कनीना के होटल संचालकों के साथ थाना प्रभारी ने की बैठक
-ठहरने वाले व्यक्ति का विधिवत रखें रिकार्ड
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कनीना की आवाज। थाना शहर कनीना पुलिस ने थाना परिसर में होटल संचालकों व मालिकों के साथ बैठक की। सभी होटल संचालक होटल में ठहरने वाले व्यक्ति का विधिवत रिकार्ड रखें अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। होटल में कमरा किराए पर लेने वाले बाहरी व स्थानीय लोगों का आर्डडी प्रूफ लेना तथा रजिस्टर में एंट्री कर मेंटेन रखना जरूरी है। शहर थाना कनीना प्रबंधक ने होटल संचालक व मालिकों के साथ बैठक कर यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के दृष्टिगत उनमें सीसीटीवी कैमरे, उनकी रिकॉर्डिंग व कमरे में ठहरने वाले व्यक्ति का रिकार्ड रखना अनिवार्य है। होटल में बिना आईडी प्रूफ के कमरा किराए पर देने तथा किराएदार नाबालिग पाए जाने पर होटल संचालक व मालिक के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। थाना शहर कनीना पुलिस द्वारा होटलों को चेक भी किया गया।
फोटो कैप्शन 03: होटल संचालकों से बात करते हुए थाना प्रभारी
नवरात्रों में याद आते हैं जौ,30 साल पहले होती थी खूब खेती
-जौ शून्य हेक्टेयर पर पहुंचा, राबड़ी को भी तरसे लोग
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कनीना की आवाज। किसान जौ एवं चने की खेती करना भूलते जा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जौ की रोटी, राबड़ी तथा धानी आदि बनाकर प्राकृतिक ठंडक प्राप्त करते हैं। अब न तो जौ की खेती होती और न राबड़ी एवं धानी। नवरात्रों में जौ बड़े याद आते हैं।
1986-87 तक कनीना क्षेत्र की करीब 33 हजार हेक्टेयर भूमि हजारों एकड़ में जौ की खेती की जाती थी। वैसे तो जौ न केवल पूजा आदि बल्कि हवन आदि में भी काम आता है। जब नवरात्रे चलते हैं तो जौ की विशेष मांग होती है। गेहूं-चना एवं जौ -चने की मिश्रित खेती की जाती थी। 1982 में स्ंिप्रकलर फव्वारा आया जिसके चलते चने की खेती घटती जा रही है और वर्तमान में तो चना अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
जौ को गंगा में डालने, पूजा अर्चना,हवन आदि में काम आता है वहीं पैदावार 40 मण प्रति हेक्टेयर तथा भाव 2500 रुपये क्विंटल तक होता है। होली के पर्व पर जहां जौ को भूनकर पूरा परिवार चखता है और तत्पश्चात ही लावणी की शुरुआत होती आ रही है। एक जमाना था जब हर घर में जौ की खेती की जाती थी जिसे पूरी गर्मी आनंद से रोटी एवं अन्य रूपों में प्रयोग किया जाता था। जौ की रोटी खाने के लिए या फिर धानी बनवाने के लिए दूसरे क्षेत्रों से जौ खरीदकर लाते हैं।
जौ की रोटी प्रचलन था जो सेहत के लिए अति लाभकारी मानी जाती थी। राबड़ी चाव से खाते हैं वहीं जौ का प्रयोग बीयर आदि बनाने में लेते हैं। शरीर में ठंडक के लिए राबड़ी को गर्मियों में खाते हैं किंतु अब राबड़ी की बजाय चाय पर आ पहुंचा है। पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज बताते हैं कि अब जौ की पैदावार नहीं हो रही है चूंकि किसानों का रुझान ही समाप्त हो गया है।
वैज्ञानिक आधार भी है नवरात्रों का-बालकिशन शर्मा
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कनीना की आवाज। शारदीय शुरू हो चुके हैं। मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा मां, , शकंदमाता,कात्यायनी, कालरात्रि, महा गौरी, सिद्धिदात्रि के रूप में पूजा की जाती है। भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। नवरात्रों में दुर्गा मां के नौ रूपों में मां की पूजा करने के अलावा व्रत शरीर में स्फूर्ति एवं संचार होता है।
बालकिशन शर्मा बताते हैं कि इस मौके पर व्रत रखाने एवं पुराने अन्न को नौ दिनों तक शरीर से समाप्त करके नए अन्न को ग्रहण करने का नियम है। मौसम के बदलाव से नया अन्न तुरंत शरीर में ग्रहण नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि इस दिन व्रत किया जाता है।
माना जाता है कि एक बार शरीर में ग्रहण किया अन्न 9 दिनों में पूर्ण रूप से शरीर में पच जाता है और रक्त में परिवर्तित हो जाता है। किंतु नवरात्रि बदलाव का समय होता है या तो सर्दी से गर्मी या गर्मी से सर्दी के मौसम में नवरात्रे आते हैं। इस समय नया अनाज भी उपलब्ध हो जाता है। शरीर से पुराना खाया हुआ अनाज 9 दिनों में पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है क्योंकि नया अन्न ग्रहण करने से बीमारियां एलर्जी आदि होने की संभावना बढ़ जाती है।
यही कारण है कि नवरात्रों पर 9 दिन व्रत रखा जाता है ताकि शरीर का पुराना अनाज पूर्ण रूप से समाप्त हो जाए तत्पश्चात धीरे-धीरे नए अनाज को ग्रहण किया जाता है जो शरीर में स्फूर्ति और संचार पैदा करता है। धार्मिक आधार पर इन दिनों नवरात्रों में मां के नौ रूपों के पूजा करते है।
नवरात्रि वास्तव में शरीर में शक्ति ,संचार, स्फूर्ति प्रदान करने वाला होता है। नौ दिनों तक उगाये गये जौ को व्रत समापन के दौरान ज्वारे रस के रूप में पीना सेहत के लिए बेहतर माना जाता है किंतु लोग उगाये हुये जौ को जोहड़/नहर में डाल आते हैं। इसको प्रयोग नहीं करते हैं।
फोटो कैप्शन: बालकिशन शर्मा
अधूरा कार्य किया जाए पूर्ण
-एक साल से अधर में अटका है सड़क निर्माण कार्य
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कनीना की आवाज। कनीना खंड के गांव धनौन्दा से मोहनपुर (नांगल) पुराने सम्पर्क मार्ग पर सड़क निर्माण का कार्य दो जगह पर बीच में छोड़ दिए जाने से अनेक गांवों के लोगों में रोष व्याप्त है। लोगों ने हरियाणा सरकार तथा जिला प्रशासन से छोड़े गए अधूरे निर्माण कार्य को तत्काल शुरू कर सड़क निर्माण पूरा करने की मांग की है।
रमेश कुमार, सुरेश कुमार, महेंद्र कुमार आदि ने बताया कि कि धनौन्दा से मोहनपुर पुराने संपर्क मार्ग को पक्का करने का 60 प्रतिशत कार्य एक साल से पूरा हो चुका है। यह सड़क रेवाड़ी, कनीना, महेन्द्रगढ़ राज्य सड़क मार्ग तक बनकर तैयार हो चुकी है परन्तु इससे आगे का कार्य रुका हुआ है। दूसरा इस सड़क पर धनौन्दा पंप हाउस से निकलने वाली मेन जवाहरलाल नेहरू कनाल, खेड़ी माइनर, बवाना माइनर पर पुलों का निर्माण कार्य एक साल से लटका हुआ है। इस सम्पर्क मार्ग के पक्का बनने से अनेक गांवों के लोगों को सुविधा मिलेगी तथा विकास कार्यों से क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। सड़क निर्माण कार्य पूरा होने से दोनों गांवों के बीच आवागमन सुगम होगा तथा नारनौल और महेन्द्रगढ़ जाने वाले यात्रियों का भी समय व धन बचेगा। उन्होंने कहा कि एक साल से सड़क निर्माण कार्य अधूरा लटका होने के कारण इलाके के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन ने तत्काल छोड़े गए अधूरे कार्यों को पूरा करने का कार्य शुरू कर सड़क निर्माण कार्य पूरा किया जाए।
शहीद की पुण्यतिथि 26 सितंबर
अंतिम सांस तक लड़ते हुए शहीद हुये थे सज्जन सिंह
-राष्ट्रपति ने दिया था उनकी पत्नी को अशोक चक्र
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कनीना की आवाज। कनीना कस्बा के अशोक चक्र से सम्मानित शहीद सज्जन सिंह ने अपने प्राणों की आहुति देकर कई देशद्रोहियों को मार गिराया। वे अंतिम सांस तक दुश्मनों से लड़ते रहे और देश के लिए शहीद हुए। उनकी बहादुरी पर राष्ट्रपति द्वारा मरणोपरांत अशोक चक्र से उनकी पत्नी कौशिल्या देवी को प्रदान किया था।
जिला महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बा में 30 मार्च 1953 में मंगल सिंह-सरती देवी के साधारण परिवार में जन्म लिया। जन्म से ही वे अति कुशाग्र बुुद्धि के धनी थे जिसके चलते वे जब कनीना के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करते हुए 27 मई1971 में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की बच्चा कंपनी में भर्ती हो गए।
उनकी वीरता को देखते हुए 26 सितंबर 1994 को उन्हें जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में उग्रवादियों की तलाश में भेजे गए। उन्हें अपनी टुकड़ी के कमांडर की भूमिका दी थी। उनकी टुकड़ी उग्रवादियों का पीछा करते हुए उनके करीब पहुंच गए। उग्रवादी घात लगाए बैठे थे कि टुकड़ी उनकी ओर ही बढ़ रही थी। जब सूबेदार सज्जन सिंह की नजर उग्रवादियों पर पड़ी तो वे आगे बढ़ते हुए उनसे जा भिड़े ताकि पूरी टुकड़ी की जान बचाई जा सके। महज उग्रवादियों से 15 मीटर दूरी पर भीषण युद्ध चला। उग्रवादियों के पास भारी मात्रा में गोले, हथियार आदि होने के कारण तथा उनकी संख्या अधिक होने के कारण शहीद सज्जन सिंह छह उग्रवादियों को अकेने ही मार गिराने में सफल हो गए थे किंतु एक और उग्रवादी घात लगाकर बैठा हुआ था जिसकी गोली सूबेदार सज्जन सिंह के सिर में लगी। गोली सिर के पार गुजर गई किंतु उस उग्रवादी को भी मार गिराया।
इस प्रकार सूबेदार सज्जन सिंह ने अपनी जान पर खेलते हुए पूरी टुकड़ी के प्राणों की रक्षा की। उनकी बहादुरी एवं वीरता पर तत्कालीन राष्ट्रपति डा शंकर दयाल शर्मा ने मरणोपरांत उनकी पत्नी कौशिल्या देवी को 26 जनवरी 1995 को अशोक चक्र से नवाजा जो शांति समय का सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। ऐसे वीरों एवं देशभक्तों पर समस्त राष्ट्र को नाज है। कनीना के बाबा मोलडऩाथ आश्रम स्थित पार्क में शहीद की प्रतिमा लगी हुई है जो आने वाली पीढिय़ों को प्रेरणा का काम करती रहेगी। उनकी बरसी पर प्रत्येक वर्ष उन्हेें दूर दराज से आए सैनिक एवं वीर याद करते हैं।
शहीद सज्जन सिंह अपने पीछे दो पुत्रियां एवं एक पुत्र छोड़ गए थे। तीनों ही सदस्यों की शादी हो चुकी हैं तथा अपना अपना कारोबार चला रहे हैं। उनकी पत्नी कौशल्या देवी अपने पति की कुर्बानी को याद करके रो पड़ती हैं।
फोटो कैप्शन: शहीद सज्जन सिंह।
एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में अध्यापक-अभिभावक बैठक का आयोजन
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कनीना की आवाज। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में अध्यापक-अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में 1005 से अधिक अभिभावकों ने भाग लेकर छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी एवं अध्यापक-अभिभावक बैठक के महत्व को समझने का परिचय दिया। सभी अभिभावकों ने अग्रिम सोच का परिचय देते हुए बच्चों के भविष्य के लिए विद्यालय प्रबंधन व सभी संबंधित अध्यापकों के साथ अध्ययन संबंधी समस्याओं के समाधान, शैक्षिक उपलब्धियों के साथ-साथ अन्य गतिविधियों व विषयों पर विमर्श किया। अभिभावकों ने अपने बच्चों की दिनचर्या उनके व्यवहार समय-सारिणी, रुचि आदि से संबंधित पहलुओं से प्रबंधन व संबंधित अध्यापकों से परिचित करवाया और अपने बच्चों की रिपोर्ट लेने में काफी रुचि दिखाई।
विद्यालय चैयरमैन जगदेव यादव ने अध्यापक-अभिभावक बैठक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बैठक जागरुक अभिभावकों के लिए अध्यापकों से समय-समय विचार विमर्श करने व बच्चों के लिए सही मार्ग का चुनाव व सहयोग का आधार है। जिस प्रकार तीन भुजाए एक साथ मिलकर त्रिभुज का आकार बनाती है उसी प्रकार अभिभावक के सहयोग से बच्चे बड़े से बड़े लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह बैठक शैक्षिक जानकारी के साथ-साथ सम्पूर्ण व्यवहार, सामथ्र्य से संबंधित बातों के आदान-प्रदान के लिए आयोजित की जाती है। अध्यापक एवं अभिभावकों का विचार-विमर्श छात्र के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। बच्चे के शैक्षणिक विकास में विद्यालय के साथ-साथ अभिभावक की भी अहं भूमिका होती है। उन्होंने सभी अभिभावकों का धन्यवाद कर बैठक का समापन किया।
फोटो कैप्शन 02: एसडी स्कूल में पीटीएम का नजारा।
ग्राम पंचायत के सहयोग से चला सफाई अभियान
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कनीना की आवाज। ग्राम पंचायत के सहयोग से गांव भोजावास में विभिन्न जगहों पर सफाई अभियान चलाया गया। ग्राम सचिवालय के सामने से लेकर राजकीय आइटीआइ तक की सफाई की गई। उसके बाद गोमला मोड़ से लेकर नायक बस्ती तक की सफाई की गई। तत्पश्चात वाल्मीकि बस्ती में प्राइमरी स्कूल के पीछे की सफाई की गई। इस मौके पर ग्राम सचिव विकास कुमार, पवन तंवर, सत्यवान चौकीदार, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, आंगनबाड़ी वर्कर राजेश कुमार रजनीश , पवन, उर्मिला, सुभाष, धर्मवीरस्वामी , सीमा देवी मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 01: भोजावास में सफाई अभियान चलाये हुए ग्राम पंचायत
नंबर ढ़की गाड़ी में आये लोगों ने दी गाली गलौच
--महिला ने की पुलिस में शिकायत
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कनीना की आवाज। नंबर ढ़की गाड़ी में आये लोगों ने गाली गलौच की।
पुलिस में इस संबंध में शिकायत कर दी गई है।
प्रमुख समाज सेवी, शांति कुंज प्रभुजन निवास संचालक पवन कुमार के घर रविवार शाम को नंबर प्लेट ढकी हुई एक गाड़ी आई और गाड़ी आते ही गली से पवन को गाली देते हुए पुकारा। पवन कुमार की पत्नी गेट के पास आई और बताया कि वह घर पर नहीं है। गाड़ी में से मुंह पर कपड़े बंधे एक व्यक्ति ने कहा कि सरपंच के खिलाफ गुरुग्राम कमिश्नर के जाएगा तो जीवित वापस नहीं आएगा। तभी एक अन्य व्यक्ति की अंदर से आवाज आई कि इसी को उठा लो। तभी किसी अन्य ने कहा कि बुधवार तक देखते हैं। नहीं तो बुधवार के बाद में इसको और इसकी लड़की को उठा लेंगे और इसके पति व लड़के को जान से मार देंगे। इस घटना पर पीडि़ता ने बताया कि उसने अपने पति को फोन किया व बाद में मेरे जेठ को फोन किया। जेठ घर आया और पुलिस 112 को काल किया पुलिस 112 मौके पर पहुंची तब उसका पति भी घर पर आ चुका था। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे देख जिस पर नंबर ढके हुए प्लेट की गाड़ी आई हुई दिखी। पीडि़ता ने सदर थाना कनीना में शिकायत दे दी है।
कनीना स्कूल की दोहरी उपलब्धि
- हाकी में छात्राओं का परचम और जैवलिन में नवनीत का कमाल
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कनीना की आवाज। राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकली प्रतिभाएं भी बड़े से बड़ा मुकाम हासिल करने की क्षमता रखती हैं। विद्यालय की अंडर-17 लड़कियों की हाकी टीम ने हाल ही में फतेहाबाद में आयोजित हरियाणा राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में अपने शानदार खेल और जज़्बे से सबका दिल जीत लिया।
इस प्रतियोगिता में कनीना की 8 छात्राओं ने स्टेट लेवल के लिए क्वालीफाई कर विद्यालय का नाम ऊंचा किया। पूरे राज्य से चुनिंदा खिलाड़ी इस स्तर पर हिस्सा लेते हैं, और इनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना की छात्राएं प्रमुख रूप से शामिल होकर विद्यालय की खेल प्रतिभा को नई पहचान दे गईं।
भिवानी को हराकर क्वार्टर फाइनल में पहुंची टीम-
फतेहाबाद में खेले गए पहले मैच में कनीना की बेटियों ने मजबूत मानी जाने वाली भिवानी टीम को 3-0 के अंतर से पराजित कर सबको चौंका दिया। और सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।
टीम में कनीना का दबदबा-
इस टीम के कुल 12 खिलाडिय़ों में से 8 खिलाड़ी राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं हैं। इनमें - हिमांशी, अर्चना, दिव्या, स्वीटी, रिया, भावना, लक्ष्मी और पूनम (कक्षा 9वीं और 10वीं) की छात्राएं शामिल रहीं। इतनी बड़ी संख्या में खिलाडिय़ों का एक ही विद्यालय से चयन होना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
एथलेटिक्स में भी गूंजी कनीना की प्रतिभा-
केवल हाकी ही नहीं, विद्यालय के कक्षा 12वीं कॉमर्स के छात्र नवनीत ने भी अपनी कड़ी मेहनत और लगन से जैवलिन थ्रो में राज्य स्तर के लिए क्वालीफाई कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया। उनकी इस सफलता में विद्यालय के डीपीई संजय यादव का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने निरंतर मार्गदर्शन और अभ्यास से नवनीत को तैयार किया।
शिक्षकों और कोच का योगदान-
छात्राओं का उत्साह बढ़ाने के लिए विद्यालय की अर्थशास्त्र प्रवक्ता प्रीति भी प्रतियोगिता स्थल तक उनके साथ रहीं और लगातार उनका हौसला बढ़ाती रहीं। वहीं, विद्यालय के अनुभवी हाकी कोच श्री कपिल गौड़ ने खिलाडिय़ों को कठिन परिश्रम, अनुशासन और रणनीति का प्रशिक्षण दिया, जिसका परिणाम शानदार सफलता के रूप में सामने आया।
विद्यालय के प्राचार्य सुनील खुडानिया ने इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर सभी खिलाडिय़ों को हार्दिक बधाई दी है।
फोटो कैप्शन 07: राज्य स्तरीय खेलों में अव्वल रही छात्राएं
पड़तल के वार्ड एक
व दो के रास्ते की पैमाइश करवाने की मांग
--हो रहे हैं अवैध कब्जें
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कनीना की आवाज। पड़तल गांव में वार्ड एक व दो की अनुसूचित बस्ती में पंचायत के मुख्य रास्तों पर अवैध कब्जा हो चुका है जिससे गलियों से निकलना मुश्किल हो गया है।
गांव के गांव के अजीत सिंह, बाबूलाल, महावीर, संदीप कुमार, सतीश कुमार, संजय, नरेंद्र जयप्रकाश, राजेश आदि लोगों ने बताया कि अभी तक यहां की न तो नालियां पक्की है और न ही रास्ता पक्का है वहीं चौड़ाई 22 फुट होनी चाहिए किंतु कहीं 5 फुट तो कहीं 7 फुट बची हुई है। जिससे आवाज में दिक्कत हो रही है। इस संबंध में सरपंच को भी 15 सितंबर को शिकायत देकर सूचना दी वहीं पंचायत पंचायत अधिकारी को पहले सूचना दी है। इसी संबंध में एसडीओ कनीना से 7 नवंबर 2024 को मिले थे किंतु समाधान नहीं हुआ है।
फोटो कैप्शन 07: लोग संकीर्ण गली को दिखाते हुए।






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