जर्जर हो चला है कनीना से गाहड़ा सड़क मार्ग
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कनीना की आवाज। कनीना से गाहड़ा तक करीब 3 किलोमीटर का मार्ग अति जर्जर हो गया है। जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है।
उल्लेखनीय है कि कनीना से गाहड़ा, सीहोर तथा आगे चरखी दादरी आदि तक यह मार्ग पहुंचता है। और इसी मार्ग से होकर बव्वा, बहाला होकर रोहतक तक भी पहुंचा जा सकता है। यह मार्ग कुछ वर्षों पहले बना था किंतु अति जर्जर हो चला है। सुरेंद्र सिंह, सीटू ,बबली, दिनेश, इंद्रजीत आदि में बताया कि इस मार्ग पर पैदल चलना भी कठिन हो गया है, दुर्घटनाओं का अंदेशा बन गया है। इस मार्ग पर छोटे-छोटे गड्ढे बन गए हैं। कुछ जगह तो जल भराव से सड़क टूट गई है। कुछ जगह सड़क का नामोनिशान मिट गया है। इस मार्ग की अविलंब सुध ली जाए ताकि आवागमन सुचारु रूप से हो सके।
त्वरित गति से बाजरे की पैदावार ले रहे किसान
- फसल कटाई के साथ-साथ रबी की कर रहे हैं तैयारी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जानकारी 20 हजार हेक्टेयर पर बाजरा उगाया गया था जिसकी त्वरित गति से पैदावार किसान ले रहे हैं। अच्छी पैदावार लेकर किसान प्रसन्नचित नजर आ रहे हैं किंतु साथ में रबी फसल की तैयारी में भी जुटे हुए हैं। इस वर्ष जहां रबी फसल की तैयारी के लिए पर्याप्त समय बच गया है।
कृष्ण कुमार, योगेश कुमार, रोहित कुमार, अजीत सिंह, सूबे सिंह दिनेश कुमार, महेश कुमार आदि किसानों ने बताया कि बाजरे की अच्छी पैदावार हुई है, कड़बी की भी अच्छी पैदावार मिली है। अभी से ही किसान रबी फसल की तैयारी में जुट गए हैं। इस बार एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। किसानों को सरकारीतौर पर बाजरा बेचने के लिए एक माह तक इंतजार करना पड़ सकता है चूंकि एक अक्टूबर से बाजरे की सरकारी खरीद होती आ रही है।
फोटो कैप्शन 06: लावणी करते किसान
रात के वक्त न तो बसों की सुविधा और न हीं ट्रेन
- रात्रिकालीन कोई बस सेवा नहीं
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल होते हुए भी यहां न तो रात्रिकालीन कोई बस सेवा उपलब्ध है और न हीं कोई ट्रेन उपलब्ध है। ऐसे में यदि कोई रात के समय कनीना में फंस जाता है तो उसे सुबह का इंतजार करना पड़ेगा।
कनीना खास रेलवे स्टेशन 1939 में निर्मित किया गया था किंतु यहां फास्ट एवं सुपरफास्ट ट्रेन नहीं रुकती, महज एक फास्ट तथा पैसेंजर ट्रेन से ही गुजारा करना पड़ता है। रेवाड़ी से कनीना की ओर 8:55 पर रेवाड़ी से ट्रेन चलती है वहीं कनीना से रेवाड़ी की ओर 9:48 पर चलती है। तत्पश्चात कोई ट्रेन सुबह होने तक नहीं है जिसके चलते अगर कोई चरखी दादरी, रोहतक ,अटेली एवं नारनौल आदि की ओर जाना चाहे तो नहीं जा सकता क्योंकि यह ट्रेन केवल महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी की और देर शाम तक ही चलती हैं। तत्पश्चात सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है।
कनीना के रेलयात्री रविंद्र बंसल, सुरेश कुमार, दिनेश कुमार, महेंद्र शर्मा, महेश कुमार आदि ने बताया कि ट्रेन की कोई बेहतर सुविधा नहीं है। बार-बार आंदोलन किए गए ज्ञापन भी उच्च अधिकारियों को भेजे लेकिन का नीना खास रेलवे स्टेशन जो अहीरवाल एवं सैनिकों को गढ़ है किंतु यहां कोई ट्रेन सुविधा उपलब्ध नहीं है। फास्ट और सुपरफास्ट ट्रेन यहां ठहराव किए बगैर आगे निकल जाती है। यदि यहां एक मिनट का ठहराव कर लिए दिया जाए तो न केवल रेलवे को लाभ मिलेगा अपितु सैनिकों और यात्रियों को भारी लाभ मिल सकता है। वैसे भी कनीना उपमंडल हैं जहां से ट्रेन उपलब्ध होनी चाहिए, हर फासट ट्रेन रुकनी चाहिए ताकि लोगों को लाभ मिल सके।
कुछ इसी प्रकार की हालत बस स्टैंड की है। कनीना बस स्टैंड से नारनौल, रेवाड़ी, कोसली आदि के लिए रात्रिकालीन कोई सेवा नहीं है जहां विभिन्न मार्गों पर आठ बजे तक बस या निजी साधन उपलब्ध हो सकते हैं तत्पश्चात कोई साधन उपलब्ध नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति कनीना में फस जाए तो उसे न तो बस उपलब्ध हो पाएगी और न ही ट्रेन अपितु सुबह होने पर ही बस एवं ट्रेन ट्रेन उपलब्ध हो पाएंगी। ऐसे में सबसे बड़ी विकट समस्या यात्रियों के लिए है।
उल्लेखनीय की कनीना एक और जहां रेवाड़ी, रोहतक ,चरखी दादरी, नारनौल, अटेली एवं महेंद्रगढ़ आदि शहरों से जुड़ा हुआ है और उनके बीच में स्थित है किंतु यहां कोई ट्रेन और बस सेवा उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते कनीना वाचक बेहद परेशान हैं। कनीनावासी बार-बार मांग कर रहे हैं कि अलवर से चरखी दादरी वाया कनीना जो रेल मार्ग प्रस्तावित है उसे अभिलंब बनाया जाए यही नहीं कोसली से कनीना भी रेलवे लाइन प्रस्तावित है उसको बनाया जाए ताकि कनीना एक जंक्शन बन सके और यहां ट्रेनों का ठहरा हो सके। सभी की नजरें जंक्शन बनने पर टिकी हुई है। उधर कनीना के बस स्टैंड से रात्रि कालीन सेवाएं चलती थी किंतु आपके सभी सेवाएं बंद है। कभी चंडीगढ़, दिल्ली एवं बीकानेर आदि के लिए रात्रि कालीन सेवाएं उपलब्ध थी। अब कोई सेवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में लोगों की मांग है की रात्रिकालीन बस सेवाएं शुरू की जाए और कनीना में सभी ट्रेनों का ठहराव किया जाए
एसीपी में तदर्थ सेवा का दिया जाए लाभ
-दस-दस सालों की तदर्थ सेवा कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं शिक्षक
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कनीना की आवाज। सरकारी स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों की तदर्थ/एडहाक सेवा का लाभ उनकी एसीपी(सुनिश्चित सेवा प्रगति) में शामिल किया जाए। यह मांग अध्यापक नेताओं ने सरकार से यहां की है।
यहां जारी एक बयान में अध्यापक नेताओं कंवरसेन वशिष्ठ एवं धर्मपाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में करीब 30 हजार ऐसे शिक्षक हैं जिनको 20-20 वर्षों की सेवा पर एक ही एसीपी लग पाया है। सरकार पहले दस, बीस एवं तीस वर्ष पर तो अब आठ, सोलह एवं 24 वर्षों के बाद एसीपी का लाभ दे रही है। ऐसे में उनकी एसीपी लाभ में तदर्थ या अस्थाई नौकरी का लाभ नहीं दिया गया है। इस बात को लेकर शिक्षकों में रोष है और वे वर्षों से एसीपी के लाभ में अस्थाई एवं तदर्थ सेवा का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। बार बार सरकार से मांग की जाती है किंतु सिरे नहीं चढ़ पाती है।
इस संबंध में एडवोकेट रमेश कुमार ककराला का कहना है कि इस संबंध में अगर न्यायालय में केस डाला जाए तो हो सकता है कोई समाधान निकल आये वरना सरकार तदर्थ सेवा को एसीपी देते वक्त नहीं मानती । यह दुर्भाग्य है कि कई कई वर्षों की सेवा का उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाता है। इस संबंध में कुछ पूर्व शिक्षकों ने उच्चाधिकारियों को भी पत्र प्रेषित किया है तथा मांग की है कि उनकी तदर्थ सेवा को एसीपी में जोड़ा जाए।
जिला व राज्य स्तर पर राजकीय माडल संस्कृति स्कूल कनीना के विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन
-हाकी की टीम खेलेगी राज्य स्तर पर
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कनीना की आवाज। राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना के विद्यार्थियों ने हाकी टीम ने हाल ही में एस डी ककराला में आयोजित अंडर-17 जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। पूरी टीम का चयन अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। क्योंकि कभी कनीना का नाम पूरे प्रदेश में हाकी के लिए सिरमौर माना जाता था। इस जीत ने उस गौरवशाली परंपरा के पुनर्जीवित होने की उम्मीद को और भी प्रबल बना दिया है।
इसी क्रम में कक्षा 12 के छात्र रुद्र ने अपनी लगन और मेहनत के बल पर फुटबाल में असाधारण प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तरीय टीम में जगह बनाई है। वहीं, कक्षा 12 के ही छात्र नवनीत ने जैवलिन थ्रो में अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार जीत दर्ज की और अब उनका चयन जिला स्तर पर हुआ है।
साथ ही विद्यालय की कक्षा नौवीं की एक छात्रा रिया का जिला स्तरीय कबड्डी टीम में भी चयन हुआ है।
विद्यालय के प्राचार्य सुनील खुडानिया ने इन सभी उपलब्धियों पर खिलाडिय़ों को हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिवार को अपने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर गर्व है। खेल केवल शारीरिक विकास का ही साधन नहीं हैं बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को भी विकसित करते हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे ये खिलाड़ी राज्य स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और भविष्य में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे। इस सफलता के पीछे हाकी टीम के कोच कपिल तथा विद्यालय के डीपीई संजय कुमार की मेहनत और मार्गदर्शन की अहम भूमिका रही।
विद्यालय परिवार को पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में हमारे खिलाड़ी और भी ऊंचाइयां छूएंगे तथा विद्यालय, क्षेत्र और प्रदेश का नाम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगे।
फोटो कैप्शन 05: राज्य स्तरीय हाकी की टीम के चयनित विद्यार्थी
कहानी -
चोर साहब
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****कहानी के सभी पात्र एवं स्थान आदि कल्पनिक हैं। यदि किसी से मिलते जुलते हो तो इसे संयोग समझा जाए।***
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जोर-जोर से अमन शोर मचा रहा था कि चोर पकड़ लिया, चोर पकड़ा गया, चोर पकड़ लिया क्योंकि अमन लंबे समय से परेशान चल रहा था। उसके प्लाट से कभी गमले, कभी पत्थर, कभी मंढ़ी की ईंट,कभी पड़ोस के लोगों की ईंट चोरी हो रही थी। अमन ने तो पुलिस में भी शिकायत दी हुई थी कि कोई चोर उनका बहुत सा सामान चोरी कर ले गया।
अमन ने अपने दिल में चोर पकडऩे की ठान ली। वैसे तो लोगों ने अमन से चोरी करने वाले का नाम बता दिया था किंतु अपनी आंखों से चोरी करते हुए नहीं देखा था, ऐसे में कैसे विश्वास करें?
एक दिन अमन अपने प्लाट पर छुपकर बैठ गया। जब दोपहर पश्चात भीषण गर्मी पड़ रही थी कोई भी अपने घरों से नहीं निकल रहा था, तभी चोर चोरी करने के लिए गाड़ी लेकर आया और अमन के गमले को उठाने लगा। अमन की नजर ज्यों ही पड़ी तो तुरंत दरवाजा खोला। चोर का चेहरा पीला पड़ गया, चोर साहब को ऐसे लगा जैसे कोई शेर आ गया है। फिर क्या था अमन ने बहुत खरी खोटी सुना डाली किंतु चोर साहब चिकना घड़ा बना खड़ा हो गया और फिर कभी हाकी निकालकर लाता तो कभी राड़ निकाल कर लाता लेकिन अमन भी आज पूरे क्रोध में था।
अमन कुल्हाड़ी उठाकर लाया और क्रोध में आकर मारना भी चाहा परंतु उसने अपने क्रोध पर काबू पा लिया। चोर साहब का हौसला देखिए कि अपने घर के बाहर तो स्वयं सामान रख लेता है किंतु दूसरे के समान को कभी नहीं देखना चाहता। यही वजह है कि लंबे समय से चोर साहब चोरी करता आ रहा था। आखिर पुलिस में चोर साहब ने शिकायत दे दी कि उसे कुल्हाड़ी से मारना चाहा। उधर अमन तक जब सूचना मिली तो अमन ने भी अपनी शिकायत दे दी। एक निर्धारित दिन चोर साहब और अमन को बुलाया गया। चोर साहब की तरफ से अपंग व्यक्ति जो पुलिस का दल्ला नाम से जाना जाता था, पहुंचा। उधर अमन के साथ भी कुछ लोग पहुंचे। पुलिस में हंगामा चला। जब अमन को घटना बताने के लिए पुलिस ने कहा तो अमन ने सारी घटना एक के बाद एक पुलिस को बताई। इसके बाद पुलिस ने चोर साहब को कहा कि अब तुम बताओ। आश्चर्य उस समय हुआ कि चोर साहब ने पुलिस से कहा कि अमन ने अपने घर के दीवार के साथ पत्थर लगा रखे हैं जिनपर एक ट्रैक्टर और एक स्कूली बस के टायर ब्रस्ट हो चुके हैं। अमर ने जवाब दिया कि मैंने अपनी दीवार के साथ तीन-तीन फुट जगह छोड़ रखी है, उसमें मेरे पत्थर लगे हुए हैं, उनसे कोई टकराए तो इसका मतलब है कि टकराने वाला जानबूझकर पत्थरों को टक्कर मार रहा है। और आज तक बस चालक या ट्रैक्टर चालक ने कभी मेरे से शिकायत नहीं की। चलो तुम्हारी झूठ को सच मान ले तो तू क्या लगा हुआ है कि पत्थर चोरी कर ले गया?
अमन से आज रहा नहीं गया और कहा कि तुम अपने को देखो कि बड़े-बड़े बोर्ड टांग रखे हैं और वह भी सरकारी जमीनों में। बोर्ड पर बिजली भी सरकारी खर्च कर रहे हो। अपने घर का दरवाजा बाहर की ओर खोलते हो, दूसरे के दरवाजे पर गाडिय़ां खड़ी करते हो। चार से पांच फुट अवैध कब्जा कर रखा है। अपने घर के साथ-साथ नाली भी खत्म कर रखी है, क्या यह न्याय है। चोर साहब ने पुलिस में कहा कि ज्यादा न बोलिये। फिर तो अपंग भी उछला और कहा कि अमन हमारा क्या बिगाड़ लेगा, हम देख लेंगे? तभी अमन क्रोध आया और पुलिस सहित चोर साहब व पुलिस के दल्ले को वो खरी खोटी सुना दी कि पुलिस भी क्रोध में आ गई। अमन ने कहा कि मैंने चोर पकड़ा है, पुलिस को चाहिए कि उस पर करवाई करें। उल्टी पुलिस अमन पर टूट पड़ी और कहा इसका फोन छीन लो और इसे अंदर करना है। खैर चोर साहब जो चोरी करते पकड़ा गया था उसे घर भेज दिया और अमन से पुलिस ने कहा कि तुमसे गलती की है, तुम हमें गालियां देते हो, हम तो चाहते थे कि चोर को अंदर करें पर अब तो मामला ही उलट गया। अमन ने उत्तर दिया कि एक तो चोरी करें ऊपर सीनाजोरी करें, ऐसे चोर का तुम कुछ नहीं बिगडऩे तो खैर कोई बात नहीं इस बार हम कैमरे लगाकर उसे पकडऩे वाले हैं। अमन ने उच्च अधिकारियों को फोन कर सारी घटना बताई। उच्च अधिकारियों ने कहा कि अभी हम पुलिस को सूचित करते हैं, बस फिर क्या था पुलिस ने दोबारा अमन को नहीं बुलाया किंतु बात वही खड़ी रह गई। चोर साहब उल्टे दूसरे की दरवाजे पर अपनी गाड़ी खड़ी करने लग गया। इससे नाराज लोग स्पष्ट कहते नजर आए कि चोर साहब एक दुष्ट प्रवृति का है इसने जैंीवन में सब गलत किये हैं, इनके बाप दादा भी चोर रहे हैं वो आदत कैसे छूट पाएगी। ऐसे चोर साहब को सजा तो मिलेगी यहां नहीं तो भगवान के घर।




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