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Thursday, October 16, 2025


 


बंदर पकडऩे के लिए आई तीन एजेंसी
-जल्द ही उनके जांचे


























जाएंगे कागजात
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कनीना की आवाज।
 कनीना में लंबे समय से बंदरों की समस्या झेल रहे लोगों के लिए कुछ शकुन भरा पाल होगा जब बंदरों को पकडऩे की कार्रवाई शुरू होगी। बंदर पकड़वाने के लिए टेंडर छोड़े गए थे जिसमें तीन एजेंसी आई हैं।
विस्तृत जानकारी देते हुए एमई नगर पालिका कनीना दिनेश कुमार ने बताया कि बंदर पकडऩे के लिए तीन एजेंसी आ चुकी है। टेंडर खोले जा चुके हैं। अभी उनके कागजात चेक करके फिर इनको बंदर पकडऩे का आदेश दे दिया जाएगा। संभावना है कि दीपावली के बाद ही यह कार्य संभव हो पाएगा।
   उधर उन्होंने बताया कि कनीना में डोर टू डोर कूड़ा कचरा उठाने के लिए दो एजेंसी आई है। इनको एक सप्ताह का समय दिया है ताकि ये डीएमसी नारनौल मिलेंगे और उसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। इसमें कुछ समय लगेगा। एमई दिनेश कुमार ने बताया कि अगर ये एजेंसी ठेका लेती है तो हर दिन साथ नए टेंपो लगेंगे जो कूड़ा उठाने के लिए ठेका लेती हैं तो 7 नये टैंपों लगाए जाएंगे जिन पर टैग लगे होंगे। और घरों पर भी टैग लगाए जाएंगे। तत्पश्चात गिला और सूखा कूड़ा अलग-अलग वाहनों में डाला जाएगा। लेकिन यह आगे की योजना है। अभी तो इन कूड़ा कचरा उठाने के लिए दो एजेंसी को डीएमसी के पास उपस्थित होना होगा।





दिव्यांग किसी प्रकार किसी से कम नहीं
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कनीना की आवाज।
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद पंचकूला के तत्वावधान में राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल कनीना में दिव्यांग जागरूकता शिविर के पहले दिन प्राचार्य सुनील की खुडानिया ने मां सरस्वती के चित्र के आगे दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत की।
अमृत सिंह राघव विशेष शिक्षक ने सभी एसएमसी मेंबर ,सामान्य अध्यापक, दिव्यांग बच्चों के अभिभावक को संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाई तथा विशेष शिक्षा का सरिता ने दिव्यंका के प्रकारों के कर्म और उपायों पर प्रकाश डाला। रिसोर्स पर्सन धर्मेंद्र ने दिव्यांग से संबंधित आने वाली बाधा से हम कैसे मुक्त हो सकते हैं, के बारे में सभी अभिभावकों ,अध्यापकों को बताया। धर्मेंद्र कुमार रिसोर्स पर्सन ने बताया कि दिव्यांग का कोई अभिशाप नहीं है बल्कि एक विशेष प्रकार की योग्यता है। और दिव्यांग किसी भी रूप में किसी से कम नहीं है। आज दिव्यांग हर क्षेत्र में अपना नाम कमा रहे हैं। और उन्होंने यह भी बताया कि कनीना  रिसोर्स सेंटर के अंतर्गत आने वाले कुछ दिव्यांग बच्चों ने सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली है। आखरी में प्राचार्य सुनील खुडानिया ने आने वाले सभी का अभिवादन किया।
  इस मौके पर मुंशी राम प्रवक्ता और धर्मेंद्र कुमार ने सहभागिता निभाई।
फोटो कैप्शन 10: दिव्यांग जागरूकता शिविर में संबोधित करते रिसोर्स पर्सन







निजी स्तर पर खरीद पहुंची 104228 क्विंटल
-अब तक 3609 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 104228 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा 1900 रुपये से लेकर 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 104228 क्विंटल हो चुकी है। गुरुवार को 225 किसान 7533 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 3609 टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।






जर्जर हो चला है कनीना से गाहड़ा सड़क मार्ग 

--टेंडर लगाए हुए हैं-एक्षन
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कनीना की आवाज।
 कनीना से गाहड़ा तक करीब 3 किलोमीटर का मार्ग अति जर्जर हो गया है। जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है।
 उल्लेखनीय है कि कनीना से गाहड़ा, सीहोर तथा आगे चरखी दादरी आदि तक यह मार्ग पहुंचता है। और इसी मार्ग से होकर बव्वा, बहाला होकर रोहतक तक भी पहुंचा जा सकता है। यह मार्ग कुछ वर्षों पहले बना था किंतु अति जर्जर हो चला है। सुरेंद्र सिंह, सीटू ,बबली, दिनेश, इंद्रजीत आदि में बताया कि इस मार्ग पर पैदल चलना भी कठिन हो गया है, दुर्घटनाओं का अंदेशा बन गया है। इस मार्ग पर छोटे-छोटे गड्ढे बन गए हैं। कुछ जगह तो जल भराव से सड़क टूट गई है। कुछ जगह सड़क का नामोनिशान मिट गया है। इस मार्ग की अविलंब सुध ली जाए ताकि आवागमन सुचारु रूप से हो सके।
इस संबंध में चंद लोगों से बात की तो उनके विचार निम्र हैं-
चरखी दादरी पहुंचने का यह छोटा मार्ग गाहड़ा,सिहोर होकर आगे गुजरता है किंतु यह मार्ग अति जर्जर हो चला है। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। कुछ जगह तो यही नहीं पता चला कि रोड़ था या नहीं। जब-जब किसान अपनी पैदावार लेकर कनीना आते हैं उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ती है। आवागमन प्रभावित हो रहा है।
-- मनोज शर्मा, कनीना
गाहड़ा-सीहोर सड़क मार्ग बहुत जर्जर है। इसी मार्ग पर जहां अनेक स्कूल संस्थाएं और कार्यालय स्थापित है वही इस सड़क मार्ग की हालत जर्जर होने के कारण और रोहतक जाने वाले लोग भी परेशान है क्योंकि उनके लिए भी एक छोटा मार्ग है। कनीना से गाहड़ा करीब 3 किलोमीटर मार्ग है। और इसकी हालत बहुत जर्जर है। इसकी तुरंत सुध ली जाए।
-- सुदेश कुमारी,बव्वा
  कनीना- गाहड़ा- सीहोर- बव्वा आदि गांवों से कनीना का गहरा संबंध है। इसलिए आवागमन इसी मार्ग से होता है और यह मार्ग अति जर्जर होने के कारण इस पर पैदल चलना भी कठिन हो गया है। यदि मार्ग बेहतर हो तो आवागमन बेहतर हो पाएगा। दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा। विशेष कर स्कूली विद्यार्थियों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। इस मार्ग पर कनीनावासियों का आवागमन भी अधिक है। खेतों में तथा गैस एजेंसी तक जाने के लिए भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है।
 सुरेश कुमार, कनीना
कनीना-सीहोर वाया गाहड़ा सड़क मार्ग को बने लंबा अरसा नहीं हुआ है किंतु इसकी हालत बहुत जर्जर हो गई है। कई स्थानों से सड़क गायब है ,कहीं चौड़े चौड़े गड्ढे बन गए हैं। यदि इसकी सुध ले ली जाए तो लाखों लोगों को लाभ मिलेगा, वहीं विभिन्न मैरिज प्लेस, स्कूल संस्थाएं इसी मार्ग पर स्थित हैं।
--रघुराज सिंह
क्या कहते एक्शन पीडब्ल्यूडी बीएंड आर-
एक्शन पीडल्यूडीबी एंड आर से सड़क के संबंध में चर्चा हुई ।उन्होंने बताया कि इस रोड का जल्द ही उद्धार होगा। टेंडर लगाए हुए हैं और टेंडर का कार्य पूर्ण होते ही इसका पुन: निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
फोटो कैप्शन 08: कनीना-गाहड़ा-सीहोर जर्जर मार्ग
साथ में सुदेश कुमारी, सुरेश कुमार, मनोज शर्मा, रघुराज सिंह





हेरिटेज विद्यालय में दीपावली अवसर पर दीया मेकिंग व रंगोली कार्यक्रम किया आयोजित
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कनीना की आवाज।
उप मंडल कनीना में स्थित हेरिटेज वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोहनपुर में आज दीपावली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए दिया मेकिंग तथा रंगोली कार्यक्रम की आयोजित की। जिसमें बच्चों ने बड़े ही सुंदर दिए सजाये इसमें नन्हे बच्चों ने बड़े ही सुंदर मनमोहक लुभाने वाले दिए सजाकर सभी का मन मोह लिया।
  जिसमें यूकेजी कक्षा से आराधना हनीष पहली कक्षा से युग, दूसरी कक्षा से नमन, तीसरी कक्षा से अवनी, चौथी कक्षा से निधि, पांचवीं कक्षा से समीर ने बड़े ही सुंदर-सुंदर दीये सजाए। इसके साथ विद्यालय में रंगोली कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमें कक्षा छठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और प्रतियोगिता में बहुत ही सुंदर-सुंदर रंगोली बनाई। जिसमें प्रथम स्थान चंचल,पूजा, एकता 11वीं कक्षा से, द्वितीय स्थान पलक, दीक्षित नौवीं कक्षा से तथा तृतीय स्थान लक्षिता, मोनिका ने रंगोली प्रतियोगिता में अपना स्थान हासिल किया। इस पूरे कार्यक्रम में बच्चों की बड़ी ही सराहना की गई जिन्होंने इतने अच्छे-अच्छे रंगोली पिक्चर्स बनाई हैं। नन्हे नन्हे बच्चों ने दीये सजाए हैं सभी ने उनकी सराहना की। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ने सभी बच्चों को बधाई दी और उन्हें अपनी प्रतिभाओं में और मेहनत करके सफलता प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के सीईओ कैलाश शर्मा, मनीष कुमार, डायरेक्टर खुशीराम शर्मा, प्रधानाचार्य कृष्ण सिंह, सीनियर कोआर्डिनेटर सुरेंद्र कुमार, जूनियर कोआर्डिनेटर सुमन  तथा समस्त अध्यापक उपस्थित रहे।




पीएमश्री जेएनवी करीरा में अभिभावक-शिक्षक बैठक का सफल आयोजन
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, करीरा के बहुउद्देशीय हाल में अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) का आयोजन किया गया।
   बैठक में सभी शिक्षकगण तथा अभिभावकों की व्यापक उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन और समग्र विकास पर विस्तृत चर्चा हुई। कक्षा शिक्षकों द्वारा अभिभावकों को बच्चों के परिणाम दिखाए गए, जिससे उनकी प्रगति और कमियों पर प्रकाश डाला गया।
मंच संचालन विक्रम सिंह द्वारा किया गया । उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य , वरिष्ठ शिक्षक विजय मोहन, सुदेश कुमारी ने व्याख्यान दिए, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और करियर मार्गदर्शन पर बल दिया गया। कई अभिभावकों ने उपयोगी सुझाव साझा किए, जैसे विद्यालय में नियमित रूप से शिक्षक अभिभावक बैठकों का आयोजन होना  चाहिए। इन पर विचार करते हुए विद्यालय प्रशासन ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। स्काउट एंड गाइड के विद्यार्थियों द्वारा सभी उपस्थित जनों को चाय और जलपान वितरण में सहयोग किया गया।
प्राचार्य बृजमोहन लाल रावत जी ने अपने उद्बोधन में सभी के सहयोग की प्रशंसा की। श्री रावत ने अभिभावकों के समक्ष विद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि छात्रावासों के शौचालय और स्नानघरों के अधिकांश पुराने दरवाजों को बदल दिया गया है, ताकि स्वच्छता और सुविधा बनी रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा और संरक्षा हमारी प्रथम जिम्मेदारी है, उसके बाद शैक्षणिक और अन्य सुविधाएं आती है । सभी अभिभावकों को आगामी दीपावली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने घोषणा की कि भविष्य में पीटीसी बैठकें प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी।
यह बैठक विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अभिभावक-शिक्षक सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई। विद्यालय परिवार ने सभी का आभार व्यक्त किया।
फोटो कैप्शन 06: नवोदय विद्यालय पीटीएम का नजारा


प्रदूषण रहित दीवाली मनाने का लिया संकल्प
-प्रदूषण से हो जाता है जीना हराम
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कनीना की आवाज।
लोगों में धीरे धीरे आई जागरूकता के चलते इस बार प्रदूषण रहित दीवाली मनाने के लिए युवा एवं बुजुर्ग आगे आने लगे हैं। दीवाली के दिन दीये जलाकर, घर की मिठाई खाकर मनाएंगे। दीवाली को हंसी खुशी, भाईचारा एवं एकता के साथ एक दूसरे को मिठाई बांटकर मनाना चाहते हैं।  इस बार दीवाली पर युवा एवं बुजुर्ग जागृत हैं और वे प्रदूषण के विषय में जानते हैं। मैत्रीभाव से मिलकर दीवाली मनाने का निर्णय लेने वालों की होड़ लगी हुई है। दीये जलाने व शहीदों की याद में एक एक दीया जलाने का निर्णय लिया है।
प्रसिद्ध पर्व पर प्रदूषण क्यों करें? हवन आदि करके वातावरण को शुद्ध रखने का प्रयास किया जाएगा। लोगों को प्रेरणा देकर पटाखे न चलाने या बहुत कम चलाने पर बल दिया जाए। गले मिलकर मिठाई का आदान प्रदान करके ही दीवाली का आनंद आएगा। खुशियों का त्योहार है इसमें नाखुशी कैसे बर्दाश्त की जाए?
   --राजेश कुमार, लूखी
 प्रेम, भाईचारा, एकता का पर्व दीवाली है। इस पर्व पर प्रदूषण करके बुजुर्ग एवं रोगियों के लिए सांस लेने की तकलीफ पैदा हो जाती हैं।  ऐसे में अगर प्रदूषणरहित दीवाली सबके मन को लुभाएगी। मिठाइयां बांटकर दीवाली मनाने पर बल दिया जाना चाहिए। मिठाई भी घर की बनी हुई होनी चाहिए। बाजार की मिठाई लेन देन में प्रयोग नहीं करेंगे।
      -निर्मल कुमार, नांगल हरनाथ
 देसी घी के दीये में डालकर दीपावली के दिन बुजुर्ग पुराने समय से जलाते आ रहे हैं। बुजुर्ग बहुत बुद्धिमान थे। पर्व पर तेल या मोमबत्ती जलाना अशुभ मानते थे। अब उन्हीं के कदमों पर चलकर वे इस बार दीवाली को देसी घी के दीयों से मनाएंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे। घी के दीये जलाने से वातावरण शुद्ध होता है।
---जसवंत सिंह, समाजसेवी कनीना
 देसी घी के दीये जलाकर हिंदुओं के महान पर्व को मनाना अति लाभदायक एवं फलदायक होता है। देसी घी के दीये जलाने प्रदूषण नामक बीमारी से बचा जा सकता है। वैसे भी घरों में पशुधन मिलता है और देसी घी भी आसानी से मिल जाता हे। ऐसे में इस पर्व पर देसी घी के दीये ही जलाएंगे।
   -डा मुंशीराम, नांगल मोहनपुर
फोटो कैप्शन  06: राजेश कुमार,  निर्मल कुमार,  जसवंत सिंह, डा मुंशीराम।



जर्जर हो चला है कनीना से गाहड़ा सड़क मार्ग
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कनीना की आवाज।
 कनीना से गाहड़ा तक करीब 3 किलोमीटर का मार्ग अति जर्जर हो गया है। जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है।
 उल्लेखनीय है कि कनीना से गाहड़ा, सीहोर तथा आगे चरखी दादरी आदि तक यह मार्ग पहुंचता है। और इसी मार्ग से होकर बव्वा, बहाला होकर रोहतक तक भी पहुंचा जा सकता है। यह मार्ग कुछ वर्षों पहले बना था किंतु अति जर्जर हो चला है। सुरेंद्र सिंह, सीटू ,बबली, दिनेश, इंद्रजीत आदि में बताया कि इस मार्ग पर पैदल चलना भी कठिन हो गया है, दुर्घटनाओं का अंदेशा बन गया है। इस मार्ग पर छोटे-छोटे गड्ढे बन गए हैं। कुछ जगह तो जल भराव से सड़क टूट गई है। कुछ जगह सड़क का नामोनिशान मिट गया है। इस मार्ग की अविलंब सुध ली जाए ताकि आवागमन सुचारु रूप से हो सके।


क्षेत्र में धनतेरस को लेकर सजी बर्तन की दुकानें
-हर घर से खरीदते हैं बर्तन
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में शनिवार को धन तेरस का पर्व मनाया जाएगा जिसको लेकर बाजार में बर्तनों की दुकानें सज गई हैं।
  कनीना क्षेत्र में दो दिनों पूर्व से ही दिवाली पर्व की धूम मची है। बाजारों में भारी रौनक देखने को मिली है वहीं बर्तनों की दुकानों पर दुकानदार ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं।
 दीपावली के चलते बाजार सजने लगे हैं। दीपावली के पर्व को महज चार दिन ही बाकी हैं और बाजार में रौनक आने लगी है। बाजार सजने लगे हैं। अब तक ऐसा लग रहा था कि रौनक फीकी रहेगी किंतु अब धीरे-धीरे बाजार सजने लगे हैं।  धीरे-धीरे बाजार में रौनक आने लगी है और भीड़ के चलते आवागमन में परेशानी होने लगी है। मुख्य मार्गों पर भी दुकानों की वजह से मार्ग संकीर्ण बन गए हैं। क्या कहते हैं दुकानदार एवं ग्राहक--
  इस दिन का लंबे समय से इंतजार होता है। इस दिन अन्य दिनों की बजाय सबसे ज्यादा बर्तन बिकते हैं। इस दिन लगभग हर घर से बर्तन खरीदने के लिए बाजार आते हैं। बर्तन वालों के लंबी कतार देखने को मिलती है। अब वो समय आ गया है।
---मुकेश कुमार, दुकानदार
आचार्य दीपक कौशिक का कहना है कि धन तेरस के दिन ही राक्षसों एवं देवताओं के बीच हुए समुद्र मंथन से अमृत निकला था जिसे पाने के लिए देवता अपना अपना बर्तन लिए बैठे थे और धनवंतरि सभी को अमृत बांट रहे थे। उसी दिन से माना जाता है कि धनवंतरि उन्हें अमृत बाटने आते हैं। इस दिन लोग नए बर्तन में धनवंतरि से अमृत पाने की इच्छा से बर्तन खरीदते हैं।
  --आचार्य दीपक
घर परिवार में बर्तनों की जरूरत होती है किंतु इस दिन का विशेष इंतजार होता है क्योंकि इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा चली आ रही है। वे जरूर बर्तन खरीदकर ले जाएंगे। चाहे बर्तना छोटा हो या बड़ा मांग के अनुसार खरीद ही लेते हैं।
---सुरेंद्र सिंह, बव्वा
यह कामना करते हुए कि धनवंतरि उन्हें नये खरीदे हुए बर्तन में अमृत देकर जाएंगे धतेरस को बर्तन खरीद लेते हैं। वैसे भी बर्तन की जरूरत हर घर में ही होती है। साल में एक बार कई कई बर्तन भी खरीद लेते हैं।
---विजयपाल समाजसेवी
फोटो कैप्शन 05: बर्तनों की सजी दुकानें
साथ में विजयपाल्र, सुरेंद्र, मुकेश एवं दीपक कौशिक

Wednesday, October 15, 2025


 






तीन वार्डों की गली गंदे पानी से भरी
- नालों का गंदा जल दूर तक फैला तथा पड़े हैं गंदगी के ढेर
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कनीना की आवाज।
 कनीना के वार्ड 1,2 और 3 की एक गली गंदे पानी से लगातार भरी हुई है। आधा किलोमीटर दूरी तक  गंदे नाले का ओवरफ्लो तथा गंदा पानी फैला हुआ है। पिछले करीब 2 माह से एक दिन भी यह गंदा पानी नहीं सूखा है। पास में ही गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। इनमें या तो आवारा जीव जंतु घूमते रहते हैं या कोड बिन वाले लोगों से भी खेलते रहते हैं इन वार्डों की यह बदहालात देखकर ऐसा लगता है कि कनीना में नगरपालिका नाम की कोई चीज नहीं है। दूर दराज तक फैलती हुई बदबू लोगों का जीना हराम कर रही है। पिछले लंबे समय से लोग परेशानी से निजात पाना चाहते हैं किंतु नगर पालिका ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। वार्ड एक, दो और तीन की एक गली जो रेवाड़ी रोड को क्रास करते हुए सीधी करीरा गांव को जाती है, इसमें गंदा पानी लगातार खड़ा रहता है। आस पड़ोस के एक दर्जन से यदि घरों में सांस लेना भी कठिन हो गया है। यही नहीं पास का चौड़ा गंदा नाला ओवरफ्लो करके गंदगी को और बदबू को भी फैला रहा है।
कूड़ा कचरा-गंदे नाले के पास कूड़े कचरे का ढेर लगा है। इस कचरे में आवारा जीव विचरते रहते हैं। कभी यहां कूड़़ादान होते थे जो नगरपालिका ने जर्जर होने के कारण हटा दिए। अभी भी लोग अपनी जगह नहीं बदल रहे अपितु इसी जगह कूड़ा डाल रहे हैं। कुछ समय के लिए नगर पालिका ने कूड़े कचरे के पास बैठने की बेंच भी रखी थी जिसे बाद में हटा भी लिया है। अब इस कूड़े स्थल पर कई कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठाया जाता। लोग परेशान हैं।
गंदा नाला- यहां चौदा गंदा नाला है जो ओवरफ्लो हो रहा है। ओवरफ्लों को देखते हुए इस पर डाली गई सीट भी हटा दी गई है, जिससे बदबू दूर दराज तक फैल रही है और गंदे नाले का जल दूर दराज तक फैल हुआ है।
 जोहड़ का गंदा जल- जोहड़ का गंदा जल दूरदराज तक फैल रहा है। करीब आधा किलोमीटर दूरी तक घरों की दीवारों के साथ खड़ा हो जाता है। बार-बार नगरपालिका शिकायत की जाती है किंतु कोई सुनने वाला नजर नहीं आता। आखिरकार लोग परेशान होकर शिकायत करना ही भूल गए। कहेने को तो नगर पालिका है किंतु ग्राम पंचायत से भी बदतर है।
 क्या कहते लोग-
 इस क्षेत्र के लोग धर्मवीर, सुनील कुमार, महेश कुमार, सुरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि पास के जोहड़ की समस्या है। इस जोहड़ की पैमाइश करके अतिक्रमण हटा दिया जाए तो समस्या से निजात पाया जा सकता है किंतु नगर पालिका अतिक्रमण हटाने की कोई बात नहीं कह रही है। क्या कहते हैं अधिकारी-
 कनिष्ठ अभियंता नगर पालिका राकेश कुमार से संबंध में बात हुई। उन्होंने बताया कि यहां के जोहड़ की खोदाई करवाना जरूरी है, पैमाइश हो या नहीं हो परंतु इसकी खोदाई हो जाने पर इस समस्या से का हल निकल जाएगा। उन्होंने बताया कि सफाई कर्मचारी कम होने की वजह से सभी वार्डों में नहीं जा पा रहे, सफाई का प्रबंध किया जा रहा है। उन्होंने बताया चौड़े नाले और जोहड़ की समस्या का एकमात्र इलाज जोहड़ की खोदाई करना है। फोटो कैप्शन 05: तीनों वार्डों का की गंदगी
06: चौड़े नाले का ओवरफ्लो
07:जोहड़ का दूरदराज तक फैला गंदा जल







कैमला स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की।
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कैमला में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य संबंधी जांच करने के लिए डाक्टर हितेश अरोड़ा के नेतृत्व में संदीप सिंह फार्मासिस्ट, दीपक कुमार , ममता देवी एएनएम आदि टीम के साथ विद्यालय में पहुंचे और सभी विद्यार्थियों का ऊंचाई ,वजन, हीमोग्लोबिन, रक्त संचार, आंख, नाक, गला आदि संपूर्ण शरीर की जांच कर स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारियां सभी विद्यार्थियों  दी।  
   उन्होंने बताया कि प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर योग करें जिससे आपका शरीर ,मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहेंगे प्रात: हमें शुद्ध आक्सीजन अधिक मात्रा में मिलेगी जो हमारे शरीर के लिए लाभदायिक रहेगी हमें फास्ट फूड से दूर रहकर पौष्टिक एवं  गुणवत्तापूर्ण भोजन करना चाहिए और दूध का अधिक मात्रा में सेवन करें , दैनिक जीवन सम्बंधित  उपयोगी जानकारी दी। विद्यालय की ओर से मौलिक मुख्याध्यापक  वीरेंद्र सिंह जांगिड़ ने टीम का आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि हम सभी ने अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए  स्वास्थ्य के लिए सरकार और विभाग समय-समय पर उचित और आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रही है। विद्यालय में जाकर सभी विद्यार्थियों की स्वास्थ्य संबंधी संपूर्ण जांच और आवश्यक परामर्श दिया जा रहा है ताकि हमारे देश के भविष्य स्वस्थ रह सकें और आत्मनिर्भर एवं समृद्ध भारत की परिकल्पना साकार हो सकें। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। जो हमारी बुद्धि लब्धि के विस्तार में सहायक है। इस अवसर पर मनवीर सिंह तंवर ,सुनील कुमार शास्त्री, देवेंद्र कुमार, सुनील कुमार ,राजेश कुमार, भगत सिंह ,गरिमा रानी, सूबे सिंह, तारामणि देवी, पिंकी देवी, बबली देवी, सुनील कुमार आदि उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन 04: डाक्टर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करते हुए।









हर प्रकार से भोजन और अनाज को खराब होने से बचना चाहिए -भगत सिंह
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कनीना की आवाज।
आए दिन भोजन को खराब करने तथा इधर उधर फेंकने की शिकायतें मिल रही है। लोगों को जागरूक करके ही खाद्य सामग्री को खराब होने से बचा सकते हैं। विवाह समारोह स्थल हो या किसी घर में बहुत अधिक खाना बेकार चला जाता है।
न केवल इंसान अपितु आवारा जंतु, रोडेंट जिनमें चूहे गिलहरी और कितने ही पक्षी खाद्य पदार्थों को खराब कर रहे हैं। जागरूकता के चलते इस अभियान को आगे बढ़ाया जा सकता है और खाद्य सामग्री को खराब होने से बचा सकते हैं। कुछ प्रमुख लोगों से इस संबंध में चर्चा हुई-
**खाद्य सामग्री हर इंसान तक पहुंचाने का एक ही तरीका है कि चूहों गिलहरी आदि से अनाज एवं खाद्य सामग्री को बचाना चाहिए। यहां तक की भंडारण उचित ढंग से किए जाने चाहिए ताकि भंडार में किसी प्रकार की नमी न पहुंचे और खाद्य पदार्थ खराब होने से बच सके। आवारा जंतु और रोडेंट आदि से सुरक्षा के लिए प्रबंध करने चाहिए। जब इंसान के पास पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री होगी तो वह दूसरों तक पहुंचा सकेंगे और गरीबी खत्म करने में अहम योगदान होगा।
--- डा. देवेंद्र यादव, पूर्व कृषि अधिकारी
 हर घर में रोटी बर्बाद हो जाती है। वैसे तो बहुत से घरों में अब चूल्हे की बजाय गैस की रोटी बनती और गरमा गरम रोटी खाकर खुश होते हैं वहां रोटियां बर्बाद कम होती हैं परंतु कुछ घरों में आज भी अधिक रोटियां बन जाती है। जिसके कारण उन्हें फेंकना पड़ता है उन्होंने कहा गायों के लिए अलग से रोटी बनाना अच्छी बात है किंतु जो रोटियां बच जाती है उनको गायों तक पहुंचाना चाहिए। जितनी भूख हो उसी अनुसार सारे परिवार के लिए रोटियां बनाई जाए फिर भी यदि कोई रोटी बच जाती है तो उसे गो-ग्रास गाड़ी आती है उसमें डाल देना चाहिए। अक्सर लोग इधर-उधर रोते को फेंक देते हैं इससे बचना चाहिए क्योंकि आवारा जंतु पनपते हैं जो कभी भी किसी इंसान को काट सकते हैं।
   -- भगत सिंह गौशाला प्रधान
 मैरिज प्लेस में एक नियम बना रखा है कि अधिक मात्रा में खाद्य पदार्थ विवाह शादी समारोह आदि में बन जाते है तो उनको गौशाला एवं सुअर पालने वालों तक पहुंचाया जाता है। अगर वह सूखा पदार्थ है तो गौशाला की गाड़ी आती है उसमें डाल दिया जाता है। लोग जूठन अधिक छोड़ते हैं। इस जूठन में बचे हुये सभी पदार्थ सुअर पालन केंद्र वाले मुफ्त में ले जाते हैं। इससे खाद्य पदार्थ चाहे सुअर या गायों को उपलब्ध होते हैं। इससे खाद्य पदार्थों को कुछ खराब होने से बचा सकते हैं। उनका यह नियम लंबे समय से चला आ रहा है।
    --हनुमान सिंह मैरिज प्लेस संचालक
विवाह शादियों और समारोह  में जाने वाले लोगों को पहले समझाया जाए। हो सकता है कुछ लोगों पर प्रभाव पड़े और वह खाने की प्लेट में अधिक खाना न छोड़ें। इसे भोजन की बचत हो सकती है। यहां तक की विवाह शादियों में भारी मात्रा में भोजन खराब होता है उसे पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को अधिक खाना प्लेट में एकबार न डालने प्रेरित करना चाहिए। तभी ऐसा संभव हो सकता है कि खाना खराब होने से बचाया जाए। एक एक दाना सर्दी एवं गर्मी में बड़ी मेहनत करके कमाया जाता है। उसको खराब करना अनुचित है। कभी किसान पर तरस खाते हुए अन्न को बर्बाद न करें।
----दिनेश प्रधान मोलडऩाथ आश्रम ट्रस्ट किसान
 फोटो कैप्शन :दिनेश कुमार, हनुमान सिंह , डा देवेंद्र ,भगत सिंह।



प्रवक्ता सचिन कुमार हुए ग्लोबल विभूति अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित
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कनीना की आवाज।
देश की सुप्रसिद्ध समाजसेवी संस्था जीकेएसएसएस व अनुवाद संस्थान एवं गुवाहाटी राष्ट्रभाषा महाविद्यालय परिचालना समिति के संयुक्त तत्वाधान में  असम के गुवाहाटी में एक दिवसीय पुस्तक विमोचन , सामाजिक जागरूकता व ग्लोबल विभूति अचीवर्स अवार्ड समारोह का आयोजन किया गया। जिसमे कनीना के भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता सचिन कुमार को ग्लोबल विभूति अचीवर्स अवार्ड प्रदान किया गया । राष्ट्रीय स्तर के इस भव्य कार्यक्रम में पूरे देश से 25 ऐसी विभूतियों को सम्मानित किया गया जो समाज में अतुलनीय योगदान दे रहे है जिसमे हरियाणा से 3, उत्तराखण्ड से 2, छत्तीसगढ़ से 1, दिल्ली से 2 हिमाचल प्रदेश से 1 व ओडि़सा , मध्यप्रदेश , महाराष्ट्र , पश्चिम बंगाल , बिहार , तमिलनाडू , आन्ध्रप्रदेश व गुजरात की प्रतिभाएं शामिल रही। सचिन कुमार को यह सम्मान शिक्षा , समाजसेवा व मंचीय विधा में प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईएएस अबुल बासर मोहम्मद यूनुस , देश्समाजसेवी श्रीप्रकाश निमराजे व सूर्यकांत शर्मा पूर्व डीजीएम सेबी रहे। समारोह में देश के सुप्रसिद्ध प्रोफेसर , प्राध्यापक , साहित्यकार , कवि व शोधार्थी उपस्थित रहे व रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में सभी ने सचिन कुमार के समाज के प्रति उल्लेखनीय योगदान की प्रशंसा की। सचिन कुमार को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने पर क्षेत्र में खुशी की लहर व्याप्त हो गई है।
गौरतलब है कि सचिन कुमार इससे पहले भी कई मंचों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर तक कनीना व समूचे क्षेत्र का नाम रोशन कर चुके है व वर्तमान में वो रेवाड़ी के नांगल तेजू में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत है। श्री श्याम मित्र मंडल के प्रधान अनिल गर्ग , प्रधान निरंजन मित्तल , विनोद मित्तल , दिनेश यादव , प्रवक्ता अजीत राव , बलवान सिंह प्रधान  व अनेकों सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें बधाई दी।
फोटो कैप्शन 01: सचिन कुमार को सम्मानित करते हुए।


निजी स्तर पर खरीद पहुंची 96695 क्विंटल
-अब तक 3380 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर अभी तक बाजरा नहीं खरीदा गया है लेकिन निजी स्तर पर 96695 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा 1900 रुपये से लेकर 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 96695 क्विंटल हो चुकी है। बुधवार को 625 किसान 19695 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 3380  टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
फोटो कैप्शन 08: कनीना मंडी में बाजरे कर निरीक्षण करते अधिकारी

घटते लिंगानुपात पर जताई चिंता
संवाद सहयोगी, जागरण. कनीना। आयुष्मान आरोग्य मंदिर गुढ़ा पर घटते हुए घटते लिंगानुपात पर चर्चा की गई। जिसमें लोकेश कुमार सीएचओ ने बताया कि लड़कियां, लड़कों से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं होती और बेटियां सभी क्षेत्रों में अपना-अपना, माता-पिता एवं परिवार जनों का नाम रोशन कर रही हैं। अगर लड़कियों को जन्म से पहले मार देंगे फिर पत्नी कहां से आएंगी। ऐसा करने वाला दंड का भागीदार होगा, यह कानूनी जुर्म है। जन्म से पहले लिंग जांच करवाने वाला और करने वाला और इनका साथ देने वाला सजा के भागीदार होते हैं।
 इनका पता एवं सूचना देने वाले व्यक्ति कोई नाम दिया जाता है तथा उसे व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता। बैठक में लोकेश सीएचओ, संदीप एमपीएचडब्ल्यू, नवीन एएनएम, राजेश सिंह, आशा, आंगनवाड़ी वर्कर एवं महिलाएं मौजूद रही।
फोटो कैप्शन 02: गुढ़ा के सब सेंटर पर बैठक में बोलते लोकेश कुमार



दीपावली पर्व 20 अक्टूबर को पड़ेगा ---
शिति कंठा
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कनीना की आवाज।
ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिराज शितिकांठा का कहना है कि सूर्य सिद्धांत के अनुसार ही पंचांग निर्माण की हमारी ऋषि परंपरा रही है। धर्म शास्त्र के अनुसार ही हमारे निर्णय पूर्णत: फलित होते हैं, इसी को आधार मानते हुए देखें तो 20 अक्टूबर 2025 को 03:48 मिनट पर अमावस्या लग रही है। हमारे यहां प्रदोष व्यापिनी अमावस्या ही दीपावली पर ग्राह्य होती है जो कि अगले दिन शाम 5:55 बजे तक रहेगी।
ऐसे में धर्मशास्त्र और ज्योतिषीय सिद्धांत के आधार पर दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है।
देवज्ञ पंडित ऋषि राज शितिकंठा ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
उनके आगमन और धन-समृद्धि की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है। पहले दिन दीपावली पर, कौवे को परमात्मा का दूत होने की मान्यता के कारण प्रसाद दिया जाता है। दूसरे दिन
दीपावली पर, कुत्तों को अपनी ईमानदारी के लिए भोजन दिया जाता है। तीसरे दिन गोरु त्योहार
में, गाय और बैल को सजाया जाता है। लक्ष्मी पूजा की जाती है। इस दिन व्यापारी अपने सारे खातों को साफ कर उन्हें समाप्त कर देते हैं। लक्ष्मी पूजा से पहले, मकान  सजाया जाता है; लक्ष्मी पूजा के दिन, तेल के दीयों को दरवाजे और खिड़कियों के पास जलाया जाता है। चौथे दिन को गोवर्धन पूजा  होती है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है, जो दीपावली महापर्व से चौथा दिन होता है। यह त्योहार 22 अक्टूबर को पड़ेगा। पांचवें और अंतिम दिन को भैया दूज कहा जाता, यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह पर्व भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। भाई बहनों से मिलते हैं। भाई के माथे पर टीका लगाया जाता है। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं । यह त्योहार 23 अक्टूबर को पड़ेगा।
 पंडित ऋषिराज ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
 उनके आगमन और धन-समृद्धि  की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
फोटो कैप्शन : ऋषिराज













Tuesday, October 14, 2025


 




दीपावली पर्व 20 अक्टूबर को पड़ेगा ---
शिति कंठा
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कनीना की आवाज।
ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिराज शितिकांठा का कहना है कि सूर्य सिद्धांत के अनुसार ही पंचांग निर्माण की हमारी ऋषि परंपरा रही है। धर्म शास्त्र के अनुसार ही हमारे निर्णय पूर्णत: फलित होते हैं, इसी को आधार मानते हुए देखें तो 20 अक्टूबर 2025 को 03:48 मिनट पर अमावस्या लग रही है। हमारे यहां प्रदोष व्यापिनी अमावस्या ही दीपावली पर ग्राह्य होती है जो कि अगले दिन शाम 5:55 बजे तक रहेगी।
ऐसे में धर्मशास्त्र और ज्योतिषीय सिद्धांत के आधार पर दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है।
देवज्ञ पंडित ऋषि राज शितिकंठा ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
उनके आगमन और धन-समृद्धि की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
भारत में दीपावली त्योहार पांच दिन की अवधि तक मनाया जाता है। पहले दिन दीपावली पर, कौवे को परमात्मा का दूत होने की मान्यता के कारण प्रसाद दिया जाता है। दूसरे दिन
दीपावली पर, कुत्तों को अपनी ईमानदारी के लिए भोजन दिया जाता है। तीसरे दिन गोरु त्योहार
में, गाय और बैल को सजाया जाता है। लक्ष्मी पूजा की जाती है। इस दिन व्यापारी अपने सारे खातों को साफ कर उन्हें समाप्त कर देते हैं। लक्ष्मी पूजा से पहले, मकान  सजाया जाता है; लक्ष्मी पूजा के दिन, तेल के दीयों को दरवाजे और खिड़कियों के पास जलाया जाता है। चौथे दिन को गोवर्धन पूजा  होती है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है, जो दीपावली महापर्व से चौथा दिन होता है। यह त्योहार 22 अक्टूबर को पड़ेगा। पांचवें और अंतिम दिन को भैया दूज कहा जाता, यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह पर्व भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। भाई बहनों से मिलते हैं। भाई के माथे पर टीका लगाया जाता है। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं । यह त्योहार 23 अक्टूबर को पड़ेगा।
 पंडित ऋषिराज ने बताया कि दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से लौटने, या फिर पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
 उनके आगमन और धन-समृद्धि  की देवी के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
यह आत्मा की वह अवस्था है, जब वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम आनंद और ज्ञान का अनुभव करती है।
फोटो कैप्शन : ऋषिराज



मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना-2.0
-सीईओ उदय सिंह की अध्यक्षता में हुआ आवासीय प्लाट आवंटन का आनलाइन ड्रा
-जिला के 9 गांवों के 306 लाभार्थियों को मिले प्लाट
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कनीना की आवाज।
मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 के दूसरे चरण के तहत आज जिला महेंद्रगढ़ के पात्र लाभार्थियों को सभागार नारनौल में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में आनलाइन ड्रा के माध्यम से आवासीय प्लाटों का आवंटन किया गया। ये कार्यक्रम जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदय सिंह की अध्यक्षता में हुआ।
इस मौके पर उन्होंने सभी लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर वंचित और जरूरतमंद को घर जैसी मूलभूत सुविधा वरीयता के आधार पर उपलब्ध हो। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार पात्र लाभार्थियों के लिए प्लाट वितरण का कार्यक्रम रखा गया है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उन ग्रामीण परिवारों को आवास की सुविधा प्रदान की गई है जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय परिवार पहचान पत्र के अनुसार 1.80 लाख तक है।
इस आवंटन के बाद जिला की पंचायतों में 100 वर्ग गज के आवासीय प्लाट लाभार्थियों को दिए जाएंगे।
इस प्रक्रिया में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को पंजीकरण और कब्जे के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। प्लाटों का भौतिक कब्जा लाभार्थियों को सड़कें, सीवरेज, पेयजल आपूर्ति और बिजली जैसी बुनियादी ढांचा पूरा होने के बाद ही सौंपा जाएगा। लाभार्थी को एमएमजीएवाई-2.0 पोर्टल के माध्यम से 1000 रुपए का एकमुश्त शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके बाद लाभार्थी अपने आवंटन पत्र के साथ बीडीपीओ के समक्ष प्रस्तुत होंगे।
जिले के इन 9 गांवों के लाभार्थियों को मिले प्लाट--
जिला परिषद के सीईओ उदय सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना-2.0 योजना के तहत जिले के 9 गांवों के पात्र आवेदकों को प्लॉट आवंटित किए गए हैं। ब्लाक कनीना में गुढा के 30, खेड़ी के 90 और सेहलंग के 39 पात्र लाभार्थियों को प्लाट मिले। इसी प्रकार, ब्लॉक महेंद्रगढ़ में सीसोठ के 25, डेरोली जाट के 11 और दोखेरा के 13 लाभार्थियों को उनका हक मिला। ब्लाक नांगल चौधरी के कमानिया से 23, नारनौल ब्लॉक के मंडलाना से 12, और ब्लाक सतनाली के सतनाली गांव से 63 लाभार्थियों को प्लाट आवंटित किए गए हैं।







निजी स्तर पर खरीद पहुंची 77,000 क्विंटल
-अब तक 2765 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज।
 कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर पर एक दाना भी खरीदा नहीं गया है लेकिन निजी स्तर पर 77,000 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा 1900 रुपये से लेकर 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 77,000 क्विंटल हो चुकी है। मंगलवार को 211 किसान 6000 क्विंटल बाजरे की पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 2765  टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।




दो दिवसीय दिव्यांग जागरूकता शिविर 16 से
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कनीना की आवाज।
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद पंचकूला के तत्वाधान में राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय  कनीना के रिसोर्स सेंटर के अंतर्गत 16 अक्टूबर 17 अक्टूबर को दो दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया जा रहा है । प्राचार्य श्री सुनील खुडानिया व अमृत सिंह विशेष शिक्षक ने बताया कि आने वाली 16 अगस्त 17 अक्टूबर को दो दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन विद्यालय में किया जा रहा है जिसमें कनीना खंड में अध्यनरत दिव्यांग बच्चों के अभिभावक और उनके विद्यालय से अध्यापक एसएमसी सदस्य ओर आंगनवाड़ी वर्कर इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। रिसोर्स पर्सन के रूप में धर्मेंद्र विशेष अध्यापक राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चरखी दादरी अपनी भूमिका निभाएंगे और तो रिसोर्स पर्सन अमृत सिंह विशेष शिक्षक व सरिता विशेष शिक्षक होंगे ।


2 नवंबर देव उठावनी एकादशी होने से खूब बजेंगी शहनाइयां
--कनीना में 6 मैरिज प्लेस
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कनीना की आवाज।
02 नवंबर से देव उठनी एकादशी पर विवाह शादियों का सीजन शुरू हो जाने से इस बार कम अवधि में खूब शहनाइयां बजेंगी। ऐसे में नये कपड़ों की विशेषकर आधुनिक कपड़ों की मांग बढऩे लगी है। ऊनी कपड़ों की मांग भी बढ़ी है। कनीना एवं आस पास दो सौ के करीब शादियां हैं। सभी विवाह समारोह स्थल पहले से ही बुक हैं।  
देव उठनी एकादशी 02नवंबर को-
 देव उठानी एकादशी 02 नवंबर से शुरू हो रही है। इस दिन विवाह शादी शुरू हो जाएंगी तथा विभिन्न विभिन्न स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कनीना के आचार्य दीपक कौशिक ने बताया कि अकेले कनीना क्षेत्र में 10 के करीब शादियां हो रही है तथा आस पास गांवों को मिलकार करीब 200 शादियां हैं। देव उठनी एकादशी का दिन विवाह शादियों के लिए सबसे शुभ दिन होता है। लंबे समय से विवाह शादी करने वाले इस दिन का इंतजार कर रहे थे। एकादशी पुनीत कार्य पुण्य के बराबर होते हैं। यही कारण है कि इस दिन विवाह शादियां की जाती है।
निर्वाण दिवस-
 उधो आश्रम के बाबा लाल दास ने बताया कि उदास निर्वाण दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन पवित्र ग्रंथ की पूजा अर्चना की जाती है तथा विभिन्न कार्यक्रम उदास आश्रम में आयोजित किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय उठानी एकादशी का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या कहते हैं विवाह समारोह संचालक-
विवाह समारोह संचालक हनुमान सिंह से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कनीना में 6 विवाह समारोह स्थल हैं जिनके पास नवंबर एवं दिसंबर दो माह में करीब 25 से 30 शादियों की बुकिंग आएंगी। किसी के पास अधिक तो किसी के पास कम बुकिंग आ चुकी हैं।
फोटो केप्शन: हनुमान सिंह विवाह समारोह संचालक


सर्दी के दस्तक देते ही बढऩे लगी ऊनी कपड़ों की मांग
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कनीना की आवाज।
 हल्की सर्दी दस्तक देने से गर्म कपड़ों की की मांग बढऩे लगी है। आधुनिक दर्जे के गर्म कपड़ों की मांग को देखते हुए दुकानदार भी विभिन्न प्रकार के गर्म कपड़े रखने लग गए हैं और आए दिन फैशन के नाम पर दुकानें खुलने लगी हैं।
2 नवंबर से देव उठनी एकादशी पर विवाह शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में कपड़ों की विशेषकर आधुनिक कपड़ों की मांग बढऩे लगी है। सिले हुए कपड़ों की दुकान एवं सिलाई करने वाले दर्जियों के पास कपड़े सिलवाने वालों की मांग बढ़ी है वहीं स्कूल एवं कालेजों में जाने वाले विद्यार्थी एवं जवां दिखने की ललक वाले जन फैशन प्वाइंटों पर जाकर आधुनिक दर्जे के फैशनवाले कपड़े खरीदने लगे हैं।
  विगत करीब तीन वर्षों में सिले हुए कपड़ों की दुकानों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वर्तमान में करीब तीन दर्जन नए नए फैशन की दुकानें तथा कई सिले हुए कपड़ों की दुकानें खुल चुकी हैं जहां युवा पीढ़ी कपड़े लेने जरूर जाते हैं।
क्या कहते हैं दुकानदार-
आधुनिक दर्जे के कपड़े सिलने व आधुनिक दर्जे के फैशन के कपड़े की दुकान करने वाले महेंद्र कुमार, शेर सिंह, मनोज का कहना है कि नए डिजाइन एवं आधुनिकता से परिपूर्ण एवं गर्म कपड़ों की बेहद मांग हैं। वे दिल्ली से इस प्रकार के कपड़े लाकर युवाओं के लिए प्रदान कर रहे हैं। युवा एवं अन्य जन बेहद आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में शादियां शुरू होने जा रही हैं जिसके चलते नए डिजाइन के कपड़े सिलवाने वालों का तांता लगने लगा है।



कालरवाली जोहड़ की खोदाई जारी
-इसके बाद होलीवाला जोहड़ होगा साफ
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कनीना की आवाज।
 कनीना के कालरवाली जोहड़ की खोदाई का काम पूरे यौवन पर है। वर्षा के कारण बीच में काम स्थगित हो गया था। अब फिर से जारी है। जोहड़ को गहरा खोदा जा रहा है। तत्पश्चात इस जोहड़ में पानी अधिक मात्रा में समास समा सकेगा।
जानकारी देते हुए नगर पालिका के कनिष्ठ अभियंता राकेश कुमार ने बताया की कालरवाली जोहड़ का काम पूरा होने के बाद होलीवाला जोहड़ की सुध ली जाएगी और इस समस्या से निजात पाया जाएगा।
 उल्लेखनीय है कनीना का अधिकांश वर्षा एवं गंदा जल होलीवाला जोहड़ में आता है। होलीवाला जोहड़ का जल सड़कों पर फैला हुआ है। पूरे साल में इस जोहड़ का जल सड़कों पर फैला रहता है। इस जोहड़ के चारों ओर अतिक्रमण पूरे यौवन पर है। कस्बा के धर्मवीर, विजय कुमार, सुनील कुमार महेश कुमार आदि का कहना है कि जिस प्रकार कालरवाली जोहड़ की खोदाई करने से पहले पैमाइश करवाई गई थी ठीक उसी प्रकार होलीवाला जोहड़ की भी पहले पैमाइश होनी चाहिए, तत्पश्चात इसकी खोदाई का कार्य शुरू किया जाना चाहिए। खोदाई के बाद कनीना के होलीवाला जोहड़ की समस्या से निजात मिलने की संभावना जताई जा रही है। वैसे तो यह जोहड़ चारों तरफ से अतिक्रमण के कारण संकीर्ण हो चुका है और यह जल मजबूरन सड़कों पर फैल रहा है। अगर इसकी पैमाइश करके अतिक्रमण हटा दिया जाए तो खोदाई की ही जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर खोदाई होती है तो इसमें ज्यादा जल समा सकेगा।
कभी इस जोहड़ का जल फसल के लिए भी उपयोग किया गया था किंतु बाद में किसानों ने इस जल का उपयोग बंद कर दिया। अब दोनों जोहड़ों का जल सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचता है। जब कभी वर्षा होती है तो इन जोहड़ों का जल बहुत दूर दराज तक फैल जाता है। जोहड़ों के कारण लाखों रुपये की क्षति सड़कों की हुई है वही दो जान भी इन जोहड़ों में गिरने से हो चुकी है।
फोटो कैप्शन 01: कनीना का कालरवाली जोहड़ की खोदाई



ऐसे मनाएंगे दीपावली  
घर की मिठाई खाकर सादगी से मनाएंगे दीपावली
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कनीना की आवाज।
इस बार क्षेत्र के युवा घर की बनी मिठाई खाकर,चाइनीज आइटम नहीं खरीदेंगे और दीपावली सादगी से मनाएंगे। दीपावली को घी के दीये जलाकर एवं आपस में मिलकर दीपावली मनाना चाहते हैं। वे एक नारा लगा रहे हैं कि घर की मिठाई खाकर, आपस में मिलकर घी के दीये जलाएंगे।  उनका मानना है कि लाखों रुपये चाइनीज आइटम पर खर्च होते हैं वे खर्च नहीं किए जाएंगे। क्या कहते हैं दीपावली मनाने वाले-
चीन के बने सामान, लाइट आदि नहीं खरीदेंगे। देसी घी को दीये में डालकर दीपावली के दिन बुजुर्ग पुराने समय से जलाते आ रहे हैं। बुजुर्ग बहुत बुद्धिमान थे। अब उन्हीं के कदमों पर चलकर वे इस बार दीवाली को देसी घी के दीयों से मनाएंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे।  
   --डा. वेदप्रकाश
हम कई वर्षों से देसी घी के दीये जलाते आ रहे हैं। न केवल बड़ी या छोटी दिवाली अपितु मुख्य दिवाली के दिन घर में विभिन्न स्थानों पर रखे जाने वाले समस्त दीये देसी घी से ही जलाते हैं। देसी घी का दीया जलाने का अर्थ है कि वातावरण की देखभाल करना तथा सभी के जीवन की मंगलकामना करना। उन्होंने इन दीयों को अंधकार दूर करने वाला तथा दिलों में शुद्धता भरने वाला प्रतीक बताया। चीन के बने दीपावली के आइटमों से दूर रहने की सलाह दी है।
---मनोज कुमार एडवोकेट
मैं घर पर बनी मिठाई खाऊंगा तथा दूसरों को प्रेरित करूंगा। न केवल स्वयं देसी घी के दीये जलाएंगे अपितु दूसरों को भी इस बार देसी घी के ही दीये जलाने के लिए प्रेरित करेंगे। उनके अनुसार देसी घी के दीये जलाना एक हवन या यज्ञ के बराबर होता है। पर्यावरण का प्रदूषण दूर होता है तथा सुगंधित वातावरण बन जाता है। दीये का प्रकाश जहां तक जाता है वहां तक हानिकारक कीट नष्ट हो जाते हैं।
-------डा. ज्ञान सिंह
हमारी संस्कृति के अनुसार घी के दीये जलाना शुभ माना जाता है और ऐसे में वे देशी घी के दीये स्वयं भी जलाते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार की मिठाई नहीं खरीदेंगे, चाइनीज आइटमों का सदा बहिष्कार करते आये हैं।  दीये खरीदने पर बल देंगे।
--डा. अजीत
फोटो कैप्शन : डा. अजीत, डा. ज्ञान, डा. वेद प्रकाश, मनोज एडवोकेट



 कम से कम 30 सेकंड और अधिकतम 1 मिनट हाथों को धोना चाहिए-डा. विनय
-हस्तप्रक्षालन दिवस-15 अक्टूबर
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कनीना की आवाज।
हस्तप्रक्षालन का सही अर्थ होता है हाथ धुलना। विभिन्न बीमारियों का कारण सफाई होती है। जब हम अपने आस पास सफाई नहीं रखते तो बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ठीक उसी प्रकार अगर हम अपने हाथ को साफ नही रखते जिससे तरह तरह की चीजें छूते हैं। प्रतिवर्ष 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन लोगों में हाथ धोने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाया जाता है। कुछ महत्वपूर्ण कार्य करने के पहले हाथ धोना बहुत महत्वपूर्ण है। भारतीयों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां हाथ से ही खाना खाने की संस्कृति है। इसके अलावा मलत्याग के बाद पानी से हाथ द्वारा गुदा स्थान को साफ करते हैं, अत: इसके बाद उचित ढंग से हाथ की सफाई आवश्यक है।
डा. विनय शर्मा बताते हैं कि खाने खाते वक्त बेहतर दर्जे के हैंड वाश आदि से हाथों को धोना चाहिए। यह शारीरिक स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कीटाणुओं को फैलने से रोकता है और बीमारियों से बचाता है।
  उन्होंने बताया कि हस्त प्रक्षालन खाने वाले व्यंजनों के कारण होने वाली बीमारियों को रोकने में मदद करता है।
कुछ हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में, हस्त प्रक्षालन का विशेष ध्यान रखा जाता है। हाथों को कम से कम से कम 30 सेकंड और अधिकतम 1 मिनट तक धोना चाहिए। हाथों को सीधा, फिर उल्टा, फिर नाखून फिर हथेली, फिर अंगूठा ,और फिर बाजू छह सौपानों से होकर हाथों को धोना चाहिए। हाथों को धोने से बीमारी फैलने वाले वायरस और जीवाणु जो नंगी आज से नहीं दिखाई देते, नष्ट हो जाते हैं। हाथों को धोने से अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। जब-जब मलमूत्र त्याग करते हैं, बाहर कहीं घूम कर आते हैं या कोई गंदगी आदि उठाकर आते हैं, सुबह, शाम दोपहर जब भी हाथों से कोई खाने पीने का कार्य करते हैं उसे समय हाथों को धोना जरूरी होता है। हाथों को यदि नहीं धोया जाए तो बीमारियां घर कर जाती है। बीमारियों से बचने का सबसे सरल उपाय हस्त प्रक्षालन या हैंड वाश, हाथ धोवन नाम से जाना जाता है। खाना बनाने से पहले, बाथरूम इस्तेमाल करने पर, खाना खाते समय अपने हाथों को जरूर साफ करना चाहिए जिससे कई बीमारियों से बचा जा सकता है। वर्ष 2008 में विश्व  हस्त प्रक्षालन दिवस की शुरुआत की गई थी तब से लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। हाथों को अच्छी प्रकार धोने से दस्त एवं निमोनिया सहित कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। एक अन्वेषण के दौरान पता लगाया कि हाथों के धोने से बच्चों में दस्त से होने वाला खतरा 40 फीसदी कम हो जाता है। लोगों को हाथ धोने के बारे में जानकारी देने से स्वास्थ्य का अच्छा बनाने में मदद मिलती है। न केवल लीवर संबंधी समस्या का समाधान होता है बल्कि सर्दी, बुखार एवं वायरल आदि दूर हो जाते हैं। कई बार ऐसे जीवाणु और विषाणु जो नग्न आंखों से नहीं देखे जा सकते हैं, मोबाइल फोन या टूथ ब्रश में सबसे ज्यादा पाए जाते हैं, ऐसे में खाने से पहले नियमित रूप से हाथ धोना जरूरी है। अच्छी तरह हाथ धोने से खसरा, चिकन पाक्स के चकते आदि इंफेक्शन नहीं होता क्योंकि ये संक्रमण जानलेवा हो सकते हैं। हर समय कोई काम करते हैं और खाने पीने का काम हाथों करते हैं उस समय हाथों को धो लेना चाहिए।
फोटो कैप्शन: डा. विनय शर्मा














नवोदय विद्यालय में मनाया विकसित भारत बिल्डथान दिवस
--13 अध्यापको ने 5 सदस्यों वाली टीमों का गठन
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में विकसित भारत बिल्डथान-2025 दिवस मनाया गया। जिसमे मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुनीता श्रीवास्तव ,  केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा , विशिष्ट अथिति सहायक प्रोफेसर मुरलीधर नायक, केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुनील कुमार,  केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा  विद्यालय परिसर में उपस्थित हुए।
  मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुनीता श्रीवास्तव ने सभी छात्र-छात्राओ को  आत्म- निर्भर भारत का आह्वान, विकसित भारत का निर्माण विषय पर बच्चों का मार्गदर्शन किया। विशिष्ट अतिथि ने स्वदेशी, वाकल फार लोकल समृद्ध भारत एवं आत्म-निर्भर भारत विषयों पर जानकारी दी। विद्यालय प्राचार्य बृजमोहन लाल रावत  ने विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को अपनाते हुए विकसित भारत की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के प्रभारी शिक्षक गोविन्द नारायण सैन के नेतृत्व में उनकी टीम के सदस्यों ने अपनी नवाचार का प्रदर्शन सभी उपस्थित जनों के समक्ष प्रभावी ढंग से किया। मंच संचालन विक्रम सिंह के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की और से 13 अध्यापको ने 5 सदस्यों वाली टीमों को गठन किया जो अपने विभिन्न प्रोजेक्ट/माडल को निश्चित समयावधि में पूर्ण करेंगे। विद्यालय के उप -प्राचार्य धर्मेन्द्र आर्य ने सभी अतिथियों एवं टीम प्रतिभागी विद्यार्र्थियों व उनके मार्गदर्शक शिक्षकों  का आभार व्यक्त किये।
फोटो कैप्शन 02: वकसित भारत बिल्डथान दिवस पर विद्यार्थी एवं शिक्षक

Monday, October 13, 2025


 



 

अहोई अष्टमी धूमधाम से मनाई गई
-ग्रामीण महिलाओं ने सुनी अष्टमी की कहानी
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कनीना की आवाज।
सोमवार को कनीना क्षेत्र में अहोई अष्टमी का पर्व मनाया गया। यह व्रत संतान के बेहतर जीवन एवं लंबी उम्र के लिए किया जाता है। इस व्रत में स्याऊं मां की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस पूजा से परिवार के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं और लंबी उम्र प्राप्त होती है। दिनभर दानपुण्य की परंपरा चलती रही। महिलाओं ने स्याऊं मां की पूजा की, व्रत रखा तथा कहानी सुनी
कौन सी कहानी सुनाई गई-
   आचार्य दीपक के अनुसार इस व्रत में सेठ सेठानी की कहानी सुनाई गई जिसमें एक सेठानी के हाथों से अनजाने में एक सेही के बच्चे मिट्टी खोदते वक्त मर जाते हैं। जब सेही अपने बच्चों को मृत देखती है तो मारने वाले को श्राप दे देती है जिसके चलते सेठानी के बच्चे भी मर जाते हैं। सेठ व सेठानी तप करने और शरीर को गलाने के लिए चल पड़ते हैं। अंत में वे थक जाते हैं तो आकाशवाणी होती है कि तुम अगले इसी पर्व तक दान दक्षिणा देना, दया रहम दिखाना तब कहीं जाकर तुम्हें पुत्र होंगे। अंतत: सेठ एवं सेठानी ने वैसा ही किया और वे पुत्रवान हो गए।
तभी से यह व्रत चला आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व के प्रति गहन लगाव है। गांवों में मिलकर महिलाएं कथा सुनी।





कबाड़ में लगी आग, आसपास तक फैला धुआं
--लोगों की भीड़ हुई जमा
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कनीना की आवाज।
एसडीएम कार्यालय समक्ष सड़क पार सोमवार दिन कबाड़ में लगी आग धीरे-धीरे एक बंद दुकान तक फैल गई जिसमें फर्नीचर भी जल कर राख हो गया। भारी मात्रा में धुआं फैल गया।
मिली जानकारी अनुसार बस स्टैंड के आसपास दुकानदार कूड़ा कचरा खाली जगह में डाल देते हैं। जिसके पास एक बंद कमरे में फर्नीचर रखा हुआ था। धीरे-धीरे आग कबाड़ से फर्नीचर तक पहुंच गई और फर्नीचर जल गया। धुआं को देखकर लोग इकट्ठे हो गए किंतु पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड तक इसकी कोई सूचना नहीं है। इस प्रकार काफी समय तक भारी भारी प्रदूषण चलता रहा।
 फोटो कैप्शन 03:फैली हुई धुआं






निजी स्तर पर खरीद पहुंची 71,000 क्विंटल
-अब तक 2554 गेट पास काटे गये
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कनीना की आवाज।
कनीना की नई अनाज मंडी स्थित चेलावास में सरकारी तौर पर एक दाना भी खरीदा नहीं गया है लेकिन निजी स्तर पर 71,000 क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है। यह बाजरा 1900 रुपये से लेकर 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है। कुल आवक 71,000 क्विंटल हो चुकी है। सोमवार को 354 किसान अपनी पैदावार लेकर अनाज मंडी पहुंचे।
 विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव मार्केट कमेटी मनोज पाराशर ने बताया कि अब तक 2554  टोकन किसानों के काटे जा चुके हैं और किसान अपनी बाजरे की पैदावार अनाज मंडी में ला रहे हैं किंतु उनके सैंपल फेल होने के कारण सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।
हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सैंपल रेवाड़ी भेजे जाते हैं किंतु मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण सभी सैंपल फेल हो जाते हैं। ऐसे में सरकारी तौर पर खरीद नहीं हो पा रही है।





दिव्यांगों के लिए मिल सकेंगे व्हील चेयर
-अंतिम तिथि 5 नवंबर
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कनीना की आवाज।
जनशक्ति विकास संगठन के द्वारा कनीना में तीसरा विशाल दिव्यांगजनों का कैंप लगाया जा रहा हैं। व्हीलचेयर दिव्यांग लोगों के लिए उपलब्ध हो पाएंगे।
  विस्तृत जानकारी देते हुए दीपक कुमार ने बताया कि जो दिव्यांग है उसके पास दिव्यांग की सर्टिफिकेट व यूडीआईडी कार्ड होना अनिवार्य है। फैमिली आईडी, आधार कार्ड और एक पासपोर्ट साइज फोटो सहित आवेदन कर सकता है।
इसके साथ-साथ जिन बुजुर्गों लोगों की उम्र 60 या उससे अधिक है साथ ही उनकी फैमिली इनकम कितनी भी हो। लेकिन कैंडिडेट की स्वयं की आय 1,80,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
 दीपक कुमार ने बताया कि बुजुर्गों को कमर की बेल्ट, ग्रीवा कालर, घुटने के दर्द के गोडियां,
कान की मशीन,चलने वाला वाकर, बैथ आदि उपलब्ध रहेंगे।
 उन्होंने बताया कि जिन व्यक्तियों को पहले  व्हीलचेयर एक बार मिल चुकी है उनको 3 साल के बाद ही दूसरी व्हीलचेयर का लाभ मिल सकता है।रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए दस्तावेज लेकर राजकीय पितामह डिग्री कालेज कनीना की लाइब्रेरी में संपर्क करें। दस्तावेज जमा करवाने का समय सुबह 10 से 12 बजे तक रहेगा। दस्तावेज जमा करवाने की अंतिम तिथि 5 नवंबर तक रहेगी। सभी को यह सामान मुफ्त में वितरित किया जाएगा।






  भाजपा के राज में सड़क में गड्ढे नहीं बल्कि गढो में सड़क है-रामनिवास कोटिया
--सरकार कर रही है समाधान
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कनीना की आवाज।
जहां वर्तमान सरकार छोटे से छोटे सड़क मार्ग को पक्का कर देने का दावा कर रही है वहीं उपमंडल कनीना के विभिन्न गांव में जाने वाले सड़क मार्ग भी टूटे हुए हैं। ये विचार कांग्रेस के वरिष्ठ युवा नेता कोटिया गांव के पूर्व सरपंच भाई रामनिवास यादव ने व्यक्त किये।
उन्होंने कहा वैसे तो प्रदेश तथा देश की सरकार बड़े-बड़े राजमार्ग बनाने का दावा कर रही है लेकिन सच्चाई तो यह है कि कनीना से कोसली जाने वाली कनीना से रेवाड़ी जाने वाली तथा कनीना से नारनौल जाने वाली कनीना से अटेली जाने वाली सड़कों की जो दयनीय हालत हो चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा सड़क में गड्ढे हो सकते हैं पर इन मार्गों पर जाने वाली सड़क तो गढ़ों में  ही है। उन्होंने यह भी कहा इस क्षेत्र का कोई भी विधायक बना हो लेकिन इस क्षेत्र का कोई काम आज तक सुचारु रूप से नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलित कमजोर गरीब लोगों का शोषण हो रहा है। जिस सरकार में एडीजीपी लेवल के  अधिकारियों को अपने उच्च अधिकारियों  द्वारा टार्चर किया जाता हो तो आम जनता का इस प्रदेश में और देश की सरकार में कौन वाली बारिश होगा उन्होंने यह भी कहा की वाई के पूर्ण कुमार जैसे कर्मठ एवं होनहार अफसर के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है जिसमें उनको परेशान होकर आत्महत्या करने जैसे कदम उठाने पड़े तो आम आदमी का जीना कैसे सुख शांति में हो सकता है। उन्होंने बताया की आने वाला समय कांग्रेस का होगा।
  उधर टूटी सड़कों के विषय में एक्शन पीडब्ल्यूडी बी एंड आर ने बताया कि सड़कों को पुन: निर्मित करवाये का प्रयास जारी है। अंतिम फैसला तो सरकार को लेना है।
फोटो कैप्शन 02: जर्जर सड़क मार्ग दिखाते हुए युवा नेता एवं अन्य






डीएपी न मिलने से रोष प्रदर्शन
-रोष एवं जुलूस मार्च निकाला
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कनीना की आवाज।
किसानों को डीएपी खाद खेतीबाड़ी अनुसार न मिलने से उनका धैर्य जवाब देने लगा है। डीएपी किल्लत को लेकर कहीं किसान मंडी गेट बंद कर रहे हैं तो कहीं सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं।
बसपा के नेता अतरलाल के नेतृत्व में किसानों ने धनौन्दा बस अड्डा पर रोष मार्च व जुलूस निकाला। किसानों ने सड़क पर उतरकर हाथों में पोस्टर लहराकर तथा नारेबाजी कर पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध करवाने की मांग की। रोष मार्च में पाथेड़ा, कैमला, अगिहार, खेड़ी तलवाना, पोता, स्याणा, नौताना, बाघोत, उच्चत, छिथरोली, झाड़ली, धनौन्दा, सिहोर आदि गांवों के सैकड़ों किसान तथा बसपा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
  अतरलाल ने कहा कि सरसों की बुआई शुरू हो चुकी है परन्तु किसानों को काश्त के अनुसार डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। जिला के किसान डीएपी खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं और उन्हें सारे दिन लाइनों में लगकर भी बिना खाद लिए घर लौटना पड़ रहा है। उन्हें खाद विक्रेता डीएपी खाद के साथ 500-600 रुपये का अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। जो किसान के साथ अन्याय है। किशनपाल, मीर सिंह वैद्य, करतार, मदन सिंह, राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार हर चीज में किसानों के साथ धोखा कर रही है। सरकार ने बाजरा भावांतर के 575 रुपये प्रति क्विंटल देने की घोषणा की परन्तु सरकार 2200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरा नहीं खरीद रही है। किसानों को 1700-1800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरा बेचना पड़ रहा है। उन्होंने बाजरा भावांतर की राशि बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से करने की मांग की। इस अवसर पर मुकेश तंवर, राधेश्याम, सुरेश, राकेश यादव, नवीन डुडी, राजबीर, बीर सिंह, कैलाश सेठ, मदन सिंह, महेन्द्र सिंह, विक्रम पंच, रामबीर पंच, पवन धनखड़ ने कहा कि सरकार ने तत्काल किसानों को आवश्यकता अनुसार डीएपी खाद उपलब्ध करवाने के पुख्ता प्रबन्ध नहीं किए तो किसान बड़ा आंदोलन छेडऩे से भी पीछे नहीं हटेंगे।
फोटो कैप्शन 01: बसपा नेता अतरलाल के नेतृत्व में रोष मार्च निकालते किसान कार्यकर्ता।




जतिन शर्मा का भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग लेफ्टिनेंट पद पर चयन
--भडफ़ का निवासी है जतिन
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के गांव भडफ़ के जतिन शर्मा
का भारतीय वायु सेना में 94वीं रैंक हासिल करके फ्लाइंग लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं दी हैं। उनके पिता कृष्ण कुमार शर्मा वर्तमान में श्री कृष्ण राजकीय महाविद्यालय, कंवाली  में कार्यरत है।
जतिन ने अपनी मेहनत, अनुशासन और अदम्य लगन से न केवल अपने परिवार एवं गांव भडफ़  का गौरव बढ़ाया है, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया है। उनकी यह अभूतपूर्व उपलब्धि आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा और उत्साह का उज्ज्वल प्रतीक बनेगी। जतिन ने अपनी सफलता का श्रेय दादा सत्यनारायण मुनीम एवं अपने सभी गुरुजनों व परिवारजनों को दिया। उन्हें बधाइयां मिल रही है।
फोटो कैप्शन: जतिन शर्मा
 











मेरी फसल मेरा ब्यौरा और खाद पोर्टल हुए कनेक्ट
-अब उन्हीं को मिलेगा खाद जिनका हो चुका है रजिस्ट्रेशन
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कनीना की आवाज।
 अब तक खाद पाने वाले इधर-उधर से आधार कार्ड जुटाकर कर खाद प्राप्त कर लेते थे लेकिन अब मेरी फसल मेरा ब्यौरा और खाद पोर्टल आपस में कनेक्ट कर दिए हैं जिसके चलते अब उन्हीं किसानों को खाद मिलेगा जिनका रजिस्ट्रेशन मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर है।
विस्तृत जानकारी देते हुए हैफेड मैनेजर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके यहां 1800 बैग डीएपी के आए थे जो शुक्रवार एवं शनिवार को दो दिनों में आवंटित कर दिए गए हैं।  किसानों से मिली जानकारी अनुसार जब भी डीएपी विभिन्न स्थानों पर आता है कनीना उपमंडल के 6 पैक्स/किसान सहकारी समिति में भी खाद आता है किंतु कनीना  में कोई डीएपी नहीं आया जिससे किसानों में रोष है। किसानों का पैक्स से सीधा संबंध होता है।
 किसान जसवंत सिंह, दिनेश कुमार ,मनोज कुमार, सुरेश कुमार, महेंद्र सिंह आदि ने बताया कि बार-बार पैक्स कार्यालय/किसान सहकारी समिति जाते हैं किंतु डीएपी नहीं मिलता। एक और जहां किसान डीएपी के लिए मारे मारे फिर रहे वही डीएपी न मिलने से परेशानी बढ़ी है। इस संबंध में पैक्स के मैनेजर कृष्ण कुमार से संपर्क हुआ जिन्होंने बताया कि उनका लाइसेंस ही नहीं बन पाया है। अब लाइसेंस के लिए कार्रवाई जारी है जल्इ ही लाइसेंस बनने की उम्मीद है इसके बाद ही खाद मिल पाएगा।