Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Sunday, December 28, 2025


 
 रामपुरा हाउस में केंद्रीय राज्य मंत्री इंद्रजीत सिंह से मुलाकात की दीपक चौधरी ने
-कनीना क्षेत्र की रखी चंद मांगे
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कनीना की आवाज।
  केंद्रीय मंत्री इंद्रजीत सिंह के रामपुर हाउस पहुंचने पर दीपक चौधरी व उनकी टीम ने राव इंद्रजीत सिंह से मुलाकात कर क्षेत्र की अनेक समस्याओं के बारे में अवगत कराया और राव इंद्रजीत सिंह को नव वर्ष व मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दी। दक्षिणी हरियाणा पर अपनी राजनीतिक निगाहें बनाए रखने के लिए राव इंद्रजीत सिंह से आग्रह किया और एम्स माजरा जैसी सौगात दक्षिणी हरियाणा को देने के लिए उनका धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।
 दीपक चौधरी एडवोकेट में बताया कि राव इंद्रजीत सिंह का नाम देश के राजनीतिक गलियारों में एक ईमानदार और बेदाग छवि के नेता के रूप में पहचानी जाने वाली शख्सियत है। वो अपने पिता स्वर्गीय राव वीरेंद्र सिंह के नक्शेकदम पर चलकर दक्षिणी हरियाणा के लोगों से उनकी समस्याएं पूछ कर और उनका समाधान करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उन्हीं के नक्शे कदम पर चलकर हमारे हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव भी पीछे नहीं है। उन्होंने अपने पिता और दादा जी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए  अब पूरे हरियाणा में सेवाएं देने का कार्य कर रही है। स्वास्थ्य विभाग को निरंतर प्रयास करके आम जन की सेवाओं के लिए नई-नई योजनाएं लागू करवा रही है।
 इस मौके परमनीष कुमार , मुकेश नंबरदार , योगेश पार्षद,नरेंद्र फौजी, हेड मास्टर बिजेंद्र, रोहित उर्फ चीनू, जोनी जांगड़ा आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 05: राव इंद्रजीत सिंह से मिलते दीपक एडवोकेट




कान्ह सिंह पार्क के पास अवैध कब्जों की भरमार
-करीब तीन दर्जन व्यक्तियों कर रखे अवैध कब्जे
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कनीना की आवाज।
 कान्ह सिंह पार्क कनीना के पास अवैध कब्जों की भरमार है। इस संबंध में शुभराम कनीना, प्रदीप कुमार, वेद प्रकाश आदि वर्ष 2020 से लगातार उच्च अधिकारियों को शिकायत कर रहे हैं। उच्च अधिकारी भी बार-बार मौके पर पहुंच रहे किंतु समस्या समाधान नहीं हो पाया हैं।
शुभराम आदि ने बताया कि अवैध कब्जाधारियों ने सीवर सेअवैध कनेक्शन ले रखे हैं जिससे सीवर ओवरफ्लो करके प्रदूषण फैला रहे हैं वहीं किसी रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि गौशाला कनीना की तरफ नगर पालिका की जमीन पर, प्राथमिक स्कूल कनीना ढाणी की जमीन पर तथा डीएवी स्कूल के साथ लगती जमीन पर भारी संख्या में अवैध कब्जे हो चुके हैं। उन्होंने मांग की है कि अवैध कब्जों को हटाकर ग्रीन बेल्ट बनाई जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
 शुभराम ने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक वो इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं। उच्च अधिकारी भी मौके पर आए हैं और उन्होंने यह माना है कि अवैध कब्जे हो रहे लेकिन हटवाने में नाकाम रहे हैं।
 फोटो कैप्शन 4: रास्तों पर अवैध कब्जे




कनीना नगर पालिका के उप चुनाव की होने लगी है चर्चाएं
-वार्ड 14 से होना है उपचुनाव
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कनीना की आवाज।
 नगर पालिका कनीना के यूं तो प्रधान एवं उप प्रधान पहले ही बन चुके हैं। नगर पालिका अपना कार्य विधिवत रूप से कर रही थी कि अचानक वार्ड 14 के पार्षद राजेंद्र लोढ़ा की मौत के बाद एक बार फिर से कनीना के वार्ड 14 की तरफ लोगों की नजरें टिक गई है। यहां निकट भविष्य में उपचुनाव होने वाले हैं क्योंकि वार्ड 14 का पार्षद नगर पालिका प्रधान का ससुर था। जिनके कारण नगर पालिका में बहुमत बना हुआ था और प्रधान एवं उप प्रधान बने थे। अब लोगों की नजरें वार्ड 14 पर टिक गई है और कई नए और पुराने चुनाव लडऩे वाले इस चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। एक तरफ लोढ़ा परिवार से ही किसी सदस्य को चुनाव लडऩे की बातें भी कनीनावासी कर रहे हैं तो वहीं वार्ड 14 से पहले चुनाव लड़ चुके ऐसे पार्षदों के मैदान में उतरने की संभावना सी इनकार नहीं किया जा सकता। वार्ड 14 एक नया वार्ड पहली बार चुनाव इस बार के चुनावों में बनाया गया था। बीते चुनावों से पहले कनीना नगर पालिका के 13 वार्ड होते थे। पहली बार चुनाव में वार्ड 14 बनाया गया था  जिसमें अधिकांश लोग रेवाड़ी, गाहड़ा आदि सड़क मार्ग पर बसे हुई वोटर हैं। क्योंकि 6 महीने के अंदर उपचुनाव होने की संभावना है और जल्द ही यह माना जा रहा है चुनाव होंगे। उसके लिए चुनाव लडऩे वालों की तैयारी भी शुरू हो गई है। अब यह देखना है कि इतना उपचुनाव कब होते हैं और कितने लोग चुनाव मैदान में उतर पाते हैं।


जैव विविधता दिवस-29 दिसंबर
जैव विविधता संरक्षण सतत भविष्य के लिए एक मार्ग
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कनीना की आवाज।
देश में ही नहीं प्रत्येक क्षेत्र में जैव विविधता देखने को मिलती है। जैव विविधता का संसार बहुत बड़ा है। विभिन्न जीव आपस में एक दूसरे से मिलजुलकर रहते हैं। जैव विविधता पर कुछ जानकारों से चर्चा की गई-
** जैव विविधता शब्द की परिभाषा एडवर्ड विल्सन द्वारा दी गई थी। आनुवंशिकी विविधता के तहत एक जाति अनुवंशिकी स्तर पर वितरण क्षेत्र में बहुत अधिक विविधता दर्शाती है। एक क्षेत्र के जीव दूसरी क्षेत्र के जीवों से जातीय रूप से विविध होते हैं। यही नहीं बारिश,रेगिस्तान व आद्र्र क्षेत्र क्षेत्र के जीवों में भिन्नता पाई जाती है। जंतुओं में विविधता देखने को मिलती है किंतु मानव अति लालची है जो जीव जंतु का शोषण कर रहा है, अति दोहन कर रहा है।  समुद्री मछलियों का जिस दर से दोहन कर रहा है उससे अनेकों प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। बहुत से पेड़ पौधे वातावरण बदलाव तथा इंसान की के हस्तक्षेप के चलते धरती से लुप्त होने के कगार पर जा चुके हैं। यदि जैव विविधता को संरक्षित किया जाए तो भविष्य उज्ज्वल बन सकता है। जैव विविधता के खतरे दिनों दिन बढ़ रहे हैं जिनमें जलवायु परिवर्तन,बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का परिचय आवास का विनाश शिकार अधिक शोषण वनों की कटाई कीटनाशक छीड़कना, चिडिय़ाघर और अनुसंधान के उद्देश्य के लिए जीव जंतु को संग्रह आदि प्रमुख कारण हैं।  यदि यह जीव जंतु लुप्त हो जाएंगे तो भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
  ---जगदेव यादव, निदेशक एसडी स्कूल
 इंसान को तर्कसंगत पर्यावरण का उपयोग करना चाहिए जो प्रजातीय विविधता संरक्षण, जीन प्रजातियां, निवास को बचाने तक ही सीमित था उसे जैव विविधता के संरक्षण समाज के कल्याण की स्थिरता पर आधारित है। दुनिया संसाधन संस्थान द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति कार्यक्रम, विकासशील देशों में संरक्षण के लिए अनुदान, जैव विविधता संरक्षण और पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता को प्राथमिकता दी जा रही है। जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रौद्योगिकियों का स्थानांतरण किया जा रहा है। जीवित संसाधन संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए के बीच की कड़ी शामिल करने वाली विश्व संरक्षण रन रणनीति अपनानी चाहिए। संरक्षण के दो ही तरीके हैं अंदरूनी संरक्षण और बाहरी संरक्षण। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1980 में पेड़ों और जानवरों की पूजा कर संरक्षण का दिया था जिससे जीवों के संरक्षण में मदद मिलेगी। यदि समय रहते जीव जंतुओं को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले समय में इनकी जंतुओं को महज पुस्तकों में ढूंढने को मौका मिलेगाए जीव जंतु लुप्त हो जाएंगे पेड़ पौधे लुप्त हो जाएंगे।  विविधता में कमी होना इंसान के जीवन को खतरे का संकेत होगा । अभी से ही बचाव के तरीके अपनाने चाहिए। भारत जैसे देश में जहां पौधे की 45000 जंगली प्रजातियां और पशुओं की 85251 जंगली प्रजातियां पाई जाती है उनको संरक्षित करने के उपाय अपनाने चाहिए ताकि देश की धरोहर और ये जीव-जंतु, पेड़-पौधे देखने को हर इंसान को मिले।
    ---रामधारी सिंह शिक्षाविद


ग्रीटिंग कार्ड बना बीते जमाने की बात
-व्हाटसअप और आधुनिक तरीकों से भेजते हैं ग्रीटिंग
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कनीना की आवाज।
एक जमाना था जब ग्रीटिंग का इंतजार बेसब्री से किया जाता था। डाकिए से पूछते थे कि कोई उनका नए साल का कार्ड आया या नहीं। जब कोई ग्रीटिंग कार्ड आता तो बड़े प्रसन्न नजर आते और उसे अपने फाइल में रखकर लंबे समय तक याद करते थे। नये साल लगने से दस दिन पहले तथा दस दिन बाद तक ग्रीटिंग भेजे जाते थे।  परंतु विज्ञान की तकनीक इस कदर बढ़ गई है कि ग्रीटिंग का तो तरीका ही बदल कर रख दिया है। अब न तो ग्रीटिंग के लिए डाकिए की जरूरत है और न ही किसी प्रकार के ग्रीटिंग छपवाने या बनाने की जरूरत है। मोबाइल के जरिए ग्रीटिंग बनाकर चंद सेकंड में उसे गंतव्य स्थान तक भेज दिया जाता है।
अब नए साल की ग्रीटिंग देने का तौर तरीका ही बदल गया है। अब एसएमएसए, व्हाट्सअप,मेल भेजकर ही ग्रीटिंग देते हैं। पत्र की शुभकामनाएं एवं ग्रीटिंग कार्ड भेजने की काम लगभग बंद हो गया है। इस संबंध में कुछ लोगों से चर्चा की गई।
** कभी मोबाइल का प्रचलन इतनी उन्नति पर नहीं था और ग्रामीण लोगों को नए साल पर या फिर किसी पर्व पर ग्रीटिंग भेजने के लिए डाकघर का सहारा लेना पड़ता था। ग्रीटिंग को लिफाफे में बंद करके पर्व या नए वर्ष से दस दिन पूर्व ही भेजते थे और पाने वाले को भी ये ग्रीटिंग अक्सर देर से मिलने की शिकायत होती थी। नए साल पूर्व डाकघरों में केवल ग्रीटिंग ही दिखाई पड़ते थे और पोस्टमैन सबसे अधिक व्यस्त इन्हीं में रहते थे। रंगीन ग्रीटिंग कार्ड भेजने के लिए कई तैयारियां करनी होती थी किंतु बाद में समय बदला ओर ग्रीटिंग की ओर कम ध्यान दिया जाने लगा।
--हनुमान सिंह, कनीना
  आज के दिन गांव-गांव में मोबाइल की टावर लगी हुई हैं और उपभोक्ता भी ग्रीटिंग पर काफी पैसे खर्च करने की बजाए मोबाइल से बधाई संदेश भेजकर खुश हो जाते हैं। इस प्रकार न केवल समय की बचत होती है अपितु तुरंत संदेश पहुंचाया जाता है। ग्रीटिंग कार्ड बेचने वाले रोहित कुमार एवं योगेश कुमार का कहना है कि अब तो कोई बच्चा ही बेशक ग्रीटिंग कार्ड लेने उनके पास आता हो। अब तो ग्रीटिंग महज एक बीते जमाने की बात बन गई है।
    -रोहित कुमार,कनीना
    उधर डाकघर में काम कर चुके पोस्टमैन राजेंद्र सिंह ने बताया कि अब तो कोई दस-बीस ही ग्रीटिंग कार्ड नए वर्ष या किसी पर्व के मौके पर मिलते हैं। एक वक्त था जब नए वर्ष के शुरू होने से दस दिनों पूर्व से लेकर दस दिन बाद तक केवल ग्रीटिंग कार्डों की ही धूम मची रहती थी।
 ---राजेंद्र सिंह पोस्टमैंन
मोबाइल क्रांति से पहले वे सैकड़ों ग्रीटिंग खरीदकर लाते थे जिन्हें दुकान पर बेचा जाता था। बच्चे एवं युवा उनमें से बेहतरीन कार्ड लेकर जाते थे। अब तो वो जमाना ही लद गया है। न ग्रीटिंग कार्ड भेजने वाले रहे हैं और उनके खरीददार। ग्रीटिंग अब बीते जमाने की वस्तु बन गई है।
  -गणेश अग्रवाल
फोटो कैप्शन:हनुमान सिंह, राजेंद्र सिंह, रोहित कुमार, गणेश अग्रवाल,





कनीना क्षेत्र में पड़ रही है कड़ाके की ठंड
-लोग हाथ सेकते देखे गये
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कनीना की आवाज।
क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पेड़ पौधों पर तथा वनस्पतियों पर हल्का पाल जमा देखा गया। सुबह सवेरे लोग आग सकते देखे गए। ठंड के कारण लोग गर्म कपड़ों में लिपटे दिखाई दिए। सूर्य दिनभर चमकता रहा। रात को हल्का धुंध और कोहरा कुछ समय के लिए पड़ा था। बाद में लगातार कड़ाके की ठंड पड़ती रही। कनीना क्षेत्र में लगातार मौसम बदल रहा है। कुछ दिन पहले पाला भी जमा था धुंध और कोहरा भी पड़ा था किंतु ठंड जारी है। अभी तक विगत वर्ष की तुलना में कम ठंड पड़ी है। यह ठंड फसलों के लिए लाभ प्रद मानी जा रही है।
  कनीना क्षेत्र में महज 3 दिन धुंध एवं कोहरा पड़ा है बाकी दिनों मौसम साफ रहा है। दिन में धूप तथा रात को ठंड पडऩे से फसलों को नुकसान का अंदेशा नहीं है। ऐसा कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं। कनीना क्षेत्र में जा गेहूं और सरसों दो फसलें अच्छी प्रकार लहलहा रही हैं। आने वाले समय में बेहतरीन पैदावार होने की उम्मीद है।
फोटो कैप्शन 3:ठंड में उदय होते सूर्य को ढकती हुई धुंआ।



संत मोलडऩाथ आश्रम पर हवन एक जनवरी को
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कनीना की आवाज।
 कनीना के संत मोलडऩाथ आश्रम पर 1 जनवरी 2026 को प्रात: 9 बजे हवन आयोजित होगा। विस्तृत जानकारी देते हुए ट्रस्ट प्रधान दिनेश कुमार ने बताया कि सभी की मंगलकामना और बेहतरीन संत भवन निर्माण की कामना को लेकर हवन आयोजित होगा। क्योंकि संत का भव्य आकर्षक भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है। 27 फरवरी को मेला लगेगा उससे पूर्व यह भवन पूर्ण होने की संभावना है। यह भवन बेहतरीन ढंग से पूर्ण हो तथा सभी के लिए नया साल मंगलमय हो इन्हीं कामनाओं को लेकर यह हवन आयोजित होगा।





एक गाय गोद ली और 5100 रुपए दिया दान
-जाजू परिवार का किया अभिनंनदन
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कनीना की आवाज।
 कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में सुरेंद्र जाजू व महेंद्र जाजू ने अपने पिता सागरमल जाजू की पुण्यतिथि पर एक गाय को गोद लिया तथा 5100 रुपए का दान भी दिया। इस मौके पर प्रधान गौशाला भगत सिंह ने उनका अभिनंदन किया है। इस मौके पर मधु जाजू, मनीष पार्षद, दीपक चौधरी पार्षद, भगत सिंह प्रधान, नरेंद्र फौजी, नवीन यदुवंशी, योगेश पार्षद, राहुल जाजूू, संदीप जाजू,अतुल जाजू आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 01: गायों को गोद लेते हुए जाजू परिवार
















चोर साहब के कारनामों के बाद अब कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे तथा ब्लैकमेलर शिक्षक-
-दो कृतियों की कडिय़ां प्रसारित होगी 14 जनवरी से, पढ़ते रहे कनीना की आवाज
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कनीना की आवाज।
डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्डधारक पूर्व शिक्षक, लेखक, साहित्यकार एवं पत्रकार ने जहां विगत दिनों चोर साहब के कारनामों पर 65 कडिय़ां प्रकाशित की थी और वह पुस्तक पूरी होने के कारण प्रकाशन हेतु प्रेस में जा चुकी है। लोगों ने चोर साहब के कारनामों को बहुत सराहा था। ऐसे में जितने भी पाठक जुड़े रहे उन सभी का आभार। अब 14 जनवरी 2026 से 2 नई कृतियां प्रकाशन की तैयारियां पूर्ण हो गई है।
 पहली कृति का नाम होगा कतरूं प्राचार्य के काले कारनामे । इस पुस्तक के विषय में मैं बताना चाहूंगा कि करीब 40 सालों के शिक्षण में 35 विभिन्न प्राचार्यों से भेंट हुई। जिनमें एक कुतरूं प्राचार्य भी मिला जो अय्याशी किस्म का था। उसके कारनामे देखे जाए तो बहुत मशहूर हैं वह अपनी बेटी के समान शिक्षिकाओं पर भी बुरी नजर रखता था। जब तक मैंने पढ़ाया तब तक उसकी बुरी नजर मशहूर रही थी। शिक्षिकाओं को अपने पास घंटों बैठाए रखता था। जब मैं स्कूल से अन्यत्र चला गया तब भी उसने अपने कारनामे जारी रखें। गांव के लोगों के सामने हाथ पैर जोड़ता था गिड़गिड़ाता था, लोग उसे कुतरूं कहते थे। इसलिए इस कृति का नाम कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे रखा है। जिसकी प्रथम कड़ी 14 जनवरी 2026 को कनीना की आवाज ब्लाग में प्रकाशित की जाएगी।
 दूसरी कृति ब्लैकमेलर शिक्षक होगी। डा. होशियार सिंह पूर्व विज्ञान शिक्षक के संपर्क में आया था।  40 सालों की शिक्षण अवधि में यह एक ऐसा शिक्षक भी मिला जिसे शिक्षक कहते हुए शिक्षक कहते हुए शर्म आती है। जिसको न हिंदी आती, ना अंग्रेजी आती, ना संस्कृत आती, न ही उर्दू आती, न फारसी आती ना आने कोई भाषा का ज्ञान था। परंतु चापलूसी में पीएचडी था। वह बहुत मशहूर रहा है। परंतु चापलूसी में अग्रणी पंक्ति में रहा है। किसी के पैर पकड़ लेना, किसी के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा लेना और यहां तक की उसे अगर थोड़ा सा धमका दे तो तो वह पीछे हट जाता था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी रही है कि सभी को ब्लैकमेल करने पर तुला रहता था। किसी को नौकरी लगाना, किसी को किसी केस से बरी करवाना, किसी को कोई लोन दिलवाना, किसी का अन्य कोई काम करवाने के आश्वासन देने में मशहूर रहा है। यहां तक की उसकी अनेकों ब्लैकमेलिंग की घटनाएं  सामने आई हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह ऐसे लोगों को अपनी नजदीक रखता है जो रंडी जैसे गुण रखते हैं। इस शिक्षक के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आ गए हैं और पास में रख लिए हैं। अब सोचा कि क्यों नहीं  एक के बाद एक कड़ी डालता रहूं। किसी ने कहा कि उनकी नौकरी हट जाएगी, आपके पास सारे प्रमाण है तो मैं उनसे साफ कह दिया कि चाहे मेरा कोई दुश्मन भी है तो उसे नौकरी नहीं हटवाना चाहूंगा। चूंकि नौकरी किसी को देना सीखना चाहिए ,हटवाना नहीं। हां उसके जो ब्लैकमेलिंग के कारनामे हैं वे जरूर प्रकाशित करूंगा। यह भी सोच लिया  जो भी राक्षस प्रवृत्ति के लोग मेरे जीवन में मेरे विरुद्ध खड़े थे उनके कारनामे सभी के सामने लाये जाएंगे। जान आनी जानी होती है। एक न एक दिन सभी को जाना होता है। अब उनसे पूरे जोश के साथ लड़ा जाएगा क्योंकि सच्चाई बहुत कड़वी होती है, बहुत दर्द देती है और कलम की मार तो सबसे बुरी होती है। इसलिए अब कलम की मार की जाएगी ताकि लोग उनके कारनामों से परिचित हो सके। आशा है सभी पाठकवृंद का साथ यूं ही बना रहेगा।

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