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Sunday, December 21, 2025



 चोर साहब के कारनामों के बाद अब कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे तथा
-ब्लैकमेलर शिक्षक दो कृतियों की कडिय़ां 14 जनवरी से
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कनीना की आवाज।
 डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्डधारक पूर्व शिक्षक, लेखक, साहित्यकार एवं पत्रकार ने जहां विगत दिनों चोर साहब के कारनामों पर 65 कडिय़ा प्रकाशित की थी और वह पुस्तक पूरी होने के कारण प्रकाशन हेतु प्रेस में जा चुकी है। लोगों ने चोर साहब के कारनामों को बहुत सराहा था। ऐसे में जितने भी पाठक जुड़े रहे उन सभी का आभार। अब 14 जनवरी 2026 से 2 नई कृतियां प्रकाशन की तैयारियां पूर्ण हो गई है।
 पहली कृति का नाम होगा कतरूं प्राचार्य के काले कारनामें । इस पुस्तक के विषय में मैं बताना चाहूंगा कि करीब 40 सालों के शिक्षण में 35 विभिन्न प्राचार्यों से भेंट हुई। जिनमें एक कुतरूं प्राचार्य भी मिला जो अय्याशी किस्म का था। उसके कारनामे देखे जाए तो बहुत मशहूर है वह अपनी बेटी के समान शिक्षिकाओं पर भी बुरी नजर रखता था। जब तक मैंने पढ़ाया तब तक उसकी बुरी नजर मशहूर रही थी। शिक्षिकाओं को अपने पास घंटों बैठाए रखता था। जब मैं स्कूल से अन्यत्र चला गया तब भी उसने अपने कारनामे जारी रखें। गांव के लोगों से क्या-क्या हाथ पैर जोड़ता था गिर गिरता था लोग उसे कुतरूं कहते थे। इसलिए इस कृति का नाम कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे रखा है। जिसकी प्रथम कड़ी 14 जनवरी 2026 को कनीना की आवाज ब्लाग में डाली जाएगी।
 दूसरी कृति ब्लैकमेलर शिक्षक होगी। डा. होशियार सिंह पूर्व विज्ञान शिक्षक के संपर्क में आया था।  40 सालों की शिक्षण अवधि में एक ऐसा शिक्षक भी मिला जिसे शिक्षक कहते हुए शिक्षक कहते हुए शर्म आती है। जिसको न हिंदी आती, ना अंग्रेजी आती, ना संस्कृत आती, न ही उर्दू आती, न फारसी आती ना आने कोई भाषा का ज्ञान था। वह बहुत मशहूर रहा है। परंतु चापलूसी में अग्रणी पंक्ति में रहा है। किसी के पैर पकड़ लेना, किसी के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा लेना और यहां तक की उसे अगर थोड़ा सा धमका दे तो तो वह पीछे हट जाता था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी रही है कि सभी को ब्लैकमेल करने पर तुला रहता था। किसी को नौकरी लगाना, किसी को किसी केस से बरी करवाना, किसी को कोई लोन दिलवाना, किसी का अन्य कोई काम करवाने के आश्वासन देने में मशहूर रहा है। यहां तक की उसकी अनेकों ब्लैकमेलिंग की घटनाएं  सामने आई हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह ऐसे लोगों को अपनी नजदीक रखता है जो रंडी जैसे गुण रखते हैं। इस शिक्षक के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आ गए हैं और पास में रख लिए हैं। अब सोचा कि क्यों नहीं  एक के बाद एक कड़ी डालता रहूं। किसी ने कहा कि उनकी नौकरी हट जाएगी, आपके पास सारे प्रमाण है तो मैं उनसे साफ कह दिया कि चाहे मेरा कोई दुश्मन की है तो उसे नौकरी नहीं हटवाना चाहूंगा। चूंकि नौकरी किसी को देना सीखना चाहिए ,हटवाना नहीं। हां उसके जो ब्लैकमेलिंग के कारनामे हैं वे जरूर प्रकाशित करूंगा। यह भी सोच लिया  जो भी राक्षस प्रवृत्ति के लोग मेरे जीवन में मेरे विरुद्ध खड़े थे उनके कारनामे सभी के सामने लाये जाएंगे। जान आनी जानी होती है। एक न एक दिन सभी को जाना होता है। अब उनसे पूरे जोश के साथ लड़ा जाएगा क्योंकि सच्चाई बहुत कड़वी होती है, बहुत दर्द देती है और कलम की मार तो सबसे बुरी होती है। इसलिए अब कलम की मार की जाएगी ताकि लोग उनके कारनामों से परिचित हो सके। आशा है सभी पाठकवृंद का साथ यूं ही बना रहेगा।

 

 


 विजय वधवा की हिम्मत का कोई पर्याय नहीं
- किसी वैज्ञानिक से कम नहीं है कार्यकुशलता
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कनीना की आवाज।
 यदि हाथों में कुछ करने का हुनर हो तो दिव्यांगता आड़े नहीं आती है। हिम्मत के पर्याय के रूप में कनीना का विजय वधवा जाना जाता है जो 83 प्रतिशत दिव्यांग है। डाक्टरों ने कहा था कि यह खड़ा भी नहीं हो सकेगा किंतु अपनी रोटी रोजी आज भी कमा रहा है। वो हरियाणा का पहला वैज्ञानिक कबाड़ से जुगाड़ बनाने के नाम से जाने जाते हैं।
कनीना बस स्टैंड के पीछे छोटी सी पुरानी दुकान में बैठकर खराब सीएफएल को ठीक करता है। कनीना में सबसे पहले खराब सीएफएल वो भी 10 रुपये में ठीक करने का अगर श्रेय जाता है तो उनको जाता है। वर्षों पहले इन्होंने अपने यहां सीएफएल ठीक करना शुरू किया और अच्छा नाम कमाया। 2017 में इनको हृदयघात आया और मेडिसिटी गुररुग्राम में भर्ती करवाना पड़ा। कान खराब हो गए, आंखों से दिखाई कम देने लगा और शरीर की एक साइड अधरंग हो गई। वर्तमान में 83 प्रतिशत दिव्यांग हैं परंतु हिम्मत नहीं छोड़ते हैं। उनकी हिम्मत के आगे सभी नतमस्तक होते हैं। प्रतिदिन 30 से 40 सीएफएल वर्तमान में भी ठीक कर लेते हैं जबकि उनके हाथ बड़ी मुश्किल से काम करता है। एक हाथ बिल्कुल काम नहीं करता। पैरों से चला नहीं जाता ,शरीर में कई दिक्कत आती है, चलने के लिए ट्राई साइकिल ले रखी है परंतु उनका एक ही उद्देश्य है कि किसी प्रकार अपनी रोटी रोटी खुद कमाये और दूसरों पर निर्भर न रहे। कहने को तो उनका परिवार है जो अच्छी खासी नौकरियों में है किंतु उन्होंने कभी काम से जी नहीं चुराया। पुरानी सीएफएल लाने वाले लोगों की सीएफएल ठीक करके देता है। यह काम करने को तो अनेकों  लोग कर रहे हैं परंतु जिन परिस्थितियों में विजय वधवा काम कर रहे हैं वो सराहनीय है। उसको देखकर लगता है कि सचमुच वह एक उदाहरण बनकर उभरा है।
विजय वधवा कबाड़ से जुगाड़ करने में भी महारत लिये हुए है। वर्ष 2008 में उन्होंने कबाड़ में पड़ी हुई खराब ट्यूबलाइट को महज अल्प राशि में ठीक करके देने का काम शुरू किया था और आज उन्होंने नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर बहरोड़, कोसली, नारनौल, अटेली, दादरी, सेहलंग एवं कनीना में अपने शिष्य छोड़ दिए हैं जो जन सेवा में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार को आइटीआइ में इस प्रकार का ट्रेड शुरू कर देना चाहिए ताकि वे प्रशिक्षण दे सके। उनका मानना है कि विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में उनके नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर लगाने की अनुमति दी जाए ताकि वे बेरोजगारों को रोजगार की राह दिखा सके। उनकी तमन्ना है कि हर गांव में कम से कम एक व्यक्ति उनका यह प्रशिक्षण लेकर गांव की खराब लाइटों को ठीक करने लगे तो उनका नाम भी हो और बेरोजगारों को भी रोजगार मिल सके।   विजय वधवा के कानों में सुनने की मशीन, आंखों पर बड़े चश्मे, पास खड़ी ट्राइसाइकिल, बेंत नजर आते हैं किंतु उनके ग्राहक उन तक जरूर आ जाते हैं। धुआं रहित चिमनी वर्षों पहले से बना रहे हैं।



श्रीश्याम परिवार दीवाना संकीर्तन मंडल कनीना ने कराया भव्य श्याम जागरण
-भजनों पर झूमे श्रद्धालु
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कनीना की आवाज।
श्री श्याम परिवार दीवाना संकीर्तन मंडल कनीना द्वारा बाबा मौलड़ नाथ धाम परिसर में भव्य श्याम जागरण का आयोजन किया गया। धार्मिक श्रद्धा और भक्ति भाव से ओत-प्रोत इस जागरण में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर श्याम बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरआरसीएम स्कूल के चेयरमैन रोशन लाल यादव रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वि_ल गिरी महाराज एवं बुद्धि प्रकाश शर्मा उपस्थित रहे। इसके अलावा नगर पालिका पार्षद दीपक चौधरी, मुकेश नंबरदार तथा मार्केट कमेटी प्रधान दीपक गुप्ता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
श्याम जागरण के दौरान आमंत्रित गायक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां देकर श्याम बाबा का गुणगान किया। हारे का सहारा श्याम हमारा जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। संपूर्ण वातावरण भक्ति, श्रद्धा और संकीर्तन की मधुर ध्वनि से गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत रात्रि करीब 9 बजे हुई, जो निरंतर भक्ति रस के साथ प्रात: 4 बजे तक चला। पूरी रात श्रद्धालु श्याम बाबा के भजनों में लीन रहे। आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम के अंत में मंडल के सदस्यों ने आए हुए अतिथियों, कलाकारों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
फोटो कैप्शन 13: संबंधित है



86 वर्ष पुराने कनीना खास रेलवे स्टेशन पर
नहीं रुकती अधिकांश ट्रेन
-- राजनीति पकड़ कमजोर का दंश झेल रहा है कनीना
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कनीना की आवाज।
  कनीना उपमंडल होते हुए भी यहां का रेलवे स्टेशन महज नाम का ही रह गया है। अधिकांश ट्रेन ठहराव नहीं करती हैं। कमजोर राजनीति पकड़ का दंश कनीनावासी झेल रहे हैं।
 कनीना खास रेलवे स्टेशन 1939 में निर्मित किया गया था किंतु यहां फास्ट एवं सुपरफास्ट ट्रेन नहीं रुकती, महज एक फास्ट तथा पैसेंजर ट्रेनों से ही गुजारा करना पड़ता है। रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ के बीच 18 ट्रेन चलती हैं जिनमें से कनीना को महज 7 ट्रेन पैसेंजर नसीब होती हैं जबकि कनीना खास रेवाड़ी से 34 किमी तथा महेंद्रगढ़ से 17 किमी दूरी पर स्थित है। रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों के बीच में स्थित है कनीना खास रेलवे स्टेशन। अगर कोई चरखी दादरी, रोहतक ,अटेली एवं नारनौल आदि की ओर जाना चाहे तो नहीं जा सकता क्योंकि यह ट्रेन केवल महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी की और देर शाम तक ही चलती हैं। तत्पश्चात सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है।
 कनीना के रेलयात्री रविंद्र बंसल, सुरेश कुमार, दिनेश कुमार, महेंद्र शर्मा, महेश कुमार आदि ने बताया कि ट्रेन की कोई बेहतर सुविधा नहीं है। बार-बार आंदोलन किए गए ज्ञापन भी उच्च अधिकारियों को भेजे लेकिन कनीना खास रेलवे स्टेशन जो अहीरवाल एवं सैनिकों को गढ़ है किंतु यहां कोई ट्रेन सुविधा उपलब्ध नहीं है। फास्ट और सुपरफास्ट ट्रेन यहां ठहराव किए बगैर आगे निकल जाती है। यदि यहां एक मिनट का ठहराव कर लिए दिया जाए तो न केवल रेलवे को लाभ मिलेगा अपितु सैनिकों और यात्रियों को भारी लाभ मिल सकता है। वैसे भी कनीना उपमंडल हैं जहां से ट्रेन उपलब्ध होनी चाहिए, हर फास्ट ट्रेन रुकनी चाहिए ताकि लोगों को लाभ मिल सके। जब तक कनीना खास रेलवे स्टेशन मीटर गेज था सभी ट्रेन ठहराव करती थी किंतु जब से ब्राड गेज बना है कोई फास्ट या सुपरफास्ट ट्रेन ठहराव नहीं करती है।
 उल्लेखनीय की कनीना एक और जहां रेवाड़ी, रोहतक ,चरखी दादरी, नारनौल, अटेली एवं महेंद्रगढ़ आदि शहरों से जुड़ा हुआ है और उनके बीच में स्थित है किंतु यहां कोई ट्रेन और बस सेवा उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते कनीना वासी बेहद परेशान हैं। कनीनावासी बार-बार मांग कर रहे हैं कि अलवर से चरखी दादरी वाया कनीना जो रेल मार्ग प्रस्तावित है उसे अविलंब बनाया जाए यही नहीं कोसली से कनीना भी रेलवे लाइन प्रस्तावित है उसको बनाया जाए ताकि कनीना एक जंक्शन बन सके और यहां ट्रेनों का ठहरा हो सके। सभी की नजरें जंक्शन बनने पर टिकी हुई है। उधर कनीना के बस स्टैंड से रात्रि कालीन सेवाएं चलती थी किंतु आपके सभी सेवाएं बंद है। कभी चंडीगढ़, दिल्ली एवं बीकानेर आदि के लिए रात्रि कालीन सेवाएं उपलब्ध थी। ऐसे में लोगों की मांग है की रात्रिकालीन बस सेवाएं शुरू की जाए और कनीना में सभी ट्रेनों का ठहराव किया जाए।
क्या कहते हैं यहां के लोग-
कनीना खास रेलवे स्टेशन 1939 से पहले का बना हुआ है और उपमंडल का दर्जा होते हुए भी ट्रेन की सुविधाओं से दूर है। विभिन्न अधिकारी, व्यापारी, दैनिक यात्री, भारी संख्या में दिल्ली चंडीगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर आदि स्थानों पर जाते हैं किंतु उनके लिए कोई ट्रेन सुविधा नहीं है। उन्हें ट्रेन पकडऩे के लिए भी कम से कम 35 किलोमीटर दूर रेवाड़ी जाना पड़ता है। ऐसे में कनीना खास रेलवे स्टेशन पर ट्रेन ठहराव की सुविधा दी जाए।
                ---गणेश अग्रवाल
 कनीना कस्बे के भारी संख्या में दैनिक यात्री, नौकरी, रोजगार के लिए तथा अधिकारियों को दिल्ली तथा दूरदराज जाना पड़ता है। किंतु उनके लिए ट्रेन की सुविधा नहीं है। ट्रेन पकडऩे के लिए भी उन्हें 35 किलोमीटर दूर रेवाड़ी जाना पड़ता है। नौकरी,साक्षात्कार वगैरह के लिए उन्हें रात को भी जाना पड़ता है। ऐसे में उनको बड़ी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सभी ट्रेनों का ठहराव होना चाहिए। रात्रिकालीन बस सेवा उपलब्ध कराई जाए।
                     ---योगेश अग्रवाल
 कनीना में कम से कम 1000 दुकाने है जिनसे सैकड़ों दुकानदार प्रतिदिन सामान लेने के लिए भी दूरदराज आने को मजबूर है। कनीना खास रेलवे स्टेशन से उनको कोई सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसे में उनकी मांग है कि कनीना की हर प्रकार से जायज मांगे, सभी फास्ट ट्रेन, सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव तुरंत पूरी की जाए। उन्होंने उनका कहना है कि बार-बार आंदोलन कर चुके हैं और उनके आंदोलन को इसलिए रुकवा दिया जाता है कि जल्दी ट्रेन का जल्द ही ठहराव करेंगे किंतु ट्रेनों का ठहराव नहीं किया जा रहा है। रात्रि सेवा बस लगाई जाएं।
              -मुकेश नंबरदार
कनीनावासियों की पुरानी मांग है कि कनीना खास रेलवे स्टेशन पर सभी ट्रेनों का ठहराव किया जाए किंतु बार बार आंदोलन, ज्ञापन देने तथा अधिकारियों से मिलने के बाद भी मांग को सिरे नहीं चढ़ाया गया है।
--पंकज एडवोकेट
फोटो कैप्शन 11: कनीना खास रेलवे स्टेशन
             साथ में रविंद्र बंसल, गणेश अग्रवाल मुकेश नंबरदार एवं पंकज एडवोकेट




 करीरा गांव के लोगों के आवागमन का स्थायी समाधान नहीं
-करीरा मोड़ पर सड़क बनने का इंतजार
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कनीना की आवाज।
कनीना के कुछ लोगों की जमीन करीरा सड़क मार्ग पर निकलने के कारण और कनीना कोर्ट के फैसले के अनुसार जमीन के चारदीवारी निर्माण हेतु नींव खोद दी थी। यह जमीन करीरा सड़क मार्ग के बीच तक निकलने से तथा आधे मार्ग पर  पेड़ होने के कारण गत दिवस  सड़क मार्ग बंद हो चुका है। अब एक व्यक्ति के मानने पर थोड़ी राहत मिली है किंतु स्थायी समाधान नहीं हुआ है।  करीरा और अन्य गांवों के लोग भडफ़ या कोटिया होकर कनीना पहुंच पा रहे हैं।  कनीना, करीरा, गोठड़ा आदि गांवों के लोग एवं किसान प्रभावित हो गये हैं।
उल्लेखनीय के लंबे समय से पीडब्ल्यूडी एवं कनीना के कुछ लोगों का विवाद न्यायालय में चल रहा था। आखिरकार 10 दिसंबर को कनीना के कुछ लोगों के पक्ष में फैसला आ जाने से उन्होंने नींव खुदवाई है और सड़क मार्ग बंद हो गया था। क्योंकि दूसरी तरफ पेड़ पौधे खड़े हुए हैं। बड़े-बड़े पेड़ जिनकी कटाई होने के बाद ही सड़क मार्ग बनाया जा सकेगा। यही नहीं कुछ घरों का गंदा जल फैल जाने से नींव खोदाई के पास से दुपहिया वाहन गुजरना खतरे से खाली नहीं है। धक्के मारकर कई वाहनों को कीचड़ से निकाला जाता है। इस संबंध में कनीना निवासी जिनकी जमीन मालिक विक्रम सिंह से बात हुई। उन्होंने कहा कि वह मानवता के नाते कुछ दिनों के लिए आवागमन के लिए रास्ता खोल दिया गया है लेकिन मजबूर है। अपनी जगह पर काबिज होना ही पड़ेगा। विभाग को चाहिए कि पेड़ पौधों की कटाई करके और तुरंत सड़क निर्माण करें वरना आवागमन पर प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि नीम के खोदाई के दूसरी तरफ बहुत मामूली सी जगह बचती है जिनमें से दोपहिया वाहन ही बड़ी मुश्किल से आ जा सकते हैं। बड़े-बड़े ऊंचे पेड़ खड़े हुए जिनमें कटाई तथा लेवल होने के बाद ही सड़क मार्ग निर्मित किया जा सकेगा।
गत दिवस एक्सीईन पीडब्ल्यूडी अश्विनी कुमार ने कहा था कि पेड़ो की कटाई की अनुमति वन विभाग से मिल जाने के बाद ही कुछ समाधान निकलेगा किंतु राहगीरों की समस्या का समाधान निकाल दिया जाएगा।
 अब विक्रम सिंह ने खोदी गई नींव को मिट्टी से भरवाकर आवागमन का रास्ता खोला है जिससे आंशिक राहत मिली है। अब तो सभी की नजरें करीरा मोड़ की सड़क निर्माण पर टिकी हैं।
फोटो कैप्शन 10: धक्के मारकर दुपहिया वाहन निकालते हुए



राष्ट्रीय गणित दिवस -22 दिसंबर
प्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के रूप में मनाया जाता है गणित दिवस
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कनीना की आवाज।
 भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिन को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज के दिन विद्यार्थी गणित से कुछ दूर भागते हैं जबकि भारत के इस गणितज्ञ ने वह खोज की जो आज भी विदेशों तक शोध का आधार बने हुए हैं। इस संबंध में कुछ गणित के जानकारों से बात हुई --
**बेशक वर्तमान पीढ़ी गणित से कुछ दूर भागती हो किंतु गणित बहुत आसान विषय है। गणित को अगर सही ढंग से पढ़ा जाए तो निसंदेह हर विषय की समस्याओं को हल करने की चाबी के रूप में कार्य करेगा। जिस प्रकार रामानुजन ने 32 वर्ष के अल्प जीवन काल में 3900 समीकरण और सर्वसमिकाओं का संकलन किया है, पाई की अनंत श्रेणी शामिल की गई, अनेक सूत्र भी प्रदान किये चुनौती पूर्ण गणित की समस्याओं को हल करने के लिए नए विचार प्रस्तुत कर गणित को आसान से भी आसान विषय सिद्ध करके दिखाया। चाहे उनका 32 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था किंतु वह एक ऐसी शिक्षा और ज्ञान का सागर दे गए जिस पर सदियों तक शोध किया जाता रहेगा। आज भी विद्यार्थियों द्वारा उनसे शिक्षा लेकर आगे  बढ़ाना चाहिए।
--- राजकुमार गणित के पूर्व शिक्षक
गणित से डरना बुरी बात है किंतु गणित के साथ खेलने से यह विषय एक सुंदर खेल का माध्यम बन जाता है। गणित से जो डरकर दूर भागता है उतना ही गणित में कमजोर हो जाता है लेकिन जो गणित के गहराई तक जाने का प्रयास करता है वह अंतत: गणित में पारंगत हासिल कर लेता है और उसकी पहचान प्रतिभावान के रूप में की जाती है। श्रीनिवास रामानुजन छोटी उम्र में गणित में पारंगत हो गये थे। उनकी गणित के प्रति रुचि ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचा दिया। उनके ज्ञान सागर की ओर ध्यान देकर आगे बढऩा चाहिए। तभी गणित आसान विषय बन सकता है।
--- मनोज कुमार गणित के जानकार
गणित बहुत बड़ा विषय है। गणित की छोटी-छोटी समस्याओं को हल करने में यदि ध्यान दिया जाए तो सही मायने में  इंसान का ज्ञान निखर कर सामने आएगा। गणित से दूर भागना योद्धा के समान है जो युद्ध की विभीषिका देखकर डर के मारे भाग रहा हो लेकिन जिस प्रकार एक योद्धा युद्ध में पूरे हौसले के साथ उतरता है तो जीत उसके कदमों को चूमती है। इसी प्रकार गणित में जो भी इंसान डुबकी लगाएगा वह निश्चित रूप से गणित रूपी ज्ञान का मोती ज्ञान रूपी सागर की गहराइयों से निकाल कर लाएगा। गणित पढऩा  अरुचिकर नहीं अपितु रुचिकर लगेगा और गणित अपने आप में एक अच्छा ज्ञान का सागर इंसान को दे पाएगा।
-- देशराज गणित के जानकार
गणित को सरल तरीके एवं छोटी छोटी बातों से बड़ी बातों की ओर ले जाने पर विद्यार्थी आसानी से सीख सकते हैं। गणित में अगर एक बार रुचि जागृत हो जाए तो गणित सबसे सरल विषय बन सकता है।
--अरविंद कुमार, गणित के जानकार
फोटो कैप्शन: देशराज, मनोज कुमार, राजकुमार, अरविंद कुमार



दोपहर तक चली धुंध, कड़ाके की ठंड जारी
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में तीन दिनों से जहां मौसम बिल्कुल साफ रहा है लेकिन कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लेकिन रविवार को फिर से धुंध पड़ी जो दोपहर तक जारी रही। कनीना कस्बे में जहां पहले पाला भी जमा था, बाद में 2 दिन धुंध पड़ी तत्पश्चात फिर से मौसम साफ चल रहा है।
  उल्लेखनीय है कि कनीना क्षेत्र में 20000 हेक्टेयर पर सरसों तो 8000 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल उगाई गई है जिसके लिए सर्दी की जरूरत होती है। अभी इतनी सर्दी भी नहीं पड़ रही है जिससे फसल को कोई नुकसान हो। यह सर्दी फसलों के लिए लाभदायक साबित होगी।
   किसान सुरेंद्र कुमार, कृष्ण कुमार, अजीत कुमार, सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि सर्दी पडऩे से ही सरसों और गेहूं के फसल में आब आ जाती है लेकिन अधिक समय तक मौसम खराब रहने से फसलों को नुकसान हो सकता है। अभी तक ऐसी हालत नहीं बनी है कि फसलों को कोई नुकसान हो।
 फोटो कैप्शन 07 से 09: कनीना में धुंध



बागवानी विभाग के प्रयासों से महेंद्रगढ़ के किसानों की आय में होगा इजाफा
- गांव बुचावास में जिला स्तरीय सेमिनार आयोजित
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कनीना की आवाज।
हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को बागवानी की आधुनिक तकनीकों से जोडऩे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से आज कनीना ब्लाक के गांव बूचावास में एक जिला स्तरीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया। कार्यक्रम में हरियाणा राज्य बागवानी विकास एजेंसी (एचएसएचडीए) पंचकूला के मिशन निदेशक जोगेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और किसानों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन कर उनके उत्पादों की सराहना की।
इस मौके पर मिशन निदेशक जोगेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हरियाणा सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और बागवानी विभाग विभिन्न योजनाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहा है। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि महेंद्रगढ़ जिले की जलवायु के अनुसार यहां बेर, नींबू और किन्नू जैसे शुष्क फलों की बागवानी बेहद लाभदायक है। उन्होंने आधुनिक खेती पर जोर देते हुए कहा कि ड्रिप सिंचाई, नेट हाउस, मल्चिंग और टनल तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा सब्जी और मसाले की खेती व बीज उत्पादन के लिए 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को सबसे पहले मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है, जिसके बाद विभाग के पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है। यह योजना पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर लागू है और एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक लाभ ले सकता है।
उद्यान विकास अधिकारी राधेश्याम ने किसानों को कीट नियंत्रण के आधुनिक तरीकों जैसे फेरोमेन ट्रैप और सोलर लाइट ट्रैप के बारे में जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसान बिरेंद्र सिंह के खेत में ग्राफ्टेड बैंगन और ड्रैगन फ्रूट की खेती का भी अवलोकन किया, जिसे देख अन्य किसान उत्साहित नजर आए।
कार्यक्रम में डा. नेहा यादव, मुकेश शिवराण, डा. नरेंद्र सिंह सहित कई कृषि विशेषज्ञों ने तकनीकी जानकारी साझा की। इस सेमिनार में जिले के करीब 250 प्रगतिशील किसानों, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिससे क्षेत्र में बागवानी को लेकर एक नया उत्साह देखने को मिला।
फोटो कैप्शन 03: कार्यक्रम में संबोधित करते मिशन निदेशक जोगेंद्र सिंह।
फोटो कैप्शन 04:स्टालों का अवलोकन करते मिशन निदेशक जोगेंद्र सिंह।



पीएमश्री स्कूल जेएनवी करीरा में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर व्याख्यान
-एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुनील कुमार ने दिया व्याख्यान
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कनीना की आवाज।
पीएमश्री स्कूल जेएनवी करीरा में पीएमश्री गतिविधियों के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह गतिविधि जेएनवी करीरा के प्राचार्य बीएम रावत के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
मुख्य वक्ता पर्यावरण विज्ञान के हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, पाली में एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुनील कुमार थे। कक्षा 6, 7 एवं 8 के छात्र-छात्राओं ने इस सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में पूजा सिंह ने अतिथि व्याख्याता का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया।
डा. कुमार ने भारतीय परंपराओं पर जोर देते हुए बताया कि प्रकृति की पूजा भारत की प्राचीन परंपरा रही है तथा भारत ने विश्व को योग का उपहार दिया है। प्रकृति का सम्मान एवं पूजा करने पर वह हमें आशीर्वाद प्रदान करती है। सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा संचालित चिपको आंदोलन तथा बिश्नोई समुदाय की प्रकृति संरक्षण भावना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ उत्तम समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। बिहार के छठ पूजा जैसे त्योहारों में प्रकृति पूजा तथा सर्वे भवन्तु सुखिन: सिद्धांत पर प्रकाश डाला।
भारतीय ज्ञान प्रणाली की समृद्धि को संजीवनी बूटी, जयपुर के जंतर-मंतर के वैज्ञानिक उदाहरण से स्पष्ट किया। भारतीय वैज्ञानिक डा. जगदीश चंद्र बोस द्वारा के्रेस्कोग्राफ आविष्कार से पौधों की अन्य जीवों जैसी प्रतिक्रिया का उल्लेख किया। पारंपरिक कृषि पद्धतियां, ढलान क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेती तथा जल संरक्षण की प्राचीन प्रणालियां जैसे बावड़ी, जोहड़ एवं भोपाल झील जैसी कृत्रिम झीलों का विस्तार से वर्णन किया।
यह व्याख्यान बच्चों के लिए अत्यंत जानकारीपूर्ण, उपयोगी एवं प्रेरणादायक रहा, जिसने उन्हें भारतीय ज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण की गहन समझ प्रदान की। कार्यक्रम के समापन पर उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य ने धन्यवाद जताया।
फोटो कैप्शन 05: संबोधित करते डा. सुनील कुमार




 स्कूलों की और बिजली विभाग का लाखों रुपए बकाया
- एसडीओ बूचावास ने स्कूलों के नाम निकला आदेश, कनीना के स्कूलों की भी यही हालात
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कनीना की आवाज।
 स्कूलों की ओर बिजली विभाग का लाखों रुपए बकाया है। ऐसे में बूचावास एसडीओ के तहत के तहत 5 स्कूलों का 239581 रुपए बकाया है। वही कनीना के दो स्कूलों का ही डेढ़ लाख से अधिक बिजली बिल बकाया है।
 इस संबंध में कनीना डीएचबीवीएन एसडीओ उमेश वर्मा से बात हुई उन्होंने बताया कि नियम अनुसार जिनकी ओर 5000 रुपए भी बकाया है उनका कनेक्शन काट दिया जाता है। सोमवार को विभिन्न स्कूलों की सूची जारी करेंगे जिसमें उनका बिल बकाया है। यदि वह समय पर बिल भरेंगे तो उचित वरना कनेक्षन काटने की नौबत आ जाएगी। उधर एसडीओ बूचावास अरुण कुमार ने राजकीय उच्च विद्यालय पाथेड़ा की ओर 55596 रुपए, राजकीय माध्यमिक स्कूल रसूलपुर की ओर 63504 रुपए, जीपीएस बवानिया की ओर 57107 रुपए ,जीपीएस अगिहार की ओर 29666 रुपए, राजकीय उच्च विद्यालय बूचावास 33708 रुपए बकाया दिखाएं है। साथ में लिखा है 7 दिनों तक यदि बिल नहीं भरा तो उनके कनेक्शन काट दिये जाएंगे। इस प्रकार कुल 239581 रुपए बकाया है। उधर कनीना के मंडी स्कूल का एक लाख से अधिक बिल बकाया है वह राजकीय उच्च विद्यालय की ओर 50000 रुपए से अधिक का बिल बकाया है।
 इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी डा. विश्वेश्वर कौशिक से बात हुई। उन्होंने बताया कि संबंध में उच्च अधिकारियों को डिमांड भेजी हुई है। ज्यों ही राशि आती है तुरंत इन स्कूलों को भेज दी जाएगी ताकि इनका कनेक्शन नहीं कटे।



डीआरयूसीसी के सदस्य ने जा
























ना रेलवे यात्रियों की समस्याओं को
-अतरलाल ने दिया ज्ञापन
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कनीना की आवाज। उत्तर पश्चिमी रेलवे बीकानेर मंडल के संभागीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्श समिति (डीआरयूसीसी) के सदस्य हरमेश कुमार ने कनीना, उन्हाणी, भोजावास, धनौन्दा में बैठक आयोजित कर रेलवे यात्रियों की समस्याओं को जाना। इस अवसर पर प्रजा भलाई संगठन के अतरलाल एडवोकेट ने डीआरएम बीकानेर डीवीजन के नाम एक ज्ञापन उन्हें सौंपकर कनीना खास रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव करने की मांग की।
 अतरलाल ने कहा कि कनीना रेलवे स्टेशन से होकर 8 एक्सप्रेस गाडिय़ां गुजरती हैं परन्तु उनमें से एक भी एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव यहो नहीं है। जिसके कारण रोजना सैकड़ों यात्रियों को एक्सपेस ट्रेनों में यात्रा करने के लिए रेवाड़ी और महेन्द्रगढ़ चढऩा और उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कनीना उपमंडल है, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी और तहसील कार्यालय है। दो पुलिस स्टेशन है। सरकारी कालेज तथा अनेक प्राइवेट कॉलेज हैं पुरानी अनाजमंडी है। इलाका सैनिकों की खान है। नजदीक बाघोत गांव का ऐतिहासिक व धार्मिक शिव मंदिर तथा नजदीक महासर गांव में देवी माता का मंदिर है। इसलिए कनीना रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होना जरूरी है। उन्होंने इस लाईन पर एक नई पैसेजर इएमयू गाड़ी प्रात: 5 बजे सादुलपुर से वाया कनीना, रेवाड़ी, दिल्ली, पानीपत तक चलाने तथा पानीपत में एक घंटे का ठहराव करने के बाद वापसी इसी रूट से सादुलपुर तक चलाने तथा कनीना रेलवे स्टेशन को आदर्श भारत स्टेशन योजना में शामिल करने की मांग भी की।
 संभागीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्श समिति के सदस्य हरमेश कुमार ने ज्ञापन को तत्काल डीआरएम को भेजने तथा उनकी मांग को डिविजन की मीटिंग में रखने और एक एक्सप्रंस ट्रेन का ठहराव कनीना खास रेलवे स्टेशन पर करवाने का भरोसा दिया। इस अवसर पर मुकेश तंवर, ओमप्रकाश, राकेश यादव, भाग सिंह चेयरमैन, कैलाश सेठ सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे।
फोटो कैप्शन 02:डीआरयूसीसीके सदस्य को ज्ञापन सौंपते




 

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