण संभव हो पाया। गुरू वशिष्ठ , विश्वामित्र, द्रोणाचार्य, संदीपनी सबने अपने साथ शिष्यों को लेकर बदलाव व मूल्यों की स्थापना की। चाणक्य, माक्र्स, अरस्तु, ने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक सभी क्षेत्रों में नये आयाम दिए तथा मानव जीवन को सुंदर बनाने का प्रयास किया। चिकित्सा, विज्ञान , खगोल जैसे विषयों पर आज भी विश्व के वैज्ञानिक जो रिसर्च कर रहे हैं वह भी ऋषि मुनियों ने संसार को दी हैं। शिक्षकों के द्वारा ही विद्यार्थी आगे के जीवन को सार्थक बनाता है । आज के युग में शिक्षक की महता ओर अधिक है क्योंकि ये आर्थिक स्पर्धा का युग है और इसमें विद्यार्थी सही मूल्यों को अपनाकर मानव कल्याण की भावना के साथ विश्व के विकास में योगदान दे सके। शिक्षा ने इस दिशा में सबसे अहं भूमिका निभाई है।
---कंवरसेन वशिष्ठ, पूर्व शिक्षक
शिक्षा से परिपूर्ण शिक्षक अपने आप में बड़ा ही गौरवशाली एवं प्रतिष्ठित पद है। शिक्षक को राष्ट्र का निर्माता कहा गया है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है।  चाणक्य ने शिक्षक को परिभाषित करते हुए कहा है कि एक विद्यार्थी के सम्पूर्ण जीवन का निर्माण और प्रलय उसकी गोद में पलते हैं। दुनिया में शिक्षक ही गौरवमयी पद है जो हमेशा अपने विद्यार्थी को अपने से ऊपर देखना चाहता है। चिंतनशील विचारधारा और महान् व्यक्तित्व तो वास्तव में शिक्षक ही होता है जो अपने आदर्शवादी विचारों से विद्यार्थी और समाज की दिशा और दशा बदलने में कारगर सिद्ध हो सकता है। आधुनिक युग में भी शिक्षक का बहुत बड़ा सम्मान है।
    *** देशराज कोटिया, शिक्षाविद
फोटो कैप्शन  कंवरसेन वशिष्ठ एवं दशराज कोटिया




राष्ट्रीय बालिका दिवस -24 जनवरी
-आज के दिन लड़के लड़कियों में भेदभाव कम-नरेश
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कनीना की आवाज।
 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है। बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाती है। आज के दिन बालिकाओं के अधिकारों, लैंगिक समानता जैसे विषयों के प्रति लोगों को जागरूक करके मुहिम चलाई जाती है। आज के दिन बालिकाएं किसी प्रकार किसी से काम नहीं है चाहे धरती या समुद्र की गहराई का मसला हो या चांद पर पहुंचने का मसला हो। हर जगह बालिकाओं का बहुत बड़ा योगदान होता है। एक वक्त था जब लड़कियों को कम चाहते थे और लड़के को अधिक चाहते थे किंतु आज के दिन लड़के और लड़कियों को बराबर समझा जाता है। प्रदेश सरकार ने जैसे मुहिम बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा दिया और मुहिम चलाई तब से बालिकाओं का नाम अग्रणी है। क्षेत्र में विभिन्न बच्चियों नाम कमा रही है, इस बात को इंगित करता है लड़कियां आज हर क्षेत्र में आसमान छू रही है। इस संबंध में लोगों से प्रबुद्ध जनों से चर्चा की गई जिनके विचार निम्न हैं-
**विभिन्न स्कूलों में जहां लड़कियों के लोगों लगे हुए हैं। बेटी बचाओ बेटी बचाओ तथा बच्चियों के साथ होने वाले किसी प्रकार की अन्य को रोकने के लिए सरकार कटिबद्ध है। विभिन्न स्कूलों में जहां बालिका मंच कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनके जरिए स्कूली बच्चियों को जागरूक किया जाता है। बाल श्रमिक रोकने भ्रूण हत्या रोकने, समाज की विकृत मानसिकता को रोकने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा कानूनी जागरूकता कार्यक्रम लगाए जाते हैं। लड़कियों के लिए दहेज प्रथा, बाल विवाह पर पूर्ण रोक लगाई हुई है बच्चियों का हर प्रकार से आगे लाने का प्रयास किया जा रहा है।          
बेटियां हर घर की शान होती हैं, बेटियां ईश्वर का वरदान होती हैं। बेटियां सबके नसीब में कहां होती हैं, भगवान को जो घर पसंद हो वहां होती हैं। आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं है। बात चाहे चंद्रयान-3 की स्वर्णिम सफलता की हो या सिविल सर्विस की परीक्षा में टापर आने की ,ओलंपिक में मैडल लाने की बात हो या फिर सरहदों पर पहरा देने की व फाइटर प्लेन उड़ाने की। बेटियां आज हर क्षेत्र में बेटों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम बेटियों के प्रति अपनी सोच बदलें तथा उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा देने की पहल करें उनके जन्म पर उत्सव मनाए तथा उनकी कल्पना की उड़ान को मूर्त रूप देने में उनकी मदद करें। ये निश्चित ही एक दिन आकाश छू लेंगी तथा माता-पिता व देश का नाम रोशन करेंगी।
     ----नरेश कुमार शिक्षाविद
बालिका शिक्षा के बढ़ावे से ही समाज का विकास संभव है। सामाजिक संस्थाओं को आगे आकर बालिका सशक्तिकरण, बालिका जागृति, बालिका स्वावलंबन, बाल विवाह, दहेज प्रथा के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। बालिकाओं को शिक्षा के साथ-साथ आत्म रक्षा स्वावलंबन भी बनने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। राज्य में लिंगानुपात पिछले वर्षों में लगातार सुधार हुआ है वहीं बाल विवाह में भी कमी आई है। प्रदेश की बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर नित नये कीर्तिमान रच रही है। हमें बेटियों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की आवश्यकता हैं। अगर हमारी बालिकाएं स्वस्थ और सशक्त होगी तो आने वाला देश का कल भी सशक्त होगा। बालिकाओं के विकास के लिए व उनके लिए सहयोगी वातावरण बनाने के लिए और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए अनेक प्रयासों की आवश्यकता है और इसके लिए हमें प्रतिबद्ध भी रहना चाहिए। बालिकाओं का घटता लिंगानुपात भी चिंता का विषय है। माता-पिता को बेटे बेटी में फर्क नहीं समझना चाहिए। सरकार की योजनाएं भी बालिका के जन्म को बढ़ावा देने उनके विकास के लिए प्रेरणादायक हो सकती हैं।
               नेम सिंह
फोटो कैप्शन: नेम सिंह एवं नरेश कुमार


नेताजी मेमोरियल क्लब के ओपन फुटबाल प्रतियोगिता का किया शुभारंभ
-26 जनवरी तक चलेंगे खेल
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कनीना की आवाज।
संत मोलडऩाथ आश्रम के महंत रामनिवास ने रिबन काटकर खेलों का ओपनिंग की। संत मोलडऩाथ मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव में जानकारी देते हुए बताया कि नेताजी सुभाष क्लब की ओर से यह खेलों की आयोजन किया जा रहा है जिसमें नवीन कुमार व उनकी पूरी टीम एवं अनेक कार्यकर्ताओं ने इन खेलों का आयोजन किया है। दूर-दूर से टीम में पहुंच रही है जिसमें नाइजीरिया से भी टीम अपना प्रदर्शन करने के लिए पहुंचे हैं। करीब 15 टीम में अभी तक आ चुकी हैं और कुछ और आने की उम्मीदें हैं।  उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि यह नेताजी सुभाष चंद्र की याद में खेलों का आयोजन किया जा रहा है इसमें युवाओं को अपने खेल भावना वह अपने अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की है।
इन खेलों के आयोजन में सद्भावना और भाईचारे को बनाए रखना जरूरी है। दिनेश यादव ने उनकी इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि मुख्य अतिथि से मात्र एक रुपये लेकर यह ओपनिंग करवाई और जैसा कि सनातन धर्म में हमारी परंपरा है मेहमान को सम्मान देकर विदा किया जाता है। उधर 1100 रुपए की राशि व वस्त्र भेंट कर महंत रामनिवास का सम्मान किया। इसके लिए महंत रामनिवास ने पूरी युवा क्लब व नवीन यादव का दिल से धन्यवाद किया और आशीर्वाद दिया कि वह जीवन में उन्नति करें।
फोटो कैप्शन 03: खेलों का शुभारंभ करते महंत रामनिवास




कृष्ण कुमार ने ली चार गाये गोद और 21000 रुपए दिया दान
-गायों को गोद लेने से दूर होते हैं पाप और संताप-भगत सिंह
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कनीना की आवाज।
 श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में कृष्ण कुमार दुकानदार वार्ड नंबर 1 पुत्र जयनारायण ने चार गाये गोद लेकर 21000 रुपए का नकद दान दिया है।
 इस मौके पर भगत सिंह प्रधान गौशाला ने कहा कि गायों को दान पुण्य जरूर करते रहना चाहिए। किसी भी अवसर पर गौशाला में आकर चारा चराने, सवामणि लगाने,गुड़ आदि खिलाने, गाय गोद लेने या अन्य किसी प्रकार की गायों की सेवा के लिए जरूर पहुंचना चाहिए। गायों की सेवा  से पाप और संताप सभी नष्ट हो जाते हैं। गायों की सेवा सर्वोत्तम सेवा मानी गई है। गाय को माता का दर्जा दिया गया इसलिए गायों की सेवा जरूर घर पर या गौशाला में करनी चाहिए। जिनके पास घर पर गाये हैं वो घर पर उनकी सेवा करें और अगर गाय नहीं है तो गौशाला में आकर सेवा कर सकते हैं।
  उन्होंने बताया कि गौशाला को आधुनिकतम बनाया गया है। कनीना वासी और आसपास के लोगों का फर्ज बनता है कि आकर के गौशाला में गायों के दर्शन करें।
इस मौके पर एडवोकेट धर्मवीर फौजी, राजकुमार यादव राज, सूबेदार मेजर राजेश कुमार, मास्टर रामप्रताप, बाबूजी दिलावर सिंह,  सतबीर गुगनवाला, सचिव यशपाल यादव, सह सचिव राम पाल सिंह यादव, योगेश कुमार उर्फ भीम आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 4: गाये गोद लेते हुए कृष्ण कुमार दुकानदार




डा. होशियार सिंह यादव कनीना का नाम विश्व रिकार्ड बुक में
- 25 जनवरी जयपुर में मिलेगा अवार्ड
-कई विश्व रिकार्ड बुकों में हो चुका है नाम दर्ज
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कनीना की आवाज।
  कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव पूर्व शिक्षक, साहित्यकार ,लेखक का नाम एक बार फिर से विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो चुका है। 25 जनवरी 2026 को जयपुर में उन्हें विभूषित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विदेशों तक विश्व बुक रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है। इसी कड़ी में इनफ्लुएंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज किया जा चुका है। यह अवार्ड राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जयपुर में दिया जाएगा। विगत करीब 40 सालों से साइकिल चलाते आ रहे हैं और लगभग हर काम साइकिल पर चलकर करते हैं। वे ताउम्र साइकिल चलाना चाहते हैं। वे प्रतिदिन 50 से 60 किमी तक साइकिल चला लेते हैं।
 अब तक हजारों की संख्या में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त, डा. होशियार सिंह यादव के 3 शोध प्रकाशित तथा तीन बार राज्यपाल से, राज्य शिक्षक पुरस्कार तथा अनेकों अवार्डोंं से सम्मानित डाक्टर यादव लंबे समय से साइकिल चला रहे हैं। करीब 40 सालों से साइकिल चला रहे और ताउम्र चलने का संकल्प ले रखा है। यही नहीं कावड़ यात्रा, खाटू श्याम पदयात्रा ,जैतपुर पदयात्रा तथा अन्य किसी धाम की यात्रा पर पैदल जाकर नाम कमा चुके हैं। यही कारण है कि उनका नाम एक बार फिर से विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो चुका है।
कई विश्व रिकार्ड धारक हैं-
कुर्सी प्रयोग किये बगैर 40 वर्षों तक सदा खड़े रहकर पढ़ाने के कारण डा. होशियार सिंह, कनीना का इंडियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम पहले ही दर्ज हो चुका था और इंफ्लुअंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है।
 इससे पहले उन्होंने लंदन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करवाया था। यही नहीं इंटरनेशनल बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड, इंडियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है वहीं आईकानिक अवार्ड भी मिल चुका है। साथ में ओरिएंट बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। इसके अलावा चैंपियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। यही नहीं कई विश्व रिकार्ड बुकों में भी उनका नाम दर्ज हो चुका हैं। उनका नाम विश्व रिकार्ड बुक में दर्ज हो जाने
फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह यादव




 बाबा मोलडऩाथ मंदिर निर्माण में नेम सिंह लखेरा ने दिये 1.05 लाख
--शिक्षक बतौर देते आए हैं बच्चों को मौजा मुफ्त
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कनीना की आवाज।
बाबा मोलडऩाथ मंदिर निर्माण के लिए मास्टर नेम सिंह लखेरा ने किया 1.05 लाख का सहयोग किया।  बाबा मोलडऩाथ मंदिर में मास्टर नेम सिंह लखेरा परिवार सहित पहुंचे और उन्होंने अपने परिवार को साथ लेकर यह राशि मंदिर निर्माण के लिए अर्पित की।
 मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव ने कहा कि मास्टर नेम सिंह लखेरा बहुत ही धार्मिक व्यक्तित्व के धनी हैं। वे धार्मिक कार्यों में हमेशा अग्रणी रहते हैं। बाबा मोलडऩाथ सत्संग मंडल में भी यह रात भर जाकर लोगों को अपने भजनों से मंत्र मुग्ध करते हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए अपनी नेक कमाई में देकर एक नई ऊर्जा प्रदान की है। मंदिर कमेटी ने मास्टर नेम सिंह को स्मृति चिन्ह देखकर सम्मानित किया और कहां की यह समाज के लिए एक प्रेरणा है।
 मंदिर कमेटी प्रधान दिनेश यादव ने कहा कि अंधेरे में अपनी छाया भी साथ नहीं देती बुढ़ापे में काया भी साथ नहीं देती, सारा जीवन दाव पर लगा देते हैं जिसके लिए अंत में वह माया भी साथ नहीं देती। इसलिए इंसान को हमेशा धर्म और दान दक्षिणा करते रहना चाहिए। उल्लेखनीय है कि नेम सिंह जब स्कूली शिक्षक थे तब भी बच्चों को मौजे प्रदान करते थे।
इस मौके पर बाबा रामनिवास, संजय यादव, मुकेश शर्मा, बलबीर साहब, प्रकाश साहब, शिव कुमार, महेंद्र यादव, अरविंद यादव, अशोक डीपी, अनिल कुमार, लाल सिंह, रमेश कुमार, अशोक डीपीई आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01:मोलडऩाथ आश्रम पर नेम सिंह को स्मृति चिह्न भेंट करते हुए।




कनीना क्षेत्र में हुई 6 एमएम वर्षा
-वर्षा फसलों के लिए होगी लाभप्रद- कृषि अधिकारी
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में बसंत पंचमी के दिन 6 एमएम वर्षा सुबह सवेरे हुई। यूं तो जल्दी सुबह बूंदाबांदी शुरू हो गई थी तत्पश्चात बिजली के कट भी लगे किंतु बाद में बिजली सप्लाई बहाल कर दी गई। बूंदाबांदी जारी रही। कुल मिलाकर 6 एमएम वर्षा हुई। वर्षा से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। जहां गत दिवस तापमान बढ़ गया था जिसके चलते अचानक वर्षा हुई है।
 किसान अजीत कुमार, सुरेश कुमार, राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह ने बताया कि फसल में आब आ गई है क्योंकि कुछ समय से किसान सिंचाई करने की योजना बन रहे थे। सर्दियों के मौसम में विगत दिनों पूर्व कुछ बूंदाबांदी हुई थी। जिसका फसलों पर कुछ लाभ हुआ था। सर्दियों के मौसम में पहली बार इतनी वर्षा हुई है। किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल अभी छोटी है जिसमें पानी देने में बड़ी दिक्कत आती है। जब फव्वारा पाइप लगाते तो फसल टूट जाही है। वहीं सरसों में फूल और फलियां आ गई हैं जिससे फसलों में घुसना आसान नहीं है। ऐसे में यदि घुसते हैं तो पौधे टूट जाते हैं और पौधे टूटने से नुकसान होने का अंदेशा बना रहता है। किसान लंबे समय से वर्षा का इंतजार कर रहे थे। अब वर्षा हो गई जिससे किसानों ने राहत की सांस ली है। अब ठंड भी कम हो सकती है। किसानों का मानना है कि अब ठंड कम हो जाएगी, धुंध और कोहरा अभी चल सकता है। उधर वर्षा से जहां सब्जी की फसलों में भी लाभ होगा और खेतों में खड़ी हुई सभी फसलों में भी लाभ होने की उम्मीद बन गई है।
 क्या कहते हैं कृषि अधिकारी-
 कृषि विभाग महेंद्रगढ़ के एसडीओ डा. अजय यादव ने बताया कि वर्षा से फसलों को लाभ होगा। गेहूं की फसल छोटी है इसलिए उसमें लाभ होगा वहीं सरसों की फसल में भी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि वर्षा से परागण क्रिया और पराग कणों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वर्षा से सरसों की फसल में जहां नमी की आपूर्ति हो जाएगी वही पैदावार में बढ़ोतरी होने की संभावना बन जाती है। उन्होंने बताया कि इस समय वर्षा की जरूरत होती है। वैसे भी किसान सिंचाई करते हैं परंतु सिंचाई करना आसान कार्य नहीं है क्योंकि फसल बड़ी हो गई है जिसमें घुसते हैं तो फसल टूटने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में वर्षा ने किसानों का मन मोह लिया है और किसान अब खुश हैं। किसान अपनी फसल को निहार रहे हैं। इस समय सरसों 20000 हेक्टेयर पर तथा गेहूं करीब 8000 हेक्टेयर पर खड़ा हुआ है और दूर दराज तक सरसों पीली नजर आ रही है।
 फोटो कैप्शन 02:  किसान फसलों का निरीक्षण करते हुए
साथ में डा. अजय यादव एसडीओ कृषि



अगिहार स्कूल में मनाया राष्ट्रीय पराक्रम दिवस
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कनीना की आवाज।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में राष्ट्रीय पराक्रम दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्या पूनम यादव ने की विद्यालय में अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी तथा आजाद हिंद फौज की भूमिका के बारे में विस्तृत चर्चा की।  उनके जीवन पर कविताओं का वाचन किया।
  विद्यालय में गणित के प्रवक्ता अजय  कुमार बंसल ने नेताजी की अद्भुत नेतृत्व क्षमता की तारीफ की तथा उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का  अजेय योद्धा बताया। विद्यालय की छात्रा ममता,प्रवेश, साइना, कल्पना तथा शारदा ने नेताजी के जीवन पर कविताओं का वाचन किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रवक्ता राजेंद्र कटारिया,निशा जांगड़ा,कैलाश देवी, शशि कुमारी,पूनम कुमारी, धर्मेंद्र डीपीई, प्रमोद कुमार तथा सुरेंद्र सिंह सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 09: पराक्रम दिवस मनाते हुए



एडवांस चल रही है सब्जियां
-किसान सब्जी उगाने की सोच रहे हैं किंतु बाजार में वे उपलब्ध
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कनीना की आवाज।
 कनीना में सब्जी की दुकानों पर एडवांस में सब्जियां आ चुकी है। जिन सब्जियों के पौधे लगाने की अभी किसान सोच रहे हैं वो सब्जियां ही बाजार में उपलब्ध हो चुकी हैं। परिणाम यह है कि जब तक आम किसान सब्जी उगाएगा तब तक उनको लोग खा- खाकर बोर हो जाएंगे।
 इंद्रजीत सब्जी विक्रेता ने बताया कि इस समय भिंडी, चप्पल कद्दू और भी बहुत सी एडवांस सब्जियां आ रही है अभी कई सब्जियां किसानों ने लगाने की सोची होगी किंतु ये बाजार में उपलब्ध हैं। जब तक किसानों की सब्जी आएंगी तब तक लोग इन सब्जियों को खाना पसंद नहीं करेंगे। परिणाम यह निकलेगा कि आम किसानों की सब्जियां फिर सस्ते दामों पर ही बिकेंगी। फिलहाल ये एडवांस सब्जियां महंगे दामों पर बिक रही हैं।  
वैज्ञानिक इस समय इन सब्जियों को खाने से मना करते हैं क्योंकि ये विषम परिस्थितियों में पैदा की गई हैं।
फोटो कैप्शन 10 11 इंद्रजीत एडवांस सब्जी बेचते हुए


 अब हरे चने के पौधे भी बिकते हैं, कभी खूब होती थी चने की खेती
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कनीना की आवाज।
 जलवायु और जल परिवर्तन के चलते कनीना और आसपास क्षेत्रों चने की खेती नहीं हो पा रही है।  किंतु चने के हरे पौधे टांट सहित बाजार में खूब बिक रहे हैं। लोग भी इन्हें बड़े चाव से खरीद रहे हैं। क्योंकि इनकी चटनी एवं सब्जी एवं कई रूपों में प्रयोग करते हैं। ये चने के पौधे टांट सहित राजस्थान और राजस्थान से लगते जिला महेंद्रगढ़ के कुछ गांवों से आती हैं। उनके बारे में रामा, दुलारी, सुनीता आदि ने बताया कि हरे चना की चटनी बहुत अच्छी बनती है किंतु उनकी जगह अब तो मटर की चटनी भी बनाने लग गए हैं। आलम यह है कि अब तो बड़े स्तर पर भी इनको बेचने की लोग सोच रहे हैं। क्योंकि इनकी भारी मांग है। इसलिए मुनाफा कमाने के लिए रहेडियों एवं फोर व्हीलरों में भी हरे चने के पौधे टांट सहित बेचे जा रहे हैं।















 फोटो कैप्शन 10: हरे चने के पौधे बिकते हुए

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