अन्नी पहलवान ने 21000 रुपए की जीती कुश्ती
--कनीना के एकमात्र पहाड़ी वाले गांव सेहलंग में मेला आयोजित
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कनीना की आवाज। कनीना खंड के एकमात्र गांव सेहलंग, जहां पहाड़ी पर खिमज माता का आरोग्य सप्तमी पर मेला लगा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ धाम पर पूजन,दर्शन के लिए आती रही और देर शाम तक विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं होती रही। मेले से पहले दिन खेल प्रतियोगिताएं प्रारंभ हो गई थी तथा रहीश यादव ने पृथ्वी सिंह, किरणमई का बेहतर सांग प्रस्तुत किया।
कबड्डी नेशनल में आदमपुर ने प्रथम तथा महम(रोहतक)ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। वालीबाल प्रतियोगिता में मकड़ाना ने प्रथम मोनु पटौदी की टीम ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। प्रथम पुरस्कार में 31000 रुपए तथा द्वितीय पुरस्कार में 21000 रुपए प्रदान किए गए। क्रिकेट प्रतियोगिता में रावलधी की टीम ने प्रथम पुरस्कार 41000 रुपए तथा कोसली की टीम ने द्वितीय पुरस्कार 31000 रुपए प्रदान किए। कुश्ती प्रतियोगिता में 50 रुपए से 31000 रुपए तक की कुश्तियां हुई। अन्नी पहलवान ने 21000 रुपए की कुश्ती जीती। कामडे की कुश्ती छोटा नाड उर्फ साहिल भिवानी तथा अंकुश पहलवान,अहरी के बीच बराबरी पर छूटी।
मेले में भंडारे की भी बढिय़ा व्यवस्था रही,सेहलंगिया जनसेवा ग्रुप की तरफ से मेले में मुफ्त चाय, पानी,म_ी की व्यवस्था की गई। मेले में पंचायत तथा प्रशासन का पूर्ण सहयोग रहा। मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। मेले में जिला प्रमुख राकेश कुमार एवं पंचायत समिति चेयरमैन,खंड कनीना जय प्रकाश यादव ,जिला पार्षद प्रतिनिधि लीलाराम, सरपंच सेहलंग विनीत कुमार, पंचो के साथ उपस्थित रहे तथा धाम तथा गांव के विकास कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया।
फोटो कैप्शन 09: कुश्ती प्रतियोगिता देखते हुए
पाले का हुआ सरसों में नुकसान, किसान परेशान
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में सर्दी के मौसम में कई दिनों तक पाला जमा है। जहां विगत दिनों जमकर पाला जमा था जिसका सरसों में काफी नुकसान अब देखने को मिल रहा है।
किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, अजीत कुमार आदि ने बताया कि विगत दिनों पाला जमा था और पाला ज्यादा जमा था। जिसके कारण सरसों की फलियां खराब हो गई है। उन फलियां में लाल रंग के और बगैर तेल के दाने बन गए हैं। पाला जमने के कुछ दिनों बाद ही नुकसान का पता चलता है। किसानों ने सरसों के दाने दिखाते हुए बताया कि कुछ दिन पहले पड़े पाले का यह नुकसान हुआ है।
विगत दो दिन भी पाला जमा है। पहले भी कनीना क्षेत्र में कई बार पाला जमा है। पाले से हर साल किसानों की फसल को नुकसान होता है। किसान श्रीभगवान उर्फ पप्पू ने बताया कि पाले से करीब 10 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है। अभी पाला जमने की घटनाएं जारी है। पाला जमने का नुकसान भविष्य में दिखाई देगा।
फोटो कैप्शन 01: पाले से नुकसान हुई फलियों को दिखाते हुए किसान
प्राचार्य कुतरूं के कारनामे-07
-कुतरूं के सामने ही चमचामल से कहा-कल तक हमें पानी पिलाता था और आज नमस्ते भी नहीं करता
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव जहां करीब 40 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में जमे रहे। उन्होंने अपने जीवन में कई हजार विद्यार्थियों को शिक्षा दी है। उन्होंने करीब 35 विभिन्न मुख्याध्यापकों एवं प्राचार्यों के साथ काम किया और करीब 35 ही स्कूलों/कालेजों में अपनी सेवा दी है। वैसे तो डा. होशियार सिंह की कृति -मेरी शिक्षा का सफर में विस्तार से बताया जा चुका है। सेवा दौरान अनेक कष्ट और समस्याएं झेलनी कुतरूं जैसे प्राचार्यों के कारण वहन करनी पड़ी है। साफ छवि और मेहनतकश शिक्षकों की तरफ बहुत कम लोग मिलते और बोलते हैं। डा. होशियार सिंह ने सदा ही कुर्सी पर बगैर बैठे पढ़ाया और नाम कमाया है। इस अवधि में कुछ ऐसे प्राचार्य मिले जिनका नाम लेते वक्त भी फ़क्र होता है जबकि कुछ ऐसे प्राचार्य भी मिले जिनके नाम लेते हुए भी ऐसा महसूस होता है जैसे किसी गंदगी में हाथ लग गया हो। इसी दौरान उनके कारनामे भी सामने लाने पड़े हैं क्योंकि एक नहीं चार-पांच कुतरूं प्राचार्य मिले हैं जिनके कारनामे एपिसोड के रूप में पेश किए जा रहे हैं। किंतु पूर्ण रूप से नाम सहित गाथा पढऩे के लिए मेरी भविष्य प्रकाशित होने वाली पुस्तक कुतरूं प्राचार्य के कारनामे जरूर पढऩे का कष्ट करें। ये कारनामे यूं ही प्रकाशित होते रहेंगे चाहे मुझे अपनी जान भी क्यों न देनी पड़े चूंकि कुतरूं प्राचार्यों की नींद हराम हो चुकी हैं और वे कोई भी साजिश रच सकते हैं। अब कोई डर नहीं और न पहले था।
इंसान को अपनी औकात नहीं भूलनी चाहिए और जो औकात को भूल जाते हैं वो समाज में कलंकित कहलाते हैं। कुछ लोग पैैसे पाकर इस कदर इतरा जाते हैं कि इंसानियत को भी भूल जाते हैं। वो क्या थे कभी इस बात को नहीं भूलना चाहिए। इंसान की नम्रता सदा काम आती है। ऐसे ही एक नहीं दो वाक्य सामने आए जिनसे लगा कि कुतरूं प्राचार्य का मुंह ग्रामीण क्षेत्रों में कहते हैं ना भीगी बल्ली जैसा हो गया और रही बात चमचामल की वो कई दिनों तक बोल नहीं पाया। क्योंकि चमचामल कुतरूं प्राचार्य का खासमखास है। हुआ यूं की सजनी मैडम एक बार चमचामल के पास गई और चमचामल से नमस्ते किया। उसने नमस्ते भी ढंग से नहीं लिया, बैठने तक भी नहीं कहा। मैडम बहुत स्वाभिमानी थी, है और रहेगी। उन्होंने तपाक से कहा कि तुम शायद भूल गये चमचामल, तुम्हारे बाप ने भी हमें पानी तक पिलाया है, वो बड़े सीधे इंसान थे। तुम हमारे पास शिक्षा पाकर आज कुछ बन गए तो हमारी नमस्ते भी नहीं लेते। चाहिए की कुर्सी बैठने के लिए कहा जाए परंतु तुम्हारी औकात बदल गई है। लगता है सचमुच तुम अपनी औकात से बाहर चले गए। तुम्हें शर्म आनी चाहिए। तुम शायद भूल गए कि तुमने भी हमें कभी पानी पिलाया था। आज कुछ बन गए तो हमें भूल गए और यह चाहते हो कि हम तुम्हें ही पानी पिला दे। ध्यान रे एक दिन तुम्हें जरूर पानी पिलाऊंगी? इतना सुन चमचामल मायूस हो गया। पर कहते हैं कि चिकने घड़े का क्या बिगड़ता है किंतु कुतरूं प्राचार्य का मुंह सुल्फी जैसा हो गया। देखकर हंसी की फुहार छूट गई। कुछ ऐसा ही वाक्या एक शिक्षक के साथ भी हुआ और शिक्षक ने भी चमचामल से यही कहा कि पुराने दिनों को याद कर लो। कभी तुम पानी पिलाते थे, आज कुछ बन गए क्या, अपने पुराने दिनों को ही भुला दिया। यह तुम्हारा घमंड है और घमंड का सिर नीचा होता है। चमचामल और उसका कुतरूं प्राचार्य एक बार फिर से आंखें झुका कर ऐसे बैठ गए जैसे भीगी बिल्ली बैठी हो। आज तक इन वाक्यों को मैं नहीं भुला पाया हूं और जिसने भी ये वाक्या सुना उनके मुंह से निकला-
औकात को जो भूल गए,
वो तो फांसी पर झूल गये।
जो जन सज्जनता रखते हैं,
वो ही दुनिया को जंचते हैं।।
इंसान बनो इस जग में सदा,
राक्षसों का काम नहीं यहां।
यूं ही चले बुरी राह पर तो,
ढूंढते रहोगे नरक धाम कहां।।
जाना होगा एक दिन जहां से,
बुरे कर्मों से कुत्ते कहलाएंगे।
जब जाओगे इस दुनिया से तो
लोग जमके खुशियां मनाएंगे।।
नौकरी मिली क्या तुमको तो,
अपने आपे को ही भूल गए।
जब होंगे सेवानिवृत्त कभी यूं,
कहेंगे धरा से कांटे शूल गए।।
बुरा कर लो चाहे कितना यहां,
एक दिन नजरों से गिर जाओगे।
जब नहीं रहेगी ये नौकरी कभी,
जूते ही जूते लोगों के खाओगे।।
किसानों का दुश्मन बना हुआ है सरसों का मामा
--इस परजीवी पौधे को ओरोबंचे नाम से भी जाना जाता है
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां सरसों में इस समय सरसों का मामा जिसे ओरोबंचे नाम से भी जाना जाता है भारी मात्रा में खड़ा हुआ है। किसान इससे परेशान हो चले हैं चूंकि इसे खत्म करने की कोई खरपतवारनाशी नही है। यह एक परजीवी पौधा होता है जो सरसों, बैंगन, टमाटर, आक आदि फसलों एवं पौधों की जड़ों पर खड़े मिलते हैं। जिस प्रकार अमरबेल का रंग हरा नहीं होता उसी प्रकार ओरोबंचे का रंग भी हरा न होकर सफेद होता है। जिसके सफेद और बैंगनी फूल आते हैं। जब ये बीज पक जाते हैं तो बिखर जाते और अगले वर्ष फिर से उग जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता है कि ये फसलों की जड़ों पर उगते हैं इसलिए इनको किसी दवा से नष्ट करना भी मुश्किल है क्योंकि जिस पौधे की जड़ों पर उगते हैं उसको भी दवा का नुकसान होने का खतरा बना होता है। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि ओरोबंचे को हाथों से उखाडऩा जरूरी होता है। यह पौधा अपना भोजन नहीं बनाता और धीरे-धीरे सरसों और जिस भी पौधे की जड़ पर उगता उसका रस चूसते चूसते उसे कमजोर बना देता है। अंत से पौधा खत्म हो जाता है।
किसान सूबे सिंह, श्रीभगवान, योगेश, रोहित आदि ने बताया कि यह पौधा इस समय अर्थात सर्दी के मौसम में उगते हैं और सरसों में बहुत अधिक मिलते हैं। कभी कभार किसान इनको उखाड़ कर पशु को जरूर खिलाते हैं क्योंकि खरपतवार हैं। उनका कहना है कि इस पौधे के बारे में बहुत से किसान नहीं जानते और यह खेतों में यूं ही खड़े रहते हैं जबकि इनका उखाड़ कर फेंक देना चाहिए। इसकी के कारण खेतों में पैदावार घट जाती है। पूर्व विषय विशेषज्ञ डा. देवराज का कहना है कि यह पौधे खरपतवार एवं परजीवी हैं और फसलों के लिए नुकसानदायक है।
फोटो कैप्शन 02: किसान सरसों का मामा पौधा दिखाते हुए
संघ के शताब्दी वर्ष में हिंदू सम्मेलन को सफल बनाने के लिए बैठक आयोजित
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कनीना की आवाज। संघ के शताब्दी वर्ष में होने वाले चार कार्यक्रमों की शृंखला में चौथे और अंतिम कार्यक्रम हिंदू सम्मेलन जो मंडल स्तर पर होने हैं। इनको आकर्षक और ऐतिहासिक बनाने के लिए पाली मंडल के कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया है। इस क्रम में निरंतर छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन करके सम्मेलन में पहुंचने की योजना बनाई जा रही है। इस क्रम में पाली मंडल के गांव झाखड़ी में कार्यक्रम में पहुंचने की योजना बनाने की एक बैठक संयोजक दशरथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में अमित, पवन, राकेश, महेश, सुंदर, ईश्वर, विक्रम, विकास, प्रवीण, संजय, बनवारी लाल, नाथाराम, रोशन लाल, तुलसीराम, सतवीर फौजी, संदीप फौजी, हवा सिंह आदि की उपस्थिति में गांव से 301 महिला पुरुषों की टोली ढोल नगाड़े के साथ 8 फरवरी को बाबा जयरामदास आश्रम पहुंचने का आश्वासन दिया। साथ ही पारंपरिक परिधान पहनकर सौ युवाओं की टोली उस दिन हिंदू सम्मेलन में पहुंचे इसके लिए भी योजना बनाई गई। नहड़ा गाने वाली एक टोली कार्यक्रम में मनोरंजन के लिए अपनी प्रस्तुति देगी। इसी क्रम में पालड़ी परिहार में महिला और पुरुषों की बैठक आयोजित की गई और पाली में ललिता भारद्वाज हेमलता के सानिध्य में महिलाओं की एक बैठक में कलश यात्रा की योजना बनाई गई।
इन बैठकों को संबोधित करते हुए कैलाश पाली ने कहा कि भाषा- भूसा ,देश- वेश ,भाव- भजन ओर भोजन यह सब स्वदेशी हो गंगा गीत गायत्री गौ माता में आस्था हो वो सब भारतीय हिंदू हैं और उन सब के लिए हिंदू सम्मेलनों के दरवाजे खुले हैं। यह एक स्वर्णिम युग है जिसमें हम समाज में फैली कुरीतियों को नष्ट करके समरस समाज की स्थापना की ओर बढ़ रहे हैं। भारत का वैभव समस्त संसार में हो इसके लिए सामाजिक सद्भाव पर्यावरण स्वदेशी पर समाज को चिंतन करना होगा। उन्होंने कहा कि इन सम्मेलनों में साधु संतों का सानिध्य मिलेगा वही समाज को इक_ा करने का एक माध्यम यह सम्मेलन बनेंगे पालड़ी में जहां कविता, संतोष, सरोज, गुड्डी, राजबाला, सरिता, मुनेश, कन्नू, सुषमा, पूनम, सरिता, धर्मा के नेतृत्व मे महीलाओ की ग्राम टोली बनाई गई। वहीं इसी गांव में पुरुषों की टोली में प्रेमपाल, अनुज, पवन, दिनेश, सतवीर, विधि प्रकाश, बाबूलाल, करतार हनुमान नंबरदार, रवि दत्त, महावीर, सुरेंद्र, दीपक को रखा गया। कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए अलग-अलग परिधान में अलग-अलग गांव से टोलियां आए इसके लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।
फोटो कैप्शन 08: संबंधित है
एसडीवमा विद्यालय ककराला में मनाया गणतन्त्र दिवस
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कनीना की आवाज। सम्पूर्ण भारतवर्ष में 77 वें गणतन्त्र दिवस को बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इसी उपलक्ष्य में एसडी विद्यालय ककराला में भी 77 वें गणतन्त्र दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया। विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने राष्ट्रीय ध्वज को फहराया व सलामी दी। इसके बाद अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिससे पूरा वातावरण देश भक्ति के रंग में रंग गया। राजस्थानी नृत्य, हरियाणवी लोक नृत्य एवं पुलवामा घटना को विद्यार्थियों को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि सभी दर्शक भाव विभोर हो गए। प्यारा तिरंगा, वतन मेरे आवाद रहे तुम व तेरी मिट्टी में मिल जावा जैसे गीतों ने सम्पूर्ण सभा का समा बांध दिया। विद्यालय चेयरमैन ने गणतन्त्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ हर वर्ष भारत इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है। आज भारत एक सशक्त देश है। देश की सुरक्षा व रक्षा का दायित्व प्रत्येक नागरिक पर है। प्रत्येक नागरिक को सकारात्मक विचारों क साथ अपने कार्य को पूर्ण करना चाहिए जो देश को उन्नति के पथ पर बढ़ाता है। प्रत्येक नागरिक किसान, विद्यार्थी, अध्यापक, चिकित्सक, सैनिक आदि अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन कर देशभक्ति को निभा सकता है तथा देश के विकास में सहयोगी बनता है। वर्तमान समय में भारतीय जनता में सुनहरे भविष्य के प्रति आशाएं व विश्वास बढ़ा है संपूर्ण विद्यालय स्टाफ व विद्यार्थियों ने 77वें गणतंत्र दिवस पर एक दूसरे को बधाइयां दी। इस अवसर पर विद्यालय का सम्पूर्ण स्टाफ उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 07: एसडी स्कूल में गणतंत्र दिवस मनाते हुए
गौसंवर्धन हेतु कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में आया नंदी 211 सांड
-तैयार होंगी गायों की बेहतर नस्लें -भगत सिंह
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कनीना की आवाज। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में गौसंवर्धन हेतु कारोली गौशाला जिला रेवाड़ी से हरियाणा नस्ल का नंदी नंबर 211 सांड लाया गया है। इस कार्य के लिए देवेंद्र पुत्र पूर्व शिक्षक राम प्रताप का विशेष योगदान रहा है। वही इस मौके पर कनीना निवासी सत्यनारायण एडवोकेट हाई कोर्ट और सुकेश दीवान महेंद्रगढ़ भी हाजिर रहे। उन्होंने गौशाला में हो रहे नवीनीकरण कार्य को बहुत सराहनीय बताया। उन्होंने गौशाला में पहुंचकर समस्त गतिविधियों का अवलोकन किया।
प्रधान श्रीकृष्ण गौशाला भगत सिंह ने कारोली गौशाला के गौभक्त सन्नी का विशेष आभार व्यक्त किया जिन्होंने गौशाला से नंदी उपलब्ध करवाया है। उन्होंने कहा कि अब कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला को चार चांद लगाए जा रहे। हर क्षेत्र में विकास किया जा रहा है। गायों के लिए हर सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। गायों की नस्ल बेहतर हो इसलिए यह नंदी 211 नस्ल का सांड लाया गया है जो हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सालय एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में चैंपियन भी रह चुका है। उन्होंने बताया कि अब श्री कृष्ण गौशाला का में गायों के लिए चारा, पानी अलग-अलग रहने की व्यवस्था और हर प्रकार की सुविधा जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। विभिन्न गौ भक्त प्रतिदिन गौशाला पहुंच रहे और दान दे रहे हैं। करीब 500 गायें गोद ली जा चुकी हैं।
उल्लेखनीय है कि जब से कनीना में भगत सिंह को प्रधान बनाया है तब से श्रीकृष्ण गौशाला अग्रणी गौशाला बनती जा रही है। आने वाले समय में कुछ और विकास होने की पूरी संभावना है। इस मौके पर गौशाला सचिव यश यादव, मास्टर रामप्रताप कोषाध्यक्ष, सूबेदार महेंद्र सिंह ,सूबेदार दीनदयाल यादव, ऑडिटर अशोक कुमार ,कृष्ण कुमार, बलवान आर्य, मास्टर सुरेंद्र सोनी, नवीन यदुवंशी, नरेंद्र फौजी, सतबीर यादव, राज सिंह यादव, रामपाल यादव, अशोक ठेकेदार, देवेंद्र यादव, ठेकेदार ओमप्रकाश, डा. नीरज, दिलावर सिंह उप-प्रधान, रविंद्र बंसल, नरेंद्र सहित विभिन्न गणमान्य जन उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: गौशाला में आए नये सांड का अभिनंदन करते हुए
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कोटिया में स्थायी अध्यापक न होने ग्रामीणों ने दिया एसडीएम को ज्ञापन
- स्कूल गेट समक्ष किया विरोध प्रदर्शन, लंबे समय से परेशान हैं विद्यार्थी
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल के गांव कोटिया स्थित शहीद हनुमान सिंह राजकीय माध्यमिक विद्यालय में एक भी स्थायी अध्यापक न होने के चलते कोटिया ग्रामीणों ग्रामीणों ने रोष जताया और स्कूल द्वारा पर आंदोलन की किया।
तत्पश्चात एसडीएम कनीना डा. जितेंद्र को ज्ञापन भी दिया। क्योंकि विद्यालय में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। एक प्रतिनियुक्ति पर संस्कृत का शिक्षक आता है।
ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक 30 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय के एमआईएस पोर्टल पर 31 अगस्त 2022 तक मुख्य अध्यापक, गणित, सामाजिक, संस्कृत, पीटीआई, क्लर्क और बाबू के पद सृजित थे और सभी पदों पर अध्यापक कार्यरत भी थे किंतु एक सितंबर 2022 को सामान्य तबादले हुए तब विद्यालय में केवल मुख्य अध्यापक, पीटीआई बाबू और एक चपरासी के ही पद सृजित किए गये। जो तकनीकी खामी रही। इसके बाद सामान्य तबादले- 2022 चला जिसमें केवल एक मुख्य अध्यापक की नियुक्ति हुई। पीटीआई का पद था वह कैप्ट रखा गया। 1 सितंबर 2022 से विद्यालय में केवल मुख्याध्यापक, क्लर्क और चपरासी कार्य कर रहे थे।
ज्ञापन में कहा गया है कि विभागीय निर्माण अनुसार विद्यालय में मुख्य अध्यापक, विज्ञान, सामाजिक, संस्कृत, पीटीआई ,बाबू और चपरासी का पद सृजित होने चाहिए। इन पदों को एमआईएस पर सृजित न होना तकनीकी खामी है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में पिछले 1 सितंबर 2022 से केवल मुख्य अध्यापक, बाबू और चपरासी कार्यरत थे लेकिन 30 सितंबर 2025 को मुख्य अध्यापक भी सेवानिवृत्त हो चुका है। एक अक्टूबर 2025 विद्यालय में कोई भी स्थायी अध्यापक नहीं है। परीक्षा का समय आ चुका है। इन विद्यार्थियों का भविष्य अंंधकारमय हो गया है। विभाग को कई बार लिखा जा चुका है। ग्रामीणों की ओर से अनुरोध किया कि तुरंत प्रभाव से स्थायी अध्यापकों की व्यवस्था करें। इस संबंध में उन्होंने ज्ञापन शिक्षा एवं मंत्री आरती सिंह राव आदि को भेजा है। ज्ञापन में सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।
फोटो कैप्शन 04: विद्यालय के द्वार पर आंदोलन करते ग्रामीण
05: एसडीएम को ज्ञापन देते हुए
शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों की बदहालात-
कोटिया स्कूल में एक भी नियमित शिक्षक नहीं
-30 विद्यार्थी पा रहे हैं शिक्षा , प्रतिनियुक्ति पर आता है एक शिक्षक
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कनीना की आवाज। शहीद हनुमान सिंह राजकीय माध्यमिक विद्यालय कोटिया में वर्तमान में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। 30 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। एक मुख्य अध्यापक जरूर कार्यरत थे जो 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में बिना शिक्षकों के कैसे पढ़ाई हो?
एसएमसी सदस्य देशराज यादव,करतार सिंह, ओमप्रकाश, राजेंद्र सिंह, रामफल आदि ने बताया कि उनके कोटिया स्कूल में लंबे समय से एक मुख्य अध्यापक कार्यरत था जो 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो चुका है। अब कोई नियमित शिक्षक विद्यालय में कार्यरत नहीं है। एक शिक्षक सिहोर से प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कई बार शिक्षा अधिकारियों से शिक्षक भेजने की मांग की है किंतु सब बेकार गया।
अगर शिक्षा अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि एक शिक्षक डेपूट कर रखा है जो कार्यरत सीहोर में है किंतु पढ़ाने के लिए यहां आता है लेकिन वह भी नियमित रूप से नहीं आ पाता। यहां कम से कम से कम यहां तीन शिक्षकों की जरूरत है।
कभी कभार सेवानिवृत्त शिक्षक भी परेशान विद्यार्थियों की समस्या हल करने के लिए विद्यालय में आ जाते हैं। ऐसे में अब बेचारे विद्यार्थी क्या करें? अभिभावक भी अब तो परेशान हो चले हैं। नजदीक दूसरा स्कूल कम से कम 3 किलोमीटर दूर पड़ता है। जहां तक बच्चों को भेजना भी कठिन होता है। एसएमसी पदाधिकारियों ने बताया कि एमआईएस पर मुख्याध्यापक एवं पीटीआई के पद ही खोले हुए हैं बाकी सभी केप्ट रखे हुए हैं।
शिक्षा अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाती है तो उनका कहना होता है कि उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत करा दिया गया है। निकट भविष्य में तबादले होने जा रहे हैं जिसमें शिक्षक आ जाएंगे। सभी पद सृजित करने की भी बात कही गई है। समस्या जल्द ही ठीक होने के आसार है। उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों का एक सत्र खराब हो चुका है वहीं यह भी निश्चित नहीं है कि तबादलें हो पाएंगे या नहीं?
फोटो कैप्शन 06: कोटिया स्कूल जहां कोई शिक्षक नहीं, दिखाते अभिभावक
विगत दो दिनों जमा
है पाला
- मंगलवार को हुई 2 एमएम वर्षा, दिनभर छाये रहे बादल
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में विगत रविवार और सोमवार को पाला जमा वहीं मगलवार को दो एमएम वर्षा हुई है। पाला भी इतना भारी मात्रा में जमता है कि सब कुछ सफेद नजर आता है। दूर दराज तक घास फूस, उपले, पौधों के पत्तों पर पाला जमा रहता है जो करीब तीन घंटों बाद गायब होता है। सुबह सवेरे बाहर निकलना भी कठिन हो गया है। दुकानदार सभी सुबह सवेरे आग जलाकर दुकानों के आगे बैठे रहते हैं। मंगलवार को एक बार फिर से मौसम बदला और दो एमएम वर्षा हुई। दिनभर बादल छाये रहे।
किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, योगेश कुमार, कृष्ण कुमार आदि का कहना है कि कहीं लगातार पाला जमना फसलों को नुकसान न पहुंचा दे। कृषि विभाग भी मानता है कि लगातार पाला जमा तो फसल को नुकसान होगा परंतु अभी तक ऐसी हालत नहीं है कि पाले से कोई नुकसान हो।
विगत दिनों भी कनीना क्षेत्र में पाला जमा था। दूसरी बार क्षेत्र में पाला जमा है। लगातार मौसम बदल रहा है और किसान लगातार फसल पर नजर जमाए हुए हैं।
फोटो कैप्शन 05 व 06: जमा हुआ पाला











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