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Monday, January 4, 2021

 
पुलिस ने पकड़ा 80 किलो गांजा,
एक व्यक्ति गिरफ्तार

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कनीना। सीआईए ने कनीना रेवाड़ी मार्ग पर ओपीवाई स्कूल के पास एक स्विफ्ट गाड़ी से करीब 80 किलो गांजा पकड़ा है। यह गांजा आंध्र प्रदेश से मालड़ाबास निवासी जिला महेंद्रगढ़ का कर्मबीर गाड़ी में लेकर आ रहा था। पुलिस ने उसे पकड़ा है। आगामी कार्रवाई एवं पूछताछ जारी है।
 मिली जानकारी अनुसार सीआईए टीम कुछ समय से आरोपित पर नजर टिकाये हुये थी। आंध्र प्रदेश से गांजा की सूचना मिलते ही उसका पीछा किया जा रहा था। आखिरकार जब वह रेवाड़ी से कनीना की ओर आ रहा था तो पुलिस सतर्क थी, उसे मुख्य सड़क मार्ग पर गिरफ्तार कर लिया।
 सोमवार को शाम सीआईए की टीम ने रेवाड़ी-कनीना रोड पर ओपीवाई स्कूल के पास एक स्विफ्ट डिजायर गाड़ी से नाकबांदी के दौरान 80 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसारी मालड़ा बांस निवासी कर्मबीर के द्वारा गाड़ी की डिग्गी में गांजे को लेजाया जा रहा था। जो रेवाड़ी की तरफ से अपनी गाड़ी को लेकर कनीना की तरफ आ रहा था। इस दौरान सीआईए नारनौल की टीम ने ओपीवाई स्कूल के पास नाकाबंदी कर उक्त गाड़ी को मौके पर रूकवाकर उसकी जांच की तो गाड़ी के अन्दर से पुलिस को गांजे के 38 पैकेट बरामद हुए है। जिनमें करीब 80 किलोग्राम गांजा लेजाया जा रहा था। सीआईए नारनौल इंचार्ज जसवीर सिंह ने बताया कि उनकी टीम ने सूचना के आधार पर दो गाडिय़ों की मद्द से नाकाबंदी कर आरोपी को काबू कर लिया है। इस दौरान टीम के सदस्य के रूप में एएसआई अनिल कुमार, एएसआई लाल सिंह, एएसआई संजय, एचसी संजय, एचसी संजीत, एचसी सुशील, दीपक, सिपाही प्रिंस, सिपाही राकेश सहित अन्य पुलिस कर्मचारी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि जिले में इस प्रकार के नशीले पदार्थो की तस्करी करने वालों को किसी भी किमत पर नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने बताया कि आरोपी कर्मबीर से पूछताछ में ओर भी खुलाशे होने की संभावना बनी हुई है।
फोटो कैप्शन 10: गांजे सहित कर्मवीर को गिरफ्तार करते पुलिस।















नांगल में व्यक्ति का हुआ अंतिम संस्कार
-फाइनेंसरों के दबाव में की थी आत्महत्या

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कनीना। उपमंडल के गांव नांगल में निजी कंपनी में काम करने वाले राजेंद्र सिंह का गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उधर पुलिस ने मामले में संलिप्त किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया है। चार जनों के विरुद्ध दर्ज हुआ था मामला।
क्या था मामला-
 एक निजी कंपनी में काम करने वाले राजेंद्र सिंह नांगल का शव खेतों से पुलिस ने बरामद किया था। मृतक राजेंद्र के भाई अशोक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका भाई राजेन्द्र बावल स्थित एक कम्पनी में कार्य करता था। रविवार को दोपहर में उसके पास फोन आया कि उसके भाई राजेन्द्र का मृत शरीर खेतों में पड़ा हुआ है। जब वह मौके पर पहुंचा तो वहां पर गांव का सरपंच व अन्य लोग पहले से ही उपस्थित थे। उसके भाई का शव खेत में एक पेड़ के नीचे पड़ा हुआ था। जिसके पास कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल व एक डब्बी पड़ी हुई थी। जिसकी सूचना कनीना पुलिस को दी गई। सूचना के बाद पुलिस ने खेतों में पहुंच कर शव को कब्जे में लिया व उसकी तलाशी ली गई। मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। जिसमें उसने चार लोगों के खिलाफ उसे मानसिक रूप से परेशान करने की बात कही है। अशोक ने बताया कि उसके भाई राजेन्द्र ने गंगायचा जाट निवासी दीपेश, सोहली निवासी बाबूलाल, ढाणा निवासी उसके दामाद व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ उसे परेशान करने क बात कही है। मृतक ने गंगायचा जाट निवासी दीपेश से करीब 50 हजार रुपये उधार लिए थे। जिसे वह छह माह के दौरान करीब तीस हजार रुपए वापस भी दे चुका था। आरोप है कि दीपेश, बाबूलाल व उसका दामाद उसे पैसे देने के लिए परेशान कर रहे थे व उसके परिवार को खत्म करने की धमकी भी दे रहे थे। अशोक ने कहा कि इन लोगों के दबाव की वजह से ही उसके भाई ने आत्महत्या की है। पुलिस ने मृतक के भाई अशोक के बयान पर मामला दर्ज कर मौके से बरामद हुए सुसाइड नोट के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
भोजावास में मृतक का हुआ अंतिम संस्कार-उधर भोजावास में दवा के रियेक्षन से हुई मौत के मामले में मृतक सत्यवीर सिंह का भी गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसने नाक के जरिये दवा डाल ली थी जिससे रियेक्षन हुआ और उन्हें महेंद्रगढ़ अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई थी।

प्रशिक्षण को लेकर आयोजित की बैठक

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कनीना। भारतीय जनता पार्टी के कनीना मंडल की बैठक नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना में सोमवार को आयोजित की गई। मीटिंग की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष अतर सिंह ने की। बैठक में मुन्नी लाल शर्मा विशेष रूप से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। प्रशिक्षण स्थान आरस वाटिका कनीना रहेगा।
मंडल अध्यक्ष अतर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति और नीति से अवगत कराने के लिए मंडल स्तर पर 5 व 6 जनवरी को प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करेगी। मंडल अध्यक्ष अतर सिंह ने कहा कि भाजपा प्रदेश में अपने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए सभी संगठनात्मक मंडलों में प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करेगी। इसमें मंशा- पंचायत चुनाव में बड़ी जीत के लिए बूथ को मजबूत करना है। पार्टी के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा के नेतृत्व यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। अतर सिंह ने आगे कहा कि पार्टी में स्थापना काल से ही कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की परंपरा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व व कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से विश्व का सबसे बड़ा राजनैतिक संगठन है। भाजपा में कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक कार्य प्रणाली को लेकर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाते है। जिनके माध्यम से ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण होता है, जो समाज में अन्य दलों से अलग दिखाई देते है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर पार्टी द्वारा आयोजित किये जाने वाले प्रशिक्षण वर्गों का ही परिणाम है कि कोविड-19 की  वैश्विक आपदा के समय पार्टी कार्यकर्ताओं ने सेवा ही संगठन को मूलमंत्र मानकर हर गरीब जरूरतमंद की मदद में आगे बढ़कर अपनी जान की परवाह किए वगैर सेवा कार्यों को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान, नौजवानों सहित सभी के हितों को ध्यान में रखकर लोक कल्याण के लिए कार्य कर रही है लेकिन विपक्षी दल साजिश व झूठ के सहारे जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे है। मंडल अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इन प्रशिक्षण वर्गों से पार्टी कार्यकर्ता प्रशिक्षित होकर तर्क पूर्ण ढंग से विपक्षी दलों की साजिश को न सिर्फ नाकाम करेगें बल्कि जनता के बीच केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकारों की उपलब्धियों को बताते हुए पार्टी संगठन को मजबूत बनाने का काम करेगें। इस बैठक में जिला प्रवक्ता ओम प्रकाश निशानियां, मंडल महामंत्री कृष्ण जांगड़ा, देशराज, उपाध्यक्ष वेद बोरा, कप्तान छितरौली, हरिराम मित्तल, कंवर सैन वशिष्ठ, ओम प्रकाश यादव, अरुणा, सरिता, राजकुमार भारद्वाज, मास्टर कृष्ण व दीपक कुमार वशिष्ठ उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 7: भाजपा की कनीना में आयोजित बैठक 

 लुइस ब्रेल का जन्म दिन मनाया

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कनीना। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में लुइस ब्रेल का जन्मदिन मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य लाल सिंह ने किया। अमृत सिंह विशेष अध्यापक ने लुइस ब्रेल के जीवन पर प्रकाश डाला लुइस ब्रेल का जन्म 4 जनवरी 1809 को फ्रांस के पास कुप्रे नामक स्थान पर हुआ। इनके पिता का नाम साइमन तथा माता का नाम मोनिका था।
  अमृत सिंह ने उनके जीवन पर एक रागिनी गाकर कार्यक्रम को चार चांद लगाए लुइस ब्रेल ने दृष्टि बाधितों के पढऩे लिखने के लिए ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था। ब्रेल लिपि के आने से दृष्टि बाधित ओं के जीवन में प्रकाश आया उन्हें समाज की मुख्यधारा में जुडऩे का सौभाग्य प्राप्त हुआ तथा दृष्टि बाधित बच्चों के शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए ब्रेल एक वरदान साबित हुई आज के परिवेश में समावेशित शिक्षा कार्यक्रम के तहत ब्रेल लिपि से ही दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है। इस अवसर पर प्राचार्य लाल सिंह, मुख्याध्यापक पंकज कुमार, रमन शास्त्री, मदन लाल शास्त्री, महिपाल, सोमनाथ, विनोद विशेष अध्यापक, ईश्वर प्रवक्ता, सुमित्रा व पूनम मौजूद थी।
फोटो केप्शन 8: कनीना स्कूल में लुइस ब्रेल का जन्म दिन मनाते हुए।

उम्मीद 2021
शिक्षा की चार दशकों से जगाए हुये हैं अलख
शिक्षक से डिप्टी डीईओ तक पहुंचने वाले डा रामानंद आज भी प्रेरणास्रोत
-अभी भी ट्यूबवेल पर दे रहे हैं शिक्षा

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कनीना। कनीना के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) रह चुके तथा उप जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी से सेवानिवृत्त रामानन्द यादव सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षा की अलख जगाए हुये हैं। कम से कम दो सौ महान हस्तियों के हाथों एक सौ के करीब सम्मान पा चुके हैं। जब वे अंग्रेजी बोलते हैं तो लगता है कि वे हिंदी नहीं जानते किंतु जब हिंदी बोलते हैं तो लगता है कि हिंदी के ही प्रवक्ता रहे होंगे। वे एक अच्छे कवि, लेखक, प्रशासक एवं शिक्षक बतौर जाने जाते हैं।
  अति साधारण से दिखाई देने वाले एवं सादी पोशाक पहनने वाले रामानन्द यादव ने न केवल कई बेईमान कर्मियों की एफआईआर दर्ज करवाई है अपितु नटवरलालों का पर्दाफाश भी किया है। जिला महेंद्रगढ़ के सतनाली खंड के गांव डिगरोता में एक अति साधारण परिवार में जन्में रामानन्द यादव वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके परिवार में कोई सदस्य लिख पढ़ा न होते हुए भी रामानन्द यादव ने पढऩा शुरू किया। प्राथमिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से पाने के बाद मिडिल शिक्षा नावां से प्राप्त की। जब वे नौंवीं कक्षा में पढ़ते थे तभी उनके पिता का साया सिर से उठ गया। जैसे तैसे करके सतनाली से हायर सेकेंडरी शिक्षा पाकर महेंद्रगढ़ से स्नातक की शिक्षा पाई। अंग्रेजी में स्नातकोत्तर अलवर से प्राप्त करने के बाद एनसीईआरटी द्वारा संचालित रिजनल कालेज अजमेर से बीएड की शिक्षा पाई। वर्ष 1984 में सतनाली में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर नियुक्त हो गए।
  वर्ष 2002 में सोंहासड़ा (भिवानी) में प्राचार्य पद पर नियुक्त हुए। वर्ष 2009 में जाटूसाना खंड शिक्षा अधिकारी बने। इसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया। वर्ष 2011 से लगातार कनीना में खंड शिक्षा अधिकारी बतौर काम करने के बाद वे उप जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी सेवा करने के बाद वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने वालंटियर शिक्षण का कार्य भी लोहारू, सतनाली, महेंद्रगढ़ में काम किया।
अनेक अवार्ड मिले-
  डा रामानंद यादव को राष्ट्रीय अवार्डों में लाइफ टाइम अचीवमेंट गोल्ड मेडल अवार्ड, एमिनेंट सिटिजन आफ इंडिया अवार्ड, ज्वेल आफ इंडिया अवार्ड, राष्ट्रीय सम्मान पुरस्कार, गोडफ्रे फिलिफ्स ब्रेवरी अवार्ड, मेरिटोरियस पर्सन अवार्ड, आर्क आफ एक्सीलेंस एजूकेशन अवार्ड, डा सर्वपल्ली राधाकृष्ण शिक्षा अवार्ड, राष्ट्रीय शिक्षा ज्योति अवार्ड, इंदिरा गांधी एक्सीलेंसी अवार्ड, राष्ट्रीय हिंदी शिक्षा अवार्ड के अलावा अन्तर्राष्ट्रीय अवार्डों में नेपाल, एशिया पेसिफिक, नेपाल, बैंगकाक, दुबई आदि देशों से अवार्ड मिले हैं। अभी यह सिलसिला जारी है।
  वे अपने परिवार जिसमें उनकी पत्नी दो पुत्र एक डाक्टर एवं दूसरा वकील है तथा एक पुत्री भी है। अपने परिवार के साथ जीवन सहजता एवं सरलता जीकर दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।             
  अभी भी दे रहे हैं छोटे बच्चों को मुफ्त शिक्षा-
इसे नेक दिली कहे या फिर फरिस्ताई काम कि सेवानिवृत्ति के बाद भी एक डिप्टी डीइओ नि:स्वार्थ भाव से छोटे बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। विगत दो माह से वे इस नेक काम में लगे हुए हैं।
कहा दे रहे हैं शिक्षा-
 महेंद्रगढ़ जिला के डीगरोता गांव में पले एवं बड़े हुए नेकदिली इंसान रामानंद यादव विगत दो माह से अपने खेतों में ट्यूबवेल पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि दूर दराज ट्यूशन भी उपलब्ध नहीं है और खेतों में स्कूल भी नहीं है। ऐसे में उनकी समस्या को देखते हुए प्रत्येक रविवार को नि:शुल्क शिक्षण का काम शुरू कर दिया है।
रामानंद गरीबी से जूझे हैं-
 बता दे कि रामानंद यादव पांच जुलाई 1957 को डीगरोता में जन्मे और उनके पिता रामजीलाल का उस वक्त देहांत हो गया था जब वे नौवीं कक्षा के छात्र थे। किसान परिवार में जन्मे रामानंद की मां सरिया देवी भी उस वक्त उन्हें छोड़ गई जब वे खंड शिक्षा अधिकारी नियुक्त हुए।
  मई 1983 में अंग्रेजी के प्राध्यापक बनने के बाद जनवरी 2002 में वे प्राचार्य बने। वर्ष 2009 में खंड शिक्षा अधिकारी बने और 2014 में डिप्टी डीईओ रेवाड़ी बने जहां से जुलाई 2015 में सेवानिवृत्त हो गए। कोरोना के कारण शिक्षण कार्य रुका हुआ है। वे मानते हैं कि कोरोना काल समाप्त होते ही फिर से इस काम में जुट जाएंगे
फोटो कैप्शन : रामानंद यादव।
फोटो कैप्शन 9: डा रामानंद यादव सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षण करते हुए 

 

नांगल में व्यक्ति का हुआ अंतिम संस्कार
-फाइनेंसरों के दबाव में की थी आत्महत्या

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कनीना। उपमंडल के गांव नांगल में निजी कंपनी में काम करने वाले राजेंद्र सिंह का गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उधर पुलिस ने मामले में संलिप्त किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया है। चार जनों के विरुद्ध दर्ज हुआ था मामला।
क्या था मामला-
 एक निजी कंपनी में काम करने वाले राजेंद्र सिंह नांगल का शव खेतों से पुलिस ने बरामद किया था। मृतक राजेंद्र के भाई अशोक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका भाई राजेन्द्र बावल स्थित एक कम्पनी में कार्य करता था। रविवार को दोपहर में उसके पास फोन आया कि उसके भाई राजेन्द्र का मृत शरीर खेतों में पड़ा हुआ है। जब वह मौके पर पहुंचा तो वहां पर गांव का सरपंच व अन्य लोग पहले से ही उपस्थित थे। उसके भाई का शव खेत में एक पेड़ के नीचे पड़ा हुआ था। जिसके पास कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल व एक डब्बी पड़ी हुई थी। जिसकी सूचना कनीना पुलिस को दी गई। सूचना के बाद पुलिस ने खेतों में पहुंच कर शव को कब्जे में लिया व उसकी तलाशी ली गई। मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। जिसमें उसने चार लोगों के खिलाफ उसे मानसिक रूप से परेशान करने की बात कही है। अशोक ने बताया कि उसके भाई राजेन्द्र ने गंगायचा जाट निवासी दीपेश, सोहली निवासी बाबूलाल, ढाणा निवासी उसके दामाद व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ उसे परेशान करने क बात कही है। मृतक ने गंगायचा जाट निवासी दीपेश से करीब 50 हजार रुपये उधार लिए थे। जिसे वह छह माह के दौरान करीब तीस हजार रुपए वापस भी दे चुका था। आरोप है कि दीपेश, बाबूलाल व उसका दामाद उसे पैसे देने के लिए परेशान कर रहे थे व उसके परिवार को खत्म करने की धमकी भी दे रहे थे। अशोक ने कहा कि इन लोगों के दबाव की वजह से ही उसके भाई ने आत्महत्या की है। पुलिस ने मृतक के भाई अशोक के बयान पर मामला दर्ज कर मौके से बरामद हुए सुसाइड नोट के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
भोजावास में मृतक का हुआ अंतिम संस्कार-उधर भोजावास में दवा के रियेक्षन से हुई मौत के मामले में मृतक सत्यवीर सिंह का भी गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसने नाक के जरिये दवा डाल ली थी जिससे रियेक्षन हुआ और उन्हें महेंद्रगढ़ अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई थी।

प्रशिक्षण को लेकर आयोजित की बैठक

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कनीना। भारतीय जनता पार्टी के कनीना मंडल की बैठक नेताजी मेमोरियल क्लब कनीना में सोमवार को आयोजित की गई। मीटिंग की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष अतर सिंह ने की। बैठक में मुन्नी लाल शर्मा विशेष रूप से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। प्रशिक्षण स्थान आरस वाटिका कनीना रहेगा।
मंडल अध्यक्ष अतर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति और नीति से अवगत कराने के लिए मंडल स्तर पर 5 व 6 जनवरी को प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करेगी। मंडल अध्यक्ष अतर सिंह ने कहा कि भाजपा प्रदेश में अपने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए सभी संगठनात्मक मंडलों में प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करेगी। इसमें मंशा- पंचायत चुनाव में बड़ी जीत के लिए बूथ को मजबूत करना है। पार्टी के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा के नेतृत्व यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। अतर सिंह ने आगे कहा कि पार्टी में स्थापना काल से ही कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की परंपरा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व व कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से विश्व का सबसे बड़ा राजनैतिक संगठन है। भाजपा में कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक कार्य प्रणाली को लेकर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाते है। जिनके माध्यम से ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण होता है, जो समाज में अन्य दलों से अलग दिखाई देते है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर पार्टी द्वारा आयोजित किये जाने वाले प्रशिक्षण वर्गों का ही परिणाम है कि कोविड-19 की  वैश्विक आपदा के समय पार्टी कार्यकर्ताओं ने सेवा ही संगठन को मूलमंत्र मानकर हर गरीब जरूरतमंद की मदद में आगे बढ़कर अपनी जान की परवाह किए वगैर सेवा कार्यों को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान, नौजवानों सहित सभी के हितों को ध्यान में रखकर लोक कल्याण के लिए कार्य कर रही है लेकिन विपक्षी दल साजिश व झूठ के सहारे जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे है। मंडल अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इन प्रशिक्षण वर्गों से पार्टी कार्यकर्ता प्रशिक्षित होकर तर्क पूर्ण ढंग से विपक्षी दलों की साजिश को न सिर्फ नाकाम करेगें बल्कि जनता के बीच केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकारों की उपलब्धियों को बताते हुए पार्टी संगठन को मजबूत बनाने का काम करेगें। इस बैठक में जिला प्रवक्ता ओम प्रकाश निशानियां, मंडल महामंत्री कृष्ण जांगड़ा, देशराज, उपाध्यक्ष वेद बोरा, कप्तान छितरौली, हरिराम मित्तल, कंवर सैन वशिष्ठ, ओम प्रकाश यादव, अरुणा, सरिता, राजकुमार भारद्वाज, मास्टर कृष्ण व दीपक कुमार वशिष्ठ उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 7: भाजपा की कनीना में आयोजित बैठक 

 

घर में घुस कर मारपीट करने तथा अपहरण करने के प्रयास का मामला दर्ज

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कनीना। घर में घुस कर मारपीट तथा अपहरण करने के प्रयास का मामला दर्ज हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार मनोज कुमार निवासी प्राणपुरा हाल आबाद रामबास ने कनीना पुलिस को एक शिकायत देकर बताया कि चेलावास व उन्हाणी के कुछ लड़कों तथा 20-22 अन्य लड़कों ने उनके घर में रविवार शाम को घुसकर लाठी व डंडों मारपीट की तथा उनका अपहरण करने से का प्रयास किया गया। वही पुलिस ने व्यक्ति के  बयान पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आरंभ करदी है। जांच के बाद ही हकीकत का पता चल पाएगा।


विभिन्न स्कूलों में छापामारी जारी

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कनीना। शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न टीमें गठित कर निजी स्कूलों में छापेमारी की कार्रवाई जारी है। छोटे बच्चों को स्कूल में बुलाये जाने के मसले को लेकर यह कार्रवाई जारी है। खंड शिक्षा अधिकारी कनीना की एक टीम ने इसी कड़ी में रामचंद्र पब्लिक स्कूल कनीना में छापेमारी की किंतु यह सब कुछ व्यवस्थित पाया गया।
खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय कनीना की टीम की टीम  जिसमें प्राचार्या डा सुविरा यादव व एबीआरसी ओमरती ने आरसीएम स्कूल में निरीक्षण किया तो कक्षा नौवीं से ऊपर के बच्चे पढ़ते पाये गये। सभी बच्चे सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप मास्क पहने हुए थे तथा आवश्यक दूरी बनाए हुए थे ।
डा यादव ने बच्चों से बात की तथा प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्कूल में सरकार के आदेशों की अनुपालना सही ढंग से की जा रही है। प्राचार्य राकेश कौशिक ने बताया कि विद्यालय सरकार द्वारा जारी आदेशो की अक्षरस: अनुपालना करता है तथा सभी बसों , कक्षा - कक्षों तथा विद्यालय कैंपस को रोजाना दो बार सेनिटाइज किया जाता  है तथा बच्चों व अध्यापकों का दिन में दो - तीन बार तापमान मापा जाता है । विद्यालय में दो  सेनिटाइज मशीनें लगाई गई है ताकि सभी बार-बार स्वयं को सेनिटाइज कर सकें। साथ साथ सभी अभिभावकों से अपील भी की कि वे अपने घर पर भी इन सब की उचित पालना करें।
फोटो कैप्शन 5: आरसीएम स्कूल में छापेमारी में जांच करती बीइओ कार्यालय कनीना की टीम 

 

 विश्व कल्याण के लिए करवाया हवन यज्ञ

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कनीना। कनीना बार एसोसिएशन की तरफ से नए साल के पहले कार्य दिवस पर विश्व कल्याण के लिए वैदिक रीति से हवन यज्ञ किया गया। मुख्य अतिथि कनीना न्यायालय के न्यायाधीश सब डिवीजन मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन व प्रवीण कुमार रहे। यज्ञ का शुभारंभ पवित्र वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किया गया। इस दौरान मौजूद सभी अधिवक्ताओं की तरफ से हवन की पवित्र अग्नि में आहुतियां अर्पित की गई।  हवन यज्ञ संपन्न होने के बाद सब डिवीजन मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन ने कहा कि हवन पद्धति हमारी पुरानी संस्कृति है। इससे वातावरण शुद्ध होता है। समय-समय पर हवन यज्ञ का आयोजन करते रहना चाहिए। सब डिवीजन मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार ने आमजन से अपील की कि कोरोना के चलते नियमों का पालन किया जाए। नववर्ष सभी के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करें। बार प्रधान कुलदीप रामबास सब डिवीजन मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन व प्रवीण कुमार को विशेष रूप से धन्यवाद किया। प्रधान कुलदीप रामबास ने बताया कि नए साल के पहले कार्य दिवस पर कनीना बार एसोसिएशन के सदस्यों ने हवन यज्ञ में आहुति डालकर विश्व कल्याण की कामना की है। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश गुप्ता, गिरवर लाल कौशिक, रामनिवास शर्मा, सुभाष चंद शर्मा, राजेश कनीनवाल ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में यजमान की भूमिका अधिवक्ता जितेंद्र कुमार एवं अधिवक्ता मनोज कुमारी ने की। यजमान दंपति को बार एसोसिएशन कनीना की ओर से एक धार्मिक पुस्तक भेंट की गई।इस मौके पर सचिव अखिल अग्रवाल, निहाल सिंह खटाना, पूर्व प्रधान हरीश गाहडा, पवन गोमला, राजेंद्र करीरा, योगेश गुप्ता, देशबंधु यादव, संदीप सेहलंग, विचित्र, विक्रम यादव, सुनील रामबास, ओपी रामबास, कुलदीप कनीनवाल, विनोद कनीना व अभिषेक यादव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे ।
फोटो कैप्शन 6: हवन के दौरान बार एसोसिएशन के सदस्य हवन में आहुति डालते हुए। 

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तीसरे दिन भी हुई बूंदाबांदी
-लुक्का छिपी करता नजर आया सूर्य

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 कनीना। कनीना क्षेत्र में तीसरे दिन भी मौसम फसल अनुकूल रहा। हल्की बूंदाबांदी हुई। अब तक 2 एमएम बारिश हुई है वहीं पाला नहीं जम रहा है। सोमवार को भी हालात रविवार जैसे ही रहे। किसान इस मौसम को फसल के अनुकूल बता रहे हैं। हल्की बूंदाबांदी एवं सुबह ठंड और धुंध से फसल में आब आ गई है। अब बेहतर फसल होने के आसार बन गये हैं। 29 हजार हेक्टेयर पर सरसों फसल खड़ी है।
 इस वक्त सरसों और गेहूं की प्रमुख रूप से दो फसलें खेतों में खड़ी हुई है। किसान राजेंद्र सिंह, महेश कुमार, देशपाल, दिनेश कुमार आदि ने बताया कि मौसम फसल के अनुकूल बन गया है, बारिश होना फसल के लिए लाभप्रद होगा। लगातार तीन दिनों से जहां बूंदाबांदी और आसमान में बादल छाए हुए हैं वहीं फसल लहलहा रही है। पाला पडऩा बंद हो गया है। पल-पल मौसम बदल रहा है। सुबह जहां हल्की धुंध पड़ी फिर बादल छा गए। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बूंदाबांदी भी हुई किंतु अच्छी बारिश अभी तक सर्दियों के मौसम में नहीं हुई है। किसान अच्छी बारिश का अभी भी इंतजार कर रहे हैं।
   इस वक्त होने वाली बारिश फसल के लिए लाभप्रद मानी जाती है। धरा पर दूर-दराज तक पीली सरसों नजर आती है। 16 फरवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।  उधर कृषि अधिकारी डा देवराज यादव ने बताया कि बूंदाबांदी फसल के लिए अनुकूल है वहीं मौसम भी फसल के अनुकूल बन गया है। आगामी अच्छी पैदावार के संकेत हैं। किसान प्रसन्नचित नजर आ रहे हैं।
फोटो कैप्शन 2: बूंदाबांदी के बाद सब्जी के खेत में काम करता किसान।



ठंड के चलते बंदर हुए गायब

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कनीना। लंबे समय तक बंदरों से परेशान रहने वाले कस्बा कनीना वासियों को ठंड के समय थोड़ी राहत मिली है। जब से पाला जम रहा है, कड़ाके की ठंड पड़ रही है, बंदर गायब हो गए हैं। कनीना मंडी के शिव कुमार, रविंद्र बंसल, गणेश अग्रवाल ने कहा कि बंदरों से हर वर्ष लाखों रुपए की क्षति होती है। इससे बचने का एकमात्र उपाय उन्हें पकड़कर दूर छोडऩा है। नगरपालिका ने यह प्रयास भी किया था किंतु सफलता अस्थाई रही।
बंदर जहां पेड़ पौधों को पूर्ण रूप से क्षति पहुंचाते हैं वहीं पानी की टंकियों को भी क्षति पहुंचा रहे हैं। बंदरों के कारण कस्बा कनीना में आधा दर्जन लोग घायल भी हो चुके हैं वहीं कितने ही लोग परेशान है। बंदरों के कारण खिड़की दरवाजे बंद करके लोग बैठ जाते हैं ताकि बंदरों से बचा जा सके।
क्योंकि सर्दी अधिक होने से बंदरों को भी ठंड लगती है इसलिए बंदर अचानक गायब हो गए हैं। कभी इक्का-दुक्का बंदर जरूर नजर आता है किंतु वह भी सुस्त महसूस नजर आता है। ऐसे में क्षेत्रवासियों ने बंदरों से राहत मिली है। कुलदीप कुमार, रवि कुमार, महिपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि ने बताया कि जिन बंदरों से कनीनावासी अनहक परेशान थे वे सर्दियों में नहीं दिखाई देते। उन्हें खुशी जताई कि बंदर कम से कम सर्दियों में तो उनका पीछा छोड़ दिया है। परंतु गर्मियां आते ही जल्दी सुबह और देर रात तक भारी नुकसान पहुंचाते हैं। नया गांव-बहाला में तो बंदर हजारों की संख्या में पाए जाते हैं जहां पेड़ों के ऊपर चोटी या तो है ही नहीं या छतरीनुमा बना डाले हैंं।
समाजसेवी एवं आरटीआई एक्सपर्ट शिव कुमार अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने तो कई बार प्रशासन से आरटीआई द्वारा बंदरों को दूर छोडऩे की जानकारी हासिल की है किंतु बंदरों से प्रशासन ने कोई विशेष राहत नहीं दी लेकिन ठंड ने थोड़ी थोड़े समय के लिए राहत जरूर दे दी है।


लक्की सिगड़ा के घर आई नन्ही परी 

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कनीना। बीएमडी क्लब अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी, पर्यावरणविद लक्की सीगड़ा के घर एक नन्ही परी ने जन्म लिया है। उनकी पत्नी पिंकी यादव प्रमुख परामर्शदाता है। दोनों के यह पहली संतान हुई है। विराट अस्पताल रेवाड़ी में दोनों जच्चा बच्चा स्वस्थ हैं।  दोनों को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। बच्ची के जन्म पर लक्की सिगड़ा ने खुशी जताई कि उनके घर एक बच्ची ने जन्म लिया है। लड़की- लड़को से किसी प्रकार का नहीं होती हैं।


बेरी के बाग एवं बेरी के पौधे दिये उखाड़
-किसी जमाने में बेर के लिए प्रसिद्ध था कनीना

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कनीना। बुजुर्गों के वक्त एक कहावत कनीना पर लागू की जाती थी--रेवाड़ी की रेवड़ी, कनीना के बेर। जल्दी से खा लो करना नहीं देर। आज कनीना के लोग ही बेर खरीदकर लाते हैं। बाग एवं बेरी के पौधे किसान काट देते हें। पेट भरने के लिए बाग उजाड़ दिये गये वहीं गेहूं एवं सरसों में बेरी का पौधा कई रोगों का सहायक बनता है।
 गरीबों के सेव गरीब लोगों के लिए बेहतर आय का स्रोत बन गए हैं। चार माह तक ये बाजार में उपलब्ध होते हैं। कनीना क्षेत्र में रेहडिय़ों पर भारी मात्रा में बेर उपलब्ध हैं। बेर जैसे रसीले फल गरीबों के सेव कहलाते हैं। बेर नामक वो फल हैं जिसका स्वाद तो भगवान् श्रीराम ने भी भीलनी के हाथों से लिया था। बेरों का ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर उपभोग किया जाता है यहां तक कि अधिक मात्रा में उत्पन्न बेरों को सूखा लिया जाता हैं और वर्ष भर खाया जाता है। बेरों के गुणों की जानकारी देते हुए विभिन्न लोगों से चर्चा हुई।
   श्रीकिशन वैद्य का कहना है कि गरीब जन जो महंगे दामों पर सेव नहीं खरीद सकते हैं वे अपने बेर खाकर विटामिन सी की आपूर्ति कर लेते हैं। बेरों के दो रूप होते हैं जिनमें से देशी नाम से जाना जाने वाला बेर अधिक मीठा एवं पौष्टिïक होता है जबकि हरे रंग का लंबा बेर कम पौष्टिïक एवं कम खनिज लवण प्रदान करने वाला होता है। बेर का व्यवसाय भी होने लगा है। बेर खाने से मुंह में दांतों की एक्सरसाइज होती है वहीं मसुड़े भी स्वस्थ रहते हैं। कनीना क्षेत्र कभी बेर के लिए प्रसिद्ध था जहां अनेक बाग होते थे अब वे अन्न पैदा करने के लिए काट डाले हैं।
 कुलदीप बोहरा का कहना है कि सर्दी के मौसम में बेर को जमकर खाया जा सकता है जो लाभकारी साबित होता है।  किसान के खेतों में दोनों ही प्रकार के बेर उगाए जाते हैं जो किसान के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते हैं। शहरी किसान तो इन बेरों को बेचकर आय कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कनीना में बेरी के पौधे हर किसान के खेत में होते थे जिन पर मधुर फल लगते थे किंतु वे पौधे फसल पैदावार में घातक साबित हुये जिसके चलते बेरी बहुत कम रह गई। बकरी चराने वालों ने भी बकरी का प्रमुख चारा होने से काट डाले।
     बागवानी विभाग बेरी के पौधे उगाने की किसानों को सलाह देता आ रहा है। वैसे भी भूमि बेर की काश्त के लिए लिए बेहतर होने के कारण बेरी उगाकर उनसे लाभ उठाने पर बल दे रहा है। किसान खेत में फसल भी ले सकते हैं और बेरी से बेर के फल भी ले सकते हैं। एक ओर जहां बेर की मांग बढ़ती ही जा रही है वहीं बच्चे एवं बूढ़े भी बेर को चाव से खाते हैं।   
 रोशन कुमार का कहना है कि ये फल बिना किसी अधिक मेहनत के खेतों में पैदा होते हैं। रबी फसल के साथ-साथ भी स्वयं पैदा हो जाते हैं। बड़े पेड़ों के भी लगते हैं तो झाडिय़ों के भी लगते हैं। झाड़ी के लगने के कारण इन्हें झाड़ीवाले बेर नाम से भी जाना जाता है। बागों में जो बेर लगते हैं उन्हें बागू बेर कहते हैं। कभी कनीना एवं आस पास झाड़ी भारी मात्रा में मिलती थी जो फसल पैदावार में घातक थी। टै्रक्टर एवं हल नहीं चल पाता था इसलिये उन्हें उखाड़ फेंका और कनीना एवं आस पास बेर खत्म होते जा रहे हैं।
कृषि विस्तार सलाहाकार डा देवराज का कहना है कि बेरी बागों के रूप में तो लाभप्रद है किंतु फसल के बीच खड़ी हो तो फसली रोग फैलाने में सहायक है। इसलिए इनको काट दिया और कनीना क्षेत्र से बेर लुप्तप्राय हैं। कुछ किसान जैसे महाबीर सिंह करीरा, अजय इसराणा,गजराज मोड़ी इन्हें उगा रहे हैं और पैदावार ले रहे हैं। अब तो कनीना के बेर लगभग खत्म हैं।
फोटो कैप्शन 7: बेर की एक फोटो।
साथ मेेंं डा देवराज यादव, रोशन , श्रीकिशन, कुलदीप बोहरा, देवराज।

Sunday, January 3, 2021



एक की दवा रियेक्षन से मौत तो दूसरे ने की आत्महत्या
मामला दर्ज
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 कनीना। कनीना खंड के दो अलग-अलग गांवों में एक की दवा के रियेक्षन से तो दूसरे ने आत्महत्या की। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
 मिली जानकारी के अनुसार भोजावास गांव में सत्यवीर नामक 48 वर्षीय की दवा के रियेक्षन से मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने पुलिस में दी जानकारी अनुसार वह शराब का आदि था। उसके शराब के छोडऩे की दवा ला रखी थी जो नाक में डाली जाती थी। उसने शराब पी ली और दवा नाक में डाल ली जिसके रियेक्षन हो गया। जिन्हें महेंद्रगढ़ अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दौंगड़ा चौकी में इत्तफाकिया मौत का मामला दर्ज कर लिया है। शव का पोस्टमार्टम महेंद्रगढ़ से कराया जाएगा।
 दूसरी तरफ नांगल मोहनपुर में 45 वर्षीय राजेंद्र सिंह ने संदिग्ध परिस्थितियों में खेतों में मृत मिला। जिसने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है।
मृतक के भाई अशोक ने पुलिस में दी जानकारी अनुसार राजेंद्र सिंह किसी कंपनी में काम करता था। उनके पास किसी का फोकन आया कि उनका भाई खेतों में मृत पड़ा है। उन्होंने जाकर देखा तो लोग जमा हो रहे थे। उन्होंने पुलिस को सूचित किया पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने पुलिस में बताया कि मृतक ने चार व्यक्तियों से पैसे उधार ले रखे थे जिसमें से कुछ चूकता भी कर दिया था। उन व्यक्तियों के दबाव में खेतों में जाकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है। उसके पास से सुसाइड नोट मिला है जिसमें चार व्यक्तियों के नाम लिखे हैं। पुलिस ने चार व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उनका पोस्टमार्टम महेंद्रगढ़ से कराया जाएगा।

 

 

 
बेरी के बाग एवं बेरी के पौधे दिये उखाड़
-किसी जमाने में बेर के लिए प्रसिद्ध था कनीना
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कनीना। बुजुर्गों के वक्त एक कहावत कनीना पर लागू की जाती थी--रेवाड़ी की रेवड़ी, कनीना के बेर। जल्दी से खा लो करना नहीं देर। आज कनीना के लोग ही बेर खरीदकर लाते हैं। बाग एवं बेरी के पौधे किसान काट देते हें। पेट भरने के लिए बाग उजाड़ दिये गये वहीं गेहूं एवं सरसों में बेरी का पौधा कई रोगों का सहायक बनता है।
 गरीबों के सेव गरीब लोगों के लिए बेहतर आय का स्रोत बन गए हैं। चार माह तक ये बाजार में उपलब्ध होते हैं। कनीना क्षेत्र में रेहडिय़ों पर भारी मात्रा में बेर उपलब्ध हैं। बेर जैसे रसीले फल गरीबों के सेव कहलाते हैं। बेर नामक वो फल हैं जिसका स्वाद तो भगवान् श्रीराम ने भी भीलनी के हाथों से लिया था। बेरों का ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर उपभोग किया जाता है यहां तक कि अधिक मात्रा में उत्पन्न बेरों को सूखा लिया जाता हैं और वर्ष भर खाया जाता है। बेरों के गुणों की जानकारी देते हुए विभिन्न लोगों से चर्चा हुई।
   श्रीकिशन वैद्य का कहना है कि गरीब जन जो महंगे दामों पर सेव नहीं खरीद सकते हैं वे अपने बेर खाकर विटामिन सी की आपूर्ति कर लेते हैं। बेरों के दो रूप होते हैं जिनमें से देशी नाम से जाना जाने वाला बेर अधिक मीठा एवं पौष्टिïक होता है जबकि हरे रंग का लंबा बेर कम पौष्टिïक एवं कम खनिज लवण प्रदान करने वाला होता है। बेर का व्यवसाय भी होने लगा है। बेर खाने से मुंह में दांतों की एक्सरसाइज होती है वहीं मसुड़े भी स्वस्थ रहते हैं। कनीना क्षेत्र कभी बेर के लिए प्रसिद्ध था जहां अनेक बाग होते थे अब वे अन्न पैदा करने के लिए काट डाले हैं।
 कुलदीप बोहरा का कहना है कि सर्दी के मौसम में बेर को जमकर खाया जा सकता है जो लाभकारी साबित होता है।  किसान के खेतों में दोनों ही प्रकार के बेर उगाए जाते हैं जो किसान के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते हैं। शहरी किसान तो इन बेरों को बेचकर आय कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कनीना में बेरी के पौधे हर किसान के खेत में होते थे जिन पर मधुर फल लगते थे किंतु वे पौधे फसल पैदावार में घातक साबित हुये जिसके चलते बेरी बहुत कम रह गई। बकरी चराने वालों ने भी बकरी का प्रमुख चारा होने से काट डाले।
     बागवानी विभाग बेरी के पौधे उगाने की किसानों को सलाह देता आ रहा है। वैसे भी भूमि बेर की काश्त के लिए लिए बेहतर होने के कारण बेरी उगाकर उनसे लाभ उठाने पर बल दे रहा है। किसान खेत में फसल भी ले सकते हैं और बेरी से बेर के फल भी ले सकते हैं। एक ओर जहां बेर की मांग बढ़ती ही जा रही है वहीं बच्चे एवं बूढ़े भी बेर को चाव से खाते हैं।   
 रोशन कुमार का कहना है कि ये फल बिना किसी अधिक मेहनत के खेतों में पैदा होते हैं। रबी फसल के साथ-साथ भी स्वयं पैदा हो जाते हैं। बड़े पेड़ों के भी लगते हैं तो झाडिय़ों के भी लगते हैं। झाड़ी के लगने के कारण इन्हें झाड़ीवाले बेर नाम से भी जाना जाता है। बागों में जो बेर लगते हैं उन्हें बागू बेर कहते हैं। कभी कनीना एवं आस पास झाड़ी भारी मात्रा में मिलती थी जो फसल पैदावार में घातक थी। टै्रक्टर एवं हल नहीं चल पाता था इसलिये उन्हें उखाड़ फेंका और कनीना एवं आस पास बेर खत्म होते जा रहे हैं।
कृषि विस्तार सलाहाकार डा देवराज का कहना है कि बेरी बागों के रूप में तो लाभप्रद है किंतु फसल के बीच खड़ी हो तो फसली रोग फैलाने में सहायक है। इसलिए इनको काट दिया और कनीना क्षेत्र से बेर लुप्तप्राय हैं। कुछ किसान जैसे महाबीर सिंह करीरा, अजय इसराणा,गजराज मोड़ी इन्हें उगा रहे हैं और पैदावार ले रहे हैं। अब तो कनीना के बेर लगभग खत्म हैं।
फोटो कैप्शन 7: बेर की एक फोटो।
साथ मेेंं डा देवराज यादव, रोशन , श्रीकिशन, कुलदीप बोहरा,



पौधारोपण जनहित का कार्य-नवीन कौशिक
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कनीना। कनीना बीइंग हुमैन सेवा मंडल के अध्यक्ष नवीन कौशिक की अध्यक्षता में पौधारोपण अभियान चलाया। कनीना क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थानों पर पौधारोपण किया जिनमें फलदार, छायादार पौधे लगाए।
 नवीन कौशिक ने बताया कि बेरी, अमरूद, सेहजना, पीपल, बरगद के पौधे विभिन्न स्थानों पर लगाते हुए कहा कि पेड़ पौधे लगाना जनहित का कार्य होता है। यह सदा फल, फूल, छाया आदि देते आए हैं। सदियों से हमें ऑक्सीजन दे रहे हैं। इनकी रक्षा करना हम सभी का फर्ज है। उन्होंने कहा कि जो पौधों को काटता है वह नरक का भागीदार होता है। उसे धरती पर रहने का अधिकार नहीं है। इस मौके पर उन्होंने विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण किया। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था अब तक हजारों पौधे विभिन्न स्थानों पर लगा चुकी है। इस अवसर पर उनके साथ वीर सिंह छावड़ी, अभिनव बाली, लोकेश कुमार माली आदि मौजूद थे जिन्होंने पौधारोपण किया।
 फोटो कैप्शन 8: पपड़ी का पौधा लगाते हुए बीइंग ह्यूमैन सेवा मंडल के सदस्य।


 मनोहर सरकार को लोकतंत्र सेनानियों को लेकर की गई घोषणाओं की याद दिलाई
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,कनीना। आपातकाल के समय जेलों में बंद रहे आपातकाल बंदियों की संस्था लोकतंत्र सेनानी संघ जिला महेंद्रगढ़ की एक आवश्यक बैठक निजामपुर रोड स्थित दफ्तर 40 ्र, इंडस्ट्रियल एरिया में हुई।  बैठक की अध्यक्षता जिला महेंद्रगढ़ लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष हरिराम मित्तल ने की। बैठक में लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गोविंद भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक में जिला महेंद्रगढ़ लोकतंत्र सेनानी संघ से जुड़े कई सदस्यों व उनके परिजनों ने हिस्सा लिया। लोकतंत्र सेनानी संघ की इस बैठक में सभी सदस्यों ने प्रदेश की मनोहर सरकार को लोकतंत्र सेनानियों को लेकर की गई घोषणाओं की याद दिलाई। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गोविंद भारद्वाज ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से अपील की कि उनकी तरफ से की गई घोषणाओं को मुख्यमंत्री जल्द पूरा करवाने की कृपा करें। गोविंद भारद्वाज ने कहा कि हरियाणा में मनोहर सरकार पार्ट वन में मुख्यमंत्री जी ने लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते हुए कई घोषणाएं की थी। जिनमें से कई अभी भी लंबित है। भारद्वाज ने कहा कि आपातकाल के समय जेलों में बंद रहे आपातकाल बंदियों को हरियाणा की मनोहर लाल सरकार ने लोकतंत्र सेनानी घोषित किए पूरे 2 साल पूरे हो गए। लेकिन अब तक सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। वहीं सरकार की तरफ से लोकतंत्र सेनानियों के लिए शुभ्र ज्योत्सना योजना शुरू की गई थी। जिसके तहत हरियाणा रोडवेज की बसों में लोकतंत्र सेनानी पत्नी समेत एक सहायक के रूप में मुफ्त यात्रा के लिए मान्य थे। लेकिन इस घोषणा को लेकर जिलों में सरकार की तरफ से कोई पत्र जारी नहीं किया गया। जिसके कारण हरियाणा रोडवेज की बसों में सफर करने के दौरान लोकतंत्र सेनानियों को कई बार रोडवेज बस कंडक्टर  से अपमानित होना पड़ता है। बैठक में इसको लेकर भी मांग उठी कि सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों को सरकारी रिटायर कर्मचारीयों की तर्ज पर मेडिकल मेडिकल सुविधा की भी घोषणा की थी। लेकिन मेडिकल सुविधा का लाभ लेने के लिए बुजुर्ग लोकतंत्र सेनानियों को लंबे वक्त तक स्वास्थ्य विभाग वह जिलाधीश कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं जिससे उन्हें इस उम्र में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गोविंद भारद्वाज ने सरकार से मांग की कि सरकार स्वास्थ्य सेवा में कैशलेस कार्ड आयुष्मान योजना में उनको सम्मलित करें। वहीं लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान राशि (मासिक पेंशन) के रूप में शासकीय आदेश आदेश के तहत जो पेंशन मिल रही है उसे सरकार विधानसभा में बिल लाकर पास करें। ताकि भविष्य में राजस्थान और मध्य प्रदेश की भांति कोई दूसरी सरकार प्रदेश में बनी तो वह उसे रद्द ना कर सके। वहीं महंगाई और बीमारी को ध्यान में रखते हुए पारिवारिक जीविका संचालन के लिए पेंशन के रूप में मिल रही ?10000 की राशि बहुत कम है ऐसे में उसे भी अन्य राज्यों की भांति ?25000 मासिक पेंशन किए जाने की मांग भी बैठक में प्रमुख तौर पर उठी। इसके अलावा स्वर्ग सिधार चुके लोकतंत्र सेनानियों के परिजनों को सहायता राशि या सरकारी नौकरी दिए जाने की भी मांग की गई । बैठक में लोकतंत्र सेनानियों पर आपातकाल के समय दर्ज मुकदमे खारिज कर सम्मान बहाल व देशद्रोही धाराएं हटाने की भी मांग की गई। इसके अलावा बैठक में देश में 1975 में आपातकाल को अवैध करार दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर किए जाने पर भी सहमति हुई। ताकि भविष्य में कोई भी सरकार संविधान में प्रदत शक्तियों का दुरुपयोग ना कर सके।

 नि:शुल्क नवोदय परीक्षाओं की तैयारी का हुआ शुभारंभ
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कनीना। उपमंडल के गांव ककराला की बहुउद्देश्यीय लाइब्रेरी ने सफलता मन्त्र जूनियर मुहिम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामनिवास पूनिया व प्रोफेसर डा कर्मवीर ने उपस्थित सभी बच्चों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुये सभी बच्चों को सफलता मंत्र मुहिम के प्रथम बैच में सम्मिलित होने की भी बधाई दी।
पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष  रामनिवास ने बताया कि गांव से ही पढ़े लिखे और आयकर विभाग से ज्वाइंट कमिशनर के पद से सेवानिवृत्त श्री पूनिया जी आज भी बच्चों के प्रेरणास्रोत हैं। वो काफी लंबे अर्से से चाहते थे कि उनके गांव के बच्चों के लिये शिक्षा के संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा सुधार हो ताकि कोई भी होनहार बच्चा अच्छी शिक्षा से वंचित न रह सकें।
डा कर्मवीर ने बताया कि आज के बदलते युग में बच्चों को पुस्तकालय से क्या लाभ मिल सके और उनको कौन सी सुविधाएं चाहिये जिससे यह सार्वजनिक पुस्तकालय उनके लक्ष्यों में सहायक भूमिका अदा कर सकें। यह सब बातों का ध्यान रखा जा रहा है।
इसमें समाज के विचारकों, प्रबुद्धजनों व शिक्षाविदों के साथ विचार संगोष्ठी, कैरियर गाइडेंस सेमिनार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग् आयोजन आदि सभी जरूरतों को ध्यान में रखकर वो आगे बढ़ रहें हैं।
छोटे बच्चों को नवोदय, सैनिक स्कूल व अन्य उच्च कोटि संस्थाओं में प्रवेश पाने के लिए कोई तैयारी करने विशेष साधन नहीं था। कोरोना के चलते बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं, इसीलिए उनकी जरूरत का संज्ञान लेते हुये यह मुहिम शुरू की है।
इस अवसर पर सफ़लतामन्त्र के सभी शिक्षक पंकज कुमार, आदेश कुमार, विकास जांगड़ा, अमित कुमार को सम्मानित किया गया।
सफ़लता मन्त्र जूनियर मुहिम के प्रथम बैच के सभी बच्चों ने कविता व गीत सुनाकर अतिथियों का अभिवादन किया। पुस्तकालय की तरफ से सभी बच्चों को पुरस्कृत किया गया। शर्मिला और मनीषा छात्राओं ने नए वर्ष की पहली पुस्तकालय सदस्यता ली।
इस शुभ अवसर पर उपप्रधान अजय कुमार,
सेवानिवृत्त मा. रामचन्द्र, मा रामेश्वर दयाल, मा सुनील, मा गुलशन, पूर्व प्रधान डा राजीव, पूर्व प्रधान राममेहर, शैक्षणिक समन्वयक नवीन कुमार, पर्यावरण समन्वयक इंद्रपाल शर्मा, लाइब्रेरी प्रभारी विकास, नाजिम यादव, अभिषेक आदि ग्रामीण उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 5: बीबीएमडी क्लब ककराला में होनहार बच्चों को सम्मानित करते हुए पदाधिकारी।


फ्री-स्टाइल महिला एवं पुरुष कुश्ती आयोजित
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 कनीना।  फ्लोरेंस कुश्ती एकेडमी बाघोत में फ्रीस्टाइल महिला एवं पुरुष ककुश्ती का आयोजन संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि जैसे रामजस पहलवान बाघोत, विशिष्ट अतिथि महावीर पहलवान थे।
 प्रतियोगिता में बाघोत निवासी प्रदीप कुमार
ने 57 किलो वजन में, अरविंद कुमार 61 किलो कोटिया, राजेश 65 किलो, रितेश 70 किलो बाघोत, देवेंद्र 74 किलो, कृष्ण कुमार 79 किलो,  सोनू कुमार 86 किलो, सोमबीर 92 किलो बाघोत निवासी, हरीश कुमार 97 किलो, संदीप 125 किलो ने जीती वहीं महिला वर्ग तन्नू 50 किलो प्रिया कुमारी 53 किलो, सुमित कुमारी 68 किलो ने ने बाजी मारी। इस प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि जसराम पहलवान ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा जय भगवान पहलवान व कोच राजेंद्र सिंह अनुज, रोहतास पीटीआई, महावीर पहलवान एकेडमी संचालक ने प्रतियोगिता को सफल करवाया।
 फोटो कैप्शन 6: कुश्ती करने से पहले पहलवान। जागरण

 दूसरे दिन भी छाए रहे आसमान में बादल
-सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए 

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 कनीना। कनीना क्षेत्र में दूसरे दिन भी मौसम फसल अनुकूल रहा। जहां शनिवार को 2 एमएम बारिश हुई वहीं पाला नहीं जमा, रविवार को भी हालात शनिवार जैसे ही रहे। किसान इस मौसम को फसल के अनुकूल बता रहे हैं। मौसम विभाग बूंदाबांदी की संभावना जता चुका है।
 इस वक्त सरसों और गेहूं की प्रमुख रूप से दो फसलें खेतों में खड़ी हुई हैं। किसान सूरत सिंह, महेंद्र कुमार, दमन सिंह, केशव आदि ने बताया कि मौसम फसल के अनुकूल बन गया है, बारिश होना फसल के लिए लाभप्रद होगा। लगातार दो दिनों से जहां बूंदाबांदी और आसमान में बादल छाए हुए हैं वहीं फसल लहलहा रही है। पाला पडऩा बंद हो गया है। पल-पल मौसम बदल रहा है। सुबह जहां हल्की धुंध पड़ी फिर बादल छा गए। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बूंदाबांदी भी हुई किंतु अच्छी बारिश अभी तक सर्दियों के मौसम में नहीं हुई है। किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
   इस वक्त होने वाली बारिश फसल के लिए लाभप्रद मानी जाती है क्योंकि इस वक्त फसल पकान पर नहीं पहुंची है। धरा पर दूर-दराज तक पीली सरसों नजर आती है। 16 फरवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा, जब तक फूल अधिक संख्या में न बचने की संभावना बनी है।  जिस गति से फूल आ रहे हैं अगर वैसे ही फूल आते रहे तो जनवरी माह में अधिकांश फूल खत्म हो जाएंगे। तत्पश्चात फसल पकने लग जाएगी किसान सूबे सिंह, रोहित कुमार, देशराज आदि ने बताया कि फसल के लिए बूंदाबांदी लाभप्रद है यदि ऐसा ही मौसम चला तो फसल को अधिक लाभ होगा।
फोटो कैप्शन 3: धरा पर दूर तक पीली सरसों नजर आते हुये।


ठंड के चलते बंदर हुए गायब
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कनीना। लंबे समय तक बंदरों से परेशान रहने वाले कस्बा कनीना वासियों को ठंड के समय थोड़ी राहत मिली है। जब से पाला जम रहा है, कड़ाके की ठंड पड़ रही है, बंदर गायब हो गए हैं। कनीना मंडी के शिव कुमार, रविंद्र बंसल, गणेश अग्रवाल ने कहा कि बंदरों से हर वर्ष लाखों रुपए की क्षति होती है। इससे बचने का एकमात्र उपाय उन्हें पकड़कर दूर छोडऩा है। नगरपालिका ने यह प्रयास भी किया था किंतु सफलता अस्थाई रही।
बंदर जहां पेड़ पौधों को पूर्ण रूप से क्षति पहुंचाते हैं वहीं पानी की टंकियों को भी क्षति पहुंचा रहे हैं। बंदरों के कारण कस्बा कनीना में आधा दर्जन लोग घायल भी हो चुके हैं वहीं कितने ही लोग परेशान है। बंदरों के कारण खिड़की दरवाजे बंद करके लोग बैठ जाते हैं ताकि बंदरों से बचा जा सके।
क्योंकि सर्दी अधिक होने से बंदरों को भी ठंड लगती है इसलिए बंदर अचानक गायब हो गए हैं। कभी इक्का-दुक्का बंदर जरूर नजर आता है किंतु वह भी सुस्त महसूस नजर आता है। ऐसे में क्षेत्रवासियों ने बंदरों से राहत मिली है। कुलदीप कुमार, रवि कुमार, महिपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि ने बताया कि जिन बंदरों से कनीनावासी अनहक परेशान थे वे सर्दियों में नहीं दिखाई देते। उन्हें खुशी जताई कि बंदर कम से कम सर्दियों में तो उनका पीछा छोड़ दिया है। परंतु गर्मियां आते ही जल्दी सुबह और देर रात तक भारी नुकसान पहुंचाते हैं। नया गांव-बहाला में तो बंदर हजारों की संख्या में पाए जाते हैं जहां पेड़ों के ऊपर चोटी या तो है ही नहीं या छतरीनुमा बना डाले हैंं।
समाजसेवी एवं आरटीआई एक्सपर्ट शिव कुमार अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने तो कई बार प्रशासन से आरटीआई द्वारा बंदरों को दूर छोडऩे की जानकारी हासिल की है किंतु बंदरों से प्रशासन ने कोई विशेष राहत नहीं दी लेकिन ठंड ने थोड़ी थोड़े समय के लिए राहत जरूर दे दी है।
 

सुसज्जित लैब हो ग्रामीण क्षेत्रों में














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कनीना। ग्रामीण क्षेत्रों में मिडिल एवं उच्च विद्यालयों को सुसज्जित लैबयुक्त करने की मांग बढ़ रही है। विज्ञान के युग में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान की प्रयोगशालाओं पर बल देना जरूरी बताया जा रहा है। अभी तक मिडिल स्कूलों में विज्ञान लैब पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
  हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश सचिव धर्मपाल शर्मा ने बताया कि सरकार विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा दे रही है किंतु कई राजकीय वरिष्ठ, राजकीय उच्च एवं माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान तक के पद समाप्त कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कनीना के सिहोर, भडफ़, कोटिया, कनीना मंडी आदि दर्जनों स्कूलों से विज्ञान का पद भी स्वीकृत नहीं है जिसके चलते विज्ञान शिक्षण बेहतर ढंग से नहीं चल पा रहा है। यही नहीं अपितु ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान की प्रयोगशाला का अभाव होने से भी परेशानी बढ़ रही है। बेरोजगार विज्ञान शिक्षकों की कोई कमी नहीं है।
  उधर विज्ञान शिक्षण को प्रयोगशाला के माध्यम से पढ़ाने की जरूरत होती है किंतु अधिकांश राजकीय माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला तक नहीं है। महज विज्ञान किट से काम चलाया जाता है। ऐसे में विद्यार्थी बगैर विज्ञान के उपकरणों से विज्ञान को बेहतर ढंग से नहीं सीख पा सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाएं जरूर स्थापित की जाए ताकि विज्ञान शिक्षण में रुचि बढ़ सके।
  उन्होंने कहा कि विज्ञान शिक्षकों के पद को तकनीकी पद घोषित किया जाए। अभी तक विज्ञान की पुस्तक का नाम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी रख दिया है किंतु विज्ञान शिक्षकों के पद को तकनीकी घोषित करने की मांग को दफन किया जा रहा है। उन्हें प्रायोगिक भत्ता भी दिया जाए।

Saturday, January 2, 2021

 

 सुसज्जित लैब हो ग्रामीण क्षेत्रों में
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कनीना। ग्रामीण क्षेत्रों में मिडिल एवं उच्च विद्यालयों को सुसज्जित लैबयुक्त करने की मांग बढ़ रही है। विज्ञान के युग में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान की प्रयोगशालाओं पर बल देना जरूरी बताया जा रहा है। अभी तक मिडिल स्कूलों में विज्ञान लैब पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
  हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश सचिव धर्मपाल शर्मा ने बताया कि सरकार विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा दे रही है किंतु कई राजकीय वरिष्ठ, राजकीय उच्च एवं माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान तक के पद समाप्त कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कनीना के सिहोर, भडफ़, कोटिया, कनीना मंडी आदि दर्जनों स्कूलों से विज्ञान का पद भी स्वीकृत नहीं है जिसके चलते विज्ञान शिक्षण बेहतर ढंग से नहीं चल पा रहा है। यही नहीं अपितु ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान की प्रयोगशाला का अभाव होने से भी परेशानी बढ़ रही है। बेरोजगार विज्ञान शिक्षकों की कोई कमी नहीं है।
  उधर विज्ञान शिक्षण को प्रयोगशाला के माध्यम से पढ़ाने की जरूरत होती है किंतु अधिकांश राजकीय माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला तक नहीं है। महज विज्ञान किट से काम चलाया जाता है। ऐसे में विद्यार्थी बगैर विज्ञान के उपकरणों से विज्ञान को बेहतर ढंग से नहीं सीख पा सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाएं जरूर स्थापित की जाए ताकि विज्ञान शिक्षण में रुचि बढ़ सके।
  उन्होंने कहा कि विज्ञान शिक्षकों के पद को तकनीकी पद घोषित किया जाए। अभी तक विज्ञान की पुस्तक का नाम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी रख दिया है किंतु विज्ञान शिक्षकों के पद को तकनीकी घोषित करने की मांग को दफन किया जा रहा है। उन्हें प्रायोगिक भत्ता भी दिया जाए।

 पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा
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कनीना। जिला के सैनिक बाहुल्य गांव  पाथेड़ा में सहित रविपाल सिंह की 16वीं पुण्यतिथि प्रजा भलाई संगठन सुप्रीमो समाजसेवी ठाकुर अतरलाल के मुख्य अतिथित्व में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। अध्यक्षता प्रमुख शिक्षाविद प्रोफेसर डा. प्रवीण यादव ने की।
 श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में ग्रामवासियों तथा आसपास के गांवों के मौजीजान ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प चक्र तथा माल्यापर्ण कर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य अतिथि अतरलाल ने शहीद की विरांगना कुमकुम, माता ओमवती तथा गांव के पूर्व सैनिकों को शॉल ओढ़ा कर तथा अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने जाबांज शहीद रविपाल की शहादत को याद करते हुए कहा की 2005-2006 में उनकी 26 राजपूत पलाटून ने मणिपुर में आतंकवादियों के सफाए के लिए आपरेशन हिफाजत चलाया हुआ था। जिसमें आतंकवादियों से लोहा लेते हुए जांबाज वीर सैनिक रविपाल सिंह 2 जनवरी 2006 को शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि शहीदों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कत्र्तव्य है। प्रोफेसर डा. प्रवीण कुमार यादव ने शहीदों की कुर्बानी से सबक लेकर देश की एकता व अखंडता के लिए काम करने की अपील की है। जिला पार्षद सतपाल सिंह, जिला वेद प्रचार मंडल के प्रधान इंद्रपाल शर्मा, कप्तान हरद्वारीलाल सिंह व पवन तंवर ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर पूर्व सैनिक संगठन के सदस्य कप्तान हरद्वारी लाल, सुखदेव सिंह, रामबीर सिंह, रामसिंह, औमप्रकाश सिंह, प्रताप सिंह, मलखान सिंह, मामन सिंह, करतार, प्रेम सिंह, इन्द्र सिंह पूर्ण सिंह, गनीराम, कृश्णपाल, वेदव्यास, इन्द्रजीत, रामौतार सिंह, बलबीर सिंह, बहादुर सिंह, संजय सिंह, बाबूलाल, सुरेन्द्र सिंह, पूर्व सरपंच दलीप सिंह, जिला करणी सेना के प्रधान जर्मन सिंह, देवेन्द्र सिंह आदि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 8: श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुये डा प्रवीण यादव।

 किसान जय सिंहपुर खेड़ा रवाना हुए
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कनीना। अनिल यादव नेता के नेतृत्व में किसान शुक्रवार की रात ट्रैक्टर ट्रालियों में बैठा कर जयसिंहपुर खेड़ा रवाना होने हुये। उन्होंने सरकार से कृषि के लिए बनाए तीनों काले कानूनों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि  किसान परेशान है। उन्होंने खाने पीने का प्रबंध करके रवानगी ली।


प्याज गिरी औंधे मुंह, 30 रुपये किलो पहुंची
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 कनीना। क्षेत्र में जो प्याज 90 रुपये किलो तक बिक रही थी वह औंधे मुंह गिर गई है। अब 30 रुपये किलो के भाव पर पहुंच गई है। गांवों में भी प्याज ठेलियों पर बेची जा रही हैं।
लंबे समय से प्याज और टमाटर में होड़ चली आ रही है। कभी टमाटर सस्ता तो प्याज महंगी हुई। अब टमाटर और प्याज बराबर भाव पर चल रहे हैं।
 अचानक प्याज के भाव कम होने के पीछे प्याज उगाने वाले गए, महाबीर करीरा, गजराज मोड़ी, सब्जी विक्रेता सुरेश कुमार एवं योगेश कुमार ने बताया कि प्याज के भाव बढऩे से खरीददार कम हो गए थे किंतु नासिक एवं सीकर में प्याज को जल्दी उखाड़ दिया और प्याज आयात होने से प्याज के भाव अचानक गिर गए।
यहां तक कि हरी प्याज भी सूखी प्याज के रास्ते पर चली और वह भी 80 रुपये किलो तक बिकी। किंतु अब टमाटर महंगा हो गया है। माना जा रहा है आने वाले समय में प्याज और भी सस्ती होगी।
प्याज सस्ती होने से जहां गली-गली में आप लोग प्याज बेचते नजर आ रहे किंतु खरीददार नहीं मिल रहे वही दुकानदार भी अधिक प्याज नहीं रख रहे हैं क्योंकि प्याज दिनोंदिन सस्ती हो रही है।  उपभोक्ता भी मान रहे हैं कि प्याज और सस्ती होगी वही दुकानदार योगेश, दिनेश, धर्मेंद्र आदि ने बताया कि प्याज के भाव लगातार घट बढ़ रहे हैं।
 ग्राहक भी अब बहुत कम प्याज खरीद रहे हैं उनका भी कहना है कि प्याज के भाव और घटेंगे। गृहणि सुनीता, शकुंतला, मनीता आदि ने बताया कि प्याज महंगे दामों पर पहुंच गई थी किंतु अब सस्ती हो रही है। आने वाले समय में और भी सस्ती होने की संभावना है। अभी तक दाल एवं सब्जी का तड़का लगाते समय प्याज गायब हो गई थी। अब फिर से प्याज के लौट आने से तड़के में प्याज दिखाई देगी।
 फोटो कैप्शन 9: प्याज की फोटो।

ग्रामीण क्षेत्रों से लुप्त हो रही है भेली
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 कनीना। एक जमाने में विवाह शादी विभिन्न उत्सव और विशेषकर नए वर्ष पर गुड़ की भेली देने का रिवाज था किंतु अब दुकानों से भेलियां गायब है। वैसे तो बुजुर्ग कहते हैं गुड़ की भेली और गांव की अभेली दोनों ही ग्रामीण क्षेत्रों से गायब होती जा रही हैं।
 वास्तव में से गुड़ से बना हुआ चक्का भेली कहलाता था और यह सेर में मापी जाती थी। आजकल जहां तोल के लिए किलोग्राम प्रयोग किया जाता है किसी जमाने में सेर और छटांक प्रयोग करते थे। 16 छटांक का एक सेर बनता था और एक सेर में करीब 900 ग्राम वजन होता था। आज भी पुराने घरों में सेर का बट्टा देखने को मिल सकता है। से का स्थान किलोग्राम ने ले लिया किंतु अढ़ाई सेर या पांच सेर की गुड़ की भेली दुकानों पर मिलती थी। जहां विवाह शादियों में लड़का आदि होने पर गुड़ की भेली दी जाती थी वहीं 1 जनवरी से 14 जनवरी तक तो गुड़ की भेलियों की इस कदर मांग होती थी की दुकानों पर गुड़ ही गुड़ नजर आता था।
बुजुर्ग राजेंद्र सिंह, संतरा, विमला, कमला का कहना है कि जहां प्रसाद के रूप में शक्कर तत्पश्चात बताशे उसके बाद बूंदी प्रयोग में लाई जाती हैं इसी प्रकार पुराने वक्त में गुड़ ही सबसे बड़ी मिठाई होती थी। खुशी के अवसर पर गुड़ का लेनदेन होता था और गुड़ की 2.5 या 5 किलो खुशी खुशी में दिया जाता था जो धीरे धीरे बंद हो गई।
और अब तो गुड़ की भेली दिखाई नहीं पड़ती। बुजुर्ग बताते हैं कि पहले किसी भी उत्सव पर चूरमा, खीर, दाल आदि बनाई जाती थी और वहीं परंपरा आज भी चली आ रही है। 14 जनवरी मकर सक्रांति के दिन जा दाल व चूरमा आज भी चाव से खाया जाता है।
नए साल पर प्रथम जनवरी से कभी गुड लेकर के माता-पिता अपनी विवाहित पुूत्री के ससुराल  या भाई अपनी विवाहित बहन के लिए गुड़ की भेली देकर आता था और साथ में घी भी देकर आता था ताकि मकर सक्रांति पर चूरमा और दाल बनाई जा सके। इसे त्योहारी नाम से जाना जाता था। अब ना तो त्योहारी बची है और ना गुड़ की भेली का लेनदेन होता है।
आज गुड़ की भेली गायब हैं। दुकानदार कृष्ण कुमार, रोहित कुमार, योगेश कुमार आदि ने बताया कभी मकर संक्रांति पर गुड़ की भेली की मांग होती थी लेकिन अब गुड़ की भेली के खरीददार नहीं रहे। इसलिए प्रचलन घट गया है। कनीना की 20 हजार आबादी की करीब 800 दुकानों पर भटका जाए तो महज एक या दो दुकानों पर भेली मिल सकती हैं।
फोटो कैप्शन 01: गुड़ की भेली। दैनिक जागरण


बार रूम के आस-पास पड़ी गंदगी को सफाई करवाने के लिए एसडीएम से मिले अधिवक्ता
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कनीना। कनीना बार एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप रामबास के नेतृत्व में कुछ अधिवक्ता शुक्रवार को एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से मिले। बार प्रधान कुलदीप रामबास ने जानकारी देते हुए बताया कि बार रूम के आसपास बहुत अधिक मात्रा में गंदगी हो रखी है। वहीं बार रूम के पीछे की तरफ टायलेट बने हुए हैं।  जिनमें बहुत अधिक मात्रा में गंदगी फैली हुई है। वहीं बार रूम के पास जमीन पर एक बिजली का ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। जिसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इन सभी समस्याओं को लेकर शुक्रवार को एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से अधिवक्ताओं ने मुलाकात की। एसडीएम ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि जल्दी ही इन सभी समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए समाधान किया जाएगा।
वही बार प्रधान कुलदीप रामबास ने बताया कि 4 जनवरी को जब कोर्ट ओपन होगा तो बार एसोसिएशन के पास एक यज्ञ के साथ नए साल की शुरुआत की जाएगी ।
फोटो कैप्शन 02: एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से समस्याओं के बारे में जानकारी देते हुए अधिवक्ता गण

बाघोत में 3 जनवरी को होगी कुश्ती प्रतियोगिता
कनीना। बाघोत में 3 जनवरी को सिनीपट कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें लड़के-लड़कियों के वर्ग में पहलवान भाग लेंगे। कोच जय भगवान ने जानकारी देते हुए बताया कि 3 जनवरी को सुबह 8 बजे पहलवानों का वजन किया जाएगा। सभी पहलवानों को दो पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र एवं मेडिकल सर्टिफिकेट लेकर और कुश्ती की किट में आना अनिवार्य है। लड़कों के वर्ग में 57, 61, 65, 70, 74, 79, 86, 92, 97, 155 किलो भारवर्ग में पहलवान भाग लेंगे। वहीं लड़कियों के वर्ग में 50, 53, 55, 59, 62, 65, 68, 72 व 76 किलो भारवर्ग में पहलवान भाग लेंगी।


नव वर्ष पर भंडारा लगाकर 500 लोगों को खिलाया खाना
-मोलडऩाथ आश्रम पर हुआ हवन
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कनीना। नये वर्ष 2021 के आगमन पर जगह जगह विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये। भोजन खिलाया, हवन आयोजित किये तथा गले मिलते नये साल की मुबारकवाद देते देखे गये।
कनीना के कुछ युवाओं ने कनीना महेंद्रगढ़ मेन रोड पर नए वर्ष के उपलक्ष्य में राहगीरों के लिए भंडारा लगाकर 500 लोगों को खाना खिलाया गया। भंडारे में विशेष रूप से झुग्गी झोपडिय़ों में रहने वाले लोगों के साथ राहगीर शामिल हुए। जितेंद्र यादव ने राहगीरों को भंडारे का प्रसाद वितरित करते कहा कि मानवता की नए वर्ष का शुभारंभ अच्छे दिन और लोगों की सेवा करने के साथ-साथ किया गया है। यह भंडारा सेवा को समर्पित हैं। प्रेम स्वामी सीहोर ने कहा कि  बुजुर्गों के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है और जीवन में धर्म के रास्ते पर चलकर दूसरों की सेवा करनी चाहिए। इस अवसर पर सुभाष, सौरभ जांगड़ा, जितेंद्र कुमार, विनोद कुमार, बलजीत, सतपाल, प्रेम, विकास, कादर, विक्रम, कर्ण सिंह, ढोलिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
 वहीं दूसरी तरफ नए वर्ष के शुभारंभ बाबा मोलडऩ नाथ आश्रम में हवन यज्ञ करके किया गया। यह हवन साईं मंदिर पुजारी प्रवेश पंडित
ने पूर्ण करवाया। इस मौके पर विभिन्न उपस्थित लोगों ने पूर्ण आहुति में भाग लिया।
इस अवसर पर रमेश दादा, शनि मंदिर पुजारी रामकिशन,दिनेश कुमार, सुरेश गोयल, दीपक नितेश आदि मौजूद थे। इस मौके पर हेमंत मित्तल यजमान बने थे। प्रवेश पंडित ने हवन की महिमा बताई।
फोटो कैप्शन 03: बाबा मोलडऩाथ आश्रम पर हवन कराते प्रवेश पंडित।
      04: महेंद्रगढ़ रोड़ कनीना में लोगों को नव वर्ष पर खाना खिलाते युवा।

रुकमणी देवी स्मृति में आयोजित हुआ भंडारा
-यदुवंशी शिक्षा निकेतन के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह थे मुख्य अतिथि

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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव करीरा में शुक्रवार सती माता रुकमणी देवी की स्मृति में भंडारे का आयोजन किया गया। लगभग 300 साल पहले रुकमणी देवी  अपने पति के साथ चिता में सती हो गई थी। विगत छह वर्षों से ग्राम करीरा में नियमित रूप से भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।
 आयोजित भंडारे में मुख्य अतिथि के बतौर पर  नांगल चौधरी के पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने शिरकत की। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने नव वर्ष की बधाई दी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने इस मौके पर अटेली विधानसभा क्षेत्र से अगला चुनाव लडऩे का ऐलान करते हुए आमजन से अपना पूर्ण सहयोग देने की अपील भी की। राव बहादुर सिंह ने कहा कि यदि अटेली क्षेत्र की जनता ने उनका साथ दिया तो वह समूचे अटेली क्षेत्र में विकास की बयार ला देंगे। उन्होंने कहा की भाजपा सरकार चाहे वह देश की हो या प्रदेश की नकारा है किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर है और सरकार के वजीर अपने ऐसी महलों में आराम फरमा रहे हैं। जिला परिषद के पूर्व  पार्षद विक्रम यादव  ने भी  ग्रामीणों से  राव बहादुर सिंह का  तन मन धन से साथ देने की अपील की । वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने सती माता मंदिर प्रबंधन समिति को अपने निजी कोष से 51,000 की राशि भेंट  की। पूर्व विधायक के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर पंडित केदारनाथ, जगराम शर्मा, अशोक शर्मा, कैलाश शर्मा, बलवंत सिंह, राजेश सरपंच, शिवलाल, उदमी राम, मातादीन यादव आदि सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 05 व 06: पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह भंडारे में करीरा में भाग लेते हुए।




 क्षेत्र में हुई 2 एमएम बूंदाबांदी
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में 2 दिनों से लगातार पाला पडऩे के बाद शुक्रवार की रात से रुक-रुक कर बूंदाबांदी हो रही है। दिनभर आकाश में बादल छाए रहे जिसके चलते शनिवार को पाला नहीं जमा लेकिन मौसम फसल अनुकूल हो गया है। किसानों के माथे की चिंता अब गायब हो गई है, फसल पर आ गई है। दूर-दराज तक पीली पीली सरसों नजर आ रही है।
कनीना क्षेत्र में जहां करीब 31,000 हेक्टेयर पर विभिन्न फसलें उगाई गई है। किसान बारिश का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मौसम विभाग आगामी दिनों में बूंदाबांदी की संभावना जता रहे हैं। उधर किसान बूंदाबांदी से प्रसन्न है क्योंकि लगातार खेतों में पानी देकर पैदावार बढ़ाने का प्रयास में बूंदाबांदी सहायक होगी और खेतों में पानी नहीं देना पड़ेगा।
 किसान दिनेश कुमार, राजेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह देशराज, महेश कुमार आदि ने बताया कि रबी की फसल के लिए बारिश यदा-कदा ही होती है। अक्सर नलकूपों से रबी पैदावार ली जाती है। एक बार बूंदाबांदी पहले भी हुई थी और दूसरी बार यह बूंदाबांदी हुई है जिससे फसलों पर आब आ गई है। अब तक पाला पडऩे से फसलों को नुकसान होने का जो अंदेशा बना हुआ था अब समाप्त हो गया है। शनिवार को शाम तक मौसम नहीं खुला था, सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। किसानों का कहना है कि इस प्रकार का मौसम रहे तो आगामी तो पैदावार बढ़ जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसान दिनेश कुमार, सूरत सिंह, महेश कुमार आदि ने बताया कि गांव में बिजली आपूर्ति कम होने से फसल में पानी देने की जरूरत समझी जा रही थी जो बूंदाबांदी ने पूरी कर दी है। एक और जहां कनीना खंड के
दर्जनों किसानों ने सब्जी और फल के पौधे उगा रखे हैं जिनके लिए पाला नुकसान पहुंचा रहा था। अब उस पाले से नुकसान होने की संभावना क्षीण हो गई है। कृषि विभाग अधिकारी डा देवराज ने बताया कि यह बूंदाबांदी नहीं बल्कि चांदी बरस रही है। यह फसल के लिए बहुत उत्तम होती है। अब तक जो संभावना पाले से नुकसान की जताई जा रही थी वह समाप्त हो गई है। किसानों को अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है।
 फोटो कैप्शन 10: बारिश के बाद दूर-दराज तक नजर आती पीली सरसों फसल।











स्कूलों में छापामारी
-छोटे विद्यार्थियों को स्कूल बुलाना गलत
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 कनीना। कड़ाके की ठंड व शीतलहर में शिक्षक और विद्यार्थी जहां स्कूलों में जा रहे हैं किंतु कुछ स्कूलों में छोटी कक्षाओं विशेषर एक से आठ को बुलाने की सूचना मिलने पर पूरा प्रशासन सख्ती से पेश आ रहा है। निजी स्कूलों पर छापे मारे जा रहे हैं तथा कार्रवाई के अंदेशा बना हुआ है। ऐसे में निजी स्कूल अपने स्कूलों में छोटे बच्चों की कक्षाएं नहीं लगा रहे हैं।      उल्लेखनीय है कि सरकारी स्कूलों में लगातार शिक्षक स्कूलों में जा रहे हैं। कोरोना काल में भी शिक्षकों को स्कूल में जाना पड़ा है। कड़ाके की ठंड में भी नौवीं से बारहवीं तक कक्षा के विद्यार्थी कम संख्या में स्कूल पहुंच रहे हैं किंतु शिक्षकों का पहुंचना बहुत जरूरी है। इस बार शीतकालीन अवकाश होने से शिक्षकों को पूरी ठंड , बारिश पाला आदि कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है।
अभिभावक कमल, दिनेश, महेश, सुरेश आदि ने बताया कि कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी स्कूलों में जा रहे हैं तो छोटी कक्षाएं भी बुला ली जाए तो शिक्षक बोर नहीं होंगे।  उधर शिक्षक भी दबी जुबान से कह रहे हैं कि जब कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं नहीं बुलाई जा रही तो शिक्षकों को भी न बुलाया जाए।
 दूसरी और मिली जानकारी अनुसार विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या आधी से भी कम आ रही है जिसके चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब हो रही है वहीं छोटे विद्यार्थी आनलाइन शिक्षा पा रहे हैं। आश्चर्य है कि बड़े विद्यार्थी तो आनलाइन शिक्षा पाने में सक्षम है किंतु उन्हें तो स्कूलों में बुलाया जा रहा है किंतु छोटे बच्चे जो मोबाइल से दूर रखे जाने चाहिए उनको अब मोबाइल पकडऩा पड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों की आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है पर मजबूरी वश अभिभावक भी उन्हें मोबाइल दे रहे हैं। अभिभावक मोहन, देवेंद्र, सुरेंद्र आदि ने बताया कि उनकी मजबूरी है कि वे अपने बच्चों को मोबाइल दे रहे हैं वरना मोबाइल से बच्चों के शरीर पर घातक प्रभाव पड़ रहा है।

Friday, January 1, 2021



रिश्तेदार का मुर्गी फार्म देखने लखनऊ गये युव की मौत
-मृतक कोटिया का रिश्तेदार एवं किशनगढ़ का रहने वाला था
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कनीना। फार्म देखने के लिए टाटा-407 में सवार होकर लखनऊ जाते वक्त हुई दुर्घटना में कोटिया गांव के एक रिश्तेदार की मौत हो गई जबकि कोटिया गांव के दो लोग घायल हो गए। घायलों को पीजीआई लखनऊ में भर्ती करवाया गया है तथा हालात ठीक है। मृतक का नाम और रोहित 24 वर्षीय है जो रेवाड़ी जिला के किशनगढ़ का रहने वाला है तथा कोटिया गांव का रिश्तेदार है (मृतक बहन  कोटिया में विविाहिता है)।
मृतक के पिता रतिराम ने फोन पर बताया कि रोहित के एक रिश्तेदार ने लखनऊ में मुर्गा फार्म किया हुआ है। जहां अकसर चूजे हरियाणा से ले जाये जाते हैं।  गुरुवार की शाम के वक्त पानीपत से चूजे टाटा 407 में भरकर लखनऊ जा रहे थे। रोहित ने इच्छा जाहिर की कि वह भी रिश्तेदार का मुर्गा फार्म देखेगा और वह भी सवार हो लिया। इस टाटा 407 का ड्राइवर कोटिया निवासी धर्मवीर तथा साथ में दीपक उर्फ बब्बल कोटिया भी सवार थे। जब उनकी टाटा 407 आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर ऊसराहार थाना के अंतर्गत चैनल नंबर 132 पर पर पहुंची तो घने कोहरे के कारण एक ट्रक चालक ट्रक को मोड़ रहा था जिसके चलते एक डीसीएम टकरा गई और फिर तो एक के बाद एक दर्जनों वाहन भीड़ गए। जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। जिनमें एक मृतक कोटिया का रिश्तेदार तथा रेवाड़ी जिला के किशनगढ़ का रहने वाला रोहित 24 वर्षीय भी शामिल है।
 वही दीपक उर्फ बब्बल तथा धर्मवीर चालक को गंभीर चोटें आई। मृतक के पिता रतिराम ने लखनऊ से फोन पर बताया कि ड्राइवर की आंख पर गहरी चोट है जबकि दीपक के पैर की हड्डी टूट गई है उन्हें पीजीआई लखनऊ में भर्ती करवाया गया है। उनकी हालात चिंता से बाहर है।
गांव कोटिया में मातम छाया हुआ है वही कोटिया गांव के रिश्तेदार भी लखनऊ पहुंच गए हैं। शव का पोस्टमार्टम कर रेवाड़ी के किशनगढ़ लाया जाएगा। उधर गांव में कोटिया में लोग पल-पल की खबर फोन से ले रहे हैं।

नव वर्ष पर भंडारा लगाकर 500 लोगों को खिलाया खाना
-मोलडऩाथ आश्रम पर हुआ हवन
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कनीना। नये वर्ष 2021 के आगमन पर जगह जगह विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये। भोजन खिलाया, हवन आयोजित किये तथा गले मिलते नये साल की मुबारकवाद देते देखे गये।
कनीना के कुछ युवाओं ने कनीना महेंद्रगढ़ मेन रोड पर नए वर्ष के उपलक्ष्य में राहगीरों के लिए भंडारा लगाकर 500 लोगों को खाना खिलाया गया। भंडारे में विशेष रूप से झुग्गी झोपडिय़ों में रहने वाले लोगों के साथ राहगीर शामिल हुए। जितेंद्र यादव ने राहगीरों को भंडारे का प्रसाद वितरित करते कहा कि मानवता की नए वर्ष का शुभारंभ अच्छे दिन और लोगों की सेवा करने के साथ-साथ किया गया है। यह भंडारा सेवा को समर्पित हैं। प्रेम स्वामी सीहोर ने कहा कि  बुजुर्गों के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है और जीवन में धर्म के रास्ते पर चलकर दूसरों की सेवा करनी चाहिए। इस अवसर पर सुभाष, सौरभ जांगड़ा, जितेंद्र कुमार, विनोद कुमार, बलजीत, सतपाल, प्रेम, विकास, कादर, विक्रम, कर्ण सिंह, ढोलिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
 वहीं दूसरी तरफ नए वर्ष के शुभारंभ बाबा मोलडऩ नाथ आश्रम में हवन यज्ञ करके किया गया। यह हवन साईं मंदिर पुजारी प्रवेश पंडित
ने पूर्ण करवाया। इस मौके पर विभिन्न उपस्थित लोगों ने पूर्ण आहुति में भाग लिया।
इस अवसर पर रमेश दादा, शनि मंदिर पुजारी रामकिशन,दिनेश कुमार, सुरेश गोयल, दीपक नितेश आदि मौजूद थे। इस मौके पर हेमंत मित्तल यजमान बने थे। प्रवेश पंडित ने हवन की महिमा बताई।
फोटो कैप्शन 10: बाबा मोलडऩाथ आश्रम पर हवन कराते प्रवेश पंडित।
      11: महेंद्रगढ़ रोड़ कनीना में लोगों को नव वर्ष पर खाना खिलाते युवा।

रुकमणी देवी स्मृति में आयोजित हुआ भंडारा
-यदुवंशी शिक्षा निकेतन के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह थे मुख्य अतिथि
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कनीना। कनीना उपमंडल के गांव करीरा में शुक्रवार सती माता रुकमणी देवी की स्मृति में भंडारे का आयोजन किया गया। लगभग 300 साल पहले रुकमणी देवी  अपने पति के साथ चिता में सती हो गई थी। विगत छह वर्षों से ग्राम करीरा में नियमित रूप से भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।
 आयोजित भंडारे में मुख्य अतिथि के बतौर पर  नांगल चौधरी के पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने शिरकत की। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने नव वर्ष की बधाई दी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने इस मौके पर अटेली विधानसभा क्षेत्र से अगला चुनाव लडऩे का ऐलान करते हुए आमजन से अपना पूर्ण सहयोग देने की अपील भी की। राव बहादुर सिंह ने कहा कि यदि अटेली क्षेत्र की जनता ने उनका साथ दिया तो वह समूचे अटेली क्षेत्र में विकास की बयार ला देंगे। उन्होंने कहा की भाजपा सरकार चाहे वह देश की हो या प्रदेश की नकारा है किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर है और सरकार के वजीर अपने ऐसी महलों में आराम फरमा रहे हैं। जिला परिषद के पूर्व  पार्षद विक्रम यादव  ने भी  ग्रामीणों से  राव बहादुर सिंह का  तन मन धन से साथ देने की अपील की । वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने सती माता मंदिर प्रबंधन समिति को अपने निजी कोष से 51,000 की राशि भेंट  की। पूर्व विधायक के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर पंडित केदारनाथ, जगराम शर्मा, अशोक शर्मा, कैलाश शर्मा, बलवंत सिंह, राजेश सरपंच, शिवलाल, उदमी राम, मातादीन यादव आदि सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 12 व 13: पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह भंडारे में करीरा में भाग लेते हुए।




ग्रामीण क्षेत्रों से लुप्त हो रही है भेली
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 कनीना। एक जमाने में विवाह शादी विभिन्न उत्सव और विशेषकर नए वर्ष पर गुड़ की भेली देने का रिवाज था किंतु अब दुकानों से भेलियां गायब है। वैसे तो बुजुर्ग कहते हैं गुड़ की भेली और गांव की अभेली दोनों ही ग्रामीण क्षेत्रों से गायब होती जा रही हैं।
 वास्तव में से गुड़ से बना हुआ चक्का भेली कहलाता था और यह सेर में मापी जाती थी। आजकल जहां तोल के लिए किलोग्राम प्रयोग किया जाता है किसी जमाने में सेर और छटांक प्रयोग करते थे। 16 छटांक का एक सेर बनता था और एक सेर में करीब 900 ग्राम वजन होता था। आज भी पुराने घरों में सेर का बट्टा देखने को मिल सकता है। से का स्थान किलोग्राम ने ले लिया किंतु अढ़ाई सेर या पांच सेर की गुड़ की भेली दुकानों पर मिलती थी। जहां विवाह शादियों में लड़का आदि होने पर गुड़ की भेली दी जाती थी वहीं 1 जनवरी से 14 जनवरी तक तो गुड़ की भेलियों की इस कदर मांग होती थी की दुकानों पर गुड़ ही गुड़ नजर आता था।
बुजुर्ग राजेंद्र सिंह, संतरा, विमला, कमला का कहना है कि जहां प्रसाद के रूप में शक्कर तत्पश्चात बताशे उसके बाद बूंदी प्रयोग में लाई जाती हैं इसी प्रकार पुराने वक्त में गुड़ ही सबसे बड़ी मिठाई होती थी। खुशी के अवसर पर गुड़ का लेनदेन होता था और गुड़ की 2.5 या 5 किलो खुशी खुशी में दिया जाता था जो धीरे धीरे बंद हो गई।
और अब तो गुड़ की भेली दिखाई नहीं पड़ती। बुजुर्ग बताते हैं कि पहले किसी भी उत्सव पर चूरमा, खीर, दाल आदि बनाई जाती थी और वहीं परंपरा आज भी चली आ रही है। 14 जनवरी मकर सक्रांति के दिन जा दाल व चूरमा आज भी चाव से खाया जाता है।
नए साल पर प्रथम जनवरी से कभी गुड लेकर के माता-पिता अपनी विवाहित पुूत्री के ससुराल  या भाई अपनी विवाहित बहन के लिए गुड़ की भेली देकर आता था और साथ में घी भी देकर आता था ताकि मकर सक्रांति पर चूरमा और दाल बनाई जा सके। इसे त्योहारी नाम से जाना जाता था। अब ना तो त्योहारी बची है और ना गुड़ की भेली का लेनदेन होता है।
आज गुड़ की भेली गायब हैं। दुकानदार कृष्ण कुमार, रोहित कुमार, योगेश कुमार आदि ने बताया कभी मकर संक्रांति पर गुड़ की भेली की मांग होती थी लेकिन अब गुड़ की भेली के खरीददार नहीं रहे। इसलिए प्रचलन घट गया है। कनीना की 20 हजार आबादी की करीब 800 दुकानों पर भटका जाए तो महज एक या दो दुकानों पर भेली मिल सकती हैं।
फोटो कैप्शन 7: गुड़ की भेली।

बार रूम के आस-पास पड़ी गंदगी को सफाई करवाने के लिए एसडीएम से मिले अधिवक्ता
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कनीना। कनीना बार एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप रामबास के नेतृत्व में कुछ अधिवक्ता शुक्रवार को एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से मिले। बार प्रधान कुलदीप रामबास ने जानकारी देते हुए बताया कि बार रूम के आसपास बहुत अधिक मात्रा में गंदगी हो रखी है। वहीं बार रूम के पीछे की तरफ टायलेट बने हुए हैं।  जिनमें बहुत अधिक मात्रा में गंदगी फैली हुई है। वहीं बार रूम के पास जमीन पर एक बिजली का ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। जिसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इन सभी समस्याओं को लेकर शुक्रवार को एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से अधिवक्ताओं ने मुलाकात की। एसडीएम ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि जल्दी ही इन सभी समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए समाधान किया जाएगा।
वही बार प्रधान कुलदीप रामबास ने बताया कि 4 जनवरी को जब कोर्ट ओपन होगा तो बार एसोसिएशन के पास एक यज्ञ के साथ नए साल की शुरुआत की जाएगी ।
फोटो कैप्शन 8: एसडीएम विश्राम कुमार मीणा से समस्याओं के बारे में जानकारी देते हुए अधिवक्तागण

बाघोत में 3 जनवरी को होगी कुश्ती प्रतियोगिता
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,कनीना। बाघोत में 3 जनवरी को सिनीपट कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें लड़के-लड़कियों के वर्ग में पहलवान भाग लेंगे। कोच जय भगवान ने जानकारी देते हुए बताया कि 3 जनवरी को सुबह 8 बजे पहलवानों का वजन किया जाएगा। सभी पहलवानों को दो पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र एवं मेडिकल सर्टिफिकेट लेकर और कुश्ती की किट में आना अनिवार्य है। लड़कों के वर्ग में 57, 61, 65, 70, 74, 79, 86, 92, 97, 155 किलो भारवर्ग में पहलवान भाग लेंगे। वहीं लड़कियों के वर्ग में 50, 53, 55, 59, 62, 65, 68, 72 व 76 किलो भारवर्ग में पहलवान भाग लेंगी।


फिर से जमा पाला
-31 हजार हेक्टेयर पर खड़ी है फसल
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 कनीना। कनीना क्षेत्र में पाला पडऩे की घटना जारी है। पाला किसानों का पीछा नहीं छोड़ रहा है। इस वक्त फसल पर फलियां आ रहे हैं और पाला पडऩे से नुकसान होने का अंदेशा है। सब्जियों और फलों पर अधिक नुकसान होने की संभावना है। कनीना क्षेत्र में जहां करीब 31000 हेक्टेयर पर विभिन्न फसलें उगाई गई है वही पाला कई दिनों से पीछा नहीं छोड़ रहा है।
 शुक्रवार को भी पाला जमा देखा गया पाला पडऩे से किसानों की समस्याएं बढ़ती जा रही है। यद्यपि कृषि विभाग के अधिकारी इस पाले को नुकसानदायक नहीं मान रहे हैं किंतु किसान चिंतित हैं। कृषि विस्तार सलाहकार डा देवराज यादव ने बताया कि लगातार पाला पडऩे से सब्जी की फसलों पर नुकसान अधिक हो सकता है, बाकी फसलों पर कोई नुकसान होने की संभावना अभी तक नजर नहीं आती है। लंबे समय तक पाला पड़ेगा तो नुकसान हो सकता है। ऐसे में उन्होंने फसलों, सब्जी आदि में ताजा पानी देने की अपील की है जिससे फसलों को नुकसान होने से बच सकता है वहीं फसलों में 200 मिली गंधक का अमल 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में छिड़काव कर देने की सलाह दी।
कनीना के किसान सूबे सिंह ने बताया किनके खेत में सब्जी उगाई हुई है तथा अमरूद, आम, चीकू आदि के फलदार पौधे लगे हुए हैं। इन पौधों के फल भी अब नष्ट हो रहे हैं। गमलों के पौधे तो पहले ही नष्ट हो चुके हैं। सब्जी भी धीरे-धीरे नष्ट हो रही है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे मेथी, पालक, धनिया आदि को नुकसान हो रहा है और धीरे धीरे सर्दी से जल रहे है ।उन्होंने बताया कि अब सरसों फसल में फलियां आने लग गई है और पाला फलियों के लिए घातक साबित होता है क्योंकि फलों में सरसों के दाने नहीं पनप पाते परंतु उन्होंने कहा कि प्रकृति के समक्ष असहाय हैं।
 फोटो कैप्शन 8: और फल सब्जियों को निहारता किसान सूबे सिंह।



 मूंगफली, गजक, रेवड़ी की आवक बढ़ी
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कनीना। मकर संक्रांति पर्व के नजदीक आने पर बाजारों में मूंगफली गजक तथा शकरकंदी की आवक बढ़ गई है। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इससे पूर्व पंजाबी समुदाय का पर्व लोहड़ी भी बनाया जाएगा। इसलिए बाजार में रेवड़ी भी नजर आ रही है। उधर सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि मकर संक्रांति पर गजक, शकरकंदी एवं मूंगफली अधिक मांग रहती है तथा रात भर लोग ईंधन जलाकर उस के समीप बैठे इन पदार्थों का सेवन करते हैं।
  कनीना की सब्जी मंडी में जहां शकरकंदी की भारी आवक हो रही है वहीं इसकी मांग भी बढ़ती जा रही है। सर्दी के दिनों में शकरकंदी को खूब खरीदा जाता है वही खरीददार इसको जमकर उपभोग करते हैं। कुछ रेहड़ी पर काम करने वाले लोग तो शकरकंदी को बेचकर ही अपना व परिवार का गुजारा चला रहे हैं। शकरकंदी की 14 जनवरी मकर संक्रांति पर अधिक मांग होती है इसके बाद मांग कम हो जाती है। कनीना के बाजार में मूंगफली, गजक और रेवड़ी का भी बोल बाला है। मूंगफली, गजक, रेवड़ी जैसे पदार्थ 13 जनवरी 14 जनवरी को जम कर खाए जाते हैं। पूरी रात लोग आग के पास बैठे रहते हैं और मूंगफली, गजक, शकरकंदी आदि का उपयोग करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नान किया जाना भी बेहद लाभकारी हैं। इस दिन दान पुण्य की परंपरा चलती रहती है। किसानों ने बताया कि जिन्होंने शकरकंदी उगा रखी थी वह खुदाई पूर्ण कर ली है क्योंकि 14 जनवरी को सबसे अधिक मात्रा में शकरकंदी की मांग होती है इसके बाद में घटती चली जाती है। मूंगफली, गजक, रेवड़ी बेचने वाले रोहित कुमार तथा योगेश कुमार ने बताया कि पर्वों को ध्यान में रखते हुए इन पदार्थों को अधिक मात्रा में रखा जाता है ताकि उनकी बिक्री हो सके और वे अपनी रोटी रोटी कमा सके।
फोटो कैप्शन 9: ठेले पर मूंगफली एवं गजक।


स्थानांतरण पर पटवारी योगेश कुमार को दी विदाई, दिया सम्मान
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कनीना।  पटवारी योगेश कुमार के स्थानांतरण होने पर साथी पटवारियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी है। उन्होंने दौंगड़ा अहीर, कलवाड़ी, मुंडिया खेड़ा तथा दौंगड़ा जाट गांवों के पटवारी की भूमिका निभाई है।
 पटवारी विदाई समारोह में शमशेर सिंह पटवारी ने कहा कि राजस्व विभाग का कार्य अलग शैली का होता है। वह जमीन से जुड़े हुए कार्यों के साथ-साथ कई कार्यों में लगे रहते है। लोगों ने कहा कि पटवारी पद पर रहते हुए योगेश कुमार पटवारी का करीब पांच वर्ष का कार्यकाल सराहनीय रहा। उन्होंने उनके हलके के गांवों में जमीन से संबंधित समस्याओं का तुरन्त समाधान किया।
इस मौके पर वीरेंद्र पटवारी, अनूप पटवारी, उमेद सिंह जाखड़ पटवारी, राज पटवारी, महेंद्र सिंह पटवारी, ओम प्रकाश पटवारी, शेर सिंह पटवारी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 1: स्थानांतरण पर पटवारी योगेश कुमार को सम्मान साथ विदाई देते हुए। फोटो योगेश पटवारी

किसान आंदोलन का समर्थन करने कनीना से गया 11 लोगों का दल
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कनीना। कृषि कानूनों के आंदोलन के खिलाफ जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर पर किसान संगठन आंदोलन की नई-नई रणनीति बना रहे हैं। वहीं क्षेत्र के किसान भी इसमें सहयोग देने की रणनीति बना रहे हैं।
 कस्बे के अधिवक्ता सुनील राव ककरालिया के नेतृत्व में 11 किसानों का एक दल बृहस्पतिवार को सुबह हरियाणा राजस्थान बार्डर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर पर किसानों को समर्थन देने के लिए पहुंचा। अधिवक्ता सुनील राव ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान आंदोलन रूपी महायज्ञ में आहुति देने के लिए 11 लोगों का एक दल कनीना से रवाना  होकर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर पर पहुंचा। जब तक किसान इस काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं तब तक गांव के किसान भी उनके साथ हर कदम पर कदम से कदम मिलाकर खड़े हैं । सुनील राव ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द तीनों काले कृषि कानूनों को वापस ले लेना चाहिए नहीं तो सरकार को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों का यह आंदोलन दिन प्रति दिन बड़ा रूप धारण करते जा रहा है । इस आंदोलन में सुनील राव ककराला के साथ विशाल नांगल, नीरू मोदी ककराला, हेमंत नांगल, मोनू ककराला, दीपक रामबास ,जीतू मोहनपुर लोग धरना स्थल पर पहुंचे।
फोटो कैप्शन 2: जयसिंह पुर खेड़ा बार्डर पर किसान नेता योगेंद्र यादव व सुनील राव संबोधित करते हुए।



कुश्ती में राष्ट्रीय स्तर पर जीता प्रथम इनाम
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कनीना। आरआरसीएम पब्लिक स्कूल कनीना में टाटा मोटर्स 39-वीं ग्रीक रोमन ब्वायज स्टाइल कुश्ती प्रतियोगिता में विद्यालय के छात्र रवि ने भार वर्ग 60 किण् ग्राण् में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी खेल प्रतिभा का परिचय दिया। यह प्रतियोगिता का आयोजन बिहार के पटना में हुई थी।
इस अवसर पर विद्यालय में छात्र रवि को सम्मानित किया गया।  संस्था के चेयरमैन रोशन लाल यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में खेलों की अनेक प्रतिभाएँ होती है। हमें इन्हें पहचान कर उचित मंच प्रदान करना चाहिए ताकि ये भविष्य में राज्य व राष्ट्रीय स्तर के अच्छे खिलाड़ी बन सके इसके लिए विद्यालय एक अच्छा मंच साबित हो सकता है।
इस अवसर पर  संस्था के निदेशक संजय यादव एवं प्राचार्य नरेंद्र गौतम ने भी छात्र रवि को उसकी सफलता पर हार्दिक बधाई प्रदान की। इस अवसर पर संस्था के सभी कर्मचारी उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 3: आरआरसीएम के छात्र रवि को सम्मानित करते रोशनलाल चेयरमैन।


दूसरे दिन खरीदा 39 किसानों का 885 क्विंटल बाजरा
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,कनीना। कस्बे की अनाज मंडी में दूसरे दिन 39 किसानों का 885 क्विंटल बाजरा खरीदा। दो दिनों में 2700 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है।
  उल्लेखनीय है कि नवंबर माह में शुरू की बाजरे की खरीद में कुछ किसान बाजरा बेचने से वंचित रह गये थे। सभी किसानों की बाजरे की समय पर खरीद न होने से किसानों ने सरकार से मांग की गई थी कि जिन किसानों का बाजार नहीं खरीदा गया उनका दोबारा से खरीदा जाए। जिसके लिए कृषि विभाग ने वेरिफिकेशन किया और उसके बाद मंगलवार को बेचे हुये किसानों की खरीद दोबारा से शुरू हो गई।
विस्तृत जानकारी देते हुए हेफेड मैनेजर सत्येंद्र यादव ने बताया कि जिन किसानों का एक बार भी नंबर नहीं आया था उन्होंने सरकार से मांग की थी कि जिन किसानों का बाजरा नहीं बिका है उनका दोबारा से खरीदा जाए। कृषि विभाग ने वेरिफिकेशन किया और उसके बाद मंगलवार  107 किसान ही उपस्थिति दर्ज करवा पाए और उनका 1815 क्विंटल बाजरा खरीदा गया। बुधवार को कोई खरीद नहीं हुई तथा गुरुवार को 39 किसान बाजरा बेचने पहुंचे जबकि शेड्यूल 51 किसानों का जारी हुआ था। अब तक दो दिनों में 146 किसानों का 2700 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है।
 मैनेजर ने बताया कि पूरे जिला में यह खरीद शुरू की गई है जो छह जनवरी तक जारी होगी। विभिाग ने किसानों को एसएमएस के जरिये सूचित किया है वे ही किसान बाजरा बेचने आए हैं।
फोटो कैप्शन 04: बाजरे की पुन: खरीद करते हैफेड मैनजर एवं अन्य



908 लोगों ने सात लाख रुपये भरा टैक्स
-अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग उठी
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 कनीना। टैक्स भरने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तक 908  लोगों ने 7,15,538 रुपये टैक्स भरा है। कनीना नगर पालिका में प्रापर्टी टैक्स भरने वालों के लिए प्रतिदिन शिविर का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता  प्रतिदिन सतीश जेलदार पालिका प्रधान ने की। टैक्स भरकर छूट पाने की तिथि 31 दिसंबर रखी हुई थी जिसके चलते अंतिम टैक्स भरने वालों की भीड़ देखी गई और सभी दिनों से अधिक टैक्स जमा किया गया। 31 दिसंबर को 1,98,063 रुपये टैक्स भरा जबकि 30 दिसंबर को 134 लोगों ने एक लाख सात सौ छह रुपये टैक्स भरा। इस प्रकार 908  लोगों ने 7,15,538 रुपये टैक्स भरा।
   पालिका प्रधान ने कहा कि टैक्स भरना जनहित का काम है। टैक्स भरना हम सबका कत्र्तव्य बनता है और हमारी जिम्मेदारी है। यह जरूर भरना चाहिए। यह टैक्स जनहित के विकास कार्यों पर खर्च होता है। इस मौके पर कनीना के विभिन्न लोगों को प्रापर्टी टैक्स भरने के लिए समझाया जिसके चलते अब तक 663 लोगों ने 5,17,475 रुपये प्रापर्टी टैक्स जमा किया। टैक्स भरने की तिथि बढ़ाने की मांग की गई है। सतीश जेलदार ने बताया कि 25 दिसंबर को 15190 रुपये, 26 दिसंबर को 64,018 रुपये वहीं 28 दिसंबर को 1,36,3,42 रुपये वहीं 29 दिसंबर को एक लाख रुपये के करीब टैक्स जमा हुआ है। जबकि 30 दिसंबर को 134 लोगों ने एक लाख सात सौ छह रुपये टैक्स भरा।
    इस अवसर पर सतीश जेलदार ने बताया कि 31 दिसंबर तक सरकार ने प्रापर्टी टैक्स भरने वालों के लिए 25 फीसदी छूट दी थी। यहां तक की बकाया राशि का ब्याज भी नहीं लिया। कनीना में विभिन्न 13 वार्ड हैं। ।उन्होंने कहा कि वे सरकार को लिखकर टैक्स भरने की तिथि बढ़वाने का प्रयास करेंगे।
इस मौके पर  एमई चमनलाल, लेखाकार शिवचरण शर्मा, रोहित, श्यामलाल, आदि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 05: टैक्स भरने के लिए पालिका परिसर में आयोजित कैंप में टैक्स भरते लोग

किसानों को भावांतर भरपाई योजना के बारे में दी जानकारी
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कनीना। कृषि कार्यालय कनीना के प्रांगण में बागवानी विभाग की ओर से भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को जानकारी दी गई। इस दौरान किसानों को योजना के बारे में जानकारी देते हुए बागवानी विभाग से अंकुश यादव ने कहा कि इस योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों को पंजीकरण करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि प्याज व टमाटर की फसल के लिए पंजीकरण के लिए 15 फरवरी तक का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि जो भी बागवानी से संबंधित किसान इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वे भावांतर भरपाई योजना ई-पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय में हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। वहां पर किसान अपना पंजीकरण नि:शुल्क करवा सकते हैं।
कृषि विभाग से डाक्टर अरविंद यादव ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की किसानों के लिए अनेक योजनाएं हैं इन योजनाओं को कृषि कार्यालय बागवानी कार्यालय में जाकर जानकारी ली जा सकती है। जिन किसानों के पास मोबाइल फोन इंटरनेट की सुविधा है वह अपने मोबाइल फोन पर भी इन योजनाओं की जानकारी लेकर पंजीकरण करवा सकते हैं। डॉ मनीषा यादव ने किसानों को कहा कि इस वक्त किसानों को सरसों व गेहूं में पानी लगातार देते रहना चाहिए। अगर पानी नहीं देंगे तो फसल में ठंड की मार ज्यादा हो जाएगी। इस दौरान डा अरविंद यादव, डाक्टर मनीषा यादव, अंकुश यादव, रमनदीप, एग्रीकल्चर सुपरवाइजर जिले सिंह, शंकर शेखावत, विकास, जोगेंद्र, राहुल, बंसी, निशा, लालचंद, कृष्ण सहित अन्य मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 4: सरकारी नौकरी में किसानों को जानकारी देते हुए कृषि विभाग में बागवानी विभाग के कर्मचारी

नव वर्ष पर रामचंद्र स्कूल के विद्यार्थियों ने जरूरतमंदों को किए स्वेटर व कंबल वितरित
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कनीना। रामचंद्र पब्लिक स्कूल कनीना के विद्यार्थियों ने प्राचार्य राकेश कौशिक के नेतृत्व में जरूरतमंद व्यक्तियों को खाद्य सामग्री गर्म वस्त्र वितरित किए।
स्कूल के प्राचार्य राकेश कौशिक ने बताया कि विद्यार्थियों ने अपनी जेब खर्ची में से कुछ पैसा बचा कर गरीबों की सहायता करने के लिए खाद्य सामग्री गर्म कंबल स्वेटर जुराब तथा कुछ अन्य आवश्यक वस्तुएं भेंट की। संस्था के चेयरमैन रोशन लाल ने कहा कि देश में आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिनको दो वक्त का खाना भी ठीक से नसीब नहीं हो पा रहा है ऐसे में हम नव वर्ष या कोई धार्मिक कार्यक्रम करते हैं तो उस कार्यक्रम को आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करके मनाना चाहिए। इस मौके पर अनीता, ऋतु, नीतू, राहुल, रवि प्रकाश, प्रदीप कुमार रवि कुमार, सतीश कुमार, कृष्ण कुमार व अन्य स्टाफ मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 5: स्कूल के विद्यार्थी जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र वितरित करते हुए।