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Sunday, September 21, 2025


 





 कनीना स्कूल की दोहरी उपलब्धि
- हाकी में छात्राओं का परचम और जैवलिन में नवनीत का कमाल
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कनीना की आवाज।
राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकली प्रतिभाएं भी बड़े से बड़ा मुकाम हासिल करने की क्षमता रखती हैं। विद्यालय की अंडर-17 लड़कियों की हाकी टीम ने हाल ही में फतेहाबाद में आयोजित हरियाणा राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में अपने शानदार खेल और जज़्बे से सबका दिल जीत लिया।
इस प्रतियोगिता में कनीना की 8 छात्राओं ने स्टेट लेवल के लिए क्वालीफाई कर विद्यालय का नाम ऊंचा किया। पूरे राज्य से चुनिंदा खिलाड़ी इस स्तर पर हिस्सा लेते हैं, और इनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना की छात्राएं प्रमुख रूप से शामिल होकर विद्यालय की खेल प्रतिभा को नई पहचान दे गईं।
भिवानी को हराकर क्वार्टर फाइनल में पहुंची टीम-
फतेहाबाद में खेले गए पहले मैच में कनीना की बेटियों ने मजबूत मानी जाने वाली भिवानी टीम को 3-0 के अंतर से पराजित कर सबको चौंका दिया। और सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।
टीम में कनीना का दबदबा-
इस टीम के कुल 12 खिलाडिय़ों में से 8 खिलाड़ी राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं हैं। इनमें - हिमांशी, अर्चना, दिव्या, स्वीटी, रिया, भावना, लक्ष्मी और पूनम (कक्षा 9वीं और 10वीं) की छात्राएं शामिल रहीं। इतनी बड़ी संख्या में खिलाडिय़ों का एक ही विद्यालय से चयन होना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
एथलेटिक्स में भी गूंजी कनीना की प्रतिभा-
  केवल हाकी ही नहीं, विद्यालय के कक्षा 12वीं कॉमर्स के छात्र नवनीत ने भी अपनी कड़ी मेहनत और लगन से जैवलिन थ्रो में राज्य स्तर के लिए क्वालीफाई कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया। उनकी इस सफलता में विद्यालय के डीपीई संजय यादव का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने निरंतर मार्गदर्शन और अभ्यास से नवनीत को तैयार किया।
शिक्षकों और कोच का योगदान-
छात्राओं का उत्साह बढ़ाने के लिए विद्यालय की अर्थशास्त्र प्रवक्ता प्रीति भी प्रतियोगिता स्थल तक उनके साथ रहीं और लगातार उनका हौसला बढ़ाती रहीं। वहीं, विद्यालय के अनुभवी हाकी कोच श्री कपिल गौड़ ने खिलाडिय़ों को कठिन परिश्रम, अनुशासन और रणनीति का प्रशिक्षण दिया, जिसका परिणाम शानदार सफलता के रूप में सामने आया।
विद्यालय के प्राचार्य सुनील खुडानिया ने इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर सभी खिलाडिय़ों को हार्दिक बधाई दी है।
फोटो कैप्शन 07: राज्य स्तरीय खेलों में अव्वल रही छात्राएं




पड़तल के वार्ड एक व दो के रास्ते की पैमाइश करवाने की मांग
--हो रहे हैं अवैध कब्जें
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कनीना की आवाज।
 पड़तल गांव में वार्ड एक व दो की अनुसूचित बस्ती में पंचायत के मुख्य रास्तों पर अवैध कब्जा हो चुका है जिससे गलियों से निकलना मुश्किल हो गया है।
गांव के गांव के अजीत सिंह, बाबूलाल, महावीर, संदीप कुमार, सतीश कुमार, संजय, नरेंद्र जयप्रकाश, राजेश आदि लोगों ने बताया कि अभी तक यहां की न तो नालियां पक्की है और न ही रास्ता पक्का है वहीं चौड़ाई 22 फुट होनी चाहिए किंतु कहीं 5 फुट तो कहीं 7 फुट बची हुई है। जिससे आवाज में दिक्कत हो रही है। इस संबंध में सरपंच को भी 15 सितंबर को शिकायत देकर सूचना दी वहीं पंचायत पंचायत अधिकारी को पहले सूचना दी है। इसी संबंध में एसडीओ कनीना से 7 नवंबर 2024 को मिले थे किंतु समाधान नहीं हुआ है।
फोटो कैप्शन 07: लोग संकीर्ण गली को दिखाते हुए।





कार मुक्त दिवस- 22- सितंबर
दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है कार मुक्त दिवस मनाना
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कनीना की आवाज।
दिनों दिन बढ़ते हुए वायु प्रदूषण, पेट्रेाल पदार्थों की समस्या से जूझने वाले कार चालकों को कम से कम एक दिन अपनी कार नहीं चलनी चाहिए और कार फ्री डे मनाना चाहिए। दुनिया भर के लोगों को इस काम के लिए प्रोत्साहित करें ताकि एक दिन के लिए कम से कम कार न चलाई जाए जिसके भावी लाभ होंगे। उन लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य कार फ्री डे मनाया जाता है। इस संबंध में विभिन्न लोगों से चर्चा की गई जिनके विचार सामने आए।
***बड़े-बड़े देशों में इस दिन कार की बजाय सार्वजनिक साधनों से लोग अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाते हैं। कार फ्री डे मनाने के पीछे एक ही उद्देश्य है कि किसी प्रकार वायु प्रदूषण को कम किया जाए क्योंकि वायु प्रदूषण बढऩेके कारण धु्रवों पर जमी बर्फ पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, वैसे तो वर्ष 1990 के दशक में आइसलैंड, ब्रिटेन आदि देशों में कार मुक्त दिवस मनाया जाता है।  वर्ष 2000 में कार फ्री डे के साथ ही अभियान शुरुआत की गई थी। कर मुक्त होने के कारण परिणाम साफ देखने को मिलते हैं। ग्लोबल वार्मिंग का खतरा कम हो सकता है। मोटर वाहनों के से निकलने वाले धुआं से वायुमंडल का तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर पिघल रहे हैं जिसके कारण भारी बाढ़ एवं बारिश का खतरा बढ़ रहा है, जंगलों में आग लग रही है  हीट वेव से लोगों की जाने जा रही है। सभी के पीछे ग्लोबल वार्मिंग है और इस ग्लोबल वार्मिंग में कार और वाहनों का एक बड़ा योगदान है।
   ---अजीत कुमार झगड़ोली
 एक दिन कार न चला कर पूरे संसार को हम लाभ दे सकते हैं। ऐसे में एक दिन सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करना चाहिए। आजकल इलेक्ट्रानिक व्हीकल आ गए हैं। इस दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि इलेक्ट्रानिक व्हीकल वायु प्रदूषण नहीं करते और कारों को बंद करके एक दिन कम से कम इलेक्ट्रानिक वाहन चलाये जाए तो बहुत अधिक प्रदूषण से मुक्ति मिल सकती है। और भविष्य के लिए अच्छे परिणाम सामने आएंगे। यह एकमात्र किसी एक व्यक्ति से नहीं अभी तो लोगों को इस और जागरूक करना होगा। एक अभियान चलाया जाए तो लोगों को जागरूक किया जा सकता है और बाद में इसके परिणाम सामने आते रहेंगे। विशेषकर बाद ग्लेशियर का पिघलना, ओजोन छेद तथा अन्य हानिकारक प्रभाव से बचा जा सकेगा।
---- वेद प्रकाश समाजसेवी
 एक दिन कार को बंद करके पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना चाहिए। यहां तक की कर बंद करके दुपहिया वाहन को प्रयोग करके या पैदल चलकर या साइकिल का उपयोग करके हम अपने गंतव्य स्थान तक जाना चाहिए जिससे एक सकारात्मक प्रभाव दूसरे लोगों पर भी पड़ेगा और वे लोग भी इस श्रृंखला में जुड़ते चले जाएंगे। तभी कार फ्री डे का सपना पूरा हो सकेगा और देश-विदेश में कार फ्री डे की चर्चाएं चलेगी। यह प्रयास एक सुखद प्रयास होगा। आने वाली पीढ़ी को हम बचा पाएंगे।
  --- सुरेश कुमार कार चालक
 कार फ्री डे किसी एक व्यक्ति से नहीं अपितु एक अभियान के रूप में छेडऩा चाहिए। सोशल मीडिया द्वारा तथा समाचारपऋों के माध्यम से यह संदेश पहुंचाना चाहिए कि भविष्य में यदि सुखद परिणाम चाहते हैं तो कार फ्री डे जैसे दिन मनाने चाहिए। कार फ्री डे मनाए जाने का के पीछे यही उद्देश्य होगा कि वायु प्रदूषण को कम किया जाए। दिनों दिन प्रदूषण बढ़ रहा है। अगर पूरे विश्व एक दिन कार न चलाई जाए तो परिणाम बहुत सुखद होगा। कई देशों में एक दिन कार न चलाकर यह सिद्ध कर दिया है कि वायु प्रदूषण जो विकट समस्या है उससे बचने का एकमात्र साधन कार फ्री डे है। कार फ्री डे को अपनाना भविष्य और भावी पीढ़ी को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। सरकार को इलेक्ट्रॉनिक्स कार ,साइकिल आदि अपनाने पर बल देना चाहिए। साइकिल चलाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि भविष्य में सभी लोग साइकिल जैसे साधन को अपना सके।
--- रवि कुमार कनीना
  फोटो कैप्शन:  वेद प्रकाश, सुरेश कुमार, अजीत कुमार, रविंद्र कुमार।





विश्व गुलाब दिवस-22 सितंबर
 कैंसर से बचे हुए रोगियों को गुलाब का पुष्प देकर लंबी जिंदगी की,की जाती है कामना
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कनीना की आवाज।
 विश्व गुलाब दिवस  उन लोगों को समर्पित है जो कैंसर से बच गए हैं। कैंसर से बचने के बाद वो तेजी से अपने पहले वाली जिंदगी में आने की कोशिश करते हैं। ऐसे समय में उनका गुलाब देकर यह दिन मनाया जाता है ताकि वो प्रसन्न रहे और जल्दी रोग के सदमें जाये। जब किसी में कैंसर हो जाता है तो मरीज के सामने नाम लेने से दिक्कत रहती हैं क्योंकि यदि इस रोग का पता लग जाता है तो वह और तेजी से बीमार होता चला जाता है यहां तक कि डिप्रेशन में जा सकता है क्योंकि कैंसर को ला-इलाज बीमारी मानते हैं। ऐसे समय में मरीजों को कैंसर की जानकारी नहीं दी जाती लेकिन जो कैंसर से बच गए हैं उनको जानकारी देना उचित भी माना जाता है ताकि वह और तेजी से अपने पहले वाली जिंदगी में आ सके और वह खुश नजर आए। उनकी खुशी को बढ़ाने के लिए गुलाब दिया जाता है। यह दिन उन मरीजों के लिए है। यूं तो देश में यूं तो हर प्रकार के कैंसर के मरीज पाए जाते हैं और हर  उम्र अनुसार इनका प्रभाव कम या अधिक होता है।  बुजुर्ग व्यक्ति कुछ लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं जबकि जवान और बच्चे में तेजी से कोशिकाओं की वृद्धि होने से टार्बेट गति से कोशिकाओं की वृद्धि होने से यह रोग तेजी से फैलता है। इसलिए बुजुर्गों को ऑपरेशन आदि डाक्टर मना कर देते हैं। कनीना और आसपास सैकड़ों मैरिज कैंसर के है। कभी कैंसर का नाम सुनते ही आसपास के लोग अवाक हो जाते थे किंतु अब कैंसर आम रोग बन गया है। कैंसर के विषय में डा. जितेंद्र मोरवाल से बात की गई।
 कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। कैंसर का नाम सुनकर मरीज डिप्रेशन में चले जाते हैं। इसलिए कैंसर का नाम रोगी समक्ष बताना उचित नहीं लगता लेकिन जब वह रोग से बच जाता है तो बताना गलत नहीं हो सकता है और उन्हें गुलाब का फूल जो सुंदरता का प्रतीक होता है भेंट किया जाना चाहिए। डाक्टर ने बताया देश में सबसे अधिक मरीज ब्रेस्ट कैंसर और दूसरे सर्वाइकल कैंसर के होते हैं। इन दोनों कैंसर से कुछ मरीज बच जाते हैं किंतु फेफड़े का कैंसर बहुत तेजी से फैलता है। बाकी कैंसर की विभिन्न प्रकार पाई जाती है वो भी घातक साबित होती है किंतु ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर से बहुत से मरीज बच जाते हैं यदि समय पर उन्हें डायग्नोज किया जाए।
डाक्टर का कहना है कि मरीजों को जो कैंसर से बच जाते हैं उन्हें बेहतर भोजन देने के साथ-साथ प्रसन्नचित रहने की जरूरत होती है और उसकी प्रसन्नता को बढ़ाने के लिए गुलाब का फूल भी दिया जाता है और यह दिन गुलाब के फूल के रूप में मनाया जाता है। अक्सर लोग गुलाब के फूल दिवस को समझते हैं कि गुलाब को समर्पित है परंतु यह उनका आंसर सिर्फ बचे हुए मरीजों को समर्पित है। उन्होंने कहा कि महिला को अपने ब्रेस्ट में किसी प्रकार की गांठ आदि होने  उसकी जांच करवाते रहना चाहिए। अगर प्रारंभ में किसी रोग का पता लग जाता है तो निदान संभव है अन्यथा बाद में इस रोग से बचपन भी बहुत कठिन हो जाता है, यहां तक की मौत भी हो जाती है। 10 प्रतिशत लोग प्राथमिक अवस्था में  कैंसर रोग को पहचान पाते हैं जिससे उनकी जान बचाई जा सकती है।
फोटो कैप्शन. डा जितेंद्र मोरवाल




भगत सिंह प्रधान ने दिया गौशाला 300 क्विंटल बाजरा दान
-हर वर्ष देते हैं अन्न व दान
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कनीना की आवाज।
 कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में प्रधान भगत सिंह ने 300 क्विंटल बाजरा दान किया है। हर वर्ष भगत सिंह विभिन्न गौशालाओं को दान देते आ रहे हैं। भगत सिंह ने बताया कि धनौंदा स्थित श्रीकृष्णानंद आश्रम में जीवों के लिए दाना डालने हेतु 8 क्विंटल बाजरा भी दिया है।
 उल्लेखनीय की भगत सिंह कनीना श्रीकृष्ण गौशाला के प्रधान हैं और जब से प्रधान बने तब से गौशाला को अग्रणी बनाने के लिए भ्रसक प्रयास कर रहे हैं। गौशाला में आए दिन लोग पहुंच रहे हैं और दान दक्षिणा दे रहे हैं।
फोटो कैप्शन 5: श्री कृष्ण गौशाला कनीना का नजारा




शारदीय नवरात्रे 22 से---
नौ रूपों में पूजा होती है दुर्गा की, मंदिरों एवं दुकानों को सजाया
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कनीना की आवाज। 
22 सितंबर से शारदीय नवरात्रे प्रारंभ हो रहे हैं।  आने वाले नवरात्रों में माता के मंदिरों को सजाया जाता है वहीं दिनभर व्रत आदि करके नौ दिनों तक माता की पूजा की जाती है।  
 इन नवरात्रों का सौभाग्यवती महिलाओं के लिए विशेष महत्व होता है। प्राचीन ग्रंथों में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती आ रही है। ये नौ रूप  शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री नामों से जाना जाता है। इन नौ रूपों के दर्शनों के लिए मंदिरों में जाकर पूजा की जाती है।
  वासंतीय नवरात्र चैत्र माह में आते हैं। इन नवरात्रों में वसंत ऋतु आती हैं और सर्दी से गर्मी के मौसम में प्रवेश होता है वहीं शारदीय नवरात्रों में गर्मी से सर्दी में प्रवेश किया जाता है। साथ में फसल पैदावार लेने के बाद ये पर्व दो बार मनाए जाते हैं। खरीफ एवं रबी की फसल पैदावार के बाद उन्हें शरीर में ग्रहण करने से पूर्व पुराने अन्न को पूर्णरूप से शरीर से निकाला जाता है इसलिए व्रत किए जाते हैं। नौ दिनों में पुराना अन्न शरीर से निकल जाता है और नया अन्न ग्रहण किया जाता है जो एलर्जी आदि रोग नहीं करेगा।
वैसे भी नवरात्रों में रातों में परिवर्तन आ जाता है। शारदीय नवरात्रों में गर्मी से सर्दी के मौसम में प्रवेश होना माना जाता है। नवरात्रों में जहां नौ रूपों में मां दुर्गा ने राक्षसों का संहार किया था उन नौ रूपों में नौ कन्याओं को नवरात्रे पूर्ण होने पर भोजन कराया जाता है। साथ में नवरात्रों में जौ उगाए जाते हैं जो समृद्धि के प्रतीक होते हैं। गंगा में जौ उगाना एक कहावत भी है। वैसे भी नौ दिनों में उगे हुए जौ को ऊपर से काटकर ज्वारे रस का पान किया जाए तो घातक रोगों में भी लाभकारी माना जाता है।
  ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व को लेकर अति प्रसन्नता होती है वहीं दुकानदार सामान बेचने को लालायित रहते हैं। छह माह के बाद नवरात्रे आने से उनके सामान की बिक्री छह माह बाद ही नवरात्रों के सामान की हो पाती है। मंदिरों को ग्रामीण क्षेत्रों में सजाकर पूजा अर्चना करने का विशेष प्रावधान होता है। नवरात्रों में शुभ काम करने की प्रथा भी चली आ रही है। इसी के साथ ही शुरू हो जाती है सांझी पूजा। बच्चियां दीवार पर सांझी बनाकर उसकी नौ दिनों तक पूजा करती हैं। दशहरे के दिन सांझी को पानी में बहाया जाता है।
दिनेश शर्मा कनीनावासी का कहना है कि नवरात्रेे विधि विधान से करने से वांछित फल मिलता है। ऐसे में इन दिनों मां के नौ रूपों की पूजा करनी चाहिए। 22 सितंबर को घट स्थापना की जाएगी।
  उधर कनीना में विभिन्न दुकानों को सजाया गया है। दुकानदार कृष्ण सिंह, रवि कुमार, योगेश कुमार आदि ने बताया कि नवरात्रों का समस्त सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। विभिन्न घरों में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। ग्राहक सामान खरीद रहे हैं।
फोटो कैप्शन 06: नवरात्रों पर सजी हुई दुकान






नशे के खिलाफ ग्रामीणों को किया गया जागरूक
--ककराला व खरकड़ाबास में किया गया जागरूक
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कनीना की आवाज।
जिला पुलिस युवाओं को नशे से दूर रखने तथा खेलों से जोडऩे के लिए विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है। पुलिस टीम द्वारा ग्रामीणों को नशा न करने बारे जागरूक किया जा रहा है और नशा ना करने की शपथ भी दिलवाई जा रही है। इसके साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति किसी प्रकार के नशे का आदी है और नशा छोडऩा चाहता है तो उसकी काउंसलिंग कराई जाएगी और ऐसे व्यक्ति की पुलिस प्रशासन द्वारा हर सम्भव मदद की जाएगी।
इसी कड़ी में निरीक्षक धर्म सिंह और उनकी टीम ने कनीना के गांव ककराला और खरकड़ा बास में ग्रामीणों, युवाओं को नशे से दूर रहने तथा खेलों से जुडऩे के लिए प्रेरित किया। युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशे से दूर रहें तथा खेलों में अपनी ऊर्जा लगाकर देश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि अपने घर, परिवार व क्षेत्र के लोगों को ड्रग एवं हिंसा से बचाने के लिए अपने व आस-पड़ोस के युवाओं को भी प्रेरित करें। पुलिस टीम द्वारा नशा न करने बारे जागरूक किया तथा नशा ना करने की शपथ भी दिलवाई गई।
फोटो कैप्शन 03: नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए।





रामबास के युवाओं ने मुख्य रास्तों पर किया पौधारोपण
--बांटे पौधे भी
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कनीना की आवाज।
रामबास के युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए गांव के मुख्य रास्तों पर एवं मंदिर परिसर में पौधारोपण किया।
युवा मनोज कुमार रामबास ने बताया कि पौधारोपण केवल हरियाली बढ़ाने का कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का संकल्प है। उन्होंने यह भी कहा कि लगाए गए पौधों की देखभाल वे स्वयं करेंगे, ताकि ये पेड़ बनकर आने वाले समय में गाँव की सुंदरता और उपयोगिता बढ़ा सकें।
उन्होंने बताया कि हमारा प्रयास है कि गाव के सभी मुख्य रस्ते व मंदिर परिसर में फलदार व हरित व सुंदरता से भरे हुए हो। इसके लिए हम लगातार पौधारोपण कर रहे हैं ।समस्त ग्रामवासियों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
फोटो कैप्शन 04: युवा वर्ग पौधे वितरित करते हुए।





एक पखवाड़े से बह रहा है नल का पेयजल
- आधा दर्जन लोगों ने की एसडीओ और जेई से शिकायत
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कनीना की आवाज।
 कनीना के वाटर सप्लाई केंद्र के पास जहां विगत एक पखवाड़े से नल का पेयजल सड़क पर बह रहा है किंतु ठीक नहीं किया गया है। एक और जहां सड़क को नुकसान हो रहा है वही अधिकांश जल इधर उधर बह जाने से उपभोक्ताओं तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। उपभोक्ता अच्छे खासे परेशान है और उन्हें गंदा जल पीने को मिल रहा है। आए दिन जब नल चलते हैं और जल सप्लाई होता है तो जल सड़क पर दूर तक बह जाता है और आवागमन करने वाले वाहन छींटे मारते हुए आगे गुजर जाते हैं। यह जल दूर दराज तक फैल जाता है।  रोजाना का यही नजारा होता है।
 इस संबंध में आसपास के आधा दर्जन लोगों ने एसडीओ तथा जेई को शिकायत कर नल के रिसाव को रोकने की गुहार लगाई है  ताकि उनको पेयजल उपलब्ध हो सके।
  इस संबंध में जेई तेज बहादुर से फोन पर संपर्क हुआ तो उन्होंने बताया कि यह नल एक निजी व्यक्ति है जिसको एक दिन का नोटिस दे दिया है। उन्होंने बताया यदि एक दिन में इस नल को ठीक नहीं किया जाएगा तो अगले दिन नल का कनेक्शन ही काट दिया जाएगा।
 फोटो कैप्शन 01: सड़क पर फैला हुआ पेयजल


















कनीना बस स्टैंड पर चलाया साइबर जागरूकता अभियान
--पुलिस प्रशासन चला रहा है अभियान
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कनीना की आवाज।
थाना शहर कनीना की पुलिस टीम द्वारा बस स्टैंड कनीना पर साइबर जागरूकता अभियान चलाकर विद्यार्थियों, युवाओं, आमजन को साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया। साथ ही विद्यार्थियों को साइबर अपराध से बचने के उपाय बताए गए। सभी को नशे से दूर रहने का आह्वान भी किया। टीम द्वारा साइबर सुरक्षा की जानकारी देते हुए बताया गया कि तकनीकी युग में हर व्यक्ति मोबाइल व कंप्यूटर से जुड़ा है। नौकरी व पढ़ाई भी मोबाइल व कंप्यूटर जैसे संसाधनों से जुड़ गए हैं। इंटरनेट की दुनिया में साइबर अपराधी मेल या मोबाइल पर संदेश से लिंक भेजते हैं, लिंक के माध्यम से मोबाइल को हैक कर ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं।
टीम ने डिजिटल अरेस्ट, टेलीग्राम टास्क फ्रॉड, एपीके फाइल फ्राड व अन्य साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी। मोबाइल पर आने वाला कोई भी ओटीपी किसी के साथ सांझा न करें। किसी अनजान फोन कॉल को न उठाएं, अंजान लिंक पर क्लिक ना करें, अपनी निजी जानकारी सांझा ना करें। अपनी यूजर आईडी व पासवर्ड भी किसी को नहीं बताना चाहिए। साइबर अपराध होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल करें।
फोटो कैप्शन 02: साइबर अपराधों की जानकारी देते हुए पुलिस

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