खरीद पहुंची 141374 क्विंटल ,सरकारीतौर पर खरीद शून्य
-अब तक 4723 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 141374 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 141374 क्विंटल हो चुकी है। शनिवार को 610 किसान 10494 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 4723 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना को बनाया जाएगा आधुनिकतम -भगत सिंह
-3 महीने में 22 लाख रुपये की हुई आवक तथा 200 गायें ली गई गोद
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कनीना की आवाज। कनीना की श्री कृष्ण गौशाला का जब से भगत सिंह कनीना ने प्रधान का कार्यभार संभाला है तब से श्री कृष्ण गौशाला में एक नई परिपाटी शुरू हो गई है। 200 के करीब गए गोद ली जा चुकी है और 22 लाख से अधिक राशि की आवक हुई है।
विस्तृत जानकारी देते हुए भगत सिंह प्रधान ने बताया कि 1 जुलाई 2025 को उनके पास 56 लाख रुपये के करीब राशि थी जब उन्होंने चार्ज लिया। एक अक्टूबर 2025 को बढ़ाकर 78 लाख रुपए पहुंच गई। उन्होंने बताया कि उनके प्रयास के कारण गाय गोद लेने की एक नई परिपाटी शुरू हुई है जिसके चलते अब तक 200 के करीब गए गोद ली जा चुकी है। यही कारण है कि अब श्रीकृष्ण गौशाल की तरफ लोगों का रुझान बढऩे लगा है। सवामणि, जन्मदिन विभिन्न उत्सव आदि पर गौशाला में लोग जरूर दान देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौशाला को आधुनिकतम बनाया जाएगा। यह विचार भगत सिंह प्रधान के हैं उन्होंने बताया कि उच्च नस्ल के सांड लेाये जाएंगे जिसके चलते श्रीकृष्ण गौशाला में उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध हो पाएंगी।
कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में जब से भगत सिंह प्रधान ने कार्यभार संभाला है तब से जहां गायों को गोद लेने का सिलसिला बढ़ा है। वही गायों के लिए दान पुण्य भी बढ़ता ही जा रहा है।
भगत सिंह प्रधान ने बताया कि उनका उद्देश्य श्री कृष्ण गौशाला में गायों की नस्लें सुधारना है। इसके लिए व्यापक प्रबंध कर रहे हैं ताकि अच्छी नस्ल के सांडों से संकरण करवा कर उन्नत नस्ल की गाये तैयार हो सके। जिससे कोई भी व्यक्ति इन गायों को अपना सके और घरों में पाल सके। उन्होंने बताया कि समय 1400 गाये हैं जिन पर 40 कर्मचारी उनकी सेवा में लगे हुए हैं जो डाक्टर भी उनकी सेवा कर रहे हैं। वह गायों के लिए अलग-अलग बाड़े बनवा रहे हैं ताकि गाये अच्छी प्रकार पल सके। उनके बाहर घूमने का भी प्रबंध किया जा रहा है। उन्होंने बताया प्रतिदिन दो लाख रुपये गौशाला पर आ रहा है।
उन्होंने बताया इस समय गौशाला में गिर एवं हरियाणवीं नस्ल की गायें हैं। 10000 मण कड़बी इक_ी की जा चुकी है। 13 ट्रैक्टर बाहर से लगाए गये। प्रत्येक ट्रैक्टर का किराया 900 रुपये प्रति ट्रैक्टर हिसाब से दिया गया जबकि तीन ट्रैक्टर गौशाला के रहे। इस प्रकार 7 लाख रुपये खर्च करके कड़बी का व्यापक प्रबंध किया है। अब उनकी गौशाला अच्छे ढंग से चल पाएगी। उन्होंने लोगों का आह्वान किया की गौशाला में आए और गायों की सेवा धर्म भी निभाये। तीन गोग्रास गाडिय़ां लगाई हैं।
फोटो कैप्शन 07: गायों की सेवा करते हुए भगत सिंह एवं अन्य
दीपावली उत्सव की रही धूम
--धनौंदा स्कूल में मनाई दीपावली
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कनीना की आवाज। गांव धनौंदा स्थित ब्रिलिएंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दीवाली उत्सव के उपलक्ष्य में रामायण चौपाई गायन, दिया सजाओ, बेस्ट फ्राम वेस्ट ,ड्राइंग -पेंटिंग तथा रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिनमें विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
चौपाई गायन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रामायण की विभिन्न चौपाइयों का सस्वर अर्थ सहित गायन करके समां बांध दिया। चौपाई गायन प्रतियोगिता में यशवंत ने प्रथम, दिव्या और केशव ने द्वितीय तथा अदिति ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। मंच संचालन कक्षा सातवीं की छात्राओं गुंजन और निशिका ने किया। दिया सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन कक्षावार किया गया। नर्सरी कक्षा में अब्दुल समद प्रथम, मेघा, दिया ,हर्ष द्वितीय व देवांश तृतीय स्थान पर रहे ।एलकेजी में जयवर्धन व कशिश प्रथम, अंश तथा अनिरुद्ध द्वितीय तथा संध्या व विवेक तृतीय स्थान पर रहे। यूकेजी में साक्ष्य व ललित प्रथम, पराग व लतिका द्वितीय तथा मानवी और जिया तीसरे स्थान पर रहे। बेस्ट फ्रॉम द वेस्ट प्रतियोगिता में कक्षा दसवीं की छात्राओं नेहा और कनिका ने राम मंदिर की प्रतिकृति बनाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। कक्षा दसवीं के ही छात्र विनय ने सुंदर घर का मॉडल बनाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। तीसरे स्थान पर कक्षा छठी की छात्रा अक्षिता व आठवीं की छात्रा हर्षिता संयुक्त रूप से रहीं। ड्राइंग प्रतियोगिता में प्रथम ग्रुप में चित्रा प्रथम, अवनी द्वितीय तथा मयंक व अंश तृतीय स्थान पर रहे। दूसरे ग्रुप में श्रुति और यशवंत प्रथम, दिव्या और मानवी द्वितीय तथा रिहान और सौम्या तृतीय स्थान पर रहे। पेंटिंग प्रतियोगिता में मुस्कान प्रथम, अंशिका द्वितीय तथा तनु और बानी तीसरे स्थान पर रहीं। रंगोली प्रतियोगिता में बारहवीं विज्ञान संकाय और सातवीं की छात्राओं ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। छठी कक्षा की छात्राएं दूसरे स्थान पर तथा आठवीं और नौवीं की छात्राएं संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। इस अवसर पर आशुतोष शास्त्री, प्रहलाद सिंह, सत्येंद्र सिंह, मुकेश यादव, रेनू यादव, नरेंद्र कौशिक, मनजीत, परवीन, सतीश कुमार, शन्नो तंवर, शीतल, पूजा, निशा, स्मृति सहित विद्यालय के सभी स्टाफ मेंबर्स और विद्यार्थी उपस्थित थे ।
फोटो कैप्शन 08: विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपने प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए विद्यार्थी।
डीएचबीवीएन पटाखे न चलाने की अपील की
--पटाखों से हो सकता है फाल्ट
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कनीना की आवाज। एसडीओ पावर उमेश वर्मा ने डीएचबीवीएन के सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वितरण ट्रांसफार्मर को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाने के लिए ट्रांसफार्मर के पास पटाखे न जलाएं। पटाखों से कंडक्टर/केबल में आग लग सकती है। अत:, आपसे अनुरोध है कि ओवरहेड लाइन कंडक्टर और केबल को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाने के लिए निगम की 11 केवी/एलटी लाइन के नीचे पटाखे न जलाएं।
बीआर आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेहलंग में हुआ दीपावली मेले का भव्य आयोजन
--सजे विभिन्न पंडाल, मची धूम
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कनीना की आवाज। सेहलंग स्थित बीआर आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शनिवार 18 अक्टूबर 2025 को भव्य दीपावली मेला बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर रंग-बिरंगी रोशनी, सजावटी दीपों और पुष्पों से सुसज्जित था। विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा स्थानीय समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
मेले में विविध प्रकार के झूले, मिठाइयों के स्टाल, सजावट व क्राफ्ट के स्टाल, फूड स्टाल, इलेक्ट्रानिक बाइक और स्कूटर की प्रदर्शनी, तथा मेहंदी आर्ट स्टाल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने उत्साहपूर्वक सभी गतिविधियों में भाग लिया और मेले के हर कोने में उत्सव का माहौल छा गया।
विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई विज्ञान प्रदर्शनी और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रदर्शनी मेले की मुख्य आकर्षण रहीं। विद्यार्थियों ने कबाड़ से उपयोगी वस्तुएं बनाकर अपनी सृजनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए सजावटी दीयों के स्टाल ने मेले को पारंपरिक रंग प्रदान किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज ने कहा कि दीपावली मेला विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का एक सशक्त माध्यम है। इस प्रकार के आयोजन न केवल उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करते हैं बल्कि विद्यालय और समाज के बीच एकता और सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।
विद्यालय के चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीपावली मेला हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को विकसित करते हैं। विद्यालय परिवार सदैव ऐसे रचनात्मक आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहेगा।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिसर में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। सभी प्रतिभागियों को विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
फोटो कैप्शन 05 व 06: खुशियों और उमंग से भरे दीपावली मेले का आनंद उठाते विद्यार्थी
दीपावली सादगी से मनाते हैं समाजसेवी
-मन में उमंग एवं जोश है
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कनीना की आवाज। दीपावली के पर्व को सादगी से मनाने वालों की संख्या अधिक है। क्षेत्र के विभिन्न समाजसेवियों से दीपावली मनाए जाने के बारे में परिचर्चा की तो सभी ने दीपावली को सादगी से मनाए जाने, हवन करने, जनसेवा करने तथा दान पुण्य करने पर बल देते हैं। इस संबंध में विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों से इस संबंध में बात की गई तो उनके विचार अलग अलग उभरकर आए-
***दीपावाली हिंदुओं का पवित्र एवं महान पर्व है। यह पर्व हमें एकता एवं भाईचारे की शिक्षा देता है। वे अपने परिवार में अति सादगी से तथा बगैर पटाखे चलाए परिवार के संग मनाते हैं। इस दिन पूरा परिवार कुछ धन निकालकर जनहित में खर्च करता है। वे सभी से पटाखे रहित, सादगी से मनाने की अपील करते हैं। वे अपने साथियों को सलाह देते हें कि सादगी से तथा घर की मिठाई खाकर दीपावली मनाए। उनका कहना है कि इस दिन खोखले मनोरंजन न करके बेहतर कार्य, परहित के कार्य, जनसेवा करके, पौधारोपण करके मनाते हैं।
--- पूर्व मुख्याध्यापक, सतीश कुमार
दीपावाली हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार है और इस दिन हमें शुभ काम करना चाहिए। प्रदूषण करने की बीमारी इसी दिन से जुड़ी है। प्रदूषण विश्वव्यापी बीमारी है जो हर इंसान पर बुरा प्रभाव डाल रही है। ऐसे में पटाखे नहीं चलाने चाहिए। मैं स्वयं भी प्रदूषण नहीं करूंगा और दूसरों को भी प्रदूषण करने से रोकूंगा। एक ओर पूरा देश महात्मा गांधी के सपनों के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन में लगा है और दूसरी ओर यदि प्रदूषण होता है तो सांस की अनेकों बीमारियां फैल जाएंगी।
--सुनील कुमार शिक्षाविद
दीपावली के शुभ दिन हवन करके वातावरण को साफ सुथरा बनाने का प्रयास करूंगा और अपने साथियों को भी इस काम के लिए उत्साहित करूंगा साथ में अपील करता हूं कि जगह जगह इस दिन हवन आयोजित करके वातावरण को साफ सुथरा बनाने में अपना योगदान देवें।
---सत्येंद्र यादव, प्रसिद्ध आर्य समाजी-
दीपावाली को वर्षों से सादगी से मनाते आ रहे हैं। ईश्वर स्तुति करते हैं। तत्पश्चात पूरा परिवार मिलकर मिठाई खाता है। बाजार की बनी मिठाइयां परिवार नहीं खाता है। पूरे परिवार के बच्चे पटाखे नहीं चलाते बल्कि पटाखों पर जो खर्च आता है उतना ही पास की अपंग गौशाला में दान कर दिया जाता है। इससे मन को अति प्रसन्नता होती है। वे अपने साथियों को भी इसी तरीके से दीवाली मनाने की सलाह देता हूं। दीवाली के पर्व पर जो प्रदूषण होता है उसका कुप्रभाव मरीजों के शरीर पर कई दिनों तक पड़ता रहता है।
--- रमेश कुमार भारद्वाज, समाजसेवी
फोटो कैप्शन:सतीश कुमार पूर्व मुख्याध्यापक, सत्येंद्र आर्य, सुनील कुमार ,रमेश भारद्वाज
क्षेत्र में मनाया गया धन तेरस का पर्व, खरीदे बर्तन
-बाजार में रही भारी भीड़
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में शनिवार को धनतेरस का पर्व मनाया गया। बाजार में बर्तनों की दुकानों पर भार भीड़ देखने को मिली। कई दिनों से बर्तनों की दुकानें सजी हुई थी और ग्राहक आने का इंतजार था।
कनीना क्षेत्र में दो दिनों पूर्व से ही दिवाली पर्व की धूम मची है। बाजारों में भारी रौनक देखने को मिली है वहीं बर्तनों की दुकानों पर लोगों ने बर्तन खरीदे।
दीपावली की रौनक के चलते बाजार सजने लगे हैं। दीपावली के पर्व को महज एक दिन ही बाकी हैं और बाजार में रौनक आने लगी है। बाजार सजने लगे हैं। अब तक ऐसा लग रहा था कि रौनक फीकी रहेगी किंतु अब धीरे-धीरे बाजार सजने लगे हैं। धीरे-धीरे बाजार में रौनक आने लगी है और भीड़ के चलते आवागमन में परेशानी होने लगी है। मुख्य मार्गों पर भी दुकानों की वजह से मार्ग संकीर्ण बन गए हैं।
बर्तन विक्रेता सुरेश कुमार ने बताया कि इस दिन का लंबे समय से इंतजार होता है। इस दिन अन्य दिनों की बजाय सबसे ज्यादा बर्तन बिकते हैं। इस दिन लगभग हर घर से बर्तन खरीदने के लिए बाजार आते हैं। बर्तन वालों के लंबी कतार देखने को मिली।
पंडित दिनेश का कहना है कि धन तेरस के दिन ही राक्षसों एवं देवताओं के बीच हुए समुद्र मंथन से अमृत निकला था जिसे पाने के लिए देवता अपना अपना बर्तन लिए बैठे थे और धनवंतरि सभी को अमृत बांट रहे थे। उसी दिन से माना जाता है कि धनवंतरि उन्हें अमृत बाटने आते हैं। इस दिन लोग नए बर्तन में धनवंतरि से अमृत पाने की इच्छा से बर्तन खरीदते हैं।
फोटो कैप्शन 03:बर्तन की दुकानों पर बर्तन बेचते एवं खरीदते लोग।
दीवाली के दीये जलाने हो गये शुरू
--पांच दिन चलने वाला महापर्व है
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कनीना की आवाज। दीपावली कोई एक त्योहार नहीं अपितु त्योहारों का समूह हैं। त्योहार से दो दिन पूर्व धन तेरस, नरक चतुर्दशी का त्योहार पूरे आवेग से आते हैं वही दीपावली से दो दिन पश्चात गोवर्धन पूजा एवं भैया दूज धूमधाम से मनाए जाते हैं। हिन्दुओं के लिए इन त्योहारों का अति महत्व है।
ग्रामीण अचल में धनतेरस के दिन से ही दीपावली के दीये जलाने शुरू कर दिए गये हैं। धनतेरस को बर्तन खरीदने शुभ माने जाते हैं।
दीपावली से एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी का त्योहार श्रद्धा व उल्लास में मनाया जाता है। इस दिन सूर्योदय पूर्व स्नान Ÿोष्ठ माना जाता है। इस दिन को छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी असुर नरकासुर की याद दिलाता है। अति अभिमानी व देवताओं को दु:खी करने वाला नरकासुर इसी दिन भगवान् श्रीकृष्ण के हाथों मारा गया था।
दीपावली अंधेरे रूपों को मिटाने वाली तथा प्रकाशरूपी पुण्य को भेजने वाला महान त्योहार है। भगवान् राम 14 वर्षों का वनवास काटकर, रावण पर विजय पाकर, अयोध्या लौटे तो घी के दीये जलाकर तीन दिन खुशियां मनाई थी। तभी से यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। अमावस्या के अंधेर को दीप जलाकर नष्ट कर दिया जाता है।
दीपावली के अगले दिन अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है। इसे गोवर्धन पूजा नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मन्दिरों में खिचड़ी व क़ी बंाटी जाती है जिसे प्रत्येक जन चाव से खाता है। गोवर्धन पूजा से जुड़ा है श्री कृष्ण व इन्द्रदेव की कथा। गवान् श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अंगुली पर उठाया था।
दीपावली के दूसरे दिन भैया दूज का त्योहार उल्लास से मनाया जाता है। भाई बहन के अटूट प्रेम को त्योहार दर्शाता है। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने भाई को बुलाकर आदर सत्कार करती हैं और तब तक अन्न को ग्रहण नहीं करती जब तक उसे उसके भाई के दर्शन न हो जाए। बहन भाई को टीका करती है और लम्बी आयु की कामना करती है। इस दिन बहनें यमराज की पूजा कर अपने भाई को लम्बी आयु के लिए व्रत भी रखती हैं।
कैमला सरकारी स्कूल में लगा दीवाली मेला
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में दीपावली मेला का आयोजन विद्यालय स्तर पर किया गया जो बड़ा ही आकर्षक, रोचक, भव्य और दिव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होशियार सिंह सेवानिवृत्ति मुख्याध्यापक इसराना वाले रहें। अमृतलाल स्पेशल टीचर कनीना की विशेष रूप से उपस्थित रहीं सभी विद्यार्थियों ने सुन्दर ,आकर्षक पेंटिंग, दीपक बनावट प्रतियोगिता फैंसी ड्रेस और कक्षा कक्ष की सजावट आदि का आयोजन किया गया।
मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने सभी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन हमें जीवन जीने की सीख देते हैं। दीपावली का पावन पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान ने श्रीराम के जीवन वृतांत का रहस्य विस्तार से बताया कि जीवन का सच्चे अर्थ में जो मानवता की सेवा करना ,परस्पर आपसी मेलजोल,भाईचारे और मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा हर पर्व हमें देते हैं।
एमडीएम इंचार्ज मनवीर सिंह तंवर ने विद्यार्थियों के लिए स्वादिष्ट और विशेष भोजन की व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया और भरपूर स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया। कार्यक्रम की सभी ने सराहना की और सभी विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और उनका मनोबल को बढ़ाने के लिए सभी को विद्यालय की ओर से पुरस्कृत किया गया।
इस अवसर पर मनवीर सिंह तंवर ,देवेंद्र यादव, सुनील कुमार शास्त्री, सुनील कुमार डीपीई ,राजेश कुमार, गरिमा रानी प्राथमिक अध्यापिका, सुबे सिंह, सुनील कुमार चौकीदार, तारामणि देवी, बबली देवी, पिंकी देवी, शारदा देवी, सावित्री देवी आदि उपस्थित रहें।
फोटो केप्शन 01: विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए होशियार सिंह
दीपावली पर्व 20 अक्टूबर को पड़ेगा -शितिकंठा
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कनीना की आवाज।ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिराज शितिकांठा का कहना है कि सूर्य सिद्धांत के अनुसार ही पंचांग निर्माण की हमारी ऋषि परंपरा रही है। धर्म शास्त्र के अनुसार ही हमारे निर्णय पूर्णत: फलित होते हैं, इसी को आधार मानते हुए देखें तो 20 अक्टूबर 2025 को 03:48 मिनट पर अमावस्या लग रही है। हमारे यहां प्रदोष व्यापिनी अमावस्या ही दीपावली पर ग्राह्य होती है जो कि अगले दिन शाम 5:55 बजे तक रहेगी।
ऐसे में धर्मशास्त्र और ज्योतिषीय सिद्धांत के आधार पर दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है।
देवज्ञ पंडित ऋषि राज शितिकंठा ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
उनके आगमन और धन-समृद्धि की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है। पहले दिन दीपावली पर, कौवे को परमात्मा का दूत होने की मान्यता के कारण प्रसाद दिया जाता है। दूसरे दिन
दीपावली पर, कुत्तों को अपनी ईमानदारी के लिए भोजन दिया जाता है। तीसरे दिन गोरु त्योहार
में, गाय और बैल को सजाया जाता है। लक्ष्मी पूजा की जाती है। इस दिन व्यापारी अपने सारे खातों को साफ कर उन्हें समाप्त कर देते हैं। लक्ष्मी पूजा से पहले, मकान सजाया जाता है; लक्ष्मी पूजा के दिन, तेल के दीयों को दरवाजे और खिड़कियों के पास जलाया जाता है। चौथे दिन को गोवर्धन पूजा होती है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है, जो दीपावली महापर्व से चौथा दिन होता है। यह त्योहार 22 अक्टूबर को पड़ेगा। पांचवें और अंतिम दिन को भैया दूज कहा जाता, यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह पर्व भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। भाई बहनों से मिलते हैं। भाई के माथे पर टीका लगाया जाता है। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं । यह त्योहार 23 अक्टूबर को पड़ेगा।
पंडित ऋषिराज ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
उनके आगमन और धन-समृद्धि की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
फोटो कैप्शन : ऋषिराज
यूरो स्कूल कनीना में रंगोली बनाओ व दीप सजाओ प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
--अव्वल रहने वाले किये पुरुस्कृत
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कनीना की आवाज। यूरो स्कूल बेहतर शिक्षा के साथ--साथ उत्तम संस्कार एवं हमारी संस्कृति और धार्मिक त्योहारों के प्रति गहरी आस्था रखने में भी सर्वदा अग्रणीय है।
आज स्कूल प्रांगण में कक्षा पहली से आठवीं तक रंगोली बनाओ और दीप सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता अंतर सदनीय स्तर पर हुई। चारों सदनों के विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस प्रतियोगिता में बच्चों ने अपने--अपने कला कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन प्रतियोगियों में प्रथम आईंसटाईन सदन, द्वितीय न्यूटन सदन, तृतीय डार्विन सदन व चौथे स्थान पर एडिसन रहा। इस शुभ अवसर पर प्राचार्य सुनील यादव व उप-प्राचार्या संजू यादव ने सभी विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को इस दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी। साथ ही उन्होंने बताया कि हमारा भारत वर्ष देश सदा से ही अपनी परंपराओं व संस्कृति को यथा विधि संभाले हुए है। साथ ही उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम की तरह आदर्शवादी व संस्कारी होना चाहिए। हमें भी उनके पद चिन्हों पर चलकर अपने माता-पिता का आदर व सम्मान करना चाहिए।
इस अवसर पर कार्डिनेटर नवनीत लावणिया, रि
तू तंवर, तनू गुप्ता, सुमन यादव व स्कूल के समस्त सदस्यगण उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01:दीप जलाते विद्यार्थी














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