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Friday, September 5, 2025
चोर साहब के कारनामे
-कुछ और साक्ष्य आए हैं सामने
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां चोर साहब ने पत्रकार ,लेखक साहित्यकार डा. होशियार सिंह के तीन ट्राली पत्थर, मंढ़ी की ईंटें, तीन दर्जन गमले, पड़ोसियों की ईंटें ,बिजली उपकरण एवं कृषि उपकरण समय-समय पर चोरी कर लिये। चोर साहब के कारनामों की एक पुस्तक भविष्य में प्रकाशित होने जा रही है जिसकी अब तक 40 कडिय़ां प्रकाशित कर चुका हूं क्योंकि नए करनामे सामने आए हैं, इसलिए नए कारनामों की कडि़य़ां भविष्य में फिर से जारी रहेगी। क्योंकि समय अभाव के कारण कुछ कडिय़ां जारी नहीं हो पाई थी और अब फिर से जारी की जाएगी और पुस्तक को पूर्ण किया जाएगा।
राक्षसी जानवर बंदर -कड़ी-01
-आने वाले समय में फलदार पौधे उगाने से परहेज करेंगे लोग
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कनीना की आवाज। कहने को तो आज भी कुछ अज्ञानी/ मंदबुद्धि या कम सोच वाले लोग बंदरों को हनुमान जी की फौज बताते हैं। हकीकत यह है कि हनुमान जैसा वीर आज तक नहीं हुआ है न ही होगा। वो कोई बंदर नहीं थे, यह कपोल कल्पित कहानी है। उनकी फौज में कोई बंदर नहीं थे वीर थे। यह तो विज्ञान भी मानता है कि इंसानों में पहले पूछ होती थी, आज भी कुछ बच्चे पैदा होते हैं जिनमें पूछ पाई जाती है जो पैदा होने पर डाक्टर काटकर अलग कर देते हैं। परंतु यह हकीकत है की राक्षसी जीवों में एक नंबर पर बंदरों का नाम है। किसी भी प्रकार की वस्तु को नहीं बख्शते चाहे फलदार, फूलदार, छायादार हो। किसी प्रकार के वृक्ष को नहीं छोड़ते। यहां तक की फसलों को भी नुकसान पहचाने लग गए हैं। बंदरों के कारण अब तो लोग फलदार पौधे लगाते हैं, अगले दिन गायब मिलते हैं। यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में लोग बंदरों को देखकर गोली से उड़ाने की बात भी कह डालेंगे क्योंकि कितने लोगों को इन्होंने नुकसान पहुंचाया है, मौत हुई है। ये रेबीज का रोग फैलाते हैं जो कुत्ते के काटने से नुकसान होता है वही बंदरों के काटने से होता है। बंदर सर्वाहारी है जो हर प्रकार की वस्तु को चट कर जाता है। किसी भी जगह चढऩे में सक्षम है, इंसान को जो की नजर नहीं आए उसको भी देखकर ढूंढ कर नष्ट करके ही प्रसन्न होते हैं। चाहे आज के दिन करेले उगा लो उनको भी तोड़-तोड़ कर काटकर, खाकर पटक जाएंगे। ऐसी कोई चीज नहीं है जो उनकी नजर में ना हो। अब तो कुछ लोगों ने अपनी छतों पर झटका मशीन लगानी शुरू कर दी है जो बहुत कारगर है। झटका मशीन सभी को लगानी भी चाहिए ताकि फल और फूलों की सुरक्षा हो सके। वरना आने वाले समय में ये फल और फूल पूर्ण रूप से खत्म कर देंगे।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए मिला एक वर्ष
-अंतिम पड़ाव से रह गया था पीछे
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कनीना की आवाज। आज शिक्षक दिवस है और शिक्षक दिवस पर पत्रकार, लेखक, साहित्यकार, विश्व रिकार्ड धारक डा. होशियार सिंह यादव अपने जीवन की एक अजीब स्थिति के बारे में बताना चाहते हैं। वो कैसे राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से वंचित रहे, आइये सुनते हैं डा. होशियार सिंह की जुबानी उन्हीं की कहानी-
- वैसे तो मैंने वर्ष 2022 में हरियाणा राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त हो गया था, तत्पश्चात राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन करने का केवल एक मौका मिला। यह दुर्भाग्य था कि पहले तदर्थ सेवा होने के कारण 15 साल की सेवा पूर्ण नहीं हुई और 15 साल की सेवा पूर्ण न होने के कारण राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं कर पाया और जब पूर्ण हुआ तब आवेदन किया तो वर्ष 2022 में ही यह पुरस्कार मिल गया था। तत्पश्चात वर्ष 2023 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन किया, जब पुरस्कार के लिए आवेदन किया तब काफी अंक भी मिले किंतु अपनी कुछ कमियों के कारण अंतिम पउ़ाव तक नहीं पहुंच पाया। यह भी सोचा था कि वर्ष 2024 में यह पुरस्कार मिल जाएगा लेकिन दुर्भाग्य वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त हो गया। अप्रैल 2024 में सेवानिवृत्त हो चुका था किंतु राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार में एक शर्त थी कि मार्च 2024 तक सेवा में जो शिक्षक रहा वह भी आवेदन कर सकता है। बशर्ते उनकी आयु 55 साल से अधिक नहीं हो और उस समय मेरी आयु 55 वर्ष होने के कारण आवेदन नहीं कर पाया। जिसका बहुत मलाल है। लोग बदकिस्मत कहते हैं, चाहे बदकिस्मत हो या कोई कारण मेरी किस्मत ने मेरा साथ नहीं दिया वरना राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित निश्चित रूप से मुझे होना था। आज राज्य शिक्षक पुरस्कार से ही सब्र करना पड़ रहा है लेकिन बड़े खेद की बात है कि यह पुरस्कार पाने के बाद भी न तो किसी समाचार पत्र में कोई नाम आता और नहीं कोई समाचार प्रकाशित करता। सबसे बड़ी विडंबना देखिए कि मैं स्वयं भी पत्रकार हूं लेकिन अपने अखबार में अपना समाचार हम नहीं भेज सकते। यह अखबार का आदेश है, जिसके कारण मैं कितने ही राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को प्रकाशित करता आ रहा हूं लेकिन अपना नाम प्रकाशित नहीं कर पा रहा। दूसरे समाचार पत्रों में यदि भेजते हैं तो वो वह यह कह देते हैं कि यह पत्रकार है, पत्रकार की खबर हम नहीं लिखेंगे। वो यह भूल जाते हैं कि पहले यह शिक्षक होते थे, पत्रकार नहीं। ऐसे में वो मेरा समाचार नहीं प्रकाशित करते और यह दुर्भाग्य है विश्व रिकार्ड धारक होते हुए, 40 वर्षों तक बिना कुर्सी पर बैठे पढ़ाने वाला शिक्षक तथा 40 सालों से साइकिल चलाने वाला शिक्षक का एक नाम भी अखबारों में प्रकाशित नहीं हो पाता जिसका बहुत बड़ा मलाल होता है।
विश्व के श्रेष्ठ गायक रफी का कहना था-
मोहम्मद रफी जब एक बार हज के लिए चले गए ,फिल्मों में गीत गाने से थोड़ा दूर हो गए थे तो दूसरे गायक आगे आ गए। उसे समय रफी को कम पूछने लगे। अपने जमाने का हिंदुस्तान का सर्वश्रेष्ठ गायक रफी है परंतु फिल्मी समाज को देखिए, फिल्मी दुनिया ने उसे भुलाने की कोशिश की। रफी ने खुद कहा है कि जो लोग, जो फिल्मकार, जो निर्माता निर्देशक उनके पैर छूते थे, घंटों उनके सामने गिड़गिड़ाते थे कि एक गीत गा दो वो उनसे कन्नी काटने लग गए। ऐसी हालत डा. होशियार सिंह के साथ है जब शिक्षक था कितने ही लोग पूछते थे, शिक्षक दिवस पर कई जगह से न्यौते आते थे और जब सेवा नहीं रही है ,एक भी व्यक्ति ने किसी जगह से न्यौता नहीं दिया। न शिक्षक दिवस पर बुलाया, सम्मान की बात तो दूर रही।
पत्रकार एक जुनून जरूर है,भूखो मरने की नौबत
-नहीं बनना चाहिए किसी को लोकल में पत्रकार
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कनीना की आवाज। पत्रकार का नाम आते ही लोगों के दिलों दिमाग में जाने कितनी बातें आती हैं, वो समझते हैं कि इनको तो पता नहीं कितने रुपये मिलते होंगे, कितनी धन दौलत मिलती होगी, कितने गिफ्ट मिलते होंगे परंतु वो यह भूल जाते हैं कि पत्रकार महज भूखो मरने की नौबत के अलावा कुछ भी नहीं है। मैं यहां स्पष्ट बताना चाहूंगा क्योंकि मैं लगभग एक दर्जन से अधिक विभिन्न समाचार पत्रों में पत्रकार रह चुका हूंप् मेरी पत्नी स्व. सुमन यादव भी विभिन्न समाचार पत्रों की पत्रकार रही है। वर्तमान में आशा यादव पत्नी भी विभिन्न समाचार पत्रों में पत्रकार है परंतु पत्रकारों को एक नया पैसा भी नहीं मिलता। इक्का दुक्का अखबार अगर कुछ देते हैं तो वह भी पूरे महीने में 3000 रुपये से अधिक नहीं देते। इसका मतलब है 100 रुपये प्रतिदिन से अधिक नहीं।जिसमें भाग दौड़, दिन भर की मेहनत, अपना नेट, अपना फोन, अपनी बाइक, घर परिवार से दूर, कितने ही कष्ट, कितना ही तनाव, कितने ही दुख तकलीफ, तब समाचार को संकलित करके, भेज कर पूरे माह में 3000 रुपये मिलते हैं वह भी सभी पत्रकारों को नहीं मिलते। ऐसे में बताइए कि पत्रकार बनने से लाभ क्या है? कुछ लोग समझते हैं कि पत्रकार बनने से अपना काम निकाल लेते हैं, यह हकीकत है कोई प्रभावशाली पत्रकार हो वह अपना काम जरूर निकाल लेता होगा लेकिन सामान्य पत्रकार के बस का वह भी नहीं होता। मैं एक उदाहरण अपने बारे में ही बताना चाहूंगा। जब डा. होशियार सिंह ने एक चोर को सरेआम चोरी करते पकड़ा और पुलिस में शिकायत दी, तो पुलिस ने सबूत मांगा। अब बताइए चोर पकड़ते समय हम वीडियो बनाएं या उसको धमकाए। ऐसे में उल्टा पुलिस ने कहा कि तुम्हें अंदर किया जाएगा। इसका मतलब यह हुआ हम जैसे पत्रकार कोई पुलिस या किस क्षेत्र का कोई लाभ नहीं उठा सकते। रही सही बात है कि अखबार कुछ देता नहीं। यदि कोई पत्रकार पर कोई केस डाल दिया जाए तो अखबार हाथ ऊपर कर लेता है। सबसे बड़ी विडंबना देखिए, अखबार में लोग समझते होंगे कि पत्रकार अपनी बहुत सी खबर लिख लेंगे लेकिन अखबार ने प्रतिबंध लगा रखा है कि अपने परिवार और अपनी कोई खबर अखबार में नहीं भेज सकते। यहां तक की दूसरे अखबार वाले भी किसी संवाददाता की कोई खबर नहीं भेजते, यह कहकर हटा देते हैं कि यह तो पत्रकार है। अब ऐसे में यदि पत्रकार बनता है तो महज भूखों मरने के अलावा कुछ भी नहीं है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए किसी भी छोटी-मोटी नौकरी को जरूर अपना ले। हां कुछ एक पत्रकार, सैकड़ों में एकाध पत्रकार ब्लैकमेलिंग जरूर करता है, अधिकारियों से सांठ गांठ रखता है, उच्च अधिकारियों संपर्क रखना है, वह बात अलग है लेकिन ऐसे भी पत्रकार है जो बहुत बोल्ड होते हैं पुलिस प्रशासन या कोई अधिकारी काम नहीं करता तो उसे धमकाने से भी नहीं छोड़ते। कहने को तो पत्रकारों के लिए अनेक धाराएं बनाई गई है उनके विरुद्ध कार्रवाई करने वालों पर कुछ धाराएं लगाई जा सकती हैं लेकिन आज तक किसी इक्का-दुक्का केस छोड़कर कहीं ऐसा मामला सामने नहीं आया कि पत्रकारों के साथ मार पिटाई करने वालों के विरुद्ध कोई सख्त कार्रवाई हुई हो। पत्रकार के असामयिक मरने के बाद परिवार को पांच लाख तक जरूर मिलते हैं, वह भी इंश्योरेंस के। ऐसे में ऐसा इंश्योरेंस कोई भी अपना करवा सकता है इसमें हर साल 500 रुपये तक भरकर पांच लाख तक का बीमा हो जाए। कुछ लोगों ने एक बार मेरे से पूछा कि आपको बहुत गिफ्ट मिलते हैं, मैंने कहा बड़े ताजूब की बात है दिन रात एक करके खून जलाकर मेहनत करके, खबर लिखते हैं, अगर एक डायरी दे गए तो उससे मेरा जीवन का गुजर बसर हो जाएगा या आधा किलो मिठाई कभी गलती से दे गए तो उससे क्या मेरा जीवन चल पाएगा। लोग उल्टी अधिक सोचते हैं। ऐसे में मेरा निवेदन है कि किसी को अगर पत्रकार बनाना हो तो अखबार का पेयी रिपोर्टर जरूर बनाए वरना भूखो मरने के अलावा कुछ भी नसीब नहीं होगा। कहने को पत्रकार एक दूसरे का साथ देते हैं लेकिन जितना विरोध पत्रकारों में होता है वह शायद कहीं नहीं देखने को मिलता। मेरे विरुद्ध देखिए एक पत्रकार ने नौकरी तक हटवाने की कोशिश की और एक राक्षस एवं प्रसिद्ध ब्लैकमेलर जिसको ना हिंदी, ना अंग्रेजी, ना किसी भाषा का कोई ज्ञान है उसके कहने से दो पत्रकार मेरे विरुद्ध खड़े हो गए और भारी नुकसान भी करवा दिया, ब्लैकमेलिंग करने वाले ने ब्लैकमेल भी किया।
चापलूसी का जमाना है यारों, चमचा बनके रहो हास्य आलेख
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कनीना की आवाज। वैसे तो1960 में आई जाली नोट फिल्म में जानी वाकर का एक बहुत सुंदर गाना है- छुरी बन, कांटा बन ओ माय सन, सब कुछ बन किसी का चमचा नहीं बन। परंतु यह मोहम्मद रफी द्वारा गया हुआ गीत आज के दिन उल्टा प्रतीत होता है। यदि किसी का चमचा बनकर रहने वाले आज के दिन कामयाब हो रहे हैं। घोर कलियुग है जिसमें सब कुछ संभव है। एक ऐसा चमचा भी देखने को मिला जो शिक्षक होते हुए उसे न हिंदी का ज्ञान, न अंग्रेजी का, न संस्कृत का और न अन्य भाषा का। मेरा दावा है उसके साथ मैं उसके ही विषय में मुकाबला कर सकता हूं। अगर वह मुझसे अधिक अच्छा साबित हो तो मैं सदा उसके लिए दास बनकर रहूंगा। ऐसा शिक्षक समाज को शर्मसार कर रहा है। एक अधिकारी के पीछे-पीछे घूम रहा है। दुर्भाग्य तो उस अधिकारी का है कि वह भी उसको साथ लिए घूम रहा है। इससे बुरी बात क्या होगी। जिसको अपने विषय का ज्ञान नहीं और वह चमचागिरी करके उनसे चिपका रहता है, अधिकारियों को भी लानत है। अधिकारी कम से कम ऐसे शिक्षक को तो लेकर चले जो समाज में उदाहरण हो वरना लोग उस अधिकारी पर भी यही लेबल लगा देंगे कि अधिकारी भी शिक्षक जैसा ही होगा? ऐसे शिक्षक जिन्होंने न जाने कितने घपले किये हैं, कितनी उल्टी सीधी सर्टिफिकेट से नौकरी पा ली, प्रमोशन पा लिया है और आज वह समाज को अकड़ दिखा रहा। अपने समय का प्रसिद्ध ब्लैकमेलर भी रहा है। समाज को चाहिए कि ऐसे शिक्षक को जूते मार कर निकाले, ऐसे कलंक, शिक्षकों को कलंकित करते हैं। इनका बहिष्कार भी होना चाहिए पर वह संभव नहीं लगता।
चार घंटे बिजली रहेगी बंद
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कनीना की आवाज। कनीना के 132केवी उपकेंद्र के तहत पडऩे वाले 33 केवी सब स्टेशन सिहोर पर दिनांक 06.09.20256 सितंबर को प्रात: 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक 33केवी लाइन के रखरखाव कार्य हेतु परमिट लिया जाएगा। विस्तृत जानकारी देते हुए उमेश कुमार एसडीओ विद्युत ने बताया कि 6 सितंबर सितंबर को प्रात: 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक झाड़ली, छितरोली, उच्चत, उन्हानी, सिहोर गांवों की आपूर्ति बंद रहेगी।
28 एमएम वर्षा हुई, वर्षा का दौर अभी जारी
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कनीना की आवाज। शुक्रवार को कनीना में 28 एमएम वर्षा हुई तथा समाचार लिखे जाने तक वर्षा जारी थी। शाम 5 बजे से 5:45 बजे तक 23 एमएम वर्षा हुई जबकि सुबह के वक्त 5 एमएम वर्षा हुई।
श्राद्ध सात सितंबर चंद्रग्रहण के दिन से शुरू
-22 सितंबर से शुरू होंगे नवरात्रे-पंडित दिनेश
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कनीना की आवाज। क्षेत्र में श्राद्ध 7 सितंबर चंद्र ग्रहण के दिन से शुरू होंगे और 21 सितंबर तक जारी रहेंगे। इसके लिए प्रत्येक घर में तैयारियां शुरू हो गई है।
विस्तृत जानकारी देते हुए पंडित दिनेश कुमार ने बताया कि हर साल पितृ पक्ष भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होते हैं और अश्वनी मास की अमावस्या तक चलते हैं। इस बार सात सितंबर से शुरू होंगे 21 सितंबर तक चलेंगे। उन्होंने बताया कि पितरों की आत्मिक शांति की शांति के लिए पितृपक्ष में श्रद्धा किए जाते हैं। पितृ पक्ष का दिन अपने पूर्वज और पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करने का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दिन मृत्यु लोक से पूर्व धरती लोक पर आते हैं। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद बना रहता है पितृ पक्ष श्राद्ध करने का विशेष फल भी प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि विधि विधान से पितृ पक्ष श्राद्ध करने चाहिए तत्पश्चात नवरात्रि पर शुरू हो जाएंगे नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होंगे। पितृपक्ष दौरान खीर, पूरी तथा विभिन्न पकवान बनाकर पितरों को खिलाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि साथ ही जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध भी अमावस्या तिथि पर किया जाता है। इसलिए अमावस्या श्राद्ध को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु हुई हो, उनके निमित्त भी सर्व पितृ अमावस्या के दिन अनुष्ठान कर सकते हैं।
दूध महंगा-
ग्रामीण क्षेत्रों में दूध चाहे कुछ सस्ता हो किंतु शहरों एवं कस्बों में दूध का भाव 80 रुपये लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे में खीर बनाना भी मुश्किल हो गया है। लोग दुकानों पर मिलने वाले दूध से ही खीर बनाकर पितृपक्ष में श्राद्ध करने को मजबूर हैं।
भोजन बर्बादी के दिन-
पितृपक्ष दौरान खाना चौराहों एवं छतों पर कई कर्द दिन पड़ा मिलता है। पूड़ी को न तो कौवा और न गाय एवं कुत्ता खाते हैं। ऐसे में भोजन बर्बादी इन दिनों पूरे यौवन पर मिलती है। हां, ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।
फोटो कैप्शन: दिनेश कुमार पंडित
फिर हुई कनीना क्षेत्र में 28 एमएम वर्षा, फसल बर्बादी का दौर जारी
-पोर्टल पर त्वरित गति से करवा रहे हैं फसल क्षति अपलोड
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में आए दिन वर्षा होती है जिसके चलते क्षेत्र के कपास और बाजरे की फसल में नुकसान का दौर जारी है। शुक्रवार को एक बार फिर से 28 एमएम वर्षा हुई। किसानों की माने तो बाजरे की फसल कपास की फसल बचने की अब कोई संभावना नहीं रही है जबकि बाजरे का खराब होने का दौर जारी है। जिन किसानों ने बाजरे के भुट्टे काटकर ढेर लगा दिया वे नीचे से सभी अंकुरित हो चुके हैं। जब किसान इनको पलटते हैं तो हताश हो जाते हैं। किसान मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन मौसम विभाग अभी 15 सितंबर तक इसी प्रकार का मौसम रहने की बात कह रहा है। ऐसे में किसान अब केवल सरकार पर आश्रित हैं। सरकार ने क्षतिपूर्ति के लिए ई-पोर्टल तो खोल दिया है ताकि अपनी फसलों की क्षति की जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर सकें।
पोर्टल पर आई तेजी--
क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने के बाद जहां किसान त्वरित गति से फसलों की क्षति की जानकारी पोर्टल पर देने लग गए हैं। किसानों की मांग है कि अब अधिक से अधिक मुआवजा मिले। यदि मुआवजा कम मिलता है तो उनकी फसल क्षति की भरपाई नहीं हो पाएगी। सीएससी सेंटर संचालक छोटूराम मेहरा ने बताया कि अब किसान त्वरित गति से अपनी फसलों की क्षति का ब्यौरा दे रहे हैं।
फोटो कैप्शन 07: बाजरे के भुट्टे ढेर में, पूर्णरूप से अंकुरित
08: क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ब्यौरा देते किसान
बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेहलंग में शिक्षक दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया
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कनीना की आवाज। बीआर आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेहलंग में शिक्षक दिवस बड़े ही धूमधाम और उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन हरीश भारद्वाज मुख्य अतिथि रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या श्रीमती ज्योति भारद्वाज ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात भारत के महान दार्शनिक, शिक्षक एवं द्वितीय राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया तथा उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए।
इसके उपरांत शिक्षकों के लिए विभिन्न रोचक और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की गईं। शिक्षकों को उनके व्यवहार तथा व्यक्तित्व के अनुसार उनको टैगलाइन देकर पहचानने, साथ ही पर्ची निकालने पर उसी अनुसार अभिनय , नृत्य एवं अन्य प्रस्तुति देने की गतिविधियाँ हुईं। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने बड़े उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षक ही समाज और राष्ट्र की असली धुरी हैं। वे बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं। डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम भी है। बी.आर. परिवार अपने सभी शिक्षकों के समर्पण, परिश्रम और योगदान को नमन करता है।
समारोह के अंत में चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में उपहार भेंट किए। उपहार प्राप्त कर शिक्षकों ने प्रसन्नता व्यक्त की और संस्था के प्रति आभार प्रकट किया।
फोटो कैप्शन 09: शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करते बीआर स्कूल के चेयरमैन हरीश भारद्वाज तथा प्रिंसिपल ज्योति भारद्वाज
आपस में हुई कहासुनी को लेकर मारपीट करने के मामले में पुलिस ने एक ओर आरोपित पकड़ा
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कनीना की आवाज। आपस में हुई कहासुनी को लेकर मारपीट करने के मामले में कार्रवाई करते हुए थाना सदर कनीना की पुलिस टीम ने एक ओर आरोपित को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान दौंगड़ा अहीर निवासी संदीप के रूप में हुई है, जिससे पूछताछ में पुलिस ने वारदात में प्रयोग की गई बुलेरो गाड़ी बरामद की है। इस मामले में पुलिस द्वारा चार आरोपितों दौंगड़ा अहीर निवासी देवा, दीपक, रोहित और विकास को गिरफ्तार किया था। जिनसे पूछताछ में पुलिस ने पता लगाया कि आरोपियों ने आपसी कहासुनी को लेकर मारपीट की वारदात को अंजाम दिया था। शिकायतकर्ता नवीन वासी पोता ने थाना सदर कनीना में दी शिकायत में बताया कि वह झाड़ली प्लांट में नौकरी करता है। 9 अगस्त को शाम के समय में करीब 9 बजे वह उसके दोस्त व उसके मामा के लड़के के साथ कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दौगंडा चौक पर गए थे। तभी वहां पर देवा वासी गांव दौगंडा अहीर उनका रास्ता रोककर गाली-गलौच करने लगा और फिर आपस में छुटाव हो गया था। जब वह होटल से जाने लगे तो बाहर अचानक से उनके रास्ते में एक बुलेरो गाड़ी रुकी, जिसमें बैठे युवकों ने उनके साथ झगड़ा किया और मारने लगे। इस दौरान शिकायतकर्ता अपना बचाव करके छत पर भागा तो झगड़ते-झगड़ते आरोपियों ने उसे धक्का मार दिया और वह छत के नीचे गिर गया। जिससे उसे काफी चोटें आई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।
शिक्षक दिवस पर आयोजित हुआ हवन
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कनीना की आवाज। राजकीय विद्यालय रसूलपुर में आर्य समाज रसूलपुर द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर यज्ञ आयोजित किया जिसके पुरोहित सतीश आर्य तथा ब्रह्मा किशनलाल मुख्य अध्यापक रहे।
सतीश आर्य ने बताया कि रसूलपुर के स्कूल में प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार को यज्ञ किया जाता है। इसके बाद एक स्वतंत्र सेनानी की जीवनी पर प्रकाश डाला जाता है। किशन लाल मुखिया रसूलपुर ने आर्य समाज रसूलपुर कार्यकारिणी का इस पुनीत कार्य, अच्छे संस्कारवान चरित्र निर्माण करने के लिए धन्यवाद किया। सतीश आर्य ने शिक्षक दिवस पर गुरु के महत्व का गुणगान किया। इस अवसर पर आर्य समाज रसूलपुर के प्रधान हरफूल आर्य रहे वहीं महामंत्री धर्मपाल आर्य, मनमोहन सिंह, रवीना, अशोक कुमार, विनोद कुमार, अनिल, धर्मवीर, दिनेश कुमार, अजीत, सर्वेश आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 6: हवन करते हुए सतीश आर्य
दिनभर रही अध्यापक दिवस की धूम
-शिक्षकों को किया सम्मानित
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कनीना की आवाज। अध्यापक दिवस पर दिनभर विभिन्न विद्यालयों में अध्यापक दिवस की धूम रही। विभिन्न शिक्षकों को सम्मानित किया।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में आजाद भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में डा. जितेंद्र सिंह उप मंडल अधिकारी (नागरिक) कनीना की अध्यक्षता में हर्षोल्लास के साथ शिक्षक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में योगी वचनाई नाथ पार्षद वार्ड नंबर एक से मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। डा. पूर्ण प्रभा प्राचार्या राजकीय महाविद्यालय महेंद्रगढ़ ,डा. अभयराम प्रधान यादव सभा महेंद्रगढ़, नीना यादव , सेवानिवत्त प्रवक्ता हिंदी कनीना, सरला सेवानिवृत्त हिंदी अध्यापिका , मास्टर सीताराम आदि अति विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित हुए।
योगीराज ने बच्चों की शिक्षा संस्कार और अनुशासन पर बल दिया। मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने कहा कि हमें जीवन में प्रत्येक अवसर का लाभ उठाना चाहिए महापुरुषों के विचारों का मनन करना चाहिए
उधर खंड के गांव ककराला में शिक्षक दिवस के अवसर पर बाबा भैया सेवा दल संस्था द्वारा गांव के सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान में ककराला गुरु गौरव सम्मान समारोह का भव्य आयोजन संस्था के लाइब्रेरी भवन में किया गया।
इस अवसर पर गांव के उन शिक्षकों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा और समाज निर्माण को समर्पित किया।
ग्रामवासियों ने एक स्वर में माना कि यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि शिक्षा और संस्कार की उस परंपरा का है जिसने ककराला को विशेष पहचान दिलाई है।
इस मौके पर स्टेट अवार्डी मास्टर बनवारी लाल सहित विभिन्न शिक्षक एवं विभिन्न पदाधिकारी उपस्थित रहे।
उधर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में शुक्रवार को शिक्षक दिवस मनाया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य पूनम यादव ने की। अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को भारत रत्न, देश के दूसरे राष्ट्रपति तथा पहले उपराष्ट्रपति महान दार्शनिक और शिक्षक डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे श्री राधाकृष्णन के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करें। विद्यालय में गणित के प्रवक्ता अजय बंसल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके अपने लक्ष्य हासिल करें तथा जीवन में सफलता पाए।
फोटो कैप्शन 03: एसडीएम कनीना शिक्षकों को सम्मानित करते हुए।
04:ककराला में शिक्षकों को सम्मानित करते हुए
05: अगिहार में शिक्षक दिवस मनाते हुए
जीव विज्ञान में निकिता ने पाया अखिल भारतीय स्तर पर 66वां रैंक
-पास की जेआरएफ
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कनीना की आवाज। कनीना खंड के गांव सीगड़ा की निकिता यादव ने सीएसआईआर द्वारा आयोजित जेआरएफ की जीव विज्ञान विषय की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर रैंक 66 लेकर न केवल गांव का बल्कि अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनके पिता कृष्ण कुमार जो सरकारी स्कूल में मुख्य शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि निकिता यादव बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार है। उसका जीव विज्ञान विषय में शोध करना मुख्य उद्देश्य है। वह बड़ी होकर या तो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होना चाहती है या आईएएस की परीक्षा पास करके अपने कार्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार पूरी तरह से समाप्त करना उद्देश्य है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने एमएससी प्राणी विज्ञान की परीक्षा में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में प्रथम स्थान प्राप्त करके गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया था। निकिता यादव अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने गुरुजनों,दादा-दादी माता-पिता, चाचा-चाची को देती है। प्राचार्य सूबे सिंह चौहान, प्रवक्ता राजेश शर्मा, अशोक शर्मा, सतीश शर्मा,सुरेंद्र, विजय सिंह यादव ने निकिता यादव को जेआरएफ परीक्षा में 66वां रैंक लेने पर बधाई दी एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
फोटो कैप्शन: निकिता यादव
कारगिल बलिदानी अशोक कुमार की 26वीं पुण्यतिथि पर हवन यज्ञ
-54 यूनिट रक्त इकट्ठा किया
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल के गांव सिहोर में कारगिल बलिदानी अशोक कुमार संपदा सोसायटी (रजि.) की ओर से शहीद स्मारक पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बलिदानी अशोक कुमार को उनकी 26वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 2 मिनट का मौन रखकर बलिदानी को नमन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दड़ोली आश्रम के संचालक स्वामी समर्पणानंद महाराज रहे।
उन्होंने कहा कि बलिदानी किसी एक जाति या धर्म के नहीं होते, वे पूरे देश के होते हैं। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान शहीद अशोक कुमार की मां भतेरी देवी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। भाई राजवीर सिंह ने बताया कि हवन यज्ञ कर शहीद की आत्मा को शांति के लिए प्रार्थना की गई।
पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर, 54 यूनिट हुआ रक्त संग्रह-
उधर बलिदानी कुमार संपदा सोसायटी व रेडक्रास सोसाइटी महेंद्रगढ़ स्थित नारनौल के तत्वावधान में बलिदानी अशोक कुमार की 26वीं पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर बाबा ब्रह्मचारी मंदिर परिसर में आयोजित हुआ। शिविर का शुभारंभ बलिदानी अशोक कुमार के भाई राजबीर सिंह ने किया। इस दौरान महेंद्रगढ़, भिवानी, झज्जर और रेवाड़ी जिलों से आए लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कुल 54 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया।
राजबीर सिंह ने बताया कि बलिदानी अशोक कुमार की पुण्यतिथि पर हर वर्ष रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है ताकि जरूरतमंदों की जान बचाई जा सके। मौके पर डा. प्रतीक, लैब तकनीशियन सुनील कुमार, नर्सिंग आफिसर सुरभि, वन अधिकारी नरेंद्र कुमार, सुनील यादव, रतिराम यादव, नीरज यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: रक्तदान करते हुए लोग
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