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Sunday, August 10, 2025



 


 रसूलपुर की महिलाओं ने जीते योग में दो सिल्वर एवं दो गोल्ड
--योग के क्षेत्र में कमाया नाम
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कनीना की आवाज।
महेंद्रगढ़ में आयोजित जिला स्तरीय योग प्रतियोगिता में रसूलपुर की माताओं ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण  और 2 रजत पदक जीतकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
आर्य समाज मंदिर, रसूलपुर में प्रतिदिन 30 माताएं नियमित रूप से योगाभ्यास करती हैं। इन्हीं में से चार महिलाओं ने आज अपने परिश्रम और समर्पण से यह सफलता अर्जित की है।
मिली जानकारी अनुसार संतोष ने सिल्वर मेडल, सुमन ने गोल्ड मेडल,पूजा ने गोल्ड मेडल तथा लक्ष्मी ने सिल्वर मेडल जीता है।
 इनकी मेहनत और लगन का अगला पड़ाव 22 अगस्त को स्टेट लेवल प्रतियोगिता होगा, जहां ये महिलाएं अपने गांव, जिले और प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी।
आर्य समाज मंदिर के मार्गदर्शक सतीश आर्य ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि योग से न केवल शरीर स्वस्थ होता है, बल्कि मन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
फोटो कैप्शन 05: पदक जीतने वाली महिलाएं



चाय छोडऩे से मिले हैं कई लाभ
-एक महीना बिता बिना चाय के
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कनीना की आवाज। 
कहते हैं कि एक शराबी से पूछा जाए शराब में क्या लाभ या क्या हानियां होती है? यदि वह सही बताये तो लाभ और हानियां का सही पता लग जाएगा। ऐसे ही चाय पीकर ही पता लगता है कि इससे कोई लाभ है यह हानियां है? वैसे तो वैज्ञानिक चाय पीने की केवल हानियां बताते आ रहे हैं।
 अभी तक लेखक एवं पत्रकार डा. होशियार सिंह यादव भी लंबे समय से चाय पीता आ रहा  था किंतु विगत एक महीने से पूर्णरूप से चाय छोड़ दी है। अभी चाय की हानियां स्पष्ट रूप से बताने में सक्षम है। चाय से अनेकों परेशानियां झेलनी पड़ी है। परिणाम यह है की अच्छी प्रकार खाना खाने के लिए चाय आदि का सेवन बंद कर देना चाहिए। ब्लैक-टी/काली चाय जिसे प्रोसेस करके बनाया जाता है। इसमें कैफीन नामक एक जहरीला तत्व होता है जो शरीर में जाकर अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा करता है लेकिन इसके छोड़ देने से शरीर में जहां बीपी, शुगर आदि अगर कोई शरीर में है तो उनका कु-प्रभाव घटता चला जाएगा, पेट में गैस बनना, खाना कम खाने की समस्य,ा भोजन पाचन में दिक्कत और अनेकों समस्याएं देखने को मिलती हैं। सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि एक ही कप/गिलास जिसमें कई व्यक्ति चाय पीते हैं, कुछ रोगाणु छोड़ जाते हैं। दुकानदार के पास भी कोई वर्कर इन गिलासों को अच्छी प्रकार नहीं धोता।  सुबह एक बाल्टी पानी लेगा और दिन भर इस पानी में कप/ गिलास धोता रहेगा जिससे गंदगी बढ़ती ही चली जाती है। चाहे मीट मांस खाने वाला हो या कोई शराब पीने वाला, न जाने क्या-क्या खाने वाला व्यक्ति भी इन कपों में चाय पीता है और नये चाय पीने वाले व्यक्ति के होठों से अंदर चली जाती है। ऐसे में अगर चाय नहीं छोडऩा चाहे तो कुल्हड़ या डिस्पोजल गिलास प्रयोग करने चाहिए ताकि कम से कम इस बुराई से बचा जा सके। वैसे तो चाय अच्छी चीज नहीं है फिर भी दिन रात लोग चाय चुसड़ते रहते हैं। अगर इंसान चाय छोडऩा चाहे तो आसानी से छोड़ सकता है क्योंकि चाय पीने के नुकसान अधिक है। इसकी बजाय अगर ग्रीन-टी कभी कभार प्रयोग करें वो भी धागे वाली मिश्री/गुड़/शहद में बनाए तो लाभ मिल सकता है।
लेखक एवं पत्रकार होशियार सिंह जो पहले शिक्षा भाग में कार्यरत रहे हैं। साथियों सहयोगियों के कारण चाय पीना 1995 से शुरू किया था और 2025 में आकर पूर्ण रूप से छोड़ दी है। इस चाय छोडऩे पर भी कुछ निकृष्ट लोगों का तो यह भी मानना है कि चाय पर खर्च आता है इसलिये चाय नहीं पीते जो सरासर झूठ है। यदि कोई लाभ ही नहीं है तो उस चीज को पीने में क्या लाभ? कम से कम शरीर को लंबा चलाना हो तो बुराइयों को त्यागना जरूरी है। लेखक एवं पत्रकार होशियार सिंह में एक ही चाय की जरूर लत थी बाकी आज तक कोई अन्य चीज जैसे शराब, बीड़ी, हुक्का आदि कभी छूकर भी नहीं देखी। ऐसे में इस बुराई को छोड़कर शरीर में तंदुरुस्ती जरूर महसूस हो रही है। आने वाले समय में पता लग पाएगा कि चाय  छोडऩे के कितने लाभ और मिले हैं।




चोर साहब के कारनामे-31
-जिस जगह चोर साहब बैठता है वहां निश्चित रूप से होता है नुकसान
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कनीना की आवाज।
 कनीना निवासी लेखक एवं साहित्यकार डा.होशियार सिंह यादव के प्लाट के अंदर एवं बाहर से तीन ट्राली पत्थर, तीन दर्जन गमले, ईंटें , बिजली का सामान और अन्य सामान चोर साहब ने समय-समय पर चोरी कर लिये हैं। आखिर एक दिन चोर साहब को रंगे हाथों पकड़ा तब जाकर पता लगा की चोरी कौन करता है? तब तक यही अनुमान था कि चोरी हो सकता है कोई अन्य व्यक्ति कर रहा हो। अनेक लोगों से पता करने से पाया कि चोर साहब जिस जगह बैठता है एक न एक दिन उसे जगह नुकसान होता है। चोर साहब का साथ देने वाले लोग भी निश्चित रूप से चोर साहब जैसे गुणों से परिपूर्ण हैं। अभी तक कितने ही लोग मिले हैं जिनका चोर साहब ने नुकसान किया है, चोरी की है। चोर साहब की सबसे प्रमुख आदत है आपस में लड़वाने की है। किसी के ईंट पत्थर चोरी करके दूसरे के खेत में डाल देता है ताकि ईंट पत्थर का मालिक और उस खेत का मालिक आपस में झगड़ते रहे। तब चोर साहब को बड़ा आनंद आता है। अच्छी चीज चोर साहब अपने घर ले भागते हैं तथा कुछ कम काम की हो उसे दूसरे के खेतों में डाल देते हैं। चोर साहब के कारनामों पर नजर डालें तो बहुत दुख होता है कि इंसान इस धरती से क्या लेकर जाएगा? केवल बैरभाव, चोरी करके दूसरे का नुकसान करके, दूसरों को आपस में लड़ाकर क्या चोर साहब सफल हो पाएगा, नहीं? जहां भी जाए अब तो चोर साहब की चर्चा जोरों पर है। इससे दुखदाई बात और क्या हो सकती है। जिस समाज में ऐसे कलंक भी होते हैं जो दूसरे का नुकसान करके ही खुश होते हैं। चोर साहब का सबसे प्रमुख गुण और देखने को मिला कि जब तक दूसरे का थोड़ा बहुत नुकसान नहीं हो जाता तब तक चोर साहब को चैन नहीं मिलता है।



अब बंदर फसलों को भी पहुंचाने लगे नुकसान
- मक्का, ज्वार, बाजरा को भी तोड़कर खाने लगे
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कनीना की आवाज।
 कस्बे में बंदर एक ला-ईलाज बीमारी जैसी समस्या बन गई है। दिनोंदिन बंदर एक समस्या बनती जा रही है। अब तक किसानों के खेत सुरक्षित थे किंतु अब खेतों में भी बंदर जाने लगे हैं। बाजरा हो या ज्वार मक्का हो या फलदार पौधे किसी को नहीं बख्शते। बंदरों के कारण जहां हर इंसान दुखी हो चला है। कभी बंदरों की पूजा करते थे अब लट्ठ पूजा होती है, कभी बंदर को लोग देख कर खुश होते थे, अब बंदर दिखाई देते घर का दरवाजा बंद कर लेते हैं। बंदरों के बारे में कभी लोगों की दिमाग में गलतफहमी  थी और हनुमान जी की फौज बताने लग गये थे। बड़ा दुर्भाग्य है हनुमान जैसे परमवीर, राम भक्त जिसने कभी किसी का अहित नहीं किया और बंदरों का दुनिया में एक काम बता दो जो अच्छा करता हो। अगर पानी की टंकी है तो उसमें गर्मियों में खूब नहाते हैं, हगतेे हैं मूतते हैं और लोग मजे से उस पानी को पी जाते हैं। यदि यूं ही बंदर बढ़ते गए तो आने वाले समय में खेतों पेड़ ,पौधे, फसल नहीं बच पाएंगी और फिर लोग इनको पीटने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।  बंदर को  कोई चीज हाथ लगे चट कर जाता है। पक्षियों को मारकर खा जाता है, घोंसले से अंडे चोरी करके खा जाता है, किसी पेड़ पर जीव के अंडे है तो उनको भी नहीं बख्शता।
अगर बंदर के कारनामे देखें तो कनीना में ही कम से कम दो दर्जन लोगों को बंदरों ने काट लिया फिर बड़ी मुश्किल से जान बची है। कनीना नगर पालिका कोई कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि सबसे प्रमुख मांग कनीना की बंदरों से निजात दिलाने की थी और बंदरों को काबू करने में नगर पालिका फेल हो चुकी है।
क्या कहते हैं जेई नपा-
कनीना नगरपालिका के कनिष्ठ अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि इसके लिए अभी तक टेंडर नहीं छोड़े हैं। पूर्व डीएमसी को भी अवगत करवाया गया था किंतु उन्होंने कहा कि ये ऐसे प्राणी हैं जिन्हेंं एक बार अन्यत्र छुड़वा दिया जाए तो ये फिर से वापस आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि टेंडर छोडऩे की तैयारी जरूर की हुई है।


जगह-जगह लगे मिलते हैं गंदगी के ढेर
-कूड़ादान पात्र गये हैं टूट
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कनीना की आवाज।
 संदीप सिंह पूर्व एसडीएम कनीना जब प्रशासनिक अधिकारी होते थे तब कनीना के विभिन्न स्थानों पर कूड़ादान लगाए गए थे जिनमें लोग प्रतिदिन कूड़ा डालते हैं। अब ये कूड़ादन जर्जर हो चुके हैं या फिर पेंदा  निकल गया है जिसके चलते कूड़ेदान ही लगभग खत्म हो गए हैं और उनके स्थान पर अब लोग खुलेआम कूड़ा डालने लग गए हैं। ऐसा कई स्थानों पर देखने को मिलता है।
 जिस प्रकार होलीवाला जोहड़, प्राथमिक पाठशाला कनीना के बाहर तथा कई अन्य स्थानों पर खुले में लोग कूड़ा डाल रहे हैं। इस कूड़े को जब कभी नगरपालिका की कूड़ा उठाने वाली गाड़ी आती है और कर्मी आते हैं तो उठाया जाता है। प्रतिदिन यह कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है जिससे न केवल प्रदूषण फैलता है अपितु कुत्ते और छूटी गाये, सुअर आदि बिखेर जाते हैं। लोगों में रोष है। सभी स्थानों पर नये कूड़ादान लगाए जाने की मांग उठ रही है।
  कूड़ादान न होने के कारण आवारा जंतु इधर-उधर मंडराते रहते हैं। कई बार तो कुत्ते आपस में लड़ते रहते हैं वहीं सूअर, बंदर ,छूटे हुए पशु घूमते हैं जिनके पास से गुजरने वाले लोगों को भी भय का माहौल होता है। कभी भी जानवर इंसान पर धावा बोल सकते हैं। पास से गुजरने वाले दुपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा होता है। कूड़ेदान होंगे तो लोग उनमें कूड़ा डालते रहेंगे और उनके दूर तक बिखरने की संभावना कम हो जाएगी।
---पवन कुमार,कनीना
खुले में कूड़ा डालने के कारण कूड़े से काम का सामान ढूंढने वाले लोग भी इस कूड़े को दूर तक भी बिखेर देते हैं। हालात यह बन जाती है कूड़ा पूरे रास्ते पर बिखर जाता है। आवागमन में दिक्कत होती है। अगर कूड़ादान लगे होंगे तो प्रदूषण कम होगा और कूड़ा उठाने में भी नगर पालिका कर्मियों को सुविधा होगी।
--नवीन यदुवंशी,कनीना
कूड़े को इधर-उधर फेंकना लोगों की मजबूरी बन गई है क्योंकि कूड़ादान नहीं लगे हैं।  नगरपालिका जर्जर हालत में कूड़ादान उठा ले गई जिसके कारण अब एक कूड़ा इधर-उधर बिखरा पड़ा होता है और नाले और नालियों में भी यह कूड़ा चला जाता है जिससे नालियां और नाले भी अवरुद्ध होने का खतरा बन जाता है। नगर पालिका को कूड़ादान जगह-जगह लगाए जाने चाहिएद्ध
  --नवीन कुमार,कनीना
जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से बदबू फैल रही है। कूड़े के पास से गुजरना भी मुश्किल हो गया है क्योंकि कूड़ादान नहीं लगाए गए हैं। प्रदूषण के कारण जहां नाक ढककर इनके पास ही गुजरना होता है। नगर पालिका को कूड़ा दान जरूर लगानी चाहिए ताकि लोग कूड़े को पात्रों में डाल सके।
--अनूप कुमार यादव,कनीना
 क्या कहते हैं कनिष्ठ अभियंता -
कनीना नगर पालिका कनिष्ठ अभियंता राकेश कुमार से कूड़ादन के विषय में बात हुई तो उन्होंने बताया कि बहुत से कूड़ादान या तो गल गये हैं या पेंदे नष्ट हो गए हैं।अभी कोई कूड़ादान लगाए जाने की संभावना नजर नहीं आती है चूंकि  घर-घर जाकर ही कूड़ा उठाया जा रहा है। इसके लिए साधन जुटाया गया है। उन्होंने कहा कि कनीना को साफ-सुथरा रखने के लिए कूड़ा उठाकर ले जाने वाली गाडिय़ां घरों के पास से गुजरती है जिसमें कूड़ा डाला जा सकता है।
 फोटो कैप्शन 04: कनीना होलीवाला जोहड़ पर पड़ा गंदगी का ढेर
 फोटो कैप्शन: नवीन कुमार, नवीन यदुवंशी, नवीन, पवन कुमार




बाबा लालगिरी आश्रम मंदिर निर्माण शुरू
-हाल का होगा पुन: जीर्णोद्वार
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कनीना की आवाज।
बाबा लालगिरी आश्रम पर मंदिर निर्माण व हाल का पुन: जीर्णोद्वार का काम शुरू किया गया। जिसमें पार्षद नितेश गुप्ता नगरपालिका कनीना ने पूजा पाठ करवा कर मंदिर निर्माण की नींव रखकर शुभारंभ किया। मोहन सिंह पूर्व पार्षद ने बताया कि इस मौके पर गांव के गणमान्य लोग उपस्थित थे और उन्होंने अपनी तरफ से बढिय़ा काम करवाने में सहयोग का आश्वासन दिया। मोहन सिंह ने बताया कि इस मौके पर काफी लोगों ने अपनी तरफ से सहयोग राशि भी दी इनमें जगमाल बोहरा ने दो लाख रुपये, बिट्टू राव ने सौ कट्टे सीमेंट, मोहन सिंह पूर्व पार्षद ने 2100 रुपये, नितेश पार्षद ने 31000 रुपये, महिला सत्संग मंडल ने 21000 रुपये,मनीष पार्षद वार्ड नं चार ने 5100 रुपये, संतोष देवी लूखी 2100 रुपये, रामप्रताप मास्टर 1100 रुपये का दान दिया।
 इस मौके पर राजेंद्र सिंह पूर्व पार्षद,मुकेश नंबरदार, मास्टर रामप्रताप ,प्रदीप विशु ,जसवंत चेयरमैन ,मोहन सिंह पार्षद ,बिट्टू राव,जगदीश गोस्वामी , जगदीश सेहलंगिया, होशियार पार्षद,मनोज पार्षद, राकेश पार्षद,योगेश पार्षद,राजकुमार पार्षद, मनीष पार्षद, राकेश बोहरा,सतबीर प्रधान,मामन सिंह, माडूराम ,जगमाल सिंह बोहरा, पवन कुमार मिस्त्री, महावीर ठेकेदार आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: मंदिर निर्माण के लिए पूजा पाठ करते हुए पार्षद नितेश कुमार।











एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में अध्यापक-अभिभावक बैठक आयोजित
-1275 अभिभावक पहुंचे
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कनीना की आवाज।
एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में अध्यापक-अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में 1275 अभिभावकों ने भाग लेकर छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी एवं अध्यापक-अभिभावक बैठक के महत्व को समझने का परिचय दिया।  सभी अभिभावकों ने अग्रिम सोच का परिचय देते हुए बच्चों के भविष्य के लिए विद्यालय प्रबंधन व सभी संबंधित अध्यापकों के साथ अध्ययन संबंधी समस्याओं के समाधान, शैक्षिक उपलब्धियों के साथ-साथ अन्य गतिविधियों व विषयों पर विमर्श किया। अभिभावकों ने अपने बच्चों की दिनचर्या उनके व्यवहार समय-सारिणी, रुचि आदि से संबंधित पहलुओं से प्रबंधन व संबंधित अध्यापकों से परिचित करवाया और अपने बच्चों की रिपोर्ट लेने में काफी रुचि दिखाई।
     विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने अध्यापक-अभिभावक बैठक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बैठक जागरूक अभिभावकों के लिए अध्यापकों से समय-समय विचार विमर्श करने व बच्चों के लिए सही मार्ग का चुनाव व सहयोग का आधार है। जिस प्रकार तीन .भुजाए एक साथ मिलकर त्रिभुज का आकार बनाती है उसी प्रकार अभिभावक के सहयोग से बच्चे बड़े से बड़े लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते है।  
उन्होंने यह भी बताया कि यह बैठक शैक्षिक जानकारी के साथ-साथ सम्पूर्ण व्यवहार, सामथ्र्यता से संबंधित बातों के आदान-प्रदान के लिए आयोजित की जाती है। अध्यापक एवं अभिभावकों  का विचार-विमर्श छात्र के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। बच्चे के शैक्षणिक विकास में विद्यालय के साथ-साथ अभिभावक की भी अहम भूमिका होती है। उन्होंने सभी अभिभावकों का धन्यवाद कर बैठक का समापन किया।
फोटो कैप्शन 03: एसडी में पीटीएम का नजारा

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