दो अलग-अलग जगह चोरी
-अज्ञात चोर कर ले गया नकदी व जेवरात चोरी
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल के दो गांवों में चोरी हो गई। अज्ञात चोर नकदी और जेवरात चोरी कर ले गये।
मिली जानकारी अनुसार सेहलंग में कर्नल राजकुमार के घर से अज्ञात चोर चोरी कर ले गया। कर्नल ने रखवाली के लिए केयर टेकर रख रखा है। केयर टेकर जब खाना खाने के लिए करीब एक घंटे के लिए बाहर गया और जब लौटा तो 15000 रुपये की नकदी और जेवराज चोरी मिले। पुलिस मौके पर पहुंची और जांच की। उधर पोता गांव के मंदिर में अज्ञात चोर दानपात्र से करीब 3000 रुपये चोरी कर ले गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
राक्षसी जानवर बंदर-03
-- बच्चे तथा मोबाइल तक तक उठा ले जाते हैं बंदर
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कनीना की आवाज। यूं तो कुछ लोग आज भी बंदरों की पूजा करते हैं, उन्हें हनुमान की फौज बताते हैं जो गलत है। परंतु धीरे-धीरे लोगों का बंदरों के प्रति मोह भंग होता जा रहा है। कभी बंदरों को खाना खिलाने के लिए बंदरों के गांव में जाते थे, आजकल उनकी संख्या दिनों दिन घटती जा रही है। उधर बंदर भी अपना स्थान छोड़कर गांव में आ गए हैं और किसी भी घर, मोहल्ले ,सड़क किनारे देखा जा सकता है। बंदरों ने अब तो उत्पाद मचा रखा है। एक गांव से एक बच्चे को ही उठा ले जाने का मामला सामने आया। मोबाइल उठाकर ले जाने के मामले भी सामने आए हैं। घरों से फ्रिज खोलकर सामान को अक्सर खा जाते हैं। फल वाले पौधे तो समझो कि लगाकर ही दुखी होना है। चाहे 20 साल देखरेख करो एक मिनट भी इधर-उधर हो गए तुरंत पेड़ को तहस नहस कर जाते हैं। बंदरों का नुकसान अब तो सहन करने योग्य नहीं रहा है। वास्तव में बंदर बेहद नुकसान कर रहे हैं।
विज्ञान मानता है कि बंदरों से ही इंसान की उत्पत्ति हुई और बंदरों पर अनेक प्रयोगशाला में प्रयोग किए जाते हैं। इसीलिए बंदरों का अगर कोई लाभ है तो वह इन पर किए गए प्रयोग हैं। वरना कोई बंदरों से एक लाभ तो बता दीजिये।
बंदरों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है जो किसी से डरते नहीं। बंदरों को कुत्तों से मुकाबला करते हुए देखा होगा और बंदर कुत्तों को भी पीछे धकेल देते हैं। बंदर आने वाले समय में इतने अधिक हो जाएंगे कि इंसान इनके आगे मजबूर हो जाएगा और ये इंसान को जबरदस्ती घेरकर घर का सामान उठा ले जाएंगे। अभी भी मंदिरों में देखने में आया है कि बंदर किसी के हाथ से झपट्टा मार कर प्रसाद तक छीन ले जाते हैं। रेहड़ी वाले इसलिए दुखी है उनके फलों को उठा ले जाते हैं, अंडे वाले इसलिए दुखी उनके अंडे उठा ले जाते हैं। अगर किसी जगह पक्षी कोई मिल जाता है उसको मार कर खा जाते हैं, पक्षियों के अंडे का रस चूस जाते हैं। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां पर बंदर न पहुंच जाए और जीवों के लिए सबसे अधिक घातक बंदर साबित हो रहे हैं। अब तो झटका पका मशीन ही इनके लिए कारगर साबित हो सकती है और वह लगवानी भी चाहिए।
बड़े नेताओं की आड़ में कर रहे छुटभैये नेता उल्टे सीधे काम
-वोट तक भी नहीं डालते
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कनीना की आवाज। अब तो हालात यह बन गई है हर गांव मोहल्ले में कुछ ऐसे छुटभैया नेता पनप गये हैं जो बड़े नेताओं की आड़ में उल्टे सीधे काम कर रहे हैं। बड़े-बड़े नेताओं की फोटो लगवा कर बड़े-बड़े पोस्टर मुफ्त में लगा लेते हैं, इन पोस्टरों में बिजली भी सरकारी प्रयोग करते हैं। वैसे तो कोई व्यक्ति चोरी करता पाया जाए तो बिजली विभाग उन पर जुर्माना लगता है किंतु सरेआम चोरी कर रहे हैं इन छुटभैया नेताओं के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करता। सबसे बड़ी बात है कि छुटभैया नेता बड़े नेताओं की आड़ में कहीं अतिक्रमण कर रहे हैं, कभी किसी को धमका रहे हैं, कभी किसी के दरवाजे पर अपनी गाड़ी जबरदस्ती खड़ी कर रहे हैं या कभी किसी से छेड़छाड़ कर रहे हैं। कितने ही उल्टे सीधे काम कर रहे हैं यहां तक कि ऐसे कुछ छुटभैये नेता भी देखने मिले जो चोरी करने से पीछे नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि चलिए किसी नेता की आड़ ली जाए, अच्छी बात तो हैं किंतु कम से कम उसका हित तो किया जाए परंतु ऐसे भी केस देखने को मिले। छुटभैया नेता सामने आए कि नेता समाज के लिए कलंक है। अभी भी लोग नहीं समझेंगे तो न जाने कब समझ पाएंगे। इनके पास बड़े-बड़े वाहन चलाते हैं और उल्टे सीधे कार्यों से ही वाहन चलाए जाते हैं, एक नंबर के पैसों से तो बहुत कम लोग ही अपने वाहन चला पाएंगे। ऐसे भी छुटभैया नेता देखे हैं जो गलियारों में कुत्तों की भांति पिटते हैं परंतु उनको शर्म नहीं है, बेशर्मी की हद कर रखी है। कुछ तो शराबी और कबाबी भी मिलते हैं। कुछ गिरे हुए चरित्र के हैं। समाज को ऐसे छुटभैया नेताओं को पहचानना चाहिए और उनसे बचकर रहना चाहिए। वरना ये अपने पास रहने वाले लोगों को भी कलंकित कर देंगे।
धनौंदा के कृष्णानंद आश्रम में पूर्णिमा पर विशाल भंडारा
-अब तक 551 युवाओं को दिलवाई जा चुकी हैं नशा-मुक्ति की शपथ
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कनीना की आवाज। उपमंडल के गांव धनौंदा स्थित कृष्णानंद आश्रम में पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को विश्व शांति के लिए यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
आश्रम के संत शिवानंद महाराज ने बताया कि आश्रम में हर पूर्णिमा को विश्व शांति के लिए यज्ञ का आयोजन किया जाता है। यज्ञ के दौरान न केवल धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं बल्कि समाज सुधार के लिए विशेष पहल भी की जाती है। इसी कड़ी में युवाओं को नशे से दूर रहने की शपथ दिलवाई जाती है। अब तक 551 युवाओं को नशा-मुक्त जीवन जीने का संकल्प दिलाया जा चुका है।
स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा कि नशा समाज और परिवार को खोखला कर देता है। इसलिए युवाओं को सही दिशा में ले जाने और उनके जीवन को सकारात्मक बनाने के लिए आश्रम लगातार प्रयासरत है। भंडारे में आए श्रद्धालुओं ने संत महराज से आशीर्वाद लिया और समाज सुधार के इस अभियान की सराहना की। इस दौरान सिटी थाना प्रभारी रविंद्र सिंह, ट्रस्ट के व्यवस्थापक कैलाश गोयल,अनिल यादव, कर्मवीर सिंह, विजय कुमार आर्य, फतेहचंद दायमा, मखनलाल आचार्य, आनंद सिंगल दिल्ली, ठाकुर रतन सिंह तंवर, राजेंद्र नंबरदार, ठाकुर घनश्याम सिंह, घनश्याम शास्त्री, प्रदीप चौहान मोहनपुर दीपांशु तंवर सहित अन्य मौजूद रहे।
उधर संत उद्योदास आश्रम में संत लालदास महाराज ने पूर्णिमा के अवसर पर भजन, प्रवचन किये तथा प्रसाद वितरित किया। दूर दराज से आये भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
फोटो कैप्शन 06: भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते हुए श्रद्धालु
चंद्र ग्रहण आज रात को
-जानिये ग्रहण के बारे में अफवाहें
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कनीना की आवाज। साल 2025 का दूसरा आखिरी चंद्र ग्रहण आज को लगने वाला है. भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को रात 08.58 बजे शुरू होगा और रात 02:25 बजे ग्रहण खत्म होगा। चंद्र ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, लेकिन इसके बारे में कई तरह के अंधविश्वास प्रचलित हैं. आइए जानते हैं सच्चाई को जाने--
***ग्रहण के समय गर्भवती महिला अगर बाहर निकली तो बच्चे पर दाग या कट का निशान पड़ेगा। विज्ञान के अनुसार, इसका कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है। बच्चे की शारीरिक बनावट गर्भ में डीएनए और विकास प्रक्रिया से तय होती है, ग्रहण से नहीं।
***ग्रहण के समय खाना बनाने या खाने से जहर फैलता है। वास्तव में ग्रहण का भोजन पर कोई असर नहीं पड़ता। पहले के समय लोग खाने को बचाने के लिए सावधानियां लेते थे क्योंकि बिना फ्रिज के खाना जल्दी खराब हो जाता था, जिससे यह मान्यता बनी।
***ग्रहण देखने से आंखें खराब हो जाती हैं।
विज्ञान अनुसार सूर्य ग्रहण देखने से आंखें खराब हो सकती है. बिना सुरक्षा चश्मे के देखने पर आंखों को नुकसान हो सकता है। चंद्र ग्रहण पूरी तरह सुरक्षित है, नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है।
****ग्रहण के दौरान घर में पानी और पौधे दूषित हो जाते हैं। यह झूठ है विज्ञान कहता है कि
इसका कोई असर नहीं होता। यह सब अंधविश्वास है.
***ग्रहण के समय पूजा-पाठ या स्नान न करने से पाप लगता है। यह झूठ है।यह धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण का इंसानी कर्मों से कोई लेना-देना नहीं।
***ग्रहण धरती पर प्राकृतिक आपदाएं (भूकंप, बाढ़ आदि) लाता है जो सरासर झूठ है।ग्रहण एक खगोलीय घटना है, इसका प्राकृतिक आपदाओं से कोई सीधा संबंध नहीं।
***ग्रहण सेहत पर बुरा असर डालता है। यह भी गलत है।इस बात को लेकर कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है। अगर लोग बीमार महसूस करते हैं तो वह डर और मान्यता की वजह से होता है।
ग्रहण से जुड़ी ज्यादातर बातें सिर्फ परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं. विज्ञान के अनुसार, यह केवल सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के एक सीध में आने से लगता है, जिसका इंसानी स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं या खाने-पीने पर कोई असर नहीं।
ये जानकारी धर्मपाल शर्मा जिला संयोजक हरियाणा विज्ञान मंच ने दी।
दिन भर धूप खिली लेकिन सड़कों पर जमा है अभी भी गंदा जल
-किसानों को मिली राहत
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां रविवार को दिनभर धूप खिली, बीच-बीच में कभी कभार बादलों की आवाजाही जारी रही लेकिन सड़कों पर अभी भी गंदा जल खड़ा हुआ है। नालियां भरी खड़ी है तथा जोहड़ लबालब हैं। होली वाला और कालरवाली जोहड़ मार्गों पर पानी भरा है। यदि दो-तीन दिनों तक वर्षा नहीं होती तब जाकर यह पानी कम होगा वरना हालात बदहालात रहेगी। आवागमन अभी भी गंदे पानी से होकर हो रहा है।
किसानों ने आज महसूस की किसानों ने अपने खेतों में हलचल बढ़ा दी है किंतु उन्हें डर सता रहा है कि कहीं दोबारा से वर्षा न हो जाए। ऐसे में किसानों अपनी फसलों को सुखाया और यह देख रहे हैं कि कुछ बाजरे में बचा है या नहीं बचा।
इस संबंध में पूर्व कृषि अधिकारी महेंद्रगढ़ तथा वर्तमान में निदेशक हिसार डा. रमेश कुमार से बात हुई। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने बाजरे की काटकर फसल ढक रखी है उन्हें अब सूखा लेनी चाहिए और जिन्होंने काट कर डाल दी थी और ढका नहीं वो लगभग खराब हो चुकी, अंकुरित हो गई है तथा अधिक वर्षा कारण कम गुंजाइश है कि उसे दाने सही सलामत होंगे। उन्होंने बताया कि फसल जो खड़ी हुई है उनमें नुकसान होना था हो चुका लेकिन उसकी भी लावणी/कटाई करनी चाहिए और जो भुट्टे गिर गए या बाजरे का पौधा गिर गया उनमें नुकसान हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष को ध्यान में रखते हुए किसानों का अपनी फसल काट कर डाली गई उसे सूखा लेना चाहिए लेकिन ढकने का प्रबंध जरूर रखें।
फोटो कैप्शन 5: नालियां वर्षा जल से ओवरफ्लो
भवन की चारदीवारी को लेकर आंबेडकर जनजागरण समिति िकी बैठक संपन्न
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कनीना की आवाज। डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति कनीना की बैठक कान्हा सिह पार्क कनीना में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति के प्रधान कृष्ण कुमार पूनिया ने की
बैठक में सभी ने अपने-अपने विचार प्रकट किये। बैठक में प्रवक्ता सूरत सिंह ने अंबेडकर भवन की चारदीवारी को लेकर विचार विमर्श किया। एडवोकेट दिलीप सिंह ने कहा कि नगर पालिका चेयरपर्सन से समिति के सदस्य मिलकर अंबेडकर भवन की चारदीवारी के बारे में विचार विमर्श किया था जिसमें चेयरपर्सन ने आश्वासन दिया कि अंबेडकर भवन की चारदीवारी का कार्य प्रस्तावित भूमि पर जल्दी ही शुरू कर देंगे।
समिति इसके लिए नगर पालिका चेयरपर्सन का तहे दिल से आभार प्रकट करती है। इसी कड़ी में महेश गोमला ने कहा कि समाज में फैली हुई कुरीतियां को समाप्त करने के लिए समिति अहं कार्य करें। उपस्थित लोगों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।
इस मौके पर डीगराम, कोषाध्यक्ष बलबीर सिंह तोंदवाल, भोजावास अंबेडकर समिति के प्रधान विनोद कुमार एडवोकेट, समिति के उप प्रधान पवन कुमार कनीना, समिति के सह सचिव विजयपाल मास्टर, समिति के कार्यकारिणी सदस्य रामेश्वर कनीना, राकेश कुमार छितरोली, सूबे सिंह, डा. भीमराव युवा समिति भडफ़ के प्रधान सचिन रंगा, कुलदीप कनीना, लोकेश उर्फ बंटी, गजराज सिंह , कार्यकारिणी के सदस्य डा. राजकुमार सिंह चौहान इत्यादि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 04: आंबेडकर जनजागरण समिति की बैठक
जीवन में सफल होना है तो ईमानदारी अपनाओ
कुलदीप कुमार कनीना,
मेरी माताजी माया देवी 40 वर्ष की उम्र में 19 फरवरी 1992 को स्वर्ग सिधार गई थी। वे हंसमुख ,नेक एवं ईमानदारी की राह पर चलने वाली थी। वो हमेशा ईमानदारी से जीवन जीने की प्रेरणा देती थी। एक दिन जब मैं कक्षा छठी में स्कूल से पढ़कर आया तो स्कूल होमवर्क करने में आनाकानी करने लगा। उन्होंने मुझे एक ही बात कही-अगर जीवन में सफल होना है तो आलस्य छोड़कर ईमानदारी से अपना काम करते रहो। एक दिन सफलता कदम चूमेगी। जब मेरी मां का देहांत हो गया तो मुझे उनकी याद आने लगी। मैं अपनी मां के बताए गए आदर्शों पर आगे बढऩे लगा और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेहनत एवं ईमानदारी के बल पर मुझे जीवन की ऊंचाइयां मिली। आज भी उन्हें याद करके उनकी ईमानदारी, देवीरूप एवं भक्तिभाव याद आ जाते हैं। आज भी जब कभी पूरा परिवार मिल बैठता है तो उनको याद जरूर करता है। ऐसे महान माता के कारण आज मेरा एवं मेरे परिवार का नाम रोशन है।
फोटो कैप्शन: कुलदीप कुमार लघु व्यवसायी, कनीना एवं माया देवी।
तर्पण के लिए भेजें बुजुर्गों के प्रसंग
- मुफ्त में होंगे प्रकाशित
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कनीना की आवाज। अपने पितरों को याद करते हुए उनकी फोटो तथा स्वयं की फोटो मेरे व्हाट्सअप पर भेजे। पितरों को याद करने वाले प्रसंग भेजें। आप अपने पितरों को क्यों याद करते हो ऐसे प्रसंग भेजते हुए अपनी फोटो तथा अपने पितरों की फोटो भेजे। व्हाट्सएप 94163 48400
अब होगा सुमन ट्रस्ट के कार्यालय का निर्माण
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कनीना की आवाज। कनीना- रेवाड़ी सड़क मार्ग पर राजकुमार कनीनवाल के पास श्रीमती सुमन यादव पत्रकार चैरिटेबल ट्रस्ट कनीना की लाइब्रेरी का निर्माण हो चुका है। पास में दैनिक जागरण कार्यालय भी निर्मित किया गया है। कार्य लगभग पूर्ण हो गया है। कैमरे लगवाए जा रहे हैं वहीं इनवर्टर एवं वाई-फाई का प्रबंध भी किया जा रहा है। वहीं पास में अपने प्लाट पर श्रीमती सुमन यादव पत्रकार चेरिटेबल ट्रस्ट के कार्यालय का निर्माण अब करवाया जाएगा। तत्पश्चात दोनों एक साथ चलेंगे। एक और कार्यालय वहीं लाइब्रेरी यह लाइब्रेरी। लाइब्रेरी निशुल्क होगी। कार्यालय का निर्माण लाइब्रेरी के पास ही अपने प्लाट पर होगा जिसके लिए अब कच्ची सामग्री डलवाने का कार्य शुरू किया जा रहा है।
तर्पण
महेश बोहरा, कनीना
मेरे पूज्य पिताजी सत्यवीर सिंह बोहरा 31 अक्टूबर 2019 को स्वर्ग सिधार गए वह सच्चे, इमानदार व गो-प्रेमी थे। उन्होंने कनीना व आसपास के गांव के सहयोग से कनीना में श्री कृष्ण गौशाला की स्थापना करके श्रीकृष्ण गौशाला में प्रथम प्रधान के पद पर सेवा भी दी। कनीना नगर पालिका में पार्षद के पद पर रहते हुए उन्होंने नगर वासियों की तन मन धन से सेवा की उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई के लिए ईमानदारी के साथ व्यतीत किया। बीज की दुकान के माध्यम से उन्होंने 35 साल किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध करवा के अन्नदाताओं का बहुत लाभ किया। उन्होंने हमें हमेशा अच्छी सीख दी और वे कहते थे कि बेटा धर्म की जड़ सदा हरी रहती है धर्म करते रहना चाहिए और हमेशा असहाय आदमी की निस्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए जैसा तुम करोगे वैसा ही तुम्हारे पास लौटकर आएगा। मैं आज उनके पदचिह्नों पर चलकर बेहतर ढंग से जीवन जी रहा हूं तथा उनकी बातें सदा रह रहकर याद आती हैं। वे इस जग में नहीं हैं किंतु श्राद्ध के वक्त उनकी बहुत याद आती है।
फोटो कैप्शन: महेश बोहरा तथा स्व राव सतबीर बोहरा













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