बाजार में धार्मिक नाम के फलों की बहार
-फलों के साथ साथ लिया जाता हैं सीता और राम का नाम
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में अब तो फल बेचने वाली भी राम और सीता की याद दिलाने वाले फल बेच रहे हैं ताकि उनको खूब याद किया जा सके। फल विक्रेता भारी मात्रा में फल बेच रहे हैं जिनमें सीताफल और रामफल प्रमुख हैं। फल विक्रेता रमेश कुमार ने बताया कि सीताफल सीता को याद दिलाता है जबकि रामफल श्रीराम की याद दिलाता है। उनका कहना है कि फलों के नाम लेने से भगवान श्रीराम और सीता का नाम भी जुबां पर आ जाता है। यद्यपि ये फल आसपास नहीं होते दूर दराज से मंगवाए जाते किंतु उनकी मांग अधिक है। लोगों बड़े चाव से खा रहे हैं। फल विक्रेता दिखाया कि रामफल बिल्कुल बड़े टमाटर जैसा होता है किंतु हिमाचल से आता है। सीताफल आसपास भी पैदा हो जाता है। लोग इनके नाम सुनकर खुश हैं।
फोटो कैप्शन 11: राम एवं सीताफल बेचता दुकानदार
जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में आयुर्वेद पर हुआ व्याख्यान
-डा. विनय शर्मा ने दी आयुर्वेद की जानकारी
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कनीना की आवाज। जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में भारतीय ज्ञान प्रणाली के अंतर्गत एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान हिंदी में दिया गया और इसका मुख्य विषय आयुर्वेद रहा।
इस मौके पर प्रमुख वक्ता डा. विनय शर्मा मेडिकल आफिसर - आयुष, उपनागरिक अस्पताल कनीना रहे। डा. विनय यादव ने विद्यार्थियों को
आयुष प्रणाली का परिचय और महत्व विस्तार से बताया। साथ में आयुर्वेद की मूल अवधारणाए,आयुर्वेद में चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा का इतिहास भी समझाया। शल्य चिकित्सा का जनक महान आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत के योगदान का विस्तार से हवाला दिया। उन्होंने संतुलित आहार का महत्व,आम स्वास्थ्य समस्याएं, विशेष रूप से बच्चों में मिलने वाली विटामिन बी-12 की कमी, विटामिन डी-3 की कमी,एनीमिया (खून की कमी) की जानकारी दी साथ में इन कमियों के लक्षण, कारण तथा आयुर्वेदिक एवं सामान्य उपचार पर चर्चा भी की। यह व्याख्यान छात्रों को प्राचीन भारतीय ज्ञान से जोडऩे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला था।
इस कार्यक्रम का आयोजन का नेतृत्व एवं समन्वय प्राचार्य बीएम रावत के मार्गदर्शन में चला। इस मौके पर उप-प्राचार्य धर्मेंद्र आर्य एवं
समन्वयक पूजा सिंह पीजीटी रही।
इस मौके परकक्षा 6, 7 तथा 8 के विद्यार्थियों ने ज्ञान अर्जित किया। ऐसे आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को स्कूली शिक्षा में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे छात्रों में आयुर्वेद जैसी प्राचीन विद्या के प्रति जागरूकता बढ़ती है और वे आधुनिक जीवन में भी स्वस्थ रहने के पारंपरिक तरीके सीखाते हैं।
फोटो कैप्शन 12: डा. विनय शर्मा आयुर्वेद पर व्याख्यान देते हुए।
आजादी में खादी का योगदान विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित
-अव्वल को किया पुरस्कृत
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कनीना की आवाज। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग हरियाणा द्वारा जन शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के दौरान देश की आजादी में खादी का योगदान विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस रोमांचक प्रतियोगिता में कक्षा 11वीं की छात्रा कुमारी सुप्रिया ने खादी के पक्ष में प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं खादी के विरोध में अपने विचार रखते हुए कुमारी प्रीति ने द्वितीय स्थान तथा अंजलि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक ने कहा कि आज देश वोकल फार लोकल और लोकल को ग्लोबल के प्रधानमंत्री के संदेश के साथ आगे बढ़ रहा है। खादी हमारे देश की आत्मा है, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा दिया गया ऐसा मूल मंत्र है, जो आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि खादी केवल एक वस्त्र नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है, और आज रेशमी, ऊनी तथा सूती खादी की लंबी शृंखला विश्व स्तर पर पहचान बना रही है। इसके प्रचार-प्रसार के साथ-साथ हमें इसे अपनाना भी होगा।
कार्यक्रम के संयोजक दीपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि शीघ्र ही कनीना में खादी ग्रामोद्योग केंद्र की एक शाखा शुरू की जाएगी, जिससे क्षेत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग के उत्पादों को बेहतर ढंग से प्रचारित व प्रसारित किया जा सके।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में नरेश कुमार यादव, हेमंत शर्मा, पन्नालाल, अनीता यादव सहित विद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा। सभी विजेता प्रतिभागियों को खादी ग्रामोद्योग विभाग की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए।
फोटो कैप्शन 09: वाद विवाद प्रतियोगिता में अव्वल रहे बच्चे।
ठंड का कहर जारी,सुबह सवेरे जमा पाला
-दिनभर कंपाने वाली ठंड पड़ी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में जहां दिन भर में मौसम बदलता रहा। सुबह सवेरे कोहरा पड़ा वहीं कोहरे के बाद कड़ाके की ठंड पड़ी, लोग ठंड के मारे आग सेकते हुए देखे गए। तत्पश्चात सूर्य तेज प्रकाश के साथ चमका और शाम को फिर से ठंड पडऩी शुरू हो गई। क्षेत्र के लोग जहां सुबह सवेरे कोहरे से परेशान नजर आए वहीं हल्का पाला भी जमा। तत्पश्चात सूर्य चमकता रहा।
कनीना क्षेत्र के किसान अपनी लहलहाती फसल को बार-बार देख रहे हैं क्योंकि इस समय सरसों गेहूं की फसल अच्छी खड़ी हुई है। मौसम अच्छा रहा तो आने वाले समय में अच्छी पैदावार हो सकती है। किसानों को इसी फसल से आय की आश है। किसान रवि कुमार, सुरेश कुमार, अजीत कुमार,कृष्ण सिंह, सूबे सिंह आदि ने बताया कि पूरे वर्ष में रबी की फसल एक मात्र ऐसी फसल जिससे किसान अपनी वर्षभर के कामकाज के लिए कुछ पैसे कमा पाते हैं और वर्ष भर का गुजारा करते हैं। यदि यह फसल बर्बाद हो जाती है तो किसान भी बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने बताया अभी तक मौसम सही चल रहा है और फसल अच्छी प्रकार वृद्धि कर रही है। सरसों पर फूल ही फूल नजर आ रहे हैं। गेहूं की फसल छोटी है।
फोटो कैप्शन 10: कनीना क्षेत्र में सरसों पर आई आब
प्रशिक्षण पढ़ाई भी और पोषण भी पर दी जानकारी
-तीन दिवसीय आंगनबाड़ी शिविर शुरू
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कनीना की आवाज। महिला एवं बाल विकास विभाग कनीना द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आज से आरंभ हुआ। इस प्रशिक्षण शिविर में खंड की 90 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर कुसुम लता ने बताया कि यह प्रशिक्षण पढ़ाई भी और पोषण भी विषय पर आधारित है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उनके केंद्रों पर बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने की आधुनिक विधियों के साथ-साथ संतुलित एवं पोषित आहार की जानकारी भी प्रदान की जा रही है, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने आगे बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं तथा बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देते हैं।
इस अवसर पर आंगनबाड़ी कर्मी अनीता यादव, मंजू, ज्योति, पूजा खींची, मनीष यादव तथा सुमन यादव सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। प्रशिक्षण शिविर के आगामी सत्रों में भी विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा।
फोटो कैप्शन 05:आंगनबाड़ी की महिलाओं को प्रशिक्षण देते हुए।
पुत्र की प्रेरणा से पूर्व शिक्षक ले रहा है आर्गेनिक खेती
-1000 ड्रेगन फ्रूट भी उगा रखे हैं
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कनीना की आवाज। अपने पुत्र की प्रेरणा से पूर्व शिक्षक रामप्रताप अपने आधा एकड़ में आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। समय-समय पर 6 फुट तक की घिया/लौकी, 2.5 किलोग्राम तक की चुकंदर उगाने में नाम कमा चुके रामप्रताप श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में सचिव एवं कोषाध्यक्ष पद पर सुशोभित हैं। उनका पुत्र देवेंद्र अल्ट्राटेक कंपनी में बतौर मैनेजर कार्यरत है जिनकी प्रेरणा से वह आज भी आर्गेनिक खेती लगने लगे हुए हैं।
इस वक्त उनके बाग में जहां पांच सफेद चंदन महक रहे हैं वही अंजीर के पेड़ों पर भारी मात्रा में फल लगे हुए हैं। 200 अमरूद के पेड़ों, 15 एप्पलबेरी, 25 अनार के पौधों पर भी फल लगे हुए हैं। उनका घिया का बगीचा देखने में अजीबोगरीब है जहां इस सर्दी के मौसम में भी अनेक पांच पांच फुट की लौकियां लटक रही है। रामप्रताप ने बताया कि खाने में फल एवं सब्जियां कम प्रयोग करते हैं किंतु उनका शौक इनको उगाने में है। उनके खेत में वर्तमान में धनिया, प्याज, चुकंदर, चना,पालक, बेरी,नींबू, नींबूघास आदि खड़े हुये है। उनके खेत में चारों ओर हरी पत्तेदार सब्जियां खड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि जीव जंतु उनके बाग में फलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं परंतु फिर भी खुश है।
घर पर ही जीवामृत तैयार करके वे पौधों में डालते हैं या गौशाला से गोबर का खाद लाकर डालते हैं परिणामस्वरूप उनके खेत में अजीबोगरीब फल सब्जियां खड़ी हुई है। विगत वर्षों मनाने 5 फुट की घिया तैयार की थी जबकि इस वर्ष 6 फुट तक लंबी घिया तैयार कर चुके हैं। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि आर्गेनिक खेती शरीर के लिए लाभप्रद साबित होगी वहीं उनका उद्देश्य सेहत को बचाने का है।
रामप्रताप बांट रहे हैं कच्ची हल्दी-
किसी भी प्रकार का कोई पैसा किसी खेत में आने वाले नहीं लेते और उन्हें सब्जी उपहार में देते हैं। वे हर वर्ष कच्ची हल्दी उगाकर जन सेवा करते हैं। कोरोना काल में कच्ची हल्दी लोगों को मुफ्त में बांटी थी। इस वक्त भी उनकी हल्दी की फसल तैयार है और लोगों को कच्ची हल्दी दे रहे हैं ताकि दूध में डालकर सेवन करने से शरीर में रोगरोधक क्षमता बढ़ जाये।
1000 पौधे ड्रेगन फ्रूट के-
शिक्षक रामप्रताप ने चार एकड़ में 1000 ड्रैगन फ्रूट लगा रखें हैं। ये फ्रूट बहुत कम पानी प्रयोग करते हैं किंतु बाजार में फलों की मांग अच्छी है। करीब डेढ़ वर्ष पहले यह ड्रैगन फ्रूट उगाए थ। एक साल के होने के बाद उन्होंने फल देने शुरू कर दिए। फलों के अधिक मांग किंतु अभी पैदावार कम होने लगी है। उन्हें विश्वास है कि भविष्य में बहुत अच्छी पैदावार देंगे लोगों को ड्रैगन फ्रूट लगे देखकर आनंद भी आता है। सुबह-शाम अपने ड्रैगन फ्रूट पौधों की देखरेख करते हैं।
फोटो कैप्शन 06: कच्ची हल्दी दिखाते हुए रामप्रताप
07: 5 फुट लंबी लौकी
08: ड्र्रेगन फ्रूट दिखाते पूर्व शिक्षक
काकोरी ट्रेन एक्शन के शहीदों को किया याद
--अगिहार स्कूल में किया शहीदों को याद
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कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में शुक्रवार को काकोरी ट्रेन एक्शन के शहीदों को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य पूनम यादव ने की। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे शहीदों और क्रांतिकारियों के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करें। इस अवसर पर विद्यालय में अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को काकोरी के शहीदों पंडित राम प्रसाद ,बिस्मिल अशफाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह तथा राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के जीवन तथा आजादी की लड़ाई में उनके योगदान के बारे में विस्तृत प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल की अनेक गजलों तथा कविताओं का वाचन किया। विद्यालय की छात्रा साइना ने गोरखपुर की जेल में बैठा मां को लिखता परवाना गीत प्रस्तुत किया तथा नरगिस ने बिस्मिल की प्रसिद्ध गजल, सरफरोशी की तमन्ना अब हमारा दिल में है - का गायन किया। ममता,प्रवेश तथा मानवी ने भी इस अवसर पर देशभक्ति पूर्ण कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विद्यालय के प्रवक्ता अजय कुमार बंसल,राजेंद्र कटारिया, निशा जांगड़ा मुख्य शिक्षक,रतन लाल , धर्मेंद्र डीपीई, राकेश कुमार सहित विद्यालय के सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 01: काकोरी शहीदों को याद करते हुए स्टाफ
श्री कृष्ण गौशाला को दिया 1.21 लाख रुपए का दान, 21 क्विंटल बाजरा भेंट
-गौशाला पदाधिकारी ने जताया आभार
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कनीना की आवाज। यूं तो लोग दिये गये दान को बार बार गाते हैं किंतु कुछ ऐसे लोग भी हैं जो दान को छुपाते हैं। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला के लिए एक सज्जन ने अमावस्या के उपलक्ष्य पर 1.21 लाख रुपए का दान दिया है। साथ में 21 क्विंटल बाजरा भी दान किया।श्री कृष्ण गौशाला के प्रधान भगत सिंह ने बताया कि पहले भी यह दानदाता दस लाख रुपये दान कर चुका है।
प्रधान भगत सिंह ने कहा कि गायों की सेवा सर्वश्रेष्ठ सेवा होती हे। हमें दिल खोलकर गायों की सेवा करनी चाहिए। भगत सिंह ने कहा कि गायों की सेवा से सभी पाप मिट जाते हैं और पुण्य का भागी बन जाता है। इंसान को जरूर गायों की सेवा करनी चाहिए ताकि अपने जीवन में नाम कमा सके। उन्होंने कहा गायों की सेवा भगवान श्रीकृष्ण ने की थी इसलिए गोपाल कहलाए। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में गायों के प्रति फिर से वो लगाव उत्पन्न होने लगा है जो वर्षों पहले सिर चढ़कर बोल रहा था। उन्होंने बताया कि कनीना श्रीकृष्ण गौशाला से करीब 500 गाए गोद ली जा चुकी है और भक्तों द्वारा दान दिया गया है। वहीं गौशाला में अमूल चूल परिवर्तन किये जा चुके हैं। आने वाले समय में श्रीकृष्ण गौशाला प्रदेश भर में नंबर वन होगी।
उल्लेखनीय है कि समय समय पर कुछ ऐसे उदार लोग धरा पर आते हैं जो अपनी कर्मठता के चलते लोगों के दिलोदिमाग पर छा जाते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत इस वक्त गौशाला के प्रधान बतौर भगत सिंह ने कार्यभार संभाल रखा है। कहते हैं कि जिसमें कुछ करने की तमन्ना हो वो कुछ नया करके ही दिखाते हैं। भगत सिंह ने गौशाला में आकर मूल चूल परिवर्तन कर दिखलाये हैं जो अपने आप में भागीरथ से कम नजर नहीं आते हैं। इस समय श्रीकृष्ण गौशाला कनीना में 2500 गौवंश हैं। जिनके लिए गौशाला में व्यापक प्रबंध किये गये हैं। आज से छह माह पहले जो गौशाला रंग रही थी वो आज उड़ान भरने की कगार पर है। कभी गौशाला में लोग जाते हुए कतराते थे अब पूरे परिवार सहित खुशी खुशी जाकर दानपुण्य कर रहे हैं जिसके पीछे भगत सिंह नामक भागीरथ मिल गया है जो भागीरथी प्रयास कर गौशाला को आधुनिकतम की ओर ले जा रहे हैं।
फोटो कैप्शन 04: गायों के लिए दान देते हुए
विश्व मानव एकजुटता दिवस- 20 दिसंबर
कनीना क्षेत्र में धर्म को भुलाकर एक दूसरे के धार्मिक स्थानों पर जाते हैं सभी धर्मों के लोग
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में करीब एक दर्जन भर विभिन्न हिंदू एवं मुस्लिम धार्मिक संस्थान है जहां एकजुटता के साथ एकता परिचय देते हुए सभी धर्म के लोग एक दूसरे के धार्मिक स्थानों पर जाकर पूजा अर्चना करते हैं। जहां हिंदू धर्म के लोग विभिन्न पीरों एवं मजारों पर जा रहे हैं वहीं मुस्लिम लोग भी हिंदू मंदिरों में जाकर मन्नत मांगते हैं। कहने को तो कनीना उप-मंडल के गांव भोजावास,पड़तल, ढाणा तथा समीपी गांव बोहका आदि में जिंदा देव नाम से धार्मिक स्थान बने हुए हैं वहीं कनीना के थाना परिसर में बाबा पीर, कोसली सड़क मार्ग पर बाबा पीर स्थल बने हुए हैं। वहीं धनौंदा में बाबा दयाल, खरकड़ा बस में भी बाबा दयाल तो गुढ़ा गांव में बाबा छज्जू पीर, मोड़ी गांव में मजार तथा और भी कई जगह संस्थान है जहां हिंदू-मुस्लिम मिलकर जाते हैं। वहीं कनीना के शिव भोले मंदिर, बाघेश्वर धाम बाघोत में जहां हिंदू धर्म के लोग ही नहीं मुस्लिम धर्म को मानने वाले भी समय-समय पर जाते रहते हैं।
विभिन्न अवसरों पर यहां मेले लगते हैं और एकजुटता का परिचय दिया जाता है। जहां कनीना थाना परिसर में सप्ताह में कम से कम दो बार भारी संख्या में लोग पीर पर जाते हैं। सबसे बड़ी बात देखने को मिली कि कनीना-कोसली सड़क मार्ग पर एक पीर को ही हिंदू धर्म के मानने वाले लोग चला रहे हैं।
मोड़ी गांव के खेतों में जहां मजार बनी हुई है जहां हिंदू और मुस्लिम सभी धर्म के लोग वहां पहुंचने हैं और मन्नत मांगते हैं। बाबा जिंदा के नाम से तो कनीना उपमंडल के कई गांवों में मेला लगते हैं। जहां भोजावास,पड़तल, ढाणा तथा समीपी गांव बोहका में जहां एक ही साथ मेले लगते हैं वहीं विभिन्न धर्मों के मेानने वाले लोग वहां पहुंचते हैं। कनीना को उपमंडल के गांव गुढ़ा में छज्जू पीर स्थान है धार्मिक स्थान है जहां सभी धर्म के लोग पहुंचते हैं ,चद्दर भी चढ़ाते हैं मन्नत भी मांगते हैं जो एकता और एकजुटता का उल्लेखनीय उदाहरण है। बास में बाबा दयाल का धार्मिक स्थान है जहां हिंदू मुस्लिम एकमत होकर पहुंचते हैं और प्रसाद अर्पित करते हैं। कनीना के बाघोत स्थित बागेश्वर धाम पर तो जहां वर्ष में दो बार मेेले लगते हैं अपार श्रद्धा देखने को मिलती है वही हिंदू और मुस्लिम सभी धर्म के लोग यहां पहुंचते हैं। मोड़ी के अजय कुमार कांता, पूर्व सरपंच गजराज सिंह आदि में बताया की भोजावास,पड़तल, ढाणा तथा समीपी गांव बोहका गांवों में बाबा जिंदा देव के स्थलों पर विभिन्न धर्मो के विशेषकर हिंदू मुस्लिम धर्म के लोग पहुंचते हैं जहां समय-समय पर लोग प्रसाद अर्पित करने जाते हैं और दर्शन के लिए जाते हैं। वहीं वर्ष में एक बार बड़ा मेला भी सभी स्थलों पर लगता है। छज्जू पीर गुढ़ा का प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है जहां चद्दर अर्पित की जाती है विभिन्न धर्मो के लोग यहां पहुंचते हैं। यहां लगने वाले मेलों में पहुंचकर लोग प्रसाद बांटते हैं और मन्नत मांगते हैं।
क्या कहते हैं नौरंग
नौरंग खान शहीद शेर सिंह के पुत्र है जो कनीना के स्थाई निवासी हैं। दिल्ली में पोस्ट आफिस में कार्यरत है। उन्होंने बताया कि मैं और मेरे परिवार की बाबा शिव भोले के प्रति अगाध आस्था और विश्वास हैं। 1996 में बाबा भोले बाघोत को अर्पित करने हरिद्वार से कावड़ लेकर आया था और सभी धर्मों में अटूट विश्वास करता हूं। प्रतिदिन पैसेंजर ट्रेन से दिल्ली जाता हूं और भजन कीर्तन मंडली में शामिल होकर जाता हूं और भजनों में सभी धर्म के भजनों को गाया जाता है। श्याम और ओम के भजन गाकर मुझे प्रसन्नता होती है। जहां भी जाए वहां एकता का परिचायक होता है।
धनौंदा के जसवंत सिंह का कहना है कि उनके यहां खरकड़ावास एवं धनौदा में बाबा दयाल का स्थान है। जहां सभी धर्म के लोग आते हैं। वर्ष में एक बार मेला लगता है। इस मेले में अपार भीड़ जुटती है और लोग एकजुटता का परिचय देते हैं। न केवल हमारा संविधान भी अनेकता में एकता को बढ़ावा देता है वही ऐसा ही दृश्य कनीना क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थानों पर देखने को मिलता है। कनीना के शिव भोले मंदिर में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है।
फोटो कैप्शन 02:भोजावास का बाबा जिंदा देव
चोर साहब के कारनामों के बाद बाद अब कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे तथा
-ब्लैकमेलर शिक्षक दो कृतियों की कडिय़ां 14 जनवरी से
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कनीना की आवाज।
डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्डधारक पूर्व शिक्षक, लेखक, साहित्यकार एवं पत्रकार ने जहां विगत दिनों चोर साहब के कारनामों पर 65 कडिय़ा प्रकाशित की थी और वह पुस्तक पूरी होने के कारण प्रकाशन हेतु प्रेस में जा चुकी है। लोगों ने चोर साहब के कारनामों को बहुत सराहा था। ऐसे में जितने भी पाठक जुड़े रहे उन सभी का आभार। अब 14 जनवरी 2026 से 2 नई कृतियां प्रकाशन की तैयारियां पूर्ण हो गई है।
पहली कृति का नाम होगा कतरूं प्राचार्य के काले कारनामें । इस पुस्तक के विषय में मैं बताना चाहूंगा कि करीब 40 सालों के शिक्षण में 35 विभिन्न प्राचार्यों से भेंट हुई। जिनमें एक कुतरूं प्राचार्य भी मिला जो अय्याशी किस्म का था। उसके कारनामे देखे जाए तो बहुत मशहूर है वह अपनी बेटी के समान शिक्षिकाओं पर भी बुरी नजर रखता था। जब तक मैंने पढ़ाया तब तक उसकी बुरी नजर मशहूर रही थी। शिक्षिकाओं को अपने पास घंटों बैठाए रखता था। जब मैं स्कूल से अन्यत्र चला गया तब भी उसने अपने कारनामे जारी रखें। गांव के लोगों से क्या-क्या हाथ पैर जोड़ता था गिर गिरता था लोग उसे कुतरूं कहते थे। इसलिए इस कृति का नाम कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे रखा है। जिसकी प्रथम कड़ी 14 जनवरी 2026 को कनीना की आवाज ब्लाग में डाली जाएगी।
दूसरी कृति ब्लैकमेलर शिक्षक होगी। डा. होशियार सिंह पूर्व विज्ञान शिक्षक के संपर्क में आया था। 40 सालों की शिक्षण अवधि में एक ऐसा शिक्षक भी मिला जिसे शिक्षक कहते हुए शिक्षक कहते हुए शर्म आती है। जिसको न हिंदी आती, ना अंग्रेजी आती, ना संस्कृत आती, न ही उर्दू आती, न फारसी आती ना आने कोई भाषा का ज्ञान था। वह बहुत मशहूर रहा है। परंतु चापलूसी में अग्रणी पंक्ति में रहा है। किसी के पैर पकड़ लेना, किसी के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा लेना और यहां तक की उसे अगर थोड़ा सा धमका दे तो तो वह पीछे हट जाता था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी रही है कि सभी को ब्लैकमेल करने पर तुला रहता था। किसी को नौकरी लगाना, किसी को किसी केस से बरी करवाना, किसी को कोई लोन दिलवाना, किसी का अन्य कोई काम करवाने के आश्वासन देने में मशहूर रहा है। यहां तक की उसकी अनेकों ब्लैकमेलिंग की घटनाएं सामने आई हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह ऐसे लोगों को अपनी नजदीक रखता है जो रंडी जैसे गुण रखते हैं। इस शिक्षक के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आ गए हैं और पास में रख लिए हैं। अब सोचा कि क्यों नहीं एक के बाद एक कड़ी डालता रहूं। किसी ने कहा कि उनकी नौकरी हट जाएगी, आपके पास सारे प्रमाण है तो मैं उनसे साफ कह दिया कि चाहे मेरा कोई दुश्मन की है तो उसे नौकरी नहीं हटवाना चाहूंगा। चूंकि नौकरी किसी को देना सीखना चाहिए ,हटवाना नहीं। हां उसके जो ब्लैकमेलिंग के कारनामे हैं वे जरूर प्रकाशित करूंगा। यह भी सोच लिया जो भी राक्षस प्रवृत्ति के लोग मेरे जीवन में मेरे विरुद्ध खड़े थे उनके कारनामे सभी के सामने लाये जाएंगे। जान आनी जानी होती है। एक न एक दिन सभी को जाना होता है। अब उनसे पूरे जोश के साथ लड़ा जाएगा क्योंकि सच्चाई बहुत कड़वी होती है, बहुत दर्द देती है और कलम की मार तो सबसे बुरी होती है। इसलिए अब कलम की मार की जाएगी ताकि लोग उनके कारनामों से परिचित हो सके। आशा है सभी पाठकवृंद का साथ यूं ही बना रहेगा।














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