बंदरों को छुड़वाया जाए दूर दराज
- वापस आने की बनी रहती है शंका
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कनीना की आवाज। यूं तो कनीना में नगर पालिका द्वारा बंदरों को पकड़वाने का काम चला रखा है किंतु अब लोगों की मांग उठने लगी है कि ये बंदर वापस आ जाते हैं। ऐसे इनको दूर दराज छुड़वाया जाए।
कनिष्ठ अभियंता राकेश कुमार नगर पालिका ने बताया कि सोमवार को भी 36 बंदर पकड़े हैं जिनमें 8 मेल 22 फीमेल तथा छह छोटे बंदर हैं। बंदर पकडऩे का कार्य जारी है। जब तक बंदर कनीना से खत्म नहीं हो जाएंगे तब तक पकडऩे का कार्य जारी रहेगा।
बथुआ के विभिन्न शाक एवं सब्जियों बनाई जा रही हैं ग्रामीण क्षेत्रों में
--ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर प्रयोग किया जाता है
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कनीना की आवाज। सब्जी महंगी होने के कारण किसान वर्ग न केवल खेतों में खरपतवार के रूप में उगने वाले बाथू/बथुआ को सब्जी के रूप में प्रयोग कर रहे हैं वहीं खेतों से उखाड़कर दूसरों को भी खाने की प्रेरणा दे रहे हैं। अब तो बाजार में भी 60 रुपये किलो बिकता है।
बाथू मानव के काम तो आता है वहीं पशुओं के लिए भी उत्तम हरे चारे का काम करता है। सर्दियों में रबी फसल के साथ अपने आप उगने वाले इस हरे भरे शाक को ग्रामीण परिवेश के लोग बाथू, बथुआ या हरा नाम से पुकारते हैं जिसे आयुर्वेद में कई गुणों की खान व औषधियों में काम में लाया जाता है। इस संबंध में किसानों से चर्चा की गई-
** बथुआ का किसी जमाने में गरीब तबके के लोग ही प्रयोग में लाते थे जो महंगी बाजार की सब्जी खरीदने में असमर्थ थे किंतु आजकल बदलाव आ गया है और अमीर एवं रोगी जनों के लिए रामबाण दवा का काम कर रहा है विशेषकर पेट की बीमारी एवं एनिमिया के शिकार इसे ढूंढते फिरते हैं।
--सूबे सिंह, किसान
वैद्य बालकिशन का कहना है कि पेट की बीमारियों एवं खून की कमी को दूर करने में सहायक है। कीटनाशकों के प्रयोग तथा आधुनिक कृषि के यंत्रों द्वारा जुताई के चलते बाथू की मात्रा कम होती जा रही है। दिसंबर से जनवरी माह में किसान खेतों में निराई करते हैं और इस शाक को उखाड़ फेंकते हैं क्योंकि यह पैदावार में बाधक बन जाता है। डाक्टर और हकीम इसे खून की कमी वाले व्यक्तियों और रक्त शोधक के रूप में उपयोग करने की सलाह देते हैं। इसके पत्ते गहरे हरे तथा टहनियां भी हरी होती हैं।
--वैद्य श्रीकिशन, करीरा
वे इसे रायता, देसी सब्जी बनाने में प्रयोग कर रहे हैं वहीं आटे में मिलाकर रोटियां बना रहे हैं वहीं इससे जायकेदार पराठे भी बना रहे हैं। ये व्यंजन उनको बहुत अधिक भा रहे हैं। यही नहीं अपितु वे सरसों का साग व अन्य खेतों में पाई जाने वाली हरी सब्जियां प्रयोग में ला रहे हैं। खरपतवार के रूप में अपने आप खेतों में उगने वाला बाथू ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शाक माना जाता है। कई रूपों में मानव के काम आता है वहीं पशुओं के लिए भी उत्तम हरे चारे का काम करता है। सर्दियों में फसल के साथ अपने आप उगने वाले इस हरे भरे शाक को ग्रामीण परिवेश के लोग बाथू,बथुआ या हरा नाम से पुकारते हैं।
--निरंजन ,किसान करीरा
बाथू आजकल किसानों के लिए आय का साधन बनता जा रहा है। इसके गुणों को देखते हुए अमीर जन इसे बाजार से खरीद कर लाते हैं और बड़े ही चाव से खाते हैं जिससे सिद्ध होता है कि बीते जमाने की गरीबों की सब्जी अब अमीरों का भोजन बनती जा रही है। बाजार में किसान इसे उखाड़कर बेच रहे हैं और आमदनी कर रहे हैं।
खरपतवार के रूप में अपने आप खेतों में उगने वाला बाथूÓ ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शाक माना जाता है। कई रूपों में मानव के काम आता है वहीं पशुओं के लिए भी उत्तम हरे चारे का काम करता है। सर्दियों में फसल के साथ अपने आप उगने वाले इस हरे भरे शाक को ग्रामीण परिवेश के लोग बाथू, बथुआ या हरा नाम से पुकारते हैं जिसे आयुर्वेद में कई गुणों की खान व औषधियों में काम में लाया जाता है। यह बहेत तेजी से बढ़ता है तथा एक खरपतवार है।
-बबिता, गृहिणी
फोटो कैप्शन 08:बथुआ
साथ में श्रीकिशन करीरा ,सूबे सिंह, निरंजन,बबिता
कनीना में पंचायत समिति की दुकानों को खाली कराने को लेकर बैठक
-प्रभावित दुकानदारों को वैकल्पिक स्थान देने का आश्वासन
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कनीना की आवाज। उपमंडल के बीडीपीओ कार्यालय में सोमवार को बीडीपीओ नवदीप कुमार और पंचायत समिति अध्यक्ष जयप्रकाश यादव की अध्यक्षता में पंचायत समिति की भूमि पर बनी दुकानों को खाली कराने को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन दुकानदारों को बुलाया गया जिनकी दुकानें आगामी निर्माण कार्यों की वजह से प्रभावित हो रही हैं। बीडीपीओ ने बताया कि कनीना में 54 करनाल 16 मरला भूमि पर लघु सचिवालय व न्यायिक परिसर का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें से 31 करनाल 3 मरला जमीन पंचायत समिति के अधीन आती है। इसी भूमि पर बीते 40-45 वर्षों से चल रही कई दुकानें निर्माण क्षेत्र में आती हैं, जिन्हें हटाया जाना अनिवार्य हो गया है। पंचायत समिति द्वारा दुकानदारों को पहले नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद दुकानदार हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने 8 फरवरी 2024 को सक्षम अधिकारी को निर्णय करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 21 अप्रैल 2025 को एक बैठक कर प्रस्ताव पारित किया गया और 5 जून को नई बैठक बुलाई गई। सोमवार की बैठक में समिति ने दुकानदारों को भरोसा दिलाया कि जिनकी दुकानें हटाई जा रही हैं, उन्हें अन्य स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। साथ ही, पंचायत समिति की जो भी उपलब्ध भूमि होगी, वहां प्रभावित दुकानदारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक के बाद दुकानदारों ने बताया कि वे मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात कर अपनी बात रखेंगे।
फोटो कैप्शन 05: दुकानदारों की बीडीपीओ के साथ बैठक
कैम्पेन कल्पना मिशन में बीएमडी फॉउंडेशन लगातार गतिशील
-गांव नांगल माला में बेटी के जन्म उत्सव पर कुआं पूजन कार्यक्रम हुआ आयोजित
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कनीना की आवाज। कैम्पेन कल्पना मिशन के तहत बीएमडी फाउंडेशन द्वारा गत देर शाम गांव नांगल माला में पूजा धर्मपत्नी अमित की नवजात बेटी नक्षिता के जन्मोत्सव पर कुआं पूजन के अवसर पर परिवार को सम्मानित किया गया।
बीएमडी फाउंडेशन से महिला विंग संयोजिका एडवोकेट रेखा यादव एवं चेयरमैन लक्की सीगड़ा ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर नवजात बेटी के माता-पिता को प्रशस्ति-पत्र देकर परिवार के इस प्रयास की सराहना की।
एडवोकेट रेखा यादव ने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़कर परिवार के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन कर रही है। हमारी भारतीय संस्कृति में बेटियों को देवी स्वरूपा माना गया है। हमारे यहां कभी नव दुर्गा के रूप में तो कभी माता लक्ष्मी, माता सरस्वती के रूप में बेटियों की पूजा की जाती है। समाज में अब पहले से बेटियों को लेकर काफी जागृति आई है। इसी का परिणाम है कि बेटे के जन्म पर जो खुशियां और महोत्सव मनाया जाता है वैसा ही महोत्सव अब बेटी के जन्म पर भी मनाया जाने लगा है।
संस्था के चेयरमैन लक्की सीगड़ा ने कहा कि गत कई वर्षों से जिले में लिंगानुपात में निरंतर सुधार हो रहा है फिर भी कुछ जगह पर लिंग भेद और लिंग चयन की मानसिकता व्याप्त है जो कि बालिकाओं के जन्म और उनके अस्तित्व को जोखिम में डालता है। इस सोच के उन्मूलन के लिए हम सभी को कैंपेन कल्पना मिशन से जुडऩा होगा। कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई के लिए महिलाएं भी पुरुषों के बराबर जिम्मेदार है। भ्रूण हत्या से पहले महिलाओं को यह सोचना होगा कि उसने भी कन्या के रूप में ही जन्म लिया है। बेटियों के प्रति सामाजिक नजरिया बदलने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा।
नवजात बेटी के दादा शिव कुमार ने बताया कि 25 अक्टूबर के दिन उनके घर में बेटी का जन्म हुआ था। इस कुआं पूजन के दिन को एक यादगार और समाज में बिटिया के प्रति सकारात्मक सोच का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजन किया गया।
इस अवसर पर नवजात बेटी के दादा शिव कुमार, दादी लीला देवी, ताऊ लोकेश, ताई वन्दना, ममता, तन्नू,बाला एवं पिंकी सहित अन्य परिजनों ने भी पहुंचकर आशीर्वाद दिया।
फोटो कैप्शन 06: लड़की के जन्म होने पर सम्मान देते बीएमडी क्लब सदस्य
कनीना की प्रथम महिला पत्रकार को 15वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, हवन आयोजित
-गौशाला में दान पुण्य कर,पौधारोपण भी किया गया
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कनीना की आवाज। कनीना उप-मंडल की प्रथम महिला पत्रकार सुमन यादव की 15वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी, हवन आयोजित हुआ तथा विभिन्न स्थानों पर पौधे लगाये गये।
सुमन यादव पत्रकार को उनके निवास कनीना पर क्षेत्र के विभिन्न लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। घर पर हवन आयोजित हुआ। उनकी याद में निर्माण्णधीन कार्यालय परिसर में पौधे लगाया गया वहीं गौशाला में दानपुण्य किया तथा गायों को गुड़ खिलाया गया। वे राष्ट्रीय समाचारपत्र की लंबे समय तक पत्रकार रही थी वहीं विभिन्न पत्रिकाओं में लेखन का काम भी किया था। उन्हें बतौर लेखिका भी जाना जाता है।
इस मौके पर पालिका के पार्षद दीपक चौधरी ने कहा कि महिला होते हुए भी वो गंभीर प्रकृति की लेखिका एवं निष्पक्ष पत्रकार थी। उन्होंने सदा मर्यादित रहकर लेखनी का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि यूं तो सभी को कभी न कभी जाना ही पड़ता है किंतु असामयिक मौत ने उनकी लेखन की एवं बौद्धिक क्षमता को अधूरा कर दिखाया। उन्होंने कहा कि गंभीर एवं निर्भीक पत्रकारिता के गुणों से परिपूर्ण सुमन यादव के पदचिह्नों पर अन्य पत्रकारों को भी चलने का प्रयास करना चाहिए।
इस मौके पर भारत विकास परिषद के संरक्षक एवं पूर्व प्रधान कंवरसेन वशिष्ठ ने कहा कि एक महिला पत्रकार होते हुए भी उनकी लेखनी अति स्टीक एवं हर पहलू को उजागर करने वाली थी। उन्हें सच कहते हुए कोई हिचक नहीं थी। योगेश कुमार, रोहित कुमार, अनिल कुमार, कृष्ण कुमार, आशा यादव ने हवन में पूर्ण आहुति देकर उन्हें याद किया।
इस मौके पर पार्षद मोहन सिंह ने कहा कि महिला होते हुए भी निष्पक्ष लिखने में कोई चूक नहीं की। वे निडर पत्रकार रही है। उन्होंने कहा कि यूं तो सभी को कभी न कभी जाना ही पड़ता है किंतु असामयिक मौत ने उनकी लेखन एवं बौद्धिक क्षमता को नुकसान पहुंचाया है।
इस मौके पर डा. अजीत शर्मा झगड़ोली वाले, राकेश पार्षद वार्ड-6, नरेंद्र फौजी पार्षद, संत मोलडऩाथ ट्रस्ट प्रधान दिनेश कुमार, प्रोफेसर डा. हरिओम, भगत सिंह गौशाला प्रधान, राजकुमार कनीनावाल पूर्व चेयरमैन, सतीश जेलदार पूर्व प्रधान नगरपालिका युवा नेता महेश बोहरा ने भी अपने अपने विचार रखे और दिवंगत आत्मा को याद किया। उन्होंने कहा कि शायद ही भावी पीढ़ी विश्वास करेगी कि एक महिला होकर भी इतने बोल्ड कदम उठा सकती होगी। उनका मानना है कि वो एक महान लेखिका एवं पत्रकार थी। कई गणमान्य लोगों ने सुमन यादव को पुष्प अर्पित किए।
इस मौके कनीना प्रेष परिषद के दीपचंद यादव, इंद्रजीत शर्मा, जसवंत सिंह, अनिल शर्मा, आशा यादव ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर नवीन यदुवंशी, थान सिंह , अमीश कुमार, अमीशा, प्रदीप कुमार, हनुमान सिंह सहित कई गणमान्य जन मौजूद रहे।
अलवर में में पैदा हुई सुमन यादव की शादी कनीना के लेखक होशियार सिंह से हुई थी। अपनी शादी के महज आठ वर्षों के बाद ही गहरा घाव देते हुए कैंसर के चलते एक छोटे से पुत्र अमीश को छोड़कर सदा के लिए आंखों से ओझल हो गई। उनकी दो पुस्तकें मानव शरीर की कविताएं तथा आस्था प्रकाशित हो चुकी हैं।
उनके जीवन व चरित्र को उजागर करने वाली कनीना के लेखक डा. एचएस यादव की कृति कष्टों की देवी का दूसरा संस्करण एवं आइएसबीएन संस्करण प्रकाशित हो चुका है। जिसमें सुमन यादव का संक्षिप्त जीवन का चरित्र-चित्रण किया गया है। 2010 को वे स्वर्ग सिधार गई। उनकी पुण्यतिथि पर कनीना में नये कार्यालय परिसर में पौधारोपण किया। उनकी विभिन्न पत्र एवं पत्रिकाओं में लेख एवं कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी कहानी दरिंदा अति प्रसिद्ध हुई। हरियाणा सरकार ने उनकी कहानी पर प्रदेश स्तरीय द्वितीय पुरस्कार भी दिया था। उनके उदात चरित्र एवं गुणों को एक पुस्तक कष्टों की देवी में विस्तृत प्रकाशन किया गया है।
अलवर में दो अक्टूबर 1979 में पैदा हुई सुमन यादव की विभिन्न पत्र एवं पत्रिकाओं में लेख एवं कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने अपने काम को विराम नहीं दिया। एक ओर जहां गृहस्थ आश्रम वहीं दूसरी ओर पत्रकारिता एवं लेखन कार्य को बखूबी से निभाया। उन्होंने अपने पत्रकारिता के दौरान आम आदमी एवं किसान आदि की समस्याओं को अधिक उठाया।
कनीना पत्रकार परिषद की सदस्य सुमन यादव अपने जीवन के अंतिम समय में पीएचडी कर रही थी। एमए. इतिहास के अलावा पीजीडीसीए धारक सुमन यादव स्वभाव से अति मृदु एवं अति हिम्मत वाली साहसी स्त्री थी। उनकी हिम्मत की दाद उस वक्त देखने को मिली जब वे वर्ष 2008 में गंभीर रोग से पीडि़त हो गई। जिसकी परवाह न करते हुए भी उन्होंने अपना दैनिक कार्य विशेषकर समाचार संकलन एवं प्रेषण का काम नहीं छोड़ा। जब उन्होंने जग को छोड़ा उन्होंने अपने अंतिम समय के तीन वर्षों में घोर कष्ट सहन किए।
ट्रस्ट द्वारा उनके नाम पर एक लाइब्रेरी स्थापित की जा चुकी हैं जिसका निकट भविष्य में उद्घाटन किया जाएगा। उनके नाम पर बनाई गई ट्रस्ट के कार्यालय का निर्माण किया जाना है।
सुमन यादव घर गृहस्थी के काम के अलावा समय निकालकर लेखन कार्य में जुट जाना और वो भी उस वक्त जब भयंकर रोग ने उन्हें घेर रखा हो। कनीना कस्बा की पहली महिला पत्रकार को विभिन्न संस्थाओं ने उन्हें समय-समय पर सम्मानित भी किया था। उनके साहित्य को अभी प्रकाशित किया जाना बाकी है। लोग विशेषकर महिलाएं उनको आज तक नहीं भूला पाए हैं। वे सभी से शालीनता से बातें करती थी और सभी का मन जीत लेती थी।
इस मौके पर उनके परिजन शकुंतला देवी, अमीशा, आशा यादव, डा. होशियार सिंह, अमीश कुमार सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे।
टमाटर फिर से हुआ लाल
-80 रुपये किलो पहुंचा भाव
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कनीना की आवाज। ज्यों ज्यों सर्दी बढऩे लगी है त्यों त्यों टमाटर लाल होता जा रहा है। टमाटर का भाव बढ़ता ही जा रहा है। वर्तमान में 80 रुपये किलो तक टमाटर पहुंच गया है। अभी इसका और महंगा होने की संभावना है। इस वर्ष प्याज जहां सस्ती रही। हर वर्ष प्याज महंगी रहती है किंतु इस बार प्याज के भाव नहीं बढ़ पाये किंतु टमाटर के भाव बढ़ रहे हैं। सब्जी विक्रेता इंद्रजीत शर्मा रमेश, दिनेश आदि ने बताया कि विवाह शादियों के चलते भाव बढ़े हैं।
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