देश-विदेश बाक्सरों ने किया अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन
-एसडी विद्यालय में रविवार को तीन रिंग में खिलाडिय़ों के बीच रहा कड़ा मुकाबला
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कनीना की आवाज। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ककराला में पिछले चार दिन से जारी सीबीएसई नेशनल बाक्सिंग चैम्पियनशिप प्रतियोगिता में रविवार को अन्तिम मुकाबले के मध्य एसडी विद्यालय खिलाडिय़ों ने बढ़त बनाई रखी। इस बाक्सिंग चैम्पियनशिप प्रतियोगिता में 6 देशों बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई सहित भारत देश के 9 जोन से करीब 1400 बाक्सर खिलाडिय़ों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन दिया। प्रतियोगिता का समापन विधिवत रूप से किया जाएगा। जिसमें विजेता मुक्केबाजों को मुख्य अतिथि जिला उप जिला शिक्षा अधिकारी डा. विश्वेश्वर कौशिक के हाथों पारितोषिक दिया जायेगा। समारोह कि अध्यक्षता विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव करेंगे।
चेयरमैन जगदेव यादव ने देश-विदेश से आये खिलाडिय़ों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में शिक्षा के साथ-साथ खेलों का भी बहुत महत्व है। आज के समय में सरकार द्वारा विद्यार्थियों में प्रतिभा निखारने के लिए समय-समय पर खेल प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। विद्यार्थी खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन करके अपने भविष्य को सुधार सकते हैं। सरकार का उदेश्य है कि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ खेल में भी अपना कैरियर बना सकते है।
विद्यालय के चेयरमैन जगदेव यादव ने कहा कि पूरी प्रतियोगिता बड़े ही शान्तिप्रिय, सुन्दर ढ़ंग व निष्पक्षता से समपन्न हुई। खिलाडिय़ों की सुरक्षा के लिए कनीना शहर थाना पुलिस कर्मचारी तनात रहे वहीं स्वास्थ्य के लिए उपनागरिक अस्पताल कनीना के चिकित्सक उपस्थित रहे।
उन्होंने प्रतियोगिता में जय-पराजय वाले खिलाडिय़ों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जीत और हार एक सिक्के के दो पहलू है। पराजित होने वाले खिलाडिय़ों को इससे निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि भविष्य में इससे अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।
परिणाम--
रविवार को खिलाडिय़ों के मध्य कडा मुकाबला रहा। जिनमें महिला खिलाडिय़ों के 19 आयु व 45 किलोग्राम भार वर्ग में नोर्थ जोन से गुंजन, 45-48 किलोग्राम भार वर्ग में नोर्थ जोन से जिया, 48-51 किलोग्राम भार वर्ग में नोर्थ जोन 2 ए से कशिश मलिक, 51-54 किलोग्राम भारवर्ग में महक, 54-57 किलोग्राम भारवर्ग में कंचन, 57-60 किलोग्राम भारवर्ग में निलाक्षी, 60-64 किलोग्राम भारवर्ग में निकिता दांगी, 64-66 किलोग्राम भारवर्ग में ईवा यादव, 66-69 किलोग्राम भारवर्ग में शेरी मरांडी, 69-75 केलोग्राम भारवर्ग में हंसिका, 75-81 किलोग्राम भारवर्ग में सेम तथा 81 प्लस किलोग्राम भारवर्ग में सिद्धिका सैनी ने विजय प्राप्त की।
लडकों की 17 आयु व 44-46 किलोग्राम भारवर्ग में समेर, 46-48 किलोग्राम भारवर्ग में यश कुमार, 48-50 किलोग्राम भारवर्ग में रोहन जोशी, अजय प्रताप सिंह, तेजस कोशियार, विवेक केसरवानी, 50-52 किलोग्राम भार वर्ग में पवन सिंह कुलोरा, विशाल, 52-54 किलोग्राम भारवर्ग में मोहित भ्ंाडारी, 54 से 57 किलोग्राम भारवर्ग में फ्राइस्ट जोन से उमेश ने दिखाया अपने पंच का दम।
इस मौके पर विद्यालय के प्राचार्य ओमप्रकाश, वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीईओ आर एस यादव, उपप्राचार्य पूर्ण सिंह, खेल प्रमुख तेजपाल कोच, सोनू कोच, प्रदीप फुटबाल कोच खेड़ी, प्रवीन वालीबाल कोच, दीपक कब्बड़ी कोच, खोगेश्वर बाक्सिंग कोच, विकास कोच खेड़ी, संगीता डीपी व ज्योति डीपी आदि सभी स्टाफ उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 04 से 07: मुक्केबाजी से संबंधित हैं।
पूर्व ईटीओ राजेंद्र प्रसाद जांगिड़ की माता एवं कनीना की पूर्व पार्षद इमरती देवी का निधन
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कनीना की आवाज। नगर पालिका कनीना की पूर्व पार्षद इमरती देवी, माता पूर्व ईटीओ राजेंद्र प्रसाद जांगिड़ का निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं। परिजनों ने बताया कि उनका दाह संस्कार कनीना में ही किया गया।
इमरती देवी वर्ष 1991 में नगर पालिका कनीना की मनोनीत पार्षद बनी थीं और उन्होंने नगर क्षेत्र के विकास कार्यों में सक्रिय योगदान दिया। उनके निधन से नगर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
परिवार की जानकारी देते हुए राजेंद्र प्रसाद जांगिड़ ने बताया कि वे तीन भाई हैं। वे स्वयं ईटीओ पद से सेवानिवृत्त हुए, जबकि उनके भाई प्रदीप चीफ इंजीनियर के पद से रिटायर हैं और तीसरे भाई जितेंद्र भी अपने क्षेत्र में कार्यरत हैं। दाह संस्कार के अवसर पर अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जिनमें पूर्व नगर पालिका प्रधान मास्टर दिलीप सिंह, मुकेश लंबरदार, सतीश जांगिड़, ब्रह्म दत्त जांगिड़, गौरी शंकर गर्ग, डॉ. अजीत सिंह, कृपा सरपंच, धर्मचंद जांगिड़, एडवोकेट कैलाश चंद्र गुप्ता सहित अनेक लोग शामिल हुए।
इमरती देवी के निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।
फोटो कैप्शन: फाइल फोटो इमरती देवी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में हिंदी दिवस मनाया गया धूमधाम से
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कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में हिंदी दिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य एवं हिंदी की प्रवक्ता पूनम यादव ने की। इस अवसर पर जिला स्तर पर कविता पाठन में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर आठवीं कक्षा के छात्र प्रिंस तथा भाषण प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली सायना को सम्मानित किया गया।
हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भाषण प्रतियोगिता,कविता पाठ,प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता तथा नुक्कड़ नाटक इत्यादि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम में विद्यालय के अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक,संस्कृत की प्रवक्ता कैलाश देवी तथा सामाजिक अध्ययन अध्यापिका पूनम कुमारी ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए हिंदी का गौरवगान किया। जतिन, नव्या तथा शारदा की टीम ने प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर मंच संचालन कक्षा नौवीं की छात्रा नरगिस ने किया। इस मौके पर विद्यालय के प्रवक्ता राजेंद्र कटारिया, निशा जांगड़ा, वंदना जांगिड़, शशि कुमारी, धर्मेंद्र डीपीई, मुख्य शिक्षक रतनलाल,सुरेंद्र सिंह सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: अव्वल विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए स्टाफ।
विश्व ओजोन दिवस -16 सितंबर
सुरक्षा पर्त का नाम है ओजोन, इसे बचाना जरूरी
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कनीना की आवाज। विश्व स्तर पर ओजोन पर्त के संरक्षण के लिए ओजोन दिवस मनाया जाता है। ओजोन पर्त की उपयोगिता की ओर यह दिवस ध्यान आकर्षित करता है। ओजोन परत वायुमंडल में ऐसी परत है जो सूर्य की हानिकारक किरणों विशेष कर पैराबैंगनी किरणों से बचाती है। 1987 में ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों पर 16 सितंबर के मानिटरियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए थे। तब से यह दिवस मनाया जा रहा है। ओजोन पर्त को ठीक रखने और जलवायु परिवर्तन को बदलाव करने के लिए यह इस पर्त को बचाना जरूरी है। ओजोन का अर्थ होता है गंध लेना। ओजोन परत सूर्य की पैराबैंगनी किरणों को 98 प्रतिशत तक अवशोषित कर लेती है। ये किरणें अगर धरती पर आ जाये तो कैंसर जैसे घातक रोगों का कारण बननेंगी। 1985 में अंटार्कटिक क्षेत्र में एक ओजोन पर्त में एक छेद देखा गया था। जिसके बाद परेशानी बढ़ती चली गई और इसको हानि पहुंचाने वाले विशेष कर क्लोरोफ्लोरोकार्बन नामक रसायन पदार्थ खोजे गए। मानेट्रियल प्रोटोकाल की शुरुआत की गई थी जिसमें ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों पर विचार विमर्श किया गया और उन पदार्थों को कैसे कम करते हुए बंद किया जाएए इस पर विचार विमर्श हुआ।
ओजोन विषय में विज्ञान के जानकारों से चर्चा की गई तो उनके विचार सामने आये। क्या कहते विज्ञान के जानकार ---
ओजोन पर्यावरण में सूर्य के प्रकाश से आने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकती हैं। यदि ये किरणें नहीं रोकी गई तो सीधा को प्रभाव शरीर पर पड़ेगा जिससे जीना दूभर हो जाएगा। इसलिए ओजोन पर संरक्षण जरूरी है। आम आदमी का फर्ज बनता है कि कम से कम फ्रिज एवं एसी आदि का प्रयोग कम से कम करें। जिससे निकलने वाले हानिकारक पदार्थ ओजोन को नुकसान पहुंचाते हैं। ओजोन स्वस्थ रहेगी तो जीवन में रोग नहीं आएंगे।
.-- रविंद्र कुमार शिक्षाविद एवं विज्ञान के जानकार
यह यह पृथ्वी के 10 किलोमीटर से अधिक तथा पृथ्वी से लगभग 30 किलोमीटर दूरी तक गैस की मोटी परत पाई जाती है जिसे ओजोन नाम से जाना जाता है। यह पराबैंगनी किरणों को सोखती है और इंसान एवं पेड़ पौधों को रोगों से बचाती है। इसे डाबसन इकाई में मापते हैं। क्योंकि वैज्ञानिक डाबसन ने इस पर्त को बचाने के लिए कई प्रयोग एवं महत्वपूर्ण कार्य किया है। जीवन रक्षक ओजोन कहलाती है। इसकी सुरक्षा करना हम सभी का फर्ज बनता है।
. --राजेश कुमार विज्ञान के जानकारी एवं शिक्षाविद
ओजोन गंधयुक्त गैस होती है जो हल्के नीले रंग की होती है। ओजोन परत सुरक्षा का आवरण है। ओजोन आक्सीजन का ही एक प्रकार है। ऑक्सीजन के तीन परमाणु से मिलते हैं तो ओजोन बनती है। यह पृथ्वी की समताप मंडल के ऊपर मध्य मंडल के नीचे दोनों के बीच में होती है। सूर्य की हानिकारक किरणों को रोकती हैं। इस पर्त को बचाना हम सभी का फर्ज बनता है अन्यथा भयंकर परिणाम सामने आएंगे। ओजोन को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी बनती है।
--देवेंद्र कुमार शिक्षाविद एवं विज्ञान के जानकार
ओजोन जीवनरक्षक पर्त है। इसको नुकसान पहुंचाने वाले सीएफसी पदार्थों पर रोक लगानी चाहिए वरना हमारी सुरक्षा की पर्त खत्म हो जाएगी और कैंसर जैसी घातक बीमारियां लग जाएंगी। प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस पर्त को बचाने के लिए किसी एक व्यक्ति का फर्ज नहीं अपितु समस्त पृथ्वी के लोगों की जिम्मेदारी बनती है। इस पर्त की रक्षा करना ही जीवन की रक्षा करना है।
--राकेश कुमार शिक्षाविद एवं विज्ञान के जानकार
फोटो कैप्शन:राजेश कुमार बंसल, रविंद्र कुमार, देवेंद्र कुमार, राकेश कुमार।
निश्शुल्क शिविर में 110 मरीजों की जांच की
--सेवा भारती कनीना तथा उजाला सिग्रस अस्पताल द्वारा किया गया
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कनीना की आवाज। सेवा भारती कनीना तथा उजाला सिग्रस अस्पताल द्वारा विशाल निश्शुल्क हृदय रोग, स्त्री रोग एवं अन्य सामान्य रोग जांच एवं परामर्श का आयोजन किया गया। यह आयोजन लाला शिवलाल धर्मशाला कनीना मंडी में किया गया।
इस शिविर में उजाला सिग्नस अस्पताल से डा. राकेश केसरी सामान्य रोग विशेषज्ञ तथा डा. हर्ष, लेडी डा.जय श्री ने अपनी टीम के साथ सेवायें प्रदान की। गंगादेवी आंखों के अस्पताल रेवाड़ी से डा. रोहण वर्मा एवं तरुण कुमार ने आंखों की आंखों की जांच की। इस अवसर पर रोगियों की इसीजी, बीपी, ब्लड शुगर की निश्शुल्क जांच की। इस मौके पर 110 रोगियों ने अपनी जांच कराई। उन्हें दवाइयां निश्शुल्क वितरित की गई। इस अवसर पर सेवा भारती की संरक्षक शिव कुमार, का अध्यक्ष सुरेश शर्मा, सचिव श्यामसुंदर महाशय, कोषाध्यक्ष अमित सिंगला, प्रचार प्रमुख योगेश अग्रवाल, दिनेश कुमार, नवीन मित्तल, राकेश कुमार के अलावा सिग्रस अस्पताल के डा. सत्यनारायण यादव, प्रताप यादव, प्रवीन, प्रीति, कृष्ण कुमार, डा. तरुण कृष्ण कुमार, विशाल आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 01: डा.मरीजों की जांच करते हुए
25 सितंबर को रोहतक पहुंचने का दिया न्यौता
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कनीना की आवाज। ताऊ चौधरी देवीलाल पूर्व उप-प्रधानमंत्री का रोहतक में 25 सितंबर को सम्मान दिवस मनाया जाएगा। सम्मान दिवस परचौधरी अभय सिंह चौटाला अध्यक्षता करेंगे । वेद प्रकाश नम्बरदार इनेलो प्रदेश उपाध्यक्ष एससी सेल व प्रदेश कार्यकरिणी ज्ञानेश्वर निंभल जिला अध्यक्ष एससी सेल, पिंकी कोच, चौधरी सतपाल उन्हाणी, अमर सिंह जागंङा, जयवीर सिंह,कुलदीप ठेकेदार ,संदीप नम्बरदार, धर्मेद्र ढाका, सुरेश उर्फ कालू, नंदलाल कोटिया, बलवान निंभल पङ़तल मदन लाल रोशन लाल, राजेश निंभल, जगदीश मानपुरा, जगदीश प्रधान ,अजीत सिंह, रमेश चोकीदार, सरपंच बनवारी लाल रामबास, जयप्रकाश निंभल, शर्मीला देवी, सरपंच माया देवीआदि सहित विभिन्न लोगों ने 25 सितंबर का न्यौता दिया।
वेदपकाश ने बताया कि 25 सितंबर को समान दिवस पर भारी संख्या में लोग पहुंचेंगे। इस मौके पर चौधरी आनन्द सिंह श्योराण इनेलो अटेली हलका प्रभारी ने अपनी टीम के साथ हलका अटेली के गांव भडफ़, कपूरी, ककराला, इशराणा रामबास, ढ़ाणा, मानपुरा, मोड़ी मे सम्मान दिवस का निमंत्रण देने पहुंचे।
फोटो कैप्शन 02: 25 सितंबर का न्यौता देते इनेलो नेता
तर्पण
संदीप यादव कनीना
पढऩे की शिक्षा दी मां ने
मेरी
दादी मां सूरजकौर का पांच वर्ष पूर्व 75 वर्ष की उम्र में उनका स्वर्गवास
हो गया था। वे अति दयालु एवं पूजा अर्चना में विश्वास रखने वाली महिला थी।
मैं उनसे इतना प्रभावित था कि पहले उन्हें खाना खिलाकर ही खाना खाता था।
उन्हें मेरी बहुत चिंता रहती थी। कुछ वर्षों पूर्व जब मैं पढ़ाई से ऊब चुका
था और आगे नहीं पढऩे की सोच रहा था तो एक दिन अपनी दादी मां से मैंने सारी
बात बताई और नौकरी करने की बात कही। मेरे विचार सुनकर उन्हें गुस्सा आ गया
और मेरे मुंह पर हल्का चांटा मारा और कहा कि अगर तुम पढ़ोगे नहीं तो एक
दिन कोई तुम्हें पूछेगा नहीं। मैं दिनभर दादी मां के कथन को सोचता रहा और
अंतत: यह समझकर कि उनके कहने में कोई न कोई राज छुपा होगा। मैंने उस दिन के
बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का निर्णय किया और आज उच्च शिक्षा पाकर उस
दिन को सोचता हूं तो मुझे मेरे सामने मेरी दादी मां नजर आती है। मैं सोचता
हूं कि हर इंसान की जिंदगी में बड़े बुजुर्गों का बहुत बड़ा योगदान होता
है। वे अपने बच्चे की जिंदगी में कोई न कोई ऐसा परिवर्तन ला देते हैं जिसे
भूलकर भी नहीं भुलाया जा सकता है।
संदीप यादव
फोटो सूरजकौर एवं संदीप कुमार
तर्पण
राजकुमार कनीना मंडी
शिक्षा है अनमोल गहना
हमारे
पूर्वज जिस किसी तिथि को स्वर्ग सिधार गए हैं उसी तिथि को उनका पितृपक्ष
कहा जाता है। यह अश्विनी माह से शुरू होता है। पूर्वजों ने जो बातें कहीं
वो कभी कभी रह रहकर याद आती हैं।
बात उन दिनों की है जब मेरे दादा जी
रामस्वरूप जीवित थे। मैं पढऩे में कम रुचि लेता था और घर के काम में अधिक।
एक दिन उन्होंने कहा-घर का का काम इतना जरूरी नहीं जितना शिक्षा है। यह
शिक्षा ही काम आएगी। उनकी एक शिक्षा आज भी याद है। आज 95 साल की उम्र में
उनका स्वर्गवास हो गया किंतु उनकी वो बात रह रहकर याद आती है। वो आज हमारे
बीच नहीं है किंतु उनकी यादें जहन में आज भी बसी हुई हैं। उन्हीं की बदौलत
आज मैं कानून की शिक्षा पा ली है तथा अपने व्यवसाय में लगा हुआ हूं।
तर्पण
के दौरान जब अपने पूर्वजों को याद किया जाता है और गायों, ब्राह्मणों, कुल
गुरू, कौवों आदि को खाना खिलाया जाता है तो पूर्वजों को याद करके आंखें नम
हो जाती हैं। वे परमेश्वर के समान हैं। उनका आशीर्वाद हमें बड़ी से बड़ी
विपत्ति से बचा सकता है। हमें उनको अनवरत याद करते रहना चाहिए। भारतीय समाज
में चली आ रही यह परंपरा सचमुच इंसान के जीवन में नया उजाला लेकर आती है।
राजकुमार
फोटो कैप्शन: राजकुमार एवं स्व सूरजकौर
तर्पण
भरपूर सिंह
कर्म से विमुख न होने की दी शिक्षा
मेरे
पिताजी जयनारायण की 24 फरवरी 1989 को स्वर्ग सिधार गए थे। वे
डेयरीवाला नाम से ही विख्यात नहीं थे अपितु ताकत में एवं कवि बतौर जाने
जाते थे। बांसुरी एवं अलगोजा बजाने में तथा गायों को श्रीकृष्ण की भांति
जंगल में दिनभर चराकर लाने में प्रसिद्ध थे। अपने साथ रहने वालों को कविता
सुनाते रहते थे। एक दिन कविता के मार्फत उन्होंने सुनाया कि शिक्षा पाने
वाला सदा सफल रहता है। उनकी शिक्षा पर गौर करते हुए हम चार भाई लिखे पढ़े
और शिक्षा क्षेत्र में नाम कमाया। उनके साथ रहे रांझा पाली की भूमिका
निभाने वाले आज भी उनको याद करते हैं। जब भी दूध एवं गायों की चर्चा होती
है तो उनका नाम भी आदर से लिया जाता है। आज भी जब कभी पूरा परिवार मिल
बैठता है तो उनको याद जरूर करता है। ऐसे महान पिता के कारण आज मेरा एवं
मेरे परिवार का नाम रोशन है।
फोटो कैप्शन: भरपूर सिंह कनीना एवं स्व जयनारायण
तर्पण
मां की शिक्षाएं काम आई-राजेश कुमार
जब
मैं छोटा था तो पढऩे में अति बुद्धिमान था। मेरी दादी मां रामरति देवी
मुझे प्यार से बुलाती थी और कहती थी तू एक दिन नाम रोशन करेगा। मैं अपनी
दादी मां के चरण छूकर नित्य प्रति आगे बढ़ता रहा, उच्च शिक्षा पाई और आज
अपनी मां के कहे अनुसार शिक्षक पद पर आसीन हो गया हूं। मेरी मां 2021 में
स्वर्ग सिधार गई किंतु जब कभी मैं शिक्षा के बारे में सोचता हूं तो मेरी
दादी मां मुझे याद आती है। उनका चित्र मेरी आंखों के आगे से घूमने लगता है।
उनके कहे गए वचन कि एक दिन तू उच्च पद पर पहुंचेगा। आज भी याद आते हैं। जब
भी मैं अपनी मां को याद करता हूं तो आंखें भर आती है। श्राद्ध पर उन्हें
नमन करता हूं।
फोटो कैप्शन राजेश कुमार स्वयं एवं स्व रामरति मां





















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