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Wednesday, July 23, 2025
कावड़ के नाम पर खूब हुआ है देव का अपमान **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। यूं तो शिवभोले के नाम पर गोमुख , हरिद्वार और नीलकंठ आदि से कांवड़ लाई गई हैं लेकिन कावड़ के नाम पर घटिया गाने, नशीले पदार्थों का सेवन तथा देव का अपमान आम बात बन गई है। यह सत्य है की कावड़ लाने वालों के लिए जगह-जगह कैंप लगाए गये जिनमें कावडिय़ों की अच्छी सेवा की जाती है। जब कुछ भक्त कैंप में बैठते हैं तो वह अपने आप को राष्ट्रपति से कम नहीं समझते और बैठकर विभिन्न खाने पीने की वस्तुएं मंगवाने में हिचकिचाते नहीं। ऐसे आवाज लगाते देखे गये जैसे होटल में वेटर को बुलाया जाता है। यहां गौरतलब है कि ये कावडिय़े अपने स्वार्थ के लिए कावड़ लाते हैं और ये कैंप उनकी सेवा के लिए होते हैं परंतु सेवा का मतलब यह नहीं कि अपनी मनमर्जी करें। अनेक प्रकार की कांवड़ लाई जाती है लेकिन डाक कावड़ का स्वरूप ही बदल गया है। जिस प्रकार भागदौड़ शो शराबा, रोड़ पर दिखावा किया जाता है वह बहुत घटिया होता है तथा जो कावडिय़े पैदल चलकर आते हैं और गंगाजल लेकर आते हैं उनको तो कावडिय़ा ही नहीं समझा जाता। जबकि हकीकत में देखा जाए तो तो 50-60 युवक हुड़दंग करते हुए डाक कावड़ लाते हैं वह कावड़ का अच्छा रूप नहीं है। उधर कावड़ लाने वाले 90 प्रतिशत से अधिक नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए आते हैं। कुछ कावडिय़े तो जमकर शराब पीते हैं । यहां तक की इस लेखक ने जब बाघोत में कावड़ अर्पित की तो उस समय लाइन में शराब की बदबू ने बहुत ही परेशान कर दिया। इसका मतलब कावड़ चढऩे वाले या उनके सहयोगी शराब पीकर आते हैं। रास्ते में भांग पीने वालों की कमी नहीं है। कम से कम 40 प्रतिशत कावडिय़े सिगरेट और बीड़ी का तथा भांग का उपयोग करते हैं, 30 प्रतिशत लोग तो अन्य चीज चबाते और रास्तों को गंदा करते हुए आते हैं। कुछ ही प्रतिशत लोग भक्ति भाव से कावड़ को लाते हैं वरना रास्ते में गाली गलौज करते हुए आते हैं। शिव भोले को तो याद नहीं करते। सबसे बड़ा दुर्भाग्य मिला कि शिवभोले को चिलम पीते हुए दिखाया गया है और ऐसे पोस्टर बैनर लगाकर कावड़ लाते मिले। कावड़ पर भद्दे गानों और भजनों की तो क्या कहिए? शायद ही कोई भजन ऐसा हो जिसमें यह नहीं कहा गया हो कि शिव भांग पीते थे, भोले ने पी ली एक बाल्टी भांग,पार्वती से भांग घुटवाने की बात जैसे कितने ही अपमानजनक शब्द शिव भोले के लिए प्रयोग किए जाते हैं। वास्तव में दर्द होता है कि कुछ कावडिय़ा तो शिव भोले की फोटो तक नहीं लगाते अपितु घटिया फोटो लगाकर ही कावड़ ले जाते हैं। किसी कैंप में जाकर बैठना भी दुष्कर होता है क्योंकि बीड़ी सिगरेट का धुआं इस कदर छोड़ते हैं कि दूर दरार तक प्रदूषण हो जाता है। नीलकंठ पर जहां शुद्ध हवा मिलनी चाहिए परंतु वहां देखने को मिला कि सबसे प्रदूषित हवा बन गई है। नीलकंठ पर इस कदर बीड़ी सिगरेट का धुआं छोड़ते हैं कि चलना भी कठिन हो जाता है। रही बात गंगाजल की, गंगा में न जाने कितना कूड़ा कचरा, गंदगी डाल रहे हैं और उसी को लाकर शिव भोले पर अर्पित किया जा रहा है। साथ में उस गंगाजल को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में प्रयोग किया जाता है। इससे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात क्या हो सकती है। ऐसा लगता है की कावड़ के नाम पर लोग देव का अपमान भी करते हैं और व्यसनों मेें सम्मिलित भी पाए जाते हैं। एक शुद्ध आत्मा से कावड़ लाने वाले के लिए कावड़ लाना बहुत कठिन हो गया है। पहले ही कावड़ लाने वाले न तो साबुन का प्रयोग करते और तेल का प्रयोग करते। मलमूत्र त्यागने के बाद पानी से हाथ साफ करते हैं जो कि पूर्ण रूप से शुद्ध हाथ नहीं होते। ऐसे में कावड़ को इन्हीं हाथों से ले जाते हैं। ऐसे मेें कहा जा सकता है कि कार्ड शुद्ध मन से बहुत कम लोग लाते हैं जो शिव भोले को याद करते हुए आते हो।
चोर साहब के कारनामे- 23 -राम नाम जपना पराया माल अपना **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। कनीना निवासी लेखन होशियार सिंह के प्लाट से चोर साहब गमले, ईंट, पत्थर, कृषि का सामान, बिजली का समान आदि समय-समय पर चोरी कर ले गया। बड़ी बात यह है कि चोर साहब तीन ट्राली पत्थर भी उठा ले गया और किसी के कानों कान तक भी महसूस नहीं हुआ। आस पड़ोस के ईट आदि की चोरी कर ले गया। जिनकी आदत बन गई है उसे कोई नहीं मिटा सकता। चोर साहब पर 1960 में आई मूवी पतंग के बहुत सुंदर गीत शत प्रतिशत लागू होता है जो राजेंद्र कृष्ण ने लिखा हुआ है। जिसने कहा गया है -यह दुनिया बड़ी लुटेरी ना तेरी है ना मेरी अरे मुंह में इसके राम राम और दिल में हेरा फेरी, ये दुनिया बड़ी लुटेेरी। वही दो दिल 1965 की मूवी का एक गीत जो महमूद पर फिल्माया गया है जिसमें साफ कहा गया है- राम नाम जपना पराया माल अपना। चोर साहब पर दोनों ही गीत लागू होते हैं जो जो चोर साहब की हकीकत बया करते हैं। जब यह बातें सुनते हैं कि चोर साहब ने क्या-क्या उठा लिए तो सभी आश्चर्यचकित हो जाते परंतु साठ के दशक में इस प्रकार के भजन बनाए गए, गीत बनाए गए तो उनको पहले से ही आभास था कि भविष्य में क्या कुछ हो सकता है। चोर साहब पर ये गाने बहुत बखूबी लागू होते हैं। पर ऐसे गानों से एक शिक्षा मिलती है परंतु चोर साहब ने तो इन भजनों से भी कोई शिक्षा नहीं मिली। आश्चर्य होता है कि चोर सब के दोस्त, चोर साहब का परिवार उसको इतना भी नहीं समझा पाया परंतु अब लेखक ने अपने प्लाट पर उच्च दर्जे के कैमरे लगाने शुरू कर दिये हैं और आने वाले 15 दिनों में उच्च दर्जे के कैमरे लगा दिए जाएंगे जिससे किसी प्रकार की चोरी आदि पर अंकुश लगने की संभावना है।
शिक्षक चरित्रवान नहीं होंगे तो देश का भविष्य होगा कैसा होगा? **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल का एक शिक्षक छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में जेल चला गया है। पहले भी समय-समय पर ऐसे कारनामे सामने आते रहे हैं जिनमें शिक्षक जेल गये हैं। इससे एक बात स्पष्ट होती है कि जब शिक्षक ही ऐसे होंगे तो भविष्य कैसा होगा? सबसे बड़ी बात कि शिक्षक को चरित्रवान होना चाहिए ताकि समाज के लिए आइना बन सके परंतु वे गिरावट पर जा रहे हैं जिससे कलियुग नजर आने लगा है। एक 50 साल से अधिक उम्र के शिक्षक द्वारा आठवीं की 12-13 साल की छात्राओं से छेड़छाड़ करना कहां तक संभव है? अगर यह संभव है तो गहन छानबीन करनी चाहिए और ऐसे शिक्षक को समाज से निष्कासित कर देना चाहिए परंतु आज के समाज में एक नई बुराई शामिल होने लगी है कि शिक्षक के साथ किसी की नहीं बनती तो राजनीति का शिकार बन जाता है। इस प्रकार के आरोप लगा दिए जाते हैं। अगर ऐसा है तो समाज को सुधारना चाहिए और इस प्रकार के आरोपों से बचना चाहिए। इंसान चाहे कितनी भी दुश्मनी किसी से रखता हो लेकिन किसी पर इतने गंभीर आरोप नहीं लगाने चाहिए। वैसे तो समाज में ऐसे कितने ही उदाहरण है जिसमें शिक्षक वास्तव में राक्षस बन जाता है और ऐसे राक्षस आदमी नाम कमा रहे हंै। एक ऐसा ही राक्षस लेखक ने देखा है। उसके और बहुत से कारनामे सामने आए हैं। जिसमें वह अपने दोस्त की पुत्री को भी नहीं बख्शता यहां तक कि दोस्त की पत्नी को भी नहीं बख्शता। घर में किराएदार को भी नहीं बख्शा और कितने ही चरित्र पर लगे दाग सामने आये। परंतु वह शिक्षक जिस जगह बैठा उसने घर को गर्त में मिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेखक के पास एक ऐसा ही कु-चरित्र शिक्षक 5 साल बैठता रहा और जिसने बाद में इस लेखक के विरुद्ध वह षड्यंत्र रचा कि लाखों रुपये के नुकसान में पहुंचा दिया। और भविष्य भी अंधकारमय कर दिया। इस राक्षस ने तो कितने ही लोगों की जिंदगी बर्बाद करके रख दी। ऐसे राक्षस कभी पुलिस की चपेट में नहीं आए। ऐसे राक्षसों को तो फांसी दी जानी चाहिए। और भी कई उदाहरण देखने को मिले जिसमें गुरु शिष्य की परंपरा जो उच्च मानी जाती है, संबंध पवित्र माना जाता है उसे तार तार कर दिया। महाभारत में भी प्रसंग आता है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे तो अर्जुन अपनी शिष्या को संगीत की शिक्षा देता था। एक दिन शिष्या के परिवार ने शिष्या का विवाह अर्जुन से कराने की बात कही। कंतु अर्जुन का एक ही कथन था कि गुरु शिष्य परंपरा को वह लांछित नहीं करना चाहता। ऐसे में उसका विवाह अर्जुन के पुत्र से करवाया गया। जब द्वापर युग में भी ऐसी परंपरा को श्रेष्ठ माना जाता था तो आज के दिन इस परंपरा को इतना नीचे क्यों गिरा दिया परंतु इस प्रकार के केसों की सघन जांच की जानी चाहिए ताकि दोषी को सजा मिले और निर्दोष को बचाया जा सके।
विभिन्न शिवालयों में मनाया गया शिवरात्रि का पर्व, दिनभर रही भीड़ -हजारों कांवड़ बाघेश्वर धाम पर अर्पित की गई **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। शिवरात्रि का पर्व क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर व्रत रखा गया और गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। देशभर में विख्यात बाघेश्वरी धाम पर दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। कांवड़ चढ़ाई गई और शिवलिंग का अभिषेक करके मन्नत मांगी गई। इस बार भारी संख्या में कांवड़ अर्पित की गई। इस वर्ष जोश अधिक देखने को मिला। विशेषकर टोकना कावड़, डाक कावड़ का जोर रहा। सुबह से ही चारों ओर बम-बम के जयकारे सुनाई पड़ रहे थे। विभिन्न शिवालयों में सुबह से शाम तक भीड़ रही। कनीना के 21 फुट प्रतिमा वाले शिवालय पर भारी भीड़ रही। धनौंदा के ब्रह्मचारी कृष्णानन्द आश्रम में शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। विभिन्न गांवों में भी जल चढ़ाकर मन्नत मांगने का सिलसिला जारी रहा। देशभर में कांवड़ के लिए विख्यात बाघेश्वर धाम पर कांवड़ चढ़ाने वालों की भीड़ रही वहीं शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए भी मारामारी चली। स्वयंभू शिवलिंग पर हजारों वर्षों से गंगाजल अर्पित करने व कांवड़ लकार अर्पित करने का सिलसिला चला आ रहा है। लाखों भक्तों ने शिवालय जाकर शिव भोले को जल अर्पित किया। महिलाओं की संख्या अधिक रही। बाघेश्वरी धाम पर न केवल भक्तों ने अपितु संत, महात्मा, नेताओं आदि ने गंगाजल अर्पित किया। यूं तो प्रत्येक सोमवार को यहां पर भारी भीड़ देखने को मिलती है। मेले का आयोजन चार दिनों से चला आ रहा था जो आज संपन्न हो गया है। ट्रैक्टरों मेें जा रहे थे भक्त- बाघेश्वरी धाम पर कांवड़ अर्पित करने के लिए भक्तजन टै्रक्टरों, पिकअप आदि में सवार होकर जाते देखे गए। दिन एवं रात को वाहनों एवं भक्तों का तांता बाघोत की ओर जाते देखा गया। उनको अलग रास्ते से शिवालय में जाने की व्यवस्था की हुई थी। एक ओर 350 किमी से व्यक्तिगत कांवड़ लेकर आने वाले भक्तों को सामान्य लाइन में खड़ा होना पड़ा वहीं डाक कांवड़ लाने वालों को विशेष लाइन में दर्शनों का मौका दिया गया। गीत भजन एवं डांस के साथ कांवड़ की गई अर्पित- शिवरात्रि के दिन बाघेश्वरी धाम पर कांवड़ चढ़ाने का सिलसिला अनवरत चलता रहा। इस दौरान कांवड़ लाने वाले भक्त अपनी कांवर को विधि विधान से पूजा करवाकर उन्हें बैंड बाजों पर थिरकते हुए शिवालय तक पहुंचे। और तो और महिलाएं भी नृत्य करते हुए आगे बढ़ती देखी गई। जिस प्रकार शादी दौरान नृत्य किया जाता है ठीक उसी प्रकार कांवड़ अर्पित करने का सिलसिला देखने को मिला। भारी संख्या में कांवर अर्पित की गई। कांवड़ अर्पित करने का सिलसिला विगत चार दिनों से चला आ रहा था। एक अनुमान के अनुसार बीस हजार कांवड़ अर्पित की गई हैं। विभिन्न गांवों के शिवालयों में भी कांवड़ अर्पित की गई। विभिन्न दलों ने सेवा की- कांवर लाकर अर्पित करने वाले तथा शिवालय के दर्शन करने वाले भक्तों की सेवा के लिए विभिन्न दल सेवा कर रहे थे। शिवरात्रि के दिन भारी भीड़ देखने को मिली। तीन तीन घंटों में नंबर पड़ रहा था। पानी पिलाना तथा मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी सेवादल अहं भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस बल दौरा करते हुए देखे गए। झूला, बैकुंठी, खड़ी कांवड़ भी अर्पित की गई। फोटो कैप्शन 05: कांवड़ के संग ढोल पर नृत्य करते कावडिय़े 06: बाघोत शिवालय में भीड़
कावडिय़ों के लिए लगाए गये शिविरों का हुआ समापन **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। कांवडिय़ों के लिए विगत एक सप्ताह से लगाये गये सेवा शिविर संपन्न हो गये हैं। कनीना के बस स्टंैड के पास ही रेवाड़ी मार्ग, कोसली मार्ग, महेंद्रगढ़ एवं अटेली मार्ग, गाहड़ा मार्ग पर शिविर लगाए हुए थे। ये शिविर एक सप्ताह तक चले आ रहे थे। इस शिविरों में कनीना व आस-पास के लोग आकर शिवभक्तों की सेवा करते रहे। जहां कुछ लोग इन शिवभक्तों की सेवा करके खुश रहे तो कुछ दान पुण्य करके ही प्रसन्न रहे। इस शिविरों में कांवडिय़ों के लिए जहां चाय, पानी, नाश्ता एवं भोजन की संपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई वहीं उनकी सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। देर रात तक ये सेवक भक्तों की सेवा के लिए तैयार देखे गए। जहां शिवभक्तों में शिव के प्रति आस्था के अनेकों तरीके हैं वहीं शिवभक्तों की सेवा करने वाले भी कई प्रकार से उन भक्तों की सेवा कर रहे थे। जहां कुछ भक्त कांवड़ लाकर ही अपना मन शुद्ध करने का प्रयास कर रहे थे वहीं कुछ लोग उनकी सेवा करके ही अपने को धन्य समझते थे। कनीना व आस-पास गांवों में कांवडिय़ों के लिए जहां दूध, फल, सब्जी, नाश्ता, खाना, दवाएं एवं हर प्रकार की सुविधा प्रदान की जा रही थी वहीं उनके पैरों में मेहंदी का लेप लगाया जा रहा था। इन शिविरों में ठहरने वाले भक्तों के पैर के 350 किमी लंबी दूरी पैदल तय करने के कारण कट जाते हैं वहीं दर्द होने के कारण परेशानी का कारण बन जाते हैं। उनके पैरों के तलवों पर दिनरात कुछ भक्त मेहंदी का लेप कर रहे थे। बताया जाता है कि मेहंदी के लेप के कारण ही उन्हें आराम मिलता था और आगे बढऩे का हौसला भी मिलता था। एक भक्त अशोक कुमार, संदीप कुमार, सुनील कुमार ने बताया कि वो उनके शिविर में मेहंदी लगाकर भक्तों की सेवा करके ही अपने को धन्य समझता है। उनका कहना है कि नर सेवा ही नारायण सेवा होती है। हरिद्वार से कांवड़ नहीं लाए तो क्या हुआ वे कांवड़ लाने वालों की सेवा तो कर ही सकते थे।
जिला में दूर-दराज से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए ठहरने की निशुल्क व्यवस्था **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। प्रदेश में 26 व 27 जुलाई को होने वाली कामन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी-2025) परीक्षा के मध्य नजर जिला प्रशासन की ओर से जिला में दूर-दराज से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए ठहरने की निशुल्क व्यवस्था की गई है। उपायुक्त नारनौल डा. विवेक भारती ने बताया कि परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए नारनौल में धर्मशाला, कम्युनिटी सेंटर व रेन बसेरा में लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। इनका ओवरआल इंचार्ज नगर परिषद के ईओ दीपक गोयल होंगे। उन्होंने बताया कि दुलीचंद धर्मशाला पार्क गली, अग्रवाल धर्मशाला नागरिक अस्पताल, सैनी सभा रेवाड़ी रोड नारनौल, यादव धर्मशाला बस स्टैंड के पीछे, नामदेव की धर्मशाला पुल बाजार, हुडडा कम्युनिटी सेंटर हुडडा सेक्टर नियर सीएल पब्लिक स्कूल, रेन बसेरा नजदीक बस स्टैंड व नजदीक सिविल हॉस्पिटल रेन बसेरा में ठहरने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि दुलीचंद धर्मशाला में ठहरने के लिए धर्मशाला मेंबर सतीश गर्ग के मोबाइल नंबर 9416416725 पर फोन कर सकते हैं। इसी प्रकार अग्रवाल धर्मशाला में ठहरने के लिए तरुण कौशिक के मोबाइल नंबर 7988849861 पर, सैनी सभा में ठहरने के लिए विकास कुमार सैनी के मोबाइल नंबर 9017733463 पर, यादव धर्मशाला में ठहरने के लिए कंवर सिंह के मोबाइल नंबर 9466924414 पर व वह नामदेव की धर्मशाला में ठहरने के लिए प्रदीप के मोबाइल नंबर 6376583760 पर फोन कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी धर्मशाला, हुडडा कम्युनिटी सेंटर व रेन बसेरा में ठहरने के लिए नगर परिषद से नोडल अधिकारी राकेश कुमार के मोबाइल नंबर 946688 3897 पर फोन कर सकते हैं।
शिवरात्रि पर हवन यज्ञ के साथ भंडारे का आयोजन **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। गांव गोमला में शिवरात्रि के पावन अवसर पर हवन यज्ञ कर भंडारे का आयोजन किया गया। इस विषय में जानकारी देते हुए मंदिर के पुजारी बृजदास ने बताया कि इस अवसर पर गांव के युवाओं द्वारा हरिद्वार से डाक कावड़ लाकर गांव में स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक भी किया गया। इसके साथ-साथ गांव के कुछ शिव भक्त झूला कावड़ लेकर भी मंदिर में पहुंचे। इस दौरान काफी बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। इस अवसर मंदिर प्रांगण में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुषों ने हवन में आहुति दी। ग्रामीणों की तरफ से सामूहिक रूप से भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें गांव और आसपास के बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान शिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग पर जल अर्पण करने वालों की सुबह से ही मंदिर में भीड़ लगी थी जिसमें महिलाओं की संख्या अधिक रहे। मंदिर में आयोजित हवन यज्ञ के साथ-साथ सुमेर मास्टर और उनकी भजन पार्टी ने शिव भोले के भजनों का गुणगान किया। इस अवसर पर सरपंच वेद प्रकाश, पूर्व सरपंच दयाराम, बलवंत, करतार सिंह, हवा सिंह, सत्यवीर, संजय, नौबत राय, सुरेंद्र, संदीप, बबीता ,सुनीता ,मंजू, सुरेश देवी ,नरेश, दिलीप, नीरज, पंकज ,सरोज, सुरेश देवी शाहिद सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। फोटो कैप्शन 02: गोमला में भंडारा का नजारा
शिवरात्रि के अवसर पर दुकानदारों ने खीर हलवे का किया भंडारा **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। गांव भोजावास में अटेली रोड स्थित दुकानदारों ने शिवरात्रि के पावन अवसर पर भंडारे का आयोजन किया। इस अवसर पर दुकानदारों ने खीर और हलवे का प्रसाद वितरित किया। दुकानदारों की तरफ से आयोजित इस भंडारे में जहां डाक कावड़ लाने वाले शिव भक्तों को प्रसाद वितरित किया तो वहीं इसके साथ-साथ राहगीरों को भी खिर और हलवे का प्रसाद वितरण किया गया। शिवरात्रि के पावन अवसर पर दुकानदारों द्वारा आयोजित इस पुनीत कार्य के लिए आसपास के दुकानदारों ने अपना सहयोग दिया और राहगीरों को प्रसाद वितरण का कार्य किया। इस अवसर पर कृष्ण जांगड़ा, नवीन तंवर, हरीश शर्मा, रतन भगत, जितेंद्र यादव ,हरिओम तंवर सहित अनेक दुकानदार मौजूद रहे। फोटो कैप्शन 03: खीर का प्रसाद वितरित करते हुए
महिलाओं को समर्पित है तीज एवं सिंधारा -जमकर चलती है पतंगबाजी **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। अब छतों पर वो मारा वो काटा का शोर सुनाई पडऩे लगा है। कनीना क्षेत्र में 27 जुलाई को हरियाली तीज व 26 अगस्त को सिंधारा पर्व के दृष्टिगत पतंगों की बहार आ गई है। सुबह से शाम अब वो मारा, वो काटा की आवाज सुनाई पड़ती है। बम बम के साथ साथ वो काटा वो मारा का शोर छतों पर सुनाई पड़ता है। युवा वर्ग इस मामले में अधिक सक्रिय है। सर्वाधिक पतंगबाजी हरियाली तीज पर होती है। उधर तीज एवं सिंधारा के दृष्टिगत बाजारों में घेवर की मिठाई की धूम मची हुई है। त्योहार पर घेवर का लेनदेन किया जाता है। शहरी क्षेत्र में पतंगबाजी में तेजी आ गई है। बाजारों में दुकानों पर पतंग एवं डोर ही नजर आती है। युवा हो या बच्चा अपनी छतों पर सुबह शाम पतंगबाजी करता है। जिस दिन स्कूलों की छुट्टी होती है उस दिन तो बच्चे अपने घरों की छतों से नीचे ही नहीं आते हैं। एक ओर सिंधारा पर्व पर घेवर की मिठाई का बोलबाला है वहीं तीज पर्व पर पतंगबाजी का बोलबाला है। यूं तो इस सावन माह में उत्सवों की बहार है किंतु तीज पर्व का अपना ही महत्व है। सावन में आने वाली हरियाली तीज पर सर्वाधिक पतंगबाजी की जाती है तत्पश्चात पतंगबाजी में कमी आ जाती है। सावन माह में इस बार झूले कम ही नजर आते हैं। सावन माह में पुराने समय से झूलों पर झूलने की प्रथा थी किंतु अब वह प्रथा धीमी पड़ गई है। पतंगबाजी में युवा एवं बच्चों की अधिक भागीदारी होती है। एक दुकानदार योगेश कुमार ने बताया कि इस बार पतंगबाजी के लिए युवा वर्ग में इतना उत्साह नहीं है जितना होना चाहिए। कनीना क्षेत्र में बारिश का बोलबाला है। वैसे तो पूरे सावन माह में ही पींग पर झूला जाता है किंतु इस दिन विशेष आकर्षण का केंद्र पींग होती है। जंगलों में नृत्य करते मोर, वषा का शोर तथा पतंग उड़ाने वालों की ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ती है। पर्व खुशियां लेकर आता है। वर्षा अच्छी होने पर तो खुशियां और भी बढ़ जाती हैं। फोटो कैप्शन 04: कनीना में घेवर की मिठाई
हेरिटेज विद्यालय में शिवरात्रि के पावन पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया गया **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। उपमंडल कनीना में स्थित हेरिटेज वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोहनपुर में शिवरात्रि के पावन पर्व को विद्यालय प्रांगण में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया जिसमें सर्वप्रथम विद्यालय के अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने पूजा अर्चना करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अविका ग्रुप ने हरिद्वार में बाजी पायल चांदी की गाने पर अपने सुंदर नृत्य से तालियां बटोरी। कक्षा नौवीं की छात्राएं जिन्होंने गोरा का बीपी हाई गाने पर बहुत ही सुंदर व मनमोहक नृत्य पेश किया। इसके उपरांत नन्हे नन्हे बच्चों ने भोले के लावेगा गाने पर अपना नृत्य पेश किया। कक्षा आठवीं की छात्राएं जिन्होंने मेरा जी लगे से बाबा में गाने पर तालियां बटोरी। कक्षा दूसरी की छात्राएं पायल भोले की गाने पर अपने नृत्य पेश किया। बच्चों ने इस पर्व को मनाया जिसमें विद्यालय के सभी अध्यापकों ने भी अपनी रुचि दिखाई। इसके उपरांत विद्यालय के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ने बच्चों को शुभ आशीर्वाद दिया। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के सीईओ कैलाश शर्मा, मनीष कुमार ,डायरेक्टर खुशीराम शर्मा, प्रधानाचार्य कृष्ण सिंह, सीनियर कोआर्डिनेटर सुरेंद्र कुमार, जूनियर कोआर्डिनेटर सुमन तथा समस्त अध्यापक उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन 01: शिवरात्रि पर्व पर हेरिटेज के बच्चे।
रेवाड़ी जिला में बने सीईटी परीक्षा केंद्रों के लिए शटल सेवा का शेड्यूल तैयार **************************************************** ********************************************************** ********************************************************* कनीना की आवाज। हरियाणा राज्य परिवहन, नारनौल डिपो के महाप्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से 26 व 27 जुलाई को होने वाली सीईटी की परीक्षा के लिए महेंद्रगढ़ जिला से राज्य परिवहन की बसों में रेवाड़ी जाने वाले परीक्षार्थी रेवाड़ी से शटल सेवा से अपने-अपने परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समयावधि में पहुंच सकेंगें।
रेवाड़ी परीक्षा केंद्रों के लिए 11 रूट निर्धारित
हरियाणा राज्य परिवहन, नारनौल डिपो के महाप्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि रेवाड़ी जिला में बने 11 शटल सर्विस रूट को परीक्षा केंद्रों अनुरूप आवंटित किया गया है। ऐसे में परीक्षार्थी नई सब्जी मंडी बिठवाना पर बने मुख्य स्थान से अपने-अपने परीक्षा केंद्र के लिए शटल सर्विस का लाभ उठा सकते हैं।
*रूट नंबर 1 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से सरकुलर रोड रेवाड़ी शहरी क्षेत्र)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29046 राज इंटरनेशनल स्कूल, केंद्र क्रमांक 29024 होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल, केंद्र क्रमांक 29052 सैनी पब्लिक स्कूल, केंद्र क्रमांक 29030, 29016, 29029 क्रमश: जैन पब्लिक स्कूल, जैन बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल व जैन गल्र्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, केंद्र क्रमांक 29037 महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, केंद्र क्रमांक 29042 व 29043 पीएम श्री गवर्नमेंट गल्र्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल तथा केंद्र क्रमांक 29047 राव बहादुर सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल यादव नगर कनकरवाली बेरली रोड रेवाड़ी ।
*रूट नंबर 2 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से धारूहेड़ा)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29031 व 29032 केएलपी कॉलेज नजदीक राव तुलाराम स्टेडियम, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29007 डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल पुलिस लाइन, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29054 व 29055 श्री कृष्ण सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव हांसाका रोड, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29039 माउंट हेरीटेज इंटरनेशनल स्कूल गांव बलियार खुर्द, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29048 ऋषि पब्लिक स्कूल गांव हांसाका, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29050 व 29051 आरपीएस पब्लिक स्कूल गांव बलियार कलां, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29009 दिल्ली पब्लिक स्कूल गांव जोनावास, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29010 व 29011 यूरो इंटरनेशनल स्कूल गांव जोनावास, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29060, 29061, 29062, 29063 सूरज सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव रसगन, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29022 व 29023 गुरुकुलम द स्कूल गांव मसानी व परीक्षा केंद्र क्रमांक 29014 गवर्नमेंट कॉलेज गांव खरखड़ा।
*रूट नंबर 3 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से बोडिय़ा कमालपुर)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29020 व 29021 गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल रेवाड़ी, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29001 अहीर कॉलेज रेवाड़ी, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29017 गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव बूढ़पुर, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29004 भारती इंटरनेशनल स्कूल बांउिय़ा कमालपुर, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29008 डाउन निलायम पब्लिक स्कूल गांव बालावास जमापुर बेरली रोड।
*रूट नंबर 4 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से खोरी)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29027 व 29028 जय राम नर्सिंग कॉलेज नियर डाइट गांव हुसैनपुर, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29038 माता राजकौर कॉलेज गांव गांगुली साहरनवास, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29057 व 29058 सनगलो इंटरनेशनल स्कूल गांव गांगुली साहरनवास, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29040 नव ज्योति स्कूल पिथरावास। *रूट नंबर 5 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से गणेशी लाल हिंदू स्कूल)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29041 पीएम श्री गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी गांव बिठवाना, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29044 प्रथम इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव धामलाका, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29056 सोमानी इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, 29005 कैंब्रिज स्कूल सहबाजपुर पाडियावास, 29013 गणेशी लाल हिंदू पब्लिक स्कूल सहबाजपुर पाडियावास।
*रूट नंबर 6 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से रोलियावास)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29067 व 29068 वृंदावन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल महेंद्रगढ़ रोड, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29019 गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव सहारनवास, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29064 टैगोर पब्लिक स्कूल जाडरा गांव, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29065 व 29066 विकास इंटरनेशनल स्कूल गांव रोलियावास।
*रूट नंबर 7 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से कोसली)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29002व 29003 अरावली इंटरनेशनल स्कूल गांव गोकलगढ़, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29018 गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव गोकलगढ़, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29006 गवर्नमेंट पॉलिटेक्निकल कॉलेज लिसाना, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29045 आर सी ग्रीन फील्ड स्कूल गांव गंगायाचा जाट, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29049 रॉयल पब्लिक स्कूल गांव रोडहाई, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29059 सूरज सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव गुडिय़ानी, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29006 डीएवी गल्र्स कॉलेज कोसली।
*रूट नंबर 8 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से डोहकी)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29012 जीडी गोयनका स्कूल रेवाड़ी, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29069 व 29070 यदुवंशी शिक्षा निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव डोहकी।
*रूट नंबर 9 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से जैतडावास)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29053 सरस्वती विद्या निकेतन भडवास रोड रेवाड़ी, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29034 केरला पब्लिक स्कूल गांव जैतडावास।
*रूट नंबर 10 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से राजपुरा)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29025 व 29026 आईजीयू मीरपुर, परीक्षा केंद्र क्रमांक 29035 व 29036 एमएलपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांव राजपुरा आलमगीरपुर।
*रूट नंबर 11 (नई सब्जी मंडी बिठवाना से कौनसीवास)* परीक्षा केंद्र क्रमांक 29033 केंद्रीय विद्यालय गांव कौनसीवास ।
सीईटी के लिए जिला में आने वाले तथा बाहर जाने वाले परीक्षार्थियों के लिए रूट चार्ट तैयार चरखी दादरी व भिवानी से आएंगे तथा रेवाड़ी व चरखी दादरी जाएंगे परीक्षार्थी ' सीईटी ट्रैवल ऐप पर करवाएं पंजीकरण **************************************************** ********************************************************** ***************
****************************************** कनीना की आवाज। हरियाणा राज्य परिवहन का नारनौल डिपो आगामी 26 व 27 जुलाई को हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) में भाग लेने वाले महेंद्रगढ़ जिले के परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए विशेष बस सेवाओं का संचालन करेगा। हरियाणा राज्य परिवहन, नारनौल डिपो के महाप्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि परीक्षार्थियों को उनके गांव व शहर के निकट से परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए महेंद्रगढ़ जिले के विभिन्न स्थानों से दादरी और रेवाड़ी जिलों के लिए बसों का संचालन किया जाएगा। महेंद्रगढ़ जिले से दादरी और रेवाड़ी के लिए बस संचालन केंद्र : * बस स्टैंड नारनौल * बस स्टैंड महेंद्रगढ़ * बस स्टैंड नांगल चौधरी * बस स्टैंड अटेली * बस स्टैंड कनीना * बस स्टैंड सतनाली * भांखरी * निजामपुर * दौंगडा अहीर * दुलोठ अहीर * नांगल सिरोही * पाली * भोजावास (कनीना) * सेहलंग * कांटी खेड़ी परीक्षा केंद्रों तक अंतिम मील कनेक्टिविटी : दादरी जाने वाले परीक्षार्थी : महेंद्रगढ़ से दादरी जाने वाले परीक्षार्थियों को चरखी दादरी में नई अनाज मंडी कनीना रोड पर बने अस्थायी बस स्टैंड तक पहुंचाया जाएगा। यहां से शटल बस सेवा के माध्यम से उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। * रेवाड़ी जाने वाले परीक्षाथीर्: रेवाड़ी जाने वाले परीक्षार्थियों को पीठवाना सब्जी मंडी में बने अस्थायी बस स्टैंड तक पहुंचाया जाएगा, जहां से शटल बस सेवा द्वारा उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। * महेंद्रगढ़ आने वाले परीक्षार्थी (चरखी दादरी व भिवानी से) : चरखी दादरी और भिवानी से महेंद्रगढ़ जिला में आने वाले परीक्षार्थियों को महेंद्रगढ़ बदेरवाल सिटी और नई अनाज मंडी नारनौल पर बने अस्थायी बस स्टैंडों पर पहुंचाया जाएगा। इन स्थानों से शटल बस सेवा के माध्यम से उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। बस संचालन का समय: * प्रथम शिफ्ट: बसों का संचालन प्रात: 04:30 बजे शुरू होगा। * दूसरी शिफ्ट: बसों का संचालन प्रात: 09:00 बजे शुरू होगा। जिला प्रशासन महेंद्रगढ़ और हरियाणा राज्य परिवहन परीक्षार्थियों से अपील करता है कि वे इन सुविधाओं का लाभ उठाएं और समय पर अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंचें। सभी परीक्षार्थी ' सीईटी ट्रैवलÓ ऐप पर पंजीकरण करवाएं।
Tuesday, July 22, 2025
चोर साहब के कारनामे-22 क्या मिलिये ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे...... ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव लेखक के प्लाट से जहां अनेकों गमले,पत्थर, कृषि के उपकरण, बिजली का सामान समय-समय पर चोर साहब ने चोरी कर लिये। एक बार तो चोर साहब को रंगे हाथों पकड़ भी लिया परंतु चोर साहब कब मानने वाला है। अब सुरक्षा के लिए जहां कैमरा लगा दिया है और जल्द ही उच्च दर्जे के कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि चोर साहब को पकड़ा जा सके क्योंकि कहा जाता है कि चोर चोरी से जाए किंतु हेरा फेरी ,घटियापन चोर साहब के दिल में बसा हुआ है। दूसरों का अहित करना उसका एक फैशन बन चुका है। एक फिल्मी गाना रेडियो पर सुनाई दिया-क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे,नकली चेहरा सामने आये असली सूरत छुपी रहे। 1968 में धर्मेंद्र की इज्जत फिल्म आई थी जिसमें यह गीत बहुत प्रचलित हुआ था। उस जमाने में भी चोर साहब जैसी व्यक्तियों के लिए कितना सुंदर गीत बनाया गया था। साहिर लुधियानवी ने अपने शब्दों से पिरोकार समाज में चोर साहब जैसे लोगों को उजागर किया था। सचमुच ऐसे लोगों से मिलना बहुत बुरी बात है। ऐसे लोगों को समाज से दूर रखा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। कहावत है कि बुराई बुरे लोगों के दिल से समाज में फैलती है वही अच्छे लोगों से खुशबू सारे समाज को बेहतर बनाने की कोशिश करती है। संतों का भी यही कहना है कि बुरी संगति से अकेला भला। ऐसे लोगों से मिलकर भी इंसान गलत संगत में जाता है। ऐसे लोगों का साथ देने वाले एक दिन निश्चित रूप से गर्त में जाएंगे अच्छे लोगों की संगति हरिण की कस्तूरी के समान होती है जिसकी खुशबू सारे समझ में फैलकर तन मन को प्रफुल्लित कर देती है। बुराई करने वाले दूसरे का अहित करने वाले चोर साहब जैसे लोग न जाने किस किस प्रकार से लोगों का अहित सोचते हैं परंतु इन लोगों की जिंदगी ज्यादा लंबी नहीं होती और जल्द ही इस दुनिया से रुखसत होना पड़ता है। चोर साहब चाहे कितना भी अहित करें परंतु निश्चित है उसका अंत और यह अंत भी ऐसा बुरा होगा कि समाज ऐसे घटिया प्रवृत्ति के लोगों के जाने पर थू-थू करेगा। तभी तो कहा है- घटिया लोगों का साथ दो, तन मन की जाती है आब। नीचे कलंक जहान में कहलाते हैं चोर साहब।। इस प्रकार के संस्कार पूर्वजों से आते हैं और सबसे बड़ी बात है कि परिवार के सदस्य इस प्रकार की प्रवृति को अगर रोकना चाहे तो रोक सकते हैं किंतु नहीं रोकेंगे तो इसका मतलब है वह परिवार भी दोषी होगा। क्योंकि नारद मुनि ने वाल्मीकि से यही पूछा था कि जो वह पाप कर रहा है क्या उसके पाप का भागीदार उसका परिवार होगा? उसके परिवारों ने स्पष्ट कर दिया था कि वो कभी भागीदार नहीं होंगे। इसके बाद ही उसकी मति बदली थी किंतु चोर साहब जैसे लोगों के घर परिवार के लोग भी उसे बढ़ावा दे रहे हैं जिसके कारण इस प्रकार की प्रवृत्ति उसके दिलोदिमाग में कूट-कूट कर भरी हुई है।
बहुत बड़ा अंतर है शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। अक्सर लोग शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर नहीं समझ पाते परंतु दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। शिवरात्रि हर महीने शिव की पूजा अर्चना के लिए आती है किंतु सावन की शिवरात्रि सबसे बेहतर मानी जाती है क्योंकि गुरुओं की पूजा और देवों का आशीर्वाद इस माह में सदैव प्राप्त होता है। पूजा अर्चना करने वाले शिव के आशीर्वाद के भागीदार होते हैं। इस माह में कावड़ अधिक चढ़ाई जाती है। यूं तो कावड़ महाशिवरात्रि पर भी अर्पित की जाती है किंतु उस समय मौसम अनुकूल नहीं होता। ऐसे में शिवरात्रि पर ही कावड़ आसानी से चढ़ाई जा सकती है। उधर महाशिवरात्रि फरवरी या मार्च माह में अक्सर आता है। इस दिन शिव भोले ने अमरनाथ में पार्वती को अमर कथा सुनाई थी। इस दिन जहां अमर कथा सुनते-सुनते पार्वती को नींद आ गई थी और कबूतरों के जोड़े ने महाशिवरात्रि पर शिव भोले की कथा सुन ली क्योंकि कबूतर जब बोलते हैं तो ऐसा लगता है कि हुंकारा भरा जा रहा है। इसलिए सारी कथा सुनने के कारण वो भी अमर हो गए। शिव भोले ने उनको मारना भी चाहा किंतु तब तक वो अमर हो चुके थे। आज भी अमरनाथ गुफा में सफेद रंग के कबूतर कुछ लोगों को दर्शन देते हैं जो माने जाते हैं कि अमर हैं। ऐसे में 23 जुलाई को शिवरात्रि आ रही है जबकि फरवरी या मार्च में महाशिवरात्रि आएगी। 2026 में यह महाशिवरात्रि 15 फरवरी को आएगी।
कनीना में हुई हल्की वर्षा संस,जागरण.कनीना। कनीना क्षेत्र में मगलवार की शाम को हल्की वर्षा हुई। चंद दिनों के बाद यह हल्की वर्षा हुई है। इस वक्त सड़कों का गंदा जल सूख चुका है तथा अब वर्षा के बाद फिर से पानी भर गया है। फोटो साथ हैं।
कावडिय़ों के लिए लगाए गये शिविरों का बुधवार को होगा समापन ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। कांवडिय़ों के लिए विगत एक सप्ताह से लगाये गये सेवा शिविर बुधवार को संपन्न हो जाएंगे। कनीना के बस स्टंैड के पास ही रेवाड़ी मार्ग, कोसली मार्ग, महेंद्रगढ़ एवं अटेली मार्ग शिविर लगाए हुए हैं। ये शिविर एक सप्ताह तक चले आ रहे थे। इस शिविरों में कनीना व आस-पास के लोग आकर शिवभक्तों की सेवा करते आ रहे हैं। जहां कुछ लोग इन शिवभक्तों की सेवा करके खुश रहे तो कुछ दान पुण्य करके ही प्रसन्न रहे। इस शिविरों में कांवडिय़ों के लिए जहां चाय, पानी, नाश्ता एवं भोजन की संपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई वहीं उनकी सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। देर रात तक ये सेवक भक्तों की सेवा के लिए तैयार देखे गए। बुधवार को जगह जगह भंडारे आयोजित किये जाएंगे। जहां शिवभक्तों में शिव के प्रति आस्था के अनेकों तरीके हैं वहीं शिवभक्तों की सेवा करने वाले भी कई प्रकार से उन भक्तों की सेवा कर रहे हैं। जहां कुछ भक्त कांवड़ लाकर ही अपना मन शुद्ध करने का प्रयास कर रहे थे वहीं कुछ लोग उनकी सेवा करके ही अपने को धन्य समझते हैं। कनीना व आस-पास गांवों में कांवडिय़ों के लिए जहां दूध, फल, सब्जी, नाश्ता, खाना, दवाएं एवं हर प्रकार की सुविधा प्रदान की जा रही थी वहीं उनके पैरों में मेहंदी का लेप लगाया जा रहा है। इन शिविरों में ठहरने वाले भक्तों के पैर के 350 किमी लंबी दूरी पैदल तय करने के कारण कट जाते हैं वहीं दर्द होने के कारण परेशानी का कारण बन जाते हैं। उनके पैरों के तलवों पर दिनरात कुछ भक्त मेहंदी का लेप कर रहे हैं। बताया जाता है कि मेहंदी के लेप के कारण ही उन्हें आराम मिलता है और आगे बढऩे का हौसला भी मिलता है। एक भक्त अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने गाहड़ा मार्ग पर शिविर लगाकर भक्तों की सेवा की है। उनका कहना है कि नर सेवा ही नारायण सेवा होती है। हरिद्वार से कांवड़ नहीं लाए तो क्या हुआ वे कांवड़ लाने वालों की सेवा तो कर ही सकते हैं। फोटो कैप्शन 12: शिविरों में कावडिय़े। महिलाओं को समर्पित है तीज एवं सिंधारा -जमकर चलती है पतंगबाजी ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। अब छतों पर वो मारा वो काटा का शोर सुनाई पडऩे लगा है। कनीना क्षेत्र में 27 जुलाई को हरियाली तीज व 26 जुलाई को सिंधारा पर्व के दृष्टिगत पतंगों की बहार आ गई है। सुबह से शाम अब वो मारा, वो काटा की आवाज सुनाई पड़ती है। बम बम के साथ साथ वो काटा वो मारा का शोर छतों पर सुनाई पड़ता है। युवा वर्ग इस मामले में अधिक सक्रिय है। सर्वाधिक पतंगबाजी हरियाली तीज पर होती है। उधर तीज एवं सिंधारा के दृष्टिगत बाजारों में घेवर की मिठाई की धूम मची हुई है। त्योहार पर घेवर का लेनदेन किया जाता है। शहरी क्षेत्र में पतंगबाजी में तेजी आ गई है। बाजारों में दुकानों पर पतंग एवं डोर ही नजर आती है। युवा हो या बच्चा अपनी छतों पर सुबह शाम पतंगबाजी करता है। जिस दिन स्कूलों की छुट्टी होती है उस दिन तो बच्चे अपने घरों की छतों से नीचे ही नहीं आते हैं। एक ओर सिंधारा पर्व पर घेवर की मिठाई का बोलबाला है वहीं तीज पर्व पर पतंगबाजी का बोलबाला है। यूं तो इस सावन माह में उत्सवों की बहार है किंतु तीज पर्व का अपना ही महत्व है। सावन में आने वाली हरियाली तीज पर सर्वाधिक पतंगबाजी की जाती है तत्पश्चात पतंगबाजी में कमी आ जाती है। सावन माह में इस बार झूले कम ही नजर आते हैं। सावन माह में पुराने समय से झूलों पर झूलने की प्रथा थी किंतु अब वह प्रथा धीमी पड़ गई है। पतंगबाजी में युवा एवं बच्चों की अधिक भागीदारी होती है। एक दुकानदार योगेश कुमार ने बताया कि इस बार पतंगबाजी के लिए युवा वर्ग में इतना उत्साह नहीं है जितना होना चाहिए। कनीना क्षेत्र में बारिश का बोलबाला है। वैसे तो पूरे सावन माह में ही पींग पर झूला जाता है किंतु इस दिन विशेष आकर्षण का केंद्र पींग होती है। जंगलों में नृत्य करते मोर, वषा का शोर तथा पतंग उड़ाने वालों की ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ती है। पर्व खुशियां लेकर आता है। वर्षा अच्छी होने पर तो खुशियां और भी बढ़ जाती हैं। फोटो कैप्शन 10 व 11: पतंग की डोर एवं घेवर की
सीईटी परीक्षा को लेकर सीएम ने डीसी से की वीडियो कांफ्रेंसिंग -परीक्षार्थियों के लिए महोत्सव की तरह होगी सीईटी परीक्षा -अभिभावकों की तरह कार्य करेंगे सभी अधिकारी -पहले दिन जाने वाले परीक्षार्थी 25 से ही उठा सकेंगे फ्री बस सेवा का लाभ ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश में 26 व 27 जुलाई को होने वाली कामन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी-2025) को लेकर राज्य के सभी उपायुक्त तथा संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। जिला महेंद्रगढ़ की तरफ से उपायुक्त डॉ विवेक भारती में इस संबंध में की गई तैयारी की जानकारी दी। इसके बाद उपायुक्त ने जिला के अधिकारियों की बैठक ली तथा निर्देश दिए कि इस परीक्षा को देने के लिए आने वाले परीक्षार्थियों तथा यहां से दूसरे जिले में जाने वाले परीक्षार्थियों के लिए यह महोत्सव की तरह होना चाहिए। जिला प्रशासन के सभी अधिकारी इन बच्चों के अभिभावकों की तरह कार्य करें। डीसी ने बताया कि जिला महेंद्रगढ़ से 70072 परीक्षार्थी चरखी दादरी तथा रेवाड़ी के लिए परीक्षा देने के लिए जाएंगे। इसी प्रकार भिवानी तथा चरखी दादरी से इस जिला में 80148 परीक्षार्थी सीईटी परीक्षा देने के लिए आएंगे। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से पर्याप्त व्यवस्था की गई है। परीक्षार्थियों को ठहरने से लेकर गंतव्य तक पहुंचने के लिए सुचारू और व्यवस्थित योजना बनाई गई है। डीसी ने बताया कि जो परीक्षार्थी पहले दिन परीक्षा देने के लिए जाना चाहता है वह सीईटी का एडमिट कार्ड दिखाकर 25 जुलाई से ही फ्री बस सेवा का लाभ उठा सकता है। उन्होंने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में पुलिस की व्यवस्था रहेगी। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ तथा अतिरिक्त उपायुक्त सुशील कुमार के अलावा सभी एसडीएम तथा अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। रेवाड़ी व चरखी दादरी से अलग सेंटर आया है तो प्रशासन को सूचित करें- जिला महेंद्रगढ़ के जिन परीक्षार्थियों का केंद्र रेवाड़ी व चरखी दादरी से अलग आया है, वो परीक्षार्थी 23 जुलाई तक जिला प्रशासन महेंद्रगढ़ को सूचित करें। ऐसे परीक्षार्थियों के लिए भी जिला प्रशासन द्वारा व्यवस्था की जाएगी। ऐसे परीक्षार्थी लिखित में जिला प्रशासन को अपनी शिकायत दें। जिला प्रशासन ने 23 जुलाई शाम तक यह सूचना मांगी है। सीईटी परीक्षा के दौरान धारा 163 के आदेश जारी-- जिलाधीश डा. विवेक भारती ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पंचकूला की ओर से 26 व 27 जुलाई को होने वाली सीईटी परीक्षा के सुचारु और शांतिपूर्ण संचालन के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। जिलाधीश ने आदेशों में स्पष्ट किया है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से 26 व 27 जुलाई को प्रात: 10 बजे से 11:45 बजे तथा दोपहर 3:15 बजे से सायं 5 बजे तक सीईटी की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के दिन परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना पूर्णत: प्रतिबंधित है। सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित पहचान पत्र के बिना किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सभी फोटोकॉपी मशीनें, मोबाइल फोन, लैपटाप, वाई-फाई और अन्य पर्सनल हाटस्पाट परीक्षा केंद्रों के अंदर व आसपास सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित नहीं किए जा सकते। परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे में लोगों के गैरकानूनी जमावड़े पर प्रतिबंध रहेगा। ये आदेश पुलिसकर्मियों और ड्यूटी पर तैनात अन्य लोक सेवकों पर लागू नहीं होंगे। इन आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और कानून के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीईटी परीक्षा के सफल संचालन एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त--- जिलाधीश डॉ विवेक भारती ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पंचकूला की ओर से 26 व 27 जुलाई को होने वाली ग्रुप-सी सीईटी परीक्षा के सफल संचालन एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए परीक्षा केंद्रों पर सात ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए हैं। नारनौल में स्थित परीक्षा केंद्रों के लिए जिला खेल अधिकारी नरेंद्र कुंडू, डीटीपी गुंजन वर्मा, एचएसआईआईडीसी मैनेजर ज्ञानवीर पूनिया, पंचायती राज विभाग से कार्यकारी अभियंता रमेश कुमार व नगर परिषद से ईओ दीपक गोयल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है। इसी प्रकार महेंद्रगढ़ में स्थित परीक्षा केंद्रों के लिए दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम सीहमा से एसडीओ अमित सोनी, एचवीपीएनएल महेंद्रगढ़ से एसएसई प्रमोद कुमार, पब्लिक हेल्थ डिवीजन नंबर दो नारनौल से कार्यकारी अभियंता जितेंद्र हुड्डा, बाबा खेतानाथ पालिटेक्निक नारनौल से प्रिंसिपल अनिल यादव, डीडीएएच कनीना से एसडीओ बलजीत सिंह, काडा से कार्यकारी अभियंता सोनित राठी तथा नांगल चौधरी से आरएफओ रजनीश कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है। जिले में स्थापित परीक्षा केन्द्रों पर केन्द्र नोडल प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त-- जिलाधीश डा. विवेक भारती ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी 2025) ग्रुप-सी की लिखित परीक्षाएं राज्य के हर जिले में 26 व 27 जुलाई को (प्रात: 10 से 11:45 तथा सांय 03:15 से 05) बजे करवाई जाएगी। जिले में स्थापित प्रत्येक परीक्षा केन्द्र पर केन्द्र नोडल प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। सभी केन्द्र नोडल प्रशासनिक अधिकारी परीक्षा से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि परीक्षा केन्द्रों पर लगे बायोमैट्रिक डिवाइस, जैमर इत्यादी उपकरण सही तरीके से कार्य कर रहे या नहीं इसके अतिरिक्त परीक्षा केन्द्रों पर किसी प्रकार की बाहरी गतिविधि न होने देना सुनिश्चित करें। लघु सचिवालय में स्थापित किया कंट्रोल रूम-- डीसी डा. विवेक भारती ने बताया कि ग्रुप-सी सीईटी परीक्षा के लिए जिला प्रशासन की ओर से लघु सचिवालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।परीक्षाओं के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी तथा सहायता के लिए नागरिक 01282-256960 पर डायल कर सकते हैं। यहां पर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सीईटी परीक्षार्थियों के लिए हरियाणा सरकार की अभिनव पहल- हरियाणा सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सीईटी-2025 की परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए सीइटी ट्रैवलÓ नामक एक अत्याधुनिक मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया गया है, जिसके माध्यम से वे अपनी परीक्षा यात्रा के लिए अग्रिम रूप से अपना स्लाट बुक कर सकेंगे। यह पहल न केवल अभ्यर्थियों की यात्रा को सुगम बनाएगी बल्कि उन्हें तनाव-मुक्त और सुरक्षित परीक्षा अनुभव प्रदान करने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी। उपायुक्त डा. विवेक भारती ने जानकारी देते हुए बताया कि इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों अभ्यर्थियों को यात्रा संबंधी चुनौतियों का सामना न करना पड़े इस बात को ध्यान में रखते हुए ही ये ऐप की अवधारणा को साकार किया गया है। डा. भारती ने आगे कहा कि यह सिर्फ एक यात्रा बुकिंग ऐप नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने वाला एक व्यापक समाधान है। नि:शुल्क बस यात्रा की सुविधा प्रदान करके सरकार ने अभ्यर्थियों के वित्तीय बोझ को कम करने का प्रयास किया है, ताकि वे अपनी पूरी एकाग्रता परीक्षा पर केंद्रित कर सकें। उपायुक्त डॉ. भारती ने सभी सीईटी-2025 अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपनी परीक्षा यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए तुरंत 'सीइटी ट्रैवलÓ ऐप डाउनलोड करें और अपनी यात्रा स्लाट अग्रिम रूप से बुक करें। यह ऐप गूगल प्ले स्टोरपर उपलब्ध है और इसे सीइटी2025.आनबोर्ड.इन वेबसाइट के माध्यम से भी एक्सेस किया जा सकता है।
आयुष्मान भारत मोबाइल है पर जबरन रजिस्ट्रेशन के आदेश पर रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा ने उठाए सवाल- धर्मपाल शर्मा ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा संबंधित अखिल भारतीय राज सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के राज्य प्रेस सचिव धर्मपाल शर्मा ने कहा है कि रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा (संबद्ध - अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन) ने हरियाणा सरकार के कोष एवं लेखा विभाग द्वारा 14 जुलाई, 2025 को जारी आदेश संख्या टीए-एचआर (5 टी) 2025/4518 पर गहरी आपत्ति जताई है, जिसमें सभी नियमित कर्मचारी, पेंशनर्स एवं उनके परिवारजनों को 31 जुलाई, 2025 तक आयुष्मान भारत मोबाइल ऐप पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा ने हितधारकों (कर्मचारी एवं पेंशनर्स) से बातचीत किए बिना एकतरफा तरीके से उक्त पत्र जारी करने की भी आलोचना की और 31 जुलाई से पहले संघ के शिष्टमंडल को बातचीत करने के लिए आमंत्रित करने की मांग की। ताकि कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में उत्पन्न हुई अनिश्चिता एवं बेचैनी दूर हो सकें।धर्मपाल शर्मा ने बताया किठ्ठ रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष वजीर सिंह,महासचिव रतन कुमार जिंदल व मुख्य सलाहकार सुभाष लांबा ने इस आदेश की वैधता व उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए महानिदेशक, कोष एवं लेखा विभाग, हरियाणा को एक पत्र भेजकर तत्काल कुछ बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा ने डीजी को लिखे पत्र के माध्यम से उठाए गए प्रमुख प्रश्न इस प्रकार हैं: 1. क्या आयुष्मान भारत कार्ड की अधिकतम सीमा केवल 5 लाख है ? 2. वर्तमान में कर्मचारियों व पेंशनर्स को बिना किसी सीमा के मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा प्राप्त है, तो फिर सीमित सुविधा वाले कार्ड की आवश्यकता क्यों ? 3. सभी कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को ऐप पर पंजीकरण करवाने के पीछे उद्देश्य क्या है ? 4. क्या यह आदेश सरकार का है या विभाग का आंतरिक निर्णय ? 5. कई पैनल अस्पताल आयुष्मान कार्ड को नहीं मानते और कई इलाज इसके तहत शामिल नहीं होते, जैसे आंखों का ऑपरेशन आदि — तो ऐसी स्थिति में इस योजना का क्या लाभ ? 6. आयुष्मान भारत कार्ड 70 साल आयु में बन सकते हैं, लेकिन अधिकांश कर्मचारी और पेंशनरों की आयु 70 से कम है। इस स्थिति में क्या होगा ? 7. आयुष्मान भारत कार्ड में इलाज की अधिकतम सीमा क्रास करने के बाद खर्च होने वाली राशि का भुगतान कौन करेंगे ? रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के सलाहकार सुभाष लांबा ने मांग की है कि उक्त आदेश के पीछे की मंशा को स्पष्ट किया जाए और तब तक पंजीकरण की बाध्यता को तुरंत रोका जाए। इसके अतिरिक्त प्रतिनिधिमंडल से चर्चा का समय भी जल्द तय किया जाए। रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान वजीर सिंह ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी एवं पेंशनर्स के हितों से जुड़ा कोई भी निर्णय बिना वार्ता और स्पष्ट जानकारी के थोपना अस्वीकार्य है। उन्होंने बताया कि अगर सरकार ने संघ के पत्र को गंभीरता से नहीं लिया तो रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा आंदोलन करने पर मजबूर होगा।
यूरो स्कूल में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का हुआ सफल आयोजन ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक विशेष पहचान बनाने वाले यूरो इंटरनेशनल स्कूल के नाम से कौन परिचित नहीं है। आज यूरो स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित कर रहा है। अपनी इसी गरिमा को बरकरार रखने के लिए स्कूल समय-समय पर विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन करता रहता है। इसी कड़ी में आज स्कूल प्रांगण में इंटर स्कूल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। य़ह प्रतियोगिता यूरो स्कूल की शाखाओं- रेवाड़ी, धारूहेड़, भिवाड़ी और कनीना के मध्य हुई। इस प्रतियोगिता का शुभारंभ यूरो ग्रुप आफ स्कूल के चेयरमैन सत्यवीर यादव, निदेशक नितिन यादव, एकेडमिक डीन मीनू दूबे, प्राचार्य सुनील यादव, उप-प्राचार्या संचू यादव ने मां सरस्वती की प्रतिमूर्ति के चरणों में दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस प्रतियोगिताओं में काव्य-पाठ, निबंध लेखन, काव्य-रचना, कहानी सुनाना, व्यक्तित्व विश्लेषण, आशुभाषण व वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सभी प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी बुद्धि-कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में शिरकत करने आए अभिभावकों ने इन प्रतिभावान विद्यार्थियों की तहेदिल से प्रशंसा की। इन प्रतियोगिताओं में अंजू यादव, ज्योति, सुनील कुमार, हरिनिवास, महावीर प्रसाद, कृष्ण कुमार, बिट्टू ने निर्णायक मंडल के रूप में अपनी भूमिका निभाई। निर्णायक मंडल ने अपने नीर क्षीर विवेक से परिणाम घोषित किया। स्कूल प्रबंधन द्वारा इन प्रतियोगिताओं में विजयी विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न व प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। इस शुभावसर पर यूरो ग्रुप आफ स्कूल के संस्थापक सत्यवीर यादव ने विजयी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई दी और कहा कि हमारा ध्येय केवल किताबी शिक्षा ही नहीं बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। इसी कड़ी में प्राचार्य सुनील यादव ने कार्यक्रम में भाग लेने आए, प्रतिभागियों, अभिभावकों और निर्णायक मंड़ल का स्वागत करते हुए विजयी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई दी और साथ ही कहा कि आज के इस प्रतियोगिक समय में बच्चों में एक बेहतर शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगिता की भावना का होना भी जरूरी है। हर एक विद्यार्थी में एक प्रतिभा छुपी हुई होती है। जिसे थोड़े ही प्रयास और प्रोत्साहन से निखारा जा सकता है। साथ ही उन्होंने इन प्रतियोगिताओं को सफल बनाने का श्रेय उपप्राचार्या संजू यादव, का-र्डिनेटर रविंद्र यादव, ऋतु तंवर, तन्नू गुप्ता, सुमन यादव, गतिविधि प्रभारी मधु यादव को दिया। फोटो कैप्शन 09: अव्वल रहे विद्यार्थी।
कांवड़ लाकर नाम कमाया है सुमेर सिंह चेयरमैन ने --44 कांवड़ शिवालय पर कर दी अर्पित ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। कनीना के शिवभक्त सुमेर सिंह चेयरमैन 70 वर्षीय ने 44 कांवड़ शिवालय पर अर्पित कर दी हैं। यह जुनून अभी भी जारी है। जिला महेंद्रगढ़ के कनीना के कितने ही भक्त कांवर हरिद्वार से लेकर उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश को पार करते हुए हरियाणा में लाकर बाघेश्वर धाम पर अर्पित करते हैं। कनीना के भरपूर सिंह निर्बाण ने 16 कांवर लाकर शिव के प्रति इतनी आस्था जागी कि 21 फुट ऊंची प्रतिमा वाला शिवालय ही बनवा डाला, दखोरा के अनिल कुमार कमांडो ने 26 कांवड़ एवं 12 खाटू श्याम ध्वज अर्पित किए वहीं कनीना के एक शरीर से कमजोर सुमेर सिंह चेयरमैन ने अब तक 44 कांवर अर्पित करके रिकार्ड कायम किया हुआ है। किसान कापरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे सुमेर सिंह चेयरमैन दल बल संग हरिद्वार रवाना होते हैं। हरिद्वार से कनीना के बाघेश्वर धाम तक की दूरी करीब 400 किमी है। इस दूरी को पांच से छह दिनों में पूरी करके कंधे पर कांवड़ धारण करके कनीना होते हुए बाघोत जाकर प्राचीन शिवालय पर अर्पित करते हैं। सुमेर सिंह जिनकी उम्र 70 वर्ष हैं वजन महज 50 किग्रा है किंतु वर्ष 1981 से लगातार प्रतिवर्ष सावन माह में कांवर लाकर अर्पित करते आ रहे हैं। इस वर्ष 23 जुलाई को शिवरात्रि का कांवड़ मेला लग रहा है। वे अब तक चार खड़ी, दो बैकुंठी तथा 37 झूला कांवड़ ला चुके हैं। वे डाक कांवर में कतई विश्वास नहीं करते हैं और डाक कांवड़ को बेहतर नहीं मानते हैं। पांच से सात दिनों में 360 किमी दूरी तय करके वे कांवड़ को शिवालय पर अर्पित करते हैं। सुमेर सिंह ने बताया कि वे नीलकंठ, मंशादेवी, ऋषिकेश आदि धार्मिक स्थानों पर घूमते कांवर हरिद्वार के गंगाघाट से उठाकर अपने गंतव्य मार्ग पर रवाना होते हैं और महज एक सप्ताह से कम समय में 400 किमी दूरी तय करके शिवालय पर अर्पित कर देते हैं। सुमेर सिंह ने बताया कि अब आस्था भी बढ़ गई है वहीं भक्तों के लिए पड़ाव भी अधिक मिलने लगे हैं। कभी हरिद्वार से शामली होकर कांवड़ लाई जाती थी किंतु अब हरिद्वार-रुड़की- पुरकाजी-मुजफ्फरनगर-शाहपुर-बुढ़ाना-बड़ौत- खरखौदा-सांपला -छारा-झज्जर-कोसली-नाहड़- कनीना-बाघोत का सफर तय करना होता है। सुमेर सिंह प्रसन्न हैं और वे अपने साथियों सहित अगली कांवड़ लाने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि जब तक वे जीते रहेंगे तब तक कांवर लाते रहेंगे। वे सादी चप्पलों में ही कांवर लाते रहे हैं और लाते रहेंगे। कैसी जागी आस्था- सुमेर सिंह का कहना है कि जब वर्ष 1981 में वे फोटो स्टुडियो की दुकान चलाते थे तो शिवालय की फोटो एवं हरिद्वार की फोटो देखने व खिंचने का मौका मिलता था। भक्तों को हरिद्वार जाते आते देखने से ही उनके मन में इच्छा जागृत हुई कि क्यों न एक कांवड़ लाकर देखी जाए और वे कांवर ले आए। तत्पश्चात उन्होंने कभी मुड़कर ही नहीं देखा और जब सावन माह में मेला आता है तो वे कांवर लाने के लिए तैयार हो जाते हैं। अपने साथियों सहित कांवड़ लाते हैं जिनकी संख्या चार या पांच होती है। शिव को पूजने वाले सुमेर सिंह अति आस्थावान हैं। पहली कांवर लाए थे उस वक्त उनकी उम्र महज 27 वर्ष ही थी। ग्रेजुएट सुमेर सिंह यूं तो नेता बतौर भी जाने जाते हैं वहीं मारुति के बेहतर चालक होने के कारण भी याद किए जाते हैं किंतु कांवड़ लाने वालों में उनका नाम सर्वोपरि है। कम समय में कांवड़ लाने का रिकार्ड- वैसे तो कांवर लेकर करीब 350 किमी दूरी अलग अलग समय में तय करके भक्त गंतव्य स्थान तक पहुंचते हैं किंतु सुमेर सिंह ऐेसे भक्त हैं जिनकी टोली महज पांच दिनों में ही यह दूरी तय कर लेती है। उन्होंने बताया कि वे धूप में कम चलते हैं और जल्दी सुबह अधिक दूरी तय करते हैं। फोटो कैप्शन 03: कनीना क्षेत्र में सर्वाधिक कांवड़ लाने वाले सुमेर सिंह चेयरमैन
बाघेश्वर धाम बाघोत जहां मन्नत होती हैं पूरी -23 जुलाई शिवरात्रि का लगेगा मेला ******************************************************** ************************************************************** ******************************************************** कनीना की आवाज। उपमंडल कनीना के गांव बाघोत में 23 जुलाई शिवरात्रि मेला लगने जा रहा है। वर्ष में यहां दो बार मेला लगता है। सावन माह में शिवरात्रि के दिन सबसे अधिक कावड़ चढ़ती हैं। महाशिवरात्रि पर विशेषकर मेला लगता है। मंदिर एवं स्वयंभू शिवलिंग का पौराणिक महत्व एवं इतिहास समेटे हुए है। भारी भीड़ यहां दर्शनार्थ के लिए आते हैं। बाघोत पहुंचने के लिए कनीना-चरखी दादरी मार्ग पर 15 किमी दूरी पर स्थित बाघोत गांव में मुख्य सड़क मार्ग के पास ही शिवालय स्थित है। चरखी दादरी से भी शिवालय पहुंचा जा सकता है। बाघोत का मंदिर करीब 1700 वर्ष पुराना है। इस शिवालय के पास खड़े कदंब के पेड़, तालाब एवं स्वयंभू शिवलिंग ऋषि मुनियों की तप स्थली होने की याद दिलाते हैं। मंदिर निर्माण से पहले भगवान् श्रीराम के पूर्वजों ने भी यहां तप किया था। राजा दलीप ने किया था तप- शिवरात्रि पर हजारों कावड़ चढ़ाई जाती हैं। तत्कालीन समय में राजा दलीप को शिव ने बाघ के रूप में दर्शन दिए थे जिसके चलते गांव का मंदिर बाघेश्वर धाम कहलाया। शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था। शिवालय का पुनरुद्धार भी किया जा चुका है। व्यापक सुरक्षा- सुरक्षा के प्रबंध किए गये हैं। कणाण के महाराज कल्याण सिंह रैबारी द्वारा निर्मित शिवालय पर ऊंटों की कतार 1990 के दशक तक बनी हुई थी किंतु बाद में इस शिवालय का जीर्णोद्धार हुआ तो उस पर ऊंटों की कतार के चित्र नहीं बने हैं। ऊंटों की कतार की तस्वीर बनाने के पीछे महाराजा के ऊंटों के सोने चांदी को लूटने की घटना एवं शिव भोले के दृष्टांत के बाद पुत्र प्राप्ति की याद को ताजा करते थे। ये तस्वीर शिवालय का पूरा हाल वर्णित करती थी। शिवालय एवं समीप मंदिर-बाघेश्वर धाम का मुख पूर्व दिशा की ओर है और सामने एक विशाल तड़ाग है जिसमें कांवडिय़ों द्वारा लाया गया गंगाजल जो शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है बहकर इसी तड़ाग में चला जाता है। इसलिए यह जोहड़ भी पवित्र माना जाता है। इस शिवालय में शिवलिंग स्वयं-भू है जो प्राचीन इतिहास की याद दिलाता है। स्वंभू शिवलिंग-- भक्तजन जो स्वयंभू शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहते हैं वे बाघेश्वरी धाम आते हैं उन्हें पश्चिम दिशा में मंदिर से करीब 200 गज दूरी पर कतार में खड़ा होना होता है। कतार दक्षिण को मुड़कर पश्चिम की ओर जाने पर शिवलिंग के दर्शन होते हैं। बाघेश्वरी धाम पर जाने वाले भक्तजन अपने साध गंगाजल, पेठा, बेलपत्र के पत्र, नारियल, केला, फल एवं फूल ले जाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन फाल्गुन माह की कृष्ण त्रयोदशी के अलावा दूसरी बार सावन माह की कृष्ण त्रयोदशी को बड़ा मेला लगता है। पुलिस का व्यापक प्रबंध होता है वहीं दवा मुफ्त उपलब्ध होती हैं एवं भंडारे लगते हैं। अपार भीड़ विशेषकर महिलाएं व्रत धारण करके यहां जल अर्पित करने आते हैं। हरिद्वार से विभिन्न रास्तों पर भी बाघोत के इस धाम का नाम वर्णित है।बाघेश्वर धाम जहां बनते हैं बिगड़े काम एक सप्ताह पहले से लगती हैं कांवड़ चढऩे- शिवरात्रि के दिन यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है। हरिद्वार और नीलकंठ से बम-बम के जयघोष में श्रद्धालु कावड़ उठाकर लाते हैं तथा प्रांत भर में ही नहीं अपितु देशभर में विख्यात बाघोत शिवालय पर अर्पित करते हैं। यूं तो यहां वर्षभर श्रद्धालु आते हैं और छोटे-छोटे मेले लगते हैं किंतु श्रावण के सोमवार को भारी भीड़ जुटती है। देशी घी का भंडारा चलता है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाओं के अतिरिक्त अबोहर कावड़ संघ, कनीना सेवा समिति तथा महाबीर सत्संग मंडल सुविधाएं जुटाते हैं। श्रद्धालु यहां स्थित जोहड़ पर स्नान करके शिवलिंग के दर्शन करके अपने को धन्य समझते हैं। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से जो कुछ मन्नत मांगी जाती है वह अवश्य पूरी हो जाती है। इतिहास-- एक किवदंति के अनुसार बाघोत का पुराना नाम हरयेक वन था। यहां दधि ऋषि के पुत्र पीपलाद ने भी तप किया। उनका आश्रम भी तो यहीं था। उनके कुल में राजा दलीप के कोई संतान नहीं थी। वे दु:खी थे और दुखी मन से अपने कुलगुरु वशिष्ठ के पास गए। उन्होंने अपना पूरा दु:ख का वृतांत मुनिवर को सुनाया। वशिष्ठ ने उन्हें पीपलाद ऋषि के आश्रम में नंदिनी नामक गाय एवं कपिला नाम की बछिया निराहार रहकर चराने का आदेश दे दिया। राजा ने गाय व बछिया को निराहार रहकर चराते हुए जब लंबा अर्सा बीत गया तो एक दिन भगवान् भोलेनाथ ने बाघ का रूप बनाकर राजा की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। बाघ ने बछिया पर धावा बोल दिया। जब राजा की नजर बाघ पर पड़ी तो उन्होंने बाघ से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि वे उन्हें खा ले क्योंकि यदि वे बछिया को खाने देते हैं तो गाय का श्राप लगेगा और गाय को खाने देते हैं तो तप पूरा नहीं हो पाएगा। ऐसे में उन्होंने अपने आपको बाघ के सामने पटक दिया। कुछ समय पश्चात जब उन्होंने सिर उठाकर देखा तो बाघ के स्थान पर शिवभोले खड़े थे। बाघ के कारण ही गांव का नाम बाघोत पड़ा जो आज कणाणा के महाराज ने कराया था निर्माण- बाघोत स्थित शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था। एक बार राजा के ऊंटों की कतार हरयेक वन से गुजर रही थी जिन पर सोना-चांदी लदा था। हरयेक वन में लुटेरों ने ऊंटों को लूट लिया और वहीं छुप गए। ऊंटों के सरदार को घायल कर दिया। सरदार स्वयंभू शिवलिंग के पास ही पड़ा था। सरदार ने ऊंटों के लूटने की सूचना राजा तक पहुंचाई। इसी बीच शिवलिंग से सरदार को दृष्टïांत मिला कि लुटेरे सभी इसी वन प्रदेश में ही छुपे हुए हैं। राजा के सरदार के पास आने पर सरदार ने राजा को शिवभोले का दृष्टïांत सुनाया तो समूचे वन प्रदेश को सैनिकों द्वारा घिरवा दिया। सैनिकों ने लुटेरों को पकड़ लिया और धन-दौलत वापस मिल गया। महाराज ने खुश होकर स्वयंभू शिवलिंग पर शिवालय का निर्माण करवाया। स्वयं गंगाजल लाकर शिवलिंग का अभिषेक किया। पुत्र प्राप्ति के लिए भी जाना जाता है- बाघोत स्थित शिवालय उन भक्तों के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है जिनके कोई संतान नहीं होती है। मेले में आकर दंपत्ति अपने हाथों से एक विशाल वटवृक्ष को कच्चा धागा बांधकर सुंदर संतान होने की कामना करता है। जब संतान हो जाती है तो यहां आकर ही धागा खोलता है। यही कारण है कि शिवलिंग के पास ही खड़ा एक वटवृक्ष कच्चे धागों से लदा मिलता है। डाक कांवड़ की भीड़-- बाघोत गांव का का अब भव्य द्वार बना दिया गया है। महंत रोशनपुरी लंबे समय से बाघेश्वरधाम के महंत हैं। विभिन्न रूपों में कांवड़ अर्पित की जाती हैं किंतु डाक कांवड़ अर्पित करने वालों की भीड़ अधिक होती है। नृत्य के संग अर्पित की जाती हैं कांवड़-- बैंड, नृत्य कें संग कांवर अर्पित की जा रही हैं शिवरात्रि शिवरात्रि तक बाघेश्वरी धाम पर कांवड़ चढ़ाने का सिलसिला अनवरत चलता रहेगा। इस दौरान कांवर लाने वाले भक्त अपनी कांवड़ को विधि विधान से पूजा करवाकर उन्हें बैंड बाजों पर थिरकते हुए शिवालय तक पहुंच रहे हैं। और तो और महिलाएं भी नृत्य करते हुए आगे बढ़ती देखी गई। जिस प्रकार शादी दौरान नृत्य किया जाता है ठीक उसी प्रकार कांवर अर्पित करने का सिलसिला जारी है। भारी संख्या में कांवड़ अर्पित की जाती है। सेवा में जुटे हैं सेवादल- कांवर लाकर अर्पित करने वाले तथा शिवालय के दर्शन करने वाले भक्तों की सेवा के लिए विभिन्न दल सेवा कर रहे हैं। पानी पिलाना तथा मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी सेवादल अहं भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस बल को दौरा करते हुए देखे गए। शिवालय पर व्यवस्था- स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन करने के लिए जहां मंदिर के पास बेहतर व्यवस्था बनी हुई है। करीब 500 गज की दूरी तक लोहे की जालियां लगाकर कतारबद्ध चलने की व्यवस्था की गई है। डाक कांवर लाने वालों के लिए अलग से व्यवस्था है जबकि अन्य कांवरियों के लिए अलग से व्यवस्था नहीं हैं। खड़ी, बैठी, डाक कांवरों की भरमार है। शिवालय पर भारी शोर- बाघेश्वरी धाम पर विशेषकर डाक कांवड़ लाने वालों का भारी शोर सुनाई पड़ रहा है। इस बार डाक कांवड़ों की संख्या अधिक है। सीटी बजाते हुए, बाइक एवं वाहनों को दौड़ाते हुए तथा सड़क पर हंगामा करते हुए डाक कांवड़ लाई जा रही हैं। एक डाक कांवड़ के साथ 40 तक युवा हैं जो वाहन चालकों के लिए समस्या बने हुए हैं। पेट के बल, बैठी, खड़ी, झूला, टोकना कांवड़ आदि भक्तजन लाकर अर्पित कर रहे हैं। शिवालय पर भारी शोर सुनाई पड़ रहा है। दर्शनों के लिए प्यासे- शिवालय में भारी संख्या में नेता, संत, बच्चे, बूढ़े, महिलाएं, युवा एवं सामान्य जन स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन कर रहे हैं और गंगाजल से अभिषेक करके अपने को धन्य समझ रहे हैं। सभी कावडिय़ों के साथ बरती जाए समानता- लेकिन शिव भक्तों में काफी रोष है कि डाक कवडिय़ों को अहमियत दी जाती है जबकि 350 किलोमीटर दूरी तय करके अपनी खुद की कांवड़ लाने वालों को सामान्य लाइन में खड़े रहना पड़ता है। इसका कावडिय़ों में रोष है। कावडिय़े सुमेर सिंह, मिंटू मनीष, दिनेश सुरेश आदि ने बताया कि उनके साथ अन्याय होता है, वे 350 किलोमीटर दूरी तय करके जब कांवड़ अर्पित करने जाते हैं तो उन्हें सामान्य लाइन में धकेल दिया जाता है ,घंटों परेशान होते हैं ऐसे में उन्होंने मांग की है कि सभी कांवडिय़ों को बराबर मानकर उन्हें अलग से लाइन में जाने की अनुमति दी जाए। हरिद्वार तक तांता- देवनगरी हरिद्वार से बाघेश्वर धाम तक शिव भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है। एक ओर जहां शिवालयों में कावड़ अर्पित करने का सिलसिला विभिन्न गांवों में शुरू हो गया है वहीं प्राचीन शिवालयों पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। भक्तजन खड़ी, बैकुंठी, टोकना झूला, थैला तथा डाक कावड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। जहां उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश में पुलिस का व्यापक प्रबंध
Monday, July 21, 2025
रसूलपुर में संपन्न हुआ यज्ञ -एकादशी का यज्ञ था ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। आर्य समाज मंदिर रसूलपुर में एक वैदिक यज्ञ संपन्न हुआ। इस मौके पर सतीश आर्य , धर्मपाल आर्य एवं गांव की माताएं, बहनों के बीच श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी को यह यज्ञ पूर्णरूप से संपन्न हुआ। मधु, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा से पीएचडी कर रही है, जो लगातार दो महीने से योग अभ्यास कक्षा आर्य समाज मंदिर में चला रही है। सतीश आर्य एवं धर्मपाल आर्य ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की एवं यज्ञ करवाने के साथ साथ रामायण के क्षणों को याद किया, महिलाओं को योगाभ्यास करने के लिए उत्साहित किया। साथ ही प्रतिदिन योगाभ्यास करने का प्रण लिवाया। योग हमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रखता है। यज्ञ- सांसारिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से लाभकारी सिद्ध हुआ है, इसलिए प्रत्येक घर में प्रतिदिन यज्ञ होना चाहिए, इससे आसपास का वातावरण साफ व सुंदर होता है। साथ ही वैदिक यज्ञ सकारात्मक ऊर्जा को फैलाता है। अंत में बहन मधु ने सभी का धन्यवाद किया और ओम की ध्वनि से यज्ञ संपन्न हुआ। फोटो कैप्शन 05: रसूलपुर में यज्ञ करते हुए।
लेखक ने की अपनी कावड़ बाघेश्वर धाम पर की अर्पित - 2010 से लगातार ला रहे हैं कांवड़ ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव लेखक ने अपनी कावड़ बाघेश्वर धाम पर सुबह सवेरे 2 बजे अर्पित कर दी। 12 जुलाई को हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे तथा नीलकंठ, ऋषिकेश आदि पर पहुंचे तथा वहां भी अअपनी कांवड़ अर्पित की। वही हरिद्वार से 14 जुलाई शाम करीब 3:15 बजे कावड़ उठाई थी तथा लगातार चलते हुए 19 जुलाई को बाघेश्वर धाम के करीब पहुंच गए जहां 20 जुलाई को बहाला में आराम किया। जहां सत्यवान मिस्त्री/सत्य जो कनीना में बेहतरीन मिस्त्री हैं, ने बेहतर सेवा प्रदान की। उनकी सेवा ससे सभी गदगद हो गये। 20 जुलाई को रात्रि 11 बजे बहाला से बाघोत की ओर रवाना हुए और 2 बजे लंबी कतार और भीड़ में अपनी कावड़ अर्पित कर दी। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में भारी लूट खसोट चलती है जहां सभी नकली पानी एवं पेय पदार्थ मिलते हैं, वहीं फोन चार्ज करने के भी 30 रुपये लेते हैं। जहां खाने और ठहरने के तो अधिक चार्ज है वहीं भक्तों को जमकर लूटा जाता है। उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे सुधार होता जा रहा है। मुजफ्फरनगर तक कुछ दिक्कत है किंतु उसके बाद कैंप शुरू हो जाते हैं। यहां तक की योगी महाराज में अच्छे प्रबंधन करवाये हैं। हरियाणा सचमुच स्वर्ग के समान है जहां हर जगह शिविरों में भक्तों का आदर सम्मान किया जाता है। बिजरोल में सुमित्रा नामक महिला शिविर लंबे समय से चला रही है भगत करती है। जहां जगह-जगह शिविर लगे हुए हैं। भक्तों की सेवा विभिन्न खाद्य पदार्थ, दवाई औषधियां आदि से की जाती है। उल्लेखनीय है कि लेखक होशियार सिंह ने 2010 में कावड़ अर्पित करनी शुरू की थी और लगातार कावड़ अर्पित कर रहे हैं। जहां कोरोना काल में नीलकंठ पर कावड़ अर्पित की थी वहीं 2010 से ही लगातार खाटू श्याम के लिए निशान यात्रा की जा रही हैं और वहां जाकर निशान अर्पित करते हैं।वही 5 वर्षों से कनीना से 30 किलोमीटर दूर हुडिय़ा जैतपुर में भी निशान अर्पित कर चुके हैं। वहीं हर वर्ष अनेकों बार यात्रा करते हैं। इस बार कावड़ अर्पित करने का उद्देश्य गहन था जो शिव भोले के चरणों में जाकर मन्नत मांगी है। वह पूर्ण होगी ऐसा दृढ विश्वास है।
जानकारी झोपड़पट्टी से आलीशान कोठियों का सफर ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। यूं तो हर चीज वक्त के अनुसार बदलती रहती है किंतु यदि इंसान के जीवन में आज से कोई 50 साल पहले की जिंदगी को देखे तो सचमुच स्वर्णिम जीवन होता था और उस वक्त मोबाइल,टीवी आदि ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं होते थे। इंसान बैठकर आपस में सुख दुख की बातें करते थे। झोपड़पट्टी का जमाना था। झुंडे की छांद होती थी। उसे वक्त झुंडे को काटकर पुला बनाया जाता था और पुलों से बेहतर दर्जे की छाांद/झोपड़पट्टी बनाई जाती थी। झोपड़पट्टी बनाने वाले एक्सपर्ट होते थे जो किसी जगह झोपड़पट्टी बनाते वहीं पर ठहरते, खाना खाते और बेहतरीन खाने की मांग करते थे। घी शक्कर जरूर होता था, चाहे घर में किसी के घी शक्कर हो या ना हो किंतु उनको घी- शक्कर सहित खाना दिया जाता था। उसे समय इंसान के साथ पक्षी वर्ग था। विभिन्न प्रकार की चिडिय़ा,मोडी झोपड़पट्टियों में रहती थी और जब बारिश का मौसम होता तो बहुत मजा आता था। ऐसा एसी बनता जो शायद उसके सामने आजकल के एसी भी नहीं होते। चारों तरफ से ठंडी-ठंडी हवा बहती जो मन को उद्वेलित कर देती। लोग खुशी-खुशी बारिश का आनंद लेते थे। ये झोपड़पट्टी आज किसी बड़े होटल में जरूर देखने को मिल सकती है, वरना गरीब से गरीब व्यक्ति के घर में भी झोपड़पट्टी नहीं मिलेगी। तत्पश्चात ऐसा वक्त आया की कच्ची ईंटों के घर बनाए जाने लगे और कच्ची ईंटों के घर झोपड़पट्टी से कुछ अधिक विकसित होते थे। यहां तक कि कच्ची ईंटों की भी अटारी बनाई जाती थी जहां नई नवेली दुल्हनिया आराम करती थी। जीवन बहुत सुखमय होता था। परंतु बरसात के मौसम में ऐसे घरों के गिरने की संभावना होती थी और अनेकों कष्ट सहने पड़ते थे। सुख की नींद बारिश में नहीं ले पाते थे। झोपड़पट्टी की बजाय ये अधिक विकसित थे किंतु बरसात के लिहाज से ये कमजोर होते थे। कच्ची दीवार बारिश में गिर जाती थी। इसके बाद आया पक्की ईंटों के बने घरों का। जो कच्ची ईंटों की बजाए अधिक विकसित होते थे। पक्की ईंटें अपने खेत में बनाई जाती थी। ईंटें बनाकर भट्टी लगाई जाती थी और इस भट्टी में ईंट को पकाया जाता था। गुड़ का प्रसाद आदि बताकर ये ईंटें पकाई जाती थी और कुछ दिनों के बाद इन ईंटों को निकाल कर घर बनाए जाने लगे किंतु अमीर तबके के लोग ही इन घरों का प्रयोग करते थे। प्रत्येक गांव में कुछ अमीर लोग होते थे। वैसे घर बनाने में सीमेंट का बोलबाला नहीं होता था और गारा से ईंटों को जोड़ा जाता था। इसके बाद तो दिनों दिन सुधार होता चला गया। चूना पीसकर दीवार बनाई जाने लगी। कोड़ी आदि से पुताई की जाती थी। घरड़ द्वारा चूने की पिसाई करके दीवारों में प्रयोग किया जाता था। उसके बाद सीमेंट का युग आ गया और आजकल सीमेंट से बेहतर पदार्थों से घर बनने लगे हैं। जहां पहले दिन के समय भी जाने में लोग कतराते थे कि कहीं भूत न हो। वहां पर आज आलीशान कोठियां बनी हुई हैं। अब तो वक्त आ गया है कि हर घर लगभग पक्का हो गया है। वर्तमान आलीशान कोठियां पहले की कोठियों से ज्यादा विकसित होती हैं। धीरे-धीरे और भी अनेकों प्रकार के सुधार हुये हैं। अनेकों प्रकार की ईट मसाले तथा दीवारों पर चिपकाई जाने वाली टाइल, न जाने कितने सुधार होते चले गए। टीवी, मोबाइल आदि बढ़ते चले गए, आधुनिक सुविधाएं बढ़ गई किंतु वह चैन आराम नहीं है जो झोपड़पट्टियों में मिलता था। आज भी बुजुर्ग उन दोनों को याद कर रोनी सूरत बना लेते हैं। काश वो दिन फिर लौट आए किंतु गुजरा हुआ जमाना फिर से लौटकर नहीं आता। अब तो लोग यही कहेंगे की जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता में जलकर।
चोर साहब के कारनामे-20 पाप का घड़ा जल्द ही भरता है- संत ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। कनीना के लेखक होशियार सिंह के प्लाट से चोर साहब ने समय पर कृषि उपकरण, ईंट, गमले तथा सामान चोरी कर लिया है। एक बार तो उसे रंगे हाथ पकड़ भी लिया। किंतु चोर साहब बाज नहीं आए। इस संबंध में एक संत बहुत अच्छी बात बता रहे थे। संत लालदास ने बताया कि पाप का घड़ा बहुत जल्द बरता है। किसी के यहां चोरी-जारी करने वाला अधिक दिनों का मेहमान नहीं होता है। चोरी करने से बेहतर होता है डूब कर मर जाना। वास्तव में संत का कहना है कि चाहे हमें खाना मिले या नहीं मिले किसी भी हालत में जीना पड़े किंतु चोरी करना एक कलंक कहलाता है। इसे किसी भी सूरत में नहीं करना चाहिए। लालदास बता रहे थे कि चोर चाहे लोगों की नजरों से बच जाए किंतु प्रभु की नजरों से नहीं बच पाएगा। ऐसे व्यक्ति दूसरों को कष्ट देते हैं, दूसरे का सामान चोरी करते हैं, ऐसे व्यक्ति अधिक दिनों की मेहमान नहीं होते। उन्हें समाज में कलंक कहा जाता है और जब संसार से जाते हैं तो लोग खुशी मनाते हैं क्योंकि राक्षस प्रवृत्ति के लोग जब जग से जाते हैं तो खुशियां मनाना स्वाभाविक है। संत का कहना है कि हालत में बड़े से बड़े कष्ट आए तो भी चोरी नहीं करनी चाहिए। संत का कहना है कि इंसान चाहे परिस्थितियों से घिर जाए, खाने को बहुत दिन नहीं मिले तो भी चोरी नहीं करनी चाहिए। चोरी एक ऐसे संस्कार है जो पूर्वजों से मिलता है और अगर किसी के पूर्वज चोर होते हैं तो उनके बच्चों में भी यह संस्कार जरूर पहुंचते हैं।
सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में रही भीड़ -बाघोत में चढ़ी सैकड़ों कांवड़ ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में भारी भीड़ रही। सावन माह 9 अगस्त रक्षा बंधन पर संपन्न हो जाएगा। बाघेश्वर धाम पर छोटा मेला लगा। भारी भीड़ जुटी। महिलाओं ने व्रत रखा तथा दिनभर शिवलिंग अभिषेक कार्यक्रम चलता रहा। 23 जुलाई को लगेगा सबसे बड़ा मेला। उधर स्वयंभू/प्राकृतिक शिवलिंग का अभिषेक करने वालों का दिनभर तांता लगा रहा। विगत करीब दस दिनों से बाघोत धाम पर लगातार भारी भीड़ जुटती आ रही है। शिवरात्रि के दिन तो लाखों भक्तों ने शिवलिंग का अभिषेक करेंगे वहीं अपार भीड़ मेले में देखने को मिली। हजारों कांवड़ अर्पित की गई। बाघेश्वरधाम पर तो विगत सोमवार से छोटे मेले लगते आ रहे हैं वहीं शिवरात्रि को सावन मेला आयोजित होगा। सावन माह के इस सोमवार को कनीना के विभिन्न शिवालयों में शिव को याद किया। व्रत धारण करके स्त्री एवं पुरुषों ने पूजा अर्चना की और ओम नम: शिवाय के जयकारे लगा। कनीना में सावन माह के दूसरे सोमवार को शिवालयों में भारी भीड़ रही। कनीना के 21 फुट ऊंचे शिव प्रतिमा वाले शिवालय में सुबह से ही भक्तजन शिवलिंग का अभिषेक करते देखे गए। भक्त भरपूर सिंह, रोहित कुमार, शकुंत देवी ने बताया कि दिनभर भक्तों का यहां तांता लगा रहा। कनीना उपमंडल के बाघोत स्थित शिवालय पर आर भीड़ रही। सुबह से ही भक्तजन व्रत करके जल अर्पित करते देखे गए। संपूर्ण शिवालय शिवमय बना हुआ था। पहले सोमवार के बाद दूसरे सोमवार के दिन भारी भीड़ देखने को मिली। कनीना के ज्योतिषाचार्य राकेश जोशी के अनुसार व्रत धारण करने वालों के लिए सावन के सोमवार सबसे बेहतर होता है। सावन माह में शिव की गूंज हर जगह सुनाई पड़ती है। शिवालयों में तो शिव के नारे व जाप गूंजते रहे। कनीना स्थित 21 फुट ऊंची शिव प्रतिमा वाले शिवालय में जल अर्पित करते देखे गए। बाघेश्वरी धाम पर छोटा मेला आयोजित हुआ। विभिन्न नेताओं एवं मंत्रियों ने दूसरे सोमवार को बाघोत में शिवलिंग का अभिषेक किया। फोटो कैप्शन 04: शिवलिंग पर जल अर्पित करते भक्तजन।
नवोदय में छठी कक्षा के लिए प्रवेश प्रक्रिया के आनलाइन आवेदन जारी ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज।। पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा जिला महेन्द्रगढ़ में कक्षा 06 में प्रवेश हेतु होने वाली चयन परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में सत्र 2026-27 में कक्षा छठीं के लिए प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन पत्र की प्रक्रिया जारी है । जिसकी अंतिम तिथि 29 जुलाई 2025 है । जो विद्यार्थी दाखिला लेना चाहते हैं वो एनवीएस की आधिकारिक वेबसाइट पर लिंक पर जाकर आनलाईन आवेदन कर सकते हैं । इस संबंध में जानकारी देते हुये श्री धर्मेन्द्र आर्य प्राचार्य प्रभारी पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा ने बताया कि अभ्यर्थी जिला महेन्द्रगढ़ के किसी भी सरकारी/सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालय में कक्षा पांचवीं में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अध्ययनरत होना चाहिए एवं महेंद्रगढ़ जिले का स्थायी निवासी होना चाहिए। अभ्यर्थी ने किसी भी सरकारी/सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालय में कक्षा तीसरी एवं चौथी में पूर्ण शैक्षणिक सत्र में अध्ययन किया हो तथा उत्तीर्ण होना चाहिए । अभ्यर्थी का जन्म 01 मई 2014 से 31 जुलाई 2016 (दोनों तिथियां सम्मिलित) के बीच होना चाहिए । आनलाइन आवेदन के लिए अभ्यर्थी के हस्ताक्षर, अभ्यर्थी के माता या पिता के हस्ताक्षर ,अभ्यर्थी का फोटो , अभ्यर्थी का आधार कार्ड एवं जाति प्रमाण-पत्र (अगर लागू है तो ) की आवश्यकता होती है। किसी भी परिस्थिति में कोई भी अभ्यर्थी दूसरी बार इस परीक्षा में सम्मिलित होने के योग्य नहीं होगा । परीक्षा की तिथि 13 दिसंबर 2025 (शनिवार) है ।
गंगा जल अर्पित करने से होती है मनोकामना पूर्ण-राव नरेंद्र -सुमेर सिंह नेे अर्पित की 44वीं कांवड़ ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। कंधे पर कांवड़ लाने वालों के हौसले बुलंद होने के कारण सड़कों पर दिनरात अब तो बम-बम भोले की गूंज सुनाई पड़ती है और युवा से लेकर वृद्ध तक 350 किमी से भी अधिक दूरी तय करने के बाद भी उसी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं जिस रफ्तार से चलना शुरू करते हैं। दिल में अपार श्रद्धा एवं भक्ति या फिर दिलों में किसी मनोकामना को लेकर सावन माह में शिवभक्त कांवड़ ला रहे हैं। कुछ भक्तजन तो कई-कई वर्षों से ही कांवड़ ला रहे हैं और उनके हौसले बुलंद हैं। वे कहते हैं कि जब तक शिवभोले की उन पर कृपा रहेगी वे कांवड़ यूं ही लाते रहेंगे। 70 वर्षीय प्रसिद्ध शिवभक्त सुमेर सिंह ने बताया कि यह उनकी 46वीं कांवड़ है। बचपन से ही शिवभक्त होने के कारण वे कांवड़ लाकर शिवालय पर चढ़ा रहे हैं और जब तक उनके कदमों में दम है तब तक वे कांवड़ यूं ही चढ़ाते रहेंगे। वे दिल में किसी प्रकार की शिवभोले से मनोकामना नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि शिव कृपा से उनके कदम अभी तक नहीं रुके हैं। आगे भी कांवड़ लाते रहने का प्रण है। पांच दिनों में हरिद्वार से कावड़ लाकर बाघेवर धाम पर सुमेर सिंह ने अर्पित की। उनके साथ पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह थे। उन्होंने कहा कि गंगा का पवित्र जल शिवालय में अर्पित करने से मनोकामना पूर्ण होती है। फोटो कैप्शन 03: गंगाजल अर्पित करते हुए राव नरेंद्र सिंह व सुमेर सिंह
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बाघोत के ऐतिहासिक शिव मंदिर में किया जल अर्पण -बाघोत, स्याणा व सेहलंग में विकास कार्यों के लिए 10-10 लाख की घोषणा -152-डी पर जल्द लगेगा कट, फाइल केंद्र को भेजी -आरती सिंह राव ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि ग्रीन कारिडोर 152-डी पर बाघोत कट हर हाल में बनेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में चल रही हरियाणा सरकार ने कट खोलने के लिए फाइल केंद्र को भेजी है। इस कार्य को जल्द से जल्द सिरे चढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री आज अटेली विधानसभा क्षेत्र के गांव बाघोत, स्याणा और सेहलंग जनसभाओं को संबोधित कर रही थी। इस दौरान उन्होंने तीनों गांवों में विकास कार्य करवाने के लिए 10-10 लाख रुपए की घोषणा की। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यहां के लोगों की मांग पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इस मार्ग को स्टेट हाइवे का दर्जा दिलवाया। यह क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पहले यह एमडीआर यानी जिला की मुख्य सड़क थी। यहां पर कट लगाने के लिए स्टेट हाइवे होना जरूरी था। अब इस मार्ग को स्टेट हाइवे का दर्जा मिल चुका है। अब आगे की कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार चहुंमुखी विकास को प्रतिबद्ध है। हमने जो कहा है वह करके दिखाया है। स्वास्थ्य मंत्री के कार्यक्रमों की शुरुआत बाघोत गांव से हुई, जहां उन्होंने प्रसिद्ध शिवधाम मंदिर में जल अर्पण कर आशीर्वाद लिया। इस मौके पर नागरिकों ने उनका भव्य स्वागत किया और लड्डुओं से तोल कर सम्मानित किया। इस अवसर पर गांव के सरपंच ने मांग पत्र सौंपा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बाघोत में पंचायत समिति की ओर से 45 लाख रुपये के विकास कार्य करवाए गए हैं। स्याणा गांव में भी स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव का पुष्प मालाओं से जोरदार स्वागत किया। यहां पर ग्रामीणों ने फलों से तोल कर उनका अभिनंदन किया। सरपंच द्वारा मांग पत्र प्रस्तुत किया गया। मंत्री ने गांव की स्वच्छता व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से पंचायत समिति द्वारा प्रदान की गई ई-रिक्शा का रिबन काटकर उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने सेहलंग गांव का दौरा किया। नागरिकों ने भव्य पुष्प वर्षा से उनका अभिनंदन किया। इस कार्यक्रम में कनीना के एसडीएम डा. जितेंद्र सिंह, सीएमओ डा. अशोक कुमार, पूर्व विधायक सीताराम यादव, कनीना पंचायत समिति चेयरमैन जयप्रकाश, कनीना मंडल अध्यक्ष बीरेंद्र, अटेली मंडल अध्यक्ष मुकेश कुमार, पूर्व मंडल कृष्ण कुमार, विजय पूर्व चेयरमैन नौताना, बाघोत के सरपंच राजेंद्र, स्याणा के सरपंच वीरपाल, सेहलंग के सरपंच विनीत कुमार, आकाश, अंकित सहित कई गणमान्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। फोटो 01:बाघोत के ऐतिहासिक शिव मंदिर में जल अर्पण करती स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव। फोटो 02:जनसभा को संबोधित करती स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव।
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 13 सितंबर को -हेल्पलाइन नंबर 01282-250322 पर फोन कर ले सकते हैं कानूनी जानकारी- सीजेएम नीलम कुमारी ***************************************************************** ******************************************************************** ****************************************************************** कनीना की आवाज। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशानुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र सूरा के मार्गदर्शन में 13 सितंबर को न्यायिक परिसर नारनौल, महेंद्रगढ़ व कनीना में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस लोक अदालत में आम नागरिक आपसी सौहार्दपूर्ण माध्यम से मामले का निपटारा करवा सकते हैं। यह जानकारी देते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीलम कुमारी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक लोन, मोटर व्हीकल एक्सीडेंट, एनडीपीएस एक्ट, फौजदारी, दीवानी, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद का निपटारा किया जाएगा। सीजेएम ने बताया कि न्यायालय में लंबित मामलों को परस्पर सहयोग व सौहार्दपूर्ण माध्यम से निपटाने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति का कोई मामला न्यायालय में लंबित है तो वह राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से उसका निस्तारण करवा सकता है। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के हेल्पलाइन नंबर 01282-250322 पर भी फोन कर आमजन लोक अदालत व अन्य कानूनी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा नालसा के हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी कॉल कर कानूनी जानकारी ले सकते हैं।