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Thursday, September 4, 2025


 


शिक्षक से राष्ट्रपति पद तक पहुंचे थे डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन
--सर्वपल्ली गांव में जन्में थे वो     
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कनीना की आवाज।
पांच सितंबर का दिन एक महान विद्वान,लेखक,आलोचक,विचारक और शिक्षक से राष्ट्रपति तक पहुंचने वाली विभूति के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। उस महान विभूति का नाम डा. एस राधाकृष्णन है जो युगों-युगों तक शिक्षक समाज के लिए प्रेरणा के स्त्रोत माने जाते रहेंगे।
   डा. राधकृष्णन का जन्म पांच सितंबर 1888 को तिरुपति, आंध्र प्रदेश में हुआ था। 1903 में मद्रास से मैट्रिक, 1905 में इन्टर तथा 1908 में दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर कर मात्र 21 वर्ष की अल्पायु में ही 1909 में प्रेसीडेंसी कालेज में प्राध्यापक पद पर सुशोभित हो गए थे। 1921में कलकत्ता में नैतिक शास्त्र तथा 1935 में आक्सफोर्ड कालेज में प्रोफेसर नियुक्त हुए। 1939 में बनारस हिन्दु विवि के वाइस चांसलर तथा 1948 में विश्वविद्यालय आयोग के अध्यक्ष चुने गए। 1949 में तत्कालीन यूएसएसआर में राजदूत के पद पर भेजा गया। वे 1952 से 1962 तक दो बार उपराष्टï्रपति बने। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। 13 मई 1962 को वे जब दूसरे राष्टï्रपति के पद पर सुशोभित हुए तो उनका जन्म दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
   राधाकृष्णन एक महान लेखक थे। 1908 में उन्होंने वेदान्त शास्त्र पुस्तक लिखी किंतु 1920 मे उनके द्वारा लिखी हुई 'समकालीन समाज में हिन्दू धर्मÓ का देश विदेश में प्रचार हुआ। 'द फिलासाफी ऑफ रविन्द्रनाथ टैगोरÓ लिखकर वे महान रचनाकार, समीक्षक व अंग्रेजी लेखकों की श्रेणी में आ गए। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी। 1955व 1957 में जर्मन एवं इंग्लैंड ने उन्हें कई उपाधियों से सम्मानित किया। उन्होंने गीता का अनुवाद भी किया। महात्मा गांधी उनसे बहुत अधिक प्रभावित थे। एक बार महात्मा गांधी ने कहा था-आप मेरे कृष्ण हो और मैं आपका अर्जुन। इस महान विभूति का एक वर्ष की लंबी बीमारी के बाद 17 अप्रैल 1975 को काल ने लील लिया।
 राधाकृष्णन एकता के महान पुजारी थे। उनके अनुसार राष्ट्रीय एकता ईंट और गारे से नहीं बनाई जा सकती और न ही इसका निर्माण छैनी और हथौड़े से किया जा सकता। इसे तो चुपचाप लोगों के दिलों दिमाग में उत्पन्न करना होगा जिसका एकमात्र साधन शिक्षा है। जब वे विश्वविद्यालय आयोग के अध्यक्ष बने तब उन्होंने शिक्षा के विषय में कहा था-शिक्षा रोटी रोजी कमाने का साधन मात्र नहीं है और न ही विचारों का पालन पोषण करती है। और न हीं नागरिकता की पाठशाला है। यह तो आत्मा के जीवन का आरंभ है। मानवीय आत्मा का सत्य की खोज के लिए प्रशिक्षण है। वास्तव में शिक्षा दूसरा जन्म है।
   राधाकृष्णन के शिक्षक के विषय में सुन्दर विचार थे। उनके अनुसार-समाज में शिक्षक का स्थान महत्वपूर्ण है। वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक बौधिक परंपराओं व तकनीकी कौशल सौंपने की प्रक्रिया का केंद्र बिंदु है। वह सभ्यता के दीपक को प्रज्वलित करने में सहायक होता है। वह केवल व्यक्तियों का मार्गदर्शक नहीं अपितु राष्टï्र के भाग्य का निर्माता होता है। शिक्षक को अपना दायित्व समझना चाहिए। वो महान शख्स हमारे बीच आज नहीं है किंतु कहते प्रतीत होते हैं:-
             दुनिया में आकर एक शख्स दे गया पैगाम,
             कभी न घटने पाए, अध्यापक तेरा सम्मान।  
   एक शिक्षक प्रत्युत्तर में कह रहा है:-
             तन,मन,धन से सेवा करें,बांटे खुलकर ज्ञान,
             कैसे घटेगा जाने वाले, अध्यापक का सम्मान।




मिलिये स्टेट अवार्डी शिक्षक डा. होशियार सिंह यादव से
-45 पुस्तकों की रचना करने वाला चलता है हमेशा साइकिल पर
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कनीना की आवाज।
  वर्ष 2022 में धनौंदा स्कूल से डा. होशियार सिंह यादव को स्टेट अवार्ड मिल चुका है। उन्होंने 45 पुस्तकों की रचना भी की है तथा अपने शिक्षण कार्य के लिए सदा ही जाने जाते हैं। आज भी उनसे पढ़ा हुआ विद्यार्थी उन्हें याद कर नतमस्तक हो जाता है। वे कालेज से लेकर नवोदय विद्यालयों सहित सरकारी विभिन्न विद्यालयों में सेवा दे चुके हैं। दो बार राज्यपाल से सम्मानित हो चुके हैं। उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार का अभी तक कोई लाभ न मिलने से परेशान हैं। वे 30 अप्रैल 2024 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं।  वे वर्ष 1995 में तदर्थ आधार पर सेवा में आये तथा 5 सितंबर 2022 को राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला जबकि 30 अप्रैल 2024 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनसे शिक्षा ग्रहण करने वाला विद्यार्थी उन्हें नहीं भूला सकता। एनएमएमएस हो या सांस्कृतिक कार्यक्रम उनकी भागीदारी बेहतर रही है। हर क्षेत्र में उनका योगदान कभी नहीं भूलाया जा सकता। वर्तमान में भी समाज सेवा में जुटे हुये हैं। परंतु शिक्षा विभाग की नीतियों के चलते उन्हें दो वेतनवृद्धियां और दो साल का सेवा विस्तार का लाभ नसीब नहीं हुआ।
उनके पढ़ाये हुए विद्यार्थी प्रोफेसर, डाक्टर, शिक्षक, प्राध्यापक, एवं ऊंचे पदों पर पदाधिकारी हैं।
सदा चलते हैं साइकिल पर--
एक ऐसी शख्सियत भी कनीना क्षेत्र की है, जिनके पास सरकारी नौकरी भी रही परंतु कभी किसी वाहन की ओर नहीं दौड़े, साइकिल पर ही चले और आज भी साइकिल पर चल रहे हैं। डा. होशियार सिंह यादव एक ऐसी शख्सियत है जो बचपन से ही साइकिल के शौकीन रहे। स्कूलों में शिक्षण के लिए भी साइकिल का प्रयोग किया और आज भी साइकिल पर ही चलते हैं और अभी चुस्त दुरुस्त है। हालांकि शिक्षा विभाग में 40 सालों तक शिक्षण कार्य निजी स्तर पर और सरकारी तौर पर किया, पास में पैसे भी रहे परंतु उन्होंने कभी किसी वाहन की नहीं सोची। आज वे बेशक सेवानिवृत्त नियुक्त हो चुके है लेकिन उनके हजारों विद्यार्थी आज भी उन्हें याद कर प्रसन्नचित हो जाते हैं। कालेज से लेकर सरकारी स्कूलों में श्री यादव ने जहां सादगी भरे कपड़े पहने हैं, कभी दिखावे पर नहीं उतरे परंतु कहावत है कि सादा जीवन उच्च विचार। अगर ऐसी भावना कहीं देखने को मिलती तो श्री यादव कनीना मेें है। जिस भी क्षेत्र में उतरते हैं अच्छा खासा नाम कमाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में तो उनका कोई सानी नहीं है। जब तक पढ़ाया कभी किसी कुर्सी पर नहीं बैठे। शिक्षण कार्य दौरान ही उन्होंने 45 विभिन्न पुस्तकों की रचना की है। यही कारण है कि हरियाणा साहित्य अकादमी से पुरस्कार मिल पाया और क्षेत्र में नाम भी कमाया है। लेखन कार्य को देख तो वह भी उनका उतना ही बेहतरीन है जितना शिक्षण कार्य। सादगी भी इतनी बेहतरीन है जितने उनके सादे विचार है। आने वाली पीढ़ी शायद यह विश्वास नहीं करेगी कि इस प्रकार का व्यक्ति भी कनीना क्षेत्र में रहा होगा।  अब तक समय समय पर तीन बार राज्यपाल से सम्मानित हो चुके हैं। प्रशासन ने दर्जनों बार तो विभिन्न संस्थानों ने सैकड़ों बार पुरस्कृत किया हुआ है। उच्च लिखे पढ़े होने/पीएचडी के कारण वे डाक्टर कहलाते हैं। वर्षों के बाद पैदा होती है जो सादगी भरे जीवन में जीती है। उनको उनको एक आदर्श शिक्षक ही नहीं आदर्श इंसान और आदर्श लेखक भी कहा जा सकता है।
विश्व रिकार्ड धारक हैं-
डा. होशियार सिंह, कनीना का इंडियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम पहले ही दर्ज हो चुका था और इंफ्लुअंस बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो गया है।
 इससे पहले उन्होंने लंदन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करवाया था। यही नहीं इंटरनेशनल बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में आईकानिक अवार्ड भी मिला था। साथ में ओरिएंट बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। इसके अलावा चैंपियन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है।
फोटो कैप्शन: डा. होशियार सिंह यादव




संजू धनौंदा का माडल रहा प्रथम
- शिक्षा विभाग पंचकूला से संयुक्त निदेशक संजीव कुमार रहे उपस्थित
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कनीना की आवाज।
राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में खंड स्तरीय पर्यावरण विज्ञान प्रदर्शनी का  आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरे कनीना खंड से विभिन्न विद्यालयों के कुल 40 विद्यार्थियों ने भाग लेते हुए अपने-अपने नवोन्मेषी एवं रचनात्मक माडल प्रस्तुत किए।
  बच्चों ने प्रदूषण नियंत्रण, ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, सतत विकास एवं हरित ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित अपने माडल से सबका ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शनी का शुभारंभ उप-जिला शिक्षा अधिकारी डा. विश्वेश्वर कौशिक एवं जिला विज्ञान विशेषज्ञ रविंद्र अग्रवाल के मार्गदर्शन में तथा विद्यालय के प्राचार्य सुनील खुडानिया की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर अति विशिष्ट अतिथि के रूप में डीएसई पंचकूला से संयुक्त निदेशक संजीव कुमार उपस्थित रहे।
निर्णायक मंडल की भूमिका राजकीय महाविद्यालय कनीना से रसायन विज्ञान के सहायक प्राध्यापक अजय प्रकाश, प्राणीशास्त्र के सहायक प्राध्यापक राकेश कुमार एवं भौतिकी के सहायक प्राध्यापक राहुल कुमार ने निभाई।
राजकीय माडल स्कूल धनौंदा की संजू ने प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन किया। राजकीय उच्च विद्यालय के अंकित को द्वितीय स्थान, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोता के गणेश को तृतीय स्थान तथा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी की सुप्रिया को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। विजेताओं को क्रमश: 8000 रुपये, 6000 रुपये, 4000 रुपये एवं 2000 रुपये की नगद राशि पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी।
सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रबंधन की ओर से सभी निर्णायकों एवं विशिष्ट अतिथियों को पौधे भेंट किए गए, जिससे समाज में हरित पर्यावरण एवं जागरूकता का संदेश प्रसारित हो सके।
समापन अवसर पर प्राचार्य सुनील खुडानिया ने सभी अतिथियों, निर्णायकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अनुसंधान, रचनात्मकता एवं नवाचार की दिशा में प्रोत्साहित करती हैं और भविष्य में वे पर्यावरण संरक्षण तथा विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करेंगे।
 इस मौके पर कार्यक्रम के  संचालन के लिए विद्यालय प्राचार्य ने विज्ञान एवं गणित विभाग के तीन प्रवक्ताओं नितिन मुद्गिल, गुरदीप सिंह एवं संदीप कुमार की समिति बनाई थी। मंच संचालन विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता नरेश कुमार ने किया।
फोटो कैप्शन 09: संयुक्त निइेशक शिक्षा विभाग विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए


 
कारगिल शहीद अशोक कुमार की 26वीं पुण्यतिथि पर हवन यज्ञ
-नम आंखों से दी श्रद्धांजलि
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के गांव सिहोर में कारगिल शहीद अशोक कुमार संपदा सोसायटी (रजि.) की ओर से शहीद स्मारक पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहीद अशोक कुमार को उनकी 26वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 2 मिनट का मौन रखकर शहीद को नमन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दड़ोली आश्रम के संचालक स्वामी समर्पणानंद महाराज रहे।
   उन्होंने कहा कि शहीद किसी एक जाति या धर्म के नहीं होते, वे पूरे देश के होते हैं। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान शहीद अशोक कुमार की मां भतेरी देवी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। भाई राजवीर सिंह ने बताया कि हवन यज्ञ कर शहीद की आत्मा को शांति के लिए प्रार्थना की गई।
शहीद अशोक कुमार का जीवन परिचय-
1 नवंबर 1977 को जन्मे अशोक कुमार की
खेलों में विशेष रुचि, गांव के मैदान में फुटबाल खेलना प्रिय था। 1 मार्च 1997 को रानीखेत में खुली भर्ती में 13 कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हुए।
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सियाचिन ग्लेशियर पर ड्यूटी, फिर कारगिल युद्ध में भेजा गया। कारगिल युद्ध में 5685 प्वाइंट  तुरतूक पहाड़ी पर दुश्मनों को मारकर कब्जा किया।युद्ध के दौरान वीरगति प्राप्त की। मरणोपरांत सैन्य सेवा मेडल से सम्मानित।
 फोटो कैप्शन 06: शहीद अशोक कुमार की 26वीं पुण्यतिथि पर हवन यज्ञ में श्रद्धांजलि अर्पित करते स्वामी समर्पण आनंद महाराज एवं परिजन।




शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक संजीव कुमार ने कनीना के कई स्कूलों का किया निरीक्षण
--दी अनेक हिदायतें
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कनीना की आवाज।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक संजीव कुमार एचसीएस ने राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी निरीक्षण किया। उनका स्वागत विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने फूलों का गुलदस्ता भेंट करके किया। निरीक्षण के केंद्र बिंदु कंप्यूटर लैब, आइसीटी लैब तथा  विज्ञान विषयों की प्रयोगशालाएं रही तथा सघन निरीक्षण के पश्चात संबंधित कक्षाअंो का निरीक्षण, अध्यापकों की दैनिक डायरी तथा कक्षा में प्रयोग किए जा रहे स्मार्ट बोर्ड की उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी ली।
  संयुक्त निदेशक ने  विशेष हिदायत दी कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना तथा शिक्षण में नवाचार शामिल व गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग कृत संकल्प है। इससे पूर्व संयुक्त निदेशक ने माडल संस्कृति स्कूल कनीना में खंड स्तरीय विज्ञान माडल प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों को बेहतर वैज्ञानिक सोच के साथ एआई तकनीक के विभिन्न आयामों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय में दोपहर भोजन को भी चखा तथा विद्यालय की भाषा प्रयोगशाला ,आइसीटी प्रयोगशाला व बुनियाद की प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया । इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी विश्वेश्वर, प्रवक्ता नितिन मुदगिल, सचिन, संदीप कुमार, प्राचार्य सुनील कुमार सहित समस्त स्टाफ उपस्थित था। तत्पश्चात उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रामबास का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उनके साथ  डालनवास के प्राचार्य रमन शास्त्री उपस्थित थे ।
फोटो कैप्शन 07: संयुक्त निदेशक संजीव कुमार एचसीएस का राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में स्वागत करते नरेश कौशिक प्राचार्य






प्रकृति की मार के सामने रोटी रोजी नजर आई छिनती
-खेती का सहारा वो भी हुआ बेसहारा, किसान रोने को मजबूर
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कनीना की आवाज।
 कनीना और आसपास क्षेत्रों में जहां इस वर्ष अब तक 500 एमएम से अधिक वर्षा हो चुकी और वर्षा का दौरा अभी भी जारी है। किसानों की कपास की फसल पूर्णतया बर्बाद हो चुकी है बाजरे में भी अब किसानों को कुछ बचता नजर नहीं आ रहा है और तो और पशुओं के लिए उपयोगी चारा भी खराब हो गया है। सैकड़ों किसानों ने जिनके पास कोई अन्य रोटी रोजी का सहारा नहीं था, यह सोचकर बाजरे की फसल उगाई थी कि सरकारी भाव अच्छे मिलेंगे वही कपास के भी अच्छे भाव मिलने की संभावना थी लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि उनकी रोटी रोजी प्रकृति छीन लेगी। अब फसल पूर्ण रूप से बर्बाद हो गई है, कुछ किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने जमीन जोतने के लिए जमींदारों से ली थी किंतु उन पर भी प्रकृति का कहर बरपा है। अब उनको इस साल कठिनाई से जीवन यापन करना पड़ेगा या किसी से उधार लेकर ही अपने बच्चों की पढ़ाई करानी पड़ेगी। कुछ किसान ऐसे मिले जिनकी इस बार रोटी रोजी नष्ट होती नजर आ रही है।
** किसान एक- महेंद्र सिंह जिसके पास केवल एक एकड़ जमीन है। अन्य कोई रोटी रोजी का सहारा नहीं है। आशा के साथ बाजरा बोया था, यह सोचकर कि उसके दो बच्चे पढ़ते हैं, दोनों की पढ़ाई का खर्चा भी पैदावार से निकल जाएगा और घर का गुजारा भी हो जाएगा किंतु उन्हें क्या मालूम था कि अधिक वर्षा उनकी एक एकड़ की फसल को ही बर्बाद करके रख देगी। महेंद्र सिंह असहाय नजर आये। उन्होंने कहा कि जैसी दाता की इच्छा, जिस हाल में रखेंगे वैसे रहना पड़ेगा।
 रविदत्त किसान जिसके पास डेढ़ एकड़ जमीन है। घर में और कमाने वाला नहीं है। दो बच्चे हैं जिनमें से एक परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। रवि दत्त ने बताया कि उन्हें इस बार विश्वास था कि अच्छी पैदावार होगी और बच्चे की अच्छी कोचिंग दिलवाई जा सकेगी किंतु उनकी आशा उस समय धूमिल हो गई जब उनकी फसल मिट्टी में मिल गई। उनका कहना है कि अब तो फसल कटाई की भी जरूरत नहीं है, फसलों में पानी भर गया है फसल बर्बाद हो गई है लेकिन अब हिम्मत के अलावा और कोई चारा नहीं है।
किसान कांता- पति और पत्नी दोनों बेरोजगार है। दोनों के पास आधा एकड़ जमीन है। तीन बच्चे हैं जो पढ़ते हैं। इसी से रोटी रोजी चलाते हैं। बच्चों की पढ़ाई का खर्चा भी वहन करना पड़ता है। उन्हें आशा थी कि अच्छी पैदावार होगी। विशेषकर सब्जी उगाने की सोची थी। बीज भी बोये थे वर्षा ने खराब कर दिये। फसल बर्बाद हो गई। ऐसे में रोटी रोजी का कोई सहारा नहीं बचा लेकिन उनका कहना है कि जिस रूप में प्रभु रखना चाहे,रहना पड़ेगा। कहीं से उधार लेकर गुजर बसर करेंगे।   किसान जगदीश जिसके पास डेढ़ एकड़ जमीन है। दो बच्चे हैं, दोनों बेरोजगार हैं। कुछ बकरी पाल कर गुजारा करते हैं किंतु इस बार उनकी फसल भी बर्बाद हो गई और चारा भी उपलब्ध नहीं हो पाएगा। ऐसे में उनका कहना है कि अब तो गुजर बसर करने के लिए किसी से उधार लिया जाएगा या फिर सरकार से उम्मीद है कि सरकार उन्हें कुछ मुआवजा दे तो गुजर बसर हो पाएगा।
किसान राजेश कुमार, जिसने पांच एकड़ जमीन ठेके पर ली थी। उन्हें क्या मालूम था कि इस बार उनकी फसल बर्बाद हो जाएगी और जमींदार को दी गई राशि भी पूरी नहीं हो पाएगी।  तीन लड़कियां है, जिनकी पढ़ाई भी और भविष्य में शादी भी करनी है। ऐसे में उनके सामने भी रोटी रोजी का संकट छाया हुआ है।
किसान सज्जन सिंह जिनके पास कोई जमीन नहीं है। 6 एकड़ जमीन जोतने के लिए ली थी, वह भी बर्बाद हो गई है। दो छोटे बच्चे हैं जिनकी पढ़ाई के लिए भी फीस वहन करनी पड़ेगी। ऐसे में पशुओं के लिए चारा तथा रोटी रोजी का संकट छाता नजर आ रहा है ऐसे अनेक कैसे और भी देखने को मिला।
किसान सुरेश कुमार दो एकड़ जमीन है सारी पर उगाई गई फसल बर्बाद हो गई। अब उनके लिए अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। महज सरकार द्वारा मिलने वाला मुआवजा ही सहारा साबित होगा।
 फोटो कैप्शन: कांता, महेंद्र, राजेश, रविदत्त, सज्जन सिंह, सुरेश कुमार


फिर हुई कनीना क्षेत्र में वर्षा, फसल बर्बादी का दौर जारी
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में आए दिन वर्षा होती है जिसके चलते क्षेत्र के कपास और बाजरे की फसल में नुकसान का दौर जारी है। किसानों की माने तो बाजरे की फसल कपास की फसल बचने की अब कोई संभावना नहीं रही है जबकि बाजरे का खराब होने का दौर जारी है। किसान मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन मौसम विभाग अभी 15 सितंबर तक इसी प्रकार का मौसम रहने की बात कह रहा है। ऐसे में किसान अब केवल सरकार पर आश्रित हैं। सरकार ने क्षतिपूर्ति के लिए ई-पोर्टल तो खोल दिया है ताकि अपनी फसलों की क्षति की जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर सकें। पोर्टल खोलने के बाद जहां किसान त्वरित गति से फसलों की क्षति की जानकारी पोर्टल पर देने लग गए हैं। किसानों की मांग है कि अब अधिक से अधिक मुआवजा मिले। यदि मुआवजा कम मिलता है तो उनकी फसल क्षति की भरपाई नहीं हो पाएगी।
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला, 15 सितंबर तक अपलोड कर सकते हैं नुकसान की रिपोर्ट-
मानसून सीजन 2025 के दौरान भारी वर्षा और जल भराव से प्रभावित किसानों को राहत नहीं देने की उद्देश्य से सरकार ने खरीफ फसलों को हुए नुकसान के दावो को ई- क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपलोड करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 15 सितंबर 2025 तक खोला गया है।
वित आयुक्त, राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इसमें महेंद्रगढ़ जिले के सभी गांवों को शामिल किया गया है।
सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारी और विभागीय अधिकारी इस संबंध में किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेंगे, ताकि कोई भी पत्र किस दवा दाखिल करने से वंचित न रहे।
गौरतलब है कि इससे पहले क्षतिपूर्ति  पोर्टल तो खोल दिया गया था, लेकिन उसमें महेंद्रगढ़ जिले के किसानों के लिए आप्शन नहीं आ रहा था।
अब सरकार ने पोर्टल को ओपन कर दिया है  विकास एवं निगरानी समिति सदस्य चौधरी रामनिवास खेड़ी ने बताया कि महेंद्रगढ़ अकेला ऐसा जिला है जिसके सभी गांव क्षतिपूर्ति पोर्टल के लिए खोले गए हैं।
फोटो कैप्शन 04: बाजरे की काटकर डाली गई फसल पूर्णरूप से नष्ट




उप-प्रधान पद का चुनाव 6 सितंबर को,
--चौथी बार हुई है घोषणा, न्यायालय के आदेश पर लिया गया है यह फैसला
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कनीना की आवाज।
 कनीना नगर पालिका बालिका के प्रधान पद का चुनाव 6 सितंबर को निर्धारित किया गया है। यह फैसला प्रशासन ने पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर लिया है। जहां कनीना पालिका के नवनियुक्त प्रतिनिधियों ने 25 मार्च 2025 को पंचकूला में शपथ ले ली थी। यदि कोई प्रतिनिधि बच गया तो उनको भी उप प्रधान के चुनाव वाले दिन शपथ दिलाई जाएगी। इस संबंध में कनीना एसडीएम ने एक पत्र जारी करते हुए प्रधान एवं सभी पार्षदों को सूचना दे दी है तथा उन्होंने बताया कि उप प्रधान चुनाव वाले दिन नगरपालिका में एक घंटे के लिए पहले दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे फिर नामांकन पत्र प्राप्त किए जाएंगे, जांच होगी नाम वापस लेने का भी समय दिया जाएगा, यदि आवश्यक हुआ तो मतदान दोपहर 12 से 1 बजे तक चलेगा तुरंत बाद परिणाम की घोषणा कर दी जाएगी। इस संबंध में उन्होंने कहा है कि कुछ इच्छुक उम्मीदवार एक प्रस्ताव तथा एक समर्थक सहित अपना नामांकन भर सकते हैं।
15 दिनों में करवाये जाए कनीना पालिका उप-प्रधान के चुनाव न्यायालय आदेश--
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में कनीना नगर पालिका के उप- प्रधान बनने के बारे में गत दिनों सुनवाई हुई।
एडवोकेट आदित्य यादव एवं सत्यनारायण यादव द्वारा हाईकोर्ट में पार्षदों एवं अन्य लोगों की तरफ से/कुल 8 लोगों द्वारा याचिका दायर की थी कि एक बड़े नेता अपने चहेते को उप-प्रधान बनवाना चाहते हैं इसलिए नगर पालिका उप-प्रधान का बार-बार स्थगित कर दिये जाते हैं।
 एडवोकेट सत्यनारायण ने बताया कि हाई कोर्ट में सरकार की तरफ से कहा गया है कि 15 दिन के अंदर अंदर नगर पालिका के उप-प्रधान का चुनाव करवा दिया जाएगा।  उल्लेखनीय है कि 12 अप्रैल को कनीना पालिका के चुनाव संपन्न हुये थे किंतु अभी तक उप प्रधान का चुनाव नहीं हो सका है। इससे पहले जहां 18 अप्रैल को पहली बार, 26 अप्रैल को दूसरी बार फिर 20 जून को तीसरी बार उप प्रधान पद के लिए तिथि घोषित हुई थी जो स्थगित कर दी गई। कनीना के 14 वार्डों से चुने हुए प्रतिनिधि तथा प्रधान पद का प्रतिनिधि सहित 8 पार्षदों से कोरम पूरा होना है तथा उप-प्रधान पद को बहुत अधिक जरूरत समझा जा रहा है क्योंकि विकास कार्यों में अहं योगदान होगा।
फोटो कैप्शन 05: कनीना नगरपालिका








कनीना महाविद्यालय में उद्यमिता पर हुईं विभिन्न गतिविधियां
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कनीना की आवाज।
पीकेएस राजकीय महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को महाविद्यालय के प्राचार्य विनोद कुमार की अध्यक्षता में  उद्यमिता पखवाड़े का समापन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक  सहायक प्राध्यापक संदीप कुमार ककरालिया ने बताया कि उद्यमिता पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर स्लोगन राइटिंग, पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन, वाद-विवाद में भाग लिया।
   उन्होंने कहा कि जब मन में कुछ करने का लक्ष्य है तो किसी भी छोटे उद्योग को हम किसी भी ऊंचे मुकाम तक ले जा सकते हैं। विद्यार्थियों ने बढ़-बढ़चढ़कर विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में रोहित प्रथम, वर्षा और शीतल द्वितीय तथा महक और नेहा  तृतीय, मुस्कान ने सांत्वना पुरस्कार  प्राप्त किया। कार्यक्रम में डा.महेश, डा. कांता, डा.हरिओम, डा. सोमवीर,  डा.यतेंद्र सिंह, डा.बलराज, डा. संदीप , डा. रविंद्र, और महाविद्यालय के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: उद्यमिता दिवस पर कनीना कालेज में पोस्टर मेकिंग में भाग लेते हुए पिद्यार्थी



वार्ड 9 में कई दिनों से सप्लाई हो रहा है गंदा जल
 -अधिकारी एक सप्ताह में ठीक करने का दे रहे हैं आश्वासन
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कनीना की आवाज।
 कनीना के वार्ड नौ में गंदे पानी सप्लाई की लंबे समय से समस्या चली आ रही है। वहीं वार्ड से रवि कुमार, सुरेश कुमार, अमन कुमार, रमन कुमार, संतरा देवी आदि ने बताया कि उनके यहां सप्लाई जल इतना गंदा होता है कि जोहड़ का पानी भी उससे साफ होता है। उन्होंने सरकार से बार-बार मांग की है कि इस प्रकार सप्लाई  गंदे जल को रोका जाए वरना लोगों में बीमारी फैलने का अंदेशा बन जाएगा। अभी तक कई बार के जन स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर दिया है। लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि इस पानी को पीने से कोई भी रोग किसी भी समय लग सकता है। ऐसे में रोगों से बचने के लिए कम से कम साफ जल सप्लाई करने की मांग की है। इस संबंध में लोगों से बात की गई जिनके विचार निम्र हैं-
*** गंदा जल सप्लाई होने से परेशानी बढ़ गई है। जल इतना दूषित होता है कि किसी तालाब का पानी लाया जाए तो वह इससे बेहतर होगा। ऐसे में लोग मजबूरन नालियों में इस पानी को बहा देते हैं। यह तो कपड़े धोने के काम भी नहीं लाया जा सकता।
-- आलोक कुमार ,वार्ड वासी
 वाटर सप्लाई का पेयजल कहने को पेयजल है किंतु इसको पशु भी नहीं पीते। यह जल इतना दूषित है कि किसी भी काम में नहीं लिया जा सकता। ऐसे जल सप्लाई करने से बेहतर है सप्लाई ही न की जाए। मजबूरन लोग पेड़ पौधों में इस पानी को डाल रहे हैं।
-- मनीष जांटीवाल
 वार्ड नौ में सप्लाई होने वाला जल बीमारी फैला सकता है। सप्लाई जल में शिविर का जल मिल रहा है लेकिन विभाग अभी तक यह पता नहीं लगा पाया है कि यह गंदा और शुद्ध जल कहां मिलते हैं? इसे अविलंब ठीक किया जाए।
-- सुनील कुमार निवासी कनीना
इस संबंध में जेई वाटर सप्लाई तथा एसडीएम को भी पत्र लिखा जा चुका है किंतु अभी तक पेयजल सप्लाई दुरुस्त नहीं हुई है। लंबे समय से गंदा जल सप्लाई हो रहा है।
- नितेश कुमार ,वार्ड पार्षद
वैसे यह समस्या आज की नहीं अपितु मई माह से चली आ रही है। जेब से कनीना मंडी सड़क मार्ग बनाया गया है उसके बाद से यह गंदा जल सप्लाई हो रहा है। भ्रसक प्रयास किये जा रहे हैं कि गंदा और शुद्ध जल कहां आपस में मिल रहे हैं पता लगाया जा रहा है। सड़क मार्ग को तोड़ा नहीं जा सकता। यह जल दो जगह जाता है, बारी-बारी से वाल्व लगाकर पता लगाया जा रहा है कि किस जगह से अशुद्ध जल शुद्ध में मिल रहा है? आने वाले एक सप्ताह में इस समस्या को दूर कर दिया जाएगा।
- तेज बहादुर सिंह जेई, वाटर सप्लाई ,कनीना फोटो कैप्शन दो व तीन सप्लाई होने वाला दूषित जल। साथ में आलोक कुमार ,मनीष कुमार ,नितेश कुमार सुनील की पासपोर्ट



7 सितंबर को भारत में दिखाई देगा ब्लड मून चन्द्र ग्रहण
--इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण, नंगी आंखों से भी देख सकते हैं
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कनीना की आवाज।
07 सितंबर को भारत सहित पूरी दुनिया में इस साल का  अंतिम चन्द्र ग्रहण होगा। भाद्रपद की पूर्णिमा के दिन लगने वाला  पूर्ण चन्द्र  ग्रहण जो भारतवर्ष में दिखाई देगा।  7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा जब पृथ्वी की पूरी छाया चंद्रमा को ढक लेती है इस दौरान चंद्रमा का गहरा लाल रंग का दिखाई देता है क्योंकि सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से छानकर चंद्रमा तक पहुंचती है।
 इसे ब्लड मून चन्द्र ग्रहण भी कहते है। इस अद्भुत घटना 07 सितंबर को भारतीय समय के अनुसार रात 8:58 से शुरू होकर 08 सितंबर की सुबह 2:25 तक रहेगा। यह चन्द्र ग्रहण 11:41 बजे पूर्ण ग्रहण में बदल जाएगा। चंद्रमा का रंग लाल दिखाई देगा। चन्द्र ग्रहण की अवधी  5 घण्टे  27 मिनट की होगी।
चन्द्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं जब चन्द्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया मे आ जाता है। ऐसा तभी होता है जब जब सूर्य ,पृथ्वी ,और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हो। चन्द्र ग्रहण केवलं पूर्णिमा को घटित हो सकता है। यह चन्द्र ग्रहण मे चन्द्रमा पहले काले फीर धीरे धीरे सुर्ख लाल रंग मे तब्दील हो जायेगा ।
    पृथ्वी अपने उपग्रह, चांद को लेकर जब सूरज के चक्कर लगाती है तो पूर्णिमा के दिन सूरज और चांद के बीच में पृथ्वी आ जाती है और सूरज की रोशनी को चांद पर पडऩे से रोक देती है, इस कारण चंद्रमा की चमक खत्म हो जाती है और चांद की सतह काली या कम चमकीली पड़ जाती है। चांद की इस स्थिति को चंद्र ग्रहण कहते हैं। चंद्र ग्रहण पूर्ण या आंशिक हो सकता है। यह एक खगोलीय घटना है और विज्ञान का नियम है।
 ग्रहण का उपयोग कुछ स्वार्थी लोग जानबूझकर अपने स्वार्थ सिद्धि और  उदर पूर्ति  के लिए कर रहे  हैं। वे इससे आदमी को डराते हैं उन्हें उन में खौफ पैदा करते हैं और वह मनुष्य की अज्ञानता, अनजानपन और अनभिज्ञता का लाभ उठाते हैं, उनमें अंधविश्वास फैलाते हैं और वह आदमी  और  आदमियत को बौना बनाते हैं।
    धर्मपाल शर्मा ने बताया कि चंद्र ग्रहण में किसी भी राहु या केतु का कोई रोल नहीं है क्योंकि राहुल या केतु आकाश में कोई बिंदु नहीं हैं, कोई ग्रह या उपग्रह नहीं हैं। इनका कोई अस्तित्व नहीं है, इनसे हमें डरने की जरूरत नहीं है। ग्रहण के दिन हमें अपने बच्चों को डराना नहीं चाहिए और ना ही डरना चाहिए। यह एक अद्भुत नजारा है, प्रकृति का चमत्कार है हमें इसका भरपूर आनंद लेना चाहिए और अपने बच्चों को इसके बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए इससे कोई अहित, हानि या समस्या  होने वाला नहीं है। यह एक खगोलीय घटना है, इसको इसी रूप में लीजिए। इससे देखने में कोई तकलीफ नहीं होने वाली है। अपने बच्चों को अंधविश्वासों के भंवर से निकाले ।
ध्यान रहे सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए किंतु चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना चाहिए।



5 सितंबर शिक्षक दिवस पर विशेष
खंड कनीना में 63 वर्षों में चार शिक्षकों को मिल चुका है राज्य शिक्षक अवार्ड
-दो हो चुके हैं सेवानिवृत्त, दो अभी भी कार्यरत
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कनीना की आवाज।
कनीना खंड में विगत 63 वर्षों के इतिहास में महज चार शिक्षकों को हरियाणा राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला है जिनमें से दो सेवा में हैं और दो सेवानिवृत्त हो चुके हंै। वर्ष 2020 में कोरोना के चलते राज्य के किसी भी शिक्षक को कोई अवार्ड नहीं दिया गया।  इन चार में से दो दिव्यांग हैं। 5 सितंबर 1962 से डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा था जो अभी भी जारी है।
    बेहतर शिक्षण पर मिला था अवार्ड-
 कनीना प्रखंड के गांव ककराला निवासी एवं रसूलपुर स्कूल से मुख्याध्यापक पद से सेवानिवृत्त बनवारीलाल को कनीना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में बतौर समाजशास्त्र प्रवक्ता काम करते हुए 2006 में हरियाणा शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया गया था। आज भी जनसेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने दो साल की अतिरिक्त सेवा का लाभ भी मिला था। कनीना खंड के पहले अवार्डी शिक्षक रहे हैं। बेहतर शिक्षण के कारण मिला था अवार्ड। उन्होंने वन महोत्सव में बढ़ चढ़ कर भाग लिया, पेड़ पौधे न केवल लगाए अपितु संरक्षण भी किया, रक्तदान हो या फिर बेहतर परीक्षा परिणाम हर जगह समाजसेवा में उनका नाम अग्रणी रहा है।
बनवारी लाल पहले विज्ञान अध्यापक रहे हैं। हर विद्यार्थी उनकी शिक्षण कला से प्रभावित था। बाद में समाजशास्त्र के प्रवक्ता बने और मुख्याध्यापक बने और बतौर 2011 को बतौर मुख्याध्यापक रसूलपुर से सेवानिवृत्त हुये हैं। बेशक दुर्भाग्यवश उनके एक पैर पर बिजली का पोल गिरकर दिव्यांग बना दिया था।
   हर क्षेत्र में अग्रणी रहे हैं वीरेंद्र सिंह कैमला-
 वीरेंद्र सिंह मौलिक मुख्य अध्यापक राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला खंड कनीना जिला महेंद्रगढ़ में 2 जून 2014 से कार्यरत हैं तब से लेकर अब तक उन्होंने विद्यालय में पूर्ण नैतिकता समर्पण भाव के साथ कार्य किया है। एक रेल दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवा देने के बाद पूर्ण दिव्यांग होने के उपरांत भी उन्होंने कड़ी मेहनत लगन निष्ठा विद्यार्थियों के साथ लगातार शैक्षिक उपलब्धियों में नए-नए आयाम सफलता के प्राप्त किए हैं। जिला व खंड स्तर पर उनका विद्यालय हमेशा प्रथम रहता है। राष्ट्रीय पर्व पर विद्यालय की प्रथम और द्वितीय स्थान पर रहा है। एनएमएमएस में 4 वर्षों से लगातार विद्यालय के बच्चों का चयन हुआ है। पिछले 15 साल से सभी शैक्षिक उपलब्धियों उत्कृष्ट है। पिछले 20 वर्षों से सेवाकाल के दौरान उनका शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा है। मुख्यमंत्री सौंदर्यीकरण स्कीम में विद्यालय जिला स्तर पर प्रथम रहा था। वे सेवा में 16 जनवरी 1997 में तदर्थ आधार पर बतौर हिंदी शिक्षक सेवा में आये और अब मुख्याध्यापक बतौर कार्यरत हैं। वे 2032 में सेवानिवृत्त होंगे।
हर क्षेत्र में रही है उपलब्धि-
प्रमिला पत्नी कुलदीप कुमार जेबीटी अध्यापिका वर्ष 2000 में सेवा में आई तथा वर्तमान में पाथेड़ा में हिंदी शिक्षिका बतौर कार्यरत है। अध्यापिका शुरुआत से होनहार रही है। उन्हें भी 5 सितंबर 2019 में राज्य शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया गया था। अति मृदुभाषी एवं अपने शिक्षण कार्य में लीन रहने वाली प्रमिला हर क्षेत्र में उपलब्धि प्राप्त होने के बाद ही उन्हें यह अवार्ड मिला है। उन्हें भी दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का मौका दिया जाएगा। वे आठ नवंबर 2000 से बतौर जेबीटी सेवा में आई थी और अब हिंदी शिक्षिका हैं। वे 2039 में सेवानिवृत्त होंगी।
 पढ़ाये हुए बच्चे हैं प्रोफेसर एवं डाक्टर-
वर्ष 2021 में धनौंदा स्कूल से डा. होशियार सिंह यादव को स्टेट अवार्ड मिल चुका है। उन्होंने 45 पुस्तकों की रचना भी की है तथा अपने शिक्षण कार्य के लिए सदा ही जाने जाते हैं। आज भी उनसे पढ़ा हुआ विद्यार्थी उन्हें याद कर नतमस्तक हो जाता है। वे कालेज से लेकर नवोदय विद्यालयों सहित सरकारी विभिन्न विद्यालयों में सेवा दे चुके हैं। दो बार राज्यपाल से सम्मानित हो चुके हैं।  वे 30 अप्रैल 2024 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं।  वे वर्ष 1995 में तदर्थ आधार पर सेवा में आये तथा 5 सितंबर 2022 को राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला। उनसे शिक्षा ग्रहण करने वाला विद्यार्थी उन्हें नहीं भूला सकता। एनएमएमएस हो या सांस्कृतिक कार्यक्रम उनकी भागीदारी बेहतर रही है। पढ़ाये हुए विद्यार्थी प्रोफेसर, डाक्टर, शिक्षक, प्राध्यापक, एवं ऊंचे पदों पर पदाधिकारी हैं।
2020 के बाद लाभ बंद-
वर्ष 2020 तक स्टेट अवार्डी शिक्षकों को दो साल का सेवा विस्तार, दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियां मिलती रही हैं किंतु 2020 के बाद नहीं दी ा रही हैं। डा. होशियार सिंह को छोड़कर शेष सभी शिक्षकों को मिली हैं दो साल की सेवा विस्तार।
नहीं जारी हुई है 2024 की सूची-
शिक्षा विभाग हरियाणा द्वारा अभी तक वर्ष 2024 की भी अवार्डी शिक्षकों की सूची जारी नहीं की है। उस पर 2025 के अवार्डी शिक्षकों की सूची भी नहीं आई है। शिक्षक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
जिला महेंद्रगढ़ से मिल चुका है कई शिक्षकों को यह अवार्ड-
जिला महेंद्रगढ़ से वीरेंद्र गणित अध्यापक, डा. जितेंद्र भारद्वाज, अशोक कुमार, संगीता प्राध्यापिका, दिलबाग सिंह बीआरपी, ईश्वर सिंह प्राचार्य, अश्विनी कुमार प्राचार्य, जेपी यादव सेवानिवृत्त प्राचार्य आदि को भी राज्य शिक्षक पुरस्कार मिल चुका हे।
फोटो कैप्शन: विरेंद्र कैमला, प्रोमिला देवी, बनवारीलाल एवं डा. होशियार सिंह यादव





























Wednesday, September 3, 2025


 


याद दिला दी है 2022 की जब बाजरे भुट्टों में हो गया था अंकुरित
-1995 के हालात भी बने हैं जब खेतों में पानी ही पानी
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कनीना की आवाज।
कनीना और आसपास क्षेत्रों में जमकर वर्षा हो रही है। जहां इस वर्ष करीब 500 एमएम वर्षा हो चुकी है जो विगत वर्षों  की तुलना में अधिक है। वर्षा के चलते बाजरे की फसल खड़ी तथा काटकर डाली गई दोनों ही रूपों में अंकुरित हो गई है। कपास की फसल पूर्णरूप से बर्बाद हो गई है। वर्ष 2022 में सितंबर माह में ही वर्षा होने से फसल बर्बाद हो गई थी। उस समय लगातार 100 एमएम वर्षा के करीब हुई थी जब किसानों ने बाजरे की फसल को काटकर डाल दिया था तथा फसल पैदावार के अंतिम दौर में थे। जिसके चलते बाजार अंकुरित हो गया था। बाजरे के भुट्टे काट कर डाले गए थे वो नीचे से सब गए अंकुरित हो गए थे। इस वर्ष भी वैसी ही हालात हैं। कपास की फसल के टिंडे काले पड़ गए हैं या अंकुरित हो गए हैं। बाजरे के भुट्टे जमीन के संपर्क में आने से अंकुरित हो चुके हैं या बदरंग हो चुके हैं वहीं खड़ी फसल के भुट्टों में भी बाजरा अंकुरित हो चुका है। किसान वर्षा के चलते चलते 1995 की बाढ़ तथा 2022 दोनों को याद करते हैं। किसान बताते हैं कि 1995 में खूब वर्षा हुई थी। भूमिगत जलस्तर भी बढ़ गया था। पूरे हरियाणा में बाढ़ आ गई थी किंतु जिला महेंद्रगढ़ में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी। एक बार फिर से खेतों में पानी ही ही पानी नजर आता है और बाढ़ जैसी हालत बन गई है। वर्षा भूमि के जलस्तर को बढ़ाने में कारगर सिद्ध हो सकती है किंतु फसल के लिए कहर बनकर आई है। फसल बर्बाद होती जा रही है। यदि वर्षा लगातार चली तो शायद ही कोई फसल बच पाएगी और चारा भी नहीं बचेगा।
इस समझ में कुछ किसानों से चर्चा की गई जिनके विचार इस प्रकार हैं।
 किसान सत्यवीर सिंह ने बताया कि 2022 में भी किसानों की फसल यूं ही मिट्टी में बर्बाद हो गई थी। एक बार फिर से वही हालात बन गए हैं। इस बार कपास और बाजरे की फसल दोनों की बर्बाद होने की हो चुकी है। ई-पोर्टल खोल खोल दिया गया जिससे सहारा मिल सकता है बशर्ते अधिक मुआवजा प्रति एकड़ दिया जाए।
  किसान रामकिशन का कहना है कि लगातार बादलों के बरसने से किसानों की आंखों में आंसू आ गये हैं। बाजरे का इस बार एसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल का है जो अच्छा भाव रखा गया है लेकिन अब लगता है कि यह भाव किसी काम का नहीं रहा क्योंकि जब फसल ही नहीं बचेगी तो एमएसपी का क्या लाभ होगा। उन्होंने सरकार से अधिक से अधिक मुआवजा देने की मांग की है।
कर्ण सिंह किसान ने बताया कि वैसे तो 1995 के बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जब खेतों में दूर-दूर तक पानी ही पानी था। इस वक्त भी खेतों में पानी पानी भरा हुआ है। इस पानी का भूमिगत जल स्तर को अच्छा लाभ मिल सकता है लेकिन फसल पूर्णतया मिट्टी में मिल गई है। ऐसा ही हाल रहा तो लावणी करने की ही जरूरत नहीं रहेगी। उन्होंने सरकार से मुआवजा मांगा है।
 किसान हनुमान सिंह का कहना है कि 2022 में जहां लगातार 100 एमएम वर्षा उस समय हुई थी जब किसानों ने अपने खेतों में काटकर फसल डाल दी थी।  इस बार फसल कुछ काटी गई है बाकी खेतों में खड़ी है। जो खेतों में खड़ी है उसके भुट्टे भी अंकुरित हो गए हैं। अब तो एकमात्र सहारा सरकार है जो मुआवजा देगी तो कुछ क्षति की पूर्ति हो पाएगी।
 फोटो कैप्शन: सत्यवीर सिंह, रामकिशन करण सिंह और हनुमान सिंह



 जिन किसानों की फसलों का इंश्योरेंस है वो भेजें व्हाट्सएप पर शिकायत
-तीन विकल्पों में से एक को अपनाए
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कनीना की आवाज।
 क्षेत्र में लगातार वर्षा के कारण जहां कपास और बाजरे की फसल जहां नष्ट हो गई है वही ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल भी खुल गया है। लेकिन जिन किसानों ने फसलों का बीमा करवा रखा है वे अपना क्लेम डालने के लिए तीन तरीकों में से किसी एक को अपना सकते हैं।
 विस्तृत जानकारी देते हुए उप मंडल कृषि अधिकारी महेंद्रगढ़ डा. अजय यादव ने बताया कि या तो किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं या क्रोप इंश्योरेंस ऐप डाउनलोड करके उसे पर अपनी शिकायत भेज सकते हैं। शिकायत भेजने के लिए इंश्योरेंस की प्रति भेजनी होगी। उन्होंने बताया कि जो किसान व्हाट्सएप के जरिए क्लेम करना चाहते हैं वह 0765514447 पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। केवल आनलाइन ही शिकायत ली जाएंगी, ऐसे में किसानों को अपना क्षतिपूर्ति का क्लेम पाने के लिए आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।




ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने से किसानों ने ली राहत की सांस
-10 सितंबर तक दे सकते हैं ब्यौरा,मेरी फसल मेरा ब्यौरा की भी तिथि बढ़ाई
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कनीना की आवाज।
कई दिनों से अधिक वर्षा होने के कारण जिला महेंद्रगढ़ में कपास और बाजरे की फसल लगभग तबाह हो चुकी है। इसके चलते ही ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले जाने की बार-बार मांग चल रही थी, आखिरकार क्षतिपूर्ति पोर्टल सरकार ने खोल दिया है। किसानों ने खुशी जताई और ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करने के लिए किसानों की लंबी कतार जमा हो गई।
   किसान सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह ,सतीश कुमार, गजराज सिंह, महावीर सिंह,अजय कुमार, कांता देवी आदि ने बताया कि पोर्टल खुलने की सूचना उन्हें मिली है और उन्हें खुशी है कम से कम सरकार ने पोर्टल खोल दिया है लेकिन उनकी मांग है कि अधिक से अधिक मुआवजा सरकार दे ताकि किसानों की फसल की क्षति की पूर्ति हो। सके। किसानों ने बताया कि उनकी फसल पूर्ण रूप से बर्बाद हो गई है, कपास के मुकाबले बाजरे की फसल कम बर्बाद हुई है। ऐसे में एकमात्र सहारा किसानों को सरकार से है और सरकार उनको यदि अधिक मुआवजा देगी तो ही उनकी समस्या हल हो पाएगी। इस संबंध में ई पोर्टल पर क्षतिपूर्ति का ब्यौरा भरने के लिए विभिन्न इंटरनेट सेवाओं, सीएससी सेंटरों पर किसान पहुंचने लग गए हैं। नारायण इंटरनेट , विनीत इंटरनेट, छोटूराम सीएससी सेंटर ने बताया की उन्होंने कुछ आवेदन भी अब तक कर दिए हैं तथा जिला महेंद्रगढ़ के सभी किसानों के लिए पोर्टल खुला है।
  इस संबंध में अनूप पटवारी ने बताया कि पूरे जिला में महेंद्रगढ़ के लिए यह सेवा उपलब्ध हो गई है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल दिया है किंतु अभी तक 10 सितंबर तक ही अंतिम तिथि है।  अभी फिलहाल 10 सितंबर तक ही पोर्टल पर ब्यौरा अपलोड किया जा सकता है। साथ में किसानों के लिए एक बार फिर से फसल रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर ब्यौरा देने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 सितंबर कर दी गई है। जिन किसानों ने अभी तक फसल मेरी फसल मेरा भी और नहीं दिया है वे भी अपनी फसल का पंजीकरण 10 सितंबर तक करवा सकते हैं।
 फोटो कैप्शन 3: इंटरनेट पर क्षतिपूर्ति पोर्टल ब्यौरा भरवाते हुए किसान




उद्यमिता पखवाड़ा के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित
--उन्हाणी कालेज में चले कई कार्यक्रम
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कनीना की आवाज।
उद्यमिता पखवाड़ा के अवसर पर राजकीय कन्या महाविद्यालय, उन्हाणी में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्राचार्य डा. विक्रम सिंह यादव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में उद्यमिता की भावना का विकास करना तथा उनके नवाचार एवं कौशल को प्रोत्साहित करना था।
   इस मौके पर महाविद्यालय परिसर में आयोजित नारा लेखन, पोस्टर मेकिंग और भाषण प्रतियोगिता में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
नारा लेखन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत से जुड़े प्रभावशाली नारे प्रस्तुत किए। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप संस्कृति जैसे विषयों को आकर्षक रंगों और डिजाइनों के माध्यम से उकेरा गया। भाषण प्रतियोगिता में छात्राओं ने उद्यमिता के महत्व, भारत के भविष्य में उसकी भूमिका और युवाओं की जिम्मेदारी पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
विजेताओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया।
    कार्यक्रम के समापन पर प्लेसमेंट सेल प्रभारी डॉ. कविता ने प्राचार्य एवं निर्णायकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन करता रहेगा ताकि छात्राओं में उद्यमिता कौशल का निरंतर विकास हो सके। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं और हमारा महाविद्यालय इस दिशा में सतत प्रयासरत रहेगा।
फोटो कैप्शन 01: उद्यमिता दिवस पर छात्राएं पोस्टर दिखाते हुए



मातृशक्ति को दिया नायब सरकार ने लाडो लक्ष्मी योजना का सम्मान-चौधर रामनिवास
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कनीना की आवाज।
दूरसंचार सलाहकार समिति सदस्य एवं भाजपा नेता चौधरी रामनिवास खेड़ी ने कहा कि सीएम  नायब सिंह सैनी  द्वारा दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना लागू कर मातृ शक्ति का मान- सम्मान बढ़ाया है। 25 सितंबर से इस योजना का प्रदेश की महिलाओं को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि नायब सरकार द्वारा चुनाव में किए गए वादों को लगातार पूरा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार द्वारा देश व प्रदेश में 2047 तक विकसित भारत -विकसित हरियाणा के सपने का साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक व सराहनीय कार्य किया जा रहे हैं। भाजपा नेता चौधरी रामनिवास खेड़ी ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द कहना न केवल राजनैतिक गिरावट है, कल की भारतीय संस्कृति और मर्यादा का भी अपमान है।
   चौधरी रामनिवास खेड़ी ने कहां की नायब  सरकार सबका साथ-सबका विकास- सबका प्रयास -सबका विश्वास की नीति पर कार्य कर रही है। पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। सीएम ने साबित कर दिया कि वो जो कहते हैं करके दिखाते हैं, चुनाव में भाजपा सरकार की गई घोषणा को पूरा किया है।




वर्षा से खराब फसल की स्पेशल गिरदावरी करवाए सरकार- सुनिल राव
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कनीना की आवाज।
बार एसोसिएशन कनीना के पूर्व उप-प्रधान सुनिल राव ककरालिया ने पिछले कई दिनों से लगातार हो रही वर्षा के कारण बाजरे व कपास की फसल में हुए नुकसान के लिए सरकार को जिले में क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलना चाहिए । सरकार को फसलों के नुकसान की स्पेशल गिरदावरी करवा कर किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा देना चाहिए। सरकार महेंद्रगढ़ जिले के लिए फसल नुकसान की बाबत क्षतिपूर्ति पोर्टल ना खोल कर जिले के साथ भेदभाव कर रही है। हम सरकार से मांग करते है कि सरकार बीमा कंपनियों को भी आदेश दे की बीमाकृत फसलों का जल्द से जल्द और उचित मुआवजा किसानों दे।
फोटो कैप्शन: सुनील राव


























प्रशासन की लापरवाही से कनीना बस स्टैंड तालाब बना, यात्रियों का जीना दुश्वार
बस स्टैंड द्वार पर बना तालाब
-आवागमन प्रभावित, अधिकारी मौन
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कनीना की आवाज।
कनीना का मुख्य बस स्टैंड यात्रियों की सुविधा के बजाय अब उनकी मुसीबत बन चुका है। बाहर भरे गंदे पानी और कीचड़ से बस पकडऩा किसी चुनौती से कम नहीं। यह समस्या महीनों से बनी हुई है लेकिन प्रशासन पूरी तरह से आंखें मूंदकर बैठा है। बरसात के बाद भी पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। सड़क तालाब का रूप धारण कर चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग और प्रशासन को बार-बार शिकायतें दी गईं, लेकिन न तो कोई अधिकारी मौके पर आया और न ही समस्या का समाधान किया गया।
यात्री सुनील कुमार ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन सिर्फ कागजों में सफाई दिखाता है, जमीनी हकीकत यही है कि यात्रियों को गंदगी और बदबू में खड़ा होना पड़ रहा है।
वहीं राजेश यादव का कहना है कि बरसात में यह जगह बस स्टैंड नहीं, तालाब बन जाता है। महिलाएं और बुजुर्ग फिसल कर गिरने से कई बार चोटिल हो चुके हैं।
महिला यात्री नीलम देवी ने कहा कि अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। शायद प्रशासन यात्रियों की तकलीफों से बेखबर रहना चाहता है।
स्थानीय दुकानदार मोहनलाल ने आरोप लगाया कि गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और ग्राहक भी इधर आना बंद कर रहे हैं। प्रशासन की नाकामी का खामियाजा हम भुगत रहे हैं।
लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही जलभराव हटाने और निकासी की पक्की व्यवस्था नहीं की गई तो वे मजबूर होकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
  फोटो कैप्शन 02: बस स्टैंड द्वार पर बना वर्षा के जल का तालाब

Tuesday, September 2, 2025


 


 फिर हुई 20 एमएम वर्षा
-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले जाने की मांग
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कनीना की आवाज।
 कनीना और आसपास क्षेत्रों में जहां अधिक वर्षा बाजरे की फसल को कम तो कपास की फसल को अधिक क्षति पहुंची है। बाजरे के भुट्टे खड़ी फसल में अंकुरित हो गए हैं वहीं कपास की फसल के टिंडे भी अंकुरित हो गये हैं। किसान बेहद परेशान है।  किसान अब सरकार से वर्षा से हुई क्षति हेतु क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले जाने की मांग कर रहे हैं ताकि किसी प्रकार उनकी क्षति की पूर्ति हो सके।     दक्षिण हरियाणा की कपास और बाजरा प्रमुख फसलें हैं। दोनों ही बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। किसान बेहद परेशान हैं। आए दिन वर्षा होती है। जहां मंगलवार को 20 एमएम वर्षा हुई जिसने रही सही कसर भी पूरी कर दी। अब किसानों को कोई उम्मीद नहीं है कि उनकी बाजरे या कपास की फसल बच पाएगी।  किसानों की एक ही मांग है कि जितना जल्दी हो सके क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाए और अधिक से अधिक मुआवजा दिया जाए तभी जाकर किसानों की माली हालत सुधर पाएगी। इस संबंध में किसानों से चर्चा की गई--
*** कपास की फसल के टिंडे या तो काले पड़ गए या खड़ी फसल में ही टिंडों में अंकुरण आ गया है। कपास के टिंडे अंदर से इतने काले हो गए हैं कि कपास बिनौला और रुई दोनों खत्म हो गये हैं। ऐसे में कपास उगाने वाले किसान निराश है । किसने की एक ही मांग है सरकार को इस क्षति के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलना चाहिए और अधिक से अधिक मुआवजा देना चाहिए।
--- विनोद कुमार, किसान
बाजरे की फसल भी खराब चुकी है। क्षेत्र में अधिक बाजरा उगाया गया है तथा दूसरे नंबर पर कपास उगाई गई है। इसलिए बाजरे एवं कपास दोनों ही फसलों की क्षतिपूर्ति सरकार द्वारा की जानी चाहिए और यह पोर्टल खोलकर किसानों की फसल का मुआवजा देना चाहिए तथा इस समय क्षति की सर्वे करवानी चाहिए और अधिक से अधिक मुआवजा देना चाहिए।
--- कर्ण सिंह, किसान
आज के दिन किसान बेहद मायूस है क्योंकि अधिक वर्षा से न तो बाजरे की फसल बची है और न ही कपास की फसल से कोई उम्मीद बची है। दोनों लगभग खराब हो चुकी है। उन्होंने पोर्टल खोले जाने के साथ-साथ फसलों की क्षति की सर्वे भी अविलंब करवानी चाहिए और किसानों को अधिक से अधिक मुआवजा देना चाहिए ताकि किसानों की आस पूरी हो सके।
--- गजराज सिंह, किसान
फोटो कैप्शन 3: किस अंकुरित टिंडे दिखाते हुए 04: किसान कपास की फसलों में हुई क्षति को दिखाते हुए



तेज बारिश में करंट का बढ़ा खतरा, बिजली विभाग कनीना ने जारी किया अलर्ट
-सतर्क रहें! गीले हाथों से न छुए बिजली उपकरण,कनीना बिजली निगम ने दी चेतावनी
बिजली से जुड़े हादसों से बचाव के लिए बिजली विभाग की अपील हेल्पलाइन नंबर किया जारी
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कनीना की आवाज।
  लगातार हो रही बरसात और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम कनीना ने नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है। निगम के उपमंडल अधिकारी उमेश कुमार वर्मा ने एडवाइजरी जारी कर कहा कि बारिश और बाढ़ के हालात में बिजली से जुड़े हादसों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को लापरवाही से बचते हुए विशेष सावधानी बरतनी होगी। उन्होंने कहा कि गीले हाथों से विद्युत उपकरण न छुए,  वर्षा या बाढग़्रस्त क्षेत्रों में गिरे हुए बिजली के तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। घरों या दुकानों में पानी भर जाने की स्थिति में मुख्य बिजली स्विच तुरंत बंद कर दें और किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में निगम के कंट्रोल रूम/हेल्पलाइन नंबर 8059888240 पर तुरंत संपर्क करें।
निगम की ओर से खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को बिजली के खंभों और उपकरणों से दूर रखने की अपील की गई है। साथ ही पानी भरे क्षेत्रों में मोटर, पंप और इन्वर्टर जैसी मशीनों का इस्तेमाल न करने की भी हिदायत दी गई है। आपकी सावधानी ही आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा है।



महेंद्रगढ़ पुलिस का नशा मुक्ति अभियान
-- कनीना में लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति किया जागरूक
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कनीना की आवाज।
पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के निर्देशानुसार आज कनीना के वार्ड नंबर 1, 7 और 8 में निरीक्षक शारदा और उनकी टीम ने जागरूकता अभियान के अंतर्गत लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया, नशे के खिलाफ अभियान चलाने व युवाओं को नशे से दूर रखने बारे प्रेरित किया और नशा न करने की शपथ दिलवाई। इस अभियान के तहत लोगों को नशे का प्रकार, शारीरिक नुकसान, गलत संगति, दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक विकास में नशा सबसे बड़ी बाधा बनता है। कम उम्र में ही बच्चे नशे के प्रति जागरूक होकर इससे दूर रहें, इसके लिए पुलिस जागरूकता अभियान चला रही है। अभिभावक भी अपने बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक करें। सभी व्यक्ति इस अभियान से जुड़कर समाज को नशामुक्त बनाने में सहयोग करें। यदि शुरूआत से ही बच्चों को नशे के दुष्प्रभाव और सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक नुकसान से अवगत कराया जाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस दौरान मौजूद लोगों को टीम ने जागरूक करते हुए कहा कि यदि आने वाली युवा पीढ़ी को नशामुक्ति अभियान से जोड़ा जाए, तो इसका सार्थक परिणाम भी आएगा।
फोटो कैप्शन 02: नशामुक्ति के प्रति जागरूक करती पुलिस अधिकारी


आपस में हुई कहासुनी को लेकर डंडे से मारपीट कर चोटें मारने के मामले में
आरोपित गिरफ्तार
-डंडा भी किया बरामद
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कनीना की आवाज।
आपस में हुई कहासुनी को लेकर डंडे से मारपीट कर चोटें मारने के मामले में कार्रवाई करते हुए थाना सदर कनीना की पुलिस टीम ने आरोपित सत्यप्रकाश वासी नौताना को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने पूछताछ में आरोपी से वारदात में डंडा बरामद किया है। आरोपित को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। शिकायतकर्ता रामअवतार वासी नौताना ने शिकायत दी कि वह मानेसर ट्रक पर ड्राइवरी की नौकरी करता है। दिनांक 21 अगस्त को वह गाड़ी दूसरे ड्राईवर को देकर धारुहेड़ा से उसके गांव के ड्राइवर सुरेन्द्र के साथ उसके ट्रक में बैठकर घर आ रहा था। उसी ट्रक में उसके गाँव का सत्यप्रकाश पहले से ही बैठा था। रास्ते में सत्यप्रकाश ने उसके साथ बेवजह बहस करनी शुरू कर दी। उसने शराब पी रखी थी और मुझे गाली गलौच करने लगा। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे वो दोनों ट्रक से उतर गए, उसी समय सत्यप्रकाश उसके साथ मारपीट करने लगा, एक व्यक्ति ने उसको छुड़वाया। शिकायतकर्ता बैग लेकर घर की तरफ जा रहा था तभी सत्यप्रकाश ने उसे अचानक सामने से रोक लिया और लाठी से उसके सिर पर मारा। उसने शिकायतकर्ता को हाथ, पैर, बाई आंख, नाक व शरीर पर लाठी से भयंकर चोटें मारी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।



धर्मशाला में नशा मुक्ति पर जागरूकता अभियान कार्यक्रम आयोजित
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कनीना की आवाज।
कनीना के वार्ड नंबर 01 स्थित पितामह कान्हा सिंह धर्मशाला में इंस्पेक्टर शारदा देवी के नेतृत्व में नशा मुक्त हमारा भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर वार्ड नंबर-एक के नरेंद्र फौजी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लाल सिंह जेई, राजेन्द्र प्रसाद, नित्यानंद, राम दास, नवीन यदुवंशी, अश्वनी कुमार, अजय भोलू आदि ने भागीदारी निभाई द्य
इंस्पेक्टर शारदा देवी ने नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेने का  आह्वान किया।
फोटो कैप्शन 01: कान्ह सिंह धर्मशाला में इंस्पेक्टर शारदा नशामुक्ति के बारे में जागरूक करते हुए।



नारियल को कच्चा और पका दोनों रूपों में किया जाता उपयोग -डा जितेंद्र
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कनीना की आवाज।
नारियल यूं तो दक्षिण भारत में पैदा होता है किंतु नारियल का के उपयोग को की जानकारी से धीरे-धीरे लोग जागरूक होते जा रहे हैं। वर्तमान समय में नारियल को कच्चा और पका दोनों रूपों में उपयोग किया जा रहा है। पूरे विश्व में नारियल की खेती होती है। जहां नारियल खाने से वैज्ञानिक लाभ बताते हैं। नारियल खाने से जहां वजन कम रहता है, मधुमेह से बचा जा सकता है और अनेक समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। नारियल के गुणों के चलते 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। विशेषकर सर्दियों में कच्चा नारियल अधिक खाया जाता है क्योंकि मौसम में अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है, कच्चे नारियल में बहुत सारे गुण पाए जाते हैं। इस संबंध में डा. जितेंद्र मोरवाल से से नारियल के विषय में चर्चा की।
 उन्होंने बताया कि नारियल में विटामिन और लोहा होने के साथ-साथ तांबा, सेलिनियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम आदि पाए जाते हैं यदि इसका उपयोग रोजाना किया जाए तो शरीर में मजबूती और ऊर्जा दोनों का संचार होगा। उन्होंने बताया कि कच्चा नारियल खाने से पेट की बहुत सी समस्याएं हल हो जाती हैं क्योंकि कच्चे नारियल में 60 प्रतिशत तक पानी होता है। यह कब्ज, एसिडिटी, पेट की जलन, अफारे की समस्या से छुटकारा दिलाता है। जिन व्यक्तियों को अपना वजन काबू करना है वह इसकी कच्चे नारियल की सहायता से वजन पर काबू पा सकता है। क्योंकि इसमें विटामिन बी-6 पाया जाता है जो याददाश्त को बढ़ाता है। शुगर की मात्रा नियंत्रित रखने में भी इसका उपयोग किया जाता है। विटामिन-ए अधिक होने के कारण एंटी एक्सीडेंट का काम भी करता ही है साथ में बालों की समस्या को मिटाता है। पेय के रूप में कच्चे नारियल के जल का उपयोग होता है। जहां किसी भी पूजा में कच्चे नारियल का उपयोग होता है वहीं अंतिम संस्कार के समय भी नारियल का उपयोग किया जाता है। जहां कच्चा नारियल लोग बेचकर अपनी रोटी रोजी भी कमाते हैं वही नारियल पक जाने पर न जाने किस कितने प्रकार की मिठाइयों में डाला जाता है शरीर में लाभ होता है। विटामिन-सी भी नारियल में पाया जाता है जो हृदय को स्वस्थ रखता है वहीं पाचन क्रिया की रुकावट दूर होती है। ऐसे में कच्चा नारियल हो या पका हुआ नारियल अवश्य प्रयोग किया जाता है। कोरोना काल के समय नारियल का पानी बहुत कारगर सिद्ध हुआ था। नारियल महंगे भी हो गए थे परंतु नारियल का उपयोग करके लोगों ने अपनी जान को बचाया। ऐसे में डॉक्टर का कहना है कि नारियल का उपयोग जरूर करें।
फोटो कैप्शन: डा. जितेंद्र मोरवाल











सतनाली में कृषि मेला स्थगित
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कनीना की आवाज।
 कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत 3 सितंबर को सतनाली अनाज मंडी में कृषि मेला आयोजित किया जाना था वह स्थगित कर दिया गया है। विस्तृत जानकारी देते हुए विषय विशेषज्ञ महेंद्रगढ़ डा. गजानंद शर्मा ने बताया कि बरसात के चलते यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।


Monday, September 1, 2025


 


सतनाली में कृषि मेला 3 सितंबर को
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कनीना की आवाज।
 कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत 3 सितंबर को सतनाली अनाज मंडी में कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। विस्तृत जानकारी देते हुए विषय विशेषज्ञ महेंद्रगढ़ डा. गजानंद शर्मा ने बताया कि खरीफ फसलों में कीट व बीमारी प्रबंधन तथा नवीनतम तकनीकों के बारे में कृषि विज्ञान महेंद्रगढ़ के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को जानकारी दी जाएगी। इस मौके पर विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे जो अपने-अपने विभागों की स्कीमों की जानकारी किसानों को उपलब्ध करवाएंगे।



36 साल सेवा समर्पित करने के बाद जीआरपी के इंस्पेक्टर सेवानिवृत्त
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कनीना की आवाज।
 बनिहाड़ी निवासी इंस्पेक्टर देशराज जीआरपी नारनौल से रिटायर्ड हो गए हैं। उन्होंने करीब 36 साल 8 महीने तक पुलिस को अपनी सेवाएं समर्पित की। वह 1989 में हरियाणा पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुए थे तथा अब इंस्पेक्टर बनकर सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी सेवानिवृत्ति पर जीआरपी रेलवे स्टेशन पर एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसे संबोधित करते हुए डीएसपी राजेश कुमार ने कहा कि अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। देशराज इस कार्य में खरे उतरे हैं तथा वह अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत की तरह काम करेंगे। इस मौके पर पूर्व चेयरमैन सत्यपाल दहिया, रेवाड़ी जीआरपी के एसएचओ देवेंद्र सिंह, नारनौल जीआरपी के एसएचओ कैलाश चंद शर्मा, पूर्व इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह, अंबाला से सब इंस्पेक्टर कमल कुमार, रिटायर्ड इंस्पेक्टर बलवान सिंह, देशराज की पत्नी माया देवी, सोमदत्त, दिनेश, राजेश, संदीप, मोतीलाल व नीरसिंह आदि मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 09:इंस्पेक्टर देशराज को सम्मानित करते डीएसपी राजेश कुमार।




विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं का शिक्षित होना अत्यंत जरूरी -डा. बनवारी लाल
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कनीना की आवाज।
युवा किसी  भी देश की सबसे अमूल्य पंूजी होते है। देेश का उज्ज्वल भविष्य युवाओं पर ही निर्भर करता है। जिस  देश के युवा जितने ज्यादा  शिक्षित एवं कुशल होते है वह राष्ट्र प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति के नए आयाम स्थापित करता है। वर्तमान में भारत   दुनिया का सबसे बड़ा युवा  देश है जिसमें 65 प्रतिशत से ज्यादा  आबादी  युवाओं कि है जिसके बलबूते पर आज भारत विकासशील ना होकर विकसित होने की राह पर चल रहा है। ये विचार एसडी स्कूल ककराला प्रांगण में युवा ओर सेवा फाउंडेशन  द्वारा आयोजित कार्यक्रम समुत्कर्ष विद्यार्थी प्रोत्साहन उपक्रम- के आयोजन के दौरान पूर्व केबिनेट मंत्री हरियाणा सरकार सहकारिता एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग डा. बनवारी लाल ने मेधावी छात्र -छात्राओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।    उन्होंने कहा कि युवा ओर सेवा फाउंडेशन द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की स्मृति में प्रोत्साहन राशि प्रदान करके उन्हें शिक्षा  के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का उपक्रम सही मायनों में प्रशंसा के योग्य है। इसके लिए उन्होंने संस्था से जुड़े कार्यकर्ताओं के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन का यह प्रयास मेधावी विद्यार्थियों को जीवन में सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने में मील का पत्थर साबित होगा।
   कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ के भिवानी विभाग के सह-विभाग कार्यवाह सुभाष ने बताया कि भारत रतन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का पूरा जीवन समाज को शिक्षित एवं संगठित करने में व्यतीत हुआ है। उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का शक्तिशाली साधन है तथा यह निडर , संगठित और संघर्ष के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने बाबा साहेब के जीवन से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंग बताकर युवाओं को आगे बढऩे के लिए पे्ररित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि स्वामी समर्पणानंद  महाराज दड़ौली आश्रम के प्रवचनों ने युवाओं में देशभक्ति भाव पैदा किये। उनका कहना था कि देश हमें सब कुछ देता है बदले में हम भी तो कुछ देना सीखे। कार्यक्रम में समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विविध संगठनों के गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी सहमति प्रदान की जिसमें शिक्षा, समाज सेवा,पर्यावरण संरक्षण , धर्म जागरण  व्यापारी वर्ग, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी अनेक हस्तियां मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 08: डा. बनवारीलाल पूर्व मंत्री दीप प्रज्वलित करते हुए।



एसडीएम कार्यालय समक्ष धरना 5 को
-ई-पोर्टल खोलेने की मांग
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कनीना की आवाज।
लगातार हो रही भारी बरसात से खेतों में जलभराव के कारण कपास तथा बाजरा की फसलों में हुए नुकसान का मुआवजा देने तथा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने की मांग को लेकर बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता आगामी 5 सितम्बर को उपमंडल अधिकारी नागरिक कनीना के कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करेंगे। धरना प्रदर्शन का नेतृत्व समाजसेवी अतरलाल करेंगे।
जानकारी देते हुए बसपा के राजेन्द्र यादव ने कहा कि जिला के सैकड़ों गांवों के किसानों की कपास तथा बाजरा की फसलें खेतों में बरसाती पानी जमा होने के कारण खराब हो गई हैं। परन्तु सरकार ने अभी तक महेन्द्रगढ़ जिला के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोला है। सरकार ने सिरसा, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, रोहतक, रेवाड़ी, पलवल, कुरूक्षेत्र, यमुनानगर, झज्जर, फतेहाबाद और नूंह 12 जिलों के लिए ई-क्षति पूर्ति पोर्टल 10 सितम्बर तक खोल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार फसल खराबा का मुआवजा देने तथा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने में महेन्द्रगढ़ जिला के किसानों के साथ भेदभाव कर रही है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल न खोलने के कारण जिला के किसान फसल खराबा की रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करने से वंचित हो गए हैं। इससे उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। महेन्द्रगढ़ जिले के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल न खोलने के कारण किसानों में भारी रोश व्याप्त है और उन्हें धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार ने तत्काल ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोला तो बसपा कार्यकर्ता आगामी 5 सितम्बर को उपमंडल अधिकारी नागरिक कनीना कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करेंगे।




फिर हुई 15 एमएम वर्षा, सड़कों पर जल भरा
-किसानों के खेतों में बाजरा हुआ अंकुरित,भारी नुकसान
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में यूं तो इस वर्ष 450 एमएम से अधिक वर्षा हो चुकी है किंतु सोमवार को 15 एमएम वर्षा ने फिर से लावणी/कटाई का काम प्रभावित हो गया है। वहीं किसान अब बेहद मायूस नजर आए क्योंकि कपास के टिंडे काले पड़ गए या अंकुरित हो गए हैं। वहीं बाजरे की खड़ी फसल के भुट्टे भी अंकुरित हो गये हैं वहीं काट कर डाली गई फसल भी अंकुरित होने से नुकसान बढ़ता ही जा रहा है। यदि वर्षा और होती है तो नुकसान भी बढ़ेगा। इस समय किसान त्वरित गति से लावणी कर रहे हैं और जो लावणी नहीं कर पा रहे उनके खेत में ही फसल को नुकसान हो रहा है। जहां बाजरे की फसल चारे के लिए उगाई जाती है वह चारा भी पशुओं के लायक नहीं रहा है। क्षेत्र में आए दिन वर्षा हो रही है।
 किसान किसानों का कहना है अब तो वे सरकार के भरोसे हैं। अगर सरकार क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल देती है और उन्हें कुछ मुआवजा मिल जाता है तो हो सकता है उनका गुजर बसर हो जाएगा। अब तो खड़ी और पड़ी फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है।
  कनीना क्षेत्र में करीब 20000 हेक्टेयर पर बाजरे की फसल उगाई गई है दूसरे नंबर पर कपास उगाया गया है। दोनों ही फसलों में इस बार नुकसान होता जा रहा है। किसानों ने अपने खेतों में काट कर डाला गया बाजरा दिखाया और बताया कि किस प्रकार की अंकुरित हो गया। उनके बाजरे के भुट्टे अंकुरित हो गए हैं, कुछ काले पड़ गए हैं। कुछ किसानों से बाजरे एवं कपास फसल पर चर्चा की गई।
*** काट कर डाला गया बाजरा अंकुरित होने लग गया है और अंकुरित होने के बाद यह बाजरा किसी भी काम का नहीं रहेगा। वही भुट्टों में फफूंद लग गई है। बाजरे की फसल से किसानों को बड़ी आशा थी किंतु अब वह भी धूमिल होती नजर आ रही है। यदि सरकार मुआवजा नहीं देती तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
   ---महिपाल सिंह, किसान
 बाजरे की फसल पशुओं के चारे के लिए उगाई जाती है लेकिन खड़ी और पड़ी फसल के भुट्टे काले पड़ गए हैं। भुट्टों पर फफूंद लग गई है,  अंकुरित हो गए हैं। ऐसे में यह चारा भी पशुओं के लायक नहीं रहेगा। आने वाले समय में पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहराने की संभावना बढ़ गई है। पशुपालक भी अभी से मायूस नजर आने लगे हैं। किसानों की कमर टूटती नजर आ रही है।
    ---निरंजन, किसान
अब तो कपास के टिंडे जो वर्षा के कारण भूमि से छू गए काले पड़ गए हैं तथा पौधे के ऊपर लगे हुए टिंडे अंकुरित हो गए हैं। कपास को तो भारी नुकसान हुआ है वही बाजरे का नुकसान अभी जारी है। अधिक वर्षा होने पर बाजरे में नुकसान भी बढ़ता ही चला जाएगा। किसानों ने सरकार से मांग की है कि मुआवजा दिया जाए।
--सुंदर सिंह, किसान
बाजरे की फसल को चारे के साथ-साथ अनाज के रूप में भी काम में लेते हैं लेकिन न तो चारा बचा है और नहीं अनाज खाने योग्य बचा है। किसानों ने बड़ी मेहनत से बाजरा उगाया गया था लेकिन उनकी मेहनत प्रकृति के सामने धूमिल हो गई है। किसी का जोर तो चलता नहीं लेकिन किसान बेहद मायूस हैं। किसानों को मुआवजा सरकार देती है तो उनका गुजर बसर हो पाएगा वरना इस साल पशुओं को बेचना पड़ेगा। वही  अनाज के लिए भी भाग दौड़ करनी पड़ेगी।
-- किसान अजय
कपास की फसल को नुकसान हो चुका है। टिंडे काले पड़ गए हैं या कपास अंकुरित होने लग गया है। बाजरे की खड़ी फसल भी अंकुरित हो गई है। बाजरे खड़ी फसल पर लगे भुट्टे अंकरिेत हो गये हैं वही काट कर डाले गए भुट्टे भी अंकुरित हो चुके हैं। यदि अधिक वर्षा होती है तो नुकसान और भी बढ़ेगा।
--- डा.अजय यादव, एसडीओ कृषि विभाग महेंद्रगढ़



















फोटो कैप्शन 3 व 4 : खेत में काटकर डाली गई फसल व भुट्टे
5 व 6: अंकुरित हुए भुट्टे
07: किसान अंकुरित भुट्टे दिखाते हुए
साथ में अजय, महिपाल, निरंजन, सुंदर सिंह, और डा. अजय यादव पासपोर्ट

 

विद्यार्थियों को दिलवाई गई स्वच्छता की शपथ
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में विभाग के निर्देशानुसार हमारा विद्यालय, हमारा स्वाभिमान- संकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत सभी विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया।
 मौलिक मुख्याध्यापक वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने बताया कि हम सब ने मिलकर अपने विद्यालय को स्वच्छ, अनुशासित और  हरियाली से परिपूर्ण बनाना है विद्यालय की सभी संपदा, संसाधन और उनका संरक्षण आदि का राष्ट्रीय गान की भांति सम्मान करना हैं। हम सभी ने मिलकर विद्यालय में भय मुक्त शैक्षिक वातावरण के साथ संस्कार पूर्ण और गुणवत्तापूर्ण व शिक्षा चरित्र निर्माण के साथ-साथ सर्वांगीण विकास पर आधारित नवाचार शिक्षण अधिगम की ओर विशेष प्रयास करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी और अध्यापक को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना तथा कर्म को पूजा समझना चाहिए। स्वच्छता से ही नवीन विचारों का निर्माण होता है, जिससे तन -मन और विचार स्वच्छ बनते हैं। मनुष्य के जीवन में नैतिक मूल्य की प्राप्ति होती है इसलिए हमें समझना चाहिए कि हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ है और हमारी आत्मा का अभिमान है, राष्ट्र निर्माण का आधार है।
 इस अवसर पर मनवीर सिंह ,सुनील कुमार , देवेंद्र कुमार ,राजेश कुमार, भगत सिंह, गरिमा रानी ,सूबे सिंह, सुनील कुमार,  तारामणी देवी, पिंकी देवी, बबली देवी आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: कैमला में विद्यार्थियों को शपथ दिलाते हुए।


आंबेडकर भवन निर्माण को लेकर बैठक आयोजित
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कनीना की आवाज।
  डा. भीमराव आंबेडकर जनजागरण समिति के पदाधिकारियों की बैठक कनीना नगरपालिका में संपन्न हुई जिसमें नगरपालिका प्रधान, नगर पालिका सचिव व नगर पालिका पार्षद उपस्थित रहे।
डा. भीमराव अंबेडकर जन जागरण समिति के प्रधान कृष्णा पूनिया ने बताया कि नगर पालिका द्वारा 2022 में प्रस्ताव पास किया गया था कि नहर के साथ लगती भूमि पर आंबेडकर भवन की चारदीवारी वह आंबेडकर भवन बनाया जाने पर विचार विमर्श किया गया था। जिसमें आंबेडकर भवन की चारदीवारी के लिए टेंडर लगाया गया वर्क आर्डर हो चुके थे लेकिन चिह्नित भूमि पर आज तक चारदीवारी नहीं बनाई गई है। इस विषय को लेकर नगर पालिका चेयरपर्सन से नगर पालिका द्वारा चिह्नित भूमि पर डा. भीमराव अंबेडकर भवन की चारदीवारी बनाने को लेकर चर्चा हुई। चर्चा में नगर पालिका चेयरपर्सन ने आश्वासन दिया कि एमई नगरपालिका से वार्तालाप करके एक सप्ताह के अंदर अंदर चारदीवारी बनाने पर विचार विमर्श किया जाएगा।
 इस बैठक में एडवोकेट दिलीप सिंह पड़तल, डा. अंबेडकर युवा समिति के प्रधान, सचिन रंगा भडफ़, डा. भीमराव अंबेडकर जन  जागरण समिति के प्रधान, कृष्णा पूनिया, उप-प्रधान,पवन कनीना, महासचिव राजेंद्र कपूरी, कोषाध्यक्ष बलबीर सिंह तोंदवाल, पूर्व पार्षद रामेश्वर कनीना, कुलदीप कनीना, प्रताप सिंह,नांगल मोहनपुर, वार्ड नंबर 8 के पार्षद नीलम कनीना , देशराज, वार्ड नंबर 6 के पार्षद राकेश कुमार, वार्ड नंबर 10 के पार्षद योगेश यादव, नरेंद्र फौजी, वार्ड नंबर 2 के पार्षद दीपक चौधरी, मनीष, वार्ड नंबर 11 के पार्षद होशियार सिंह आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: डा. आंबेडकर भवन को लेकर बैठक का नजारा।