सर्दी से मिली कुछ राहत, तापमान बढ़ा
-दूर दराज तक धरा नजर आती है पीली
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में शनिवार को बादल छाए रहने से तापमान में बढ़ोतरी हुई सर्दी से राहत मिली है। मिली जानकारी अनुसार अधिकतम ताप 21 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेंटीग्रेड नोट किया गया। कनीना क्षेत्र में 20000 हेक्टेयर पर सरसों की फसल खड़ी हुई है। सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। अभी तक बेहतर फसल खड़ी हुई है जिसको देखकर किसान खुश है। दूर दराज तक पीले फूल नजर आ रहे हैं। किसान रवि कुमार, सुरेश कुमार, महेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत कुमार आदि ने बताया कि सर्दी पडऩा फसलों के लिए जरूरी है किंतु पाला पडऩा नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि शनिवार को मौसम बेहतर रहा। न अधिक गर्मी रही और ना अधिक सर्दी पड़ी।
फोटो कैप्शन 8: दूर-दराज तक सरसों के फूलों से पीली नजर आती धरा
गरीबों के सेब, सेब को भी दे रहे हैं मात
-सर्दी की मार के चलते महंगे हैं बेर
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में भारी मात्रा बेरों की आवक होने लगी है। यूं तो ये बेर गरीबों के सेब कहलाते आये हैं क्योंकि ये गरीबों के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाते रहे हैं। जो सेब नहीं खा सकते वे बेर खा सकते हैं। किंतु इस बार सेब सस्ते रहे हैं जबकि बेर महंगे। इस बार विगत एक महीना पहले बेर के भाव 150 रुपये किलो बिक रहे हैं जबकि सेब 70 से 75 रुपये किलो मिल जाते हैं। यही कारण है इस बार गरीबों के सेब गरीबों की पहुंच से दूर हो गए हैं।
कनीना क्षेत्र में जाकर युवा इसराणा ,मोहनपुर कनीना एवं करीरा आदि अनेक स्थानों पर बेरी की खेती की हुई है तथा उससे पैदावार ली जाती है। परंतु इस बार तोता पक्षियों द्वारा भारी नुकसान पहुंचाया गया है। आवक कम होने के कारण बेर महंगे हैं।
बेर उगाने वाले महावीर सिंह करीरा, अजीत किसान इसराना, रामप्रताप कनीना, अजय मोड़ी गजराज सिंह मोड़ी आदि से बात हुई उन्होंने कहा कि इस बार सर्दी के मौसम के कारण बेर महंगे है क्योंकि सर्दी की मार से अधिकांश बेर झड़ जाते हैं जिसके कारण पैदावार में गिरावट आई है।
बेरों के शौकीन लोग बेर जरूर खाते हैं। वैद्य हरिकिशन, डा रविंद्र, वैद्य बालकिशन का कहना है कि बेर दांतो और मसूड़ों की एक्सरसाइज करते हैं। ये विटामिन, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा आदि के बेहतर स्रोत है। यह अच्छी मात्रा में ऊर्जा भी देते हैं और इनका मनपसंद टेस्ट भी होता है। बाजार में इस समय एप्पल बेर आए हुए हैं जिनको ग्रीन एप्पल नाम से जाना जाता है। जो प्राय: कुछ सस्ते होते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डा प्रेम कुमार बताते हैं कि जिला महेंद्रगढ़ में बेरों की अच्छी पैदावार होती है जिनमें जोधपुरी गोला, ग्रीन एप्पल, कश्मीरी एप्पल, बाल सुंदरी आदि कई किस्में होती हैं जबकि जंगलों में लगने वाले झाड़ी और देसी बर होते हैं। इस सर्दी की मार से बेर कम बचे है और बेर महंगे है।
रोटी रोजी कमाते रेहडी पर बेर बेचने वाले-बेर बेचने वाले रेहडिय़ों पर बेर बेचकर रोटी रोजी कमाते हैं। बेर बेचने वालों भोलू, दिनेश, मनीष आदि ने बताया कि वे बेर बाजार से खरीद कर लाते और महंगे दामों पर मिलते इसलिए महंगे दामों पर ही बेरों को बेच रहे हैं परंतु वे प्रतिदिन अपनी रोटी रोजी रोटी कमा लेते हैं। वे 500 से 600 रुपये प्रतिदिन बेरों से कमा लेते हैं। परंतु जब भी महंगे हो जाते हैं तो उनकी बिक्री भी बढ़ सकती है।
उधर महाबीर सिंह करीरा का भी यही कहना है कि बेरों की फरवरी माह में शिवरात्रि पर भारी मांग रहती है किंतु बाजार में एप्पल बेर तो मिल जाएंगे किंतु बेहतरीन बेर नहीं मिल पाएंगे। अभी देसी बेर पके नहीं हैं जो मार्च माह में पकेंगे जब तक बेरों की मांग कम हो जाएगी।
गौ सेवक एवं गौ भक्त नाम से जाने जाते हैं भगत सिंह, गौशाला के प्रधान हैं
-दान दक्षिणा और जीवों की सेवा करने में 2003 से निभा रहे हैं अहं भूमिका
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कनीना की आवाज। कनीना के निवासी एवं समाजसेवी भगत सिंह का नाम गौ सेवकों और गो भक्तों में से एक है। वर्ष 2003 में कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला स्थापित हुई थी जिसमें हर प्रकार से सेवा करने में अहम भूमिका कनीना निवासी भगत सिंह निभा रहे हैं। वास्तव में उनको डिस्क की प्राब्लम हो गई थी और बहुत कष्टमय जीवन जीया। उन्होंने निर्णय किया कि अधिक दान दक्षिणा देने से जीवन में निखार आता है। यही कारण है कि आज यदि दान दाताओं में श्रीकृष्ण गौशाला में नाम देखा जाए तो सर्वोपरि स्थान पर है। उनका कोई स्वार्थ नहीं है अपितु निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। जहां पेयजल की समस्या होती वहां अपने कोष से ट्यूबवेल स्थापित करते हैं। वही अनेक स्थानों पर वर्षभर पक्षियों के लिए दाना पानी का बंद कर रहे हैं। अब तक गौभक्त भगत सिंह ने गौशाला कनीना, कन्या उच्च विद्यालय कनीना, सीएचसी कनीना, राजकीय कालेज कनीना, लाल गिरी आश्रम, मोलडऩाथ आश्रम, भोजावास गौशाला, कालीबाड़ी बीकानेर गौशाला आदि में अपने निजी को से ट्यूबवेल लगवा चुके हैं। बीकानेर में तो जहां पानी की भारी किल्लत है भारी खर्चे से ट्यूबवेल स्थापित करवाया है । जहां भी गायों का नाम आता है उनके लिए चारा,गुड़ तथा अन्य खाद्य पदार्थ पहुंचाने में कसर नहीं छोड़ी हैं।
विगत दिनों जहां उनके पुत्र हितेष की शादी 2024 हुई है जिस पर कनीना की गौशाला को पांच लाख जबकि पांच अन्य गौशाला कारोली, बूचावास, भोजावास, धनौंदा आदि में 11-11 रुपये की राशि प्रदान कर चुके हैं। वर्ष 2003 से ही उन्होंने पक्षियों के लिए कई स्थानों पर अपने निजी कोष से चुग्गे का प्रबंध कर रखा है जहां वर्ष भर का जीवों के अन्न का खर्चा स्वयं वहन करते हैं जिनमें कृष्णानंद आश्रम धनौंदा, भडफ़ आश्रम, कोटिया की बनी स्थित आश्रम ऐसे स्थल हैं जहां पक्षी अधिक मात्रा में दाना चुगने आते हैं। उनके चुग्गे के लिए वह वर्ष भर का दाना प्रबंध करते हैं और 200 क्विंटल के करीब बाजरा प्रतिवर्ष खरीदकर गौशाला और पक्षियों के लिए दान करते हैं। वहीं विभिन्न स्थानों पर आर्थिक सहायता पहुंचाते हैं। यही नहीं कि दान दक्षिणा में ही भूमिका निभाते हैं कनीना क्षेत्र में पेड़ पौधे लगाने में भी उनका अहम योगदान है। जहां श्रीकृष्ण गौशाला तथा आम रास्ते पर उन्होंने भारी संख्या में दूरदराज से महंगे दामों पर पौधे लाकर लगाए हैं। यद्यपि डिस्क की प्रॉब्लम है फिर भी वे अपने हाथों से इन पौधों में पानी देेते हैं। उनके द्वारा लगाए हुए पौधे तो बड़े हो चुके हैं। उनका ध्येय है कि अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाए जाए जो न केवल पर्यावरण को साफ सुथरा रखेंगे अपितु आने वाले समय में फल फूल और छाया देते रहेंगे।
उन्होंने अब तक श्री कृष्ण गौशाला में 100 पौधे लगाए हैं। इनकी जाली, ईंटों से चबूतरा बनाना आदि स्वयं अपने कोष से करते आ रहे हैं। जब गरीब लड़कियों की शादी का जिक्र आता है बढ़-चढ़कर दान देते हैं। वह भगवान में अति विश्वास करते हैं और सिर्फ यह कहते हैं कि सब ऊपर वाले की देन है। उनका कुछ भी नहीं है। जब भी कहीं किसी स्थान पर दान दक्षिणा चारा शादी की बात चलती है तो उनका नाम अग्रणी मिलता है। अनेकों संस्थाओं ने उन्हें समाज सेवा के चलते सम्मानित भी किया है। उनका कहना है कि दान बिना बताए दिया जाए तो फलीभूत होता है। इसलिए वह दान देकर की राशि की रसीद नहीं लेना चाहते, गुप्त दान करना चाहते हैं। अब तक वे एक बार पार्षद भी बन चुके हैं । उनका कहना है कि वे ताउम्र गायों की सेवा करना चाहते हैं और गायों को कष्ट देखकर सहन नहीं कर पाते। विभिन्न गौशाला में जाते हैं गायों की सुरक्षा देखरेख के हिंट देकर ही आते हैं।
आज भगत सिंह कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में प्रधान बनकर नाम कमा रहे हैं। गौशाला को दिया है नया रूप। आने वाले समय में कनीना की गौशाला होगी दर्शनीय।
फोटो कैप्शन: भगत सिंह साथ में
फोटो कैप्शन तीन: लगाए गए बोर के पास भगत सिंह और
04: भगत सिंह द्वारा लगाए गए पौधों के साथ भगत सिंह
तीन बार स्पीड ब्रेकर बनाया और तीन बार टूट गया
-अब यह स्पीड ब्रेकर ही हटाया, पुन: निर्मित किये जाने की मांग
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कनीना की आवाज। कनीना-रेवाड़ी सड़क मुख्य सड़क मार्ग पर पानी की टंकी के समक्ष
तीन बार स्पीड ब्रेकर बनाया और तीनों बार टूट जाने के बाद आखिर परेशान होकर पीडब्ल्यूडी बीएंडआरने स्पीड ब्रेकर को ही गत दिनों हटा दिया है।
कनीना और आसपास के लोगों के लिए यह बहुत जरूरी है क्योंकि जब लोग कनीना कस्बे से रेवाड़ी सड़क मार्ग पर चढ़ते हैं तो दुर्घटना होने का अंदेशा बना होता है। पहले भी एक बाइक सवार की यहां मौत हो चुकी है। ऐसे में स्पीड ब्रेकर होगा तो वाहन धीमी गति से चलेंगे और दुर्घटना होने के आशंका घट जाएगी। ऐसे में कनीना के नरेश कुमार, दिनेश, सुरेश, मदन सिंह, राम सिंह आदि ने मांग की है कि तुरंत यहां स्पीड ब्रेकर बनाया जाए ताकि पेयजल सप्लाई में किसी काम से आने वाले लोगों को भी राहत मिल सके। यहां उल्लेखनीय है कि स्पीड ब्रेकर के करीब 100 गज आगे एक स्पीड ब्रेकर बनाया था जो आधा टूट चुका है और आधा अधूरा अभी भी पड़ा हुआ है। इसके 100 गज आगे एक और स्पीड ब्रेकर बनाया था जो आधा टूट चुका है। ऐसे में सरकार से लोगों ने मांग की है कि या तो स्पीड ब्रेकर बनाया ही न जाये और बनाया जाए तो बेहतर दर्जे का स्पीड ब्रेकर बनाया जाए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
उल्लेखनीय है कि यहां मोड़ पर पहले भी कई दुर्घटनाएं घट चुकी जिनके पीछे तेज गति से आने वाले वाहन होते हैं। सड़क मार्ग के साथ साथ बसासत है। ऐसे में यहां स्पीड ब्रेकर होना बहुत जरूरी है।
फोटो कैप्शन 07: रेवाड़ी मार्ग का वह स्थान जहां से स्पीड ब्रेकर हटा दिया गया
2 लोगों ने गौशाला को दिए 5100-5100 रुपए का दान
-गौशाला प्रबंधक कमेटी ने किया उनका अभिनंदन
--सेठ कैलाश चंद धनौंदा वाले ने गौशाला में 51000 रुपए भेंट की
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में सेठ कैलाश चंद धनौंदा वाले ने गौशाला में आकर गौवंश को गुड़ खिलाया वहीं 51000 रुपए की राशि गौशाला को भेंट की। वहीं नीलम कुमारी मनोनीत पार्षद वार्ड नंबर 8 ने भी 5100 रुपए का दान दिया। उन्होंने गौशाला में आकर गौवंश को हरा चारा खिलाया। इस मौके पर गौशाला प्रधान भगत सिंह ने अपनी समस्त कार्यकारिणी सहित उनका अभिनंदन किया। भगत सिंह ने कहा कि गायों की सच्ची सेवा उनकी दान देकर या उन्हें गड़-चारा आदि चराकर की जा सकती है। गौशाला में दिया गया दान सीधा पुण्य का कार्य होता है तथा आने वाले समय में गायों का आशीष पाकर पाप दोष से मुक्त हो जाते हैं। इस मौके पर बलवान सिंह आर्य, मा. कृष्ण प्रकाश, मा. राम प्रताप, दिलावर बाबूजी, रविंद्र बंसल, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, सूबेदार दुलीचंद, सूबे सिंह, होशियार सिंह यादव पार्षद वार्ड-11, ओमप्रकाश ठेकेदार भडफ़, महेश कुमार अग्रवाल, सतबीर गुगनवाला आदि उपस्थित रहे। इस मौके पर सतीश आर्य रसूलपुर ने भी एक गाय गोद लेकर 5100 रुपए की राशि दान दी।
फोटो कैप्शन 01: गौशाला प्रबंधक कमेटी दानदाताओं का अभिनंदन करते हुए
नगर पालिका ने किया बेहतर काम
- बस स्टैंड पर दोनों तरफ सड़क मार्ग पर हटाए अतिक्रमण-सवाई सिंह
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कनीना की आवाज। नगर पालिका बेहतर कदम उठाते हुए कनीना बस स्टैंड के सामने से गुजरने वाली सड़क के दोनों तरफ दुकानों के सामने किए गए अतिक्रमण हटा दिए गए हैं। सवाई सिंह मनोनीत पार्षद ने खुशी जताते हुए कहा कि वे कई बार नगर पालिका अधिकारियों से मिल चुके हैं तथा इस प्रकार के अतिक्रमण को हटाने की बार-बार मांग कर चुके हैं। जिसके चलते नगर पालिका ने अतिक्रमण को हटाया जिससे लोगों में खुशी की लहर है। उन्होंने कहा कि अब तक अतिक्रमण के चलते दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई थी। अतिक्रमण हटा देने के बाद दुर्घटनाओं की आशंका घट गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां चलते रहनी चाहिए ताकि लोगों की को लाभ मिल सके और किसी प्रकार के दुर्घटना से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि जोहड़ों पर किए गए अतिक्रमण तथा बणियों में किए गए अतिक्रमण का हटाने के प्रयास करवाएंगे। साथ में जहां-जहां नगर पालिका की जमीन प्रतिक्रमण हो रहे उन्हें हटवाने का प्रयास करवाएंगे। जिससे नगर पालिका की आय हो उसके तथा लोगों को राहत मिल सके।
फोटो कैप्शन 6: अतिक्रमण हटाने के बाद खुला सड़क मार्ग
राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में दो दिवसीय वार्षिक एथलेटिक मीट का जोशपूर्ण शुभारंभ
-प्रथम दिन छात्राओं ने खेल मैदान में दिखाया उत्साह, अनुशासन और दमखम
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कनीना की आवाज। राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में दो दिवसीय वार्षिक एथलेटिक मीट का शुभारंभ प्रथम दिन पूरे जोश, उत्साह एवं खेल भावना के साथ हुआ। यह आयोजन डा. सत्यजीत के मार्गदर्शन तथा श्रीमती सुषमा यादव,खेल प्रभारी की कुशल अगुवाई में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पीके यादव पूर्व प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय नाहड़ ने समारोह में शिरकत की।
मुख्य अतिथि द्वारा ध्वज फहराकर एथलेटिक मीट का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर खेल प्रांगण में विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं—दौड़, जेवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो आदि—आयोजित की गईं, जिनमें महाविद्यालय की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपनी खेल प्रतिभा, अनुशासन तथा प्रतिस्पर्धात्मक भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्राचार्य डा. विक्रम सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि खेल गतिविधियां छात्राओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ-साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का निर्माण करती हैं। उन्होंने खेलों को व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
मुख्य अतिथि पीके यादव ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में छात्राओं को खेलों के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि खेल न केवल शारीरिक क्षमता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि अनुशासन, आत्मसंयम, नेतृत्व एवं निर्णय क्षमता जैसे जीवनोपयोगी गुणों का भी विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि खेल प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी छिपी प्रतिभाओं को पहचानने तथा आत्मविश्वास के साथ आगे बढऩे का सशक्त मंच प्रदान करती हैं।
उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन निर्माण की प्रक्रिया के रूप में अपनाए। श्री यादव ने जीवन को सहज एवं संतुलित ढंग से जीने के चार महत्वपूर्ण सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन, सतत परिश्रम तथा सही निर्णय लेने की क्षमता को सफलता की कुंजी बताया। इस क्रम में उन्होंने एलन मस्क के उदाहरण के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि कठिन परिस्थितियों में लिए गए साहसिक एवं दूरदर्शी निर्णय व्यक्ति को असाधारण उपलब्धियों तक पहुंचा सकते हैं।
फोटो कैप्शन 02: अव्वल छात्राओं को पुरस्कृत करते हुए
फूलों वाले मुफ्त में वितरित किए
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कनीना की आवाज। नारनौल में जनशक्ति विकास संगठन के अध्यक्ष दीपक कुमार वशिष्ठ द्वारा 16 हरियाणा बटालियन एनसीसी और अन्य सरकारी कार्यालयों में फ्री में हजारों रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे वितरित किये।
जनशक्ति विकास संगठन के अध्यक्ष दीपक कुमार वशिष्ठ द्वारा ने कहा कि महेंद्रगढ़ जिले को हरा-भरा बनाने के लिए हर एक व्यक्ति को आगे आना होगा और ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करना होगा। उन्होंने कहा कि पुष्प अभियान के तहत महेंद्रगढ़ जिले को फूलों की पौध लगाकर सुखद वातावरण की परिकल्पना को साकार करना है ऐसे में लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए प्रशासन सामाजिक संस्था का सहयोगी बन रहा है। उन्होंने कहा कि फूलदार पौधों से एक ओर जहां वातावरण सुगंधित होता है वहीं दूसरी ओर नजारा भी मनमोहक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि लोगों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाकर महेंद्रगढ़ को सुगंधित, मनमोहक व हरा-भरा बनाएं।
इसी कड़ी में 16 हरियाणा बटालियन एनसीसी के सूबेदार जसवीर सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा। फूलों के पौधे लगाने से वातावरण सुगंधित होगा और गंदगी दूर होगी। जहां पर रंग-बिरंगे फूलों के पौधे लगे होते हैं वहां लोगों का मन भी उत्साहित रहता है। इस मौके पर बटालियन एनसीसी से सूबेदार जसवीर सिंह,लिपिक गौरव,जनशक्ति विकास संगठन के सदस्य अमित कुमार, यश गिरी और आदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 03: दीपक वशिष्ठ पुष्प वाले पौधे वितरित करते हुए
शहीद महेशपाल फुटबाल प्रतियोगिता--
धनौंदा की टीम ने उन्हाणी को हराकर जीत की हासिल
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कनीना की आवाज। धनौन्दा गांव में 17वीं शहीद महेशपाल फुटबाल प्रतियोगिता का शुभारंभ अतरलाल एडवोकेट, सरपंच प्रतिनिधि बीर सिंह थानेदार तथा शहीद के भाई जीतपाल सिंह ने किया। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि व गांव के गणमान्य लोगों ने शहीद महेशपाल की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। उसके बाद मुख्य अतिथि व अन्य अतिथिगण ने ध्वज फहराकर तथा रिबन काटकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया।
प्रतियोगिता का उद्घाटन मैच अंडर-14 धनौन्दा और उन्हाणी की टीमों के बीच खेला गया। नेताजी अतरलाल ने फुटबाल को किक मारकर मैच की शुरुआत की। रोमांचक मुकाबले में दोनों टीमें बराबरी पर रही। टाई ब्रेकर में धनौन्दा की टीम ने उन्हाणी की टीम को हराकर मुकाबला अपने नाम किया। खेल स्थल पर पहुंचने पर खेल कमेटी द्वारा मुख्य अतिथिगण का स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। ब्रिलिएन्ट सीनियर सैकण्डरी स्कूल, धनौन्दा की छात्राओं भारती, मीनाक्षी और राखी ने अतिथियों के सम्मान में स्वागत गान प्रस्तुत किया। मंच संचालन मास्टर प्रहलाद सिंह ने किया। इस अवसर पर उपस्थित खिलाडिय़ों व जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि नेताजी अतरलाल ने कहा कि खेल को खेल भावना से खेलना खिलाड़ी का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। खेल में हार-जीत होती रहती है। एक अच्छा खिलाड़ी अपनी टीम की जीत के लिए अपना शत प्रतिशत योगदान देता है। अतरलाल ने कहा कि शहीद महेशपाल की याद में विशाल फुटबाल प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए खेल कमेटी, ग्राम पंचायत तथा सभी ग्रामवासी धन्यवाद के पात्र हैं। शहीदों की बदौलत ही आज हम आजादी की खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। शहीदों का सम्मान और स्मरण करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इस अवसर पर राजेन्द्र सिंह नम्बरदार, पूर्व सरपंच रूपेन्द्र सिंह, पवन सिंह प्रधान, कोच सतीश जोशी, अशोक सिंह पंच, सुशील पंच, पृथ्वी सिंह पंच, हवा सिंह फौजी, कोच सुधीर, मनोज, किशनपाल, कोच दर्शन कौशिक, राजेश चौधरी, परम राघव सहित सैकड़ों खिलाड़ी और ग्रामीण उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: अव्वल खिलाडिय़ों के साथ अतरलाल
कुतरूं प्राचार्य के कारनामें -03 पढ़े कल
-शेर सिंह के नाम से आज भी डरता है कुतरूं
क्या मिला पत्रकारिता से? कल के लेख में पढ़े
-सज्जन इंसान को नहीं करनी चाहिए पत्रकारिता
-लेखनबुद्धि का खेल-चिंतनशीलता का कार्य













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