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Thursday, November 20, 2025



 





10000 रुपए रिश्वत लेते हुए पटवारी गिरफ्तार
-भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो गुरुग्राम की टीम ने पकड़ा रंगे हाथों
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कनीना की आवाज।
 कनीना में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो गुरुग्राम की टीम ने कनीना में कार्यरत पटवारी विक्रम सिंह को 10000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर ििलया और आगामी कार्रवाई कर दी है। यह कार्रवाई अमनदीप सिंह रामबास निवासी की लिखित शिकायत पर गुरुवार को शाम करीब 5 बजे की गई। ग्राम रामबास के अमनदीप का आरोप है कि पटवारी जमीन की तक्सीम और एक लोन संबंधित रिकार्ड के बदले 22,500 रुपए की रिश्वत मांग रहा था। मामले की गंभीरता को देखते अेमनदीप निवासी रामबास ने विजिलेंस टीम से संपर्क किया, जिसके बाद टीम ने उसे रंगे हाथों पकडऩे की योजना बलाई।
 शिकायतकर्ता ने पटवारी को जैसे ही 10000 रुपये की पहली किस्त दी तो तुरंत मौके पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो गुरुग्राम की टीम ने पहुंचकर पटवारी की तलाशी ली। तलाशी के बाद वही राशि उपलब्ध हो गई। इसके बाद कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
मिली जानकारी अनुसार पटवारी विक्रम सिंह के पास कोटिया का चार्ज था वही रामबास का भी अतिरिक्त चार्ज था।
फोटो कैप्शन 7: रिश्वत लेते गिरफ्तार पटवारी





माडल युवा ग्राम सभा का हुआ आयोजन
-जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में चला कार्यक्रम, लोगों का मन मोहा
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कनीना की आवाज।
 पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में सांस्कृतिक कला केंद्र में लोकतंत्र की पाठशाला कार्यक्रम के तहत माडल युवा ग्राम सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि करीरा के सरपंच प्रतिनिधि हवा सिंह रहे। विद्यालय के प्राचार्य बीएम रावत एवं मुख्य अतिथि कद्वारा दीप प्रज्वलित किया गया तथा राष्ट्रगान के कार्यक्रम के शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर शिक्षक विजय मोहन एवं देवी लाल सैनी के निर्देशन में बच्चों ने ग्राम सभा के विभिन्न पात्रोंकी भूमिका निभाई। बाल मुखिया के रूप में पंकज सोनी एवं सपना यादव के द्वारा कार्यक्रम की कार्रवाई संचालित की गई।
प्राचार्य डीएम रावत ने कहा कि हर इंसान को ज्ञान होना चाहिए कि किस प्रकार ग्राम सभा चलती है। ग्राम सभा में जहां सभी पात्रों ने लोगों का दिल जीत लिया। विशेष कर सरपंच की भूमिका निभाने राजेश सोनी और सचिव की भूमिका निभा रही छात्रा सपना ने अपनी मधुर वाणी से विद्यार्थियों को ग्राम सभा से रूबरू करवाया। इस मौके पर विभिन्न प्रस्ताव पास करना, किस प्रकार समस्या उठाई जाती है तथा ग्राम सभा में कैसे पांच संबोधित करते हैं, सभी बातों को ध्यान में रख करके माडल युवा ग्राम सभा आयोजित हुई। जहां ग्राम सभा में गांव करीरा के सरपंच प्रतिनिधि एवं विभिन्न पंच पहुंचे। उन्होंने भी अपने विचार व्यक्त किये।
इस मौके पर मिली जानकारी अनुसार पंकज सोनी सरपंच की भूमिका निभाई और सपना ने छात्र ने सचिन की भूमिका बेहतरीन ढंग से निभाई। वैसे तो सभी बाल कलाकारों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिनको विभिन्न पदाधिकारियों की भूमिका दी गई थी।
 इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि हवा सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम में केवल मनमोह लेते हैं अपितु हमें ग्राम सभा की याद दिल देते हैं। इस मौके पर जहां गांव करीरा  दिनेश पंच, रामावतार पंच, राजेश पंच ने मुख्य अतिथि बतौर भूमिका निभाई वही इस मौके पर प्राचार्य भी रावत ने कहा कि ग्राम सभा लोकतंत्र की सबसे छोटी कड़ी होती है और इसी कड़ी से जानकारी हासिल करके गांव के सरपंच तथा अन्य प्रतिनिधियों का योगदान का पता लगता है। कैसे ग्राम सभा होती है, क्या-क्या प्रस्ताव रखे जा सकते हैं, कैसे अपनी आवाज बुलंद की जाती है, विद्यार्थियों को समस्त जानकारी दी गई। इस मौके पर सभी प्रतिभागियों को प्राचार्य एवं मुख्य अतिथियों ने अपने हाथों से सम्मानित किया वही। मंच संचालन विक्रम सिंह पीजीटी कामर्स ने किया। समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
फोटो कैप्शन 5 व 6: माडल ग्राम सभा से संबंधित हैं




 नशा मुक्त हरियाणा: कनीना के गुढ़ा गांव में पुलिस का जागरूकता अभियान
--गुढ़ा में नशे के खिलाफ जागरूकता चौपाल का आयोजन
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कनीना की आवाज।
महेंद्रगढ़ पुलिस की एसपी पूजा वशिष्ठ के दिशा निर्देशानुसार गठित टीम ने कनीना क्षेत्र के गांव गुढ़ा में नशे के खिलाफ जागरूकता चौपाल का आयोजन किया। निरीक्षक शारदा और उनकी टीम ने ग्रामीणों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया।
निरीक्षक शारदा ने लोगों को नशे की बुराइयों के बारे में बताया और कहा कि नशा करने वाला न सिर्फ स्वयं की जिंदगी से खेलता है, बल्कि पूरे परिवार को भी बर्बाद करता है।
नशा सिर्फ स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी तबाह कर देता है। नशा करने वाला व्यक्ति अपराधों की ओर अग्रसर होता है, पारिवारिक संबंध टूटते हैं और आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है। यह युवाओं के भविष्य को अंधकारमय कर देता है और समाज में अस्थिरता पैदा करता है।
इस दौरान उन्होंने मौजूद लोगों को नशीली दवाओं, शराब व अन्य मादक द्रव्यों के सेवन को जड़ से खत्म करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की समय-समय पर काउंसलिंग करते रहें और उनकी बदलती आदतों का ध्यान रखें। परिजनों को बच्चों को नशे के दुष्प्रभाव और उससे होने वाले अपराधों के बारे में भी बताना चाहिए।
पुलिस टीम ने ग्रामीणों को हेल्पलाइन नंबर 1933 की जानकारी दी। उन्होंने यह भी अपील की कि नशे से संबंधित किसी भी जानकारी की सूचना डायल 112 अथवा संबंधित थाना/चौकी पुलिस को दें।
फोटो कैप्शन 03: नशा मुक्त अभियान के तहत जानकारी देते हुए





बीआर स्कूल सेहलंग में नि:शुल्क नेत्र जांच एवं आपरेशन शिविर 23 नवंबर को
--राजेंद्र भारद्वाज, की 16वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कैंप
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कनीना की आवाज।
बीआर स्कूल सेहलंग के संस्थापक स्वर्गीय राजेंद्र भारद्वाज, की 16वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बीआर स्कूल सेहलंग में  एक विशाल नि:शुल्क नेत्र जांच एवं ऑपरेशन शिविर का आयोजन रविवार, 23 नवंबर 2025 को किया जा रहा है। जिसमें क्षेत्र की प्रसिद्ध गंगा देवी पांडे आंखों की अस्पताल, महेंद्रगढ़ के विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा नेत्र जांच की जाएगी ।
शिविर में आने वाले मरीजों की आंखों की संपूर्ण जांच की जाएगी और डाक्टरों द्वारा आवश्यक परामर्श दिया जाएगा। जांच के दौरान रोशनी और परदे की स्थिति की जांच की जाएगी, आंखों में इंफेक्शन या एलर्जी की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा तथा मोतियाबिंद की पुष्टि होने पर उसका नि:शुल्क ऑपरेशन भी किया जाएगा। मरीजों को अस्पताल तक लाने और वापस छोडऩे की सुविधा भी विद्यालय द्वारा उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही आवश्यक दवाइयां और चश्मे भी नि:शुल्क प्रदान किए जाएंगे।
विद्यालय प्रबंधन ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित हों।  इच्छुक व्यक्ति विद्यालय से संपर्क कर सकते हैं या आनलाइन पंजीकरण भी कर सकते हैं। अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए संपर्क नंबर 9416014285 उपलब्ध है। विद्यालय के चेयरमैन हरीश भारद्वाज ने बताया कि विद्यालय द्वारा हर वर्ष आंखों का फ्री कैंप विद्यालय के फाउंडर मेंबर स्वर्गीय राजेंद्र की पुण्यतिथि पर किया जाता है।
फोटो कैप्शन 04: बी आर स्कूल में आँखों का जांच करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाते क्षेत्रवासी।




 जिला स्तरीय टैलेंट सर्च प्रतियोगिता
--कनीना का रहा दूसरा स्थान
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कनीना की आवाज।
शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा जिला स्तरीय टैलेंट सर्च प्रतियोगिता का आयोजन जीएमएस नसीबपुर में किया गया। जिसमें प्रत्येक खंड से प्रथम आने वाले टीमों ने हिस्सा लिया। राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना के प्राचार्य सुनील खुडानिया ने बताया कि इस प्रतियोगिता में हमारे विद्यालय की फाक ग्रुप डांस में दूसरा स्थान प्राप्त किया। तथा विद्यालय प्राचार्य ने विद्यालय स्तर पर बच्चों को सम्मानित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अनुसार अमृत सिंह राघव तथा सरिता विशेष अध्यापिका का विशेष सहयोग रहा।




महेंद्रगढ़ पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में पीओ पकड़ा
--आरोपी रोहतक, भिवानी और दादरी के विभिन्न मामलों में भी पीओ चल रहा था
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कनीना की आवाज।
पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के दिशा-निर्देशानुसार जिला पुलिस द्वारा चलाए जा रहे आपरेशन ट्रैक डाउन के तहत महेंद्रगढ़ पुलिस के थाना शहर कनीना की टीम ने कार्रवाई करते एक पीओ को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक पीओ संजय वासी रासीवास दादरी को पकडऩे में सफलता पाई है, आरोपी एनडीपीएस एक्ट के मामले में पीओ था। आरोपी रोहतक, भिवानी और दादरी के विभिन्न मामलों में भी पीओ चल रहा था। जो करीब पिछले दो वर्षों से गणेश गिरी आश्रम, आसलवास, थाना बुहाना, जिला झुंझुनू में महंत के रूप में छिपकर रह रहा था। जिसे थाना शहर कनीना की पुलिस टीम ने बुधवार को पकड़ा है। आरोपी के खिलाफ हत्या, मारपीट, आर्म्स एक्ट, प्रिजन एक्ट के तहत ओर अन्य मामले भी दर्ज हैं।
इसके अतिरिक्त, थाना शहर कनीना की पुलिस टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए एक बेल जंपर बबलू पासवान वासी भगोत जिला समस्तीपुर बिहार हाल आबाद कसबा कनीना को गिरफ्तार किया है। आरोपी आबकारी अधिनियम के मामलों में बेल जंपर था। आरोपी के खिलाफ 2022 में आबकारी अधिनियम के तहत मामले दर्ज हुए थे, जिनमें आरोपी बेल जंपर था।




जिला युवा महोत्सव में 2025 एसडी ककराला ने मारी बाजी
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कनीना की आवाज।
जिला स्तर पर  आयोजित जिला स्तरीय युवा महोत्सव में एसडी विद्यालय ककराला के विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में विद्यालय की तीन टीमों ने भाग लिया और तीनों ने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान हासिल कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया।
विद्यालय प्राचार्य ओमप्रकाश यादव ने बताया कि दिपांशु व कीर्ति ने प्रतियोगिता में दृष्टिहीन व्यक्तियों की सहायता के लिए विकसित एक महत्वपूर्ण नवाचार के लिए प्रथम स्थान, इसी कड़ी में भावना व भूमि ने रसोई में सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से आटोमेटिक गैस स्टोव सिस्टम तैयार कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया व अभिनव ने सुरक्षा पर आधारित सेफ राइड पर आधारित प्रोजेक्ट तैयार कर तृतीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन किया। इनोवेशन कार्यप्रभारी जसबीर जांगिड के मार्गदर्शन में तैयार किया गया। उन्होंने ने बताया कि अब ये विद्यार्थी पंचकुला में होने वाले राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में भाग लेगें।
इस अवसर पर चेयरमैन जगदेव यादव ने सभी विजेता विद्यार्थियों एवं विद्यालय स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह कि उपलब्धि अपने आप में बड़े गर्व का विषय है। यह विद्यार्थियों अध्यापकों एवं अभिभावकों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। अत: हमें हमेशा एकाग्रता चित होकर सच्ची लग्न से परिश्रम करना चाहिए। सच्ची लग्न से कर्म करते रहने से ही सफलता सम्भव है। कर्म सर्वोपरि है। प्रत्येक कार्य को आनन्द से पूरा करना चाहिए जिससे काम करने की गति भी बढ़ती है व काम सुंदर तरीके से पूरा होता है।
इस अवसर पर प्राचार्य ओमप्रकाश, विद्यालय समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीइओ आर एस यादव, उपप्राचार्य पूर्ण सिंह, कोर्डिनेटर स्नेहलता, प्रियंका एवं बिंदु, जसबीर जांगिड़, ईश्वर सिंह, अजीत कुमार एवं समस्त स्टाफ उपस्थित था।
फोटो कैप्शन 01: युवा महोत्सव में सम्मान पाते एसडी ककराला के विद्यार्थी



किसानों की मेहनत को मिट्टी में मिला रही हैं नील गाय एवं छुट्टे पशु
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कनीना की आवाज।
किसानों की पैदावार को कुछ आवारा जंतु एवं जंगली जंतु बिना किसी मेहनत किए ही चट कर जाते हैं। किसान दिन रात अपनी  फसल को इन जंतुओं से बचाने के लिए प्रयासरत रहता है।
चूहे,मोर, नील गाय, छुट्टे पशु, पक्षी, कीट, बंदर और शशक आदि  किसान के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। किसान को तो इन जीवों से फसल को बचाए रखने के लिए भारी धन खर्च करना पड़ रहा है। आवारा जंतुओं से फसल को बचाने के लिए रखवालें भी रखने पड़ते हैं जो रखवाली के बदले अनाज लेते हैं।  
   किसान के लिए नील गाय और छुट्टे पशु सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।  नील गाय झुंड के रूप में चलती हैं और जिस किसी खेत में घुस जाती हैं उसे तबाह करके ही दम लेती हैं।  किसान को सबसे अधिक रखवाली इन्हीं जीवों से करनी होती है। इन्हीं जीवों से फसल को बचाने के लिए रखवालों का प्रबंध भी करना पड़ता है। आवारा गायों और नील गायों से बचने के लिए खेत में टाओ खड़ा करता है तथा फाटक में उन्हें बंद करता है किंतु फिर भी ये गाएं फसल को नुकसान पहुंचाए बगैर नहीं रह सकती हैं। फसल को नुकसान पहुंचाने में शशक, आवारा गायें, गिलहरी, कीट,बंदर, सुअर, तोता, कौवा, फाख्ता और चिडिय़ां जैसे कितने ही पक्षी न केवल खेत में खड़ी अपितु काटकर डाली गई फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी-
पूर्व कृषि अधिकारी डा देवराज ने कहा कि यूं तो पूरे हरियाणा की ही यह समस्या है और समस्या अधिक विकराल दक्षिण हरियाणा की है जहां मेहनत अधिक करके ही किसान फसल उगाता है और उस पर पानी फेर नील गाय चंपत हो जाती है। सर्वाधिक सरसों की खेती सर्दी के मौसम में होती है। सर्दी से बचने के लिए किसान जब घर में जाता है तभी ये नील गाय नुकसान पहुंचा जाती है। इनका नुकसान भारी है जो दस फीसदी को पार कर जाता है। जब ये नील गाय खेत से दौड़ती है तो उनके पैरों से सरसों की खड़ी फसल टूट जाती है। ये जीव खाते कम हैं और खराब अधिक करते हैं।
अब तो सरकार ने नीलगायों को मारने का आदेश भी दे दिया है।
फोटो कैप्शन 02: फसल को चट करते छुट्टे पशु



भूलते जा रहे हैं टीवी को, मोबाइल से हो गया है प्रेम
-विश्व टीवी दिवस -21 नवंबर
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कनीना की आवाज।
यूं तो टेलीविजन/टीवी का आविष्कार ने 1942 में जेएल बेयर्ड ने कर दिया गया था लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में टीवी आते-आते लंबा समय लग गया। 1980 के दशक में ग्रामीण क्षेत्रों में टीवी इक्का-दुक्का मिलता था जो बाद में इस कदर फैला कि टीवी को आज भुलाते चले जा रहे हैं। आज टीवी की जगह हर जगह मोबाइल का युग आ गया है। कभी टीवी को महत्वपूर्ण समझा जाता था और लोग समाचार या चित्रहार देखने के लिए लंबी कतार में बैठे मिलते थे किंतु आज टीवी एवं रेडियो आदि कबाड़ का सामान बन गए हैं और उनके स्थान पर आधुनिक एलइडी और मोबाइल में ले लिया है। पुराने समय में जब श्वेत-श्याम टीवी चले थे तब के दर्शन आज भी उन दिनों को याद कर प्रसन्न हो जाते हैं। 21 नवंबर का दिवस के विषय में जब कई लोगों से चर्चा की गई तो उनके विचार अलग-अलग थे।
***1984 में जब हमने टीवी को देखा तो आश्चर्यचकित रह गए थे कि इस प्रकार के यंत्र भी खोज लिए गए हैं। उस समय चित्रहार देखने के लिए दूर दराज जाते थे, बाद में जहां वीसीपी एवं वीसीआर  आदि चले तब तो सिनेमा हाल की लगभग छुट्टी ही हो गई थी परंतु टीवी की क्रांति ने लोगों का जीवन ही बदल कर रख दिया। उसे समय ब्लैक एंड व्हाइट टीवी होते थे परंतु उनको देखने के लिए भी दूरदराज तक सफर करना पड़ता था और घंटों इंतजार करके तब कार्यक्रम देख पाते थे।
  --- मुकेश फोटोग्राफर, कनीना
टीवी की क्रांति के चलते उन्होंने पहले श्वेत-श्याम टीवी देखें तत्पश्चात रंगीन टीवी देखें फिर एलसीडी देखते हुए आधुनिक एलइडी और वर्तमान में हम मोबाइल क्रांति देख रहे हैं। आने वाले समय में टेलीविजन को भुला दिया जाएगा। बेयर्ड जिन्होंने इसका आविष्कार किया उसकी कल्पना और सोच को भी इंसान द्वारा भुलाने में देर नहीं लगेगी। मोबाइल ने सब कुछ बदल दिया है। धीरे-धीरे लोग टीवी के को भुला रहे हैं और मोबाइल के आदि होते जा रहे हैं। जहां टीवी में निश्चित दूरी से देखते थे आंखें कम नुकसान पहुंचता था परंतु आजकल मोबाइल में जितनी नजदीकी से देखते इतनी आंखें कमजोर होती जा रही है। यह दुर्भाग्य है परंतु विज्ञान की क्रांति है।
-- देशराज, 59 वर्षीय
टेलीविजन अपने जमाने में महान क्रांति लेकर आया था। कभी रेडियो का प्रचलन होता था वह जमाना भी हमने देखा। रेडियो सुनने के लिए आतुर होते थे। दूर दराज से रेडियो खरीद कर लाते थे परंतु जब से टीवी का आविष्कार हुआ और ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहुंचा तब रेडियो को भुलाना शुरू कर दिया और रेडियो कबाड़ की वस्तु बन गई।अब तो ब्लैक एंड व्हाइट टीवी कबाड़ की वस्तु बन चुकी है। कहीं श्वेत-श्याम टीवी शायद ही कहीं मिल जाए। परंतु उसे जमाने में इस ब्लैक एंड व्हाइट टीवी ने लोगों को के मनोरंजन में अहम भूमिका निभाई थी। आज मोबाइल में सब कुछ बदल कर रख दिया, कितने ही यंत्रों को की छुट्टी कर दी है। उन यंत्रों का आज मोबाइल के जरिए लाभ उठा रहे हैं।
-- रामनिवास,मुख्यशिक्षक,कोटिया निवासी
रंगीन टीवी को देखते हुए एलसीडी और एलइडी देखी है और आज भी एलईडी प्रयोग की जा रही है। पुराने वक्त के लोग आज भी एलईडी तक ही सीमित है। मोबाइल से दूर है किंतु हम ऐसे युग को देख रहे हैं जिसमें मोबाइल और एलइडी दोनों बरकरार है। आने वाले समय में एलईडी को भुला दिया जाएगा। वास्तव में मोबाइल की क्रांति में तो बच्चे, बूढ़े और हर वर्ग, हर लिंग के व्यक्तियों को प्रभावित ही नहीं किया अपितु बदल कर रख दिया है। ऐसे में टीवी आने वाले समय में कबाड़ की वस्तु बनकर रह जाएगी।
-- राजेंद्र सिंह, बुजुर्ग एवं टीवी के शौकीन, कनीना
फोटो कैप्शन: राजेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, देशराज, रामनिवास





अभिवादन का वर्तमान शब्द नमस्ते है -सतीश आर्य  
--विश्व नमस्कार दिवस- 21 नवंबर
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कनीना की आवाज।
 21 नंबर को विश्व नमस्कार दिवस मनाया जाता है। इसे हेलो दिवस के नाम से जाना जाता है। इस एक शब्द के बोलने से ही एक दूसरे की पुरानी दुश्मनी खत्म हो जाती है और मित्रता को बढ़ावा मिलता है। वास्तव में हेलो एक सामान्य शब्द है। लगभग फोन पर पहला शब्द हेलो बोलते हैं लेकिन हेलो शब्द का प्रयोग 1973 में इजरायल और मिस्र के बीच लंबे समय चल रहे युद्ध के समाप्त होते ही शांति और मित्रता के लिए प्रयोग किया था।  जिस शब्द का पहले इस्तेमाल किया गया था वह हेलो था और उसी समय से विश्व हेलो दिवस मनाने की शुरुआत हो गई थी। युद्ध के दौरान हजारों सैनिक एवं नागरिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों में शांति स्थापना के लिए पहला शब्द हेलो प्रयोग किया गया था जो वर्तमान में नमस्ते का रूप ले चुका है। इस संबंध में विभिन्न आर्य समाज और  प्रबुद्ध जनों से बात की गई।
** नमस्ते शब्द प्रयोग करने से दिल के भाव पैदा होते हैं। दिल के किसी प्रकार की कटु भावना समाप्त हो जाती है। हाथ जोड़कर नमस्ते करते हैं तो यह एक्सरसाइज भी हाथों की हो जाती है जो मन और हाथ, मुंह, आंख सभी का प्रयोग करते हुए बेहतरीन प्रभाव छोड़ती है। नमस्ते अपने आप में एक पूर्ण शब्द है इसका उपयोग करने से शरीर पर बेहतर प्रभाव पड़ता है।
-- राव मोहर सिंह आर्य
नमस्ते करने से किसी का कुछ घटता नहीं परंतु यह पता चल जाता है कि नमस्ते करने वाले के मन में क्या भाव है। अगर नमस्ते का तरीका, हावभाव सब कुछ बता देता है। यदि हावभाव अच्छे हैं और चेहरे पर खुशी है तो नमस्ते सार्थक है। नमस्ते करने से मन के सभी तार प्रसन्नचित हो जाते और खुशी एक पल भी शरीर के लिए लाभ पहुंचती है। नमस्ते का उपयोग करना तन और मन दोनों के लिए जरूरी है।
 नमस्ते एक व्यापक शब्द है। राम राम जी बोलते हैं उसका कोई विरोध तो नहीं है परंतु अधूरा शब्द है। इसकी बजाय जय राम जी की बोल दिया जाए तो एक पूर्ण शब्द बन जाता है। इसी प्रकार यदि हम नमस्ते बोलते हैं तो यह आपसी भाईचारे, एकता और खुशी का प्रतीक है। यदि छोटे बड़े को नमस्ते करता है तो बड़ा बदले में छोटे को नमस्ते करता है जिसके कारण दोनों के बीच कटुता चली आ रही है वह भी समाप्त हो जाती है। घर में यदि सुबह सवेरे उठकर नमस्ते की जाए तो रात भर से किसी प्रकार की मन में कड़वाहट को समाप्त हो जाती है। नमस्ते का सार्थक प्रभाव यह है कि एक दूसरे से परिचित हो जाते हैं और प्रसन्नता मन में घर कर जाती है जो प्रत्येक के लिए भी जरूरी है। एक प्रकार की व्यायाम भी हो जाता है और मन भी खुश हो जाता है।
--सतीश आर्य, रसूलपुर
फोटो कैप्शन:राव मोहर सिंह, सतीश आर्य।
































-साफ पानी के जोहड़ों में पाली जा सकती है मछलियां-पिंकी यादव
--विश्व मत्स्य दिवस-21 नवंबर
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कनीना की आवाज। 
साफ पानी में मत्स्य पालन किया जा सकता है। अधिकांश गांवों में जोहड़ नहर के पानी से भरे जाते जो साफ माना जाता है। इससे न केवल रोजगार मिल सकता अपितु मत्स्य पालन करके जोहड़ों का सदुपयोग भी किया जा सकता है। ग्राम पंचायत और नगर पालिका इस क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कहने को तो कनीना में 6 जोहड़ है और अधिकांश जोहड़ों का पानी होलीवाला और कालरवाली जोहड़ में डाला जा रहा है किंतु कालरवाली जोहड़ का पानी इतना दूषित हो गया है कि इसमें शैवाल भरा हुआ है। कभी इसमें साफ पानी भरा होता था। होलीवाला जोहड़ भी साफ पानी का नहीं है। दोनों ही जोहड़ों में घरों से निकलने वाला गंदा पानी भरा हुआ है। यदि ये जोहड़ बारिश के पानी से भरे होते तो यहां मत्स्य पालन किया जा सकता था। कनीना में अगर नजर डालें तो संत शिरोमणि मोलडऩाथ जोहड़ पक्का है इसमें मत्स्य पालन किया जा सकता है और अच्छा रोजगार भी मिल सकता है। यही नहीं कनीना का सिरसवाला जोहड़ जो पक्का किया हुआ है इसमें भी मत्स्य पालन किया जा सकता है। मत्स्य की मांग कनीना क्षेत्र में भी बढ़ती जा रही है क्योंकि दूसरे राज्यों से भारी संख्या में लोग कनीना और आसपास गांवों में रह रहे हैं जो मछली को उपयोग करते हैं। ऐसे में भी मछली खरीद कर ले जाते हैं। कनीना और आसपास जितने भी मत्स्य पालन केंद्र है उनमें बिहार और उत्तरप्रदेश के लोगों की मांग सबसे अधिक देखने को मिलती है। मत्स्य पालन के लिए कनीनाा क्षेत्र में पहले भी प्रयास हुए थे। इस संबंध में  पालिका के पूर्व प्रधान सतीश जेलदार से बात हुई।
उन्होंने बताया कि कनीना के सिरसवाला जोहड़ में मत्स्य पालन के लिए चर्चाएं चली थी। परंतु यह बात सिरे नहीं चढ़ पाई क्योंकि न पट्टे पर जोहड़ छोड़ा गया और न हीं बात को आगे बढ़ाया। मेरे कार्यकाल में यह चर्चा अवश्य चली थी और इस पर विचार भी हुआ था परंतु योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। इससे भी कालरवाली जोहड़ को भी पट्टे पर मछली पालन छोड़ जाना था जिसके लिए इश्तहार भी छपवाए गए किंतु मछली पालने वाला कोई भी व्यक्ति यहां हाजिर नहीं हुआ जिसके कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई थी। अब इन जोहड़ों में साफ पानी होने के कारण दो जोहड़ों में मत्स्य पालन किया जा सकता है। उधर मछली की मांग भी अधिक है।
कनीना में लंबे समय तक मछली पालन कर रही पिंकी यादव से चर्चा की गई। गांव और शहरों के जोहड़ नगर पालिका एवं ग्राम पंचायत के तहत आते हैं वहां पट्टे पर मछली पालन के लिए छोड़ सकते हैं। इसके लिए एक प्रस्ताव पारित करना होता है। मछलियां वैसे तो हर प्रकार के पानी में पाली जाती है। नहर का पानी जिन जोहड़ों में जाता है उनमें आसानी से मछली पाली जा सकती है। ऐसे में सिरसवाला जोहड़ जो नहर के पानी से भरा है वहीं मोलडऩाथ जोहड़ जो डीप बोर के पानी से भरा है, में मछली पालन किया जा सकता है।  मछली पालन के लिए पट्टे पर छोड़ी गई जगह के लिए बोली दाता आते हैं। जो बोलीदाता कम बोली पर जोहड़ छुड़वाते हैं उन्हें पट्टे पर नगर पालिका या ग्राम पंचायत जोहड़ छोड़ सकती है पांच साल के लिए कम से कम पट्टे पर छोडऩा जरूरी होता है। हरियाणा के किसी भी जिले से कोई मछली पालन करने वाला व्यक्ति जोहड़ पट्टे पर ले सकता है और मछली पालन करके लाभ प्रदान कर सकता है। मछली मछली की मांग दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है।
  क्या कहते हैं अधिकारी--
मछलियां न केवल खराब जल में अपितु साफ जल में भी पाली जा सकती है जहां साफ जल में मछलियों के लिए दाना डालना पड़ेगा वही खराब जल में कुछ खाद्य पदार्थ मछलियों को जल से प्राप्त हो जाते हैं। सरकार मत्स्य पालन पर अनुदान भी देती है जो महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग है। मत्स्य पालन एक बेहतरीन कार्य है। यदि मत्स्य पालन करना चाहे तो वह इसके लिए आवेदन भी कर सकता है। मत्स्य पालन में जहां रोजगार भी मिल जाता है। वह सरकार भी पूरी मदद करती है।
यदि कोई किसान पंचायत से जोहड़ पट्टे पर लेता है तो उसे अनुसूचित जाति के किसान को प्रथम वर्ष पट्टा राशि पर विभाग द्वारा 50 फीसदी अनुदान दिया जाता है तथा खाद खुराक के लिए 60 प्रतिशत के हिसाब से एक हेक्टेयर के लिए 90 हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है। यदि कोई किसान अपने मछली पालन जोहड़ पर सोलर सिस्टम लगाता है तो अधिकतम 30 किलोवाट पर 60 प्रतिशत के हिसाब से अनुदान सरकार देती है। यदि कोई किसान अपने खेत में तालाब बनाता है तो एक हेक्टेयर के तालाब की कुल अनुमानत लागत राशि लगभग 11 लाख रुपए होती है इस पर अनुसूचित जाति या किसी भी वर्ग की महिला को 60 प्रतिशत के हिसाब से व सामान्य वर्ग के किसान को विभाग 40 प्रतिशत के हिसाब से अनुदान देता है।  अपनी मिट्टी एवं पानी की जांच करवाकर मत्स्य पालन किया जा सकता है जो अकसर लाभप्रद होता है। यदि कोई पंचायत पंचायती भूमि पर तालाब बनाकर मत्स्य पालन करना चाहे तो सरकार मुफ्त में तालाब खोदवाकर देती है।
--सोमदत्त, जिला मत्स्य अधिकारी नारनौल
फोटो कैप्शन: सोमदत्त, जिला मत्स्य अधिकारी नारनौल





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