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Thursday, December 10, 2020

 
पालिका प्रधान की भाभी का निधन 

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 कनीना। कनीना नगरपालिका के प्रधान सतीश जेलदार की भाभी कमलेश यादव का निधन हो गया। वे 63 वर्ष की थी। वे अपने पीछे दो बेटे तथा पति दमन यादव छोड़ गई है। कमलेश यादव शिवा पब्लिक स्कूल सिवाह (पानीपत) में निजी स्कूल की मुख्य अध्यापिका थी वही इनके प्रति दमन सिंह स्कूल के निदेशक हैं।
दमन सिंह का नाम समाजसेवियों में
प्रसिद्ध है। उनके अंतिम संस्कार गुरुवार को कनीना में किया गया। उनके अंतिम संस्कार में  आरपीएस ग्रुप आफ स्कूल्स के निदेशक डा ओम प्रकाश यादव, कनीना पालिका प्रधान सतीश जेलउदार, उप प्रधान अशोक ठेकेदार,पूर्व प्रधान नगरपालिका कनीना दिलीप सिंह, आर्य समाज प्रधान मोहर सिंह ,आर्य समाज के  बलवान सिंह आर्य, मुख्याध्यापक कृष्ण प्रकाश, कप्तान भरपूर सिंह, इंजीनियर सतपाल सिंह ,आर्य समाज रसूलपुर के सतीश आर्य, मनफूल सिंह आर्य कनीना सहित विभिन्न जन मौजूद थे।
फोटो : स्व कमलेश यादव


महज 3 घंटे लगा करेगा स्कूल

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 कनीना। हरियाणा के शिक्षा विभाग में हरियाणा के स्कूलों को खोलने की कवायद शुरू कर दी है। बोर्ड की परीक्षाओं और कोविड-19 की गंभीरता को देखते हुए 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 14 दिसंबर से प्रतिदिन 3 घंटे प्रात: दस बजे से दोपहर एक बजे के बीच सभी प्राइवेट एवं सरकारी स्कूल लगेंगे। विस्तृत जानकारी देते हुए राज्य सचिव हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ धर्मपाल शर्मा ने बताया नौवीं एवं 11वीं की कक्षाएं 21 दिसंबर से शुरू होंगी। इस बार विद्यालय में आने से पूर्व विद्यार्थी अपने सामान्य स्वास्थ्य जांच करवाएंगे। चिकित्सक द्वारा दिए गए पत्र के पश्चात ही स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। चिकित्सक का प्रमाण पत्र स्कूल में 72 घंटे से पुराना नहीं हो वहीं अभिभावकों की अनुमति भी जरूरी है। अध्यापक नेता ने बताया कि पूर्व की भांति स्कूलों में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों का ताप नोट किया जाएगा तथा सभी आंकड़े इकट्ठे किए जाएंगे। यदि ताप अधिक हो तो स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाए। विद्यार्थियों की जांच के लिए सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है।  

चाइल्ड लाइन की गतिविधियों की जानकारी दी

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कनीन। चाइल्ड लाइन, महेन्द्रगढ़ के टीम सदस्य नरेंद्र कुमार,हेमन्त कुमार,राजेश कुमार व संजय कुमार ने विभिन्न गांवों में जाकर उन्हें चाइल्ड लाइन की योजनाओं,कार्यकर्मों व गतिविधियों के बारे में अवगत कराया।
टीम सदस्यों ने लोगों से मुलाकात कर उन्हें बताया कि चाइल्ड लाइन महेन्द्रगढ़ सम्पूर्ण महेन्द्रगढ़ जिले में सक्रिय रूप से अपने कार्यक्रमों व योजनाओं को संचालित कर रहा है, वही सदस्यों ने लोगों को अवगत कराया कि आपके क्षेत्र में यदि कोई बाल श्रम, बाल अपराध, बाल विवाह,बाल यौन शोषण की कोई घटना घटित होती है, तो उसकी सूचना चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 पर दे। चाइल्ड हेल्प लाइन महेन्द्रगढ़ की टीम हर संभव सहायता प्रदान करेगी। टीम सदस्यों ने खण्ड निजामपुर के नया गांव के सरपंच नंदलाल से मुलाकात कर, को अपनी मुलाकात के दौरान कोविड-19 के संबंध मे भी जानकारी प्रदान की तथा कोविड-19 से बचाव के उपायों पर भी विचार विमर्श किया।
फोटो कैप्शन 3: नया गांव के सरपंच नंदलाल से मुलाकात करते चाइल्ड लाइन के सदस्य।


मधुमक्खी पालन आय का बना बेहतर स्रोत

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 कनीना। क्षेत्र में में मधुमक्खी पालन का धंधा शुरू हो गया है।  सरसों मधुमक्खियों के लिए शहद निर्माण में अहं भूमिका निभा रही है। करीब तीन माह तक यह धंधा अच्छी आय का स्त्रोत होता है।
   क्षेत्र में सड़क के किनारे ही नहीं अपितु किसी खेत में ठहरने की उचित व्यवस्था मिलते ही मधुमक्खी पालने वाले डेरा डाल देते हैं। प्रदेशी समझकर ग्रामीण परिवेश में लोग उनकी खुलकर मदद करते हैं। हरियाणा प्रदेश से ही नहीं अपितु पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि प्रांतों से लोग शहद का धंधा करने के लिए अस्थायी रूप से यहां आते हैं। पांच-सात लोगों का समूह किसी कुएं की कोठरी में डेरा डाल देते हैं और शहद निर्माण कार्य कर देते हैं। इनके पास दस-बीस बड़े पीपे होते हैं तथा इन पीपों में ये लोग शहद इक_ïा करते हैं। जहां खेत के मालिक को मधुमक्खियों से परागण क्रिया में बढ़ोतरी मिलने से पैदावार में बढ़ोतरी मिलती है वहीं इन बेरोजगार युवकों को रोजगार के अवसर मिलते हैं।
 शहद का व्यवसाय करने वाले धवन एवं देवदत्त युवकों से बताया कि चार-पांच लाख रुपये की लागत से 100-125 डब्बे लाए जाते हैं जहां मधुमक्खियां शहद इक_ïा करती हैं। चार-पांच दिनों में ही पर्याप्त शहद इक_ïा हो जाता है जिसे बड़ी-बड़ी कंपनियां खेत पर आकर खरीद ले जाती हैं। इस प्रकार लाखो रुपये की आमदनी होती है। उन्होंने बताया कि जब फूल कम होते हैं तो यह धंधा भी धीमा पड़ जाता है।
 क्या कहते हैं वनस्पति शास्त्री-
  कनीना के वनस्पति शास्त्री रवींद्र का  कहना है कि मधुमक्खी पालन व्यवसाय का किसान को भारी लाभ होता है क्योंकि ये मधुमक्खियां सरसों में परागण क्रिया को बढ़ावा देकर पैदावार को बेहद बढ़ाती है अत: इस व्यवसाय से किसानों को भी लाभ मिलता है।
कब आते हैं मधुमक्खी पालक-
कनीना क्षेत्र में अकसर मधुमक्खी पालन सर्दियों में आते हैं। उस वक्त सरसों पर भारी फूल खिले होते हैं और चारों ओर फूल ही फूल नजर आते हैं। ऐसे में मधुमक्खी पालक दूसरे राज्यों से यहां आते हैं और भारी मात्रा में शहद प्राप्त करके विभिन्न कंपनियों को देते हैं। यहां रहकर जहां किसानों के ट्यूबवेल पर पानी एवं खाना उन्हें उपलब्ध हो जाता है। एक ओर ये मधुमक्खी पालक किसान की सहायता कर देते हैं वहीं किसान उन्हें अन्न एवं पानी उपलब्ध करा देते हैं।
 क्या कहते हैं मधुमक्खी पालक-
मधुमक्खी पालक संजन, धर्मवीर, चेतन, राकेश ने बताया कि तेीन माह तक ये मधुमक्खियां खूब शहद बनाती हैं फिर कोई शहद नहीं बना पाएंगी और उन्हें भोजन के लिए भी चीनी का घोल देना पड़ रहा है। इसके बाद उत्तरप्रदेश राज्य में कई स्थानों पर तारामीरा नामक तिलहन पर फूल आ जाते हैं और मौसम भी खुश्क नहीं होता है जिसके चलते ये फिर से शहद बनाने लग जाती हैं। इस वक्त उन्हें कृत्रिम भोजन जिसमें चीनी का घोल प्रमुख रूप से दिया जा रहा है।
जिला उद्यान अधिकारी-
डा मंदीप यादव जिला उद्यान अधिकारी का कहना है कि जिला महेंद्रगढ़ में मुडायन, सिलारपुर, छाजियावास, बाघोत, बाछोद आदि गांवो ंमें किसान मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। करीब 50 किसान वर्तमान में यह काम कर रहे हैं। उनका शहद 70 से 80 रुपये प्रति किलो बिक जाता है। इसके उपकरणों पर सरकार 85 फीसदी अनुदान देती है। कुरुक्षेत्र के रामनगर में भारत का सबसे बड़ा मधुमक्खी पालन केंद्र केंद्र है जहां ट्रेनिंग,उपकरण आदि दिये जाते हैं। इंडो इजराइल के सहयोग से यह केंद्र चल रहा है। किसान तीन माह में 6 से 7 बार शहद प्राप्त कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि शहद जमने का अर्थ यह नहीं है कि खराब है अपितु सरसों का शहद जम ही जाता है।
फोटो कैप्शन 5: शहद के डब्बों को निहारते मधुमक्खी पालक।

चाइल्ड लाइन की गतिविधियों की जानकारी दी

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कनीन। चाइल्ड लाइन, महेन्द्रगढ़ के टीम सदस्य नरेंद्र कुमार,हेमन्त कुमार,राजेश कुमार व संजय कुमार ने विभिन्न गांवों में जाकर उन्हें चाइल्ड लाइन की योजनाओं,कार्यकर्मों व गतिविधियों के बारे में अवगत कराया।
टीम सदस्यों ने लोगों से मुलाकात कर उन्हें बताया कि चाइल्ड लाइन महेन्द्रगढ़ सम्पूर्ण महेन्द्रगढ़ जिले में सक्रिय रूप से अपने कार्यक्रमों व योजनाओं को संचालित कर रहा है, वही सदस्यों ने लोगों को अवगत कराया कि आपके क्षेत्र में यदि कोई बाल श्रम, बाल अपराध, बाल विवाह,बाल यौन शोषण की कोई घटना घटित होती है, तो उसकी सूचना चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 पर दे। चाइल्ड हेल्प लाइन महेन्द्रगढ़ की टीम हर संभव सहायता प्रदान करेगी। टीम सदस्यों ने खण्ड निजामपुर के नया गांव के सरपंच नंदलाल से मुलाकात कर, को अपनी मुलाकात के दौरान कोविड-19 के संबंध मे भी जानकारी प्रदान की तथा कोविड-19 से बचाव के उपायों पर भी विचार विमर्श किया।
फोटो कैप्शन 3: नया गांव के सरपंच नंदलाल से मुलाकात करते चाइल्ड लाइन के सदस्य।


मधुमक्खी पालन आय का बना बेहतर स्रोत

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कनीना। क्षेत्र में में मधुमक्खी पालन का धंधा शुरू हो गया है।  सरसों मधुमक्खियों के लिए शहद निर्माण में अहं भूमिका निभा रही है। करीब तीन माह तक यह धंधा अच्छी आय का स्त्रोत होता है।
   क्षेत्र में सड़क के किनारे ही नहीं अपितु किसी खेत में ठहरने की उचित व्यवस्था मिलते ही मधुमक्खी पालने वाले डेरा डाल देते हैं। प्रदेशी समझकर ग्रामीण परिवेश में लोग उनकी खुलकर मदद करते हैं। हरियाणा प्रदेश से ही नहीं अपितु पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि प्रांतों से लोग शहद का धंधा करने के लिए अस्थायी रूप से यहां आते हैं। पांच-सात लोगों का समूह किसी कुएं की कोठरी में डेरा डाल देते हैं और शहद निर्माण कार्य कर देते हैं। इनके पास दस-बीस बड़े पीपे होते हैं तथा इन पीपों में ये लोग शहद इक_ïा करते हैं। जहां खेत के मालिक को मधुमक्खियों से परागण क्रिया में बढ़ोतरी मिलने से पैदावार में बढ़ोतरी मिलती है वहीं इन बेरोजगार युवकों को रोजगार के अवसर मिलते हैं।
 शहद का व्यवसाय करने वाले धवन एवं देवदत्त युवकों से बताया कि चार-पांच लाख रुपये की लागत से 100-125 डब्बे लाए जाते हैं जहां मधुमक्खियां शहद इक_ïा करती हैं। चार-पांच दिनों में ही पर्याप्त शहद इक_ïा हो जाता है जिसे बड़ी-बड़ी कंपनियां खेत पर आकर खरीद ले जाती हैं। इस प्रकार लाखो रुपये की आमदनी होती है। उन्होंने बताया कि जब फूल कम होते हैं तो यह धंधा भी धीमा पड़ जाता है।
 क्या कहते हैं वनस्पति शास्त्री-
  कनीना के वनस्पति शास्त्री रवींद्र का  कहना है कि मधुमक्खी पालन व्यवसाय का किसान को भारी लाभ होता है क्योंकि ये मधुमक्खियां सरसों में परागण क्रिया को बढ़ावा देकर पैदावार को बेहद बढ़ाती है अत: इस व्यवसाय से किसानों को भी लाभ मिलता है।
कब आते हैं मधुमक्खी पालक-
कनीना क्षेत्र में अकसर मधुमक्खी पालन सर्दियों में आते हैं। उस वक्त सरसों पर भारी फूल खिले होते हैं और चारों ओर फूल ही फूल नजर आते हैं। ऐसे में मधुमक्खी पालक दूसरे राज्यों से यहां आते हैं और भारी मात्रा में शहद प्राप्त करके विभिन्न कंपनियों को देते हैं। यहां रहकर जहां किसानों के ट्यूबवेल पर पानी एवं खाना उन्हें उपलब्ध हो जाता है। एक ओर ये मधुमक्खी पालक किसान की सहायता कर देते हैं वहीं किसान उन्हें अन्न एवं पानी उपलब्ध करा देते हैं।
 क्या कहते हैं मधुमक्खी पालक-
मधुमक्खी पालक संजन, धर्मवीर, चेतन, राकेश ने बताया कि तेीन माह तक ये मधुमक्खियां खूब शहद बनाती हैं फिर कोई शहद नहीं बना पाएंगी और उन्हें भोजन के लिए भी चीनी का घोल देना पड़ रहा है। इसके बाद उत्तरप्रदेश राज्य में कई स्थानों पर तारामीरा नामक तिलहन पर फूल आ जाते हैं और मौसम भी खुश्क नहीं होता है जिसके चलते ये फिर से शहद बनाने लग जाती हैं। इस वक्त उन्हें कृत्रिम भोजन जिसमें चीनी का घोल प्रमुख रूप से दिया जा रहा है।
जिला उद्यान अधिकारी-
डा मंदीप यादव जिला उद्यान अधिकारी का कहना है कि जिला महेंद्रगढ़ में मुडायन, सिलारपुर, छाजियावास, बाघोत, बाछोद आदि गांवो ंमें किसान मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। करीब 50 किसान वर्तमान में यह काम कर रहे हैं। उनका शहद 70 से 80 रुपये प्रति किलो बिक जाता है। इसके उपकरणों पर सरकार 85 फीसदी अनुदान देती है। कुरुक्षेत्र के रामनगर में भारत का सबसे बड़ा मधुमक्खी पालन केंद्र केंद्र है जहां ट्रेनिंग,उपकरण आदि दिये जाते हैं। इंडो इजराइल के सहयोग से यह केंद्र चल रहा है। किसान तीन माह में 6 से 7 बार शहद प्राप्त कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि शहद जमने का अर्थ यह नहीं है कि खराब है अपितु सरसों का शहद जम ही जाता है।
फोटो कैप्शन 5: शहद के डब्बों को निहारते मधुमक्खी पालक।
 
गले की फांस बन गये हैं परिवार पहचान पत्र 

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 कनीना। परिवार पहचान पत्र बनाना विशेष कर शिक्षकों के लिए  गले की फांस बन गए हैं। एक और सरकार ने विभिन्न विभिन्न एजेंसियों द्वारा भी परिवार पहचान पत्र बनाए जाने का सिलसिला जारी है, वही कोरोना काल में जहां बच्चे और अभिभावक आराम से घरों में बैठे हुए हैं, उन्हें किसी प्रकार की परिवार पहचान पत्र बनाए जाने की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है।
 बार बार फोन करके शिक्षक अभिभावकों को बुलाते किंतु अभिभावक नहीं आते। शिक्षकों ने बताया की एक और प्रशासन का डंडा शिक्षकों पर है, शिक्षक कोरोना काल में घर से बाहर नहीं आना चाहते क्योंकि उनके पास कोरोना से बचने की कोई विशेष सुविधा ही नहीं मिली हुई है। उस पर घर घर जाकर परिवार पहचान पत्र बनाए जाने का काम मजबूरी बन गई है। शिक्षकों ने बताया कि अभिभावकों को फोन किया जाता है तो फोन का कोई उत्तर देते या फिर परिवार पहचान पत्र नाम सुनकर यह कहते हुये भी नहीं हिचकिचाते कि फोन नंबर गलत है। अभिभावकों की दो बार आवश्यकता होती है। एक बार आंकड़े अपलोड किए जाते हैं, उनकी प्रिंट लेकर फिर से हस्ताक्षर करवा कर अपलोड करने पर ही फाइनल अंतिम सबमिट माना जाता है।
शिक्षक मजबूरी वश प्रलोभन देकर कि उन्हें स्कूल में बुला रहे हैं किंतु वे फिर भी नहीं आते। शिक्षकों ने बताया मिड डे मील का राशन मिलने संबंधित सूचना दी जाती है तो कुछ अभिभावक चल कर आते हैं। शिक्षकों ने और स्कूलों ने ग्रुप बना रखे हैं। उन्होंने बताया कि जिस ग्रुप में पढ़ाई से संबंधित जानकारी प्रेषित की जाती है इस ग्रुप में परिवार पहचान पत्र की जानकारी जुटाई जाती है तो भी अभिभावक अनसुना कर देते हैं। शिक्षक भी खूब समझाते हैं कि इसके बगैर कोई सुविधा नहीं दी जाएगी। यही नहीं कुछ अभिभावक तो कोरोना की वजह से दूसरे जिलों एवं राज्यों में चले गए। कुछ दूसरे राज्य से संबंध रखते थे वह भी अपने राज्य को लौट गए हैं लौटकर नहीं आए हैं। यही कारण है क्या उनकी पहचान पत्र भी बनाए जाना कठिन कार्य है। कहने को तो शिक्षकों के अवकाश है किंतु शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन उन्होंने स्कूल में जाकर काम नहीं करना पड़ता हो। कोरोना की मार पहले भी झेल चुके हैं और फिर से शिक्षक गली-गली व स्कूल आदि जा रहे हैं जिसके चलते फिर से कोरोना संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता। जहां शिक्षकों पर मुखियों का तो मुखियों पर उच्च अधिकारियों का डंडा होता है कि परिवार पहचान पत्र बनाओ। यही कारण है कि परिवार पहचान पत्रों को जल्दी जल्दी अपलोड करवाया जा रहा है जिनमें कमियां होने की ज्यादा संभावना बनती जा रही है।


कनीना में एक बेटी -एक पौधा मिशन के तहत पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन 

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कनीना। सामाजिक संस्था बीएमडी क्लब ने क्लब सदस्या प्रियंका प्रजापत के जन्मदिवस अवसर पर कान्हाजी स्कूल प्रांगण कनीना में एक बेटी -एक पौधा मिशन के तहत पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन कर समाज को बेटी बचाओ-पर्यावरण बचाओ का संदेश दिया।
बीएमडी क्लब चेयरमैन लक्की सिगड़ा ने कहा कि पौधारोपण कर मनाया गया बेटी का जन्म दिवस जिन्दगी के लिए यादगार पल बनेगा और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में अहम योगदान रहेगा। पौधेरोपण एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा ही नहीं है बल्कि यह पर्यावरण संस्कार है। बेटी के जन्म पर भी समाज में फैली गलत धारणाओं को मिटाकर हम एक सुदृढ़ समाज व सकारात्मक सोच के साथ जीवन व्यतीत कर सकते है। जिस प्रकार बेटी ही समाज के उत्थान का कारण बन सकती हैं। उसी प्रकार बिना पेड़-पौधों के हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अपने जन्मदिवस पर तो अवश्य पौधरोपण कर प्रकृति को उपहार देना चाहिए। इस प्रकार की गतिविधियों से हम समाज को बेटी बचाओ और प्रकृति संरक्षण दोनों का ही संदेश दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है।  हमारा कत्र्तव्य बनता है कि हम पर्यावरण की रक्षा करे। अगर प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों व खुद के जन्मदिन पर पेड़ लगाए तो पर्यावरण में सुधार हो जाएगा। इस मौके पर बीएमडी क्लब सचिव इंद्रजीत शर्मा,कर्मपाल,रोनिका यादव ने इस संदेशात्मक कार्यक्रम में पौधरोपण कर मिशन को आगे बढ़ाया।
फोटो कैप्शन 1:लड़की के जन्म दिन पर कनीना कान्हाजी पार्क में पौधारोपण करते हुए इंद्रजीत सिंह एवं लक्की सिंगड़ा।


बाघोत में 31 दिसंबर से होगी तीन दिवसीय 

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**************** कनीना। उपमंडल के गांव बाघोत में 21 से 23 दिसंबर को तीन दिवसीय क्रिकेट में खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। खेल प्रतियोगिता के आयोजन करता संदीप गुर्जर वह हरीश गुर्जर ने जानकारी देते हुए बताया कि एक दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन 21 से 23 दिसंबर तक किया जाएगा।  कोविड़ 19 के चलते क्रिकेट प्रेमियों को दो गज दूरी और मास्क पहनने के लिए दिशा निर्देश दिए जाएंगे। इस दौरान तीन दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता में प्रथम इनाम 21000 द्वितीय इनाम 11000 दी जाएगी।
आयोजकों ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि सभी खिलाड़ी अपना आधार कार्ड अवश्य लेकर आए वरना खेल प्रतियोगिता में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

11 दिसंबर से 4 माह तक रहेंगी शादियां बंद
-पहले मलमास तत्पश्चात गुरु तारा अस्त होना इसका कारण बना 

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कनीना। कनीना यूं तो कोरोना काल के दृष्टिगत ऐतिहात के सभी नियमों में बंध कर भारी शादियां चली। 25 नवंबर को कार्तिक मास शुक्ल एकादशी से विवाह मुहूर्त शुरू हुए थे जो 11 दिसंबर तक चलेंगी।  तत्पश्चात 31 दिसंबर से मलमास शुरू होगा जो 28 जनवरी तक रहेगा। इस दौरान कोई शादी नहीं होगी। उस पर 17 जनवरी को 2021 को फिर से गुरु तारा अस्त हो जाएगा जिसके चलते 14 फरवरी 2021 को तारा उदय होने पर फिर से विवाह मुहूर्त निकलेंगे। तत्पश्चात इक्का-दुक्का शादी बिना मुहूर्त जरूर होंगी।
समस्त जानकारी देते हुए सुरेंद्र शर्मा ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 27 फरवरी को होली का डांडा लग जाएगा जो 28 मार्च तक चलेगा। 25 अप्रैल 2021 फिर से शादी होगी। इस बार कोरोना काल के दृष्टिगत त्वरित गति से शादियां की गई हैं। एक-एक दिन में कई कई विवाह शादियां चली। उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी के दिन यहां तक कि 14 जनवरी मकर संक्रांति को भी कुछ लोग शादियां कर लेते हैं लेकिन मुहूर्त नहीं बन रहा है।
अब देखा जाना है 25 अप्रैल तक कोरोना से छुटकारा मिल पाता है या फिर से कोरोना की मार में शादी या फिर से शुरू होंगी।




बर्खास्त पीटीआई के चेहरों पर मुस्कान लौटी
-शिक्षा विभाग में समायोजित करने के लिए काउंसलिंग हुई शुरू 

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 कनीना। हरियाणा सरकार ने कोर्ट के आदेशों के चलते 1980 पीटीआई बर्खासत कर दिये थे। जहां करीब 6 माह पहले बर्खास्त किये पीटीआई का लंबे समय तक संघर्ष जारी रहा। आखिरकार उन्हें सरकार के शिक्षा विभाग में समायोजित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनके आवश्यक कागजात तसदीकीकरण,काउंसलिंग आदि शुरू हो गई है जिसके चलते उनके चेहरे पर मुस्कान लौट कआई है।
 पीटीआई जोगेंद्र सिंह, मनीष कुमार, सुनील कुमार, रघुवीर सिंह, संतोष कुमार, सुरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि अभी तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें समायोजित किया जाएगा या नहीं किंतु उनके काउंसलिंग शुरू होने और उनके कागजात जांच करने की कार्रवाई शुरू होने से अब उन्हें विश्वास हो गया है कि उनकी छीनी हुई रोटी रोजी फिर से बहाल होने जा रही है। जिला महेंद्रगढ़ के 89 बर्खास्त पीटीआई को जिले में ही समायोजित किया जाएगा बाकी कुछ दूसरे जिलों में भी जाएंगे। उन्होंने बताया करीब 1 माह पहले आनलाइन आवेदन मांगे थे, स्टेशन भी भरवा दिए गए थे। काउंसलिंग शुरू होनी बाकी थी। अब काउंसलिंग शुरू हो गई है। अब तक बर्खास्त पीटीआई घुट घुट कर जी रहे थे।वर्तमान में पीटीआई एवं उनके परिवार सरकार का आभार व्यक्त कर रहे हैं कि उन्हें आखिरकार समायोजित किया जा रहा है। कुछ  बर्खास्त पीटीआई तो ऐसे थे कि अपनी रोटी रोजी कमाने के लिए पशु पालने तक का ही धंधा शुरू कर दिया था। उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की बेहतरीन पहल है।

Wednesday, December 9, 2020

 


भारत विकास परिषद के सदस्य की मृत्यु पर आयोजित की शोक सभा 

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कनीना। बुधवार को नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना मे भारत विकास परिषद् शाखा कनीना के सदस्यों ने शोक सभा आयोजित की। परिषद के सदस्य रामेश्वर यादव के अकस्मात निधन पर एक शोक सभा आयोजित की करके दो मिनट का मौन रखा गया।
इस मौके पर क्लब प्रधान मा कृष्ण सिंह ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामेश्वर यादव एक ईमानदार पढ़ा लिखा समाजसेवी व्यक्ति था।  उसकी कमी हमें हमेशा खलती रहेगी। प्रधान कंवरसेन वशिष्ठ ने बताया कि रामेश्वर यादव अपने पीछे दो पुत्र व पत्नी सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। मोहन सिंह पार्षद ने बताया स्व.रामेश्वर दानशील व मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। इस मौके पर उपस्थित गजराज सिंह, धनपत, मोहन सिंह पार्षद, दलीप पार्षद, देशराज, महेश बोहरा, ओमप्रकाश,सोनू, जयप्रकाश, हरिराम मित्तल, विनय एडवोकेट, सीताराम, अभिषेक भारद्वाज, सुरेन्द्र प्रवक्ता, सुरेन्द्र, सरिता भारद्वाज, ऊषा जांगड़ा शहीद परिषद के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 1: नेताजी मेमोरियल क्लब में मौन व्यक्त करते भारत विकास परिषद पदाधिकारी।

 आरोपित की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शिकायत पहुंची सीएम विंडो पर 

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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव गाहड़ा निवासी सज्जन सिंह पुत्र रामस्वरूप ने बुधवार को सीएम विंडो में शिकायत दर्ज कर आरोपितों को की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने यहां बताया की कनीना पुलिस ने मुकदमा नंबर 381 विभिन्न धाराओं के तहत 20 अक्टूबर 2020 को शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया था लेकिन आरोपित की गिरफ्तारी नहीं की है।
 क्या है मसला-
 सज्जन सिंह ने बताया कि उनके फोन नंबर 94 16382371 तथा 89308 6894 पर बार-बार कुछ नंबरों से फोन आते हैं और उन्हें जान से मारने की धमकी देता है। पीडि़त ने सज्जन सिंह ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि कुछ फोन नंबरों से उन्हें उनसे पांच लाख रुपये की फिरौती की मांग की जा रही है। और धमकी देने वाला अपने आप एक जाति विशेष का बताता है। उन्होंने अपने परिवार के जानमाल की रक्षा के लिए यह शिकायत की थी। जिस पर कनीना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था। सज्जन सिंह ने बताया अभी भी उनके फोन नंबरों पर फोन लगातार आ रहे हैं। उन्हें मारने की धमकियां मिल रही है। ऐसे में उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई है ताकि उनके संभावित जानमाल के नुकसान से बचा जा सके।

कई सड़क मार्ग हैं जर्जर

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 कनीना। कस्बा कनीना के आस पास कई मार्ग जर्जर हो चुके हैं। इनको ठीक किए जाने की मांग उठ रही है।
कस्बा कनीना के अनाज मंडी से ककराला तक का मार्ग अति जर्जर हो गया है। वही गाहड़ा से बव्वा तक का मार्ग जर्जर हो चुका है। इसी प्रकार कई अन्य मार्ग जर्जर हो रहे हैं। प्रशासन से मांग की गई है कि इन मार्गों की सुध ली जाए। कनीना अनाज मंडी से ककराला करीब 3 किलोमीटर लंबा मार्ग है जो कपूरी होते हुए रेवाड़ी रेवाड़ी को जाता है। इस मार्ग पर गड्ढे बन गए हैं। आवागमन में परेशानी हो रही है। ककराला-कपूरी को जाने वाले रमेश कुमार, महेश कुमार, दिनेश कुमार आदि ने बताया किस मार्ग के जर्जर हो जाने से उन्हें भारी परेशानी हो रही है। बार-बार प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया जा रहा किंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
  इसी प्रकार गाहड़ा से बव्वा मार्ग भी करीब 3 किलोमीटर है जो जर्जर हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग पर चलना बहुत कठिन हो गया है। वैसे भी यह मार्ग संकीर्ण है। ऐसे में मार्ग जर्जर होने से चलना कठिन हो गया है। इस मार्ग की सुध लिए जाने की मांग की गई है।
उधर मोहनपुर नांगल बस स्टैंड से ककराला तक के मार्ग को त्वरित गति से निर्मित किये जाने की मांग को लेकर कई बार ग्रामीण उच्चाधिकारियों से मिल चुके हैं। गांव के जगदेव यादव, ओमप्रकाश, बनवारीलाल आदि ने मांग की है कि इस मार्ग को अविलंब पूरा किया जाए।

अति कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं गाडिय़ा लुहार

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कनीना। वर्तमान में गाडिय़ा लुहार अति कठिन जीवन जी रहे हैं। किसी वक्त राजस्थान के मेवाड़ में महाराणा प्रताप की सेना में गाडिय़ा लुहार के पूर्वज लुहार का काम करते थे। आज उनके वंशज कठिन जीवन जी रहे हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात में अपनी झोपड़ी में रहने वाले इन लोगों का अब कृषि उपकरण बनाने का धंधा भी चौपट हो गया है। अब तो इनके पास न तो स्थायी आवास उपलब्ध हैं और न इनको दो जून खाने के लिए रोटी ही उपलब्ध हैं।
  कनीना क्षेत्र के आस पास गाडिय़ा लुहार कठिन जीवन जी रहे हैं। जब आधुनिक मशीनों से कृषि के उपकरण नहीं बनते थे उस वक्त गाडिय़ा लुहारों के पास कृषि उपकरण बनाने तथा बनाकर बेचने का बेहतर रोजगार होता था किंतु विज्ञान के सामने इनकी कोई नहीं चल पाई है और बेचारे कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं। यहां तक कि ये लुहार कभी भीख नहीं मांगते थे किंतु अब पेट की भूख ने उन्हें भीख तक मांगने को मजबूर कर दिया है। उनके पास स्थायी आवास नहीं है और जहां कहीं भी अधिक दिनों तक ठहरते वहां से उन्हें खदेड़ दिया जाता है। सर्दी हो या गर्मी इनको विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करना पड़ता है। आलम यह है कि अब उनके भूखों मरने की नौबत आ गई है और जराइम पेशा करने को मजबूर हो सकते हैं।
  गाडिय़ा लुहारों की सबसे खूबी यह है कि मिलकर रहना और खाना। ये लोग जो कुछ रोटी रूखी सूखी मिल जाती है उसे आपस में बांटकर खाते हैं। रोटी को जब तक नहीं खाते तब तक उन्हें सुनिश्चित न हो जाए कि सभी को रोटी मिल गई है चाहे एक  एक टुकड़ा ही मिला हो। बार बार सरकार से उन्हें स्थायी प्लाट देने एवं रोजगार का प्रबंध करने की बात उठती है किंतु अभी तक सरकार का ध्यान भी नहीं गया है।
क्या कहते हैं इतिहासकार-
इतिहासकार राजेश कुमार का कहना है कि
 जब महाराणा प्रताप 1576 में अकबर के विरुद्ध हल्दीघाटी का युद्ध किया था उस वक्त उनकी सेना में गाडिय़ा लुहारों के पूर्वज हथियार बनाने का काम करते थे। जब महाराणा प्रताप की हार हो गई थी तो बताया जाता है कि इन्होंने अपनी चारपाई को उल्टा रखकर वतन इस शर्त पर छोड़ा था कि जब तक राणा का सम्मान एवं साम्राज्य नहीं लौट पाएगा तब तक वे अपने वतन को नहीं लौटेंगे। ऐसे में जहां भी पड़ाव मिला वे रहते हैं और कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करते आ रहे हैं।
क्या करते हैं गाडिय़ा लोहार-
 कनीना में गाडिय़ा लोहार सुरता, धर्मबीर, मंतरू, कलावती आदि ने बताया कि उनके लिए कोई स्थायी आवास नहीं होता। वे इधर-उधर घूमते रहते हैं । उनकी मजबूरी है कृषि के उपकरण बेचने के लिए गांव में निकलते हैं तो कोई उनके उपकरण नहीं लेते। यहां तक कि उन्होंने बताया कि उनके लिए ने पेयजल एवं प्रकाश व्यवस्था नहीं मिलती है।  यहां तक कि उनकी वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं बनाई जाती जिसके कारण उनका जीवन यापन बहुत कठिन हो जाता है। उन्होंने बताया कि वे अब मजबूरी में बाजार से खरीदे हुए कृषि के उपकरण बेचने के लिए गांव गांव ले जाते ले जाते हैं। पहले कभी भी अपने हाथों से बनाते थे किंतु अब हाथ के उपकरण कोई खरीदने वाला नहीं है।
सर्दी, गर्मी या बरसात हर समय यह गांव से बाहर अपनी झोपड़ पट्टी में रहते हैं। उनके पास न कोई सुविधा होती है और ना ही अपने बच्चों को शिक्षा दिलवा पाते हैं।  उनको लोग बुरी नजर से देखते हैं। सरकार अगर कोई सहायता दे तो वह आधुनिक मशीन दे तो कृषि के कारण बना सकते हैं। आधुनिक मशीनों द्वारा कृषि के उपकरण बना सकते हैं और बेचकर गुजर-बसर कर सकते हैं लेकिन ऐसा अभी तक संभव नहीं हो पाया है।

ओमप्रकाश लिसानिया को बनाया जिला प्रवक्ता 

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कनीना। भारतीय जनता पार्टी जिला महेंद्रगढ़ का का गठन किया गया जिसमें ओम प्रकाश लिसानिया कनीना को भाजपा जिला महेंद्रगढ़ का प्रवक्ता बनाया गया हैं।
 श्री ओमप्रकाश लिसानिया कनीना ने बताया कि लखमीचंद चौहान नांगल मोहनपुर को जिला महामंत्री व नीलम कुमारी कनीना वार्ड नंबर आठ को जिला मंत्री व उमेद सिंह राजपूत पाथेङा को जिला मंत्री बनाया गया है।  ओमप्रकाश , लखमीचंद चौहान,उमेद व नीलम ने भारतीय जनता पार्टी जिला महेंद्रगढ़ के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा एडवोकेट ,भाजपा हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ,प्रदेश महामंत्री संदीप जोशी एवं जिला प्रभारी महेश चौहान ,पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव व पार्टी के शीर्ष नेताओं कार्यकर्ताओं को ये सम्मान देने पर आभार जताया है। उन्हें राजकुमार चेयरमैन, मोहन सिंह पार्षद, देशराज, कंवरसेन वशिष्ठ, अभिषेक भारद्वाज, कृष्ण सिंह, राकेश, सुरेन्द्र, धनपत, कर्ण, दलीप, संदीप और अनेकों पार्टी सदस्य थे।
श्री लिसानिया ने कहा कि किसानों की आड़ में विरोधी पार्टियां अपनी राजनैतिक रोटियां सेक रही हैं। भाजपा सदा किसानों की हितैषी रही है हरियाणा में किसानों का बाजरा 2150 रुपये और सरसों 4425 रुपये जो अब एमएसपी बढ़ाकर 4650 रुपए कर दिया गया है। हर साल फसलों का एक-एक दाना खरीदती है। किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने किसानों को विपक्षी पार्टियों के झांसे में न आने की बात की है।
फोटो कैप्शन: ओमप्रकाश लिसानिया।


आवारा जंतुओं से किसान परेशान
-रातभर जागकर दे रहे हैं तैनाती

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कनीना। सर्दी के मौसम में आवारा जंतु किसानों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। नील गाय उनमें से एक हैं। ये फसल का दस फीसदी भाग तक नष्ट कर देती हैं। गेहूं तथा सरसों की फसल खेतों में हरियाली के रूप में दिखाई पडऩे लगी है तब से धावा बोलना शुरू कर दिया है।
 किसान की फसल का कुछ हिस्सा आवारा जंतुओं का निवाला बन जाता है। चूहे,मोर, नील गाय, गाएं, पक्षी, कीट, बंदर और सूअर आदि  किसान के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। किसान को तो इन जीवों से फसल को बचाए रखने के लिए भारी धन खर्च करना पड़ रहा है। आवारा जंतुओं से फसल को बचाने के लिए रखवालें भी रखने पड़ते हैं जो रखवाली के बदले फसल पैदावार पर अनाज लेते हैं। गौशाला होने के बावजूद भी कनीना में कुछ गाएं घूम मिल सकती हैं।    किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत सिंह, कृष्ण कुमार आदि ने बताया कि नील गाय और  गायें सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। नील गाय झुंड के रूप में चलती हैं और जिस किसी खेत में घुस जाती हैं उसे तबाह करके ही दम लेती हैं।  किसान को सबसे अधिक रखवाली इन्हीं जीवों से करनी होती है। इन्हीं जीवों से फसल को बचाने के लिए रखवालों का प्रबंध भी करना पड़ता है। आवारा गायों और नील गायों से बचने के लिए खेत में रखवाली के बावजूद भी ये गाएं फसल को नुकसान पहुंचाए बगैर नहीं रह सकती हैं। फसल को नुकसान पहुंचाने में गाएं, सूअर जैसे कितने ही जीव न केवल खेत में खड़ी अपितु काटकर डाली गई फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
क्या कहते हैं किसान-
 किसानों का कहना है कि नील गाय उनकी फसल को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। बाकी जानवर मिलकर जितना नुकसान नहीं पहुंचाते उतना नील गायें पहुंचा रही हैं। किसान रवि कुमार, कृष्ण सिंह, योगेश कुमार ने बताया कि वे फलदार पौधे उगाते थे किंतु अब ये फलदार पौधे उगाने बंद कर दिए है क्योंकि फलदार एवं सब्जियों को नीलगाय रौंद जाती हैं।
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी-
कृषि विस्तार सलाहकार डा देवराज ने कहा कि यूं तो पूरे हरियाणा की ही यह समस्या है और समस्या अधिक विकराल दक्षिण हरियाणा की है जहां मेहनत अधिक करके ही किसान फसल उगाता है और उस पर पानी फेर नील गाय चंपत हो जाती है। सर्दी से बचने के लिए किसान जब घर में जाता है तभी ये नील गाय नुकसान पहुंचा जाती है। इनका नुकसान भारी है जो दस फीसदी को पार कर जाता है।
फोटो कैप्शन 2: कनीना के खेतों में नील गाय।



विगत वर्ष की तुलना में कम उगाया है सरसों, गेहूं एवं चना
-चने की खेती का अस्तित्व संकट में

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कनीना। इस बार किसानों ने गेहूं,सरसों एवं चने की फसल विगत वर्ष की तुलना में कम उगाया है किंतु भ्रसक प्रयासों के बावजूद भी चने की खेती नहीं बढ़ पा रही है। सरकार द्वारा किसानों को सरसों के बेहतर दाम दिए जाने के चलते सरसों की फसल की तरफ बढ़ा था किंतु स्कूल, कालेज, मैरिज प्लेस बनाये जाने, बागवानी की ओर रुझान होने के चलते कृषि योग्य भूमि घटती ही जा रही है। इस वर्ष क्षेत्र में सरसों की फसल की बिजाई 400 हेक्टेयर पर कम की गई है। वहीं क्षेत्र में गेहूं व चने की बिजाई में गिरावट दर्ज की गई है जबकि गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल तो सरसों का 4625 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है।
कृषि विस्तार सलाहकार डा देवराज ने बताया कि ने बताया कि खंड में 2018 में करीब 19300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों की फसल की बिजाई की गई थीजो वर्ष 2019 में 19950 हेक्टेयर तो 2020 में 19500 हेक्टेयर पर बिजाई की गई है। गेहूं की पैदावार 2018 में 11020 हेक्टेयर पर, वर्ष 2019 में 10405 हेक्टेयर तो 2020 में 10200 हेक्टेयर पर बिजाई की गई है। चना वर्ष 2018 में 50 हेक्टेयर, 2019 में 40 हेक्टेयर तो 2020 में 15 हेक्टेयर पर उगाया गया है।
चने लड़ा रहा अस्तित्व की लड़ाई-
करीब 20 वर्ष पहले किसानों का चना उगाने में बहुत उत्साह दिखाता था किंतु अब चने उगाना ही भूल गया है। चने को उगाने पर पैदसवार नहीं दे पा रहा है क्योंकि इसके लिए बरानी भूमि चाहिए।
  कनीना के दीपचंद ने विगत वर्ष एक एकड़ में चने उगाए थे। किसान राजेंद्र सिंह, मा रविंद्र सिंह भी थोड़े से भूभाग पर चने उगाते हैं। रामानंद यादव ने बताया कि वे अब भी बेहतर चने की पैदावार ले लेते हैं। वे कई वर्षों से चने की खेती करते आ रहे हैं।
फोटो कैप्शन 3: चने की खेती से चने का साग तोड़ता किसान।
भारत विकास परिषद के सदस्य की मृत्यु पर आयोजित की शोक सभा 

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कनीना। बुधवार को नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना मे भारत विकास परिषद् शाखा कनीना के सदस्यों ने शोक सभा आयोजित की। परिषद के सदस्य रामेश्वर यादव के अकस्मात निधन पर एक शोक सभा आयोजित की करके दो मिनट का मौन रखा गया।
इस मौके पर क्लब प्रधान मा कृष्ण सिंह ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामेश्वर यादव एक ईमानदार पढ़ा लिखा समाजसेवी व्यक्ति था।  उसकी कमी हमें हमेशा खलती रहेगी। प्रधान कंवरसेन वशिष्ठ ने बताया कि रामेश्वर यादव अपने पीछे दो पुत्र व पत्नी सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। मोहन सिंह पार्षद ने बताया स्व.रामेश्वर दानशील व मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। इस मौके पर उपस्थित गजराज सिंह, धनपत, मोहन सिंह पार्षद, दलीप पार्षद, देशराज, महेश बोहरा, ओमप्रकाश,सोनू, जयप्रकाश, हरिराम मित्तल, विनय एडवोकेट, सीताराम, अभिषेक भारद्वाज, सुरेन्द्र प्रवक्ता, सुरेन्द्र, सरिता भारद्वाज, ऊषा जांगड़ा शहीद परिषद के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 1: नेताजी मेमोरियल क्लब में मौन व्यक्त करते भारत विकास परिषद पदाधिकारी।


वैगनार ने मारी मोटरसाइकिल सवार को टक्कर, मौत

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कनीना। बुधवार को भडफ़ गांव के पास वैगनआर एवं मोटरसाइकिल के बीच हुई टक्कर में मोटरसाइकिल सवार घायल हो गया जिन्हें कनीना के उप नागरिक अस्पताल लाया गया जहां उन्हें डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मनोज बूचावास के रूप में उनकी पहचान हुई है। कनीना पुलिस में विजयपाल पायगा निवासी की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। वैगन-आर मालिक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया।
 मिली जानकारी अनुसार विजयपाल पाएगा निवासी ने बताया पुलिस में दी शिकायत में कहा गया है कि बुधवार को वह अपनी गाड़ी से दड़ौली से पायगा जा रहा था और उनके आगे उनका भांजा मनोज बूचावास जो रेवाड़ी से अपनी मोटरसाइकिल पर अपने गांव बूचावास जा रहा था। जब मनोज कनीना उपमंडल के गांव भडफ़ के बस स्टैंड के पास पहुंचा तो महेंद्रगढ़ की ओर से से आ रही एक  वैगनआर का चालक तेज गति से गाड़ी दौड़ाता ला रहा था और उन्होंने मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी। जिससे मोटरसाइकिल सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। इसी बीच वैगनार चालक अपनी गाड़ी को छोड़कर फरार हो गया। भीड़ इक_ी हो गई और तभी पुलिस की वर्दी धारक संजय बवाना जो जिला पलवल में कार्यरत हैं, उनके भांजे को कनीना के उप नागरिक अस्पताल तक लेकर आया। जहां डाक्टरों ने
उन्हें मृत घोषित कर दिया। कनीना पुलिस ने वैगनआर चालक के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है।


लोक गायक अमृत सिंह को पितृ शोक 

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 कनीना। कनीना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत विशेष अध्यापक एवं हरियाणा लोक गायक अमृत सिंह के पिता नरपाल सिंह का देहांत हो गया। वे 65 वर्ष के थे तथा अपने पीछे तीन बेटे दो बेटियां तीन पति पत्नी को छोड़ गए। उनका मूल निवास खोहड़ बहरोड है। वे अपने पुत्र अमृत लाल के साथ कनीना रहते थे। उनके पिता के देहांत पर क्षेत्र के शिक्षाविदों ने शोक जताया है।

Tuesday, December 8, 2020

 खाद्य सुरक्षा अधिकारी भंवर सिंह ने किया दुकानों का निरीक्षण किया
-खाद्य सुरक्षा का लाइसेंस जरूरी- भंवर सिंह

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कनीना।  मंगलवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी भंवर सिंह ने कस्बे सहित कनीना खंड के गांवों में भी स्थित दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परचून की दुकानों में रखे पैक व खुले सामान की गुणवत्ता व एक्सपायरी से संबंधित जांच कर दुकानदारों को जरूरी दिशा निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कनीना धनौंदा, सेहलंग, खेड़ी तलवाना, भोजावास, पड़तल सहित करीब 25 गांवों में छापेमारी कर दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी दुकानदारों को अपना रजिस्ट्रेशन जल्द से जल्द करवाने की अपील की। ताकि वे भविष्य में होने वाली परेशानियों से बच सके।
कस्बे में खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा किए जा रहे निरीक्षण की सूचना मिलने के बाद अनेक किराना दुकानदार तो अपनी-अपनी दुकाने बंद कर घरों को चले गए। डा भंवर सिंह ने बताया कि किराना की दुकानों के माध्यम से खुले व पैकिंग में बेचे जाने वाले सामान की जांच के लिए समय-समय विभाग के अधिकारियों के द्वारा निरीक्षण किया जाता रहता है। जो भी दुकानदार एक्सपायरी व खराब सामान बेचता हुआ पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बता दे कि जिले में क्वांटस कम्पनी द्वारा खाद्य सुरक्षा सर्टिफिकेट की ट्रेनिंग के लिए दुकानदारों के रजिस्ट्रेशन का कार्य किया जा रहा है। जिन दुकानदारों के द्वारा अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया गया है उनकी ट्रेनिंग अगले सप्ताह से शुरू होने जा रही है। क्वांटस कम्पनी के अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी आफ इंडिया ने खाद्य पदार्थों की क्वालिटी बनाए रखने के लिए कदम उठाए है। जिसके तहत खाद्य पदार्थ बनाने और बेचने वालों को एफएसएसएआई की फोस्टेक योजना के तहत ट्रेनिंग लेनी होगी। ट्रेनिंग के बाद दुकानदार को खाद्य सुरक्षा सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जिसकी आवश्यकता दुकानदार को अपनी दुकान के रजिस्ट्रेशन में पड़ेगी। जिसके लिए जिले में कम्पनी के कर्मचारियों के द्वारा रजिस्ट्रेशन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महेंद्रगढ़ व कनीना खंड में अभी तक करीब 650 दुकानदारों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। उन्होंने अन्य दुकानदारों को भी जल्द से जल्द अपना रजिस्ट्रेशन करवाने की अपील की। ताकि सभी दुकानदार ट्रेनिंग लेकर अपना-अपना सर्टिफिकेट प्राप्त कर सके व भविष्य में होने वाली किसी भी परेशानी से बच सके। उन्होंने बताया कि कम्पनी के कर्मचारी दुकानदार से 708 रुपए लेकर उसका रजिस्ट्रेशन कर रहे है। जिसके बाद उक्त दुकानदारद्मह्यड्ड को कम्पनी के ट्रेनरों के द्वारा ट्रेनिंग की जाएगी। जिसके बाद सभी दुकानदारों के सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे।
फोटो कैप्शन 6: डा भंवर सिंह किराने की दुकानों पर निरीक्षण करते हुए।


लाला गोपीराम की याद में लगाई गौशाला में सवामणी

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कनीना। कनीना वार्ड 7 निवासी विक्की पंसारी के 80 वर्षीय दादा लाला गोपीराम के गत दिनों निधन पर रसम पगड़ी पर गौशाला में सवामणी लगाई। गायों के लिए मीठा चारा विक्की पंसारी ने अपने हाथों से बनाकर गायों को खिलाया। गोपीराम कदमों पर चलते हुए उनका पौता विक्की पंसारी भी समाजसेवा में लगा हुआ है। लाला गोपीराम अपने पीछे तीन पुत्र, एक पुत्री, पांच पौते, पांच पौतियां, पांच पड़पौते व एक पड़पौती सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए है। सभी ने एक दिन गायों की सेवा की। इस मौके पर शिबू पंसारी, विजय कुमार, महावीर प्रसाद, रमेश कुमार गौरव, विकी पंसारी, सतीश कुमार, सोनू मित्तल आदि ने गायों को खाना खिलाया एवं दानपुण्य किया।
उधर स्व प्रो हंसराज यादव की पत्नी चंद्रमुखी  रसम पगड़ी पर हवन आयोजित किया गया। अरविंद जोशी ज्योतिष शास्त्री ने हवन करवाया। जहां प्रोफेसर वर्ष 2006 में गंभीर बीमारी के चलते देहांत हो गया था। उनके चार पुत्र दो पुत्रियां, 6 पोतें  तथा दो पोतियां रसम पगड़ी में हाजिर थी। उनका एक पुत्र गजेंद्र यादव वर्तमान में भी रेवाड़ी में प्रोफेसर पद पर कार्यरत है।
फॅोटो कैप्शन 7: गायों के लिए कनीना श्रीकृष्ण गौशाला में सवामणी लगाता विक्की पंसारी एवं उनका परिवार।

 

स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए सरकार ने दिया एक और मौका 

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कनीना। हरियाणा सरकार ने बीए, बीकाम , बीएससी प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए एक मौका और दे दिया है। राजकीय महाविद्यालय कनीना के नोडल अधिकारी हरिओम भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार ने बीए,बीकाम,बीएससी प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए एक मौका और दिया है। जो विद्यार्थी अब तक किसी कारणवश दाखिला नहीं ले पाए वह अब 12 दिसंबर 2020 तक आनलाइन आवेदन कर दाखिला ले सकते हैं। उन विद्यार्थियों को 12 दिसंबर रात्रि 12 बजे तक फीस जमा करानी होगी। फीस भरने के तुरंत बाद 12 दिसंबर से पहले पहले ऐसे विद्यार्थियों को अपने दस्तावेजों का तसदीकीकरण करवाना होगा तथा महाविद्यालय में गठित तसदीकीकरण कमेटी से एक सौ रुपए की रेड क्रास रसीद भी लेनी होगी। इसके बाद ही उनका प्रवेश कंफर्म हो सकेगा। इस तरह वे अपना दाखिला सुनिश्चित कर सकते हैं।  राजकीय महाविद्यालय कनीना में बीए, बीएससी ,बीकाम प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए कुछ सीटें रिक्त हैं। वहीं राजकीय कन्या महाविद्यालय उन्हाणी में भी सीटें रिक्त हैं।


अधिवक्ताओं पर के खिलाफ दर्ज हुआ मामला गलत -मीनाक्षी 

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 कनीना। कनीना बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने महेंद्रगढ़ के अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे का विरोध जताया तथा धरना देते हुए वर्क सस्पेंड रखा।
बार एसोसिएशन के उप-प्रधान मीनाक्षी यादव ने कहा कि वकीलों के खिलाफ जो मुकदमा दर्ज हुआ है वह गलत हुआ है। यह अविलंब रद्द होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कि ये मामला रद्द नहीं होगा तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस बारे में पूर्व प्रधान संदीप कनीनवाल ने कहा कि कनीना के वकीलों के खिलाफ प्रशासन की तानाशाही नहीं चलेगी। जिला मुख्यालय की मांग हमारी जायज है जिसका हमारा हक है वह मिलना चाहिए। इस अवसर पर ओम प्रकाश रामबास अधिवक्ता ने कहा कि अधिवक्ताओं की मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन का रूप दिया जाएगा। इसके अलावा सभी अधिवक्ताओं ने मिलकर किसानों के आंदोलन का भी समर्थन किया। एमएसपी मांग बिल्कुल जायज है और जल्द सभी कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। इस मौके पर पूर्व प्रधान रमेश कौशिक, पूर्व प्रधान कुलदीप कनीनवाल, पूर्व प्रधान संदीप कनीनवाल, पूर्व प्रधान जितेंद्र यादव, पूर्व सचिव मंजीत, कोषाध्यक्ष सोमवीर गोमला, दीपक चौधरी, सतीश करीरा, सुनील राव ककरालिया, विक्रम, दिनेश यादव, राजकुमार तंवर युद्धवीर पड़तल, पूर्व प्रधान विजय अधिवक्ता, पूर्ण सिंह नंबरदार,महेंद्र नंबरदार आदि मौजूद थे। समर्थन देने पहुंचे अधिवक्ता-
 कनीना बार प्रधान कुलदीप रामबास की अध्यक्षता में महेंद्रगढ़ बार को समर्थन देने कनीना बार पदाधिकारी पहुंचे। कनीना सचिव अखिल अग्रवाल ने बताया कि जिला मुख्यालय की मांग जायज है, अधिवक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है वह गलत है, इसको रद्द किया जाए। एफआईआर का पूरा विरोध किया। कनीना बार का नौ दिसंबर से कोर्ट का कार्य सुचारू रूप से चलेगा। सभी अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हम सभी महेंद्रगढ़ बार के साथ हैं। इस मौके पर बार प्रधान कुलदीप रामबास, सचिव अखिल अग्रवाल, सुमन यादव तथा बार के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
फोटो कैप्शन तीन: धरने पर बैठे कनीना के अधिवक्ता।



भारत बंद का कोई असर नहीं हुआ 

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 कनीना। कनीना क्षेत्र में भारत बंद का कोई असर नहीं हुआ। एक भी दुकान बंद नहीं हुई। बहुत से दुकानदारों को तो यह भी मालूम नहीं था कि आज भारत बंद किया हुआ है। अधिकांश दुकानदार प्रतिदिन की भांति समय पर चलकर आए और दुकानें खोली। दिनभर बाजार में भी भीड़ रही तथा दुकानों पर सामान खरीदते  लोग देखे गए।
दुकानदार सुरेश कुमार, कुलदीप कुमार, रवि कुमार, रविंद्र बंसल आदि ने बताया कि दुकानें आम दिनों की तरह खुली रही तथा कोई प्रभाव नजर नहीं आया। उन्होंने कहा कि भारत बंद पूर्ण रूप से फेल हुआ है। उन्होंने बताया कि सभी दुकानों पर जहां लोग खरीददारी करते देखे गए वहीं रेहड़ी वाले भी अपने फल सब्जियों को बेचते देखे गए। सब्जियों की दुकानें खुली तथा रोडवेज बसें चलती रही।
फोटो कैप्शन 4: कनीना में खुली दुकानें।

ओमप्रकाश लिसानिया को बनाया जिला प्रवक्ता 

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कनीना। भारतीय जनता पार्टी जिला महेंद्रगढ़ का का गठन किया गया जिसमें ओम प्रकाश लिसानिया कनीना को भाजपा जिला महेंद्रगढ़ का प्रवक्ता बनाया गया हैं।
श्री लिसानिया ने शीर्ष नेताओं, मंत्री, पूर्व मंत्री विधायकों, पूर्व विधायकों व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़, जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा का जताया है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के नियमों पर चलकर पार्टी को मजबूत करेंगे।
भारत बंद पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री लिसानिया ने कहा कि जिला महेंद्रगढ़ में बंद का कोई असर नहीं है। किसानों की आड़ में विरोधी पार्टियां अपनी राजनैतिक रोटियां सेक रही हैं। भाजपा सदा किसानों की हितैषी रही है हरियाणा में किसानों का बाजरा 2150 रुपये और सरसों 4425 रुपये जो अब एमएसपी बढ़ाकर 4650 रुपए कर दिया गया है। हर साल फसलों का एक-एक दाना खरीदती है। किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने किसानों को विपक्षी पार्टियों के झांसे में न आने की बात की है।
फोटो कैप्शन: ओमप्रकाश लिसानिया।


बेरोजगारों के लिए उदाहरण बना हुआ है वर्मा परिवार
-चांदरों की छपाई से पूरा परिवार मिलकर छापता है चादर

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कनीना। यदि दिल में लग्न हो और हाथों में कला का जादू हो तो बेरोजगारी आड़े नहीं आती। कामचोर व्यक्ति बेरोजगारी की दुहाई देते हैं परन्तु जिला महेंद्रगढ़ के कनीना कस्बा में एक बेरोजगार परिवार अपनी कड़ी मेहनत और लग्न से कामचोरों के लिए उल्लेखनीय उदाहरण बन गया है। दो परिवारों के पांच सदस्य बेशक कम पढ़े लिखे हैं किंतु हस्तकला के चलते क्षेत्र में ही नहीं अपितु दूर दराज तक विख्यात हैं। कपड़े की चादरों पर रंग,पेंट से देवी देवताओं की तस्वीरें उभारते हैं जिसके कारण इन चादरों को दूर दराज के लोग खरीदकर ले जाते हैं। सुनीता के पति राजेंद्र सिंह का देहांत हो चुका है जो सुबह से शाम अपने हाथों से रंगों से तस्वीर उकेरती है।
  कस्बा कनीना  का यह परिवार वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी देवी देवताओं की प्रिंटिड चादर बनाने के नाम से प्रसिद्ध हैं। कई जातियों के लोग रतजगा में इस परिवार की चादर प्रयोग करते हैं। इस परिवार के लिए रोटी रोजी काम धंधा भी चादर ही है। वर्मा परिवार के सुनीता देवी एवं काल का कहना हैं कि उनके पूर्वज रामकुमार तथा मुन्नालाल भी चादरों की घरेलू प्रिंटिंग के लिए विख्यात थे। प्रारंभ में यह परिवार सफेद चादर खरीदकर  लाता है जिस पर वांछित रंग देकर देवी देवताओं के सुंदर चित्र बनाता है। ये देवी भगवती, देवी गुसाई, देवी कालिका आदि के चित्र अपने हाथों की कलाकारी से छापते हैं। परिवार को जब चादर छापनी होती है तो तुरंत पूरा परिवार मिलकर सुंदर हस्त छपाई में मग्न हो जाता है। करीब तीन दिनों के अथक प्रयासों के बाद चादर तैयार होती है।
 दिल्ली की कपड़ा मिलों में छपाई के लिए प्रयुक्त रंगों को यह परिवार खरीदकर लाता है और देवी देवताओं की तसवीरें छापकर बेचता हे। बेचने के लिए कोई दुकान नहीं बनाई गई है अपितु घर से ही खरीदकर ले जाते हैं। सुनीता महज छह जमात पढ़ी हुई है और उनकी पुत्री चंचल उनकी मदद करती है वहीं दूसरा परिवार अशोक कुमार, सुमन,काजल एवं तन्नू है। दूसरे परिवार में भी सुमन सात जमात पढ़ी हुई है। कुछ लोग इनको आर्डर देकर चादर छपवाता है।
परिवार का रोटी रोजी का यही एक पैतृक धंधा बचा है। परिवार की आर्थिक हालात अच्छी ना होने पर भी अपने इस काम से खुश हैं
क्या कहते हैं अशोक वर्मा-
 दोनों परिवारों की देखरेख कर रहे अशोक वर्मा ने बताया कि कई जातियों के लोग मन वांछित फल पाने के लिए भी इन चादरों की उपस्थिति में रात जगाते हैं। वर्मा परिवार का कहना है कि उनके दादा मुन्नालाल यह कार्य करते थे। तत्पश्चात उनके पुत्र रामकुमार ने 1993 तक यह कार्य किया और अब उनके पुत्र अशोक वर्मा इस काम को बखूबी से निभा रहे हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी इस कला का हस्तांतरण होता आ रहा है। गत्ते के ब्लाक, रंग, पेंट द्वारा उनके दिमाग में जो कला उभरती है उसे हाथों द्वारा तीन या चार दिनों में उभारते हैं। उन्हें अफसोस है कि उनका यह धंधा सर्दियों में अधिक चलता है और बाकी समय खास काम नहीं मिलता। वर्ष भर में एक सौ तक चादर ही बेच पाते हैं।
कौन अधिक खरीदते हैं इनकी चादर-
  उधर वर्मा परिवार की चादर यूं तो कोई भी खरीद लेता है किंतु  कुछ जाति विशेष के लोग होते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी देवी देवताओं की छपी चादर जागरण में प्रयोग करते हैं। जब यह चादर फट जाती है या परिवार का सदस्य अलग हो जाता है तो उन्हें नई चादर खरीदनी पड़ती है। अभी तक राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के लोगों में ही इन चादरों की मांग है। यद्यपि बड़े परिवार का गुजारा मामूली धंधे से चला पाना कठिन है परंतु परिवार अपने कत्र्तव्य ,निष्ठा , ईमानदारी  और लग्न के फल से संतुष्टï है।
फोटो कैप्शन 2: चादर की छपाई करता वर्मा परिवार।

दो बाइकों की टक्कर में एक की मौत, दूसरा गंभीर रूप से घायल
-मृतक गांव का पंच था

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कनीना।  उपमंडल के गांव चेलावास की बणी के पास पेट्रोल पंप के पास दो मोटरसाइकिल आमने-सामने से टकरा गई जिसमें एक व्यक्ति नांगल मोहनपुर की मौत हो गई जबकि दूसरी बाइक पर सवार प्रदीप पुत्र वीरेंद्र सिंह नांगल मेहता थाना नीमराणा गंभीर रूप से घायल हो गया है। कनीना पुलिस ने राजस्थान की बाइक चालक सवार के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है। कनीना पुलिस में प्रेम सिंह नांगल की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच अभियान जारी है।
 प्रेम सिंह पुत्र रामेश्वर दयाल नांगल मोहनपुर ने दी शिकायत में कहा है कि वह घरेलू सामान लेने के लिए कनीना आए थे। सामान लेने के बाद भी अपने छोटे भाई दुकान पर पहुंचा उसका छोटा भाई दुकान बढ़ा कर घर जाने के लिए तैयार था। हम दोनों अलग-अलग बाइक पर सवार होकर के नांगल मोहनपुर चल दिए। गांव चेलावास की बणी के पास तेज रफ्तार से आगे से आ रही राजस्थान के नंबरों की एक बाइक ने ईश्वर पंच की बाइक को टक्कर मार दी। बाइक गिर गई, तुरंत प्रभाव से प्रेम सिंह ने बाइक से अपने भाई को उठाया और कनीना के उप नागरिक अस्पताल पहुंचा जहां डाक्टरों ने जांच करके उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके भाई का पोस्टमार्टम महेंद्रगढ़ से करवा परिजनों को सौंप दिया है जहां उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। उधर राजस्थान का रहने वाला प्रदीप पुत्र वीरेंद्र सिंह नांगल मेहता थाना नीमराणा को उप नागरिक अस्पताल कनीना लाया गया जहां डाक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया है।
फोटो कैप्शन 1: दो बाइकों की टक्कर में पड़ी हुई एक बाइक।

Monday, December 7, 2020

 
अधिवक्ता तीसरी बार रखेंगे एक दिन का वर्क सस्पेंड 

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कनीना। कनीना बार के बार रूम में सोमवार को बार प्रधान कुलदीप रामबास के अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई। बार सचिव अखिल अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बैठक में महेंद्रगढ़ बार एसोसिएशन की तरफ से किए जा रहे धरने के समर्थन में वर्क सस्पेंड किया जाएगा। जिला मुख्यालय महेंद्रगढ़ में बनाए जाने के लिए जो अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया हुआ है उसके लिए कनीना बार ने तीसरी बार वर्क सस्पेंड रखा जाएगा। बार प्रधान कुलदीप रामबास के अध्यक्षता में हुई बैठक में  मौजूद अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति यह घोषणा की कि तीसरी बार महेंद्रगढ़ में अनिश्चितकालीन धरने के समर्थन में जाएंगे। इस दिन 1 दिन का वर्क सस्पेंड रखा जाएगा। इससे पहले 25 नवंबर व 2 दिसंबर को कनीना कोर्ट में वर्क सस्पेंड रखा जा चुका है। वही बार प्रधान कुलदीप रामबास ने प्रशासन से अधिवक्ताओं पर हुई एफआईआर वापस लेने की मांग भी की है। इस मौके पर बार प्रधान कुलदीप रामबास, सचिव अखिल अग्रवाल, उप प्रधान मीनाक्षी यादव, रामनिवास शर्मा, गिरवर लाल कौशिक, राजेश कनीनवाल, देशबंधु, सुभाष शर्मा, संदीप यादव, विचित्र शर्मा, निहाल सिंह खटाना, नरेश यादव, विक्रम, विनोद, सतीश ढाणा, रमेश कौशिक, राजेंद्र करीरा, योगेश गुप्ता, माडू सिंह आदि अधिवक्ता गण मौजूद रहे।  
वहीं दूसरी तरफ बार रूम के बाहर कुछ अधिवक्ताओं ने महेंद्रगढ़ में जिला मुख्यालय की मांग कर रहे अधिवक्ताओं के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज करने विरोध में  2 दिन के लिए सांकेतिक धरना शुरू कर दिया है। इन अधिवक्ताओं ने मांग की है कि वकीलों के खिलाफ जो गलत तरीके से मुकदमा दर्ज हुआ है वह रद्द किया जाए। वकीलों की जिला मुख्यालय की मांग सही और जाए हैं जो की मांग मानी जानी चाहिए । इसके साथ ही किसानों द्वारा जो भारत बंद किया जा रहा है। उसमें अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल पंजाब और हरियाणा के चेयरमैन से किसानों की मांगों का समर्थन करने के लिए सहयोग मांगा है। इस दौरान मौके पर पूर्व प्रधान संदीप महेंद्रगढ़ बार एसोसिएशन, पूर्व प्रधान विजेंद्र यादव, रमेश कौशिक, पूर्व प्रधान हरीश गाहडा, कुलदीप, मंजीत यादव, विजय, ओपी रामबास, पवन छितरौली, अनिल शर्मा, दिनेश यादव, दीपक चौधरी, सुनील राव काकरालिया, युद्धवीर पड़तल, संदीप, हरकेश, विक्रम, मनोज, ममता आदि अधिवक्ता गण मौजूद थे ।
फोटो कैप्शन 9: बार रूम में बैठक करते अधिवक्ता।
10: बार रूम के बाहर धरने पर बैठे वकील।




 धुंध पडऩे लगी, ठंड बढ़ी 

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 कनीना। कनीना क्षेत्र में सोमवार को हल्की धुंध पड़ी। सुबह सवेरे आसमान पर बादल छाये रहे। तत्पश्चात धुंध पडऩे लगी जिसके चलते ठंड का एहसास हुआ। विगत दिनों से दिन के समय गर्मी पड़ रही थी जिससे फसल को नुकसान होने की पूरी संभावना बन गई है। ऐसे में ठंड का एहसास हुआ।
किसान बेसब्री से बूंदाबांदी का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब ठंड बढ़ेगी तो फसल को लाभ होगा।  बार-बार आसमान की ओर झांक रहे हैं।

 

भारत विकास परिषद कोविड-19 वैक्सीन वितरण में करेगा मदद
-मददगारों की सूचि बनाकर भेजी

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कनीना। भारत विकास परिषद की बैठक कनीना के नेताजी मेमोरियल क्लब में संपन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता प्रधान कंवरसेन वशिष्ठ ने की।
अध्यक्षता कर रहे कंवर सिंह वशिष्ठ ने बताया कि भारत सरकार द्वारा भारत विकास परिषद के सदस्यों द्वारा भविष्य में कोविड-19 की वैक्सीन वितरण में स्थानीय चिकित्सकों, अस्पताल के कर्मचारियों की वैक्सीन लोगों तक पहुंचाने में मदद करने के लिए कमेटी का गठन करके जिला कार्यालय भेजेंगे।  
श्री वशिष्ठ ने आगे बताया कि देहली व हरियाणा प्रांतों की बैठक विनीत गर्ग राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में 27 नवंबर को को संपन्न हुई। इस बैठक में  कोविड-19 वैक्सीन वितरण में भारत विकास परिषद एक सहयोगी संस्था के रूप में कार्य करने पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। बैठक में कोविड-19  वैक्सीन वितरण में सहयोग के लिए सभी से आह्वान किया गया कि प्रत्येक सदस्य इस सेवा कार्य के लिए तत्पर रहे।
कोविड-19  वैक्सीन वितरण में सहयोग के लिए कनीना में बनाईं गई समिति में मोहन सिंह, अनिल,देशराज, सचिव,महेश बोहरा,अतर सिंह, कंवरसैन, सदस्य, वरिष्ठ, धनपत, सदस्य, वरिष्ठ, लखनलाल, गजराज, सदस्य,दलिप सिंह, अरुणा कौशिक,सरिता,उषा जांगड़ा, कृष्णा यादव, डिम्पल जांगड़ा प्रमुख होंगे।
फोटो कैप्शन 8: भारत विकास परिषद की बैठक का नजारा।

देसी कट्टे सहित एक व्यक्ति पकड़ा, मामला दर्ज -पुलिस मामले की जांच में जुटी 

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 कनीना। कनीना पुलिस को सुचना मिली कि कोका गांव के बस अड्डे पर अवैध हथियार सहित एक व्यक्ति खड़ा हुआ है। कनीना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस बल सहित बताए गए स्थान पर छापा मारा। वहां एक युवक खड़ा मिला।
युवक से पूछता करने पर उन्होंने अपना नाम पवन बताया। तलाशी करने पर उनकी पेंट में एक देसी कट्टा बरामद हुआ जिसका वे लाइसेंस नहीं पेश कर पाए। कनीना पुलिस ने पवन कोका के विरुद्ध आर्मज एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। पवन को भी गिरफ्तार कर लिया है।


भारी संख्या में खाली रह गई कालेज की सीटें
-वाणिज्य विषय के प्रति सबसे कम रुचि दिखाई

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 कनीना। कनीना उपमंडल में कार्यरत दो सरकारी कालेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए निर्धारित पांच दिसंबर के बाद भारी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। जहां राजकीय महाविद्यालय कनीना में बारे में 1200 सीटों में से 896 सीटें भर पाई तथा 304 सीटें खाली रह गई। वहीं उन्हाणी कालेज में 320 सीटों में से 186 भर पाई  तथा 134 सीटें खाली रह गई। अब अंतिम तिथि भी जा चुकी है।
राजकीय महाविद्यालय कनीना के प्रवेश के नोडल अधिकारी डा हरिओम भारद्वाज ने बताया किनके यहां 1200 सीटों में से 896 भर पाई। बीए की 640 सीटों में से 118 खाली रह गई वहीं बीएससी नान मेडिकल की 320 सीटों में से 60 खाली रह गई। बीएससी मेडिकल की 80 सीटों में से 23 सीटें खाली रह गई और बीकाम की 160 सीटों में से 103 खाली रह गई।
 उधर राजकीय महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डा विक्रम सिंह यादव ने बताया कि उनके कालेज में 320 सीटों में से 186 भर पाई और 108 सीटें खाली रह गई। उन्होंने बताया कि बीएससी की 80 सीटों में से 56 भर पाई हैं बीए की 160 सीटों में से 118 ही भर पाई। बीकाम की 80 सीटों में से महज 12 सीटें ही भर पाई। कामर्स संकाय के प्रति विद्यार्थियों में बहुत कम रुझान देखने को मिला।

 जैविक खेती में कमा लेता अजय किसान लाखों रुपये
- 50 से 60 लोगों का गु्रप बनाकर कर रहे हैं जागरूक  

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कनीना। गेहूं और सरसों की खेती छोड़कर इसराणा का किसान अजय सिंह जैविक खेती कर रहा है। अकेले गोभी में एक लाख रुपये कमा चुके हैं। जैविक खेती के लिए लोगों को भी जागरूक कर रहे है।
 किसान अजय सिंह इसराणा का कहना है कि एक तरफ हम धरती को बचाने के लिए पौधारोपण कर रहे हैं जबकि दूसरी तरफ हम कीटनाशकों का प्रयोग हम करने में लगे हुए हैं। बावजूद इसके जमीन में कीटनाशकों का प्रयोग कम होने के बजाय हर साल बढ़ता ही जा रहा है । इसी वजह से खेती योग्य भूमि भी बंजर बनती जा रही है । इस समय कस्बे की बात करें तो यहां जमीन में मौजूद आर्गेनिक कार्बन की मात्रा भी धीरे धीरे घट रही है। यह कार्बन जमीन की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में मुख्य होता है। जमीन की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए जैविक खेती करनी चाहिए। किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उनको जैविक खेती करने में सहयोग भी कर रहा हूं। कस्बे के युवाओं को जागरूक करने के साथ-साथ उनकी मदद कर रहा हूं। इस वक्त आसपास के तकरीबन 50 से 60 किसानों का एक ग्रुप बना रखा है जिसमें सभी लोग जैविक सब्जियां उगाते है। इन सभी किसानो ने मार्केट में बिक रही जहर की सब्जी को हटाकर जैविक सब्जी बेचने में लगे हुए हैं।
 किसानों ने खुद जैविक खेती कर रखी है। कस्बे में बने ट्रेनिंग सेंटर बागवानी विभाग सुंदरह मे क्षेत्र के किसान प्रशिक्षण ले रहे हैं।जैविक सब्जियां उगाने का काम दो वर्ष पहले मैंने डेढ़ एकड़ जमीन में सब्जी उगाई टमाटर गोभी बैंगन जिसमें सारा खर्चा निकाल कर 1 लाख 70 हजार की बचत हुई । डा मनदीप यादव बागवानी विभाग से हैं उन्होंने भरपूर सहयोग दिया तथा बागवानी विभाग ने मुझे सब्सिडी के तौर पर भी प्रोत्साहन दिया है। ड्री पद्धति सरकार ने मुझे उपलब्ध करवाई एक-एक करके स्केटिंग सरकार ने मुझे उपलब्ध कराई मल्चिंग सीट का सहयोग भी बागवानी विभाग ने दिया। इस तरह मेरा मनोबल बढ़ता गया और वर्तमान में बैंगन, ककड़ी, टमाटर, प्याज, मिर्च,गाजर, मूली, एप्पल बेर, पालक,टिंडा व नींबू के भी पौधे लगाए हुए हैं। इस प्रकार मिश्रित खेती कर रहे हैं। छह एकड़ में उन्होंने सब्जी उगा रखी है और बेहतर आय मिल रही है। पैदावार शुरू हो गई।
किसान अजय का कहना हैं कि खेत की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए खेतों में फसल कटाई के बाद के अवशेषों को जलाए नहीं । उनकी जुताई कर जमीन में ही मिला देना चाहिए। गोबर खाद जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए ।
मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलों की बिजाई करें यह भी जमीन की उर्वरता बढ़ाने में सहायक है। हरित घास जैसे ढांचा अन्य फसलों की बिजाई करें और फिर उनके अवशेषों को खेत में मिला दें ।
कीटनाशकों का प्रयोग ना करें। नीम उत्पाद जो मित्र कीटों के लिए अच्छी हैं उनका प्रयोग करें।
अजय ने बताया कि वे जुलाई माह के पहले सप्ताह में मैं नर्सरी डाल देते हैं।
जैविक खेती करने वाले किसान अजय सिंह ने बताया कि वह ट्रैक्टर ट्राली के माध्यम से गांव गांव जाकर आर्गेनिक सब्जियां बेचता है। आर्गेनिक सब्जियों के दाम रूटीन की सब्जियों से एक दो रुपया कम ही रखता है। जिससे सभी लोग आसानी से सब्जियों को खरीद सके। गोभी के साथ-साथ टमाटर, बैंगन, गाजर, मूली, धनिया, पालक, मेथी इत्यादि सब्जियों को भी बाजार से कम भाव में गांव गांव जाकर बेच रहे हैं। 2 एकड़ में उगाई गोभी में से आधी गोभी अभी बाकी है
 अजय के अच्छे उत्पादन के तरीके को देख आसपास के के कई किसान अब गोभी की खेती करने लगे हैं। गाहडा के आनंद भी अब गोभी की खेती करने लगे हैं और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। आनंद ने बताया पहले वे गेहूं और सरसों की खेती करते थे लेकिन लागत ज्यादा और मुनाफा कम होता था। अब गोभी के साथ साथ मूली, गाजर, मिर्च, बैंगन की सब्जी से मुझे बहुत मुनाफा हुआ है।
फोटो कैप्शन 5,6 व 7: किसान अजय इसराणा विभिन्न आर्गेनिक सब्जियां पैदावार लेते हुये।


पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के लिए लगातार प्रयासरत हैं रामबास के लोग

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कनीना। आज के भौतिकवादी जीवन पर्यावरण संरक्षण एक चुनौती भरा मुद्दा है, पर्यावरण संरक्षण केवल पौधारोपण तक ही नही हैं बल्कि लगातार उनका संरक्षण एक चुनौती है। यह कहना पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करने वाले रामबास गाव के मनोज कुमार का है। उन्होंने रामबास में भारी संख्या में पेड़ पौधे लगाये हैं।
मनोज कुमार रामबास ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण कोई मुद्दा कोई मुहिम नहीं है बल्कि एक सोच है। इसी एक सोच लेकर रामबास के युवा चल रहे हैं। पर्यावरण-संरक्षण की और लगातार सकारात्मकता की और बढ़ते चलते जा रहे हैं। सार्वजनिक पार्क से लेकर पौधरोपण,उनके संरक्षण के साथ साथ पानी की व्यवस्था करते रहते हैं। हजारों पेड़ लगाये जा चुके हैं। उनका कहना है कि इसमें कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं है लेकिन हम धरती माता को प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। गाव लगातार बिना किसी सरकारी मदद से पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।
फोटो: मनोज रामबास।

 प्रिया यादव ने लगातार तीसरी बार उत्तीर्ण की नेट की परीक्षा

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कनीना। गांव सीगड़ा निवासी प्रिया यादव ने लगातार तीसरी बार सांख्यिकी  विषय में नेट की परीक्षा उत्तीर्ण की है। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेन्द्रगढ में सांख्यिकी विषय में पीएचडी कर रही प्रिया यादव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों से मिले सहयोग,हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में सांख्यिकी विषय के सहायक प्रोफेसर डा देवेन्द्र कुमार,अन्य गुरुजनों से मिले उचित मार्गदर्शन और स्वयं की मेहनत को दिया है। प्रिया यादव के ससुर विक्रम यादव,बीएमडी क्लब चेयरमैन स्टेट यूथ अवार्डी लक्की सीगड़ा, गांव के सरपंच सुभाषचन्द, ,क्लब सचिव रचना शर्मा,पिता रतन सिंह,पति गौरव यादव,सूबेदार मेजर महिपाल सिंह पंच व अन्य गणमान्य लोगों ने बधाई दी है।
फोटो: प्रिया यादव


एक सौ साल से अधिक का बुजुर्ग युवाओं से कम नहीं
-फास्ट फूड, हुक्का, गुड़,शक्कर का शौकीन 

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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव गोमली के बुजुर्ग जमना राम के काम देखकर युवा पीढ़ी भी सोचने को मजबूर हो जाती है। उनकी उम्र करीब 105 वर्ष हैं। सृष्टि नामक रिसर्च संस्था द्वारा उनको प्रदत्त सम्मान पत्र में उम्र 106 वर्ष बताई गई है। परिजन 107 वर्ष का बताते हैं।
बुजुर्ग बेशक है किंतु आज भी अपने सभी काम स्वयं करते हैं और घी,दूध के अतिरिक्त फास्ट फूड,गुड़, घी,शक्कर खाने तथा हुक्का पीने का शौकीन है।
  अपने सभी कार्य स्वयं करने के अतिरिक्त पशुओं की देखरेख करना तथा अपने काम स्वयं करते हैं। वे अपनी पांचवीं पीढ़ी को देख रहे हैं। मुंह में दांत नहीं हैं किंतु दिन में तीन बार खाना खाता है और आज भी आधा किलो शक्कर को देसी घी में मिलाकर खाने की क्षमता रखता है। दिनभर में एक चाय पीते हैं और बाकी किसी प्रकार का कोई नशा नहीं करते हैं। पंजाब के अबोहर में दो जमात पढ़े हुये हैं।
  बुजुर्ग जमना राम पूर्णरूप से जमींदार है। महज 18 वर्ष की उम्र में उनकी शादी चरखी दादरी के गांव चांगरोड़ में हुई थी जिनके चार पुत्र एवं छह पुत्रियां हुई। उनका बड़ा पुत्र रामनिवास सेना से सेवानिवृत्त है। उनके इस समय पोतें एवं पड़ पोते चल रहे हैं। उनका भरा पूरा परिवार है। उनके 40 एकड़ जमीन हैं जिसके चलते पूरे जीवन जमींदारा किया है। उनके सबसे बड़े पुत्र की उम्र करीब 80 वर्ष है, बताते हें कि कभी डाक्टरों के पास नहीं ले गये हैं। रामरतन जेई गोमली उनके परिवार में हैं, उनका कहना है कि जमनाराम उनके आदर्श हैं और वे खाने पीने की बातें बहुत बताते हैं। उनकी अधिक उम्र का राज देशी घी, गुड़,शक्कर एवं देशी खाना है।
  जमनाराम के विषय में ग्रामीणों ने बताया कि बचपन से ही खानपान बेहतर रहा है। आज भी उसके मुंह में नहीं हैं किंतु पाचन तंत्र सुदृढ़ होने के कारण दिन में तीन बार खाना खाता है। वो बताते हें कि बचपन में अढ़ाई किलो गुड़ की भेली को स्वयं खा जाते थे। आज जिस प्रकार युवा पानी पीते हैं वैसे तो वे देशी घी खाते थे। वर्तमान में जब पकौड़ा, घी-शक्कर की बात चले तो हर समय खाने को तैयार हो जाते हैं। हुक्का दिनभर आठ से दस बार पीते हैं जो स्वयं भरते हैं।
 बैठकर घास भी खोदकर कटड़ी को चारे के रूप में दे देते हैं। उन्होंने चुनावों के विभिन्न रूप देखे हैं वहीं अंधेरे के दिन,चिमनी, लालटेन, बिजली, विज्ञान के आधुनिक यंत्र तक देखे हैं और वे चकित हैं कि विज्ञान ने कितनी उन्नति कर ली है। घर में गाय एवं भैंसें रखी जा रही हैं उनकी सेवा की जिम्मेदारी भी निभा लेते हैं।
  उनसे पूछे जाने पर बताया कि वे पहले एक किलो शक्कर खा लेता था किंतु अब भी आधा किलो शक्कर को खा लेते हैं। जमनाराम आज के दिन पूर्णरूप से स्वस्थ हैं। उन्हें कोई किसी प्रकार की बीमारी नहीं है। चलने में तथा काम करने में युवा से भी आगे हैं। युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
फोटो कैप्शन 2: हुक्का पीते हुये जमनाराम
     3: उम्र दर्शाता आधार कार्ड।

दुर्घटना में घायल एक मरा, तीन घायल
-ओवरटेक करते वक्त दो गाडिय़ां टक्कराई तथा असंतुलित होकर एक पेड़ से जा टकराई तो दूसरी पेड़ों को तोड़ती दूर जाकर पलट गई
-दोनों गाडिय़ों में सवार थे तीन तीन लोग

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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव सेहलंग के पावर हाउस के पास सेलेरियो गाड़ी को आई-20 ओवरटेक करते टकरा गई और दोनों गाडिय़ां असंतुलित होकर एक पेड़ों से जा टकराई तथा दूसरी पेड़ों को तोड़ते हुए पलट गई जिसमें आधा दर्जन व्यक्तियों को चोट आई जिन्हें महेंद्रगढ़ ले जाया गया। जहां डाक्टरों ने एक को मृत घोषित कर दिया वहीं तीन की हालात गंभीर देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया है। आई-20 चालक के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अक्षय कुमार सेहलंग की शिकायत पर मामला दर्ज किया है।
 कनीना पुलिस में दी गई शिकायत अक्षय कुमार सेहलंग ने बताया कि 6 दिसंबर को वह तथा उनके गांव का प्रवीन एवं अजीत सिलेरियो नामक गाड़ी में सवार होकर माजरा खुर्द एक शादी समारोह में शामिल होकर खाना खाकर वापस माजरा से सेहलंग आ रहे थे। सिलेरियो को अजीत चला रहा था तथा अपनी साइड में था। रात्रि करीब बारह बजे जब वे सेहलंग पावर हाउस के पास पहुंचे तो पीछे से आ रही है आई-20 ने उनकी सिलेरियो को ओवरटेक किया तथा ओवरटेक करते वक्त गाड़ी को साइड से टक्कर मार दी जिससे सिलेरियो गाड़ी असंतुलित हो गई और पेड़ से जा टकराई वहीं दूसरी गाड़ी भी असंतुलित होकर पेड़ों को तोड़ते हुये खेतों में निकल गई और फिर पलट गई।
 जब अक्षय कुमार ने बताया कि पलटने वाली गाड़ी में तीन लड़के सवार थे। जहां अजीत को काफी चोट लगी वही अक्षय व प्रवीण को हल्की चोट आई। दुर्घटना को देखकर लोग इक_े हो गए। लोगों ने बीच बचाव कर घायलों को महेंद्रगढ़ अस्पताल पहुंचाया।  जहां डाक्टरों ने अजीत को मृत घोषित कर दिया वहीं प्रवीन व अक्षय को हल्की चोट होने से प्राथमिक उपचार कर दिया गया।
दूसरी गाड़ी आई-20 जिसमें कुलवंत बारड़ा रवि कुमार झोझू एवं भूपेंद्र झोझू सवार थे जिन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है कनीना पुलिस ने आई-20 चालक पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
फोटो कैप्शन 1: दुर्घटना के बाद आई-20 गाड़ी

Sunday, December 6, 2020

 

एक युवक की जोहड़ में डूबकर मौत तो दूसरे की करंट से मौत
-दोनों की आगामी कार्रवाई कर दी है

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 कनीना। कनीना खंड में खेड़ी तलवाना में एक युवक जोहड़ में डूब कर मौत हो गई जबकि दूसरे युवक की करंट लग जाने से मौत हो गई। दोनों की आगामी कार्रवाई कनीना पुलिस ने कर दी है।
 प्राप्त विवरण अनुसार होटल उर्फ दिनेश 28 वर्ष खेड़ी तलवाना निवासी बृहस्पतिवार से लापता था। रविवार को गांव खेड़ी के जोहड़ में मृत अवस्था में पाया गया। मृतक के भाई प्रदीप के बयान पर इत्तफाकिया कार्रवाई कर दी है। मृतक के भाई प्रदीप ने पुलिस में दिए गए बयान अनुसार वे तीन भाई हैं जिनमें बीच वाला भाई दिनेश जो बृहस्पतिवार लापता था, शराब पीने का आदि था। 3 दिसंबर को शाम के समय खेड़ी के जोहड़ के पास देखा गया। लापता होने से  रविवार को गांव वालों ने मिलकर छानबीन की तो वह गांव के जोहड़ में डूबा हुआ मिला। मृतक के भाई ने कहा है कि शराब के नशे में जोहड़ में डूबने के कारण उसकी मौत हुई है। पुलिस को सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को जोहड़ से निकाला। शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए महेंद्रगढ़ भेज दिया गया है।
संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने मौत -
उपमंडल के गांव उन्हाणी में संदिग्ध परिस्थितियों में युवक की करंट लगने से मौत हो गई। उनकी मौत रोहतक पीजीआई में हुई।
मिली जानकारी अनुसार विनोद पुत्र रामकुमार 35 वर्ष रविवार सुबह करंट लगने से संदिग्ध परिस्थितियों में घायल अवस्था में बिजली की लाइन के नीचे पड़ा मिला।  करंट लगने के बाद उनके परिजन उन्हें कनीना के उप नागरिक अस्पताल ले गए जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। रोहतक में इलाज के दौरान विनोद की मौत हो गई। कनीना पुलिस ने आगामी कार्रवाई कर दी है।
एक युवक की जोहड़ में डूबकर मौत तो दूसरे की करंट से मौत
-दोनों की आगामी कार्रवाई कर दी है

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कनीना। कनीना खंड में खेड़ी तलवाना में एक युवक जोहड़ में डूब कर मौत हो गई जबकि दूसरे युवक की करंट लग जाने से मौत हो गई। दोनों की आगामी कार्रवाई कनीना पुलिस ने कर दी है।
 प्राप्त विवरण अनुसार होटल उर्फ दिनेश 28 वर्ष खेड़ी तलवाना निवासी बृहस्पतिवार से लापता था। रविवार को गांव खेड़ी के जोहड़ में मृत अवस्था में पाया गया। मृतक के भाई प्रदीप के बयान पर इत्तफाकिया कार्रवाई कर दी है। मृतक के भाई प्रदीप ने पुलिस में दिए गए बयान अनुसार वे तीन भाई हैं जिनमें बीच वाला भाई दिनेश जो बृहस्पतिवार लापता था, शराब पीने का आदि था। 3 दिसंबर को शाम के समय खेड़ी के जोहड़ के पास देखा गया। लापता होने से  रविवार को गांव वालों ने मिलकर छानबीन की तो वह गांव के जोहड़ में डूबा हुआ मिला। मृतक के भाई ने कहा है कि शराब के नशे में जोहड़ में डूबने के कारण उसकी मौत हुई है। पुलिस को सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को जोहड़ से निकाला। शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए महेंद्रगढ़ भेज दिया गया है।
संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने मौत -
उपमंडल के गांव उन्हाणी में संदिग्ध परिस्थितियों में युवक की करंट लगने से मौत हो गई। उनकी मौत रोहतक पीजीआई में हुई।
मिली जानकारी अनुसार विनोद पुत्र रामकुमार 35 वर्ष रविवार सुबह करंट लगने से संदिग्ध परिस्थितियों में घायल अवस्था में बिजली की लाइन के नीचे पड़ा मिला।  करंट लगने के बाद उनके परिजन उन्हें कनीना के उप नागरिक अस्पताल ले गए जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। रोहतक में इलाज के दौरान विनोद की मौत हो गई। कनीना पुलिस ने आगामी कार्रवाई कर दी है।

ककराला गांव की कोरोना संक्रमित महिला की मौत
-कनीना के एक बुजुर्ग की कोरोना सेजून माह में हुई थी मौत

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कनीना। कोरानो ने जहां जून माह में एक बुजुर्ग को लील लिया था वहीं अब ककराला की 78 वर्षीय कोरोना संक्रमित महिला की मौत हो गई है। मृतका महिला के परिजनों ने रेवाड़ी की एक निजी लैब में टेस्ट करवाया था। संक्रमित मिलने के बाद महिला को सांस की तकलीफ हुई थी तत्पश्चात परिवार जन महिला को उप नागरिक अस्पताल कनीना लेकर आए जहां पर चिकित्सकों ने उसे पीजीआई रोहतक के लिए रेफर कर दिया था।
मृतका कमला के पुत्र जय भगवान ने बताया कि उनकी मां को सांस की दिक्कत पिछले डेढ़ वर्षों से चली आ रही है। उनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था। 24 नवंबर को रेवाड़ी की एक निजी लैब में टेस्ट करवाया था जिसकी रिपोर्ट उसी दिन पाजिटिव आई थी।
  यही नहीं जय भगवान के पिता सादीराम का भी रैपिड टेस्ट करवाया था और वह भी कोरोना पाजिटिव पाया गया था। रेवाड़ी के डाक्टरों ने उन्हें होम आइसोलेट कर दिया। उधर 2 दिन के बाद कमला को 26 नवंबर को उनको सांस लेने में बहुत कठिनाई हुई जिसके चलते उप नागरिक अस्पताल कनीना लाये। गंभीर हालात देखते हुए डाक्टरों ने उन्हें पीजीआई रोहतक में रेफर कर दिया। पीजीआई रोहतक के डाक्टरों ने उन्हें बताया कि रविवार को उनका कोरोना संक्रमण की वजह से देहांत हो गया। पीजीआई रोहतक के सामने बने वैश्य कालेज के पास उनकी मां का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों ने डाक्टरों से विनती की कि अंतिम संस्कार उनके गांव ककराला में किया जाए लेकिन डाक्टरों ने अनसुनी कर दी। मृतका के परिजनों के सैंपल भी नहीं लिये गये हैं।
एसएमओ डा धर्मेंद्र यादव ने बताया कि मृतका के परिवार जन रेवाड़ी के निजी अस्पताल में लेकर गए थे। जहां पर उन्होंने रैपिड टेस्ट करवाया और उसकी रिपोर्ट पाजिटिव आ गई थी। परिवार जनों ने कनीना अस्पताल में जानकारी देने के  बजाए यह बात छुपा ली कि उनकी मां कोरोना संक्रमित है। जब मरीज को सांस लेने में अधिक तकलीफ महसूस हुई तब परिजनों ने मरीज को उप नागरिक अस्पताल कनीना में भर्ती करवाया। यहां से हायर सेंटर रेफर कर दिया था। जिस समय बुजुर्ग महिला की रिपोर्ट पाजिटिव आई थी उसी वक्त अगर परिवार जन उप नागरिक अस्पताल को सूचित करते तो हम उनके लिए किसी डॉक्टर की तैनाती लगाई जाती।
डॉ धर्मेंद्र ने आमजन से अपील करते हुए कहा है कि जब भी किसी को कोई तकलीफ महसूस हो तो तुरंत उप नागरिक अस्पताल कनीना में आकर सही समय पर जांच करवाएं। जिससे उनका सही समय पर इलाज हो सके। उप नागरिक अस्पताल कनीना में हर रोज कोविड-19 के सैंपल लिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मी, आशा वर्कर आंगनवाड़ी वर्कर इत्यादि जागरूक कर रहे हैं।
22 जून को हुई थी पहली मौत-
 कनीना मंडी के एक 80 वर्षीय बुजुर्ग  की 22 जून को पहली मौत हुई थी।
 मिली जानकारी अनुसार 13 जून से पूर्व न्यूरो की दिक्कत के चलते 80 वर्षीय बुजुर्ग पार्क अस्पताल गुडग़ांव गए थे। वहां से ठीक होकर कनीना आए। 13 जून को सैंपल दिया और 15 जून को रिपोर्ट पाजिटिव आई जिसके चलते होने पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। जहां उनका इलाज चलता रहा। 22 जून सोमवार को कोरोना की वजह से उनका देहांत हो गया था।  उनका अंतिम संस्कार रोहतक में ही किया गया।

गरीबों के बादाम से चला रहे जीवन

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कनीना। गरीबों का बादाम मूंगफली गरीब तबके के लिए रोटी रोजी का साधन बन चुके हैं। रेतीली मिट्टी में पर्याप्त होने के कारण प्रति दिन बेरोजगार इनको बेचकर 300 से 500 रुपये कमाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। किंतु चंद दिनों तक यह धंधा चल पाता है।
  सर्दी आते ही मूंगफली की मांग बढ़ जाती है। यह मांग मकर संक्रांति के दिन तक खूब रहती है। मूंगफली को कनीना, करीरा, भडफ़ एवं समीपी गांवों में पर्याप्त मात्रा में उगाया जाता है। किसानों की मूंगफली उनके घर से भाड़भूजे खरीद ले जाते हें यहां तक कि दुकानदार भी उनसे कच्ची मूंगफली खरीदकर भाड़भूजे से भुनवाकर बेचने का काम करते हैं।
  बस स्टैंड हो या रेलवे स्टेशन सर्दी के दिनों में मूंगफली की बेहद मांग बढ़ जाती है। रेहड़ी पर या फिर दुकानों पर जमकर बेची जाती हें। दुकानदार योगेश कुमार एवं रोहित कुमार ने बताया कि मूंगफली की मांग इस कद्र होती है कि प्रतिवर्ष पांच सं सात बोरा मूंगफली बिक जाती है। मूंगफली बेचने वाले जयचंद, राजू ने बताया कि उनके परिवार का भरण पोषण भी मूंगफली से ही होता है। प्रतिदिन पांच सौ से सात सौ रुपये बचत कर लेते हैं किंतु यह धंधा कम समय के लिए ही चलता है।
 करीरा के वैद्य हरिकिशन एवं बालकिशन का कहना है कि मूंगफली में सभी पौष्टिक तत्व उपलब्ध होते हैं। यह सेहत के लिए लाभकारी होती हैं। उन्होंने सर्दी के दिनों में इनका सेवन करने की प्रेरणा दी है। उनका कहना है कि जो गरीब बादाम नहीं खा सकते वे मूंगफली खा सकते हैं। ऐसे में गरीबों का बादाम मूंगफली होती हैं।
फोटो कैप्शन 8: मूंगफली।


तड़ाग जीते, पालिका हारी

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कनीना। नगरपालिका द्वारा तड़ागों का पानी खत्म करने की लड़ाई में तड़ाग जीत गये हैं। जोहड़ों का पानी कम नहीं हो पाया। ये जोहड़ दो जनों की जान भी ले चुके हैं तथा सैकड़ों विशालकाय पेड़ इनके गंदे जल में दफन हो चुके हैं।
भरसक प्रयास कर नगर पालिका ने दोनों कालरवाली एवं होलीवाला जोहड़ों के पानी को खत्म करना चाहा किंतु उल्टे ये जोहड़ उग्र होकर छोटे बड़े पेड़ पौधों को लीलने लगे। कालरवाली एवं होलीवाला नामक जोहड़ों में पूरे कस्बे का पानी जमा होता है जिसे नाहड़ मार्ग पर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाता है। हर संभव प्रयास किया गया है कि पानी खत्म हो जाये किंतु दोनों जोहड़ खाली होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दोनों ही जोहड़ पुराने हैं। दोनों में भारी मात्रा में गंदा पानी, उस पर शैवाल की परत छाई रहती है। दूर से दिखाई नहीं देता कि पानी है या शैवाल है। इसके चारों ओर बड़े पीपल, बरगद, सिरस ,नीम, कीकर आदि के पेड़ खड़े  होते थे जिनको धीरे धीरे जोहड़ों ने एकाएक करके लील लिया हैं। धीरे-धीरे आयाम बढ़ता ही जा रहा है। एक पुरुष एवं एक बच्ची की गिरकर इनमें मौत भी हो चुकी है। वर्तमान पालिका प्रधान सतीश जेलदार ने तो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक गंदाजल पहुंचाने के लिए छतिग्रस्त भूमिगत लाइन को ठीक करवाया किंतु आज भी जहां कलरवाली और होलीवाला जोहड़ों का दायरा आधा -आधा किलो मीटर घिरा हुआ है। जहां होलीवाला जोहड़ पर बेगराज नाम मैरिज पैलेस स्थापित होने से जोहड़ दृष्टि से ओझल होने लगा है परंतु कालर वाली जोहड़ पर जहां लोगों द्वारा कब्जा करने की, माता मंदिर बनाने की कार्रवाई चली और कुछ लोग सफल भी हुए किंतु यह जोहड़ लोगों की आंखों में खटक रहा हैं।
 फोटो कैप्शन 9: शैवाल से ढका कालरवाली जोहड़ का एक नजारा जिसमें पड़े हुए पेड़।

डा आंबेडकर को याद किया

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कनीना। भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महा परिनिर्वाण दिवस पर कनीना के डा भीमराव आंबेडकर चौक पर बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किये। अध्यक्षता एनसीसी अधिकारी रमन शास्त्री
  मुख्य वक्ता रमन शास्त्री ने संसदीय शासन व्यवस्था को विश्व की सर्वोत्तम शासन प्रणाली बताते हुए कहा इस प्रणाली में कानून पालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों का संतुलित बंटवारा होने के कारण किसी भी निकाय की तानाशाही पर लगाम लग जाती है और देश तीव्र गति से विकास करता है। इनके पीछे डा आंबेडकर का योगदान रहा है।
उन्होंने  संसदीय प्रणाली को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए लोगों से डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो के मूलमंत्र को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
 विभिन्न संस्थाओं एवं शिक्षण संस्थानों ने बाबा साहब अंबेडकर को याद किया। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर  बाबा साहब की मूर्ति पर माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि दा गई।  इस मौके पर पवन मिस्त्री,डीगराम ,विजयपाल,पूर्व पार्षद रामेश्वर  राजेंद्र, धर्म पाल,सुबेसिंह प्रवक्ता,ओमप्रकाश इत्यादि उपस्थित रहे।  
फोटो कैप्शन 7: डा भीमराव आंबेडकर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते रमन शास्त्री एवं लोग।


बर्खास्त पीटीआई कर रहे हैं पत्र मिलने का इंतजार 

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 कनीना। हरियाणा सरकार ने कोर्ट के आदेशों के चलते 1980 पीटीआई बर्खास्त कर दिए गये थे और उनका लंबे समय तक संघर्ष जारी रहा और अभी भी जारी है। बाद मेंसरकार ने उनको विभिन्न विभागों में समायोजित करने के लिए आनलाइन आवेदन करवा लिये हैं परंतु एक माह बीत जाने पर भी उन्हें अभी तक
नियुक्ति पत्र नहीं मिले हैं। वे नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
क्षेत्र के बर्खास्त पीटीआई जोगेंद्र सिंह, मनीष कुमार, सुनील कुमार, रघुवीर सिंह, संतोष कुमार, सुरेंद्र आदि ने बताया कि वे सरकार द्वारा नियुक्ति पत्र जारी करने का इंतजार कर रहे हैं। लंबा समय बर्खास्त हुये बीत गया है जिससे परिवार की आर्थिक हालात इतने कमजोर हो चली है कि रोटी के लाले पड़ रहे हैं। उन्होंने अविलंब नियुक्ति पत्र जारी कर विभागों में समायोजित करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि करीब एक माह पहले आनलाइन आवेदन मांगे थे तथा स्टेशन भी भरवा लिए थे परंतु अभी तक समायोजन से संबंधित पत्र जारी नहीं हुआ है जिसके चलते परिवार में असंतोष पनपने लगा है। बेचारे बर्खास्त पीटीआई पशु पालकी गुजर बसर करने को मजबूर हैं।