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Monday, October 20, 2025
दीपावली पर लगा बिजली का लंबा कट
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कनीना की आवाज। दीपावली के पावन पर लंबे कट चले। सुबह बिजली जाने के बाद शाम को ही बिजली आई। लोग परेशान रहे क्योंकि दीपावली का पर्व था।
रामरतन गोमली को बनाया प्रदेश संयोजक
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कनीना की आवाज। सनातन धर्म उत्थान समिति के प्रदेश संयोजक हरियाणा बतौर राम रतन गोमली जेई को बनाया गया है। समिति ने कहा है कि सनातन धर्म उत्थान समिति द्वारा समाज में शांति और लोगों के कल्याण के लिए, समाज में धार्मिक मूल्यों को अंकित करने और समाज को नई दिशा दिखाने के रामरतन गोमली का अहम योगदान है। ऐसे में प्रदेश संयोजक नियुक्त किया जाता है। उनके नियुक्ति पर विभिन्न लोगों ने खूब बधाई दी है।
फोटो कैप्शन: राम रतन गोमली
अन्नकुट का पर्व 22 अक्टूबर को
--दीवाली के एक दिन बाद मनेगा पर्व
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में 22 अक्टूबर को अन्नकुट का पर्व मनाया जाएगा। इसे गोवर्धन नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मंदिरों में खिचड़ी व कढ़ी बांटी जाती हैं जिसे प्रत्येक जन चाव से खाता है। अक्सर यह पर्व दीपावली के दूसरे दिन आता है किंतु विगत वर्ष की भांति दीपावली के अगले दिन अमावस्या मनाई जा रही है और अन्नकुट 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
गोवर्धन पर्व से जुड़ी है श्रीकृष्ण और इन्द्र देव के बीच का प्रसंग। इस संबंध में लालदास महाराज ने बताया कि -
एक बार इंद्र देव भगवान् श्रीकृष्ण से कुपित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। गोकुल में इतनी भारी वर्षा देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए और चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। जीव जल में डूबकर मरने लगे तो ग्रामीण दौड़कर भगवान् श्रीकृष्ण के पास आए। भगवान् श्रीकृष्ण ने उस वक्त गोवर्धन पर्वत ही अपनी अंगुली पर उठा लिया और गोकुलवासियों को उसके नीचे आने का आदेश दिया। इस प्रकार इंद्र का गर्व चूर-चूर हो गया और खुश होकर ग्रामीणों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इसी दिन आजकल गाय आदि की पूजा करने का विधान भी है। विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जा रही है। इस दिन विभिन्न मंदिरों में अन्नकूट बनाकर वितरित किया जाएगा।
अन्नकुट का पर्व मनाया जाता है। इसे गोवर्धन नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मंदिरों में खिचड़ी व कढ़ी बांटी जाती हैं जिसे प्रत्येक जन चाव से खाता है। गोवर्धन पर्व से जुड़ी है श्रीकृष्ण और इन्द्र देव के बीच का प्रसंग। एक बार इंद्र देव भगवान् श्रीकृष्ण से कुपित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। गोकुल में इतनी भारी वर्षा देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए और चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। जीव जल में डूबकर मरने लगे तो ग्रामीण दौड़कर भगवान् श्रीकृष्ण के पास आए। भगवान् श्रीकृष्ण ने उस वक्त गोवर्धन पर्वत ही अपनी अंगुली पर उठा लिया और गोकुलवासियों को उसके नीचे आने का आदेश दिया। इस प्रकार इंद्र का गर्व चूर-चूर हो गया और खुश होकर ग्रामीणों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इसी दिन आजकल गाय आदि की पूजा करने का विधान भी है। विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जा रही है।
कनीना और आस पास गांवों में गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा। कनीना में आाधा दर्जन विभिन्न स्थानों पर अन्नकुट का पर्व मनेगा। यह लंबे समय के बाद दूसरी बार देखने को मिला है कि दीपावली के बाद अमावस्या और अब दीवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा होगी। कनीना के मनोज गुप्ता ने बताया कि खाटू श्याम मंदिर, बड़ा मंदिर, कनीना मंडी के विश्वकर्मा मंदिर एवं कई अन्य स्थानों पर पर्व मनाया जाएगा।
फोटो कैप्शन: लालदास महाराज
कनीना क्षेत्र में मनाई दीपावली
पटाखे कम चले, प्रदूषण के दृष्टिगत जागरूक हुए लोग
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में तीन दिनों से लगातार दीपावली की धूम मची हुई थी और दीपावली दीयों की दीपावली धूमधाम से मनाई गई, पटाखे चलाए गए किंतु बहुत कम संख्या में। सरकार द्वारा बार-बार पटाखों पर प्रतिबंध लगाने लोगों की जागरूकता के चलते पटाखे बिक्री नहीं हो पाए। इसलिए पटाखे नहीं चल पाए और पटाखों के न चलने से प्रदूषण इस बार क्षेत्र में कम हो पाया है। विभिन्न जगह फुलझडिय़ां, छोटे पटाखे बच्चे चलते देखे गए और चेहरे पर खुशियां देखने को मिली। नए-नए कपड़ों में बच्चे, बूढ़े, पूजा अर्चना करते देखे गए। पूजा अर्चना के बाद प्रसाद वितरित किया गया तथा दीपों की कतार दूर तक दीवारों पर दिखाई दे रही थी। लंबे समय से दीपावली का इंतजार कर रहे थे आखिरकार वह दिन भी आ ही पहुंचा और दीपावली हंसी खुशी से मनाई गई।
फोटो कैप्शन 03: छोटी बच्ची दीपावली पर फुलझड़ी चलाते हुए।
जमकर महंगी बेची वस्तुएं, भारी भीड़ बाजारों में देखने को मिली
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कनीना की आवाज। दीपावली के दिन जमकर भीड़ विभिन्न सड़क मार्गों पर देखने को मिली वही दुकानदारों ने जमकर महंगे दामों पर वस्तुएं बेची जहां सेब 100 रुपये किलो वहीं केले 100 रुपये दर्जन बेचे गये। आनानास 100 रुपये प्रति पीस बेचा वहीं विभिन्न स्थानों पर भीड़ देखने को मिली। जहां ग्राहकों को जमकर घटियां वस्तुएं खाने को मिली। लौकी 40 रुपये किलो वहीं गोभी 80 रुपये किलो के हिसाब से बिकी। विभिन्न सड़क मार्गों पर भारी भीड़ देखने को मिला। घिसा पिटा माल बेचा गया वहीं पनीर भी 400 रुपये किलो तक बेचा गया। मिठाइयों की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
जमकर बेचे गये गन्ने
-50 से 60 रुपये प्रति करने के हिसाब से बिके
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कनीना की आवाज। कनीना बस स्टैंड पर दीपावली के दिन जमकर गन्ने बेचे गए। यद्यपि गन्ने कनीना क्षेत्र और आसपास नहीं उगाये जाते, अधिकांश गन्ने उत्तर प्रदेश में उगाए जाते हैं किंतु यहां के लोग उत्तर प्रदेश के लोगों के पदचिह्नों पर चलने लग गये हैं। यहां अधिक संख्या में उत्तर प्रदेश के लोग किराये पर रहने के कारण गन्ने की खरीददारी करते हैं। उनको गन्ना खरीदता देख अब कितने ही घरों में गन्ने लेने शुरू कर दिये हैं। करीब 5 साल पहले दीपावली के दिन कोई गन्ना नहीं खरीदता था किंतु जब से ये उत्तर प्रदेश के लोग आए हैं और गन्ना खरीदते देखा है तब से यहां के लोग भी गन्ना खरीदने लग गये हैं। कई क्विंटल गन्ना एक ही दिन में बेच दिया गया और अच्छे दामों पर बेचा गया। एक-एक गाना 50-50 रुपये तक बेचा गया।
वास्तव में गन्ना उत्तर प्रदेश में अधिक उगाया जाता है और दीपावली के दिन इनकी पूजा करके तत्पश्चात गेन्ने की कटाई की जाती है। जिस प्रकार हरियाणा प्रदेश में होली के पर्व पर जौ एवं गेहूं की बाली को भूलकर कटाई पर शुरू होता है ऐसे ही दीपावली पर उत्तर प्रदेश के लोग गन्ने की पूजा कर ,कटाई शुरू करते है वैसे भी गन्ने से भूत भगाने का काम किया जाता है। उत्तर प्रदेश के लोग घर में घुसे हुए भूत को निकालने के लिए भी गन्ने को जलाते हुए चौराहे तक जाते हैं और वहां पटक देते हैं परंतु आश्चर्य तब होता है जब लोग किसी बात के लिए लकीर के फकीर बन जाते हैं। बिना जाने बिना सोचे समझे ही किसी कार्य को करने लग जाते। यही कारण है कि आजकल गन्ने का काम सिर चढ़कर दीपावली के दिन बोला।
चार गाये ली गोद और दिया दान
--लोगों का रुझान श्रीकृष्ण गौशाला की ओर
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में रविवार दीपावली के दिन चार गाये गोद ली और दान दक्षिणा दी।
भगत सिंह गौशाला प्रधान ने बताया कि बसंत लाल शर्मा चांगरोड वाले ने एक गाय गोद ली और 5600 रुपये की राशि दान दी। जबकि धोकलमल पार्क सत्संग मंडल की सोमवती देवी, राजेश देवी, सुमन, कमलेश, सविता देवी आदि ने दो गाये गोद ली और 11000 रुपये दान दिया। उधर एडवोकेट देवेंद्र ने अपनी पुत्री के जन्मदिन पर एक गाय गोद ली और 5100 रुपये दान दिया। इस समय बच्ची की दादी सविता देवी भी मौजूद रही।
गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने कहा कि गायों को गोद लेना एक शुभ कार्य है। हो सके उतना गायों को गोद लेना चाहिए ताकि गायों की कदर बढ़े। इस मौके पर अशोक ठेकेदार, दिलावर सिंह, पूर्व शिक्षक राम प्रताप, कृष्ण गुरु जी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, सूबेदार दुलीचंद ,सूबेदार अभय सिंह, मास्टर रतन सिंह, मास्टर विजेंद्र सिंह यादव, मदन लाल गेरा, तोताराम ठेकेदार, नित्यानंद शर्मा, नरेंद्र ठेकेदार, राजेश वर्मा, नवीन यादव, एडवोकेट दीपक प्रधान, नरेंद्र पार्षद, मनीष पार्षद, योगेश पार्षद, अतर सिंह थानेदार, रामपाल यादव व मानसिंह पूर्व पार्षद आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: गायों को गोद लेते हुए
गो संवर्धन हेतु लाए गए उन्नत नस्ल के दो सांड
-खूब किया गया पूजन
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में गायों की उन्नत नस्लें तैयार करने के लिए और गो संवर्धन हेतु थारपर नस्ल का एक सांड तथा हरियाणा नस्ल का एक सांड लाये गये और उनका विधि विधान से पूजन कर गौशाला में छोड़ा। उनके नाम राम एवं श्याम रखे गये हैं।
विस्तृत जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि 25 सालों से गो संवर्धन पर काम कर रही संस्था तथा पूरे भारत में उन्नत नस्ल की गायें एवं सांड प्रदान करने वाली संस्था खांडवा से ये सांड लाये गये हैं। संचालक कृष्णस्वरूप महाराज से संपर्क कर सांड की मांग की तो उन्होंने सहर्ष देने का निर्णय किया। दोनों ही सांडों का विधि विधान से पूजन किया गया। ये नस्ले 18 से 22 लीटर तक दूध देती हैं।
भगत सिंह प्रधान ने बताया कि उनकी हार्दिक इच्छा है कि कनीना श्रीकृष्ण गौशाला ऊंचाइयों को छुए तथा उन्नत नस्ल की गायें तैयार हो ताकि लोग गौशाला से उन्नत नस्ल की गायों को अपने घर में रखने के लिए बाध्य हो जाए। उन्होंने कहा कि यह दिन अब दूर नहीं है और जल्द ही उनकी यह तमन्ना पूरी हो जाएगी। इस मौके पर अशोक ठेकेदार, दिलावर सिंह, पूर्व शिक्षक राम प्रताप, कृष्ण गुरु जी, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, सूबेदार दुलीचंद ,सूबेदार अभय सिंह, मास्टर रतन सिंह, मास्टर विजेंद्र सिंह यादव, मदन लाल गेरा, तोताराम ठेकेदार, नित्यानंद शर्मा, नरेंद्र ठेकेदार, राजेश वर्मा, नवीन यादव, एडवोकेट दीपक प्रधान, नरेंद्र पार्षद, मनीष पार्षद, योगेश पार्षद, अतर सिंह थानेदार, रामपाल यादव व मानसिंह पूर्व पार्षद आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 1: उन्नत नस्ल सांडों का पूजन करते हुए
आर्य समाज में संपन्न हुआ यज्ञ
-महर्षि दयानंद की पुण्यतिथि मनाई
संस,जागरण। कनीना के आर्य समाज मंदिर में हवन यज्ञ संपन्न हुआ। महर्षि दयानंद की पुण्यतिथि मनाई। राव मोहर सिंह ने महर्षि दयानंद की विचारधारा पर विचार रखे। कई जन मौजूद रहे।
मोहर सिंह आर्य का पोत्र सचिन बना सब इंस्पेक्टर
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कनीना की आवाज।आर्य समाज कनीना के प्रधान मोहर सिंह आर्य के पोत्र सचिन का दिल्ली पुलिस मे सब इंस्पेक्टर के पद पर चयन हुआ है। सचिन को बहुत बहुत बधाइयां मिल रही हैं।
सचिन को इस उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई। मोहर सिंह साहब कनीना आर्य समाज ने बच्चों में बहुत अच्छे संस्कार डालें। उसी मेहनत का फल है।
Sunday, October 19, 2025
नहीं भूला सकता 2010 की दिवाली
-पत्नी कैंसर में कराह रही थी
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कनीना की आवाज। जब-जब दिवाली आती है लोग बेहद खुश होते हैं, होना भी चाहिए चूंकि एक महापर्व है। हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा पर्व माना जाता है परंतु कोई जरूरी नहीं दिवाली सभी के लिए खुशहाली लेकर आए। जिनमें एक अभागा पत्रकार एवं लेखक डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्ड धारक भी है। वर्ष 2010 की बात है जब पत्नी सुमन यादव कैंसर से पीडि़त थी। 5 नवंबर 2010 को दिवाली थी। दिवाली के कारण जयपुर के कैंसर के डाक्टर भी उपलब्ध नहीं हो पाए। दिवाली को नहा धोकर पत्नी वह मायूस बैठी थी और मेरी बहन संतरा देवी आई तो उनसे साफ कह दिया था अब मुझे नहीं बचाना है। जब दिवाली का पूजन हुआ तो भी मायूस तरीके से बैठी हुई थी। खैर दिवाली बीत गई। 8 नवंबर को 2010 को डाक्टर जयपुर आ रहे थे, तब तक को बाहर गए हुए थे। डाक्टर गलगोत्रा जब 8 नवंबर 2010 को आए तब पत्नी सुमन यादव को एसएमएस जयपुर भर्ती करवा दिया गया। तत्पश्चात 12 दिनों तक जीवन मृत्यु से जूझती रही और 16 दिसंबर 2010 की रात को चल बसी। जिस दिन देव उठानी एकादशी शुरू हो गई थी। 17 नवंबर को 2010 को उनका अंतिम संस्कार किया गया। 16 नवंबर को विश्व पत्रकारिता दिवस था सुमन यादव लेखिका एवं पत्रकार थी इसलिए बहुत खुश हुई और उन्होंने कहा कि अब मैं ठीक हो गई हूं, मेरी इच्छा है अब घर चलेंगे। बात सुनकर हम भी बहुत खुश हुए थे परंतु ज्यों ज्यों रात बढ़ती गई उनकी सांसे बंद होती चली गई। ऐसे में उस दीपावली को मुझे दर्द मिला उसे कभी नहीं भूल सकता। यही कारण है कि जब-जब दिवाली आती है सुमन यादव की बहुत याद आती है। अगर सुमन यादव आज होती तो पत्रकार एवं लेखन होशियार सिंह की हालत बहुत बेहतर होती, हर प्रकार से संपन्न होता, खुशहाल होता, जीवन में आगे बढ़ता चला जाता परंतु जो नसीब में था वह मिला।
नसीब के मारो को बस रोना ही पड़ता है,
सूखा नजर आता है, पेड़ से फूल झड़ता है।
खरीद पहुंची 142076 क्विंटल ,सरकारीतौर पर खरीद शून्य, रविवार को रही मंडी बंद
-अब तक 4742 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 142076 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। रविवार को मंडी में अवकाश रहा। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 142076 क्विंटल हो चुकी है। शनिवार तक 629 किसान 12196 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 4742 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
होने लगी है कुछ वर्षों से गन्ने की पूजा
-उत्तर प्रदेश और बिहार में है अधिक प्रचलन
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कनीना की आवाज। दीवाली के दिन जहां गन्ने की पूजा करने का रिवाज धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ता जा रहा है। पहले कभी कोई गन्ने नहीं उगता था किंतु अब गन्ने की पैदावार भी कुछ किसान लेने लग गए हैं। कनीना क्षेत्र में ही कम से कम पांच किसान अलग-अलग गांवों के गन्ने की पैदावार ले रहे हैं। दीवाली पर गन्ने का पूजन बिल्कुल ठीक वैसे ही होता है जैसे होली पर। हरियाणा में गेहूं आदि का पूजन किया जाता है। जिस प्रकार होली दहन में गेहूं को भूनकर पूरा परिवार चखकर गेहूं के पकने का पता लगाता है तत्पश्चात गेहूं की कटाई होती है। इसी प्रकार दीपावली पर उत्तर प्रदेश और बिहार आदि राज्यों में गन्ने का पूजन किया जाता है तत्पश्चात उसकी कटाई की जाती है। लेकिन धीरे-धीरे प्रदेश हरियाणा में भी हजारों की संख्या में उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोग आ गए हैं जिनकी मांग गन्ने की होती है। जिसके देख अन्य लोग भी गन्ने को दीपावली पर खरीदने लग गये हैं। जहां विगत 5 वर्षों से भारी मात्रा में गन्ने बिकते आ रहे हैं।
अनेक लोग गन्ना लेकर आ गए हैं। किसा रणधीर, धर्मवीर, विजय, सोनम आदि रोहतक क्षेत्र से गन्नेकी ट्राली भरकर अपने घरों में खड़ी कर रखी है ताकि दीपावली से पहले ही गन्ने की बिक्री शुरू हो जाए। वैसे तो दीपावली के दिन के बाद ही नया शक्कर, चीनी, गुड़ आदि आते थे किंतु अब तो पहले से ही नया गुड़ भी बाजार में आ चुका है। वास्तव में गन्नों की पूजन बढऩे के कारण एक-एक गन्ना 50 रुपये का बिकता है और लोग एक दूसरे की होड़ पर गन्ने खरीद ले जाते हैं। विगत वर्ष भी गन्ने भारी मांग थी कि देखते ही देखते एक-एक ट्राली गन्ने की बिक गई थी। अब देखा जाना है कि गन्ने की बिक्री किस कदर बढ़ती है।
आज से पांच वर्ष पूर्व दीपावली के पर्व पर गन्ने के प्रति लोगों का कोई रुझान नहीं होता था किंतु अब दूसरे राज्यों विशेषकर बिहार एवं उत्तरप्रदेश से आए लोग इस पर्व पर गन्ने की पूजा करने लगे तो क्षेत्रीय लोग भी उनके पीछे दौउऩे लगे हैं। क्षेत्र में गन्ने की अच्छी खासी बिक्री होने लगी है। साफ गन्ना नहीं अपितु पत्ते सहित ही बेचा जाता है। और तो और कुछ लोग अपनी गाडिय़ों के आगे गन्ना झंडे के रूप में लगाकर दो तीनों से चल रहे हैं।
लोगों का कहना है कि दीपावली के पर्व पर गन्ना तैयार हो जाता है और कटाई शुरू हो जाती है वहीं तथाकथित भूत भगाने के लिए लोग गन्ने को घर से जलाकर चौराहे पर लाकर पटकते हैं। वाहनों के आगे गन्ना लगाकर दौड़ाने का भी रिवाज बढ़ रहा है। उत्तरप्रदेश में तो गन्ने द्वारा घर को भूतों से बचाकर पूजा की जाती है।
फोटो कैप्शन 06: गन्ने की कनीना में खेती
भारी संख्या में मजदूर लौटने लगे हैं अपने राज्यों में
-छठ पूजा के बाद फिर लौटेंगे
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कनीना की आवाज। भारी संख्या में मजदूर दो बार हरियाणा प्रदेश में आते हैं। जब दो बार फसल कटाई होती है उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में भारी संख्या में मजदूर आसपास आते हैं। अनाज मंडी, किसानों के खेतों में, मुर्गीपालन केंद्रों और अन्य जगह मजदूर काम करते हैं। दीपावली के दिन ये मजदूर अपने राज्यों में जाते हैं क्योंकि दीपावली के बाद छठ पूजा बहुत जोर शोर से उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य में मनाई जाती है। 27 अक्टूबर को छठ पूजा का पर्व मनाया जाएगा। इसीलिए मजदूर अब काम छोड़कर दूसरे अपने राज्यों में चले गए हैं या कुछ जा रहे है। तत्पश्चात यह दिवाली और छठ पूजा के बाद वापस लौट कर आएंगे। तब तक काम रुक जाता है।
कनीना के भीम सिंह, दिनेश कुमार, राज कुमार आदि ने बताया कि उनके यहां मजदूरी करने बहुत से मजदूर आते हैं। ये मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश राजस्थान,मध्यप्रदेश, नेपाल तथा दूसरे क्षेत्रों से आते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में छठ पूजा का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है और अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह लोग छठ पूजा का पर्व मानने लग गए हैं। जो मजदूर अपने राज्य नहीं जा सकते वो छठ पूजा अपने जहां रह रहे वहीं पर मानने लग गए हैं। रेवाड़ी आदि में तो अलग से घाट भी बना दिए जाते हैं। यही कारण है कि बहुत से मजदूर अब काम छोड़कर अपने राज्यों में जा रहे हैं। ट्रेनों में भारी भीड़ चल रही है जिसके चलते ये मजदूर वापस फिर से लौटकर आएंगे। तब तक सारा काम ठप हो जाता है। छोटे उद्योग धंधे, चाय की दुकान, मुर्गी पालन केंद्र या बड़े उद्योगों में ये मजदूर देखे जा सकते हैं।
दीपावली को लेकर व्यस्तता बढ़ी
-बाजार से पैदल निकलना भी हुआ कठिन
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कनीना की आवाज। दीपावली के पर्व को लेकर व्यस्तता बढ़ी है। 20 अक्टूबर को दीपावली पर्व मनाया जाएगा। जहां बाजार में भीड़ बढऩे लगी है वहीं मिठाई बनाने वालों के यहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। पर्व पर सबसे अधिक मिठाई बिकती हैं। उधर पेंट, रंग आदि की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ी है।
कई दिनों से दीवाली को लेकर भीड़ बढऩे लगी थी। ज्यों ज्यों दीपावली पास आ रही है त्यों त्यों व्यस्तता बढऩे लगी है। बाजार में तरह तरह की मिठाइयां बनाई जा रही हैं वहीं रंग पेंट की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। किसान खरीफ फसल से निपटने व भावी रबी फसल बीजाई में लग गए हैं। दुकानदार विभिन्न सामान लाकर अपनी दुकानों को सजाने में लगे हुए हैं। दीपावली के पावन पर्व पर सबसे अधिक बिक्री होती है। बाजार में घिसे पीटे माल की सेल लग रही हैं वहीं विभिन्न प्रकार के सामान बाजार में आ गए हैं जिनकी दीपावली को जरूरत होती है।
किसान खरीफ फसल से निपटने व भावी रबी फसल पैदावार लेने में लग गए हैं। दुकानदार विभिन्न सामान लाकर अपनी दुकानों को सजाने में लगे हुए हैं। रंग पेंट करने वाले मोनू एवं सोनू ने बताया कि उनकी मांग बढ़ती ही जा रही है।
कनीना पालिका तहबाजारी की पर्चियां काट दी जिससे कुछ दुकानदारों में रोष देखने को मिला। रवि कुमार ने बताया कि उन्होंने एक छोटी सी मेज लगा रखी थी जिसके दो सौ रुपये तहबाजारी के ले लिये जबकि दुकान बीडीपीओ कार्यालय के तहत आती है।
फोटो कैप्शन 05:बाजार में भीड़ का नजारा।
गो संवर्धन हेतु लाए गए उन्नत नस्ल के दो सांड
-दीपावली पर होगा उनका पूजन-भगत सिंह
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में गायों की उन्नत नस्लें तैयार करने के लिए और गो संवर्धन हेतु थारपर नस्ल का एक सांड तथा हरियाणा नस्ल का एक सांड लाये गये हैं।
विस्तृत जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि 25 सालों से गो संवर्धन पर काम कर रही संस्था तथा पूरे भारत में उन्नत नस्ल की गायें एवं सांड प्रदान करने वाली संस्था खांडवा से ये बुल लाये गये हैं। संचालक कृष्णस्वरूप महाराज से संपर्क कर बुल की मांग की तो उन्होंने सहर्ष देने का निर्णय किया। दोनों ही सांडों का दीपावली के दिन अभिनंदन किया जाएगा। ये नस्ले 18 से 22 लीटर तक दूध देती हैं।
भगत सिंह प्रधान ने बताया कि उनकी हार्दिक इच्छा है कि कनीना श्रीकृष्ण गौशाला ऊंचाइयों को छुए तथा उन्नत नस्ल की गायें तैयार हो ताकि लोग गौशाला से उन्नत नस्ल की गायों को अपने घर में रखने के लिए बाध्य हो जाए। उन्होंने कहा कि यह दिन अब दूर नहीं है और जल्द ही उनकी यह तमन्ना पूरी हो जाएगी। इस मौके पर भगत सिंह के अलावा राम प्रताप पूर्व शिक्षक, दिलावर सिंह आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 3: उन्नत नस्ल का बुल दिखाते हुए प्रधान एवं अन्य
गोवर्धन पूजा 22 को
-अन्नकुट के रूप में मनाया जाएगा-संदीप राठी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा के रूप में अन्नकुट का पर्व मनाया जाएगा। विस्तृत जानकारी देते हुए खाटू श्याम मंदिर कनीना के प्रधान संदीप राठी ने बताया कि हर वर्ष अन्नकुट का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 22 अक्टूबर को यह पर्व मनाया जाएगा इसके लिए विशेष तैयारियां चल रही हैं।
राव नरेंद्र सिंह ही कर सकते हैं क्षेत्र का भला-अंकुर यादव
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कनीना की आवाज। समाजसेवी अंकुर यादव कनीना अपने साथियों सहित कांग्रेस पार्टी द्वारा बनाए गए हरियाणा के अध्यक्ष राव नरेन्द्र से उनके निवास स्थान नारनौल पर मिलकर उनको व्यक्तिगत दीपावली की हार्दिक बधाई दी। इस व्यक्तिगत मुलाकात पर इलाके के लिए विकास कार्यों को पूरा करवाने के लिए विचार विमर्श हुआ।
अंकुर यादव ने कहा कि राव नरेंद्र को हरियाणा का अध्यक्ष बनाया जाना अपने आप में अहंमियत रखता है जो क्षेत्र के लिए खुशी की बात हैं। राव नरेंद्र सिंह के पिता भी पंचायत मंत्री होते थे जिन्होंने अनेक विकास कार्य करवाए। तत्पश्चात राव नरेंद्र सिंह ने मंत्री रहते हुए विकास कार्य करवाये जिन्हें लोग भुला नहीं सकते।
राव नरेन्द्र ने आश्वासन दिया कि इलाके में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होगा। सभी का सम्मान किया जाएगा। पूर्व मंत्री राव नरेंद्र कहा कि उनके कनीना से पारिवारिक संबंध हैं। इस मौके पर विनोद पटीकरा, हेमंत चौधरी कनीना, मोहित कनीना आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: राव नरेंद्र सिंह से मुलाकात करते हुए अंकुर यादव व अन्य।
प्रदूषण से दीपावली को बचाने की ले रहे हैं शपथ
-देसी घी के दीये जलाए जाएंगे
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कनीना की आवाज। इस बार क्षेत्र के युवा एवं बुजुर्ग दीपावली को घी के दीये जलाकर एवं आपस में मिलकर दीपावली मनाना चाहते हैं। पटाखे न चलाने व चाइनीज आइटम न खरीदने की शपथ ले रहे हैं। देसी घी के भाव एक हजार रुपये प्रति किलो होने के बावजूद भी वे मुख्य दीया घी का ही जलाते आ रहे हैं। महंगाई के कारण दस फीसदी लोग मोमबत्ती ही जलाकर दीपावली का पर्व मनाते हैं। युवाओं में इस बार दीपावली को सौहार्द, भाईचारा एवं एकता का पर्व बनाने की होड़ लगी है। वे पटाखे चलाने के पक्ष में भी नहीं हैं। युवाओं से इस संबंध में चर्चा की गई--
घरों में मोमबत्ती न जलाकर घी के दीये ही जलाने चाहिए। यही परंपरा श्रीराम के अयोध्या में लौटने पर अपनाई गई थी। उनका कहना है कि घर की मिठाइयां ही खानी चाहिए। वे पटाखे न चलाकर प्रदूषण से बचना चाहते हैं। पटाखों का प्रदूषण कई कई दिनों तक चलता है।
-- कंवरसेन वशिष्ठ,कनीना
घर की मिठाइयां खाकर, घी के दीये जलाकर एवं पटाखे न चलाकर ही दीपावली मनाएंगे। उनका मानना है कि महंगाई के युग भी दीपावली के प्रति लोगों में जोश है। उनका मानना है कि चाइनीज आइटम नहीं खरीदने चाहिए। दीये बनाने वालों से दीये खरीदेंगे और घी डालकर जलाएंगे जो एकता का परिचायक होगा।
--छोटूराम कोटिया निवासी
दीपावली को सादगी से मनाना चाहते हैं। लोग जुआ खेलते हैं और दुकानों की मिठाइयां खाकर पटाखे चलाते हैं जो अनुचित है। वे चीन के माल के विरोधी हैं तथा भारत का सामान खरीदना चाहते हैं। वे इस बार गांव में भी देसी घी के ही दीये जलाने की सलाह दे रहे हैं और इस पर्व पर पटाखे न चलाने की प्रेरणा देकर कनीना व आस पास को साफ सुथरा एवं प्रदूषण मुक्त बनाएंगे।
---मुकेश नंबरदार,कनीना
हम स्वयं भी प्रदूषण नहीं करेंगे और दूसरों को भी रोकेंगे। हम सादगी से दीपावली मनाने की तमन्ना है। हम घी के दीये जलाकर दूसरों को भी प्रेरणा देंगे। उन्होंने शपथ ली कि वे चाइनीज आइटम नहीं खरीदेंगे। कुल मिलाकर युवा पीढ़ी इस बार कम से कम पटाखे चलाने के पक्ष में हैं और दीपावली को सादगीपूर्ण मनाए जाने के पक्ष में है। वे चाइनीज आइटम नहीं खरीदना चाहते।
--सुनील कुमार, बिसोहा
फोटो कैप्शन: छोटूराम, सुनील कुमार, मुकेश नंबरदार एवं कंवरसेन वशिष्ठ
नहीं भूला सकता 2010 की दिवाली
-पत्नी कैंसर में कराह रही थी
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कनीना की आवाज। जब-जब दिवाली आती है लोग बेहद खुश होते हैं, होना भी चाहिए चूंकि एक महापर्व है। हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा पर्व माना जाता है परंतु कोई जरूरी नहीं दिवाली सभी के लिए खुशहाली लेकर आए। जिनमें एक अभागा पत्रकार एवं लेखक डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्ड धारक भी है। वर्ष 2010 की बात है जब पत्नी सुमन यादव कैंसर से पीडि़त थी। 5 नवंबर 2010 को दिवाली थी। दिवाली के कारण जयपुर के कैंसर के डाक्टर भी उपलब्ध नहीं हो पाए। दिवाली को नहा धोकर पत्नी वह मायूस बैठी थी और मेरी बहन संतरा देवी आई तो उनसे साफ कह दिया था अब मुझे नहीं बचाना है। जब दिवाली का पूजन हुआ तो भी मायूस तरीके से बैठी हुई थी। खैर दिवाली बीत गई। 8 नवंबर को 2010 को डाक्टर जयपुर आ रहे थे, तब तक को बाहर गए हुए थे। डाक्टर गलगोत्रा जब 8 नवंबर 2010 को आए तब पत्नी सुमन यादव को एसएमएस जयपुर भर्ती करवा दिया गया। तत्पश्चात 12 दिनों तक जीवन मृत्यु से जूझती रही और 16 दिसंबर 2010 की रात को चल बसी। जिस दिन देव उठानी एकादशी शुरू हो गई थी। 17 नवंबर को 2010 को उनका अंतिम संस्कार किया गया। 16 नवंबर को विश्व पत्रकारिता दिवस था सुमन यादव लेखिका एवं पत्रकार थी इसलिए बहुत खुश हुई और उन्होंने कहा कि अब मैं ठीक हो गई हूं, मेरी इच्छा है अब घर चलेंगे। बात सुनकर हम भी बहुत खुश हुए थे परंतु ज्यों ज्यों रात बढ़ती गई उनकी सांसे बंद होती चली गई। ऐसे में उस दीपावली को मुझे दर्द मिला उसे कभी नहीं भूल सकता। यही कारण है कि जब-जब दिवाली आती है सुमन यादव की बहुत याद आती है। अगर सुमन यादव आज होती तो पत्रकार एवं लेखन होशियार सिंह की हालत बहुत बेहतर होती, हर प्रकार से संपन्न होता, खुशहाल होता, जीवन में आगे बढ़ता चला जाता परंतु जो नसीब में था वह मिला।
नसीब के मारो को बस रोना ही पड़ता है,
सूखा नजर आता है, पेड़ से फूल झड़ता है।
खरीद पहुंची 142076 क्विंटल ,सरकारीतौर पर खरीद शून्य, रविवार को रही मंडी बंद
-अब तक 4742 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 142076 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। रविवार को मंडी में अवकाश रहा। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 142076 क्विंटल हो चुकी है। शनिवार तक 629 किसान 12196 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 4742 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
होने लगी है कुछ वर्षों से गन्ने की पूजा
-उत्तर प्रदेश और बिहार में है अधिक प्रचलन
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कनीना की आवाज। दीवाली के दिन जहां गन्ने की पूजा करने का रिवाज धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ता जा रहा है। पहले कभी कोई गन्ने नहीं उगता था किंतु अब गन्ने की पैदावार भी कुछ किसान लेने लग गए हैं। कनीना क्षेत्र में ही कम से कम पांच किसान अलग-अलग गांवों के गन्ने की पैदावार ले रहे हैं। दीवाली पर गन्ने का पूजन बिल्कुल ठीक वैसे ही होता है जैसे होली पर। हरियाणा में गेहूं आदि का पूजन किया जाता है। जिस प्रकार होली दहन में गेहूं को भूनकर पूरा परिवार चखकर गेहूं के पकने का पता लगाता है तत्पश्चात गेहूं की कटाई होती है। इसी प्रकार दीपावली पर उत्तर प्रदेश और बिहार आदि राज्यों में गन्ने का पूजन किया जाता है तत्पश्चात उसकी कटाई की जाती है। लेकिन धीरे-धीरे प्रदेश हरियाणा में भी हजारों की संख्या में उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोग आ गए हैं जिनकी मांग गन्ने की होती है। जिसके देख अन्य लोग भी गन्ने को दीपावली पर खरीदने लग गये हैं। जहां विगत 5 वर्षों से भारी मात्रा में गन्ने बिकते आ रहे हैं।
अनेक लोग गन्ना लेकर आ गए हैं। किसा रणधीर, धर्मवीर, विजय, सोनम आदि रोहतक क्षेत्र से गन्नेकी ट्राली भरकर अपने घरों में खड़ी कर रखी है ताकि दीपावली से पहले ही गन्ने की बिक्री शुरू हो जाए। वैसे तो दीपावली के दिन के बाद ही नया शक्कर, चीनी, गुड़ आदि आते थे किंतु अब तो पहले से ही नया गुड़ भी बाजार में आ चुका है। वास्तव में गन्नों की पूजन बढऩे के कारण एक-एक गन्ना 50 रुपये का बिकता है और लोग एक दूसरे की होड़ पर गन्ने खरीद ले जाते हैं। विगत वर्ष भी गन्ने भारी मांग थी कि देखते ही देखते एक-एक ट्राली गन्ने की बिक गई थी। अब देखा जाना है कि गन्ने की बिक्री किस कदर बढ़ती है।
आज से पांच वर्ष पूर्व दीपावली के पर्व पर गन्ने के प्रति लोगों का कोई रुझान नहीं होता था किंतु अब दूसरे राज्यों विशेषकर बिहार एवं उत्तरप्रदेश से आए लोग इस पर्व पर गन्ने की पूजा करने लगे तो क्षेत्रीय लोग भी उनके पीछे दौउऩे लगे हैं। क्षेत्र में गन्ने की अच्छी खासी बिक्री होने लगी है। साफ गन्ना नहीं अपितु पत्ते सहित ही बेचा जाता है। और तो और कुछ लोग अपनी गाडिय़ों के आगे गन्ना झंडे के रूप में लगाकर दो तीनों से चल रहे हैं।
लोगों का कहना है कि दीपावली के पर्व पर गन्ना तैयार हो जाता है और कटाई शुरू हो जाती है वहीं तथाकथित भूत भगाने के लिए लोग गन्ने को घर से जलाकर चौराहे पर लाकर पटकते हैं। वाहनों के आगे गन्ना लगाकर दौड़ाने का भी रिवाज बढ़ रहा है। उत्तरप्रदेश में तो गन्ने द्वारा घर को भूतों से बचाकर पूजा की जाती है।
फोटो कैप्शन 06: गन्ने की कनीना में खेती
भारी संख्या में मजदूर लौटने लगे हैं अपने राज्यों में
-छठ पूजा के बाद फिर लौटेंगे
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कनीना की आवाज। भारी संख्या में मजदूर दो बार हरियाणा प्रदेश में आते हैं। जब दो बार फसल कटाई होती है उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में भारी संख्या में मजदूर आसपास आते हैं। अनाज मंडी, किसानों के खेतों में, मुर्गीपालन केंद्रों और अन्य जगह मजदूर काम करते हैं। दीपावली के दिन ये मजदूर अपने राज्यों में जाते हैं क्योंकि दीपावली के बाद छठ पूजा बहुत जोर शोर से उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य में मनाई जाती है। 27 अक्टूबर को छठ पूजा का पर्व मनाया जाएगा। इसीलिए मजदूर अब काम छोड़कर दूसरे अपने राज्यों में चले गए हैं या कुछ जा रहे है। तत्पश्चात यह दिवाली और छठ पूजा के बाद वापस लौट कर आएंगे। तब तक काम रुक जाता है।
कनीना के भीम सिंह, दिनेश कुमार, राज कुमार आदि ने बताया कि उनके यहां मजदूरी करने बहुत से मजदूर आते हैं। ये मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश राजस्थान,मध्यप्रदेश, नेपाल तथा दूसरे क्षेत्रों से आते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में छठ पूजा का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है और अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह लोग छठ पूजा का पर्व मानने लग गए हैं। जो मजदूर अपने राज्य नहीं जा सकते वो छठ पूजा अपने जहां रह रहे वहीं पर मानने लग गए हैं। रेवाड़ी आदि में तो अलग से घाट भी बना दिए जाते हैं। यही कारण है कि बहुत से मजदूर अब काम छोड़कर अपने राज्यों में जा रहे हैं। ट्रेनों में भारी भीड़ चल रही है जिसके चलते ये मजदूर वापस फिर से लौटकर आएंगे। तब तक सारा काम ठप हो जाता है। छोटे उद्योग धंधे, चाय की दुकान, मुर्गी पालन केंद्र या बड़े उद्योगों में ये मजदूर देखे जा सकते हैं।
दीपावली को लेकर व्यस्तता बढ़ी
-बाजार से पैदल निकलना भी हुआ कठिन
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कनीना की आवाज। दीपावली के पर्व को लेकर व्यस्तता बढ़ी है। 20 अक्टूबर को दीपावली पर्व मनाया जाएगा। जहां बाजार में भीड़ बढऩे लगी है वहीं मिठाई बनाने वालों के यहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। पर्व पर सबसे अधिक मिठाई बिकती हैं। उधर पेंट, रंग आदि की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ी है।
कई दिनों से दीवाली को लेकर भीड़ बढऩे लगी थी। ज्यों ज्यों दीपावली पास आ रही है त्यों त्यों व्यस्तता बढऩे लगी है। बाजार में तरह तरह की मिठाइयां बनाई जा रही हैं वहीं रंग पेंट की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। किसान खरीफ फसल से निपटने व भावी रबी फसल बीजाई में लग गए हैं। दुकानदार विभिन्न सामान लाकर अपनी दुकानों को सजाने में लगे हुए हैं। दीपावली के पावन पर्व पर सबसे अधिक बिक्री होती है। बाजार में घिसे पीटे माल की सेल लग रही हैं वहीं विभिन्न प्रकार के सामान बाजार में आ गए हैं जिनकी दीपावली को जरूरत होती है।
किसान खरीफ फसल से निपटने व भावी रबी फसल पैदावार लेने में लग गए हैं। दुकानदार विभिन्न सामान लाकर अपनी दुकानों को सजाने में लगे हुए हैं। रंग पेंट करने वाले मोनू एवं सोनू ने बताया कि उनकी मांग बढ़ती ही जा रही है।
कनीना पालिका तहबाजारी की पर्चियां काट दी जिससे कुछ दुकानदारों में रोष देखने को मिला। रवि कुमार ने बताया कि उन्होंने एक छोटी सी मेज लगा रखी थी जिसके दो सौ रुपये तहबाजारी के ले लिये जबकि दुकान बीडीपीओ कार्यालय के तहत आती है।
फोटो कैप्शन 05:बाजार में भीड़ का नजारा।
गो संवर्धन हेतु लाए गए उन्नत नस्ल के दो सांड
-दीपावली पर होगा उनका पूजन-भगत सिंह
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कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में गायों की उन्नत नस्लें तैयार करने के लिए और गो संवर्धन हेतु थारपर नस्ल का एक सांड तथा हरियाणा नस्ल का एक सांड लाये गये हैं।
विस्तृत जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि 25 सालों से गो संवर्धन पर काम कर रही संस्था तथा पूरे भारत में उन्नत नस्ल की गायें एवं सांड प्रदान करने वाली संस्था खांडवा से ये बुल लाये गये हैं। संचालक कृष्णस्वरूप महाराज से संपर्क कर बुल की मांग की तो उन्होंने सहर्ष देने का निर्णय किया। दोनों ही सांडों का दीपावली के दिन अभिनंदन किया जाएगा। ये नस्ले 18 से 22 लीटर तक दूध देती हैं।
भगत सिंह प्रधान ने बताया कि उनकी हार्दिक इच्छा है कि कनीना श्रीकृष्ण गौशाला ऊंचाइयों को छुए तथा उन्नत नस्ल की गायें तैयार हो ताकि लोग गौशाला से उन्नत नस्ल की गायों को अपने घर में रखने के लिए बाध्य हो जाए। उन्होंने कहा कि यह दिन अब दूर नहीं है और जल्द ही उनकी यह तमन्ना पूरी हो जाएगी। इस मौके पर भगत सिंह के अलावा राम प्रताप पूर्व शिक्षक, दिलावर सिंह आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 3: उन्नत नस्ल का बुल दिखाते हुए प्रधान एवं अन्य
गोवर्धन पूजा 22 को
-अन्नकुट के रूप में मनाया जाएगा-संदीप राठी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा के रूप में अन्नकुट का पर्व मनाया जाएगा। विस्तृत जानकारी देते हुए खाटू श्याम मंदिर कनीना के प्रधान संदीप राठी ने बताया कि हर वर्ष अन्नकुट का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 22 अक्टूबर को यह पर्व मनाया जाएगा इसके लिए विशेष तैयारियां चल रही हैं।
राव नरेंद्र सिंह ही कर सकते हैं क्षेत्र का भला-अंकुर यादव
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कनीना की आवाज। समाजसेवी अंकुर यादव कनीना अपने साथियों सहित कांग्रेस पार्टी द्वारा बनाए गए हरियाणा के अध्यक्ष राव नरेन्द्र से उनके निवास स्थान नारनौल पर मिलकर उनको व्यक्तिगत दीपावली की हार्दिक बधाई दी। इस व्यक्तिगत मुलाकात पर इलाके के लिए विकास कार्यों को पूरा करवाने के लिए विचार विमर्श हुआ।
अंकुर यादव ने कहा कि राव नरेंद्र को हरियाणा का अध्यक्ष बनाया जाना अपने आप में अहंमियत रखता है जो क्षेत्र के लिए खुशी की बात हैं। राव नरेंद्र सिंह के पिता भी पंचायत मंत्री होते थे जिन्होंने अनेक विकास कार्य करवाए। तत्पश्चात राव नरेंद्र सिंह ने मंत्री रहते हुए विकास कार्य करवाये जिन्हें लोग भुला नहीं सकते।
राव नरेन्द्र ने आश्वासन दिया कि इलाके में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होगा। सभी का सम्मान किया जाएगा। पूर्व मंत्री राव नरेंद्र कहा कि उनके कनीना से पारिवारिक संबंध हैं। इस मौके पर विनोद पटीकरा, हेमंत चौधरी कनीना, मोहित कनीना आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: राव नरेंद्र सिंह से मुलाकात करते हुए अंकुर यादव व अन्य।
प्रदूषण से दीपावली को बचाने की ले रहे हैं शपथ
-देसी घी के दीये जलाए जाएंगे
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कनीना की आवाज। इस बार क्षेत्र के युवा एवं बुजुर्ग दीपावली को घी के दीये जलाकर एवं आपस में मिलकर दीपावली मनाना चाहते हैं। पटाखे न चलाने व चाइनीज आइटम न खरीदने की शपथ ले रहे हैं। देसी घी के भाव एक हजार रुपये प्रति किलो होने के बावजूद भी वे मुख्य दीया घी का ही जलाते आ रहे हैं। महंगाई के कारण दस फीसदी लोग मोमबत्ती ही जलाकर दीपावली का पर्व मनाते हैं। युवाओं में इस बार दीपावली को सौहार्द, भाईचारा एवं एकता का पर्व बनाने की होड़ लगी है। वे पटाखे चलाने के पक्ष में भी नहीं हैं। युवाओं से इस संबंध में चर्चा की गई--
घरों में मोमबत्ती न जलाकर घी के दीये ही जलाने चाहिए। यही परंपरा श्रीराम के अयोध्या में लौटने पर अपनाई गई थी। उनका कहना है कि घर की मिठाइयां ही खानी चाहिए। वे पटाखे न चलाकर प्रदूषण से बचना चाहते हैं। पटाखों का प्रदूषण कई कई दिनों तक चलता है।
-- कंवरसेन वशिष्ठ,कनीना
घर की मिठाइयां खाकर, घी के दीये जलाकर एवं पटाखे न चलाकर ही दीपावली मनाएंगे। उनका मानना है कि महंगाई के युग भी दीपावली के प्रति लोगों में जोश है। उनका मानना है कि चाइनीज आइटम नहीं खरीदने चाहिए। दीये बनाने वालों से दीये खरीदेंगे और घी डालकर जलाएंगे जो एकता का परिचायक होगा।
--छोटूराम कोटिया निवासी
दीपावली को सादगी से मनाना चाहते हैं। लोग जुआ खेलते हैं और दुकानों की मिठाइयां खाकर पटाखे चलाते हैं जो अनुचित है। वे चीन के माल के विरोधी हैं तथा भारत का सामान खरीदना चाहते हैं। वे इस बार गांव में भी देसी घी के ही दीये जलाने की सलाह दे रहे हैं और इस पर्व पर पटाखे न चलाने की प्रेरणा देकर कनीना व आस पास को साफ सुथरा एवं प्रदूषण मुक्त बनाएंगे।
---मुकेश नंबरदार,कनीना
हम स्वयं भी प्रदूषण नहीं करेंगे और दूसरों को भी रोकेंगे। हम सादगी से दीपावली मनाने की तमन्ना है। हम घी के दीये जलाकर दूसरों को भी प्रेरणा देंगे। उन्होंने शपथ ली कि वे चाइनीज आइटम नहीं खरीदेंगे। कुल मिलाकर युवा पीढ़ी इस बार कम से कम पटाखे चलाने के पक्ष में हैं और दीपावली को सादगीपूर्ण मनाए जाने के पक्ष में है। वे चाइनीज आइटम नहीं खरीदना चाहते।
--सुनील कुमार, बिसोहा
फोटो कैप्शन: छोटूराम, सुनील कुमार, मुकेश नंबरदार एवं कंवरसेन वशिष्ठ
Saturday, October 18, 2025
खरीद पहुंची 141374 क्विंटल ,सरकारीतौर पर खरीद शून्य
-अब तक 4723 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 141374 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा कम से कम 1900 रुपये और अधिकतम 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 141374 क्विंटल हो चुकी है। शनिवार को 610 किसान 10494 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 4723 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
श्रीकृष्ण गौशाला कनीना को बनाया जाएगा आधुनिकतम -भगत सिंह
-3 महीने में 22 लाख रुपये की हुई आवक तथा 200 गायें ली गई गोद
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कनीना की आवाज। कनीना की श्री कृष्ण गौशाला का जब से भगत सिंह कनीना ने प्रधान का कार्यभार संभाला है तब से श्री कृष्ण गौशाला में एक नई परिपाटी शुरू हो गई है। 200 के करीब गए गोद ली जा चुकी है और 22 लाख से अधिक राशि की आवक हुई है।
विस्तृत जानकारी देते हुए भगत सिंह प्रधान ने बताया कि 1 जुलाई 2025 को उनके पास 56 लाख रुपये के करीब राशि थी जब उन्होंने चार्ज लिया। एक अक्टूबर 2025 को बढ़ाकर 78 लाख रुपए पहुंच गई। उन्होंने बताया कि उनके प्रयास के कारण गाय गोद लेने की एक नई परिपाटी शुरू हुई है जिसके चलते अब तक 200 के करीब गए गोद ली जा चुकी है। यही कारण है कि अब श्रीकृष्ण गौशाल की तरफ लोगों का रुझान बढऩे लगा है। सवामणि, जन्मदिन विभिन्न उत्सव आदि पर गौशाला में लोग जरूर दान देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौशाला को आधुनिकतम बनाया जाएगा। यह विचार भगत सिंह प्रधान के हैं उन्होंने बताया कि उच्च नस्ल के सांड लेाये जाएंगे जिसके चलते श्रीकृष्ण गौशाला में उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध हो पाएंगी।
कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में जब से भगत सिंह प्रधान ने कार्यभार संभाला है तब से जहां गायों को गोद लेने का सिलसिला बढ़ा है। वही गायों के लिए दान पुण्य भी बढ़ता ही जा रहा है।
भगत सिंह प्रधान ने बताया कि उनका उद्देश्य श्री कृष्ण गौशाला में गायों की नस्लें सुधारना है। इसके लिए व्यापक प्रबंध कर रहे हैं ताकि अच्छी नस्ल के सांडों से संकरण करवा कर उन्नत नस्ल की गाये तैयार हो सके। जिससे कोई भी व्यक्ति इन गायों को अपना सके और घरों में पाल सके। उन्होंने बताया कि समय 1400 गाये हैं जिन पर 40 कर्मचारी उनकी सेवा में लगे हुए हैं जो डाक्टर भी उनकी सेवा कर रहे हैं। वह गायों के लिए अलग-अलग बाड़े बनवा रहे हैं ताकि गाये अच्छी प्रकार पल सके। उनके बाहर घूमने का भी प्रबंध किया जा रहा है। उन्होंने बताया प्रतिदिन दो लाख रुपये गौशाला पर आ रहा है।
उन्होंने बताया इस समय गौशाला में गिर एवं हरियाणवीं नस्ल की गायें हैं। 10000 मण कड़बी इक_ी की जा चुकी है। 13 ट्रैक्टर बाहर से लगाए गये। प्रत्येक ट्रैक्टर का किराया 900 रुपये प्रति ट्रैक्टर हिसाब से दिया गया जबकि तीन ट्रैक्टर गौशाला के रहे। इस प्रकार 7 लाख रुपये खर्च करके कड़बी का व्यापक प्रबंध किया है। अब उनकी गौशाला अच्छे ढंग से चल पाएगी। उन्होंने लोगों का आह्वान किया की गौशाला में आए और गायों की सेवा धर्म भी निभाये। तीन गोग्रास गाडिय़ां लगाई हैं।
फोटो कैप्शन 07: गायों की सेवा करते हुए भगत सिंह एवं अन्य
दीपावली उत्सव की रही धूम
--धनौंदा स्कूल में मनाई दीपावली
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कनीना की आवाज। गांव धनौंदा स्थित ब्रिलिएंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दीवाली उत्सव के उपलक्ष्य में रामायण चौपाई गायन, दिया सजाओ, बेस्ट फ्राम वेस्ट ,ड्राइंग -पेंटिंग तथा रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिनमें विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
चौपाई गायन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रामायण की विभिन्न चौपाइयों का सस्वर अर्थ सहित गायन करके समां बांध दिया। चौपाई गायन प्रतियोगिता में यशवंत ने प्रथम, दिव्या और केशव ने द्वितीय तथा अदिति ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। मंच संचालन कक्षा सातवीं की छात्राओं गुंजन और निशिका ने किया। दिया सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन कक्षावार किया गया। नर्सरी कक्षा में अब्दुल समद प्रथम, मेघा, दिया ,हर्ष द्वितीय व देवांश तृतीय स्थान पर रहे ।एलकेजी में जयवर्धन व कशिश प्रथम, अंश तथा अनिरुद्ध द्वितीय तथा संध्या व विवेक तृतीय स्थान पर रहे। यूकेजी में साक्ष्य व ललित प्रथम, पराग व लतिका द्वितीय तथा मानवी और जिया तीसरे स्थान पर रहे। बेस्ट फ्रॉम द वेस्ट प्रतियोगिता में कक्षा दसवीं की छात्राओं नेहा और कनिका ने राम मंदिर की प्रतिकृति बनाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। कक्षा दसवीं के ही छात्र विनय ने सुंदर घर का मॉडल बनाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। तीसरे स्थान पर कक्षा छठी की छात्रा अक्षिता व आठवीं की छात्रा हर्षिता संयुक्त रूप से रहीं। ड्राइंग प्रतियोगिता में प्रथम ग्रुप में चित्रा प्रथम, अवनी द्वितीय तथा मयंक व अंश तृतीय स्थान पर रहे। दूसरे ग्रुप में श्रुति और यशवंत प्रथम, दिव्या और मानवी द्वितीय तथा रिहान और सौम्या तृतीय स्थान पर रहे। पेंटिंग प्रतियोगिता में मुस्कान प्रथम, अंशिका द्वितीय तथा तनु और बानी तीसरे स्थान पर रहीं। रंगोली प्रतियोगिता में बारहवीं विज्ञान संकाय और सातवीं की छात्राओं ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। छठी कक्षा की छात्राएं दूसरे स्थान पर तथा आठवीं और नौवीं की छात्राएं संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। इस अवसर पर आशुतोष शास्त्री, प्रहलाद सिंह, सत्येंद्र सिंह, मुकेश यादव, रेनू यादव, नरेंद्र कौशिक, मनजीत, परवीन, सतीश कुमार, शन्नो तंवर, शीतल, पूजा, निशा, स्मृति सहित विद्यालय के सभी स्टाफ मेंबर्स और विद्यार्थी उपस्थित थे ।
फोटो कैप्शन 08: विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपने प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए विद्यार्थी।
डीएचबीवीएन पटाखे न चलाने की अपील की
--पटाखों से हो सकता है फाल्ट
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कनीना की आवाज। एसडीओ पावर उमेश वर्मा ने डीएचबीवीएन के सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वितरण ट्रांसफार्मर को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाने के लिए ट्रांसफार्मर के पास पटाखे न जलाएं। पटाखों से कंडक्टर/केबल में आग लग सकती है। अत:, आपसे अनुरोध है कि ओवरहेड लाइन कंडक्टर और केबल को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाने के लिए निगम की 11 केवी/एलटी लाइन के नीचे पटाखे न जलाएं।
बीआर आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेहलंग में हुआ दीपावली मेले का भव्य आयोजन
--सजे विभिन्न पंडाल, मची धूम
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कनीना की आवाज। सेहलंग स्थित बीआर आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शनिवार 18 अक्टूबर 2025 को भव्य दीपावली मेला बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर रंग-बिरंगी रोशनी, सजावटी दीपों और पुष्पों से सुसज्जित था। विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा स्थानीय समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
मेले में विविध प्रकार के झूले, मिठाइयों के स्टाल, सजावट व क्राफ्ट के स्टाल, फूड स्टाल, इलेक्ट्रानिक बाइक और स्कूटर की प्रदर्शनी, तथा मेहंदी आर्ट स्टाल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने उत्साहपूर्वक सभी गतिविधियों में भाग लिया और मेले के हर कोने में उत्सव का माहौल छा गया।
विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई विज्ञान प्रदर्शनी और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रदर्शनी मेले की मुख्य आकर्षण रहीं। विद्यार्थियों ने कबाड़ से उपयोगी वस्तुएं बनाकर अपनी सृजनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए सजावटी दीयों के स्टाल ने मेले को पारंपरिक रंग प्रदान किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या ज्योति भारद्वाज ने कहा कि दीपावली मेला विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का एक सशक्त माध्यम है। इस प्रकार के आयोजन न केवल उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करते हैं बल्कि विद्यालय और समाज के बीच एकता और सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।
विद्यालय के चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीपावली मेला हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को विकसित करते हैं। विद्यालय परिवार सदैव ऐसे रचनात्मक आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहेगा।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिसर में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। सभी प्रतिभागियों को विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
फोटो कैप्शन 05 व 06: खुशियों और उमंग से भरे दीपावली मेले का आनंद उठाते विद्यार्थी
दीपावली सादगी से मनाते हैं समाजसेवी
-मन में उमंग एवं जोश है
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कनीना की आवाज। दीपावली के पर्व को सादगी से मनाने वालों की संख्या अधिक है। क्षेत्र के विभिन्न समाजसेवियों से दीपावली मनाए जाने के बारे में परिचर्चा की तो सभी ने दीपावली को सादगी से मनाए जाने, हवन करने, जनसेवा करने तथा दान पुण्य करने पर बल देते हैं। इस संबंध में विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों से इस संबंध में बात की गई तो उनके विचार अलग अलग उभरकर आए-
***दीपावाली हिंदुओं का पवित्र एवं महान पर्व है। यह पर्व हमें एकता एवं भाईचारे की शिक्षा देता है। वे अपने परिवार में अति सादगी से तथा बगैर पटाखे चलाए परिवार के संग मनाते हैं। इस दिन पूरा परिवार कुछ धन निकालकर जनहित में खर्च करता है। वे सभी से पटाखे रहित, सादगी से मनाने की अपील करते हैं। वे अपने साथियों को सलाह देते हें कि सादगी से तथा घर की मिठाई खाकर दीपावली मनाए। उनका कहना है कि इस दिन खोखले मनोरंजन न करके बेहतर कार्य, परहित के कार्य, जनसेवा करके, पौधारोपण करके मनाते हैं।
--- पूर्व मुख्याध्यापक, सतीश कुमार
दीपावाली हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार है और इस दिन हमें शुभ काम करना चाहिए। प्रदूषण करने की बीमारी इसी दिन से जुड़ी है। प्रदूषण विश्वव्यापी बीमारी है जो हर इंसान पर बुरा प्रभाव डाल रही है। ऐसे में पटाखे नहीं चलाने चाहिए। मैं स्वयं भी प्रदूषण नहीं करूंगा और दूसरों को भी प्रदूषण करने से रोकूंगा। एक ओर पूरा देश महात्मा गांधी के सपनों के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन में लगा है और दूसरी ओर यदि प्रदूषण होता है तो सांस की अनेकों बीमारियां फैल जाएंगी।
--सुनील कुमार शिक्षाविद
दीपावली के शुभ दिन हवन करके वातावरण को साफ सुथरा बनाने का प्रयास करूंगा और अपने साथियों को भी इस काम के लिए उत्साहित करूंगा साथ में अपील करता हूं कि जगह जगह इस दिन हवन आयोजित करके वातावरण को साफ सुथरा बनाने में अपना योगदान देवें।
---सत्येंद्र यादव, प्रसिद्ध आर्य समाजी-
दीपावाली को वर्षों से सादगी से मनाते आ रहे हैं। ईश्वर स्तुति करते हैं। तत्पश्चात पूरा परिवार मिलकर मिठाई खाता है। बाजार की बनी मिठाइयां परिवार नहीं खाता है। पूरे परिवार के बच्चे पटाखे नहीं चलाते बल्कि पटाखों पर जो खर्च आता है उतना ही पास की अपंग गौशाला में दान कर दिया जाता है। इससे मन को अति प्रसन्नता होती है। वे अपने साथियों को भी इसी तरीके से दीवाली मनाने की सलाह देता हूं। दीवाली के पर्व पर जो प्रदूषण होता है उसका कुप्रभाव मरीजों के शरीर पर कई दिनों तक पड़ता रहता है।
--- रमेश कुमार भारद्वाज, समाजसेवी
फोटो कैप्शन:सतीश कुमार पूर्व मुख्याध्यापक, सत्येंद्र आर्य, सुनील कुमार ,रमेश भारद्वाज
क्षेत्र में मनाया गया धन तेरस का पर्व, खरीदे बर्तन
-बाजार में रही भारी भीड़
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में शनिवार को धनतेरस का पर्व मनाया गया। बाजार में बर्तनों की दुकानों पर भार भीड़ देखने को मिली। कई दिनों से बर्तनों की दुकानें सजी हुई थी और ग्राहक आने का इंतजार था।
कनीना क्षेत्र में दो दिनों पूर्व से ही दिवाली पर्व की धूम मची है। बाजारों में भारी रौनक देखने को मिली है वहीं बर्तनों की दुकानों पर लोगों ने बर्तन खरीदे।
दीपावली की रौनक के चलते बाजार सजने लगे हैं। दीपावली के पर्व को महज एक दिन ही बाकी हैं और बाजार में रौनक आने लगी है। बाजार सजने लगे हैं। अब तक ऐसा लग रहा था कि रौनक फीकी रहेगी किंतु अब धीरे-धीरे बाजार सजने लगे हैं। धीरे-धीरे बाजार में रौनक आने लगी है और भीड़ के चलते आवागमन में परेशानी होने लगी है। मुख्य मार्गों पर भी दुकानों की वजह से मार्ग संकीर्ण बन गए हैं।
बर्तन विक्रेता सुरेश कुमार ने बताया कि इस दिन का लंबे समय से इंतजार होता है। इस दिन अन्य दिनों की बजाय सबसे ज्यादा बर्तन बिकते हैं। इस दिन लगभग हर घर से बर्तन खरीदने के लिए बाजार आते हैं। बर्तन वालों के लंबी कतार देखने को मिली।
पंडित दिनेश का कहना है कि धन तेरस के दिन ही राक्षसों एवं देवताओं के बीच हुए समुद्र मंथन से अमृत निकला था जिसे पाने के लिए देवता अपना अपना बर्तन लिए बैठे थे और धनवंतरि सभी को अमृत बांट रहे थे। उसी दिन से माना जाता है कि धनवंतरि उन्हें अमृत बाटने आते हैं। इस दिन लोग नए बर्तन में धनवंतरि से अमृत पाने की इच्छा से बर्तन खरीदते हैं।
फोटो कैप्शन 03:बर्तन की दुकानों पर बर्तन बेचते एवं खरीदते लोग।
दीवाली के दीये जलाने हो गये शुरू
--पांच दिन चलने वाला महापर्व है
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कनीना की आवाज। दीपावली कोई एक त्योहार नहीं अपितु त्योहारों का समूह हैं। त्योहार से दो दिन पूर्व धन तेरस, नरक चतुर्दशी का त्योहार पूरे आवेग से आते हैं वही दीपावली से दो दिन पश्चात गोवर्धन पूजा एवं भैया दूज धूमधाम से मनाए जाते हैं। हिन्दुओं के लिए इन त्योहारों का अति महत्व है।
ग्रामीण अचल में धनतेरस के दिन से ही दीपावली के दीये जलाने शुरू कर दिए गये हैं। धनतेरस को बर्तन खरीदने शुभ माने जाते हैं।
दीपावली से एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी का त्योहार श्रद्धा व उल्लास में मनाया जाता है। इस दिन सूर्योदय पूर्व स्नान Ÿोष्ठ माना जाता है। इस दिन को छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी असुर नरकासुर की याद दिलाता है। अति अभिमानी व देवताओं को दु:खी करने वाला नरकासुर इसी दिन भगवान् श्रीकृष्ण के हाथों मारा गया था।
दीपावली अंधेरे रूपों को मिटाने वाली तथा प्रकाशरूपी पुण्य को भेजने वाला महान त्योहार है। भगवान् राम 14 वर्षों का वनवास काटकर, रावण पर विजय पाकर, अयोध्या लौटे तो घी के दीये जलाकर तीन दिन खुशियां मनाई थी। तभी से यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। अमावस्या के अंधेर को दीप जलाकर नष्ट कर दिया जाता है।
दीपावली के अगले दिन अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है। इसे गोवर्धन पूजा नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मन्दिरों में खिचड़ी व क़ी बंाटी जाती है जिसे प्रत्येक जन चाव से खाता है। गोवर्धन पूजा से जुड़ा है श्री कृष्ण व इन्द्रदेव की कथा। गवान् श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अंगुली पर उठाया था।
दीपावली के दूसरे दिन भैया दूज का त्योहार उल्लास से मनाया जाता है। भाई बहन के अटूट प्रेम को त्योहार दर्शाता है। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने भाई को बुलाकर आदर सत्कार करती हैं और तब तक अन्न को ग्रहण नहीं करती जब तक उसे उसके भाई के दर्शन न हो जाए। बहन भाई को टीका करती है और लम्बी आयु की कामना करती है। इस दिन बहनें यमराज की पूजा कर अपने भाई को लम्बी आयु के लिए व्रत भी रखती हैं।
कैमला सरकारी स्कूल में लगा दीवाली मेला
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कनीना की आवाज। राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में दीपावली मेला का आयोजन विद्यालय स्तर पर किया गया जो बड़ा ही आकर्षक, रोचक, भव्य और दिव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होशियार सिंह सेवानिवृत्ति मुख्याध्यापक इसराना वाले रहें। अमृतलाल स्पेशल टीचर कनीना की विशेष रूप से उपस्थित रहीं सभी विद्यार्थियों ने सुन्दर ,आकर्षक पेंटिंग, दीपक बनावट प्रतियोगिता फैंसी ड्रेस और कक्षा कक्ष की सजावट आदि का आयोजन किया गया।
मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने सभी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन हमें जीवन जीने की सीख देते हैं। दीपावली का पावन पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान ने श्रीराम के जीवन वृतांत का रहस्य विस्तार से बताया कि जीवन का सच्चे अर्थ में जो मानवता की सेवा करना ,परस्पर आपसी मेलजोल,भाईचारे और मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा हर पर्व हमें देते हैं।
एमडीएम इंचार्ज मनवीर सिंह तंवर ने विद्यार्थियों के लिए स्वादिष्ट और विशेष भोजन की व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया और भरपूर स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया। कार्यक्रम की सभी ने सराहना की और सभी विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और उनका मनोबल को बढ़ाने के लिए सभी को विद्यालय की ओर से पुरस्कृत किया गया।
इस अवसर पर मनवीर सिंह तंवर ,देवेंद्र यादव, सुनील कुमार शास्त्री, सुनील कुमार डीपीई ,राजेश कुमार, गरिमा रानी प्राथमिक अध्यापिका, सुबे सिंह, सुनील कुमार चौकीदार, तारामणि देवी, बबली देवी, पिंकी देवी, शारदा देवी, सावित्री देवी आदि उपस्थित रहें।
फोटो केप्शन 01: विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए होशियार सिंह
दीपावली पर्व 20 अक्टूबर को पड़ेगा -शितिकंठा
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कनीना की आवाज।ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिराज शितिकांठा का कहना है कि सूर्य सिद्धांत के अनुसार ही पंचांग निर्माण की हमारी ऋषि परंपरा रही है। धर्म शास्त्र के अनुसार ही हमारे निर्णय पूर्णत: फलित होते हैं, इसी को आधार मानते हुए देखें तो 20 अक्टूबर 2025 को 03:48 मिनट पर अमावस्या लग रही है। हमारे यहां प्रदोष व्यापिनी अमावस्या ही दीपावली पर ग्राह्य होती है जो कि अगले दिन शाम 5:55 बजे तक रहेगी।
ऐसे में धर्मशास्त्र और ज्योतिषीय सिद्धांत के आधार पर दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है।
देवज्ञ पंडित ऋषि राज शितिकंठा ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
उनके आगमन और धन-समृद्धि की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है। पहले दिन दीपावली पर, कौवे को परमात्मा का दूत होने की मान्यता के कारण प्रसाद दिया जाता है। दूसरे दिन
दीपावली पर, कुत्तों को अपनी ईमानदारी के लिए भोजन दिया जाता है। तीसरे दिन गोरु त्योहार
में, गाय और बैल को सजाया जाता है। लक्ष्मी पूजा की जाती है। इस दिन व्यापारी अपने सारे खातों को साफ कर उन्हें समाप्त कर देते हैं। लक्ष्मी पूजा से पहले, मकान सजाया जाता है; लक्ष्मी पूजा के दिन, तेल के दीयों को दरवाजे और खिड़कियों के पास जलाया जाता है। चौथे दिन को गोवर्धन पूजा होती है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है, जो दीपावली महापर्व से चौथा दिन होता है। यह त्योहार 22 अक्टूबर को पड़ेगा। पांचवें और अंतिम दिन को भैया दूज कहा जाता, यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह पर्व भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। भाई बहनों से मिलते हैं। भाई के माथे पर टीका लगाया जाता है। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं । यह त्योहार 23 अक्टूबर को पड़ेगा।
पंडित ऋषिराज ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
उनके आगमन और धन-समृद्धि की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
फोटो कैप्शन : ऋषिराज
यूरो स्कूल कनीना में रंगोली बनाओ व दीप सजाओ प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
--अव्वल रहने वाले किये पुरुस्कृत
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कनीना की आवाज। यूरो स्कूल बेहतर शिक्षा के साथ--साथ उत्तम संस्कार एवं हमारी संस्कृति और धार्मिक त्योहारों के प्रति गहरी आस्था रखने में भी सर्वदा अग्रणीय है।
आज स्कूल प्रांगण में कक्षा पहली से आठवीं तक रंगोली बनाओ और दीप सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता अंतर सदनीय स्तर पर हुई। चारों सदनों के विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस प्रतियोगिता में बच्चों ने अपने--अपने कला कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन प्रतियोगियों में प्रथम आईंसटाईन सदन, द्वितीय न्यूटन सदन, तृतीय डार्विन सदन व चौथे स्थान पर एडिसन रहा। इस शुभ अवसर पर प्राचार्य सुनील यादव व उप-प्राचार्या संजू यादव ने सभी विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को इस दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी। साथ ही उन्होंने बताया कि हमारा भारत वर्ष देश सदा से ही अपनी परंपराओं व संस्कृति को यथा विधि संभाले हुए है। साथ ही उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम की तरह आदर्शवादी व संस्कारी होना चाहिए। हमें भी उनके पद चिन्हों पर चलकर अपने माता-पिता का आदर व सम्मान करना चाहिए।
इस अवसर पर कार्डिनेटर नवनीत लावणिया, रि
तू तंवर, तनू गुप्ता, सुमन यादव व स्कूल के समस्त सदस्यगण उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01:दीप जलाते विद्यार्थी
Friday, October 17, 2025
निजी स्तर पर खरीद पहुंची 120880 क्विंटल
-अब तक 4113 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज। कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 120880 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा 1900 रुपये से लेकर 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 120880 क्विंटल हो चुकी है। शुक्रवार को 504 किसान 16652 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 4113 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
बीआर स्कूल सेहलंग में दिवाली मेले का होगा आयोजन
-लगेंगे विभिन्न पंडाल
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कनीना की आवाज। बीआर स्कूल सेहलंग में 18 अक्टूबर को दिवाली मेले का आयोजन किया जाएगा। यह मेला विद्यालय परिवार के साथ-साथ विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के लिए एक विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। आयोजन में सांस्कृतिक, शैक्षिक और मनोरंजन से जुड़ी विविध गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी, जो सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
मेले में आगंतुकों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले लगाए जाएंगे, जिनमें बच्चे और बड़े सभी आनंद ले सकेंगे। स्वादिष्ट मिठाइयों के स्टॉल पर पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। सजावट से जुड़े आकर्षक स्टॉल विद्यालय की सृजनात्मकता को दर्शाएंगे। फूड स्टॉल पर स्थानीय और आधुनिक दोनों प्रकार के व्यंजन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही इलेक्ट्रानिक बाइक और स्कूटर की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए मेहंदी स्टॉल पर मनमोहक डिजाइन प्रस्तुत किए जाएंगे।
विद्यार्थियों द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई विज्ञान प्रदर्शनी इस मेले की मुख्य विशेषता होगी। इसमें छात्र अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचार को प्रदर्शित करेंगे।'बेस्ट आउट ऑफ वेस्टÓ गतिविधि के माध्यम से छात्र बेकार की चीजों से उपयोगी व आकर्षक वस्तुएँ बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करेंगे। इसके अतिरिक्त, सजावटी दीयों के स्टॉल पर विद्यार्थियों द्वारा हाथ से बनाए गए रंग-बिरंगे दीये प्रदर्शित और विक्रय किए जाएंगे, जो दीपावली की पारंपरिक भावना को जीवंत करेंगे।
विद्यालय की प्राचार्या ज्योति भारद्वाज ने बताया कि दिवाली मेला विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने के साथ-साथ विद्यालय और समुदाय के बीच संबंधों को मजबूत बनाने का एक उत्कृष्ट अवसर है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में संगठन, अनुशासन और नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं।
विद्यालय के चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने कहा कि यह मेला विद्यालय की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देने का माध्यम है। उन्होंने सभी अभिभावकों और स्थानीय निवासियों से अपील की कि वे इस उत्सव में शामिल होकर बच्चों का उत्साहवर्धन करें। उन्होंने बताया कि यह दिवाली मेला विद्यालय और समुदाय के लिए एक यादगार अवसर साबित होगा।
विद्यालय प्रशासन ने सभी को इस मेले में पधारकर उत्सव की खुशियों में सहभागी बनने का आमंत्रण दिया है।
फोटो कैप्शन 08: बी आर स्कूल सेहलंग में आयोजित होने वाले मेले की तैयारी करते हुए।
दीपावली पर्व नहीं महापर्व है
-पंचपर्वों का महापर्व है दीपावली
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कनीना की आवाज। दीपावली का पर्व एक पर्वों का समूह है। इस पर्व से पहले तथा बाद में भी दीपावली की धूम रहती है। शनिवार से ही दीपावली पर्व की शुरूआत हो जाएगी। धन तेरस का पर्व मनाया जा रहा है जिसके बाद तो एक के बाद एक पर्व लगातार चलते रहेंगे।
ग्रामीण अचल में 10 नवंबर धन तेरस के दिन से ही दिवाली के दीये जलाने शुरू कर दिए जाते हैं। इस दिन माना जाता है कि बर्तन खरीदना लाभकारी है। यही कारण है कि इस दिन बर्तनों की दुकानों पर भारी भीड़ मिलती है। धन तेरस के दिन ही बर्तन क्यों खरीदे जाते हैं। इसके विषय में माना जाता है कि देवताओं और दानवों के द्वारा समुद्र मंथन के पश्चात इसी दिन ही धनवंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र से बाहर आए थे। अमृत पाने के लिए देवता बर्तन लेकर दौड़े थे। इसी कारण से यह दिन धनवंतरि त्रयोदशी कहलाता है। लोगों का मानना है कि धनवंतरि इस दिन ही सभी को अमृत बांटते हैं और अमृत पाने की लालसा को लेकर नए बर्तन खरीदे जाते हैं। प्रार्थना की जाती है कि उनका यह नया बर्तन अमृत से भरा रहे और परिवार खुश एवं खुशहाल रहे। वैद्य के लिए यह दिन अति शुभ माना जाता है।
दिवाली के एक दिन पूर्व यानी 18 अक्टूबर नरक चतुर्दशी व छोटी दीपावली का त्योहार आएगा। यह पर्व श्रद्धा एवं उल्लास से मनाया जाता है। इस दिन सुबह सवेरे स्नान करना लाभप्रद माना जाता है। अत: लोग सूर्योदय से पूर्व ही स्नान करते हैं। इस पर्व को ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी दिवाली का पर्व कहा जाता है। नरक चतुर्दशी का पर्व असुर नरकासुर की याद दिलाता हैं। अति अभिमानी और देवताओं को सताने वाला नरकासुर राक्षस का भगवान् श्रीकृष्ण ने इसी दिन वध किया था। कहीं मृत्यु का देवता उन्हें नरक न प्रदान करे। इस भय के मारे लोग यमराज की पूजा करते हैं। इसे दूसरे दिन की दिवाली भी कहा जाता है।
19 एवं 20 अक्टूबर दिवाली का पर्व अंधेरे को मिटाने वाला तथा प्रकाश रूपी पुष्प भेजने वाला हिन्दुओं का महान पर्व है। जब भगवान् श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास भेजा गया था तभी से प्रजाजन अति दु:खी थे और पल.पल उनको याद करते रहते थे। आखिरकार एक दिन रावण ने सीता का ही हरण कर लिया और उन्हें लंका ले गया। हनुमान की सहायता से जब सीता का पता लगाया तो भगवान् श्रीराम ने लंका पर धावा बोलकर रावण का वध कर दिया जिसे दशहरा नाम दिया गया । उस दिन पश्चात श्रीराम अयोध्या के लिए लौट चले थे। जब श्रीराम अयोध्या लौटे तो लोगों ने खुशी के मारे तीन दिन देशी घी के दीये जलाए थे। तभी से यह त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। अमावस्या के दिन घोर अंधेरा होता है किंतु दीप जलाकर इस अंधेरे को नष्ट कर दिया जाता है। इस त्योहार पर घरों और आवास को चमकाया जाता है। लक्ष्मी सरस्वती और गणेशजी की पूजा की जाती है।
दिवाली के अगले दिन अर्थात 21 अक्टूबर अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। इसे गोवर्धन नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मंदिरों में खिचड़ी व कढ़ी बांटी जाती हैं जिसे प्रत्येक जन चाव से खाता है। गोवर्धन पर्व से जुड़ी है श्रीकृष्ण और इन्द्र देव के बीच का प्रसंग। एक बार इंद्र देव भगवान् श्रीकृष्ण से कुपित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। गोकुल में इतनी भारी वर्षा देखकर ग्रामीण भयभीत हो गए और चारों ओर त्राहि.त्राहि मच गई। जीव जल में डूबकर मरने लगे तो ग्रामीण दौड़कर भगवान् श्रीकृष्ण के पास आए। भगवान् श्रीकृष्ण ने उस वक्त गोवर्धन पर्वत ही अपनी अंगुली पर उठा लिया और गोकुलवासियों को उसके नीचे आने का आदेश दिया। इस प्रकार इंद्र का गर्व चूर.चूर हो गया और खुश होकर ग्रामीणों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इसी दिन आजकल गाय आदि की पूजा करने का विधान भी है। विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जा रही है।
दिवाली के दूसरे दिन यानी 22 अक्टूबरको भैया दूज नाम से जाना जाता है। यह पर्व भाई बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता है। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने भाई को बुलाकर उनका आदर सत्कार करती हैं। तथा उनके दर्शन किए बगैर अन्न भी ग्रहण नहीं करती हैं। बहन भाई को तिलक करके उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए यमराज की पूजा करती हैं। इस प्रकार दिवाली का पर्व पूरे पांच दिनों तक चलने वाला पर्व हैजिसका महत्व आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में उतना ही है जितना पहले कभी होता था।
दो दिवसीय दिव्यांग शिविर संपन्न
--आरपीडब्ल्यूडी एक्ट पर डाला प्रकाश
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कनीना की आवाज। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के तत्वाधान में दिव्यांग जागरूकता शिविर के दूसरे दिन प्राचार्य सुनील खुडानिया ने सभी को संबोधित करते हुए कार्यक्रम का आगाज किया। शिविर में नारनौल से आए एपीसी डा. विक्रम ने सभी अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित किया। रिसोर्स पर्सन धर्मेंद्र ने आरपीडब्ल्यूडी एक्ट/दिव्यांगता के अधिकार पर प्रकाश डाला तथा सभी अभिभावकों ओर शिक्षकों को इससे अवगत कराया। प्राचार्य सुनील खुडानिया ने दिव्यांग के प्रकार पर प्रकाश डाला। इस शिविर में अमृत सिंह राघव विशेष शिक्षक सरिता विशेष शिक्षिका विशेष रूप से उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 06: प्राचार्य श्री खुडानिया अभिभावकों को जानकारी देते हुए।
सतवीर और राम सिंह ने गोद ली दो-दो गायें, श्रीकृष्ण गौशाला को 11-11 हजार की राशि भेंट
--भगत सिंह प्रधान ने किया अभिनंदन
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कनीना की आवाज। शुक्रवार को श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्र के कई श्रद्धालुओं ने गोसेवा में अपना योगदान दिया। इस अवसर पर कनीना निवासी सतवीर ने दो गायें गोद लेकर 11,000 रुपये की राशि, वहीं राम सिंह कनीना ने भी दो गायें गोद लेकर 11,000 रुपये का सहयोग किया। गौसेवकों के इस योगदान का स्वागत करते हुए श्रीकृष्ण गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव ने कहा कि क्षेत्र के लोग अब धीरे-धीरे गौशाला के विकास के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में श्रीकृष्ण गौशाला को हाइटेक और आदर्श गौशाला के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां गायों के लिए उत्तम चारे, चिकित्सीय सुविधा और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था होगी। भगत सिंह यादव ने यह भी कहा कि गौशाला में समय-समय पर धार्मिक, सामाजिक और जनजागरण से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जाता है ताकि अधिक से अधिक लोग गोसेवा से जुड़ सकें। कार्यक्रम में मास्टर रामप्रताप, दिलावर सिंह, सूबेदार दीनदयाल, सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, मदनलाल गेरा, तोताराम ठेकेदार, रामकिशन, सूबेदार दुलीचंद यादव, दिनेश यादव, सूबेदार बद्रीनारायण, मनीष जांगड़ा, राज सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 07: गायों को गोद लेते हुए।
होलीवाला जोहड़ बन गया आफत
-साल भर बिखेरता रहता है गंदा जल
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कनीना की आवाज। होलीवाला जोहड़ पर गंदे पानी की निकासी के लिए नगर पालिका प्रशासन ध्यान देना चाहिए। ये विचार दीपक चौधरी पार्षद वार्ड 2 ने व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि जहां दीपावली के अवसर पर एक तरफ तो नगर के सभी वार्डों में सफाई अभियान चलाया जा रहा है दूसरी ओर पिछले एक महीने से होलीवाला जोहड़ का पानी आम रास्ते जल भराव की समस्या से लोग परेशान है जो कि गंदा पानी आने जाने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों के लिए समस्या बना हुआ है। नगर पालिका प्रशासन और प्रधान इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। बार-बार अवगत कराने के बावजूद भी इस पानी की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि होलीवाला जोहड़ की छटाई के लिए टेंडर भी लगा हुआ है। जब तक इसकी छटाई नहीं होती तब तक अस्थाई रूप से इस पानी का समाधान किया जाए। ताकि आमजन और स्कूली बच्चों और महिलाओं को आने जाने में परेशानी ना हो आवागमन के लिए पर साफ करवाया जाए ताकि दीपावली के अवसर पर साफ सफाई की व्यवस्था से आसपास के आम लोगों को परेशानी ना हो।
फोटो कैप्शन 09: गंदा जल दिखाते हुए दीपक चौधरी
अतर सिंह कैमला को बनाया ट्रस्ट का प्रदेश उपाध्यक्ष, मिली बधाइयां
--अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट के बने हैं उपाध्यक्ष
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कनीना की आवाज। ठाकुर अतर सिंह तंवर कैमला को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष हरियाणा नियुक्त किया है। उनकी संगठन के प्रति निष्ठा और लगन देखते हुए संगठन ने प्रदेश उपाध्यक्ष हरियाणा नियुक्ति की है।
उल्लेखनीय है कि अतर सिंह इलाके के बड़े जमींदार और कनीना मंडल अध्यक्ष भाजपा रह चुके हैं। उनके पिता गांव के सरपंच रह चुके हैं तथा बैंक के चेयरमैन और एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद किया जाता है। उनकी बेटी एमबीबीएस है और एक बेटा इंजीनियर और दूसरा वकालत पूरी चुका है। उनके उपाध्यक्ष बनाये जाने पर विभिन्न लोगों ने बधाई दी है तथा अतर सिंह ने मुख्यमंत्री सहित भाजपा के पदाधिकारियों का आभार जताया है।
पवन कुमार को मिली संस्कृत में पीएचडी की उपाधि
--कनीना मंडी निवासी है पवन कुमार
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कनीना की आवाज। कनीना निवासी वार्ड नंबर 07 से डा. पवन कुमार को मिली पीएचडी की उपाधि।
यह प्रतिष्ठित उपाधि बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय रोहतक के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के दौरान प्रदान की गई। यह समारोह विश्वविद्यालय और उपाधि प्राप्त कर्ताओं दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर था। समारोह में हरियाणा राज्य के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विशिष्टअतिथि हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महंत बालक नाथ योगी की उपस्थिति में संस्कृत विषय में पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर के मौके पर एसडीएम विजय कुमार यादव, मास्टर सत्यवीर सिंह, डॉ दिनेश कुमार, जेपी कोटिया, उमेश यादव, प्रवीण सेन, राजकुमार यादव, देवेंद्र गोयल,शिव कुमार,तेजपाल सेन, मुकेश कुमार,राजेश कुमार, अजय यादव आदि ने पवन कुमार को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
फोटो कैप्शन 04: पवन कुमार पीएचडी उपाधि लेेते हुए।
नपा के कर्मियों को दी दीवाली की शुभकामनाएं
--अंकुर यादव
के नेतृत्व में हुआ कार्यक्रम
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कनीना की आवाज। दीवाली पर कनीना नगरपालिका के कर्मचारियों को शिवा इंडस्ट्री की तरफ से दीवाली की हार्दिक बधाई दी। इस मौके पर कनीना नगरपालिका के सचिव और समस्त वार्ड पार्षद मौजूद रहे।
कंपनी के द्वारा भेजे गई भेंट महेंद्र सैन द्वारा बाटे गए। सभी कर्मचारियों के द्वारा साफ सफाई में दिया जाने वाला योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है। ये विचार अंकुर यादव कनीना चेयरमैन शिवा ग्रुप के हैं। उन्होंने कहा कि जो जान को जोखिम में डालकर सेवा करते हैं उनको कभी नहीं भुलाना चाहिए।
फोटो कैप्शन 05: नगरपालिका कर्मियों को दीवाली की शुभकामनाएं देते हुए।
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