गायों के चारे के लिए दिए 19000 रुपए
- वीरेंद्र सिंह एसए हर वर्ष देते हैं योगदान
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला वीरेंद्र सिंह एसए वासी मकराना, चरखी दादरी निवासी ने 19000 रुपए गायों के चारे के लिए दान दिये हैं।
मिली जानकारी अनुसार हर वर्ष वीरेंद्र सिंह एसए कुछ न कुछ गायों के लिए जरूर योगदान देते आए हैं। कनीना की कनीना श्रीकृष्ण गौशाला की समस्त कार्यकारिणी ने वीरेंद्र सिंह एसए का अभिनंदन किया।
इस मौके पर भगत सिंह प्रधान गगौशाला ने बताया कि पिछले करीब 6 महीने से गौशाला के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। एक और जहां गायों को गोद लेने की नई परंपरा शुरू की गई थी जिसके तहत आशातीत परिणाम प्राप्त हुए हैं। 500 से भी अधिक गायें गोद ली जा चुकी हैं। वहीं गए गौशाला में घूमने फिरने के लिए भी प्रबंध किया जा रहा है। जल्द ही यह प्रबंध पूरा कर लिया जाएगा। जहां गायों के लिए सेवा भी बढ़ गई है। उनके लिए सर्दी, गर्मी, बरसात से बचाने के व्यापक प्रबंध किए हैं। वही अब गौशाला अग्रणी गौशालाओं में शामिल हो चुकी है। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में प्रतिदिन सैकड़ों लोग न केवल गायों को देखने के लिए आते हैं अपितु गौशाला में किये जा रहे विकास कार्यों को भी देखने के लिए आते हैं। जो भी कोई गौशाला में आता है वह प्रसन्नचित लौटता है। यह कनीना गौशाला के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। अभी तक श्रीकृष्ण गौशाला में दर्जनों प्रधान रह चुके हैं किंतु यहां उल्लेखनीय है कि जब से भगत सिंह ने कार्यभार संभाला है गौशाला को चार चांद लगा दिये हैं। गौशाला का नाम आज हर व्यक्ति की जुबान पर है। जिस भी किसी से पूछा जाए वह गौशाला की बड़ाई करता मिलता है। यह न केवल कनीनावासियों के लिए अपितु भगत सिंह और गौशाला के लिए सम्मान का विषय बन गया है।
इस मौके पर मास्टर राम प्रताप यादव, सहसचिव रामपाल यादव, सचिव यश यादव, उप प्रधान रविंद्र बंसल, बलवान आर्य, कृष्ण कुमार गुरुजी, उप प्रधान दिलावर सिंह, डा. नीरज, डा. महेश यादव आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 6: गौशाला में दान देते वीरेंद्र एसए मकराना
सिहोर में किया बच्ची के जन्म पर कुआं पूजन
--अतरलाल ने दिया आशीर्वाद
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कनीना की आवाज। जिला के सिहोर गांव निवासी मोतीलाल प्रजापत के परिवार में कन्या जन्मोत्सव पर कुआं पूजन कर खुशियां मनाई गई। प्रमुख समाजसेवी अतरलाल ने कन्या जन्म पर कुआं पूजन करने के लिए कन्या की माता प्रियंका देवी व परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मोतीलाल प्रजापत के परिवार ने कन्या जन्म पर कुआं पूजन कर बेटा-बेटी की समानता का संदेश देकर ऐतिहासिक कार्य किया है। इससे समाज के दूसरे लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने लोगों से लड़कों के समान बेटियों की परवरिश करने तथा उन्हें शिक्षित करने की अपील की। कन्या के दादा मोतीलाल तथा पिता नरेन्द्र ने कहा कि लड़कियां परिवार का सौभाग्य होती हैं। आज विकास के सभी क्षेत्रों में लड़कियां कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। इस अवसर पर दावत आयोजित की गई। जिसमें सैकड़ों स्नेहीजनों ने शिरकत की।
फोटो कैप्शन 05: कन्या जन्म पर कुआं पूजन करते हुए कन्या की माता प्रियंका।
लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर किया याद
--कनीना मंडी में चला कार्यक्रम
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कनीना की आवाज। कनीना में स्वतंत्रता सेनानी, अमर बलिदानी, पंजाब केसरी लाला लाजपतराय की जयंती मनाई गई। मुख्य अतिथि अतरलाल एडवोकेट ने लाला लाजपतराय की मूर्ति पर माल्यार्पण कर समारोह का शुभारंभ किया। अध्यक्षता व्यापार मंडल कनीना के प्रधान पूर्णचंद ने की।
मुख्य अतिथि अतरलाल ने लाला लाजपतराय के साथ इलाके के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी आरडी सोमानी (खोल), राव सोहनलाल (लूखी), लाला बंशीधर गुप्ता (कनीना), रामेश्वर सिंह चौहान (कांटी खेड़ी), मातादीन शर्मा (खुडाना) तथा अनेक ज्ञात व अज्ञात शहीदों को नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन तथा बलिदान हमें देशप्रेम, राष्ट्र भक्ति तथा समाजसेवा का संदेश देता है। उन्होंने लाला लाजपतराय को प्रखर देशभक्त, ओजस्वी वक्ता, आर्य समाज प्रचारक, पंजाब नेशनल बैंक का संस्थापक सदस्य बताते हुए लोगों से उनके विचारों को अपनाने की अपील की। श्रीकृष्ण गौशाला के उपप्रधान रविन्द्र बंसल, राजनैतिक व सामाजिक विश्लेषक व चिंतक श्रीभगवान गौतम, पदमेन्द्र जांगड़ा व मास्टर बुधराम ने लाला लाजपतराय को स्वतंत्रता सेनानियों का प्रकाश स्तम्भ बताते हुए कनीना में जयंती मनाने के लिए प्रजा भलाई संगठन के सदस्यों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर व्यापार मंडल उपप्रधान महेन्द्र बचीनी, भीमसेन गोयल, सुभाष गेरा, अशोक कुमार, पूर्णचंद, नीटू जांगड़ा, मास्टर बुधराम, बनवारीलाल महाशय, हरिकिशन बंसल, सतीश गुप्ता, प्रवीन लखेरा, दीपक वर्मा, जगदीश प्रसाद, प्रदीप शर्मा, बलवंत सिंह, मुंशीराम गुप्ता, माडूराम, पदमेन्द्र जांगड़ा, रविन्द्र बंसल, श्रीभगवान गौतम, राजेन्द्र पंच, सरजीत सिंह, संजय स्वामी, औमप्रकाश, धर्मबीर, धर्मपाल, विजय सिंह सहित सैकड़ों मौजीजान उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 04: लाला लाजपत राय को याद करते हुए
शिक्षक एवं समाजसेवी निर्मल कुमार होंगे 31 को सेवानिवृत्त
--शास्त्री के नाम से जाने जाते हैं निर्मल
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कनीना की आवाज। कनीना से महज 12 किमी दूर नांगल हरनाथ निवासी शिक्षक एवं समाजसेवी निर्मल कुमार 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होंगे। 22 जनवरी 1968 को नांगल हरनाथ में जन्मे निर्मल कुमार के पिता राम अवतार व माता का नाम मेवा देवी भी समाजसेवी रहे हैं।
निर्मल कुमार ने 1998 में राजकीय प्राथमिक पाठशाला बुचावास में जेबीटी अध्यापक के पद पर कार्य ग्रहण किया था। फरवरी 2012 मे राजकीय माध्यमिक विद्यालय नांगल मोहनपुर में तबादला हो गया था। 2016 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुंदरह में तबादला हुआ। अगस्त 2018 में संस्कृत के अध्यापक पर पदोन्नति होने पर रेवाड़ी जिले के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय बव्वा में 1 वर्ष की सेवा पूर्ण की। सितंबर 2019 में संस्कृत अध्यापक के पद पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बूचावास में तबादला हो गया और अब बूचावास से ही सेवानिवृत्त होंगे। 27 वर्ष 5 महीने की जेबीटी व संस्कृत अध्यापक के पद पर अपनी सरकारी सेवाएं दी है।
निर्मल कुमार भारतीय मजदूर संघ, सर्व कर्मचारी संघ,राजकीय अध्यापक संघ आदि संगठनों में काम करते हुएसमय-समय पर कर्मचारियों की मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया है। वे आरएसएस के भी समर्थक एवं सदस्य रहे हैं।
फोटो कैप्शन : निर्मल कुमार
खबर डालकर फोन तक नहीं करने वालों के समाचार नहीं छापेंगे
-बार-बार फोन करते हैं फोन तक नहीं उठाते
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कनीना की आवाज। कैसी विडंबना है कि समाचार छपवाने वाले कुछ लोग तो व्हाट्सअप पर समाचार भेजकर फोन तक नहीं करते। और जब उनको फोन मिलाया जाए तो फोन भी नहीं उठाते। पत्रकार के लिए समाचार संकलन करना बहुत कठिन काम होता है। एक पत्रकार सुबह से शाम तक समाचार संकलन करता है फिर उनको टाइप करके भेजता है। पूरा दिन उसका बर्बाद हो जाता है, धन भी खर्च होता है किंतु कुछ समाचार छपवाने वालों की आदत बन गई है कि समाचार व्हाट्सएप पर डाल देते हैं और समझते हैं कि उनका समाचार लग जाएगा। कुछ तो ऐसे समाचार भेजने वाले हैं जिन्होंने आज तक कभी फोन तक नहीं किया। एक पत्रकार के पास सैकड़ों की संख्या में व्हाट्सअप संदेश आते हैं। जब तक फोन नहीं करेंगे तब तक पत्रकार को कैसे पता चलेगा कि किसी ने कोई खबर भेजी है। इसलिए जो भी कोई समाचार भेजता है वह फोन अवश्य करें। कई बार फोन समाचार में कुछ त्रुटियां रह जाती है या कोई बात पूछनी होती है तो उसे स्पष्ट करने के लिए पत्रकार भी फोन करते हैं। ऐसे में वो फोन तक भी नहीं उठाते। कृपया ऐसे लोग समाचार न भेजें जो कम से कम एक फोन तक भी नहीं कर सकते। फोन करने से परिचय भी होता है तथा भविष्य के लिए भी समाचार छपवाने के द्वार खुलते हैं। वैसे तो समाचार पत्रों का ट्रेंड चल रहा है कि जो विज्ञापन देगा उन्हीं के अधिक समाचार प्रकाशित होते हैं किंतु कुछ तो ऐसे लोग हैं जो रोजाना ही अपना समाचार छपवाना चाहते हैं। तो कृपया थोड़ा सा सावधान रहे।
बाबा भैया लाइब्रेरी ककराला में 2026 कैलेंडर का विमोचन
--अध्ययनरत विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
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कनीना की आवाज। बाबा भैया लाइब्रेरी के विचार संगोष्ठी के कार्यक्रम में नव वर्ष 2026 के कैलेंडर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय कंवाली के प्राचार्य डा. कर्मवीर, लाइब्रेरी से जुड़े पाठकों एवं ग्राम के गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। कैलेंडर का विमोचन संस्था द्वारा लाइब्रेरी में नियमित रूप से अध्ययन कर रहे पाठकों की तस्वीर जारी करते हुए किया गया।
इस कैलेंडर में गांव के कुल देवता बाबा भैंया की पावन फोटो को प्रमुख रूप से स्थान दिया गया है, जिससे ग्रामीण संस्कृति और आस्था को सम्मान मिल सके। कैलेंडर में उत्तर भारत के सभी प्रमुख व्रत, पर्व और त्यौहार दर्शाए गए हैं, जिससे यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी उपयोगी बन गया है।
इसके साथ ही, कैलेंडर में लाइब्रेरी से जुडऩे एवं इस शैक्षिक मुहिम को सहयोग देने हेतु विशेष क्यूआर कोड भी दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग बाबा भैया लाइब्रेरी के कार्यों से जुड़ सकें और शिक्षा के इस अभियान को आगे बढ़ा सकें।
उल्लेखनीय है कि बाबा भैया लाइब्रेरी का संचालन बाबा भैया सेवा दल समाजसेवी संस्था द्वारा किया जा रहा है, जो निरंतर शिक्षा, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक उत्थान के लिए कार्यरत है।
संस्था के अध्यक्ष मास्टर रामनिवास ने बताया कि इस कैलेंडर का उद्देश्य केवल तिथियों की जानकारी देना नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने इस पहल की सराहना की।
इस अवसर पर स्टेट अवार्डी मास्टर बनवारी लाल, कंवर सिंह नंबरदार, विद्यालय एसएमसी प्रधान बाबूलाल स्वामी, प्रधान योगेश कुमार, शांतिलाल नंबरदार, ग्राम विकास कमेटी कोषाध्यक्ष प्यारेलाल, लाल सिंह चौकीदार, राज सिंह, सचिव महेश कुमार, सह सचिव रामपाल, कार्यालय प्रबंधक दिनेश सोनी, सोनम लाइबेरियन, यश शर्मा सहित लाइब्रेरी के छात्र मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 01: बाबा भैया लाइब्रेरी में वर्ष 2026 का कैलेंडर जारी करते हुए
दूसरे दिन भी छाए रहे बादल, हुई हल्की बूंदाबांदी
--विगत दो दिनों जमा था पाला
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में बुधवार को दूसरे दिन भी आकाश में दिनभर बादल छाए रहे। मंगलवार को भी बादल छाए रहे थे और वर्षा भी हुई थी। कनीना क्षेत्र में जहां दो दिनों तक पाला जमने के बाद दो दिनों से बादल छाए हुए हैं। पाले से फसल को नुकसान भी हो चुका है ऐसे में किसान टकटकी लगाकर बादलों की ओर तो कभी फसलों की ओर देख रहे हैं। कनीना क्षेत्र में जहां 18000 हेक्टेयर पर सरसों 8000 हेक्टेयर पर गेहूं की बिजाई की हुई है। सरसों में फलियां आ गई और जल्द ही पकान की ओर चली जाएगी। किसानों का कहना है कि इस समय वर्षा फसलों के लिए लाभप्रद साबित हो सकती है किंतु लगातार पाला जमना फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं साबित होगा। उनका कहना है किसानों का कहना है कि सर्दी का पडऩा भी जरूरी है, धुंध और कोहरा भी नुकसानदायक नहीं हैं लेकिन लगातार पाला जमना और सूर्य का दिखाई नहीं देना फसलों के लिए घातक साबित हो सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक भी यही मानते हैं। इस समय जहां फसलों में पहले से दो बार पाले का नुकसान हो चुका है। जब कभी बादल छाए होते हैं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लग जाती है। किसानों का मानना है कि यदि बेहतर फसल पैदावार होगी तो किसानों की माली हालत में सुधार होगा।
फोटो कैप्शन 03: आकाश में छाए हुए बादल
किसानों का दुश्मन बना हुआ है सरसों का मामा, पशु इसे खाते हैं
--इस परजीवी पौधे को ओरोबंचे नाम से भी जाना जाता है
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां सरसों में इस समय सरसों का मामा जिसे ओरोबंचे नाम से भी जाना जाता है भारी मात्रा में खड़ा हुआ है। किसान इससे परेशान हो चले हैं चूंकि इसे खत्म करने की कोई खरपतवारनाशी नही है। यह एक परजीवी पौधा होता है जो सरसों, बैंगन, टमाटर, आक आदि फसलों एवं पौधों की जड़ों पर खड़े मिलते हैं। जिस प्रकार अमरबेल का रंग हरा नहीं होता उसी प्रकार ओरोबंचे का रंग भी हरा न होकर सफेद होता है। जिसके सफेद और बैंगनी फूल आते हैं। जब ये बीज पक जाते हैं तो बिखर जाते और अगले वर्ष फिर से उग जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता है कि ये फसलों की जड़ों पर उगते हैं इसलिए इनको किसी दवा से नष्ट करना भी मुश्किल है क्योंकि जिस पौधे की जड़ों पर उगते हैं उसको भी दवा का नुकसान होने का खतरा बना होता है। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि ओरोबंचे को हाथों से उखाडऩा जरूरी होता है। यह पौधा अपना भोजन नहीं बनाता और धीरे-धीरे सरसों और जिस भी पौधे की जड़ पर उगता उसका रस चूसते चूसते उसे कमजोर बना देता है। अंत से पौधा खत्म हो जाता है।
किसान सूबे सिंह, श्रीभगवान, योगेश, रोहित आदि ने बताया कि यह पौधा इस समय अर्थात सर्दी के मौसम में उगते हैं और सरसों में बहुत अधिक मिलते हैं। कभी कभार किसान इनको उखाड़ कर पशु को जरूर खिलाते हैं क्योंकि खरपतवार हैं। उनका कहना है कि इस पौधे के बारे में बहुत से किसान नहीं जानते और यह खेतों में यूं ही खड़े रहते हैं जबकि इनका उखाड़ कर फेंक देना चाहिए। इसकी के कारण खेतों में पैदावार घट जाती है। पूर्व विषय विशेषज्ञ डा. देवराज का कहना है कि यह पौधे खरपतवार एवं परजीवी हैं और फसलों के लिए नुकसानदायक है।
फोटो कैप्शन 02: किसान सरसों का मामा पौधा दिखाते हुए
हिंदु सम्मेलन में पहुंचेंगे हजारों हिंदु
-8 फरवरी
को पाली में आयोजित होगा सम्मेलन
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कनीना की आवाज। संघ के शताब्दी वर्ष में होने वाले चार कार्यक्रमों की शृंखला में चौथे और अंतिम कार्यक्रम हिंदू सम्मेलन जो मंडल स्तर पर होने हैं। इनको आकर्षक और ऐतिहासिक बनाने के लिए पाली मंडल के कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया है। इस क्रम में निरंतर छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन करके सम्मेलन में पहुंचने की योजना बनाई जा रही है। इस क्रम में पाली मंडल के गांव झाखड़ी में कार्यक्रम में पहुंचने की योजना बनाने की एक बैठक संयोजक दशरथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में अमित, पवन, राकेश, महेश, सुंदर, ईश्वर, विक्रम, विकास, प्रवीण, संजय, बनवारी लाल, नाथाराम, रोशन लाल, तुलसीराम, सतवीर फौजी, संदीप फौजी, हवा सिंह आदि की उपस्थिति में गांव से 301 महिला पुरुषों की टोली ढोल नगाड़े के साथ 8 फरवरी को बाबा जयरामदास आश्रम पहुंचने का आश्वासन दिया। साथ ही पारंपरिक परिधान पहनकर सौ युवाओं की टोली उस दिन हिंदू सम्मेलन में पहुंचे इसके लिए भी योजना बनाई गई। नहड़ा गाने वाली एक टोली कार्यक्रम में मनोरंजन के लिए अपनी प्रस्तुति देगी। इसी क्रम में पालड़ी परिहार में महिला और पुरुषों की बैठक आयोजित की गई और पाली में ललिता भारद्वाज हेमलता के सानिध्य में महिलाओं की एक बैठक में कलश यात्रा की योजना बनाई गई।
इन बैठकों को संबोधित करते हुए कैलाश पाली ने कहा कि भाषा- भूसा ,देश- वेश ,भाव- भजन ओर भोजन यह सब स्वदेशी हो गंगा गीत गायत्री गौ माता में आस्था हो वो सब भारतीय हिंदू हैं और उन सब के लिए हिंदू सम्मेलनों के दरवाजे खुले हैं। यह एक स्वर्णिम युग है जिसमें हम समाज में फैली कुरीतियों को नष्ट करके समरस समाज की स्थापना की ओर बढ़ रहे हैं। भारत का वैभव समस्त संसार में हो इसके लिए सामाजिक सद्भाव पर्यावरण स्वदेशी पर समाज को चिंतन करना होगा। उन्होंने कहा कि इन सम्मेलनों में साधु संतों का सानिध्य मिलेगा वही समाज को इक_ा करने का एक माध्यम यह सम्मेलन बनेंगे पालड़ी में जहां कविता, संतोष, सरोज, गुड्डी, राजबाला, सरिता, मुनेश, कन्नू, सुषमा, पूनम, सरिता, धर्मा के नेतृत्व मे महिलाओं की ग्राम टोली बनाई गई। वहीं इसी गांव में पुरुषों की टोली में प्रेमपाल, अनुज, पवन, दिनेश, सतवीर, विधि प्रकाश, बाबूलाल, करतार हनुमान नंबरदार, रवि दत्त, महावीर, सुरेंद्र, दीपक को रखा गया। कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए अलग-अलग परिधान में अलग-अलग गांव से टोलियां आए इसके लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।
फोटो कैप्शन 08: संबंधित है










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