Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Sunday, November 23, 2025



 
गीता प्रश्नमाला में भाग लेने वाले डाउनलोड करें अपनी-अपनी सर्टिफिकेट
--सभी प्रतिभागियों की आ चुकी हैं सर्टिफिकेट्स
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कनीना की आवाज।
 गीता प्रश्नमाला जो चार नवंबर से 14 नवंबर तक चली थी जिसमें कनीना निवासी डा. होशियार सिंह यादव द्वारा गीता प्रश्नमाला में 757 गीता भक्तों को जोड़ा था। जिनमें कई इनाम भी आए हैं लेकिन जिनको इनाम नहीं आए उनके लिए भी सर्टिफिकेट का प्रावधान है। वैसे तो सर्टिफिकेट का सभी भक्तों के लिए प्रावधान किया गया है। इसलिए 757 भक्तों से निवेदन है कि वो निम्र लिंक https://igmquiz.in/Webloginkkr.aspx
     पर जाकर अपने फोन नंबर और पासवर्ड/ओटीपी लगाकर लिंक को खोले और सर्टिफिकेट डाउनलोड करें। ऐसे डाउनलोड करें सर्टिफिकेट--
1. सबसे पहले https://igmquiz.in/Webloginkkr.aspx लिंक पर जाए
2. फोन नंबर तथा पासवर्ड/ओटीपी डालें
3. अगर पासवर्ड भूल गए हो तो फारगेट करके नए पासवर्ड के लिए रिक्वेस्ट डाले तुरंत पासवर्ड आ जाएगा।
4. ज्यों ही लागिन करते हैं अर्थात फोन नंबर और पासवर्ड डालकर लागिन करते हैं नीली लाइनों में लिखा मिलेगा सर्टिफिकेट डाउनलोड। सर्टिफिकेट डाउनलोड करके लेमिनेशन लगवा कर घर में टांग सकते हैं ताकि गीता के प्रति आपकी रुचि को इंगित कर सके। किसी भी प्रकार की डाउनलोड में दिक्कत हो तो निसंकोच 9416348 400 या 9306300700 पर संपर्क करें, डा. होशियार सिंह समझा देंगे की किस प्रकार सर्टिफिकेट डाउनलोड करनी है।
 होशियार सिंह को मिली है पांच सर्टिफिकेट -
उधर डा. होशियार सिंह यादव ने गीता प्रश्रमाला में 757 भक्तों को जोड़ा था जिसके चलते कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड तथा हरियाणा सरकार ने उन्हें 5 सर्टिफिकेट प्रदान किए हैं। इसके लिए डा. होशियार सिंह सभी भक्तों और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने उनकी इस क्षेत्र में सहायता की है। विगत 3 वर्षों से यह सर्टिफिकेट पाने वाले एकमात्र शख्सियत डा. होशियार सिंह बन चुके हैं।

 

 


समुत्कर्ष प्रोजेक्ट का 1 दिसंबर को ककराला के एसडी स्कूल में होगा भव्य आयोजन
-शिक्षा मंत्री हरियाणा एवं रेडक्रास के पूर्व महामंत्री होंगे मुख्य मार्गदर्शक
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कनीना की आवाज।
युवा एंड सेवा फाउंडेशन द्वारा संचालित समुत्कर्ष प्रोजेक्ट, जो समाज के प्रतिभाशाली किंतु आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित परिवारों (अनुसूचित जाति वर्ग) के होनहार विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक, मानसिक और सामाजिक उत्थान का विशेष माडल है। इसका मासिक सार्वजनिक कार्यक्रम समुत्कर्ष 4.0, एक दिसंबर 2025, सोमवार को महेंद्रगढ़ के गांव ककराला स्थित एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित किया जाएगा।
 जगदेव सिंह संयोजक समुत्कर्ष प्रोजेक्ट  युवा एवं सेवा फाउंडेशन महेंद्रगढ़ ने बताया कि समुत्कर्ष प्रोजेक्ट केवल छात्र प्रोत्साहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण व्यक्तित्व विकास, सामाजिक चेतना, मूल्य-आधारित प्रशिक्षण, मेंटोरिंग, कैरियर मार्गदर्शन, एवं युवा संवेदनशीलता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कार्य करता है। प्रोजेक्ट का उद्देश्य है— प्रतिभा को अवसर, परिश्रम को दिशा, और युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोडऩा।
  उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर महिपाल ढांडा शिक्षा मंत्री, हरियाणा सरकार तथा विशिष्ट अतिथि के तौर पर महेश जोशी, पूर्व महामंत्री, रेडक्रास हरियाणा होंगे।
उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर के आयोजन में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा समाज के प्रतिनिधियों की बड़ी संख्या में सहभागिता होगी। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण कैरियर परामर्श व्यक्तिगत सत्र, समुत्कर्ष प्रोजेक्ट के सहयोगियों को सम्मान, क्विज प्रतियोगिता,
समाज सेवा के प्रकल्पों की प्रदर्शनी), समूह गीत प्रस्तुति, देशभक्ति आधारित नाट्य प्रस्तुति और साहस एवं आत्मविश्वास प्रदर्शन किये जाएंगे।
   उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में 102 बच्चे एनरोल किये गये हैं। जिनके दसवीं कक्षा पास करने के बाद 75 प्रतिशत अंक या अधिक हैं उनको शामिल किया गया है। अभी तक यह योजना जिला महेंद्रगढ़ के विद्यार्थियों के लिए है जिसे बाद में दूसरे जिलों को भी शामिल किया जाएगा। बच्चों को डोनेट की गई राशि में से हिस्सा दिया जाएगा।  इस मौके पर जगदेव यादव, डा. योगेश, विनोद कुमार, कुलदीप, डा. सनील आदि ट्रस्टी हाजिर रहे।
फोटो कैप्शन 03: समुत्कर्ष कार्यक्रम की जानकारी देते हुए जगदेव एवं अन्य।






6 गाये कनीना श्री कृष्ण गौशाला से ली गोद
-सभी ने दी दान राशि भेंट
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कनीना की आवाज।
 कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में अनुराधा ने अपनी शादी की सालगिरह के अवसर पर एक गाय गोद ली तथा  5100 रुपए की राशि भी गौशाला को भेंट की। वही सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह ने एक गाय गोद ली और 5100 गौशाला को दान दिया। करण सिंह निवासी कनीना ने एक गाय गोद ली व एक गाय नरेंद्र जेलदार कनीना ने गोद ली। एक गाय पंकज कनीना ने गोद ली।
  उधर श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में श्रद्धा और सेवा का अनोखा संगम देखने को मिला। कनीना निवासी नारायणी देवी की पुण्यतिथि पर उनके पुत्र रूप शर्मा, मुकेश शर्मा, डा. दिनेश शर्मा और बसंत शर्मा ने गौसेवा का संकल्प लेते हुए एक गाय गोद ली और गौशाला को 5100 रुपए की राशि भेंट की। वहीं  अधिवक्ता  रमेश शर्मा पुत्र नाथूराम शर्मा ने एक गया गोद ली है।
  इस अवसर पर गौशाला के प्रधान भगत सिंह यादव ने परिजनों के इस सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि गौसेवा के ऐसे प्रेरक उदाहरण समाज में जनजागृति और सकारात्मक संदेश फैलाते हैं। उन्होंने बताया कि गौशाला में लगातार लोग श्रद्धा भाव से आगे आकर योगदान दे रहे हैं, जिससे गौवंश की देखभाल और बेहतर ढंग से की जा सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान डा. नीरज चौधरी, नवीन यदुवंशी, योगेश पार्षद, अंकुर गुप्ता, मास्टर रामप्रसाद, दिलावर बाबू  सूबेदार दुली चंद यादव, ओमप्रकाश ठेकेदार, योगेश पार्षद, अशोक ठेकेदार, सुधीर मैनेजर ,दिलावर सिंह अनिल कुमार सिंगला, राज सिंह, सत्यवीर सिंह आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: गाय गोद लेते हुए।





सेहलंग में सेवा और शिक्षा का संगम
- 1189 लोगों की आंखों की जांच, दवाएं व चश्मे मुफ्त
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कनीना की आवाज।
कनीना उपमंडल के गांव सेहलंग स्थित बीआर स्कूल में संस्थापक की 16वीं पुण्यतिथि पर विशाल नेत्र शिविर का आयोजन, विधायक कंवर सिंह यादव मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल हुए।
सेहलंग स्थित बी आर स्कूल में संस्थापक स्वर्गीय राजेंद्र भारद्वाज की 16वीं पुण्यतिथि पर नेत्र जांच एवं ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया जिसमें महेंद्रगढ़ विधानसभा के विधायक कंवर सिंह यादव मुख्य अतिथि तथा प्रवीण यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
विद्यालय पहुंचने पर अतिथियों का स्वागत फूल मालाओं से किया गया और उसके बाद मुख्य अतिथि विधायक कंवर सिंह याद तथा प्रवीण यादव विशिष्ट अतिथि ने परिसर में स्थापित स्वर्गीय राजेंद्र भारद्वाज की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी जिसके पश्चात चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने बुक्का देकर मुख्य अतिथि का औपचारिक स्वागत किया ।
नेत्र शिविर का संचालन गंगा देवी पांडेय आई अस्पताल की विशेषज्ञ डा. टीम द्वारा किया गया मुख्य अतिथि ने डाक्टरों और स्टाफ से मुलाकात कर पूरे शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और स्वयं भी अपनी आंखों की जांच करवाई विद्यालय परिसर में बनाए गए शिविर में कुल लगभग 1189 लोगों ने अपनी आंखों की जांच करवाई ।
जांच के दौरान डाक्टरों ने रोशनी की क्षमता, परदे की स्थिति, संक्रमित या एलर्जी संबंधी समस्याओं आदि का विस्तृत मूल्यांकन किया मोतियाबिंद के मरीजों को निशुल्क आपरेशन के लिए आगे की तिथि प्रदान की गई साथ ही जरूरतमंद लोगों को आवश्यक दवाइयां और चश्मे भी मुफ्त में वितरित किए गए ।
विधायक कंवर सिंह यादव ने कहा कि स्वर्गीय राजेंद्र भारद्वाज अत्यंत मिलनसार और समाजसेवी व्यक्तित्व के धनी थे उन्होंने क्षेत्र के हर बच्चे को शिक्षित करने का सपना देखा था और आज उनके सपने को उनके सुपुत्र हरिश भारद्वाज और कृष्ण भारद्वाज सहित समस्त बी आर परिवार पूरे समर्पण से आगे बढ़ा रहे हैं उनका लक्ष्य था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर घर तक पहुंचे।
चेयरमैन हरिश भारद्वाज ने बताया कि यह नेत्र शिविर हर वर्ष संस्थापक की पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति में आयोजित किया जाता है और संस्था समाज सेवा के ऐसे कार्य आगे भी जारी रखेगी उन्होंने क्षेत्र से आए सभी ग्रामीणों डॉक्टर टीम और स्टाफ का धन्यवाद व्यक्त किया।
फोटो कैप्शन 01: नेत्र जांच शिविर में आंखें चेक करवाते विधायक कंवर सिंह यादव






 निराई गुड़ाई का काम पूरे यौवन पर
-खाद छिड़ककर कर रहे हैं सिंचाई
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कनीना की आवाज।
जैसे तैसे किसानों ने डीएपी की कमी को झेलते हुये सरसों की बिजाई कर ली है। सरसों फसल उगाने वाले किसान निराई गुड़ाई में लग गए हैं। 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों की बिजाई की गई है जो विगत वर्ष की बीजाई से कम नहीं है। किसान सरसों फसल उगाने वाले किसान हैप्पी, कृष्ण कुमार,सुनील, दिनेश, महेश आदि ने बताया कि सरसों फसल खेतों में दिखाई देने लग गई है ऐसे में किसान निराई गुड़ाई के काम में लग गये है। किसानों ने बताया कर निराई गुड़ाई करने से खेतों में खड़े हुए अवांछनीय पौधों को हटाया जाता है ताकि फसल बेहतर हो सके। उन्होंने बताया कि निराई-गुड़ाई के बाद खाद का छिड़काव किया जा रहा है और फसल बेहतर बन जाएगी।  सर्दी बढ़ गई है। जहां सर्दी बढ़ गई है जो सरसों की फसल के लिए लाभप्रद मानी जा रही है। इस बार कनीना क्षेत्र में सबसे अधिक सरसों की बिजाई की गई है दूसरे नंबर पर गेहूं उगाया गया है।
 किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह आदि ने बताया कि अगर वर्षा होती तो उसे ज्यादा लाभ होगा। उल्लेखनीय है कि किसानों के खेतों में जंगली घास,प्याजी, बथुआ एवं जंगली पौधों सहित कई अवांछनीय पौधे फसल के साथ पैदा हो गए हैं और फसल को कमजोर कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि निराई करने के बाद पैदावार बढऩेकी संभावना होती है।  खेतों में निराई करने के लिए भारी पैसा खर्च करना पड़ता है। विभिन्न प्रकार की दवाई डालकर इन पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है।
  कनीना मंडी से रविंद्र बंसल ने बताया कि इस बार सरसों का एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है जबकि गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये पर प्रति क्विंटल रखा गया है। सरसों का एसपी बेहतर है इसलिए किसान सरसों की बिजाई की तरफ अधिक रुझान रखते हैं।
क्या कहता है कृषि विभाग-
कृषि विभाग के पूर्व सस्य विशेषज्ञ डा. देवराज का कहना है कि सरसों के अच्छे दाम मिलने से किसान उत्साहित है और धीरे-धीरे किसानों का रुझान बढ़ता ही जा रहा है।
फोटो कैप्शन 04: सरसों की निराई करता किसान परिवार














35 सालों में ही भूले जौ एवं चना की खेती
-चना एवं जौ शून्य एकड़ पर पहुंचा
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कनीना की आवाज।
किसान जौ एवं चने की खेती करना भूलते जा रहे हैं।
  1986-87 तक कनीना क्षेत्र की करीब 33 हजार हेक्टेयर भूमि होती थी जिस पर हजारों एकड़ में जौ की खेती तो हजारों हेक्टेयर पर चने की खेती की जाती थी। वैसे तो जौ न केवल पूजा आदि बल्कि हवन आदि में भी काम आता है। जब नवरात्रे चलते हैं तो जौ की विशेष मांग होती है। गेहूं-चना एवं जौ -चने की मिश्रित खेती की जाती थी। 1982 में स्ंिप्रकलर फव्वारा आया जिसके चलते चने की खेती घटती जा रही है और वर्तमान में तो चना अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कनीना उपमंडल के सभी गांवों में कुल मिलाकर जौ एवं चने की खेती शून्य एकड़ पर पहुंच गई है।
जौ को गंगा में डालने, पूजा अर्चना,हवन आदि में काम आता है वहीं पैदावार 40 मण प्रति हेक्टेयर तथा भाव करीब 2500 रुपये क्विंटल तक होता है। होली के पर्व पर जहां जौ को भूनकर पूरा परिवार चखता है और तत्पश्चात ही लावणी की शुरुआत होती आ रही है। एक जमाना था जब हर घर में जौ की खेती की जाती थी जिसे पूरी गर्मी आनंद से रोटी एवं अन्य रूपों में प्रयोग किया जाता था।  जौ की रोटी खाने के लिए या फिर धानी बनवाने के लिए दूसरे क्षेत्रों से जौ खरीदकर लाते हैं। जौ की किसी भी गांव में खेती नहीं की गई है।
 तीन दशक पूर्व कनीना क्षेत्र में चने की पैदावार सर्वाधिक होती थी जो अब शून्य हेक्टेयर पर चला गया है। किसी एक या दो क्यारी में किसान चना उगाते हैं। दालों भावों में तेजी आ रही है। विगत 2014 में महज तीस हेक्टेयर में चना उगाया था। वर्ष 2015 में 52 हेक्टेयर पर चने की बीजाई की गई थी। 2015 से 2018 तक भी चने की महज 70 से 80 हेक्टेयर बिजाई की गई थी जो 2020 तक 10 हेक्टेयर से कम सिमट कर रह गया है। 2022 में शून्य पर चला गया है। वर्ष 2023 में 8 एकड़ पर उगाया गया जो अब शून्य पर पहुंच गया है।
 कभी विवाह शादी में अवश्य लड्डू बनाए जाते थे किंतु अब जब किसी के शादी होती है तो लड्डू के लिए चने दूर दराज से लाने पड़ते हैं।
 बुजुर्ग राम सिंह, दुलीचंद, धनपती का कहना है कि कभी इस क्षेत्र में चने की खेती की जाती थी और विभिन्न खाद्य वस्तुएं बनाई जाती थी।
  ****वर्तमान में छोटे-छोटे खेत हो गए जिनमें जरूरत रूपी फसले ंउगाई जाती है। वैसे भी मार्केट रेट कम होने के कारण लोग गेहूं एवं सरसों को उगाते हैं और गाय, भैंस आदि पालने वाले किसान भी गेहूं पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग में लेते हैं। यही हालात चने की है। परंतु चने की पैदावार में सबसे बड़ी मुसीबत भूमिगत जमीन के खारे पानी की है। लगता है जल मीठा है किंतु वह दाल देने वाली फसलों के लिए अच्छा नहीं है। बारिश का पानी मिलता नहीं। कभी बारिश पर आधारित चने की खेती होती थी किंतु अब धीरे-धीरे पैदावार घट गई है। आम आदमी की जरूरत में कम काम आता है, इसलिए भी किसान पैदावार के रूप में चने की बजाय गेहूं सरसों लेते हैं।
--कृषि अधिकारी, मनीषा
फोटो कैप्शन 06: कनीना क्षेत्र में सब्जी हेतु उगाया गया चना।

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