200 गेट पास काटे गये, 4500 क्विंटल बाजरा निजी स्तर पर खरीदा
-सरकारी तौर पर खरीद शून्य रही
************************************************************************
****************************************************************
*************************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में यूं तो 23 सितंबर से बाजरे की आवत जारी है किंतु एक दाना भी सरकारी तौर पर बाजरे का नहीं खरीदा गया है। न ही भविष्य में कोई संभावना लगती कि कोई बाजरा खरीदा जाएगा। अभी तक 4500 क्विंटल बाजरा निजी स्तर पर जरूर खरीदा गया है। किसानों की। इस बार सारी बाजरे की पैदावार खराब हो गई है। जिन मानकों पर खरीद होनी है उन पर खरी नहीं उतर रही है।
दस संबंध में मार्केट कमेटी सचिव मनोज पाराशर से बात हुई। उन्होंने बताया कि गुरुवार को 200 गेट पास काटे गए। अब तक कुल 1350 गेट पास काटे जा चुके हैं लेकिन बाजरे की सरकारी तौर पर कोई खरीद नहीं हो पाई है। 4500 क्विंटल बाजरा निजी स्तर पर जरूर खरीदा गया है। सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु पास नहीं हो पा रहे हैं जिसके कारण बाजरे की खरीद संभव नहीं हो पा रही है।
उधर हैफेड खरीद एजेंसी के मैनेजर विरेंद्र कुमार ने बताया कि गुरुवार को 9 सैंपल रेवाड़ी भेजे गये जो सभी फेल हो गये हैं। प्रतिदिन सैंपल भेजे जा रहे हैं।
फोटो कैप्शन 09: कनीना अनाज मंडी चेलावास
कैमला स्कूल में बाल रामलीला आयोजित
--रामायण का प्रत्येक पात्र देता है हमें शिक्षा
************************************************************************
****************************************************************
*************************************************************************
कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में एफएलएन मिशन के अंतर्गत निपुण कार्यक्रम के अनुसार कक्षा 1 से 3 तक के विद्यार्थियों के द्वारा रंगमंच पर रामायण बाल लीला का मंचन बेहद रोचक, आकर्षक ढंग से किया गया। जिसमें जयंत ने रावण की भूमिका का किरदार निभाया और अंगद के रूप में मंयक तथा यश कुमार, भावना ,गौरव हिमांशी, अक्षत, नंदिनी आदि बाल कलाकारों ने विभिन्न पात्रों के रूप में किरदार निभाते हुए अपनी भूमिका अच्छे ढंग से प्रस्तुत की।
मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने विद्यार्थियों के मनोबल और उत्साह को बढ़ाते हुए बताया कि रामायण का प्रत्येक पात्र अपने आप में एक पूरा जीवन वृत्तांत है। रामायण हमें जीना सिखाती है कि हमें आपस में परस्पर प्रेम भाव, वसुदेव कुटुंबकम, सहनशीलता, विनम्रता, संगठन की शक्ति आदि भाव ग्रहण करने चाहिए। इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और मनोबल की भावना बढ़ती है हमें प्रत्येक प्रकार की पाठ्यक्रम आधारित गतिविधियों एवं सहगामी क्रिया-कलापों में बढ़-चढ़कर के भाग लेना चाहिए। जिससे कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होता है। बाल रामलीला की तैयारी गरिमा रानी प्राथमिक अध्यापिका द्वारा करवाई गई जो सराहनीय और आकर्षित का केंद्र रहीं। इस अवसर पर मनवीर सिंह विज्ञान अध्यापक, देवेंद्र कुमार, सुनील कुमार डीपीई, राजेश कुमार ,भगत सिंह, गरिमा रानी,सुनील कुमार, सूबे सिंह ,तारामणि, पिंकी देवी, बबली देवी आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 07: बाल रामलीला के पात्रों का अभिनंदन करते हुए।
दिलबाग सिंह गोठवाल बने कनीना खंड शिक्षा अधिकारी
-विभिन्न लोगों ने किया अभिनंदन
************************************************************************
****************************************************************
*************************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना के खंड संसाधन समन्वयक एवं नव प्रमुख पदोन्नति खंड शिक्षा अधिकारी दिलबाग सिंह गोठवाल ने कनीना में खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्य भार ग्रहण किया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद दिलबाग सिंह ने बताया कि विद्यालयों में गुणात्मक शिक्षा के लिए सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों को समयबद्ध तरीके से लागू करवाना उनकी प्राथमिकता होगी तथा सरकार द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षा छात्र संख्या बढ़ाना तथा अन्य निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करना प्राथमिकता रहेगी।
उल्लेखनीय है दिलबाग सिंह की पदोन्नति खंड शिक्षा अधिकारी गन्नौर के रूप में हुई थी तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ने समायोजन करते हुए उन्हें कनीना खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है। इस अवसर पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने गुलदस्ता भेंट कार्यालय में उनका अभिनंदन किया। श्री कौशिक ने बताया कि दिलबाग सिंह एक कर्मठ और समर्पित शिक्षा अधिकारी के रूप में रहे हैं तथा प्राचार्य रहते हुए राज्य अध्यापक पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं। इस अवसर पर कार्यालय के सहायक ओमप्रकाश शर्मा एबीआरसी मनोज यादव, उल्लास के समन्वयक गुलशन कुमार, प्रवक्ता हंसराज, लिपिक पंकज यादव, कविता कुमारी ,रामपाल सिंह और मानव उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 08: खंड शिक्षा अधिकारी दिलबाग सिंह का अभिनंदन करते नरेश कौशिक प्राचार्य एवं अन्य
मलबे से चांदी के सिक्के
दूसरे दिन भी मलबे से ढूंढते रहे लोग चांदी के सिक्के
-अभी तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा
************************************************************************
****************************************************************
*************************************************************************
कनीना की आवाज। कनीना-अटेली सड़क मार्ग पर कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास की दीवार के नजदीक डाला गया हवेली के मलबे पर सभी की नजर टिक गई है। चेलावास के एक व्यक्ति द्वारा पुरानी हवेली को तोड़कर उसका मालवा सड़क के किनारे डाला था।
बुधवार अचानक एक बच्चे को कोई सिक्का मिला, उसने तलाश की तो और सिक्के मिले। उन्होंने अपने साथियों को यह सूचना दी तत्पश्चात 200 से 250 व्यक्ति मौके पर पहुंच गए थे और जिसको जितने सिक्के हाथ लगे वह लेकर चलता बना। गुरुवार दूसरे दिन भी बहुत से लोग मलबे से सिक्के तलाश करते रहे।
मौके पर मौजूद मनीष मित्तल ने बताया कि वह अनाज मंडी गया था। मलबे के पास भीड़ देखकर वह रुक गया। उन्हें जानकारी मिली कि मलबे के पास एक बच्चे को सिक्का मिला था और बात इतनी बढ़ी कि लोगों की भीड़ जमा हो गई। अपने-अपने औजार और यंत्रों से सिक्कों की तलाश करते रहे परंतु यह किसी को कुछ भी नहीं मालूम कि कितने सिक्के उसमें थे और कितने किसी को हाथ लगे। जिसको भी सिक्के हाथ लगे वह लेकर चलता बना। दूसरे दिन भी गुरुवार को लोग सिक्के तलाशते रहे। कोई उच्च अधिकारी या पुरातत्व विभाग का अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
प्रत्यक्ष दर्शी मनीष मित्तल की माने तो उसमें 200 से 250 सिक्के थे जो लोग ढूंढ कर ले गए। जहां तक की एक खाखी रंग का कपड़ा भी मिला। अनुमान लगाया जा रहा है इसी कपड़े में सिक्के डालकर हवेली के मालिक हवेली में छुपाया हुआ था। आज भी उमराव सेठ के कुछ परिजन कनीना में रह रहे हैं तो कुछ विदेश में भी रह रहे हैं। एक उनके परिजन चेकोलाविया में रह रहा है। वही कनीना में भी रह रहे हैं। सैकड़ो वर्षों पहले यह हवेली निर्मित की गई थी किंतु चेलावास के अधिकांश सेठ कनीना में आ बसे थे। चूंकि कनीना की अनाज मंडी विशाल रही है इसलिए चेलावास में रहने वाले अधिकांश सेठ कनीना आ बसे थे। उसी समय हवेली छोड़ दी गई थी और अब खंडहरनुमा बन गई थी। वर्तमान में यह हवेली मानसिंह नामक व्यक्ति के पास है जिसने खरीद ली बताई। उन्होंने अपनी जेसीबी और ट्रैक्टर की सहायता से इस हवेली को तोड़कर इसका मलबा चेलावास की अनाज मंडी के पास डाला था जिसे अब लोग उठा ले गये। थोड़ा बहुत मलबा डाले गये स्थान पर पड़ा हुआ है। यही नहीं मलबे से जो कुछ मिला वे सब पदार्थ लोग उठा ले गए। बाद में मानसिंह ने भी शेष मलबा यहां ना डालकर अपनी कि प्लाट में डाल दिया।
कोई अधिकारी नहीं पहुंचा मौके पर -
घटना को दो दिन बीत जाने के बाद तक मलबे वाले स्थान पर कोई भी पुलिस अधिकारी या पुरातत्व विभाग का अधिकारी नहीं पहुंचा। यह भी माना जा रहा है कि आप मौके पर कोई सिक्का मिलने वाला नहीं है जिसके चलते अब अधिकारी आकर भी क्या करेंगे जहां कनीना के योगेश अग्रवाल से बात हुई उन्होंने बताया की हवेली का किसी समय मलिक रहे उमराव का परिजन अब चेकोस्लाविया में रह रहा है। वही चेलावास के लोगों से बात की तो उन्होंने बताया की हवेली इस समय बिक चुकी है और इस हवेली को तोड़ा जा रहा है ऐसे में सिक्के किसी दीवार में थे ऐसा माना जा रहा है। दीवार का मलबा जेसीबी से तोड़कर ट्रैक्टर की सहायता से यहां डलवाया गया था।
हवेली वाले स्थान को कर दिया है समतल-
हवेली वाले स्थान को अब समतल कर दिया गया। यहां का मलबा उठाकर दूर डाला जा चुका है।
200 साल पुराने हैं सिक्के-
ये चांदी के सिक्के वर्ष 1840 के बने हुए हैं जिन पर सन लिखा हुआ है। करीब 200 वर्ष पुराने हैं तथा सिक्कों पर विक्टोरिया की फोटो भी अंकित है। ये एक-एक रुपये के चांदी के सिक्के हैं।
फोटो कैप्शन 04: दूसरे दिन मलबे से सिक्के तलाशते लोग
05: वह कपड़ा दिखाते हुए जिसमें माना जा रहा है सिक्के थे
06: चेलावास की चो अवेली जहां से मलबा उठाया गया था, अब समतल है
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस -10 अक्टूबर
-मानसिक समस्याओं को यूं ही खामोशी से ना पनपने दें-डा. जितेंद्र
************************************************************************
****************************************************************
*************************************************************************
कनीना की आवाज। मानसिक स्वास्थ्य संपूर्ण स्वास्थ्य का एक अभिन्न हिस्सा है। यदि यूं कहा जाए कि मानसिक स्वास्थ्य के बिना हम स्वास्थ्य की कल्पना नहीं कर सकते तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज चिकित्सा के क्षेत्र में इंसान ने बड़े-बड़े अविष्कार कर लिए हैं, लेकिन मानसिक रोगों को लेकर समाज की सोच अभी भी संकुचित ही है। हम लोग खांसी-जुकाम, बुखार होने की अवस्था में तुरंत डाक्टर के पास भागते हैं, परन्तु अपनी मानसिक समस्याओं को यूं ही खामोशी से पनपने देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अरुचि, भ्रांतियां और गलत जानकारी। मानसिक समस्या को बीमारी न समझना या मानसिक अस्वस्थता को कलंक समझना और इसकी चर्चा से परहेज करना इस समस्या को और भी विकराल बना देता है।
समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और गलत जानकारियां हैं। इसलिए जागरूकता की बेहद जरूरत है। दरअसल जीवनशैली में बदलाव, नकारात्मक भावनाओं का पोषण, सामाजिक अलगाव, चिंता और तनाव मानसिक अस्वस्थता का कारण बनते जा रहे हैं। आगे जाकर यह सब अवसाद के साथ-साथ अन्य मानसिक रोगों का कारण बन जाते हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो जाती है।
भागदौड़ की जिंदगी में तथा मोबाइल के चलते इंसान तनाव भरी जिंदगी जीने लगा है। वह अपनी बातें किसी से शेयर नहीं करता है कि लोग उसका मजाक उड़ाएंगे। अगर वह इंसान अपनी तनाव की बातें किसी से शेयर कर दे तो हो सकता है तनाव कम हो जाए और किसी गलत कदम उठाने से बच सकेगा। उन्हें चाहिए कि वो डाक्टरों से अपनी बात बताए और समस्या का समाधान ढूंढे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ-
आधुनिक जीवनशैली की मांगों के दबाव के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई तनाव में जी रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2030 तक, तनाव संबंधी बीमारियां संक्रामक रोगों से अधिक हो जाएंगी। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि हम मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझें और उसके संरक्षण के लिए स्वयं सजग व जागरूक रहें तथा दूसरों को भी जागरूक करने का प्रयास करते रहें। मानसिक बीमारियों के प्रति उपेक्षा भाव और गलत अवधारणाओं की वजह से बड़ी संख्या में लोगों पर ध्यान नहीं दिया जाता और उन्हें आवश्यक देखभाल नहीं मिल पाती है। इसलिए लोगों के सामने आने वाली मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के लिए व्यापक जागरूकता का होना जरूरी है।
---डा जितेंद्र मोरवाल उप-नागरिक अस्पताल कनीना
फोटो कैप्शन : डा जितेंद्र मोरवाल
कनीना के श्रीकृष्ण गौशाला मनाया बच्चे का जन्मदिन
-- गायों के लिए दिया दानपुण्य
************************************************************************
****************************************************************
*************************************************************************
कनीना की आवाज। चंद्र प्रकाश सिहोर निवासी ने अपने पुत्र मोहक का जन्म दिन श्रीकृष्ण गौशाला में धूमधाम से मनाया। इस मौके 15000 रुपये दान दिया और तीन गायों को गोद लिया। चंद्रप्रकाश ने कहा कि जन्मदिन मना कर गायों की सेवा करना पुण्य का काम होता है। गाय अमृतमय दूध देती हैं।
उधर इस मौके पर प्रधान गौशाला भगत सिंह ने दानदाताओं का अभिनंदन किया। इस मौके पर कविता देवी मां, महिमा, भगत सिंह, दिलावर सिंह करण सिंह, नरेंद्र ठेकेदार, राजेश, तुलसीराम सोनी डा.महेश यादव, बलवान आर्य, कृष्ण कुमार गुरुजी आदि भी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 03: तीन बच्चों के जन्मदिन पर गाये गोद लेते हुए
10 अक्टूबर करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ पर्व पर आई खांडसारी के करवों की बहार
************************************************************************
****************************************************************
*************************************************************************
कनीना की आवाज। शुक्रवार को कनीना क्षेत्र में करवा चौथ का पर्व मनाया जा रहा है। बाजार में खांडसारी के करवों की बहार आ गई है वहीं कपड़ों की दुकानों तथा ब्यूटी पार्लरों पर भीड़ लगने लगी है। इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं एवं साज शृंगार करती हैं।
कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्थी को सौभाग्यवती महिलाओं का पर्व करवा चौथ मनाया जा रहा है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में गटक चौथ आदि नामों से जाना जाता है। सर्दी के प्रारंभ में आने वाले इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत पति, पुत्र की मंगलकामना, धन एवं धान्य के लिए किया जाता है जिसका समापन चन्द्रदेव को अघ्र्य देकर पूर्ण किया जाता है। दान पुण्य करने की भी परम्परा चली आ रही है।
यह व्रत विवाहित एवं अविवाहित दोनों के लिए ही फलदायक माना जाता है। अविवाहित महिलाएं अपने सुपति की कामना से तो विवाहित महिलाएं अपने पुत्र, भाई एवं पति की मंगलकामना के लिए व्रत करती हैं। अब तो पुरष भी यह व्रत रखने लग गये हैं। चांद को देखकर तथा उसे अघ्र्य देकर ही इस व्रत का समापन किया जाता है जिसके पीछे माना जाता है कि महिलाएं चांद जैसी शीतलता एवं चमक अपने इष्टदेव में देखना चाहती हैं। इस दिन श्रीगणेश की पूजा करने का विशेष विधान है।
क्या खाया जाता है-
करवा चौथ के दिन खांडसारी के बनाए हुए करवे खाए जाते हैं। इस दिन पूजा के लिए भी करवा खरीदे जाते हैं। करवा नामक औरत की कथा भी सुनी एवं सुनाई जाती है। खांडसारी के बने हुए करवे बाजार में कई दिन पूर्व ही उपलब्ध हो जाते हैं जिन्हें खरीदकर महिलाएं लाती हैं। ये खांडसारी के करवे ही लेने देन में काम आते हैं। महिलाएं अपने से बड़ी महिलाओं को करवे दिए जाते हैं।
क्या कहानी सुनाई जाती है-
पंडित दीपक आचार्य बताते हैं कि इस दिन करवा नामक औरत की कहानी सुनाई जाती है जिसमें उस औरत के भाई अपनी बहन की भूख की व्याकुलता देखकर परेशान हो जाते हैं। वे उसे आग जलाकर छलनी में से नकली चंद्रमा का आभास कराते हैं और करवा खाना खाने के लिए तैयार होती है तो अपशकुन होते हैं किंतु दुख उस वक्त होता है जब करवा को उसके पति की मृत्यु का समाचार मिलता है। आखिरकार वह अपने पति को जीवित करने के लिए घोर तप करती है और पुन इस व्रत के आने का इंतजार करती है। आखिरकार करवा अपने पति को जीवित कराने में सफल हो जाती है। उसी दिन से करवा खाने और करवा चौथ का पर्व चला आ रहा है।
कब तक चलेगा यह व्रत-
आचार्य दीपक का कहना है कि यह व्रत दिनभर चलेगा किंतु शुक्रवार शाम करीब 8:13 बजे पर चंद्रमा दिखाई देने लग जाएगा। महिलाएं इसी चंद्रमा को अघ्र्य देकर अपना व्रत पूर्ण कर सकती हैं। दिनभर कहानी सुनने, दान पुण्य करने तथा बड़े बूढ़ों से आशीर्वाद पाने की परंपरा चली आ रही है। खांडसारी के करवे ही दान दिए जाते हैं।
कौन करता है करवा चौथ व्रत-
एक वक्त था जब केवल महिलाएं ही करवा चौथ का व्रत करती थी। अब तो इसमें पुरुष भी भागीदार बन गए हैं। महिलाएं जहां अपने पति के लिए तो पति अपने पत्नी के लिए लंबी उम्र की कामना करते हैं। अविवाहित लड़कियां भी इस व्रत को करने लगी हैं। पले केवल विवाहित महिलाएं ही व्रत करती थी। धीरे धीरे ऐसे में बदलाव आ गया है और पुरुष की भागीदारी बढ़ती जा रही है
बाजार सजने लगे हैं और खासकर करवा चौथ पर बाजारों में बिक्री की ज्यादा उम्मीद है।
फोटो कैप्शन 02: खांडसारी के करवे बेचता दुकानदार। साथ में आचार्य दीपक कौशिक












No comments:
Post a Comment