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Monday, December 15, 2025



 


जिले में सरसों की फसल को रोगों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
-ठंड व गहरा कोहरे से बीमारियों की संभावना
-सफेद रतुआ के पहचान करके करें दवा का प्रयोग
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कनीना की आवाज।
कृषि तथा किसान कल्याण विभाग ने महेंद्रगढ़ जिले के किसान भाईयों के लिए सरसों की फसल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वह कृषि विभाग की एडवाइजरी का पालन करें।
यह जानकारी देते हुए उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि जिले में लगभग 1,11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बिजाई की हुई है, जो रबी सीजन की प्रमुख फसल है। यह फसल लगभग 60-65 दिनों की हो चुकी है, और जैसे-जैसे ठंड व गहरा कोहरा बढ़ेगा, सफेद रतुआ व तना गलन जैसी बीमारियों की संभावना बन सकती है।
इस संबंध में डीडीए देवेंद्र सिंह ने बताया कि सफेद रतुआ के पहचान के लक्षण तने तथा पत्तियों पर सफेद अथवा पीले क्रीम रंग के कील से प्रकट होते हैं, और तने व फूल बेढंगे आकार के हो जाते हैं, जिन्हें स्टैग हैड कहते हैं। यह ज्यादातर पछेती फसल में होता है। इसके उपचार के लिए, लक्षण नजर आते ही 600 ग्राम मेन्कोजैब (डाइथेन या इन्डोफिल एम-45) को 250 से 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
दूसरी संभावित बीमारी तना गलन है, जिसके पहचान के लक्षण तनों पर लम्बे आकार के भूरे जलसिक धब्बे होते हैं, जिन पर बाद में सफेद फफूंद की तह बन जाती है।
उन्होंने बताया कि ये लक्षण पत्तों तथा टहनियों पर भी नजर आ सकते हैं। फूल निकलने या फलियाँ बनने के समय आक्रमण होने पर तने टूट जाते हैं और पौधे मुरझाकर टूट जाते हैं, और ऐसे पौधों के तनों पर या तनों के भीतर काले रंग के पिंड (स्कलरोशिया) बनते हैं। तना गलन के उपचार के लिए, लक्षण नजऱ आने पर 40-45 दिन तथा 65-70 दिनों के बाद कारबेन्डाजिम का 250 ग्राम को 200-250 लीटर पानी में मिलाकर दो बार छिड़काव करें।
अत: जिले के सभी किसान भाईयों को जागरूक करते हुए अनुरोध किया जाता है कि वे समय-समय पर फसल का निरीक्षण करते रहें। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए कृषि विभाग के नजदीकी कार्यालय में संपर्क करके विस्तार से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
   उल्लेखनीय है कि कनीना क्षेत्र में विगत दिनों पाला जमा था वहीं ठंड पड़ रही है। अब कोहरा पड़ रहा है। कोहरे का फसलों पर अभी तक संभव नहीं है किंतु लगातार मौसम खराब रहे तो फसलों में कुछ नुकसान की संभावना बन जाती है।
कनीना ही नहीं पूरे जिला महेंद्रगढ़ में इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले सरसों की अधिक बिजाई की गई है। जिला महेंद्रगढ़ में 112000 हेक्टेयर पर सरसों उगाई गई है जबकि 29000 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल उगाई गई है। इसी क्रम में चना 5000 हेक्टेयर पर वही जौ करीब 125 हेक्टेयर पर उगाया गया है। जहां बरसीम 470 हेक्टेयर पर वहीं करीब 2000 हेक्टेयर पर चारा देने वाली फसले उगाई गई हैं।
 इस समय गेहूं और सरसों की फसल बड़ी हो गई है। सर्दी पडऩे से फसलों में आब आ गई है। किसान सूबे सिंह ,कृष्ण कुमार, रवि कुमार, सुनील कुमार आदि ने बताया कि इस समय फसल लहलहाने लगी है। सर्दी कड़ाके की पड़ रही है जिससे फसल में भी आब आ गई है। उन्होंने बताया कि यदि मौसम सही रहा तो अच्छी पैदावार सरसों की मिल पाएगी। विगत वर्ष की तुलना में इस बार सरसों अधिक भूभाग पर उगाई गई है।
कनीना मंडी से रविंद्र बंसल ने बताया कि बार सरसों का एमएससपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि गेहूं का एमएसपी 2585 रुपए प्रति क्विंटल रखा गया है। इस बार सरसों के अच्छे भाव मिलने की उम्मीद को लेकर किसानों ने सरसों अधिक उगाई है। गेहूं के मुकाबले जिले में करीब चार गुना अधिक सरसों उगाई गई है। इस समय किसान सिंचाई कर रहे हैं और खेतों में खाद डाल रहे हैं। क्या कहते हैं एसडीओ कृषि विभाग-
 एसडीओ कृषि विभाग डा. अजय यादव ने बताया कि किसान पहली सिंचाई गेहूं और सरसों की कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो किसान यूरिया का छिड़काव कर रहे हैं उन्हें एक साथ यूरिया नहीं छिड़कना चाहिए। महज 20 किलो यूरिया एक बार में गेहूं में छिड़के। तत्पश्चात दोबारा से छिड़के। चूंकि यूरिया में नाइट्रोजन होता है जो फसलों को जितना मिल पाता है मिल जाता है बाकी हवा में उड़ जाता है। ऐसे में एक साथ यूरिया का पूरा बैग न डाले। एक साथ पूरा बैग छिड़क देने से फसल में कोई विशेष ताकत नहीं आती। उन्होंने कहा कि सरसों में सिंचाई जरूर करें किंतु जहां ढलान हो वहां पानी इकट्ठा न होने पाए। वरना और रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने का सर्दी से बचने के लिए हल्की सिंचाई करने पर बल दिया।





विजय दिवस -16 दिसंबर
पाकिस्तान को दो टुकड़े में विभाजित किया गया था इस दिन-राव मोहर सिंह
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कनीना की आवाज।
 पाकिस्तान को दो भागों में विभाजित करने वाली भारतीय सेना के वीरता और पराक्रम को याद दिलाने वाला विजय दिवस 16 दिसंबर को मनाया जाता है।  इसी दिन पाकिस्तान सेना ने 13 दिनों तक चले युद्ध में बुरी तरह से हार स्वीकार करते हुए आत्म समर्पण कर दिया था। पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल एए नियाजी खान ने 93000 सैनिकों के साथ आत्म समर्पण किया था। इस प्रकार बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग करने के लिए भारतीय सेवा करीब 4000 जांबाज सैनिक शहीद हुए थे। उनको श्रद्धांजलि के लिए भी 16 दिसंबर का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इस संबंध में कुछ पर्व सैनिकों से चर्चा की गई--
17 सालों की आर्मी में सेवा करने वाले तथा जिनके समय कारगिल युद्ध हुआ तथा 2003 में सेवानिवृत्ति पाने वाले सुनील कुमार कनीना बताते हैं कि 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध 3 दिसंबर को शुरू हुआ और 16 दिसंबर को समाप्त हो गया था। इस युद्ध में भारतीय सेवा का नेतृत्व फील्ड मार्शल मानेकशा कर रहे थे और उस वक्त प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी होती थी। 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान सेना के पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है के शहर ढाका में पाकिस्तानी सेना ने आत्म समर्पण किया था। पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल नियाजी खान ने उस वक्त भारतीय सेना समक्ष समर्पण किया था। इसी विजय के साथ बांग्लादेश का एक अलग राष्ट्र बनाने का कार्य संपन्न हुआ। उनका कहना है कि आज भी उन दोनों को याद कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं एवं जोश भर जाता है। आज भी वे युद्ध में जाकर सेवा करने को तत्पर है।
   --सुनील कुमार, कनीनावासी
 मोहर सिंह कनीना निवासी जो 1974 में आर्मी में भर्ती हुए तथा 1998 में सेवानिवृत होकर 24 सालों की सेवा करके आए, का कहना है कि युद्ध में भारतीय सेवा के करीब 4000 जांबाज शहीद हुए थे। जब पाकिस्तान सेना के प्रमुख आत्म समर्पण कर रहे थे तब उनके हाथ कांप रहे थे, आंखों में आंसू थे। उनका कहना है कि यह युद्ध कभी नहीं भुलाया जा सकता। पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ति वाहिनी के लड़ाकुओं ने पाकिस्तान के सैनिकों के खिलाफ भारतीय सेवा के साथ हाथ मिला लिया था। 14 दिसंबर को इंडियन एयर फोर्स ने जब पाकिस्तान के एक घर पर हमला किया उसे समय पाकिस्तान के गवर्नर के साथ बैठक हो रही थी। हमले पाकिस्तान दहल उठा जिसके चलते उन्होंने आत्म समर्पण कर दिया। जिसके कारण  बांग्लादेश पैदा हुआ। यह युद्ध भारत के अहम माना जाता है इसीलिए 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पाकिस्तान के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक जीत थी। यह इसे आज भी हर जन याद कर खुशी से उछल पड़ता है।
 ---राव मोहर सिंह
 इसके अतिरिक्त पूर्व सेना के अधिकारियों ने भी उस दिन को याद कर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह दिन सचमुच विजय दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।
 फोटो कैप्शन: मोहर सिंह तथा सुनील कुमार






नवोदय विद्यालय में शुरू हुआ चार दिवसीय आत्मरक्षा गुर शिविर
-प्राचार्य ने किया शुभारंभ
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कनीना की आवाज।
 पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा में छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सीखने के लिए चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। शिविर का शुभारंभ प्राचार्य बीएम रावत ने किया।
  इस मौके पर बीएम रावत ने छात्राओं को कहा कि आज के जमाने में इस कला एवं हुनर का हर छात्रा में होना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी वक्त छात्रा को आत्मरक्षा करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। कभी किसी रास्ते पर चलते हुए या अनजान जगह पर जाते हुए कोई घटना घटती है तो उस समय यह आत्मरक्षा बहुत काम की हो सकती है। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा से ही इंसान सुरक्षित रह सकता है।
 इस मौके पर जहां प्रशिक्षण देने के लिए सोमरिता सैनी उत्तर प्रदेश से पहुंची है। वो 200 छात्राओं को वह आत्मरक्षा के गुर सीखा रही है। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा आज के दिन बहुत जरूरी है। शरारती तत्व कहीं भी किसी भी मोड़ पर मिल सकते हैं और उनसे सुरक्षा हर इंसान का फर्ज बनता है, विशेष कर महिलाओं में यदि आत्मरक्षा का गुर है तो वह मुसीबत को पार कर सकती है।
फोटो कैप्शन 03: आत्मरक्षा का गुर सीखते हुए  छात्राएं





कनीना क्षेत्र में दूसरे दिन पड़ा सघन कोहरा
 -सूर्य उदय होने के बाद कम हुआ, कई दुर्घटनाएं घटित
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में दूसरे दिन सघन कोहरा पड़ा। रविवार को पहले दिन हल्की धुंध पड़ी थी। साथ में एक बार फिर से ठंड बढ़ गई है। धीरे-धीरे सूर्य उदय के बाद कोहरा कम हो गया। धुंध एवं कोहरा फसलों के लिए लाभप्रद बताया जा रहा है।
पूर्व कृषि अधिकारी डा. देवराज ने बताया कि धुंध से फसलों में पानी की आपूर्ति होती है और जिन फसलों में पानी की अधिक आवश्यकता होती है उनकी आपूर्ति होने से फसलों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में धुंध एवं कोहरा पडऩा अच्छा होता है  किंतु लंबे समय तक जब धुंध/कोहरा पड़ता है और सूर्य के दर्शन नहीं हो पाते तो नुकसान होने का अंदेशा बना जाता है। कनीना क्षेत्र में इस समय गेहूं की फसल छोटी है जबकि सरसों की फसल में फूल पूरे यौवन पर है।   कनीना क्षेत्र में लगातार मौसम बदलने के कारण के चलते भी इस बार फसल बेहतर होने का अंदेशा है। इस बार सर्दी के दिनों में दो-तीन दिन पाला भी जमा है। कनीना क्षेत्र में करीब 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों तो 8 हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल खड़ी है।
  कोहरे का कोहराम-
जैसे ही कनीना क्षेत्र में धुंध/कोहरा ने दस्तक दी उसी के साथ दुर्घटनाएं भी शुरू हो गए है। बीती सुबह दादरी की तरफ से आ रही ब्रेजा गाड़ी महेंद्र गढ़-रेवाड़ी मोड़ तिराहे के पास अनियंत्रित हो कर खेतों में जा पलटी। गनीमत यह रही कि किसी को चोट नहीं आई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह लगभग 6 बजे दादरी कि तरफ से सफेद रंग कि गाड़ी कनीना कि ओर आ रही थी जैसे ही गाड़ी महिला कालेज के पास मोड़ पर पहुंची तो धुंध के कारण संतुलन बिगड़ गया और गाड़ी सड़क के किनारे खड़े पोल से टकरा कर खेतों में जा पलटी। आस पास के दुकानदारों ने बताया कि यहां अंधेरे में रिफ्लेक्टर न होने के कारण अक्सर हादसे होते रहते है। वहीं सोमवार को एक बाइक सवार को कोहरे के कारण दिखाई नहीं दिया जिससे वह एक पोल से जा टकराया किंतु चोटें आई। 152 डी पर भी वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गये। कई अन्य जगहों पर वाहन दुर्घटना के समाचार मिले हैं।
फोटो कैप्शन 04 से 08: कनीना क्षेत्र में कोहरा
        09 व 10: दुर्घटनाग्रस्त वाहन





राज्य स्तरीय युवा महोत्सव 2025 में एसडी स्कूल रहा अव्वल
--जगदेव यादव ने दी सभी को बधाई
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कनीना की आवाज।
पंचकुला में आयोजित राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में एसडी विद्यालय ककराला के विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पूरे साइंस प्रतियोगिता में विद्यालय की टीम ने भाग लिया और प्रथम स्थान हासिल कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया।
विद्यालय प्राचार्य ओमप्रकाश यादव ने बताया कि दिपांशु व क्रीति ने प्रतियोगिता में दृष्टिहीन व्यक्तियों की सहायता के लिए विकसित एक महत्वपूर्ण नवाचार के लिए प्रथम स्थान व 11 हजार रुपए प्राप्त कर विद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन किया। इनोवेशन कार्यप्रभारी जसबीर जांगिड के मार्गदर्शन में तैयार किया गया। उन्होंने ने बताया कि इस कार्यक्रम में हरियाणा के कृषि मंत्री कृष्ण कुमार बेदी उपस्थित रहे और उन्होंने बच्चों को सम्मानित किया। अब ये विद्यार्थी 12 जनवरी को भारत मंडपम में आयोजित होने वाले नेशनल फेस्टिवल में हिस्सा लेंगे जहां वे प्रधानमंत्री के विचार सुनेंगे और अपना प्रोजेक्ट राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेंगे।
इस अवसर पर चेयरमैन जगदेव यादव ने सभी विजेता विद्यार्थियों एवं विद्यालय स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह कि उपलब्धि अपने आप में बड़े गर्व का विषय है। यह विद्यार्थियों अध्यापकों एवं अभिभावकों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। अत: हमेशा एकाग्रता चित होकर सच्ची लग्न से परिश्रम करना चाहिए। सच्ची लग्न से कर्म करते रहने से ही सफलता सम्भव है। कर्म सर्वोपरि है। प्रत्येक कार्य को आनन्द से पूरा करना चाहिए जिससे काम करने की गति भी बढ़ती है व काम सुंदर तरीके से पूरा होता है।
इस अवसर पर प्राचार्य ओमप्रकाश, विद्यालय समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र यादव, सीइओ आर एस यादव, उप-प्राचार्य पूर्ण सिंह, कोर्डिनेटर स्नेहलता, प्रियंका एवं बिंदु, जसबीर जांगिड़, ईश्वर सिंह, अजीत कुमार एवं समस्त स्टाफ उपस्थित था।
फोटो कैप्शन 01: अव्वल रहने पर पंचकुला में सम्मानित करते कृषि मंत्री कृष्ण कुमार बेदी



आनलाइन ट्रांसफर पालिसी के विरोध में किया दो घंटों का विरोध प्रदर्शन
--पावर हाउस के कर्मियों की व्यथा
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कनीना की आवाज।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रांगण में बिजली कर्मचारियों द्वारा हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्कर यूनियन हेड आफिस भिवानी के आह्वान पर आनलाइन ट्रांसफर पालिसी 2025 के विरोध में दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोध प्रदर्शन में सभी कर्मचारियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। जिसकी अध्यक्षता सब यूनिट प्रधान अजित सेहलंग ने की। व मंच संचालन सब यूनिट सेकेट्री सुनील वर्मा ने किया। इस मौके  पर कर्मचारी नेता निगम मैनेजमेंट व सरकार पर जमकर बरसे और आनलाइन ट्रांसफर पालिसी 2025 को कर्मचारी व उपभोक्ता विरोधी बताया। सब यूनिट बूचावास से सर्कल सचिव सत्यवान यादव ने बताया कि यह धरणा प्रदर्शन 12 दिसंबर से 16 दिसंबर तक सब यूनिट लेवल पर जारी  है। अगर समय रहते निगम  मैनेजमेंट इस मुद्दे पर बातचीत के लिए संगठन को नहीं बुलाता है तो इस विरोध प्रदर्शन को उच्चस्तर पर ले जाया जायेगा। जिससे किसी भी प्रकार की औद्योगिक अशांति या उपभोक्ता को कोई परेशानी होती है तो निगम मैनेजमेंट पूर्ण रूप से इनका जिम्मेवार होगा। इस मौके पर सतीस जेई , प्रवीन जेई, अमित जेई,  ,सतीश फोरमैन, बंसी फोरमैन,सुजीत फोरमैन, राजेश फोरमैन, सोमबीर लाइनमैन, सुनिल यूडीसी,कैशियर आलोक ,  नवीन लाइनमैन  , विवेक , संदीप सुरजनवास, मुकेश यूडीसी, जगमोहन सब स्टेशन इंचार्ज , नवीन लाइनमैन , ऋषिराज  लाइनमैन इत्यादि कर्मचारियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
फोटो कैप्शन 02: विरोध प्रदर्शन करते हुए कर्मी

















 पेंशन संबंधी वित्त विधेयक 2025 तुरंत वापस लिया जाए-धर्मपाल शर्मा
--17 दिसंबर 2025 को दिया जाएगा धरना
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कनीना की आवाज। रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा संबंधित अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश सचिव धर्मपाल शर्मा ने बताया कि रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा की
राज्य कार्यकारिणी के प्रधान वजीर सिंह तथा महासचिव रतन जिंदल के आह्वान पर हरियाणा में 17 दिसंबर 2025  को सभी जिलों में 10 से 1 तक उपायुक्त कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करके अपनी मांगों से संबंधित राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिए जाएंगे। श्री शर्मा ने केंद्र  सरकार व राज्य सरकार से मांग की है पेंशन सम्बन्धी वित विधेयक  2025 को तुरंत वापस लिया जाए। रिटायर्ड कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के सभी लाभ पूर्व की भांति दिए जाएं।  कम्युटेकी गई राशि सभी राज्यों में 11 वर्ष तक काटी जाए। कोरोना काल के दौरान रोका गया 18 माह  का महंगाई भत्ता का एरियर ब्याज सहित दिया जाए। 65 वर्ष की आयु में 10 प्रतिशत व 75 की आयु में 20 प्रतिशत मूल वेतन में वृद्धि की जाए। रिटायर्ड कर्मचारियों का सभी सरकारी व पैनल वाले अस्पतालों में मुफ्त इलाज किया जाए और मेडिकल भत्ता 3000 रुपए प्रति माह दिया जाए। रिटायर्ड कर्मचारियों को रेलवे व हवाई जहाज यात्रा में पहले की तरह 50 प्रतिशत छूट दी जाए। न्यायालय के सभी लाभकारी निर्णय को सभी योग्य  कर्मचारी व पेंशनर्स पर लागू किया जाए। मजदूर विरोधी कर श्रम संहिताओं को समाप्त किया जाए। सभी विभागों में रिक्त पदों पर स्थायी रूप से नियुक्ति की जाए तथा निजीकरण नीतियों पर रोक लगाई जाए।  एनपीएस तथा यूपीएस पेंशन स्कीम को समाप्त करके  पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए। यदि सरकार हमारी इन मांगों  की अनदेखी करेगी तो 22- 23 फरवरी 2026 को कुरुक्षेत्र में अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर फेडरेशन का राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। उसमें बड़े आंदोलन करने की रूप रेखा तैयार की जाएगी। रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला महेन्द्रगढ़ के प्रधान घनश्याम दास शर्मा व जिला सचिव रोशनलाल निंबल ने बताया कि जिला महेन्द्रगढ़ में धरना-प्रदर्शन नारनौल लघु सचिवालय में किया जाएगा।

 


मेरा शिक्षा का सफर पुस्तक से साभार- 152
-दो फीसदी मुखिया हो गए हैं विक्षिप्त मानसिकता के, मेडिकल टेस्ट की सरकार से मांग
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कनीना की आवाज।
 डा. होशियार सिंह पूर्व विज्ञान अध्यापक विज्ञान अध्यापक, लेखक एवं साहित्यकार, विश्व रिकार्डधारक 30 अप्रैल 2024 को शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने 29 विभिन्न शिक्षण संस्थानों में काम किया और कम से कम 35 स्कूल के मुखियों के साथ काम भी किया। जिनमें से  दो मुखिया ऐसे भी मिले जो बहुत संकीर्ण विचारधारा एवं ेघटिया मानसिकता वाले रहे हैं। यदि संयोगवश कोई बात चले और वो अपने पर लेते थे। ऐसे मुखियों का मेडिकल टेस्ट होना चाहिए। चूंकि वे मानसिक रूप से विक्षिप्त होते नजर आ रहे हैं। ऐसी ही कहानी सुनिये डा.होशियार सिंह यादव के मुख से.................
मेरी पुस्तक-शिक्षा का सफर लगभग पूरी हो गई थी परंतु अकस्मात एक ऐसा वाकया सामने आया कि फिर से कलम उठानी पड़ी है। 80 के दशक में कनीना मंडी में रामलीला चलती थी जिसमें स्वर्गीय श्रीचंद एक बहुत सुंदर दृष्टांत मनोरंजन के रूप में मंच पर प्रदर्शित करते थे। मुझे भी ले चलो अर्थात एक व्यक्ति के बीमारी है, मुझे भी ले चलो की बीमारी है। वह उछलता कदता है और लगातार चिल्लाता है- मुझे भी ले चलो और दूसरा उस छू लेता है तो वह भी उछलने कूदने लग जाता है। वह भी चिल्लाता है- मुझे भी ले चलो। ऐसी बीमारी को से लगता है शिक्षा विभाग के चंद मुखिया हैं। यद्यपि अधिकांश मुखिया बहुत बेहतरीन कार्य कर रहे हैं और उनकी समझ उच्च दर्जे की है,शिक्षा विभाग में ऐसे प्राचार्य की जरूरत भी है किंतु दो करीब दो प्रतिशत ऐसे मुखिया हो गए हैं जो कुएं में भांग वाली कहावत पर चलते एवं कहावत को चरितार्थ करते हैं।
सोमवार 15 दिसंबर 2025 को एक साथी का फोन आया कि मैं आपसे मिलना चाहता हूं। मेरे साथ एक शिक्षक भी है। शिक्षक का उन्होंने नाम नहीं बताया। मैंने उन्हें कहा कि शाम के समय लिए सिर्फ 15-20 मिनट ही मिल पाऊंगा। उस समय मेरा वह साथी एक शिक्षक को लेकर आया। उसे शिक्षक को मैं इतना जानता हूं कि करीरा स्कूल में मेरे साथ था और उनसे कोई बहुत बेहतरीन संबंध नहीं रहे। इतना जरूर जानता हूं कि वह एक शिक्षक है। मैंने अपने साथी से पूछा कि बताइए क्या बात है? उन्होंने सकुचाते हुए एक बात बताई और कहा कि किसी स्कूल के मुखिया का कहना है कि  स्कूल की बातें इस शिक्षक के जरिए पत्रकार होशियार सिंह यादव तक पहुंचाई हैं। मैं चौकन्ना हुआ और पूछा कि बात क्या है, मैं समझ नहीं पाया। मेरे साथी ने बताया कि तुमने दो लघुकथाएं लिखी थी। मैंने कहा- हां, यह तो मेरा उद्यम है। लंबे समय से लेखन कार्य में तल्लीन हूं और 45 कृतियों की रचनाएं कर चुका हूं और लघु कथाएं तो प्राय: मैं लिखना ही रहता हूं। मैंने पूछा कि आखिर लघुकथा में किसी मुखिया का कैसे संबंध जुड़ा हो सकता है? उन्होंने कहा कि ये लघु कथाएं एक मुखिया पर लागू होती है। चकित होकर मैंने पूछा-ये कैसे हो सकता है? क्या उस मुखिया के स्कूल में भी इसी प्रकार की घटना घट चुकी है? मेरा साथी सुनकर मौन हो गया।
 मैंने कहा- अच्छा, एक कहावत है काले काले मेरे बाप के साले अर्थात एक लघुकथा जो लेखक के अपने विचार और बुद्धिमत्ता को इंगित करते हैं वे किसी पर अगर संयोगवश सही बैठते हैं तो वह लेखक का दोष नहीं। कितनी ऐसी फिल्में हैं जिनकी कहानी किसी एक ना एक व्यक्ति पर जरूर लागू होती है लेकिन साफ लिखा होता है कि यह कहानी है, लघुकथा है जो अपनी बुद्धि को विस्तार देकर बनाई गई है। यदि किसी पर शत प्रतिशत लागू होता है तो तो कोई मुखिया अपने पर लागू करके देखता है तो उस मुखिया की कमजोरी है। इसमें किसी का क्या दोष?
 मैंने साथी से पूछा कि आखिर मसला क्या है तो उन्होंने विस्तार से जानकारी दी और पूछा कि यह लघु कथा आपके दिमाग में कैसे आई? मैंने कहा कि ऐसी घटनाएं मेरे साथ भी कई हो चुकी हैं, जब मैं शिक्षक था तब इस प्रकार की घटनाएं घटी थी और मैं उस दृश्य को ध्यान में रखते हुए लघु कथाएं बनाई। अगर कोई अपने पर लेता है तो यह उसकी विक्षिप्त मानसिकता को इंगित करता है। यह उसकी अपनी कलुषित मानसिकता का द्योतक है। उन्होंने कहा कि मुखिया का आरोप है कि  स्कूल की बातें काई बाहर पहुंचाता है।
मैं कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि मुझे सेवानिवृत्त हुए करीब 2 वर्ष होने को है। मेरा कोई संबंध अब किसी शिक्षक से नहीं रहा है। दरअसल मेरे साथी अब धीरे धीरे मुझसे दूर चले गये हैं।  2 साल से मैं अपने काम में इतना तल्लीन हूं मेरे पास कोई मिलने के लिए पुराने साथी इक्का दुक्का ही आते हैं। और अगर कोई आता है तो खड़े-खड़े दो बात करके चला बना है। मेरे साथी ने बताया कि बात कुछ गंभीर बन गई है। मैंने उत्तर दिया गंभीर है तो मेरे पास तो किसी का इलाज नहीं। इलाज सरकार को करवाना चाहिए, सरकार को कुछ घटिया मानसिकता वाले मुखियों की मेडिकल करवानी चाहिए वरना वे समाज को कलंकित करे सकते हैं। उन्होंने कहा ठीक है जैसी आपकी मर्जी इतना कहकर मेरे से चले गए।
 मैं सोचता ही रह गया कि देखिए कंकर उछालो वह किसी न किसी को सीधा चोट पहुंचता है तो जिसके लगता है वह यह कहे कि मुझे जानबूझकर मारा है इसमें उस मुखिया का ही दोष है जिसकी मानसिकता छोटी है। ऐसे मुखियों को अपनी सोच विस्तृत करनी चाहिए।



 



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