कनीना में दिनभर रही बिजली की आंख मिचौनी
-वर्षा के कारण बनी यह स्थिति
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कनीना की आवाज। कनीना में दिनभर बिजली आंख मिचौनी करती रही। चूंकि वर्षा के कारण फाल्ट आ गया और बार बार बिजली चालू करने का प्रयास हुआ। कुछ समय के लिए बिजली चल पाती फिर से कट हो जाती। ऐसा दिनभर चलता रहा जिसके कारण इंवर्टर भी काम छोड़ गये। पेयजल आपूर्ति में भी दिक्कत आई।
स्कूल गेट पर किया पौधारोपण
-पेड़ पौधे हमारा जीवन आधार-महेंद्र यादव
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कनीना की आवाज। कनीना उपमंडल के गांव भडफ़ में ग्राम जागरण टोली ने सरकारी स्कूल के द्वार पर पौधारोपण किया। इस मौके पर पूर्व सरपंच महेंद्र सिंह ने कहा कि पौधों का जीवन में सबसे बड़ा योगदान होता है। यदि पेड़ पौधे न हो तो इंसान का जीवन ही संभव नहीं है। ऐसे में हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाकर उनकी सेवा करनी चाहिए ताकि वे हमें फल फूल, ईंधन एवं विभिन्न पदार्थ प्रदान कर सके।
इस मौके पर डा: विनोद , मोहन सिंह , पूव सरपंच महेंद्र सिंह, काशीराम , देवदत्त ,योगेश, विनोद ,वेद प्रकाश, करण सिंह ,महेंद्र शर्मा आदि उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 05: भडफ़ में स्कूल द्वार पर पौधारोपण करते हुए ग्राम जागरण टोली
अपने हाथों से नष्ट कर दी खरपतवार
-अनेकों खरपतवार थी शाक सब्जी बनाने में महत्वपूर्ण
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कनीना की आवाज।कनीना और आसपास क्षेत्रों में किसी जमाने में अनेकों जड़ी बूटियां औषधीय पौधे खरपतवार के रूप में उगती थी किंतु किसान ने अपने हाथों से इनको नष्ट कर दिया है। परिणाम स्वरूप पंसारी की दुकानों पर महंगे दामों पर जड़ी बूटियों को ढूंढते फिरते हैं। यही नहीं मिलने वाली जड़ी बूटियों की कोई प्रमाणिकता भी नहीं होती।
एक वक्त था जब ग्रामीण क्षेत्रों में खरपतवार आदि को नष्ट करने के लिए कोई दवा का छिड़काव नहीं किया जाता था। महज अपने हाथों से उखाड़ कर इन खरपतवार को फेंक दिया जाता था जिससे अनेकों खरपतवार खेतों में रह जाती थी। किसान ही नहीं लोगों को भी जिनको जरूरत होती थी विभिन्न उद्देश्यों के लिए काम में लेते थे। ऐसी ही आने को खरपतवारों में बथुआ, चौलाई, सीरियाई, कोहेंद्रा, पुनर्नवा आदि प्रमुख थी।
किसान उनको अपने खेत उखाड़ कर लाता था और परिवार के लिए महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ रायता, कोफ्ता, पराठे, भाजी, खाटा का साग, कढ़ी आदि बनाता था किंतु जब से खरपतवार किसानों ने जहरीली दवा डाल कर नष्ट कर दी तब से बाजार में सब्जी की दुकानों पर किसान इन्हें खरीदते देखा जा सकता हैं।
सर्दियों के मौसम में पैदा होने वाला बथुआ एवं कोहेंद्रा प्रमुख औषधियां थी। वैसे भी शाक सब्जियां थी जिन्हें विभिन्न रूपों में प्रयोग करता था। डॉक्टर ही नहीं वैद्य भी इनको प्रयोग करने की सलाह देते थे। खून की कमी को अक्सर दूर करने के लिए भी इनका अहं योगदान होता था किंतु अब ये खरपतवार किसी खेत में या तो पैदा होती ही नहीं होती है और अगर पैदा होती है तो उन पर जहरीली दवा छिड़की जाती हैं ताकि वेे समूल नष्ट हो जाए। इन दवाओं का कुप्रभाव अनाज पर भी पड़ता है और सांस की बीमारी, कैंसर, मिर्गी, दमा आदि उत्पन्न होते हैं किंतु किसान किसान जानबूझकर आज भी इनका उपयोग कर रहा है। गर्मियों के दिनों में पैदा होने वाली चौलाई ,श्रीआई, पुनर्नवा आज ढूंढे भी नहीं मिलते। बाजार और पंसारी की दुकान ऊपर चौलाई, सीरियाई के बीज ढूंढते हैं या उन्हें पुस्तकों में पढऩे को मिलती हैं। अधिकांश युवा पीढ़ी तो इनके नाम लेते ही अचंभित होते हैं कि यह भी कोई पौधा होता था। वास्तविकता यह है कि आज भी इक्का-दुक्का किसी जगह यह पौधे देखे जा सकते हैं। पर अधिक मात्रा में उत्पन्न नहीं होते।
एक जमाना था जब जंगल में गहरी बणिया होती थी। पशुपालक उन बणियों में अपने पशुओं को चराने के लिए ले जाते थे। कैर एवं जाल पेड़ों के आसपास भारी मात्रा में चौलाई और खेतों में सीरियाई खड़ी नजर आती थी। इनको तोड़कर शुद्ध आयरन युक्त शाक बनाता था। आज भी बुजुर्गों के सामने यदि रायता, शाक, कोफ्ता, भाजी, पराठे कढ़ी, खाटा का साग आदि का नाम ले तो वह उत्सुकता भरी नजरों से देखते नजर आएंगे क्योंकि उनके जमाने में उन्होंने बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग किया और आधुनिक पीढ़ी ने इनको अपने हाथों से नष्ट कर दिया। ऐसे समय में किसान और आम आदमी इन को नष्ट करके पछता रहा है किंतु कहते हैं अब पछताए होत क्या जब चिडिय़ा चुग गई खेत। अब तो किसी दुकान पर इनको ढूंढ सकते हैं। यही नहीं खेतों में जंगल के रूप में पैदा होने वाली कचरी, जंगली टिंडा, जंगली करेला आदि पूर्ण रूप से खो दिए। इनकी सब्जी जायकेदार होती थी और इंसान आज भी इनको नहीं भुला पाया है।
फोटो कैप्शन 5: सीरियाई का खड़ा हुआ खेतों में एक पौधा।
गहराता ही जा रहा है
- निजी स्कूल में पेड़ कटवाते समय सफाई कर्मचारी का गिरकर बेहोश होना
-सचिव नगरपालिका ने कारण बताओ नोटिस भी किया जारी
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कनीना की आवाज। कनीना के वार्ड-14 के पार्षद राजेंद्र सिंह द्वारा अपने निजी स्कूल में पेड़ कटवाने का मामला गहराता ही जा रहा है। जीएल पब्लिक स्कूल वैसे तो विगत वर्ष 7 बच्चों की मौत के बाद बहुत चर्चा में रहा है परंतु अभी तक उस घटना के बाद भी स्कूल के संचालक सबक नहीं ले रहे हैं। 18 अगस्त 2025 को राजकुमार नामक सफाई कर्मचारी से स्कूल के पेड़ कटवाए जा रहे थे और वह गिरकर बेहोश हो गया। एक ओर जहां नगरपालिका कनीना की सफाई व्यवस्था चौपट हो रही है, वहीं सफाई कर्मचारियों से निजी काम लेने पर पार्षदों ने एतराज जताया है और उच्चाधिकारियों को शिकायत की है। वार्ड एक की पार्षद मंजू यादव, वार्ड दो दीपक चौधरी वार्ड पार्षद योगेश कुमार आदि ने एक लिखित शिकायत सचिव नगर पालिका कनीना को दी थी जिसमें उनसे पूछा गया था कि किस हैसियत से सफाई कर्मियों को वार्ड 14 के पार्षद के निजी स्कूल में पेड़ कटवाने के लिए भेजा गया था? यदि कोई अनहोनी हो जाती तो कौन जिम्मेवार होता? जिस पर सचिव नगर पालिका कनीना कपिल कुमार ने एक नोटिस राकेश कुमार सफाई दरोगा के नाम भेजा और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिसमें कहा गया है कि 18 अगस्त को सफाई कर्मचारी राजकुमार जो एचकेआरएन आधार पर लगा हुआ है, स्कूल के निजी कार्य करने हेतु भेजा गया था तथा भेजने के उपरांत सचिव को सूचित क्यों नहीं किया गया? इससे स्पष्ट होता है कि आप ठीक तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, पहले भी मौखिक रूप से स्पष्ट किया जा चुका है कि किसी प्राइवेट संस्था या कार्यक्रम आदि जगहों पर नगर पालिका कनीना का कोई भी कर्मचारी बिना सूचना के नहीं जा सकता? आदेशों की अवहेलना की गई है इसलिए 18 अगस्त का वेतन काटा जाएगा और आप इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण 2 दिनों में दे अन्यथा विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जिस पर राकेश कुमार जमादार ने लिखित रूप से सचिन को कहा है कि उनके पास वार्ड-14 राजेंद्र सिंह लोढ़ा का बार-बार फोन आया कि वार्ड-14 में गली की सफाई करवानी है जिसके चलते राजकुमार कर्मचारी को वार्ड 14 में रोड़ पर छोड़ दिया। उसके बाद मुझे नहीं पता कि पार्षद द्वारा कहां ले जाकर कार्य करवाया गया है।
उधर राकेश कुमार एचकेआरएन कर्मचारियों ने लिखित में सचिव को कहा है कि राकेश जमादार ने उसे वार्ड 14 के निजी स्कूल के गेट के सामने छोड़ दिया था। वार्ड 14 पार्षद ने अपने स्कूल के अंदर पेड़ कटवाने का आदेश दिया। जिसके चलते पेड़ से गिरकर बेहोश हो गया था, अंदरुनी चोटें आई। उनका कहना है कि जब चोट लगी हुई थी तब उन्होंने राकेश जमादार को फोन किया तब राकेश जमादार ही उसे घर छोड़कर गया था। शरीर में गुम चोट आई हैं। अभी भी उपचार चल रहा है, उठने बैठने में दिक्कत आ रही है।
अब वार्ड पार्षदों ने निर्णय लिया है कि एक और सफाई व्यवस्था ठप हो रही है वहीं वार्ड पार्षद जो पहले प्रधान रह चुके हैं, अपने निजी कार्यों में सफाई कर्मचारियों को लगातेे हैं जिससे कनीना की सफाई व्यवस्था ठप हो जाएगी और किसी के साथ अनहोनी घटित हुई तो जिम्मेदार कौन होगा? इसलिए उन्होंने निर्णय किया है कि वे इस मसले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे। वार्ड पार्षदों ने बताया कि वह इस घटना से बहुत आहत हैं। उन्हें जब से सूचना मिली है तब से भी कभी सचिव कनीना पालिका को तो कभी प्रधान के पास जा रहे हैं लेकिन पालिका प्रधान का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने कभी किसी को कहीं नहीं भेजा, जिम्मेदारी कर्मचारियों की है।
उन्होंने बताया कि अब यह मसला जिला उपयुक्त, डीएमसी, मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों को प्रेषित किया जाएगा। साथ में अगर न्याय नहीं मिला तो सीएम विंडो प्रधानमंत्री तक शिकायत की जाएगी ताकि इस प्रकार अपने निजी कार्य करवाने वाले पार्षद के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जा सके।
कहीं किसानों के लिए दुखदायी साबित न हो जाये इस समय की वर्षा
-काट कर डाली गई फसल बह गई पानी में, किसान चिंतित, 62 एमएम वर्षा हुई, वर्षा का कहर जारी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में 62 एमएम वर्षा ने किसानों की नींद हराम कर दी है। चहुं ओर पानी ही पानी भर गया जो बाद में धीरे धीरे कम होता चला गया। निचले स्थानों, सड़क मार्गों एवं होलीवाला जोहड़ सड़क पर गंदा पानी जमा हो गया। खड़ी व पड़ी फसल को नुकसान का अंदेशा है।
कनीना क्षेत्र में जहां सावन माह बीतने तक 300 एमएम से अधिक वर्षा हो चुकी है किंतु अब जब फसल पककर तैयार है किसान लावणी में लगे हुए हैं, तब वर्षा का होना शुभ संकेत नहीं है। कुछ किसान मानते हैं कि भावी फसल के लिए यह वर्षा बेहतर साबित हो सकती है किंतु वर्तमान में बाजरे का एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल है जो अच्छा भाव है। इस भाव को लेने के लिए बाजरा साफ सुथरा होना जरूरी है, अगर बार-बार वर्षा होती रही तो खड़ी और पड़ी बाजरे की फसल को नुकसान होने अंदेशा बन जाएगा। अगर बाजार डि- कलर हो जाता है/रंग बदल जाता है/ बदरंग हो जाता है तो अच्छे भाव नहीं मिल पाएंगे। किसानों के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है कि कैसे अपनी फसल कटाई कर पैदावार को घरों में डाला जाए क्योंकि इस समय फसल एकदम पककर तैयार है और उसे पर वर्षा का कुप्रभाव पड़ेगा। दानों का रंग खराब हो सकता है, फफूंद लगा सकती है, पड़ी हुई फसल में भी नुकसान हो सकता है। विगत वर्षों भी किसानों की बाजरे की फसल बहुत नुकसान हुआ था। एक बार तो काट कर डाली गई बाजरे की फसल में भट्टों के दाने अंकुरित हो गये थे। यदि मौसम साफ रहेगा तो ही किसान अपनी पैदावार सही सलामत घर में डाल पाएंगे वरना किसानों के लिए एक और सिरदर्द खड़ा हो जाएगा। बहरहाल शनिवार को वर्षा 10 एमएम तक पहुंच गई वहीं रविवार को कुल 32 एमएम वर्षा हुई है। विगत दिनों भी कुछ वर्षा हुई थी। वर्षा लगातार होना बेहतर संकेत नहीं है। शनिवार को भी दोपहर बाद लगातार वर्षा होती रही और रुक-रुक कर वर्षा होती रही वहीं रविवार सुबह जमकर वर्षा हुई।
किसान कृष्ण सिंह, योगेश कुमार, सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र कुमार आदि ने बताया कि इस वक्त फसल कटाई का काम पूरे यौवन पर चल रहा है। ऐसे में वर्षा ने न केवल लावणी में खलल डाली है अपितु खड़ी व पड़ी बाजरे की फसल को नुकसान का अंदेशा बन गया है। यदि और वर्षा होती है तो निश्चितरूप से खड़ी फसल को नुकसान होगा। कपास की फसल को पहले ही नुकसान हो चुका है। अगर वर्षा का जल जमा हो जाएगा तो फसल को भारी नुकसान होगा। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि फसलों में जमा वर्षा का जल नुकसानदायक है।
फोटो कैप्शन 01 से 04: फसलों में खड़ा जल एवं पानी में बह रही बाजरे की काटकर डाली फसल

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